ट्रम्प बोले- पेरिस जल्द मुस्लिम शहर बन जाएगा:मैक्रों को 8 साल पहले चेताया था; फ्रांस में हिंसा के लिए इमिग्रेशन नीति को जिम्मेदार ठहराया

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोमवार को कहा कि पेरिस जल्द मुस्लिम शहर बन जाएगा। उन्होंने फ्रांस में जारी हिंसा के लिए राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की इमिग्रेशन नीति को जिम्मेदार ठहराया। ट्रम्प लंबे समय से इमिग्रेशन पर सख्ती करने की वकालत करते रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि फ्रांस सरकार ने दूसरे देशों से आने वाले लोगों पर रोक लगाने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए। ट्रम्प ने दावा किया कि उन्होंने करीब 8 साल पहले मैक्रों को चेतावनी दी थी कि दूसरे देशों से आने वाले लोगों को इतनी बड़ी संख्या में फ्रांस में आने देना बड़ी गलती है। फ्रांस में महंगाई के खिलाफ प्रदर्शन में हिंसा और तोड़फोड़ फ्रांस के कई शहरों में 17 अक्टूबर को प्रदर्शन के दौरान हिंसक झड़पें हुई। इन घटनाओं में सरकारी इमारतों में आग लगाने, दुकानों में लूटपाट करने और ऐतिहासिक इमारतों को निशाना बनाने जैसी घटनाएं सामने आई हैं। फ्रांस की पुलिस ने 2400 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया है। वहीं, हिंसा रोकने की कोशिश में करीब 1000 पुलिसकर्मी और सैना के जवान घायल हुए हैं। इसके बाद प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू ने सोमवार को सरकार की इमरजेंसी मीटिंग बुलाई। उन्होंने सोमवार शाम से पेरिस, लिली, नीस समेत कई शहरों में कर्फ्यू लगाने को कहा है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो देश में आपातकाल भी लगाया जा सकता है। एक्सपर्ट- हिंसा के पीछे सिर्फ इमिग्रेशन को वजह मानना सही नहीं ट्रम्प ने फ्रांस में हो रही हिंसा को दूसरे देशों से लोगों को आने देने की नीति से जोड़ा है। हालांकि, एक्सपर्ट्स के मुताबिक फ्रांस के हालात के पीछे महंगाई, रोजमर्रा की चीजों के बढ़ते दाम, आर्थिक परेशानियां, सरकारी सुविधाओं पर बढ़ता दबाव और युवाओं की नाराजगी जैसे मुद्दे भी हैं। फर्स्टपोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिणपंथी नेता और कुछ टिप्पणीकार इमिग्रेशन पर सख्ती करने की मांग कर रहे हैं। हालांकि, हिंसा के लिए इमिग्रेशन कितना जिम्मेदार है, यह अलग सवाल है। मैक्रों बोले- तोड़फोड़ करने वालों को कीमत चुकानी होगी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने हिंसक प्रदर्शन के बाद रविवार को सख्त कार्रवाई का वादा किया। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने तोड़फोड़ और लूटपाट की है, उन्हें इसकी कीमत चुकानी होगी। मैक्रों ने माना कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले लोगों की कुछ मांगें जायज हो सकती हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों की मांगों को हिंसा और तोड़फोड़ करने वालों की हरकतों के साथ नहीं जोड़ना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि फ्रांस के नागरिक अपने ही देश के खिलाफ ऐसी हरकतें कैसे कर सकते हैं। मैक्रों को देश का सबसे कमजोर राष्ट्रपति माना जा रहा फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों अपने राजनीतिक करियर के सबसे मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं। उनके विरोधी उन्हें अब तक का सबसे कमजोर राष्ट्रपति करार दे रहे हैं। हाल ही में हुए एक सर्वे में सिर्फ 15% लोगों ने उनके प्रति सकारात्मक राय जताई, जबकि 82% लोगों ने उनके कामकाज पर नाराजगी जताई। महंगाई, कमजोर अर्थव्यवस्था, बढ़ता सरकारी कर्ज और शिक्षा व दूसरी सरकारी सेवाओं को लेकर लोगों का गुस्सा बढ़ रहा है। गूगल पर ट्रेंड कर रहा फ्रांस प्रोटेस्ट ———————— यह खबर भी पढ़ें… फ्रांस में बार-बार क्यों भड़कते हैं प्रदर्शन: पेंशन से लेकर महंगाई तक, आंदोलन के पीछे 5 बड़ी वजहें समझिए फ्रांस दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। यहां आधुनिक शहर हैं और शिक्षा, स्वास्थ्य जैसी सरकारी सुविधाओं का बड़ा तंत्र है। इसके बावजूद, सरकार के फैसलों को लेकर यहां बार-बार बड़े आंदोलन होते हैं। पूरी खबर पढ़ें…

SBI की धांसू स्कीम! बिना किसी रिस्क के मिलेगी पक्की मंथली इनकम, मैच्योरिटी पर 110% रिफंड भी!

