Raksha Bandhan 2026: रक्षा बंधन पर्व कब है और इसका शुभ मुहूर्त कब है? महंत रोहित शास्त्री से जानें किस समय राखी बांधने से बचें

Raksha Bandhan 2026: रक्षा बंधन का पर्व भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक पर्व है। इस दिन बहनें अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती हैं और उनकी सुरक्षा के लिए भगवान से प्रार्थना करती हैं। भाई अपनी बहनों का ध्यान रखने और उनकी सुरक्षा करने का वचन देते हैं। हिंदू धर्म में इस पर्व को काफी उत्साह और धूमधाम से मनाया जाता है। रक्षा बंधन का पर्व हर साल सावन माह की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। श्री कैलख ज्योतिष एवं वैदिक संस्थान ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं स्टेट अवॉर्डी महंत रोहित शास्त्री ज्योतिषाचार्य ने बताया कि रक्षाबंधन का पावन पर्व इस वर्ष 28 अगस्त, शुक्रवार को मनाया जाएगा।

कब से लग रही सावन पूर्णिमा तिथि

महंत रोहित शास्त्री के अनुसार, श्रावण पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त, गुरुवार को सुबह 09:09 बजे प्रारंभ होकर 28 अगस्त, शुक्रवार को सुबह 09:49 बजे समाप्त होगी। चूंकि 28 अगस्त को सूर्योदय-व्यापिनी पूर्णिमा है, इसलिए रक्षाबंधन का पर्व इसी दिन मनाया जाएगा।

राहुकाल में नहीं बाधें रखी

महंत रोहित शास्त्री ने बताया कि राहुकाल सुबह 10:45 बजे से दोपहर 12:22 बजे तक रहेगा। अतः इस इस बहनों का भाई का राखी बांधना अशुभ होगा। इस अवधि को छोड़कर पूरे दिन राखी बांध सकते हैं।

रक्षा बंधन में नहीं होगा चंद्रग्रहण का भेद

महंत रोहित शास्त्री ने बताया कि इस दिन चंद्रग्रहण अवश्य है, लेकिन यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। इसलिए भारत में रहने वाले लोगों के लिए इससे संबंधित किसी प्रकार की विशेष धार्मिक या सामाजिक नियम करने की आवश्यकता नहीं है। मंदिरों के कपाट बंद करने अथवा पूजा-पाठ रोकने जैसी कोई आवश्यकता नहीं होगी। जब ग्रहण भारत में दिखाई ही नहीं देगा, तो सूतक आदि को लेकर अनावश्यक भय या तनाव पालना उचित नहीं है। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि गर्भवती महिलाओं को घबराने अथवा किसी प्रकार के नियमों का पालन करने की जरूरत नहीं है। गर्भवती महिलाएं अपनी सामान्य दिनचर्या जारी रखें और बेवजह की पाबंदियों से स्वयं को परेशान न करें।

उन्होंने कहा कि धार्मिक आस्थाओं का सम्मान अपनी जगह है, लेकिन आस्था के साथ विवेक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण भी आवश्यक है। किसी भी प्राकृतिक खगोलीय घटना को लेकर डर, भ्रम या अफवाह फैलाने के बजाय सही जानकारी को समझना और दूसरों तक पहुंचाना बेहतर है। अतः इस दिन लोग सामान्य रूप से अपना कार्य करें। गर्भवती महिलाएं निश्चिंत रहें, मंदिरों के कपाट सामान्य रूप से खुले रहें और चंद्रग्रहण को लेकर किसी प्रकार का अनावश्यक भय या भ्रम न रखा जाए।

पूरे दिन मना सकते हैं रक्षा बंधन का पर्व

महंत रोहित शास्त्री ने कहा कि 28 अगस्त को सूर्योदय व्यापिनी तिथि पूरे दिन है, इसलिए रक्षा बंधन का पर्व पूरे दिन मनाया जा सकेगा। पूर्णिमा तिथि के सुबह 9.49 बजे तक ही रहने का कोई प्रभाव नहीं होगा।

