UP में MBBS इंटर्न को योगी सरकार का बड़ा तोहफा, दोगुने से भी ज्यादा बढ़ा स्टाइपेंड

UP में MBBS इंटर्न को योगी सरकार का बड़ा तोहफा, दोगुने से भी ज्यादा बढ़ा स्टाइपेंड

उत्तर प्रदेश में सरकारी मेडिकल कॉलेजों में इंटर्नशिप कर रहे MBBS छात्रों के लिए बड़ी घोषणा की गई है। योगी सरकार ने मेडिकल कॉलेजों में इंटर्नशिप करने वाले MBBS छात्रों के स्टाइपेंड में बढ़ोतरी का फैसला किया है। अब उन्हें हर महीने 12 हजार रुपये की जगह 25 हजार रुपये मिलेंगे।

लंबे समय से MBBS इंटर्न स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग कर रहे थे। सरकार के इस फैसले से प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में इंटर्नशिप कर रहे छात्रों को सीधा लाभ मिलेगा। बढ़ी हुई राशि पूरे प्रदेश में लागू की जाएगी।

प्रदेश के राजकीय मेडिकल कालेजों, संस्थानों और चिकित्सा विश्वविद्यालयों से एमबीबीएस व बीडीएस परीक्षा उत्तीर्ण कर रोटेटिंग इंटर्नशिप करने वाले छात्रों को अब हर माह 12 हजार के बजाय 25 हजार रुपये इंटर्नशिप भत्ता मिलेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में भत्ता बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। गौरतलब है कि योगी सरकार ने इससे पहले भी 2021 में यह भत्ता 7500 हजार से बढ़ाकर 12 हजार रुपये किया था।

2021 में भी बढ़ाया गया था इंटर्नशिप भत्ता : अभी इंटर्नशिप के दौरान मेडिकल छात्रों को 12 हजार रुपये प्रतिमाह बतौर भत्ता मिलता है। कैबिनेट ने यह राशि दोगुने से ज्यादा बढ़ाकर 25 हजार रुपये प्रति माह किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी देकर इन छात्रों को आर्थिक राहत दी है। इससे प्रदेश के सरकारी चिकित्सा संस्थानों में प्रशिक्षण लेने वाले एमबीबीएस और बीडीएस इंटर्न को प्रोत्साहन मिलेगा।

ओपीडी व रात्रि ड्यूटी में निभाते हैं महत्वपूर्ण भूमिका : प्रदेश में एमबीबीएस और बीडीएस परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले छात्रों के लिए रोटेटिंग इंटर्नशिप अनिवार्य है। इंटर्नशिप के दौरान छात्र राजकीय चिकित्सा संस्थानों में मरीजों के उपचार में चिकित्सकीय सहयोग देने के साथ ही आपातकालीन सेवाओं, वार्ड, ओपीडी और रात्रि ड्यूटी में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

यूपी में 60 साल से ज्यादा उम्र की महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा : यूपी की योगी सरकार ने आज एक और बड़ा ऐलान किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में आज कुल 24 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई, जिसमें एक ‘लोकमाता अहिल्याबाई मातृशक्ति योजना’ भी है। इसके तहत उत्तर प्रदेश में 60 साल या उससे ज्यादा उम्र की महिलाएं उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (UPSRTC) की बसों में पूरी जिंदगी मुफ्त यात्रा कर सकेंगी।

इस सुविधा का लाभ लेने के लिए आधार कार्ड या वोटर आईडी को मान्य दस्तावेज माना जाएगा। सरकार के मुताबिक, इस योजना से एक करोड़ से ज्यादा महिलाओं को फायदा मिलने की उम्मीद है। रक्षाबंधन से पहले लिए गए इस फैसले को महिलाओं के लिए बड़ी सौगात माना जा रहा है।

गुजरात पुलिस बेड़े में शामिल होंगे 500 नए आधुनिक ‘जनरक्षक’ वाहन, गृह राज्यमंत्री हर्ष संघवी देंगे सौगात

गुजरात पुलिस बेड़े में शामिल होंगे 500 नए आधुनिक ‘जनरक्षक’ वाहन, गृह राज्यमंत्री हर्ष संघवी देंगे सौगात

Gujarat emergency response system: गुजरात सरकार द्वारा राज्य की सुरक्षा व्यवस्था को अधिक सुदृढ़ और त्वरित बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। राज्य पुलिस के बेड़े में 500 नए अत्याधुनिक ‘जनरक्षक’ वाहनों को शामिल किया जा रहा है। गृह राज्य मंत्री हर्ष संघवी इन नए वाहनों का लोकार्पण कर पुलिस विभाग को यह सौगात देंगे। इन नए वाहनों के जुड़ने से राज्य में आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली (इमरजेंसी रिस्पांस सिस्टम) और अधिक सक्षम बनेगी।

24 घंटे आपातकालीन सेवा के लिए 1000 वाहन रहेंगे तैनात

500 नए जनरक्षक वाहनों के जुड़ने से अब पूरे गुजरात में 24 घंटे लगातार 1000 वाहन आपातकालीन सेवाओं, गश्त (पेट्रोलिंग) और त्वरित सहायता के लिए उपलब्ध रहेंगे। किसी भी अप्रिय घटना या आपात स्थिति के समय घटनास्थल पर जल्द से जल्द पहुंचकर नागरिकों को त्वरित सुरक्षा और सहायता प्रदान करने में ये वाहन महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

