Hartalika Teej puja samagri list: 14 सितंबर को हरतालिका तीज व्रत करने से पहले पूजा के लिए जरूरी सामग्री जुटा लें, इनके बिना अधूरा है अटल सुहाग का व्रत

Hartalika Teej puja samagri list: हरतालिका तीज भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है। इस दिन सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र व अखंड सौभाग्य के लिए और अविवाहित कन्याएं सुयोग्य वर पाने के लिए निर्जला व्रत (बिना अन्न-जल का उपवास) रखती हैं। इस व्रत में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा का विधान है। ‘हरतालिका’ शब्द ‘हरत’ यानी हरण करना और ‘आलिका’ यानी सखी से मिलकर बना है। मान्यता है कि माता पार्वती की सखियां उन्हें घने जंगल में ले गई थीं, ताकि उनके पिता हिमालय किसी और के साथ उनका विवाह न कर पाएं। यहां उन्होंने कठोर तपस्या करके भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त किया था।

हिंदू धर्म के इस प्रमुख व्रत में पूजा के लिए जरूरी समाग्री का भी अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। इसलिए व्रत करने वाली महिलाएं इस उपवास की सभी सामग्री बहुत ध्यान से अर्जित करती हैं। आप भी यह व्रत करने जा रही हैं, तो सोमवार को व्रत शुरू करने से पहले एक बार यहां दी जा रही सामग्री सूची से अपनी सूची का मिलान कर लें। ताकि पूजा करते समय आपको कोई असुविधा न हो। आइए जानें पूजा की संपूर्ण सामग्री लिस्ट और पूजा विधि

हरतालिका व्रत 2026 तारीख और समय

वर्ष 2026 में उदया तिथि के अनुसार हरतालिका तीज 14 सितंबर 2026, सोमवार को मनाई जाएगी।

तृतीया तिथि प्रारंभ : 13 सितंबर 2026 को सुबह 07:08 बजे से

तृतीया तिथि समाप्त : 14 सितंबर 2026 को सुबह 07:06 बजे तक

प्रातःकाल पूजा मुहूर्त : 14 सितंबर 2026 को सुबह 06:05 से 07:06 बजे तक

हरतालिका तीज पूजन सामग्री लिस्ट

बालू या मिट्टी से बनी शिव, पार्वती और भगवान गणेश की प्रतिमाएं

सुहाग सामग्री (लाल चुनरी, बिंदी, चूड़ियां, आलता, मेहंदी, सिंदूर, कुमकुम, काजल, कंघी, बिछिया, पायल और अन्य श्रृंगार वस्तुएं)

रोली, चावल, कपूर, रुई, माचिस, मौली, हल्दी, चंदन, घी का दीपक, अगरबत्ती या धूपबत्ती, फल और मिठाइयां, खीर और हलवा, भिगोए हुए चने, पूजा के लिए कलश, जल और गंगाजल, पंचामृत बनाने के लिए दूध, दही, शहद, शक्कर और घी, 1 नारियल, दूर्वा घास, बेलपत्र, शमी पत्र, कच्ची हल्दी की गांठें, गेहूं या चावल, एक चौकी या आसन, मंडप बनाने के लिए केले के पत्ते, फूलों की माला और फूल, पान के पत्ते और सुपारी, कच्चा सूत

हरतालिका तीज 2026 पूजा विधि

प्रतिमा निर्माण : प्रातः स्नान के बाद संकल्प लें। इसके बाद काली मिट्टी या बालू से शिव-पार्वती और भगवान गणेश की प्रतिमा बनाएं।

शृंगार व अर्पण : भगवान शिव को चंदन, बेलपत्र, धतूरा, अक्षत और वस्त्र अर्पित करें। माता पार्वती को सुहाग की सामग्री (सिंदूर, चूड़ी, बिंदी, चुनरी आदि) चढ़ाएं।

कथा व आरती : हरतालिका तीज की व्रत कथा सुनें या पढ़ें और अंत में शिव-पार्वती की आरती करें।

रात का जागरण : इस व्रत में रात भर जागरण कर भजन-कीर्तन करने की परंपरा है।

पारण : अगले दिन सुबह विधिवत पूजा के बाद पंडित या बुजुर्गों को दान-दक्षिणा देकर व्रत खोलें।

Hartalika Teej 2026: अखंड सौभाग्य के व्रत हरतालिका तीज में ये 5 गलतियां खंडित कर सकती हैं व्रत, जानें किन चीजों को करने से बचें

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Hartalika Teej 2026: हिंदू धर्म के अत्यंत कठिन और प्रभावशाली उपवासों में से एक है हरतालिका तीज का व्रत। यह व्रत हर साल भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को किया जाता है। इस साल यह व्रत 14 सितंबर को गणेश चतुर्थी के पर्व के साथ किया जाएगा। इसे हिंदू धर्म में विवाहित महिलाओं के महत्वपूर्ण व्रतों में से एक माना जाता है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि के लिए निर्जला उपवास रखती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तप किया था, तभी से इस व्रत की परंपरा चली आ रही है। इस व्रत का पूर्ण फल प्राप्त करने के लिए शास्त्र सम्मत नियमों का पालन करना बेहद जरूरी है। इस व्रत के कुछ ऐसे नियम हैं, जिनकी अनदेखी अखंड सौभाग्य के लिए होने वाले इस व्रत को खंडित कर सकती है। आइए जानते हैं कि हरतालिका तीज के दिन कौन से काम भूलकर भी नहीं करने चाहिए:

