विजय के ‘पीएम दांव’ पर सियासत गर्माई : DMK और कांग्रेस का तंज, क्या 2029 में विजय बनेंगे प्रधानमंत्री?

विजय के 'पीएम दांव' पर सियासत गर्माई : DMK और कांग्रेस का तंज, क्या 2029 में विजय बनेंगे प्रधानमंत्री?

CM Vijay Thalapathy

TVK Vijay Prime Minister Demand: तमिलनाडु की राजनीति में हाल में हुए बड़े बदलाव के बाद अब एक नया सियासी भूचाल खड़ा हो गया है। अभिनेता से नेता बने सी. जोसेफ विजय (Thalapathy Vijay) की पार्टी तमिलगा वेत्री कज़गम (TVK) ने राज्य विधानसभा चुनाव में इतिहास रचते हुए 108 विधानसभा सीटों पर जीत दर्ज की और अकेले दम पर 35% वोट शेयर हासिल किया। लगभग 60 सालों से चले आ रहे डीएमके (DMK) और एआईएडीएमके (AIADMK) के बारी-बारी के शासन को खत्म कर विजय तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बन चुके हैं।

 

35% वोट शेयर का यह आंकड़ा तमिलनाडु के पूर्व लोकप्रिय मुख्यमंत्री एमजी रामचंद्रन (MGR) को मिले वोट शेयर से भी 2 प्रतिशत अधिक है। बिना किसी गठबंधन के अकेले चुनाव लड़कर इतना बड़ा जनादेश हासिल करने का दावा करते हुए टीवीके समर्थक अब एक कदम आगे बढ़ गए हैं और विजय को 'भारत का अगला प्रधानमंत्री' प्रोजेक्ट करने लगे हैं। ALSO READ: परिसीमन पर तमिलनाडु CM विजय ने PM मोदी को लिखा पत्र, लोकसभा सीटों की संख्या 543 पर स्थायी रूप से तय करने की मांग

विधानसभा में उठा 'दक्षिण का पीएम' का मुद्दा

हाल ही में तमिलनाडु विधानसभा के सत्र के दौरान टीवीके के वरिष्ठ नेता और मंत्री आधव अर्जुन (Aadhav Arjuna) ने यह कहकर नया विवाद छेड़ दिया कि 'दक्षिण भारत के किसी तमिल नेता को देश का अगला प्रधानमंत्री बनना चाहिए'।

 

इसके बाद से पूरे तमिलनाडु में टीवीके कार्यकर्ताओं और विजय के प्रशंसकों ने जगह-जगह पोस्टर्स और होर्डिंग्स लगा दिए हैं, जिनमें विजय को 2029 के लोकसभा चुनाव के लिए प्रधानमंत्री पद के चेहरे के रूप में पेश किया जा रहा है। सोशल मीडिया पर भी इस बहस से जुड़े रील्स और वीडियो तेज़ी से वायरल हो रहे हैं।

कांग्रेस भड़की : 'दिल्ली में राहुल गांधी ही पीएम चेहरा'

टीवीके के इस नए दांव ने उनकी सहयोगी कांग्रेस के प्रदेश नेतृत्व को असहज और नाराज कर दिया है।

 

कांग्रेस नेताओं का रुख : तमिलनाडु कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने स्पष्ट किया है कि भले ही विजय तमिलनाडु में एक बड़ा राजनीतिक चेहरा हैं, लेकिन राष्ट्रीय स्तर और दिल्ली की राजनीति में राहुल गांधी ही विपक्ष के प्रधानमंत्री पद के एकमात्र उम्मीदवार हैं।

 

कांग्रेस का कहना है कि 2029 के आम चुनाव में राहुल गांधी के नेतृत्व में ही लड़ा जाएगा, इसलिए टीवीके कार्यकर्ताओं का विजय को पीएम पद का दावेदार बताना जल्दबाजी और अनुचित है। विजय के मंत्रिमंडल में शामिल 2 विधायकों ने भी इसका खुला विरोध किया है और मंत्री पद से इस्तीफे की धमकी भी दी है। 

 

दूसरी ओर, राज्य के अन्य विपक्षी दलों ने विजय को प्रधानमंत्री बनाने की बात को 'एक बड़ा मज़ाक' करार देते हुए खारिज कर दिया है और कहा है कि ऐसा होने की कोई व्यावहारिक संभावना नहीं है। ALSO READ: तमिलनाडु CM विजय के यू-टर्न पर भड़के CJP नेता अभिजीत दीपके, कहा डर लग रहा है तो सुधारो व्यवस्था

DMK प्रवक्ता टीकेएस एलंगोवन का तीखा तंज

इस पूरे राजनीतिक घमासान के बीच डीएमके के मुख्य प्रवक्ता और कम्यूनिकेशन टीम के अध्यक्ष टीकेएस एलंगोवन (TKS Elangovan) ने टीवीके और विजय पर जोरदार कटाक्ष किया है।

 

“टीवीके को तमिलनाडु में स्पष्ट बहुमत (118 सीटें) खुद नहीं मिला था। विजय केवल कांग्रेस और वीसीके (VCK) जैसी पार्टियों के समर्थन के बल पर सरकार चला रहे हैं। जब राज्य में ही उनकी सरकार दूसरों के बैसाखियों पर टिकी है, तो वे पूरे देश के प्रधानमंत्री कैसे बन सकते हैं?”

 

उन्होंने आगे तंज कसते हुए कहा- “एक दौर था जब हमने मांग की थी कि तमिलनाडु को एक अलग देश बनाया जाए। अगर तमिलनाडु कभी एक अलग देश बनता है, तो शायद विजय वहां के प्रधानमंत्री जरूर बन सकते हैं!”

2029 के लिए क्या हैं सियासी मायने?