SBI Life Smart Platina Plus: एसबीआई लाइफ का ‘स्मार्ट प्लैटिनम प्लस’ एक नॉन-लिंक्ड सेविंग्स प्लान है, जो बिना किसी मार्केट रिस्क के गारंटीड रिटर्न और लाइफ कवर देता है। सुरक्षित और तयशुदा इनकम के जरिए अपने लॉन्ग-टर्म फाइनेंशियल गोल्स को पूरा करने के लिए यह एक बेहतरीन विकल्प है।

अगर आप बिना किसी मार्केट रिस्क के एक तयशुदा और सुरक्षित इनकम का जरिया तलाश रहे हैं, तो यह प्लान आपके फाइनेंशियल गोल्स को पूरा करने में बेहद मददगार साबित हो सकता है।

SBI Life स्मार्ट प्लैटिनम प्लस की मुख्य विशेषताएं

इस पॉलिसी की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसके रिटर्न पूरी तरह फिक्स और कॉन्ट्रैक्टुअल होते हैं, यानी शेयर बाजार की चाल का इस पर कोई असर नहीं पड़ता है। आइए जानते हैं इसके जरूरी नियम और फीचर्स:

प्लान टाइप: यह एक नॉन-लिंक्ड और नॉन-पार लाइफ इंश्योरेंस सेविंग्स प्लान है।

इनकम विकल्प: इसमें दो मुख्य विकल्प मिलते हैं- पहला ‘गारंटीड इनकम ऑप्शन’ (रेगुलर फिक्स इनकम के लिए) और दूसरा ‘लाइफ इनकम ऑप्शन’ (पेआउट पीरियड के दौरान रेगुलर गारंटीड इनकम)।

प्रीमियम भुगतान अवधि (PPT): पॉलिसीधारक अपनी सुविधा के अनुसार 6, 7, 8 या 10 साल के लिए प्रीमियम का भुगतान चुन सकते हैं।

न्यूनतम वार्षिक प्रीमियम: इस योजना का लाभ उठाने के लिए न्यूनतम सालाना प्रीमियम ₹50,000 तय किया गया है।

न्यूनतम सम एश्योर्ड: प्लान के तहत न्यूनतम बीमा राशि ₹5,50,000 है।

पेआउट फ्रीक्वेंसी: निवेशक अपनी जरूरत के हिसाब से इनकम का भुगतान सालाना, छमाही, तिमाही या मासिक आधार पर ले सकते हैं।

मैच्योरिटी और डेथ बेनिफिट्स

मैच्योरिटी बेनिफिट: पॉलिसी की अवधि पूरी होने पर, निवेशक को कुल चुकाए गए प्रीमियम का 110% हिस्सा रिफंड कर दिया जाता है।

डेथ बेनिफिट: पॉलिसी अवधि के दौरान पॉलिसीधारक की दुर्भाग्यपूर्ण मृत्यु होने पर नॉमिनी को एकमुश्त डेथ बेनिफिट मिलता है। इसके अलावा, गारंटीड इनकम विकल्प के तहत कमेंसमेंट के बाद भी पेआउट मिलने का प्रावधान जारी रह सकता है।

पॉलिसी लोन सुविधा: वित्तीय आपातकाल के समय पॉलिसीधारक सरेंडर वैल्यू जो कम से कम 2 साल के पूरे प्रीमियम भुगतान के बाद मिलती है उसके 50% तक का लोन ले सकते हैं।

ऑप्शनल राइडर्स: सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए इसमें एसबीआई लाइफ एक्सीडेंटल बेनिफिट राइडर (एक्सीडेंटल डेथ / आंशिक विकलांगता) और एसबीआई लाइफ वेवर ऑफ प्रीमियम राइडर जैसे विकल्प भी उपलब्ध हैं।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

यमन के सैन्य शिविर पर मिसाइल हमले में 25 सैनिकों की मौत, 30 घायल

यमन के दक्षिण-पूर्वी प्रांत शबवा में सोमवार को एक सरकारी सैन्य प्रशिक्षण ठिकाने पर मिसाइलें हमलों में कम से कम 25 सैनिकों की जान चली गई और 30 से अधिक घायल हो गए।

प्रांतीय राजधानी अताक के पास जरदान जिले में स्थित अल-आलम सैन्य अड्डे पर गिरी तीनों मिसाइलों ने परिसर के भीतर बने एक प्रशिक्षण शिविर को निशाना बनाया। एक सैन्य अधिकारी ने इस हमले के पीछे हुती विद्रोहियों का हाथ बताया है।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे फुटेज में घटनास्थल पर भारी तबाही और हताहत लोग दिखाई दे रहे हैं। स्थानीय चिकित्सा सूत्र ने बताया कि हताहतों का यह आंकड़ा शुरुआती है और इसमें बढ़ोतरी हो सकती है।

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चिकित्सा सूत्र के अनुसार, आपातकालीन और मेडिकल टीमें घायलों को शबवा के अस्पतालों में पहुंचाने में जुटी हैं। शिविर से बरामद कुछ शव बुरी तरह झुलस चुके हैं, जिससे मृतकों की अंतिम संख्या तय करने में मुश्किलें आ रही हैं। जरदान जिले में स्थित अल-आलम एक बड़ा सैन्य ठिकाना है। इसका इस्तेमाल यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार और सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन का समर्थन करने वाले बल करते हैं।

हुती विद्रोहियों ने फिलहाल इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। यह वारदात ऐसे समय में हुई है, जब यमन के कई मोर्चों पर हुती विद्रोहियों और सऊदी गठबंधन समर्थित सरकारी बलों के बीच लड़ाई और हमले तेज हो गए हैं।

यमन 2014 के उत्तरार्ध से ही भयानक संघर्ष में फंसा हुआ है, जब हूतियों ने राजधानी सना और देश के अधिकतर उत्तरी हिस्से पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के समर्थन में सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने 2015 में सैन्य हस्तक्षेप किया था।

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फ्रांसीसी राष्ट्रपति बोले- तोड़फोड़ करने वालों को कीमत चुकानी होगी:गृहमंत्री का इस्तीफा मंजूर नहीं किया, PM लेकोर्नू ने इमरजेंसी मीटिंग बुलाई

