Dussehra 2026: आज या कल कब होगा रावण दहन? जानें सही तारीख, विजय मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

Dussehra 2026: धर्म पर धर्म, असत्य पर सत्य और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक महापर्व विजयादशमी (दशहरा) इस वर्ष देश भर में भव्य रूप से मनाया जा रहा है। दशहरे के पावन अवसर पर मां अपराजिता की पूजा, शस्त्र पूजन (आयुध पूजा), शमी वृक्ष के पत्तों के आदान-प्रदान और शाम को रावण, कुंभकर्ण व मेघनाद के पुतलों के दहन की परंपरा निभाई जाती है। हालांकि, तिथियों की गणना और क्षेत्रीय परंपराओं की वजह से लोगों के मन में इस बात को लेकर भ्रम की स्थिति बनी है कि रावण दहन 20 अक्टूबर को होगा या 21 अक्टूबर को। पंचांग और शास्त्रीय मान्यताओं के आधार पर आइए समझते हैं कि रावण दहन की सही तारीख, शुभ मुहूर्त और पूजन विधि क्या है।

20 या 21 अक्टूबर: कब मनाया जाएगा दशहरा और रावण दहन?

हिंदू पंचांग के अनुसार, आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को विजयादशमी का पर्व मनाया जाता है।

दशमी तिथि का प्रारंभ: 20 अक्टूबर को दोपहर 12 बजकर 50 मिनट से।

दशमी तिथि का समापन: 21 अक्टूबर को दोपहर 2 बजकर 11 मिनट तक।

श्रवण नक्षत्र: 19 अक्टूबर की दोपहर 3 बजकर 38 मिनट से शुरू होकर 20 अक्टूबर की शाम 6 बजकर 2 मिनट तक।

उत्तर, मध्य और पश्चिम भारत में 20 अक्टूबर को दशहरा

उत्तर भारत, राजस्थान, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में विजयादशमी का निर्धारण अपराह्न काल (दोपहर के समय) में दशमी तिथि की उपस्थिति के आधार पर किया जाता है। 20 अक्टूबर को दोपहर 12:50 बजे के बाद दशमी तिथि लग रही है, इसलिए उत्तर भारत में मुख्य दशहरा पर्व और रावण दहन 20 अक्टूबर मंगलवार को ही संपन्न होगा। हालांकि मंगलवार के दिन माता की मूर्ति का विसर्जन नहीं किया जाता, इसलिए देवी दुर्गा की विदाई 21 अक्टूबर बुधवार को होगी।

पूर्वी भारत में 21 अक्टूबर को विजयादशमी

पश्चिम बंगाल, ओडिशा, असम और पूर्वी भारत के कई हिस्सों में दुर्गा पूजा का निर्धारण सूर्योदय कालीन तिथि (उदयातिथि) के आधार पर होता है। 20 अक्टूबर को सूर्योदय के समय नवमी तिथि रहेगी (जो दोपहर 12:50 तक चलेगी), जबकि 21 अक्टूबर को सूर्योदय के समय दशमी तिथि मौजूद रहेगी। इसलिए बंगाल और पूर्वी भारत में 21 अक्टूबर को विजयादशमी मनाई जाएगी।

रावण दहन का सही समय और प्रदोष काल मुहूर्त

दशहरे पर रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के विशाल पुतलों का दहन हमेशा सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल के दौरान किया जाता है। शास्त्रानुसार 20 अक्टूबर को रावण दहन के लिए सबसे उत्तम समय इस तरह रहेगा:

प्रदोष काल का समय: 20 अक्टूबर को शाम 5 बजकर 47 मिनट से रात 8 बजकर 17 मिनट (कुछ गणनाओं में 8:21 बजे) तक।

रावण दहन का सर्वोत्तम मुहूर्त: 20 अक्टूबर की शाम 5 बजकर 47 मिनट से 6 बजकर 12 मिनट के बीच का समय रावण दहन के लिए सबसे शुभ और फलदायी माना गया है।

पूजा के शुभ मुहूर्त: अपराजिता पूजन और आयुध पूजा

विजयादशमी के दिन मां अपराजिता और अस्त्र-शस्त्रों की पूजा का विशेष विधान है। इस दिन अगर आप नया वाहन, इलेक्ट्रॉनिक सामान या प्रॉपर्टी खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो इन विजय और शुभ मुहूर्तों का ध्यान रखें:

मां अपराजिता पूजा मुहूर्त: 20 अक्टूबर को दोपहर 1 बजकर 14 मिनट से दोपहर 3 बजकर 30 मिनट तक।

आयुध/शस्त्र पूजा मुहूर्त: 20 अक्टूबर को दोपहर 1 बजकर 59 मिनट से दोपहर 2 बजकर 45 मिनट तक।

विजयादशमी पर क्या करें और क्या है धार्मिक महत्व?

