Drishyam 3 Box Office Collection Day 17: अजय देवगन स्टारर की कमाई में बढ़त दर्ज, 17वें दिन कमाए 6.15 करोड़

Drishyam 3 Box Office Collection Day 17: अजय देवगन अभिनीत ‘दृश्यम 3 द कन्क्लूजन’ ने अपने तीसरे रविवार को भी सिनेमाघरों में शानदार प्रदर्शन जारी रखा। फिल्म ने 17वें दिन भारत में लगभग 6.15 करोड़ रुपये (नेट) की कमाई की, जिससे इसकी कुल घरेलू नेट कमाई 347.25 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। अभिषेक पाठक द्वारा निर्देशित इस क्राइम थ्रिलर ने दुनिया भर में 538.15 करोड़ रुपये की कमाई की है। अब यह 550 करोड़ रुपये के वैश्विक आंकड़े के करीब पहुंच गई है।

17वें दिन की कमाई और बॉक्स ऑफिस के आंकड़े

शुक्रवार को 3.10 करोड़ रुपये और शनिवार को 5 करोड़ रुपये की कमाई के बाद रविवार 18 अक्टूबर 2026 को फिल्म ने भारत में 6.15 करोड़ रुपये (नेट) की कमाई की। तीसरे वीकेंड के इस प्रदर्शन ने फिल्म की स्थिति को और मजबूत कर दिया है, क्योंकि अब यह घरेलू स्तर पर 350 करोड़ रुपये (नेट) के आंकड़े के करीब पहुंच रही है।

रिपोर्ट के अनुसार फिल्म का भारत में कुल ग्रॉस कलेक्शन 416.15 करोड़ रुपये है, जबकि दुनिया भर में इसका कुल ग्रॉस कलेक्शन 538.15 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इसमें से लगभग 122 करोड़ रुपये की कमाई विदेशों से हुई है।

हफ्ते-दर-हफ्ते बॉक्स ऑफिस और विदेशी प्रदर्शन

इस थ्रिलर फिल्म की शुरुआत शानदार रही और इसने अपने पहले हफ्ते में 245.50 करोड़ रुपये (नेट) की कमाई की। दूसरे हफ्ते में इसने 87.50 करोड़ रुपये और जोड़े, जिससे 14वें दिन के अंत तक भारत में इसकी कुल नेट कमाई 333 करोड़ रुपये हो गई।

इसके बाद, फिल्म ने 15वें दिन 3.10 करोड़ रुपये और 16वें दिन 5 करोड़ रुपये की कमाई की। वहीं, तीसरे रविवार को फिल्म ने 6.15 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया। वीकेंड पर कमाई में आया यह उछाल दिखाता है कि दर्शकों की दिलचस्पी अभी भी बनी हुई है। हालांकि, वीकडे (सप्ताह के दिनों) की कमाई से ही यह तय होगा कि फिल्म कितनी जल्दी अपने अगले घरेलू माइलस्टोन तक पहुंचती है।

फिल्म के कुल बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन में अंतरराष्ट्रीय बाजारों का बड़ा योगदान रहा है। रिपोर्ट के अनुसार फिल्म ने पहले हफ्ते में विदेशों से 89 करोड़ रुपये और दूसरे हफ्ते में 27 करोड़ रुपये की कमाई की। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, फिल्म की कुल विदेशी कमाई लगभग 122 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। दुनिया भर में कुल 538.15 करोड़ रुपये की कमाई के साथ, अब यह फिल्म 550 करोड़ रुपये के आंकड़े तक पहुंचने के करीब है।

कलाकार और कहानी

फिल्म में अजय देवगन विजय सलगांवकर के रूप में और तब्बू मीरा देशमुख के रूप में नज़र आएंगी। इनके साथ ही श्रिया सरन, इशिता दत्ता, मृणाल जाधव और रजत कपूर भी वापसी कर रहे हैं, और साथ में जयदीप अहलावत और प्रकाश राज भी शामिल हैं। यह क्राइम थ्रिलर विजय के उस संघर्ष को आगे बढ़ाती है, जिसमें वह अपने परिवार को बचाने की कोशिश करता है, जबकि उनके इर्द-गिर्द जांच का दायरा और तेज हो जाता है।

जगन मोहन रेड्डी को 2023 के चुनाव आयोग के कानून पर क्यों है पछतावा? NDA को दे दी टेंशन!

चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति को लेकर अब YSR कांग्रेस पार्टी ने अपने पुराने रुख पर सवाल उठाए हैं। आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और पार्टी प्रमुख वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी ने रविवार को माना कि चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े बिल पर NDA सरकार का समर्थन करना उनकी पार्टी की गलती थी। उन्होंने कहा कि पार्टी को अब अपने उस फैसले पर अफसोस है।

उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “हमें अब इस बात का पछतावा है… हमें एहसास हुआ है कि ऐसी चयन प्रक्रिया को मंजूरी देना हमारी गलती थी, जिसमें चुनाव आयुक्त का चुनाव तीन सदस्यीय पैनल द्वारा किया जाता है। इस पैनल में प्रधानमंत्री, प्रधानमंत्री द्वारा चुने गए एक मंत्री और विपक्ष के नेता शामिल होते हैं।” उन्होंने तर्क दिया कि मौजूदा व्यवस्था ने चुनाव आयोग (EC) के ढांचे को असंतुलित कर दिया है।

इस दौरान जगन ने कानून में संशोधन की भी मांग की, ताकि चयन समिति में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को फिर से शामिल किया जा सके। उन्होंने कहा, “अभी की प्रक्रिया इतनी एकतरफा है, जैसे कि छात्र खुद ही अपना परीक्षक चुन रहे हों। ऐसा नहीं होना चाहिए।”