फ्रांस में 17 अक्टूबर को हुई हिंसा और लूटपाट को लेकर राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने रविवार को सख्त कार्रवाई का वादा किया। उन्होंने रविवार रात अपने संबोधन में कहा कि जिन लोगों ने तोड़फोड़ और लूटपाट की है, उन्हें इसकी कीमत चुकानी होगी। मैक्रों ने गृहमंत्री लॉरेंट नुनेज का इस्तीफा भी नामंजूर कर दिया। मैक्रों ने नुनेज से कहा कि वे सड़कों को सुरक्षित बनाने के लिए कदम उठाएं। इस बीच प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू ने सोमवार को सरकार की इमरजेंसी मीटिंग बुलाई है। इसमें हिंसा की घटनाओं और उनसे निपटने के तरीकों पर चर्चा होगी। 1500 दुकानों में लूटपाट, 1000 पुलिकर्मी घायल महंगाई और सरकारी सुविधाओं में कमी के खिलाफ शनिवार को 8 लाख से ज्यादा लोग सड़कों पर उतरे थे। शुरुआत में हालात शांतिपूर्ण थे लेकिन बाद में काले कपड़े पहने और चेहरे ढके कुछ लोगों ने तोड़फोड़ और लूटपाट शुरू कर दी। अनुमान है कि करीब 1,500 दुकानों और कारोबारों में लूटपाट की गई या उन्हें नुकसान पहुंचाया गया। हालात संभालने के लिए पुलिस ने आंसू गैस छोड़ी और भीड़ पर पानी की बौछारें कीं। गृह मंत्रालय के मुताबिक, शनिवार को करीब 1000 पुलिसकर्मी घायल हुए। इनमें सात की हालत गंभीर थी। गृह मंत्री नुनेज पर आरोप लग रहे हैं कि वे पहले से तय प्रदर्शनों के लिए पर्याप्त तैयारी नहीं कर पाए। मैक्रों को देश का सबसे कमजोर राष्ट्रपति माना जा रहा हिंसा के बाद खबरें सामने आई कि मैक्रों कुछ इलाकों में कर्फ्यू लगा सकते हैं या आपातकाल घोषित कर सकते हैं। लेकिन उन्होंने रविवार को टीवी पर देश को संबोधित किया। उन्होंने हिंसा के लिए कट्टर वामपंथी समूहों और उपद्रवियों को जिम्मेदार ठहराया। मैक्रों ने लोगों से एकजुट रहने की अपील की और भरोसा दिलाया कि हिंसा करने वालों को सजा मिलेगी। हालांकि, फ्रांस के मीडिया ने उनके भाषण की आलोचना की। उनका कहना है कि मैक्रों ने यह साफ नहीं किया कि सरकार आगे क्या कदम उठाएगी। लूटपाट और तोड़फोड़ करने वालों पर कार्रवाई कैसे होगी, शहरों को दोबारा ऐसी घटनाओं से कैसे बचाया जाएगा, जिन दुकानदारों का नुकसान हुआ है, उन्हें मुआवजा कैसे मिलेगा। संसद तीन गुटों में बंटी, कोई भी फैसला लेना आसान नहीं फ्रांस की संसद तीन बड़े राजनीतिक गुटों में बंटी हुई है। इनके बीच इतने मतभेद हैं कि संसद का कामकाज प्रभावित हो रहा है। ऐसे माहौल में सरकार के लिए कोई बड़ा फैसला लेना आसान नहीं है। राष्ट्रपति मैक्रों का कार्यकाल खत्म होने वाला है। अप्रैल 2027 में राष्ट्रपति चुनाव होना है। ऐसे में देश में राजनीतिक खींचतान भी बढ़ गई है। राष्ट्रपति पद के लिए मुकाबले की तैयारी कर रहे नेताओं में दक्षिणपंथी नेता मरीन ले पेन और वामपंथी नेता जीन-ल्यूक मेलांशों भी शामिल हैं। ले पेन प्रवासियों के खिलाफ सख्त रुख के लिए जानी जाती हैं, जबकि मेलांशों पूंजीवाद के विरोधी हैं। दोनों नेता मौजूदा हालात में अपनी बात लोगों तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। फ्रांस पर कर्ज का दबाव भी बढ़ रहा फ्रांस की सरकार के सामने आर्थिक मुश्किलें भी हैं। देश पर बढ़ते सरकारी कर्ज को काबू में करने के लिए निवेशक सरकार पर दबाव डाल रहे हैं। लेकिन सरकार को डर है कि अगर उसने सरकारी सुविधाओं या कल्याणकारी योजनाओं में कटौती की, तो और ज्यादा लोग नाराज होकर सड़कों पर उतर सकते हैं। देश में लोग पूछ रहे हैं कि अब आगे क्या होगा और क्या फ्रांस की व्यवस्था टूटने की कगार पर पहुंच गई है। शनिवार को हुई हिंसा ने लोगों को डरा दिया है। ————————— यह खबर भी पढ़ें… फ्रांस में बार-बार क्यों भड़कते हैं प्रदर्शन:पेंशन से लेकर महंगाई तक, आंदोलन के पीछे 5 बड़ी वजहें समझिए फ्रांस दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। यहां आधुनिक शहर हैं और शिक्षा, स्वास्थ्य जैसी सरकारी सुविधाओं का बड़ा तंत्र है। इसके बावजूद, सरकार के फैसलों को लेकर यहां बार-बार बड़े आंदोलन होते हैं। पूरी खबर पढ़ें…

फुटबॉल स्टेडियम में हुआ बड़ा हादसा, स्टंट करते समय करीब 150 फीट नीचे गिरा सैनिक, हुई मौत

अमेरिका के टेक्सास में शनिवार को रात स्टेडियम में हजारों दर्शकों के सामने एक दर्दनाक हादसा हो गया। मैच शुरू होने से पहले रैपलिंग स्टंट करते समय अमेरिकी वायुसेना का एक सैनिक स्टेडियम की छत से करीब 150 फीट नीचे गिर गया। करीब 150 फीट नीचे गिरने की वजह से उसकी मौत हो गई। ये सैनिक सैन एंटोनियो के अलामोडोम में एक डिस्प्ले में हिस्सा ले रहे चार मिलिट्री वालों में से एक था। ये कार्यक्रम यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास एट सैन एंटोनियो (UTSA) और नेवी के बीच होने वाले कॉलेज फुटबॉल मैच से पहले आयोजित किया गया था।