कथा सुनना न भूलें : हरतालिका तीज की पूजा बिना कथा सुने अधूरी मानी जाती है। इसलिए पूजा के दौरान हरतालिका तीज की व्रत कथा का पाठ अवश्य करें या सुनें, जिससे व्रत का पूरा पुण्य प्राप्त हो सके।

काले या सफेद वस्त्र पहनने से बचें : हरतालिका तीज के व्रत में महिलाओं के शुभ रंगों के वस्त्र पहनने चाहिए। इस दिन काले, नीले या सफेद रंग के कपड़े नहीं पहनने चाहिए। तीज के पावन पर्व पर हरे या लाल रंग के वस्त्र पहनना सबसे उत्तम और अखंड सौभाग्य का प्रतीक माना गया है। इसके साथ ही सुहाग की सभी वस्तुएं पूरी निष्ठा के साथ मां पार्वती को अर्पित करें।

अन्न और जल का सेवन न करें : हरतालिका तीज का व्रत मुख्य रूप से निर्जला किया जाता है। एक बार व्रत का संकल्प लेने के बाद दिनभर जल या अन्न ग्रहण करना वर्जित माना जाता है। हालांकि, यदि स्वास्थ्य कारणों से या गर्भावस्था की स्थिति में डॉक्टर की सलाह से फलाहार का विकल्प चुना जा सकता है, लेकिन सामान्य स्थिति में अन्न-जल का त्याग ही नियम है।

क्रोध और नकारात्मक विचारों से दूरी : व्रत के दिन मन, वाणी और कर्म से पवित्रता बनाए रखना अनिवार्य है। किसी पर भी गुस्सा न करें, अपशब्द न बोलें। घर में वाद-विवाद की स्थिति से दूर रहें। इस दिन पूरी तरह से सात्विक आचरण करते हुए भगवान का ध्यान करना चाहिए।

दिन में सोना वर्जित : धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हरतालिका तीज के दिन दिन में सोने से बचना चाहिए। इस पूरे दिन और रात के समय भगवान शिव और माता पार्वती के भजन-कीर्तन व जागरण का विधान है। मान्यता है कि इस दिन व्रत के दौरान सोने से व्रत का पूर्ण फल नहीं मिलता है।

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Ganesh Chaturthi 2026 Kalash Sthapana: बप्पा के स्वागत में जरूर रखें कलश, स्थापना से पहले कलश में जरूर डालें ये चीजें

Ganesh Chaturthi 2026 Kalash Sthapana: देश में इस समय गौरी पुत्र गणेश के स्वागत की तैयारियां चल रही हैं। भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को विघ्नहर्ता गणेश अपने भक्तों के बीच धरती पर पधारते हैं और अनंत चतुर्दशी तक रहते हैं। भगवान गणेश के जन्मोत्सव का पर्व पूरे देश में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन घरों और पंडालों में विधि-विधान से गणपति बप्पा की स्थापना की जाती है। इस बार गणेश चतुर्थी का पर्व 14 सितंबर दिन सोमवार को मनाया जाएगा। गणपति स्थापना की पूजा में मूर्ति के साथ कलश स्थापना का भी विशेष महत्व माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कलश शुभता, समृद्धि और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है। आप अगर गणेशजी की स्थापना करने जा रहे हैं, तो पहले यह जान लें कि गणेश चतुर्थी के पर्व में कलश क्यों जरूरी है और इसमें किन 7 चीजों को रखा जाता है

गणेश चतुर्थी 2026: कलश स्थापना

हिंदू पूजा पद्धति में कलश को देवताओं का प्रतीक माना जाता है। गणेशजी की स्थापना से पहले पूजा स्थल की शुद्धि करके कलश स्थापित किया जाता है। सामान्यतः मिट्टी, तांबे या पीतल के कलश में जल भरकर उसके ऊपर आम या अशोक के पत्ते और नारियल रखा जाता है। मान्यता है कि कलश में जल जीवन और ऊर्जा का प्रतीक है, जबकि नारियल पूर्णता और शुभता का प्रतीक माना जाता है। गणेश चतुर्थी पर गणपति स्थापना के दौरान कलश को भगवान गणेश के समीप रखा जाता है।

गणेश चतुर्थी 2026 पर कलश स्थापना विधि

गणेश स्थापना के समय पूजा स्थल को साफ करके चौकी पर कलश रखें। कलश में शुद्ध जल भरें और उसमें अक्षत, गंगाजल, सुपारी व सिक्का डालें। कलश के मुख पर आम या अशोक के पत्ते रखें और ऊपर नारियल स्थापित करें। कलश के पास भगवान गणेश की मूर्ति रखें। इसके बाद कलश और गणपति का विधिवत पूजन करें। हालांकि कलश स्थापना की विधि और उसमें रखी जाने वाली सामग्री अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों की धार्मिक परंपराओं के अनुसार थोड़ी अलग हो सकती है।

