Ranchi Student Protest: रांची में छात्रों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले छोड़े गए, JPSC के पूर्व चेयरमैन गिरफ्तार

Ranchi Student Protest: JPSC-JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ विधानसभा घेराव करने पहुंचे छात्रों को रोकने के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की स्थिति बन गई। छात्रों के लगातार आगे बढ़ने और बैरिकेडिंग पार करने की फिर धरना शुरू कर दिया, जिसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले दागे। इसके बाद प्रदर्शनकारी छात्रों की ओर से पुलिस की तरफ जूते-चप्पल फेंके जाने लगे। वहीं छात्रों के प्रदर्शन के बीच एक बड़ी खबर भी सामने आई है। झारखंड CID ने झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) के पूर्व चेयरमैन एल. खियांग्ते को गिरफ्तार कर लिया है।

JPSC के पूर्व चेयरमैन गिरफ्तार

झारखंड CID की कार्रवाई ऐसे समय में हुई है, जब रांची में JPSC और JSSC के अभ्यर्थी लगातार विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। छात्र संगठन JSSC-CGL परीक्षा की पूरी और स्वतंत्र जांच सीबीआई से कराने की मांग कर रहे हैं। इसके साथ ही छात्र JPSC और JSSC की कार्यप्रणाली में बड़े सुधार की भी मांग कर रहे हैं। 21 जुलाई को JPSC ऑफिस में रेड के बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद से CID उनसे लगातार पूछताछ कर रही थी।

इससे पहले विधानसभा मार्च के दौरान पुलिस प्रदर्शनकारियों को कंटीले तार की बैरिकेडिंग और वाटर कैनन से रोकने की कोशिश की तो छात्र बैरिकेडिंग पर चढ़कर डांस करते नजर आए। वहीं, 9 दिन से भूख हड़ताल पर बैठे देवेंद्रनाथ महतो एंबुलेंस से विधानसभा मार्च में शामिल हुए।

Government School के 1,500 बच्चों ने अपने हक़ के लिए उठाई आवाज़ | Gen Alpha Protest

स्कूल में पढ़ाई होनी चाहिए, आंदोलन नहीं।
लेकिन जब बच्चों को साफ़ पानी, शौचालय, पंखे और शिक्षक जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए सड़क पर उतरना पड़े,
तो सवाल बच्चों पर नहीं, सिस्टम पर उठता है।
उत्तर प्रदेश के फतेहपुर से शुरू हुई यह आवाज़ अब बिहार, राजस्थान, महाराष्ट्र और देश के कई हिस्सों तक पहुँच रही है।
क्या आपको लगता है कि बच्चों को अपने अधिकारों के लिए इस तरह प्रदर्शन करना पड़ना चाहिए?
अपनी राय कमेंट में ज़रूर बताइए।

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महाराष्ट्र में 1 साल के कोर्स पर होम्योपैथी डॉक्टर लिख सकेंगे एलोपैथिक दवाएं, डॉक्टरों ने दी हड़ताल की चेतावनी

Homeopathic doctors in Maharashtra: महाराष्ट्र ने मेडिकल सेक्टर में एक बड़ा और विवादास्पद कदम उठाते हुए एक होम्योपैथी डॉक्टर को आधुनिक (एलोपैथिक) दवाएं लिखने की अनुमति दे दी है। इसके साथ ही महाराष्ट्र ऐसा करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। यह अनुमति राज्य मेडिकल काउंसिल ने एक साल के सर्टिफिकेट कोर्स के आधार पर दी है। इसी के साथ महाराष्ट्र देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है, जहां स्टेट मेडिकल काउंसिल द्वारा 1 साल का फार्मकोलॉजी सर्टिफिकेट कोर्स करने वाले होम्योपैथी डॉक्टर को आधुनिक/एलोपैथिक दवाएं लिखने की अनुमति/रजिस्ट्रेशन दिया गया है।

हालांकि इस फैसले का मेडिकल विशेषज्ञों और डॉक्टरों के संगठनों ने कड़ा विरोध किया है। उनका कहना है कि इससे मरीजों की सुरक्षा पर गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। फिलहाल जवाबदेही तय करने का कोई स्पष्ट ढांचा भी मौजूद नहीं है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) और महाराष्ट्र एसोसिएशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स (MARD) ने इस कदम पर कड़ी आपत्ति जताई है।

