उत्तराखंड में दलेर मेहंदी की परफॉर्मेंस पर बवाल, भाई के बचाव में उतरे मिका सिंह ने दिया सिंगिंग छोड़ने का चैलेंज, जानें क्या है पूरा मामला

उत्तराखंड में एक कार्यक्रम के दौरान दलेर मेहंदी की परफॉर्मेंस को लेकर शुरू हुआ विवाद अब नया मोड़ ले चुका है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में राज्य के कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल सिंगर के प्रदर्शन पर नाराजगी जताते नजर आए। इसके बाद दलेर मेहंदी पर शराब पीकर स्टेज पर आने के आरोप लगाए गए। अब उनके भाई और सिंगर मिका सिंह ने इन आरोपों पर खुलकर अपनी बात रखी है। मिका ने यहां तक कह दिया कि अगर कोई दलेर मेहंदी को शराब पीते हुए देखने का दावा साबित कर दे, तो वह सिंगिंग छोड़ देंगे।

‘दलेर मेहंदी ने कभी शराब नहीं पी’, मिका सिंह का दावा

मिका सिंह ने अपने भाई का बचाव करते हुए शराब पीने के आरोपों को गलत बताया। उन्होंने कहा कि दलेर मेहंदी का नाम कभी शराब पीने से नहीं जुड़ा और उनके खिलाफ इस तरह की बातें करना ठीक नहीं है। मिका ने अपने बयान में चुनौती देते हुए कहा कि अगर किसी एक व्यक्ति के पास भी ऐसा सबूत है कि उसने दलेर मेहंदी को शराब पीते देखा है, तो वह संगीत की दुनिया छोड़ने के लिए तैयार हैं। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है।

तबीयत खराब होने के बावजूद स्टेज पर पहुंचे थे दलेर?

मिका सिंह ने यह भी बताया कि दलेर मेहंदी पिछले कुछ समय से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से जूझ रहे हैं और उनकी बड़ी सर्जरी भी हुई थी। मिका के मुताबिक, संभव है कि खराब तबीयत के बावजूद पहले से किया गया वादा निभाने के लिए दलेर कार्यक्रम में पहुंचे हों।

उन्होंने बताया कि कलाकार कई बार बीमारी और थकान के बावजूद अपने तय कार्यक्रम पूरे करते हैं। मिका ने कहा कि अगर किसी कलाकार ने शो के लिए हामी भर दी है, तो वह अपनी जिम्मेदारी निभाने की कोशिश करता है, भले ही उसकी तबीयत ठीक न हो। हालांकि, दलेर मेहंदी की तबीयत को लेकर मिका की ओर से दी गई इस सफाई के बीच शराब पीने के आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।

35 लाख रुपये की फीस और लिप-सिंकिंग पर उठा सवाल

यह विवाद उत्तराखंड के टिहरी जिले में नवरात्रि के दौरान आयोजित कुंजापुरी मेले का है। 18 अक्टूबर को हुए कार्यक्रम में दलेर मेहंदी की प्रस्तुति के बीच मंत्री सुबोध उनियाल मंच पर पहुंचे और नाराजगी जताई।

मंत्री ने आरोप लगाया कि सिंगर मंच पर ठीक से गा नहीं रहे थे और गानों पर केवल लिप-सिंक कर रहे थे। उन्होंने यह भी दावा किया कि कार्यक्रम के लिए दलेर मेहंदी को 35 लाख रुपये दिए गए थे, इसलिए उनसे बेहतर प्रस्तुति की उम्मीद थी। उनियाल ने धार्मिक आयोजन में कथित तौर पर शराब पीकर प्रस्तुति देने पर भी आपत्ति जताई। हालांकि, शराब के नशे में होने का आरोप साबित नहीं हुआ है।

अब विवाद के बीच चर्चा में हैं दोनों भाई

एक तरफ मंत्री ने दलेर मेहंदी की प्रस्तुति पर सवाल उठाए हैं, तो दूसरी तरफ मिका सिंह अपने भाई के समर्थन में खुलकर सामने आए हैं। फिलहाल इस पूरे मामले में दोनों पक्षों के बयानों के कारण सोशल मीडिया पर बहस जारी है।

अब देखने वाली बात होगी कि यह विवाद आगे क्या मोड़ लेता है और दलेर मेहंदी की ओर से इस मामले पर क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।

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Video: साक्षी को बार-बार चिढ़ाते दिखे धोनी, वायरल वीडियो पर फैंस ने किए मजेदार कमेंट्स

पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी का एक मजेदार वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में वह वह अपनी पत्नी साक्षी धोनी के साथ मस्ती करते नजर आ रहे हैं। ये वीडियो गुजरात के जामनगर में अंबानी परिवार की ओर से आयोजित नवरात्रि मेले का बताया जा रहा। वीडियो में धोनी अपनी पत्नी साक्षी को आइसक्रीम का एक स्कूप खिलाते दिखाई दे रहे हैं। दोनों के बीच की मस्ती भरी इस झलक ने सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींचा। सोशल मीडिया पर ये वीडियो काफी वायरल हो रहा है।

नवरात्रि समारोह में शामिल हुए धोनी

महेंद्र सिंह धोनी और उनकी पत्नी साक्षी धोनी 18 अक्टूबर, रविवार को गुजरात के जामनगर स्थित रिलायंस ग्रीन्स में आयोजित नवरात्रि समारोह में शामिल हुए। इस खास मौके पर दोनों ने अनंत अंबानी, राधिका मर्चेंट और उनके दोस्तों के साथ त्योहार का आनंद लिया। कार्यक्रम में पारंपरिक संगीत, गरबा नृत्य और कई तरह के झूले भी लगाए गए थे। इस दौरान सभी मेहमानों ने मिलकर त्योहार का जश्न मनाया।

वायरल हो रहा वीडियो

X पर शेयर किए गए एक वीडियो में महेंद्र सिंह धोनी अपनी पत्नी साक्षी को आइसक्रीम खिलाते नजर आ रहे हैं। दोनों एक ऐसी जगह पर खड़े दिखाई देते हैं, जो पौधों के स्टॉल जैसी लग रही है। वीडियो में देखा जा सकता है कि जैसे ही साक्षी आइसक्रीम खाने के लिए आगे झुकती हैं, धोनी शरारत करते हुए चम्मच पीछे खींच लेते हैं और खुद ही आइसक्रीम खा लेते हैं। धोनी का यह मजेदार अंदाज देखकर साक्षी की हंसी छूट जाती है। धोनी ने यह शरारत दो-तीन बार दोहराई। हर बार वह साक्षी को आइसक्रीम खिलाने का नाटक करते और फिर चम्मच अपने पास खींचकर खुद ही आइसक्रीम खा लेते। साक्षी भी उनके इस मजाक पर मुस्कुराती नजर आईं और दोनों इस पूरे पल का खूब आनंद लेते दिखे।

