सीजेपी ने शिक्षा का मुद्दा छोड़ दिया

कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी ने क्या शिक्षा का मुद्दा छोड़ दिया? उसके नेता इस पर कुछ नहीं बोल रहे हैं। उन्होंने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद स्कूल बदलने का अभियान शुरू किया था। हालांकि शुरू में वे सिर्फ भाजपा शासित राज्यों में गए। लेकिन जब दबाव बना तो कुछ विपक्षी शासन वाले राज्यों में भी गए। लेकिन वहां से सिर्फ अच्छी तस्वीरें दिखाईं। फिर भी स्कूल सुधारों और शिक्षा में बदलाव का उनका एक बड़ा एजेंडा था, जिस पर युवाओं और छात्रों का समर्थन उनको मिल रहा था। उनके आंदोलन और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद ही केंद्र सरकार ने नीट सहित अन्य परीक्षाओं में सुधार के लिए नंदन नीलेकणी कमेटी का गठन किया था।

पिछले चार दिन में इनसे जुड़े दो बड़े घटनाक्रम हुए हैं लेकिन सीजेपी का कोई बयन देखने को नहीं मिला। मुख्य चुनाव आयुक्त का इस्तीफा मांगने में बिजी सीजेपी के नेताओं ने न तो नंदन नीलेकणी कमेटी की सिफारिशों को लेकर कोई टिप्पणी की और न इस पर कोई बयान दिया कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने संसद की शिक्षा मामलों की समिति के सामने कहा कि उसके नौ साल के कार्यकाल में एक भी पेपर लीक नहीं हुआ है। एनटीए ने इतना बडा झूठ बोला लेकिन नीट पेपर लीक पर आंदोलन करने वाली सीजेपी ने लगता है कि इसको देखा ही नहीं। इसी तरह नीलेकणी कमेटी की सिफारिशें तैयार हो गई हैं। उसमें कहा गया है कि परीक्षा कंप्यूटर बेस्ड होगी। यह भी कहा गया है कि हजारों सवालों का बैंक तैयार किया जाएगा और परीक्षा के समय उस प्रश्न बैंक से एआई के जरिए रैंडम सवाल सीधे कंप्यूटर पर आ जाएंगे। इस सिफारिश को अच्छा या बुरा बताने वाली कोई टिप्पणी सीजेपी की नहीं आई।

आप और लेफ्ट के सहारे प्रदर्शन

मुख्य चुनाव आय़ुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने का प्रदर्शन वैसे तो कॉकरोच जनता पार्टी के नाम से हो रहा है लेकिन असल में इस प्रदर्शन में उनका कुछ भी नहीं है। सारी तैयारी लेफ्ट और आम आदमी पार्टी के नेता कर रहे हैं। यह ध्यान रखने की जरुरत है कि इस बार का प्रदर्शन जून और जुलाई में हुए प्रदर्शन से बहुत अलग है। उस समय नीट पेपर लीक से प्रभावित 24 लाख छात्र और उनके परिवार के लोग आंदोलन से जुड़े थे और साथ ही हर परिवार की सहानुभूति उस आंदोलन के साथ थी। जो जंतर मंतर नहीं पहुंच रहा था उसका भी भावनात्मक जुड़ाव उस प्रदर्शन से था। इस बार का प्रदर्शन प्रभावित यानी पीड़ित पक्ष का नहीं है। यह थर्ड पार्टी प्रदर्शन है। पार्टियों द्वारा प्रायोजित है। इसमें ऐसा नहीं हो रहा है कि जिनके नाम कटे हैं वे लोग हजारों या लाखों की संख्या में सड़क पर उतर रहे हैं।

यह स्वंयस्फूर्त आंदोलन नहीं है। इसके लिए लोगों को मोबाइलाज करना पड़ रहा है। वह काम करने के लिए न तो अभिजीत दीपके और उनकी चार लोगों की टीम के पास कोई संगठन है और न कोई सलाहियात हैं। पता नहीं है कि उनको ऑनलाइन या दूसरे माध्यम से कितना पैसा मिला है। लेकिन यह पता है कि उनके पास कोई संगठन नहीं है। जबकि प्रोटेस्ट मोबिलाइज करना बहुत मुश्किल काम होता है वह भी तब जब मुद्दा सीधे आम लोगों को प्रभावित करने वाला नहीं हो। यह काम आम आदमी पार्टी और लेफ्ट पार्टियां कर रही हैं। राजधानी दिल्ली में भी लेफ्ट पार्टियों के छात्र संगठनों के पास बड़ा कैडर है और आप के पास संसाधन है। आप को चार महीने में पंजाब और गोवा का चुनाव भी लड़ना है। इसलिए आप और लेफ्ट अपने संगठन और संसाधन से लोगों को मोबिलाइज कर रहे हैं और सीजेपी को उसका श्रेय मिल रहा है।

रवैया जब टच एंड गो का है तब साथ आ कर भी विपक्ष कैसे आंदोलन ख़ड़ा करेगा?

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर की गड़बड़ियों और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की मनमानियों के खिलाफ विपक्षी पार्टियों की बैठक 30 सितंबर को दिल्ली में हो रही है। मई में भी विपक्षी गठबंधन यानी ‘इंडिया’ ब्लॉक की एक बैठक दिल्ली में हुई थी। तब जिन पार्टियों ने उससे दूरी बनाई थी वे भी इस बार की बैठक में शामिल हो रही हैं। इससे पार्टियों की गंभीरता का अहसास हो रहा है। लेकिन क्या सिर्फ एक साथ आकर बैठक कर लेना पर्याप्त होगा? देश के सामने जो अभूतपूर्व संकट दिख रहें हैं उससे निपटने के लिए पार्टियों की साझा बैठक या नेताओं के बेहद आक्रामक बयान या सोशल मीडिया का अभियान पर्याप्त नहीं है।

