अयोध्या-काशी की तर्ज पर संवरेगा ब्रज: सीएम योगी

अयोध्या-काशी की तर्ज पर संवरेगा ब्रज: सीएम योगी

Yogi adityanath

CM Yogi Adityanath Braj redevelopmen: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अयोध्या काशी के भव्य विकास के बाद अब ब्रजभूमि को भी जन-भावनाओं के अनुरूप विकसित किया जाएगा। डबल इंजन सरकार इसमें कोई कसर नहीं छोड़ेगी। ब्रजभूमि के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व को ध्यान में रखते हुए यहां ऐसा भव्य परिसर तैयार किया जाएगा, जैसा अयोध्या और काशी में हुआ है। पिछली सरकारें श्रीकृष्ण जन्मभूमि आने से डरती थीं, क्योंकि उन्हें अपने वोट बैंक की चिंता होती थी। यह सरकार कृष्ण कन्हैया, प्रभु श्रीराम, बाबा विश्वनाथ और मां विंध्यवासिनी पर विश्वास करती है। लेकिन, जिनकी आस्था बाबर और औरंगजेब में होगी, क्या वे आपकी आस्था का सम्मान कर पाएंगे? 

समाज विरोधी मंसूबे पूरे नहीं होने देगी सरकार

मुख्यमंत्री शुक्रवार को श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर में दर्शन-पूजन करने के उपरांत मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि बाबर और औरंगजेब के अनुयायी फिर से समाज में जहर घोलने का काम करने जा रहे हैं। उनकी आदत समाज में विष वमन करने की है, जिससे समाज व राष्ट्र विरोधी तत्वों के हौसले बढ़ सकें, वे आपकी सुरक्षा में सेंध लगा सकें, युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर सकें, बहन-बेटियों की सुरक्षा में सेंध लगा सकें, अन्नदाता किसानों की खुशहाली पर डकैती डाल सकें और उद्यमी बनने की ओर अग्रसर कारीगरों व हस्तशिल्पियों को फिर से लाचार बना सकें। लेकिन डबल इंजन की सरकार इन मंसूबों पर पानी फेरेगी और इन्हें कभी पूरा नहीं होने देगी। 

कल्पना से परे था अयोध्या का कायापलट

मुख्यमंत्री ने कहा कि अयोध्यावासियों को कल्पना भी नहीं थी कि कभी अयोध्या का इतना भव्य विकास होगा। वहां न सड़क थी, न बिजली और न ही पानी की समुचित व्यवस्था। गंदगी का अंबार लगा रहता था। अयोध्या रेलवे की सिंगल लाइन से जुड़ी थी। जो श्रद्धालु वहां जाता था,  अव्यवस्था और अराजकता देखकर रोता हुआ लौटता था। आज प्रतिदिन करीब एक लाख श्रद्धालु अयोध्या धाम आते हैं। रामनवमी, कार्तिक माह, सावन का झूला मेला, दीपोत्सव आदि पर्वों पर यह संख्या बढ़कर पांच से 50 लाख तक पहुंच जाती है। कहीं कोई असुविधा नहीं होती।

सामाजिक समता का अद्भुत उदाहरण भी देखने को मिलता है। प्रभु श्रीराम के नाम को जन-जन तक पहुंचाने वाले महर्षि वाल्मीकि के नाम पर अयोध्या में अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट बन गया है। कनेक्टिविटी के लिए चारों ओर से फोरलेन सड़कें बन चुकी हैं। रेलवे की डबल लाइन हो चुकी है। अयोध्या में जहां भी जाएंगे, आपको भक्तिपथ, रामपथ जैसे नामों की फोरलेन सड़कें मिलेंगी।

अपराजित रही हमारी आस्था

सीएम ने कहा 1528 में विदेशी आक्रांता ने हमारी आस्था को समाप्त करने का प्रयास किया था। लेकिन, अयोध्या में प्रभु श्रीराम के प्रति हमारी सनातन आस्था निरंतर बढ़ रही है। वहां उमड़ रहे जनसैलाब से इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। जो आक्रांता खुद को अविजित मानते थे, आज उनका कहीं अता-पता नहीं। सब समाप्त हो गए। लेकिन, हमारी आस्था कभी पराजित नहीं हुई। अयोध्या में प्रभु श्रीराम का दुनिया का विशालतम भव्य मंदिर बन गया। जिन लोगों को ये सब अच्छा नहीं लगता, वे अयोध्या को बदनाम कर रहे हैं।

मां विंध्यवासिनी धाम का भव्य परिसर

मुख्यमंत्री ने कहा कि मैं अभी यहां योगमाया का दर्शन कर रहा था। इसी धरा पर योगमाया ने अवतरित होकर कंस के अहंकार को चुनौती दी थी और वही योगमाया विंध्यवासिनी धाम में प्रकट हुई थीं। मैं जब भी यहां आता था, मुझे तत्काल मां विंध्यवासिनी का स्मरण आता था। आज मुझे यह बताते हुए प्रसन्नता है कि योगमाया के प्रति हमारी आस्था ने विंध्यवासिनी धाम को एक भव्य परिसर उपलब्ध कराया है।

ब्रज क्षेत्र में श्रद्धालुओं को मिलेंगी सभी सुविधाएं

सीएम ने कहा कि मथुरा-वृंदावन समेत बरसाना, नंदगांव व गोवर्धन आने वाले श्रद्धालुओं को सभी सुविधाएं मिलेंगी। किसी श्रद्धालु को कोई दिक्कत न हो, उसकी आस्था को ठेस न लगे, वह सहज भाव से आए, दर्शन करे और आशीर्वाद लेकर जाए। इसके लिए डबल इंजन की सरकार निरंतर प्रयास कर रही है। ये पर्व व त्योहार केवल आस्था ही नहीं,  हमारी आर्थिकी के आधार भी हैं। समाज का हर व्यक्ति किसी न किसी रूप में व्यवस्था के साथ जुड़कर पीएम मोदी जी के विकसित भारत की परिकल्पना को आगे बढ़ाने में अपना योगदान दे रहा है।

हम सिर्फ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करें

मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन से एक ही बात कही कि अर्जुन, तुम निमित्त मात्र हो, तुम अपना कर्तव्य करो। तुम अगर निष्काम कर्म करोगे तो परिणाम पाओगे। इसी तरह हम सब भी देश, समाज व परिवार के प्रति अपने कर्तव्यों का ईमानदारीपूर्वक निर्वहन करेंगे तो भारत को विकसित भारत और उत्तर प्रदेश को विकसित उत्तर प्रदेश बनने में कोई देर नहीं लगेगी। ‘कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन’, श्रीकृष्ण कहते हैं कि कर्म करो, अपने कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ो। बाकी चिंता हमारे कृष्ण कन्हैया करेंगे।

 