बैलेंस बगड़ने से गिरे सैनिक

बताया जा रहा कि रस्सी के सहारे नीचे उतरते समय एक सैनिक का बैलेंस बिगड़ गया और वह सीधे मैदान में जा गिरा। कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, जमीन पर गिरने से पहले वह काफी तेजी से नीचे आ रहा था। इस हादसे को देखकर स्टेडियम में मौजूद दर्शक घबरा गए। घटना के तुरंत बाद आपातकालीन सेवाओं की टीम मौके पर पहुंची और घायल सैनिक की मदद करने की कोशिश की। हादसे के बाद मेडिकल टीम ने मैदान पर ही सैनिक को बचाने की कोशिश की। इसके बाद सैन एंटोनियो फायर डिपार्टमेंट की टीम उसे गंभीर हालत में पास के अस्पताल ले गई। लेकिन सैनिक की जान नहीं बच सकी। नेवादा के नेलिस एयर फोर्स बेस के प्रवक्ता ने बाद में उसकी मौत की पुष्टि की।

द सन की रिपोर्ट के मुताबिक, एक प्रवक्ता ने बताया, “इस घटना की जांच की जा रही है। जैसे ही मामले से जुड़ी और जानकारी सामने आएगी, उसे जारी कर दिया जाएगा।”

20 हजार से ज्यादा फुटबॉल प्रशंसक थे मौजूद

ये हादसा UTSA के सालाना कार्यक्रम ‘सैल्यूट टू आर्म्ड फोर्सेज एंड वेटरन्स नाइट’ के दौरान हुआ। इस आयोजन का मकसद सेना के जवानों और पूर्व सैनिकों को सम्मान देना था। बताया जा रहा कि जिस समय यह घटना हुई, उस वक्त स्टेडियम में 20 हजार से ज्यादा फुटबॉल प्रशंसक मौजूद थे। हादसे के बाद वहां मौजूद लोगों के बीच अफरा-तफरी और चिंता का माहौल बन गया। हादसे के बाद राहत और बचाव दल के मौके पर पहुंचने के कारण फुटबॉल मैच को कुछ देर के लिए रोकना पड़ा। लेकिन, थोड़ी देर बाद खेल दोबारा शुरू कर दिया गया।

UTSA यूनिवर्सिटी ने जारी किया बयान

UTSA यूनिवर्सिटी ने एक बयान जारी कर इस हादसे पर दुख जताया और मृत सैनिक के परिवार व साथियों के प्रति संवेदना व्यक्त की। बताया जा रहा कि मृतक सैनिक 6th कॉम्बैट ट्रेनिंग स्क्वाड्रन की डिटैचमेंट 2 यूनिट का हिस्सा था। ये यूनिट ऐसे सैन्य कर्मियों को प्रशिक्षण देती है, जो जमीन पर मौजूद सैनिकों के साथ मिलकर हवाई मदद की योजना बनाते हैं और उसे सही दिशा में इस्तेमाल करने का काम करते हैं।

Kolkata Stampede: कोलकाता दुर्गा पूजा भगदड़ मामले में बड़ा एक्शन! आयोजकों समेत 7 लोग गिरफ्तार, अमित शाह ने अस्पताल पहुंच घायलों का जाना हाल, 19 की मौत

Kolkata Durga Puja Stampede: कोलकाता पुलिस ने चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में मची भगदड़ के सिलसिले में पूजा आयोजकों समेत सात लोगों को गिरफ्तार किया है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने रविवार (18 अक्टूबर) को बताया कि शनिवार को हुए इस हादसे में कम से कम 19 लोगों की मौत हुई है। पुलिस ने इस मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए गैर इरादतन हत्या का मामला भी दर्ज किया है। पुलिस ने घटना की जांच के सिलसिले में शनिवार रात 14 लोगों को हिरासत में लिया था। उत्तरी कोलकाता के चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में शनिवार (17 अक्टूबर) शाम बारिश के बीच अचानक भीड़ बढ़ने से भगदड़ मच गई थी। इसमें कम से कम 19 लोगों की मौत हो गई और 25 अन्य लोग घायल हो गए।

भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के अधिकारी ने न्यूज एजेंसी पीटीआई से कहा, “हमने सात लोगों को गिरफ्तार किया है। ये उन 14 लोगों में शामिल हैं, जिन्हें कल रात हिरासत में लिया गया था। कुछ और लोगों को भी गिरफ्तार किया जा सकता है।” उन्होंने कहा, “शवों की पहचान करने की प्रक्रिया जारी है।”

अमित शाह ने अस्पताल पहुंचकर घायलों का जाना हाल

इस बीच, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार (18 अक्टूबर) को कोलकाता के एक अपोलो अस्पताल में पहुंचकर भगदड़ में घायल हुए लोगों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने घायलों के स्वास्थ्य की जानकारी ली। पश्चिम बंगाल के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. शरद्वत मुखर्जी भी घायलों से मिलने अपोलो अस्पताल पहुंचे। इससे पहले अमित शाह ने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के साथ कालीघाट स्थित काली मंदिर में दर्शन किए। हादसे की जांच जारी है। कोलकाता पुलिस घटना के कारणों के साथ-साथ भीड़ मैनेजमेंट में हुई संभावित चूक की पड़ताल कर रही है।

प्रत्यक्षदर्शियों ने भीड़ मैनेजमेंट में खामियों का आरोप लगाया

कोलकाता पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि क्या भीड़ मैनेजमेंट में खामियों, एंट्री और एग्जिट के रास्तों को लेकर भ्रम तथा भारी बारिश के कारण चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में भगदड़ मची।

