ज्ञानेश कुमार सरकारी गवाह बनें : राहुल

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष तथा लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा है कि देश में ‘वोट चोरी’ करवाई जा रही है इसलिए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा देकर सरकारी गवाह बन जाना चाहिए।

श्री गांधी ने शनिवार को अपने पॉडकास्ट में परीक्षाओं में देरी, नियुक्तियां अटकने और बुनियादी सुविधाओं की कमी का जिक्र करते हुए ऐसे मुद्दों पर जवाबदेही तय करने की जरूरत बतायी। उन्होंने पिछले एक महीने में इंदौर, नासिक, बालाघाट और दिल्ली में छात्रों की गूंज कार्यक्रम के दौरान के अनुभव साझा करते हुए कहा कि छात्रों के सवाल ऐसी व्यवस्था को चुनौती देते हैं।

उन्होंने कहा कि आरएसएस-भाजपा से जुड़े लोगों ने देश के संस्थानों पर कब्जा कर लिया है और आदिवासी और पिछड़े वर्ग के छात्रों को जो सुविधाएं मिलती हैं उनमें कटौती की जा रही है इसलिए इन मामलों में सरकार की ओर से जवाबदेही तय होनी चाहिए।

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श्री गांधी ने इस पॉडकास्ट में महाराष्ट्र के नासिक में आंदोलनरत आदिवासी विद्यार्थियों, महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग की परीक्षा में कथित अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों और मध्य प्रदेश के बालाघाट में कुपोषण तथा बीमारियों से बच्चों को खोने वाले आदिवासी परिवारों के साथ अपनी मुलाकात का भी जिक्र किया। उन्होंने बालाघाट में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण पूरी तरह लागू करने का आग्रह किया और कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव को इस संदर्भ में पत्र लिखा है।

उन्होंने कहा कि दिल्ली के बेला एस्टेट की झुग्गी बस्ती में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद 729 निवासियों में से 728 के नाम मतदाता सूची से हट गये। इसे मतदान के अधिकार के उल्लंघन का गंभीर मामला बताते हुए उन्होंने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा देकर सरकारी गवाह बनना चाहिए।

वोट चोरी को संविधान पर हमला बताते हुए श्री गांधी ने 30 सितंबर को यहां इंडिया गठबंधन के नेताओं के साथ हुई बैठक का उल्लेख किया और कहा कि उसमें प्रत्येक भारतीय के मतदान के अधिकार की रक्षा पर विचार-विमर्श किया गया है।

उन्होंने परीक्षा में देरी, नियुक्तियां अटकने और बुनियादी सुविधाओं की कमी जैसे मुद्दों के साथ ही दिल्ली के सत्य निकेतन की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि शिक्षा बजट में कटौती की वजह से ऐसा हो रहा है और इन सब मामलों में जवाबदेही तय होनी चाहिए।

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पाकिस्तान के बलूचिस्तान में भूकंप के तेज झटके

पाकिस्तान के बलूचिस्तान क्षेत्र में शनिवार को भूकंप के तेज झटके महसूस किये गये। भारत के राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (एनसीएस) के अनुसार भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 5.8 आंकी गयी। भूकंप का केंद्र जमीन से 15 किलोमीटर की गहराई में था।

एजेंसी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में बताया कि भूकंप के झटके भारतीय समयानुसार आज पूर्वाह्न 10 बजकर 37 मिनट पर आए। इसका अक्षांश 27.944 डिग्री उत्तर और देशांतर 66.532 डिग्री पूर्व था। भूकंप के बाद तत्काल किसी के हताहत होने या नुकसान की कोई सूचना नहीं मिली है।

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उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान में भूकंप आने का खतरा अधिक रहता है, क्योंकि यह भारतीय और यूरेशियाई टेक्टोनिक प्लेटों की सीमा के पास स्थित है। इन दोनों प्लेटों के टकराव से भूकंपीय गतिविधियां उत्पन्न होती हैं।

दक्षिण-पश्चिमी पाकिस्तान का विशाल प्रांत बलूचिस्तान भूकंप के खतरे वाले क्षेत्रों में शामिल है। इसके अलावा खैबर पख्तूनख्वा और गिलगित-बाल्टिस्तान भी संवेदनशील क्षेत्र हैं, जहां सक्रिय भ्रंश रेखाओं और जटिल पर्वतीय प्रणालियों के कारण भूकंप का खतरा बना रहता है। पंजाब और सिंध के कुछ हिस्सों में भी भूकंपीय गतिविधियों की आशंका रहती है।

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पाकिस्तान के बलूचिस्तान में 5.7 तीव्रता का भूकंप आया:सिंध में भी झटके महसूस हुए; इतनी ही तीव्रता का भूकंप फरवरी में भी आया था

पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में शनिवार को 5.7 तीव्रता का भूकंप आया। अमेरिकी भूगर्भीय सर्वेक्षण (USGS) के मुताबिक, भूकंप का केंद्र खुझदार शहर से 48 किलोमीटर दूर था। इसी साल फरवरी में यहां इतनी ही तीव्रता का भूकंप आया था। भूकंप के झटके सिंध में भी महसूस किए गए हैं। स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन टीमें खुझदार और आसपास के ग्रामीण इलाकों में नुकसान का आकलन कर रही हैं। जिले में राहत-बचाव दल, अस्पताल और पुलिस को अलर्ट पर रखा गया है। फिलहाल, भूकंप से जान-माल के नुकसान की कोई जानकारी सामने नहीं आई हैं। फरवरी में भी भूकंप आया था इससे पहले फरवरी में बलूचिस्तान में 5.6 तीव्रता का भूकंप आया था। यह सुबह 6 बजकर 30 मिनट पर आया था और इसका केंद्र जमीन से 13 किलोमीटर की गहराई में था। उस समय भूकंप का केंद्र खुझदार शहर से 86 किलोमीटर दूर था। भूकंप के झटके बलूचिस्तान के झल मगसी, जाफराबाद और नसीराबाद में महसूस किए गए थे। पड़ोसी सिंध प्रांत के सुक्कुर, कंबर, शहदादकोट और दादू जिलों में भी झटके महसूस हुए थे। बलूचिस्तान में पहले भी खतरनाक भूकंप आ चुके हैं बलूचिस्तान के क्वेटा में 1935 में 7.7 तीव्रता का विनाशकारी भूकंप आया था। इसमें करीब 35 हजार लोगों की मौत हुई थी। वहीं, 1945 में मकरान तट के पास 8.1 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया था, जिससे समुद्र में सुनामी भी उठी थी। 2005 के भूकंप में 74 हजार से ज्यादा मौतें हुई थीं पाकिस्तान में अब तक के सबसे विनाशकारी भूकंपों में से एक 8 अक्टूबर 2005 को आया था। इस भूकंप में 74 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी। विशेषज्ञों के मुताबिक, पाकिस्तान तीन प्रमुख टेक्टोनिक प्लेटों – अरबियन, यूरेशियन और भारतीय प्लेट- के संपर्क वाले क्षेत्र में स्थित है। इन प्लेटों की हलचल के कारण देश में अक्सर भूकंप के झटके महसूस होते हैं। ——————– ये खबर भी पढ़ें… बांग्लादेश में छात्रों ने मंदिर के सामने गोमांस पकाया: आज यूनिवर्सिटी में गाय काटने की तैयारी बांग्लादेश की जगन्नाथ यूनिवर्सिटी में 12 अक्टूबर को मंदिर के पास गोमांस पकाने को लेकर विवाद हो गया। इसके दो दिन बाद यूनिवर्सिटी प्रशासन ने कैंपस में पशु काटने से बचने का नोटिस जारी किया। पूरी खबर यहां पढ़ें…

ऐसा प्रोटेस्ट हुआ कि पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में लगाना पड़ गया आपातकाल! वहां क्यों मचा है बवाल?

पाकिस्तान में इमरान खान के समर्थकों के विरोध और बढ़ती हिंसा के बीच रविवार को खैबर पख्तूनख्वा में इमरजेंसी लगा दी गई। पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने देश के उत्तरी प्रांत खैबर पख्तूनख्वा में बिगड़ती कानून-व्यवस्था और बढ़ते आतंकी हमलों का हवाला देते हुए आपातकाल की घोषणा की है। राष्ट्रपति ने तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के नेतृत्व वाली प्रांतीय सरकार को भी बर्खास्त कर दिया। राष्ट्रपति के इस फैसले का असर तुरंत प्रभाव से लागू हो गया है। बता दें इमरान खान की रिहाई की मांग को लेकर उनके हजारों समर्थक खैबर पख्तूनख्वा में मार्च कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी देश की खराब आर्थिक स्थिति को लेकर भी सरकार के खिलाफ अपना गुस्सा जाहिर कर रहे हैं।

राष्ट्रपति ने लगाया इमरजेंसी

इमरजेंसी लागू होने के बाद पाकिस्तान की केंद्र सरकार को प्रांत के प्रशासन पर ज्यादा अधिकार मिल गए हैं। ये फैसला संविधान के दो सुरक्षा प्रावधानों के तहत लिया गया। राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने कानून-व्यवस्था की स्थिति और सरकारी प्रतिनिधियों के साथ बातचीत बेनतीजा रहने के बाद मिली सिफारिशों के आधार पर इस आदेश पर हस्ताक्षर किए। राष्ट्रपति कार्यालय ने आदेश पर उनके हस्ताक्षर वाली तस्वीर भी जारी की है।

खैबर पख्तूनख्वा की बढ़ाई गई सुरक्षा

AFP के एक रिपोर्टर के अनुसार, रविवार को खैबर पख्तूनख्वा की राजधानी पेशावर में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई थी, जबकि प्रांत के कई अन्य शहरों में भी सड़कों को बंद रखा गया। सरकार के साथ बातचीत विफल होने के बाद PTI समर्थकों ने करीब एक सप्ताह पहले प्रांत के अलग-अलग कस्बों और शहरों से गुजरते हुए ‘लॉन्ग मार्च’ शुरू किया था।

PTI ने किया विरोध

खैबर पख्तूनख्वा को इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) का मजबूत गढ़ माना जाता है। रविवार को उठाए गए संवैधानिक कदमों के बाद प्रांत की PTI सरकार के अधिकार सीमित हो जाएंगे। PTI के चेयरमैन गौहर अली खान ने इस फैसले की कड़ी आलोचना करते हुए इसे गंभीर राजनीतिक भूल और लोकतंत्र के खिलाफ उठाया गया कदम बताया। उन्होंने X पर लिखा कि, ‘लोग अपने अधिकारों के खिलाफ उठाए जा रहे ऐसे कदमों को कभी स्वीकार नहीं करेंगे।’