 

लोगों ने दिया ये रिएक्शन

सोशल मीडिया पर भी इस वीडियो को लेकर लोगों की मजेदार प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। एक यूजर ने इस पर कमेंट करते हुए लिखा, “उसे गुस्सा दिलाना ही प्यार जताने का उसका तरीका है।” एक यूजर ने लिखा, “पहली बार यह मजेदार लगा, इसलिए उसे दूसरी बार भी ऐसा करना पड़ा। हाहाहा!” एक और यूजर ने कहा, “धोनी जिस तरह सिर्फ साक्षी का रिएक्शन देखने के लिए उन्हें बार-बार चिढ़ाते हैं और साक्षी हर बार उनके झांसे में आ जाती हैं, वह बेहद प्यारा है।” वहीं, एक अन्य यूजर ने लिखा, “क्या इसे ही कपल गोल कहते हैं? मुझे भी ऐसा ही रिश्ता चाहिए।”

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करोड़ों का महल फिर भी सऊदी प्रिंस बंकर में छिपे:रिपोर्ट- हूती विद्रोहियों के हमलों से डरे, बार-बार अपने ठिकाने बदल रहे

वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान हूती विद्रोहियों के हमले के डर से बंकरों वाले महल में रहने को मजबूर हैं। उनके पास करोड़ों का महल है लेकिन बढ़ते हमलों के डर से उन्हें बार-बार अपना ठिकाना बदलना पड़ रहा है। बीते कुछ समय में हूतियों ने सऊदी पर हमले बढ़ा दिए हैं। इसी महीने रियाद एयरपोर्ट को 20 बार निशाना बनाया गया। इसके चलते एयरपोर्ट बंद है और उड़ाने रद्द हैं। प्रिंस सलमान की सुरक्षा के लिए चुने गए गार्ड तैनात रिपोर्ट के मुताबिक, मोहम्मद बिन सलमान की सुरक्षा के लिए खास तौर पर चुने गए गार्ड तैनात हैं। हूती विद्रोहियों के हमलों के खतरे को देखते हुए सऊदी अरब अपने शाही महलों और तेल ठिकानों की सुरक्षा भी बढ़ा रहा है। इसके लिए मिसाइलों को हवा में रोकने वाले एयर डिफेंस सिस्टम को अलग-अलग जगहों पर तैनात किया जा रहा है। इस महीने सऊदी के एयरपोर्ट पर हुए बड़े हमले 6 अक्टूबर: जजान और नजरान के एयरपोर्ट को निशाना बनाया गया। खामिस मुशैत की ओर दागी गई बैलिस्टिक मिसाइल को सऊदी एयर डिफेंस ने रोकने का दावा किया। 7 अक्टूबर: रियाद और अभा के एयरपोर्ट पर हमले हुए। सऊदी अधिकारियों के मुताबिक, तीन विदेशी नागरिकों की मौत हुई और 36 लोग घायल हुए। 8 अक्टूबर: रियाद एयरपोर्ट पर एक और हमला हुआ। अधिकारियों के मुताबिक, तीन सऊदी नागरिकों की मौत हुई। सरकारी एयरलाइन सऊदिया का एक विमान भी क्षतिग्रस्त हुआ। 10 अक्टूबर: रियाद एयरपोर्ट पर मिसाइल हमले में 1 भारतीय नागरिक समेत 13 लोगों की मौत हुई और 300 से ज्यादा लोग घायल हुए। इसके बाद एयरपोर्ट पर उड़ानें रोकनी पड़ीं। 11 अक्टूबर: रियाद एयरपोर्ट के पर एक मिसाइल या ड्रोन गिरा। एक पाकिस्तानी नागरिक की मौत हुई और 11 लोग घायल हुए। 2015 से जारी है सऊदी और हूतियों की लड़ाई यमन में हूतियों ने 2014 में राजधानी सना पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद 2015 में सऊदी अरब ने कई देशों के साथ मिलकर उनके खिलाफ सैन्य अभियान शुरू किया। सऊदी अरब चाहता था कि यमन की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार दोबारा सत्ता में आए और हूतियों का कब्जा खत्म हो। इसके बाद कई साल तक यमन में हवाई हमले होते रहे। लेकिन हूतियों को पूरी तरह पीछे धकेलने में सऊदी गठबंधन कामयाब नहीं हो पाया। हूती अब भी यमन के बड़े हिस्से में अपनी पकड़ बनाए हुए हैं। उनकी लड़ाई का असर अब सऊदी अरब की सुरक्षा पर भी पड़ रहा है। क्राउन प्रिंस सलमान की आलीशान जिंदगी से जुड़े किस्से 41 साल के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की आलीशान जिंदगी से जुड़े कई किस्से मशहूर हैं। कहीं उन्होंने करोड़ों रुपए खर्च कर पार्टी की, तो कहीं हजारों करोड़ की पेंटिंग, हवेली और यॉट से उनका नाम जुड़ा। 1. मालदीव में एक महीने के लिए 474 करोड़ रुपए में लिया रिसॉर्ट लेखक जस्टिन शेक की किताब ‘ब्लड एंड ऑयल’ के मुताबिक, जुलाई 2015 में सलमान ने मालदीव का वेला रिसॉर्ट एक महीने के लिए करीब 474 करोड़ रुपए में किराए पर लिया था। यहां पिटबुल, साइ और डीजे अफ्रोजैक ने परफॉर्म किया। एक रात सलमान खुद मंच पर पहुंचे और अपने पसंदीदा गाने बजाने लगे। पार्टी की खबर बाहर आने के बाद इसे एक हफ्ते के भीतर खत्म कर दिया गया। 2. 4268 करोड़ की पेंटिंग की खरीद से जुड़ा नाम लियोनार्डो दा विंची की पेंटिंग ‘साल्वेटर मुंडी’ 2017 में करीब 4268 करोड़ रुपए में बिकी थी। इसे दुनिया की सबसे महंगी पेंटिंग में गिना जाता है। इस पेंटिंग की खरीद से सलमान का नाम भी जुड़ा था। हालांकि, अबू धाबी के संस्कृति और पर्यटन विभाग ने दावा किया था कि पेंटिंग उसने खरीदी है। 3. फ्रांस में 2848 करोड़ की हवेली सलमान ने 2015 में फ्रांस के वर्साय में करीब 2848 करोड़ रुपए की एक आलीशान हवेली खरीदी थी। 57 एकड़ में फैली यह हवेली बाहर से पुराने शाही महल जैसी दिखती है। इसमें सिनेमा हॉल, स्विमिंग पूल और शानदार सजावट है। हवेली में एक ऐसा कमरा भी है, जहां पानी के बीच बैठकर ऊपर तैरती मछलियों को देखा जा सकता है। यहां के फव्वारे, लाइटें और एसी तक आईफोन से चलाए जा सकते हैं। 4. आधे घंटे यॉट देखी, पसंद आई तो दोगूनी कीमत में खरीदी रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2015 में फ्रांस में छुट्टियां मनाते समय सलमान को ‘सेरेन’ नाम की सुपरयॉट पसंद आ गई। उन्होंने करीब आधे घंटे तक इसे देखा और फिर लगभग 5472 करोड़ रुपए में खरीद लिया। इस यॉट में दो हेलीपैड हैं। इसके अलावा, इसमें एक खास कमरा भी है, जहां से पानी के अंदर का नजारा देखा जा सकता है। 5. नियोम के महल में निजी समुद्र तट और 10 हेलीपैड सऊदी अरब के नियोम में लाल सागर के किनारे सलमान का एक आलीशान महल भी है। यहां निजी समुद्र तट, बड़े-बड़े बगीचे और गोल्फ कोर्स हैं। महल में हेलिकॉप्टर उतारने के लिए 10 हेलीपैड भी बनाए गए हैं। ———————— ये खबर भी पढ़ें… हूती विद्रोहियों ने यमन के राष्ट्रपति भवन पर हमला किया:5 बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं, 4 की मौत; प्रधानमंत्री मौजूद थे, बाल-बाल बचे यमन के अदन शहर में हूती विद्रोहियों ने राष्ट्रपति भवन पर 5 बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। हमले के समय प्रधानमंत्री शाया मोहसेन अल-जिंदानी और सरकार के कई मंत्री परिसर में मौजूद थे, सभी सुरक्षित हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें…