कलश में रखी जाने वाली 7 चीजें

  • स्वच्छ जल
  • अक्षत यानी चावल
  • सुपारी
  • सिक्का
  • गंगाजल
  • आम या अशोक के पत्ते
  • नारियल

गणेश महोत्सव की प्रमुख तिथियां

14 सितंबर 2026, सोमवार – गणपति स्थापना और गणेश चतुर्थी

15 सितंबर, मंगलवार – गणपति पूजा और दैनिक आरती

16 सितंबर, बुधवार – गणपति पूजा

17 सितंबर, गुरुवार – गणपति पूजा

18 सितंबर, शुक्रवार – गणपति पूजा

19 सितंबर, शनिवार – गणपति पूजा

20 सितंबर, रविवार – गणपति पूजा

21 सितंबर, सोमवार – गणपति पूजा

22 सितंबर, मंगलवार – गणपति पूजा

23 सितंबर, बुधवार – गणपति पूजा

24 सितंबर, गुरुवार – उत्सव का अंतिम दिन/विसर्जन की तैयारी

25 सितंबर 2026, शुक्रवार – अनंत चतुर्दशी और गणपति विसर्जन

गणेश चतुर्थी पर्व का महत्व

प्रथमपूज्य भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और मंगलकर्ता कहा जाता है। हिंदू धर्म हर शुभ और मांगलिक कार्य गणेश भगवान की पूजा से शुरू होता है। माना जाता है, भगवान गणेश की पूजा करने से कार्य में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं। गणेश चतुर्थी पर घर में गणपति की स्थापना करना श्रद्धालुओं के लिए भगवान के स्वागत का प्रतीक है। 10 दिन तक चलने वाले इस पर्व का समापन भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी तिथि यानी अनंत चतुर्दशी के दिन गणेश विसर्जन के साथ हो जाता है। गणपति स्थापना केवल धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं, बल्कि परिवार में सुख-शांति, सद्भाव और सकारात्मक ऊर्जा की कामना से जुड़ी परंपरा भी है।

Hartalika teej 2026 Puja Time: क्या हरतालिका तीज पर रहेगा भद्र का साया ? जानें सुबह-शाम की पूजा का शुभ मुहूर्त

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Hartalika teej 2026 Puja Time: भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित हरतालिका तीज व्रत को सबसे कठिन उपवास माना जाता है, क्योंकि इसमें व्रती महिलाएं लगभग 24 घंटे निर्जला उपवास करती हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, माता पार्वती भगवान शिव को अपने पति रूप में पाना चाहती थीं। इसलिए उन्होंने हिमालय पर बिना अन्न-जल हजारों वर्ष कठिन तप किया। माता पार्वती के पिता हिमालय उनका विवाह भगवान विष्णु से कराना चाहते थे। जब यह बात माता पार्वती को पता चली, तो उनकी सखियों ने उनका हरण कर लिया और उन्हें एक जंगल में छिपा दिया। इसी से इस व्रत का नाम हरतालिका पड़ा, क्योंकि संस्कृत में हरत का अर्थ हरण करने से है और आलिका का अर्थ सखी होता है। यानी सखियों द्वारा हरण किया जाना। माना जाता है कि माता पार्वती ने भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को जंगल में मिट्टी से शिवलिंग बनाकर पूजा की। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी रूप में स्वीकार किया था।

हरतालिका तीज का व्रत पति की लंबी उम्र, अच्छी सेहत और तरक्की के लिए किया जाता है। विवाहित महिलाएं और कुंवारी कन्याएं दोनों ही निर्जला व्रत करती हैं। यह व्रत हर साल भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को किया जाता है। इस साल यह व्रत सोमवार के दिन 14 सितंबर को किया जाएगा। लेकिन इस साल हरतालिका तीज के दिन भद्रा भी लग रही है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि इस दिन सुबह-शाम की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त कब से कब तक मिलेगा?

हरतालिका तीज व्रत तारीख

पंचांग के अनुसार, भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 13 सितंबर 2026, रविवार को सुबह 07:09 मिनट पर प्रारंभ होगी और 14 सितंबर 2026, सोमवार को सुबह 07:07 मिनट पर समाप्त हो जाएगी। उदया तिथि में प्रदोष व्रत 14 सितंबर को ही किया जाएगा।

हरतालिका तीज पर भद्रा का साया

ज्योतिष शास्त्र में भद्रा को अशुभ काल माना गया है। इस समय किसी भी शुभ या मांगलिक कार्य की मनाही होती है। कहा जाता है कि भद्रा काल में किए गए उत्तम फलों का नकारात्मक या अशुभ फल प्राप्त होता है। इस बार हरतालिका तीज के दिन भद्रा का साया रहने वाला है। इस दिन भद्राकाल शाम 07:20 बजे प्रारंभ होगी और अगले दिन 15 सितंबर को सुबह 07 बजकर 44 मिनट पर समाप्त होगी।

