September Ekadashi Vrat Date: सितंबर में किया जाएगा अजा एकादशी और परिवर्तनी एकादशी का व्रत, जानें दोनों की सही तारीख और पारण समय

September Ekadashi Vrat Date: हिंदू कैलेंडर के प्रत्येक माह में कृष्ण और शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को एकादशी व्रत किया जाता है। प्रत्येक माह 2 एकादशी व्रत को देखते हुए साल में कुल 24 एकादशी आती हैं। यह तिथि भगवान विष्णु को समर्पित है और इस व्रत का श्री हरि की कृपा पाने के सबसे सरल उपायों में से एक माना जाता है। माना जाता है कि एकादशी व्रत करने से जातक को सुख-समृद्धि मिलने के साथ ही अंत में मोक्ष की प्राप्ति होती है। हर माह की तरह भाद्रपद माह की कृष्ण और शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को यह व्रत किया जाएगा। आइए जानें सितंबर माह में आने वाले एकादशी व्रत किस दिन किए जाएंगे।

सितंबर 2026 में दो एकादशी व्रत आएंगे

अजा एकादशी : 7 सितंबर 2026, सोमवार, भाद्रपद कृष्ण पक्ष

अजा एकादशी का पारण : 8 सितंबर 2026

परिवर्तिनी एकादशी : 22 सितंबर 2026, मंगलवार, भाद्रपद शुक्ल पक्ष

परिवर्तिनी एकादशी का पारण : 23 सितंबर 2026

अजा एकादशी व्रत 2026

भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को अजा एकादशी व्रत किया जाता है। इस दिन भगवान श्री हरि विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करने का विधान है। इस साल यह व्रत 7 सितंबर 2026 को किया जाएगा। भाद्रपद कृष्ण पक्ष एकादशी तिथि 6 सितंबर 2026 को शाम 07:29 बजे से प्रारंभ होगी और 7 सितंबर 2026 को शाम 05:03 बजे समाप्त होगी। इस व्रत का पारण 8 सितंबर 2026 को सुबह 06:02 से 08:33 के बीच कर सकेंगे।

महत्व और धार्मिक मान्यता

अजा एकादशी का व्रत रखने से समस्त पापों का नाश होता है और व्यक्ति को अश्वमेध यज्ञ के समान फल की प्राप्ति होती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, राजा हरिश्चंद्र ने अपने खोए हुए राज-पाट, परिवार और मान-सम्मान को पुनः प्राप्त करने के लिए महर्षि गौतम के कहने पर यही व्रत किया था।

परिवर्तिनी एकादशी 2026 

भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को परिवर्तिनी एकादशी कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चातुर्मास के दौरान योगनिद्रा में लीन भगवान श्री हरि विष्णु इस दिन करवट बदलते हैं, इसलिए इसे परिवर्तिनी एकादशी कहते हैं। इस साल यह व्रत 22 सितंबर 2026 को किया जाएगा। भाद्रपद शुक्ल पक्ष एकादशी तिथि 21 सितंबर 2026 को रात 10:15 बजे से प्रारंभ होकर 22 सितंबर 2026 को रात 08:40 बजे समाप्त होगी। इस व्रत का पारण 23 सितंबर 2026 (बुधवार) को सुबह 06:10 से 08:35 के बीच कर सकते हैं।

महत्व और धार्मिक मान्यता

इस दिन भगवान विष्णु के वामन अवतार की पूजा का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से वाजपेय यज्ञ के समान पुण्य प्राप्त होता है और अनजाने में हुए सभी पाप मिट जाते हैं।

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Aja Ekadashi 2026 Date: भादों की पहली एकादशी होगी अजा एकादशी, इस दिन बन रहे दुर्लभ संयोग में पूजा और व्रत का मिलेगा राजसुख

Aja Ekadashi 2026 Date: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष स्थान है। यह व्रत हर हिंदू माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने से सभी कष्टों का निवारण होता है। ऐसा ही एक व्रत है अजा एकादशी का भी। यह व्रत भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है। यह भादों माह की पहली एकादशी होती है। यह भगवान विष्णु को समर्पित एक अत्यंत पवित्र व्रत है। सनातन धर्म में इस एकादशी का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है। आइए जानें इस साल ये व्रत कब किया जाएगा, किस दुर्लभ योग में पूजा और व्रत करने से मिलेगा राजसुख और इसका महत्व क्या है?