उन्होंने कहा कि हमारा देश स्वतंत्र है, तभी हम इतने स्वतंत्र माहौल में अपने पर्व और त्योहार मना पा रहे हैं। कल से लाखों की संख्या में श्रद्धालु मथुरा-वृंदावन आकर आस्था के साथ विभिन्न समारोहों और आयोजनों में भागीदार बन रहे हैं। आज हम शासन की सुविधाओं से जुड़े हैं और विकास की नई-नई परियोजनाओं का लाभ ले रहे हैं। नौजवान अपने जीवन और भविष्य के प्रति आश्वस्त है। हर बेटी बहन अपनी सुरक्षा के प्रति आश्वस्त है। हर कारीगर और हर हस्तशिल्पी के मन में उद्यमी बनने का विश्वास है। इसी विश्वास को जगाने और हमें जोड़ने के लिए ये पर्व व त्योहार आते हैं। मुझे भी इसीलिए ब्रजभूमि में ‘लाला’ (बालकृष्ण) के दर्शन करने का अवसर प्राप्त हुआ है।

अब जवाहर बाग जैसी घटना नहीं, बल्कि उत्सव होता है

मुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित भारत के लिए हमारी आस्था भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। विरासत के सम्मान के लिए ही मैं श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर यहां आता हूं। पिछली सरकारें यहां आने से डरती थीं, क्योंकि उन्हें वोट बैंक की चिंता होती थी। उन्हें डर रहता था कि कहीं लोग सवाल न पूछ लें और इसीलिए उनके कृत्यों से यहां जवाहर बाग जैसी घटना हुई। लेकिन, अब हमारी यह ब्रजभूमि जन्मोत्सव, रंगोत्सव, ब्रजरज उत्सव और वैष्णव कुंभ जैसे आयोजनों के साथ नए उत्साह, नई उमंग और नए विश्वास से जुड़ रही है। यही नया विश्वास हम सबको आगे बढ़ने की प्रेरणा दे रहा है। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को जन्माष्टमी की बधाई व शुभकामनाएं भी दीं।

 

 

Asian Games में नीरज की जगह यह भाला फेंक खिलाड़ी करेगा एथलेटिक्स दल की अगुवाई

javelin throw

राष्ट्रमंडल खेलों में कांस्य पदक जीतने वाले भाला फेंक के एथलीट यशवीर सिंह को जापान में होने वाले एशियाई खेलों के लिए चोटिल नीरज चोपड़ा की जगह गुरुवार को 77 सदस्यीय भारतीय एथलेटिक्स टीम में शामिल किया गया जबकि लंबी दूरी के धावक अभिषेक पाल को कथित डोपिंग उल्लघंन के लिए नाडा (राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी) से नोटिस जारी किए जाने के बाद टीम से बाहर कर दिया गया।

भारतीय एथलेटिक्स महासंघ (एएफआई) ने लुधियाना में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में 19 सितंबर से चार अक्टूबर तक आइची-नागोया में होने वाले एशियाई खेलों के लिए 77 सदस्यीय ट्रैक एवं फील्ड टीम की घोषणा की। लुधियाना अभी राष्ट्रीय युवा चैंपियनशिप की मेजबानी कर रहा है।

पुरुषों की 110 मीटर बाधा दौड़ के धावक तेजस शिरसे को भी टीम से बाहर कर दिया गया है क्योंकि वह हाल ही में ग्लास्गो में हुए राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान चोटिल हो गए थे।अभिषेक को पिछले महीने नाडा ने नोटिस भेजा था क्योंकि उनके डोपिंग नमूने में महिलाओं की प्रजनन क्षमता बढ़ाने वाली दवा पाई गई थी।

खेल मंत्रालय ने इस महीने की शुरुआत में 73 सदस्यीय एथलेटिक्स टीम की घोषणा की थी जिसमें शिरसे और अभिषेक भी शामिल थे। मंत्रालय ने बुधवार को छह नए खिलाड़ियों को टीम में शामिल किया।

इन खिलाड़ियों में 200 मीटर की धाविका हरिता भद्रा, 400 मीटर दौड़ में भाग लेने वाली किरण पहल, पोल वॉल्टर सिंधुश्री जी, त्रिकूद की एथलीट आशा इलंगो, चक्का फेंक की खिलाड़ी सान्या यादव और हैमर थ्रोअर प्रवीण कुमार शामिल हैं।

इस तरह से पहले घोषित किए गए 73 खिलाड़ियों में से दो खिलाड़ियों अभिषेक और शिरसे के बाहर होने और बुधवार को छह खिलाड़ियों के जुड़ने से अंतिम संख्या 77 हो गई है।AFI ने आयोजकों से यह भी अनुरोध किया है कि पिछले एशियाई खेलों के दोहरे पदक विजेता अविनाश साबले को 5000 मीटर दौड़ में भाग लेने की अनुमति दी जाए। साबले की पसंदीदा 3000 मीटर स्टीपलचेज़ में उनकी भागीदारी सुनिश्चित है।

पिछले साल एसीएल सर्जरी कराने के बाद साबले ने इस सत्र में केवल एक ही दौड़ में हिस्सा लिया है। उन्होंने 2023 में हांगझोऊ एशियाई खेलों में 3000 मीटर स्टीपलचेज़ में स्वर्ण और 5000 मीटर में रजत पदक जीता था।

दस सितंबर को होने वाली प्रतियोगिता में एशियाई खेलों के लिए चुने गए अधिकतर एथलीट भाग लेंगे।गुलवीर सिंह और पारुल चौधरी एशियाई खेलों में तीन-तीन स्पर्धाओं में भाग लेंगे। गुलवीर 10,000 मीटर, 5000 मीटर और 1500 मीटर में जबकि पारुल 3000 मीटर स्टीपलचेज, 5000 मीटर और 1500 मीटर में हिस्सा लेंगी।