बता दें कि यह बयान इसलिए अहम है क्योंकि 2023 के कानून का YSRCP ने लोकसभा और राज्यसभा, दोनों जगह समर्थन किया था, जबकि विपक्ष ने इसमें से CJI को हटाए जाने पर आपत्ति जताई थी।

‘सोच बदल गई है’

यह पहली बार नहीं है जब जगन मोहन रेड्डी ने चुनाव आयोग (EC) के कामकाज को लेकर चिंता जताई है। सितंबर में, चुनाव आयोग के भीतर मतभेदों पर ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की जांच पर प्रतिक्रिया देते हुए, उन्होंने ‘X’ पर लिखा कि “लोकतंत्र तभी कायम रह सकता है जब लोगों को चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाओं पर पूरा भरोसा हो”।

रिपोर्ट में मतदाता सूची के ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) से जुड़े फैसलों पर दो चुनाव आयुक्तों द्वारा जताई गई आपत्तियों का जिक्र किया गया था।

इस पर जगन ने लिखा था, “आरोप-प्रत्यारोप लगाने के बजाय, जनता को यह स्पष्ट रूप से पता होना चाहिए कि क्या आपत्तियां दर्ज की गईं, उन पर क्या कार्रवाई हुई, और मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने या बहाल करने की प्रक्रिया कितनी पारदर्शी तरीके से पूरी की गई।”

उन्होंने चुनावी प्रक्रिया में जनता का भरोसा बहाल करने, नागरिकों के मतदान के अधिकारों की रक्षा करने और यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाने की मांग की कि लोग बिना किसी डर के अपने इन अधिकारों का इस्तेमाल कर सकें।

YSRCP के एक नेता ने कहा, “हमने हमेशा कहा है कि (NDA) सरकार को हमारा समर्थन मुद्दों पर आधारित होगा। इस मामले में, हमें लगता है कि जनता को सरकार से और अधिक आश्वासन मिलने की जरूरत है।”

NDA को संसदीय समर्थन

कुछ विधायी मामलों में NDA को पार्टी का समर्थन मिलने का मतलब यह नहीं था कि BJP के साथ कोई औपचारिक गठबंधन हो गया है। हालांकि, संसद में पार्टी के रुख ने अक्सर सरकार को अपने गठबंधन के दायरे से बाहर भी समर्थन जुटाने में मदद की, जिससे जगन का बदला हुआ रुख राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो जाता है।

YSRCP ने संसद में लगातार NDA का समर्थन किया है। 2020 में, पार्टी ने केंद्र सरकार को उन विवादास्पद कृषि कानूनों पर समर्थन दिया था, जिन्हें बाद में रद्द कर दिया गया। 2023 में, जब विपक्षी दलों ने नए संसद भवन के उद्घाटन समारोह का बहिष्कार किया था, तब भी YSRCP के विधायक उस कार्यक्रम में शामिल हुए थे।

साल 2019 से 2024 के बीच, जब आंध्र प्रदेश में YSRCP सत्ता में थी, तब पार्टी ने नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, प्रस्तावित राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) और अनुच्छेद 370 को हटाए जाने के मुद्दों पर NDA का समर्थन किया था।

जानकारी के मुताबिक, 2024 के चुनावों के बाद, जब YSRCP के केवल चार लोकसभा सांसद ही जीत पाए और आंध्र प्रदेश में पार्टी सत्ता से बाहर हो गई, तब भी उसने स्पीकर पद के लिए NDA की पसंद का समर्थन किया था। इसके अलावा, 2025 में पार्टी ने सत्ताधारी गठबंधन की ओर से उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार सी.पी. राधाकृष्णन का भी समर्थन किया, और इस साल की शुरुआत में उसने परिसीमन विधेयक (डिलिमिटेशन बिल) पैकेज को अपना समर्थन देने की घोषणा की।

वाम दलों के साथ तालमेल

जगन के करीबी सूत्रों ने बताया कि YSRCP वाम दलों (जिसमें CPI(M) और CPI शामिल हैं) के साथ बातचीत कर रही है। यह बातचीत आंध्र प्रदेश में मतदाताओं के नाम बड़े पैमाने पर सूची से हटाए जाने के मुद्दे पर हो रही है।

एक सूत्र ने कहा, “आंध्र प्रदेश में विपक्ष की एक पार्टी होने के नाते, हमारा मानना ​​है कि हमें उन लोगों के साथ खड़ा होना चाहिए जो उन मतदाताओं के हितों का समर्थन कर रहे हैं, जिनके नाम अवैध रूप से हटा दिए गए हैं। TDP के नेतृत्व वाली आंध्र प्रदेश सरकार, राज्य चुनाव आयोग (EC) का पक्ष ले रही है और अपनी बात मानने वाले इस आयोग का फायदा उठा रही है।”

गौरतलब है कि जगन मोहन रेड्डी की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब YSRCP और सत्ताधारी TDP के नेतृत्व वाले गठबंधन (जिसमें BJP और जन सेना पार्टी भी शामिल हैं) के बीच राजनीतिक टकराव जारी है।

YSRCP ने सत्ताधारी गठबंधन पर अपने लोकसभा फ्लोर लीडर, पी.वी. मिथुन रेड्डी की हत्या की कोशिश करने का भी आरोप लगाया है। वहीं, TDP ने आरोप लगाया है कि आगामी स्थानीय निकाय चुनावों के लिए नामांकन दाखिल करने के दौरान, मिथुन ने भीड़ को आगजनी के लिए उकसाया था।

राज्य में TDP के नेतृत्व वाला गठबंधन पूरी तरह से सत्ता में है। ऐसे में, YSRCP मतदाता सूची में बदलाव और संवैधानिक संस्थाओं के कामकाज जैसे मुद्दों पर विपक्ष का समर्थन एकजुट करने की कोशिश कर रही है।

क्या एक व्यापक विपक्षी मोर्चा बनेगा?

