पाकिस्तान के खैबर-पख्तूनख्वा में इमरान की पार्टी की सरकार बर्खास्त:इमरजेंसी लगी; पूर्व पीएम की रिहाई के लिए राज्य के CM मार्च निकाल रहे थे

पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार ने रविवार को खैबर-पख्तूनख्वा प्रांत में इमरजेंसी लगा दी और सरकार बर्खास्त कर दी। यहां इमरान खान की पार्टी PTI की सरकार है। खैबर-पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी पूर्व पीएम इमरान खान की रिहाई की मांग को लेकर समर्थकों के साथ इस्लामाबाद की ओर मार्च निकाल रहे थे। शहबाज सरकार का आरोप है कि इमरान खान की PTI सरकार प्रांत में आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में जानबूझकर सहयोग नहीं कर रही है। पाक सरकार आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं करेगी। इमरान खान की पार्टी PTI ने फैसले का विरोध किया इमरजेंसी लगाने का फैसला प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की अध्यक्षता में हुई आपात कैबिनेट बैठक में लिया गया। बैठक में प्रांत की सुरक्षा स्थिति पर चर्चा हुई। सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 232 और 234 के तहत इमरजेंसी और गवर्नर शासन लागू करने का फैसला किया। हालांकि, पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी PTI ने इस कदम का विरोध किया है। पार्टी अध्यक्ष गौहर अली खान ने इसे अलोकतांत्रिक बताते हुए कहा कि प्रांत के अधिकार कमजोर करके शांति और स्थिरता नहीं लाई जा सकती। शहबाज ने अफगानिस्तान पर आतंकवाद पर लगाम न लगाने का आरोप लगाया शरीफ ने कैबिनेट बैठक में कहा कि PTI की अगुवाई वाली प्रांतीय सरकार को देश की अर्थव्यवस्था को अस्थिर करने की इजाजत नहीं दी जा सकती। उन्होंने खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में आम नागरिकों, पुलिसकर्मियों, सुरक्षाबलों और बच्चों की मौतों पर भी चिंता जताई। शहबाज ने यह भी कहा कि पाकिस्तान लगातार पड़ोसी अफगानिस्तान से आतंकवादी संगठनों पर लगाम लगाने की अपील करता रहा है, लेकिन उनकी शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा। PTI बोली- फैसले से हिंसा और बढ़ सकती है इमरान खान के करीबी सहयोगी और PTI प्रवक्ता जुल्फिकार बुखारी ने इस फैसले को ‘हास्यास्पद’ बताया। उन्होंने दावा किया कि खैबर पख्तूनख्वा पाकिस्तान की एकमात्र वैध रूप से चुनी गई सरकार है। बुखारी ने कहा कि इस फैसले से हिंसा, अस्थिरता और आम लोगों की परेशानी बढ़ सकती है। उन्होंने कहा कि बातचीत के जरिए विवाद सुलझाने का रास्ता अब भी खुला था। उनके मुताबिक, सरकार के इस कदम से लगता है कि वह बातचीत करना ही नहीं चाहती थी। इससे पहले इमरान खान के समर्थकों के प्रदर्शन कई बार हिंसक हो चुके हैं। 2024 में हुए प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षाकर्मियों और आम नागरिकों की भी मौत हुई थी। इमरजेंसी और गवर्नर शासन का क्या मतलब है? पाकिस्तान के संविधान के अनुच्छेद 232 के तहत युद्ध, दूसरे देश के हमले या देश के अंदर बिगड़े ऐसे हालात में इमरजेंसी लगाई जा सकती है, जिन्हें प्रांतीय सरकार संभाल न पा रही हो। इमरजेंसी लगने पर केंद्र सरकार को प्रांत के मामलों में दखल देने और कुछ मुद्दों पर कानून बनाने के ज्यादा अधिकार मिल जाते हैं। वहीं, अनुच्छेद 234 के तहत जब किसी प्रांत की सरकार संविधान के मुताबिक काम नहीं कर पाती, तो वहां गवर्नर शासन लगाया जा सकता है। इसके लिए राष्ट्रपति के फैसले को संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक से मंजूरी लेनी होती है। मंजूरी नहीं मिलने पर गवर्नर शासन दो महीने बाद खत्म हो जाता है। मंजूरी मिलने पर भी इसे एक बार में दो महीने के लिए ही बढ़ाया जा सकता है। यह व्यवस्था कुल छह महीने से ज्यादा नहीं चल सकती। पाकिस्तान सरकार ने इस फैसले में अनुच्छेद 233 का इस्तेमाल नहीं किया है। यह अनुच्छेद इमरजेंसी के दौरान नागरिकों के कुछ बुनियादी अधिकारों पर रोक लगाने से जुड़ा है। ————————- ये खबर भी पढ़ें… पाकिस्तान में 4 प्रांतों के 15 हिस्से करने की तैयारी:पंजाब-सिंध में नवाज और भुट्टो परिवार कमजोर होंगे पाकिस्तान के आर्मी चीफ असीम मुनीर देश के 4 प्रांतों को 12 से 15 हिस्सों में बांटकर सियासत का पूरा गणित बदलना चाहते हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें…

पाकिस्तान का नक्शा बदल अपनी ताकत बढ़ाना चाहते हैं मुनीर:4 प्रांतों को 15 हिस्सों में बांटने की तैयारी; पंजाब-सिंध की सियासी ताकत कमजोर होगी