एक ही प्लेटफॉर्म ‘डायल 112’ पर सभी प्रमुख हेल्पलाइन का समन्वय

राज्य में ‘डायल 112’ प्रोजेक्ट के तहत सभी प्रकार की आपातकालीन सेवाओं को एक ही प्लेटफॉर्म पर एकीकृत किया गया है। इसमें पुलिस (100), एम्बुलेंस (108), फायर (101), महिला हेल्पलाइन (181), चाइल्ड हेल्पलाइन (1098), डिजास्टर हेल्पलाइन (1070) और ट्रैफिक हेल्पलाइन शामिल हैं। इसके अलावा, डिजिटल सुविधा को बढ़ाते हुए ओला, उबर, रैपिडो और भारत टैक्सी ऐप्स में भी '112 पैनिक बटन' शामिल किया गया है।

11 लाख से अधिक लोगों को त्वरित सेवा प्रदान करने की बड़ी उपलब्धि

गुजरात में अब तक डायल 112 और जनरक्षक वाहनों के माध्यम से 11.04 लाख से अधिक आपातकालीन सेवाएं सफलतापूर्वक प्रदान की जा चुकी हैं। वाहनों की संख्या बढ़ने से अब शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में पुलिस का रिस्पॉन्स टाइम घटेगा और नागरिकों को पहले की तुलना में अधिक तेज़, कुशल और सुरक्षित सेवाएं मिलेंगी।

असम में बाढ़ में घायल हथिनी ‘जॉयमोती’ को मिला नया जीवन, इलाज के लिए वंतारा किया गया एयरलिफ्ट

जॉयमोती नाम की 53 साल की मादा हाथी, जो जुलाई के दूसरे हफ्ते में नागालैंड और असम में आई बाढ़ के पानी में बह गई थी, को अब गुजरात के जामनगर स्थित वंतारा ले जाया जा रहा है। संगठन ने शुक्रवार को बताया कि हाथी को तुरंत और विशेषज्ञ पशु चिकित्सा इलाज की जरूरत है, इसलिए उसे एयरलिफ्ट किया जा रहा है।

बाढ़ के दौरान जॉयमोती को स्थानीय लोगों ने सरकारी एजेंसियों के साथ मिलकर रेस्क्यू किया था। बाढ़ में बहने के बाद हाथी को कई गंभीर चोटें आई हैं। उसके माथे, दाहिने कान, पूंछ के ऊपर, बाईं अंदरूनी जांघ और पेट पर घाव हैं। साथ ही, उसके बाहरी जननांग के पास गहरी चोट भी है, जिसमें कीड़े पड़ गए थे।

उसकी दाहिनी आंख भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई है, जिसकी वजह से उस आंख की रोशनी पूरी तरह चली गई है और लगातार पानी भी निकल रहा है। इसके अलावा, उसके बाएं पिछले पैर में काफी समय से लंगड़ाने की समस्या है। यह समस्या उसे जंगल में पेड़ काटने के दौरान लगी चोट और फ्रैक्चर के कारण हुई थी। इस वजह से उसे सामान्य तरीके से चलने और खाना-पानी तक पहुंचने में परेशानी होती है।

रेस्क्यू के बाद जॉयमोती को स्थानीय स्तर पर प्राथमिक उपचार और शुरुआती पशु चिकित्सा सुविधा दी गई। इसमें घावों की ड्रेसिंग, दर्द की दवा, मल्टीविटामिन और मिनरल सप्लीमेंट्स के साथ जरूरी सपोर्टिव ट्रीटमेंट शामिल था। हालांकि, उसके शरीर पर कई जगह गंभीर चोटें हैं। साथ ही उसकी उम्र ज्यादा है और पहले से ही चलने-फिरने में परेशानी है। इन सभी वजहों से उसे तुरंत किसी विशेषज्ञ अस्पताल में इलाज की जरूरत थी।

हाथी को मेडिकल कारणों से किया गया शिफ्ट

हालांकि, वंतारा ने स्पष्ट किया है कि यह स्थानांतरण पूरी तरह से मेडिकल कारणों से किया जा रहा है। सड़क मार्ग के बजाय हवाई मार्ग से ले जाने का निर्णय हाथी को विशेष अस्पताल तक पहुंचाने में लगने वाले शारीरिक तनाव और समय को कम करने के लिए लिया गया है। पहुंचते ही जॉयमोती की पूरी पशु चिकित्सा जांच की जाएगी, जिसमें उसके घावों, आंखों की स्थिति और पोषण एवं सहायक देखभाल संबंधी सभी आवश्यकताओं का ध्यान रखा जाएगा।

बता दें कि किसी हाथी को गंभीर इलाज के लिए हवाई रास्ते से अस्पताल ले जाना भारत में अपनी तरह का पहला प्रयास है। इसके लिए पशु चिकित्सकों, एनिमल केयर टीम और लॉजिस्टिक्स से जुड़े लोगों ने काफी तैयारी की है।

जॉयमोती को ले जाने की पूरी प्रक्रिया में उसकी सेहत, आराम और सुरक्षा का खास ध्यान रखा गया। यात्रा से पहले मेडिकल जांच और तैयारी से लेकर विमान में चढ़ाने, उड़ान के दौरान उसकी निगरानी और अस्पताल पहुंचने तक हर चरण को सावधानी से पूरा किया गया।