हरतालिका तीज पर सुबह-शाम के पूजन मुहूर्त

हरतालिका तीज के दिन प्रात: काल पूजा का समय सुबह 06:05 बजे से सुबह 07:06 बजे तक रहेगा। हिंदू धर्म में भगवान शिव के पूजन के लिए प्रदोष काल सबसे उत्तम मुहूर्त माना गया है। इस दिन प्रदोष काल शाम 05:43 बजे से शाम 07:13 बजे तक रहेगा।

हरतालिका तीज 2026 व्रत पारण का समय

हरतालिका तीज व्रत का पारण अगले दिन सूर्योदय के पश्चात करना सबसे उत्तम माना गया है। हालांकि तीज व्रत पारण के दिन भी भद्रा विद्यमान रहेगी। इसलिए व्रत पारण के लिए भद्रा समाप्त होने का इंतजार करना पड़ेगा। तीज व्रत का पारण 15 सितंबर 2026 को सुबह 07:44 बजे के बाद किया जा सकेगा।

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Radha ashtami 2026 Date: 3 शुभ योगों में 19 सितंबर को मनाई जाएगी राधाष्टमी, जानें लाडली जी की पूजा का शुभ मुहूर्त और व्रत पारण समय

Radha ashtami 2026 Date: हिंदू धर्म में भाद्रपद का महीना कई धार्मिक वजहों से खास माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, द्वापर युग में इसी माह में भगवान विष्णु के आठवें अवतार श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था। और इसके 15 दिनों के बाद, यानी भाद्रपद शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को भगवान कृष्ण की आल्हादिनी शक्ति और प्राणप्रिया राधा रानी का भी जन्म हुआ था। प्रतिवर्ष भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को राधा रानी के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह पर्व कृष्ण जन्माष्टमी के ठीक 15 दिन बाद आता है।

शास्त्रों के अनुसार राधा रानी की आराधना के बिना भगवान श्रीकृष्ण की पूजा अधूरी मानी जाती है। इस दिन व्रत रखने और राधारानी की उपासना करने से सुख, समृद्धि, अखंड सौभाग्य और निष्काम प्रेम की प्राप्ति होती है। उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में बरसाना और वृंदावन में यह पर्व विशेष हर्षोल्लास और धूमधाम से मनाया जाता है। बरसाना के लाडली जी मंदिर में इस दिन विशेष अभिषेक, पूजन और भव्य उत्सव होता है। इस साल राधाष्टमी का पर्व शनिवार, 19 सितंबर 2026 को मनाया जाएगा। इस दिन 3 शुभ योग बनने से इसका महत्व और बढ़ गया है।

राधाष्टमी 2026 तारीख

वैदिक पंचांग के अनुसार, इस बार भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि 18 सितंबर को दोपहर 1 बजे से प्रारंभ होगी। इस तिथि का समापन 19 सितंबर को दोपहर 3 बजकर 26 मिनट पर होगा। उदयातिथि के आधार पर राधाष्टमी 19 सितंबर दिन शनिवार को है। राधाष्टमी की पूजा की जाती है। राधाष्टमी के दिन भक्त व्रत रखते हैं और श्री राधाजी की पूजा करते हैं।

राधाष्टमी 2026 में बन रहे 3 शुभ योग

इस साल राधाष्टमी के दिन आयुष्मान् योग, सौभाग्य योग और रवि योग, 3 शुभ योग बन रहे हैं। इस दिन आयुष्मान् योग प्रात:काल से लेकर दोपहर 2 बजकर 29 पी एम तक रहेगा। इस योग में आयु में वृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। दोपहर 2:29 बजे से सौभाग्य योग बनेगा, जो भाग्य को बढ़ाने वाला है।

इनके अलावा रवि योग राधाष्टमी की मध्य रात्रि यानि 20 सितंबर को 01:43 ए एम से बनेगा और सुबह 06:08 ए एम तक रहेगा। इस योग में सूर्य का प्रभाव अधिक होता है, जिसकी वजह से इस योग में कोई दोष नहीं रह जाता। राधाष्टमी के दिन मूल नक्षत्र प्रात:काल से लेकर 20 सितंबर को 01:43 ए एम तक रहेगा। उसके बाद से पूर्वाषाढा नक्षत्र होगा।

राधाष्टमी 2026 पूजा के शुभ मुहूर्त

इस बार राधाष्टमी की पूजा का शुभ मुहूर्त दिन में 11 बजकर 1 मिनट से शुरू है और दोपहर 1 बजकर 28 मिनट तक रहेगा। राधाष्टमी को लाडली जी की पूजा के लिए आपको 2 घंटे 27 मिनट का शुभ समय प्राप्त होगा। राधाष्टमी पर ब्रह्म मुहूर्त 04:34 ए एम से लेकर 05:21 ए एम तक है, वहीं अभिजीत मुहूर्त दिन में 11 बजकर 50 मिनट से दोपहर 12 बजकर 39 मिनट तक रहेगा। राधारानी जी की पूजा के समय अभिजीत मुहूर्त भी विद्यमान रहेगा।