जगन ने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के नेताओं को सार्वजनिक रूप से अपना समर्थन दिया है। बता दें कि CJP के सदस्य सौरव दास और आशुतोष रंका को जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराने के बाद गिरफ्तार किया गया था। इस पर जगन ने एक बार फिर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी प्रतिक्रिया दी।

उन्होंने एक पोस्ट में कहा, “व्यवस्था में एक खामी है जिसे ठीक करने की जरूरत है। चुनावी प्रक्रिया में लोगों का भरोसा फिर से बहाल होना चाहिए। सौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी से कोई समस्या हल नहीं होगी, बल्कि इससे हालात और बिगड़ेंगे।”

उनका यह कदम तब आया है जब पड़ोसी राज्य तेलंगाना की एक क्षेत्रीय पार्टी, ‘भारत राष्ट्र समिति’ (BRS) ने भी CJP का समर्थन किया है। इससे संकेत मिलता है कि क्षेत्रीय पार्टियों के राजनीतिक हित आपस में मेल खा सकते हैं।

बता दें कि जगन का यह बदला हुआ रुख ऐसे समय में सामने आया है, जब क्षेत्रीय पार्टियों को मिलाकर एक व्यापक विपक्षी मोर्चा बनाने की कोशिशों को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं।

वहीं तमिलनाडु में, इस साल हुए विधानसभा चुनावों के बाद कांग्रेस के विजय की पार्टी ‘TVK’ के साथ हाथ मिलाने से, कांग्रेस और DMK के रिश्तों में खटास आ गई है। DMK ने भी CJP का समर्थन किया है।

पार्टी सूत्रों के अनुसार, YSRCP के लिए इस तरह का कोई भी गठबंधन मुख्य रूप से आंध्र प्रदेश में उसकी राजनीतिक लड़ाई से प्रेरित होगा।

एक सूत्र ने बताया, “आंध्र प्रदेश में YSRCP को समर्थन देने वाले गठबंधनों के लिए जगन हमेशा तैयार रहे हैं। फिलहाल, राज्य में TDP के नेतृत्व वाले गठबंधन को रोकने के लिए ‘लेफ्ट फ्रंट’ (वाम मोर्चा) या क्षेत्रीय दलों का गठबंधन काफी लग रहा है।”

हालांकि, कांग्रेस के साथ गठबंधन की संभावना फिलहाल कम ही है, क्योंकि जगन और उनकी बहन YS शर्मिला के बीच रिश्ते तनावपूर्ण हैं। शर्मिला कांग्रेस की राज्य इकाई की प्रमुख हैं।

एक सूत्र ने कहा, “फिलहाल कांग्रेस के साथ गठबंधन की कोई संभावना नहीं है।”

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सीएम पर भतीजे को बचाने का आरोप

कोलकाता। चोरबागान दुर्गापूजा पंडाल में शनिवार रात को हुए हादसे के बाद इस पर राजनीति भी शुरू हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि इस मामले के दोषियों को बचाया जा रहा है। टीएमसी ने यह भी आरोप लगाया है कि हादसे के दोषियों में एक मुख्यमंत्री का भतीजा भी है, जिसे बचाया जा रहा है।

तृणमूल कांग्रेस ने कोलकाता पुलिस को टैग करते हुए सोशल मीडिया पोस्ट में तीन लोगों के नाम गिनाएं और पूछा इन लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई होगी या सीएम उन्हें बचा रहे हैं? ममता की पार्टी ने एक्स पोस्ट में देबदीप अधिकारी को मुख्य संरक्षक बताया है, जो सीएम शुभेंदु अधिकारी के भतीजे हैं।  विजय ओझा को अध्यक्ष बताया है, जो भाजपा के विधायक हैं। इसके अलावा तीसरा नाम तमोघना घोष का है, इन्हें मुख्य सलाहकार बताया गया है। तमोघना उत्तरी कोलकाता के भाजपा जिला अध्यक्ष हैं।

तृणमूल कांग्रेस ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा है, ‘मुख्यमंत्री ने खुद चोरबागान पूजा पंडाल का उद्घाटन किया था। क्या पंडाल में जाते समय उन्होंने सुरक्षा इंतजामों पर ध्यान नहीं दिया? क्या जान गंवाने वाले हर एक व्यक्ति के लिए उन्हें जवाबदेह नहीं ठहराया जाएगा’? तृणमूल के आरोपों पर प्रदेश भाजपा के प्रवक्ता और विधायक रितेश तिवारी ने कहा कि उन्हें जानकारी नहीं है कि मुख्यमंत्री का कोई रिश्तेदार पूजा समिति से जुड़ा है या नहीं। हालांकि, उन्होंने सवाल किया कि यदि कोई रिश्तेदार समिति से जुड़ा भी हो तो क्या वह अपने रहते ऐसी त्रासदी होने देना चाहेगा?