इसके विरोध में डॉक्टरों ने बुधवार से नॉन इमरजेंसी (Non-emergency) सेवाओं के बहिष्कार और गुरुवार से आपातकालीन सेवाओं को भी ठप करने की चेतावनी दी है। इस पूरे मामले की सुनवाई बॉम्बे हाईकोर्ट में जारी है, जिसका फैसला अगस्त के मध्य (mid-Aug) तक आने की उम्मीद है।

रिपोर्ट के मुताबिक, नेहा पवार नाम की एक होम्योपैथ डॉक्टर, जिन्होंने फार्माकोलॉजी में एक साल का सर्टिफिकेट कोर्स किया है, उनका रजिस्ट्रेशन महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल (MMC) में कर दिया गया। यह रजिस्ट्रेशन उस समय हुआ जब बड़ी संख्या में होम्योपैथी डॉक्टरों ने MMC कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया।

सूत्रों के अनुसार, मेडिकल काउंसिल अधिकारियों ने पहले पंजीकरण प्रक्रिया को रोकने की कोशिश की थी। ताकि सरकार और डॉक्टर संगठनों के बीच बातचीत पूरी हो सके। लेकिन प्रदर्शन कर रहे होम्योपैथ डॉक्टरों के MMC कार्यालय पहुंचने के बाद आखिरकार पंजीकरण कर दिया गया।

डॉक्टर संगठनों का विरोध तेज

इस फैसले के विरोध में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) और महाराष्ट्र एसोसिएशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स (MARD) ने आंदोलन तेज करने का ऐलान किया है। बुधवार को गैर-आपातकालीन (Non-Emergency) चिकित्सा सेवाओं के बहिष्कार की घोषणा की गई है।

गुरुवार यानी 5 अगस्त से इस बहिष्कार को आपातकालीन (Emergency) सेवाओं तक बढ़ाने की चेतावनी दी गई है। डॉक्टरों का कहना है कि आधुनिक मेडितल पद्धति का अभ्यास केवल उसी क्षेत्र में ट्रेनिंग कर चुके डॉक्टरों को करना चाहिए। इस तरह की अनुमति से मरीजों की जान जोखिम में पड़ सकती है।

बॉम्बे हाईकोर्ट में मामला लंबित

इस पूरे मामले की सुनवाई फिलहाल बॉम्बे हाईकोर्ट में चल रही है। अदालत का फैसला अगस्त के मध्य तक आने की उम्मीद है। महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल द्वारा दिया गया यह रजिस्ट्रेशन सशर्त (Conditional) है। यानी हाईकोर्ट के अंतिम फैसले के आधार पर इसमें बदलाव किया जा सकता है या इसे रद्द भी किया जा सकता है।

क्या है पूरा विवाद?

विवाद इस बात को लेकर है कि क्या केवल एक वर्ष के सर्टिफिकेट कोर्स के आधार पर होम्योपैथ डॉक्टरों को आधुनिक एलोपैथिक दवाएं लिखने की अनुमति दी जानी चाहिए। मेडिकल एक्सपर्ट का मानना है कि इसके लिए विस्तृत मेडिकल ट्रेनिंग की आवश्यक है। जबकि होम्योपैथी डॉक्टरों का कहना है कि अतिरिक्त ट्रेनिंग के बाद उन्हें सीमित दायरे में यह अधिकार मिलना चाहिए। यह फैसला अब राज्य के साथ-साथ देशभर में मेडिकल व्यवस्था और मरीजों की सुरक्षा को लेकर नई बहस का विषय बन गया है।

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Jharkhand Student Protest: झारखंड के ‘सोनम वांगचुक’ कहे जाने वाले छात्र नेता देवेंद्र महतो कौन हैं? रांची के Gen-Z प्रोटेस्ट का बने चेहरा

Who is Devendra Nath Mahto: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं परीक्षा JPSC, JSSC-CGL और अन्य भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर राजधानी रांची में सैकड़ों छात्रों का प्रदर्शन लगातार जारी है। प्रदर्शनकारी परीक्षा अनियमितताओं की CBI जांच और भर्ती एजेंसियों में सुधार की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी 29 जुलाई से एक स्टेडियम में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो इस Gen-Z आंदोलन के प्रमुख चेहरा हैं।

