महाराष्ट्र में 1 साल के कोर्स पर होम्योपैथी डॉक्टर लिख सकेंगे एलोपैथिक दवाएं, डॉक्टरों ने दी हड़ताल की चेतावनी

Homeopathic doctors in Maharashtra: महाराष्ट्र ने मेडिकल सेक्टर में एक बड़ा और विवादास्पद कदम उठाते हुए एक होम्योपैथी डॉक्टर को आधुनिक (एलोपैथिक) दवाएं लिखने की अनुमति दे दी है। इसके साथ ही महाराष्ट्र ऐसा करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। यह अनुमति राज्य मेडिकल काउंसिल ने एक साल के सर्टिफिकेट कोर्स के आधार पर दी है। इसी के साथ महाराष्ट्र देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है, जहां स्टेट मेडिकल काउंसिल द्वारा 1 साल का फार्मकोलॉजी सर्टिफिकेट कोर्स करने वाले होम्योपैथी डॉक्टर को आधुनिक/एलोपैथिक दवाएं लिखने की अनुमति/रजिस्ट्रेशन दिया गया है।

हालांकि इस फैसले का मेडिकल विशेषज्ञों और डॉक्टरों के संगठनों ने कड़ा विरोध किया है। उनका कहना है कि इससे मरीजों की सुरक्षा पर गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। फिलहाल जवाबदेही तय करने का कोई स्पष्ट ढांचा भी मौजूद नहीं है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) और महाराष्ट्र एसोसिएशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स (MARD) ने इस कदम पर कड़ी आपत्ति जताई है।

इसके विरोध में डॉक्टरों ने बुधवार से नॉन इमरजेंसी (Non-emergency) सेवाओं के बहिष्कार और गुरुवार से आपातकालीन सेवाओं को भी ठप करने की चेतावनी दी है। इस पूरे मामले की सुनवाई बॉम्बे हाईकोर्ट में जारी है, जिसका फैसला अगस्त के मध्य (mid-Aug) तक आने की उम्मीद है।

रिपोर्ट के मुताबिक, नेहा पवार नाम की एक होम्योपैथ डॉक्टर, जिन्होंने फार्माकोलॉजी में एक साल का सर्टिफिकेट कोर्स किया है, उनका रजिस्ट्रेशन महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल (MMC) में कर दिया गया। यह रजिस्ट्रेशन उस समय हुआ जब बड़ी संख्या में होम्योपैथी डॉक्टरों ने MMC कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया।

सूत्रों के अनुसार, मेडिकल काउंसिल अधिकारियों ने पहले पंजीकरण प्रक्रिया को रोकने की कोशिश की थी। ताकि सरकार और डॉक्टर संगठनों के बीच बातचीत पूरी हो सके। लेकिन प्रदर्शन कर रहे होम्योपैथ डॉक्टरों के MMC कार्यालय पहुंचने के बाद आखिरकार पंजीकरण कर दिया गया।

डॉक्टर संगठनों का विरोध तेज

इस फैसले के विरोध में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) और महाराष्ट्र एसोसिएशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स (MARD) ने आंदोलन तेज करने का ऐलान किया है। बुधवार को गैर-आपातकालीन (Non-Emergency) चिकित्सा सेवाओं के बहिष्कार की घोषणा की गई है।

गुरुवार यानी 5 अगस्त से इस बहिष्कार को आपातकालीन (Emergency) सेवाओं तक बढ़ाने की चेतावनी दी गई है। डॉक्टरों का कहना है कि आधुनिक मेडितल पद्धति का अभ्यास केवल उसी क्षेत्र में ट्रेनिंग कर चुके डॉक्टरों को करना चाहिए। इस तरह की अनुमति से मरीजों की जान जोखिम में पड़ सकती है।

बॉम्बे हाईकोर्ट में मामला लंबित

इस पूरे मामले की सुनवाई फिलहाल बॉम्बे हाईकोर्ट में चल रही है। अदालत का फैसला अगस्त के मध्य तक आने की उम्मीद है। महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल द्वारा दिया गया यह रजिस्ट्रेशन सशर्त (Conditional) है। यानी हाईकोर्ट के अंतिम फैसले के आधार पर इसमें बदलाव किया जा सकता है या इसे रद्द भी किया जा सकता है।

क्या है पूरा विवाद?

विवाद इस बात को लेकर है कि क्या केवल एक वर्ष के सर्टिफिकेट कोर्स के आधार पर होम्योपैथ डॉक्टरों को आधुनिक एलोपैथिक दवाएं लिखने की अनुमति दी जानी चाहिए। मेडिकल एक्सपर्ट का मानना है कि इसके लिए विस्तृत मेडिकल ट्रेनिंग की आवश्यक है। जबकि होम्योपैथी डॉक्टरों का कहना है कि अतिरिक्त ट्रेनिंग के बाद उन्हें सीमित दायरे में यह अधिकार मिलना चाहिए। यह फैसला अब राज्य के साथ-साथ देशभर में मेडिकल व्यवस्था और मरीजों की सुरक्षा को लेकर नई बहस का विषय बन गया है।

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महाराष्ट्र के 423 शहरों के लिए ₹44800 करोड़ का प्लान, सड़क-पानी और ट्रैफिक की तस्वीर बदल जाएगी

महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के सभी 423 शहरी स्थानीय निकायों में बुनियादी ढांचे को बेहतर करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने अर्बन चैलेंज फंड नाम से 44800 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी योजना का ऐलान किया है। इस योजना की घोषणा करते हुए उप मुख्यमंत्री और नगर विकास मंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि यह कार्यक्रम शहरों को अधिक आधुनिक, आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर और भविष्य की शहरी चुनौतियों से निपटने के लिए बेहतर ढंग से सक्षम बनाएगा। यह फंड वर्ष 2025-26 से 2030-31 के बीच लागू किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर इसे अगले तीन सालों के लिए इसे बढ़ाने का प्रावधान भी रखा गया है।

फंड का ढांचा: कैसे जुटाया जाएगा 44800 करोड़ रुपये का बजट?