Bank Holiday: कल सोमवार को बंद रहेंगे बैंक! जानिए RBI ने क्यों दी है छुट्टी

Bank Holiday Monday 19 October: अगर आपको भी कल सोमवार, 19 अक्टूबर को बैंक से जुड़ा कोई काम निपटाना है तो ये खबर आपके लिए ही है। कल देश के कई राज्यों में बैंकों में कामकाज नहीं होगा।

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के ऑफिशियल हॉलिडे कैलेंडर के अनुसार, सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 को महानवमी के पावन अवसर पर उत्तर प्रदेश के सभी सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंक पूरी तरह बंद रहेंगे। इसके साथ ही पश्चिम बंगाल, बिहार और झारखंड सहित अन्य कई राज्यों में बैंक बंद रहेंगे।

इसके तुरंत बाद मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को दशहरा / विजयादशमी का मुख्य त्योहार होने के कारण बैंक शाखाओं में कोई कामकाज नहीं होगा। चूंकि 18 अक्टूबर को रविवार की वजह से पहले ही साप्ताहिक अवकाश था, इसलिए राज्य में बैंक लगातार तीन दिनों (रविवार, सोमवार और मंगलवार) तक बंद रहेंगे।

अगले हफ्ते की बैंक हॉलिडे लिस्ट

अक्टूबर के इस त्योहार सीजन वाले हफ्ते में देश के अलग-अलग राज्यों और सर्किलों में बैंक छुट्टियों की भरमार है।

मंगलवार (20 अक्टूबर): विजयादशमी / दशहरा के उपलक्ष्य में लगभग पूरे देश (कुछ पूर्वोत्तर राज्यों को छोड़कर) में बैंक बंद रहेंगे।

बुधवार (21 अक्टूबर): पूर्वोत्तर के राज्यों (जैसे असम, त्रिपुरा) में दुर्गा पूजा / विजयादशमी के चलते बैंक बंद रहेंगे।

शनिवार (24 अक्टूबर): महीने का चौथा शनिवार होने के कारण देशभर के सभी बैंकों में नियमित अवकाश रहेगा।

रविवार (25 अक्टूबर): साप्ताहिक छुट्टी के कारण देशभर के सभी बैंक बंद रहेंगे।

वैसे इस दौरान नेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग, UPI और बैंक एटीएम (ATM) सेवाएं बिना किसी रुकावट के सामान्य रूप से चालू रहेंगी, जिससे आम ग्राहकों को डिजिटल लेनदेन में कोई दिक्कत नहीं आएगी।

डीएमके ने सीईसी का इस्तीफा मांगा

नई दिल्ली। महिला आरक्षण और परिसीमन पर डीएमके से समर्थन की उम्मीद कर रही भाजपा को झटका लगा है। डीएमके संसदीय बोर्ड की शनिवार को हुई बैठक में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर का विरोध करने का फैसला हुआ है। साथ ही पार्टी ने एसआईआर में कथित गड़बड़ियों का मुद्दा उठा कर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है। गौरतलब है कि कांग्रेस सहित सभी विपक्षी पार्टियां भी यही मांग कर रही हैं।

हालांकि डीएमके ने एसआईआर और मुख्य चुनाव आयुक्त के साथ साथ कांग्रेस पर भी सवाल उठाए। संसदीय दल की बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए पार्टी के वरिष्ठ नेता ए राजा ने कांग्रेस पर सवाल उठाते हुए कहा कि डीएमके शुरुआत से एसआईआर का विरोध कर रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को डीएमके की आलोचना करने का नैतिक अधिकार नहीं है। बहरहाल, संसदीय दल की बैठक में चार प्रस्ताव पास किए गए।

गौरतलब है कि चार मई को आए विधानसभा चुनाव नतीजों के बाद कांग्रेस और डीएमके अलग हो गए हैं। कांग्रेस ने टीवीके से अलायंस कर लिया है। बहरहाल, ए राजा ने कहा कि डीएमके ने एसआईआर लागू होने के समय से ही इसका विरोध किया है। उन्होंने कहा कि पार्टी ने संसद के अंदर और बाहर कई कदम उठाए हैं और पार्टी का यह रुख अभी भी कायम है। उन्होंने बताया कि डीएमके संसदीय दल का प्रस्ताव तमिलनाडु की जनता और देश भर के राजनीतिक पर्यवेक्षकों के सामने पार्टी के विरोध का क्रम रखने के लिए तैयार किया गया है।

एसआईआर की प्रक्रिया पर निशाना साधते हए राजा ने कहा कि इसके जरिए वैध वोटर्स को वोटिंग के अधिकार से वंचित किया जा रहा है। डीएमके ने कहा कि कांग्रेस राष्ट्रीय स्तर पर एसआईआर का विरोध कर रही है, लेकिन केरलम और तमिलनाडु में वह इसी तरह की आलोचना से बच रही है। प्रस्ताव में टीवीके प्रमुख और राज्य के मुख्यमंत्री विजय की चुप्पी पर भी सवाल उठाया गया।

व्यक्तिगत दुख को पीछे छोड़ नेमरा में जनसेवा में जुटे सीएम हेमंत सोरेन

मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने व्यक्तिगत शोक और दुःख की इस कठिन घड़ी में भी जनहित के प्रति अपनी प्रतिबद्धता बनाए रखी है। अपने पैतृक गांव नेमरा (रामगढ़) में मातृशोक के बीच भी उन्होंने राज्यभर से पहुंचे लोगों की समस्याएं सुनीं और उनके त्वरित समाधान के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने नेमरा में मौजूद एक-एक व्यक्ति से मिलकर उनका कुशलक्षेम जाना और बेहद आत्मीयता के साथ उनकी फरियादें सुनीं। जनता की शिकायतों पर कड़ा रुख अपनाते हुए उन्होंने अधिकारियों को सभी मामलों का गुणवत्तापूर्ण और त्वरित निदान सुनिश्चित करने को कहा, ताकि किसी भी फरियादी को निराश न लौटना पड़े।

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उन्होंने कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी राज्य की जनता को ही अपना सबसे बड़ा परिवार मानकर उनके साथ खड़े रहने का संदेश दिया। मुख्यमंत्री से  उनके पैतृक गांव नेमरा में सांसद विजय हांसदा, नलिन सोरेन, विधायक सरयू राय, अनंत प्रताप देव एवं अमित महतो ने मुलाकात की।

छत्तीसगढ़ स्थित जशपुर राजपरिवार के सदस्यों ने भी मुलाकात की। इस दौरान महाराजा-सह-पूर्व सांसद रणविजय सिंह जूदेव, महारानी अमृता सिंह जूदेव, युवराज यश प्रताप जूदेव और राजकुमार आर्य प्रताप जूदेव ने मुख्यमंत्री से मिलकर अपनी गहरी संवेदनाएं प्रकट की।

Pic Credit : ANI

UP Holiday List 2026: 18 से 20 अक्टूबर तक दफ्तर बंद, चलिए जानते हैं मायावती, अखिलेश या योगी-किस सरकार में मिलीं ज्यादा छुट्टियां?

