Pralhad Joshi: धर्मेंद्र प्रधान की जगह प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्री क्यों बनाया गया? माने जाते हैं मोदी सरकार के भरोसेमंद संकटमोचक

Pralhad Joshi: केंद्र सरकार में वरिष्ठ मंत्री प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी मिलने की चर्चाओं के बीच उनकी प्रशासनिक क्षमता और राजनीतिक अनुभव एक बार फिर सुर्खियों में हैं। मोदी सरकार में उन्हें ऐसे नेता के रूप में देखा जाता है, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में विभिन्न मंत्रालयों की जिम्मेदारियां प्रभावी ढंग से संभाली हैं। अब उन्हें शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार भी सौंप दिया गया है। अब उनके सामने देश की परीक्षा व्यवस्था में भरोसा बहाल करने और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लंबित सुधारों को गति देने जैसी बड़ी चुनौतियां होंगी।

प्रह्लाद जोशी वर्तमान में उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। इससे पहले वह संसदीय कार्य मंत्री के रूप में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं। संसद में विभिन्न दलों के बीच समन्वय बनाने, विधेयकों को आगे बढ़ाने और जटिल राजनीतिक परिस्थितियों से निपटने के कारण उन्हें सरकार का अनुभवी रणनीतिकार माना जाता है।

शिक्षा मंत्रालय के सामने होंगी कई बड़ी चुनौतियां

शिक्षा मंत्रालय का दायित्व मिलने के बाद जोशी की सबसे पहली प्राथमिकता राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं की विश्वसनीयता को मजबूत करना होगी। परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली में सुधार और कंप्यूटर आधारित परीक्षा प्रणाली को आगे बढ़ाने पर विशेष ध्यान देना पड़ सकता है।

इसके अलावा परीक्षा में गड़बड़ियों और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने, नए कानूनी प्रावधानों के प्रभावी क्रियान्वयन और छात्रों के बीच विश्वास बहाल करने की दिशा में भी तेजी से काम करना होगा।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर रहेगा फोकस

संकट प्रबंधन के साथ-साथ राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के विभिन्न प्रावधानों को लागू करना, उच्च शिक्षा में सुधार, कौशल आधारित शिक्षा को बढ़ावा देना और केंद्र व राज्यों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना भी नई जिम्मेदारी का अहम हिस्सा माना जाएगा। सरकार की कोशिश होगी कि शिक्षा मंत्रालय की नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया और दीर्घकालिक सुधार योजनाओं पर किसी तरह का असर न पड़े और छात्रों से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले समय पर लिए जाएं।

नवनियुक्त केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने पदभार संभाल लिया है। धर्मेंद्र प्रधान के शनिवार 25 जुलाई को पद से इस्तीफा देने के बाद जोशी को शिक्षा मंत्री नियुक्त किया गया। जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। वह उपभोक्ता मामलों के मंत्री भी हैं।

‘विनम्रता के साथ जिम्मेदारी स्वीकार करता हूं’

प्रह्लाद जोशी ने शनिवार को कहा कि उन्होंने दायित्व और विनम्रता की भावना के साथ यह जिम्मेदारी स्वीकार की है। शनिवार को धर्मेंद्र प्रधान के पद से इस्तीफा देने के बाद जोशी को शिक्षा मंत्री नियुक्त किया गया है। जोशी को उपभोक्ता मामलों के मंत्री की अपनी मौजूदा जिम्मेदारी के साथ-साथ शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री ने मुझे एक जिम्मेदारी सौंपी है। मैं इस जिम्मेदारी को कर्तव्य भावना और विनम्रता के साथ स्वीकार करता हूं।”

उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के पिछले 12 वर्षों में कई ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की गई हैं। पिछले चार-पांच वर्षों में धर्मेंद्र प्रधान ने भी राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू किया है…प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में मैं अपनी पूरी क्षमता के साथ अपना सर्वश्रेष्ठ देने का प्रयास करूंगा।”