पार्टियों को संकट की व्यापकता को समझना होगा और मुकाबले के लिए गंभीर प्रयास करने होंगे। सबसे पहले तो ‘इंडिया’ ब्लॉक को ही औपचारिक रूप देना होगा। 2023 में शरद पवार के घर पर हुई बैठक के बाद से ही इसका इंतजार हो रहा है कि इसका एक संयोजक होगा और एक सचिवालय बनेगा। लेकिन अभी तक ये दोनों काम नहीं हुए। जून 2024 में चुनाव हारने के बाद तो दो साल तक इसकी बैठक भी नहीं हुई।

ऐसा नहीं है कि विपक्षी पार्टियों को कोई चैरिटी का काम करना है। संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के अभियान ने ही 2024 के चुनाव में कांग्रेस और अन्य विपक्षी पार्टियों को राजनीतिक सफलता दिलाई थी। इसलिए अगर पार्टियां गंभीरता से एसआईआर की गड़बड़ियों को पकड़ती हैं, उन्हें जनता के बीच ले जाती हैं, चुनाव आय़ोग और सरकार को कठघरे में खड़ा करती हैं तो उनको इसका राजनीतिक लाभ भी मिलेगा। एक समय था जब विपक्ष मुद्दों की तलाश करता था और उन पर आंदोलन करके सरकार को जवाबदेह बनाता था। लेकिन अब ऐसा नहीं हो रहा है।

यह बहुत दिलचस्प है कि इन दिनों आम लोग सरकार की कमियां खोज रहे हैं। नीट पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी का खुलासा छात्रों ने किया। उन्होंने न सिर्फ पेपर लीक का पता लगाया, बल्कि परीक्षा कराने का ठेका ब्लैकलिस्टेड कंपनी को दिए जाने का खुलासा भी छात्रों ने किया। पहली बार अगर नरेंद्र मोदी सरकार के किसी मंत्री का इस्तीफा हुआ तो वह छात्रों के आंदोलन और उनके दबाव में हुआ। नीट पेपर लीक का खुलासा करने से लेकर ब्लैकलिस्टेड कंपनी को परीक्षा का ठेका देने के लिए बार बार टेंडर बदलने का खुलासा सार्थक सिद्धांत और निसर्ग अधिकारी जैसे युवा छात्रों ने किया।

इसी तरह इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल से गाड़ियों के इंजन खराब होने का मुद्दा कुछ यूट्यूबर्स और इन्फ्लूएंसर्स ने उठाया। मनीष कश्यप ने इसे राष्ट्रीय मुद्दा बनाया। आम लोगों से जुड़े इस मुद्दे पर भी सरकार बैकफुट पर आई। इसी तरह यूपीआई पर शुल्क लगाने के सरकार के फैसले के खिलाफ व्यापारी लड़ रहे हैं और आम लोग सोशल मीडिया में माहौल बना रहे हैं। ऐसे ही राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का खुलासा मंदिर के ही एक कर्मचारी ने किया। इन सारे मुद्दों पर गहराई से काम करने की जरुरत थी। लेकिन विपक्ष ने सिर्फ संसद सत्र में इन मुद्दों को उठाया।

असल में विपक्ष का रवैया टच एंड गो का है। वह हर मुद्दे को छूकर आगे बढ़ जा रहा है। जबकि इतिहास गवाह है कि किसी भी मुद्दे पर सरकार को जिम्मेदार ठहराने और सत्ता विरोधी माहौल बनाने के लिए सतत चलने वाले प्रयास की जरुरत होती है। उस पर गंभीरता से शोध करना होता है, उसके हर आयाम को समझना और जनता को समझाना होता है। बोफोर्स का मामला निरंतर दो साल से ज्यादा चला था तब जाकर राजीव गांधी की सरकार के खिलाफ माहौल बना। भ्रष्टाचार का आंदोलन लगातार तीन साल चला तब लोगों की दिलदिमाग में मनमोहन सिंह की सरकार को पलट देने और कांग्रेस को सजा देने की भावना बनी। यहां कांग्रेस और दूसरी विपक्षी पार्टियां समझ रही हैं कि वे संसद में मुद्दा उठा देंगी, संसद परिसर में हंगामा कर देंगी या एक साझा बैठक कर लेंगी या कोई प्रेजेंटेशन हो जाएगा तो उससे सरकार के खिलाफ माहौल बन जाएगा तो ऐसा नहीं होने वाला है। यह सरकार पहले की सरकारों की तरह हाथ पर हाथ धरे बैठे रहने वाली नहीं है। वह लगातार आरोपों को काउंटर करती है और नए नैरेटिव पैदा करती है।

इसलिए विपक्ष अगर चाहता है कि एसआईआर की गड़बड़ियों या चुनाव आयोग की मनमानियों पर देश में एक राजनीतिक माहौल बने तो उसके प्रयासों में निरंतरता दिखनी चाहिए। बारीकी से इस पर काम करके लोगों के सामने एक एक तथ्य रखना चाहिए। सिर्फ मोटामोटी यह कह देना पर्याप्त नहीं है कि ज्ञानेश कुमार ने मनमानी की, 13 करोड़ लोगों के नाम काट दिए या जिला व प्रदेश के चुनाव अधिकारियों को सेंट्रल डेटाबेस का एक्सेस नहीं दिया। विपक्ष को इसकी तह में जाना होगा।

अभी ऐसा लग रहा है कि पार्टियां ऊपर ऊपर मामले को देख रही हैं। उनके प्रयास में निरंतरता भी नहीं है। राहुल गांधी ने पिछले साल सितंबर में कर्नाटक की आलंद विधानसभा सीट को लेकर खुलासा किया था। उन्होंने 6,018 वोट काटे जाने का दावा किया था और कहा था कि कर्नाटक के बाहर से मोबाइल नंबर से नाम कटवाने के आवेदन भेजे गए और नाम कटे। उन्होंने सूर्यकांत नाम के एक व्यक्ति को मंच पर पेश किया। सूर्यकांत ने बताया कि उन्होंने किसी का नाम काटने का आवेदन नहीं दिया लेकिन उनके नाम से आवेदन करके 14 मिनट में 12 नाम कटवाए गए। राहुल गांधी ने महाराष्ट्र को लेकर भी इस तरह के दावे किए। लेकिन उसके बाद सन्नाटा हो गया।