उन्हें झारखंड के विरोध प्रदर्शन का ‘सोनम वांगचुक’ कहा जा रहा है क्योंकि उन्होंने प्रदर्शनकारी छात्रों के समर्थन में रविवार रात (2 अगस्त) को रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की। वहीं, Gen Z प्रदर्शनकारी 29 जुलाई से स्टेडियम में धरना दे रहे हैं। उन्हें पूरे देश से समर्थन मिल रहा है। अलग-अलग शहरों से लोग ऑनलाइन डिलीवरी ऐप के जरिए प्रदर्शन स्थल पर खाने की चीजें उपलब्ध करा रहे हैं।

भर्ती परीक्षाओं में भारी अनियमितताओं का विरोध

महतो और छात्र झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में भारी अनियमितताओं का विरोध कर रहे हैं। वह CBI और ED से जांच की मांग कर रहे हैं। महतो ने 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा को तब तक रद्द करने की मांग की है जब तक कि पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित न हो जाए।

महतो ने अपना अनशन तोड़ा

छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने चार दिन बाद मंगलवार को अपना अनशन समाप्त कर दिया है। महतो ने बुधवार को एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की अपील पर अपनी भूख हड़ताल के दौरान पानी पिया। एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने महतो से बातचीत की और उनका हाल चाल-जाना। महतो JPSC, JSSC-CGL और दूसरी कई प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के विरोध में जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं।

छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने कहा, “हम 25 जुलाई से सत्याग्रह कर रहे हैं। मैं 2 अगस्त से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठा हूं। मैं बहुत थक गया था। यह एक नाजुक समय था… यहां 26 सालों से पेपर लीक हो रहे हैं… कल डॉक्टर ने चेतावनी दी थी कि अगर मैंने पानी नहीं पिया, तो मुझे अस्पताल में भर्ती होना पड़ेगा।”

इस दौरान एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने कहा, “कृपया थोड़ा पानी पी लीजिए, यह आत्महत्या जैसा है… आपको कुछ समय चाहिए, लेकिन इसमें 2-3 हफ्ते भी लग सकते हैं और मुझे उम्मीद है कि सरकार बात समझेगी और सही फैसला लेगी।”

महतो ने रविवार रात करीब 10 बजे जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में प्रदर्शन स्थल पर भूख हड़ताल शुरू की। इसमें 14वीं जेपीएससी परीक्षा, जेएसएससी-सीजीएल और अन्य भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी की सीबीआई तथा ईडी से जांच कराने की मांग की गई। अपनी भूख हड़ताल शुरू करने से पहले, उन्होंने कहा कि कथित अनियमितता के मामले में केंद्र और राज्य सरकारों का लापरवाही वाला रवैया छात्रों, युवाओं और अभ्यर्थियों का मनोबल तोड़ रहा है।

कौन हैं देवेंद्र नाथ महतो?

देवेंद्र नाथ महतो रांची के एक छोटे से गांव के रहने वाले छात्र नेता हैं। उन्होंने रांची के डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी यूनिवर्सिटी में उच्च शिक्षा प्राप्त करने से पहले बुंडू में अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की। संस्कृत के साथ-साथ कुर्माली, आदिवासी और क्षेत्रीय भाषाओं में पोस्ट-ग्रेजुएट महतो के पास हजारीबाग से बैचलर ऑफ एजुकेशन (B.Ed.) की डिग्री भी है।

महतो ने साल 2024 के झारखंड विधानसभा चुनाव में तमार निर्वाचन क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर भी चुनाव लड़ा था। वह 2015 से छात्र सक्रियता में शामिल रहे हैं। उन्होंने छात्रवृत्ति, पेपर लीक, भर्ती नियमों और आरक्षण नीतियों से जुड़े मुद्दों को लगातार उठाया है। रविवार को उन्हें कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का भी समर्थन मिला। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने कहा कि उन्होंने महतो और अन्य छात्र नेताओं के साथ वीडियो कॉल की थी।

