यूपी का राजनीतिक भविष्यफल!

यूपी का राजनीतिक भविष्यफल!

क्या आप उत्तर प्रदेश से हैं? किसी राजनीतिक दल से आगामी विधानसभा चुनाव के लिए टिकटार्थी हैं? अगर हां, तो आपको किसी विरहन की तरह भादों की रातें भारी लगेंगी। 

 

क्वार में आसमान साफ होने तक आपकी स्थिति कुछ हद तक साफ होगी। फिर भी मुकम्मल तौर पर कुछ कहना मुश्किल है। इसलिए देवताओं की परिक्रमा करते रहिए। अपनी श्रद्धा के अनुसार दान-दक्षिणा भी देते रहिए।

 

त्रेता में बारिश के बाद ही लंका कांड हुआ था। भगवान श्रीराम उत्तर प्रदेश के अयोध्या से ही थे। अब कलयुग में इस बार उत्तर प्रदेश में क्या होगा, कहना संभव नहीं। सब कुछ रामजी की मर्जी पर है। अपने मंदिर के चढ़ावे की कथित चोरी से वह खुश हैं या नाराज, यह वक्त बताएगा।

 

हर दौर की तरह इस बार भी विभीषणों की चांदी रहेगी। इन दिनों विभीषण कुछ ज्यादा ही हैं, इसलिए मिलेंगे भी खूब। 

लेकिन ध्यान रखिए—ये त्रेता वाले विभीषण नहीं, कलयुग के विभीषण हैं। इनकी निष्ठा संदिग्ध रहेगी। ये विपक्ष यानी रावण का साथ छोड़कर आपके साथ आएं, यह जरूरी नहीं। मौका मिला तो आपको ही मरवाने की भूमिका में भी नजर आ सकते हैं। इसलिए इनसे दोस्ती करते समय सावधानी जरूरी है।

 

सावन-भादों में बारिश अच्छी हुई है और सिलसिला अभी जारी है। इससे मौसमी नेताओं यानी ‘मेंढकों’  की खुशी का ठिकाना नहीं। इनकी टर्र-टर्र अभी और बढ़ेगी। हालांकि इस पर बहुत ध्यान देने की जरूरत नहीं, क्योंकि टर्राना मेंढकों का स्वभाव है और मौसम बदलते ही इनकी आवाज भी बदल जाएगी।

 

भादों मौसम के बदलाव का प्रतीक है। कुछ दिनों में मानसून की वापसी शुरू होगी। उत्तर प्रदेश में भी राजनीतिक मौसम बदलेगा या नहीं, फिलहाल मुकम्मल तौर पर कुछ कहना मुश्किल है।

 

ग्लोबल वार्मिंग ने मौसम को जितना अप्रत्याशित बनाया है, उससे कहीं ज्यादा चुनावी राजनीति ने सियासी मौसम को। देश के सबसे बड़े सूबे में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए बढ़ता चुनावी तापमान आने वाले दिनों को और अस्थिर बनाएगा। 

 

इसलिए थोड़ा दिल थामकर इंतजार करिए। आने वाले दिनों में कई चेहरे बदलेंगे, कई मौसम बदलेंगे और कई भविष्यफल गलत साबित होंगे। लेकिन तब तक एक काम जरूर कर लीजिए—SIR के बाद यह जरूर देख लीजिए कि आप मतदाता हैं भी या नहीं!