2023 से जेल में बंद है इमरान खान

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और मशहूर क्रिकेटर इमरान खान अगस्त 2023 से जेल में बंद हैं। उनके खिलाफ भ्रष्टाचार, देशद्रोह और हिंसा भड़काने समेत कई मामले दर्ज हैं। ये मामले मई 2023 में हुए बड़े सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बाद सामने आए थे। वहीं, इमरान खान और उनकी कानूनी टीम ने सभी आरोपों को गलत बताया। उनके मुताबिक, ये मामले राजनीतिक बदले की भावना से बनाए गए और इनका उद्देश्य इमरान की लोकप्रियता को नुकसान पहुंचाना है।

बाचतीच हुई फेल

पाकिस्तान सरकार ने PTI के साथ बातचीत में इमरान खान की मांगों को खैबर पख्तूनख्वा की सुरक्षा से जोड़ दिया था। खान के समर्थक चाहते थे कि उन्हें अपने डॉक्टरों से मिलने की अनुमति दी जाए। लेकिन 4 अक्टूबर को सरकार और PTI के बीच बातचीत सफल नहीं हो सकी, जिसके बाद समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। वहीं, पाकिस्तान ने खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में बढ़ते हमलों के लिए अफगानिस्तान से होने वाली आतंकी गतिविधियों को जिम्मेदार ठहराया है। हालांकि, तालिबान सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए पाकिस्तान पर अफगानिस्तान की संप्रभुता का उल्लंघन करने और आम लोगों को निशाना बनाने का आरोप लगाया है।

पाकिस्तान के खैबर-पख्तूनख्वा में इमरान की पार्टी की सरकार बर्खास्त:इमरजेंसी लगी; पूर्व पीएम की रिहाई के लिए राज्य के CM मार्च निकाल रहे थे

पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार ने रविवार को खैबर-पख्तूनख्वा प्रांत में इमरजेंसी लगा दी और सरकार बर्खास्त कर दी। यहां इमरान खान की पार्टी PTI की सरकार है। खैबर-पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी पूर्व पीएम इमरान खान की रिहाई की मांग को लेकर समर्थकों के साथ इस्लामाबाद की ओर मार्च निकाल रहे थे। शहबाज सरकार का आरोप है कि इमरान खान की PTI सरकार प्रांत में आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में जानबूझकर सहयोग नहीं कर रही है। पाक सरकार आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं करेगी। इमरान खान की पार्टी PTI ने फैसले का विरोध किया इमरजेंसी लगाने का फैसला प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की अध्यक्षता में हुई आपात कैबिनेट बैठक में लिया गया। बैठक में प्रांत की सुरक्षा स्थिति पर चर्चा हुई। सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 232 और 234 के तहत इमरजेंसी और गवर्नर शासन लागू करने का फैसला किया। हालांकि, पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी PTI ने इस कदम का विरोध किया है। पार्टी अध्यक्ष गौहर अली खान ने इसे अलोकतांत्रिक बताते हुए कहा कि प्रांत के अधिकार कमजोर करके शांति और स्थिरता नहीं लाई जा सकती। शहबाज ने अफगानिस्तान पर आतंकवाद पर लगाम न लगाने का आरोप लगाया शरीफ ने कैबिनेट बैठक में कहा कि PTI की अगुवाई वाली प्रांतीय सरकार को देश की अर्थव्यवस्था को अस्थिर करने की इजाजत नहीं दी जा सकती। उन्होंने खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में आम नागरिकों, पुलिसकर्मियों, सुरक्षाबलों और बच्चों की मौतों पर भी चिंता जताई। शहबाज ने यह भी कहा कि पाकिस्तान लगातार पड़ोसी अफगानिस्तान से आतंकवादी संगठनों पर लगाम लगाने की अपील करता रहा है, लेकिन उनकी शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा। PTI बोली- फैसले से हिंसा और बढ़ सकती है इमरान खान के करीबी सहयोगी और PTI प्रवक्ता जुल्फिकार बुखारी ने इस फैसले को ‘हास्यास्पद’ बताया। उन्होंने दावा किया कि खैबर पख्तूनख्वा पाकिस्तान की एकमात्र वैध रूप से चुनी गई सरकार है। बुखारी ने कहा कि इस फैसले से हिंसा, अस्थिरता और आम लोगों की परेशानी बढ़ सकती है। उन्होंने कहा कि बातचीत के जरिए विवाद सुलझाने का रास्ता अब भी खुला था। उनके मुताबिक, सरकार के इस कदम से लगता है कि वह बातचीत करना ही नहीं चाहती थी। इससे पहले इमरान खान के समर्थकों के प्रदर्शन कई बार हिंसक हो चुके हैं। 2024 में हुए प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षाकर्मियों और आम नागरिकों की भी मौत हुई थी। इमरजेंसी और गवर्नर शासन का क्या मतलब है? पाकिस्तान के संविधान के अनुच्छेद 232 के तहत युद्ध, दूसरे देश के हमले या देश के अंदर बिगड़े ऐसे हालात में इमरजेंसी लगाई जा सकती है, जिन्हें प्रांतीय सरकार संभाल न पा रही हो। इमरजेंसी लगने पर केंद्र सरकार को प्रांत के मामलों में दखल देने और कुछ मुद्दों पर कानून बनाने के ज्यादा अधिकार मिल जाते हैं। वहीं, अनुच्छेद 234 के तहत जब किसी प्रांत की सरकार संविधान के मुताबिक काम नहीं कर पाती, तो वहां गवर्नर शासन लगाया जा सकता है। इसके लिए राष्ट्रपति के फैसले को संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक से मंजूरी लेनी होती है। मंजूरी नहीं मिलने पर गवर्नर शासन दो महीने बाद खत्म हो जाता है। मंजूरी मिलने पर भी इसे एक बार में दो महीने के लिए ही बढ़ाया जा सकता है। यह व्यवस्था कुल छह महीने से ज्यादा नहीं चल सकती। पाकिस्तान सरकार ने इस फैसले में अनुच्छेद 233 का इस्तेमाल नहीं किया है। यह अनुच्छेद इमरजेंसी के दौरान नागरिकों के कुछ बुनियादी अधिकारों पर रोक लगाने से जुड़ा है। ————————- ये खबर भी पढ़ें… पाकिस्तान में 4 प्रांतों के 15 हिस्से करने की तैयारी:पंजाब-सिंध में नवाज और भुट्टो परिवार कमजोर होंगे पाकिस्तान के आर्मी चीफ असीम मुनीर देश के 4 प्रांतों को 12 से 15 हिस्सों में बांटकर सियासत का पूरा गणित बदलना चाहते हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें…