कई प्रत्यक्षदर्शियों ने आरोप लगाया कि प्रवेश, निकास और लोगों की आवाजाही को लेकर उचित घोषणाएं नहीं की गईं, जिससे वहां पहुंचे लोग भ्रमित हो गए। स्थानीय लोगों ने यह भी दावा किया कि पंडाल में पर्याप्त संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती नहीं की गई थी। पुलिसकर्मी मुख्य रूप से वीआईपी एंट्री गेट के पास तैनात थे।

स्थानीय लोगों ने घायलों को अस्पताल पहुंचाने में प्रशासन की ओर से बहुत कम मदद मिलने का भी आरोप लगाया। एक पुलिस अधिकारी ने पीटीआई से कहा कि पुलिस घटना के कारणों, भीड़ नियंत्रण के उपायों, आयोजन स्थल पर की गई व्यवस्थाओं और आपात स्थिति के दौरान अधिकारियों की ओर से उठाए गए कदमों की जांच कर रही है। एक अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि फॉरेंसिक टीम देर रात चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल क्षेत्र में पहुंची और घटनास्थल से साक्ष्य जुटाने शुरू किए।

उन्होंने बताया कि कोलकाता पुलिस के अधिकारी चोरबागान दुर्गा पूजा के आयोजकों से भी बात कर रहे हैं। उन्होंने वहां सुरक्षा में तैनात गार्डों तथा भीड़ मैनेजमेंट के लिए नियुक्त लोगों की सूची मांगी है। घटना के बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी घायलों से मिलने अस्पताल पहुंचे थे। कोलकाता और राज्य के अन्य हिस्सों में दुर्गा पूजा के कई आयोजक ‘थीम’ आधारित सजावट के जरिए अपने पंडालों को अधिक आकर्षक बनाने के लिए एक-दूसरे से प्रतिस्पर्धा करते हैं।

कैसे मची अफरा-तफरी?

मुख्यमंत्री अधिकारी ने बताया कि मृतकों में से दो के परिजनों के अनुसार, पंडाल क्षेत्र में निजी सुरक्षा गार्डों द्वारा सीटी बजाए जाने के कारण वहां अफरा-तफरी मच गई थी। कोलकाता पुलिस आयुक्त अजय नंदा भी अस्पताल पहुंचे और घायलों का हालचाल जाना। कोलकाता मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के सूत्रों के अनुसार, घायलों को इलाज के लिए आपातकालीन विभाग में भर्ती कराया गया। जबकि 11 मरीजों को एसएसकेएम अस्पताल भेजा गया।

मेडिकल कॉलेज के एक सूत्र ने बताया कि मृतकों में 13 महिलाएं और एक बच्चा शामिल हैं। पश्चिम बंगाल सरकार ने घटना से प्रभावित लोगों के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर शुरू किया है। इस हादसे में जान गंवाने वाली एक महिला के बेटे सोनू पाल ने घटना के वक्त की परिस्थितियों की जानकारी दी। कुम्हारटोली के निवासी पाल अपनी मां के साथ दुर्गा पूजा देखने गए थे। इसी दौरान अचानक तेज बारिश शुरू हो गई।

पाल ने कहा कि भीड़ बढ़ने के कारण लोग संभल नहीं सके और एक-दूसरे पर गिरने लगे। घटना से लोगों में भारी रोष है। भगदड़ में जान गंवाने वालों के दुखी परिजनों ने सवाल उठाया कि इन मौतों की जिम्मेदारी कौन लेगा। इस हादसे में शुभम सोनकर ने अपनी बहन को खो दिया। उन्होंने अपनी बहन से हुई आखिरी बातचीत को याद करते हुए कहा कि वह उसकी शादी की योजना बना रहे थे।

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उत्तर 24 परगना जिले के उत्तर जोगेंद्रनगर इलाके की रहने वाली प्रिया सामद्दार अपने दोस्तों के साथ दुर्गा पूजा पंडाल देखने कोलकाता आई थीं। लेकिन न्यू बैरकपुर स्थित तपती बालिका विद्यालय की यह छात्रा अब कभी घर नहीं लौटेगी। इस घटना में जान गंवाने वाली एक अन्य महिला श्रीपर्णा पोद्दार (27) हुगली जिले के बैद्यबाटी से थीं।

PF खाते से कब और कितनी बार निकाल सकते हैं एडवांस पैसा? जानिए मेडिकल, शादी, मकान और पढ़ाई के लिए क्या हैं नियम

EPFO Advance Withdrawal Rules: अगर आप कहीं नौकरी करते हैं, तो हर महीने आपकी सैलरी से एक तय हिस्सा कटता है। जितनी रकम आपकी सैलरी से कटती है, उतनी ही रकम आपकी कंपनी भी आपके प्रोविडेंट फंड यानी PF खाते में जमा करती है। यह जमा पैसा आपकी रिटायरमेंट के लिए एक बड़ा सहारा बनता है।

लेकिन क्या आप जानते हैं कि जरूरत पड़ने पर आप रिटायरमेंट से पहले भी अपने पीएफ खाते से एडवांस पैसा निकाल सकते हैं?

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने पीएफ एडवांस से जुड़े नियमों को काफी आसान और पारदर्शी बना दिया है। नए नियमों (EPF Scheme, 2026) के तहत आंशिक निकासी के लिए न्यूनतम मेंबरशिप की अवधि को घटाकर 12 महीने कर दिया गया है।

किस काम के लिए कितनी बार निकाल सकते हैं पीएफ का पैसा?