एशियाई खेल 2026 के लिए भारतीय एथलेटिक्स टीम इस प्रकार है:-

पुरुषों:-गुरिंदरवीर सिंह (100मी), अनिमेष कुजूर (100 मीटर, 200 मीटर, मिश्रित 4×100 मीटर रिले), राजेश रमेश (400 मीटर, 4×400 मीटर रिले), विशाल थेनारासु कयालविझी (400 मीटर, 4×400 मीटर रिले), कृष्ण कुमार (800 मी), मोहम्मद अफसल पुलिककलाकथ (800मी), यूनुस शाह (1500 मी), अभिषेक पाल (5000 मी, 10000 मी), गुलवीर सिंह (1500 मीटर, 5000 मीटर, 10000 मीटर)। सावन बरवाल (मैराथन), कार्तिक कारकेरा (मैराथन), तेजस शिरसे (110 मीटर बाधा दौड़), यशस पलाक्ष (400 मीटर बाधा दौड़), संतोष कुमार तमिलारासन (400 मीटर बाधा दौड़), अविनाश साबले (3000 मीटर स्टीपलचेज), प्रणव प्रमोद गुरव (मिश्रित 4×100 मीटर रिले), मोहम्मद अशफाक (4×400 मीटर रिले), धर्मवीर चौधरी (4×400 मीटर रिले), जय कुमार (4×400 मीटर रिले, मिश्रित 4×400 मीटर रिले), मनु थेक्किनालिल साजी (4×400 मीटर रिले, मिश्रित 4×400 मीटर रिले), आदर्श राम ज्योति शंकर (ऊंची कूद), सर्वेश कुशारे (ऊंची कूद) , कुलदीप कुमार (पोल वॉल्ट), देव मीना (पोल वॉल्ट), मुरली श्रीशंकर (लंबी कूद), शाहनवाज खान (लंबी कूद), प्रवीण चित्रवेल (ट्रिपल जंप) कार्तिक उन्नीकृष्णन (ट्रिपल जंप), करणवीर सिंह (गोला फेंक), तजिंदरपाल सिंह तूर (गोला फेंक), दमनीत सिंह (हथौड़ा फेंक), नीरज चोपड़ा (भाला फेंक), रोहित यादव (भाला फेंकने का खेल), तौफीक नौशाद (डेकाथलॉन), तेजस्विन शंकर (डेकाथलॉन)

महिला:– प्राची चौधरी (400 मी), गौतमी जयारमन (800 मी), पूजा (800मी, 1500मी), पारुल चौधरी (1500 मीटर, 5000 मीटर, 3000 मीटर स्टीपलचेज़), सीमा (5000 मी, 10000 मी), प्रियंका गोस्वामी (मैराथन रेस वॉक), मंजू रानी (मैराथन रेस वॉक), ज्योति याराजी (100 मीटर बाधा दौड़), नंदिनी कोंगन (100 मीटर बाधा दौड़), उन्नति अयप्पा बोलैंड (200मी), अनु राघवन (400 मीटर बाधा दौड़), विथ्या रामराज (400 मीटर बाधा दौड़), अंकिता ध्यानी (3000 मीटर स्टीपलचेज), तमन्ना (4×100 मीटर रिले, मिश्रित 4×100 मीटर रिले), नित्या गंधे (4×100 मीटर रिले), सरबानी नंदा (4×100 मीटर रिले), अबिनया राजराजन (4×100 मीटर रिले) स्नेहा सत्यनारायण (4×100 मीटर रिले, मिश्रित 4×100 मीटर रिले), सुदेशना शिवंकर (4×100 मीटर रिले), रशदीप कौर (4×400 मीटर रिले, मिश्रित 4×400 मीटर रिले), अनसा बाबू (4×400 मीटर रिले, मिश्रित 4×400 मीटर रिले),

यूपी का राजनीतिक भविष्यफल!

यूपी का राजनीतिक भविष्यफल!

क्या आप उत्तर प्रदेश से हैं? किसी राजनीतिक दल से आगामी विधानसभा चुनाव के लिए टिकटार्थी हैं? अगर हां, तो आपको किसी विरहन की तरह भादों की रातें भारी लगेंगी। 

 

क्वार में आसमान साफ होने तक आपकी स्थिति कुछ हद तक साफ होगी। फिर भी मुकम्मल तौर पर कुछ कहना मुश्किल है। इसलिए देवताओं की परिक्रमा करते रहिए। अपनी श्रद्धा के अनुसार दान-दक्षिणा भी देते रहिए।

 

त्रेता में बारिश के बाद ही लंका कांड हुआ था। भगवान श्रीराम उत्तर प्रदेश के अयोध्या से ही थे। अब कलयुग में इस बार उत्तर प्रदेश में क्या होगा, कहना संभव नहीं। सब कुछ रामजी की मर्जी पर है। अपने मंदिर के चढ़ावे की कथित चोरी से वह खुश हैं या नाराज, यह वक्त बताएगा।

 

हर दौर की तरह इस बार भी विभीषणों की चांदी रहेगी। इन दिनों विभीषण कुछ ज्यादा ही हैं, इसलिए मिलेंगे भी खूब। 

लेकिन ध्यान रखिए—ये त्रेता वाले विभीषण नहीं, कलयुग के विभीषण हैं। इनकी निष्ठा संदिग्ध रहेगी। ये विपक्ष यानी रावण का साथ छोड़कर आपके साथ आएं, यह जरूरी नहीं। मौका मिला तो आपको ही मरवाने की भूमिका में भी नजर आ सकते हैं। इसलिए इनसे दोस्ती करते समय सावधानी जरूरी है।

 

सावन-भादों में बारिश अच्छी हुई है और सिलसिला अभी जारी है। इससे मौसमी नेताओं यानी ‘मेंढकों’  की खुशी का ठिकाना नहीं। इनकी टर्र-टर्र अभी और बढ़ेगी। हालांकि इस पर बहुत ध्यान देने की जरूरत नहीं, क्योंकि टर्राना मेंढकों का स्वभाव है और मौसम बदलते ही इनकी आवाज भी बदल जाएगी।

 

भादों मौसम के बदलाव का प्रतीक है। कुछ दिनों में मानसून की वापसी शुरू होगी। उत्तर प्रदेश में भी राजनीतिक मौसम बदलेगा या नहीं, फिलहाल मुकम्मल तौर पर कुछ कहना मुश्किल है।

 

ग्लोबल वार्मिंग ने मौसम को जितना अप्रत्याशित बनाया है, उससे कहीं ज्यादा चुनावी राजनीति ने सियासी मौसम को। देश के सबसे बड़े सूबे में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए बढ़ता चुनावी तापमान आने वाले दिनों को और अस्थिर बनाएगा। 

 

इसलिए थोड़ा दिल थामकर इंतजार करिए। आने वाले दिनों में कई चेहरे बदलेंगे, कई मौसम बदलेंगे और कई भविष्यफल गलत साबित होंगे। लेकिन तब तक एक काम जरूर कर लीजिए—SIR के बाद यह जरूर देख लीजिए कि आप मतदाता हैं भी या नहीं!

