पाकिस्तान में जेल में बंद पूर्व PM इमरान खान भी पूर्व प्रधानमंत्रियों की तरह देश छोड़ सकते हैं। विपक्षी नेता महमूद खान अचकजई ने शुक्रवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में यहा दावा किया। अचकचई ने कहा कि सरकार इमरान पर समझौते के लिए दबाव बना रही है। वे नवाज शरीफ और बेनजीर भुट्टो की तरह देश छोड़कर जा सकते हैं। अचकचई पख्तूनख्वा मिल्ली अवामी पार्टी (PKMP) के अध्यक्ष और पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में विपक्ष के नेता हैं। नवाज-बेनजीर ने क्यों छोड़ा था पाकिस्तान? अचकजई ने अपने दावे के समर्थन में पाकिस्तान के दो पूर्व प्रधानमंत्रियों नवाज शरीफ और बेनजीर भुट्टो के पुराने मामलों का हवाला दिया। नवाज शरीफ: 1999 में तत्कालीन सेना प्रमुख परवेज मुशर्रफ ने सैन्य तख्तापलट कर नवाज सरकार को हटा दिया था। नवाज को जेल में डाल दिया गया। इसके बाद 2000 में सऊदी अरब और लेबनान के नेताओं की मध्यस्थता से हुए समझौते के तहत वे पाकिस्तान छोड़कर चले गए। समझौते की शर्तों के मुताबिक, नवाज को 10 साल तक पाकिस्तान से बाहर रहना था और राजनीति से दूर रहना था। बेनजीर भुट्टो: 1997 में तत्कालीन राष्ट्रपति फारूक लेघारी ने बेनजीर को भ्रष्टाचार के आरोप में प्रधानमंत्री पद से हटा दिया था। इसके बाद 1997 के आम चुनाव में उन्हें हार मिली। इसके बाद बेनजीर भुट्टो ने देश छोड़ दिया। वह 9 साल तक ब्रिटेन और दुबई में रहीं। अगस्त 2023 से जेल में हैं इमरान 73 साल के इमरान खान अगस्त 2023 से जेल में हैं। उन्हें सबसे पहले तोशाखाना मामले में 3 साल की सजा मिलने के बाद गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद उन पर सिफर, अल-कादिर ट्रस्ट और इद्दत निकाह समेत कई मामले दर्ज हुए। बाद में सिफर और इद्दत निकाह मामलों में उन्हें अदालत से राहत मिल गई। तोशाखाना मामले में भी उनकी एक सजा रोक दी गई। इसके बावजूद दूसरे मामलों के चलते वह अभी जेल में हैं। इमरान खान और उनकी पार्टी पीटीआई का कहना है कि 2022 में प्रधानमंत्री पद से हटने के बाद उनके खिलाफ मामले राजनीतिक वजहों से दर्ज किए गए। उनका आरोप है कि उन्हें राजनीति और चुनाव से दूर रखने के लिए ऐसा किया गया। वहीं, पाकिस्तान सरकार और जांच एजेंसियां इन आरोपों को खारिज करती हैं और कहती हैं कि ये मामले कानूनी प्रक्रिया के तहत चल रहे हैं। तोशाखाना क्या है और इमरान खान का मामला क्या है? तोशाखाना पाकिस्तान सरकार का सरकारी भंडार है। यहां प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, मंत्री और दूसरे सरकारी अधिकारियों को विदेशों से मिले कीमती तोहफे जमा किए जाते हैं। इनमें घड़ियां, गहने, पेंटिंग जैसी चीजें शामिल होती हैं। इमरान खान से जुड़े विवाद इमरान खान 2018 से 2022 तक पाकिस्तान के प्रधानमंत्री रहे। इस दौरान उन्हें कई महंगे विदेशी तोहफे मिले। आरोप है कि कुछ तोहफों की जानकारी और उनकी बिक्री से मिली रकम की पूरी जानकारी नहीं दी गई। इससे जुड़े तीन मामले… 1. तोहफों की जानकारी छिपाने का आरोप 2022 में पाकिस्तान के चुनाव आयोग ने इमरान को तोहफों की जानकारी गलत तरीके से घोषित करने का दोषी माना और उन्हें अयोग्य ठहराया। 2. तोशाखाना का पहला मामला इमरान पर आरोप था कि उन्होंने कुछ महंगे तोहफे तय कीमत देकर अपने पास रखे और बाद में बेच दिए। अगस्त 2023 में उन्हें 3 साल की सजा सुनाई गई। बाद में सजा निलंबित हो गई। 3. तोशाखाना-2 मामला इसमें 2021 में सऊदी क्राउन प्रिंस से मिले बुल्गारी ज्वेलरी सेट का मामला है। अभियोजन के मुताबिक इसकी कीमत करीब 8 करोड़ पाकिस्तानी रुपए थी, जबकि इसे करीब 29 लाख रुपए में रखने का आरोप है। इमरान खान के प्रमुख केस की वर्तमान स्थिति 1. तोशाखाना केस 2023 में इमरान खान को तोशाखाना मामले में 3 साल की सजा हुई थी। बाद में यह सजा निलंबित हुई। हालांकि, बाद में तोशाखाना से जुड़े एक अन्य मामले में दिसंबर 2025 में इमरान खान और बुशरा बीबी को 17-17 साल की सजा सुनाई गई। यह सजा महंगे सरकारी तोहफों की कथित कम कीमत पर खरीद से जुड़े मामले में है। 2. साइफर केस इमरान खान को साइफर/स्टेट सीक्रेट्स केस में मिली 10 साल की सजा हाईकोर्ट ने पलट दी थी। जून 2024 में उन्हें इस मामले में बरी कर दिया गया। 3. इद्दत निकाह केस फरवरी 2024 में इमरान खान और बुशरा बीबी को 7-7 साल की सजा मिली थी। जुलाई 2024 में दोनों को इस मामले में बरी कर दिया गया। 4. अल-कादिर ट्रस्ट/£190 मिलियन केस यह मामला इमरान खान के प्रधानमंत्री रहते हुए ब्रिटेन से पाकिस्तान लौटाए गए करीब £190 मिलियन और उससे जुड़े कथित भ्रष्टाचार से संबंधित है।17 जनवरी 2025 को इमरान खान को 14 साल और बुशरा बीबी को 7 साल की सजा सुनाई गई। मई 2026 में इस सजा को निलंबित करने की उनकी याचिका इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने खारिज कर दी। उनकी मुख्य अपील पर सुनवाई जारी है।
Imran Khan Controversy: बॉलीवुड अभिनेता इमरान खान की कानूनी टीम ने अब उन दावों को खारिज कर दिया है, जिनमें कहा गया था कि उन्होंने 10 अक्टूबर को मुंबई के अगस्त क्रांति मैदान में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया था। टीम का कहना है कि वह बस उस इलाके से गुजर रहे थे। यह स्पष्टीकरण तब आया है जब अधिकारियों ने अभिनेता – जो अमेरिकी नागरिक हैं और जिनके पास ‘ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया’ (OCI) कार्ड है – को 28 अक्टूबर तक भारत छोड़ने का निर्देश दिया है।
‘द टाइम्स ऑफ इंडिया’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, खान के वकीलों ने इस दावे को चुनौती दी है कि उन्होंने उस विरोध प्रदर्शन में सक्रिय रूप से हिस्सा लिया था, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की गई थी।
वहीं, विरोध प्रदर्शन में उनकी मौजूदगी को लेकर यह विवाद तब और अहम हो गया, जब ‘फॉरेनर्स रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिस’ (FRRO) ने उन्हें देश छोड़ने का नोटिस जारी किया।
इस घटनाक्रम ने अभिनेता के आव्रजन (इमिग्रेशन) दर्जे और भारत में विदेशी नागरिकों की राजनीतिक गतिविधियों से जुड़े नियमों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
अगस्त क्रांति मैदान में क्या हुआ?