राधाष्टमी 2026 पारण

जो लोग राधाष्टमी का व्रत रखेंगे, वे पारण 20 सितंबर को सुबह 06:08 ए एम के बाद से कर सकते हैं।

Hartalika Teej 2026: कई दुर्लभ संयोगों में इस साल मनेगा हरतालिका तीज व्रत, जानें इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त

Hartalika Teej 2026: कई दुर्लभ संयोगों में इस साल मनेगा हरतालिका तीज व्रत, जानें इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त

Hartalika Teej 2026: हिंदू धर्म में हरतालिका तीज का व्रत विशेष स्थान रखता है। यह व्रत हर साल भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को किया जाता है। पंचांग के अनुसार, इस साल 14 सितंबर 2026 को यह व्रत किया जाएगा। इस साल हरतालिका तीज के व्रत में कई दुर्लभ संयोग बन रहे हैं, जैसे इसी दिन गणेश चतुर्थी भी मनाई जाएगी। साथ ही इस दिन सोमवार का दिन है, जो भगवान शिव को समर्पित है। हरतालिका तीज का व्रत अखंड सौभग्य और सुख-समृद्धि के लिए किया जाता है। इस दिन विवाहित महिलाएं और कुंवारी कन्याएं दोनों ही निर्जला उपवास करती हैं। इस साल हरतालिका तीज व्रत के दिन रवि योग के साथ 3 शुभ योगों का भी निर्माण होगा। इससे यह दिन और भी शुभ फलदायी माना जा रहा है। आइए जानते हैं हरतालिका तीज पर बनने वाले शुभ संयोग और पूजा मुहूर्त के बारे में।

3 शुभ योग में हरतालिका तीज व्रत

हरतालिका तीज के दिन ब्रह्म योग, रवि योग और इंद्र योग बन रहे हैं। उस दिन ब्रह्म योग प्रात:काल से लेकर दोपहर 12:47 पी एम तक है, उसके बाद से इंद्र योग बनेगा। तीज और चतुर्थी पर रवि योग दोपहर में 01:55 पी एम से बनेगा और 15 सितंबर को सुबह 06:06 ए एम तक रहेगा।

हरतालिका तीज पर 4 अद्भुत संयोग

हरतालिका तीज की भाद्रपद शुक्ल तृतीया तिथि 14 सितंबर को सुबह 07 बजकर 06 मिनट तक है। उसके बाद से भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी तिथि प्रारंभ हो जाएगी, जो 15 सितंबर को सुबह 7 बजकर 44 मिनट तक रहेगी। इस तरह 14 सितंबर को गणेश चतुर्थी का उत्सव और हरतालिका तीज दोनों एक साथ मनाए जाएंगे। इस दिन सोमवार भी है, जो भगवान शिव की कृपा प्राप्ति का सुंदर अवसर है। इस दिन दक्षिण भारत का प्रमुख स्वर्ण गौरी व्रत भी है, जिसे गौरी हब्बा कहते हैं। यह व्रत कर्नाटक, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में रखा जाता है, जिसमें देवी पार्वती की पूजा करते हैं।

हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी मुहूर्त

हरतालिका तीज की पूजा जहां प्रदोष काल में होगी। वहीं गणेश चतुर्थी की मूर्ति स्थापना और पूजा उससे पहले ही दिन में हो जाएगी।

हरतालिका तीज पूजा का समय : इस दिन सुबह भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की पूजा 06:05 बजे से 07:38 बजे के बीच होगी। जिनके यहां शाम की पूजा होती है, वे प्रदोष काल में 06:28 पी एम से पूजा करेंगे।

गणेश चतुर्थी पूजा का समय : गणेश चतुर्थी पूजा मुहूर्त 11:02 एम से लेकर दोपहर 1:31 पीएम तक है। इस समय में आप विधिपूर्वक गणेश जी की पूजा कर लें।

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Hartalika Teej 2026: हरतालिका तीज हिंदू धर्म का एक प्रमुख और बेहद पवित्र त्यौहार है, जिसे शादीशुदा महिलाएं और अविवाहित कन्याएं पूरी आस्था और विधि-विधान से करती हैं। यह व्रत हर साल भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सौभाग्य के लिए व्रत रखती हैं। वहीं, कुंवारी कन्याएं अच्छा घर और वर पाने की लालसा में यह व्रत करती हैं।

पौराणिक कथाओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए अन्न-जल त्यागकर कठोर तपस्या की थी। उन्होंने बालू (मिट्टी) का शिवलिंग बनाकर पूजा की थी। माता पार्वती के इस अनन्य समर्पण से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने इसी दिन उन्हें अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया था। यह शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है, हरत और आलिका। इसमें हरत का अर्थ है हरण करना या छिपाना और आलिका अर्थात सहेली/सखी है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, माता पार्वती की सहेलियां उनका अपहरण करके उन्हें एक घने जंगल में ले गई थीं, ताकि उनके पिता उनका विवाह उनकी इच्छा के विरुद्ध भगवान विष्णु से न कर दें। जंगल में रहकर ही उन्होंने यह तपस्या की थी, इसलिए इसे ‘हरतालिका तीज’ कहा जाता है।