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इससे पहले, देशभर में CJP के नेतृत्व में नीट पेपर लीक मामले में छात्रों के प्रदर्शनों के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। प्रधान ने कहा कि यह उनके लिए व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का मामला नहीं है। पिछले 10 दिनों में सामने आई घटनाओं को देखकर वह परेशान हैं।

Dharmendra Pradhan Resigns: CJP प्रोटेस्ट के पहले दिन ही धर्मेंद्र प्रधान ने कर दी थी इस्तीफे की पेशकश! फिर किसने मना कर दिया?

Dharmendra Pradhan Resigns: मध्य प्रदेश के कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने पूर्व केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को लेकर एक सनसनीखेज दावा किया है। उन्होंने दावा किया है कि तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में छात्र आंदोलन शुरू होने के पहले दिन ही भारतीय जनता पार्टी (BJP) के आलकमान के सामने मंत्री पद से इस्तीफे की पेशकश कर दी थी। विजयवर्गीय ने शनिवार 25 जुलाई को इंदौर में पत्रकारों से बातचीत में प्रधान की तारीफ करते हुए कहा कि उन्हें जो भी दायित्व सौंपा जाता है, वह उसे बड़ी ईमानदारी और समर्पण से निभाते हैं।

कैलाश विजयवर्गीय ने कहा, “पहले दिन से जैसे ही (छात्र) आंदोलन शुरू हुआ था, प्रधान ने पार्टी (BJP) अध्यक्ष से कहा कि अगर उन्हें ऐसा लगता है, तो वह (शिक्षा मंत्री के पद से) इस्तीफा दे देते हैं।” विजयवर्गीय के मुताबिक BJP अध्यक्ष ने उस समय प्रधान को यह कहते हुए इस्तीफा देने के लिए मना कर दिया था कि जब तक इस बारे में कोई निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक वह इस्तीफा नहीं देंगे और किसी व्यक्ति से इस्तीफे की बात तक नहीं करेंगे।

BJP के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव विजयवर्गीय ने कहा कि बाद में बनीं परिस्थितियों के चलते जब पार्टी ने प्रधान के इस्तीफे का निर्णय लिया, तो उन्होंने तुरंत इस्तीफा दे दिया। पीटीआई के मुताबिक उन्होंने कहा, “प्रधान के इस्तीफे से उन सब विदेशी ताकतों के मंसूबे खत्म हो गए जो बांग्लादेश और श्रीलंका की तरह भारत में हिंसा फैलाकर अस्थिरता पैदा करना चाहती थीं। इसलिए प्रधान ने जो काम किया है, उसके लिए मैं उनको बधाई भी देता हूं।”

कांग्रेस और राहुल गांधी पर हमला

प्रधान के इस्तीफे को लेकर कांग्रेस नेताओं के जश्न मनाने पर विजयवर्गीय ने एक कहावत का इस्तेमाल करते हुए तंज कसा कि पड़ोसी के घर में बच्चा पैदा होने पर कांग्रेस ढोलक बजा रही है। उन्होंने कहा, “छात्र आंदोलन में कांग्रेस की क्या भूमिका थी? बच्चों ने आंदोलन किया, वे (कांग्रेस) जाकर उसके पीछे खड़े हो गए। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद विपक्ष बिल्कुल निराश हो गया है और निराशा के पल में उन्हें आशा की एक किरण कॉकरोच जनता पार्टी में दिखी।”

मंत्री ने पूछा कि क्या छात्र आंदोलन में किसी कांग्रेस नेता ने पुलिस का एक भी लट्ठ खाया है? लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने दीमक का काम करते हुए देश की शिक्षा व्यवस्था को अंदर से खोखला कर दिया है।