तमिलनाडु में सत्ता में आते ही टीवीके द्वारा राष्ट्रीय राजनीति में अपनी महत्वाकांक्षा जाहिर करना इस बात का संकेत है कि पार्टी खुद को सिर्फ राज्य तक सीमित नहीं रखना चाहती। हालांकि, कांग्रेस के साथ उभरते मतभेद और डीएमके का हमला यह दर्शाता है कि विजय के लिए राष्ट्रीय स्तर पर अपनी धाक जमाना और क्षेत्रीय सहयोगियों को साधे रखना एक बड़ी चुनौती साबित होने वाला है।

श्रीकृष्‍ण जन्माष्टमी विशेष: जब जीवन हारने लगे, तब श्री कृष्ण का जीवन पढ़िए

श्रीकृष्‍ण जन्माष्टमी विशेष: जब जीवन हारने लगे, तब श्री कृष्ण का जीवन पढ़िए

Shri Krishna Janmashtami Traditions

आज मनुष्य के पास पहले से अधिक साधन हैं, लेकिन शायद पहले से कम धैर्य है। उसके पास संवाद के लिए अनेक माध्यम हैं, फिर भी भीतर का अकेलापन बढ़ता जा रहा है। छोटी-सी असफलता उसे भीतर तक हिला देती है, संबंधों में आया मामूली तनाव निराश कर देता है और जीवन की कठिन परिस्थितियों के लिए 'डिप्रेशन' जैसे शब्द सहजता से बातचीत का हिस्सा बन गए हैं।

 

ऐसे समय में प्रश्न यह नहीं है कि कठिनाइयां क्यों आती हैं; प्रश्न यह है कि कठिनाइयों के बीच मनुष्य स्वयं को कैसे संभाले? इस प्रश्न का उत्तर हजारों वर्ष पूर्व श्रीकृष्ण के जीवन में छिपा है। यदि कृष्ण को केवल मंदिर में विराजमान भगवान के रूप में देखा जाए, तो हम उनके व्यक्तित्व का एक अत्यंत सीमित भाग ही देख पाएंगे। कृष्ण को समझने के लिए उनके जीवन को देखना होगा—एक ऐसा जीवन जिसमें जन्म से लेकर अंतिम समय तक परिस्थितियां कभी अनुकूल नहीं थीं, लेकिन उन्होंने कभी परिस्थितियों को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया।

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1. संघर्षों से घिरा जन्म और बाल्यकाल का आनंद

कारागार में जन्म: उनका जन्म किसी उत्सव के बीच नहीं, बल्कि कारागार में हुआ। माता-पिता के जीवित रहते हुए भी जन्म लेते ही उनसे दूर होना पड़ा। आधी रात को पिता वसुदेव उन्हें लेकर यमुना पार कर गोकुल पहुंचाते हैं। जिस उम्र में बालक को माता-पिता का आश्रय चाहिए, उस उम्र में कृष्ण का जीवन सुरक्षा और संघर्ष की कहानी बन चुका था।

 

संकटों के बीच मुस्कान: गोकुल में उन्हें यशोदा का वात्सल्य, नंदबाबा का स्नेह और मित्रों का साथ मिला। किंतु वहां भी पूतना से लेकर कालिया नाग तक अनेक संकट सामने आए। बाल-कान्हा हर संकट के बाद मुस्कुराते दिखाई देते हैं। यह मुस्कान सिखाती है कि जीवन में संकट का आना हमारे नियंत्रण में नहीं है, लेकिन संकट के समक्ष हमारी प्रतिक्रिया हमारे हाथ में है।

 

दायित्वों के बीच जीवन का रस: श्रीकृष्ण के बाल्यकाल को प्रायः माखन, बांसुरी, गोपियों और रास की कथाओं तक सीमित कर दिया जाता है। वास्तव में ये प्रसंग सिखाते हैं कि गंभीर जिम्मेदारियों के बीच भी जीवन से आनंद और सहजता समाप्त नहीं होनी चाहिए।

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2. त्याग, विरक्ति और नए दायित्वों की ओर कदम

संसार को पीछे छोड़ना: एक दिन कृष्ण गोकुल छोड़ देते हैं। जिस भूमि ने बचपन दिया, जिन मित्रों के साथ खेले, जिससे उनका भावनात्मक संसार बसा था—सब पीछे छूट गया।

 

समय की मांग स्वीकारना: आज हम नौकरी या शिक्षा के लिए शहर छोड़ते हैं तो विचलित हो जाते हैं। कृष्ण ने तो अपने बचपन का संपूर्ण संसार ही छोड़ दिया, लेकिन वे पीछे मुड़कर रुके नहीं। वे आगे बढ़े क्योंकि समय उनसे नई भूमिका की मांग कर रहा था। मथुरा में कंस का अंत किया और आगे चलकर द्वारका की स्थापना की। राज्य, समाज, राजनीति और सुरक्षा के अनेक उत्तरदायित्व उनके सामने आए।

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3. कुरुक्षेत्र का संदेश: कर्म की गरिमा और आत्मनिर्भरता

अर्जुन का संशय और भगवद्गीता का सार: कुरुक्षेत्र में अर्जुन का संकट आज के मनुष्य के संकट जैसा ही था। उसके सामने निर्णय लेने की चुनौती थी, लेकिन भावनाएं और संबंध आड़े आ रहे थे। जब अर्जुन का गांडीव छूट गया, तब श्रीकृष्ण ने उसे जीवन को देखने की नई दृष्टि दी—मनुष्य का अधिकार केवल अपने कर्म पर है, उसके परिणाम पर नहीं। यदि परिणाम की चिंता में कर्म ही छूट जाए, तो जीवन का उद्देश्य कमजोर पड़ जाता है।

 

कर्म की गरिमा: स्वयं राजा होते हुए भी कृष्ण शस्त्र उठाने के बजाय अर्जुन के सारथी बने। आज के समाज में जहां पद के आधार पर काम को छोटा-बड़ा समझा जाता है, कृष्ण बताते हैं कि काम की गरिमा पद में नहीं, उसके उद्देश्य और निष्ठा में होती है।

 

सक्षम बनाने का दर्शन: कृष्ण चाहते तो अपनी शक्ति से युद्ध का परिणाम क्षण भर में बदल सकते थे, लेकिन उन्होंने मनुष्य को उसकी जिम्मेदारी स्वयं निभाने दी। वे मनुष्य को आश्रित नहीं, बल्कि सक्षम बनाते हैं।

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4. विपाद के बीच संतुलन और आधुनिक युग की प्रासंगिकता

जीवन के प्रति संतुलन: कृष्ण के जीवन में केवल विजय नहीं थी। उन्होंने वियोग, मृत्यु, युद्ध, प्रियजनों को खोना और अंततः अपने ही वंश का विनाश देखा। इसके बावजूद उन्होंने जीवन का संतुलन कभी नहीं खोया।