पाकिस्तान के आर्मी चीफ असीम मुनीर देश के 4 प्रांतों को 12 से 15 हिस्सों में बांटकर सियासत का पूरा गणित बदलना चाहते हैं। ब्रिटिश मैगजीन ‘द इकोनॉमिस्ट’ की रिपोर्ट के मुताबिक, इस कदम से पंजाब और सिंध में मजबूत राजनीतिक पार्टियों का दबदबा टूट सकता है। अभी इन प्रांतों की सरकारें केंद्र को चुनौती देने की ताकत रखती हैं। छोटे प्रांत बनने पर यह ताकत बंट जाएगी और इस्लामाबाद का दखल बढ़ेगा। इससे पहले से मजबूत सेना को देश की राजनीति और सरकार पर अपनी पकड़ बढ़ाने का मौका मिल सकता है। पंजाब और सिंध की सियासी ताकत कम होगी पाकिस्तान का पंजाब प्रांत पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) का गढ़ है, जबकि सिंध में पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) का दबदबा है। दोनों पार्टियों की ताकत बड़े प्रांतों में उनकी मजबूत पकड़ से आती है। अगर इन प्रांतों को छोटे हिस्सों में बांटा जाता है, तो मौजूदा राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं। पार्टियों को अलग-अलग छोटे प्रांतों में अपनी ताकत साबित करनी होगी। इससे बड़े नेताओं का प्रभाव घट सकता है और केंद्र सरकार को प्रांतीय राजनीति में दखल देने का ज्यादा मौका मिल सकता है। प्रांत को छोटे करने के पीछे दलील क्या है ‘द इकोनॉमिस्ट’ के मुताबिक, मुनीर का मानना है कि पाकिस्तान के प्रांत इतने बड़े हैं कि वहां प्रशासन ठीक से नहीं चल पा रहा। पंजाब में करीब 12.8 करोड़ लोग रहते हैं, जबकि क्षेत्रफल के लिहाज से सबसे बड़ा बलूचिस्तान है, जहां करीब डेढ़ करोड़ की आबादी है। बड़े इलाकों में लोगों तक सरकारी सुविधाएं पहुंचाना मुश्किल होता है। ग्रामीण पंजाब में लोगों को बुनियादी सेवाओं के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। बलूचिस्तान में भी दूर-दराज के इलाकों तक सुविधाएं पहुंचाना चुनौती है। लेकिन पाकिस्तान की बदहाल अर्थव्यवस्था, महंगाई और कर्ज की समस्या सिर्फ प्रांतों के बड़े आकार से पैदा नहीं हुई। ऐसे में सवाल है कि प्रांतों को बांटने से आम लोगों की जिंदगी कितनी बदलेगी और सत्ता का फायदा किसे मिलेगा। पाकिस्तान में सेना पहले से ताकतवर पाकिस्तान में सेना कई बार सीधे सत्ता संभाल चुकी है। आज भी राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति जैसे बड़े मामलों में उसका खासा प्रभाव है। सेना के पास जमीन, कारोबार और बड़े संसाधन भी हैं। ऐसे में प्रांतों को बांटने से अगर मौजूदा राजनीतिक ताकत कमजोर होती है, तो सेना और केंद्र सरकार का दबदबा बढ़ सकता है। बड़े प्रांतों के मजबूत नेताओं के बजाय केंद्र को कई छोटी सरकारों से निपटना होगा। इससे प्रांतीय नेतृत्व की सामूहिक ताकत कम हो सकती है। 15 छोटे प्रांत बनाने या जिलों को ज्यादा ताकत देने पर विचार पाकिस्तान में दो रास्तों पर चर्चा है। पहला, 4 प्रांतों को बांटकर 12 से 15 नए प्रांत बनाना। दूसरा, करीब 160 जिलों को ज्यादा अधिकार देना, ताकि लोगों के काम के लिए उन्हें दूर न जाना पड़े। योजना मंत्री अहसान इकबाल इन दोनों विकल्पों का जिक्र कर चुके हैं।
नए प्रांत बनाने के लिए संविधान बदलना होगा। वहीं, जिलों को ज्यादा अधिकार देने से मौजूदा प्रांतों को बांटे बिना लोगों को सरकारी सुविधाएं आसानी से मिल सकती हैं। कौन-कौन से नए प्रांत बन सकते हैं? पाकिस्तान सरकार की तरफ से अभी आधिकारिक नक्शा जारी नहीं किया गया है, लेकिन जिन इलाकों की चर्चा है, वे कुछ इस तरह हैं- पंजाब: उत्तर पंजाब, मध्य पंजाब, दक्षिण पंजाब सिंध: कराची सिंध, मध्य सिंध, ऊपरला सिंध KP: उत्तरी KP, दक्षिणी KP, आदिवासी KP/फाटा रीजन बलूचिस्तान: पूर्व बलूचिस्तान, पश्चिम बलूचिस्तान, दक्षिणी बलूचिस्तान सिंध में पहले से प्रस्ताव का विरोध हो रहा सिंध विधानसभा ने 3 सितंबर को प्रस्ताव पास कर प्रांत को बांटने और उसके किसी हिस्से को केंद्र के अधीन करने का विरोध किया था। पाकिस्तान के संविधान के मुताबिक, किसी प्रांत की सीमा बदलने के लिए उसकी विधानसभा के कम से कम दो-तिहाई सदस्यों की मंजूरी जरूरी है। संसद की मंजूरी भी लेनी होगी। सिंध में कराची है, जो पाकिस्तान का प्रमुख कारोबारी केंद्र है। यहां सीमा बदलने से राजनीतिक प्रतिनिधित्व और संसाधनों के बंटवारे को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो सकता है। नक्शा बदलेगा तो सत्ता का गणित भी बदलेगा प्रांत छोटे होने से प्रशासन लोगों के करीब पहुंच सकता है, लेकिन असली सवाल यह है कि नई इकाइयों को कितने अधिकार मिलेंगे। अगर पैसा और फैसले लेने की ताकत केंद्र के पास ही रही, तो छोटे प्रांत सिर्फ नाम के लिए अलग होंगे। इस पूरी कवायद का सबसे बड़ा राजनीतिक असर पंजाब और सिंध की मौजूदा ताकत पर पड़ सकता है। बड़े प्रांतों की सियासी पकड़ कमजोर होने से केंद्र और सेना को फायदा मिल सकता है। ————————– ये खबर भी पढ़ें… पाकिस्तान में आटे के संकट से जूझ रहे लोग:20 किलो आटे का बैग 3300 रुपए पहुंचा, रोटी 20 से बढ़कर 30 रुपए हुई पाकिस्तान के पेशावर में आटे की कीमत तेजी से बढ़ने से लोग परेशान हैं। 20 किलो मोटे आटे का बैग 3,300 पाकिस्तानी रुपए तक पहुंच गया है। आटे की कीमत बढ़ने का असर तंदूरों पर भी पड़ा है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

तालिबानी ड्रोन अटैक से कंगाल पाकिस्तान बेहाल! मुनीर ने बॉर्डर चेकपोस्टों पर बंधवाई मछली पकड़ने की जाली

Pakistan Army Fishing Nets Drones: अफगानिस्तान सीमा से सटे पाकिस्तान के अशांत इलाके खैबर पख्तूनख्वा में पाकिस्तानी सुरक्षा बल खौफनाक संकट से जूझ रहे हैं। आतंकवादी संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) लगातार कमर्शियल ड्रोन का इस्तेमाल कर पाकिस्तानी सेना और पुलिस चेकपोस्टों को निशाना बना रहा है।

इस बढ़ते ड्रोन खतरे से अपने जवानों की जान बचाने के लिए पाकिस्तान के थल सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर के नेतृत्व में सेना और पुलिस ने एक अनोखा ‘जुगाड़’ निकाला है। सैन्य पोस्टों और बैरकों के ऊपर मछली पकड़ने वाली जालियां टांग दी गई है।

हंगू हमले के बाद लिया गया अजीबोगरीब फैसला

अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, यह कदम 16 अप्रैल को हंगू जिले में हुए एक जानलेवा ड्रोन हमले के बाद उठाया गया। अफगान सीमा से महज 30 किलोमीटर दूर सरकी पियाला पुलिस चेकपोस्ट पर TTP के ड्रोन ने हमला कर दिया था, जिसके तुरंत बाद आतंकवादियों ने अंधाधुंध गोलीबारी की। इस हमले में एक व्यक्ति की मौत हो गई और दर्जनों जवान घायल हो गए थे।

हंगू जिला अकेले इस साल 16 ड्रोन हमलों का सामना कर चुका है। ड्रोन के खौफ से अब सैनिक और पुलिसकर्मी अपनी बैरकों से बाहर निकलने से भी कतरा रहे हैं। करोड़ों डॉलर के महंगे एंटी-ड्रोन सिस्टम और रडार खरीदने में वित्तीय तंगी से जूझ रहा पाकिस्तान अब बेहद सस्ते विकल्पों पर निर्भर है।

अल जजीरा के अनुसार, पूरे चेकपोस्ट को मछली पकड़ने वाली जाली से ढकने का खर्च मात्र $1,400 (लगभग 1.17 लाख रुपये) आता है। वहीं, एक आधुनिक एंटी-ड्रोन सिस्टम की कीमत $5,000 से लेकर $5 मिलियन (40 करोड़ रुपये से अधिक) तक होती है।

कहां-कहां लगी जालियां?

