‘Gen Z को गुमराह करने की कोशिश…’; शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देने पर धर्मेंद्र प्रधान ने पहली बार तोड़ी चुप्पी

Dharmendra Pradhan: भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता और संबलपुर से सांसद धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देने के बाद पहली बार मामले में अपनी चुप्पी तोड़ी है। प्रधान ने शनिवार (8 जुलाई) को कहा कि नीट पेपर लीक मामले को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान ‘जेन जी’ को गुमराह करने की कोशिशें की गईं। इसके बाद उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। प्रधान ने इस मुद्दे को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए बड़े विरोध प्रदर्शनों के बीच पद छोड़ने के दो सप्ताह बाद संबलपुर के जीएम यूनिवर्सिटी में छात्रों और शिक्षकों को संबोधित करते हुए अपने इस्तीफे पर पहली बार प्रतिक्रिया दी।

प्रधान ने कहा, “जेन जी हमारे बच्चे हैं। कुछ लोगों ने उन्हें गुमराह करने की कोशिश की। भारत में हर साल कम से कम दो करोड़ बच्चे जन्म लेते हैं। पिछले 10 वर्षों में 20 करोड़ बच्चे पैदा हुए हैं। उनकी अपनी आकांक्षाएं हैं। वे भारत को ‘विश्व गुरु’ बनाएंगे। मेरे लिए पद महत्वपूर्ण नहीं था।”

धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर केंद्रीय मंत्रिपरिषद से इस्तीफा देने की पेशकश की थी। प्रधान ने 25 जुलाई को केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। NEET मुद्दे पर भारी विरोध-प्रदर्शनों के बीच केंद्रीय मंत्रिपरिषद से हटने के ठीक दो हफ़्ते बाद उन्होंने यह बयान दिया।

‘मेरे लिए पद महत्वपूर्ण नहीं था’

शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफे पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए प्रधान ने कहा कि उस समय उन्हें कोई निजी समस्या नहीं थी। उनके लिए मंत्री पद से अधिक जरूरी युवा भारतीयों की उम्मीदें थीं। प्रधान ने कहा, “Gen Z हमारे बच्चे हैं। कुछ लोगों ने उन्हें गुमराह करने की कोशिश की। तब मुझे कोई निजी समस्या नहीं थी।” उन्होंने कहा कि भारत में हर साल लगभग दो करोड़ बच्चे पैदा होते हैं। पिछले दशक में करीब 20 करोड़ बच्चे पैदा हुए हैं।

प्रधान ने यह भी बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से संपर्क किया था और केंद्रीय मंत्रिपरिषद से हटने की पेशकश की थी। रायराखोल में एक और बैठक में प्रधान ने अपने खिलाफ आयोजित विरोध-प्रदर्शनों को लेकर ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री और BJD प्रमुख नवीन पटनायक पर निशाना साधा। उन्होंने अपनी आलोचना किए जाने को लेकर पटनायक पर भी पलटवार किया।

प्रधान ने कहा, “नवीन बाबू मुझे ओडिशा के लोगों के लिए शर्म की बात और बुरा इंसान भी कहते हैं।” उन्होंने BJD अध्यक्ष पर अपने खिलाफ विरोध-प्रदर्शनों में युवाओं को शामिल करने का आरोप लगाया। उन्होंने पूछा, “क्या मैंने कभी ऐसा कुछ किया है जिससे ओडिशा के लोगों को शर्मिंदगी उठानी पड़े?” इस पर वहां मौजूद लोगों ने ‘नहीं’ में जवाब दिया।

प्रधान ने कहा कि भले ही उन्होंने ओडिशा का नाम रोशन न किया हो। लेकिन उन्होंने अपने काम से कभी ऐसा कुछ नहीं किया जिससे राज्य की बदनामी हो। उन्होंने कहा, “हो सकता है कि मैं राज्य के लिए सम्मान न लाया होऊं। लेकिन मैंने अपने काम से कभी लोगों को शर्मिंदा नहीं किया। मैं कभी ऐसा कोई काम नहीं करूंगा जिससे राज्य की प्रतिष्ठा पर आंच आए।”