यह बहुत बड़ी बात है कि किसी भी व्यक्ति के नाम या फोन नंबर का इस्तेमाल करके दूसरे व्यक्ति या व्यक्तियों के नाम काटे जा रहे हैं या काटे जा सकते हैं। अभी चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि पश्चिम बंगाल में न्यायाधिकरणों के सामने 38 लाख आवेदन लंबित हैं, जिनमें से 22 लाख आवेदन नाम जोड़ने के हैं और 16 लाख आवेदन नाम काटने के हैं। क्या यह विपक्ष की जिम्मेदारी नहीं है कि वह पता लगाए कि ये 16 लाख लोग कौन हैं, जो अपना नाम कटवाना चाहते हैं? पिछले दिनों बंगाल के माल्दा और मुर्शिदाबाद दोनों जगह से खबर आई थी कि थोक में फॉर्म सात भर कर लोगों के नाम कटवाने की कोशिश की गई।

कई जगह जागरूक बीएलओ ने इसे रोका भी। दिल्ली में 47 लाख यानी एक तिहाई मतदाताओं के नाम कट गए। इनमें 43 लाख लोगों के नाम इस आधार पर कटे हैं कि वे स्थायी रूप से शिफ्ट हो गए हैं। सोचें, इतनी बड़ी संख्या में दिल्ली से शिफ्ट होकर लोग कहां जा रहे हैं? अब ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट से खुलासा हुआ है कि धीरे धीरे सेंट्रल डेटाबेस के एक्सेस को सेंट्रलाइज किया जा रहा है और ईआरओ, डीईओ और सीईओ को संपूर्ण व बिना शर्त एक्सेस नहीं मिल रही है। अगर इस खुलासे को कर्नाटक, बंगाल या दिल्ली की खबरों से मिला कर देखें तो यह संभव है कि योजनाबद्ध तरीके से मतदाताओं की प्रोफाइलिंग करके उनके नाम काटे जाने का बड़ा खुलासा हो।

साझा बैठक करने या आंदोलन करके ऑप्टिक्स बनाने से पहले कांग्रेस और दूसरी पार्टियों को बारीकी से तमाम गड़बड़ियों पर काम करने की जरुरत है। यह समय लेने और थका देने वाला काम है। लेकिन कांग्रेस और दूसरी विपक्षी पार्टियों के पास संसाधन की कमी नहीं है। अगर उनको लग रहा है कि एसआईआर के जरिए बहुत बड़ी कोई गड़बड़ी हो रही है तो उन्हें इसका खुलासा करने के लिए बड़े पैमाने पर ही काम करना होगा। अमेरिका के वाटरगेट स्कैंडल से लेकर भारत के बोफोर्स घोटाले तक जितने बड़े मामले खुले हैं उनमें लोगों को खपना पड़ा है। ऊपर ऊपर मुद्दे को छू देने और उस पर बयान देने से सरकार न तो जवाबदेह बनेगी और न आम जनता इसे गंभीरता से लेगी। जनता को यह दिखाना होगा कि विपक्ष या योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण जैसे सिविल सोसायटी के लोग क्या लेकर सरकार से लड़ रहे हैं। इस पर कल विचार करेंग। (जारी)

CJP का 5 सितंबर को दिल्ली में बड़ा विरोध मार्च, वादाखिलाफी पर सरकार को घेरा

CJP का 5 सितंबर को दिल्ली में बड़ा विरोध मार्च, वादाखिलाफी पर सरकार को घेरा

CJP Delhi march: जंतर-मंतर पर एक महीने से अधिक समय तक आंदोलन चलाने वाली कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने 5 सितंबर को नई दिल्ली में एक बड़े शांतिपूर्ण विरोध मार्च का ऐलान किया है। पार्टी ने आरोप लगाया है कि सरकार ने 25 जुलाई को युवाओं से किए गए अपने वादों को पूरा नहीं किया है।

5 सितंबर को दिल्ली में शांतिपूर्ण विरोध मार्च

राजधानी दिल्ली में एक बार फिर युवाओं और छात्र संगठनों का बड़ा जुटान देखने को मिल सकता है। CJP के नेतृत्व में यह मार्च 5 सितंबर को इंडिया गेट से शुरू होकर नई दिल्ली पुलिस मुख्यालय की ओर बढ़ेगा। CJP के सह-संयोजक सौरव दास के अनुसार, इस मार्च का नेतृत्व नीट (NEET) परीक्षा से जुड़े मामलों में जान गंवाने वाले छात्रों और पुलिस की बर्बरता के शिकार लोगों के परिवार करेंगे। ALSO READ: CJP के दीपके ने लिखा शिक्षा मंत्रियों को पत्र, सरकारी स्कूलों की बदहाली पर उठाए 6 तीखे सवाल

सरकार परलापरवाही का आरोप

CJP ने हाल ही में हुई ऑनलाइन कार्यसमिति की बैठक में यह समीक्षा की कि एक महीना बीत जाने के बाद भी सरकार ने मुआवजे और मुकदमे वापस लेने के अपने वादों पर अमल नहीं किया है। पार्टी का कहना है कि उनके धैर्य और सद्भावना को कमजोरी न समझा जाए, इसलिए अब वे एक बार फिर सड़कों पर उतरने के लिए विवश हैं। ALSO READ: जयपुर में CJP के स्कूल दौरे पर बवाल, ग्रामीणों ने कार्यकर्ताओं को गांव से निकाला; क्या बोले आशुतोष रांका?

क्या है पूरा मामला और क्यों हो रहा है विरोध?