ओरछा में रामराजा लोक के निर्माण कार्यों का CM डॉ. मोहन यादव ने लिया जायजा, स्थानीय दुकानदारों से किया संवाद

ओरछा में रामराजा लोक के निर्माण कार्यों का CM डॉ. मोहन यादव ने लिया जायजा, स्थानीय दुकानदारों से किया संवाद

भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि ओरछा को पर्यटन के अद्भुत केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। ओरछा का राम राजा मंदिर हमारे गौरवशाली अतीत की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संपदा है। यहां के मंदिर एवं महल तत्कालीन समृद्ध स्थापत्य के प्रत्यक्ष उदाहरण हैं, जो हमें हमारी प्राचीन धरोहर और संस्कृति से जोड़े रखते हैं। ये तत्कालीन उन्नत तकनीक और स्थापत्य के भी अद्भुत उदाहरण हैं, पहले एअर कंडीशनर नहीं होते थे, लेकिन यहां के भवन वातानुकूलित बने है, जो गर्मी में ठंडे और ठंड में गर्मी का एहसास कराते हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आज ओरछा स्थित ऐतिहासिक एवं आस्था के प्रमुख केन्द्र श्री रामराजा लोक में जारी निर्माण कार्यों का अवलोकन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने  निर्माण कार्यों की प्रगति की जानकारी लेते हुए संबंधित अधिकारियों को कार्यों को गुणवत्ता के साथ निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निरीक्षण के बाद मीडिया से चर्चा में यह विचार-व्यक्त किए।

 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्माणाधीन रामराजा लोक परिसर में विभिन्न प्रतिष्ठानों का निरीक्षण करते हुए प्रतिष्ठान संचालकों से संवाद किया तथा उनकी समस्याओं और सुझावों को सुना। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को प्राप्त समस्याओं के निराकरण के लिए आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जुझार सिंह महल में चल रहे निर्माण तथा जीर्णोद्धार कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने जहांगीर महल का भ्रमण कर यहां की ऐतिहासिक एवं समृद्ध स्थापत्य कला का अवलोकन भी किया।

 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव को निरीक्षण के दौरान आर्किटेक्ट द्वारा मंदिर परिसर स्थित प्राचीन एवं ऐतिहासिक ‘सावन-भादो’ स्तंभों के संरक्षण एवं उनके स्थापत्य महत्व के संबंध में विस्तृत जानकारी दी गई। बताया कि रामराजा लोक की संरचना एवं विकास कार्यों को आकार देते समय मंदिर परिसर की प्राचीन धरोहरों, विशेषकर ‘सावन-भादो’ स्तंभों के मूल स्वरूप एवं ऐतिहासिक महत्व का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। बुंदेलखंड की विशिष्ट स्थापत्य कला के प्रतीक इन प्राचीन स्तंभों की संरचना एवं निर्माण शैली अपने समय की उन्नत तकनीक को दर्शाती है। नए निर्माण कार्यों के दौरान इन प्राचीन संरचनाओं को किसी प्रकार की क्षति नही पहुंचे, इसका विशेष ध्यान रखते हुए उनके आसपास के क्षेत्र को व्यवस्थित, सुंदर एवं श्रद्धालुओं के लिए सुगम बनाया जा रहा है।

 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारे गौरवशाली बुन्देला राजाओं का ओरछा बुंदेलखंड की राजधानी के रूप पहचाना जाता था। यहां के प्राचीन महल और भवन, हमारी समृद्ध विरासत हैं, उसे जीवंत करने के लिए सरकार काम कर रही है। तत्कालीन समय में निर्माण कार्यों में जिस प्रकार की सामग्री लगाई जाती थी, उसी सामग्री से भवनों का जीर्णोद्धार कराया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य यह है कि हमारे गौरवशाली अतीत के प्रतीक ये भवन उसी स्वरूप में दिखें जिस स्वरूप में वह वर्षों पहले थे। इसके लिए हमारे अधिकारियों के नेतृत्व और मार्गदर्शन में कुशल कारीगर काम कर रहे हैं।

 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि श्री महाकाल महालोक के निर्माण के बाद उज्जैन आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, उज्जैन की अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव आया है। इसी तर्ज पर मध्यप्रदेश के प्रमुख तीर्थस्थलों जैसे ओरछा, चित्रकूट, दतिया, नलखेड़ा, पशुपतिनाथ मंदसौर आदि का भी समग्र विकास किया जा रहा है। इससे धार्मिक पर्यटन को प्रोत्साहन मिलेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

भगवान श्रीराम ने अपने 14 वर्ष के वनवास में, लम्बी अवधि चित्रकूट में व्यतीत की। भगवान श्रीकृष्ण की जहां शिक्षा भी हुई, उज्जैन के सांदीपनि आश्रम सहित भगवान श्रीकृष्ण की जहां-जहां लीलाएं हुईं, उन सब स्थानों को तीर्थ के रूप में विकसित किया जाएगा। हमारी गौरवशाली विरासत को धार्मिक सांस्कृतिक भावनाओं के अनुरूप आने वाली पीढ़ियों से जोड़ने और उन्हें इस अतीत से परिचित कराने के लिए विभिन्न गतिविधियां संचालित हैं, इन्हें संरक्षित करना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। ओरछा में भव्य श्री रामराजा लोक का निर्माण किया जा रहा है, जो आने वाले समय में देश-दुनिया के श्रद्धालुओं के लिए प्रमुख तीर्थस्थल बनेगा।

Rakhi Shubh Muhurat: सुबह का शुभ मुहूर्त चूक गए तो जानिए आज रक्षाबंधन पर कब-कब बांधी जा सकती है राखी और कब नहीं

Rakhi Shubh Muhurat: रक्षा बंधन का पर्व सावन माह की पूर्णिमा तिथि पर मनाया जाता है। साल 2026 में 27 अगस्त को सुबह 9.08 बजे शुरू हुई पूर्णिमा तिथि आज यानी 28 अगस्त को सुबह 9.48 बजे तक ही व्याप्त थी। 27 अगस्त को सावन पूर्णिमा तिथि सूर्य व्यापिनी नहीं थी। साथ ही, पूर्णिमा तिथि लगने के साथ ही सुबह 9.08 बजे से भद्रा भी लग रही थी। भद्रा को हिंदू धर्म में सबसे अशुभ समय माना जाता है, जिसमें शुभ और मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं। रक्षा बंधन का पर्व भी भद्रा काल में करने की मनाही है।

वहीं, आज यानी 28 अगस्त को उदयातिथि में सावन पूर्णिमा होने और भद्रा रहित समय मिलने की वजह से रक्षा बंधन का पर्व आज मनाया जा रहा है। लेकिन पूर्णिमा तिथि सुबह जल्दी समाप्त होने के करण ऐसे बहुत से भाई-बहन हैं, जो इस समय में राखी नहीं बांध पाए होंगे। ऐसे में क्या अब वे अपना त्योहार नहीं मना पाएंगे? अगर आप भी ऐसा ही कुछ सोच रहे हैं, तो आज यानी 28 अगस्त को दिन के कुछ अन्य शुभ मुहूर्त हम आपको बता रहे हैं, जिसमें बहनें अपने भाइयों को बिना किसी दुविधा या संकोच के राखी बांध सकती हैं और धूमधाम से पर्व का आनंद ले सकती हैं।

राखी बांधने का शुभ मुहूर्त

सावन माह की पूर्णिमा तिथि 28 अगस्त 2026 को सुबह 9 बजकर 48 मिनट तक थी। रक्षाबंधन के दिन राखी बांधने का सबसे उत्तम मुहूर्त सुबह 6 बजकर 23 मिनट से सुबह 9 बजकर 48 मिनट तक रहेगा। इसके अलावा अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 14 मिनट से दोपहर 1 बजकर 5 मिनट तक रहेगा।