रांची में ₹4,000 करोड़ से बसाई जा रही हाई-टेक स्मार्ट सिटी! 96% काम पूरा, जानिए कब खरीद सकेंगे आशियाना

Ranchi Smart City Project: स्मार्ट सिटी मिशन के तहत रांची में स्मार्ट सिटी का निर्माण पिछले 4 सालों से हो रहा है, जहां अब पक्की सड़कें, सिग्नल, पार्क, कम्युनिटी हॉल और मंत्रियों के बंगले भी नजर आने शुरू हो गए हैं। यहां कई बड़े कॉम्प्लेक्स और फ्लैटों के निर्माण में काफी तेजी देखी जा रही है, और अब आम लोग यहां अपना घर खरीदने का सपना देख रहे हैं।

इन चीजों पर फिलहाल चल रहा है काम

रांची स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के पीआरओ अमित बताते हैं कि रांची स्मार्ट सिटी में इंटीग्रेटेड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट वर्क के तहत आठ प्रोजेक्ट्स पर काम किया जा रहा है। इनमें लैंड डेवलपमेंट, रोड, स्ट्रीट लाइट, सीवरेज एंड एसटीपी, ड्रेनेज, पावर डिस्ट्रीब्यूशन, वाटर डिस्ट्रीब्यूशन, पावर इंफ्रास्ट्रक्चर व पावर फॉर वर्क प्रोजेक्ट शामिल हैं। इस प्रोजेक्ट का 96 प्रतिशत काम पूरा कर लिया गया है।

लोगों को करना पड़ेगा इंतजार

हालांकि, आम लोगों को फ्लैट लेने के लिए अभी 1.5 साल का और इंतजार करना पड़ेगा। कई सारे प्लॉट में यहां फ्लैट और डुप्लेक्स आदि का निर्माण जारी है। बहुत लोगों ने तो बिल्डर के द्वारा एडवांस बुकिंग कर ली है, लेकिन अभी इसे पूरी तरह कंप्लीट होने में कम से कम एक से डेढ़ साल का वक्त लगेगा। चूंकि यह पूरी तरह प्लांट सिटी है, इसलिए यहां रहने का अनुभव काफी शानदार रहेगा।

Ranchi Smart City Project: आम लोगों को फ्लैट लेने के लिए अभी 1.5 साल का और इंतजार करना पड़ेगा

80 करोड़ की लागत से अर्बन हाट होगा आकर्षण का केंद्र

प्लॉट नंबर 54 में 80 करोड़ की लागत से अर्बन हाट बनाया जाएगा। पीआरओ अमित बताते हैं कि इस अर्बन हाट में हैंडीक्राफ्ट्स प्रोडक्ट्स एंड पेंटिंग्स, अस्थायी प्रदर्शनी स्टॉल, बच्चों को खेलने के लिए ओपन स्पेस, ट्रेडिशनल फूड कोर्ट, हैंडलूम स्टॉल और ओपन एयर एंफीथिएटर जैसी चीजें मुख्य आकर्षण का केंद्र रहेंगी, और यहां के स्थानीय कलाकारों को भी मंच मिलेगा।

रांची होगा फ्यूचर-रेडी स्मार्ट सिटी

अमित कुमार बताते हैं कि रांची को फ्यूचर-रेडी स्मार्ट सिटी बनाने के उद्देश्य से 37 फीसदी भूमि को ओपन और ग्रीन स्पेस के रूप में सुरक्षित किया गया है। 24×7 गैस-इंसुलेटेड पावर स्टेशन और जलापूर्ति नेटवर्क विकसित किया गया है। अंडरग्राउंड वायरिंग मॉडल, रोडसाइड यूटिलिटी डक्ट सिस्टम और कई आधुनिक मॉडल्स के जरिए यह पर्यावरण-फ्रेंडली और सस्टेनेबल डेवलपमेंट स्मार्ट सिटी बनकर तैयार होगा।

रिपोर्ट- शिखा श्रेया

जयशंकर और रूबियो की मुलाकात आज

नई दिल्ली। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो और विदेश मंत्री एस जयशंकर मंगलवार को मुंबई में मिलेंगे। दोनों नेताओं के बीच व्यापार और सामरिक विषयों के साथ साथ सभी दोपक्षीय मसलों पर बातचीत होगी। इस मुलाकात के बाद रूबियो गुजरात के जामनगर जाएंगे, जहां वे रिलायंस समूह की रिफाइनरी का दौरा करेंगे। रिलायंस समूह के प्रमुख मुकेश अंबानी से भी उनकी मुलाकात होगी।

बहरहाल, रूबियो का दौरा ऐसे समय में हो रहा है, जब भारत और अमेरिका के संबंध बहुत अच्छे नहीं है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत पर टैरिफ लगाने की धमकी और तेल खरीद को नियंत्रित करने के प्रयासों के कारण दोनों देशों में तनाव आया है। दोनों देशों के बीच व्यापार संधि अटकी है। उधर राष्ट्रपति ट्रंप भारतीय पेशेवरों के लिए वीजा पाना मुश्किल बना रहे हैं। उन्होंने पाकिस्तान के शहबाज, मुनीर प्रशासन के साथ भी खूब नजदीकी बढ़ाई है।