युवाओं के लिए प्रेरणा: आज का युवा असफलता, नौकरी न मिलने या संबंध टूटने पर बिखर जाता है। ऐसे समय में कृष्ण का जीवन कहता है:

 

  • तुम्हारी एक असफलता तुम्हारा पूरा जीवन नहीं है।
  • एक परिस्थिति तुम्हारी संपूर्ण पहचान नहीं है।
  • दुःख आएगा, लेकिन दुःख ही अंतिम सत्य नहीं है।
  • वियोग होगा, लेकिन जीवन वहीं समाप्त नहीं होता।

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5. जीवन को साधने की कला

श्रीकृष्ण जीवन से पलायन का दर्शन नहीं देते; वे जीवन के बीच खड़े होकर जीवन को साधने की कला सिखाते हैं। जब मन भ्रमित हो, विकल्प बहुत हों और निर्णय कठिन हो—तब श्रीकृष्ण के विचारों को पढ़िए। जब परिणाम की चिंता कर्म से बड़ी हो जाए या असफलता आत्मविश्वास कम करने लगे—तब कृष्ण के जीवन को देखिए।

 

वे केवल गोकुल के नटखट कान्हा, द्वारका के राजा या कुरुक्षेत्र के सारथी नहीं हैं; वे योगेश्वर श्रीकृष्ण हैं। वे आज भी संदेश देते हैं कि परिस्थिति चाहे कितनी भी विपरीत क्यों न हो, अपने कर्म, विवेक और धर्म का मार्ग कभी मत छोड़ो। जीवन की सबसे बड़ी विजय कठिनाइयों का समाप्त हो जाना नहीं, बल्कि कठिनाइयों के बीच स्वयं को संभाले रखना है।

 

जय श्री कृष्ण!

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अक्षय ओबेरॉय-हेली दारूवाला की केमिस्ट्री ने जीता दिल, ‘लव लॉटरी’ का गाना ‘नजर लग जाएगी’ हुआ रिलीज

अक्षय ओबेरॉय और हेली दारूवाला स्टारर कोर्टरूम सस्पेंस थ्रिलर फिल्म ‘लव लॉटरी’ का रोमांटिक गाना ‘नजर लग जाएगी’ रिलीज हो गया है। जावेद अली और राधिका भिड़े की आवाज में सजे इस खूबसूरत गाने का म्यीजिक वरुण मिश्रा और अरविंद पांडे ने तैयार किया है, जबकि इसके बोल अरविंद पांडे ने लिखे हैं। गाने में अक्षय ओबेरॉय और हेली दारूवाला के बीच खूबसूरत केमिस्ट्री देखने को मिलती है।

उत्तराखंड की खूबसूरत लोकेशंस पर फिल्माया गया ‘नजर लग जाएगी’ कहानी के किरदारों के रिश्ते के इमोशनल और रोमांटिक पहलू को सामने लाता है। पहाड़ों की खूबसूरती, शांत माहौल और प्रकृति के बीच फिल्माए गए रोमांटिक पल अक्षय और हेली की ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री को और निखारते हैं। दोनों की मौजूदगी गाने को बिना किसी बनावटीपन के एक स्वाभाविक और खूबसूरत एहसास देती है। गाने की सिनेमैटोग्राफी नवीन वी. मिश्रा ने की है, जबकि इसकी कोरियोग्राफी देवेंद्र चतुर्वेदी ‘डेविड’ ने की है।

गाने और फ़िल्म को लेकर निर्देशक एवं संगीत निर्देशक अरविंद पांडे ने कहा- “नजर लग जाएगी के जरिए हम अपने किरदारों के रिश्ते के इमोशनल और रोमांटिक पहलू को बहुत सहज तरीके से दिखाना चाहते थे। उत्तराखंड की खूबसूरती ने हमें इसके लिए बिल्कुल सही माहौल दिया।

फ़िल्म के निर्माता कुलदीप भार्गव कहते हैं कि लव लॉटरी का विषय नाजुक है और हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी थी कि इसे संतुलन और समझदारी के साथ दर्शकों के सामने रखा जाए। फिल्म इस बात को तलाशती है कि प्यार, भरोसा और शादी का रिश्ता कभी-कभी किस तरह एक अप्रत्याशित मोड़ ले सकता है।

जावेद अली और राधिका भिड़े की आवाज इस रोमांटिक गाना के एहसास को और गहराई देती है। वरुण मिश्रा और अरविंद पांडे के संगीत तथा अरविंद पांडे के बोलों के साथ तैयार यह गाना किरदारों के बीच की नज़दीकियों और उनके रिश्ते की भावनात्मक परत को सामने लाता है।

सिनेमा गंज फिल्म्स के बैनर तले कुलदीप भार्गव ‘तुषार’ द्वारा निर्मित ‘लव लॉटरी’ का निर्देशन अरविंद पांडे ने किया है और इसकी कहानी व लेखन अंकुर खत्री का है। फ़िल्म में अक्षय ओबेरॉय, हेली दारूवाला और कबीर दुहन सिंह प्रमुख भूमिकाओं में हैं, जबकि विजयांत कोहली, संतोष शुक्ला, हेमंत पांडे, इंदिरा कृष्णन, अग्नि अय्यारी, विक्रम शर्मा, कुमार सौरभ, अश्वंत लोधी और अर्शदीप संधू सहित कई कलाकार महत्वपूर्ण भूमिकाओं में नजर आएंगे।

NCR के बाहर ‘रियल एस्टेट बूम’: मेरठ से नौगांव तक क्यों आसमान छू रही हैं जमीन-मकान की कीमतें? जानिए पूरी इनसाइड स्टोरी

NCR Satellite Towns Real Estate Boom: मेरठ के रहने वाले प्रदीप चौधरी जब करीब ढाई साल पहले अपने शहर की एक पॉश कॉलोनी में 150 वर्ग गज के घर की जानकारी लेने गए थे, तब उसकी कीमत लगभग ₹1.1 करोड़ थी। हाल ही में उन्होंने वही प्रॉपर्टी ₹2.5 करोड़ में खरीदी।

प्रदीप बताते हैं, ‘अगर मैं ऐसा ही घर नोएडा में खरीदता तो ₹4-5 करोड़ लगते, और गुरुग्राम में तो रेट इससे भी कहीं ज्यादा हैं। मैं दिल्ली में नौकरी करता हूं, लेकिन दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे और नमो भारत (RRTS) आने के बाद अब मेरठ से दिल्ली पहुंचने में सिर्फ 50 मिनट लगते हैं। यह सफर नोएडा या गुरुग्राम के कुछ इलाकों से भी ज्यादा आसान और तेज है। फिर मैं करोड़ों रुपये ज्यादा क्यों खर्च करूं?’

