Snakebite in India: सांप के काटने में भारत नंबर-1, हर साल 13 लाख तक मामले; जानें क्यों बढ़ रहा खतरा

भारत में सांप के काटने का खतरा कितना बड़ा है, इसका अंदाजा एक नए वैश्विक अध्ययन से लगाया जा सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, हर साल देश में बड़ी संख्या में लोग सांप के जहर का शिकार होते हैं, जिससे यह समस्या गंभीर स्वास्थ्य संकट बनती जा रही है। खासकर गांवों और खेतों में रहने वाले लोगों के लिए इसका खतरा ज्यादा रहता है। बारिश के मौसम में सांपों के इंसानी इलाकों के करीब आने से घटनाएं बढ़ने की आशंका रहती है। सबसे चिंता की बात यह है कि कई मामलों में पीड़ित समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पाते। इलाज में देरी और ग्रामीण क्षेत्रों में मेडिकल सुविधाओं की कमी स्थिति को और गंभीर बना देती है।

वहीं, दुनिया के दूसरे देशों की तुलना में भारत में सांप के काटने के मामलों का आंकड़ा काफी ज्यादा बताया गया है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि किन इलाकों में खतरा ज्यादा है और कौन से जहरीले सांप सबसे ज्यादा जानलेवा साबित होते हैं।

भारत के बाद इन देशों में सबसे ज्यादा मामले

अध्ययन में दुनिया के उन देशों की पहचान की गई है जहां सांप के काटने का खतरा सबसे ज्यादा है। अनुमानित सालाना मामलों के हिसाब से भारत सबसे ऊपर है। इसके बाद नाइजीरिया, इंडोनेशिया और डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो का नंबर आता है।

भारत: 13 लाख तक मामले

नाइजीरिया: करीब 6.66 लाख मामले

इंडोनेशिया: करीब 4.90 लाख मामले

डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो: करीब 4.67 लाख मामले

रिसर्च के अनुसार, दुनिया के लगभग तीन-चौथाई सांप काटने के मामले सिर्फ 20 देशों में केंद्रित हैं।

किसानों और ग्रामीणों पर सबसे ज्यादा खतरा

भारत में सांप काटने की घटनाओं का बड़ा हिस्सा ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़ा है। खेतों में काम करने वाले किसान और मजदूर खास तौर पर जोखिम में रहते हैं। मानसून के दौरान यह खतरा और बढ़ जाता है, क्योंकि बारिश के समय सांप अक्सर सुरक्षित जगह की तलाश में इंसानी बस्तियों और खेतों की ओर आ जाते हैं। बिना जूते खेतों में काम करना, जमीन पर सोना और कच्चे या खुले घरों में रहना भी जोखिम बढ़ा सकता है।

इलाज में देरी बनती है जानलेवा

सांप के काटने के बाद समय पर सही इलाज मिलना बेहद जरूरी है। लेकिन ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में अस्पताल दूर होने के कारण मरीज को इलाज मिलने में काफी समय लग सकता है। कई मामलों में लोग अस्पताल जाने से पहले पारंपरिक इलाज या झाड़-फूंक का सहारा लेते हैं। कुछ स्थानीय स्वास्थ्य केंद्रों में एंटीवेनम और गंभीर मरीजों के लिए जरूरी चिकित्सा सुविधाओं की कमी भी समस्या को बढ़ा सकती है।

भारत के ‘बिग फोर’ जहरीले सांप

भारत में गंभीर सांप काटने के मामलों के लिए चार प्रमुख जहरीली प्रजातियों को आमतौर पर ‘बिग फोर’ कहा जाता है।

  1. Spectacled Cobra

यह कोबरा खेतों के अलावा कई बार इंसानी बस्तियों के आसपास भी दिखाई देता है। इसके जहर से शरीर के तंत्रिका तंत्र पर गंभीर असर पड़ सकता है।

  1. Common Krait

कॉमन क्रेट रात में ज्यादा सक्रिय रहता है। इसके काटने की कई घटनाएं सोते समय होती हैं और पीड़ित को शुरुआत में काटने का पता भी नहीं चल पाता।

  1. Russell’s Viper

रसेल वाइपर को भारत में गंभीर सांप काटने के प्रमुख कारणों में गिना जाता है। इसके जहर से रक्तस्राव, ऊतकों को नुकसान और किडनी से जुड़ी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।

  1. Saw-scaled Viper

आकार में छोटा होने के बावजूद यह बेहद जहरीला सांप है। इसके जहर से खून बहने और शरीर में रक्त के जमने की प्रक्रिया प्रभावित होने जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।

सांप का काटना बना ‘छिपा हुआ’ स्वास्थ्य संकट

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने snakebite envenoming को Neglected Tropical Disease यानी उपेक्षित उष्णकटिबंधीय बीमारी की प्राथमिकता वाली श्रेणी में रखा है। विशेषज्ञों का मानना है कि सांप काटने के वास्तविक आंकड़े इससे भी ज्यादा हो सकते हैं, क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में कई घटनाएं आधिकारिक रिकॉर्ड तक नहीं पहुंचतीं।

बचाव के लिए क्या कदम जरूरी?