बताया जा रहा है कि जयशंकर और रूबियो भारत व अमेरिका के संबंधों में आए तनाव को दूर करने के उपायों पर चर्चा करेंगे। जानकार अधिकारियों का कहना है, ‘बहुत ही महत्वपूर्ण बैठक होगी, जिसमें दोपक्षीय संबंधों को लेकर ज्यादा फोकस रहेगा’। गौरतलब है कि इस साल रुबियो दूसरी बार भारत आ रहे हैं। उनकी पिछली यात्रा का मुख्य केंद्र क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक थी, जहां भारत के साथ अलग से सीमित चर्चा हुई थी।

इस अमेरिकी विदेश मंत्री की यात्रा का एजेंडा साफ तौर पर भारत के साथ दोपक्षीय संबंधों को सुधारने और मजबूत करने पर केंद्रित है। अधिकारियों का कहना है कि मंगलवार की मुलाकात पुरानी बैठकों से काफी अलग होगी, क्योंकि इसमें क्वाड जैसे बहुपक्षीय मंच की छाया नहीं रहेगी। यह पूरी तरह दोपक्षीय होगी और दोनों पक्ष खुले मन से मुद्दों पर बात करेंगे। ट्रंप प्रशासन पहले ही बता चुका है कि रुबियो की यात्रा में ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग काफी अहम रहने वाला है।

मुंबई की दोपक्षीय वार्ता के के बाद रूबियो जामनगर जाएंगे, जहां रिलायंस समूह के प्रतिनिधियों के साथ उनकी अलग बैठक होगी। इसमें रिलायंस की तरफ से अमेरिका में लगाई जाने वाली रिफाइनरी, वेनेजुएला से उत्पादित क्रूड की खरीद, रिलायंस की रिफाइनरी से डीजल आपूर्ति जैसे मुद्दे शामिल होंगे। यह पहला मौका है जब कोई अमेरिकी विदेश मंत्री अपनी पूरी आधिकारिक टीम के साथ जामनगर जा रहा है, जहां रिलायंस की रिफाइनरी स्थिति है।

WPL 2027 Auction: 28 अक्टूबर को सजेगा नीलामी का मंच, ऑक्शन में 146 खिलाड़ियों पर लगेगी बोली

महिला प्रीमियर लीग (WPL) 2027 के लिए खिलाड़ियों की नीलामी की डेट फाइनल हो गई है। WPL 2027 के लिए खिलाड़ियों की नीलामी 28 अक्टूबर को केरल के कोच्चि में आयोजित की जाएगी। ये नीलामी भारतीय समयानुसार शाम 5:30 बजे शुरू होगी। इसमें पांचों टीमों में खाली 27 जगहों को भरने के लिए 146 खिलाड़ियों पर बोली लगाई जाएगी। इस लिस्ट में 119 भारतीय और 27 विदेशी खिलाड़ी शामिल हैं। भारतीय खिलाड़ियों में 22 अंतरराष्ट्रीय मैच खेल चुके हैं, वहीं 97 खिलाड़ियों को अभी भारत की ओर से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने का मौका नहीं मिला है।

27 विदेशी खिलाड़ियों में 14 अंतरराष्ट्रीय मैच खेल चुके हैं और 13 ने अभी तक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट नहीं खेला। नीलामी में खाली 27 जगहों में से 20 भारतीय खिलाड़ियों और सात विदेशी खिलाड़ियों के लिए हैं।

किसका है कितना बेस प्राइज

महिला प्रीमियर लीग (WPL) की नीलामी में 30 खिलाड़ियों ने अपना शुरुआती दाम 30 लाख रुपये रखा है। इससे पांचों टीमों को नए सीजन के लिए अपनी टीम मजबूत बनाने के लिए ज्यादा खिलाड़ियों को चुनने का मौका मिलेगा। महिला प्रीमियर लीग (WPL) की नीलामी में इंग्लैंड की बल्लेबाज सोफिया डंकले और ऑस्ट्रेलिया की ऑलराउंडर सोफी मोलिनक्स ने अपना शुरुआती दाम 50 लाख रुपये रखा है। यह नीलामी में सबसे ज्यादा तय की गई शुरुआती कीमत है।

इनके अलावा, भारतीय विकेटकीपर-बल्लेबाज जी कमलिनी और बल्लेबाज किरण नवगिरे ने 40 लाख रुपये का शुरुआती दाम तय किया है। ऑस्ट्रेलिया की ऑलराउंडर हीथर ग्राहम और जेस जोनासेन ने भी अपना शुरुआती दाम 40 लाख रुपये रखा है।

यूपी के पास है सबसे बड़ा पर्स

पांचों टीमों ने कुल 63 खिलाड़ियों को अपनी टीम में बरकरार रखा है। इनमें 23 विदेशी खिलाड़ी भी शामिल हैं। अब नीलामी में टीमों के पास खिलाड़ियों को शामिल करने के लिए 27 जगहें खाली हैं, जिनमें से सात जगहें विदेशी खिलाड़ियों के लिए रखी गई हैं। पिछले साल की तरह इस बार भी यूपी वॉरियर्स सबसे ज्यादा 3.65 करोड़ रुपये की रकम के साथ खिलाड़ियों की नीलामी में उतरेगी। 28 अक्टूबर को कोच्चि में होने वाली नीलामी से पहले मुंबई इंडियंस और यूपी वॉरियर्स के पास अपनी टीम में सबसे ज्यादा खाली जगहें हैं। ऐसे में दोनों टीमों को नए खिलाड़ियों को शामिल करने और अपनी टीम मजबूत करने के ज्यादा मौके मिलेंगे।

किस टीम के पास कितनी जगह है खाली

गुजरात जायंट्स के पास नीलामी में खिलाड़ियों को शामिल करने के लिए सबसे कम तीन जगहें खाली हैं। इनमें एक जगह विदेशी खिलाड़ी के लिए है। टीम ने पांच विदेशी खिलाड़ियों समेत कुल 15 खिलाड़ियों को अपने साथ बनाए रखा है और उसके पास खर्च करने के लिए 1.25 करोड़ रुपये बचे हैं। वहीं, रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु और यूपी वॉरियर्स ऐसी दो टीमें हैं, जिनके पास विदेशी खिलाड़ियों को शामिल करने के लिए दो-दो जगहें खाली हैं। महिला प्रीमियर लीग का पांचवां सीजन 14 जनवरी से 7 फरवरी 2027 तक खेला जाएगा।