प्रदीप की यह कहानी अकेले उनकी नहीं है। यह दिल्ली-एनसीआर के रियल एस्टेट मार्केट में आ रहे एक ऐतिहासिक बदलाव की बानगी है। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे, नमो भारत (RRTS), गंगा एक्सप्रेसवे और दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे जैसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स ने दूरी और समय को इतना घटा दिया है कि लोग अब नोएडा, दिल्ली या गुरुग्राम जाने के बजाय मेरठ और नौगांव जैसे उभरते शहरों में घर और जमीन खरीदना ज्यादा पसंद कर रहे हैं।

मेरठ का रियल एस्टेट मार्केट: सिर्फ 2-3 साल में दोगुनी हुईं कीमतें

मेरठ इस इंफ्रास्ट्रक्चर बूम का सबसे बड़ा उदाहरण बनकर उभरा है। नमो भारत/RRTS और एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी ने मेरठ को दिल्ली-एनसीआर का एक प्रैक्टिकल ‘कम्यूटर हब’ बना दिया है।

रियल एस्टेट डेवलपर्स एसोसिएशन ऑफ मेरठ (REDAM) के अध्यक्ष अशोक गर्ग के मुताबिक, ‘पहले दिल्ली से दूरी और जाम मेरठ की सबसे बड़ी कमजोरी थी, लेकिन अब इंफ्रास्ट्रक्चर ने बाजी पलट दी है। पिछले 2 से 3 सालों में मेरठ में जमीन के रेट 100 फीसदी तक बढ़ चुके हैं। दिल्ली-नोएडा की तुलना में मेरठ में रहने का खर्च बहुत कम है, इसलिए लोग यहां रहकर दिल्ली में आराम से नौकरी कर रहे हैं।’

सरकार मोदीपुरम के पास एक विशेष विकास क्षेत्र विकसित कर रही है, जिससे यहां कमर्शियल और बिजनेस एक्टिविटीज को और बड़ा बूस्ट मिलेगा। मेरठ के पॉश इलाके साकेत में ढाई साल पहले जमीन ₹80,000 से ₹90,000 प्रति वर्ग गज थी, जो आज बढ़कर ₹2 लाख से ₹2.25 लाख प्रति वर्ग गज तक पहुंच गई है।

दिल्ली-NCR के मुकाबले क्यों लोगों की पसंद बन रहे हैं मेरठ जैसे शहर?

पहले जहां लोग नौकरी के सिलसिले में दिल्ली, नोएडा या गुरुग्राम में बसने का सपना देखते थे, वहीं अब महंगी प्रॉपर्टी और रोज के ट्रैफिक जाम के कारण वे अपने फैसले पर पुनर्विचार कर रहे हैं। दरअसल, मेरठ जैसे उभरते सैटेलाइट शहरों में ₹1.5 से ₹2.5 करोड़ में बड़ा विला या स्वतंत्र मकान मिल जाता है, जबकि नोएडा-गुरुग्राम में छोटे फ्लैट्स के लिए भी ₹4 से ₹6 करोड़ तक चुकाने पड़ते हैं।

इसके अलावा, एक्सप्रेसवे और नमो भारत (RRTS) की बदौलत अब मेरठ से दिल्ली का सफर ट्रैफिक जाम से बचकर महज 50 मिनट से 1 घंटे में पूरा हो जाता है, जो नोएडा या गुरुग्राम के कई इलाकों से भी तेज है। कम रहने का खर्च और बेहतर स्पेस मिलने की वजह से ही लोग अब इन नए शहरों का रुख कर रहे हैं।

नौगांव और बड़ौदा मेव: फार्महाउस और रिजॉर्ट्स का बूम

अगर मेरठ रोज की भागदौड़ और नौकरीपेशा लोगों की पहली पसंद बन रहा है, तो राजस्थान के अलवर क्षेत्र में स्थित नौगांव और बड़ौदा मेव वीकेंड होम्स और फार्महाउस के लिए हॉटस्पॉट बन चुके हैं।

दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे ने इन इलाकों को गुरुग्राम और दिल्ली के बेहद करीब ला खड़ा किया है। स्थानीय डीलरों के अनुसार, दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे बनने के बाद नौगांव और बड़ौदा मेव के अर्बन लोकल बॉडी इलाकों में जमीनों के दाम 30 से 40 फीसदी तक चढ़ चुके हैं।

राम रतन ग्रुप के चेयरमैन विजय राम रतन बताते हैं कि एक्सप्रेसवे ने दिल्ली-गुरुग्राम के लोगों के लिए वीकेंड ट्रैवल को बहुत आसान बना दिया है। नौगांव के आसपास होटल, फार्महाउस रिजॉर्ट्स और ग्लैंपिंग की बुकिंग्स में भारी उछाल आया है।

डेवलपर्स की नई रणनीति: हाइवे किनारे होर्डिंग्स की भरमार

दिल्ली-एनसीआर के बड़े बिल्डर्स अब पारंपरिक हब्स को छोड़कर इन नए रूटों का रुख कर रहे हैं। डेवलपर्स को इन नए इलाकों में बड़े भूखंड काफी सस्ते दामों पर मिल रहे हैं। दिल्ली-देहरादून कॉरिडोर के पास बागपत और दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के पास नौगांव में बड़े बिल्डर्स प्लॉट्स, लग्जरी विला और गेटेड फार्म कम्युनिटीज ला रहे हैं।हाइवे किनारे लगे बड़े-बड़े बिलबोर्ड्स इस बात का सबूत हैं कि अब दूरी किलोमीटर से नहीं, बल्कि ‘मिनटों’ से नापी जा रही है।

कनेक्टिविटी ने पलट दिया पूरा गेम?