कब किया जाएगा हरतालिका तीज व्रत 2026

साल 2026 में हरतालिका तीज व्रत सोमवार, 14 सितंबर 2026 को किया जाएगा। तृतीया तिथि के समय और पूजा के शुभ मुहूर्त की पूरी जानकारी निम्नलिखित है:

तिथि और मुहूर्त

तृतीया तिथि प्रारंभ : 13 सितंबर 2026, सुबह 07:08 बजे

तृतीया तिथि समाप्त : 14 सितंबर 2026, सुबह 07:06 बजे

प्रातःकाल पूजा का शुभ मुहूर्त : 14 सितंबर 2026, सुबह 06:12 बजे से 07:06 बजे तक

प्रदोष काल (संध्या) पूजा : 13 सितंबर 2026, शाम 06:00 बजे से रात 08:30 बजे तक

हरतालिका व्रत के प्रमुख नियम और परंपराएं

निर्जला व्रत : यह अत्यंत कठिन व्रतों में से एक माना जाता है, जिसमें महिलाएं 24 घंटे से भी अधिक समय तक बिना पानी और भोजन के रहती हैं।

पार्थिव शिवलिंग पूजन : इस दिन शाम को या प्रदोष काल में मिट्टी से शिव-पार्वती और गणेश जी की प्रतिमाएं बनाकर विधि-विधान से पूजा की जाती है।

सोलह श्रृंगार : महिलाएं नए कपड़े पहनती हैं, मेहंदी लगाती हैं और सोलह श्रृंगार करके पूजा में बैठती हैं।

रात भर जागरण : पूजा के बाद पूरी रात भजन-कीर्तन करते हुए जागरण किया जाता है और अगले दिन सुबह पारण करके व्रत पूरा होता है।

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Raksha Bandhan 2026: रक्षा बंधन पर्व कब है और इसका शुभ मुहूर्त कब है? महंत रोहित शास्त्री से जानें किस समय राखी बांधने से बचें

Raksha Bandhan 2026: रक्षा बंधन का पर्व भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक पर्व है। इस दिन बहनें अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती हैं और उनकी सुरक्षा के लिए भगवान से प्रार्थना करती हैं। भाई अपनी बहनों का ध्यान रखने और उनकी सुरक्षा करने का वचन देते हैं। हिंदू धर्म में इस पर्व को काफी उत्साह और धूमधाम से मनाया जाता है। रक्षा बंधन का पर्व हर साल सावन माह की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। श्री कैलख ज्योतिष एवं वैदिक संस्थान ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं स्टेट अवॉर्डी महंत रोहित शास्त्री ज्योतिषाचार्य ने बताया कि रक्षाबंधन का पावन पर्व इस वर्ष 28 अगस्त, शुक्रवार को मनाया जाएगा।

कब से लग रही सावन पूर्णिमा तिथि

महंत रोहित शास्त्री के अनुसार, श्रावण पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त, गुरुवार को सुबह 09:09 बजे प्रारंभ होकर 28 अगस्त, शुक्रवार को सुबह 09:49 बजे समाप्त होगी। चूंकि 28 अगस्त को सूर्योदय-व्यापिनी पूर्णिमा है, इसलिए रक्षाबंधन का पर्व इसी दिन मनाया जाएगा।

राहुकाल में नहीं बाधें रखी

महंत रोहित शास्त्री ने बताया कि राहुकाल सुबह 10:45 बजे से दोपहर 12:22 बजे तक रहेगा। अतः इस इस बहनों का भाई का राखी बांधना अशुभ होगा। इस अवधि को छोड़कर पूरे दिन राखी बांध सकते हैं।

रक्षा बंधन में नहीं होगा चंद्रग्रहण का भेद

महंत रोहित शास्त्री ने बताया कि इस दिन चंद्रग्रहण अवश्य है, लेकिन यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। इसलिए भारत में रहने वाले लोगों के लिए इससे संबंधित किसी प्रकार की विशेष धार्मिक या सामाजिक नियम करने की आवश्यकता नहीं है। मंदिरों के कपाट बंद करने अथवा पूजा-पाठ रोकने जैसी कोई आवश्यकता नहीं होगी। जब ग्रहण भारत में दिखाई ही नहीं देगा, तो सूतक आदि को लेकर अनावश्यक भय या तनाव पालना उचित नहीं है। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि गर्भवती महिलाओं को घबराने अथवा किसी प्रकार के नियमों का पालन करने की जरूरत नहीं है। गर्भवती महिलाएं अपनी सामान्य दिनचर्या जारी रखें और बेवजह की पाबंदियों से स्वयं को परेशान न करें।

उन्होंने कहा कि धार्मिक आस्थाओं का सम्मान अपनी जगह है, लेकिन आस्था के साथ विवेक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण भी आवश्यक है। किसी भी प्राकृतिक खगोलीय घटना को लेकर डर, भ्रम या अफवाह फैलाने के बजाय सही जानकारी को समझना और दूसरों तक पहुंचाना बेहतर है। अतः इस दिन लोग सामान्य रूप से अपना कार्य करें। गर्भवती महिलाएं निश्चिंत रहें, मंदिरों के कपाट सामान्य रूप से खुले रहें और चंद्रग्रहण को लेकर किसी प्रकार का अनावश्यक भय या भ्रम न रखा जाए।