भारत ने जम्मू-कश्मीर से संबंधित ओआईसी के प्रस्ताव की कड़ी निंदा की

भारत ने जम्मू-कश्मीर की स्थिति पर इस्लामिक सहयोग संगठन (ओआईसी) के प्रस्ताव को खारिज करते हुए सोमवार को कड़े शब्दों में कहा कि संगठन ने पाकिस्तान को अपने “कट्टरपंथी एजेंडे” को आगे बढ़ाने के लिए अपने मंच का ‘दुरूपयोग’ करने की छूट दे रखी है।

नई दिल्ली ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ओआईसी की ओर से भारत के बारे में की गई टिप्पणियां “दुर्भावनापूर्ण, पक्षपातपूर्ण व झूठी हैं तथा पाकिस्तान के इशारे पर की गई हैं।

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विदेश मंत्रालय ने कहा हम 17-18 अक्टूबर को बगदाद में हुई ओआईसी की विदेश मंत्री परिषद की बैठक में पारित प्रस्तावों में भारत के खिलाफ की गई टिप्पणियों को स्पष्ट रूप से खारिज करते हैं।

मंत्रालय ने कहा भारत के बारे में की गई टिप्पणियां दुर्भावनापूर्ण, पक्षपातपूर्ण व झूठी हैं तथा पाकिस्तान के इशारे पर की गई हैं। हमें इस बात से निराशा है कि ओआईसी ने एक बार फिर पाकिस्तान को उसके कट्टरपंथी एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए अपने मंच के दुरूपयोग की अनुमति दी है।

विदेश मंत्रालय ने कहा कि ओआईसी को भारत के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है। मंत्रालय ने कहा जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न और अविभाज्य अंग हैं। राजनीतिक मकसद से किया जाने वाला दुष्प्रचार इस सच्चाई को कभी नहीं बदल सकता।

Pic Credit : UNI

‘टिपिंग प्वाइंट’ से बच पाएगा भारत?

वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने हाल में सार्वजनिक रूप से कहा कि उनका अदालती प्रक्रिया से विश्वास उठ गया है। ..सिब्बल ने उल्लेख किया कि अदालत को मतदाताओं के नाम कथित रूप से गलत तरीके से हटाने और जोड़ने के बारे में बार-बार सूचित किया गया, फिर भी उसने कोई राहत नहीं दी, जबकि बाद के ट्रिब्यूनल डेटा से पता चला कि बहुत से नामों को हटाना गलत था।

कई ओर से खिंचाव और दबाव की शिकार हो रही भारत की संवैधानिक व्यवस्था का अंतिम खंभा भी इस परिघटना के दायरे में आ गया है। 12 अक्टूबर इस मायने में एक असाधारण दिन था, जब विपक्षी दलों के आह्वान पर हजारों लोगों के हुजूम ने सर्वोच्च न्यायालय पर जाकर मोर्चा लगाया। इसके साथ ही इस आम मान्यता पर विराम लग गया कि राजनीतिक दलों के लिए,

  • विरोध दर्ज कराने या अपना पक्ष रखने का उचित मंच संसद और विधानसभाएं हैं
  • अपना विरोध जताने के लिए जन अभियान, जन सभाएं, प्रेस कॉन्फ्रेंस, अधिकारियों के घेराव आदि जैसे वैध माध्यम उन्हें उपलब्ध हैं।
  • राजनीतिक दल या संगठन अगर अदालत तक जुलूस निकालते हैं, तो इससे संदेश जाता है कि वे न्यायिक प्रक्रिया को सड़क के दबाव से प्रभावित करना चाहते हैं। न्यायपालिका को ऐसे विवादों से ऊपर समझा जाता रहा है।
  • इसीलिए अदालत तक जुलूस निकालना अब तक नाजुक और विवादास्पद मामला माना जाता था।
  • खुद सुप्रीम कोर्ट ने कई बार कहा है कि न्यायालय पर दबाव डालने वाले विरोध प्रदर्शन स्वीकार्य नहीं हैं।

लेकिन 12 अक्टूबर को ऐसा ही विरोध प्रदर्शन आयोजित हुआ। लोगों के हुजूम के साथ सुप्रीम कोर्ट पहुंच कर विपक्ष के 11 नेताओं ने निर्वाचन आयोग के खिलाफ अपनी याचिका दायर कराई। याचिका दायर कराना एक वैधानिक प्रक्रिया है। लेकिन जिस रूप में उस रोज यह कराया गया, निर्विवाद रूप से उसे एक राजनीतिक वक्तव्य और सियासी कदम अधिक समझा जाएगा। कहा जा सकता है कि यह तरीका अपना कर विपक्ष ने खुद न्यायपालिका को ही कठघरे में खड़ा करने की कोशिश की है।

विचारणीय यह है कि आखिर ये नौबत क्यों आई? संवैधानिक मर्यादा के तहत राजनीतिक एवं तमाम विवादों से ऊपर मानी जाने वाली न्यायपालिका को लेकर ऐसी धारणा क्यों बनी कि उससे “इंसाफ पाने के लिए” यह जरूरी है कि राजनीतिक तरीके से उस पर दबाव डाला जाए? इस सवाल पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। इसलिए कि इस घटना ने यह साफ कर दिया है कि न्यायपालिका को अब राजनीतिक विवादों से ऊपर नहीं समझा जा रहा है। यानी यह मान्यता कमजोर पड़ी कि अदालतें अपने फैसले विशुद्ध कानूनी आधार पर और संवैधानिक दायरों के अंदर रहते हुए देती हैं। अगर यह धारणा टूटती है, तो उसका मतलब यह भी होगा कि न्यायपालिका के निर्णयों का आदर के साथ स्वेच्छा से अनुपालन करने का चलन कमजोर हो जाएगा।

यह स्थिति क्यों आई? इस बात को समझने के लिए हाल के वर्षों में बनी पृष्ठभूमि पर गौर करना चाहिए। कुछ वरिष्ठ अधिवक्ताओं की टिप्पणियों से इस पृष्ठभूमि को बेहतर समझा जा सकता हैः

  • वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने हाल में सार्वजनिक रूप से कहा कि उनका अदालती प्रक्रिया से विश्वास उठ गया है। उन्होंने कहा कि नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए कोर्ट के पास जाने का उन्हें कोई खास औचित्य नजर नहीं आता।
  • सिब्बल ने कहा- मैं सुप्रीम कोर्ट बार-बार जाकर थक चुका हूं। मुझे नहीं लगता कि वहां जाने का कोई फायदा है। मुझे भारत के सुप्रीम कोर्ट से ज्यादा उम्मीद नहीं बची है।
  • सिब्बल ने उल्लेख किया कि अदालत को मतदाताओं के नाम कथित रूप से गलत तरीके से हटाने और जोड़ने के बारे में बार-बार सूचित किया गया, फिर भी उसने कोई राहत नहीं दी, जबकि बाद के ट्रिब्यूनल डेटा से पता चला कि बहुत से नामों को हटाना गलत था। उन्होंने कहा कि हालांकि अभी भी संविधान को बचाने वाली एकमात्र संस्था सुप्रीम कोर्ट ही है, लेकिन कुछ मामलों में व्यक्तिगत रूप से उन्हें अब उससे बहुत उम्मीद नजर नहीं आती।