मेरठ और नौगांव भले ही दो अलग-अलग तरह के रियल एस्टेट मार्केट हों जहां मेरठ रोजाना दिल्ली आकर नौकरी करने वालों का नया ठिकाना बन रहा है, वहीं नौगांव वीकेंड गेटवे और लाइफस्टाइल फार्महाउस के रूप में उभर रहा है। लेकिन दोनों को जोड़ने वाली सबसे बड़ी कड़ी है एक्सप्रेसवे और हाई-स्पीड रेल कनेक्टिविटी। बेहतर कनेक्टिविटी ने यह साबित कर दिया है कि अगर सफर आसान हो, तो महंगे एनसीआर हब्स में करोड़ों रुपये फंसाने की बिल्कुल जरूरत नहीं है।

Lust Stories 3: नेटफ्लिक्स इंडिया की ‘लस्ट स्टोरीज’ की होने जा रही वापसी, प्रीमियर डेट लॉक की गई

Lust Stories 3: ‘लस्ट स्टोरीज’ अपने तीसरे चैप्टर के साथ वापसी कर रही है। बॉलीवुड हंगामा को खास तौर पर पता चला है कि ‘लस्ट स्टोरीज़ 3’ का प्रीमियर 18 सितंबर को नेटफ्लिक्स इंडिया पर होगा। इंटरनेशनल एमी के लिए नॉमिनेट हुई इस एंथोलॉजी सीरीज़ के नए सीजन को विक्रमaditya मोटवाने, किरण राव, शकुन बत्रा और विशाल भारद्वाज ने डायरेक्ट किया है।

चार नई, छोटी लेकिन भावनाओं से भरपूर शॉर्ट फ़िल्मों के ज़रिए, यह एंथोलॉजी एक बार फिर लस्ट, प्यार, रिश्तों और दबी हुई इच्छाओं को दिखाएगी। उम्मीद है कि इसका ट्रेलर सितंबर के पहले हफ़्ते में रिलीज़ किया जाएगा। ‘लस्ट स्टोरीज़ 3’ में बॉलीवुड के कई बड़े कलाकार शामिल हैं।

विक्रमादित्य मोटवाने की फ़िल्म में राधिका आप्टे, कोंकणा सेन शर्मा, विजय वर्मा और अभिषेक बनर्जी हैं, जबकि अली फ़ज़ल और राधिका मदान शकुन बत्रा के सेगमेंट में नज़र आएंगे। असल ज़िंदगी की जोड़ी सिद्धार्थ और अदिति राव हैदरी विशाल भारद्वाज की कहानी में मुख्य भूमिका में हैं, वहीं किरण राव की फ़िल्म में गुरफ़तेह पीरज़ादा और नए कलाकार सना थम्पी मुख्य भूमिकाओं में हैं।

अलग-अलग और सोचने पर मजबूर करने वाली कहानियों के ज़रिए महिलाओं की कामुकता को बेबाकी से दिखाने के लिए सराही गई ‘लस्ट स्टोरीज़ 3’, नेटफ़्लिक्स इंडिया की पहली ऐसी एंथोलॉजी होगी जिसके तीन सीजन होंगे। नया सीज़न intimacy के सभी विरोधाभासों – जैसे शॉफ्टनेस, असहजता, सबर – को भी दिखाने का वादा करता है।

फ़रवरी 2026 में इस एंथोलॉजी की घोषणा करते हुए मेकर्स ने कहा था, “हर फ़िल्म इंसानी जुड़ाव को एक अलग नज़रिए से देखती है और दिखाती है कि कैसे इच्छा और रिश्ते हालात, खामोशी और कमज़ोरी (vulnerability) से बनते हैं। ये कहानियाँ मिलकर प्यार और चाहत के बारे में बातचीत को आगे बढ़ाती हैं और दर्शकों को जुड़ाव के मायने समझने का एक ईमानदार और आज के दौर का नज़रिया देती हैं।”

Gen Z के मुद्दों पर विपक्ष को जवाब देंगे पीएम मोदी: 11 साल बाद वडोदरा में युवाओं के बीच भरेंगे हुंकार

Gen Z के मुद्दों पर विपक्ष को जवाब देंगे पीएम मोदी: 11 साल बाद वडोदरा में युवाओं के बीच भरेंगे हुंकार

PM Modi Gujarat Visit

विदेश दौरे से लौटने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात के दौरे पर रहेंगे। 2014 के लोकसभा चुनाव में अपना संसदीय क्षेत्र रहे वडोदरा से पीएम मोदी Gen Z और युवाओं के मुद्दों पर विपक्ष को कड़ा जवाब देंगे। दिल्ली में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की अध्यक्षता में हुई बैठक के बाद इस कार्यक्रम की तैयारियां शुरू कर दी गई थीं। NEET पेपर लीक और फिर CJP के नेतृत्व वाले Gen Z विरोध प्रदर्शनों के बाद, पीएम मोदी व्यक्तिगत रूप से किसी विश्वविद्यालय में पहुंचकर छात्रों और युवाओं से सीधा संवाद करेंगे। 

 

MS यूनिवर्सिटी पवेलियन में आयोजित होगा विशेष कार्यक्रम

पीएम मोदी के मुख्य कार्यक्रम के लिए महाराजा सयाजीराव (MS) यूनिवर्सिटी पवेलियन को अंतिम रूप दिया गया है। गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी और बीजेपी युवा मोर्चा के अध्यक्ष हेमांग जोशी ने कार्यक्रम स्थल का निरीक्षण किया। 8 सितंबर को होने वाले इस विशेष कार्यक्रम में 6,000 से अधिक युवाओं और छात्रों के शामिल होने की उम्मीद है। उल्लेखनीय है कि 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद भी पीएम मोदी ने अपना पहला रोड शो वडोदरा में ही आयोजित किया था। 

 

वडोदरा और पीएम मोदी का खास और अटूट रिश्ता

 

संसदीय करियर में पीएम मोदी को सबसे ज्यादा प्यार और वोट शेयर वडोदरा से ही मिला है। 2014 के चुनाव में उन्हें 8,45,464 वोट मिले थे, जो कुल मतदान का 72.75% था। 2024 के चुनाव में वडोदरा सीट से बीजेपी के नए प्रत्याशी हेमांग जोशी को कुल 8,73,189 वोट मिले, जो कुल वोट का 72.04% है। पीएम मोदी ने 2014 में प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने से पहले अपनी आखिरी विजय रैली भी वडोदरा में ही निकाली थी। RSS प्रचारक और बीजेपी संगठनकर्ता के रूप में वे यहां लंबा समय बिता चुके हैं। 