पूरे दिन मना सकते हैं रक्षा बंधन का पर्व

महंत रोहित शास्त्री ने कहा कि 28 अगस्त को सूर्योदय व्यापिनी तिथि पूरे दिन है, इसलिए रक्षा बंधन का पर्व पूरे दिन मनाया जा सकेगा। पूर्णिमा तिथि के सुबह 9.49 बजे तक ही रहने का कोई प्रभाव नहीं होगा।

पूर्णिमा व्रत को लेकर भी दूर किया भ्रम

श्री कैलख ज्योतिष एवं वैदिक संस्थान ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं स्टेट अवॉर्डी महंत रोहित शास्त्री ज्योतिषाचार्य ने सावन पूर्णिमा के व्रत को लेकर भी भ्रम दूर किया है। उन्होंने कहा कि जो लोग पूर्णिमा तिथि पर रात के समय पूजा करते हैं वे 27 अगस्त को व्रत करेंगे, जबकि दिन में पूर्णिमा व्रत की पूजा करने वाले श्रद्धालु 28 अगस्त 2026 को उपवास करेंगे।

राखी बांधने की पारंपरिक विधि

  • बहन सर्वप्रथम भाई को तिलक लगाए, आरती करें और अक्षत अर्पित करें।
  • इसके बाद भाई की दाहिनी कलाई पर राखी बांधे और उसका पूजन करे।
  • भाई को मिठाई खिलाएं।
  • इसके पश्चात भाई बहन के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद प्राप्त करें।
  • भाई अपनी बहन को उपहार भेंट करें।
  • यह संपूर्ण प्रक्रिया व्रत अथवा उपवास रखकर संपन्न करना श्रेष्ठ माना गया है।

अगर पास में न हो भाई, तो क्या करें?

यदि भाई-बहन एक स्थान पर उपस्थित न हो सकें, तो बहन भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा को राखी बांधकर पूजा करें और भाई की मंगलकामना करें। भाई भी राखी को भगवान से स्पर्श कर रक्षा का संकल्प ले सकता है। श्रद्धापूर्वक किया गया यह प्रतीकात्मक राखी बंधन भी धार्मिक दृष्टि से फलदायी माना जाता है।

Kajari Teej 2026: कब है भाद्रपद की कजरी तीज? जानें व्रत की सही तारीख, पुजा का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

Hartalika Teej 2026: 13 या 14 सितंबर कब किया जाएगा हरतालिका तीज का व्रत? शिव को पति रूप में पाने के लिए मां पार्वती ने किया था ये कठिन व्रत

Hartalika Teej 2026: हरतालिका तीज का पर्व महिलाओं के लिए विशेष धार्मिक महत्व रखता है। इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के लिए व्रत रखती हैं। वहीं अविवाहित कन्याएं भी मनचाहा जीवनसाथी पाने की कामना से यह व्रत करती हैं। हरतालिका तीज का व्रत भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाने वाला एक अत्यंत पवित्र और कठिन पर्व है।

पौराणिक मान्यता के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। उनकी सखी ने उनका अपहरण (हरत) करके उन्हें घने जंगल में छिपा दिया था, इसलिए इस पर्व को ‘हरतालिका’ (हरत + आलिका/सखी) कहा जाता है। सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुखी दांपत्य जीवन के लिए यह व्रत रखती हैं। वहीं, अविवाहित कन्याएं मनचाहा और योग्य वर पाने के लिए यह पूजन करती हैं।

हरतालिका तीज व्रत 2026 तारीख

हरितालिका तीज का व्रत भादों शुक्ल पक्ष हस्त नक्षत्र युक्त तृतीया तिथि को होता है। इस बार हरितालिका तीज 14 सितंबर सोमवार के दिन है, जो कि प्रात:काल 7:14 तक है। विंध्यधाम के विद्यवान ज्योतिषाचार्य पं. अनुपम महराज ने लोकल 18 को बताया कि इस समय में माताएं एक बार शिव पूजन कर लें, फिर संपूर्ण दिन भगवान शिव का पूजन करें। हरितालिका तीज में माताएं मां पार्वती के समान निर्जला व्रत करती हैं।

पूजा का शुभ मुहूर्त

14 सितंबर 2026 को सूर्योदय सुबह 6 बजकर 5 मिनट पर होगा। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 32 मिनट से 5 बजकर 19 मिनट तक रहेगा। इसके अलावा अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 52 मिनट से दोपहर 12 बजकर 41 मिनट तक रहेगा। हरतालिका तीज की पूजा के लिए सुबह 6 बजकर 5 मिनट से 7 बजकर 6 मिनट तक का समय विशेष रूप से शुभ रहेगा।

सुबह पूजा न कर पाएं तो क्या करें?