पाकिस्तान का नक्शा बदल अपनी ताकत बढ़ाना चाहते हैं मुनीर:4 प्रांतों को 15 हिस्सों में बांटने की तैयारी; पंजाब-सिंध की सियासी ताकत कमजोर होगी

पाकिस्तान के आर्मी चीफ असीम मुनीर देश के 4 प्रांतों को 12 से 15 हिस्सों में बांटकर सियासत का पूरा गणित बदलना चाहते हैं। ब्रिटिश मैगजीन ‘द इकोनॉमिस्ट’ की रिपोर्ट के मुताबिक, इस कदम से पंजाब और सिंध में मजबूत राजनीतिक पार्टियों का दबदबा टूट सकता है। अभी इन प्रांतों की सरकारें केंद्र को चुनौती देने की ताकत रखती हैं। छोटे प्रांत बनने पर यह ताकत बंट जाएगी और इस्लामाबाद का दखल बढ़ेगा। इससे पहले से मजबूत सेना को देश की राजनीति और सरकार पर अपनी पकड़ बढ़ाने का मौका मिल सकता है। पंजाब और सिंध की सियासी ताकत कम होगी पाकिस्तान का पंजाब प्रांत पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) का गढ़ है, जबकि सिंध में पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) का दबदबा है। दोनों पार्टियों की ताकत बड़े प्रांतों में उनकी मजबूत पकड़ से आती है। अगर इन प्रांतों को छोटे हिस्सों में बांटा जाता है, तो मौजूदा राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं। पार्टियों को अलग-अलग छोटे प्रांतों में अपनी ताकत साबित करनी होगी। इससे बड़े नेताओं का प्रभाव घट सकता है और केंद्र सरकार को प्रांतीय राजनीति में दखल देने का ज्यादा मौका मिल सकता है। प्रांत को छोटे करने के पीछे दलील क्या है ‘द इकोनॉमिस्ट’ के मुताबिक, मुनीर का मानना है कि पाकिस्तान के प्रांत इतने बड़े हैं कि वहां प्रशासन ठीक से नहीं चल पा रहा। पंजाब में करीब 12.8 करोड़ लोग रहते हैं, जबकि क्षेत्रफल के लिहाज से सबसे बड़ा बलूचिस्तान है, जहां करीब डेढ़ करोड़ की आबादी है। बड़े इलाकों में लोगों तक सरकारी सुविधाएं पहुंचाना मुश्किल होता है। ग्रामीण पंजाब में लोगों को बुनियादी सेवाओं के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। बलूचिस्तान में भी दूर-दराज के इलाकों तक सुविधाएं पहुंचाना चुनौती है। लेकिन पाकिस्तान की बदहाल अर्थव्यवस्था, महंगाई और कर्ज की समस्या सिर्फ प्रांतों के बड़े आकार से पैदा नहीं हुई। ऐसे में सवाल है कि प्रांतों को बांटने से आम लोगों की जिंदगी कितनी बदलेगी और सत्ता का फायदा किसे मिलेगा। पाकिस्तान में सेना पहले से ताकतवर पाकिस्तान में सेना कई बार सीधे सत्ता संभाल चुकी है। आज भी राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति जैसे बड़े मामलों में उसका खासा प्रभाव है। सेना के पास जमीन, कारोबार और बड़े संसाधन भी हैं। ऐसे में प्रांतों को बांटने से अगर मौजूदा राजनीतिक ताकत कमजोर होती है, तो सेना और केंद्र सरकार का दबदबा बढ़ सकता है। बड़े प्रांतों के मजबूत नेताओं के बजाय केंद्र को कई छोटी सरकारों से निपटना होगा। इससे प्रांतीय नेतृत्व की सामूहिक ताकत कम हो सकती है। 15 छोटे प्रांत बनाने या जिलों को ज्यादा ताकत देने पर विचार पाकिस्तान में दो रास्तों पर चर्चा है। पहला, 4 प्रांतों को बांटकर 12 से 15 नए प्रांत बनाना। दूसरा, करीब 160 जिलों को ज्यादा अधिकार देना, ताकि लोगों के काम के लिए उन्हें दूर न जाना पड़े। योजना मंत्री अहसान इकबाल इन दोनों विकल्पों का जिक्र कर चुके हैं।
नए प्रांत बनाने के लिए संविधान बदलना होगा। वहीं, जिलों को ज्यादा अधिकार देने से मौजूदा प्रांतों को बांटे बिना लोगों को सरकारी सुविधाएं आसानी से मिल सकती हैं। कौन-कौन से नए प्रांत बन सकते हैं? पाकिस्तान सरकार की तरफ से अभी आधिकारिक नक्शा जारी नहीं किया गया है, लेकिन जिन इलाकों की चर्चा है, वे कुछ इस तरह हैं- पंजाब: उत्तर पंजाब, मध्य पंजाब, दक्षिण पंजाब सिंध: कराची सिंध, मध्य सिंध, ऊपरला सिंध KP: उत्तरी KP, दक्षिणी KP, आदिवासी KP/फाटा रीजन बलूचिस्तान: पूर्व बलूचिस्तान, पश्चिम बलूचिस्तान, दक्षिणी बलूचिस्तान सिंध में पहले से प्रस्ताव का विरोध हो रहा सिंध विधानसभा ने 3 सितंबर को प्रस्ताव पास कर प्रांत को बांटने और उसके किसी हिस्से को केंद्र के अधीन करने का विरोध किया था। पाकिस्तान के संविधान के मुताबिक, किसी प्रांत की सीमा बदलने के लिए उसकी विधानसभा के कम से कम दो-तिहाई सदस्यों की मंजूरी जरूरी है। संसद की मंजूरी भी लेनी होगी। सिंध में कराची है, जो पाकिस्तान का प्रमुख कारोबारी केंद्र है। यहां सीमा बदलने से राजनीतिक प्रतिनिधित्व और संसाधनों के बंटवारे को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो सकता है। नक्शा बदलेगा तो सत्ता का गणित भी बदलेगा प्रांत छोटे होने से प्रशासन लोगों के करीब पहुंच सकता है, लेकिन असली सवाल यह है कि नई इकाइयों को कितने अधिकार मिलेंगे। अगर पैसा और फैसले लेने की ताकत केंद्र के पास ही रही, तो छोटे प्रांत सिर्फ नाम के लिए अलग होंगे। इस पूरी कवायद का सबसे बड़ा राजनीतिक असर पंजाब और सिंध की मौजूदा ताकत पर पड़ सकता है। बड़े प्रांतों की सियासी पकड़ कमजोर होने से केंद्र और सेना को फायदा मिल सकता है। ————————– ये खबर भी पढ़ें… पाकिस्तान में आटे के संकट से जूझ रहे लोग:20 किलो आटे का बैग 3300 रुपए पहुंचा, रोटी 20 से बढ़कर 30 रुपए हुई पाकिस्तान के पेशावर में आटे की कीमत तेजी से बढ़ने से लोग परेशान हैं। 20 किलो मोटे आटे का बैग 3,300 पाकिस्तानी रुपए तक पहुंच गया है। आटे की कीमत बढ़ने का असर तंदूरों पर भी पड़ा है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