‘भगवान जगन्नाथ के आशीर्वाद से केंद्रीय मंत्री बना’

प्रधान ने अपने राजनीतिक सफर के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा कि भगवान जगन्नाथ और संबलपुर की आराध्य देवी समलेश्वरी के आशीर्वाद से वे 12 साल पहले केंद्रीय मंत्री बने थे। पटनायक के खिलाफ उनकी यह टिप्पणी एक ऐसे कार्यक्रम में आई जहां BJD विधायक और ओडिशा विधानसभा में उप-नेता प्रसन्न आचार्य भी मौजूद थे।

प्रधान ने कहा कि BJD के विरोध-प्रदर्शनों को देखते हुए उन्होंने आचार्य से सलाह ली थी कि क्या उन्हें कार्यक्रम में शामिल होना चाहिए। BJD के संबलपुर जिला अध्यक्ष और पूर्व मंत्री रोहित पुजारी ने प्रधान के आरोपों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि BJP नेता को इसलिए आलोचना का सामना करना पड़ा क्योंकि सरकार ने छात्र विरोध-प्रदर्शनों को जिस तरह से संभाला, वह गलत था।

उन्होंने तर्क दिया कि प्रधान को उन घटनाओं की वजह से आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने सवाल किया कि पुलिस की कार्रवाई के लिए ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री को क्यों दोषी ठहराया जाएगा। सूत्रों ने PTI को बताया कि संबलपुर पुलिस ने एहतियात के तौर पर BJD के लगभग 30 कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया।

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धर्मेंद्र प्रधान को बचाने की हुई थी आखिरी कोशिश! शिक्षा मंत्रालय बदलने का ऑफर ठुकराया, इस्तीफे पर अड़ा रहा CJP

Dharmendra Pradhan Resignation: पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से पहले केंद्र सरकार ने उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की थी। ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने उन्हें शिक्षा मंत्रालय से हटाकर किसी दूसरे मंत्रालय की जिम्मेदारी देने का प्रस्ताव तैयार किया था। लेकिन आंदोलन का नेतृत्व कर रही कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने इसे पूरी तरह खारिज कर दिया। संगठन का साफ कहना था कि धर्मेंद्र प्रधान का सिर्फ मंत्रालय बदलना नहीं, बल्कि केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा ही स्वीकार होगा।

बताया गया है कि 25 जुलाई को धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से पहले पिछले कई सप्ताह से NEET-UG 2026 परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार तेज हो रहा था। दिल्ली के जंतर-मंतर पर शुरू हुआ यह विरोध प्रदर्शन धीरे-धीरे राष्ट्रीय स्तर के अभियान में बदल गया। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रधान के पद छोड़ने से पहले केंद्र ने एक समझौता करने की कोशिश की थी, लेकिन सरकार CJP के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को मनाने में नाकाम रही।

सरकार ने निकाला था बीच का रास्ता

The Indian Express की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार ने विवाद को शांत करने के लिए एक समझौते का रास्ता तलाशने की कोशिश की। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने CJP के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका से संपर्क कर यह जानने की कोशिश की थी कि यदि धर्मेंद्र प्रधान से शिक्षा मंत्रालय लेकर उन्हें किसी अन्य मंत्रालय में भेज दिया जाए तो क्या आंदोलन समाप्त किया जा सकता है।

हालांकि आंदोलनकारी नेताओं ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया। उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि उनकी मुख्य मांग धर्मेंद्र प्रधान का पूर्ण इस्तीफा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार और आंदोलनकारियों के बीच प्रभावी संवाद समय पर स्थापित नहीं हो सका, जिससे दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर और अधिक अड़ गए। रिपोर्ट के अनुसार, सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच लगातार बातचीत का जरिया न बन पाने की वजह से गतिरोध बना रहा। फिर दोनों पक्षों का रुख और कड़ा हो गया।