पूर्णिमा व्रत को लेकर भी दूर किया भ्रम

श्री कैलख ज्योतिष एवं वैदिक संस्थान ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं स्टेट अवॉर्डी महंत रोहित शास्त्री ज्योतिषाचार्य ने सावन पूर्णिमा के व्रत को लेकर भी भ्रम दूर किया है। उन्होंने कहा कि जो लोग पूर्णिमा तिथि पर रात के समय पूजा करते हैं वे 27 अगस्त को व्रत करेंगे, जबकि दिन में पूर्णिमा व्रत की पूजा करने वाले श्रद्धालु 28 अगस्त 2026 को उपवास करेंगे।

राखी बांधने की पारंपरिक विधि

  • बहन सर्वप्रथम भाई को तिलक लगाए, आरती करें और अक्षत अर्पित करें।
  • इसके बाद भाई की दाहिनी कलाई पर राखी बांधे और उसका पूजन करे।
  • भाई को मिठाई खिलाएं।
  • इसके पश्चात भाई बहन के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद प्राप्त करें।
  • भाई अपनी बहन को उपहार भेंट करें।
  • यह संपूर्ण प्रक्रिया व्रत अथवा उपवास रखकर संपन्न करना श्रेष्ठ माना गया है।

अगर पास में न हो भाई, तो क्या करें?

यदि भाई-बहन एक स्थान पर उपस्थित न हो सकें, तो बहन भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा को राखी बांधकर पूजा करें और भाई की मंगलकामना करें। भाई भी राखी को भगवान से स्पर्श कर रक्षा का संकल्प ले सकता है। श्रद्धापूर्वक किया गया यह प्रतीकात्मक राखी बंधन भी धार्मिक दृष्टि से फलदायी माना जाता है।

Kajari Teej 2026: कब है भाद्रपद की कजरी तीज? जानें व्रत की सही तारीख, पुजा का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

Hartalika Teej 2026: 13 या 14 सितंबर कब किया जाएगा हरतालिका तीज का व्रत? शिव को पति रूप में पाने के लिए मां पार्वती ने किया था ये कठिन व्रत

Hartalika Teej 2026: हरतालिका तीज का पर्व महिलाओं के लिए विशेष धार्मिक महत्व रखता है। इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के लिए व्रत रखती हैं। वहीं अविवाहित कन्याएं भी मनचाहा जीवनसाथी पाने की कामना से यह व्रत करती हैं। हरतालिका तीज का व्रत भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाने वाला एक अत्यंत पवित्र और कठिन पर्व है।

पौराणिक मान्यता के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। उनकी सखी ने उनका अपहरण (हरत) करके उन्हें घने जंगल में छिपा दिया था, इसलिए इस पर्व को ‘हरतालिका’ (हरत + आलिका/सखी) कहा जाता है। सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुखी दांपत्य जीवन के लिए यह व्रत रखती हैं। वहीं, अविवाहित कन्याएं मनचाहा और योग्य वर पाने के लिए यह पूजन करती हैं।

हरतालिका तीज व्रत 2026 तारीख

हरितालिका तीज का व्रत भादों शुक्ल पक्ष हस्त नक्षत्र युक्त तृतीया तिथि को होता है। इस बार हरितालिका तीज 14 सितंबर सोमवार के दिन है, जो कि प्रात:काल 7:14 तक है। विंध्यधाम के विद्यवान ज्योतिषाचार्य पं. अनुपम महराज ने लोकल 18 को बताया कि इस समय में माताएं एक बार शिव पूजन कर लें, फिर संपूर्ण दिन भगवान शिव का पूजन करें। हरितालिका तीज में माताएं मां पार्वती के समान निर्जला व्रत करती हैं।

पूजा का शुभ मुहूर्त

14 सितंबर 2026 को सूर्योदय सुबह 6 बजकर 5 मिनट पर होगा। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 32 मिनट से 5 बजकर 19 मिनट तक रहेगा। इसके अलावा अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 52 मिनट से दोपहर 12 बजकर 41 मिनट तक रहेगा। हरतालिका तीज की पूजा के लिए सुबह 6 बजकर 5 मिनट से 7 बजकर 6 मिनट तक का समय विशेष रूप से शुभ रहेगा।

सुबह पूजा न कर पाएं तो क्या करें?