पाकिस्तान में ट्रम्प के बेटों की कंपनी ड्रोन यूनिट लगाएगी:3 सैन्य साइट्स चुनी गईं; आर्मी चीफ आसिम मुनीर से मुलाकात के बाद प्रोडक्शन की तैयारी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बेटों एरिक और ट्रम्प जूनियर की हिस्सेदारी वाली पावरयूएस कंपनी पाकिस्तान में ड्रोन प्रोडक्शन यूनिट लगाने जा रही है। कंपनी ने आर्मी चीफ आसिम मुनीर के साथ मर्री में सीक्रेट मीटिंग की है। ड्रोन प्रोडक्शन के लिए हरीपुर, रावलपिंडी और तक्षशिला में तीन संभावित मिलिट्री साइट्स चुनी गई हैं। यहां आत्मघाती ड्रोन बनाए जाएंगे। प्रोडक्शन यूनिट की साइट फाइनल करने के लिए पाक टीम 15 अक्टूबर के बाद अमेरिका जाएगी। सूत्रों के अनुसार, करार की बाकी औपचारिकताएं भी पूरी की जाएंगी। 16 सितंबर को मुनीर और पावरयूएस के बीच ड्रोन आयात का एमओयू हुआ था। सूत्रों के मुताबिक, ड्रोन प्रोडक्शन में पाक आर्मी की इंडस्ट्रियल यूनिट भी शामिल होगी। पाकिस्तान आर्मी फिलहाल चीन और तुर्किये से ड्रोन सप्लाई ले रही है। तुर्किये ने भी पाकिस्तान में ड्रोन प्रोडक्शन का करार किया है। एक्सपर्ट बोले- भारत के लिए खतरा, 4 सवालों में समझिए कैसे पाकिस्तान स्थित भारतीय दूतावास में काम कर चुके डिफेंस एक्सपर्ट अविनाश मोहनानी के मुताबिक पाकिस्तान में बनने वाले ये ड्रोन भारत की अंदरूनी सुरक्षा के लिए चुनौती हो सकते हैं। 1. ड्रोन यूनिट से हमें क्या खतरा? पाक को अमेरिका से मिलने वाले कई हथियार आईएसआई से होकर आतंकियों के पास जाते हैं। कश्मीर में ऐसे कई केस हैं जब यूएस मेड हथियार आतंकियों के कब्जे से बरामद हुए हैं। ये ड्रोन हमारी अंदरूनी सुरक्षा को चुनौती होंगे। 2. पाक में प्रोडक्शन क्यों? पहले पाक को अमेरिका से ड्रोन आयात करने थे, लेकिन अब प्रोडक्शन इसलिए क्योंकि ट्रम्प के बेटों की कंपनी इन्हें पाक के जरिए एशिया और अफ्रीका के उन देशों को भी बेच सकेगी जिन्हें अमेरिका सीधे हथियार नहीं देता है। 3. चीन की पाक को मंजूरी क्यों? चीन का पाक में सीपैक के रूप में बड़ा निवेश है। सीपैक सबसे अहम है, पर इसका फायदा नहीं मिल रहा है। बलूचिस्तान-खैबर में चीन खनन नहीं कर पा रहा है। ऐसे में मुनीर के कहने पर चीन ने पाक को इस डील की मंजूरी दी। 4. क्या पाक का रोल बढ़ेगा? ट्रम्प के दौर में अमेरिका का पाक के साथ कई क्षेत्रों में करार बढ़ा है। ईरान युद्ध में भी अमेरिका ने पाक को मध्यस्थ का रोल दिया था। ट्रम्प परिवार का पाक के क्रिप्टो करंसी बिजनेस में हाथ है। अमेरिका पाक के रोल को और बढ़ाने वाला है।