कपिल सिब्बल के अलावा कई अन्य वकीलों ने भी हाल में न्यायपालिका की सार्वजनिक रूप से कड़ी आलोचना की हैं। इनमें उनका आशय रहा है कि सुप्रीम कोर्ट लोगों के मौलिक अधिकारों और नागरिक स्वतंत्रताओं की रक्षा करने में विफल या अप्रभावी साबित हो रहा है। मसलन,

  • मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे को लेकर अक्टूबर के पहले हफ्ते में शुरू हुए कॉकरोच आंदोलन के क्रम दिल्ली में हुए विरोध प्रदर्शनों और प्रदर्शनकारियों/ वकीलों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई के बीच वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने चेतावनी दी कि अगर सुप्रीम कोर्ट शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों और वकीलों के खिलाफ हिंसा को रोकने के लिए हस्तक्षेप नहीं करता, तो “यह ना केवल अपनी प्रासंगिकता खो देगा, बल्कि देश और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उपहास का पात्र भी बन जाएगा।”
  • इसके पहले भूषण ने न्यायिक स्वतंत्रता की रक्षा में सुप्रीम कोर्ट के नाकाम रहने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि लगभग आधे जज सरकार की कठपुतलियों की तरह काम कर रहे हैं। उन जजों के महत्त्वपूर्ण मामलों में सरकार के खिलाफ फैसला सुनाने की संभावना बहुत कम होती है।
  • वरिष्ठ अधिवक्ता और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष दुष्यंत दवे अदालत पर मौलिक अधिकारों की रक्षा करने में विफल रहने, इंसाफ देने से बचने, और नागरिकों को निराश करने का आरोप लगा चुके हैं। उन्होंने ऐसे सवालों से सुप्रीम कोर्ट को कठघरे में खड़ा किया है कि क्या वह नागरिक अधिकारों के संरक्षक के रूप में अपने संवैधानिक कर्त्तव्य को निभा रहा है?
  • मिहिर देसाई और गोपाल नारायण जैसे वरिष्ठ वकील भी इससे मिलती-जुलती बातें कह चुके हैं।
  • ये विचार आम तौर पर चुनावी मुद्दों, विरोध प्रदर्शनों, नागरिक स्वतंत्रता के मामलों, कड़े कानूनों के तहत जमानत ना मिलने, और वर्तमान सरकार के प्रति अत्यधिक नरमी के संदर्भ में जताए गए हैं।

भारत की संवैधानिक व्यवस्था के भविष्य के लिए ये बातें बेहद अहम हैं। इसलिए कि भारत में सरकार (कार्यपालिका) और विधायिका को लेकर आम जन में पहले ही भरोसा काफी घट चुका है। इसकी वजह आम जन से किए गए वादों को पूरा ना किया जाना है। सरकारें लोगों को बेहतर जीवन स्तर देने में विफल रही हैं और विधायिकाएं उनकी प्रभावशाली ढंग से जवाबदेही तय करने की अपनी भूमिका नहीं निभा पा रही हैं। इस कारण लोगों का सब्र टूट रहा है।

इसके बीच न्यायपालिका एकमात्र संस्था है, जिससे लोगों को इंसाफ पाने तथा सरकार के अतिरेक कदमों को रोकने की आशा बची थी। लेकिन गुजरे वर्षों में जनमत का एक बड़ा हिस्सा यह देखकर निराश होता चला गया है कि खास कर जिन मामलों में नरेंद्र मोदी सरकार के राजनीतिक हित जुड़े थे, उनमें न्यायपालिका संवैधानिक अपेक्षाओं के अनुरूप अवरोध एवं संतुलन की अपनी भूमिका निभाने में नाकाम रही। इस भावना की अभिव्यक्ति ही हालिया प्रतिक्रियाओं और विपक्ष की राजनीतिक गतिविधियों के जरिए हुई है।

यह संवैधानिक व्यवस्था के लिए बढ़ती चुनौतियों के एक नए मुकाम पर पहुंच जाने का संकेत है। राजनीतिक अर्थशास्त्री राहुल मुखर्जी ने भारत में आर्थिक सुधारों को समझाने के लिए एक मॉडल विकसित किया था, जिसे ‘टिपिंग-प्वाइंट मॉडल’ (Tipping-Point Model) कहा जाता है। यह मॉडल भारत की संवैधानिक व्यवस्था के प्रति हो रही प्रतिक्रियाओं को समझने के लिहाज से भी सहायक हो सकता है। इसके मुताबिक किसी व्यवस्था के भीतर चुनौतियां इकट्ठी हो रही हों, तब भी वह व्यवस्था वर्षों तक दबाव को सहन कर सकती है। लेकिन जब ये चुनौतियां एक निश्चित सीमा को पार जाती हैं, तो एक छोटा-सा झटका भी बहुत बड़े बदलाव की राह खोल सकता है।

राजनीतिक अर्थव्यवस्था के संदर्भ में मुखर्जी ने इस बात तो दो उदाहरणों से समझाने का प्रयास किया था। इसके मुताबिक किसी पुल पर वाहनों का बोझ बढ़ता चला जाए, तब भी पुल टिका रहता है। लेकिन एक हद के बात कोई आखिरी मोटर साइकिल आती है, तो पुल अपने ऊपर जमा हुए बोझ को सह पाने में नाकाम हो जाता है। वही क्षण टिपिंग प्वाइंट कहा जाता है। लेकिन टिपिंग प्वाइंट पुल ढहने का असल कारण नहीं होता। इसी तरह कोई भूकंप लंबे समय से धरती के नीचे टेक्टोनिक परतों की स्थिति में जारी अस्थिरता का परिणाम होता है। मगर किसी एक रोज कोई आखिरी परत खिसकती है, जिससे भूकंप आ जाता है।

भारतीय राजनीति भी शायद ऐसे ही किसी मोड़ की ओर बढ़ रही है। शिक्षा से जुड़े विरोध प्रदर्शनों ने दिखाया कि लगातार जारी लामबंदी (प्रदर्शन) सरकारों को झुकने पर मजबूर कर सकती है। निर्वाचन आयोग से जुड़े विवाद ने अब इस दबाव को चुनावी राजनीति तक पहुंचा दिया है।

तो इस समय हमारे सामने यह महत्त्वपूर्ण सवाल उपस्थित है कि क्या देश किसी बड़ी उथल-पुथल की ओर बढ़ रहा है?

