Yogini Ekadashi 2026 Date: ये होगी आषाढ़ मास की पहली एकादशी, जानें योगिनी एकादशी व्रत की तारीख, पूजा मुहूर्त और विधि

Yogini Ekadashi 2026 Date: हिंदू धर्म में एकादशी तिथि को अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण तिथि माना जाता है। यह दिन भगवान विष्णु को समर्पित है और इस दिन सच्च मन से श्री हरि की पूजा करने पर साधक को जीवन के कष्टों से छुटकारा मिलता है और सुख-समृद्धि आती है। हर हिंदू माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को भगवान विष्णु को समर्पित व्रत किया जाता है। इस तरह पूरे साल में 24 एकादशी तिथियां आती हैं। हर एकादशी तिथि का अपना महत्व और स्थान होता है।

योगिनी एकादशी 2026 तारीख

पंचांग के अनुसार, इस साल आषाढ़ कृष्ण एकादशी तिथि का प्रारंभ 10 जुलाई शुक्रवार को सुबह 8 बजकर 16 मिनट पर हो रहा है। यह 11 जुलाई शनिवार को प्रात: 5 बजकर 22 मिनट तक मान्य रहेगी।

दो दिन होगा योगिनी एकादशी व्रत

11 जुलाई को हरि वासर सुबह 10 बजकर 32 मिनट पर खत्म हो रहा है, इस वजह से योगिनी एकादशी का व्रत दो दिन रखा जाएगा। 10 जुलाई को गृहस्थ लोग योगिनी एकादशी का व्रत रहेंगे, वहीं 11 जुलाई को वैष्णव संप्रदाय के लोग यह व्रत रखेंगे।

योगिनी एकादशी 2026 मुहूर्त

10 जुलाई को योगिनी एकादशी की पूजा सुबह 08:16 बजे से 10 बजकर 42 मिनट तक कर सकते हैं। उस दिन लाभ-उन्नति मुहूर्त 07:15 ए एम से 08:59 ए एम तक है, वहीं अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त 08:59 ए एम से 10:42 ए एम तक रहेगा। इस दिन ब्रह्म मुहूर्त 04:10 ए एम से 04:50 ए एम है, वहीं अभिजीत मुहूर्त 11:59 ए एम से दोपहर 12:54 पी एम तक है।

योगिनी एकादशी 2026 शुभ योग

योगिनी एकादशी व्रत पर 10 जुलाई धृति योग सुबह 07:15 ए एम तक है, उसके बाद शूल योग है, जो 11 जुलाई को 03:51 ए एम तक रहेगा। फिर गण्ड योग बनेगा। व्रत के दिन भरणी नक्षत्र दोपहर 01:15 पी एम तक है, उसके बाद से कृत्तिका नक्षत्र है।

योगिनी एकादशी पर रहेगा भद्रा का साया

10 जुलाई को भद्रा काल प्रात:काल में 05:31 बजे से प्रारंभ होगा और सुबह 08:16 ए एम तक रहेगी। यह भद्रा 2 घंटे से अधिक समय तक है, लेकिन इसका वास स्वर्ग में है, ऐसे में इसका कोई अशुभ प्रभाव धरती पर नहीं होगा।

योगिनी एकादशी 2026 पारण समय

यदि आप 10 जुलाई को योगिनी एकादशी व्रत रखते हैं, तो व्रत का पारण 11 जुलाई को दोपहर 01:50 पी एम से शाम 04:36 पी एम के बीच कर सकते हैं। वहीं जो लोग 11 जुलाई को यह व्रत रखेंगे, वे पारण 12 जुलाई को प्रात: 05:32 ए एम से लेकर सुबह 08:18 ए एम के बीच कर सकते हैं।

Shani Pradosh Vrat 2026 Today: ज्येष्ठ माह का अंतिम प्रदोष व्रत आज, शनि प्रदोष व्रत पर 5 राशि के जातक करें ये 5 उपाय

Shani Pradosh Vrat 2026 Today: ज्येष्ठ माह का अंतिम प्रदोष व्रत आज, शनि प्रदोष व्रत पर 5 राशि के जातक करें ये 5 उपाय