पाकिस्तान में ट्रम्प के बेटों की कंपनी ड्रोन यूनिट लगाएगी:3 सैन्य साइट्स चुनी गईं; आर्मी चीफ आसिम मुनीर से मुलाकात के बाद प्रोडक्शन की तैयारी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बेटों एरिक ट्रम्प और डोनाल्ड ट्रम्प जूनियर से जुड़े पॉवरस कंपनी पाकिस्तान में ड्रोन प्रोडक्शन यूनिट लगाने जा रही है। कंपनी ने आर्मी चीफ आसिम मुनीर के साथ मर्री में सीक्रेट मीटिंग की है। ड्रोन प्रोडक्शन के लिए हरीपुर, रावलपिंडी और तक्षशिला में तीन संभावित मिलिट्री साइट्स चुनी गई हैं। यहां आत्मघाती ड्रोन बनाए जाएंगे। 16 सितंबर को मुनीर और पॉवरस के बीच ड्रोन आयात का एमओयू हुआ था। सूत्रों के मुताबिक, प्रोडक्शन में पाक आर्मी की इंडस्ट्रियल यूनिट भी शामिल होगी। यूनिट की साइट फाइनल करने के लिए पाक टीम 15 अक्टूबर के बाद अमेरिका जाएगी। इसके बाद करार की बाकी औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी। पाकिस्तान आर्मी फिलहाल चीन और तुर्किये से ड्रोन सप्लाई ले रही है। तुर्किये ने भी पाकिस्तान में ड्रोन प्रोडक्शन का करार किया है। ट्रम्प के बेटों की निवेश कंपनी की 9.9% हिस्सेदारी अलजजीरा के मुताबिक, ट्रम्प जूनियर और एरिक ट्रम्प पॉवरस कंपनी में अमेरिकन वेंचर्स के जरिए निवेशक हैं। अमेरिकी रेगुलेटरी फाइलिंग के अनुसार, पॉवरस के प्रस्तावित मर्जर के बाद अमेरिकन वेंचर्स की कंपनी में 9.9% बेनिफिशियल हिस्सेदारी होने की उम्मीद है। ट्रम्प जूनियर के प्रवक्ता के मुताबिक, वह सिर्फ पैसिव निवेशक हैं और कंपनी के कामकाज या कॉन्ट्रैक्ट में उनकी कोई भूमिका नहीं है। पाकिस्तान से पहले भारत से भी पॉवरस का करार पॉवरस का पाकिस्तान से पहले भारत में भी करार हुआ था। 30 जून की फाइलिंग में पारस डिफेंस एंड स्पेस टेक्नोलॉजीज ने बताया कि पॉवरस ने उसे भारत में गार्डियन-1 ड्रोन इंटरसेप्टर बनाने और बेचने का एक्सक्लूसिव लाइसेंस दिया है। यानी पॉवरस की ड्रोन तकनीक से भारत और पाकिस्तान दोनों जुड़े हैं। पाकिस्तान ने क्या समझौता किया है? पॉवरस के मुताबिक, पाकिस्तान के साथ हुआ एमओयू अंतिम समझौता नहीं है। इससे खरीदारी की बाध्यता नहीं बनती और यह अमेरिकी कानूनों और सरकार की मंजूरी के अधीन है। कंपनी ने पाकिस्तान में अपनी तकनीक बनाने के तरीकों पर काम करने की बात भी कही है। 16 सितंबर की बैठक में रक्षा खरीद, प्रोडक्शन और क्षमता बढ़ाने पर चर्चा हुई थी। एक्सपर्ट बोले- भारत के लिए खतरा, 4 सवालों में समझिए कैसे पाकिस्तान स्थित भारतीय दूतावास में काम कर चुके डिफेंस एक्सपर्ट अविनाश मोहनानी के मुताबिक पाकिस्तान में बनने वाले ये ड्रोन भारत की अंदरूनी सुरक्षा के लिए चुनौती हो सकते हैं। 1. ड्रोन यूनिट से हमें क्या खतरा? पाक को अमेरिका से मिलने वाले कई हथियार आईएसआई से होकर आतंकियों के पास जाते हैं। कश्मीर में ऐसे कई केस हैं जब यूएस मेड हथियार आतंकियों के कब्जे से बरामद हुए हैं। ये ड्रोन हमारी अंदरूनी सुरक्षा को चुनौती होंगे। 2. पाक में प्रोडक्शन क्यों? पहले पाक को अमेरिका से ड्रोन आयात करने थे, लेकिन अब प्रोडक्शन इसलिए क्योंकि ट्रम्प के बेटों की कंपनी इन्हें पाक के जरिए एशिया और अफ्रीका के उन देशों को भी बेच सकेगी जिन्हें अमेरिका सीधे हथियार नहीं देता है। 3. चीन की पाक को मंजूरी क्यों? चीन का पाक में सीपैक के रूप में बड़ा निवेश है। सीपैक सबसे अहम है, पर इसका फायदा नहीं मिल रहा है। बलूचिस्तान-खैबर में चीन खनन नहीं कर पा रहा है। ऐसे में मुनीर के कहने पर चीन ने पाक को इस डील की मंजूरी दी। 4. क्या पाक का रोल बढ़ेगा? ट्रम्प के दौर में अमेरिका का पाक के साथ कई क्षेत्रों में करार बढ़ा है। ईरान युद्ध में भी अमेरिका ने पाक को मध्यस्थ का रोल दिया था। ट्रम्प परिवार का पाक के क्रिप्टो करंसी बिजनेस में हाथ है। अमेरिका पाक के रोल को और बढ़ाने वाला है। ————————————- यह खबर भी पढ़ें… पाकिस्तानी PM की धमकी- पानी रोकना जंग जैसा:UN में शहबाज बोले- कश्मीर गले की नस; भारत का जवाब- अवैध कब्जे वाले कश्मीर की हालत देखें पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने UN में भारत को जंग की धमकी दी। उन्होंने कहा कि भारत सिंधु नदी का पानी न रोके। पानी रोकने की कोशिश को पाकिस्तान युद्ध की कार्रवाई मानेगा। शहबाज शरीफ ने UN में कश्मीर का मुद्दा भी उठाया। शहबाज ने कहा कि कश्मीर हमारे लिए गर्दन की नस है। पूरी खबर पढ़ें…