राखी बांधने का मुहूर्त 28 अगस्त 2026

चल चौघड़िया : सुबह में 5 बजकर 57 मिनट से 7 बजकर 33 मिनट तक।

लाभ चौघड़िया : सुबह में 7 बजकर 33 मिनट से 9 बजकर 10 मिनट तक।

अमृत चौघड़िया : सुबह में 9 बजकर 10 मिनट से 10 बजकर 46 मिनट तक।

शुभ चौघड़िया : दोपहर में 12 बजकर 22 मिनट से 1 बजकर 58 मिनट तक।

आज इस समय भूलकर भी न बांधें राखी

ऊपर बताए गए मुहूर्त राखी बांधने के लिए शुभ रहेंगे। लेकिन, इस दौरान आपको कुछ बातों का विशेष ख्याल रखना होगा। जैसे की राहुकाल और रोग चौघड़िया जैसे अशुभ मुहूर्त में राखी न बांधे। 28 अगस्त को राहुकाल का समय सुबह 10 बजकर 30 मिनट से दोपहर 12 बजकर 00 मिनट तक है। वहीं, इस दिन रोग चौघड़िया का समय दोपहर में 1 बजकर 58 मिनट से 3 बजकर 35 मिनट तक है। इसके अलावा उद्वेग चौघड़िया दोपहर में 3 बजकर 35 मिनट से 7 बजकर 11 मिनट तक रहेगा।

Sawan Purnima Chandra Grahan 2026: सावन पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण आज, जानें स्नान-दान का समय और चंद्र ग्रहण के बाद किन चीजों का करें दान

Rakhi Bandhne Ke Niyam: राखी बांधते समय ध्यान रखें दिशा का यह नियम, जानें राखी बांधने के ये जरूरी नियम

Rakhi Bandhne Ke Niyam: रक्षा बंधन का त्योहार 28 अगस्त को मनाया जाएगा। सावन माह की पूर्णिमा को मनाए जाने वाले इस पर्व का हिंदू धर्म में विशेष स्थान है। यह पर्व भाई-बहन के अटूट रिश्ते, भरोसे और प्रेम का प्रतीक है। बहनें इस दिन अपने भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधती हैं और भगवान से उनके लिए लंबी आयु, सुख-समृद्धि और संपन्नता का आशीर्वाद मांगती हैं। इस रक्षा सूत्र के बदले भाई अपने बहन की हमेशा रक्षा करने का वचन देते हैं।

इस दिन भाई और बहन को राखी बांधते समय कुछ बातों को लेकर बेहद सतर्क रहना चाहिए। माना जाता है कि राखी बांधते समय सही दिशा और विधि का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। ऐसा करने से भाई-बहन के रिश्ते में मिठास बनी रहती है। साथ ही, जीवन में सकारात्मकता और खुशहाली आती है। हिंदू धर्म और ज्योतिष शास्त्र के अनुसार राखी बांधते समय भाई और बहन दोनों की दिशा का ध्यान रखना बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है :

भाई का मुख : राखी बंधवाते समय भाई का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए। ज्योतिष और वास्तु दोनों ही शास्त्रों में इस दिशा को शुभ माना गया है। माना जाता है कि सही दिशा का ध्यान रखते हुए रक्षा बंधन करने पर जीवन में सकारात्मकता बनी रहती है। यह बात ध्यान रखनी बहुत जरूरी है कि राखी बांधते समय गलती से भी भाई का चेहरा दक्षिण दिशा की ओर नहीं होना चाहिए। यह दिशा यम और पितरों की होती है।

बहन का मुख : भाई का मुख पूर्व या उत्तर में होने पर बहन का मुख अपने आप पश्चिम या दक्षिण दिशा की ओर होगा। इस विधि से राखी बांधना शास्त्र सम्मत और सकारात्मक माना जाता है।

राखी बांधने के मुख्य नियम

सिर पर कपड़ा रखें : भाई को नंगे सिर राखी नहीं बंधवानी चाहिए। राखी बंधवाते समय सिर पर रुमाल या कोई कपड़ा अवश्य रखें।

अक्षत और तिलक : सबसे पहले भाई के माथे पर कुमकुम/रोली का तिलक लगाएं और उस पर अक्षत (चावल) लगाएं। ध्यान रखें कि चावल टूटे हुए न हों।

दाहिने हाथ की कलाई : राखी हमेशा भाई की दाहिनी कलाई पर ही बांधी जानी चाहिए।

तीन गांठें लगाएं : राखी बांधते समय उसमें 3 गांठें लगाना शुभ माना जाता है। ये तीन गांठें ब्रह्मा, विष्णु, महेश यानी त्रिदेव का प्रतीक मानी जाती हैं।

आरती उतारें : राखी बांधने के बाद भाई की आरती उतारें, उसका मुंह मीठा कराएं और भाई अपनी बहन के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद ले या उससे छोटी बहन को आशीर्वाद व उपहार दे।

भद्रा काल और राहूकाल का ध्यान : भद्रा काल और राहूकाल में राखी बांधना वर्जित माना जाता है, इसलिए हमेशा शुभ मुहूर्त में ही रक्षासूत्र बांधें।

Rakhi Puja Thali Items: रक्षा बंधन पूजा की थाली में क्यों रखी जाती हैं ये 7 चीजें, जानें क्या हैं ये और इनका महत्व

Rakhi Puja Thali Items: रक्षा बंधन पूजा की थाली में क्यों रखी जाती हैं ये 7 चीजें, जानें क्या हैं ये और इनका महत्व

Rakhi Puja Thali Items: भाई बहन के प्रेम का प्रतीक पर्व रक्षा बंधन कल धूमधाम से मनाया जाएगा। इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र यानी राखी बांधती हैं। उन्हें तिलक कर आरती उतारती हैं। इस तरह वे अपने भाई पर आने वाले हर खतरे, हर परेशानी से सुरक्षा की कामना करती हैं और उन्हें जीवन में सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं।

भाई अपनी बहन की हमेशा देखभाल और सुरक्षा का वचन देते हैं। हर साल सावन माह की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला यह पर्व कल पूरे जोश और उल्लास के साथ संपन्न होगा। रक्षाबंधन पर भाई की कलाई पर राखी बांधने से पहले पूजा की थाली को सही तरीके से सजाना धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से बहुत शुभ माना जाता है।