पिछले दिनों नीट पेपर लीक के खिलाफ जंतर-मंतर पर CJP के नेतृत्व में बड़ा आंदोलन चला था। उस दौरान सरकार के आश्वासन और सद्भावना के चलते 25 जुलाई को देशव्यापी विरोध प्रदर्शन वापस ले लिया गया था। हालांकि प्रदर्शनकारियों की मांग के अनुरूप शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान का इस्तीफा हो चुका है। सीजेपी की अन्य मांगों में नीट पेपर लीक के कारण आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को 1 करोड़ रुपए का मुआवजा, प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मुकदमों को पूरी तरह रद्द करना भी शामिल है।

‘Gen Z को गुमराह करने की कोशिश…’; शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देने पर धर्मेंद्र प्रधान ने पहली बार तोड़ी चुप्पी

Dharmendra Pradhan: भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता और संबलपुर से सांसद धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देने के बाद पहली बार मामले में अपनी चुप्पी तोड़ी है। प्रधान ने शनिवार (8 जुलाई) को कहा कि नीट पेपर लीक मामले को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान ‘जेन जी’ को गुमराह करने की कोशिशें की गईं। इसके बाद उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। प्रधान ने इस मुद्दे को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए बड़े विरोध प्रदर्शनों के बीच पद छोड़ने के दो सप्ताह बाद संबलपुर के जीएम यूनिवर्सिटी में छात्रों और शिक्षकों को संबोधित करते हुए अपने इस्तीफे पर पहली बार प्रतिक्रिया दी।

प्रधान ने कहा, “जेन जी हमारे बच्चे हैं। कुछ लोगों ने उन्हें गुमराह करने की कोशिश की। भारत में हर साल कम से कम दो करोड़ बच्चे जन्म लेते हैं। पिछले 10 वर्षों में 20 करोड़ बच्चे पैदा हुए हैं। उनकी अपनी आकांक्षाएं हैं। वे भारत को ‘विश्व गुरु’ बनाएंगे। मेरे लिए पद महत्वपूर्ण नहीं था।”

धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर केंद्रीय मंत्रिपरिषद से इस्तीफा देने की पेशकश की थी। प्रधान ने 25 जुलाई को केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। NEET मुद्दे पर भारी विरोध-प्रदर्शनों के बीच केंद्रीय मंत्रिपरिषद से हटने के ठीक दो हफ़्ते बाद उन्होंने यह बयान दिया।

‘मेरे लिए पद महत्वपूर्ण नहीं था’

शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफे पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए प्रधान ने कहा कि उस समय उन्हें कोई निजी समस्या नहीं थी। उनके लिए मंत्री पद से अधिक जरूरी युवा भारतीयों की उम्मीदें थीं। प्रधान ने कहा, “Gen Z हमारे बच्चे हैं। कुछ लोगों ने उन्हें गुमराह करने की कोशिश की। तब मुझे कोई निजी समस्या नहीं थी।” उन्होंने कहा कि भारत में हर साल लगभग दो करोड़ बच्चे पैदा होते हैं। पिछले दशक में करीब 20 करोड़ बच्चे पैदा हुए हैं।

प्रधान ने यह भी बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से संपर्क किया था और केंद्रीय मंत्रिपरिषद से हटने की पेशकश की थी। रायराखोल में एक और बैठक में प्रधान ने अपने खिलाफ आयोजित विरोध-प्रदर्शनों को लेकर ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री और BJD प्रमुख नवीन पटनायक पर निशाना साधा। उन्होंने अपनी आलोचना किए जाने को लेकर पटनायक पर भी पलटवार किया।

प्रधान ने कहा, “नवीन बाबू मुझे ओडिशा के लोगों के लिए शर्म की बात और बुरा इंसान भी कहते हैं।” उन्होंने BJD अध्यक्ष पर अपने खिलाफ विरोध-प्रदर्शनों में युवाओं को शामिल करने का आरोप लगाया। उन्होंने पूछा, “क्या मैंने कभी ऐसा कुछ किया है जिससे ओडिशा के लोगों को शर्मिंदगी उठानी पड़े?” इस पर वहां मौजूद लोगों ने ‘नहीं’ में जवाब दिया।

प्रधान ने कहा कि भले ही उन्होंने ओडिशा का नाम रोशन न किया हो। लेकिन उन्होंने अपने काम से कभी ऐसा कुछ नहीं किया जिससे राज्य की बदनामी हो। उन्होंने कहा, “हो सकता है कि मैं राज्य के लिए सम्मान न लाया होऊं। लेकिन मैंने अपने काम से कभी लोगों को शर्मिंदा नहीं किया। मैं कभी ऐसा कोई काम नहीं करूंगा जिससे राज्य की प्रतिष्ठा पर आंच आए।”

‘भगवान जगन्नाथ के आशीर्वाद से केंद्रीय मंत्री बना’

प्रधान ने अपने राजनीतिक सफर के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा कि भगवान जगन्नाथ और संबलपुर की आराध्य देवी समलेश्वरी के आशीर्वाद से वे 12 साल पहले केंद्रीय मंत्री बने थे। पटनायक के खिलाफ उनकी यह टिप्पणी एक ऐसे कार्यक्रम में आई जहां BJD विधायक और ओडिशा विधानसभा में उप-नेता प्रसन्न आचार्य भी मौजूद थे।

प्रधान ने कहा कि BJD के विरोध-प्रदर्शनों को देखते हुए उन्होंने आचार्य से सलाह ली थी कि क्या उन्हें कार्यक्रम में शामिल होना चाहिए। BJD के संबलपुर जिला अध्यक्ष और पूर्व मंत्री रोहित पुजारी ने प्रधान के आरोपों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि BJP नेता को इसलिए आलोचना का सामना करना पड़ा क्योंकि सरकार ने छात्र विरोध-प्रदर्शनों को जिस तरह से संभाला, वह गलत था।

उन्होंने तर्क दिया कि प्रधान को उन घटनाओं की वजह से आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने सवाल किया कि पुलिस की कार्रवाई के लिए ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री को क्यों दोषी ठहराया जाएगा। सूत्रों ने PTI को बताया कि संबलपुर पुलिस ने एहतियात के तौर पर BJD के लगभग 30 कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया।

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विदेश में पढ़ाई के खर्चे पर अभिजीत दीपके ने बताया सच, कहा अब लोन चुकाना है

Abhijeet Deepke

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने अपनी अमेरिका में पढ़ाई के खर्चे को लेकर उठे सवालों का जवाब देते हुए स्पष्ट किया है कि उनकी बोस्टन यूनिवर्सिटी में एमएस (पब्लिक रिलेशंस) की डिग्री स्कॉलरशिप और एजुकेशन लोन से पूरी हुई। उन्होंने स्कॉलरशिप दस्तावेज भी सार्वजनिक रूप से दिखाने की पेशकश की है।