UP Holiday List 2026: त्योहारों के बीच उत्तर प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों को लगातार तीन दिन की छुट्टी मिलने जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महानवमी के मौके पर 19 अक्टूबर को सार्वजनिक अवकाश घोषित करने का फैसला लिया है। वहीं, रविवार की साप्ताहिक छुट्टी और मंगलवार को विजयादशमी की छुट्टी पहले से तय है। ऐसे में अब सरकारी दफ्तर लगातार तीन दिन बंद रहेंगे।

राज्य के सामान्य प्रशासन विभाग ने 2026 की छुट्टियों की पहले जारी की गई सूची में बदलाव को लेकर आदेश जारी किया है। हालांकि, पुराने आदेश की बाकी सभी बातें पहले की तरह लागू रहेंगी।

बता दें कि शिक्षकों और कर्मचारियों के संगठनों ने मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को पत्र लिखकर महानवमी पर छुट्टी देने की मांग की थी। इससे पहले राज्य सरकार ने 20 अक्टूबर को महानवमी और विजयादशमी, दोनों त्योहारों के लिए एक ही दिन की छुट्टी घोषित की थी।

दफ्तर कब तक बंद रहेंगे?

तारीखदिनस्थितिकारण
18 अक्टूबररविवारबंदसाप्ताहिक छुट्टी (महाअष्टमी)
19 अक्टूबरसोमवारबंदनए आदेश के तहत महानवमी की सार्वजनिक छुट्टी
20 अक्टूबरमंगलवारबंदपहले से घोषित विजयादशमी/दशहरा की छुट्टी
21 अक्टूबरबुधवारखुलेंगेसरकारी दफ्तर दोबारा खुलेंगे

क्या योगी सरकार ने पहली बार किसी त्योहार की छुट्टी बढ़ाई है?

नहीं। इस साल की शुरुआत में, राज्य सरकार ने 26 और 27 मार्च को राम नवमी के मौके पर दो दिन की छुट्टी की घोषणा की थी, और 15 जनवरी को मकर संक्रांति के लिए सार्वजनिक अवकाश था। अक्टूबर 2024 में, सरकार ने नवमी के दिन छुट्टी घोषित की।

अलग-अलग सरकारों के दौरान यूपी में छुट्टियों को लेकर क्या बदलाव आए हैं?

राज्य सरकारें पहले भी अपनी छुट्टियों की सूची का इस्तेमाल एक राजनीतिक संकेत देने के लिए करती रही हैं। मई 2007 में मायावती सरकार ने 9 अक्टूबर को-जो बीएसपी संस्थापक कांशी राम की पुण्यतिथि है-छुट्टी घोषित की थी। हालांकि, अक्टूबर 2012 में अखिलेश यादव सरकार ने इस छुट्टी को खत्म कर दिया।

बता दें कि सपा सरकार ने महर्षि कश्यप और निषादराज जयंती, अजमेर उर्स, तथा चंद्रशेखर और महाराणा प्रताप की जयंती पर भी छुट्टियां घोषित की थीं।

वहीं अप्रैल 2017 में, योगी कैबिनेट ने 15 छुट्टियां रद्द कर दीं थी, जिनमें चेटी चंड, परशुराम जयंती, छठ पूजा और वाल्मीकि जयंती शामिल थीं। सरकार का कहना था कि स्कूलों को इन महापुरुषों के बारे में पढ़ाना चाहिए, न कि उनके नाम पर छुट्टी देनी चाहिए।

सरकारछुट्टीफैसलासमयकिससे संबंधित
मायावती (BSP)कांशीराम की पुण्यतिथि (9 अक्टूबर)नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट के तहत छुट्टी घोषितमई 2007बहुजन समाज के प्रमुख नेता
मायावती (BSP)कांशीराम की जयंती (15 मार्च)यूपी की छुट्टियों की सूची में शामिल2012 तकबहुजन समाज के प्रमुख नेता
अखिलेश यादव (SP)कांशीराम की पुण्यतिथि (9 अक्टूबर)छुट्टी रद्द कीअक्टूबर 2012BSP सरकार के फैसले में बदलाव
अखिलेश यादव (SP)महर्षि कश्यप और निषादराज जयंती (5 अप्रैल)छुट्टी घोषित की2012–2017धार्मिक और सामुदायिक महत्व
अखिलेश यादव (SP)अजमेर गरीब नवाज उर्सछुट्टी घोषित की2012–2017धार्मिक महत्व
अखिलेश यादव (SP)चंद्रशेखर जयंती (17 अप्रैल) और महाराणा प्रताप जयंती (9 मई)छुट्टी घोषित की2012–2017महापुरुषों की जयंती
योगी आदित्यनाथ (BJP)चेती चंद, परशुराम जयंती, अजमेर उर्स, जमात-उल-विदा, विश्वकर्मा पूजा, वाल्मीकि जयंती, छठ पूजा और ईद-ए-मिलाद समेत 15 छुट्टियांछुट्टियां रद्द कींअप्रैल 2017त्योहार और जयंती
योगी आदित्यनाथ (BJP)महानवमी (11 अक्टूबर)छुट्टी घोषित की2024धार्मिक त्योहार
योगी आदित्यनाथ (BJP)मकर संक्रांति (15 जनवरी)छुट्टी घोषित की2026धार्मिक त्योहार
योगी आदित्यनाथ (BJP)रामनवमी (26–27 मार्च)दो दिन की छुट्टी घोषित की2026धार्मिक त्योहार
योगी आदित्यनाथ (BJP)महानवमी (19 अक्टूबर)छुट्टी घोषित की2026धार्मिक त्योहार

क्या योगी ने नवरात्रि के दौरान कुछ और भी कहा?