10 अक्टूबर को मुंबई पुलिस ने अगस्त क्रांति मैदान में जुटे या वहां पहुंचने की कोशिश कर रहे सैकड़ों लोगों को हिरासत में लिया था। ये लोग कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की ओर से बुलाए गए प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचे थे। इस प्रदर्शन में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की जा रही थी।
पुलिस की इस कार्रवाई के दौरान हिरासत में लिए गए लोगों में इमरान खान भी शामिल थे। बाद में उन्होंने सोशल मीडिया पर पुलिस वैन के अंदर की अपनी एक तस्वीर शेयर की और कैप्शन लिखा, “लगता है मैं ड्राइव पर जा रहा हूं।”
वहीं, बीजेपी नेता किरीट सोमैया के पुलिस से संपर्क करने के बाद, उस जगह पर अभिनेता की मौजूदगी विवाद का विषय बन गई। सोमैया ने सवाल उठाया कि विदेशी नागरिक होने के बावजूद, अभिनेता ने एक राजनीतिक प्रदर्शन में कैसे हिस्सा लिया। सोमैया ने खान के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि प्रदर्शन में उनकी भागीदारी से यह सवाल उठता है कि क्या उन्होंने विदेशी नागरिकों और OCI कार्डधारकों पर लागू नियमों का पालन किया है। इसके बाद खान को 28 अक्टूबर तक भारत छोड़ने का नोटिस दिया गया, जिससे यह विवाद और गहरा गया।
अब अभिनेता के वकीलों ने प्रदर्शन में उनकी मौजूदगी को लेकर लगाए गए आरोपों को चुनौती दी है। उनका कहना है कि अभिनेता प्रदर्शन में हिस्सा नहीं ले रहे थे, बल्कि वे बस उस इलाके से गुजर रहे थे।
इमरान खान को भारत छोड़ने के लिए क्यों कहा गया है?
‘जाने तू… या जाने ना’ और ‘डेल्ही बेली’ जैसी फिल्मों के लिए पहचाने जाने वाले इमरान खान, अमेरिका के नागरिक हैं और उनके पास OCI कार्ड है। हालांकि, OCI का दर्जा पात्र विदेशी नागरिकों को कुछ शर्तों के साथ भारत आने और यहां रहने की अनुमति देता है, लेकिन इससे उन्हें भारत की नागरिकता नहीं मिल जाती।
नागरिकता अधिनियम के तहत, OCI कार्ड धारकों को वे राजनीतिक अधिकार नहीं मिलते जो भारतीय नागरिकों को प्राप्त हैं; इनमें वोट देने या चुनाव लड़ने का अधिकार शामिल है। अनुच्छेद 19 के तहत मिलने वाले संवैधानिक संरक्षण – जिनमें अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण तरीके से इकट्ठा होने का अधिकार शामिल है – विशेष रूप से केवल भारतीय नागरिकों को ही दिए गए हैं।
हालांकि, भारत में विदेशी नागरिकों के राजनीतिक प्रदर्शनों में शामिल होने को लेकर कानूनी स्थिति इतनी सीधी नहीं है कि उन पर पूरी तरह से रोक हो। इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट, 2025 के तहत सरकार को भारत में विदेशी नागरिकों की मौजूदगी और उनके आचरण को नियंत्रित करने के व्यापक अधिकार मिले हैं। लेकिन इस कानून में स्पष्ट रूप से यह नहीं कहा गया है कि विदेशी नागरिकों या OCI कार्डधारकों के प्रदर्शन में शामिल होने पर पूरी तरह प्रतिबंध है।
ऐसे में इमरान खान के मामले में यह जानना अहम है कि उन्हें भारत छोड़ने का नोटिस किन कानूनी आधारों पर जारी किया गया है। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि उनके खिलाफ कार्रवाई किस वजह से की गई।
वकीलों ने अपने दावे के समर्थन में CCTV फुटेज मांगी
इमरान खान की कानूनी टीम ने संकेत दिया है कि वे घटना के दिन उनकी गतिविधियों का पता लगाने के लिए उस इलाके की CCTV फुटेज मांगेंगे। वकीलों का कहना है कि फुटेज से यह स्पष्ट हो सकेगा कि अभिनेता वहां प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचे थे या सिर्फ उस इलाके से गुजर रहे थे।
अधिवक्ता जुल्फिकार मेमन ने ‘द टाइम्स ऑफ इंडिया’ से कहा, “पुलिस इलाके की CCTV फुटेज निकलवाए, सब कुछ साफ हो जाएगा।”
बचाव पक्ष के मुताबिक, खान नाना चौक से गुजर रहे थे, तभी पुलिस की बैरिकेडिंग के कारण रास्ता रुक गया और मीडिया के लोग उनके पास आ गए। वकीलों ने शिकायतकर्ता के उस आरोप को चुनौती दी है, जिसमें दावा किया गया है कि अभिनेता ने प्रदर्शन में उसी तरह हिस्सा लिया था, जैसा शिकायत में बताया गया है।
बता दें कि हिरासत में लिए जाने से कुछ समय पहले मीडिया से बात करते हुए, खान ने वहां अपनी मौजूदगी के बारे में एक अलग ही बात कही थी। उन्होंने कहा, “मैं यहां एक नागरिक के तौर पर हूं, एक ऐसे व्यक्ति के तौर पर जो इसी शहर में रहता है। मैं यह देखने आया हूं कि लोगों की आवाजाही की आजादी पर रोक क्यों लगाई जा रही है, और लोगों की आवाज को क्यों दबाया जा रहा है।”
यह भी पढ़ें: कनॉट प्लेस में CJP के ‘लहरा दो तिरंगा’ कार्यक्रम के बाद धरने की आशंका, खुफिया एजेंसियों ने किया अलर्ट
Actor Imran Khan: मुंबई में एक विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लेने के बाद अमेरिकी नागरिक और बॉलीवुड अभिनेता इमरान खान इमिग्रेशन जांच के दायरे में आ गए हैं। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता किरीट सोमैया ने मशहूर अभिनेता आमिर खान के भांजे इमरान की कथित विदेशी नागरिकता और ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया (OCI) स्टेटस को लेकर उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। खबरों के अनुसार, इमरान खान से कथित तौर पर 28 अक्टूबर तक भारत छोड़ने के लिए कहा गया है। 10 अक्टूबर को मुंबई पुलिस ने अगस्त क्रांति मैदान से सैकड़ों लोगों को हिरासत में लिया था, जिनमें इमरान खान भी शामिल थे।
वहां प्रदर्शनकारी ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के समर्थन में इकट्ठा हुए थे। इस प्रदर्शन में मतदाता सूची के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) में कथित अनियमितताओं को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की गई थी। अभिनेता को उसी शाम रिहा कर दिया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले में अब मुंबई पुलिस द्वारा एक नोटिस जारी किया गया है। एक अधिकारी ने पीटीआई को बताया, “मुंबई पुलिस ने आव्रजन और विदेशी नागरिक अधिनियम के उल्लंघन के आरोप में अमेरिकी नागरिक एवं अभिनेता इमरान खान को भारत छोड़ने के लिए कहा है।”
इमरान खान को इमिग्रेशन से जुड़ी कार्रवाई का सामना क्यों करना पड़ रहा है?