ईपीएफओ ने विभिन्न जरूरतों को तीन मुख्य श्रेणियों- जरूरी जरूरतें, मकान से जुड़ी जरूरतें और विशेष परिस्थितियां में बांटा है:

निकासी का कारण कितनी बार निकाल सकते हैं एडवांस?
इलाज/मेडिकल जरूरतेंकोई सीमा नहीं (जितनी बार चाहें निकाल सकते हैं)
बच्चों की पढ़ाईमेंबरशिप के दौरान कुल 10 बार
शादी (स्वयं या बच्चों की)मेंबरशिप के दौरान कुल 5 बार
मकान/प्लाट/होम लोनमेंबरशिप के दौरान कुल 5 बार
विशेष परिस्थितियांएक वित्तीय वर्ष में 2 बार तक

1. मेडिकल इमरजेंसी के लिए निकासी

अगर आपको या आपके परिवार के किसी सदस्य को अचानक इलाज के लिए पैसों की जरूरत पड़ती है, तो आप पीएफ से एडवांस निकाल सकते हैं। मेडिकल इमरजेंसी के लिए निकासी की कोई अधिकतम सीमा नहीं रखी गई है।

2. बच्चों की पढ़ाई और शादी के लिए

बच्चों की उच्च शिक्षा के खर्चों को पूरा करने के लिए आप पूरी नौकरी (मेंबरशिप) के दौरान 10 बार तक एडवांस निकाल सकते हैं। वहीं, अगर परिवार में या खुद की शादी का खर्च उठाना है, तो इसके लिए 5 बार तक निकासी की अनुमति दी गई है।

3. मकान खरीदने, बनाने या होम लोन चुकाने के लिए

अगर आप नया घर या प्लॉट खरीदना चाहते हैं, घर का निर्माण कराना चाहते हैं, घर का रेनोवेशन कराना चाहते हैं या पुराने होम लोन की किस्त चुकाना चाहते हैं, तो आप अपने पीएफ खाते का इस्तेमाल कर सकते हैं। आवास से जुड़ी जरूरतों के लिए आप 5 बार तक एडवांस पैसा निकाल सकते हैं।

4. विशेष परिस्थितियों के लिए

केंद्रीय बोर्ड द्वारा अधिसूचित कुछ विशेष या आपातकालीन परिस्थितियों में भी कर्मचारियों को राहत दी जाती है। ऐसी स्थिति में कर्मचारी एक वित्तीय वर्ष में दो बार एडवांस निकाल सकते हैं।

आप अपने पीएफ से कितना पैसा निकाल सकते हैं?

ईपीएफओ के नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, अगर आपकी मेंबरशिप को 12 महीने पूरे हो चुके हैं, तो आप अपने पीएफ बैलेंस का 75% तक एडवांस निकाल सकते हैं। इस बैलेंस में आपका अंशदान, कंपनी का अंशदान और उस पर मिला ब्याज शामिल होता है।

पीएफ एडवांस निकालने से पहले अपनी पात्रता की जांच जरूर कर लें। इसके लिए आप सीधे ईपीएफओ के आधिकारिक मेम्बर सेवा पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन आवेदन जमा कर सकते हैं।

दीपके, नेहा पुलिस हिरासत में

नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस ने कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके को हिरासत में लेकर उनका तिरंगा मार्च रोक दिया। दीपके अपने समर्थकों के साथ शाम पांच बजे के करीब कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में तिरंगा मार्च निकालने जा रहे थे। लेकिन पुलिस ने वहां पहुंचने से पहले ही उनको हिरासत में ले लिया गया। हालांकि उनके कुछ समर्थक तिरंगा लेकर सेंट्रल पार्क पहुंच गए थे और वहां तिरंगा फहराया। सीपीआई माले के छात्र संगठन आइसा की अध्यक्ष नेहा बोरा को भी पुलिस ने हिरासत में लिया है। सीजेपी ने देर शाम कहा कि दीपके को दिल्ली पुलिस किसी अज्ञात जगह ले गई है।

दिल्ली पुलिस ने डेढ़ सौ अन्य लोगों को भी हिरासत में लिया है। दीपके को छह दिन में दूसरी बार दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया। इससे पहले 10 अक्टूबर को जंतर मंतर पर प्रदर्शन करने के लिए आए दीपके को इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर ही हिरासत में ले लिया गया था। एक दिन बाद 11 अक्टूबर को दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका एक बॉन्ड भर कर रिहा हुए थे। पांच दिन बाद उनको फिर से हिरासत में लिया गया। दीपके को हिरासत में लिए जाने के बाद तृणमूल कांग्रेस की ममता बनर्जी ने इसे अघोषित आपातकाल बताया।

गौरतलब है कि सीजेपी का तिरंगा मार्च रोकने के लिए एनडीएमसी ने सेंट्रल पार्क को दिन के लिए बंद कर दिया था और पुलिस ने नई दिल्ली जिले में बीएनएसएस की धारा 163 लागू कर दी है। इसके तहत चार या उससे ज्यादा लोगों के इकट्ठा होने पर रोक है। बहरहाल, दीपके को हिरासत में लेने से पहले दिल्ली पुलिस झंडेवालान स्थित उस घर पर पहुंची थी, जहां वे ठहरे हुए थे। पुलिस ने उन्हें प्रदर्शन नहीं करने का नोटिस दिया था। यह घर शरद पवार की एनसीपी के एक नेता का है।

पुलिस जब उनको नोटिस देने गई तो इस दौरान दीपके की पुलिस से बहस हो गई थी। दीपके ने पुलिस से कहा कि यह कोई रैली या प्रोटेस्ट नहीं है। उन्होंने कहा, ‘हम सिर्फ सेंट्रल पार्क तक जाकर तिरंगा फहराना चाहते हैं’। गौरतलब है कि कॉकरोच जनता पार्टी ने शुक्रवार, 16 अक्टूबर को शाम पांच बजे ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च का ऐलान किया था। सीजेपी ने प्रदर्शनकारियों को शाम पांच बजे कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में आने के लिए कहा था।