विशेषज्ञों के अनुसार, ज्यादा प्रभावित इलाकों में पर्याप्त मात्रा में एंटीवेनम उपलब्ध कराना बेहद जरूरी है। साथ ही प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के कर्मचारियों को सांप काटने के मामलों के इलाज की बेहतर ट्रेनिंग देने की जरूरत है। ग्रामीण मजदूरों को सुरक्षित जूते उपलब्ध कराना, लोगों को सांप काटने के बाद सही प्राथमिक कदमों की जानकारी देना और समय पर अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था मजबूत करना भी इस संकट से निपटने में अहम भूमिका निभा सकता है।

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पहले डॉल्फिन को साइकिल से बांधा, फिर बनाने लगा रील! वायरल वीडियो ने सोशल मीडिया पर मचा दिया बवाल

सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। वीडियो में एक शख्स कथित तौर पर गंगा नदी की डॉल्फिन को साइकिल से बांधकर उसके साथ रील बनाता नजर आ रहा है। फुटेज सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। कई यूजर्स ने इस घटना को बेहद शर्मनाक बताते हुए वन्यजीवों के साथ इस तरह के व्यवहार पर सवाल उठाए हैं। दावा किया जा रहा है कि मामला बिहार का है और वीडियो में दिख रहा व्यक्ति डॉल्फिन के साथ रील बना रहा था। घटना से जुड़े एक अन्य वीडियो को लेकर डॉल्फिन के मृत होने की बात भी कही जा रही है।

हालांकि, वायरल वीडियो और उससे जुड़े सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। लोगों ने संबंधित अधिकारियों से मामले की जांच करने और आरोप सही पाए जाने पर जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

पहले जिंदा नजर आई डॉल्फिन

वायरल पोस्ट में दो वीडियो का जिक्र है। पहले फुटेज में डॉल्फिन जिंदा दिखाई देती है और कथित तौर पर उसे साइकिल से बांधा गया है। इसके बाद सामने आए दूसरे वीडियो में वही जानवर मृत नजर आने का दावा किया गया है। इस दौरान शख्स के उसके साथ रील बनाने की बात कही जा रही है।

तेल निकालने के लिए पकड़ने का भी दावा

सोशल मीडिया पोस्ट्स में दावा किया गया है कि यह घटना बिहार की है और इसमें नेटालाल कुमार नाम के एक व्यक्ति का कथित तौर पर शामिल होना बताया जा रहा है। पोस्ट में यह भी दावा किया गया कि डॉल्फिन को कथित रूप से उसका तेल निकालने के लिए पकड़ा गया था और बाद में घटना का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाला गया।

‘रील के लिए लुप्तप्राय जीव को क्यों बनाया कंटेंट?’

वीडियो सामने आने के बाद यूजर्स ने सवाल उठाया कि सोशल मीडिया पर कुछ सेकेंड की लोकप्रियता के लिए किसी दुर्लभ वन्यजीव के साथ इस तरह का व्यवहार कैसे किया जा सकता है। कई लोगों ने बिहार पुलिस और वन विभाग से मामले की जांच कर दोष साबित होने पर सख्त कार्रवाई की मांग की।

गंगा डॉल्फिन को लेकर क्यों बढ़ी चिंता?

गंगा नदी की डॉल्फिन एक लुप्तप्राय प्रजाति है और इसके संरक्षण को लेकर लंबे समय से प्रयास किए जा रहे हैं। वायरल पोस्ट में दावा किया गया है कि दुनिया में इनकी संख्या करीब 5,000 ही रह गई है। ऐसे में एक डॉल्फिन की कथित मौत ने संरक्षण को लेकर चिंता और बढ़ा दी है।

यूजर्स ने पुलिस और वन विभाग को किया टैग

मामले को लेकर कई सोशल मीडिया यूजर्स ने बिहार पुलिस, पर्यावरण मंत्रालय और वन्यजीव संरक्षण संगठनों को टैग किया। एक यूजर ने मांग की कि अगर किसी व्यक्ति ने जानबूझकर संरक्षित जीव को नुकसान पहुंचाया है, तो उसके खिलाफ कानून के तहत कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।