न्यूज एजेंसी IANS के मुताबिक, इमरान खान को मुंबई पुलिस ने गुरुवार (15 अक्टूबर) को एक नोटिस जारी कर 28 अक्टूबर तक भारत छोड़ने का निर्देश दिया है। मुंबई पुलिस के अनुसार, भारतीय नागरिक न होने के बावजूद विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के कारण इमरान खान के खिलाफ इमिग्रेशन एक्ट (प्रवासन अधिनियम) की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है।
‘टाइम्स नाउ’ की रिपोर्ट के मुताबिक, बीजेपी के पूर्व सांसद किरीट सोमैया ने आरोप लगाया है कि खान एक अमेरिकी नागरिक हैं। उन्होंने कहा कि उनके पास OCI कार्ड है। इसलिए उन्होंने राजनीतिक प्रदर्शन में हिस्सा लेकर नियमों का उल्लंघन किया है। उन्होंने अभिनेता के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। अधिकारियों से उन्हें हिरासत में लेने और देश से बाहर भेजने (निर्वासन) पर विचार करने को कहा है।
इमरान खान के खिलाफ कार्रवाई की मांग
इमरान खान उन प्रदर्शनकारियों में शामिल थे जिन्हें पुलिस ने अगस्त क्रांति मैदान से हिरासत में लिया था। मुंबई के संयुक्त पुलिस आयुक्त मनोज कुमार शर्मा को लिखे पत्र में बीजेपी नेता ने सवाल उठाया कि क्या खान को इस आंदोलन में शामिल होने की कानूनन अनुमति थी। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में BJP नेता ने इमरान खान को तुरंत देश से बाहर निकालने की मांग की।
हिरासत में लिए जाने के बाद मुंबई पुलिस के वैन से अभिनेता ने सोशल मीडिया पर लिखा, “ऐसा लगता है कि मैं ड्राइव पर जा रहा हूं।” बाद में एक वीडियो भी सामने आया, जिसमें खान पुलिस अधिकारियों से यह पूछते दिखे, “मैंने क्या किया है? मेरे साथ धक्का-मुक्की क्यों की जा रही है?”
Actor Imran Khan, nephew of Aamir Khan, has been issued a notice by Mumbai Police directing him to leave India by October 28. Imran Khan had participated in a protest at Mumbai’s August Kranti Maidan demanding the resignation of Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar. Mumbai Police had also detained him. Action has been taken against Imran Khan under the relevant provision of the Immigration Act over his participation in the protest despite not being an Indian citizen: Mumbai Police
— IANS (@ians_india) October 15, 2026
पाकिस्तान में इमरान खान के समर्थकों के विरोध और बढ़ती हिंसा के बीच रविवार को खैबर पख्तूनख्वा में इमरजेंसी लगा दी गई। पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने देश के उत्तरी प्रांत खैबर पख्तूनख्वा में बिगड़ती कानून-व्यवस्था और बढ़ते आतंकी हमलों का हवाला देते हुए आपातकाल की घोषणा की है। राष्ट्रपति ने तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के नेतृत्व वाली प्रांतीय सरकार को भी बर्खास्त कर दिया। राष्ट्रपति के इस फैसले का असर तुरंत प्रभाव से लागू हो गया है। बता दें इमरान खान की रिहाई की मांग को लेकर उनके हजारों समर्थक खैबर पख्तूनख्वा में मार्च कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी देश की खराब आर्थिक स्थिति को लेकर भी सरकार के खिलाफ अपना गुस्सा जाहिर कर रहे हैं।
राष्ट्रपति ने लगाया इमरजेंसी
इमरजेंसी लागू होने के बाद पाकिस्तान की केंद्र सरकार को प्रांत के प्रशासन पर ज्यादा अधिकार मिल गए हैं। ये फैसला संविधान के दो सुरक्षा प्रावधानों के तहत लिया गया। राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने कानून-व्यवस्था की स्थिति और सरकारी प्रतिनिधियों के साथ बातचीत बेनतीजा रहने के बाद मिली सिफारिशों के आधार पर इस आदेश पर हस्ताक्षर किए। राष्ट्रपति कार्यालय ने आदेश पर उनके हस्ताक्षर वाली तस्वीर भी जारी की है।
खैबर पख्तूनख्वा की बढ़ाई गई सुरक्षा
AFP के एक रिपोर्टर के अनुसार, रविवार को खैबर पख्तूनख्वा की राजधानी पेशावर में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई थी, जबकि प्रांत के कई अन्य शहरों में भी सड़कों को बंद रखा गया। सरकार के साथ बातचीत विफल होने के बाद PTI समर्थकों ने करीब एक सप्ताह पहले प्रांत के अलग-अलग कस्बों और शहरों से गुजरते हुए ‘लॉन्ग मार्च’ शुरू किया था।
PTI ने किया विरोध
खैबर पख्तूनख्वा को इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) का मजबूत गढ़ माना जाता है। रविवार को उठाए गए संवैधानिक कदमों के बाद प्रांत की PTI सरकार के अधिकार सीमित हो जाएंगे। PTI के चेयरमैन गौहर अली खान ने इस फैसले की कड़ी आलोचना करते हुए इसे गंभीर राजनीतिक भूल और लोकतंत्र के खिलाफ उठाया गया कदम बताया। उन्होंने X पर लिखा कि, ‘लोग अपने अधिकारों के खिलाफ उठाए जा रहे ऐसे कदमों को कभी स्वीकार नहीं करेंगे।’
2023 से जेल में बंद है इमरान खान
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और मशहूर क्रिकेटर इमरान खान अगस्त 2023 से जेल में बंद हैं। उनके खिलाफ भ्रष्टाचार, देशद्रोह और हिंसा भड़काने समेत कई मामले दर्ज हैं। ये मामले मई 2023 में हुए बड़े सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बाद सामने आए थे। वहीं, इमरान खान और उनकी कानूनी टीम ने सभी आरोपों को गलत बताया। उनके मुताबिक, ये मामले राजनीतिक बदले की भावना से बनाए गए और इनका उद्देश्य इमरान की लोकप्रियता को नुकसान पहुंचाना है।
बाचतीच हुई फेल