वन्तारा असम में तीन वन्यजीव पशु चिकित्सा केंद्र स्थापित करेगी

इसके अतिरिक्त, वन्तारा ने असम में तीन वन्यजीव पशु चिकित्सा केंद्र स्थापित करने का प्रस्ताव दिया है, जिनमें हाथियों के लिए एक विशेष केंद्र भी शामिल है, ताकि वन्यजीवों की आपातकालीन पशु चिकित्सा देखभाल के लिए स्थानीय क्षमता को मजबूत किया जा सके। प्रस्तावित केंद्रों में प्रजाति-विशिष्ट सुविधाएं और पशु चिकित्सा सहायता उपलब्ध होगी, जिससे जरूरतमंद जानवरों को आपातकालीन स्थिति में उनके रहने के स्थान के पास ही समय पर और उचित उपचार मिल सकेगा। इन केंद्रों का संचालन पूरी तरह से असम वन विभाग द्वारा स्वतंत्र रूप से किया जाएगा।

इसका उद्देश्य स्थानीय क्षमता को मजबूत करना है ताकि असम में हाथियों और अन्य वन्यजीवों को उनके घर के पास ही उच्च गुणवत्ता वाली देखभाल मिल सके और विशेष उपचार की आवश्यकता होने पर लंबी दूरी के परिवहन की आवश्यकता न पड़े।

बता दें कि रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अनंत अंबानी द्वारा स्थापित वंतारा एक पशु कल्याण और वन्यजीव संरक्षण संगठन है।

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LPG Supply Plan: गैस संकट से बचने की तैयारी, सरकार ने हर रिफाइनरी के लिए तय की LPG प्रोडक्शन लिमिट

LPG Supply Plan: भारत सरकार ने पहली बार हर रिफाइनरी और कंपनी के लिए LPG प्रोडक्शन की अधिकतम सीमा तय कर दी है। इसका मकसद है कि अगर भविष्य में गैस सप्लाई पर संकट आए, तो देश में रसोई गैस की कमी न हो।

यह फैसला पश्चिम एशिया में हुए संघर्ष के बाद लिया गया है। उस दौरान आयात प्रभावित हुआ था और सरकार को आपातकालीन कदम उठाने पड़े थे।

13 अगस्त को पेट्रोलियम मंत्रालय ने 21 रिफाइनरियों और अपस्ट्रीम कंपनियों के लिए कुल 63,810 टन प्रतिदिन LPG उत्पादन क्षमता तय की। यह देश की मौजूदा रोजाना खपत का करीब 70% है। तुलना करें तो FY26 में भारत का घरेलू उत्पादन सिर्फ 35,900 टन प्रतिदिन था।

रिलायंस को मिली सबसे बड़ी क्षमता

सरकार ने गुजरात के जामनगर स्थित Reliance Industries की घरेलू बाजार वाली रिफाइनरी के लिए सबसे ज्यादा 18,000 टन प्रतिदिन की क्षमता तय की है।

सरकारी तेल कंपनियों की 18 रिफाइनरियों को मिलाकर 31,470 टन प्रतिदिन की क्षमता मिली है। वहीं Nayara Energy की वाडिनार रिफाइनरी को 4,480 टन प्रतिदिन और ONGC व GAIL जैसी कंपनियों को मिलाकर 6,460 टन प्रतिदिन की क्षमता दी गई है।

सरकार को यह कदम क्यों उठाना पड़ा?

FY26 में भारत ने 3.32 करोड़ टन LPG की खपत की। इसमें घरेलू उत्पादन सिर्फ 1.31 करोड़ टन रहा। बाकी 2.13 करोड़ टन गैस बाहर से मंगानी पड़ी। यानी देश की 60% से ज्यादा जरूरत आयात पर टिकी रही।

ईरान संघर्ष के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य से सप्लाई प्रभावित हुई थी। तब सरकार ने रिफाइनरियों से कहा था कि पेट्रोकेमिकल की बजाय ज्यादा LPG बनाएं। इससे उत्पादन बढ़कर करीब 55,000 टन प्रतिदिन तक पहुंच गया था।

अब हर संकट के लिए पहले से प्लान तैयार

नई व्यवस्था में सरकार जरूरत पड़ने पर रिफाइनरियों और तेल कंपनियों को तय समय के लिए उत्पादन बढ़ाने का आदेश दे सकेगी। कंपनियों को स्टोरेज, ट्रांसपोर्ट और सप्लाई की तैयारी भी पहले से रखनी होगी।

सरकार चाहती है कि रिफाइनरियां नई तकनीक अपनाकर और ज्यादा LPG निकालने के तरीके भी खोजें। इसके लिए नैफ्था को LPG में बदलने और रिफाइनरी यूनिट अपग्रेड करने जैसे विकल्पों पर काम करने को कहा गया है।

हर छह महीने में होगी समीक्षा

यह व्यवस्था एक बार बनाकर छोड़ नहीं दी जाएगी। सरकार हर साल 1 जनवरी और 1 जुलाई को इस सूची की समीक्षा करेगी। नई रिफाइनरियां, गैस प्रोजेक्ट और बढ़ी हुई क्षमता इसमें जोड़ी जाएगी। इससे भविष्य में विदेशों से सप्लाई रुकने पर भी घरेलू गैस व्यवस्था संभालना आसान होगा।

Stocks to Watch: सोमवार 17 अगस्त को 20 शेयरों पर रहेगी नजर, मिल सकता है तगड़ी कमाई का मौका