कोहाट, करक, बन्नू, लक्की मरवत और डेरा इस्माइल खान जैसे संवेदनशील सीमावर्ती इलाकों में सेना और पुलिस की चौकियों पर छत और दीवारों के बीच जालियां तान दी गई हैं।

कैसे काम करता है ‘जाल वाला सुरक्षा चक्र’?

पाकिस्तानी अधिकारियों का मानना है कि अगर कोई ड्रोन चेकपोस्ट की तरफ उड़ता हुआ आता है, तो उसके पंखे जाली में उलझ सकते हैं, जिससे ड्रोन रुक जाएगा या दूर ही डिफ्यूज हो जाएगा।

एक पुलिस अधिकारी फैयाज खान ने अल जजीरा को बताया, ‘अगर ड्रोन जाली में नहीं भी फंसता और ऊपर ही ब्लास्ट हो जाता है, तब भी नुकसान कम होगा। विस्फोट का मलबा और छर्रे सीधे जवानों पर गिरने के बजाय हवा में ही बिखर जाएंगे।’ वैसे, उन्होंने खुद स्वीकार किया कि यह सिस्टम 100% सुरक्षा की गारंटी नहीं देता है।

रक्षा विशेषज्ञों ने बताया लाचारी और ‘बचकाना कदम’

सैन्य विशेषज्ञों ने असीम मुनीर के इस कदम की आलोचना की है। सेंटर फॉर रिसर्च एंड सिक्योरिटी स्टडीज के इम्तियाज गुल ने अल जजीरा से कहा, ‘मछली पकड़ने वाली जाली लगाना एक बचकाना और सस्ता पैंतरा है। पुलिस स्टेशन ही हमेशा एकमात्र टारगेट नहीं होते। TTP के ड्रोन का मकसद बड़े इलाकों को निशाना बनाकर सनसनी फैलाना है। पाकिस्तान को ड्रोन को लॉन्च होते ही इंटरसेप्ट करने की तकनीक चाहिए, न कि जाल बिछाने की।’

TTP का बढ़ता ‘ड्रोन दस्ता’ और चीनी-तुर्की तकनीकों की नाकामी

TTP ने दिसंबर 2025 में मौलवी सलीम हक्कानी के नेतृत्व में एक विशेष ‘ड्रोन यूनिट’ बनाई थी। यह गुट बाजार में मिलने वाले सामान्य क्वाडकोप्टर में संशोधन कर बम और आईईडी (IED) जोड़कर हमले कर रहा है। रिसर्च के मुताबिक, TTP इन ड्रोन की फ्लाइंग टाइमिंग और रेंज बढ़ाने के लिए होंडा मोटरसाइकिल की बैटरियों का इस्तेमाल कर रहा है।

पाकिस्तानी मीडिया ‘डॉन’ के मुताबिक, 2026 की पहली छमाही में ही 100 से अधिक ड्रोन हमलों में लगभग 30 पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मी मारे जा चुके हैं और 90 से अधिक घायल हुए हैं।

पाकिस्तान पहले से ही चीन और तुर्की से मिले एंटी-ड्रोन सिस्टम का इस्तेमाल कर रहा है, लेकिन पहाड़ी इलाकों और TTP के कम ऊंचाई वाले ड्रोन के सामने ये सिस्टम बेअसर साबित हो रहे हैं। यही वजह है कि असीम मुनीर की सेना को अब केवल मछली पकड़ने वाली जालियों का ही सहारा नजर आ रहा है।

सऊदी अरब में तैनात होंगी पाकिस्तान-तुर्किये की फौज:हूती विद्रोहियों के खिलाफ साथ आए तीनों देश; पिछले महीने पाकिस्तान ने मदद से इनकार किया था

पाकिस्तान और तुर्किये अपनी सेना जल्द सऊदी अरब में तैनात करेगी। यह फैसला सोमवार को रियाद में मक्का गठबंधन की आपात बैठक में हुआ। हूती विद्रोहियों से जुड़े हमलों के बाद सुरक्षा खतरों को देखते हुए तीनों देश साथ आ गए हैं। हूतियों ने यमन के लाल सागर तट और बाब अल-मंदेब स्ट्रेट के बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया है। यह इलाका सऊदी अरब के बेहद करीब है। इससे सऊदी की सुरक्षा और व्यापार पर संकट बढ़ गया है। हालांकि, इससे पहले पाकिस्तान ने सितंबर में सऊदी को सैन्य मदद देने से इनकार कर दिया था। यरुशलम पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी ने हूती हमले के बाद सबसे पहले पाकिस्तान से मदद मांगी थी। लेकिन पाकिस्तान ने कहा कि उसकी सेना किसी दूसरे देश की जमीन पर युद्ध में शामिल नहीं होगी। हूती विद्रोहियों ने लाल-सागर में दो और द्वीपों पर कब्जा किया यमन के हूती विद्रोहियों ने दक्षिणी लाल सागर में दो और अहम द्वीपों पर कब्जा कर लिया है। यमन सरकार के मुताबिक हूतियों ने ग्रेटर हनीश और लेसर हनीश द्वीपों पर अपने लड़ाके तैनात किए हैं। ये द्वीप बाब अल-मंदेब स्ट्रेट से करीब 160 किमी उत्तर में हैं। इससे पहले पिछले हफ्ते हूतियों ने लाल सागर के किनारे बसे बंदरगाह शहर मोखा और बाब अल-मंदेब में मौजूद मायून द्वीप पर भी कब्जा किया था। इन दोनों जगहों पर सऊदी अरब के समर्थन वाली यमनी सरकारी सेना का नियंत्रण था। हूतियों के इन द्वीपों पर कब्जे से लाल सागर के समुद्री रास्ते पर उनका दबदबा और मजबूत हो गया है। बाब अल-मंदेब एशिया से यूरोप जाने वाले जहाजों के लिए शॉर्टकट रास्ता है। यहां से गुजरने के बाद जहाज स्वेज नहर के रास्ते भूमध्य सागर तक पहुंचते हैं। सऊदी अरब जल्द हूतियों पर हमला कर सकता है सऊदी अरब यमन में हूती विद्रोहियों के खिलाफ जंग शुरू करने की तैयारी कर रहा है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी 1 लाख से ज्यादा सैनिकों को यमन में उतार सकता है। इसका मकसद बाब अल-मंदेब स्ट्रेट को हूतियों के कब्जे से छुड़ाना और समुद्री व्यापार का रास्ता सुरक्षित करना है। रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब के सामने सैन्य कार्रवाई के दो विकल्प हैं – इस ऑपरेशन का नेतृत्व यमन की सेनाएं करेंगी, जिन्हें सऊदी अरब का समर्थन मिलेगा। जरूरत पड़ने पर सऊदी अरब हवाई हमले भी कर सकता है। मक्का पैक्ट लागू- एक पर हमला तीनों पर माना जाएगा रियाद में सोमवार को हुई बैठक में मक्का रक्षा समझौता औपचारिक रूप से लागू हो गया है। इस समझौते के तहत एक देश पर हमला तीनों पर माना जाएगा। इस बैठक में तीनों देशों के वरिष्ठ रक्षा और सैन्य अधिकारी शामिल हुए। तुर्किये की ओर से विदेश मंत्री हाकान फिदान, रक्षा मंत्री याशार ग्यूलर शामिल हुए। सऊदी अरब की ओर से विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान अल सऊद, रक्षा मंत्री प्रिंस खालिद बिन सलमान शामिल हुए। पाकिस्तान का प्रतिनिधित्व उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री मोहम्मद इशाक डार ने किया। उनके साथ चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ फील्ड मार्शल असीम मुनीर और रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ भी मौजूद रहे। पाकिस्तान के रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल नौमान महमूद भी बैठक में शामिल हुए। उन्हें मक्का रक्षा पैक्ट का महासचिव नियुक्त किया गया है।