अभिजीत दीपके ने पत्रकार बरखा दत्त को दिए इंटरव्यू में कहा, “मैं बोस्टन यूनिवर्सिटी से स्कॉलरशिप प्राप्त की थी और बाकी खर्च के लिए एजुकेशन लोन लिया था, जिसे मुझे अभी चुकाना है।” उन्होंने डीन स्कॉलरशिप का दस्तावेज साझा करते हुए बताया कि यूनिवर्सिटी ने उन्हें प्रति सेमेस्टर 12,500 डॉलर की स्कॉलरशिप दी, जो तीन सेमेस्टर के लिए कुल 37,500 डॉलर (लगभग 30 लाख रुपये से अधिक) बनी।
 
विवाद की शुरुआत : विवाद तब शुरू हुआ जब सूरत के आरटीआई कार्यकर्ता अमित तिवारी ने अभिजीत दीपके के पिता भगवानराव दीपके (महाराष्ट्र सरकार के रिटायर्ड जूनियर इंजीनियर) की वित्तीय स्थिति की जांच की मांग की। तिवारी ने सवाल उठाया कि मासिक वेतन लगभग 60-65 हजार रुपए वाले रिटायर्ड कर्मचारी ने अमेरिका जैसी महंगी पढ़ाई का खर्च कैसे उठाया। उन्होंने चुनाव आयोग, इनकम टैक्स विभाग और महाराष्ट्र सरकार को पत्र लिखकर जांच की अपील की थी।

अभिजीत ने इस पर पलटवार करते हुए कहा कि वे अपना स्कॉलरशिप लेटर और एजुकेशन लोन दस्तावेज दिखाने को तैयार हैं। उन्होंने X (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट कर चुनौती दी, “मैं अपना स्कॉलरशिप लेटर और एजुकेशन लोन लेटर दिखाने को तैयार हूं। क्या सम्राट अपना डिग्री दिखाएंगे?” कितना खर्च आया पढ़ाई पर? अमेरिका की बोस्टन यूनिवर्सिटी में पब्लिक रिलेशंस के मास्टर कोर्स पर ट्यूशन फीस, रहन-सहन, स्वास्थ्य बीमा आदि मिलाकर कुल खर्च 30 लाख से 1 करोड़ रुपये तक हो सकता है। अभिजीत की स्कॉलरशिप ने काफी हिस्सा कवर किया, जबकि बाकी लोन से पूरा हुआ। उनके पिता ने पहले भी लोन लेकर बेटे को पढ़ाने की बात कही थी।

CJP की फंडिंग को लेकर भी सवाल : अभिजीत दीपके ने पुणे से पत्रकारिता में ग्रेजुएशन किया है। इसके बाद वे अमेरिका गए और हाल ही में जून 2026 में भारत लौटकर बड़े प्रदर्शन आंदोलन का नेतृत्व किया। CJP की फंडिंग को लेकर भी सवाल उठे हैं, जिस पर उन्होंने क्राउडफंडिंग और पूर्ण पारदर्शिता का वादा किया है।यह मामला सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जहां लोग दीपके के जवाब और RTI कार्यकर्ता के सवालों पर अपनी राय रख रहे हैं। अभिजीत दीपके की स्पष्टता ने कई सवालों के जवाब दिए हैं, लेकिन राजनीतिक और सामाजिक बहस जारी है। अभिजीत दीपके ने बयान दिया है कि पढ़ाई का खर्च स्कॉलरशिप और लोन से हुआ। अब लोन चुकाना है।

बता दें कि अभिजीत दीपके कॉकरोच पार्टी बनाकर चर्चा में आए थे। पार्टी बनाने के बाद उन्‍होंने दिल्‍ली के जंतर मंतर में प्रोटेस्‍ट किया। बाद में ये प्रोटेस्‍ट जेंनजी प्रोटेस्‍ट बन गया। जिसका असर यह हुआ कि नीट पेपर लीक मामले में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्‍तीफा देना पडा। 

‘जॉब नहीं मिलेगा तो सिंहासन हिलेगा…’ 8 अगस्त के लिए राहुल गांधी ने किया बड़ा ऐलान, ये है पूरा प्लान

जंतर-मंतर में Gen Z के प्रदर्शन की ताकत देखने के बाद कांग्रेस अब इसे लेकर एक नई रणनीति पर चलती हुई दिख रही है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने छात्रों को लेकर एक बड़ा ऐलान किया है। राहुल गांधी एक बार फिर बेरोजगारी, पेपर लीक और रुकी हुई सरकारी भर्तियों के मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरने की तैयारी करते दिख रहे हैं। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी 8 अगस्त को प्रयागराज के केपी ग्राउंड में छात्र संवाद कार्यक्रम को संबोधित करेंगे। उन्होंने सोशल मीडिया पर प्रयागराज के छात्रों के लिए एक पोस्ट शेयर किया है।

राहुल गांधी ने किया ये ऐलान

राहुल गांधी ने अपने पोस्ट में लिखा, “जॉब नहीं मिलेगा, तो सिंहासन हिलेगा।” उन्होंने कहा कि कोटा और देहरादून के बाद अब “छात्रों की गूंज” प्रयागराज पहुंच रही है। अपने पोस्ट में राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि पेपर लीक की घटनाओं ने युवाओं का वर्तमान छीन लिया है, जबकि रुकी हुई भर्तियों ने उनके भविष्य को भी संकट में डाल दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि हाल ही में दिल्ली में अपने अधिकारों की मांग कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज और पैलेट का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने आगे कहा कि उनकी पार्टी युवाओं की आवाज लगातार उठाती रहेगी और उन्हें न्याय दिलाने के लिए संघर्ष जारी रखेगी। उन्होंने सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग करते हुए कहा कि अब बहानों का समय खत्म हो चुका है। अपने पोस्टच के अंत में राहुल गांधी ने युवाओं से 8 अगस्त को प्रयागराज में मिलने की अपील भी की।