इस बयान पर पलटवार करते हुए विजयवर्गीय ने कहा, “मुझे राहुल गांधी की राजनीतिक विचारधारा और उनकी बुद्धि पर बहुत तरस आता है। मुझे लगता है कि उन्हें अभी जरा समझना पड़ेगा कि संघ है क्या?” उन्होंने कहा कि देश आज सही दिशा में जा रहा है और इसके पीछे संघ की मेहनत है।

प्रह्लाद जोशी ने शिक्षा मंत्री का कार्यभार संभाला

नवनियुक्त केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने पदभार संभाल लिया है। धर्मेंद्र प्रधान के शनिवार को पद से इस्तीफा देने के बाद जोशी को शिक्षा मंत्री नियुक्त किया गया। जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। वह उपभोक्ता मामलों के मंत्री भी हैं।

नीट पेपर लीक होने के खिलाफ देशभर में कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किए। प्रदर्शनों के के बीच, प्रधान ने शनिवार को पद से इस्तीफा दे दिया। प्रधान ने अपने त्यागपत्र में कहा कि यह उनके लिए व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का विषय नहीं है। पिछले 10 दिनों के दौरान हुई घटनाओं से वह व्यथित हैं।

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Bhumi Pednekar: ‘आज हमारे… लिए एक बहुत बड़ा पल है’, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद भूमि पेडनेकर ने शेयर किया नोट

Bhumi Pednekar: एक्ट्रेस भूमि पेडनेकर ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। शनिवार को एक्ट्रेस ने अपने इंस्टाग्राम पर एक लंबा नोट लिखा और कहा कि यह पल एक मज़बूत और निष्पक्ष भारत की शुरुआत का प्रतीक है। एक्ट्रेस ने यह उम्मीद भी जताई कि यह अहम पल कमियों को पहचानने और उन्हें दूर करने की दिशा में एक सार्थक बदलाव लाएगा।

उन्होंने लिखा, “उम्मीद है कि इससे हमारा भारत और मज़बूत और बेहतर बनेगा। आज हमारे लोकतंत्र के लिए एक बहुत अहम पल है। ऐसे नागरिक जिन्होंने हार नहीं मानी और ऐसी लीडरशिप जिसने उनकी बात सुनी। युवाओं ने अपनी बात रखी; उनका पक्का इरादा, उनकी हिम्मत और बदलाव की ताकत में उनका भरोसा वाकई प्रेरणा देने वाला था।”

उन्होंने आगे कहा, “उस मंच पर बहुत कुछ कहा गया, लेकिन आखिर में वही आवाज़ गूंजी जो छात्र सही मायने में चाहते थे। मेरे लिए, जवाबदेही का मतलब है असल और समाधान-केंद्रित बदलाव लाना। कमियों को पहचानना और उन्हें दूर करना। ऐसा असली सुधार जो सच में हमारे छात्रों के भविष्य की चर्चा पर असर डाले। मुझे लगता है कि हर भारतीय के लिए—चाहे आप किसी सरकारी पद पर हों या आम नागरिक—देश, उसकी खुशहाली, उसके लोग और उसकी सुरक्षा हमेशा सबसे पहले होनी चाहिए। जय हिंद।”

राष्ट्रीय राजधानी के बीचों-बीच हफ़्तों तक चले बड़े छात्र विरोध-प्रदर्शनों और लगातार जन-आंदोलन के बाद, शनिवार को धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफ़ा दे दिया। छात्र परीक्षा में गड़बड़ियों, खासकर NEET-UG पेपर लीक को लेकर उनके इस्तीफ़े की मांग कर रहे थे। उनका इस्तीफ़ा 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ दिल्ली पुलिस की सख़्त कार्रवाई के बाद आया है।

पुलिस की इस कार्रवाई से पूरे देश में आक्रोश फैल गया और नाराज़ नागरिक बड़ी संख्या में जंतर-मंतर पर छात्रों का समर्थन करने के लिए उमड़ पड़े।