पाकिस्तान सरकार ने PTI के साथ बातचीत में इमरान खान की मांगों को खैबर पख्तूनख्वा की सुरक्षा से जोड़ दिया था। खान के समर्थक चाहते थे कि उन्हें अपने डॉक्टरों से मिलने की अनुमति दी जाए। लेकिन 4 अक्टूबर को सरकार और PTI के बीच बातचीत सफल नहीं हो सकी, जिसके बाद समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। वहीं, पाकिस्तान ने खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में बढ़ते हमलों के लिए अफगानिस्तान से होने वाली आतंकी गतिविधियों को जिम्मेदार ठहराया है। हालांकि, तालिबान सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए पाकिस्तान पर अफगानिस्तान की संप्रभुता का उल्लंघन करने और आम लोगों को निशाना बनाने का आरोप लगाया है।
पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार ने रविवार को खैबर-पख्तूनख्वा प्रांत में इमरजेंसी लगा दी और सरकार बर्खास्त कर दी। यहां इमरान खान की पार्टी PTI की सरकार है। खैबर-पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी पूर्व पीएम इमरान खान की रिहाई की मांग को लेकर समर्थकों के साथ इस्लामाबाद की ओर मार्च निकाल रहे थे। शहबाज सरकार का आरोप है कि इमरान खान की PTI सरकार प्रांत में आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में जानबूझकर सहयोग नहीं कर रही है। पाक सरकार आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं करेगी। इमरान खान की पार्टी PTI ने फैसले का विरोध किया इमरजेंसी लगाने का फैसला प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की अध्यक्षता में हुई आपात कैबिनेट बैठक में लिया गया। बैठक में प्रांत की सुरक्षा स्थिति पर चर्चा हुई। सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 232 और 234 के तहत इमरजेंसी और गवर्नर शासन लागू करने का फैसला किया। हालांकि, पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी PTI ने इस कदम का विरोध किया है। पार्टी अध्यक्ष गौहर अली खान ने इसे अलोकतांत्रिक बताते हुए कहा कि प्रांत के अधिकार कमजोर करके शांति और स्थिरता नहीं लाई जा सकती। शहबाज ने अफगानिस्तान पर आतंकवाद पर लगाम न लगाने का आरोप लगाया शरीफ ने कैबिनेट बैठक में कहा कि PTI की अगुवाई वाली प्रांतीय सरकार को देश की अर्थव्यवस्था को अस्थिर करने की इजाजत नहीं दी जा सकती। उन्होंने खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में आम नागरिकों, पुलिसकर्मियों, सुरक्षाबलों और बच्चों की मौतों पर भी चिंता जताई। शहबाज ने यह भी कहा कि पाकिस्तान लगातार पड़ोसी अफगानिस्तान से आतंकवादी संगठनों पर लगाम लगाने की अपील करता रहा है, लेकिन उनकी शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा। PTI बोली- फैसले से हिंसा और बढ़ सकती है इमरान खान के करीबी सहयोगी और PTI प्रवक्ता जुल्फिकार बुखारी ने इस फैसले को ‘हास्यास्पद’ बताया। उन्होंने दावा किया कि खैबर पख्तूनख्वा पाकिस्तान की एकमात्र वैध रूप से चुनी गई सरकार है। बुखारी ने कहा कि इस फैसले से हिंसा, अस्थिरता और आम लोगों की परेशानी बढ़ सकती है। उन्होंने कहा कि बातचीत के जरिए विवाद सुलझाने का रास्ता अब भी खुला था। उनके मुताबिक, सरकार के इस कदम से लगता है कि वह बातचीत करना ही नहीं चाहती थी। इससे पहले इमरान खान के समर्थकों के प्रदर्शन कई बार हिंसक हो चुके हैं। 2024 में हुए प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षाकर्मियों और आम नागरिकों की भी मौत हुई थी। इमरजेंसी और गवर्नर शासन का क्या मतलब है? पाकिस्तान के संविधान के अनुच्छेद 232 के तहत युद्ध, दूसरे देश के हमले या देश के अंदर बिगड़े ऐसे हालात में इमरजेंसी लगाई जा सकती है, जिन्हें प्रांतीय सरकार संभाल न पा रही हो। इमरजेंसी लगने पर केंद्र सरकार को प्रांत के मामलों में दखल देने और कुछ मुद्दों पर कानून बनाने के ज्यादा अधिकार मिल जाते हैं। वहीं, अनुच्छेद 234 के तहत जब किसी प्रांत की सरकार संविधान के मुताबिक काम नहीं कर पाती, तो वहां गवर्नर शासन लगाया जा सकता है। इसके लिए राष्ट्रपति के फैसले को संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक से मंजूरी लेनी होती है। मंजूरी नहीं मिलने पर गवर्नर शासन दो महीने बाद खत्म हो जाता है। मंजूरी मिलने पर भी इसे एक बार में दो महीने के लिए ही बढ़ाया जा सकता है। यह व्यवस्था कुल छह महीने से ज्यादा नहीं चल सकती। पाकिस्तान सरकार ने इस फैसले में अनुच्छेद 233 का इस्तेमाल नहीं किया है। यह अनुच्छेद इमरजेंसी के दौरान नागरिकों के कुछ बुनियादी अधिकारों पर रोक लगाने से जुड़ा है। ————————- ये खबर भी पढ़ें… पाकिस्तान में 4 प्रांतों के 15 हिस्से करने की तैयारी:पंजाब-सिंध में नवाज और भुट्टो परिवार कमजोर होंगे पाकिस्तान के आर्मी चीफ असीम मुनीर देश के 4 प्रांतों को 12 से 15 हिस्सों में बांटकर सियासत का पूरा गणित बदलना चाहते हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें…
Imran Khan: इमरान खान ने आखिरकार अपनी आने वाली फिल्म ‘अधूरे हम अधूरे तुम’ की रिलीज डेट कन्फर्म कर दी है। बड़े पर्दे पर इमरान खान की वापसी बॉलीवुड की सबसे चर्चित वापसी कहानियों में से एक रही है। ‘कट्टी बट्टी’ (2015) के बाद से ही यह एक्टर फिल्मों से काफी हद तक दूर रहे हैं, जिससे फैन्स यह सोचते रहे कि वे कब किसी प्रोजेक्ट में लीड रोल में नजर आएंगे।