NEET विवाद से शुरू हुआ था आंदोलन

यह आंदोलन NEET-UG 2026 परीक्षा में कथित गड़बड़ियों और पेपर लीक के आरोपों के बाद शुरू हुआ था। बाद में यह सिर्फ एक परीक्षा तक सीमित नहीं रहा। बल्कि भर्ती परीक्षाओं और प्रवेश परीक्षाओं में पारदर्शिता तथा जवाबदेही की मांग को लेकर व्यापक अभियान बन गया। CJP नेताओं ने इसे केवल एक मंत्री के खिलाफ विरोध नहीं। बल्कि परीक्षा प्रणाली में कथित खामियों और जवाबदेही की कमी के खिलाफ आंदोलन बताया।

बीजेपी के भीतर भी बढ़ी थी चिंता

रिपोर्ट के मुताबिक, इस्तीफे से करीब 48 घंटे पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) और सरकार के भीतर भी यह महसूस किया जाने लगा था कि बढ़ते जनाक्रोश और संसद में लगातार हो रहे हंगामे के बीच धर्मेंद्र प्रधान का शिक्षा मंत्री बने रहना राजनीतिक रूप से मुश्किल होता जा रहा है। सरकार ने बैक-चैनल बातचीत के जरिए संकट टालने की कोशिश की। लेकिन जंतर-मंतर पर बैठे आंदोलनकारी किसी भी समझौते के लिए तैयार नहीं हुए।

खबरों के मुताबिक, सरकार ने पर्दे के पीछे से बातचीत करके और प्रधान को कैबिनेट से हटाने के बजाय कुछ रियायतें देकर संकट को कम करने की कोशिश की थी। हालांकि, CJP का कहना था कि आंदोलन की मुख्य मांग तभी पूरी होगी जब वे इस्तीफा देंगे। सोशल मीडिया पर मजबूत लामबंदी और पहली बार वोट देने वालों एवं प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले उम्मीदवारों के बीच अपील के कारण इस विरोध प्रदर्शन को असामान्य राजनीतिक महत्व भी मिला।

आखिरकार देना पड़ा इस्तीफा

करीब पांच सप्ताह तक चले आंदोलन के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। इस्तीफे के बाद CJP ने इसे छात्रों की जीत बताते हुए अपना आंदोलन स्थगित करने की घोषणा की। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद केंद्र सरकार ने प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया। ओडिशा के वरिष्ठ BJP नेता प्रधान ने पेट्रोलियम, स्टील और शिक्षा जैसे कई अहम मंत्रालय संभाले थे। लेकिन लगभग पांच सप्ताह के विरोध प्रदर्शन के बाद उन्हें अपनी कुर्सी छोड़नी पड़ी।

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Raveena Tandon:’कुछ लोग तो वहां रील्स बनाने आए थे…’, रवीना टंडन बोलीं उपद्रवियों और राजनीतिक पार्टियों ने छात्र विरोध प्रदर्शनों को किया था हाईजैक

Raveena Tandon: एक्ट्रेस रवीना टंडन ने देश भर में हुए स्टूडेंट प्रोटेस्ट पर अपनी राय शेयर की है। उन्होंने मिजोरम में हुए शांतिपूर्ण प्रदर्शनों की तारीफ की, लेकिन साथ ही चिंता भी जताई कि दूसरी जगहों पर ऐसे आंदोलनों पर उन लोगों का कब्ज़ा हो गया जिनके अपने राजनीतिक मकसद थे या जो पब्लिसिटी चाहते थे। उनका यह पोस्ट केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े के एक दिन बाद आया है। प्रधान ने NEET-UG 2026 पेपर लीक के आरोपों को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर CJP के नेतृत्व में हफ़्तों तक चले विरोध प्रदर्शनों के बाद इस्तीफा दिया था।