असीम मुनीर की अमेरिका के साथ सीक्रेट डील! पाक सेना खरीदेगी घातक ड्रोन, जानिए इस डील में क्या-क्या छिपा है

Pakistan News: अमेरिकी ड्रोन निर्माता कंपनी POWERUS और पाकिस्तान आर्मी के बीच हुए एक नए रक्षा समझौते ने पाकिस्तानी फील्ड मार्शल असीम मुनीर की सैन्य खरीद रणनीति को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। खासतौर पर इस बात पर चर्चा शुरु हो गई है कि भविष्य में इन बिना पायलट वाले सिस्टम (Unmanned Systems) का इस्तेमाल पाकिस्तान की पश्चिमी सीमा पर किस तरह किया जा सकता है। बुधवार 16 सितंबर को POWERUS के सह-संस्थापक रॉबर्ट ब्रेट वेलिकोविच के नेतृत्व में कंपनी के प्रतिनिधिमंडल ने रावलपिंडी स्थित जनरल हेडक्वार्टर (GHQ) में पाकिस्तान के चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ और चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज फील्ड मार्शल असीम मुनीर से मुलाकात की।

पाकिस्तानी सेना के मुताबिक, बैठक में उभरती रक्षा तकनीक, सैन्य खरीद, उत्पादन और लंबी अवधि में क्षमता निर्माण जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। हालांकि, इसी बीच न्यूज एजेंसी Reuters की एक रिपोर्ट ने इस मुलाकात को और महत्वपूर्ण बना दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, POWERUS ने पाकिस्तान आर्मी के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) किया है। इसमें अनमैन्ड एरियल सिस्टम (UAS) से जुड़ा एक शुरुआती ऑर्डर भी शामिल है। हालांकि, इस ऑर्डर की कीमत और सिस्टम की पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।

क्या है POWERUS की सीक्रेट डील?

Reuters के मुताबिक, POWERUS के सह-संस्थापक ब्रेट वेलिकोविच ने पाकिस्तान आर्मी असीम मुनीर के साथ MoU और शुरुआती ऑर्डर की पुष्टि की है। हालांकि, उन्होंने ऑर्डर की कीमत या इसमें शामिल ड्रोन सिस्टम के बारे में जानकारी देने से इनकार किया। इसकी वजह सुरक्षा संबंधी संवेदनशीलता और गोपनीयता बताई गई।

दिलचस्प बात यह है कि पाकिस्तान सेना की ओर से GHQ बैठक के बाद जारी आधिकारिक बयान में इस MoU या शुरुआती ऑर्डर का उल्लेख नहीं किया गया। सेना ने केवल इतना कहा कि दोनों पक्षों ने रक्षा खरीद, उत्पादन और क्षमता निर्माण पर चर्चा की। असीम मुनीर ने बैठक में टेक्नोलॉजी इनोवेशन और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एडवांस टेक्नोलॉजी के महत्व पर जोर दिया।

क्या ईरान सीमा पर हो सकता है इस्तेमाल?

इस डील के बाद पाकिस्तान की ईरान से लगी सीमा को लेकर भी अटकलें सामने आई हैं। पाकिस्तान और ईरान के बीच करीब 909 किलोमीटर लंबी सीमा है। इसका बड़ा हिस्सा पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत से गुजरता है। यह इलाका सीमा पार आतंकवाद, तस्करी नेटवर्क और सुरक्षा चुनौतियों के कारण रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। ऐसे में हाइटेक ड्रोन या काउंटर-ड्रोन सिस्टम पाकिस्तान को निगरानी और सीमा पर स्थिति की जानकारी जुटाने में मदद कर सकते हैं।

CNN-News18 के अनुसार, खुफिया सूत्रों ने संभावना जताई है कि POWERUS की टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल भविष्य में ईरान सीमा के आसपास गतिविधियों की निगरानी के लिए किया जा सकता है। हालांकि, यह अभी यह सिर्फ दावा किया जा रहा है। पाकिस्तान सेना या POWERUS ने सार्वजनिक रूप से यह नहीं कहा है कि इस समझौते के तहत मिलने वाली तकनीक को ईरान सीमा या बलूचिस्तान में तैनात किया जाएगा। GHQ की आधिकारिक बैठक के विवरण में भी ईरान, बलूचिस्तान या पश्चिमी सीमा की निगरानी का कोई उल्लेख नहीं है। इसलिए POWERUS समझौते को सीधे ईरान की निगरानी की रणनीति से जोड़ना फिलहाल सार्वजनिक रूप से उपलब्ध तथ्यों से आगे की बात होगी।

POWERUS की $22.3 मिलियन वाली मिडिल ईस्ट डील क्या है?

पाकिस्तान के साथ समझौते से पहले POWERUS ने करीब 22.3 मिलियन डॉलर के एक अन्य डिफेंस डील की घोषणा की थी। इसके तहत कंपनी को मध्य पूर्व में महत्वपूर्ण तेल और गैस इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए नेटवर्क आधारित काउंटर-यूएएस (Counter-UAS) क्षमता उपलब्ध करानी है।

यह सिस्टम ड्रोन खतरों को डिटेक्ट, ट्रैक और क्लासिफाई करने के साथ-साथ कमांड-एंड-कंट्रोल सिस्टम के जरिए शुरुआती चेतावनी देने के लिए बनाया गया है। कंपनी ने यह भी संकेत दिया है कि भविष्य में इसमें इंटरसेप्टर तकनीक को जोड़ा जा सकता है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि इस 22.3 मिलियन डॉलर के मध्य-पूर्वी अनुबंध की तकनीक पाकिस्तान को दी जाएगी या नहीं।

अमेरिका-पाकिस्तान डिफेंस डील और चीन फैक्टर

POWERUS के साथ यह डील अमेरिका और पाकिस्तान के बीच रक्षा तकनीकी सहयोग के लिए एक नया रास्ता खोल सकता है। Reuters के अनुसार, कंपनी अमेरिका और पाकिस्तान के बीच संयुक्त ड्रोन तकनीक विकसित करने और पाकिस्तान में संभावित निर्माण की संभावनाएं भी तलाश रही है।

POWERUS के संस्थापक और CEO एंड्रयू फॉक्स ने पाकिस्तान के निजी रक्षा क्षेत्र को उभरता हुआ बताया है, हालांकि उनके मुताबिक यह क्षेत्र अभी पूरी तरह परिपक्व नहीं हुआ है। वेलिकोविच ने कहा कि कंपनी का लक्ष्य ऐसा संयुक्त तकनीकी संबंध विकसित करना है जिसमें अमेरिकी और पाकिस्तानी क्षमताओं को साथ लाया जा सके।

यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पाकिस्तान की सैन्य आपूर्ति में चीन की बड़ी भूमिका है। अमेरिकी रक्षा कंपनियों के साथ बढ़ता सहयोग पाकिस्तान को तकनीक के एक अतिरिक्त स्रोत तक पहुंच दे सकता है। साथ ही, संवेदनशील रक्षा तकनीक की खरीद में पारदर्शिता, संचालन संबंधी नियंत्रण और उससे जुड़ी शर्तों को लेकर भी सवाल उठ सकते हैं।

ट्रंप परिवार से जुड़ा नया कनेक्शन?