कानूनी कार्रवाई की उठी मांग

कुछ यूजर्स ने दावा किया कि भारत में गंगा डॉल्फिन को कानूनी संरक्षण प्राप्त है और इसे नुकसान पहुंचाने पर जेल व जुर्माने का प्रावधान है। हालांकि, वायरल वीडियो से जुड़े दावों की आधिकारिक पुष्टि स्वतंत्र रूप से नहीं हुई है। इसलिए घटना की वास्तविक परिस्थितियों और जिम्मेदार व्यक्ति की भूमिका की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।

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Bihar Police ASI Operation Result 2026: आधिकारिक वेबसाइट पर इस तरह चेक करें प्री परीक्षा की मेरिट लिस्ट, 462 पदों के लिए हुई थी परीक्षा

Bihar Police ASI Operation Result 2026: बिहार पुलिस में असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर (ऑपरेशन) की प्राथमिक लिखित परीक्षा में शामिल उम्मीदवार अपने रिजल्ट का इंतजार कर रहे हैं। इनके लिए जरूरी अपडेट है। बिहार पुलिस अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (BPSSC) ने इन उम्मीदवारों का इंतजार को खत्म करते हुए बीपी एएसआई (ऑपरेशन) प्राथमित लिखित परीक्षा 2026 का परिणाम जारी कर दिया है। यह परिणाम बिहार पुलिस रेडियो में असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर (ऑपरेशन) की 462 वैकेंसी पर भर्ती के लिए घोषित किया गया है। प्री परीक्षा 22 जुलाई, 2026 को एक ही शिफ्ट में आयोजित की गई थी। परीक्षा के लिए कुल 1,03,248 उम्मीदवार तय किए गए थे, जबकि 42,595 कैंडिडेट शामिल हुए। मूल्यांकन के बाद, 41,605 कैंडिडेट को भर्ती प्रक्रिया के लिए चुना गया। मेरिट और रिजर्वेशन क्राइटेरिया के आधार पर, 6,748 कैंडिडेट को मुख्य लिखित प्रतियोगी परीक्षा में शामिल होने के लिए चुना गया है।

बिहार पुलिस एएसआई रिजल्ट 2026: सिलेक्शन डिटेल्स देखें

आयोग ने उन उम्मीदवारों के रोल नंबर की लिस्ट जारी कर दी है जिन्हें मुख्य लिखित परीक्षा के लिए सफल घोषित किया गया है। उम्मीदवार ध्यान दें कि यह लिस्ट मेरिट लिस्ट अंतिम नहीं है और इसमें सिर्फ अगले चरण के लिए चुने गए लोगों के नाम हैं।

कुल पद : 462

शेड्यूल किए गए कैंडिडेट : 1,03,248

कैंडिडेट शामिल हुए : 42,595

कैंडिडेट का मूल्यांकन किया गया : 41,605

मुख्य लिखित परीक्षा के लिए चुने गए कैंडिडेट : 6,748

कम से कम क्वालिफाइंग मार्क्स : 30%

आयोग ने बताया कि जिन उम्मीदवारों ने कम से कम 30% अंक हासिल किए थे, उन्हें मेरिट और रिजर्वेशन श्रेणी के हिसाब से मुख्य लिखित परीक्षा के लिए चुना गया है। अगले चरण के लिए अंतिम चयन से पहले कुल 15,934 कैंडिडेट को विचार के लिए योग्य पाया गया।

बिहार पुलिस एएसआई रिजल्ट 2026: कैटेगरी-वाइज कट-ऑफ चेक करें

आयोग ने मुख्य लिखित परीक्षा के लिए चयनित उम्मीदवारों के लिए कैटेगरी-वाइज कट-ऑफ भी बताया है। कट-ऑफ कैटेगरी और लैंगिक समूह के हिसाब से अलग-अलग होता है।

अनारक्षित : पुरुषों के लिए 41.2 और महिलाओं के लिए 30.0

आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग : पुरुषों के लिए 36.4

अनुसूचित जाति : पुरुषों के लिए 31.6

अनुसूचित जनजाति : पुरुषों के लिए 30.4

बेहद पिछड़ा वर्ग : पुरुषों के लिए 37.4

पिछड़ा वर्ग : पुरुषों के लिए 38.8

आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग FFW: महिलाओं के लिए 35.2

मेन लिखित परीक्षा के लिए सफल हुए उम्मीदवारों के रोल नंबर के साथ कट-ऑफ की पूरी जानकारी आधिकारिक रिजल्ट डॉक्यूमेंट में उपलब्ध है। जिन उम्मीदवारों ने क्वालिफाई किया है, उन्हें मुख्य लिखित परीक्षा के बारे में और जानकारी के लिए आधिकारिक नोटिफिकेशन देखना चाहिए। आयोग ने कहा है कि मुख्य लिखित परीक्षा से जुड़ी पूरी जानकारी भर्ती विज्ञापन में उपलब्ध है।