विजयादशमी का पर्व केवल उत्सव का दिन नहीं है, बल्कि यह जीवन में धर्म और मर्यादा को स्थापित करने का संदेश देता है। इस दिन मां अपराजिता का ध्यान कर जीवन में हर क्षेत्र में विजय की कामना की जाती है। इसके साथ ही शमी के वृक्ष की पूजा की जाती है और शमी के पत्तों को ‘सोना’ मानकर अपनों में बांटकर आशीर्वाद लिया जाता है। विजयादशमी को अभूज मुहूर्त माना जाता है। इस दिन अपने काम में आने वाले उपकरणों, अस्त्र-शस्त्रों, गाड़ियों और व्यापारिक बही-खातों की पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

बुराइयों के दहन का संकल्प

रावण दहन का प्रतीक हमें यह याद दिलाता है कि व्यक्ति चाहे कितना भी शक्तिशाली या विद्वान क्यों न हो, अहंकार, क्रोध और असत्य का अंत विनाशकारी ही होता है। इस दिन अपने अंदर की बुराइयों को त्याग कर सत्य और अच्छाई के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया जाता है।

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दशहरा 2026 वाहन पूजा मुहूर्त: कार और बाइक पूजा का सबसे शुभ समय, नोट कर लें सही विधि

आज 20 अक्टूबर को देश भर में दशहरा यानी विजयादशमी मनाई जा रही है। आज के दिन भगवान राम ने रावण पर जीत हासिल की थी। दशहरे पर नई गाड़ी खरीदना और अपनी कार-बाइक की पूजा करना बहुत शुभ माना जाता है। कहते हैं इससे सफर सुरक्षित रहता है। अगर आप भी आज अपनी गाड़ी की पूजा करने वाले हैं तो शुभ मुहूर्त और पूजा की विधि यहाँ जान लें।

कार या बाइक की पूजा इस तरह करें

पंचांग के अनुसार आज पूजा के लिए ये समय शुभ है:

  • विजय मुहूर्त: दोपहर 1:59 से 2:45 बजे तक
  • अपराह्न मुहूर्त: दोपहर 1:14 से 3:30 बजे तक
  • दशमी तिथि: 20 अक्टूबर दोपहर 12:50 से 21 अक्टूबर दोपहर 2:11 बजे तक

ध्यान दें, हर शहर के पंचांग में समय थोड़ा अलग हो सकता है, इसलिए अपने शहर का समय जरूर देख लें।

पूजा के लिए रखें ये सामग्री

पूजा के लिए ये सामान पहले से तैयार रख लें।

  • रोली, कुमकुम, हल्दी
  • अक्षत यानी साबुत चावल
  • फूल और गेंदे की माला
  • धूप और घी का दीया
  • मौली या कलावा
  • नारियल, नींबू
  • फल या मिठाई का प्रसाद

कार-बाइक की पूजा कैसे करें?

  1.  सबसे पहले अपनी गाड़ी को अच्छे से धोकर साफ करें।
  2.  गाड़ी को साफ और खुली जगह पर खड़ा करें।
  3.  भगवान गणेश को याद करके पूजा शुरू करें।
  4.  गाड़ी के आगे रोली से स्वस्तिक बनाएं और टायरों पर तिलक लगाएं।
  5.  गाड़ी पर फूल-अक्षत चढ़ाएं और माला लगाएं। चाबी या हैंडल पर मौली बांध दें।
  6.  धूप-दीया जलाकर आरती करें और प्रसाद चढ़ाएं।

कुछ लोग नजर उतारने के लिए नींबू का भी इस्तेमाल करते हैं, पर ये जरूरी नहीं है।

दशहरे पर गाड़ी की पूजा क्यों करते हैं?

दशहरा बुराई पर अच्छाई की जीत का त्योहार है। इसलिए इस दिन नई चीजों की शुरुआत शुभ मानी जाती है। इसी वजह से लोग इस दिन गाड़ी और अपने काम के औजारों की पूजा करते हैं।

रावण दहन का समय

आज शाम रावण दहन का शुभ समय 5:47 से 8:21 बजे तक है। इसमें 5:47 से 6:12 बजे तक का समय सबसे अच्छा माना गया है। आपके शहर में रावण दहन का समय स्थानीय आयोजन के हिसाब से अलग हो सकता है।

IIIT Delhi Placements 2026: दिल्ली के इस संस्थान के बीटेक छात्र को मिला ऐसा धाकड़ पैकेज, देखते रह गए IIT-NIT के छात्र

IIIT Delhi Placements 2026: बीटेक में प्रवेश लेने वाले ज्यादातर छात्रों की यही चाहत होती है कि कोर्स पूरा होने के साथ ही उन्हें किसी मल्टीनेशनल कंपनी में तगड़े सैलरी पैकेज पर नौकरी मिल जाए। देश के प्रतिष्ठित आईआईटी या एनआईटी संस्थानों से बीटेक करने वाले छात्रों का ये सपना पूरा होता भी है। लेकिन इस साल दिल्ली के इंजीनियरिंग संस्थान IIIT Delhi ने बाजी मार ली है। यहां के एक बीटेक छात्र को 1.22 करोड़ रुपये से ज्यादा का सालाना पैकेज ऑफर किया गया है। इसके अलावा, इंस्टीट्यूट के कई कोर्स में प्लेसमेंट के आंकड़े भी अच्छे रहे हैं। आइए जानते हैं दिल्ली के इस इंस्टीट्यूट और उसके प्लेसमेंट आंकड़ों के बारे में

प्लेसमेंट के दौरान यहां के B.Tech छात्रों को अलग-अलग श्रेणी में ऑफर मिले हैं। इनमें 372 A+ ऑफर शामिल थे, जिनका सालाना CTC 12.50 लाख रुपये था। इसके अलावा, 222 A कैटेगरी के ऑफर मिले, जिनका CTC 7 लाख रुपये से ज्यादा और 12 लाख रुपये से कम था। वहीं, 88 B कैटेगरी के ऑफर ऐसे थे, जिनका CTC 7 लाख रुपये से कम था। इनमें से 60 ऑफर बाद में A या A+ कैटेगरी में अपग्रेड हो गए।