ये विरोध-प्रदर्शन दिल्ली से पहले मेट्रो शहरों और फिर छोटे कस्बों तक फैल गए। 18 जुलाई की सुबह, सोनम वांगचुक को 21 दिनों की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पूरी करने के बाद जंतर-मंतर पर प्रदर्शन स्थल से दिल्ली पुलिस द्वारा ज़बरदस्ती हटाए जाने के बाद विरोध-प्रदर्शन और तेज़ हो गए।

अधिकारियों ने उनकी बिगड़ती सेहत, डॉक्टरी सलाह और दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया। सोनम वांगचुक प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए भूख हड़ताल पर हैं।

Dharmendra Pradhan Resigns: धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर रणवीर शौरी ने उठाए सवाल, बोले- सपोटर्स की न सुनके सड़क पर मौजूद कॉकरोच…

Dharmendra Pradhan Resigns: NEET पेपर लीक विवाद को लेकर हफ़्तों तक चले छात्रों के विरोध-प्रदर्शन के बाद, जहाँ बॉलीवुड के ज़्यादातर लोगों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का स्वागत किया, वहीं अभिनेता रणवीर शौरी की राय कुछ अलग थी। जब सरकार ने प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें मान लीं और दिल्ली के जंतर-मंतर पर जश्न मनाया जाने लगा, तो शौरी ने इस फ़ैसले के समय पर सवाल उठाए और इसे ‘जनता के दबाव में कामकाज’ बताते हुए इसकी आलोचना की।

अभिजीत दिपके और सौरव दास की अगुवाई वाली ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के नेतृत्व में 36 दिनों तक चले आंदोलन के बाद प्रधान ने 25 जुलाई को इस्तीफ़ा दे दिया। इस आंदोलन में छात्र परीक्षा में कथित गड़बड़ियों के लिए जवाबदेही की मांग कर रहे थे। CJP नेताओं के साथ बातचीत के बाद, केंद्र सरकार शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ दर्ज FIR वापस लेने और NEET विवाद से जुड़े मामलों में आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवज़ा देने पर भी सहमत हो गई। मांगें माने जाने के बाद प्रदर्शनकारियों ने जंतर-मंतर पर चल रहा धरना-प्रदर्शन ख़त्म कर दिया।

प्रधान के इस्तीफ़े की ख़बर सामने आते ही, रणवीर शौरी ने X (पहले ट्विटर) पर हैरानी ज़ाहिर करते हुए एक GIF के ज़रिए अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा, “और एक ही झटके में मोदी सरकार अपने किसी भी दुश्मन को तो नहीं जीत पाई, लेकिन अपने कई समर्थकों को जरूर नाराज कर दिया। #masterstroke,” और साथ में ताली बजाने वाले इमोजी भी लगाए।

जब एक सोशल मीडिया यूज़र ने पूछा कि क्या उन्हें लगता है कि प्रधान को NEET पेपर लीक विवाद पर इस्तीफ़ा नहीं देना चाहिए था, तो शोरी ने अपनी बात विस्तार से बताई। उन्होंने लिखा, “हां, लेकिन उन्हें यह तब करना चाहिए था जब सड़कों पर हालात इतने खराब नहीं हुए थे। अब ऐसा लगता है कि समर्थकों की बात नहीं सुनी जाएगी, बल्कि सड़कों पर मौजूद ‘कॉकरोच’ की बात सुनी जाएगी!”

हाल के हफ़्तों में कई एक्टर्स और म्यूज़िशियन्स ने ऑनलाइन और प्रदर्शनों में शामिल होकर स्टूडेंट मूवमेंट का खुलकर समर्थन किया है। प्रकाश राज, शबाना आज़मी और रैपर हनुमankind ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शनों में हिस्सा लिया। सोनाक्षी सिन्हा और विजय वर्मा ने सोशल मीडिया पर अपना समर्थन जताया, जबकि गुरफतेह पीरजादा, प्रतिभा रांटा, शालिनी पांडे और कई अन्य लोगों ने मुंबई में हुए प्रदर्शनों में भाग लिया।