POWERUS के कॉरपोरेट ढांचे में भी जल्द बदलाव होने की उम्मीद है। कंपनी का Aureus Greenway Holdings के साथ विलय प्रस्तावित है। यह एक सार्वजनिक रूप से कारोबार करने वाली कंपनी है, जिसे एक ऐसे निवेश फंड का समर्थन प्राप्त है। इसका संबंध डोनाल्ड ट्रंप जूनियर और एरिक ट्रंप से जुड़ा बताया गया है। Reuters के अनुसार, दोनों कंपनियों को उम्मीद है कि यह विलय अक्टूबर की शुरुआत में पूरा हो जाएगा।

अब तक क्या पता है और क्या छिपा है?

POWERUS और पाकिस्तान आर्मी के बीच हुए समझौते से फिलहाल तीन बातें सामने आती हैं। पहली, दोनों पक्षों ने एक MoU पर हस्ताक्षर किए हैं। दूसरी, पाकिस्तान आर्मी ने अनमॅन्ड एरियल सिस्टिम्स से जुड़ा एक शुरुआती लेकिन अघोषित मूल्य वाला ऑर्डर दिया है। और तीसरी, दोनों पक्ष रक्षा खरीद, उत्पादन और क्षमता निर्माण में व्यापक सहयोग की संभावनाएं तलाश रहे हैं।

समझौते का उद्देश्य क्या है?

ईरान सीमा और बलूचिस्तान में संभावित इस्तेमाल की चर्चा इसलिए सामने आई है क्योंकि POWERUS काउंटर-ड्रोन तकनीक विकसित करती है। पाकिस्तान की पश्चिमी सीमा सुरक्षा के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्र है। लेकिन अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है कि POWERUS समझौते का उद्देश्य ईरान सीमा की निगरानी है।

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फिलहाल असीम मुनीर के नेतृत्व वाली पाकिस्तान आर्मी और POWERUS के बीच सहयोग का वास्तविक दायरा सार्वजनिक रूप से सीमित जानकारी तक ही सामने आया है। शुरुआती ड्रोन ऑर्डर की कीमत, सिस्टम की प्रकृति और संभावित ऑपरेशनल इस्तेमाल को लेकर जानकारी अभी गोपनीय रखी गई है।

लंदन में सीक्रेट मीटिंग, मुनीर का मैसेज और पाकिस्तान का नक्शा बदलने का प्लान! इस नए दांव से उड़े जरदारी-शहबाज के होश

Pakistan Political Crisis: पाकिस्तान की सियासत में एक बार फिर बड़ा भूचाल आने के संकेत मिल रहे हैं। राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी और गृह मंत्री मोहसिन नकवी के बीच लंदन में हुई 90 मिनट की एक सीक्रेट बैठक ने इस्लामाबाद से लेकर लाहौर तक राजनीतिक हलचल तेज कर दी है।

CNN-News18 के सूत्रों के हवाले से आई खबर के मुताबिक, गृह मंत्री मोहसिन नकवी फील्ड मार्शल आसिम मुनीर का एक बेहद ‘सीक्रेट मैसेज’ लेकर लंदन में जरदारी के पास पहुंचे थे। इस बैठक का मुख्य एजेंडा पाकिस्तान के प्रशासनिक नक्शे को बदलना यानी नए प्रांत और प्रशासनिक इकाइयां बनाना था।

आइए आपको बताते हैं कि लंदन की इस बैठक का क्या मतलब है, पाक सेना नया नक्शा क्यों बनाना चाहती है और इसमें नवाज शरीफ की एंट्री कैसे हुई है।

असीम मुनीर का मैसेज और जरदारी की चाल

जानकारी के मुताबिक, पाक आर्मी देश में नए प्रांत बनाने के प्रस्ताव पर तेजी से काम आगे बढ़ाना चाहती है और इसके लिए राष्ट्रपति जरदारी पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, राष्ट्रपति जरदारी नए प्रांत बनाने के पूरी तरह खिलाफ नहीं हैं, लेकिन वे इसे बेहद धीमी और चरणबद्ध प्रक्रिया के तहत लागू करना चाहते हैं।

जरदारी का सुझाव है कि नए प्रांतों के गठन की शुरुआत पंजाब और खैबर पख्तूनख्वा (KPK) से की जानी चाहिए, क्योंकि इन दोनों राज्यों की प्रांतीय असेंबलियों में नए प्रांत बनाने को लेकर पहले ही प्रस्ताव पारित हो चुके हैं।

PPP के लिए सिंध क्यों बना है सबसे बड़ा रोड़ा?

आसिफ अली जरदारी अपने राजनीतिक गढ़ सिंध के किसी भी तरह के बंटवारे के सख्त खिलाफ हैं। सिंध प्रांत पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) की सत्ता का मुख्य आधार है। जरदारी को डर है कि सिंध को बांटने का कोई भी कदम उठाने पर वहां के राष्ट्रवादी गुट उग्र विरोध प्रदर्शन शुरू कर सकते हैं, जिससे पीपीपी का सियासी वर्चस्व खत्म हो जाएगा।

वहीं बलूचिस्तान में पहले से जारी उग्रवाद और नाजुक सुरक्षा स्थितियों के कारण भी जरदारी वहां फिलहाल कोई नया प्रशासनिक प्रयोग करने से बच रहे हैं।

सीधा बंटवारा नहीं, तो क्या है अल्टरनेटिव प्लान?

संविधान में तुरंत संशोधन करके नक्शा बदलने के बजाय एक बीच का रास्ता भी तलाशा जा रहा है:

नई प्रशासनिक इकाइयां बनाना: पहले चरण में प्रांतों को विभाजित करने के बजाय नई प्रशासनिक इकाइयां बनाई जाएं और स्थानीय निकायों को मजबूत किया जाए।

संवैधानिक संशोधन: इसके बाद संविधान के अनुच्छेद 140 और अनुच्छेद 160 में संशोधन पर विचार किया जा सकता है।

अनुच्छेद 140: स्थानीय सरकारों के ढांचे से संबंधित है।

अनुच्छेद 160: राष्ट्रीय वित्त आयोग (NFC) और केंद्र-राज्यों के बीच वित्तीय संसाधनों के बंटवारे का फैसला करता है।

नवाज शरीफ की एंट्री और रायविंड में बड़ी बैठक

सैन्य प्रतिष्ठान के बढ़ते दबाव के बीच राष्ट्रपति जरदारी ने पीएमएल-एन (PML-N) के सुप्रीम नेता नवाज शरीफ से संपर्क साधा है। CNN-News18 के सूत्रों के अनुसार, हाल ही में लाहौर के रायविंड में नवाज शरीफ की अध्यक्षता में एक हाई-लेवल मीटिंग हुई, जिसमें प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज मौजूद थीं। बैठक में तय हुआ कि नए प्रांतों के इस संवेदनशील मुद्दे पर पहला स्टैंड पीपीपी लेगी, जिसके बाद ही PML-N अपना अगला कदम तय करेगी।

पाक सेना क्यों बदलना चाहती है देश का नक्शा?

सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तानी सेना/सैन्य प्रतिष्ठान छोटे प्रांत या प्रशासनिक इकाइयां बनाकर PML-N (पंजाब में मजबूत) और PPP (सिंध में मजबूत) के पारंपरिक राजनीतिक वर्चस्व को कमजोर करना चाहती है।

अगर पंजाब और सिंध जैसे बड़े सूबों को बांटा जाता है, तो सत्ता के नए केंद्र बनेंगे और पुरानी स्थापित राजनीतिक पार्टियों की पकड़ ढीली पड़ जाएगी। यही वजह है कि यह कोई सामान्य प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि पाकिस्तान का राजनीतिक समीकरण बदलने वाला खेल है।

इमरान के बेटे का दावा-पाकिस्तान तानाशाही की ओर बढ़ रहा:पिता के साथ जेल में बुरे बर्ताव का आरोप लगाया, कहा- सेना का इसमें बड़ा रोल

पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के बेटे सुलैमान ईसा खान ने दावा किया है कि पाकिस्तान तानाशाही की तरफ बढ़ रहा है। उन्होंने अपने पिता के लंबे समय से जेल में होने को इसका उदाहरण बताया। न्यूज एजेंसी ANI के साथ वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस में सुलैमान ने कहा कि पिछले कई साल से उनके पिता के साथ अमानवीय व्यवहार किया जा रहा है और इसमें सेना की बड़ी भूमिका है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में इमरान खान की स्वास्थ्य स्थिति को लेकर चर्चा की गई। सुलैमान के साथ उनके भाई कासिम खान, अंतरराष्ट्रीय वकील जेरेड जेनसर और अंतरराष्ट्रीय मामलों तथा मीडिया के सलाहकार सैयद बुखारी भी शामिल हुए। इमरान के बेटे बोले- पिता से नहीं मिल पा रहे इमरान के बेटों ने कहा कि वे जेल में बंद अपने पिता से मिलने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उनकी कोशिशें लगातार नाकाम हो रही हैं। उनका कहना है कि पाकिस्तानी अधिकारियों ने उनके वीजा आवेदन को बार-बार टाला या खारिज किया है। कासिम खान ने कहा, “उन्हें देखने का कोई भी मौका मिले तो हम तुरंत जाना चाहेंगे। हम पाकिस्तान आना चाहते हैं, लेकिन अब हालात और निराशाजनक होते जा रहे हैं। हमारे वीजा आवेदन खारिज किए गए, टाले गए और बार-बार अटकाए गए।” कासिम ने कहा, “मेरे पिता को लगातार एकांत कारावास में रखा जा रहा है। उन्हें 6×8 फुट की एक ऐसी कोठरी में 23 घंटे तक बंद रखा जाता है, जिसमें न खिड़की है और न ही रोशनी। उनकी उम्र 73 साल है और उनकी एक आंख की 85 फीसदी नजर जा चुकी है। वह आज भी अपने सिद्धांतों पर मजबूती से कायम हैं, लेकिन अब इसकी कीमत उनका शरीर चुका रहा है।” वकील का आरोप- जनरल मुनीर मनमाना शासन चला रहे इमरान खान के अंतरराष्ट्रीय वकील जेरेड जेनसर ने पाकिस्तान में लोकतंत्र की स्थिति पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने देश के सैन्य नेतृत्व को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया और सेना प्रमुख असीम मुनीर पर ‘ऑथॉरिटेरियनिज्म’ यानी दमनकारी शासन का आरोप लगाया। जेनसर ने कहा, इमरान खान और उनकी पत्नी के खिलाफ जिस तरह कार्रवाई हो रही है, वह किसी लोकतांत्रिक सरकार के तरीके जैसी नहीं है। उन्होंने दावा किया कि इमरान खान के खिलाफ सैकड़ों मामले मनगढ़ंत आरोपों के आधार पर दर्ज किए गए हैं। यह मामला अब सिर्फ उनकी जेल तक सीमित नहीं है। जेनसर के मुताबिक, उनकी गिरफ्तारी उन लोगों के लिए भी एक चेतावनी है, जो पाकिस्तान में सत्ता को चुनौती देने की कोशिश कर सकते हैं। जेनसर ने आगे कहा, उन्हें जेल में रखकर शासन पाकिस्तान के लोगों को साफ संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि उन्हें सत्ता के खिलाफ खड़ा होने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। जेनसर ने कहा, “कल्पना कीजिए कि अगर हम इमरान खान के साथ ऐसा कर सकते हैं, जिन्हें पूरी दुनिया जानती है, तो उस व्यक्ति के साथ क्या किया जा सकता है, जिसे दुनिया नहीं जानती?” इमरान खान के इलाज को लेकर भी विवाद इमरान खान की सेहत और जेल में उनके इलाज को लेकर भी विवाद बना हुआ है। 18 अगस्त को पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की पीठ ने अधिकारियों को निर्देश दिया था कि इमरान खान को इलाज के लिए 48 घंटे के भीतर अदियाला जेल से इस्लामाबाद के शिफा इंटरनेशनल अस्पताल ले जाया जाए। अदालत ने यह भी निर्देश दिया था कि इमरान खान की जांच एक स्वतंत्र मेडिकल पैनल करे। इसमें हृदय रोग विशेषज्ञ, आंखों के डॉक्टर, सामान्य चिकित्सक और उनके निजी डॉक्टर डॉ. फैसल सुल्तान को शामिल किया जाना था। हालांकि, 20 अगस्त को अधिकारियों ने इमरान खान को शिफा इंटरनेशनल अस्पताल ले जाने के बजाय पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (PIMS) पहुंचाया। वहां कई घंटों तक उनकी मेडिकल जांच की गई। इसके बाद उन्हें चिकित्सकीय रूप से फिट घोषित कर वापस अदियाला जेल भेज दिया गया। इमरान खान की टीम का आरोप है कि जेल से शिफा अस्पताल की दिशा में एक ‘डमी काफिला’ भेजा गया, ताकि ऐसा लगे कि इमरान खान को वहां ले जाया जा रहा है। टीम ने यह भी दावा किया कि उनके निजी डॉक्टर डॉ. फैसल सुल्तान शिफा अस्पताल में उनका इंतजार कर रहे थे, लेकिन उन्हें इमरान खान की जांच करने का मौका नहीं दिया गया। इमरान से फिर मिलीं बहन नूरीन नियाजी इमरान खान की बहन नूरीन नियाजी ने मंगलवार को अदियाला जेल में उनसे मुलाकात की। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद यह लगातार दूसरे हफ्ते है, जब नूरीन ने अपने भाई से मुलाकात की है। सुप्रीम कोर्ट ने 18 अगस्त को आदेश दिया था कि कैदी इमरान खान की उनके परिवार के सदस्यों से सप्ताह में एक बार मुलाकात कराई जाए। अदालत ने यह भी निर्देश दिया था कि सरकार उनके बेटों से सप्ताह में दो बार फोन पर बात कराने की व्यवस्था करे। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद इमरान खान के परिवार ने अदालत को भरोसा दिलाया था कि वे मीडिया से बात नहीं करेंगे। PTI के वकील अवैस यूनुस चौधरी के मुताबिक, मंगलवार को नूरीन नियाजी की इमरान खान से मुलाकात करीब 45 मिनट चली। उन्होंने कहा कि इमरान की दो और बहनें भी जेल के बाहर गाड़ी में इंतजार कर रही थीं। नूरीन नियाजी के जेल से बाहर आने के बाद तीनों बहनें बिना मीडिया से बात किए वहां से चली गईं। ———————————- यह खबर भी पढ़ें… इमरान खान अस्पताल से फिर जेल भेजे गए:डॉक्टर बोले- पूर्व पीएम को जेल में रखना सुरक्षित; देर रात हॉस्पिटल में भर्ती किया था
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को मेडिकल जांच के बाद शुक्रवार को इस्लामाबाद के शिफा इंटरनेशनल हॉस्पिटल से वापस अडियाला जेल भेज दिया गया। पूरी खबर यहां पढ़ें…

चीन-तुर्की की मदद से सर क्रीक के पास पाकिस्तान का नया पैंतरा, ये अबाबील- द डिवाइन स्ट्राइक क्या है?