IIIT दिल्ली के B.Tech छात्र ने झटका तगड़ा पैकेज

इंद्रप्रस्थ इंस्टीट्यूट ऑफ इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (IIIT) दिल्ली के B.Tech प्लेसमेंट 2026 में सबसे ज्यादा सालाना पैकेज 122.76 लाख रुपये यानी करीब 1.22 करोड़ रुपये रहा। इंस्टीट्यूट की ऑफिशियल वेबसाइट पर जारी आंकड़ों के अनुसार, M.Tech के लिए सबसे ज्यादा पैकेज 38.38 लाख रुपये सालाना दर्ज किया गया। वहीं, फॉरेन प्लेसमेंट में सबसे ज्यादा पैकेज 48.65 लाख रुपये रहा।

क्या कहते हैं प्लेसमेंट 2026 के आंकड़े ?

IIIT दिल्ली के प्लेसमेंट आंकड़ों के अनुसार, इस साल कुल 868 ऑफर दर्ज किए गए। इनमें 682 फुल टाइम जॉब ऑफर और 186 समर इंटर्नशिप ऑफर शामिल थे। वहीं, B.Tech छात्रों का औसत सालाना सैलरी पैकेज 20.77 लाख रुपये रहा, जबकि M.Tech छात्रों का औसत पैकेज 17.05 लाख रुपये दर्ज किया गया। इसके अलावा, इंस्टीट्यूट का कुल एवरेज पैकेज 19.59 लाख रुपये रहा।

प्लेसमेंट के दौरान छात्रों को भारत और विदेश, दोनों जगह नौकरी के ऑफर मिले। आंकड़ों में 679 भारतीय और 2 विदेशी ऑफर दर्ज किए गए। हालांकि, इन ऑफरों की संख्या और कुल प्लेसमेंट ऑफरों की संख्या में अंतर है, क्योंकि प्लेसमेंट के आंकड़ों में अलग-अलग तरह के ऑफर शामिल हो सकते हैं।

सीएसई में सबसे ज्यादा 98.26 % रहा प्लेसमेंट

IIIT दिल्ली में अलग-अलग बीटेक ब्रांच में कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग (CSE) में सबसे ज्यादा 98.26% छात्रों को प्लेसमेंट मिला। वहीं, CSAM में 94.55% और CSSS में 92.68% छात्रों को नौकरी के ऑफर मिले। इसके अलावा, CSAI ब्रांच में प्लेसमेंट प्रतिशत 92% और CSB में 91.11% रहा। EVE में 87.50% छात्रों को प्लेसमेंट मिला, जबकि ECE में यह आंकड़ा 69.70% दर्ज किया गया। इन आंकड़ों से पता चलता है कि इंस्टीट्यूट में कंप्यूटर साइंस से जुड़ी कई ब्रांच का प्लेसमेंट प्रदर्शन बेहतर रहा।

क्यों खास है IIIT दिल्ली?

आईआईआईटी दिल्ली के प्लेसमेंट 2026 के आंकड़े बताते हैं कि यहां बीटेक के एक छात्र को 1.22 करोड़ रुपये से ज्यादा का पैकेज मिला, जबकि बीटेक का औसत पैकेज 20.77 लाख रुपये रहा। इसलिए इंजीनियरिंग में एडमिशन लेने की योजना बना रहे छात्रों के लिए यह इंस्टीट्यूट भी विचार करने लायक विकल्प हो सकता है। हालांकि, एडमिशन से पहले अपनी पसंद की ब्रांच और उससे जुड़े प्लेसमेंट के आंकड़ों की जांच जरूर करनी चाहिए।

Maha Ashtami & Maha Navami 2026: शारदीय नवरात्रि में कब होगी महा अष्टमी और महा नवमी? जानें तारीख, पूजा मुहूर्त और पारण का समय

Maha Ashtami & Maha Navami 2026: शारदीय नवरात्रि में कब होगी महा अष्टमी और महा नवमी? जानें तारीख, पूजा मुहूर्त और पारण का समय

Maha Ashtami & Maha Navami 2026: हिंदू धर्म में शारदीय नवरात्री के पर्व का विशेष स्थान है। यह पव हर साल अश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू होता है। नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व के आठवें दिन यानी अश्विन शुक्ल अष्टमी तिथि को महा अष्टमी और अश्विन शुक्ल नवमी तिथि को महा नवमी का पर्व मनाया जाता है। नौ दिनों तक मां दुर्गा की उपासना करने वाले सभी भक्त इन दिनों में कन्या पूजन, उपवास और विशेष अनुष्ठान आदि का आयोजन करते हैं। शारदीय नवरात्री के नौ दिन मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है। आइए जानें इस साल महा अष्टमी और महा नवमी का पर्व किस दिन मनाया जाएगा? इस वर्ष शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर से शुरू होकर 20 अक्टूबर को विजयादशमी के साथ संपन्न होगी।

19 अक्टूबर को होगी महाष्टमी की पूजा

इस वर्ष अष्टमी तिथि का आरंभ 18 अक्टूबर 2026 को सुबह 8:27 बजे होगा और इसका समापन 19 अक्टूबर 2026 को सुबह 10:51 बजे होगा। उदया तिथि के अनुसार 19 अक्टूबर को अष्टमी मानी जाएगी। इसलिए जिन लोगों के यहां अष्टमी के दिन विशेष पूजा, हवन या कन्या पूजन की परंपरा है, वे 19 अक्टूबर को यह अनुष्ठान कर सकते हैं। अगर आप अष्टमी का व्रत रखते हैं तो 19 अक्टूबर को व्रत रखें और विधि-विधान से मां दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी की पूजा करें।