ओरछा में रामराजा लोक के निर्माण कार्यों का CM डॉ. मोहन यादव ने लिया जायजा, स्थानीय दुकानदारों से किया संवाद

ओरछा में रामराजा लोक के निर्माण कार्यों का CM डॉ. मोहन यादव ने लिया जायजा, स्थानीय दुकानदारों से किया संवाद

भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि ओरछा को पर्यटन के अद्भुत केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। ओरछा का राम राजा मंदिर हमारे गौरवशाली अतीत की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संपदा है। यहां के मंदिर एवं महल तत्कालीन समृद्ध स्थापत्य के प्रत्यक्ष उदाहरण हैं, जो हमें हमारी प्राचीन धरोहर और संस्कृति से जोड़े रखते हैं। ये तत्कालीन उन्नत तकनीक और स्थापत्य के भी अद्भुत उदाहरण हैं, पहले एअर कंडीशनर नहीं होते थे, लेकिन यहां के भवन वातानुकूलित बने है, जो गर्मी में ठंडे और ठंड में गर्मी का एहसास कराते हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आज ओरछा स्थित ऐतिहासिक एवं आस्था के प्रमुख केन्द्र श्री रामराजा लोक में जारी निर्माण कार्यों का अवलोकन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने  निर्माण कार्यों की प्रगति की जानकारी लेते हुए संबंधित अधिकारियों को कार्यों को गुणवत्ता के साथ निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निरीक्षण के बाद मीडिया से चर्चा में यह विचार-व्यक्त किए।

 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्माणाधीन रामराजा लोक परिसर में विभिन्न प्रतिष्ठानों का निरीक्षण करते हुए प्रतिष्ठान संचालकों से संवाद किया तथा उनकी समस्याओं और सुझावों को सुना। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को प्राप्त समस्याओं के निराकरण के लिए आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जुझार सिंह महल में चल रहे निर्माण तथा जीर्णोद्धार कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने जहांगीर महल का भ्रमण कर यहां की ऐतिहासिक एवं समृद्ध स्थापत्य कला का अवलोकन भी किया।

 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव को निरीक्षण के दौरान आर्किटेक्ट द्वारा मंदिर परिसर स्थित प्राचीन एवं ऐतिहासिक ‘सावन-भादो’ स्तंभों के संरक्षण एवं उनके स्थापत्य महत्व के संबंध में विस्तृत जानकारी दी गई। बताया कि रामराजा लोक की संरचना एवं विकास कार्यों को आकार देते समय मंदिर परिसर की प्राचीन धरोहरों, विशेषकर ‘सावन-भादो’ स्तंभों के मूल स्वरूप एवं ऐतिहासिक महत्व का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। बुंदेलखंड की विशिष्ट स्थापत्य कला के प्रतीक इन प्राचीन स्तंभों की संरचना एवं निर्माण शैली अपने समय की उन्नत तकनीक को दर्शाती है। नए निर्माण कार्यों के दौरान इन प्राचीन संरचनाओं को किसी प्रकार की क्षति नही पहुंचे, इसका विशेष ध्यान रखते हुए उनके आसपास के क्षेत्र को व्यवस्थित, सुंदर एवं श्रद्धालुओं के लिए सुगम बनाया जा रहा है।

 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारे गौरवशाली बुन्देला राजाओं का ओरछा बुंदेलखंड की राजधानी के रूप पहचाना जाता था। यहां के प्राचीन महल और भवन, हमारी समृद्ध विरासत हैं, उसे जीवंत करने के लिए सरकार काम कर रही है। तत्कालीन समय में निर्माण कार्यों में जिस प्रकार की सामग्री लगाई जाती थी, उसी सामग्री से भवनों का जीर्णोद्धार कराया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य यह है कि हमारे गौरवशाली अतीत के प्रतीक ये भवन उसी स्वरूप में दिखें जिस स्वरूप में वह वर्षों पहले थे। इसके लिए हमारे अधिकारियों के नेतृत्व और मार्गदर्शन में कुशल कारीगर काम कर रहे हैं।

 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि श्री महाकाल महालोक के निर्माण के बाद उज्जैन आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, उज्जैन की अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव आया है। इसी तर्ज पर मध्यप्रदेश के प्रमुख तीर्थस्थलों जैसे ओरछा, चित्रकूट, दतिया, नलखेड़ा, पशुपतिनाथ मंदसौर आदि का भी समग्र विकास किया जा रहा है। इससे धार्मिक पर्यटन को प्रोत्साहन मिलेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