Pakistan News: भारत और पाकिस्तान की समुद्री सीमा पर स्थित स्ट्रैटिजकली काफी सेंसेटिव सर क्रीक क्षेत्र के पास पाकिस्तान अपनी नौसैनिक और सैन्य इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत बना रहा है। हमारी सहयोगी वेबसाइट ‘फर्स्टपोस्ट’ की रिपोर्ट में ‘CNN-न्यूज18’ के हवाले से बताया गया है कि टॉप पॉकिस्तानी सोर्सेज के जरिए ये जानकारी सामने आई है। ये पता चला है कि यह पूरा सैन्य विस्तार पाकिस्तान के एक नए प्रोजेक्ट का हिस्सा है जिसे अबाबील- द डिवाइन स्ट्राइक नाम दिया गया है। सर क्रीक और उससे लगे इलाकों में पाकिस्तान की इन नई गतिविधियों की वजह से समुद्री सीमा पर सुरक्षा जोखिम बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

‘अबाबील’ प्रोजेक्ट के तहत SSG-N कमांडोज की तैनाती

सीएनएन-न्यूज18 को सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक पाकिस्तान नौसेना ने अपने प्रोजेक्ट अबाबील के तहत सर क्रीक इलाके में नेवल स्पेशल सर्विस ग्रुप (SSG-N) के विशेष कमांडोज को तैनात किया है। एसएसजी-एन पाकिस्तान की एक प्रमुख मैरिटाइम स्पेशल ऑपरेशंस फोर्स है। ये समंदर के साथ हवा और जमीन तीनों माध्यमों से बेहद जोखिम भरे सैन्य अभियानों को अंजाम देने के लिए प्रशिक्षित की जाती है।

तुर्की के ड्रोन और चीन के आधुनिक होवरक्राफ्ट से बढ़ा तनाव

रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान इस क्षेत्र में तुर्की में निर्मित आधुनिक ड्रोन, चीन के आधुनिक होवरक्राफ्ट और हाई स्पीड वाली नौसैनिक नौकाओं की तैनाती कर रहा है। वहां आधुनिक रॉकेट और एयर डिफेंस सिस्टम भी तैनात किए जा रहे हैं। सूत्रों ने सीएनएन-न्यूज18 को बताया कि पाकिस्तान द्वारा तैनात किए जा रहे तुर्की के ये ड्रोन विस्फोटक सामग्री ले जाने में पूरी तरह सक्षम हैं और इनका इस्तेमाल हवाई निगरानी के लिए भी किया जा सकता है। अबाबील प्रोजेक्ट के तहत एक उन्नत एयर डिफेंस सिस्टम भी शामिल किया गया है। ये सर क्रीक और अरब सागर क्षेत्र में पाकिस्तान थलसेना की नई गठित रॉकेट फोर्स के साथ कोआर्डिनेशन में काम करेगा।

चीन और तुर्की की मदद से भारतीय नौसेना को चुनौती देने की कोशिश

सीएनएन-न्यूज18 को अंदरूनी सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक सर क्रीक और अरब सागर में भारत की नौसैनिक मौजूदगी को चुनौती देने के इरादे से पाकिस्तान ने अपने समुद्री अभियानों में मानवरहित एरियल और समुद्री ड्रोनों को शामिल किया है। इसमें चीन और तुर्की की भूमिका बेहद अहम मानी जा रही है। ये दोनों देश मॉडर्न सैन्य उपकरण और तकनीक की आपूर्ति करके पाकिस्तान के सशस्त्र बलों के मॉडर्नाइजेशन में मदद कर रहे हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक चीन ने पाकिस्तान को अपनी पहली हैंगोर-क्लास पनडुब्बी सौंप दी है। सूत्र का कहना है कि इससे अरब सागर में पाकिस्तान की स्टेल्थ क्षमता और सेकेंड-स्ट्राइक क्षमता में काफी इजाफा होगा। इसके अलावा इस्लामाबाद ने अपने नौसेना बेड़े को आधुनिक बनाते हुए चीन निर्मित हाई एंड तुगरिल-क्लास युद्धपोतों को भी शामिल किया है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि सर क्रीक और अरब सागर के तटीय इलाकों में दर्जनों तटीय रक्षा नौकाएं, मरीन असॉल्ट क्राफ्ट, होवरक्राफ्ट, नौसैनिक जहाज और तेज गति वाली गश्ती नौकाएं तैनात की गई हैं। इसके साथ ही इस पूरे क्षेत्र में नौसैनिक गश्त को भी काफी बढ़ा दिया गया है।

फील्ड मार्शल असीम मुनीर की यूनिफाइड कमान में चल रहा मॉडर्नाइजेशन

सीएनएन-न्यूज18 के सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तानी सेनाध्यक्ष फील्ड मार्शल असीम मुनीर के अंडर में यूनिफाइड कमान के तहत पाकिस्तान की थलसेना, नौसेना और वायुसेना के बड़े पैमाने पर मॉडर्नाइजेशन का काम चल रहा है। इसी साल की शुरुआत में मुनीर ने तीनों सेनाओं के अभियानों को एक साथ जोड़ने और बाहरी खतरों के खिलाफ पाकिस्तान की ओवरऑल डिटर्जेंस कैपेबिलिटी को मजबूत करने के मकसद से नेशनल स्ट्रैटेजिक कमांड की स्थापना की थी।

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मोजतबा खामेनेई का मुनीर को एक ‘सीक्रेट मैसेज’, क्या टल जाएगी अमेरिका-ईरान की जंग? जानें रावलपिंडी में क्या हुआ

Iran Pakistan Backdoor Diplomacy: मिडिल ईस्ट में अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच जारी भीषण संघर्ष के बीच एक बड़ा कूटनीतिक मोड़ सामने आया है। ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई का एक ‘सीक्रेट मैसेज’ लेकर ईरान के गृह मंत्री एस्कंदर मोमेनी पाकिस्तान पहुंचे हैं। रावलपिंडी स्थित पाकिस्तानी सैन्य मुख्यालय में उन्होंने पाकिस्तान के फील्ड मार्शल असीम मुनीर के साथ करीब 50 मिनट तक वन-ऑन-वन गुप्त बैठक की।

पाकिस्तानी सुरक्षा सूत्रों के मुताबिक, ईरान और अमेरिका के बीच बैकडोर कूटनीति के लिए अब पाकिस्तान एक नया जरिया बनकर उभरा है। आइए आपको बताते हैं कि इस सीक्रेट मुलाकात में क्या बातें हुईं और क्या पाकिस्तान अमेरिका-ईरान के बीच युद्ध रुकवा सकता है।

50 मिनट की सीक्रेट मीटिंग में क्या हुआ?