क्या पाकिस्तान ने चुपके से किया खतरनाक मिसाइल टेस्ट? बलूचिस्तान में दिखा ऐसा नजारा की दहल गए लोग

Pakistan Missile Test over Balochistan: बुधवार रात पाकिस्तान के बलूचिस्तान के आसमान में एक रहस्यमयी रोशनी के साथ धुएं की लंबी लकीर देखी गई। इसके बाद से ही यह अटकलें तेज हो गई हैं कि पाकिस्तानी सेना ने बलूचिस्तान के आसमान में किसी सीक्रेट मिसाइल का परीक्षण किया है।

यह नजारा बुधवार रात करीब 8 बजे बलूचिस्तान के नुश्की और खारान जैसे इलाकों में देखा गया। देखते ही देखते स्थानीय लोगों ने इसके फोटो और वीडियो बना लिए, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। इस घटना के बाद से ही बलूचिस्तान के इलाकों में हड़कंप मच गया है।

पाकिस्तानी अधिकारियों या सेना (ISPR) की तरफ से अभी तक इस पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं आई है, लेकिन रक्षा विशेषज्ञों और रक्षा विश्लेषकों के बीच इसे लेकर बहस छिड़ गई है।

हाइपरसोनिक और लॉन्ग-रेंज मिसाइल की टेस्टिंग कर रहा पाक?

आसमान में बने विजुअल्स और उसके उड़ने के तरीके को देखकर कुछ रक्षा जानकारों का मानना है कि यह किसी हाई-अल्टीट्यूड बैलिस्टिक मिसाइल का टेस्ट हो सकता है।

वायरल वीडियो में दिख रहे पैटर्न को देखकर दावा किया जा रहा है कि यह मिसाइल का री-एंट्री फेज यानी जब मिसाइल अंतरिक्ष से वापस वायुमंडल में प्रवेश करती है उसके जैसा लग रहा है।

आसमान में बनी विशेष आकृतियों को कुछ ऑनलाइन रिपोर्ट्स में ‘हाइपरसोनिक बैलिस्टिक क्लाउड्स’ कहा जा रहा है, जो आवाज की रफ्तार से 5 गुना तेज उड़ने वाली मिसाइलों के परीक्षण के दौरान बनते हैं। हालांकि, इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

हाल के दिनों में पाकिस्तान ने कौन-कौन से टेस्ट किए हैं?

यह अटकलें ऐसे समय में सामने आई हैं जब पाकिस्तान लगातार अपनी मिसाइल क्षमताओं का परीक्षण कर रहा है:

28 अप्रैल: पाकिस्तानी सेना के ‘रॉकेट फोर्स कमांड’ ने स्वदेशी रूप से विकसित फतेह-II मिसाइल सिस्टम का ट्रेनिंग लॉन्च किया था।

14 मई: पाकिस्तान ने अपनी क्रूज मिसाइल फतेह-4 का सफल परीक्षण किया था, जो एडवांस्ड एवियोनिक्स और लॉन्ग-रेंज टार्गेटिंग क्षमता से लैस है।

पिछले साल भी बलूचिस्तान में दिखा था ऐसा ही रहस्यमयी नजारा

बलूचिस्तान में इस तरह के आकाशीय नजारे को लेकर सीक्रेट मिसाइल टेस्ट की चर्चा पहली बार नहीं हुई है। पिछले साल अक्टूबर में भी क्वेटा और बलूचिस्तान के आसमान में ऐसी ही अजीबोगरीब रोशनी और धुएं का गुबार दिखा था, जिसे लेकर हाइपरसोनिक मिसाइल टेस्ट का दावा किया गया था। उस समय पाकिस्तान मौसम विज्ञान विभाग ने इसे एक दुर्लभ प्राकृतिक घटना बताते हुए ‘लेंटिकुलर क्लाउड’ करार दिया था।