फाउंडर अभिजीत दिपके की अगुवाई वाली ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के नेतृत्व में शुरू हुए ये विरोध प्रदर्शन NEET पेपर लीक को लेकर शुरू हुए थे, लेकिन जल्द ही ये शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही और सुधार की मांग करने वाले एक बड़े युवा आंदोलन में बदल गए। सोनम वांगचुक ने भी इस आंदोलन का समर्थन किया और भूख हड़ताल की थी, जिसे उन्होंने केंद्र सरकार के साथ बातचीत के अंतिम दौर से पहले खत्म कर दिया।

प्रधान के इस्तीफ़े के बाद जंतर-मंतर पर जश्न मनाया गया। छात्रों ने नारे लगाए और इस घटनाक्रम को आंदोलन की जीत बताया। CJP ने इस्तीफ़े को एक अहम पड़ाव बताया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि बड़े सुधारों के लिए उनका अभियान मंत्री के हटने के बाद भी जारी रहेगा।

Tej Pratap Yadav: तेज प्रताप यादव 14 दिन के लिए भेजे गए पटना के बेऊर जेल, NEET प्रदर्शनकारियों को भड़काने का आरोप

Tej Pratap Yadav: जनशक्ति जनता दल (JJD) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व सीएम लालू यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव को ‘बिहार बंद’ के दौरान हुई तोड़-फोड़ और आगजनी के मामले में गिरफ्तारी के बाद पटना की एक अदालत ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। उन्हें पटना के बेऊर जेल भेज दिया गया है। शनिवार देर रात बिहार पुलिस ने तेज प्रताप यादव को एक मॉल से गिरफ्तार किया था। इसके बाद उन्हें मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया था, जहां से उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।

पुलिस ने तेज प्रताप यादव को नीट पेपर लीक के खिलाफ शनिवार को ‘बिहार बंद’ के दौरान पटना में प्रदर्शनकारियों के साथ शामिल होने पर गिरफ्तार किया। यादव पटना के रामगुलाम चौक पर धरना दे रहे प्रदर्शनकारियों के साथ शामिल हुए, जिसके कुछ देर बाद ही पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेकर वाहन में बैठा लिया। पुलिस द्वारा ले जाए जाने से पहले वाहन का दरवाजा पकड़े यादव ने कहा, “हम छात्रों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं। जरूरत पड़ी तो मैं छात्रों के अधिकारों के लिए अपनी जान देने को भी तैयार हूं।”

यादव ने प्रदर्शन में शामिल होकर बंद को अपना समर्थन दिया था। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) प्रमुख लालू प्रसाद के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव ने प्रदर्शन में शामिल होने से पहले केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की प्रदर्शनकारी छात्रों की मांग दोहराई।

अधिकारियों ने बताया कि नीट पेपर लीक और प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के विरोध में राज्यव्यापी बंद के समर्थन में वामपंथी छात्र संगठनों के सदस्यों ने शनिवार को बिहार के कई जिलों में प्रदर्शन किया। इस दौरान पुलिस के साथ उनकी झड़प हुई।

पुलिस ने बताया कि बंद का राज्यभर में मिलाजुला असर रहा। पटना में पथराव की घटनाएं हुईं। जबकि नालंदा, नवादा, जहानाबाद और रोहतास में बंद का बहुत कम असर देखने को मिला। इस दौरान प्रदर्शनकारियों के साथ झड़प और पथराव में कई पुलिसकर्मी घायल हो गए। जब तेज प्रताप छात्रों के साथ रामगुलाम चौक से डाक बंगला चौराहे की ओर मार्च करने लगे, तो एग्जिबिशन रोड के पास पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया।

वकील ने क्या बताया?