अगर किसी कारणवश सुबह पूजा संभव न हो, तो शाम के प्रदोष काल में भी भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना की जा सकती है। 14 सितंबर को शाम 6 बजकर 28 मिनट से रात 8 बजकर 47 मिनट तक प्रदोष काल रहेगा। इस दौरान रेत या मिट्टी से बनी शिव-पार्वती की प्रतिमा की पूजा करना शुभ माना जाता है।

हरतालिका तीज व्रत 2026 पारण विधि

हरतालिका तीज व्रत का पारण दूसरे दिन पारण किया जाता है। पारण के पहले ब्राह्मण को दान पुण्य करना चाहिए। इस बार हरतालिका तीज व्रत का पारण 15 सितंबर को होगा। 15 सितंबर को सुबह 5:54 से लेकर 6:40 के मध्य में यह पारण का उत्तम काल होगा।

हरतालिका तीज व्रत 2026 की पूजा विधि

निर्जला व्रत : यह एक अत्यंत कठिन व्रत है, जिसमें पूरे 24 घंटे तक अन्न और जल का त्याग (निर्जला उपवास) किया जाता है।

सोलह श्रृंगार : महिलाएं इस दिन नए वस्त्र, हरे-लाल रंग की साड़ी, मेहंदी और सोलह श्रृंगार धारण करती हैं।

मिट्टी की मूर्तियां : प्रदोष काल में बालू (रेत) या काली मिट्टी से भगवान शिव, माता पार्वती और श्री गणेश जी की अस्थायी प्रतिमाएं बनाकर पूजा की जाती है।

सुहाग सामग्री अर्पण : माता पार्वती को सुहाग का सामान (सिंदूर, बिंदी, चूड़ियां, चुनरी आदि) अर्पित किया जाता है।

रात्रि जागरण और कथा : रात भर महिलाएं जागरण कर भजन-कीर्तन करती हैं तथा हरतालिका तीज की व्रत कथा सुनती हैं। अगले दिन सुबह पूजा-आरती के बाद ही व्रत का पारण किया जाता है।

Raksha Bandhan 2026: रक्षा बंधन पर ग्रहण और भद्रा के साथ रहेगा पंचक का साया, जानें त्योहार पर पंचक का क्या होगा असर

Hariyali Teej 2026 Date: आज शाम से शुरू हो रहा शुभ मुहूर्त, जानें 15 अगस्त को कब कैसे हरियाली तीज की करें पूजा

Hariyali Teej 2026 Date: आज 14 अगस्त 2026 का दिन बेहद खास होने वाला है। हिंदू पंचांग के मुताबिक आज सावन महीने की शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि है। वहीं शाम 6 बजकर 46 मिनट से तृतीया तिथि लग जाएगी। सावन का शु्क्रवार दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा के लिए शुभ माना गया है। बता दें कि आज हरियाली तीज की तिथि शाम 6 बजकर 46 मिनट पर शुरू होगी और 15 अगस्त की शाम 5 बजकर 28 मिनट पर समाप्त होगी।

उत्तर भारत में तीज की धूम

उत्तर भारती में तीज का त्योहार बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है। खासकर राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार और झारखंड में अलग ही माहौल होता है। श्रावण और भाद्रपद मास के दौरान महिलाएं 3 तीज मनाती हैं। यह समय जीवन में उत्साह, आनंद और पारिवारिक संतुलन बनाने का प्रतीक होता है। जानिए आज पूजा का शुभ मुहूर्त, राहुकाल, चंद्रोदय और नक्षत्र…

हरियाली तीज 2026 कब होगी?

