आखिर किन 3 शर्तों पर मान गए सोनम वांगचुक? 26 दिन बाद अनशन खत्म करने की असल वजह तो अब सामने आई

CJP Protest update: NEET-UG 2026 परीक्षा में कथित धांधली और पेपर लीक के विरोध में 26 दिनों से अनशन पर बैठे मशहूर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 24 जुलाई की आधी रात के बाद अपना अनशन समाप्त कर दिया है। अनशन खत्म करने के बाद वांगचुक ने अपने एक्स हैंडल पर एक वीडियो जारी कर उन तीन प्रमुख शर्तों और वजहों का खुलासा किया है जिनके आधार पर उन्होंने अपना 26 दिनों का उपवास तोड़ा है। अस्पताल के बेड से जारी 3 मिनट के इस वीडियो में वांगचुक ने बताया कि केंद्रीय मंत्रियों जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह के साथ हुई मुलाकात के बाद उन्होंने अनशन खत्म करने का फैसला लिया।

किन 3 शर्तों पर खत्म हुआ 26 दिन लंबा अनशन?

सोनम वांगचुक के मुताबिक सरकार की ओर से मिली तीन मुख्य गारंटियों के बाद ही उन्होंने अपना अनशन वापस लिया है। पहला है परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही पर संसद में चर्चा। केंद्रीय मंत्रियों ने वांगचुक को आश्वासन दिया है कि सरकार और सभी राजनीतिक दलों के सांसद संसद में असफल हो रही परीक्षा प्रणाली और जवाबदेही के मुद्दे पर विस्तृत चर्चा करेंगे। दूसरा पीड़ित परिवारों को मुआवजा। वांगचुक के मुताबिक सरकार ने NEET परीक्षा पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले अभ्यर्थियों के पीड़ित परिवारों को पर्याप्त मुआवजा देने का आश्वासन दिया है। तीसरा शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर केस दर्ज न करना। सरकार ने वादा किया है कि जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण ढंग से विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों और लोगों के खिलाफ कोई भी कानूनी मामला या केस दर्ज नहीं किया जाएगा।

पीएम मोदी ने रात में वीडियो जारी कर किया कड़े कानून का ऐलान

सोनम वांगचुक के अनशन समाप्त करने और नीट-यूजी 2026 परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी और युवाओं के विरोध प्रदर्शन के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी गुरुवार देर रात एक सेल्फ-रिकॉर्डेड वीडियो संदेश जारी किया। पीएम मोदी ने एक्स पर वीडियो शेयर करते हुए लिखा कि पेपर लीक करने वालों के खिलाफ 24 जुलाई की कैबिनेट बैठक में और सख्त कार्रवाई आएगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि केंद्रीय मंत्रिमंडल एक ड्राफ्ट बिल लाएगा जिसमें दोषियों के लिए सख्त सजा और मामलों के त्वरित निपटारे के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट गठित करने का प्रावधान होगा। इसके लिए संबंधित विभागों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं। दूसरी ओर विपक्ष संसद के जारी मानसून सत्र के भीतर और बाहर लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहा है और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तथा नीट पेपर लीक मामले पर विस्तृत चर्चा की मांग पर अड़ा हुआ है।

कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में आज सरकार और CJP के बीच वार्ता

पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक केंद्र सरकार द्वारा तटस्थ स्थल की मांग स्वीकार किए जाने के बाद शुक्रवार को दोपहर करीब 12:30 बजे दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में सरकार और CJP के बीच बातचीत तय हुई है। सीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सौरभ दास ने बताया कि वे सरकार द्वारा न्यूट्रल वेन्यू की मांग मानने के फैसले का स्वागत करते हैं। इससे पहले 20 जुलाई को सीजेपी प्रवक्ताओं (सौरभ दास और आशुतोष रंका) की केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा के आवास पर मुलाकात हुई थी। इसके बाद सीजेपी नेताओं ने आरोप लगाया था कि उन्हें वर्चुअल डिटेंशन में रखा गया था। इसके बाद से ही सीजेपी किसी मंत्री के घर या दफ्तर के बजाय केवल न्यूट्रल वेन्यू पर ही वार्ता करने की शर्त पर अड़ी थी। सीजेपी ने स्पष्ट किया है कि जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपना इस्तीफा नहीं दे देते, तब तक जंतर-मंतर पर उनका प्रदर्शन जारी रहेगा।

CJP की मुख्य मांगें

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा।

प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी पर जवाबदेही तय करना और शिक्षा प्रणाली में सुधार।

नीट पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को ₹1 करोड़ का मुआवजा।

आंदोलन में शामिल शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर (FIR) और कानूनी कार्रवाई को वापस लेना।