महा अष्टमी 2026 कन्या पूजन समय

कन्या पूजन या कन्या भोजन कराने वाले लोग भी 19 अक्टूबर को अष्टमी तिथि के दौरान यह अनुष्ठान कर सकते हैं। कोशिश करें कि अष्टमी से जुड़े पूजा-पाठ और कन्या पूजन सुबह 10:51 बजे से पहले कर लिया जाए। कुछ परिवारों में महाष्टमी के दिन कुलदेवी या मां चामुंडा की पूजा रात के समय की जाती है। ऐसे परिवार 18 अक्टूबर की रात को अष्टमी तिथि लगने के बाद अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार पूजा कर सकते हैं।

महानवमी 2026 कब है?

19 अक्टूबर को सुबह 10:51 बजे अष्टमी तिथि समाप्त होगी और इसके बाद नवमी तिथि शुरू हो जाएगी। इसलिए 19 अक्टूबर को सुबह 10:51 बजे के बाद महानवमी की पूजा, हवन और कन्या पूजन किया जा सकता है। अगर आपके परिवार में नवमी के दिन कन्या पूजन करने की परंपरा है, तो आप 19 अक्टूबर को सुबह 10:51 बजे के बाद कन्या पूजन और हवन कर सकते हैं। 19 अक्टूबर को महाअष्टमी और महानवमी दोनों का कन्या पूजन किया जा सकता है।

20 अक्टूबर को भी कर सकते हैं नवमी का कन्या पूजन

जो श्रद्धा उदया तिथि को विशेष महत्व देते हैं, वे 20 अक्टूबर को भी महानवमी की पूजा और कन्या पूजन कर सकते हैं। हालांकि, इस दिन नवमी तिथि दोपहर 12:50 बजे तक ही रहेगी। इसलिए 20 अक्टूबर को नवमी के अनुसार पूजा, हवन और कन्या पूजन करने वाले श्रद्धालुओं को दोपहर 12:50 बजे से पहले यह अनुष्ठान पूरा कर लेना चाहिए। इस तरह, जो लोग उदया तिथि को मानते हैं, वे 20 अक्टूबर को भी महानवमी की पूजा और कन्या पूजन कर सकते हैं।

महानवमी का व्रत कब रखें और पारण कब करें?

महानवमी का व्रत 19 अक्टूबर को व्रत रख सकते हैं। नवमी के दिन मां दुर्गा की पूजा करें और पूरे दिन व्रत रखें। व्रत का पारण अगले दिन यानी विजयादशमी के दिन करना उचित माना जाता है।

संधि पूजा का शुभ मुहूर्त

इस वर्ष संधि पूजा का मुहूर्त 19 अक्टूबर 2026 को सुबह 10:27 बजे से 11:15 बजे तक रहेगा। यह कुल 48 मिनट का समय होगा। अष्टमी के अंतिम 24 मिनट और नवमी के शुरुआती 24 मिनट को मिलाकर कुल 48 मिनट का यह समय संधि काल कहलाता है। इसी दौरान संधि पूजा की जाती है। शास्त्रों में संधि काल को बेहद महत्वपूर्ण माना गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी समय मां दुर्गा ने चामुंडा स्वरूप धारण करके चंड और मुंड नामक असुरों का संहार किया था। इसी वजह से संधि पूजा में मां दुर्गा के चामुंडा स्वरूप की विशेष आराधना की जाती है। मान्यता है कि इस विशेष समय में मां चामुंडा की पूजा करने से देवी की कृपा प्राप्त होती है।

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पटना के चांदनी मार्केट में लगी आग, 15 फायर इंजन की मदद से आग पर काबू पाया

पटना का लोकप्रिय चांदनी मार्केट शुक्रवार को बड़े हादसे का शिकार हो गया। बिजली के सामान, इलेक्ट्रॉनिक चीजों और फैंसी लाइटिंग के लिए मश्हूर चांदनी मार्केट में शुक्रवार दोपहर को आग लग गई। अधिकारियों ने बताया कि आग दोपहर करीब 3.30 बजे एक स्टोरेज एरिया में लगी, जहां झूमर और दूसरी सजावटी लाइटिंग की चीजें रखी थीं। बाद में यह बगल के कमरे में फैल गई। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और पूरे इलाके में धुएं का गुबार छा गया। आग की लपटें इतनी तेज थीं कि आसपास के दुकानदारों और स्थानीय लोगों में हड़कंप मच गया।

पटना डिस्ट्रिक्ट फायर ऑफिसर अभिषेक कुमार ने बताया कि पंद्रह फायर इंजन ने आग पर काबू पाया। उन्होंने कहा, “फायरफाइटर अभी भी अंदर की लेयर में लगी आग को पूरी तरह बुझाने में लगे हैं।” कुमार ने कहा कि आग इलेक्ट्रिकल शॉर्ट सर्किट की वजह से लगी थी, और आग पूरी तरह बुझने और एरिया का इंस्पेक्शन करने के बाद ही सही वजह का पता चलेगा।