भगवान श्रीराम ने अपने 14 वर्ष के वनवास में, लम्बी अवधि चित्रकूट में व्यतीत की। भगवान श्रीकृष्ण की जहां शिक्षा भी हुई, उज्जैन के सांदीपनि आश्रम सहित भगवान श्रीकृष्ण की जहां-जहां लीलाएं हुईं, उन सब स्थानों को तीर्थ के रूप में विकसित किया जाएगा। हमारी गौरवशाली विरासत को धार्मिक सांस्कृतिक भावनाओं के अनुरूप आने वाली पीढ़ियों से जोड़ने और उन्हें इस अतीत से परिचित कराने के लिए विभिन्न गतिविधियां संचालित हैं, इन्हें संरक्षित करना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। ओरछा में भव्य श्री रामराजा लोक का निर्माण किया जा रहा है, जो आने वाले समय में देश-दुनिया के श्रद्धालुओं के लिए प्रमुख तीर्थस्थल बनेगा।

राम की बडी बहन माता शांता की राखी अयोध्या से राष्ट्रपति, पीएम और सीएम को भेजी

राम की बडी बहन माता शांता की राखी अयोध्या से राष्ट्रपति, पीएम और सीएम को भेजी

Ayodhya Rakhi Mata Shanta: अयोध्या में भगवान श्रीराम की बड़ी बहन माता शांता की ओर से श्रृंगी ऋषि सेवा संस्थान के माध्यम से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित देश के कई विशिष्ट दिग्गजों को विशेष राखियां भेजी गई हैं। इन राखियों को केले के तने, रेशमी धागे और भागलपुर की कला का उपयोग करके तैयार किया गया है।                                

राखी की मुख्य विशेषताएं

  • विशिष्ट जनों को प्रेषित : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, पीएम नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, रक्षामंत्री राजनाथसिंह, यूपी की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और सीएम योगी आदित्यनाथ को यह रक्षा सूत्र भेजा गया है।
  • वैदिक मंत्रोच्चार: साकेत भवन के महंत सीताराम दास ने इन सभी राखियों को वैदिक मंत्रों के साथ अभिमंत्रित किया है।
  • खास सामग्री : इस बार की राखियां मुख्य रूप से केले के तने के धागे, रेशम, मखाने और भागलपुरी पेंटिंग की कला का उपयोग करके बनाई गई हैं, जिन्हें मधुबनी की अंजलि सिंह के सहयोग से तैयार किया गया है।
  • भगवान राम को अर्पण : देश के प्रमुख नेताओं और गणमान्य लोगों तक रक्षा सूत्र पहुंचाने के बाद, माता शांता की ओर से भेजी गई यह पावन राखी अयोध्या में भगवान श्रीरामलला को भी अर्पित की गईं। 

क्या है धार्मिक मान्यता?

पौराणिक कथाओं के अनुसार माता शांता राजा दशरथ की पुत्री और भगवान श्रीराम की बड़ी बहन थीं, जिनका विवाह श्रृंगी ऋषि के साथ हुआ था। इसी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा का निर्वाह करते हुए हर साल रक्षाबंधन के अवसर पर माता शांता के धाम/आश्रम की तरफ से यह रक्षा सूत्र भेजने की परंपरा निभाई जाती है। 

 

श्रृंगी ऋषि सेवा संस्थान के अध्यक्ष सुभाष सिंह ने बताया कि साकेत भवन के महंत सीताराम दास ने पूर्ण विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ इन विशेष राखियों को अभिमंत्रित किया है। प्राचीन परंपरा और भ्रातृ-स्नेह को जीवंत रखने के लिए संस्थान हर वर्ष यह रक्षा सूत्र भेजता है।

Tulsidas Jayanti: रामभक्ति शाखा के मशहूर संत कवि तुलसीदास ने जन-जन को समझाया राम नाम परमार्थ, उनके ये 5 दोहे जिंदगी संवार देंगे