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NEET protest case: NEET प्रोटेस्ट मामले में नया मोड़! रूस में होने के बावजूद बिहार के युवक पर FIR दर्ज, यूजर्स ने उठाए सवाल

NEET protest case: बिहार के किशनगंज जिले के एक युवक ने दावा किया है कि नीट पेपर लीक मामले को लेकर पिछले सप्ताह हुए विरोध प्रदर्शनों के संबंध में राज्य पुलिस ने उसके खिलाफ FIR दर्ज की है। जबकि वह पिछले चार महीने से रूस में रह रहा है। किशनगंज निवासी मोहम्मद सदाकत ने रूस से बनाया गया एक वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया है, जो वायरल हो गया है। हालांकि, पीटीआई द्वारा संपर्क किए जाने पर किशनगंज के पुलिस अधीक्षक (SP) हरि मोहन शुक्ला ने न तो इस दावे की पुष्टि की और न ही खंडन किया। उन्होंने कहा कि जिन लोगों को कोई शिकायत है, वे पुलिस से संपर्क कर सकते हैं।

कथित वीडियो में मोहम्मद सदाकत ने अपने खिलाफ दर्ज मामले पर सवाल उठाते हुए कहा कि वह बहादुरगंज में पिछले सप्ताह नीट पेपर लीक के विरोध में हुए प्रदर्शन के दौरान मौजूद नहीं था, क्योंकि वह पिछले चार महीने से रूस में रह रहा है। उसने मामले की निष्पक्ष जांच कराने और FIR से नाम हटाने की मांग की।

क्या बोली बिहार पुलिस?

एसपी शुक्ला ने सदाकत के कथित वीडियो के बारे में विशेष रूप से पूछे जाने पर न्यूज एजेंसी पीटीआई से कहा, “प्रदर्शनों से संबंधित जिन लोगों को कोई शिकायत है, वे उसके निवारण के लिए पुलिस से संपर्क कर सकते हैं।” बता दें कि बिहार सरकार ने सोमवार को घोषणा की थी कि वह नीट पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शनों के सिलसिले में दर्ज सभी मामलों को वापस लेगी और विभिन्न आरोपों में जेल भेजे गए लोगों को रिहा करेगी।

राज्य के गृह विभाग की ओर से जारी अधिसूचना में कहा गया था कि 26 जुलाई को सुबह छह बजे से पहले हुई घटनाओं के संबंध में दर्ज सभी FIR, शिकायतें और कारण बताओ नोटिस वापस लिए जा रहे हैं। विभाग ने यह भी कहा था कि इस संबंध में गिरफ्तार किए गए सभी लोगों को तत्काल रिहा किया जाएगा। पिछले सप्ताह नीट प्रश्नपत्र लीक के विरोध में आयोजित बिहार बंद के दौरान कुल 694 लोगों को हिरासत में लिया गया था। इनमें लगभग आधे नाबालिग थे।

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युवक ने की जांच की मांग

वायरल वीडियो में मोहम्मद सदाकत ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि चूंकि वह चार महीने से रूस में रह रहे हैं, इसलिए उन्हें नीट प्रदर्शन में शामिल बताना गलत है। उन्होंने अधिकारियों से अपील की कि जांच के बाद यदि उनका दावा सही पाया जाए तो उनका नाम FIR से हटाया जाए। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के बाद इस मामले को लेकर कई सवाल उठने लगे हैं।

बिहार सरकार का बड़ा फैसला, NEET आंदोलन से जुड़े छात्रों पर दर्ज केस होंगे वापस

बिहार सरकार ने सोमवार को बड़ा फैसला लेते हुए NEET पेपर लीक मामले को लेकर हुए हालिया प्रदर्शन में शामिल छात्रों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने का आदेश दिया है। साथ ही आंदोलन के दौरान हिरासत में लिए गए सभी लोगों को तुरंत रिहा करने के निर्देश भी दिए हैं। गृह विभाग की ओर से जारी अधिसूचना में कहा गया है कि 26 जुलाई 2026 की शाम 6 बजे तक बिहार में कहीं भी हुए प्रदर्शन में शामिल किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कोई दंडात्मक या बदले की भावना से कार्रवाई नहीं की जाएगी।