 

पीएम मोदी के इस दौरे का विशेष राजनीतिक महत्व

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने जन्मदिन से ठीक 10 दिन पहले वडोदरा का दौरा कर रहे हैं। 17 सितंबर को पीएम मोदी का जन्मदिन है, जब वे 76 वर्ष के हो जाएंगे। इसके अलावा, 7 अक्टूबर को वे संवैधानिक पद पर अपने 25 वर्ष पूरे करने जा रहे हैं। इन महत्वपूर्ण उपलब्धियों और आगामी राजनीतिक घटनाक्रमों से पहले युवाओं के बीच जाकर संवाद करना बीजेपी की विशेष रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
 

कड़ी सुरक्षा के बीच कार्यक्रम का होगा लाइव प्रसारण

पीएम मोदी के कार्यक्रम के लिए विश्वविद्यालय पवेलियन में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। यद्यपि इस कार्यक्रम में सीमित संख्या में छात्र ही भाग लेंगे, लेकिन इस पूरे कार्यक्रम का देशभर में लाइव प्रसारण उपलब्ध रहेगा ताकि पीएम मोदी का संदेश अधिक से अधिक युवाओं तक पहुंच सके। 

Asia Cup: लचर बल्लेबाजी के बाद भी भारत ने थाईलैंड को 94 रनों से रौंदा

ओपनर शेफाली वर्मा (64) के शानदार अर्धशतक और नंदनी शर्मा तथा दीप्ति शर्मा (तीन-तीन विकेट) की अगुवाई में गेंदबाजों के दमदार प्रदर्शन से भारत ने महिला एशिया कप में रविवार को ग्रुप बी मैच में थाईलैंड को 94 रन से पीटकर विजयी शुरुआत की।

भारत ने निर्धारित 20 ओवर में नौ विकेट पर 159 रन का सम्मानजनक स्कोर बनाने के बाद थाईलैंड को 16.1 ओवर में 65 रन पर निपटा दिया। थाईलैंड की तरफ से नान्नापात कोंचारोएंकाई ने सर्वाधिक 41 रन बनाये और दहाई की संख्या में पहुंचने वाली एकमात्र बल्लेबाज रहीं। नंदनी शर्मा ने 18 रन पर तीन विकेट, श्रीचरणी ने 10 रन पर दो विकेट और दीप्ति शर्मा ने एक रन पर तीन विकेट लिए। क्रांति गौड़ को 26 रन पर एक विकेट मिला।

शेफ़ाली के आक्रामक अर्धशतक से एक समय लग रहा था कि भारत 200 के टोटल को भी छू सकता है लेकिन एक समय भारत के ऊपर ऑलआउट होने का ख़तरा मंडराने लगा लेकिन क्रांति गौड़ और श्री चरणी ने मिलकर यह नौबत नहीं आने दी और भारत के स्कोर को 150 के पार ले गईं। थाईलैंड ने अच्छी फ़ील्डिंग की, कुछ अच्छे कैच लपकने के साथ स्मृति मंधाना और दीप्ति शर्मा के रूप में अहम रन आउट भी किए। सुलीपॉर्न लाओमी ने थाईलैंड की ओर से सर्वाधिक तीन और सुनीदा चतुरोंगरतना ने दो विकेट हासिल किए।

भारत की तरफ से शेफाली ने 36 गेंदों पर 64 रन में आठ चौके और तीन छक्के लगाए। प्रतीका रावल ने 22, मंधाना ने 19 और भारती फूलमाली ने 13 रनों का योगदान दिया। अंत में क्रांति गौड़ ने आठ गेंदों में एक चौके और एक छक्के की मदद से महत्वपूर्ण नाबाद 15 रन बनाकर भारत को 159 रनों तक पहुंचाया।हालांकि थाईलैंड ने भारत को 160 से कम पर रोककर क्या शानदार प्रदर्शन किया। लेकिन उनकी बल्लेबाजों ने बाद में निराश किया।

Toxic box office collection day 5: यश स्टारर ने 214 करोड़ का आंकड़ा पार किया, ‘जन नायकन’ से निकली आगे

Toxic box office collection day 5: गीतू मोहनदास और यश की फ़िल्म ‘Toxic: A Fairy Tale for Grown-Ups’ बुधवार को बड़ी उम्मीदों के साथ सिनेमाघरों में रिलीज़ हुई। रिलीज़ के पहले दिन, यश की इस फ़िल्म ने भारत में बॉक्स ऑफ़िस पर ₹101 करोड़ से ज़्यादा की कमाई की और ‘धुरंधर: द रिवेंज’ की ओपनिंग का रिकॉर्ड तोड़ दिया। इतनी ज़बरदस्त शुरुआत को देखते हुए उम्मीद थी कि यह फ़िल्म बॉक्स ऑफ़िस पर कई रिकॉर्ड तोड़ेगी। हालांकि, दूसरे दिन ‘Toxic’ की कमाई में भारी गिरावट आई और तब से इसकी रोज़ाना की कमाई लगातार घटती जा रही है।

Toxic का 5वें दिन का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन

ट्रेड ट्रैकर Sacnilk के अनुसार, Toxic ने रविवार को भारत में ₹23 करोड़ का नेट कलेक्शन किया। इससे फिल्म का भारत में कुल नेट कलेक्शन अब तक ₹214.10 करोड़ हो गया है। रविवार को फिल्म की कुल थिएटर ऑक्यूपेंसी 25.3% रही और इसे 16,241 शो में दिखाया गया। शनिवार के ₹25.15 करोड़ के मुकाबले रविवार के कलेक्शन में लगभग 8.5% की मामूली गिरावट देखी गई। हालांकि फिल्म ने भारत में नेट कलेक्शन के मामले में ₹200 करोड़ का आंकड़ा पार कर लिया है, लेकिन रिकॉर्ड ओपनिंग के बाद से इसके रोज़ाना के कलेक्शन में लगातार गिरावट आ रही है।