दूसरी ओर इस मार्च को रोकने के लिए दिल्ली में 28 हजार से ज्यादा सुरक्षा बलों को तैनात किया गया था। अर्धसैनिक बलों के साथ साथ दिल्ली पुलिस के जवानों ने पूरे कनॉट प्लेस को घेर लिया था। सात लेयर की बैरिकेडिंग की गई थी। ऐसी की बैरिकेडिंग और सुरक्षा बंदोबस्त करके 10 अक्टूबर का जंतर मंतर का प्रदर्शन भी रोका गया था। उस दिन सात हजार के करीब लोग हिरासत में लिए गए थे।

चारधाम यात्रा: अटूट आस्था, VIP संस्कृति और व्यवस्थाओं की अग्निपरीक्षा

चारधाम यात्रा: अटूट आस्था, VIP संस्कृति और व्यवस्थाओं की अग्निपरीक्षा

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यात्राएँ केवल पर्यटन नहीं, बल्कि स्वयं को जानने, जन-आस्था को अनुभव करने और प्रकृति के निकट पहुँचने का अवसर होती हैं। धार्मिक यात्रा मनुष्य को सांसारिक भागदौड़ से दूर कर आत्मचिंतन और ईश्वर के सान्निध्य में जाने का मार्ग दिखाती है। इसी भावना के साथ 26 सितंबर को मध्य प्रदेश के देवास से उत्तराखंड की चारधाम यात्रा प्रारंभ हुई। 15 दिनों के इस सफर ने मुझे आध्यात्मिक संतोष तो दिया, लेकिन धार्मिक स्थलों की व्यवस्थाओं और श्रद्धालुओं की कठिनाइयों ने कई गंभीर प्रश्न भी खड़े किए।

 

माँ गंगा की आरती से हिमालय की दिव्यता तक

हरिद्वार में माँ गंगा की भव्य आरती, मंत्रोच्चार और दीपों से जगमगाती जलधारा ने मन को भावविभोर कर दिया। ऋषिकेश के आध्यात्मिक वातावरण से होते हुए यात्रा माँ यमुनोत्री पहुँची। लगभग छह से सात किलोमीटर के दुर्गम पहाड़ी मार्ग पर पैदल चढ़ाई, थकान और हल्की बारिश के बीच माँ यमुना के दर्शन हुए। इसके बाद उत्तरकाशी में श्री काशी विश्वनाथ महादेव और गंगोत्री में माँ गंगा के दर्शन किए। हिमालय की विशालता ने अनुभव कराया कि प्रकृति के सामने मनुष्य का अहंकार कितना छोटा है।

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केदारनाथ: आस्था अटूट, लेकिन व्यवस्था पर सवाल

यात्रा का सबसे कठिन पड़ाव बाबा केदारनाथ धाम रहा। लगभग 20 से 22 किलोमीटर के दुर्गम मार्ग पर चढ़ाई, घोड़े-खच्चरों की आवाजाही और यात्रियों की भीड़ के बीच आगे बढ़ना किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं था। लगभग 12 घंटे की मशक्कत के बाद रात करीब दो बजे धाम पहुँचना संभव हुआ, जबकि दर्शन का सौभाग्य अगले दिन शाम लगभग छह बजे मिला। बाबा केदारनाथ के सम्मुख पहुँचते ही मन श्रद्धा से भर गया और सारी थकान मानो क्षणभर में मिट गई।

 

लेकिन घंटों की प्रतीक्षा ने सवाल भी खड़ा किया कि क्या श्रद्धालुओं को सुगम दर्शन उपलब्ध कराना सरकार और प्रशासन की प्राथमिकता नहीं होनी चाहिए?

 

देश के कोने-कोने से लोग धन, समय और शारीरिक सामर्थ्य खर्च करके अपने आराध्य तक पहुँचते हैं। इनमें बुजुर्ग, महिलाएँ और अस्वस्थ लोग भी होते हैं। कठिन यात्रा के बाद घंटों कतार में खड़े रहना और अंततः कुछ सेकंड के दर्शन पाना उनकी पीड़ा को बढ़ाता है। इस समस्या के बीच VIP संस्कृति भी चिंता का विषय है। विशेष व्यक्तियों को प्राथमिकता देने से यदि आम श्रद्धालुओं को अतिरिक्त प्रतीक्षा करनी पड़े, तो यह व्यवस्था उनकी आस्था और सम्मान दोनों को ठेस पहुँचाती है।

 

ईश्वर के दरबार में हर भक्त बराबर है; किसी की विशेष सुविधा आम श्रद्धालु की परेशानी का कारण नहीं बननी चाहिए। हिमालय की कठिन भौगोलिक परिस्थितियाँ सरकार और प्रशासन के सामने चुनौती अवश्य हैं, लेकिन बेहतर योजना और जवाबदेही की आवश्यकता को नकारा नहीं जा सकता। श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ना उपलब्धि हो सकती है, पर उनकी परेशानियाँ बढ़ना व्यवस्था की सफलता नहीं है।

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त्रियुगीनारायण से बद्रीनाथ तक

केदारनाथ के बाद त्रियुगीनारायण मंदिर में दर्शन का अवसर मिला। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी स्थल पर भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। मंदिर की अखंड धूनी तथा भगवान विष्णु की उपस्थिति इस स्थान की आध्यात्मिक महत्ता बढ़ाती है। इसके बाद बद्रीनाथ धाम में भगवान बद्रीविशाल के दर्शन के साथ यात्रा पूर्ण हुई। इन पवित्र स्थलों ने श्रद्धा, समर्पण और भारतीय संस्कृति की गहराई का अनुभव कराया।

 

आस्था या सोशल मीडिया का प्रदर्शन?