सरकार ने यह भी आदेश दिया है कि तय समय सीमा से पहले जिन लोगों को इन मामलों में गिरफ्तार किया गया था या हिरासत में लिया गया था, उन्हें बिना देरी के तुरंत रिहा किया जाए।

बिहार में कई दिनों तक चला छात्रों का प्रदर्शन

यह फैसला 20 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर के पास प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई के बाद लिया गया। इस घटना के बाद बिहार में छात्र संगठनों ने कई दिनों तक लगातार विरोध प्रदर्शन किए। आंदोलन तेज होने पर 25 जुलाई को पूरे राज्य में बिहार बंद भी बुलाया गया। इससे पहले बिहार पुलिस ने बताया कि बंद लागू कराने की कोशिश के दौरान 694 लोगों को हिरासत में लिया गया था। इनमें करीब आधे नाबालिग थे। पुलिस के अनुसार, कई जगहों पर प्रदर्शन हिंसक हो गए थे। इन घटनाओं में 91 पुलिसकर्मी और सरकारी कर्मचारी, दो प्रशासनिक अधिकारी तथा 13 आम नागरिक घायल हुए।

AK-47 से फायरिंग के आरोप पर बढ़ा विवाद

बिहार बंद के दौरान सिवान जिले में एक पुलिसकर्मी द्वारा AK-47 राइफल से फायरिंग किए जाने के आरोप के बाद मामला और गरमा गया। इस घटना को लेकर राजनीतिक विवाद भी तेज हो गया। बिहार पुलिस ने बताया कि सिवान शहर के जेपी चौक पर तैनात कांस्टेबल अभिषेक कुमार को निलंबित कर दिया गया है। पुलिस के मुताबिक, बंद समर्थकों ने सुरक्षाकर्मियों को घेर लिया था। इसके बाद कांस्टेबल ने हवा में चार राउंड फायरिंग की। इस घटना के बाद विपक्ष ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया। विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने सवाल उठाया कि ऐसी स्थिति में AK-47 का इस्तेमाल क्यों किया गया। उन्होंने पूरे मामले पर सरकार से जवाब मांगा और जिम्मेदारी तय करने की मांग की।

तेजस्वी यादव ने बड़े आंदोलन की दी चेतावनी 

विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने पहले ही मांग की थी कि आंदोलन के दौरान हिरासत में लिए गए सभी छात्रों को रिहा किया जाए और उनके खिलाफ दर्ज सभी मुकदमे वापस लिए जाएं। उन्होंने चेतावनी भी दी थी कि अगर सरकार ने ऐसा नहीं किया, तो विपक्ष बड़ा आंदोलन शुरू करेगा। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर किए गए एक पोस्ट में तेजस्वी यादव ने सरकार पर लोकतांत्रिक मूल्यों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि देश में पहली बार प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर AK-47 से फायरिंग की गई। तेजस्वी यादव ने यह भी आरोप लगाया कि छात्र प्रतिनिधियों से सहमति बनने के बावजूद हजारों छात्रों को हिरासत में लिया गया, उनके खिलाफ मामले दर्ज किए गए और उनके परिवारों को परेशान किया गया। उन्होंने कहा कि अगर छात्रों को जल्द रिहा नहीं किया गया, तो एनडीए सरकार को इसका राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ेगा।

Tej Pratap Yadav: तेज प्रताप यादव 14 दिन के लिए भेजे गए पटना के बेऊर जेल, NEET प्रदर्शनकारियों को भड़काने का आरोप

Tej Pratap Yadav: जनशक्ति जनता दल (JJD) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व सीएम लालू यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव को ‘बिहार बंद’ के दौरान हुई तोड़-फोड़ और आगजनी के मामले में गिरफ्तारी के बाद पटना की एक अदालत ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। उन्हें पटना के बेऊर जेल भेज दिया गया है। शनिवार देर रात बिहार पुलिस ने तेज प्रताप यादव को एक मॉल से गिरफ्तार किया था। इसके बाद उन्हें मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया था, जहां से उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।

पुलिस ने तेज प्रताप यादव को नीट पेपर लीक के खिलाफ शनिवार को ‘बिहार बंद’ के दौरान पटना में प्रदर्शनकारियों के साथ शामिल होने पर गिरफ्तार किया। यादव पटना के रामगुलाम चौक पर धरना दे रहे प्रदर्शनकारियों के साथ शामिल हुए, जिसके कुछ देर बाद ही पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेकर वाहन में बैठा लिया। पुलिस द्वारा ले जाए जाने से पहले वाहन का दरवाजा पकड़े यादव ने कहा, “हम छात्रों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं। जरूरत पड़ी तो मैं छात्रों के अधिकारों के लिए अपनी जान देने को भी तैयार हूं।”