उन्होंने कहा कि इस घटना में कोई घायल नहीं हुआ और नुकसान सिर्फ उस एरिया में रखी प्रॉपर्टी और सामान तक ही सीमित था। कुमार ने कहा कि जिस जगह पर आग लगी थी, वहां आग से बचाव के खास इक्विपमेंट नहीं थे और आग बुझाने के काम के दौरान पास के होटलों से मदद ली गई। डीएफओ ने कहा कि एक ऑडिट किया जाएगा और संबंधित डिपार्टमेंट सही कानूनी और दूसरे कदम उठाएंगे। उन्होंने दुकानदारों से कहा कि वे पक्का करें कि उनकी दुकानों पर जरूरी फायर-सेफ्टी इक्विपमेंट मौजूद हों।

फिलहाल आग लगने के कारणों का पता नहीं चल पाया है। प्रारंभिक तौर पर आग किस वजह से लगी, इसे लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। अग्निशमन विभाग के अधिकारी पूरे मामले की जांच में जुटे हैं। आग पर पूरी तरह काबू पाने के बाद घटना के कारणों की विस्तृत जांच की जाएगी।

Diwali 2026 Dates: कब मनाया जाएगा दिवाली का त्योहार? जानें दिवाली से लेकर चित्रगुप्त पूजा तक की सही तारीख और पूजा मुहूर्त

Diwali 2026 Dates: कब मनाया जाएगा दिवाली का त्योहार? जानें दिवाली से लेकर चित्रगुप्त पूजा तक की सही तारीख और पूजा मुहूर्त

Diwali 2026 Dates: हिंदू धर्म में दिवाली का पर्व विशेष स्थान रखता है। यह पूरे साल में आने वाले प्रमुख त्योहारों में से एक माना जाता है। लोग इसके लिए काफी पहले से तैयारियां करते हैं। दिवाली का पर्व हर साल कार्तिक अमावस्या को मनाया जाता है। यह पांच दिनों का त्योहार है, जिसकी शुरुआत धनतेरस से होती है और चित्रगुप्त पूजा या भाई दूज के साथ संपन्न होता है। घर, बाजार, आस-पड़ोस हर तरफ इस त्योहार की तैयारियों की धूम रहती है। आइए जानें इस साल ये पंच दिवसीय पर्व कब से शुरू होगा और किस दिन मनाई जाएगी दिवाली? दिवाली पर लक्ष्मी पूजा का मुहूर्त क्या है?

दिवाली 2026 तारीख

वैदिक पंचांग के अनुसार, इस साल कार्तिक अमावस्या तिथि का प्रारंभ 8 नवंबर को दिन में 11 बजकर 27 मिनट पर होगा और यह तिथि 9 नवंबर को दोपहर 12 बजकर 31 मिनट तक मान्य रहेगी। उदयातिथि और लक्ष्मी पूजा मुहूर्त के आधार पर दिवाली का त्योहार 8 नवंबर दिन रविवार को है।

दिवाली 2026 लक्ष्मी पूजा मुहूर्त

8 नवंबर को दिवाली की लक्ष्मी पूजा का मुहूर्त 1 घंटा 56 मिनट का रहेगा। आप शाम में 05 बजकर 54 मिनट से लेकर शाम 07 बजकर 50 मिनट के बीच लक्ष्मी पूजा विधि विधान से कर सकते हैं।

आयुष्मान योग में मनेगी दिवाली

इस बार की दिवाली पर आयुष्मान् योग बन रहा है, जो पूरे दिन रहेगा। दिवाली पर आयुष्मान् योग प्रात:काल से लेकर 9 नवंबर को 03:03 ए एम तक मान्य है। उसके बाद से सौभाग्य का प्रारंभ होगा। आयुष्मान् योग व्यक्ति के स्वास्थ्य के लिए उत्तम होता है। दिवाली पर स्वाति नक्षत्र है, जो प्रात:काल से लेकर पूरी रात तक है।

धनतेरस 2026 तारीख

पंचांग के अनुसार, धनतेरस कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी तिथि को मनाते हैं। इस साल कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर को सुबह 10 बजकर 30 मिनट पर शुरू हो रही है और 7 नवंबर को सुबह 10 बजकर 47 मिनट तक है। उदयातिथि के आधार पर त्रयोदशी तिथि 7 नवंबर को है, लेकिन धनतेरस का त्योहार 6 नवंबर दिन शुक्रवार को मनाया जाएगा। उस दिन ही प्रदोष व्रत की पूजा भी होगी। 6 नवंबर को धनतेरस पूजा का मुहूर्त शाम में 6 बजकर 02 मिनट से शाम 7 बजकर 57 मिनट तक है।

दिवाली कैलेंडर 2026

6 नवंबर, शुक्रवार : धनतेरस, धन त्रयोदशी

7 नवंबर, शनिवार : काली चौदस, हनुमान पूजा

8 नवंबर, रविवार : दिवाली, नरक चतुर्दशी, लक्ष्मी पूजा, काली पूजा

10 नवंबर, मंगलवार : गोवर्धन पूजा, अन्नकूट

11 नवंबर, बुधवार : भाई दूज, यम द्वितीया, चित्रगुप्त पूजा

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Jitiya 2026 Date: 3 या 4 अक्टूबर, कब है जितिया व्रत? संतान की अच्छी सेहत और खुशहाली के लिए माताएं इस दिन करेंगी निर्जला उपवास, जानें मुहूर्त और पारण समय