इमरान ने अब हिंदुस्तान टाइम्स को बताया-“हमें बताया गया है कि वे इसे दिसंबर 18 को रिलीज करना चाहते हैं। इसलिए हम पोस्ट-प्रोडक्शन का काम तेजी से पूरा करने की कोशिश कर रहे हैं। यह OTT पर रिलीज होगी, न कि सिनेमाघरों में। इसलिए मुझे नहीं लगता कि तारीख से कोई फर्क पड़ता है। मैं बस इस बात से खुश हूं कि आखिरकार हम यह फिल्म सभी के साथ शेयर कर सकते हैं।”
हालांकि इमरान ने इस साल की शुरुआत में वीर दास की फिल्म ‘हैप्पी पटेल: खतरनाक जासूस’ में एक छोटा सा रोल करके दर्शकों को चौंका दिया था। लेकिन लीड एक्टर के तौर पर उनकी वापसी एक राज बनी हुई थी। अब एक्टर ने आखिरकार कन्फर्म कर दिया है कि उनकी वापसी वाली फ़िल्म इस साल क्रिसमस से पहले रिलीज होगी। यह फिल्म नेटफिलिक्स पर उपलब्ध होगी।
इमरान के अलावा इस फिल्म में भूमि पेडनेकर और गुरफतेह पीरजादा भी हैं। इसे दानिश असलम ने डायरेक्ट किया है। इससे पहले ‘द हॉलीवुड रिपोर्टर इंडिया’ के साथ बातचीत में इमरान ने इस फिल्म को “एक मैच्योर रोमांटिक कॉमेडी… जो मेरी मौजूदा उम्र के हिसाब से सही है” बताया था।
इससे पहले News18 से बात करते हुए इमरान ने बताया था कि ‘अधूरे हम अधूरे तुम’ टाइटल ‘ब्रेक के बाद’ फिल्म के एक गाने से लिया गया है। हालांकि यह फिल्म ‘ब्रेक के बाद’ का सीक्वल नहीं है। लेकिन वे इसे उसका ‘स्पिरिचुअल सक्सेसर’ (आध्यात्मिक उत्तराधिकारी) मानते हैं। इसमें ‘ब्रेक के बाद’ की झलक भी शामिल की है। कहा जा रहा है कि यह एक मैच्योर रोमांटिक कॉमेडी है जो इमरान के निजी जीवन के अनुभवों—जैसे शादी और अलगाव—पर काफी हद तक आधारित है, जिससे यह एक्टर के लिए एक बहुत ही पर्सनल प्रोजेक्ट बन गया है।
इस प्रोजेक्ट के शुरू होने के बारे में बात करते हुए, इमरान ने कहा कि उन्हें फिल्म बनाने की इच्छा हुई और उनके मन में कुछ ऐसे विषय थे जिन पर वे काम करना चाहते थे। वे पहले से ही दानिश की सोच और काम करने के तरीके से वाकिफ थे, इसलिए उन्होंने एक प्रोजेक्ट पर साथ काम करने के लिए उनसे संपर्क किया और दानिश ने भी पूरे उत्साह के साथ हामी भरी। दानिश पिछले लगभग एक दशक से अपने मन में एक कहानी पर काम कर रहे थे। इमरान को वह कहानी तुरंत पसंद आ गई। इसके बाद दोनों ने मिलकर इस फिल्म को बनाने का फैसला किया।
पाकिस्तान में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की रिहाई को लेकर हालात बिगड़ते जा रहे हैं। इमरान समर्थकों का लॉन्ग मार्च अब पेशावर से महज 30 किलोमीटर दूर पहुंच गया है। मार्च को देखते हुए प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने मंगलवार को इमरान समर्थकों को बातचीत का न्योता दिया। शहबाज का यह बयान इसलिए अहम है, क्योंकि सोमवार को ही उनकी सरकार ने इमरान समर्थकों से बातचीत करने से इनकार किया था। हालांकि, इमरान समर्थकों ने शहबाज के बातचीत के प्रस्ताव को साफ तौर पर ठुकरा दिया है। उनका कहना है कि वे इमरान खान की रिहाई की मांग से पीछे नहीं हटेंगे। मार्च की तस्वीरें… शहबाज बोले- आर्थिक सुधार को नुकसान पहुंच सकता है इमरान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के समर्थकों ने 4 अक्टूबर को यह मार्च शुरू किया था। शहबाज शरीफ लगातार चेतावनी दे रहे हैं कि लंबे समय तक चलने वाला प्रदर्शन पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति सुधारने की कोशिशों को नुकसान पहुंचा सकता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार पिछले ढाई साल से देश की अर्थव्यवस्था को स्थिर करने के लिए काम कर रही है। उन्होंने कहा कि इन कोशिशों को रोकने की कोई भी कोशिश राज्य से दुश्मनी के बराबर होगी। शहबाज ने कहा, हम ऐसा नहीं होने देंगे। कानून अपना काम करेगा। लोगों की जान और संपत्ति की सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी है और हम हर हाल में इसे सुनिश्चित करेंगे। मार्च और बढ़ा तो शहबाज की कुर्सी खतरे में आएगी पाकिस्तान में भारतीय उच्चायोग में रहे अविनाश मोहनानी ने कहा कि इमरान समर्थकों का लॉन्ग मार्च खैबर से पंजाब में पहुंचते ही शहबाज सरकार पर दबाव बढ़ाएगा। व्यापक समर्थन मिला तो आर्मी चीफ मुनीर के लिए भी इसे रोकना मुश्किल होगा। इसी वजह से मार्च को रोकने की कोशिश तेज है। इमरान की लोकप्रियता अब भी कायम है और उनकी रिहाई की चाबी मुनीर के पास है। वहीं, सीनियर फैलो और राजनीतिक विश्लेषक सुशांत सरीन के मुताबिक, आसिम मुनीर लॉन्ग मार्च के बहाने शहबाज शरीफ को घेर रहे हैं। सरीन के मुताबिक, मुनीर ने पहले मार्च के रास्ते में खैबर में फ्रंटियर फोर्स तैनात की। इसके बाद मंगलवार को शहबाज से इमरान समर्थकों को बातचीत के लिए बुलाने को कहा। उनका कहना है कि मुनीर शहबाज को कमजोर प्रधानमंत्री के तौर पर पेश करना चाहते हैं, जिससे लोगों का सरकार के खिलाफ गुस्सा बढ़े। पाकिस्तान की राजनीति के इतिहास को देखते हुए शहबाज का सत्ता से जाना तय माना जा रहा है। इमरान 2023 से जेल में बंद, पत्नी-बहनें भी कैद हैं 73 साल के इमरान खान 2023 से रावलपिंडी की अडियाला जेल में बंद हैं। उन पर 100 से ज्यादा मामले दर्ज हैं। तीन मामलों में सजा सुनाई गई है। अल कादिर ट्रस्ट केस में 14 साल, दस्तावेज लीक में 10 साल और तोशाखाना केस में 3 साल की सजा है। तोशाखाना केस में इमरान की पत्नी बुशरा भी जेल में है। सितंबर में इमरान की बहन अलीमा, उजमा और नूरीन को भी एहतियातन हिरासत में लिया गया है। 