यादव ने प्रदर्शन में शामिल होकर बंद को अपना समर्थन दिया था। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) प्रमुख लालू प्रसाद के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव ने प्रदर्शन में शामिल होने से पहले केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की प्रदर्शनकारी छात्रों की मांग दोहराई।

अधिकारियों ने बताया कि नीट पेपर लीक और प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के विरोध में राज्यव्यापी बंद के समर्थन में वामपंथी छात्र संगठनों के सदस्यों ने शनिवार को बिहार के कई जिलों में प्रदर्शन किया। इस दौरान पुलिस के साथ उनकी झड़प हुई।

पुलिस ने बताया कि बंद का राज्यभर में मिलाजुला असर रहा। पटना में पथराव की घटनाएं हुईं। जबकि नालंदा, नवादा, जहानाबाद और रोहतास में बंद का बहुत कम असर देखने को मिला। इस दौरान प्रदर्शनकारियों के साथ झड़प और पथराव में कई पुलिसकर्मी घायल हो गए। जब तेज प्रताप छात्रों के साथ रामगुलाम चौक से डाक बंगला चौराहे की ओर मार्च करने लगे, तो एग्जिबिशन रोड के पास पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया।

वकील ने क्या बताया?

तेज प्रताप यादव के वकील जगन्नाथ सिंह ने कहा, “FIR 26 तारीख को दर्ज की गई थी। जबकि गिरफ्तारी 25 तारीख को शाम 7:30 बजे सिटी सेंटर मॉल से हुई थी। मैंने अभी उनकी रिहाई के लिए जज के पास एक अर्जी दी है। उन्होंने मुझसे सोमवार को जमानत की मांग पर कार्रवाई करने को कहा।”

रविवार सुबह ANI से बातचीत में वकील ने आगे कहा, “मैं सुबह 10:30 बजे नौबतपुर पुलिस स्टेशन पहुंचा। वहां 2 SP थे… मैंने उनसे उनकी गिरफ्तारी का कारण पूछा। उनके परिवार वालों को यह भी नहीं पता कि वे शाम 7:30 बजे से हिरासत में थे… हमें अभी तक FIR की कॉपी भी नहीं मिली है।”

वहीं, तेज प्रताप यादव की गिरफ्तारी पर JJD की बांकीपुर उपचुनाव उम्मीदवार वीणा मानवी ने कहा, “मैं कुछ नहीं कहना चाहती। 13 तारीख से हमें परेशान किया जा रहा है। पहले उन्होंने (पुलिस) मुझे नामांकन के दिन उठाया। फिर आज उन्हें उठा लिया। ऐसा लगता है कि पूरा बांकीपुर जिला अब जनशक्ति जनता दल पर निर्भर है।”

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उन्होंने आगे कहा, “अगर हम थोड़ा विरोध करते हैं तो क्या गलत है? उन्होंने क्या अपराध किया? अगर बच्चों के बीच एक बार राष्ट्रीय ध्वज दिखाया गया, तो क्या वह अपराध था? और अगर आपकी नज़र में यह अपराध था भी, तो उन्हें उसी समय वहां से ले जाना चाहिए था। लेकिन उन्हें तब उठाने का क्या मतलब है जब वे शाम को परिवार के साथ समय बिता रहे थे, खरीदारी करने जा रहे थे? मुझे भी इसके पीछे का कारण नहीं पता…।”

रेलवे गेटमैन से बने DSP! दिन में नौकरी रात में पढ़ाई…पहले ही प्रयास में पास ऐसे पास की BPSC की परीक्षा

बड़ी सफलता पाने के लिए सिर्फ अच्छे हालात नहीं, बल्कि मेहनत और मजबूत इरादों की भी जरूरत होती है। बिहार के समस्तीपुर के रहने वाले राजू कुमार ने यह बात सच साबित कर दिखाई। वह रेलवे क्रॉसिंग पर गेटमैन की नौकरी करते थे। दिनभर ड्यूटी करने के बाद वह घर जाकर पढ़ाई में जुट जाते थे। उनका सपना था कि वह सरकारी अधिकारी बनें, और उन्होंने इस सपने को कभी नहीं छोड़ा। राजू कुमार ने अपने पहले ही प्रयास में 70वीं बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) परीक्षा पास कर ली।