Jitiya 2026 Date: हिंदू धर्म में जितिया या जिउतिया व्रत को सबसे कठिन उपवासों में से एक माना जाता है। यह व्रत माताएं अपनी संतान को हर मुसीबत से रक्षा करने, लंबी उम्र, अच्छी सेहत और उसकी खुशहाली के लिए करती हैं। इस व्रत को करने वाली माताएं 24 घंटे से अधिक समय तक निर्जला उपवास करती हैं और अपनी संतान की सलामती की प्रार्थना करती हैं। जितिया व्रत हर साल आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को किया जाता है। जितिया को जिउतिया और जीवित्पुत्रिका व्रत भी कहते हैं। इस साल इस व्रत की तारीख को लेकर भक्तों में कुछ कंफ्यूजन की स्थिति है, क्योंकि आश्विन कृष्ण अष्टमी तिथि 3 और 4 अक्टूबर को दोनों ही दिन प्राप्त हो रही है। आइए जानें पंचांग से इस साल ये व्रत किस दिन किया जाएगा?

जितिया व्रत 2026 सही तारीख

पंचांग के अनुसार, आश्विन कृष्ण अष्टमी तिथि 3 अक्टूबर को सुबह 7 बजकर 59 मिनट पर प्रारंभ हो रही है। लेकिन उस दिन उदयातिथि नहीं होगी क्योंकि सूर्योदय के बाद ही अष्टमी तिथि शुरू हो रही है। अष्टमी तिथि का समापन 4 अक्टूबर को सुबह 5 बजकर 51 मिनट पर होगा। अब समस्या यह है कि 4 अक्टूबर को सूर्योदय से पहले ही अष्टमी तिथि खत्म हो जा रही है।

प्रदोष काल मुहूर्त के आधार पर तय होगी जितिया व्रत की तारीख

जितिया व्रत की तारीख का निर्धारण प्रदोष पूजा मुहूर्त के आधार पर करते हैं, क्योंकि इस व्रत में पूजा सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में होती है। इस आधार पर देखा जाए तो जितिया व्रत के लिए प्रदोष काल 3 अक्टूबर को प्राप्त होगा, न कि 4 अक्टूबर को। ऐसे में इस साल जितिया व्रत 3 अक्टूबर, दिन शनिवार को रखा जाएगा। प्रदोष मुहूर्त के अलावा सुबह में 7:59 बजे से अष्टमी तिथि रहेगी।

जितिया व्रत 2026 पूजा मुहूर्त

जितिया के लिए पूजा का प्रदोष मुहूर्त शाम 6:05 बजे से प्रारंभ है। इस मुहूर्त से माताएं गंधर्व राजा जीमूतवाहन की पूजा करेंगी। जितिया के दिन ब्रह्म मुहूर्त 04:38 ए एम से 05:26 ए एम तक रहेगा, वहीं अभिजीत मुहूर्तत्र 11:46 ए एम से दोपहर 12:34 पी एम तक है।

जितिया व्रत का पारण समय

जितिया का निर्जला व्रत करने वाली व्रती माताएं, 4 अक्टूबर को सूर्योदय के बाद यानि सुबह 06:15 ए एम के बाद इस व्रत का पारण करेंगी।

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Jitiya Kab Hai 2026: अपनी संतान की खुशहाली के लिए माताएं इस दिन रखेंगी जीतिया व्रत, जानें इस निर्जला व्रत की तारीख, मुहूर्त और पारण समय

Jitiya Kab Hai 2026: जितिया व्रत को जीवित्पुत्रिका व्रत या जिउतिया व्रत के नाम से भी जाना जाता है। यह व्रत आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को किया जाता है। जीतिया व्रत हिंदू धर्म के सबसे कठिन और प्रभावशाली व्रतों में से एक माना जाता है क्यों इसमें व्रत 24 घंटे से अधिक समय तक निर्जला उपवास करती हैं। माताएं यह व्रत अपनी संतान की लंबी आयु, उत्तम स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि के लिए करती हैं। यह पर्व विशेष रूप से बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्रों में बहुत श्रद्धा से मनाया जाता है।

जीतिया व्रत तीन दिवसीय पर्व है, जिसकी शुरुआत सप्तमी तिथि को नहाय-खाय से होती है। अगले दिन यानी अष्टमी को निर्जला उपवास होता है और नवमी के दिन इस व्रत का पारण किया जाता है। छठ पर्व की तरह इसमें भी कठोर नियमों और अनुष्ठानों का पालन किया जाता है। इस दिन गन्धर्व राजकुमार जीमूतवाहन की पूजा की जाती है। साथ ही चील और सियारिन की प्रतीक आकृतियों का पूजन करने की परंपरा है।

जितिया 2026 तारीख

वैदिक पंचांग के अनुसार, इस साल जितिया व्रत के लिए जरूरी आश्विन कृष्ण अष्टमी तिथि का प्रारंभ 3 अक्टूबर को सुबह में 7 बजकर 59 मिनट पर हो रहा है। यह तिथि अगले दिन 4 अक्टूबर को सुबह 5 बजकर 51 मिनट तक मान्य रहेगी। प्रदोष काल के पूजा मुहूर्त के आधार पर जितिया का व्रत 3 अक्टूबर दिन शनिवार को रखा जाएगा।