इस पहल की एक प्रमुख विशेषता इसका ब्लेंडेड फाइनेंसिंग मॉडल है। इसके तहत परियोजनाओं को केंद्र सरकार की सहायता, बाजार उधारी और राज्य के सहयोग के संयोजन के माध्यम से फाइनेंस किया जाएगा। एलिबिल परियोजनाओं को केंद्र सरकार से 25 प्रतिशत तक की फंडिंग मिल सकती है। परियोजना लागत का कम से कम 50 प्रतिशत हिस्सा म्यूनिसिपल बॉन्ड, बैंक लोन या पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल के जरिए जुटाना होगा। बाकी 25 प्रतिशत राशि राज्य सरकार या संबंधित शहरी स्थानीय निकाय द्वारा दी जाएगी।

छोटे शहरों के लिए विशेष सुविधा

यह योजना महाराष्ट्र के सभी शहरी स्थानीय निकायों के लिए खुली है। छोटे शहरों को भी इस योजना का पूरा लाभ मिले, यह सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने 1 लाख से कम आबादी वाले शहरों के लिए लोन रीपेमेंट गारंटी मैकेनिज्म पेश किया है। इससे छोटी नगरपालिकाओं के लिए वित्तीय बाजारों से धन जुटाना और बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को शुरू करना आसान हो जाएगा।

इन 3 मुख्य क्षेत्रों पर रहेगा फोकस और ये प्रोजेक्ट होंगे शामिल

यह फंड मुख्य रूप से तीन व्यापक क्षेत्रों पर केंद्रित होगा। पहला जल आपूर्ति और स्वच्छता, दूसरा क्रिएटिव अर्बन डेवलपमेंट और तीसरा शहरों को आर्थिक विकास के इंजन के रूप में मजबूत करना।

किन-किन परियोजनाओं को मिलेगा बजट?

योजना के तहत फंडिंग के लिए एलिजिबल प्रोडेक्ट्स यहां नीचे देखे जा सकते हैं:-

डिजिटल गवर्नेंस और प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड

ट्रैफिक की समस्या से मुक्ति और लास्ट-माइल कनेक्टिविटी

पुराने शहरी इलाकों व बाजारों का पुनर्विकास

नॉन-मोटराइज्ड ट्रांसपोर्ट, ट्रांजिट हब्स और ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट

शहरी बाढ़ नियंत्रण और इंटिग्रेटेड वेस्ट मैनेजमेंट

ग्रीनफील्ड और सेमी-ग्रीनफील्ड डेवलपमेंट, सड़कें, फ्लाईओवर्स और रिवरफ्रंट डेवलपमेंट

लैंड बैंक तैयार करना और शहरी क्षेत्रों से डेयरी गतिविधियों को बाहर ले जाना

20 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों के लिए विशेष प्रोजेक्ट

जिन शहरों की जनसंख्या 20 लाख से अधिक है, वहां सरकार कई सुविधाओं को भी प्राथमिकता देगी। इसमें कन्वेंशन सेंटर्स और मनोरंजन सुविधाएं, मॉडर्न पब्लिक लाइब्रेरी और स्पोर्ट्स इंफ्रा, वॉटर स्पोर्ट्स सुविधाएं, ध्यान केंद्र और वेलनेस पार्क जैसी चीजें शामिल हैं।

परियोजनाओं को सुचारू और पारदर्शी तरीके से पूरा करने के लिए सरकार ने किया है कि प्रोजेक्ट डेवलपमेंट एंड मैनेजमेंट कंसल्टेंट्स की नियुक्ति की जाएगी। इसके अलावा प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट्स और जिला स्तर पर निगरानी समितियों का गठन होगा। हर शहर में समर्पित मिशन मैनेजमेंट सेल्स बनाए जाएंगे। जरूरत के मुताबिक परियोजनाओं को स्पेशल पर्पज व्हीकल्स के माध्यम से भी लागू किया जा सकता है।

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इसे सिर्फ एक फंडिंग स्कीम की बजाय कायाकल्प का रोडमैप बताते हुए एकनाथ शिंदे ने कहा कि यह फंड नागरिक सुविधाओं में सुधार करेगा, शहरी सेवाओं को मजबूत करेगा, निवेश लेकर आएगा, रोजगार पैदा करेगा और नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता को बढ़ाएगा। उन्होंने कहा कि लंबे समय में सरकार का उद्देश्य एक कॉम्पिटेटिव , टिकाऊ और फाइनेंशियली इंडिपेंडेंट शहरों को तैयार करना है।