अथवा, फिलहाल देश में बिखरा हुआ गुस्सा किसी टिकाऊ राजनीतिक संगठन का रूप ले सकता है?

पहली सूरत भयावह है। इसलिए कि सिर्फ उथल-पुथल से कभी कुछ नहीं बनता। उलटे बहुसंख्यक जनता को इसकी पीड़ा से गुजरना पड़ता है, जबकि उससे हासिल कुछ नहीं होता। लेकिन, जैसे पुल के ढहने या भूकंप के आने का पूर्वानुमान संभव नहीं है, वैसे ही अगर स्थितियां बन रही हों, तो सामाजिक या राजनीतिक उथल-पुथल से बचना अक्सर मुमकिन नहीं रह जाता है।

असल बात है ऐसी स्थितियों का बनना। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि नतीजों की बिना चिंता किए भारत में राजनीतिक ताकतों ने ऐसी स्थिति बनने दी है। वे यह समझने में नाकाम रहीं कि लोकतांत्रिक व्यवस्था एक सेफ्टी वॉल्व की तरह काम करती है, जिसमें लोगों का गुस्सा विस्फोट की स्थिति आने के पहले ही संस्थागत माध्यमों के जरिए निकल जाता है। अपनी बात कहने और प्रतिरोध जताने की इजाजत, विधि-सम्मत न्याय व्यवस्था और अंततः चुनाव के जरिए जवाबदेही तय करने का सिस्टम- इसी तरह के सेफ्टी वॉल्व समझे जाते हैं। भले इनसे असल में कुछ ना बदलता हो- लोगों की जिंदगी बेहतर ना होती हो, लेकिन इस सिस्टम के जरिए ऐसा होने का भ्रम बना रहता है, जिससे व्यवस्था सुरक्षित रहती है। यह साफ है, आज भारत की संवैधानिक व्यवस्था के बारे में ऐसा भरोसा रखना कठिन हो गया है।

वैसे, एक और सूरत होती है, जिससे टिपिंग प्वाइंट किसी नए निर्माण का बिंदु बन सकती है। ऐसा तब होता है, अगर ऐसी नई ताकतें उभरें, जो पुरानी व्यवस्था को चुनौती भर देने से आगे बढ़ें और अगली व्यवस्था का निर्माण करें। क्या भारत में इसकी संभावना है? फिलहाल, ये उम्मीद नहीं दिखती। इसलिए कि नई ताकतों का उदय नए विमर्श के साथ होता है। फिलहाल, राष्ट्रीय स्तर पर ऐसे किसी विमर्श का संकेत तक मौजूद नहीं है।

फिलहाल सूरत यह है कि एक तरफ सत्ता पक्ष है, जो अपने समर्थन आधार और चुनाव प्रबंधन की क्षमता के बूते अपनी सत्ता कायम रखने को लेकर आश्वस्त है। इसलिए उसे दूसरी तरफ उबल रहे “गुस्से” की कोई परवाह नहीं है। उसे वह पराजित एवं विफल ताकतों की निष्प्रभावी प्रतिक्रिया मानता है। उसे यकीन है कि राज्य के दमनकारी तंत्र के जरिए विरोधी ताकतों को वह नियंत्रित रखा जा सकता है।

दूसरी तरफ विपक्ष एवं वे समूह हैं, जो सही या गलत, लेकिन धीरे-धीरे यह मानने लगे हैं कि सत्ता पक्ष इसलिए सत्ता में नहीं है कि उसके साथ लोगों की बहुसंख्या है। बल्कि वह सत्ता में इसलिए बना हुआ है, क्योंकि राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के धरातल को अनुचित तरीकों से अपनी तरफ झुका कर वह जनादेश गढ़ रहा है। इस स्थिति में निर्वाचित सरकार की वैधता (legitimacy) का सवाल खड़ा होता है, जिसे असल में इस समय उठाया जा रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे दावा कर चुके हैं कि 2024 से हुए सभी चुनावों में धांधली हुई और इस कारण उनसे चुनी गई सरकारें अवैध हैं। विपक्षी दलों और सिविल सोसायटी मे ऐसे बहुत से लोग हैं, जो खड़गे की राय से सहमत नजर आते हैं।

इन हालात ने भारत के राजनीतिक क्षितिज पर एक गतिरोध निर्मित कर दिया है। अगर न्यायपालिका से न्याय पाने की संभावना सभी पक्षों में बनी रहती, तो इस गतिरोध का समाधान संभव था। दुर्भाग्यपूर्ण है कि अब खुद न्यायपालिका की भूमिका पर सवाल गहरा गए हैं। इसी से उपजे विवाद की झलक 12 अक्टूबर को देखने को मिली। उस रोज जो हुआ, वह कई वर्षों से बनती स्थिति का परिणाम था। इस नई सूरत का क्या नतीजा होगा, उस बारे में सोचना भयभीत करता है, हालांकि उसका सही अनुमान लगाना फिलहाल संभव नहीं है।

पाकिस्तान के बलूचिस्तान में भूकंप के तेज झटके

पाकिस्तान के बलूचिस्तान क्षेत्र में शनिवार को भूकंप के तेज झटके महसूस किये गये। भारत के राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (एनसीएस) के अनुसार भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 5.8 आंकी गयी। भूकंप का केंद्र जमीन से 15 किलोमीटर की गहराई में था।

एजेंसी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में बताया कि भूकंप के झटके भारतीय समयानुसार आज पूर्वाह्न 10 बजकर 37 मिनट पर आए। इसका अक्षांश 27.944 डिग्री उत्तर और देशांतर 66.532 डिग्री पूर्व था। भूकंप के बाद तत्काल किसी के हताहत होने या नुकसान की कोई सूचना नहीं मिली है।

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उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान में भूकंप आने का खतरा अधिक रहता है, क्योंकि यह भारतीय और यूरेशियाई टेक्टोनिक प्लेटों की सीमा के पास स्थित है। इन दोनों प्लेटों के टकराव से भूकंपीय गतिविधियां उत्पन्न होती हैं।

दक्षिण-पश्चिमी पाकिस्तान का विशाल प्रांत बलूचिस्तान भूकंप के खतरे वाले क्षेत्रों में शामिल है। इसके अलावा खैबर पख्तूनख्वा और गिलगित-बाल्टिस्तान भी संवेदनशील क्षेत्र हैं, जहां सक्रिय भ्रंश रेखाओं और जटिल पर्वतीय प्रणालियों के कारण भूकंप का खतरा बना रहता है। पंजाब और सिंध के कुछ हिस्सों में भी भूकंपीय गतिविधियों की आशंका रहती है।