रक्षाबंधन का मुहूर्त 2026

श्रावण पूर्णिमा तिथि का प्रारंभ : 27 अगस्त, गुरुवार, सुबह 9:08 बजे से

श्रावण पूर्णिमा तिथि का समापन : 28 अगस्त, शुक्रवार, सुबह 9:48 बजे पर

राखी बांधने का मुहूर्त : सुबह 05:57 बजे से लेकर सुबह 9:48 बजे तक

थाली में ये 7 चीजें जरूर होनी चाहिए

राखी (रक्षासूत्र): भाई की कलाई पर बांधने के लिए राखी थाली की सबसे मुख्य सामग्री है। यह भाई-बहन के पवित्र रिश्ते और रक्षा के वचन को दर्शाती है।

दीपक : आरती उतारने के लिए देसी घी या तेल का जलता हुआ दीपक थाली में रखें। भाई की आरती उतारकर उसकी लंबी उम्र और बुरी नजर से रक्षा की प्रार्थना की जाती है।

अक्षत (साबुत चावल): तिलक लगाने के बाद उस पर अक्षत लगाया जाता है। ध्यान रखें कि चावल टूटे हुए न हों। अक्षत अखंड सौभाग्य और समृद्धि का प्रतीक है।

रोली या कुमकुम : रक्षाबंधन पर भाई के माथे पर तिलक लगाने के लिए रोली अनिवार्य है। इसे शुभता, विजय और आरोग्य का प्रतीक माना जाता है।

मिठाई : तिलक और आरती के बाद भाई का मुंह मीठा कराने के लिए मिठाई जरूर रखें। इससे रिश्ते में मिठास और स्नेह बना रहता है।

नारियल (श्रीफल): कई परंपराओं में राखी बांधते समय भाई के हाथ में नारियल दिया जाता है। नारियल को सुख-समृद्धि और शुभ कार्यों की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है।

गंगाजल या थोड़ा पानी : तिलक बनाने (रोली घोलने) के लिए और हाथ धोने के लिए थाली में थोड़ा सा गंगाजल या जल का छोटा पात्र रखें।

Raksha Bandhan Muhurat 2026: सुबह ही खत्म हो रही है पूर्णिमा, फिर भी पूरे दिन बहनें बांध सकेंगी अपने भाइयों को राखी, जानें कैसे

Raksha Bandhan 2026: रक्षा बंधन पर्व कब है और इसका शुभ मुहूर्त कब है? महंत रोहित शास्त्री से जानें किस समय राखी बांधने से बचें

Raksha Bandhan 2026: रक्षा बंधन का पर्व भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक पर्व है। इस दिन बहनें अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती हैं और उनकी सुरक्षा के लिए भगवान से प्रार्थना करती हैं। भाई अपनी बहनों का ध्यान रखने और उनकी सुरक्षा करने का वचन देते हैं। हिंदू धर्म में इस पर्व को काफी उत्साह और धूमधाम से मनाया जाता है। रक्षा बंधन का पर्व हर साल सावन माह की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। श्री कैलख ज्योतिष एवं वैदिक संस्थान ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं स्टेट अवॉर्डी महंत रोहित शास्त्री ज्योतिषाचार्य ने बताया कि रक्षाबंधन का पावन पर्व इस वर्ष 28 अगस्त, शुक्रवार को मनाया जाएगा।

कब से लग रही सावन पूर्णिमा तिथि

महंत रोहित शास्त्री के अनुसार, श्रावण पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त, गुरुवार को सुबह 09:09 बजे प्रारंभ होकर 28 अगस्त, शुक्रवार को सुबह 09:49 बजे समाप्त होगी। चूंकि 28 अगस्त को सूर्योदय-व्यापिनी पूर्णिमा है, इसलिए रक्षाबंधन का पर्व इसी दिन मनाया जाएगा।

राहुकाल में नहीं बाधें रखी

महंत रोहित शास्त्री ने बताया कि राहुकाल सुबह 10:45 बजे से दोपहर 12:22 बजे तक रहेगा। अतः इस इस बहनों का भाई का राखी बांधना अशुभ होगा। इस अवधि को छोड़कर पूरे दिन राखी बांध सकते हैं।

रक्षा बंधन में नहीं होगा चंद्रग्रहण का भेद

महंत रोहित शास्त्री ने बताया कि इस दिन चंद्रग्रहण अवश्य है, लेकिन यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। इसलिए भारत में रहने वाले लोगों के लिए इससे संबंधित किसी प्रकार की विशेष धार्मिक या सामाजिक नियम करने की आवश्यकता नहीं है। मंदिरों के कपाट बंद करने अथवा पूजा-पाठ रोकने जैसी कोई आवश्यकता नहीं होगी। जब ग्रहण भारत में दिखाई ही नहीं देगा, तो सूतक आदि को लेकर अनावश्यक भय या तनाव पालना उचित नहीं है। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि गर्भवती महिलाओं को घबराने अथवा किसी प्रकार के नियमों का पालन करने की जरूरत नहीं है। गर्भवती महिलाएं अपनी सामान्य दिनचर्या जारी रखें और बेवजह की पाबंदियों से स्वयं को परेशान न करें।

उन्होंने कहा कि धार्मिक आस्थाओं का सम्मान अपनी जगह है, लेकिन आस्था के साथ विवेक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण भी आवश्यक है। किसी भी प्राकृतिक खगोलीय घटना को लेकर डर, भ्रम या अफवाह फैलाने के बजाय सही जानकारी को समझना और दूसरों तक पहुंचाना बेहतर है। अतः इस दिन लोग सामान्य रूप से अपना कार्य करें। गर्भवती महिलाएं निश्चिंत रहें, मंदिरों के कपाट सामान्य रूप से खुले रहें और चंद्रग्रहण को लेकर किसी प्रकार का अनावश्यक भय या भ्रम न रखा जाए।

पूरे दिन मना सकते हैं रक्षा बंधन का पर्व

महंत रोहित शास्त्री ने कहा कि 28 अगस्त को सूर्योदय व्यापिनी तिथि पूरे दिन है, इसलिए रक्षा बंधन का पर्व पूरे दिन मनाया जा सकेगा। पूर्णिमा तिथि के सुबह 9.49 बजे तक ही रहने का कोई प्रभाव नहीं होगा।

पूर्णिमा व्रत को लेकर भी दूर किया भ्रम

श्री कैलख ज्योतिष एवं वैदिक संस्थान ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं स्टेट अवॉर्डी महंत रोहित शास्त्री ज्योतिषाचार्य ने सावन पूर्णिमा के व्रत को लेकर भी भ्रम दूर किया है। उन्होंने कहा कि जो लोग पूर्णिमा तिथि पर रात के समय पूजा करते हैं वे 27 अगस्त को व्रत करेंगे, जबकि दिन में पूर्णिमा व्रत की पूजा करने वाले श्रद्धालु 28 अगस्त 2026 को उपवास करेंगे।

राखी बांधने की पारंपरिक विधि

  • बहन सर्वप्रथम भाई को तिलक लगाए, आरती करें और अक्षत अर्पित करें।
  • इसके बाद भाई की दाहिनी कलाई पर राखी बांधे और उसका पूजन करे।
  • भाई को मिठाई खिलाएं।
  • इसके पश्चात भाई बहन के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद प्राप्त करें।
  • भाई अपनी बहन को उपहार भेंट करें।
  • यह संपूर्ण प्रक्रिया व्रत अथवा उपवास रखकर संपन्न करना श्रेष्ठ माना गया है।

अगर पास में न हो भाई, तो क्या करें?