यात्रा के दौरान धार्मिक स्थलों पर तस्वीरें लेने और रील बनाने की बढ़ती प्रवृत्ति भी दिखाई दी। अनुभव साझा करना गलत नहीं है, लेकिन जब कैमरा श्रद्धा पर हावी हो जाए, तो तीर्थयात्रा का वास्तविक उद्देश्य पीछे छूटने लगता है। प्रश्न यह है कि हम ईश्वर के दर्शन करने जाते हैं या दुनिया को यह दिखाने कि हम दर्शन करने गए थे? भक्ति का वास्तविक आनंद लाइक और कमेंट में नहीं, बल्कि उस क्षण में है जब मन बिना किसी दिखावे के अपने आराध्य के सामने झुकता है।

 

सरकार और प्रशासन के लिए स्पष्ट संदेश

चारधाम यात्रा में उमड़ती भीड़ सरकार और प्रशासन के लिए अवसर से अधिक जिम्मेदारी है। दर्शन व्यवस्था, यातायात, पार्किंग, पेयजल, स्वच्छता, चिकित्सा और आपातकालीन सहायता को मजबूत करना अनिवार्य है। बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए विशेष सुविधाएँ सुनिश्चित की जानी चाहिए तथा VIP व्यवस्था के कारण आम श्रद्धालुओं का आवागमन और दर्शन बाधित नहीं होने चाहिए।

 

श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सम्मान कोई सरकारी एहसान नहीं, बल्कि प्रशासन की बुनियादी जिम्मेदारी है। सरकार को घोषणाओं से आगे बढ़कर धरातल पर सुधार दिखाना होगा। समय रहते व्यवस्थाएँ नहीं सुधारी गईं, तो बढ़ती भीड़ भविष्य में गंभीर कठिनाइयाँ पैदा कर सकती है। विकास के साथ हिमालय के नाजुक पर्यावरण की रक्षा भी उतनी ही आवश्यक है।

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आस्था का सम्मान, व्यवस्था की जवाबदेही

10 अक्टूबर को लौटते समय मन में चारधाम के दर्शन का संतोष था, लेकिन व्यवस्थाओं में सुधार की आवश्यकता भी स्पष्ट थी। सरकार को जवाबदेही निभानी होगी, प्रशासन को संवेदनशील बनना होगा और यात्रियों को अनुशासन तथा पर्यावरण संरक्षण का पालन करना होगा।

 

आस्था अटूट है, लेकिन श्रद्धालुओं की सहनशीलता को व्यवस्था की कमजोरियों का विकल्प नहीं बनाया जा सकता। ईश्वर के दरबार में समानता तभी सार्थक होगी, जब प्रत्येक भक्त को समान सम्मान और यथासंभव सुविधाजनक दर्शन मिलें। क्योंकि चारधाम की यात्रा पैरों से जितनी पूरी होती है, उससे कहीं अधिक हृदय और आत्मा से पूरी होती है।

 

हर हर महादेव! जय बद्रीविशाल! जय माँ गंगे! जय माँ यमुना!

पेशावर में विद्यालय की छत ढहने से 34 लोगों की मौत

पाकिस्तान के पेशावर शहर में गुरुवार को एक निजी विद्यालय की छत ढह जाने से 34 लोगों की मौत हो गयी जबकि 52 लोग घायल हो गये। मृतकों में ज्यादातर 13 वर्ष से कम उम्र के बच्चे और एक शिक्षिका शामिल हैं। घायलों में कई की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है।

सरकारी आपातकालीन सेवा ‘रेस्क्यू 1122’ के अनुसार, यह हादसा दीर कॉलोनी के कॉलेज रोड स्थित ‘अल-खैर’ नामक निजी विद्यालय में आज सुबह करीब 08:48 बजे हुआ। सूचना मिलते ही राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर दिये गये। स्थानीय प्रशासन और चश्मदीदों के मुताबिक, हादसे के बाद राहत कर्मियों और स्थानीय लोगों ने घंटों मलबे की तलाशी ली, क्योंकि आशंका थी कि और भी बच्चे मलबे में दबे हो सकते हैं। राहत कार्यों में सहायता के लिए पाकिस्तानी सेना के जवान भी बचाव दलों के साथ जुट गये।

लेडी रीडिंग अस्पताल (एलआरएच) के प्रवक्ता मोहम्मद आसिम ने बताया कि अस्पताल में आपातकाल घोषित कर डॉक्टर घायलों के इलाज में जुटे हैं।

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इस बीच, पेशावर पुलिस ने विद्यालय के मालिक खान मोहम्मद को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने चेतावनी दी है कि इमारत बेहद खतरनाक हालत में है और इसके और अधिक ढहने का जोखिम बना हुआ है। राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस भीषण गहरा दुख जताया है।

श्री शरीफ ने ‘एक्स’ पर दुख जताते हुए लिखा है, “विद्यालय की छत गिरने की दुखद और दिल दहला देने वाली घटना का गहरा दुख है, जिससे कई कीमती जानें चली गयी। जान गंवाने वाले बच्चों और शिक्षकों के दुखी परिवारों के साथ मेरी संवेदना है। मैं उन परिवारों के लिए सब्र और हिम्मत की दुआ करता हूं, जिन्होंने अपनी जान गंवायी।”

उन्होंने कहा कि खैबर पख्तूनख्वा के गवर्नर फैसल करीम कुंडी से घटना की पूरी रिपोर्ट मांगी है। उन्हें यह भी निर्देश दिया है कि घटना में घायल हुए बच्चों और दूसरे लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं दी जायें और प्रभावित परिवारों को हर मुमकिन मदद दी जाये।

पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो जरदारी, पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज और सिंध के मुख्यमंत्री मुराद अली शाह ने भी दुर्घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया है।

Pic Credit : UNI