जितिया 2026 मुहूर्त

इस साल जितिया व्रत के दिन ब्रह्म मुहूर्त 04:38 ए एम से लेकर 05:26 ए एम तक रहेगा। यह समय स्नान के लिए सबसे उत्तम होता है। उस दिन का शुभ समय यानि अभिजीत मुहूर्त 11 बजकर 46 ए एम से दोपहर 12 बजकर 34 मिनट तक रहेगा।

जितिया के दिन सूर्यास्त शाम को 6 बजकर 5 मिनट पर होगा। जितिया की प्रदोष पूजा शाम 06:05 बजे से की जाएगी। निशिता मुहूर्त रात में 11 बजकर 46 मिनट से देर रात 12 बजकर 35 ए एम तक है।

वरीयान योग और आर्द्रा नक्षत्र में होगा जितिया 2026 व्रत

इस साल जितिया के दिन वरीयान योग और आर्द्रा नक्षत्र रहेगा। वरीयान योग प्रात:काल से लेकर दोपहर 03 बजकर 21 मिनट तक रहेगा, उसके बाद से परिघ शुरू होगा। वरीयान एक शुभ योग हैं, इसके स्वामी धन के देवता कुबेर हैं। जितिया पर आर्द्रा नक्षत्र पूरे दिन है, जो प्रात:काल से लेकर मध्य रात्रि 01 बजकर 29 ए एम तक है।

जितिया 2026 पारण समय

जितिया का निर्जला व्रत सूर्योदय से लेकर अगले दिन सूर्योदय तक चलता है। ऐसे में जितिया का व्रत 3 अक्टूबर को सुबह 06:15 ए एम से प्रारंभ होगा और 4 अक्टूबर को 06:15 ए एम तक चलेगा। जितिया व्रत का पारण 4 अक्टूबर को सुबह 06:15 ए एम के बाद होगा।

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Hartalika Teej puja samagri list: 14 सितंबर को हरतालिका तीज व्रत करने से पहले पूजा के लिए जरूरी सामग्री जुटा लें, इनके बिना अधूरा है अटल सुहाग का व्रत

Hartalika Teej puja samagri list: हरतालिका तीज भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है। इस दिन सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र व अखंड सौभाग्य के लिए और अविवाहित कन्याएं सुयोग्य वर पाने के लिए निर्जला व्रत (बिना अन्न-जल का उपवास) रखती हैं। इस व्रत में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा का विधान है। ‘हरतालिका’ शब्द ‘हरत’ यानी हरण करना और ‘आलिका’ यानी सखी से मिलकर बना है। मान्यता है कि माता पार्वती की सखियां उन्हें घने जंगल में ले गई थीं, ताकि उनके पिता हिमालय किसी और के साथ उनका विवाह न कर पाएं। यहां उन्होंने कठोर तपस्या करके भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त किया था।

हिंदू धर्म के इस प्रमुख व्रत में पूजा के लिए जरूरी समाग्री का भी अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। इसलिए व्रत करने वाली महिलाएं इस उपवास की सभी सामग्री बहुत ध्यान से अर्जित करती हैं। आप भी यह व्रत करने जा रही हैं, तो सोमवार को व्रत शुरू करने से पहले एक बार यहां दी जा रही सामग्री सूची से अपनी सूची का मिलान कर लें। ताकि पूजा करते समय आपको कोई असुविधा न हो। आइए जानें पूजा की संपूर्ण सामग्री लिस्ट और पूजा विधि

हरतालिका व्रत 2026 तारीख और समय

वर्ष 2026 में उदया तिथि के अनुसार हरतालिका तीज 14 सितंबर 2026, सोमवार को मनाई जाएगी।

तृतीया तिथि प्रारंभ : 13 सितंबर 2026 को सुबह 07:08 बजे से

तृतीया तिथि समाप्त : 14 सितंबर 2026 को सुबह 07:06 बजे तक

प्रातःकाल पूजा मुहूर्त : 14 सितंबर 2026 को सुबह 06:05 से 07:06 बजे तक

हरतालिका तीज पूजन सामग्री लिस्ट

बालू या मिट्टी से बनी शिव, पार्वती और भगवान गणेश की प्रतिमाएं

सुहाग सामग्री (लाल चुनरी, बिंदी, चूड़ियां, आलता, मेहंदी, सिंदूर, कुमकुम, काजल, कंघी, बिछिया, पायल और अन्य श्रृंगार वस्तुएं)

रोली, चावल, कपूर, रुई, माचिस, मौली, हल्दी, चंदन, घी का दीपक, अगरबत्ती या धूपबत्ती, फल और मिठाइयां, खीर और हलवा, भिगोए हुए चने, पूजा के लिए कलश, जल और गंगाजल, पंचामृत बनाने के लिए दूध, दही, शहद, शक्कर और घी, 1 नारियल, दूर्वा घास, बेलपत्र, शमी पत्र, कच्ची हल्दी की गांठें, गेहूं या चावल, एक चौकी या आसन, मंडप बनाने के लिए केले के पत्ते, फूलों की माला और फूल, पान के पत्ते और सुपारी, कच्चा सूत

हरतालिका तीज 2026 पूजा विधि

प्रतिमा निर्माण : प्रातः स्नान के बाद संकल्प लें। इसके बाद काली मिट्टी या बालू से शिव-पार्वती और भगवान गणेश की प्रतिमा बनाएं।

शृंगार व अर्पण : भगवान शिव को चंदन, बेलपत्र, धतूरा, अक्षत और वस्त्र अर्पित करें। माता पार्वती को सुहाग की सामग्री (सिंदूर, चूड़ी, बिंदी, चुनरी आदि) चढ़ाएं।