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

गुजरात के 10 लाख कर्मचारियों और पेंशनर्स को बड़ी राहत, मेडिकल बिल मंजूरी के नियम बदले; अब जल्दी मिलेगा पैसा

gujarat cm bhupendra patel

राज्य के 10 लाख से अधिक सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को बड़ी राहत देते हुए गुजरात सरकार ने चिकित्सा खर्च की मंजूरी से संबंधित वित्तीय शक्तियों में महत्वपूर्ण सुधार किया है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने इस नई व्यवस्था की घोषणा की है।

नई नीति के तहत अब विभिन्न प्रशासनिक स्तरों पर ही मेडिकल बिल मंजूर करने के नए अधिकार सौंपे गए हैं, जिससे कर्मचारियों को अपने बिल पास कराने के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा और पूरी प्रक्रिया तेज होगी। 

 

नई शक्तियों के बंटवारे के अनुसार, अब 25,000 रुपए तक के मेडिकल बिल संबंधित कार्यालय प्रमुख (हेड ऑफ ऑफिस) खुद मंजूर कर सकेंगे। वहीं 1 लाख रुपए तक के खर्च को विभागाध्यक्ष (हेड ऑफ डिपार्टमेंट), 3 लाख रुपए तक के बिल को संबंधित प्रशासनिक विभाग और 5 लाख रुपए तक के बड़े मेडिकल बिल को स्वास्थ्य मंत्री स्तर से मंजूरी दी जाएगी। इस विकेंद्रीकरण से बिल मंजूरी की फाइलें अलग-अलग विभागों में लटके रहने की समस्या का स्थायी समाधान होगा।

 

राज्य सरकार के इस फैसले से मेडिकल बिलों की मंजूरी प्रक्रिया अधिक सरल, तेज और पारदर्शी बनेगी। विशेष रूप से गंभीर बीमारी या आपातकालीन इलाज के बाद राशि जारी होने में होने वाली देरी दूर होगी, जिसका सीधा वित्तीय लाभ लाखों कर्मचारियों और उनके परिवारों को मिलेगा। सरकार का यह कदम कर्मचारियों के कल्याण और सुविधा की दिशा में एक बेहद सकारात्मक और महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है।

थाईलैंड के स्कूल में 8वीं के छात्र ने की फायरिंग, एक टीचर की मौत, खुद को भी मारी गोली, 15 घायल

Thailand School Shooting: थाईलैंड के बांग क्रूई जिले में शुक्रवार को एक स्कूल में कथित तौर पर एक छात्र ने गोलीबारी कर दी। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस हमले में एक शिक्षक की मौत हो गई, जबकि 15 अन्य लोग घायल हुए हैं। वहीं, घटना की खबर सामने आने के शुरुआती समय में न तो पीड़ितों की संख्या स्पष्ट थी और न ही उनसे जुड़ी कोई अन्य जानकारी मिल पाई थी। बाद में रॉयटर्स के हवाले से सामने आया कि अधिकारियों ने पुष्टि की कि गोलीबारी में मारे गए लोगों में एक शिक्षक भी शामिल है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, स्कूल में फायरिंग करने के बाद हमलावर ने खुद को भी गोली मार ली। अधिकारियों ने बताया कि इस घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया और पुलिस मामले की जांच में जुट गई है।

हमलावर निकला 8वीं कक्षा का छात्र 

बैंकॉक पोस्ट के अनुसार, यह हमला नोंथाबुरी प्रांत के देबसिरिन नोंथाबुरी स्कूल में हुआ। बताया जाता है कि यह प्रांत राजधानी बैंकॉक से मात्र 20 किलोमीटर दूर है।

इसी रिपोर्ट में कहा गया है कि हमलावर आठवीं कक्षा का छात्र है। उसने कथित तौर पर स्कूल भवन की तीसरी मंजिल पर खुद को बंद कर लिया था।

थाईलैंड के स्थानीय ब्रॉडकास्टर Thai PBS के अनुसार, जिस स्कूल से गोलीबारी की सूचना मिली है, वह काफी फेमस है।

‘पहले लगा की पटाखे फूट रहे हैं’

रॉयटर्स के अनुसार, 18 साल के एक युवक ने बताया कि जब गोलीबारी शुरू हुई, तो उसे लगा कि कहीं पटाखे फूट रहे हैं या कोई कुछ पीट रहा है।

उसने कहा, “पहले तो मुझे लगा ही नहीं कि यह बंदूक है। कई गोलियां चलीं: बैंग बैंग बैंग। फिर सन्नाटा छा गया। फिर आवाजें तेज हो गईं।”

बचाव कर्मियों ने शेयर की तस्वीरें

घटना के बाद आपातकालीन बचाव कर्मियों द्वारा साझा की गई तस्वीरों में बैंकॉक के उत्तर-पश्चिमी बाहरी इलाके में स्थित देबसिरिन नोनथाबुरी स्कूल से छात्रों को बाहर निकलते हुए दिखाया गया है, जबकि एम्बुलेंस मौके पर मौजूद थीं। एक तस्वीर में एक व्यक्ति एम्बुलेंस के बाहर स्ट्रेचर पर लेटा हुआ दिखाई दे रहा है, जबकि एक अन्य व्यक्ति को पास ही मौजूद बचाव कर्मी द्वारा चिकित्सा सहायता दी जा रही है।

जिला अधिकारियों ने बताया कि 2025 के शैक्षणिक वर्ष में स्कूल में लगभग 3,100 छात्र और 147 शिक्षक नामांकित थे।