दिन में रेलवे गेटमैन, रात में पढ़ाई

बिहार तक की रिपोर्ट के मुताबिक, 70वीं बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) की परीक्षा में राजू कुमार पूरे राज्य में 72वीं रैंक हासिल की है। उनका चयन पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) के पद पर हुआ। उनकी यह सफलता मेहनत, लगन और आत्मविश्वास की एक शानदार मिसाल बन गई है। डीएसपी बनने से पहले राजू कुमार बिहार के रक्सौल में भारत-नेपाल सीमा के पास रेलवे गेट नंबर 33 पर गेटमैन की नौकरी करते थे। उनकी ड्यूटी रेलवे फाटक की देखभाल करना और हर मौसम में लंबे समय तक काम करना था। नौकरी की व्यस्तता के बावजूद उन्होंने अपनी पढ़ाई नहीं छोड़ी और बीपीएससी परीक्षा की तैयारी लगातार जारी रखी।

राजू कुमार की सफलता की कहानी

राजू का जीवन आसान नहीं रहा। जब वह 10वीं कक्षा में पढ़ रहे थे, तभी महज 12 साल की उम्र में उनके पिता का निधन हो गया। पिता के जाने के बाद परिवार आर्थिक तंगी से जूझने लगा। मुश्किल हालात के बावजूद राजू ने हार नहीं मानी और अपनी पढ़ाई व सपनों को आगे बढ़ाते रहे। मुश्किल समय में राजू कुमार को उनके चचेरे भाई राजेश कुमार सुमन का पूरा साथ मिला। राजेश रोसड़ा में बीएसएस क्लब नाम से एक मुफ्त संस्थान चलाते थे, जहां प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों को मार्गदर्शन दिया जाता था। उनके सहयोग और अपनी कड़ी मेहनत की बदौलत राजू ने पढ़ाई जारी रखी और अपने लक्ष्य पर पूरा ध्यान बनाए रखा।

पढ़ाई के साथ ही राजू ने रेलवे ग्रुप-डी की परीक्षा दी और पहले ही प्रयास में सफलता हासिल कर ली। इसके बाद उनकी नियुक्ति रक्सौल में रेलवे गेटमैन के पद पर हुई। इस नौकरी से उन्हें आर्थिक सहारा मिला, जिससे वह अपनी मां और पूरे परिवार की जिम्मेदारियां भी बेहतर तरीके से निभा सके। रेलवे में नौकरी मिलने के बाद भी राजू कुमार ने अपने सपनों को नहीं छोड़ा। उनका लक्ष्य इससे कहीं बड़ा था। उनकी मेहनत और सीखने की लगन को देखकर दोस्तों ने उन्हें प्रशासनिक सेवा की तैयारी करने की सलाह दी। दोस्तों की बात मानकर राजू ने ग्रेजुएशन में दाखिला लिया और रेलवे की नौकरी के साथ-साथ बीपीएससी परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी।

BPSC में हासिल की 72वीं रैंक

12 घंटे की ड्यूटी के बाद भी वह देर रात तक पढ़ाई करते थे। नौकरी और पढ़ाई के बीच संतुलन बनाना आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने समय का सही इस्तेमाल किया। उनकी कई वर्षों की मेहनत आखिरकार सफल हुई। पहले ही प्रयास में उन्होंने 70वीं बीपीएससी परीक्षा पास की और बिहार पुलिस सेवा में पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) के पद पर चयनित हो गए।

Bharat Tiwari Encounter: भरत भूषण तिवारी के एनकाउंटर के बाद उनके भाई चंदन तिवारी ने कर दिया बड़ा ऐलान, अंतिम संस्कार के बाद करेंगे ये काम

Bharat Tiwari Encounter Case: बिहार के भोजपुर जिले में 28 वर्षीय भरत भूषण तिवारी के कथित पुलिस एनकाउंटर को लेकर परिवार का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। मृतक के भाई चंदन तिवारी ने मीडिया से बातचीत में न्याय की मांग करते हुए लोगों से समर्थन की अपील की है। चंदन तिवारी ने यह भी ऐलान किया है कि वह अपने भाई का अंतिम संस्कार करने के बाद दिल्ली में इंसाफ की मांग करते हुए प्रदर्शन करेंगे। उन्होने कहा कि मेरी गुज़ारिश है कि आप वहां आकर मेरा साथ दें। भरत भूषण तिवारी के एनकाउंटर के बाद बिहार पुलिस सवालों के घेर में है।