कथा व आरती : हरतालिका तीज की व्रत कथा सुनें या पढ़ें और अंत में शिव-पार्वती की आरती करें।

रात का जागरण : इस व्रत में रात भर जागरण कर भजन-कीर्तन करने की परंपरा है।

पारण : अगले दिन सुबह विधिवत पूजा के बाद पंडित या बुजुर्गों को दान-दक्षिणा देकर व्रत खोलें।

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Hartalika Teej Kab Hai 2026: 13 या 14 सितंबर, कब हरतालिका तीज व्रत करना होगा सही? जानिए तिथि के कंफ्यूजन पर क्या है शास्त्रानुसार समाधान

Hartalika Teej Kab Hai 2026: पति की लंबी उम्र और सुखी जीवन के लिए किया जाने हरतालिका व्रत हिंदू धर्म के अत्यंत पवित्र व्रत में से एक है। यह व्रत हर साल भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को किया जाता है। इस साल इस व्रत की तारीख को लेकर व्रतियों में काफी कंफ्यूजन है, क्योंकि इस साल हरतालिका तीज के लिए जरूरी भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 13 सितंबर और 14 सितंबर को दोनों दिन है। हरतालिका तीज की पूजा जहां प्रदोष काल और प्रात:काल सूर्योदय के समय भी की जाती है। प्रदोष और सूर्योदय पूजा मुहूर्त के आधार पर देखा जाए तो हरतालिका तीज का व्रत और पूजन 13 सितंबर को होना उचित रहेगा। लेकिन उदयातिथि के आधार पर गणना करें तो हरतालिका तीज 14 सितंबर को होना चाहिए। ऐसे में आइए जानें इस साल हरतालिका तीज कब है, 13 या 14 सितंबर को? शास्त्रों में इस समस्या का क्या समाधान मिलता है?

हरतालिका तीज 13 या 14 सितंबर?

पंचांग के अनुसार, इस साल भाद्रपद शुक्ल तृतीया तिथि 13 सितंबर को सुबह 7:08 बजे से लेकर 14 सितंबर को सुबह 7:06 बजे तक है। न्यूज 18 हिंदी की रिपोर्ट के अनुसार, भविष्योत्तर पुराण के अनुसार, भाद्रस्य कजली कृष्णा शुक्ला च हरतालिका यानि भाद्रपद शुक्ल तृतीया को हरतालिका तीज का व्रत रखना चाहिए। इसमें भी द्वितीया युक्त तृतीया तिथि में हरतालिका तीज नहीं मनाते हैं, तृतीया चतुर्थी युक्त हो तो ज्यादा उत्तम है। दरअसल द्वितीया तिथि का संबंध पितामह यानि दादा से होता है और चतुर्थी तिथि का संबंध पुत्र से होता है।

इस आधार पर देखा जाए तो 13 सितंबर को द्वितीया युक्त तृतीया तिथि मिल रही है, क्योंकि उस दिन उदयातिथि के अनुसार द्वितीया तिथि सुबह 7:08 बजे तक है, फिर तृतीया प्रारंभ हो रही है। ऐसे में हरतालिका तीज के लिए द्वितीया युक्त तृतीया तिथि का निषेध है। वहीं, 14 सितंबर को तृतीया की उदयातिथि सुबह 7:06 बजे तक है। उसके बाद से चतुर्थी तिथि का प्रारंभ हो जा रही है। ऐसे में 14 सितंबर को चतुर्थी युक्त तृतीया तिथि मिल रही है। ऐसे में 14 सितंबर को ही हरतालिका तीज का व्रत रखना और पूजा करना शास्त्र सम्मत है।

हरतालिका तीज मुहूर्त 2026

14 सितंबर को ब्रह्म मुहूर्त 04:32 ए एम से 05:19 ए एम के बीच उठकर स्नान आदि से निवृत होकर हरतालिका तीज व्रत और गौरी-शिव पूजा का संकल्प करें। उस दिन का शुभ समय यानि अभिजीत मुहूर्त 11:52 ए एम से 12:41 पी एम तक है। सुबह में हरतालिका तीज की पूजा के लिए सुबह 06:05 बजे से सुबह 07:06 बजे के बीच शुभ होगा। इस समय में आपको अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त भी प्राप्त होगा, जो सुबह 06:05 ए एम से लेकर 07:38 ए एम तक है। सुबह की पूजा ब्रह्म योग और चित्रा नक्षत्र में होगी। ब्रह्म योग दोपहर 12:47 पी एम तक है।

प्रदोष काल में हरतालिका तीज की पूजा सूर्यास्त के बाद शाम 06:28 बजे के बाद से कर सकते हैं। प्रदोष पूजा के समय रवि योग, इंद्र योग और स्वाति नक्षत्र मिल जाएगा, जो उस दिन दोपहर में 1 बजकर 55 मिनट से प्रारंभ होगा और 15 सितंबर को सुबह 6 बजकर 6 मिनट तक रहेगा। इंद्र योग दोपहर में 12:47 पी एम से प्रारंभ है।

हरतालिका तीज 2026 राहुकाल

तीज वाले दिन राहुकाल सुबह में ही प्रारंभ हो रहा है। राहुकाल सुबह 07 बजकर 38 मिनट से सुबह 09 बजकर 11 मिनट तक है। अपनी पूजा की तैयारी इस समय को ध्यान में रखते हुए करें।

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