शिक्षा मंत्री ने दिए जांच के निर्देश

थाईलैंड के शिक्षा मंत्री प्रसर्ट चंतारारुआंगथोंग ने स्कूल में हुई गोलीबारी की घटना के बाद तुरंत कार्रवाई और मदद का भरोसा दिलाया और संवेदनशील जानकारी शेयर करने में सावधानी बरतने की अपील की। X पर उन्होंने कहा, “मैं अभी उबोन रत्चाथानी प्रांत में सरकारी काम से हूं और लगातार हालात पर नजर रखे हुए हूं। मैंने शिक्षा मंत्रालय के तहत सभी एजेंसियों को निर्देश दिया है कि वे संबंधित अधिकारियों और संगठनों के साथ मिलकर तेजी से काम करें ताकि स्थिति को जल्द सुलझाया जा सके, छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों की सुरक्षा को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी जा सके, और प्रभावित सभी लोगों की शारीरिक और मानसिक स्थिति का तुरंत आकलन करके उन्हें पूरी मदद और सहयोग दिया जा सके।”

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गल्फ संकट के दौरान भारत ने होर्मुज से कैसे निकाले अपने 60 जहाज? संसद में सरकार ने बताया पूरा प्लान

संसद में सरकार ने हाल ही में खाड़ी क्षेत्र (गल्फ) में पैदा हुए तनाव के दौरान उठाए गए कदमों की जानकारी दी। सरकार के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते खतरे के बावजूद भारत ने अपने महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार और जरूरी सामान की आवाजाही को जारी रखा। इसके लिए संबंधित एजेंसियों ने लगातार निगरानी रखी और समय पर आवश्यक कदम उठाए, जिससे देश की आपूर्ति व्यवस्था पर बड़ा असर नहीं पड़ा। संसद में पूछे गए एक सवाल के जवाब में सरकार ने बताया कि, खाड़ी क्षेत्र में तनाव के बावजूद भारत का सामान लेकर जा रहे 60 मालवाहक जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) से पूरी तरह सुरक्षित गुजरने में सफल रहे। सरकार ने ये भी बताया कि, खाड़ी क्षेत्र से 3,972 भारतीय नाविकों को सुरक्षित वापस लाया गया।

इसके अलावा 24 घंटे एक्टिव रहे संकट प्रबंधन सिस्टम ने इस दौरान हजारों फोन कॉल और ईमेल का जवाब देकर लोगों की मदद की। सरकार की ओर से शेयर किए गए ये आंकड़े बताते हैं कि खाड़ी क्षेत्र में पैदा हुए संकट के दौरान भारत ने किस तरह हालात से निपटने के लिए बड़े स्तर पर काम किया।

भारत में ज्यादातार तेल खाड़ी देशों से आता है

खाड़ी क्षेत्र में पैदा हुए संकट के दौरान वैश्विक तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही थी। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में शामिल है, क्योंकि दुनिया के बड़े हिस्से का तेल इसी रास्ते से होकर दूसरे देशों तक पहुंचता है। भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से खरीदता है, जिसमें इराक, सऊदी अरब, यूएई और कुवैत जैसे खाड़ी देश प्रमुख हैं। ऐसे में अगर होर्मुज जलडमरूमध्य में लंबे समय तक कोई रुकावट आती है, तो इसका असर तेल की सप्लाई, माल ढुलाई की लागत और बीमा खर्च पर पड़ सकता है। इससे देश में ईंधन की कीमतों पर भी दबाव बढ़ने की आशंका रहती है।

60 मालवाहक जहाज आए वापस

सरकार ने बताया कि तनावपूर्ण हालात के बावजूद भारत की ओर आने वाले 60 मालवाहक जहाज सुरक्षित अपने गंतव्य तक पहुंचे। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान लोगों की सुरक्षा और सहायता को भी प्राथमिकता दी गई। सरकार ने जानकारी दी कि, खाड़ी क्षेत्र से 3,972 भारतीय नाविकों को सुरक्षित वापस लाया गया। अधिकारियों के अनुसार, संकट के दौरान समुद्री जहाजों पर काम कर रहे भारतीयों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया गया। साथ ही उनके परिवारों से लगातार संपर्क बनाए रखा गया और जरूरत पड़ने पर सहायता व परामर्श की व्यवस्था भी की गई। संकट के दौरान उनकी सुरक्षा के लिए आपातकालीन सहायता व्यवस्था पूरी तरह एक्टिव रखी गई थी।

24 घंटे किया गया काम

सरकार ने बताया कि, पूरे संकट के दौरान 24 घंटे कंट्रोल रूम और डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग का संचार केंद्र लगातार एक्टिव रहा। आपात स्थिति में जहाजों को निर्देश दिए गए थे कि वे तुरंत नजदीकी भारतीय नौसेना या सहयोगी देशों के युद्धपोत से संपर्क करें। साथ ही घटना की जानकारी डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग, इन्फॉर्मेशन फ्यूजन सेंटर-इंडियन ओशन रीजन (IFC-IOR) और यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) को भी तुरंत दें, ताकि समय रहते जरूरी मदद पहुंचाई जा सके।

सरकार के अनुसार, संकट के दौरान शुरू की गई सहायता व्यवस्था का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हुआ। कंट्रोल रूम शुरू होने के बाद वहां नाविकों, उनके परिवारों और समुद्री क्षेत्र से जुड़े अन्य लोगों की बड़ी संख्या में मदद की गई। इस दौरान 15,771 फोन कॉल और 36,499 ईमेल का जवाब दिया गया, जिससे साफ है कि हालात को लेकर लोगों में चिंता थी और लगातार संपर्क बनाए रखना जरूरी था।