Shani Pradosh Vrat 2026 Today: हर माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि का प्रदोष व्रत किया जाता है। यह तिथि भगवान शिव को समर्पित है और इस दिन प्रदोष काल में पूजा करने का विधान है। शनिवार को पड़ने वाली त्रयोदशी तिथि को शनि प्रदोष का व्रत करते हैं। शनि प्रदोष व्रत भगवान शिव और शनिदेव दोनों की कृपा पाने का एक बेहद पावन और फलदायी अवसर है। यह व्रत करने से कुंडली में मौजूद शनि दोष, साढ़ेसाती और ढैय्या के कष्टों से राहत मिलती है। आज ज्येष्ठ माह का अंतिम प्रदोष व्रत किया जा रहा है। आज 27 जून 2026, शनिवार को शनि प्रदोष व्रत है। यह दिन भगवान शिव के साथ शनिदेव की कृपा पाने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।

शनि प्रदोष व्रत पूजा मूहूर्त

प्रदोष व्रत की पूजा हमेशा शाम को सूर्यास्त के समय यानी प्रदोष काल में की जाती है:

त्रयोदशी तिथि प्रारंभ : 26 जून 2026 को रात 10:22 बजे से

त्रयोदशी तिथि समाप्त : 28 जून 2026 को रात 12:43 बजे तक

प्रदोष काल पूजा मुहूर्त (27 जून): शाम 07:23 बजे से रात 09:23 बजे तक

कुल अवधि : 2 घंटे

5 राशियों के जातक शनि प्रदोष में करें ये उपाय

शनि प्रदोष व्रत शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या के अशुभ फलों से रक्षा करता है। मान्यता है कि इस दिन साढ़ेसाती और ढैय्या के अशुभ बचाव से बचने के लिए कुछ उपायों को करना लाभकारी होता है। इस समय मेष, कुंभ और मीन राशि पर शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव है, जबकि सिंह और धनु राशि पर ढैय्या चल रही है। ऐसे में इन पांच राशियों के जातक इस दिन शनि कृपा पाने के लिए यहां बताए जा रहे 5 उपाय कर सकते हैं

  • शनि प्रदोष व्रत के दिन शनि मंदिर जाकर सरसों के तेल का दीपक जलाएं और ॐ शं शनैश्चराय नम: मंत्र का अधिक से अधिक जाप करें। मान्यता है कि ऐसा करने शनि कृपा प्राप्त होती है और साढ़ेसाती, ढैय्या के अशुभ प्रभाव कम होते हैं।
  • शनि प्रदोष व्रत के दिन शनि से संबंधित काले वस्त्र, काले तिल, काली उड़द की दाल और लोहा आदि का दान लाभकारी माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन दान करने से शनि कृपा प्राप्त होती है।
  • शनि प्रदोष व्रत के दिन साढ़ेसाती और ढैय्या के अशुभ प्रभाव कम करने के लिए पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक लगाना और परिक्रमा करने से शनि कृपा प्राप्त होने की मान्यता है।
  • शनि प्रदोष व्रत के दिन शनि कृपा पाने के लिए हनुमान जी की आराधना करनी चाहिए। उन्हें चमेली का तेल और सिंदूर अर्पित करना चाहिए। साढ़ेसाती और ढैय्या के अशुभ प्रभावों को कम करने के लिए हनुमान चालीसा का कम के कम 108 बार पाठ करना चाहिए।
  • शनि प्रदोष व्रत के दिन शनि के अशुभ प्रभावों से राहत पाने के लिए भगवान शिव की भक्ति भाव से पूजा करनी चाहिए और शिवलिंग का जलाभिषेक करना चाहिए। शनिदेव को भगवान शिव का परम शिष्य माना जाता है। मान्यता है कि शिव भक्तों को शनि देव कभी परेशान नहीं करते हैं।

Jyeshtha Month Vat Purnima 2026: 29 जून को वट पूर्णिमा को मिलेगा स्ट्रॉबेरी मून का साथ, जानें ज्येष्ठ पूर्णिमा में स्नान-दान और पूजा का मुहूर्त