Toxic का 5वें दिन भाषा के हिसाब से कलेक्शन

भाषा के हिसाब से देखें तो, Toxic के सबसे ज़्यादा शो हिंदी में थे, जिनकी संख्या 11,734 थी। हिंदी वर्शन ने ₹14.50 करोड़ कमाए और 24% ऑक्यूपेंसी दर्ज की। वहीं, कन्नड़ वर्शन ने सिर्फ़ 1,297 शो से ₹6.40 करोड़ का नेट कलेक्शन किया और शानदार 50% ऑक्यूपेंसी हासिल की। ​​तेलुगु भाषा में रिलीज़ हुई फिल्म ने 1,541 शो से ₹1.40 करोड़ का नेट कलेक्शन किया और 23% ऑक्यूपेंसी रही, जबकि तमिल भाषा के शो से ₹0.60 करोड़ का नेट कलेक्शन हुआ (1,416 शो से)। मलयालम वर्शन ने 253 शो से ₹0.10 करोड़ का नेट कलेक्शन किया।

Toxic का अब तक का प्रदर्शन

Toxic ने पहले दिन भारत में ₹101.10 करोड़ के ज़बरदस्त नेट कलेक्शन के साथ अपनी थिएटर यात्रा शुरू की। हालांकि, गुरुवार को फिल्म के कलेक्शन में भारी गिरावट आई और इसने ₹37.65 करोड़ कमाए, जो पहले दिन के आंकड़े से 62.8% कम था।

शुक्रवार को भी गिरावट का यह सिलसिला जारी रहा और फिल्म ने ₹27.20 करोड़ का कलेक्शन किया। शनिवार को Toxic के कलेक्शन में और गिरावट आई और इसने भारत में ₹25.15 करोड़ का नेट कलेक्शन किया।

Toxic ने ‘जना नायकन’ और ‘करुप्पु’ के लाइफटाइम इंडिया नेट कलेक्शन को पीछे छोड़ा

Toxic ने यश की पिछली ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘KGF चैप्टर 2’ के मुकाबले भारत में रिलीज़ के शुरुआती पांच दिनों में हुई कमाई का आधे से भी कम कलेक्शन किया है। KGF चैप्टर 2 ने रिलीज़ के पांच दिनों के अंदर भारत में ₹430.15 करोड़ का नेट कलेक्शन किया था।

वहीं, ‘टॉक्सिक’ ने सूर्या की ‘करुप्पु’ (जिसने ₹198.18 करोड़ कमाए थे) और विजय की ‘जाना नायकन’ (जिसने ₹198.22 करोड़ कमाए थे) के भारत में लाइफटाइम नेट कलेक्शन के आंकड़े को पीछे छोड़ दिया है।

‘टॉक्सिक’ के बारे में

गीतू मोहनदास की डायरेक्ट की गई फ़िल्म ‘टॉक्सिक: ए फेयरी टेल फॉर ग्रोन-अप्स’ में यश मुख्य भूमिका में हैं। उनके साथ कियारा आडवाणी, नयनतारा, तारा सुतारिया, रुक्मिणी वसंत, हुमा कुरैशी और अक्षय ओबेरॉय भी हैं।

राहुल गांधी की बढ़ीं मुश्किलें, उत्तराखंड में FIR दर्ज, जातिवादी टिप्पणी का लगा आरोप

राहुल गांधी की बढ़ीं मुश्किलें, उत्तराखंड में FIR दर्ज, जातिवादी टिप्पणी का लगा आरोप

Complaint filed against Rahul Gandhi in Haldwani Uttarakhand

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के खिलाफ उत्तराखंड के हल्द्वानी कोतवाली में एफआईआर दर्ज की गई है। राहुल गांधी के खिलाफ यह एफआईआर अनुसूचित जाति के युवक अमित कुमार की शिकायत पर दर्ज की गई है। यह मामला हल्द्वानी में कांग्रेस की रैली के बाद किए गए 'शुद्धिकरण यज्ञ' और उसे लेकर राहुल गांधी की टिप्पणी से जुड़ा है। अमित कुमार की तरफ से आरोप लगाया गया है कि राहुल गांधी ने उनके खिलाफ जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया है।

खबरों के अनुसार, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के खिलाफ उत्तराखंड के हल्द्वानी कोतवाली में एफआईआर दर्ज की गई है। राहुल गांधी के खिलाफ यह एफआईआर अनुसूचित जाति के युवक अमित कुमार की शिकायत पर दर्ज की गई है। यह मामला हल्द्वानी में कांग्रेस की रैली के बाद किए गए 'शुद्धिकरण यज्ञ' और उसे लेकर राहुल गांधी की टिप्पणी से जुड़ा है।

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अमित कुमार की तरफ से आरोप लगाया गया है कि राहुल गांधी ने उनके खिलाफ जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया है। अमित कुमार ने कहा कि वह स्वयं अनुसूचित जाति समुदाय से हैं। बयान से उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा, सम्मान और सुरक्षा प्रभावित हुई है। अमित कुमार ने अपनी शिकायत में कहा है कि इस बयान से उनके और शुद्धिकरण में शामिल दूसरे लोगों के सम्मान और सामाजिक छवि पर असर पड़ा है।

अमित कुमार के अनुसार, 8 अगस्त को रामलीला मैदान में कांग्रेस की विजय शंखनाद रैली हुई थी। रैली के बाद मैदान में कूड़ा-कचरा और अन्य आपत्तिजनक सामग्री मिलने का आरोप लगाते हुए 11 अगस्त को उन्होंने अनुसूचित जाति के अन्य सदस्यों के साथ मैदान की सफाई और हवन-शुद्धिकरण किया था।

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दरअसल, राहुल गांधी ने कहा कि शुद्धिकरण एससी/एसटी एक्ट के तहत एक आपराधिक कृत्य है, जिन भी लोगों ने ऐसा किया है उन पर जल्द से जल्द एफआईआर होनी चाहिए। हालांकि इस मामले को लेकर हल्द्वानी पुलिस ने कोई एफआईआर दर्ज नहीं की है। यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ, जब कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की रैली के बाद श्री राम सेना के सदस्यों ने वहां शुद्धिकरण हवन किया था।

Upcoming IPO: 31 अगस्त से शुरू हो रहे हफ्ते में 7 नए IPO खुलेंगे, 15 कंपनियों की लिस्टिंग होगी