तुलसीदास जयंती 2026 आज, 19 अगस्त को पूरे देश में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई जा रही है। यह दिन महान संत और कवि गोस्वामी तुलसीदास की 529वीं जयंती के रूप में मनाया जा रहा है। तुलसीदास जी भगवान श्रीराम के बड़े भक्त थे। उन्होंने अपनी रचनाओं से श्रीराम के जीवन, उनके आदर्शों और भक्ति का संदेश लोगों तक पहुंचाया। उनकी आसान भाषा में लिखी रचनाएं आज भी लोगों के बीच बहुत लोकप्रिय हैं। गोस्वामी तुलसीदास जयंती पर लोग मंदिरों में रामचरितमानस पाठ, हनुमान चालीसा, भजन-कीर्तन और सत्संग किए जाते हैं। इस दिन लोग तुलसीदास जी की शिक्षाओं से प्रेरणा लेते हैं और भगवान श्रीराम की भक्ति के साथ दया, अच्छे कर्म और परोपकार का महत्व समझते हैं। उनकी प्रसिद्ध रचना रामचरितमानस आज भी घर-घर में पढ़ी और सुनी जाती है।

तुलसीदास जी का जीवन

गोस्वामी तुलसीदास के पिता का नाम आत्माराम और माता का नाम हुलसी देवी बताया जाता है। जन्म के बाद उनके माता-पिता ने उन्हें छोड़ दिया था। इसके बाद एक दासी ने उनका पालन-पोषण किया, लेकिन जब तुलसीदास जी करीब पांच साल के थे, तब उस दासी का निधन हो गया और वे अनाथ हो गए। इसके बाद नरहरिदास ने उन्हें अपनाया और अपने साथ अयोध्या ले गए। नरहरिदास ने उन्हें राम मंत्र की शिक्षा दी और भगवान श्रीराम की भक्ति का मार्ग दिखाया। आगे चलकर तुलसीदास जी ने अवधी भाषा में रामचरितमानस की रचना की, जिससे रामायण की कथा आम लोगों तक आसानी से पहुंची।तुलसीदास जयंती का महत्व

तुलसीदास जयंती पंचांग के अनुसार, सप्तमी तिथि 18 अगस्त को शाम 5:50 बजे शुरू होगी और 19 अगस्त को शाम 7:19 बजे समाप्त होगी। तुलसीदास जयंती हिंदू धर्म में खास महत्व रखती है। इस दिन महान संत और कवि गोस्वामी तुलसीदास जी को याद किया जाता है। इस साल उनकी 529वीं जयंती मनाई जा रही है। तुलसीदास जी भगवान श्रीराम के बड़े भक्त थे। उन्होंने अपनी प्रसिद्ध रचना रामचरितमानस के जरिए श्रीराम की कथा और उनके आदर्शों को आसान भाषा में लोगों तक पहुंचाया। उनकी रचनाओं में भक्ति के साथ अच्छे व्यवहार, सत्य, दया, न्याय और सही रास्ते पर चलने की सीख भी मिलती है।

इस दिन भक्त भगवान श्रीराम और हनुमान जी की पूजा करते हैं। कई जगहों पर रामचरितमानस और रामायण का पाठ किया जाता है। भक्त हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करने के साथ भजन-कीर्तन और सत्संग में भी शामिल होते हैं। पूजा के बाद प्रसाद बांटा जाता है। तुलसीदास जयंती पर जरूरतमंदों और ब्राह्मणों को भोजन, कपड़े और धन का दान करने की परंपरा भी है। कई स्थानों पर भंडारे का आयोजन किया जाता है। इस दिन तुलसीदास जी की शिक्षाओं को याद करते हुए लोगों को दया, सेवा और अच्छे कर्म करने की प्रेरणा दी जाती है।तुलसीदास जी के प्रसिद्ध दोहे-