Chaturmas 2026: ज्येष्ठ माह के बाद अब शुरू होगा आषाढ़ का महीना, इसमें लगेगा चतुर्मास और होगा देवशयनी एकादशी का व्रत

Chaturmas 2026: हिंदी कैलेंडर का चौथा महीना आषाढ़ का हिंदू धर्म में अहम स्थान है। इस माह को सर्वाधिक बारिश के लिए जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस महीने की पूर्णिमा तिथि के दिन आकाश में पूर्वाषाढ़ा या उत्तराषाढ़ा नक्षत्र का योग बनता है, इसलिए इस माह का नाम ‘आषाढ़’ पड़ा है। इसके अलावा यह महीना इसलिए भी खास माना जाता है क्योंकि इसमें योगिनी एकादशी, देवशयनी एकादशी, चतुर्मास और गुरु पूर्णिमा जैसे कई महत्वपूर्ण व्रत और पर्व भी आते हैं।

आषाढ़ में पुरी में जगन्नाथ रथ यात्रा का आयोजन किया जाता है। इसके बाद जगत के पालनहार भगवान विष्णु चार महीने के लिए सो जाते हैं और चतुर्मास शुरू होते हैं। भगवान विष्णु जिस दिन शयन शुरू करते हैं, उस दिन देवशयनी एकादशी का व्रत किया जाता है। इसके बाद हिंदू धर्म में शुभ और मांगलिक कार्यों पर ब्रेक लग जाता है। यह रोक लगभग 119 दिन या चार माह के तक रहने के बाद देवउठनी एकादशी पर समान्त होती है। आइए जानें इस साल आषाढ़ माह कब से शुरू हो रहा है और चतुर्मास कब से लगेगा ?

ज्येष्ठ पूर्णिमा के अगले दिन से शुरू होगा आषाढ़ का महीना

ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा तिथि के बाद आषाढ़ माह की शुरुआत होती है। वैदिक पंचांग के अनुसार इस साल वट पूर्णिमा का व्रत 29 जून 2026 को रखा जाएगा। यानि आषाढ़ माह की शुरुआत 30 जून 2026 को होगी और इसका समापन 29 जुलाई 2026 को होगा।

25 जुलाई से शुरू होगा चातुर्मास 2026

साल 2026 में चातुर्मास की शुरुआत 25 जुलाई, शनिवार से होगी। इस दिन आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी का व्रत होता है, जिसे देवशयनी एकादशी कहा जाता है। चतुर्मास का समापन 20 नवंबर, शुक्रवार को कार्तिक शुक्ल पक्ष की देवउठनी एकादशी के दिन यानी करीब 119 दिनों बाद होगा।

चातुर्मास में आते हैं ये 4 माह

चातुर्मास नाम का अर्थ ही होता है चार महीने। इसमें श्रावण, भाद्रपद, आश्विन और कार्तिक मास शामिल होते हैं। ये सभी महीने धार्मिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

भगवान विष्णु से जुड़ी मान्यता

धार्मिक कथाओं के अनुसार, देवशयनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु योग निद्रा में चले जाते हैं। ऐसा माना जाता है कि वे पाताल लोक में राजा बलि के पास विश्राम करते हैं। इसके बाद चार महीने तक वे विश्राम अवस्था में रहते हैं और देवउठनी एकादशी के दिन जागते हैं। तभी से फिर सृष्टि के संचालन की जिम्मेदारी संभालते हैं।