तृतीया तिथि की शुरुआत 14 अगस्त की शाम 6 बजकर 46 मिनट पर हो रही है। इसका समापन 15 अगस्त को शाम 5 बजकर 28 मिनट पर हो जाएगा। उदयातिथि के आधार पर हरियाली तीज का व्रत 15 अगस्त 2026 को किया जाएगा। इस दिन महिलाएं व्रत रखकर भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना करेंगी। पति की लंबी आयु की कामना करेंगी।

त्योहार की तिथि- शुक्ल पक्ष की द्वितीया –शाम 6 बजकर 46 मिनट तक, फिर तृतीया तिथि की होगी शुरुआत

योग- परिघ – सुबह 09 बजकर 28 मिनट तक, फिर शिव होगा शुरू

शुभ मुहूर्त

अभिजीत मुहूर्त- दोपहर 11 बजकर 59 मिनट से दोपहर 12 बजक 52 मिनट तक

अमृत काल- रात्रि 09 बजकर 33 मिनट से रात्रि 11 बजकर 05 मिनट तक

आज के अशुभ समय

राहुकाल- सुबह 10 बजकर 47 मिनट से दोपहर 12 बजकर 26 मिनट तक

गुलिकाल- सुबह 07 बजकर 29 मिनट से प्रातः 09 बजकर 08 मिनट तक

आज का नक्षत्र

आज चंद्रदेव पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में विराजेंगे।

पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र- अगले दिन सुबह 03 बजकर 42 मिनट (15 अगस्त) तक

नक्षत्र स्वामी- शुक्रदेव

राशि स्वामी- सूर्यदेव

Hariyali Teej 2026 Vrat Vidhi: अगर पहली बार करने जा रही हैं तीज का व्रत, जान लें पूरी विधि

Hariyali Teej 2026 Vrat Vidhi: हरियाली तीज 15 अगस्त 2026, दिन शनिवार को मनाई जाने वाली है। इस दिन सभी सुहागिन महिलाएं अखंड सौभाग्य के लिए पूरी श्रद्धा और विधि विधान से व्रत करती हैं। वहीं कुंवारी लड़कियां अच्छे वर को पाने के लिए इस व्रत को रखती हैं। सावन मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को इसे मनाया जाता है। ये त्योहार मां पार्वती और भगवान शिव के पुनर्मिलन का प्रतीक माना गया है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन व्रत और शिव-पार्वती की पूजा करने से शादीशुदा जीवन सुखों से भरा रहता है। हालांकि, पूर्ण फल पाने के लिए व्रत को विधि-पूर्वक करना बेहद जरूरी है। ऐसे में अगर आप पहली बार हरियाली तीज का व्रत कर रही हैं, तो इसकी पूरी विधि जरूर जान लें।

जानें हरियाली तीज व्रत विधि

1- सावन मास की तृतीया तिथि पर व्रत रखने वाली महिलाओं को सुबह जल्दी उठकर साफ-सफाई करके स्नान कर लेना चाहिए। इसके बाद, साफ कपड़े पहने।

2- हरियाली तीज पर महिलाओं के मायके से सिंधारा या शगुन का सामान आता है। इसमें साड़ी, चूड़ियां, मिष्ठान, श्रृंगार का सामान दिया जाता है। मायके से आए सामान में से ही साड़ी पहननी चाहिए, इसे शुभ माना जाता है। इस दिन हरे रंग की साड़ी पहनना बेहद शुभ माना गया है।

3- महिलाएं इस दिन सोलह श्रृंगार करती हैं। हरियाली तीज पर सोलह श्रृंगार का बहुत महत्व होता है। इस त्योहार को सुहाग का प्रतीक माना जाता है।

4- हरियाली तीज के दिन सबसे पहले व्रत का संकल्प लें। इसके बाद सुबह शुभ मुहूर्त में भगवान शिव और माता पार्वती की स्थापना करें और पूजा करें। माता पार्वती को पूरा श्रृंगार का सामान चढ़ाएं। वहीं शिवजी को बेलपत्र, जल, फूल आदि अर्पित करें। वहीं पूजा के दौरान हरियाली तीज व्रत कथा पाठ भी जरूर करना चाहिए। भगवान को भोग अर्पित करें।

5- मान्यताओं के मुताबिक महिलाएं हरियाली तीज पर अपनी सास को श्रृंगार का सामान देती हैं। साथी ही उनका आशीर्वाद लेती हैं। इस दिन महिलाएं को झूला भी झूलती हैं। वहीं हरियाली तीज पर मेहंदी लगाना अच्छा माना जाता है।

डिस्क्लेमर- यहां पर मौजूद जानकारी की मनीकंट्रोल पुष्टी नहीं करता है। आर्टिकल में मौजूद जानकारी मान्यताओं पर आधारित है।