छुट्टी का यह आदेश नवरात्रि के छठे दिन आया। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने महिलाओं की शक्ति के बारे में एक संदेश भी दिया। उन्होंने इस संदेश के जरिए लड़कियों और खेलों के क्षेत्र में अपनी सरकार के कामकाज को सामने रखा।

मां कात्यायनी को समर्पित इस दिन, योगी ने सोशल मीडिया पर एक संदेश साझा किया, जिसमें उन्होंने देवी को महिलाओं के साहस, संकल्प और वीरता का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा, “सभी बाधाओं और राक्षसी प्रवृत्तियों का नाश करने वाली मां कात्यायनी, महिलाओं के अदम्य साहस, अटूट संकल्प और अजेय वीरता का प्रतीक हैं।”

उन्होंने दावा किया कि 2017 से पहले, “राज्य में डर और अराजकता का माहौल था, जहां बेटियों के सपनों को दबा दिया जाता था, उनका आत्मविश्वास कुचल दिया जाता था और मौकों की कमी के कारण उनकी प्रतिभा मुरझा जाती थी।”

सीएम योगी ने कहा कि खेल के मैदान माफियाओं के नियंत्रण में थे, और लड़कियों के सपनों को उड़ान मिलने के बजाय, उन्हें “चार दीवारों के भीतर कैद” कर दिया गया था।

उन्होंने कहा, “पिछले साढ़े नौ वर्षों में, राज्य में बदलाव का एक नया अध्याय लिखा गया है। डर की जगह सुरक्षा ने ले ली है, उपेक्षा की जगह प्रोत्साहन ने, और संसाधनों की कमी की जगह खेल सुविधाओं के विस्तार ने ले ली है।”

योगी ने खेलों से जुड़ी किन सुविधाओं का जिक्र किया?

मुख्यमंत्री ने कहा कि अब लड़कियों के पास अपनी प्रतिभा को निखारने के लिए एक मजबूत आधार है, जिसमें “गांव के खेल के मैदानों और ब्लॉक-स्तरीय मिनी स्टेडियमों से लेकर जिला स्टेडियम, मंडल स्तरीय खेल कॉलेज और मेरठ में स्थित मेजर ध्यानचंद खेल विश्वविद्यालय” शामिल हैं।

उन्होंने ओलंपिक, कॉमनवेल्थ और एशियाई खेलों के पदक विजेताओं को मिलने वाले लाखों-करोड़ों रुपये के नकद पुरस्कारों और खिलाड़ियों की सीधी भर्ती का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ये चीजें प्रतिभा को बढ़ावा देती हैं, उपलब्धियों का सम्मान करती हैं और खिलाड़ियों के भविष्य को सुरक्षित बनाती हैं।

मुख्यमंत्री ने किन महिला खिलाड़ियों के नाम गिनाए?

सीएम योगी आदित्यनाथ ने एथलेटिक्स में पारुल चौधरी, प्रियंका गोस्वामी, प्राची चौधरी और अन्नू रानी; जूडो में अस्मिता डे; क्रिकेट में दीप्ति शर्मा और मेघना सिंह; हॉकी में वंदना कटारिया; और कुश्ती में दिव्या काकरान का नाम लिया। उन्होंने कहा कि कॉमनवेल्थ और एशियाई खेलों में उनके प्रदर्शन ने भारत और उत्तर प्रदेश, दोनों का मान बढ़ाया है।

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Kolkata Durga Puja 2026: कोलकाता में सजी ‘राम की अयोध्या’, 20 अक्टूबर को पहुंचेंगे रणबीर कपूर, यश और साई पल्लवी, ये है प्लान

Kolkata Durga Puja: पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा के पावन पर्व का उत्साह अपने चरम पर है। रिपोर्ट्स के मुताबिक कोलकाता में इस बार का पूजा पंडाल उत्सव बेहद खास और ऐतिहासिक रंग में नजर आ रहा है। सॉल्ट लेक सांस्कृतिक संसद ने इस बार अपनी पहली थीम-बेस्ड दुर्गा पूजा का आयोजन किया है। इसकी मेन थीम ‘राम की अयोध्या’ रखी गई है। इस भव्य पंडाल में आधुनिक 3डी लाइट एनिमेशन और वीडियो प्रेजेंटेशन के जरिए भगवान श्रीराम के 14 वर्षों के वनवास और लंकापति रावण पर विजय के बाद अयोध्या वापसी के अलौकिक दृश्यों को जीवंत रूप में दर्शाया गया है। इस अनोखी थीम वाले पूजा पंडाल का औपचारिक उद्घाटन पश्चिम बंगाल के राज्यपाल रवींद्र नारायण रवि ने किया है।

3D एनिमेशन और विजुअल इफेक्ट्स से जीवंत हुई ‘राम की अयोध्या’

न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक सॉल्ट लेक सांस्कृतिक संसद द्वारा तैयार यह पंडाल सांस्कृतिक परंपराओं और अत्याधुनिक तकनीक का अनूठा संगम पेश कर रहा है। आयोजकों ने पंडाल के भीतर लेजर और 3डी लाइट एनिमेशन के जरिए रामायण के अलग अलग प्रसंगों को बेहद खूबसूरती से उकेरा है। पंडाल में एंट्री करते ही श्रद्धालुओं को त्रेतायुग की अयोध्या में होने का अहसास होता है। विजुअल इफेक्ट्स के जरिए भगवान राम के विजय के बाद अयोध्या लौटने की पौराणिक और सांस्कृतिक महत्ता को दर्शाया गया है।