ईरानी गृह मंत्री एस्कंदर मोमेनी और पाकिस्तानी सेना प्रमुख असीम मुनीर के बीच हुई इस बैठक को मिडिल ईस्ट के युद्ध को टालने की एक बड़ी कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। बैठक के दौरान ईरानी मंत्री ने सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई का निजी और गोपनीय पत्र सीधे असीम मुनीर को सौंपा।

दोनों नेताओं के बीच तनाव कम करने और मध्यस्थता के एक नए खाके पर चर्चा हुई।ईरान के राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व ने माना कि क्षेत्रीय तनाव को कम करने में पाकिस्तान की भूमिका बेहद अहम है और इस्लामाबाद को क्षेत्र में ‘शांति का लंगर’ करार दिया।

असीम मुनीर अब अमेरिका और सऊदी अरब तक पहुंचाएंगे संदेश

पाकिस्तानी सुरक्षा सूत्रों का दावा है कि फील्ड मार्शल असीम मुनीर आने वाले दिनों में ईरानी नेतृत्व के इस गुप्त संदेश को लेकर सीधे अमेरिका और सऊदी अरब के शीर्ष अधिकारियों से चर्चा करेंगे।

पाकिस्तान ने इस पूरे युद्ध में एक ‘ईमानदार मध्यस्थ’ की भूमिका निभाने की इच्छा जताई है। कूटनीतिक प्रयासों को आगे बढ़ाने और वाशिंगटन व तेहरान के बीच बातचीत शुरू कराने के लिए असीम मुनीर जल्द ही सऊदी अरब और अमेरिका की यात्रा पर जा सकते हैं।

‘बातचीत को तैयार, लेकिन राष्ट्रीय हितों से समझौता नहीं’

बैठक के दौरान ईरानी गृह मंत्री एस्कंदर मोमेनी ने साफ शब्दों में ईरान का रुख भी सामने रखा। ईरान ने यह स्पष्ट किया है कि वह तनाव घटाने और कूटनीतिक बातचीत के लिए तैयार है। हालांकि, ईरान अपने रणनीतिक हितों और राष्ट्रीय संप्रभुता के मामलों में कोई समझौता नहीं करेगा। क्षेत्रीय कूटनीति के अलावा, दोनों देशों ने पाकिस्तान-ईरान सीमा प्रबंधन और द्विपक्षीय सुरक्षा पर भी करीबी तालमेल बनाए रखने पर सहमति जताई।

दुनिया देखती रह गई और पाकिस्तान बन गया ‘किंगमेकर’! शहबाज शरीफ ने किया अमेरिका और ईरान ‘मेगा डील’ का ऐलान

US Iran Sign Islamabad MoU: खाड़ी में सीजफायर के बीच दुनिया के लिए एक और राहत भरी खबर सामने आई है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव को खत्म करने के लिए ऐतिहासिक ‘इस्लामाबाद समझौते’ पर हस्ताक्षर हो गए हैं। अब यह समझौता तुरंत प्रभाव से लागू भी हो गया है।

इस ऐतिहासिक शांति समझौते की मध्यस्थता करने वाले पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इसकी आधिकारिक घोषणा की है। उन्होंने लिखा कि, ‘इस समझौते के तहत ईरान तुरंत होर्मुज जलडमरूमध्य को खोल देगा, वहीं अमेरिका भी अपनी नौसैनिक नाकेबंदी को ‘तुरंत’ हटा लेगा’।

शहबाज शरीफ और कतर की मध्यस्थता से हुई डील

पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ ने X पर लिखा, ‘मुझे यह घोषणा करते हुए गर्व हो रहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच ऐतिहासिक ‘इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन’ पर आज इलेक्ट्रॉनिक रूप से हस्ताक्षर किए गए हैं। दोनों देशों के माननीय राष्ट्रपतियों ने इस पर दस्तखत किए हैं और मध्यस्थ के रूप में मैंने भी इस पर हस्ताक्षर किए हैं’।

शहबाज शरीफ ने बताया कि पाकिस्तान, सह-मध्यस्थ कतर के सहयोग से 19 जून 2026 को स्विट्जरलैंड में एक आधिकारिक समारोह की मेजबानी करेगा, जहां तकनीकी स्तर की बातचीत शुरू होगी। उन्होंने इस समझौते को क्षेत्र में शांति, आपसी सम्मान और साझा समृद्धि की एक मजबूत नींव बताया।

ट्रंप ने वर्साय के महल में किए दस्तखत

व्हाइट हाउस ने भी इस बात की पुष्टि की है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ संघर्ष को समाप्त करने वाले इस समझौते को अपनी मंजूरी दे दी है। रॉयटर्स और एएफपी के मुताबिक, G7 शिखर सम्मेलन के बाद फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन के साथ वर्साय के महल में डिनर के दौरान ट्रंप ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किए।

वर्साय से रवाना होते समय ट्रंप ने खुद पत्रकारों से इसकी पुष्टि करते हुए कहा, ‘यह साइन हो चुका है… मैंने वर्साय में इस पर दस्तखत किए हैं।’ हालांकि, ट्रंप ने यह चेतावनी भी दी कि अगर ईरान ने इसका उल्लंघन किया, तो सख्त कार्रवाई की जा सकती है। उन्होंने कहा कि स्थिति की निगरानी के लिए अमेरिकी सेना कुछ समय तक खाड़ी में मौजूद रहेगी।

ईरान ने भी की पुष्टि, लेबनान को लेकर हुआ बड़ा फैसला

ईरान की आधिकारिक समाचार एजेंसी ‘इर्ना’ (IRNA) के मुताबिक, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने भी समझौते के फाइनल होने की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के सर्वोच्च अधिकारियों के दस्तखत के बाद अब इस समझौते को लागू करने की परीक्षा है।

समझौते की ये है मुख्य बातें:

  1. ईरान ने साफ किया कि लेबनान में युद्ध को समाप्त करना और सीजफायर उनकी प्राथमिकता है। इस समझौते के शुरुआती क्लॉज में लेबनान का तीन बार जिक्र है और लेबनान की संप्रभुता का सम्मान करने की बात कही गई है।
  2. समझौते के तहत अगले 60 दिनों तक ईरान के परमाणु कार्यक्रम और उस पर लगे प्रतिबंधों को हटाने के लिए बातचीत का दौर चलेगा।
  3. ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि उसका मिसाइल कार्यक्रम इस बातचीत के एजेंडे से पूरी तरह बाहर है और उस पर कोई समझौता नहीं होगा।

ईरानी संसद के स्पीकर बोले- ‘हमारा हाथ ट्रिगर पर है’

भले ही समझौते पर हस्ताक्षर हो गए हों, लेकिन ईरान के भीतर अमेरिका को लेकर अभी भी भारी अविश्वास है। ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबफ ने वाशिंगटन के प्रति गहरा संदेह जताते हुए कहा, ‘अमेरिका पर मेरा अविश्वास सबसे ज्यादा है। भले ही यह समझौता फाइनल हो जाए और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) इसे मंजूरी दे दे, फिर भी अमेरिका भरोसे के लायक नहीं है’।

होर्मुज जलडमरूमध्य का जिक्र करते हुए उन्होंने कड़े शब्दों में चेतावनी दी, ‘ईरान के वहां संप्रभु अधिकार हैं और स्वाभाविक रूप से हम सेवाओं के लिए शुल्क लेंगे। हमारा हाथ अभी भी ट्रिगर पर है।’

पीएम शरीफ ने इन नेताओं का जताया आभार

शहबाज शरीफ ने इस ऐतिहासिक डील तक पहुंचने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, जेडी वेंस, जेरेड कुशनर और ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला सैय्यद मोजतबा खामेनेई और राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन का शुक्रिया अदा किया। इसके अलावा उन्होंने कतर, सऊदी अरब, तुर्की, मिस्र के नेतृत्व और पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर के अथक प्रयासों की सराहना की।