जब उस समय पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ से मीडिया ने पूछा था कि क्या यह हाइपरसोनिक मिसाइल टेस्ट था, तो उन्होंने सीधे जवाब देने से इनकार कर दिया था। एक टीवी इंटरव्यू में उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा था, ‘अब ऐसे सवाल मत पूछिए, ये सब बातें प्राइवेट में पूछा कीजिए।’ रक्षा मंत्री के इस बयान ने संदेह को और गहरा कर दिया था।

बलूचिस्तान में जारी है भयंकर तनाव

एक तरफ जहां मिसाइल टेस्ट की चर्चा गर्म है, वहीं दूसरी तरफ बलूचिस्तान में स्थानीय बलूच समुदाय पर पाकिस्तानी सेना के जुल्म और सैन्य अभियानों को लेकर तनाव बढ़ता जा रहा है। हाल ही में बलूच नागरिक अधिकार कार्यकर्ता गुलजादी बलूच को पाकिस्तानी अदालत द्वारा आजीवन कारावास की सजा सुनाए जाने के बाद ‘बलूच यकजेहती कमेटी’ (BYC) और अन्य संगठनों का विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है।

ईरान के लिए ‘सीक्रेट हथियार’ बना रहा चीन! रिपोर्ट में हुए खुलासे से अमेरिका में हड़कंप

पाकिस्तान ने 2 हजार पूर्व अफगान सैनिक भर्ती किए:इनमें से कई तालिबान के खिलाफ लड़ चुके, अब बलूच विद्रोहियों से लड़ेंगें

बलूचिस्तान में बलूच विद्रोहियों के बढ़ते हमलों से पाकिस्तान की सेना और सुरक्षा बल पर दबाव बढ़ रहा है। इनसे निपटने के लिए पाकिस्तान ने 2,000 पूर्व अफगान सैनिकों और पुलिसकर्मियों भर्ती किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, इनमें ज्यादातर वे अफगान सैनिक हैं, जिन्होंने अफगानिस्तान में अमेरिकी सेना के साथ तालिबान के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी। एक पूर्व अफगान सैनिक के मुताबिक, भर्ती हुए लोगों को हर महीने 40 हजार पाकिस्तानी रुपए, यानी करीब 13,807 भारतीय रुपए मिलते हैं। बलूचिस्तान में 2 महीने में 172 हमले, 68 सुरक्षाकर्मी मारे गए बलूचिस्तान में सुरक्षा ऑपरेशन चलाए जाने के बावजूद विद्रोही थानों, सरकारी दफ्तरों और हाईवे को निशाना बना रहे हैं। पाकिस्तान की सुरक्षा और हिंसा से जुड़े मामलों पर रिसर्च करने वाली संस्था PICSS के मुताबिक, दो महीने में बलूचिस्तान में 172 हमले हुए। अकेले जुलाई में विद्रोही हमलों और सुरक्षा ऑपरेशन के दौरान 62 सुरक्षाकर्मी मारे गए। हालात का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि नौश्की शहर में विद्रोहियों से नियंत्रण वापस लेने के लिए पाकिस्तानी सेना को हेलिकॉप्टर और ड्रोन का इस्तेमाल करना पड़ा। तालिबान की वापसी के बाद नौकरी गई, आर्थिक तंगी ने भर्ती को मजबूर किया पाकिस्तान को इन सैनिकों से क्या फायदा? इन पूर्व अफगान सैनिकों को हथियार चलाने और लड़ाई का पहले से अनुभव है। वे तालिबान के खिलाफ लड़ चुके हैं और सीमावर्ती इलाकों में काम कर चुके हैं। इसलिए उन्हें सुरक्षा से जुड़े काम समझाने में ज्यादा समय नहीं लगेगा। पाकिस्तान के लिए इसका एक फायदा यह भी है कि इन लोगों को पहले से सैन्य ट्रेनिंग मिली हुई है। ऐसे में नए सिरे से उन्हें बेसिक ट्रेनिंग देने की जरूरत कम पड़ सकती है। बलूचिस्तान के 27 जिलों में विद्रोही संगठनों की गतिविधियां पाक इंस्टीट्यूट फॉर पीस स्टडीज की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल बलूचिस्तान में 254 हमले हुए। इनमें बलूच विद्रोही संगठनों से जुड़े 225 हमले 27 जिलों में दर्ज किए गए। केच में 30 और क्वेटा में 26 हमले हुए। वहीं, टीटीपी से जुड़े 28 हमले दर्ज किए गए। इनकी ज्यादा गतिविधियां उत्तरी पश्तून बहुल इलाकों में हुईं। बलूच संगठन स्वायत्तता या आजादी की मांग करते हैं, जबकि टीटीपी इस्लामी शासन लागू करना चाहता है। बलूचिस्तान में दो महीने में 450 से ज्यादा मौतें कई शहरों में पुलिस की पकड़ कमजोर लगातार हो रहे हमलों के कारण बलूचिस्तान के कई जिलों में पुलिस की पकड़ कमजोर हुई है। इससे कानून-व्यवस्था संभालने में भी मुश्किल आ रही है। प्रशासन को रोजमर्रा के पुलिस कामों के लिए भी अर्धसैनिक बलों और सेना की मदद लेनी पड़ रही है। कई इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था के लिए सैन्य बलों पर निर्भरता बढ़ गई है। ————————- ये खबर भी पढ़ें…. पाकिस्तान के खैबर-पख्तूनख्वा में PTI के मंत्री को किडनैप किया: एक और मंत्री पर फायरिंग पाकिस्तान के खैबर-पख्तूनख्वा में PTI के प्रांतीय मंत्री फजल शकूर खान को कथित तौर पर किडनैप कर लिया गया। पूरी खबर पढ़ें…