CJP Protest: करीना कपूर ने स्टूडेंट्स प्रोटेस्ट का किया समर्थन, बोलीं-‘बात सुनना कोई एहसान नहीं है’

CJP Protest: करीना कपूर और वरुण धवन ने दिल्ली में CJP की अगुवाई में चल रहे छात्रों के विरोध-प्रदर्शन का समर्थन किया है। सलमान खान, आलिया भट्ट, अनन्या पांडे और कई अन्य बड़े बॉलीवुड सितारों के बाद, करीना और वरुण ने भी छात्रों का साथ देते हुए कहा है कि युवा पीढ़ी की मांगों को सुनना कोई “शिष्टाचार” नहीं, बल्कि “ज़िम्मेदारी” है।

करीना ने इंस्टाग्राम पर स्टूडेंट्स के सपोर्ट में एक दिल को छू लेने वाला नोट शेयर किया। उन्होंने लिखा, “मैं कुछ दिनों से इस बारे में सोच रही थी, लेकिन अब और चुप नहीं रह सकती। इतने सारे युवा अपनी बात रखना चाहते हैं और उनकी आवाज को नजरअंदाज करना नामुमकिन है… और ऐसा किया भी नहीं जाना चाहिए।

हम सब जानते हैं कि एक बच्चे के लिए शिक्षा का क्या मतलब है। यह उन्हें आत्मविश्वास देती है। यह उन्हें उम्मीद देती है। यह परिवारों को भरोसा दिलाती है कि आने वाला कल आज से बेहतर हो सकता है। लेकिन शिक्षा तभी असरदार होती है जब बच्चे उस पर भरोसा करें। और जिस पल उन्हें यह शक होने लगता है कि ईमानदारी, कड़ी मेहनत और काबिलियत की असल में कोई अहमियत नहीं है, तो उनका भरोसा खत्म हो जाता है।”

करीना ने इस बात पर जोर दिया कि स्टूडेंट्स को ऐसा एजुकेशन सिस्टम मिलना चाहिए जिस पर वे भरोसा कर सकें। उन्होंने लिखा, “किसी भी बच्चे को यह सोचने की ज़रूरत नहीं पड़नी चाहिए कि क्या उनकी कोशिशें काफ़ी होंगी। वे ऐसे सिस्टम के हक़दार हैं जिस पर वे भरोसा कर सकें, जहां काबिलियत की असल अहमियत हो, कोशिशों का इनाम मिले और हर बच्चा बराबरी के मौके से शुरुआत करे।

यह कोई बहुत बड़ी मांग नहीं है। यह तो कम से कम ज़रूरी बात है। जब पूरी पीढ़ी अपने भविष्य के बारे में एक आवाजं में बात करती है, तो उनकी बात सुनना कोई एहसान नहीं है जो हम करते हैं। यह हमारी जिम्मेदारी है। हमारे बच्चे हमें उतनी ही बारीकी से देखते हैं जितना हम उन्हें देखते हैं। हम अभी… बाद में नहीं, बल्कि अभी… कैसा रिएक्शन देते हैं, इससे उन्हें पता चलेगा कि निष्पक्षता और भरोसा असल में होते हैं या ये सिर्फ़ बड़ों के इस्तेमाल किए जाने वाले शब्द हैं। वे आने वाले कल की तैयारी नहीं कर रहे हैं। वे ही आने वाला कल हैं।”

वरुण धवन ने भी छात्रों के विरोध प्रदर्शन का समर्थन किया और इंस्टाग्राम पर लिखा, “छात्र हमारे देश का भविष्य हैं। जब किसी छात्र का सपना टूटता है, तो सिर्फ़ एक सपना ही नहीं टूटता, बल्कि पूरे परिवार का सपना टूट जाता है। जब उन्हें लगता है कि सिस्टम ने उन्हें निराश किया है, तो उन्हें सवाल पूछने का पूरा अधिकार है।

उनकी आवाज सुनी जानी चाहिए, उनकी सुरक्षा होनी चाहिए और उनकी बातों पर ईमानदारी से ध्यान दिया जाना चाहिए। मैं अधिकारियों से अपील करता हूँ कि वे इन चिंताओं पर ध्यान दें और एक निष्पक्ष, पारदर्शी और सार्थक समाधान की दिशा में काम करें जिससे जवाबदेही तय हो सके। मुझे पूरी उम्मीद है कि यह छात्रों का विरोध प्रदर्शन ही बना रहेगा। ध्यान उन मुद्दों पर होना चाहिए जो छात्रों को प्रभावित करते हैं और उन समाधानों पर जो उनके लिए ज़रूरी हैं। शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन एक लोकतांत्रिक अधिकार है और हर छात्र को इस अधिकार का इस्तेमाल करने की अनुमति मिलनी चाहिए। जय हिंद।”