आषाढ़ माह 2026 व्रत त्योहार

3 जुलाई 2026 – कृष्णपिङ्गल संकष्टी चतुर्थी

6 जुलाई 2026 – कालाष्टमी एवं मासिक कृष्ण जन्माष्टमी

10 जुलाई 2026 – योगिनी एकादशी

12 जुलाई 2026 – रवि प्रदोष व्रत एवं मासिक शिवरात्रि

14 जुलाई 2026 – आषाढ़ अमावस्या

15 जुलाई 2026 – आषाढ़ नवरात्रि प्रारम्भ

16 जुलाई 2026 – जगन्नाथ रथयात्रा, कर्क संक्रांति

17 जुलाई 2026 – अनिरुद्ध चतुर्थी

22 जुलाई 2026 – भड़ली नवमी

25 जुलाई 2026 – देवशयनी एकादशी

26 जुलाई 2026 – रवि प्रदोष व्रत

28 जुलाई 2026 – कोकिला व्रत

29 जुलाई 2026 – गुरु पूर्णिमा, आषाढ़ पूर्णिमा

Shani Pradosh Vrat 2026: ज्येष्ठ माह की अंतिम त्रयोदशी पर होगा शनि प्रदोष व्रत, शनिदेव को इस दिन प्रसन्न करने के लिए करें ये 5 उपाय

Shani Pradosh Vrat 2026: ज्येष्ठ माह की अंतिम त्रयोदशी पर होगा शनि प्रदोष व्रत, शनिदेव को इस दिन प्रसन्न करने के लिए करें ये 5 उपाय

Shani Pradosh Vrat 2026: शनि प्रदोष व्रत का सभी प्रदोष यानी त्रयोदशी व्रत में अहम स्थान है। शनि देव को भगवान शिव का भक्त माना जाता है। शनिवार के दिन त्रयोदशी तिथि पड़ने पर भगवान शिव के साथ-साथ शनि देव की कृपा पाने का दुर्लभ संयोग बनता है। इस साल ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि शनि प्रदोष व्रत किया जाएगा।

हिंदू कैलेंडर के हर माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि भगवान शिव को समर्पित होती है। इस दिन भक्त प्रदोष काल में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-उपासना करते हैं। इसलिए इस तिथि के व्रत को प्रदोष व्रत कहते हैं। यह तिथि जिस दिन पड़ती है उसके अनुसार व्रत का नाम होता है। जैसे ज्येष्ठ शुक्ल त्रयोदशी तिथि शनिवार 27 जून को पड़ रही है, इसलिए यह शनि प्रदोष व्रत होगा। इस दिन शनि देव को प्रसन्न करने के लिए यहां बताए जा रहे 5 उपाय करने से शनि दोष शांत होगा और उनका आशीर्वाद मिलेगा।

शनि प्रदोष व्रत के दिन करें ये उपाय

  • शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या से पीड़ित लोगों को ‘दशरथकृत शनि स्तोत्र’ का पाठ करना चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से शनिदेव प्रसन्न होते हैं।
  • शनि प्रदोष व्रत के दिन प्रदोष काल में भगवान शिव का जल में काले तिल मिलाकर जलाभिषेक करना चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से भगवान शिव के साथ शनिदेव प्रसन्न होते हैं।
  • पूजा के समय भगवान शिव को बेलपत्र, शमी के पत्ते और चंदन अर्पित करने से शनि के अशुभ प्रभावों से राहत मिलती है।
  • शनि मंदिर में या पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाना अत्यंत लाभकारी माना जाता है।
  • शनि प्रदोष के दिन हनुमान जी की पूजा करनी चाहिए। इसके साथ ही हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए। मान्यता है कि इससे शनि के अशुभ प्रभावों से राहत मिलती है।

इन राशियों के लिए खास है शनि प्रदोष व्रत

कर्म फलदाता शनि इस समय मीन राशि के गोचर में हैं। शनि के मीन राशि में होने से मेष, कुंभ और मीन राशि पर शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव है, जबकि सिंह और धनु राशि पर शनि ढैय्या चल रही है। शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या के दौरान व्यक्ति को आर्थिक, मानसिक और शारीरिक तौर पर परेशानी का सामना करना पड़ता है। मान्यता है कि शनि प्रदोष व्रत के दिन साढ़ेसाती और ढैय्या से पीड़ित राशियां कुछ उपाय करती हैं, तो उन्हें शनि के अशुभ प्रभावों से राहत मिलती है।

Raksha Bandhan 2026 Lunar Eclipse: साल का अंतिम चंद्र ग्रहण सावन की पूर्णिमा को होगा, क्या इससे बदल जाएगा रक्षाबंधन का समय?