कांग्रेस ने बदली रणनीति

बता दें कि, कांग्रेस ने 17 जून को कोटा से छात्रों की गूंज अभियान का पहले चरण की शुरुआत करने के बाद दूसरा चरण 17 जुलाई को देहरादून में हुआ था। इसके बाद तीसरा चरण प्रयागराज में 8 अगस्त को होना तय हो गया है। बता दें कि, इससे पहले राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक को लेकर छात्रों ने बड़ा प्रदर्शन किया था। 36 दिन तक चले प्रदर्शन के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धमेंर्द्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया था।

इस प्रदर्शन के बाद कांग्रेस अपनी रणनीति में बदलाव करती दिख रही है। पार्टी अब इसी असंतोष को राजनीतिक समर्थन में बदलने की कोशिश कर रही है। जंतर-मंतर पर युवाओं और छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर हुए प्रदर्शनों के बाद बेरोजगारी, भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी, पेपर लीक और सरकारी नौकरियों के घटते अवसर जैसे विषयों पर पार्टी फोकस करती नजर आ रही है।

‘मेरी बेटी को नई जिंदगी मिली’: PM मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी के लिए लड़की की मां क्या बोली?

CJP Protest News Update: राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने के लिए पहले माफी मांग चुकी 15 साल की छात्रा ने अब सार्वजनिक रूप से पहली बार खुलकर बात की है। छात्रा ने कहा कि उसने कभी नहीं सोचा था कि उसे माफ कर दिया जाएगा। उसने PM मोदी के संदेश को दूसरी जिंदगी मिलने जैसा बताया।

उसने यह भी दावा किया कि विरोध प्रदर्शन के दौरान वह अपने आस-पास के लोगों से प्रभावित थी। आरोप लगाया कि उसे धमकियां मिल रही हैं। उसने कहा कि उसके खिलाफ दर्ज पुलिस केस अभी तक वापस नहीं लिया गया है। छात्रा ने कहा कि उसने अनजाने में वे बातें नहीं कही थीं। बल्कि वह विरोध प्रदर्शन वाली जगह के माहौल और दूसरे लोग जो उसे बता रहे थे, उससे प्रभावित थी।

लड़की की मां ने क्या कहा?

वहीं, लड़की की मां ने कहा कि PM मोदी के माफ करने के फैसले की वजह से उनकी बेटी को नई जिंदगी मिली है। न्यूज एजेंसी PTI से बात करते हुए लड़की की मां ने कहा कि वे PM मोदी की शुक्रगुजार हैं कि उन्होंने बदला लेने के बजाय माफ करने का रास्ता चुना। उन्होंने इसे अपनी बेटी के लिए एक दूसरा मौका बताया।

उन्होंने कहा, “PM मोदी ने उस बच्ची को माफ करके अपनी महानता दिखाई है, जिसने इतने गंदे और अश्लील शब्दों का इस्तेमाल किया था। आज उसका जन्मदिन है और PM मोदी ने उसे सबसे बड़ा तोहफा दिया है जीवनदान….। आज इस लड़की का पुनर्जन्म हुआ है।” शुक्रवार को PM मोदी ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो पोस्ट करके संयम बरतने की अपील की थी।

यह अपील जंतर-मंतर पर NEET-UG पेपर लीक के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के नेतृत्व में हुए छात्र विरोध-प्रदर्शन के दौरान उनके खिलाफ अपशब्दों वाले नारे लगाए जाने के बाद की गई थी। प्रधानमंत्री ने उन्हें अपशब्द कहने वालों को गुमराह बताया और कहा कि उन्हें नहीं लगता कि इसका समाधान गुस्से या बदले की भावना में है।

‘बहकावे में आ गई थी’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाली लड़की ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर देशवासियों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगी है। खुद को 15 साल का बताने वाली लड़की ने कहा कि वीडियो में प्रधानमंत्री को अपशब्द कहने संबंधी उसका वीडियो सोशल मीडिया पर उसने खुद पोस्ट नहीं किया था। उसने कहा कि वह इस पर बहुत शर्मिंदा है।

पीटीआई द्वारा संबंधित वीडियो की प्रामाणिकता की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की जा सकी। प्रधानमंत्री मोदी ने भी शुक्रवार को एक वीडियो संदेश में प्रदर्शन के दौरान उनके और उनकी दिवंगत मां के खिलाफ अपशब्द कहने वालों को माफ करने की बात कही।

पीएम मोदी ने कहा कि हमारी बेटियों द्वारा इस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया जाना चिंता का विषय है। हालांकि, उन्होंने कहा कि इन गुमराह बच्चों को माफ किए जाने की जरूरत है। प्रधानमंत्री ने कहा कि वह समाज में व्याप्त आक्रोश को समझते हैं। लेकिन यह गुमराह बच्चों को अपनाने और उन्हें सही राह दिखाने का समय है।

जंतर-मंतर कैसे पहुंचीं लड़की?

माफी वाले वीडियो में लड़की ने कहा, “मैं अपने दोस्तों के साथ सीपी (कनॉट प्लेस) गई थी, जहां प्रदर्शन हो रहा था।…वहां लोग बहुत चीजें बोल रहे थे। प्रधानमंत्री जी को बहुत गालियां दे रहे थे। उन लोगों के बहकावे में आकर मैंने वे सब चीजें बोलीं।”

लड़की ने कहा, “मैं अभी मात्र 15 साल की हूं। मैंने जो किया वह माफी के लायक नहीं है। मैंने बहुत गंदी चीजें बोलीं। लेकिन यह मेरी पहली और आखिरी गलती होगी। इसके बाद मैं ऐसा कुछ नहीं करूंगी। न ही वो चीज मैंने कभी पोस्ट की थी।…मैं पूरे देश से माफी मांगती हूं। मैं इतनी शर्मिंदा हूं कि अपनी नजरें भी नहीं उठा पा रही हूं।”

गाजियाबाद में शिकायत दर्ज

लड़की का यह वीडियो गाजियाबाद निवासी स्मृति सिंह की ओर से 29 जुलाई को नोएडा के एक्सप्रेसवे थाने में शिकायत दर्ज कराए जाने के बाद आया है। शिकायत में आरोप लगाया गया कि जंतर-मंतर पर सेक्टर-168 स्थित लोटस जिंग आवासीय सोसाइटी की निवासी लड़की ने प्रधानमंत्री के खिलाफ अभद्र एवं आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया, जिससे संवैधानिक पद की गरिमा को ठेस पहुंची।