महाराष्ट्र में 1 साल के कोर्स पर होम्योपैथी डॉक्टर लिख सकेंगे एलोपैथिक दवाएं, डॉक्टरों ने दी हड़ताल की चेतावनी

Homeopathic doctors in Maharashtra: महाराष्ट्र ने मेडिकल सेक्टर में एक बड़ा और विवादास्पद कदम उठाते हुए एक होम्योपैथी डॉक्टर को आधुनिक (एलोपैथिक) दवाएं लिखने की अनुमति दे दी है। इसके साथ ही महाराष्ट्र ऐसा करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। यह अनुमति राज्य मेडिकल काउंसिल ने एक साल के सर्टिफिकेट कोर्स के आधार पर दी है। इसी के साथ महाराष्ट्र देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है, जहां स्टेट मेडिकल काउंसिल द्वारा 1 साल का फार्मकोलॉजी सर्टिफिकेट कोर्स करने वाले होम्योपैथी डॉक्टर को आधुनिक/एलोपैथिक दवाएं लिखने की अनुमति/रजिस्ट्रेशन दिया गया है।

हालांकि इस फैसले का मेडिकल विशेषज्ञों और डॉक्टरों के संगठनों ने कड़ा विरोध किया है। उनका कहना है कि इससे मरीजों की सुरक्षा पर गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। फिलहाल जवाबदेही तय करने का कोई स्पष्ट ढांचा भी मौजूद नहीं है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) और महाराष्ट्र एसोसिएशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स (MARD) ने इस कदम पर कड़ी आपत्ति जताई है।

इसके विरोध में डॉक्टरों ने बुधवार से नॉन इमरजेंसी (Non-emergency) सेवाओं के बहिष्कार और गुरुवार से आपातकालीन सेवाओं को भी ठप करने की चेतावनी दी है। इस पूरे मामले की सुनवाई बॉम्बे हाईकोर्ट में जारी है, जिसका फैसला अगस्त के मध्य (mid-Aug) तक आने की उम्मीद है।

रिपोर्ट के मुताबिक, नेहा पवार नाम की एक होम्योपैथ डॉक्टर, जिन्होंने फार्माकोलॉजी में एक साल का सर्टिफिकेट कोर्स किया है, उनका रजिस्ट्रेशन महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल (MMC) में कर दिया गया। यह रजिस्ट्रेशन उस समय हुआ जब बड़ी संख्या में होम्योपैथी डॉक्टरों ने MMC कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया।

सूत्रों के अनुसार, मेडिकल काउंसिल अधिकारियों ने पहले पंजीकरण प्रक्रिया को रोकने की कोशिश की थी। ताकि सरकार और डॉक्टर संगठनों के बीच बातचीत पूरी हो सके। लेकिन प्रदर्शन कर रहे होम्योपैथ डॉक्टरों के MMC कार्यालय पहुंचने के बाद आखिरकार पंजीकरण कर दिया गया।

डॉक्टर संगठनों का विरोध तेज

इस फैसले के विरोध में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) और महाराष्ट्र एसोसिएशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स (MARD) ने आंदोलन तेज करने का ऐलान किया है। बुधवार को गैर-आपातकालीन (Non-Emergency) चिकित्सा सेवाओं के बहिष्कार की घोषणा की गई है।

गुरुवार यानी 5 अगस्त से इस बहिष्कार को आपातकालीन (Emergency) सेवाओं तक बढ़ाने की चेतावनी दी गई है। डॉक्टरों का कहना है कि आधुनिक मेडितल पद्धति का अभ्यास केवल उसी क्षेत्र में ट्रेनिंग कर चुके डॉक्टरों को करना चाहिए। इस तरह की अनुमति से मरीजों की जान जोखिम में पड़ सकती है।

बॉम्बे हाईकोर्ट में मामला लंबित

इस पूरे मामले की सुनवाई फिलहाल बॉम्बे हाईकोर्ट में चल रही है। अदालत का फैसला अगस्त के मध्य तक आने की उम्मीद है। महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल द्वारा दिया गया यह रजिस्ट्रेशन सशर्त (Conditional) है। यानी हाईकोर्ट के अंतिम फैसले के आधार पर इसमें बदलाव किया जा सकता है या इसे रद्द भी किया जा सकता है।

क्या है पूरा विवाद?

विवाद इस बात को लेकर है कि क्या केवल एक वर्ष के सर्टिफिकेट कोर्स के आधार पर होम्योपैथ डॉक्टरों को आधुनिक एलोपैथिक दवाएं लिखने की अनुमति दी जानी चाहिए। मेडिकल एक्सपर्ट का मानना है कि इसके लिए विस्तृत मेडिकल ट्रेनिंग की आवश्यक है। जबकि होम्योपैथी डॉक्टरों का कहना है कि अतिरिक्त ट्रेनिंग के बाद उन्हें सीमित दायरे में यह अधिकार मिलना चाहिए। यह फैसला अब राज्य के साथ-साथ देशभर में मेडिकल व्यवस्था और मरीजों की सुरक्षा को लेकर नई बहस का विषय बन गया है।

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UP News : योगी सरकार का स्वास्थ्य क्षेत्र को बड़ा तोहफा, 2,023 रुपए करोड़ का प्रावधान, 5 मंडलों में खुलेंगे आयुष मेडिकल कॉलेज