20 अक्टूबर को जुटेंगे बॉलीवुड और साउथ के दिग्गज सितारे

इस भव्य आयोजन को और अधिक यादगार बनाने के लिए आयोजकों ने 20 अक्टूबर को एक विशेष कार्यक्रम की योजना बनाई है। सॉल्ट लेक सांस्कृतिक संसद के ट्रस्ट बोर्ड के अध्यक्ष ललित बेरीवाला ने जानकारी दी कि 20 अक्टूबर को आने वाली फिल्म ‘रामायण’ की पूरी स्टार कास्ट इस उत्सव में शामिल होने कोलकाता पहुंच रही है। इस खास दिन बॉलीवुड अभिनेता रणबीर कपूर, साउथ सिनेमा के सुपरस्टार यश और अभिनेत्री साई पल्लवी पंडाल में पहुंचकर पूजा-अर्चना करेंगे और उत्सव का हिस्सा बनेंगे। फिल्म ‘रामायण’ की टीम के आगमन की खबर से ही स्थानीय लोगों और प्रशंसकों में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है।

44 सालों से सांस्कृतिक सेवा, 13 वर्षों से रावण दहन का आयोजन

आयोजकों ने बताया कि सॉल्ट लेक सांस्कृतिक संस्था पिछले करीब 44 सालों से विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़ी हुई है और पिछले 13 वर्षों से इस जगह पर भव्य दशहरा के साथ रावण दहन का आयोजन करती आ रही है। ललित बेरीवाला ने बताया कि पश्चिम बंगाल में सनातन धर्म की परंपराओं को बढ़ावा देने और लोगों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने के उद्देश्य से इस बार ‘राम की अयोध्या’ थीम को चुना गया है। इस भव्य आयोजन में राज्य के वरिष्ठ नेता शुभेंदु अधिकारी भी विशेष रूप से शिरकत करेंगे। आयोजकों का दावा है कि बंगाल में पिछले 50 वर्षों के दौरान इस स्तर पर और इस भव्यता के साथ रावण दहन या दशहरे का आयोजन किसी बड़े मंच पर नहीं देखा गया है।

Dussehra 2026: साल में एक बार खुलता है कानपुर का 136 साल पुराना मंदिर, रावण की होती है पूजा

Dussehra 2026: पूरे भारत में दशहरा बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में मनाया जाता है, जहां भगवान राम की जीत को दर्शाने के लिए रावण के पुतले जलाए जाते हैं। लेकिन कानपुर का एक मंदिर इससे बिल्कुल अलग परंपरा का पालन करता है। यहां लंका के दस सिरों वाले राजा को जलाया नहीं जाता, बल्कि उनकी पूजा की जाती है।

शिवाला इलाके में स्थित 135 साल पुराना ‘दशानन मंदिर’ रामायण के मुख्य खलनायक रावण को समर्पित है। यहां भगवान शिव के प्रति उनकी भक्ति और उनके ज्ञान के लिए उन्हें सम्मान दिया जाता है। यह मंदिर साल में केवल एक दिन यानी दशहरे के मौके पर ही भक्तों के लिए खुलता है। यह इस त्योहार से जुड़ी सबसे अनोखी धार्मिक परंपराओं में से एक है।

जहां कानपुर का बाकी हिस्सा शाम को होने वाले रावण दहन की तैयारी कर रहा है, वहीं सुबह के समय मंदिर परिसर का माहौल कुछ अलग ही होता है। यहां भक्त प्रार्थना करने, तेल के दीपक जलाने और “लंकापति नरेश रावण की जय” का नारा लगवाने के लिए इकट्ठा होते हैं—वे एक ऐसे व्यक्तित्व को नमन करते हैं, जिसे यहां बिल्कुल अलग नज़रिए से याद किया जाता है।

दशानन मंदिर कानपुर में रावण की पूजा क्यों की जाती है?

माना जाता है कि इस मंदिर का निर्माण 1890 में महाराज गुरु प्रसाद शुक्ला ने करवाया था। वे पड़ोसी उन्नाव जिले के रहने वाले थे और भगवान शिव के परम भक्त थे। स्थानीय लोगों के अनुसार यह मंदिर रावण की शिव-भक्ति, उसकी बुद्धिमत्ता और उसके ज्ञान के सम्मान में स्थापित किया गया था।

शिवाला में कैलाश मंदिर परिसर के भीतर स्थित दशानन मंदिर, दशहरे की प्रचलित कथा से बिल्कुल अलग एक तस्वीर पेश करता है। जहां दशहरा भगवान राम की रावण पर जीत का प्रतीक है, वहीं इस मंदिर की परंपरा रावण के जीवन के एक दूसरे पहलू पर ध्यान दिलाती है- एक विद्वान और भगवान शिव के सच्चे भक्त के रूप में उसकी पहचान।

इस मंदिर की एक खास विशेषता यहां मौजूद रावण की पांच फुट ऊंची प्रतिमा है। ज्यादातर मंदिरों की मूर्तियों से अलग, यह प्रतिमा साल के ज्यादातर समय ढकी रहती है और इसे केवल दशहरा के दिन ही खोला जाता है। मंदिर की स्थानीय परंपरा के अनुसार बाकी 364 दिन यह प्रतिमा ढकी रहती है, जो रावण के कैद में रहने के समय को दर्शाती है।