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पुलिस के अनुसार, शिकायत के आधार पर जीरो FIR दर्ज की गई और उसे जांच के लिए दिल्ली पुलिस को ट्रांसफर कर दिया गया। इससे पहले, दिल्ली पुलिस ने इस कंटेंट के प्रसार को लेकर साइबर सेल थाने में FIR दर्ज की थी। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X को इसे हटाने का नोटिस जारी कर जांच के तहत संबंधित इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड सुरक्षित रखने को कहा था।

NEET PG 2026 Exam: एक ही शिफ्ट में एग्जाम, घर के पास होगा परीक्षा केंद्र, नीट पेपर लीक के बाद सरकार ने बड़े सुधारों का किया ऐलान

NEET PG 2026 Exam: सरकार NEET-PG परीक्षा के लिए कई बदलाव किए हैं। इसमें परीक्षा केंद्र के विकल्पों का दायरा बढ़ाना, उम्मीदवारों को परीक्षा वाले शहरों तक यात्रा की योजना बनाने के लिए ज्यादा समय देना और टेस्ट के दौरान हर सवाल के लिए अधिक समय देना शामिल है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, NEET परीक्षा अब एक ही शिफ्ट में आयोजित की जाएगी। इस कदम का मकसद मूल्यांकन प्रक्रिया में निष्पक्षता सुनिश्चित करना है। हाल के वर्षों में आपातकालीन स्थितियों या परीक्षा स्थगित होने के कारण एग्जाम कई शिफ्ट में आयोजित करनी पड़ी थी।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इन सुधारों का मकसद नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट पोस्टग्रेजुएट (NEET-PG) में शामिल होने वाले उम्मीदवारों के लिए प्रक्रिया को ज्यादा सुविधाजनक बनाना है। एक बयान में मंत्रालय ने कहा, “पेपर पत्र तैयार करने और उसे पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया को कई स्तरों पर मज़बूत किया गया है।”

एक ही शिफ्ट में होगा एग्जाम

न्यूज एजेंसी PTI ने अधिकारियों के हवाले से कहा कि एक ही शिफ्ट में परीक्षा कराने का फैसला इसलिए लिया गया है ताकि सभी उम्मीदवार एक जैसी परिस्थितियों में एक ही पेपर दें। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने शनिवार 1 अगस्त को NEET-PG 2026 की तैयारियों की समीक्षा की। नड्डा ने सभी एजेंसियों को निर्देश दिया कि परीक्षा सुचारू, सुरक्षित, पारदर्शी और टेक्नोलॉजी आधारित तरीके से आयोजित की जाए।

NEET-PG 2026 के एग्जाम सेंटर घर के पास होंगे

इससे पहले ‘पहले आओ-पहले पाओ’ (first-come, first-served) वाली व्यवस्था थी। लेकिन अब उम्मीदवारों से आवेदन करते समय तीन राज्यों की प्राथमिकता बताने को कहा जाएगा। उनका राज्य अनिवार्य रूप से पहली प्राथमिकता होगी, जिससे अधिकारियों को उनके घर के पास परीक्षा केंद्र आवंटित करने में आसानी होगी। पहले उन्हें अक्सर पास के केंद्र पूरी तरह भरे हुए मिलते थे और परीक्षा देने के लिए दूसरे राज्यों में जाना पड़ता था।

कब होगा एग्जाम?

NEET PG 2026 की परीक्षा 30 अगस्त 2026 (रविवार) को आयोजित होगी। यह एग्जाम कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) के रूप में देशभर के विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर होगी। स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि उम्मीदवारों को 30 अगस्त को होने वाली परीक्षा से लगभग तीन सप्ताह पहले उनके आवंटित टेस्ट शहर के बारे में जानकारी मिल जाएगी।

इससे उन्हें यात्रा और रहने की व्यवस्था करने के लिए पर्याप्त समय मिल सकेगा। पहले, शहर और वेन्यू की जानकारी परीक्षा की तारीख के बहुत करीब जारी की जाती थी। इससे कई उम्मीदवारों को यात्रा और ठहरने की व्यवस्था करने में परेशानी होती थी।

तीन राज्यों को विकल्प के तौर पर चुन सकेंगे

मंत्रालय ने बताया कि नई व्यवस्था के तहत उम्मीदवार अपने एग्जाम सेंटर के लिए तीन राज्यों को विकल्प के तौर पर चुन सकेंगे। उनके रहने की जगह के पास केंद्र आवंटित करने में आसानी के लिए पहली प्राथमिकता के तौर पर अपने गृह राज्य को चुनना अनिवार्य होगा।

एक सूत्र ने बताया कि पहले एग्जाम सेंटर वाले शहर ‘पहले आओ, पहले पाओ’ के आधार पर आवंटित किए जाते थे, जिससे रजिस्ट्रेशन विंडो खुलते ही उम्मीदवार जल्दबाजी में आवेदन करते थे। जो लोग देर करते थे, उन्हें अक्सर पास के परीक्षा केंद्र के विकल्प पूरी तरह भरे हुए मिलते थे। इससे उन्हें परीक्षा देने के लिए दूसरे राज्यों में जाना पड़ता था।

तीन सप्ताह पहले मिल जाएगी जानकारी

एक और अहम बदलाव में उम्मीदवारों को परीक्षा से लगभग तीन सप्ताह पहले उनके आवंटित परीक्षा शहर के बारे में जानकारी दी जाएगी, जिससे उन्हें यात्रा और रहने की व्यवस्था करने के लिए पर्याप्त समय मिल सके। मंत्रालय ने बताया कि NBEMS ने परीक्षा पैटर्न को भी तर्कसंगत बनाया है, जिसके तहत उम्मीदवारों को 210 मिनट में 180 सवालों के जवाब देने होंगे। इससे उम्मीदवारों को हर सवाल के लिए ज्यादा समय मिलता है। जबकि परीक्षा की कुल अवधि में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