18 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने इमरान को मेडिकल जांच और इलाज के लिए इस्लामाबाद के निजी अस्पताल में शिफ्ट करने का आदेश दिया था। 20 अगस्त की रात उन्हें निजी अस्पताल की बजाय पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (PIMS) ले जाया गया। जांच के बाद उन्हें वापस जेल भेज दिया गया। मार्च इस्लामाबाद से पहले रोकने की तैयारी खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी ने घोषणा की कि मार्च जारी रहेगा। टैंक, डेरा इस्माइल खान, दक्षिण वजीरिस्तान, उत्तर वजीरिस्तान, बन्नू और लक्की मारवत के समर्थक गांधी चौक से मार्च में शामिल हुए। प्रधानमंत्री शरीफ के राजनीतिक सलाहकार राणा सनाउल्लाह ने कहा कि प्रदर्शनकारियों को इस्लामाबाद में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा। केंद्र सरकार ने राजधानी की ओर जाने वाली सड़कों पर अतिरिक्त सुरक्षाबल तैनात किए हैं। सरकार से दो दौर की बातचीत, पर सहमति नहीं बनी सरकार और PTI के बीच शुक्रवार और शनिवार को दो दौर की बातचीत हुई, लेकिन सहमति नहीं बनी। PTI इमरान से तत्काल मुलाकात और उन्हें ऐसे अस्पताल में शिफ्ट करने की मांग की, जहां उनके निजी डॉक्टर जांच और इलाज कर सकें। सरकार की ओर से प्रदर्शन रद्द करने की शर्त रखी गई थी। ————————— यह खबर भी पढ़ें… पाकिस्तान का ड्रोन हमलों से बचने के लिए सस्ता तरीका:सेना-पुलिस के ठिकानों पर मछली पकड़ने वाला जाल लगा रहे, दावा- इसमें ड्रोन फंसकर फट जाएंगे पाकिस्तान में ड्रोन हमलों से बचने के लिए पुलिस और सेना अब मछली पकड़ने वाले जाल का इस्तेमाल कर रही है। अल जजीरा के मुताबिक, खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के संवेदनशील इलाकों में पुलिस चौकियों और सुरक्षा ठिकानों के ऊपर कई मीटर की ऊंचाई पर ये जाल लगाए जा रहे हैं। पूरी खबर पढ़ें…
पाकिस्तान में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की रिहाई को लेकर हालात बिगड़ते जा रहे हैं। इमरान समर्थकों का लॉन्ग मार्च अब पेशावर से महज 30 किलोमीटर दूर है। मार्च को देखते हुए प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने मंगलवार को इमरान समर्थकों को बातचीत का न्योता दिया। शहबाज का यह बयान इसलिए अहम है, क्योंकि सोमवार को ही उनकी सरकार ने इमरान समर्थकों से बातचीत करने से इनकार किया था। हालांकि, इमरान समर्थकों ने शहबाज के बातचीत के प्रस्ताव को साफ तौर पर ठुकरा दिया है। उनका कहना है कि वे इमरान खान की रिहाई की मांग से पीछे नहीं हटेंगे। इमरान समर्थकों ने 4 अक्टूबर से खैबर पखतूनख्वा से मार्च शुरू किया है। ये लोग करीब 180 किमी की दूरी तय कर इस्लामाबाद पहुंचेंगे। मार्च की तस्वीरें… शहबाज बोले- आर्थिक सुधार को नुकसान पहुंच सकता है शहबाज शरीफ लगातार चेतावनी दे रहे हैं कि लंबे समय तक चलने वाला प्रदर्शन पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति सुधारने की कोशिशों को नुकसान पहुंचा सकता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार पिछले ढाई साल से देश की अर्थव्यवस्था को स्थिर करने के लिए काम कर रही है। उन्होंने कहा कि इन कोशिशों को रोकने की कोई भी कोशिश राज्य से दुश्मनी के बराबर होगी। शहबाज ने कहा, हम ऐसा नहीं होने देंगे। कानून अपना काम करेगा। लोगों की जान और संपत्ति की सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी है और हम हर हाल में इसे सुनिश्चित करेंगे। मार्च और बढ़ा तो शहबाज की कुर्सी खतरे में आएगी पाकिस्तान में भारतीय उच्चायोग में रहे अविनाश मोहनानी ने कहा कि इमरान समर्थकों का लॉन्ग मार्च खैबर से पंजाब में पहुंचते ही शहबाज सरकार पर दबाव बढ़ाएगा। व्यापक समर्थन मिला तो आर्मी चीफ मुनीर के लिए भी इसे रोकना मुश्किल होगा। इसी वजह से मार्च को रोकने की कोशिश तेज है। इमरान की लोकप्रियता अब भी कायम है और उनकी रिहाई की चाबी मुनीर के पास है। वहीं, सीनियर फैलो और राजनीतिक विश्लेषक सुशांत सरीन के मुताबिक, आसिम मुनीर लॉन्ग मार्च के बहाने शहबाज शरीफ को घेर रहे हैं। सरीन के मुताबिक, मुनीर ने पहले मार्च के रास्ते में खैबर में फ्रंटियर फोर्स तैनात की। इसके बाद मंगलवार को शहबाज से इमरान समर्थकों को बातचीत के लिए बुलाने को कहा। उनका कहना है कि मुनीर शहबाज को कमजोर प्रधानमंत्री के तौर पर पेश करना चाहते हैं, जिससे लोगों का सरकार के खिलाफ गुस्सा बढ़े। पाकिस्तान की राजनीति के इतिहास को देखते हुए शहबाज का सत्ता से जाना तय माना जा रहा है। इमरान 2023 से जेल में बंद, पत्नी-बहनें भी कैद हैं 73 साल के इमरान खान 2023 से रावलपिंडी की अडियाला जेल में बंद हैं। उन पर 100 से ज्यादा मामले दर्ज हैं। तीन मामलों में सजा सुनाई गई है। अल कादिर ट्रस्ट केस में 14 साल, दस्तावेज लीक में 10 साल और तोशाखाना केस में 3 साल की सजा है। तोशाखाना केस में इमरान की पत्नी बुशरा भी जेल में है। सितंबर में इमरान की बहन अलीमा, उजमा और नूरीन को भी एहतियातन हिरासत में लिया गया है। 18 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने इमरान को मेडिकल जांच और इलाज के लिए इस्लामाबाद के निजी अस्पताल में शिफ्ट करने का आदेश दिया था। 