तेज प्रताप यादव के वकील जगन्नाथ सिंह ने कहा, “FIR 26 तारीख को दर्ज की गई थी। जबकि गिरफ्तारी 25 तारीख को शाम 7:30 बजे सिटी सेंटर मॉल से हुई थी। मैंने अभी उनकी रिहाई के लिए जज के पास एक अर्जी दी है। उन्होंने मुझसे सोमवार को जमानत की मांग पर कार्रवाई करने को कहा।”

रविवार सुबह ANI से बातचीत में वकील ने आगे कहा, “मैं सुबह 10:30 बजे नौबतपुर पुलिस स्टेशन पहुंचा। वहां 2 SP थे… मैंने उनसे उनकी गिरफ्तारी का कारण पूछा। उनके परिवार वालों को यह भी नहीं पता कि वे शाम 7:30 बजे से हिरासत में थे… हमें अभी तक FIR की कॉपी भी नहीं मिली है।”

वहीं, तेज प्रताप यादव की गिरफ्तारी पर JJD की बांकीपुर उपचुनाव उम्मीदवार वीणा मानवी ने कहा, “मैं कुछ नहीं कहना चाहती। 13 तारीख से हमें परेशान किया जा रहा है। पहले उन्होंने (पुलिस) मुझे नामांकन के दिन उठाया। फिर आज उन्हें उठा लिया। ऐसा लगता है कि पूरा बांकीपुर जिला अब जनशक्ति जनता दल पर निर्भर है।”

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उन्होंने आगे कहा, “अगर हम थोड़ा विरोध करते हैं तो क्या गलत है? उन्होंने क्या अपराध किया? अगर बच्चों के बीच एक बार राष्ट्रीय ध्वज दिखाया गया, तो क्या वह अपराध था? और अगर आपकी नज़र में यह अपराध था भी, तो उन्हें उसी समय वहां से ले जाना चाहिए था। लेकिन उन्हें तब उठाने का क्या मतलब है जब वे शाम को परिवार के साथ समय बिता रहे थे, खरीदारी करने जा रहे थे? मुझे भी इसके पीछे का कारण नहीं पता…।”

Dharmendra Pradhan Resigns: किसी विवाद के कारण इस्तीफा देने वाले मोदी सरकार के दूसरे मंत्री हैं धर्मेंद्र प्रधान, पहले कौन थे?

Dharmendra Pradhan Resigns: दिल्ली के जंतर-मंतर समेत देशभर में NEET-UG पेपर लीक विवाद को लेकर हुए विरोध-प्रदर्शनों के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा समकालीन भारतीय राजनीतिक इतिहास में एक दुर्लभ घटना है। साल 2014 से नरेंद्र मोदी सरकार के लगातार तीन कार्यकाल और 12 से अधिक वर्षों के दौरान सार्वजनिक विवादों के कारण मंत्रियों के इस्तीफे की घटनाएं बहुत कम हुई हैं। असल में प्रधान मोदी सरकार में किसी बड़े विवाद के बीच इस्तीफा देने वाले केवल दूसरे केंद्रीय मंत्री हैं। इससे पहले विदेश राज्य मंत्री एम.जे. अकबर थे, जिन्होंने विवाद के बाद इस्तीफा दिया था।

सार्वजनिक विवाद के केंद्र में रहते हुए किसी केंद्रीय मंत्री के इस्तीफे का एकमात्र पिछला उदाहरण 17 अक्टूबर 2018 का है। वरिष्ठ पत्रकार से राजनेता बने एम.जे. अकबर ने विदेश मंत्रालय से इस्तीफा दिया था। अकबर ने #MeToo आंदोलन के दौरान लगे कथित आरोपों के बीच अपने पद से इस्तीफा दिया था।

वर्ष 2018 में कई महिला पत्रकारों ने एम.जे. अकबर पर उनके पत्रकारिता के दौर से जुड़े आरोप लगाए थे। बढ़ते विवाद के बीच उन्होंने मंत्री पद छोड़ते हुए कहा था कि वह व्यक्तिगत क्षमता में कानूनी लड़ाई लड़ना चाहते हैं, ताकि सरकारी कामकाज प्रभावित न हो।