2,73,183 उम्मीदवारों ने कराया रजिस्ट्रेशन

NEET-PG 2026 के लिए कुल 2,73,183 उम्मीदवारों ने रजिस्ट्रेशन कराया है, जो पिछले साल की तुलना में 12.5 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि है। यह परीक्षा लगभग 340 शहरों और 1,300 से अधिक एग्जाम सेंटरों पर एक ही शिफ्ट में आयोजित की जाएगी।

काउंसलिंग चार अगस्त से शुरू होगी

मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC) ने बताया कि ऑल इंडिया कोटा (AIQ) के तहत MBBS और दूसरे अंडरग्रेजुएट मेडिकल कोर्स में एडमिशन के लिए काउंसलिंग का पहला राउंड 4 अगस्त से शुरू होगा। 2026-27 बैच का एकेडमिक सेशन 8 सितंबर से शुरू होगा।

कमेटी की ओर से जारी काउंसलिंग शेड्यूल के मुताबिक, डीम्ड और सेंट्रल यूनिवर्सिटीज के लिए AIQ काउंसलिंग का पहला राउंड 4 अगस्त से 17 अगस्त तक होगा। एडमिशन लेने की आखिरी तारीख 22 अगस्त होगी।

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शेड्यूल के अनुसार, AIQ काउंसलिंग का दूसरा राउंड 24 अगस्त से 2 सितंबर तक होगा। इसके बाद तीसरा राउंड होगा, जो 10 सितंबर से 18 सितंबर तक चलेगा। स्टेट कोटा सीटों के लिए काउंसलिंग का पहला राउंड 13 अगस्त से 22 अगस्त तक होगा, जिसमें कैंडिडेट्स को 28 अगस्त तक अपना एडमिशन पूरा करना होगा। दूसरा राउंड 31 अगस्त से 8 सितंबर तक और तीसरा राउंड 16 सितंबर से 26 सितंबर तक होगा।

एक और पेपर लीक? ओडिशा मेडिकल परीक्षा के दौरान WhatsApp पर शेयर किया गया क्वेश्चन पेपर

Odisha Paper Leak: एक तरफ संसद के दोनों सदनों से एंटी पेपर लीक विधेयक पारित किया गया है, ताकि परीक्षा में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सके। वहीं दूसरी ओर एक और राज्य से कथित पेपर लीक का मामला सामने आया है। देशभर में नीट पेपर लीक को लेकर जारी आक्रोश के बीच ओडिशा में आयोजित मेडिकल पीजी परीक्षा को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। ऑल ओडिशा मेडिकल पीजी परीक्षा के 2023–26 बैच की जनरल सर्जरी MD/MS परीक्षा का प्रश्नपत्र व्हाट्सएप ग्रुप में भेजे जाने के आरोप लगे हैं।

परीक्षा के दौरान सोशल मीडिया पर वायरल हुईं तस्वीरें

ओडिशा में पोस्टग्रेजुएट (पीजी) मेडिकल परीक्षा चल रही थी, तभी प्रश्न पत्र की तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगीं। बताया जा रहा है कि एक छात्र को ये तस्वीरें व्हाट्सएप पर मिली थीं। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, यह मामला सोमवार को 2023-26 बैच की एमएस/एमडी जनरल सर्जरी की थ्योरी परीक्षा के दौरान सामने आया। परीक्षा शुरू होने के कुछ ही मिनटों बाद प्रश्न पत्र की तस्वीरें सोशल मीडिया पर फैल गईं। रिपोर्ट के अनुसार, भुवनेश्वर के एक निजी मेडिकल कॉलेज के पीजी छात्र ने ये तस्वीरें साझा की थीं। छात्र का कहना है कि उसे ये तस्वीरें बेरहामपुर के एक छात्र द्वारा बनाए गए व्हाट्सएप ग्रुप से मिली थीं। कुछ छात्रों ने यह भी आरोप लगाया है कि परीक्षा के दौरान कुछ मोबाइल नंबरों से सवालों के जवाब भी भेजे गए। हालांकि, इस दावे की अभी तक आधिकारिक या स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।

OUHS ने दिए जांच के आदेश

इस घटना के सामने आने के बाद ओडिशा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (OUHS) ने मामले की आंतरिक जांच के आदेश दिए हैं। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, विश्वविद्यालय के कुलपति मानस रंजन साहू ने सभी मेडिकल कॉलेजों के प्राचार्यों के साथ ऑनलाइन बैठक की। इस दौरान उन्होंने बची हुई परीक्षाओं में सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी को और मजबूत करने के निर्देश दिए। डीन बोले- इसे पेपर लीक नहीं कहा जा सकता

वहीं, एमकेसीजी मेडिकल कॉलेज के डीन और प्राचार्य हरेकृष्ण दलाई ने कहा कि इस घटना को सीधे तौर पर पेपर लीक कहना सही नहीं होगा। उनके अनुसार, प्रश्न पत्र परीक्षा शुरू होने के बाद छात्रों में बांटा जा चुका था और उसके तुरंत बाद उसकी तस्वीरें बाहर पहुंचीं। उन्होंने कहा कि अगर प्रश्न पत्र परीक्षा शुरू होने से पहले बाहर आ जाता और छात्रों तक पहुंच जाता, तब उसे पेपर लीक कहा जाता। लेकिन इस मामले में प्रश्न पत्र बांटने के तुरंत बाद ही उसकी तस्वीरें परीक्षा हॉल से बाहर पहुंचीं, इसलिए इसे उसी तरह की घटना माना जाना चाहिए।

यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब देश में प्रतियोगी परीक्षाओं की सुरक्षा को लेकर पहले से ही कड़ी निगरानी की जा रही है। इससे पहले नीट पेपर लीक विवाद के बाद परीक्षा व्यवस्था को लेकर देशभर में बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन हुए थे। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की अगुवाई में चला यह आंदोलन 36 दिनों तक जारी रहा। इसमें लाखों लोगों ने हिस्सा लिया और प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। बाद में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद यह आंदोलन समाप्त हो गया। इसके साथ ही CJP ने भी अपना विरोध अभियान वापस लेने का ऐलान कर दिया।