Upcoming IPO: 31 अगस्त से शुरू होने वाला नया हफ्ता IPO बाजार के लिए काफी व्यस्त रहेगा। शेयर बाजार में पिछले करीब एक महीने से सुस्ती है। इसके बावजूद IPO मार्केट में निवेशकों का भरोसा बना हुआ है। अगले हफ्ते 7 कंपनियों के IPO खुलेंगे। इनके जरिए ₹1,415 करोड़ जुटाने की योजना है। साथ ही 15 कंपनियां शेयर बाजार में लिस्ट होंगी।

₹1,265 करोड़ के 3 मेनबोर्ड IPO

अगले हफ्ते 3 मेनबोर्ड IPO खुलेंगे। इनका कुल साइज ₹1,265 करोड़ है। सबसे पहले Purple Style Labs का IPO आएगा। कंपनी Pernia’s Pop-Up Shop ब्रांड चलाती है।

कंपनी का ₹680 करोड़ का IPO 31 अगस्त को खुलेगा। इसमें 2 सितंबर तक पैसा लगाया जा सकेगा। यह पूरी तरह फ्रेश इश्यू है। प्राइस बैंड ₹546 से ₹575 प्रति शेयर है।

1 सितंबर को खुलेंगे दो IPO

Rays of Belief और Deepa Jewellers के IPO 1 सितंबर को खुलेंगे। दोनों में 3 सितंबर तक निवेश किया जा सकेगा। MOM’s Belief की पैरेंट कंपनी Rays of Belief ₹125 करोड़ जुटाना चाहती है। इसका प्राइस बैंड ₹227 से ₹239 प्रति शेयर है। यह भी पूरी तरह फ्रेश इश्यू है।

Deepa Jewellers ₹459.71 करोड़ जुटाएगी। इसमें ₹250 करोड़ के नए शेयर जारी होंगे। बाकी ₹209.71 करोड़ OFS के जरिए जुटाए जाएंगे। प्रमोटर अपने शेयर बेचेंगे। प्राइस बैंड ₹168 से ₹177 प्रति शेयर है।

4 SME IPO भी आएंगे

अगले हफ्ते 4 SME IPO भी खुलेंगे। इनका कुल साइज ₹150.17 करोड़ है। Ashutosh Fibre, Shanti Inorganics और Phychem Technologies के IPO 31 अगस्त को खुलेंगे। Farm Peace का IPO 1 सितंबर को आएगा।

विजय केडिया के निवेश वाली Ashutosh Fibre ₹56.34 करोड़ जुटाना चाहती है। इसका प्राइस बैंड ₹87 से ₹92 प्रति शेयर है। यह पूरी तरह फ्रेश इश्यू है। कंपनी ने IPO खुलने से पहले एंकर निवेशकों से ₹16.04 करोड़ जुटा लिए हैं। इसमें 5 निवेशकों ने हिस्सा लिया है।

Shanti Inorganics ₹47.23 करोड़ जुटाने की तैयारी में है। कंपनी सल्फर बेस्ड इनऑर्गेनिक केमिकल बनाती है। इसका प्राइस बैंड ₹79 से ₹83 प्रति शेयर है।

Phychem Technologies ₹14.58 करोड़ जुटाएगी। कंपनी रोटेशनल मोल्डिंग कंपाउंड बनाती है। इसका इस्तेमाल खोखले प्लास्टिक प्रोडक्ट बनाने में होता है। प्राइस बैंड ₹51 से ₹54 प्रति शेयर है।

कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग कंपनी Farm Peace ₹32 करोड़ जुटाएगी। इसका IPO 1 सितंबर को खुलेगा। प्रति शेयर कीमत ₹59 तय की गई है।

अगस्त में ₹23,679 करोड़ के IPO

अगस्त में IPO बाजार में काफी हलचल रही। मेनबोर्ड और SME सेगमेंट में कुल 46 IPO आए। इनके जरिए ₹23,679 करोड़ जुटाए गए। इस साल अगस्त तक IPO के जरिए ₹79,829 करोड़ की फंडिंग हो चुकी है।

इन IPO में निवेश का आखिरी मौका

Lumino Industries का ₹700 करोड़ का IPO 31 अगस्त को बंद होगा। कंपनी पावर केबल और इलेक्ट्रिकल वायर समेत कई प्रोडक्ट बनाती है। अब तक इस IPO को 4.87 गुना सब्सक्रिप्शन मिल चुका है।

ESDS Software Solution का ₹720 करोड़ का IPO 1 सितंबर तक खुला रहेगा। कंपनी AI, क्लाउड और डेटा सेंटर सर्विसेज देती है। Priority Jewels का ₹91.5 करोड़ का IPO भी 1 सितंबर को बंद होगा। ESDS के IPO को अब तक 2.1 गुना सब्सक्रिप्शन मिला है। Priority Jewels का IPO 1.93 गुना भर चुका है।

SME सेगमेंट में Kwick Forensic Solutions का IPO 31 अगस्त को बंद होगा। Complete Sports & Management India और Paluck Technologies के IPO 1 सितंबर तक खुले रहेंगे।

अगले हफ्ते 15 कंपनियों की लिस्टिंग

अगले हफ्ते 15 कंपनियां शेयर बाजार में लिस्ट होंगी। इनमें 8 मेनबोर्ड और 7 SME कंपनियां शामिल हैं।

Augmont Enterprises 31 अगस्त को डेब्यू करेगी। इसके बाद Hy-Tech Engineers, Skyways Air Services और Symbiotec Pharmalab 1 सितंबर को लिस्ट होंगी।

Annu Projects 2 सितंबर को लिस्ट होगी। Lumino Industries की लिस्टिंग 3 सितंबर को होगी। ESDS Software Solution और Priority Jewels के शेयरों में 4 सितंबर से ट्रेडिंग शुरू होगी।

SME सेगमेंट में Madhur Knit Crafts और ABH Healthcare 1 सितंबर को NSE Emerge पर लिस्ट होंगी। Sumax Engineering की लिस्टिंग 2 सितंबर को होगी।

Kwick Forensic Solutions 3 सितंबर को BSE SME पर डेब्यू करेगी। Complete Sports & Management India और Paluck Technologies की लिस्टिंग 4 सितंबर को होगी।

Augmont Enterprises की तगड़ी होगी लिस्टिंग या फुस्स, ग्रे मार्केट से मिल रहे ये संकेत

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।