20 अगस्त की रात उन्हें निजी अस्पताल की बजाय पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (PIMS) ले जाया गया। जांच के बाद उन्हें वापस जेल भेज दिया गया। मार्च इस्लामाबाद से पहले रोकने की तैयारी खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी ने घोषणा की कि मार्च जारी रहेगा। टैंक, डेरा इस्माइल खान, दक्षिण वजीरिस्तान, उत्तर वजीरिस्तान, बन्नू और लक्की मारवत के समर्थक गांधी चौक से मार्च में शामिल हुए। प्रधानमंत्री शरीफ के राजनीतिक सलाहकार राणा सनाउल्लाह ने कहा कि प्रदर्शनकारियों को इस्लामाबाद में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा। केंद्र सरकार ने राजधानी की ओर जाने वाली सड़कों पर अतिरिक्त सुरक्षाबल तैनात किए हैं। सरकार से दो दौर की बातचीत, पर सहमति नहीं बनी सरकार और PTI के बीच शुक्रवार और शनिवार को दो दौर की बातचीत हुई, लेकिन सहमति नहीं बनी। PTI इमरान से तत्काल मुलाकात और उन्हें ऐसे अस्पताल में शिफ्ट करने की मांग की, जहां उनके निजी डॉक्टर जांच और इलाज कर सकें। सरकार की ओर से प्रदर्शन रद्द करने की शर्त रखी गई थी। ————————— यह खबर भी पढ़ें… पाकिस्तान का ड्रोन हमलों से बचने के लिए सस्ता तरीका:सेना-पुलिस के ठिकानों पर मछली पकड़ने वाला जाल लगा रहे, दावा- इसमें ड्रोन फंसकर फट जाएंगे पाकिस्तान में ड्रोन हमलों से बचने के लिए पुलिस और सेना अब मछली पकड़ने वाले जाल का इस्तेमाल कर रही है। अल जजीरा के मुताबिक, खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के संवेदनशील इलाकों में पुलिस चौकियों और सुरक्षा ठिकानों के ऊपर कई मीटर की ऊंचाई पर ये जाल लगाए जा रहे हैं। पूरी खबर पढ़ें…
पाकिस्तान की सियासत रविवार को गरमा गई। पूर्व पीएम इमरान खान की रिहाई की मांग को लेकर उनकी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के समर्थकों ने खैबर पख्तूनख्वा के लक्की मारवत से इस्लामाबाद की ओर लॉन्ग मार्च शुरू किया। हजारों लोग करीब 275 किमी दूर इस्लामाबाद के लिए निकले। लक्की मारवत से करीब 3 किमी आगे फ्रंटियर फोर्स और इमरान समर्थक आमने-सामने आ गए। दोनों ओर से पथराव हुआ और पुलिस ने लाठीचार्ज शुरू कर दिया। अफरातफरी के बीच इमरान समर्थकों ने भी जमकर मुकाबला किया। लगभग एक घंटे बाद मार्च फिर से शुरू हो गया। लॉन्ग मार्च की शुरुआत में ही हिंसक झड़पों से खतरे के बीच पीटीआई सांसद शहजाद शहबाज और आर्मी चीफ आसिम मुनीर ने देर शाम बैठक की है। हालांकि बैठक में किए गए फैसलों के बारे में अभी कुछ पता नहीं चला है। इससे पहले शहबाज सरकार ने शनिवार रात को पंजाब सूबे में बड़ा क्रैकडाउन किया। इमरान की पार्टी PTI के कार्यकर्ताओं की बड़े पैमाने पर धरपकड़ की गई। PTI का दावा है कि उसके लगभग दो हजार कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी की गई है। वहीं इस्लामाबाद में संसद और हाईवे की सुरक्षा बढ़ाते हुए कई रास्तों को कंटेनर लगाकर बंद कर दिया गया है। इमरान 2023 से जेल में बंद, पत्नी-बहनें भी कैद हैं 73 साल के इमरान खान 2023 से रावलपिंडी की अडियाला जेल में बंद हैं। उन पर लगभग 100 से ज्यादा मामले हैं। तीन मामलाें में उन्हें सजा सुनाई गई है। अल कादिर ट्रस्ट केस में 14 साल, दस्तावेज लीक में 10 साल और तोशाखाना केस में 3 साल की सजा है। तोशाखाना केस में इमरान की पत्नी बुशरा भी जेल में है। जबकि सितंबर में इमरान की बहन अलीमा, उजमा और नूरीन भी ऐतिहाती हिरासत में है। 18 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने इमरान को मेडिकल जांच और इलाज के लिए इस्लामाबाद के निजी अस्पताल में शिफ्ट करने का आदेश दिया था। सरकार ने इसे चुनौती दी। 20 अगस्त की रात उन्हें शिफा इंटरनेशनल अस्पताल की जगह सरकारी पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (PIMS) ले जाया गया। सरकार ने इसकी वजह सुरक्षा बताई। जांच के बाद उन्हें वापस जेल भेज दिया गया, जबकि उनके निजी डॉक्टर को जांच में शामिल होने की अनुमति नहीं मिली। सरकार से दो दौर की बातचीत के बाद भी नहीं बनी सहमति सरकार और PTI के बीच शुक्रवार और शनिवार को दो दौर की बातचीत हुई, लेकिन सहमति नहीं बनी। PTI इमरान से तत्काल मुलाकात और उन्हें ऐसे अस्पताल में शिफ्ट करने की मांग कर रही थी, जहां उनके निजी डॉक्टर जांच और इलाज कर सकें। इसके अलावा पार्टी ने इमरान की बहनों और गिरफ्तार समर्थकों की रिहाई, बुशरा बीबी की मेडिकल जांच और मामलों की बिना हस्तक्षेप सुनवाई की मांग रखी। सरकार की ओर से प्रदर्शन रद्द करने की शर्त रखी गई थी। खैबर पख्तूनख्वा में आतंकवाद पर भी मतभेद पाकिस्तान के गृह राज्य मंत्री तलाल चौधरी ने कहा कि बातचीत मुख्य रूप से इसलिए विफल हुई क्योंकि खैबर पख्तूनख्वा सरकार केंद्र को आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में सहयोग का भरोसा नहीं दिला सकी। PTI की सरकार वाले इस प्रांत में लंबे समय से आतंकी हिंसा होती रही है। इमरान समर्थक बोले- जान की परवाह नहीं, पीछे नहीं हटेंगे मार्च करक, कोहाट और पेशावर से गुजरेगा, इस्लामाबाद में प्रवेश रोकने की तैयारी खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी ने रविवार रात घोषणा की कि मार्च जारी रहेगा। टैंक, डेरा इस्माइल खान, दक्षिण वजीरिस्तान, उत्तर वजीरिस्तान, बन्नू और लक्की मारवत के समर्थक गांधी चौक से मार्च में शामिल हुए। काफिला करक, कोहाट और पेशावर होते हुए आगे बढ़ेगा। 