इंस्टाग्राम पर रवीना ने लिखा कि उन्हें उम्मीद है कि आख़िरकार स्टूडेंट्स की आवाज सुनी जा रही है और ये विरोध प्रदर्शन देश की शिक्षा व्यवस्था में सार्थक बदलाव ला सकते हैं। रवीना ने इंस्टाग्राम पर कई तस्वीरें शेयर करते हुए लिखा कि हाल ही में हुए स्टूडेंट प्रोटेस्ट (छात्रों के विरोध प्रदर्शन) ने उन्हें उम्मीद दी है।

उन्होंने लिखा, “खुशी और गर्व है कि आखिरकार लोगों की आवाज़ सुनी जा रही है (#studentsprotest #Rishikeshprotest) और उम्मीद जगी है। अब तक पर्यावरण, कम्युनिटी के जानवरों, वाइल्डलाइफ और पेड़ों की कटाई के खिलाफ़ हो रहे विरोध प्रदर्शन किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पा रहे थे और नाकाम हो रहे थे। लोग जागरूक हो रहे हैं और आने वाली पीढ़ियों को यह समझना होगा कि हमारे पास यही एक ग्रह है। कोई ‘प्लैनेट B’ नहीं है। बस यही है। उनके भविष्य के लिए हमें इसी को बचाना है।”

इसके बाद रवीना ने मिज़ोरम के छात्रों के प्रदर्शन करने के तरीके की तारीफ़ की। एक्ट्रेस ने कहा कि मिज़ोरम और दूसरे राज्यों में शांतिपूर्ण प्रदर्शनों ने एक मिसाल कायम की है। उन्हें सलाम। अफ़सोस की बात है कि कुछ राज्यों में शांतिपूर्ण छात्र आंदोलन को गुंडों और राजनीतिक पार्टियों ने हाईजैक कर लिया, और कुछ लोग तो बस रील्स बनाने और लाइमलाइट पाने के मौके की तलाश में वहाँ मौजूद थे। आख़िरकार, यह जायज़ मांगों की जीत थी।”

एक्ट्रेस ने हिंसा और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटनाओं की भी निंदा की और कहा कि ऐसी हरकतें छात्रों के आंदोलन का हिस्सा नहीं थीं। “हिंसा और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के पीछे निश्चित रूप से उपद्रवी तत्व थे। वे गैर-छात्र इस विरोध प्रदर्शन को पटरी से उतार सकते थे। फिर भी, इसके बाद मैं हमारी शिक्षा व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव की उम्मीद और प्रार्थना कर रही हूं, जिसमें हमारे सरकारी स्कूलों से भी भ्रष्टाचार खत्म हो। सभी के लिए शिक्षा आसानी से उपलब्ध हो। मैं अपनी अभिव्यक्ति की आज़ादी का इस्तेमाल कर रही हूँ। आपकी राय अलग हो सकती है, लेकिन मैं उसका भी सम्मान करती हूँ। जब पढ़ेगा इंडिया, बढ़ेगा इंडिया। जय हिंद। जय, हिंद की जनता-अवाम #indiafirst।”

NEET-UG 2026 परीक्षा में गड़बड़ी और पेपर लीक के आरोपों के बाद, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने देश भर में विरोध प्रदर्शन आयोजित किए। दिल्ली के जंतर-मंतर और कई अन्य राज्यों में हज़ारों छात्र जमा हुए और उन्होंने जवाबदेही, परीक्षा में सुधार और ज़िम्मेदार लोगों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की मांग की। इन विरोध प्रदर्शनों का नतीजा 25 जुलाई को धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े के रूप में सामने आया।

Dharmendra Pradhan Resigns: धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर रणवीर शौरी ने उठाए सवाल, बोले- सपोटर्स की न सुनके सड़क पर मौजूद कॉकरोच…