अगर किसी कारणवश सुबह पूजा संभव न हो, तो शाम के प्रदोष काल में भी भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना की जा सकती है। 14 सितंबर को शाम 6 बजकर 28 मिनट से रात 8 बजकर 47 मिनट तक प्रदोष काल रहेगा। इस दौरान रेत या मिट्टी से बनी शिव-पार्वती की प्रतिमा की पूजा करना शुभ माना जाता है।

हरतालिका तीज व्रत 2026 पारण विधि

हरतालिका तीज व्रत का पारण दूसरे दिन पारण किया जाता है। पारण के पहले ब्राह्मण को दान पुण्य करना चाहिए। इस बार हरतालिका तीज व्रत का पारण 15 सितंबर को होगा। 15 सितंबर को सुबह 5:54 से लेकर 6:40 के मध्य में यह पारण का उत्तम काल होगा।

हरतालिका तीज व्रत 2026 की पूजा विधि

निर्जला व्रत : यह एक अत्यंत कठिन व्रत है, जिसमें पूरे 24 घंटे तक अन्न और जल का त्याग (निर्जला उपवास) किया जाता है।

सोलह श्रृंगार : महिलाएं इस दिन नए वस्त्र, हरे-लाल रंग की साड़ी, मेहंदी और सोलह श्रृंगार धारण करती हैं।

मिट्टी की मूर्तियां : प्रदोष काल में बालू (रेत) या काली मिट्टी से भगवान शिव, माता पार्वती और श्री गणेश जी की अस्थायी प्रतिमाएं बनाकर पूजा की जाती है।

सुहाग सामग्री अर्पण : माता पार्वती को सुहाग का सामान (सिंदूर, बिंदी, चूड़ियां, चुनरी आदि) अर्पित किया जाता है।

रात्रि जागरण और कथा : रात भर महिलाएं जागरण कर भजन-कीर्तन करती हैं तथा हरतालिका तीज की व्रत कथा सुनती हैं। अगले दिन सुबह पूजा-आरती के बाद ही व्रत का पारण किया जाता है।

Raksha Bandhan 2026: रक्षा बंधन पर ग्रहण और भद्रा के साथ रहेगा पंचक का साया, जानें त्योहार पर पंचक का क्या होगा असर

Hariyali Teej 2026 Date: आज शाम से शुरू हो रहा शुभ मुहूर्त, जानें 15 अगस्त को कब कैसे हरियाली तीज की करें पूजा

Hariyali Teej 2026 Date: आज 14 अगस्त 2026 का दिन बेहद खास होने वाला है। हिंदू पंचांग के मुताबिक आज सावन महीने की शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि है। वहीं शाम 6 बजकर 46 मिनट से तृतीया तिथि लग जाएगी। सावन का शु्क्रवार दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा के लिए शुभ माना गया है। बता दें कि आज हरियाली तीज की तिथि शाम 6 बजकर 46 मिनट पर शुरू होगी और 15 अगस्त की शाम 5 बजकर 28 मिनट पर समाप्त होगी।

उत्तर भारत में तीज की धूम

उत्तर भारती में तीज का त्योहार बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है। खासकर राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार और झारखंड में अलग ही माहौल होता है। श्रावण और भाद्रपद मास के दौरान महिलाएं 3 तीज मनाती हैं। यह समय जीवन में उत्साह, आनंद और पारिवारिक संतुलन बनाने का प्रतीक होता है। जानिए आज पूजा का शुभ मुहूर्त, राहुकाल, चंद्रोदय और नक्षत्र…

हरियाली तीज 2026 कब होगी?

तृतीया तिथि की शुरुआत 14 अगस्त की शाम 6 बजकर 46 मिनट पर हो रही है। इसका समापन 15 अगस्त को शाम 5 बजकर 28 मिनट पर हो जाएगा। उदयातिथि के आधार पर हरियाली तीज का व्रत 15 अगस्त 2026 को किया जाएगा। इस दिन महिलाएं व्रत रखकर भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना करेंगी। पति की लंबी आयु की कामना करेंगी।

त्योहार की तिथि- शुक्ल पक्ष की द्वितीया –शाम 6 बजकर 46 मिनट तक, फिर तृतीया तिथि की होगी शुरुआत

योग- परिघ – सुबह 09 बजकर 28 मिनट तक, फिर शिव होगा शुरू

शुभ मुहूर्त

अभिजीत मुहूर्त- दोपहर 11 बजकर 59 मिनट से दोपहर 12 बजक 52 मिनट तक

अमृत काल- रात्रि 09 बजकर 33 मिनट से रात्रि 11 बजकर 05 मिनट तक

आज के अशुभ समय

राहुकाल- सुबह 10 बजकर 47 मिनट से दोपहर 12 बजकर 26 मिनट तक

गुलिकाल- सुबह 07 बजकर 29 मिनट से प्रातः 09 बजकर 08 मिनट तक

आज का नक्षत्र

आज चंद्रदेव पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में विराजेंगे।

पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र- अगले दिन सुबह 03 बजकर 42 मिनट (15 अगस्त) तक

नक्षत्र स्वामी- शुक्रदेव

राशि स्वामी- सूर्यदेव