Pic Credit : UNI

जिम्बाब्वे को 4 विकेटों से हराकर भारतीय महिलाओं ने पाई शुरुआती बढ़त

INDvsZIM भारत ने अनुभवी ऑलराउंडर दीप्ति शर्मा (49 रन) और पदार्पण करने वाली बल्लेबाज निकी प्रसाद (नाबाद 39) के बीच पांचवें विकेट के लिए 82 रन की साझेदारी की मदद से शुरूआती झटकों से उबरते हुए शुक्रवार को  पहले महिला टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में जिम्बाब्वे को चार विकेट से शिकस्त देकर तीन मैच की श्रृंखला में 1-0 से बढ़त बना ली।भारत और जिम्बाब्वे पहली बार द्विपक्षीय श्रृंखला में खेल रहे हैं। इस मुकाबले के साथ स्मृति मंधाना के कप्तानी कार्यकाल की भी शुरुआत हुई।

भारतीय टीम के लिए 115 रन का लक्ष्य इतना बड़ा नहीं था लेकिन 19 रन पर चार विकेट गंवाने के बाद टीम संघर्ष करती दिख रही थी।लेकिन अनुभवी ऑलराउंडर दीप्ति (37 गेंद, आठ चौके) और मध्यक्रम बल्लेबाज निकी (35 गेंद, छह चौके) ने मिलकर पांचवें विकेट के लिए 63 गेंद में 82 रन की भागीदारी कर भारत को जीत तक पहुंचाया। यह महिला टी20 अंतरराष्ट्रीय में पांचवें विकेट के लिए भारत की सबसे बड़ी साझेदारी है। इन दोनों ने मिताली राज और अनुजा पाटिल के बीच इस विकेट के लिए 77 रन की साझेदारी के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ा।

इस दौरान दीप्ति आउट हो गईं, पर भारत ने 4.2 ओवर रहते छह विकेट पर 116 रन बनाकर जीत दर्ज की।नयाशा ग्वानजुरा (तीन ओवर में 18 रन देकर तीन विकेट) ने अपने पहले ही ओवर में भारतीय कप्तान स्मृति मंधाना (09) और अनुष्का शर्मा (04) के विकेट लेकर भारत को दो झटके दे दिए।

जिम्बाब्वे का मंधाना के खिलाफ शुरुआत में ऑफ स्पिन गेंदबाजी कराने का फैसला सफल रहा। दूसरे ओवर की पहली गेंद हालांकि विकेट लेने वाली गेंद नहीं थी। मंधाना के पास इसे खेलने का समय था लेकिन वह पीछे हटकर पुल शॉट खेलने गईं और गेंद उनके बल्ले का ऊपरी किनारा लेकर हवा में उछल गई। बैकवर्ड स्क्वायर लेग पर खड़ी खिलाड़ी ने आसान कैच लपक लिया।

जिम्बाब्वे को शुरुआती सफलता मिली और भारत की नयी कप्तान सस्ते में आउट हो गईं।फिर दो गेंद बाद ग्वानजुरा ने भारत को दूसरा झटका दे दिया। अनुष्का ऑफ स्टंप के बाहर की जाती गेंद को ड्राइव करने गईं, लेकिन गेंद बल्ले का किनारा लेकर बैकवर्ड प्वाइंट की ओर चली गई, जहां क्षेत्ररक्षक ने आसान कैच लपक लिया। भारत का स्कोर दो विकेट पर 18 रन हो गया।

स्कोर में एक रन ही जुड़ा था कि पूर्व कप्तान हरमनप्रीत कौर भी सस्ते में आउट हो गईं। मिशेल मावुंगा की फुल लेंथ को हरमनप्रीत ने फ्लिक करने की कोशिश की, लेकिन यह सीधे शॉर्ट मिडविकेट पर खड़ी ग्वानज़ुरा के हाथों में चली गई। भारत का तीसरा विकेट गिर गया।

ग्वानजुरा ने इसके बाद उप-कप्तान शेफाली वर्मा को अपनी ही गेंद पर कैच लेकर भारत को चौथा झटका दिया।स्कोर चार विकेट पर 19 रन था और भारतीय टीम मुश्किल में दिख रही थी।पर दीप्ति जिम्मेदारी से खेलते हुए क्रीज पर टिकीं रहीं, हालांकि अपने अर्धशतक से एक रन पहले ओलिंडर चारे की गेंद पर आउट हो गईं। निकी डटीं रहीं और टीम को जीत दिलाई।

इससे पहले जिम्बाब्वे की सलामी बल्लेबाज केलिस एंडलोहवु ने 44 गेंद में 42 रन की आकर्षक पारी खेली, लेकिन भारतीय गेंदबाजों ने मेहमान टीम को पांच विकेट पर 114 रन पर रोक दिया।एंडलोहवु की पारी जिम्बाब्वे की ओर से सबसे प्रभावशाली रही जबकि अन्य बल्लेबाजों को भारतीय गेंदबाजी आक्रमण के सामने संघर्ष करना पड़ा।

शारने मेयर्स ने अंतिम ओवरों में नाबाद 43 रन (33 गेंद में) बनाकर टीम के स्कोर को कुछ सम्मानजनक स्थिति तक पहुंचाया।एंडलोहवु ने बड़े मंच पर अपनी शॉट खेलने की क्षमता का शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने शॉर्ट गेंदों पर तेजी से कट और पुल शॉट लगाए। हालांकि 10 ओवर में जिम्बाब्वे का स्कोर एक विकेट पर 60 रन पहुंचने के बाद बाएं हाथ की इस सलामी बल्लेबाज की रन गति काफी धीमी हो गई। वह अपनी आखिरी 12 गेंदों पर केवल दो रन बना सकीं, जिसके बाद अरुंधति रेड्डी ने उन्हें बोल्ड कर दिया।

एंडलोहवु की सलामी जोड़ीदार बिलव्ड बिजा पहले ही ओवर में क्रांति गौड़ की सीधी गेंद को चूककर आउट हो गईं।इसके बाद एंडलोहवु और मॉडेस्टर मुपाचिकवा (26 गेंद में 16 रन) ने दूसरे विकेट के लिए 53 रन की साझेदारी की। इस दौरान ज्यादातर रन एंडलोहवु ने बनाए।

पर 11वें ओवर में स्पिनर श्री चरणी की गेंद पर मुपाचिकवा ने आसान कैच थमा दिया, जिससे जिम्बाब्वे का स्कोर दो विकेट पर 60 रन हो गया।जिम्बाब्वे की बल्लेबाजों ने काफी अधिक डॉट गेंदें खेलीं। भारत जैसी मजबूत टीम को चुनौती देने के लिए उन्हें अभी काफी सुधार करने की जरूरत है।मेयर्स ने पारी के अंतिम ओवरों में दो छक्के और चार चौके लगाकर टीम के स्कोर में उपयोगी रन जोड़े।