Dharmendra Pradhan Resigns: NEET पेपर लीक विवाद को लेकर हफ़्तों तक चले छात्रों के विरोध-प्रदर्शन के बाद, जहाँ बॉलीवुड के ज़्यादातर लोगों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का स्वागत किया, वहीं अभिनेता रणवीर शौरी की राय कुछ अलग थी। जब सरकार ने प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें मान लीं और दिल्ली के जंतर-मंतर पर जश्न मनाया जाने लगा, तो शौरी ने इस फ़ैसले के समय पर सवाल उठाए और इसे ‘जनता के दबाव में कामकाज’ बताते हुए इसकी आलोचना की।

अभिजीत दिपके और सौरव दास की अगुवाई वाली ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के नेतृत्व में 36 दिनों तक चले आंदोलन के बाद प्रधान ने 25 जुलाई को इस्तीफ़ा दे दिया। इस आंदोलन में छात्र परीक्षा में कथित गड़बड़ियों के लिए जवाबदेही की मांग कर रहे थे। CJP नेताओं के साथ बातचीत के बाद, केंद्र सरकार शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ दर्ज FIR वापस लेने और NEET विवाद से जुड़े मामलों में आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवज़ा देने पर भी सहमत हो गई। मांगें माने जाने के बाद प्रदर्शनकारियों ने जंतर-मंतर पर चल रहा धरना-प्रदर्शन ख़त्म कर दिया।

प्रधान के इस्तीफ़े की ख़बर सामने आते ही, रणवीर शौरी ने X (पहले ट्विटर) पर हैरानी ज़ाहिर करते हुए एक GIF के ज़रिए अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा, “और एक ही झटके में मोदी सरकार अपने किसी भी दुश्मन को तो नहीं जीत पाई, लेकिन अपने कई समर्थकों को जरूर नाराज कर दिया। #masterstroke,” और साथ में ताली बजाने वाले इमोजी भी लगाए।

जब एक सोशल मीडिया यूज़र ने पूछा कि क्या उन्हें लगता है कि प्रधान को NEET पेपर लीक विवाद पर इस्तीफ़ा नहीं देना चाहिए था, तो शोरी ने अपनी बात विस्तार से बताई। उन्होंने लिखा, “हां, लेकिन उन्हें यह तब करना चाहिए था जब सड़कों पर हालात इतने खराब नहीं हुए थे। अब ऐसा लगता है कि समर्थकों की बात नहीं सुनी जाएगी, बल्कि सड़कों पर मौजूद ‘कॉकरोच’ की बात सुनी जाएगी!”

हाल के हफ़्तों में कई एक्टर्स और म्यूज़िशियन्स ने ऑनलाइन और प्रदर्शनों में शामिल होकर स्टूडेंट मूवमेंट का खुलकर समर्थन किया है। प्रकाश राज, शबाना आज़मी और रैपर हनुमankind ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शनों में हिस्सा लिया। सोनाक्षी सिन्हा और विजय वर्मा ने सोशल मीडिया पर अपना समर्थन जताया, जबकि गुरफतेह पीरजादा, प्रतिभा रांटा, शालिनी पांडे और कई अन्य लोगों ने मुंबई में हुए प्रदर्शनों में भाग लिया।

फाउंडर अभिजीत दिपके की अगुवाई वाली ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के नेतृत्व में शुरू हुए ये विरोध प्रदर्शन NEET पेपर लीक को लेकर शुरू हुए थे, लेकिन जल्द ही ये शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही और सुधार की मांग करने वाले एक बड़े युवा आंदोलन में बदल गए। सोनम वांगचुक ने भी इस आंदोलन का समर्थन किया और भूख हड़ताल की थी, जिसे उन्होंने केंद्र सरकार के साथ बातचीत के अंतिम दौर से पहले खत्म कर दिया।

प्रधान के इस्तीफ़े के बाद जंतर-मंतर पर जश्न मनाया गया। छात्रों ने नारे लगाए और इस घटनाक्रम को आंदोलन की जीत बताया। CJP ने इस्तीफ़े को एक अहम पड़ाव बताया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि बड़े सुधारों के लिए उनका अभियान मंत्री के हटने के बाद भी जारी रहेगा।