यदि भाई-बहन एक स्थान पर उपस्थित न हो सकें, तो बहन भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा को राखी बांधकर पूजा करें और भाई की मंगलकामना करें। भाई भी राखी को भगवान से स्पर्श कर रक्षा का संकल्प ले सकता है। श्रद्धापूर्वक किया गया यह प्रतीकात्मक राखी बंधन भी धार्मिक दृष्टि से फलदायी माना जाता है।

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Asian Games में नीरज चोपड़ा करेंगे 55 भारतीय एथलीटों की अगुवाई

Neeraj Chopra

दो बार के ओलंपिक पदक विजेता नीरज चोपड़ा, जापान के आइची-नागोया में 19 सितंबर से 4 अक्टूबर तक होने वाले एशियन गेम्स 2026 में 73 सदस्यों वाली भारतीय एथलेटिक्स दल की अगुवाई करेंगे। भारत के स्टार जैवलिन थ्रोअर (भाला फेंकने वाले खिलाड़ी) नीरज चोपड़ा एशियन गेम्स में दो बार के डिफेंडिंग चैंपियन के तौर पर हिस्सा लेंगे। उन्होंने जकार्ता 2018 और हांगझोऊ 2023 में गोल्ड मेडल जीता था। भारतीय जैवलिन थ्रोअर के साथ रोहित यादव भी होंगे, जिन्होंने शनिवार को भुवनेश्वर में वर्ल्ड एथलेटिक्स कॉन्टिनेंटल टूर सिल्वर मीट में जीत हासिल करते हुए अपना पर्सनल बेस्ट 87.68 मीटर किया।

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के कांस्य पदक विजेता यश वीर सिंह इसमें शामिल नहीं हो पाए हैं, क्योंकि इस प्रतियोगिता के लिए केवल दो भारतीयों को चुना गया है। आइची-नागोया 2026 के लिए चुनी गई भारत की एथलेटिक्स टीम के 16 खिलाड़ी हांगझोऊ में हुए पिछले एशियन गेम्स में मेडलिस्ट रहे थे।

नीरज के अलावा, अविनाश साबले, तजिंदरपाल सिंह तूर, पारुल चौधरी और अन्नू रानी उन खिताबों को बचाने के लिए वापसी करेंगे जो उन्होंने तीन साल पहले व्यक्तिगत इवेंट्स में जीते थे।राजेश रमेश, जो हांगझोऊ में भारत की गोल्ड मेडल जीतने वाली पुरुषों की 4×400 मीटर रिले टीम का हिस्सा थे, वे भी वापसी करने वाले चैंपियंस में शामिल हैं।

साबले ने हांगझोऊ में 3000 मीटर स्टीपलचेज में स्वर्ण और 5000 मीटर में रजत पदक जीता था। नेशनल रिकॉर्ड होल्डर साबले को पिछले साल अपने दाहिने घुटने की सर्जरी के बाद चोटों से जूझना पड़ा और वे ग्लासगो में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में हिस्सा नहीं ले पाए थे।

वहीं, दो बार के डिफेंडिंग चैंपियन तजिंदरपाल सिंह तूर लगातार तीसरी बार शॉट पुट का खिताब जीतने की कोशिश करेंगे; उन्होंने जकार्ता 2018 और हांगझोऊ 2023, दोनों में टॉप स्थान हासिल किया था। पारुल चौधरी, जिन्होंने तीन साल पहले 5000 मीटर में स्वर्ण और 3000 मीटर स्टीपलचेज में रजत पदक जीता था, उन्हें 1500 मीटर, 5000 मीटर और 3000 मीटर स्टीपलचेज़ के लिए चुना गया है।

ज्योति याराजी ग्लासगो में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में हिस्सा नहीं ले पाई थीं, लेकिन वे एशियन गेम्स में 100 मीटर हर्डल्स (बाधा दौड़) में हिस्सा लेंगी। उन्होंने हांगझोऊ में इस स्पर्धा में रजत पदक जीता था। ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में लॉन्ग जंप में दूसरा रजत पदक जीतने के बाद मुरली श्रीशंकर जापान जा रहे हैं। उन्होंने पिछले एशियन गेम्स में भी रजत पदक जीता था।

तेजस्विन शंकर, गुलवीर सिंह, मोहम्मद अफसल, एंसी सोजन, प्रवीण चित्रवेल और विथ्या रामराज एशियन गेम्स में पदक जीतने वाले वे अन्य खिलाड़ी हैं जिन्हें आइची-नागोया के लिए चुना गया है। ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स के दौरान बाएं पैर में दो स्ट्रेस फ्रैक्चर होने के बावजूद तेज शिर्से को 110 मीटर हर्डल्स स्पर्धा में शामिल किया गया है।

झगझोऊ में हुए एशियन गेम्स में भारत का एथलेटिक्स में अब तक का सबसे अच्छा प्रदर्शन रहा, जिसमें उसने कुल 29 पदक जीते – छह स्वर्ण, 14 रजत और नौ कांस्य। कुल मेडल की संख्या के हिसाब से 2023 के गेम्स में एथलेटिक्स भारत का सबसे सफल खेल रहा।

एशियाई खेल 2026 के लिए भारतीय एथलेटिक्स टीम इस प्रकार है:-

पुरुषों:-गुरिंदरवीर सिंह (100मी), अनिमेष कुजूर (100 मीटर, 200 मीटर, मिश्रित 4×100 मीटर रिले), राजेश रमेश (400 मीटर, 4×400 मीटर रिले), विशाल थेनारासु कयालविझी (400 मीटर, 4×400 मीटर रिले), कृष्ण कुमार (800 मी), मोहम्मद अफसल पुलिककलाकथ (800मी), यूनुस शाह (1500 मी), अभिषेक पाल (5000 मी, 10000 मी), गुलवीर सिंह (1500 मीटर, 5000 मीटर, 10000 मीटर)। सावन बरवाल (मैराथन), कार्तिक कारकेरा (मैराथन), तेजस शिरसे (110 मीटर बाधा दौड़), यशस पलाक्ष (400 मीटर बाधा दौड़), संतोष कुमार तमिलारासन (400 मीटर बाधा दौड़), अविनाश साबले (3000 मीटर स्टीपलचेज), प्रणव प्रमोद गुरव (मिश्रित 4×100 मीटर रिले), मोहम्मद अशफाक (4×400 मीटर रिले), धर्मवीर चौधरी (4×400 मीटर रिले), जय कुमार (4×400 मीटर रिले, मिश्रित 4×400 मीटर रिले), मनु थेक्किनालिल साजी (4×400 मीटर रिले, मिश्रित 4×400 मीटर रिले), आदर्श राम ज्योति शंकर (ऊंची कूद), सर्वेश कुशारे (ऊंची कूद) , कुलदीप कुमार (पोल वॉल्ट), देव मीना (पोल वॉल्ट), मुरली श्रीशंकर (लंबी कूद), शाहनवाज खान (लंबी कूद), प्रवीण चित्रवेल (ट्रिपल जंप) कार्तिक उन्नीकृष्णन (ट्रिपल जंप), करणवीर सिंह (गोला फेंक), तजिंदरपाल सिंह तूर (गोला फेंक), दमनीत सिंह (हथौड़ा फेंक), नीरज चोपड़ा (भाला फेंक), रोहित यादव (भाला फेंकने का खेल), तौफीक नौशाद (डेकाथलॉन), तेजस्विन शंकर (डेकाथलॉन)