1. तुलसी सब छल छांड़िकै, कीजै राम-सनेह।

अंतर पति सों है कहा, जिन देखी सब देह॥अर्थ: तुलसीदास जी कहते हैं कि इंसान को अपने जीवन से छल, कपट और झूठ जैसी चीजों को दूर करके भगवान श्रीराम से सच्चा प्रेम करना चाहिए। जिस तरह कोई व्यक्ति अपने मन की बात किसी से छिपा नहीं सकता, उसी तरह भगवान भी हमारे मन के विचारों और भावनाओं को जानते हैं। वे हमारे हर अच्छे-बुरे कर्म से परिचित हैं। इसलिए भगवान की भक्ति दिखावे के लिए नहीं, बल्कि साफ मन और सच्ची श्रद्धा के साथ करनी चाहिए।2. आवत हिय हरषै नहीं, नैनन नहीं सनेह।

तुलसी तहां न जाइए, कंचन बरसे मेह॥

अर्थ: तुलसीदास जी समझाते हैं कि जिस घर या स्थान पर पहुंचने पर लोगों के मन में हमारे लिए खुशी न हो और उनकी आंखों में प्रेम और अपनापन दिखाई न दे, वहां बार-बार नहीं जाना चाहिए। भले ही उस जगह से कितना भी धन, सम्मान या फायदा मिलने की उम्मीद हो, लेकिन जहां अपनापन और सम्मान न मिले, वहां रहना उचित नहीं है। रिश्तों में केवल लाभ नहीं, बल्कि प्रेम और स्नेह भी जरूरी होता है।

3. तुलसी काया खेत है, मनसा भयौ किसान।

पाप-पुन्य दोउ बीज हैं, बुवै सो लुनै निदान॥

अर्थ: तुलसीदास जी ने इंसान के जीवन को एक खेत और उसके मन को किसान के समान बताया है। जिस तरह किसान खेत में जैसा बीज बोता है, उसे आगे चलकर वैसा ही फल मिलता है, उसी तरह इंसान के कर्म भी उसके जीवन का फल तय करते हैं। अच्छे काम और पुण्य करेंगे तो अच्छे परिणाम मिलेंगे, जबकि गलत काम और पाप करने पर उसका बुरा परिणाम भी भुगतना पड़ेगा। इसलिए व्यक्ति को अपने विचारों और कर्मों पर हमेशा ध्यान देना चाहिए।

4. लोग मगन सब जोग हीं, जोग जायं बिनु छेम।

त्यों तुलसी के भावगत, राम प्रेम बिनु नेम॥

अर्थ: तुलसीदास जी कहते हैं कि लोग अपने जीवन में अलग-अलग चीजों को पाने और अपनी इच्छाओं को पूरा करने में लगे रहते हैं। लेकिन केवल किसी चीज को हासिल करना ही पर्याप्त नहीं होता, उसे संभालकर रखना भी जरूरी है। इसी तरह धार्मिक नियमों और पूजा-पाठ का पालन करना तभी सार्थक है, जब मन में भगवान श्रीराम के प्रति सच्चा प्रेम और भक्ति हो। केवल बाहरी नियमों को निभाने के बजाय मन से ईश्वर को याद करना ज्यादा महत्वपूर्ण है।

5. राम नाम अवलंब बिनु, परमारथ की आस।

बरषत वारिद-बूंद गहि, चाहत चढ़न अकास॥

अर्थ: तुलसीदास जी कहते हैं कि भगवान श्रीराम के नाम और भक्ति का सहारा लिए बिना जीवन के सबसे बड़े उद्देश्य को पाने की उम्मीद करना मुश्किल है। वे इसकी तुलना बारिश की बूंदों को पकड़कर आसमान पर चढ़ने की कोशिश से करते हैं, जो संभव नहीं है। इसका भाव यह है कि इंसान को अपने जीवन में भगवान की भक्ति, अच्छे कर्म और सही आचरण का सहारा लेना चाहिए। केवल इच्छा करने से जीवन का उद्देश्य पूरा नहीं होता, उसके लिए सही मार्ग पर चलना और ईश्वर के प्रति विश्वास रखना भी जरूरी है।