6 अक्टूबर को कोहाट, हंगू, कुर्रम और ओरकजई के लोग इसमें शामिल होंगे, जबकि 7 अक्टूबर को पेशावर और 8 अक्टूबर को चरसद्दा व मोहम्मंद के समर्थक जुड़ेंगे। वहीं प्रधानमंत्री शरीफ के राजनीतिक सलाहकार राणा सनाउल्लाह ने कहा कि प्रदर्शनकारियों को इस्लामाबाद में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा। केंद्र सरकार ने राजधानी की ओर जाने वाली सड़कों पर अतिरिक्त सुरक्षाबल तैनात किए हैं और रास्तों पर शिपिंग कंटेनर लगाए हैं। मार्च और बढ़ा तो शहबाज की कुर्सी खतरे में आएगी पाकिस्तान में भारतीय उच्चायोग में नियुक्त रहे अविनाश मोहनानी ने बताया कि इमरान समर्थकों का लॉन्ग मार्च खैबर से पंजाब में दाखिल होते ही शहबाज सरकार पर दबाव बढ़ाएगा। जाब में व्यापक समर्थन मिला तो आर्मी चीफ मुनीर के लिए भी इसे रोकना मुश्किल होगा। इसलिए मार्च को दबाने की कोशिश तेज है। इमरान की लोकप्रियता अब भी कायम है और उनकी रिहाई की चाबी मुनीर के पास है।
पाकिस्तान में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) और सरकार के बीच आज फिर बातचीत होगी। बैठक में 4 अक्टूबर को होने वाले PTI के इस्लामाबाद मार्च को टालने और राजनीतिक तनाव कम करने पर चर्चा होगी।
शुक्रवार को दोनों पक्षों के बीच पहली बैठक हुई थी, लेकिन किसी तरह की सहमति नहीं बन पाई। PAK संसद स्पीकर अयाज सादिक के चैंबर में दोपहर 2 बजे होने वाली बैठक में सरकार, पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) और PTI के प्रतिनिधि शामिल होंगे। PTI ने मांग रखी है कि इमरान खान से तुरंत मुलाकात करने दी जाए। उन्हें ऐसे अस्पताल ले जाया जाए, जहां उनके निजी डॉक्टर उनकी जांच कर सकें। पार्टी ने इमरान की बहनों और प्रदर्शन से पहले गिरफ्तार किए गए अन्य लोगों को रिहा करने की मांग भी की है। इसके अलावा, इमरान की पत्नी बुशरा बीबी की मेडिकल जांच कराने और उनके खिलाफ चल रहे मामलों की बिना किसी दखल के सुनवाई करने की मांग रखी गई है। 4 अक्टूबर से इस्लामाबाद मार्च निकालने की तैयारी PTI ने पहले 27 सितंबर को इस्लामाबाद तक लॉन्ग मार्च निकालने की घोषणा की थी। बाद में इसे एक हफ्ते टालकर 4 अक्टूबर कर दिया गया। जुल्फिकार बुखारी के मुताबिक, मार्च खैबर पख्तूनख्वा के लक्की मरवत में गांधी चौक से शुरू होगा। इसका पहला पड़ाव करक और दूसरा 5 अक्टूबर को कोहाट में होगा। इसके बाद मार्च पेशावर जिले में दाखिल होगा। मार्च को देखते हुए सरकार ने इस्लामाबाद में सुरक्षा बढ़ा दी है। राजधानी में जाने वाले रास्तों पर शिपिंग कंटेनर लगाए गए हैं और अतिरिक्त पुलिसकर्मियों को तैनात किया जा रहा है। शुक्रवार की बैठक में बातचीत के जरिए समाधान पर बात हुई सरकार और PTI के बीच शुक्रवार को हुई पहली बैठक में देश के राजनीतिक हालात और मतभेद दूर करने पर चर्चा हुई। तीनों पक्षों ने बातचीत से समस्याओं का हल निकालने पर जोर दिया। बैठक में सरकार की ओर से प्रधानमंत्री के राजनीतिक सलाहकार राणा सनाउल्लाह के नेतृत्व में 6 सदस्यीय टीम शामिल हुई। इसमें गृह मंत्री मोहसिन नकवी भी थे। PTI की ओर से पार्टी अध्यक्ष बैरिस्टर गौहर अली खान और पूर्व स्पीकर असद कैसर समेत कई नेता पहुंचे। वहीं, PPP की ओर से सैयद नदीम कमर, शेरी रहमान और एजाज जखरानी शामिल हुए। स्पीकर बोले- संसद में ही मुद्दों का समाधान संभव नेशनल असेंबली के स्पीकर अयाज सादिक दोनों पक्षों के बीच बातचीत करा रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह सिर्फ मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। देश के मुद्दों और मतभेदों को सुलझाने के लिए संसद ही सही मंच है। बैठक से पहले सरकार के प्रतिनिधि राणा सनाउल्लाह ने कहा कि विरोध-प्रदर्शन से समस्याएं हल नहीं होतीं। बातचीत से ही समाधान निकल सकता है। उन्होंने कहा कि इमरान खान के खिलाफ चल रहे मामलों पर फैसला सरकार नहीं, अदालतें करेंगी। वहीं, PTI अध्यक्ष गौहर अली खान ने बातचीत सफल होने की उम्मीद जताई। अगस्त 2023 से जेल में हैं इमरान 73 साल के इमरान खान अगस्त 2023 से जेल में हैं। उन्हें तोशाखाना मामले में 3 साल की सजा मिलने के बाद गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद उन पर सिफर, अल-कादिर ट्रस्ट और इद्दत निकाह समेत कई मामले दर्ज हुए। बाद में सिफर और इद्दत निकाह मामलों में उन्हें अदालत से राहत मिल गई। तोशाखाना मामले में भी उनकी एक सजा रोक दी गई। इसके बावजूद दूसरे मामलों के चलते वह अभी जेल में हैं। इमरान खान और उनकी पार्टी PTI का कहना है कि 2022 में प्रधानमंत्री पद से हटने के बाद उनके खिलाफ राजनीतिक वजहों से मामले दर्ज किए गए। उनका आरोप है कि उन्हें राजनीति और चुनाव से दूर रखने के लिए ऐसा किया गया। वहीं, पाकिस्तान सरकार और जांच एजेंसियां इन आरोपों को खारिज करती हैं। उनका कहना है कि ये मामले कानूनी प्रक्रिया के तहत चल रहे हैं। ———————– ये खबर भी पढ़ें… पाकिस्तान में ट्रम्प के बेटों की कंपनी ड्रोन यूनिट लगाएगी:3 साइट्स चुनीं; भारत की 4 फैक्ट्री तैयार, 3 बनाई जा रहीं, 2 प्रस्तावित अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बेटों से जुड़ी पॉवरस कंपनी पाकिस्तान में ड्रोन प्रोडक्शन यूनिट लगाने जा रही है। एरिक ट्रम्प और डोनाल्ड ट्रम्प जूनियर की कंपनी ने पाकिस्तानी आर्मी चीफ आसिम मुनीर के साथ मर्री में सीक्रेट मीटिंग की है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