CM Yogi Adityanath

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के प्रथम अनुपूरक बजट में आयुष और स्वास्थ्य क्षेत्र को प्राथमिकता देते हुए महत्वपूर्ण परियोजनाओं के लिए अतिरिक्त बजट का प्रावधान किया है। सरकार ने आयुष विभाग के लिए 23.25 करोड़ रुपये और चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के लिए 2,000.25 करोड़ रुपये की व्यवस्था कर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। 

 

पांच मंडलों में खुलेंगे नए आयुष मेडिकल कॉलेज

 

अनुपूरक बजट में आयुष क्षेत्र के आधुनिकीकरण और वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया है। उत्तर प्रदेश सरकार और आईआईटी कानपुर के सहयोग से गंगवाल स्कूल ऑफ साइंसेज़ एंड टेक्नोलॉजी, आईआईटी कानपुर में आयुर्वेद अनुसंधान क्लीनिकल प्रमाणीकरण केंद्र स्थापित किया जाएगा। इसके लिए 3.25 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। सरकार ने प्रदेश के उन पांच मंडलों आगरा, बस्ती, गोंडा, मेरठ और मिर्जापुर में नए राजकीय एकीकृत आयुष चिकित्सा महाविद्यालय एवं चिकित्सालय स्थापित करने का निर्णय लिया है, जहां अभी कोई आयुष चिकित्सा महाविद्यालय संचालित नहीं है। इसके लिए 23.25 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है।

 

स्वास्थ्य क्षेत्र को 2000.25 करोड़ रुपये का प्रावधान

 

योगी सरकार ने चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के लिए 2000.25 करोड़ रुपये के अतिरिक्त प्रावधान में कई महत्वपूर्ण योजनाओं को शामिल किया है। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के लिए 1500 करोड़ रुपये का है। सरकार ने आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए भी बड़ा प्रावधान किया है। 

 

अनुपूरक बजट में 108 ई.एम.टी.एस 'स्वास्थ्य सेवा' के संचालन हेतु 200 करोड़ रुपये एवं 102 एम्बुलेंस के संचालन मद में भारत सरकार से प्राप्त अनुमोदन से अधिक की धनराशि का व्यवभार राज्य बजट से वहन किए जाने के लिए 200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। साथ ही प्रदेश के शहरी चिकित्सालयों में अग्निशमन व्यवस्था के लिए 96 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है।

 

चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को अत्याधुनिक और सुलभ बनाने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। इसी क्रम में प्रदेश में राज्य कैंसर मिशन की स्थापना, एसजीपीजीआई में क्वार्टनरी हेल्थ केयर सेंटर की स्थापना, ऑपरेशन थिएटर सुदृढ़ीकरण कार्यक्रम और स्मार्ट आईसीयू नेटवर्क विकसित करने की पहल की गई है। इसके साथ ही एकीकृत ट्रामा एवं इमरजेंसी नेटवर्क की स्थापना की जा रही है।

देवभूमि में कांवड़ियों का भव्य स्वागत, पुष्पवर्षा और चरण प्रक्षालन से किया अभिनंदन, CM धामी ने परोसा भोजन

cm dhami

धर्मनगरी हरिद्वार में कांवड़ यात्रा के दौरान मंगलवार को आस्था, सेवा और संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिला। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में देवभूमि उत्तराखंड ने देश के विभिन्न राज्यों से आए शिवभक्त कांवड़ियों का आत्मीय स्वागत और अभिनंदन किया। राज्य सरकार की ओर से आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में श्रद्धालुओं के सम्मान के साथ-साथ कांवड़ यात्रा के सुरक्षित, सुव्यवस्थित और सफल संचालन के लिए किए जा रहे प्रयासों का भी संदेश दिया गया।

 

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के हरिद्वार आगमन पर हरकीपैड़ी से लेकर कांवड़ यात्रा मार्ग पर हेलीकॉप्टर से शिवभक्तों पर पुष्पवर्षा कर उनका स्वागत किया गया। अलकनंदा होटल परिसर में आयोजित भव्य समारोह में मुख्यमंत्री ने पाँच शिवभक्त कांवड़ियों का चरण प्रक्षालन कर उनका सम्मान किया।  

 

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कांवड़ यात्रियों की स्वास्थ्य सहायता एवं सुविधाओं के लिए स्थापित मुख्यमंत्री स्वास्थ्य सेवा शिविर का उद्घाटन किया। उन्होंने शिविर में उपलब्ध चिकित्सकीय सुविधाओं का अवलोकन किया और श्रद्धालुओं को त्वरित उपचार, आवश्यक दवाइयां तथा अन्य स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्थाओं की जानकारी ली।

 

मुख्यमंत्री ने देश के विभिन्न राज्यों से आए शिवभक्त कांवड़ियों के बीच पहुंचकर उनका स्वागत किया और अपने हाथों से भोजन परोसा।

 

काँवड़ यात्रियों के अभिनदंन कार्यक्रम के अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड सरकार का संकल्प है कि देवभूमि आने वाले प्रत्येक शिवभक्त को सुरक्षित, सुगम और सम्मानजनक वातावरण मिले। कांवड़ यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारत की सनातन परंपरा, सामाजिक समरसता और आध्यात्मिक चेतना का विराट पर्व है। इसके सफल आयोजन के लिए राज्य सरकार सभी संबंधित विभागों के समन्वय से निरंतर कार्य कर रही है।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले पाँच वर्षों से उन्हें कांवड़ यात्रा के दौरान शिवभक्तों के बीच आने और उनकी सेवा करने का अवसर प्राप्त हो रहा है। उन्होंने कहा कि भगवान शिव का नाम करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए आस्था, ऊर्जा और विश्वास का आधार है। कठिन परिस्थितियों में भी शिवभक्त सैकड़ों किलोमीटर की यात्रा पूरी करते हैं और “बम-बम भोले” के जयघोष के साथ अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं। कांवड़ यात्रा अनुशासन, सेवा, समर्पण और सामाजिक एकता का भी प्रतीक है।