चंदन तिवारी ने बुधवार को पत्रकारों से कहा, “मैं इतना कहना चाहता हूं कि अपने भाई का अंतिम संस्कार करने के बाद मैं दिल्ली जाऊंगा। मैं आप सबसे अनुरोध करता हूं कि वहां आकर मेरा समर्थन करें।” उनके इस बयान को परिवार की ओर से न्याय की लड़ाई को राष्ट्रीय स्तर पर ले जाने की तैयारी के रूप में देखा जा रहा है।

परिवार उठा रहा एनकाउंटर पर सवाल

भरत भूषण तिवारी की मौत के बाद परिजन कथित पुलिस कार्रवाई पर सवाल खड़े कर रहे हैं। परिवार का दावा है कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और पूरी घटना की सच्चाई सामने आनी चाहिए। चंदन तिवारी के दिल्ली जाने और समर्थन मांगने के बयान के बाद इस मामले में राजनीतिक और सामाजिक संगठनों की प्रतिक्रिया भी तेज हो सकती है। परिवार न्यायिक जांच और पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र पड़ताल की मांग कर रहा है।

जांच के बाद ही साफ होगी सच्चाई

फिलहाल मामले की जांच और आधिकारिक तथ्यों का इंतजार है। एनकाउंटर को लेकर लगाए जा रहे आरोपों और पुलिस के पक्ष की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। ऐसे में सभी दावों को जांच पूरी होने तक आरोप और प्रत्यारोप के रूप में ही देखा जा रहा है।

भरत के गांव पहुंचे प्रशांत किशोर

इस बीच, जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर बुधवार को भोजपुर जिले में हालिया कथित पुलिस मुठभेड़ में जान गंवाने वाले भरत भूषण तिवारी के पैतृक गांव पहुंचे और उसके परिजनों से मुलाकात की। जन सुराज पार्टी के पदाधिकारियों ने बताया कि भरत भूषण के परिजनों ने न्याय दिलाने में किशोर से मदद की अपील की थी। उन्हें पंचायत बैठक में आमंत्रित किया था।

किशोर ने भोजपुर में पत्रकारों से कहा, “पीड़ित परिवार की मांग बिल्कुल स्पष्ट है। उन्हें न तो पैसा चाहिए, न मुआवजा और न ही सरकारी नौकरी। उन्हें न्याय चाहिए और न्याय तभी मिलेगा जब उस व्यक्ति की हत्या करने वालों तथा ऐसा करने का आदेश देने वालों के खिलाफ कार्रवाई होगी।”

उन्होंने मांग की है कि न्यायिक जांच किसी रिटायर जज के बजाय कार्यरत जज की निगरानी में कराई जाए और जांच तीन महीने के भीतर पूरी की जाए। किशोर ने कहा कि न्यायिक जांच का दायरा केवल जिला पुलिस प्रशासन तक सीमित नहीं होना चाहिए। बल्कि बिहार के गृह विभाग, विशेष कार्य बल (एसटीएफ), पुलिस महानिदेशक और राज्य के गृह मंत्री की भूमिका की भी जांच की जानी चाहिए।

एनकाउंटर के बाद बवाल

भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र में बिलौती गांव के भरत भूषण तिवारी की पिछले सप्ताह पुलिस के साथ हुई मुठभेड़ में मौत हो गई थी। इस घटना को लेकर राज्य में राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। विपक्षी दलों ने इसे कथित रूप से फर्जी मुठभेड़ बताते हुए पुलिस पर न्यायेतर हत्या का आरोप लगाया है। जन सुराज पार्टी ने रविवार को पटना में मोमबत्ती मार्च निकालकर तिवारी के लिए न्याय की मांग की थी।

मुठभेड़ के बाद अधिकारियों ने कहा था कि तिवारी लगातार पुलिस पर गोलीबारी कर रहा था, जिसके जवाब में आत्मरक्षा में की गई जवाबी कार्रवाई में उसके पैर में गोली लगी थी। हालांकि, सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में कथित तौर पर तिवारी एनकाउंट से पहले हथियार डालते हुए नजर आ रहा है।

तिवारी की मां की शिकायत के आधार पर इस मामले में घटना से जुड़े कई पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। प्रशांत किशोर ने चेतावनी दी है कि यदि 15 दिनों के भीतर उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो मुख्यमंत्री आवास का घेराव किया जाएगा।

भोजपुर जिले के बिलौती गांव में आयोजित ‘महापंचायत’ को संबोधित करते हुए किशोर ने कहा कि मामले में पटना में बैठे शीर्ष अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो वह लोगों के साथ पटना जाकर मुख्यमंत्री से मुलाकात का प्रयास करेंगे और मुलाकात नहीं होने पर उनके आवास का घेराव करेंगे।