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उन्होंने अपने हालिया X पोस्ट में लिखा, “यह संघर्ष, जो 5 जुलाई को शुरू हुआ था और 25 जुलाई से जारी दिन-रात का सत्याग्रह अब एक मुश्किल दौर में पहुंच गया है। शरीर में कमजोरी है, लेकिन छात्रों को न्याय दिलाने का संकल्प पहले से कहीं ज्यादा मजबूत है।” उन्होंने समर्थकों से आंदोलन को शांतिपूर्ण और संवैधानिक बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि यह लड़ाई किसी व्यक्ति के लिए नहीं, बल्कि झारखंड के लाखों युवा उम्मीदवारों के भविष्य के लिए है।

NEET विरोध प्रदर्शन के दौरान वांगचुक की भूख हड़ताल

एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने NEET विरोध प्रदर्शन को सुर्खियों में ला दिया, जिसने इस महीने की शुरुआत में पूरे देश में हलचल मचा दी थी। जहां एक तरफ ‘कॉकरोच जनता पार्ट’ के नेताओं की अगुवाई में छात्र 6 जून से नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरने पर बैठे थे, वहीं वांगचुक 28 जून को इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए और अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की घोषणा की।

उनके शामिल होने से इस आंदोलन को काफी सपोर्ट मिला। देश भर के छात्र विरोध प्रदर्शन में शामिल होने लगे। उन्होंने 23 जुलाई, 2026 की देर रात अपनी 26 दिन की भूख हड़ताल खत्म की, जब उन्हें केंद्र सरकार से परीक्षा में व्यापक सुधारों के बारे में आधिकारिक लिखित आश्वासन मिला। उन्होंने गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह की मौजूदगी में सूप पीकर अपना अनशन तोड़ा। वांगचुक का वजन लगभग 11 किलो कम हो गया। उनकी भूख हड़ताल बेकार नहीं गई, क्योंकि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मुख्य मांग 25 जुलाई को पूरी हो गई।

झारखंड में छात्रों का विरोध प्रदर्शन

25 जुलाई से हजारों छात्र सड़कों पर उतर आए हैं। विभिन्न सरकारी परीक्षाओं विशेष रूप से झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। यह विरोध प्रदर्शन जवाबदेही, पारदर्शी भर्ती और शिक्षा सुधारों की मांग करते हुए पूरे राज्य में फैल गया है, जिसका केंद्र रांची है।

इसकी शुरुआत JPSC सिविल सेवा परीक्षा में OMR शीट के साथ छेड़छाड़ और पेपर लीक की खबरों के बाद हुई। झारखंड में छात्र राज्य में परीक्षा से जुड़ी कई अन्य अनियमितताओं को लेकर नाराज हैं। वे 2024 झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) CGL परीक्षा का पेपर लीक होने और हाई कोर्ट के दखल के बाद परीक्षा को दोबारा आयोजित करने के फ़ैसले पर जवाब मांग रहे हैं।

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इस साल की शुरुआत में झारखंड आबकारी कांस्टेबल प्रतियोगी परीक्षा (JECCE) में लीक हुए पेपर सेट को याद करने के लिए प्रति व्यक्ति ₹15 लाख तक का भुगतान करते हुए पकड़े जाने के बाद 159 उम्मीदवारों और रैकेट के 5 सरगनाओं को अरेस्ट किया गया था। इसके अलावा, कोडरमा और गिरिडीह जैसे जिलों में JAC क्लास 10 बोर्ड परीक्षा (2025) के साइंस और हिंदी के पेपर भी परीक्षा से पहले या एग्जाम के दौरान सोशल मीडिया पर वायरल हो ग। इसके कारण परीक्षाएं रद्द कर दोबारा परीक्षा करानी पड़ी।

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आखिर किन 3 शर्तों पर मान गए सोनम वांगचुक? 26 दिन बाद अनशन खत्म करने की असल वजह तो अब सामने आई

CJP Protest update: NEET-UG 2026 परीक्षा में कथित धांधली और पेपर लीक के विरोध में 26 दिनों से अनशन पर बैठे मशहूर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 24 जुलाई की आधी रात के बाद अपना अनशन समाप्त कर दिया है। अनशन खत्म करने के बाद वांगचुक ने अपने एक्स हैंडल पर एक वीडियो जारी कर उन तीन प्रमुख शर्तों और वजहों का खुलासा किया है जिनके आधार पर उन्होंने अपना 26 दिनों का उपवास तोड़ा है। अस्पताल के बेड से जारी 3 मिनट के इस वीडियो में वांगचुक ने बताया कि केंद्रीय मंत्रियों जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह के साथ हुई मुलाकात के बाद उन्होंने अनशन खत्म करने का फैसला लिया।

किन 3 शर्तों पर खत्म हुआ 26 दिन लंबा अनशन?