 

मुख्यमंत्री ने बताया कि इस वर्ष अब तक एक करोड़ से अधिक शिवभक्त गंगाजल लेकर सफलतापूर्वक अपने गंतव्य की ओर प्रस्थान कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की सांस्कृतिक विरासत और आध्यात्मिक स्थलों के संरक्षण एवं विकास का व्यापक कार्य हो रहा है। काशी विश्वनाथ धाम, महाकाल लोक, श्रीराम जन्मभूमि, केदारनाथ धाम के पुनर्निर्माण और बद्रीनाथ मास्टर प्लान जैसी परियोजनाएं भारतीय संस्कृति को वैश्विक स्तर पर नई पहचान प्रदान कर रही हैं।

 

उन्होंने केदारनाथ आपदा का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2013 की आपदा के बाद प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में केदारनाथ धाम का पुनर्निर्माण कर इसे भव्य और दिव्य स्वरूप दिया गया है। वहां आस्था पथ, सरस्वती घाट, आदि शंकराचार्य की प्रतिमा, तीर्थ पुरोहित आवास सहित अनेक सुविधाओं का विकास किया गया है। उन्होंने कहा कि हरिद्वार में प्रस्तावित गंगा कॉरिडोर और शारदा कॉरिडोर जैसी योजनाएं राज्य के विकास और धार्मिक पर्यटन को नई दिशा प्रदान करेंगी।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वाेच्च प्राथमिकता है। इसके लिए यात्रा मार्गों पर सीसीटीवी कैमरे, ड्रोन निगरानी, एंबुलेंस सेवाएं, स्वास्थ्य शिविर और आपातकालीन सहायता व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं। उन्होंने शिवभक्तों से यात्रा के दौरान अनुशासन, मर्यादा और धार्मिक परंपराओं का पालन करने की अपील की।

उन्होंने पुलिस, प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग, पर्यावरण मित्रों, स्वच्छता कर्मियों, स्वयंसेवी संस्थाओं और अन्य सेवा कार्यों में जुटे कर्मयोगियों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि सभी का सामूहिक सहयोग ही इस विशाल आयोजन को सफल बनाता है। मुख्यमंत्री ने कांवड़ यात्रा के सफल संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले पाँच पुलिसकर्मियों तथा पाँच पर्यावरण मित्रों को सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान केवल कुछ व्यक्तियों का नहीं, बल्कि उन सभी कर्मयोगियों के प्रति राज्य की कृतज्ञता का प्रतीक है, जो यात्रा के दौरान सुरक्षा, स्वच्छता, स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य व्यवस्थाओं को सुचारु बनाए रखने में दिन-रात जुटे हुए हैं।

 

इस अवसर पर महामण्डलेश्वर ललितानंद गिरी महाराज, कैबिनेट मंत्री श्री मदन कौशिक, श्री प्रदीप बत्रा एवं श्री राम सिंह कैड़ा, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती किरण चौधरी, विधायक रानीपुर श्री आदेश चौहान, हरिद्वार की मेयर श्रीमती किरण जैसल, रुड़की की मेयर श्रीमती अनिता अग्रवाल, पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी यतीश्वरानंद, भाजपा जिलाध्यक्ष श्री आशुतोष शर्मा, पूर्व विधायक श्री संजय गुप्ता, राज्य मंत्री श्री देशराज कर्णवाल, श्री दिनेश कौशिक, डॉ. जयपाल सिंह चौहान, श्री श्यामवीर सैनी, श्री शोभाराम प्रजापति, श्री नितिन गौतम, शिवालिक नगर पालिका अध्यक्ष श्री राजीव शर्मा, गंगा सभा के महामंत्री तन्मय वशिष्ठ, भाजपा युवा मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष श्री विक्रम भुल्लर, पूर्व मेयर मनोज गर्ग, गढ़वाल आयुक्त श्री आनंद स्वरूप, मेलाधिकारी श्रीमती सोनिका, आईजी गढ़वाल श्री राजीव स्वरूप, आईजी (कुंभ मेला) श्री योगेन्द्र सिंह रावत, जिलाधिकारी श्री मयूर दीक्षित, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री नवनीत सिंह भुल्लर, एसएसपी (कुंभ मेला) श्री आयुष अग्रवाल, नगर आयुक्त श्री नंदन कुमार, मुख्य विकास अधिकारी डॉ. ललित नारायण मिश्र, पुलिस अधीक्षक (यातायात) श्रीमती निशा यादव, अपर जिलाधिकारी श्री जितेंद्र कुमार, पुलिस अधीक्षक नगर श्री अभय प्रताप सिंह, सचिव एचआरडीए श्री प्रत्यूष सिंह तथा उपजिलाधिकारी हरिद्वार श्री योगेश मेहरा, उप मेलाधिकारी मनजीत सिंह, सहित अन्य जनप्रतिनिधि, संत-महात्मा, गणमान्य नागरिक एवं बड़ी संख्या में शिवभक्त कांवड़िए उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन अपर मेलाधिकारी श्री दयानंद सरस्वती ने किया।