विजयादशमी के दिन मंदिर के दरवाजे खुलते हैं और भक्त यहां आशीर्वाद लेने आते हैं। वे अक्सर बुद्धि, शक्ति और ज्ञान के लिए प्रार्थना करते हैं। इस मौके पर एक विशेष आरती की जाती है। यह रस्म छोटी है, लेकिन बहुत अनोखी है। दशहरा की सुबह प्रार्थना और विशेष आरती के लिए मंदिर जल्दी खुल जाता है। दिन भर की रस्मों के बाद मंदिर के दरवाजे फिर से बंद हो जाते हैं और प्रतिमा अगली विजयादशमी तक वापस ढकी हुई अवस्था में आ जाती है।

यहां आने वाले भक्तों के लिए दशहरा सिर्फ रावण की हार को याद करने का दिन नहीं है। यह लंकापति रावण से जुड़े ज्ञान, भक्ति और उनके व्यक्तित्व की जटिलताओं पर विचार करने का भी एक अवसर है।

Bank Holiday: कल शनिवार को इस राज्य में बंद रहेंगे बैंक, जानिए RBI ने क्यों दी है 17 अक्टूबर की छुट्टी

Bank Holiday 17th October: अक्टूबर के महीने में त्योहारों का सिलसिला लगातार जारी है। त्योहारी सीजन के इस दौर में बैंक शाखाओं में कामकाज के लिए जाने से पहले आपको छुट्टियों की पूरी लिस्ट जरूर पता होनी चाहिए। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की बैंक हॉलिडे की ऑफिशियल लिस्ट के मुताबिक दुर्गा पूजा और महा सप्तमी जैसे पावन पर्वों के चलते देश के कुछ खास राज्यों में बैंक बंद रहने वाले हैं। अगर आपको इस सप्ताह या शनिवार-रविवार के दौरान बैंक शाखा में जाकर चेक क्लियरेंस, ड्राफ्ट बनवाने या दूसरे जरूरी फाइनेंशियल काम करने हैं तो घर से निकलने से पहले छुट्टियों का यह पूरा शेड्यूल चेक कर लें।

17 अक्टूबर को महा सप्तमी पर इस राज्य में बंद रहेंगे बैंक

आरबीआई की हॉलिडे लिस्ट के मुताबिक कल यानी 17 अक्टूबर को ‘महा सप्तमी’ के पावन अवसर पर अगरतला, त्रिपुरा में बैंक पूरी तरह बंद रहेंगे। हालांकि बैंक शाखाएं बंद रहने के बावजूद ग्राहकों को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए डिजिटल बैंकिंग सेवाएं हमेशा की तरह पूरी तरह सुचारू रहेंगी। बाकी भारत के लिए यह महीने का तीसरा शनिवार है और बैंक खुले रहेंगे।

इसके अगले दिन यानी 18 अक्टूबर को रविवार की साप्ताहिक छुट्टी के कारण पूरे देश में बैंक बंद रहेंगे। इसके तुरंत बाद अगले हफ्ते की शुरुआत में 19 और 20 अक्टूबर को महा अष्टमी, महा नवमी और विजयादशमी (दशहरा) के उपलक्ष्य में पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा, ओडिशा, बिहार, झारखंड, असम, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश समेत देश के अधिकांश राज्यों में बैंक शाखाओं में कामकाज नहीं होगा।

अक्टूबर महीने में बैंक छुट्टियों की पूरी लिस्ट

अक्टूबर महीने के बचे हुए दिनों में विभिन्न त्योहारों और राष्ट्रीय छुट्टियों की वजह से बैंकों का शेड्यूल कुछ इस तरह रहेगा-

17 अक्टूबर: महा सप्तमी के अवसर पर त्रिपुरा राज्य में बैंक बंद रहेंगे।

18 अक्टूबर: रविवार की साप्ताहिक छुट्टी की वजह से पूरे देश में बैंक बंद रहेंगे।

19 अक्टूबर: महा अष्टमी और महा नवमी के उपलक्ष्य में पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा, बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में अवकाश रहेगा।

20 अक्टूबर: विजयादशमी (दशहरा) के पावन पर्व पर लगभग पूरे देश में बैंक बंद रहेंगे। (गंगटोक और इम्फाल को छोड़कर)।

21 अक्टूबर: दुर्गा पूजा / विजया दशमी- अगरतला, बेंगलुरु, गंगटोक, गुवाहाटी, कोच्चि, कोलकाता और तिरुवनंतपुरम।

22–23 अक्टूबर: दुर्गा पूजा / दसैन- सिर्फ गंगटोक (सिक्किम)।

24 अक्टूबर: महीने के चौथे शनिवार की साप्ताहिक छुट्टी के कारण देश भर में बैंक बंद रहेंगे।

25 अक्टूबर: रविवार का साप्ताहिक अवकाश होने के कारण पूरे देश में बैंक बंद रहेंगे।

26 अक्टूबर: महर्षि वाल्मीकि जयंती और लक्ष्मी पूजा के अवसर पर पंजाब, हरियाणा, कर्नाटक, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में बैंक अवकाश रहेगा।

29 अक्टूबर: करवा चौथ पर सिर्फ शिमला में लोकल छुट्टी।

31 अक्टूबर: सरदार वल्लभभाई पटेल जयंती और करवा चौथ के मौके पर गुजरात और हिमाचल प्रदेश सहित कुछ क्षेत्रों में बैंक बंद रहेंगे।

बैंक बंद रहने पर भी चालू रहेंगी डिजिटल और ऑनलाइन सेवाएं

छुट्टियों के दौरान बैंक शाखाएं बंद रहने से ग्राहकों को किसी भी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। बैंक की सभी डिजिटल और ऑनलाइन सेवाएं सामान्य रूप से काम करती रहेंगी। ग्राहक इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग और यूपीआई के माध्यम से पैसों का लेन-देन कर सकेंगे। इसके अलावा कैश विड्रॉल और बैलेंस इंक्वायरी जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए देश भर के सभी एटीएम चौबीस घंटे काम करते रहेंगे।

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