सोनम वांगचुक के मुताबिक सरकार की ओर से मिली तीन मुख्य गारंटियों के बाद ही उन्होंने अपना अनशन वापस लिया है। पहला है परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही पर संसद में चर्चा। केंद्रीय मंत्रियों ने वांगचुक को आश्वासन दिया है कि सरकार और सभी राजनीतिक दलों के सांसद संसद में असफल हो रही परीक्षा प्रणाली और जवाबदेही के मुद्दे पर विस्तृत चर्चा करेंगे। दूसरा पीड़ित परिवारों को मुआवजा। वांगचुक के मुताबिक सरकार ने NEET परीक्षा पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले अभ्यर्थियों के पीड़ित परिवारों को पर्याप्त मुआवजा देने का आश्वासन दिया है। तीसरा शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर केस दर्ज न करना। सरकार ने वादा किया है कि जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण ढंग से विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों और लोगों के खिलाफ कोई भी कानूनी मामला या केस दर्ज नहीं किया जाएगा।

पीएम मोदी ने रात में वीडियो जारी कर किया कड़े कानून का ऐलान

सोनम वांगचुक के अनशन समाप्त करने और नीट-यूजी 2026 परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी और युवाओं के विरोध प्रदर्शन के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी गुरुवार देर रात एक सेल्फ-रिकॉर्डेड वीडियो संदेश जारी किया। पीएम मोदी ने एक्स पर वीडियो शेयर करते हुए लिखा कि पेपर लीक करने वालों के खिलाफ 24 जुलाई की कैबिनेट बैठक में और सख्त कार्रवाई आएगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि केंद्रीय मंत्रिमंडल एक ड्राफ्ट बिल लाएगा जिसमें दोषियों के लिए सख्त सजा और मामलों के त्वरित निपटारे के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट गठित करने का प्रावधान होगा। इसके लिए संबंधित विभागों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं। दूसरी ओर विपक्ष संसद के जारी मानसून सत्र के भीतर और बाहर लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहा है और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तथा नीट पेपर लीक मामले पर विस्तृत चर्चा की मांग पर अड़ा हुआ है।

कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में आज सरकार और CJP के बीच वार्ता

पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक केंद्र सरकार द्वारा तटस्थ स्थल की मांग स्वीकार किए जाने के बाद शुक्रवार को दोपहर करीब 12:30 बजे दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में सरकार और CJP के बीच बातचीत तय हुई है। सीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सौरभ दास ने बताया कि वे सरकार द्वारा न्यूट्रल वेन्यू की मांग मानने के फैसले का स्वागत करते हैं। इससे पहले 20 जुलाई को सीजेपी प्रवक्ताओं (सौरभ दास और आशुतोष रंका) की केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा के आवास पर मुलाकात हुई थी। इसके बाद सीजेपी नेताओं ने आरोप लगाया था कि उन्हें वर्चुअल डिटेंशन में रखा गया था। इसके बाद से ही सीजेपी किसी मंत्री के घर या दफ्तर के बजाय केवल न्यूट्रल वेन्यू पर ही वार्ता करने की शर्त पर अड़ी थी। सीजेपी ने स्पष्ट किया है कि जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपना इस्तीफा नहीं दे देते, तब तक जंतर-मंतर पर उनका प्रदर्शन जारी रहेगा।

CJP की मुख्य मांगें

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा।

प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी पर जवाबदेही तय करना और शिक्षा प्रणाली में सुधार।

नीट पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को ₹1 करोड़ का मुआवजा।

आंदोलन में शामिल शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर (FIR) और कानूनी कार्रवाई को वापस लेना।