हालांकि, शिरोमणि अकाली दल (SAD) की नेता हरसिमरत कौर बादल ने 2020 में तीन विवादास्पद कृषि कानूनों का विरोध करते हुए नरेंद्र मोदी कैबिनेट से इस्तीफा दिया था। लेकिन वे उस विवाद का मुख्य केंद्र नहीं थीं। उनका इस्तीफा तीन कृषि कानूनों के विरोध में था। वह खुद किसी व्यक्तिगत विवाद के केंद्र में नहीं थीं।

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की चर्चा क्यों?

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, NEET-UG परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों और अभिभावकों के विरोध के बाद शिक्षा मंत्रालय पर लगातार दबाव बना। ऐसे में धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को सरकार की जवाबदेही और परीक्षा व्यवस्था में भरोसा बहाल करने की दिशा में एक कदम के तौर पर देखा जा रहा है। बताया जा रहा है कि सरकार का उद्देश्य छात्रों की चिंताओं को कम करना, परीक्षा प्रणाली पर विश्वास बहाल करना और संसद के मानसून सत्र के दौरान महत्वपूर्ण विधायी कार्यों को सुचारु रूप से आगे बढ़ाना है।

2014 में स्थापित मौजूदा शासन मॉडल के तहत कैबिनेट की स्थिरता और संरचनात्मक निरंतरता मुख्य स्तंभ रहे हैं। हालांकि समय-समय पर कैबिनेट में फेरबदल या प्रशासनिक बदलावों के दौरान कई मंत्रियों ने मंत्रिपरिषद छोड़ी है। लेकिन बाहरी राजनीतिक दबाव या सार्वजनिक विवादों के कारण इस्तीफे की घटनाएं अपवाद ही रही हैं।

प्रशासनिक मतभेदों या पॉलिसी से जुड़ी चुनौतियों के ज्यादातर मामलों में सरकार ने तुरंत राजनीतिक इस्तीफ़े के बजाय ढांचे में बड़े बदलाव, विभागीय जांच या एजेंसी से जांच कराने को प्राथमिकता दी है। यह तरीका जल्दबाज़ी में राजनीतिक रियायतें देने के बजाय पॉलिसी को जारी रखने और संस्थागत स्थिरता को अहमियत देता है।

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के पीछे की वजह?

धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा इसलिए खास है क्योंकि यह राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी प्रवेश परीक्षाओं में गड़बड़ियों को लेकर छात्रों के जबरदस्त विरोध-प्रदर्शन का सीधा जवाब है। आम राजनीतिक विवादों के उलट, NEET-UG विवाद ने देश भर के लाखों युवा उम्मीदवारों और उनके परिवारों पर सीधा असर डाला।

सरकार ने दो मुख्य मकसद हासिल करने की कोशिश की!

युवाओं की चिंता कम करना: छात्रों को यह संकेत देना कि सरकार जवाबदेह है और जनता को परीक्षा की निष्पक्षता के बारे में भरोसा दिलाना।

संसद का कामकाज सुचारू बनाना: विपक्षी दलों के साथ टकराव के एक बड़े मुद्दे को खत्म करना ताकि मानसून सत्र के दौरान जरूरी कानूनों को आसानी से पास कराया जा सके।

जवाबदेही के लिए एक रणनीतिक तरीका

2018 में एम.जे. अकबर और धर्मेंद्र प्रधान दोनों का हटना मंत्रियों की जवाबदेही तय करने के एक सोचे-समझे तरीके को दिखाता है। दोनों ही मामलों में बड़े नेताओं के इस्तीफे का इस्तेमाल रणनीतिक कदम के तौर पर किया गया ताकि संस्थागत गतिरोध को दूर किया जा सके। साथ ही जनता के तनाव को कम किया जा सके और प्रशासन अपने मुख्य गवर्नेंस एजेंडे पर आगे बढ़ सके।

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