(Image Source : X/Athletics Federation of India)

महिला:– प्राची चौधरी (400 मी), गौतमी जयारमन (800 मी), पूजा (800मी, 1500मी), पारुल चौधरी (1500 मीटर, 5000 मीटर, 3000 मीटर स्टीपलचेज़), सीमा (5000 मी, 10000 मी), प्रियंका गोस्वामी (मैराथन रेस वॉक), मंजू रानी (मैराथन रेस वॉक), ज्योति याराजी (100 मीटर बाधा दौड़), नंदिनी कोंगन (100 मीटर बाधा दौड़), उन्नति अयप्पा बोलैंड (200मी), अनु राघवन (400 मीटर बाधा दौड़), विथ्या रामराज (400 मीटर बाधा दौड़), अंकिता ध्यानी (3000 मीटर स्टीपलचेज), तमन्ना (4×100 मीटर रिले, मिश्रित 4×100 मीटर रिले), नित्या गंधे (4×100 मीटर रिले), सरबानी नंदा (4×100 मीटर रिले), अबिनया राजराजन (4×100 मीटर रिले) स्नेहा सत्यनारायण (4×100 मीटर रिले, मिश्रित 4×100 मीटर रिले), सुदेशना शिवंकर (4×100 मीटर रिले), रशदीप कौर (4×400 मीटर रिले, मिश्रित 4×400 मीटर रिले), अनसा बाबू (4×400 मीटर रिले, मिश्रित 4×400 मीटर रिले),

Raksha Bandhan 2026: रक्षा बंधन पर ग्रहण और भद्रा के साथ रहेगा पंचक का साया, जानें त्योहार पर पंचक का क्या होगा असर

Raksha Bandhan 2026: रक्षा बंधन का पर्व भाई-बहन के प्रेम का पर्व है। इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधती हैं और उनकी सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। बदले में भाई अपनी बहनों की हमेशा रक्षा करने का वचन देते हैं और राखी बांधने पर उन्हें उपहार देते हैं। यह पर्व हर साल सावन की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। हिंदू धर्म में इस पर्व और इस दिन का विशेष स्थान है। इसके अलावा इस साल रक्षा बंधन पर कई दुर्लभ संयोग बन रहे हैं।

इस साल रक्षा बंधन पर साल 2026 का दूसरा और अंतिम चंद्र ग्रहण लग रहा है। सावन पूर्णिमा पर भद्रा का साया रहेगा और साथ ही पंचक भी रहेगा। यह तीनों ही ऐसी बातें हैं, जिनमें शुभ और मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं। राखी बांधते समय भद्रा, ग्रहण और पंचक का विचार किया जाता है। ऐसे में लोगों के मन में राखी के त्योहार को लेकर भ्रम हो रहा है कि भद्रा और पंचक के दौरान राखी बांधने को लेकर क्या नियम और मान्यताएं हैं :

भद्रा का विचार : शास्त्रों में भद्रा के समय राखी बांधना पूरी तरह वर्जित माना गया है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, रावण को उसकी बहन सूर्पणखा ने भद्रा काल में ही राखी बांधी थी, जिसके कारण उसके पूरे कुल का नाश हो गया। इसलिए भद्रा समाप्त होने के बाद ही राखी बांधी जाती है।

पंचक का विचार : पंचक के दौरान राखी बांधने पर कोई प्रतिबंध या दोष नहीं होता है। पंचक का प्रभाव मुख्य रूप से नए घर के निर्माण, छत ढालने, लकड़ी इकट्ठा करने, दक्षिण दिशा की यात्रा करने या अंतिम संस्कार जैसे कार्यों पर लागू होता है। रक्षाबंधन जैसे शुभ और धार्मिक त्यौहार पर इसका कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ता। इस बार पंचक का आरंभ गुरुवार से हो रहा है। गुरुवार से जो पंचक आरंभ होता है उसे सामान्य माना जाता है।

राखी बांधने का सही नियम :

यदि रक्षाबंधन पर भद्रा का साया है, तो भद्रा काल बीतने का इंतजार करें।

पंचक चल रहा हो तब भी आप भद्रा रहित शुभ मुहूर्त में आराम से राखी बांध सकते हैं।

रक्षाबंधन पर पंचक और भद्रा का समय

27 अगस्त को पंचक दोपहर 1 बजकर 36 मिनट पर लग जाएगा। 28 तारीख को रक्षाबंधन है और पंचक पूरे पांच दिन रहता है। पंचक 1 सितंबर को सुबह 3 बजकर 24 मिनट पर समाप्त होगा।

27 अगस्त को भद्रा पूर्णिमा तिथि आरंभ होने के साथ ही लग जाएगी और रात 9 बजकर 29 मिनट तक रहेगी। इसलिए रक्षाबंधन 27 की बजाय 28 अगस्त को मनाया जाएगा। 28 को सूर्योदय के साथ पूर्णिमा तिथि 9 बजकर 49 मिनट तक ही है जो भद्रा मुक्त है।

रक्षाबंधन के दिन शतभिषा नक्षत्र रहेगा। इसलिए इस दिन राखी बांधने को कोई दोष नहीं लगेगा। रक्षाबंधन शतभिषा नक्षत्र में होगा। इसलिए आप बेफिक्र होकर राखी बांध सकते हैं।

रक्षाबंधन पर रहेगा चंद्र ग्रहण?

इस साल का दूसरा और अंतिम चंद्रग्रहण 28 अगस्त को लगने जा रहा है। ऐसे में सवाल यह है कि चंद्रग्रहण के दिन क्या राखी बांध सकते हैं। चंद्रग्रहण का सूतक काल ग्रहण आरंभ होने से 9 घंटे पहले लग जाता है। लेकिन, यह चंद्रग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा इसलिए इसका सूतक भी मान्य नहीं होगा। इसलिए रक्षाबंधन का पर्व आप बिना किसी के चिंता का मना सकते हैं।

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