अजा एकादशी 2026 तारीख

भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 6 सितंबर को शाम 07:29 बजे शुरू होगी और 7 सितंबर को शाम 5 बजकर 3 मिनट तक रहेगी। उदयातिथि के आधार पर अजा एकादशी का व्रत 7 सितंबर दिन सोमवार को रखा जाएगा। इस व्रत का पारण 8 सितंबर मंगलवार को सुबह में 6 बजकर 2 मिनट से सुबह 8 बजकर 33 मिनट के बीच कर सकते हैं।

सर्वार्थ सिद्धि योग में अजा एकादशी

इस बार की अजा एकादशी पर सर्वार्थ सिद्धि योग शाम को 06 बजकर 14 मिनट पर बनेगा और यह अगले दिन 8 सितंबर को सुबह 06 बजकर 02 मिनट तक रहेगा। व्रत वाले दिन प्रात:काल से लेकर सुबह 06:41 ए एम तक व्यतीपात योग है, उसके बाद से वरीयान् योग बनेगा, जो 8 सितंबर को तड़के 03:38 ए एम तक है, फिर परिघ योग होगा।

अजा एकादशी 2026 मुहूर्त

यदि आपको अजा एकादशी का व्रत रखना है तो पूजा का मुहूर्त सुबह में 06:02 ए एम से 07:36 ए एम तक है, उसके बाद सुबह में 09:10 ए एम से 10:45 ए एम तक है। इस समय में आप भगवान विष्णु की पूजा कर सकते हैं। उस दिन ब्रह्म मुहूर्त 04:31 ए एम से 05:16 ए एम तक है, वहीं अभिजीत मुहूर्त दिन में 11:54 ए एम से दोपहर 12:44 पी एम तक है।

अजा एकादशी महत्व

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र ने अपने खोए हुए राज्य, परिवार और सम्मान को वापस पाने के लिए महर्षि गौतम के सुझाव पर अजा एकादशी का व्रत किया था। इस व्रत के प्रभाव से उन्हें उनका सब कुछ पुनः प्राप्त हो गया था। माना जाता है कि जो व्यक्ति सच्चे मन से अजा एकादशी का व्रत रखता है और भगवान विष्णु की पूजा करता है, उसके समस्त पाप और पूर्व जन्म के बुरे कर्म नष्ट हो जाते हैं। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, इस दिन विधि-विधान से पूजा और व्रत करने से अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य फल की प्राप्ति होती है।

पूजा विधि

  • एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और भगवान विष्णु के समक्ष व्रत का संकल्प लें।
  • भगवान विष्णु के ऋषिकेश स्वरूप की प्रतिमा या चित्र स्थापित कर उन्हें पीले फूल, तुलसी दल, फल, धूप और दीप अर्पित करें।
  • अजा एकादशी की व्रत कथा पढ़ें या सुनें और अंत में भगवान विष्णु की आरती करें।
  • इस दिन गरीबों या जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या तिल का दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
  • द्वादशी तिथि को शुभ मुहूर्त में व्रत का पारण किया जाता है।

Shravan Putrada Ekadashi Vrat Katha: सावन की अंतिम एकादशी का व्रत आज, इस व्रत में जरूर सुनें महिष्मती पुरी के राजा महीजित की ये कथा

Shravan Putrada Ekadashi Vrat Katha: आज श्रावण मास की अंतिम एकादशी पुत्रदा या पवित्रा एकादशी का व्रत है। यह व्रत हर साल श्रावण शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है। पूरे साल में आज वाले सभी एकादशी व्रतों में इसका विशेष स्थान है, क्योंकि यह व्रत संतान के सुखी और स्वस्थ जीवन की कामना के लिए किया जाता है। साथ ही, नि:संतान दंपति इसे संतान प्राप्ति की कामना से भी करते हैं। हिंदू धर्म में यह अकेला ऐसा एकादशी व्रत है, जो साल में दो बार किया जाता है। एक बार सावन में और फिर पौष के महीने में। पुत्रदा एकादशी हिंदू धर्म में भगवान विष्णु को समर्पित एक अत्यंत महत्वपूर्ण व्रत है। इस दिन भगवान विष्णु और उनके कृष्ण रूप की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। इस साल सावन पुत्रदा एकादशी पर मूल नक्षत्र के साथ सिद्धि योग, सर्वार्थ सिद्धि योग और रवियोग का संयोग बन रहा है।

एकादशी तिथि रात 3:56 बजे तक

एकादशी की तिथि रात 3:56 बजे तक रहेगी। इस दिन चर-लाभ-अमृत मुहूर्त सुबह 7:03 बजे से 11:52 बजे तक रहेगा। अभिजित मुहूर्त दोपहर 11:26 बजे से 12:18 बजे तक रहेगा। इसके अलावा शुभ योग मुहूर्त दोपहर 1:28 बजे से 3:04 बजे तक रहेगा।

श्रावण पुत्रदा एकादशी व्रत कथा

द्वापर युग में महिष्मती पुरी के राजा महीजित अत्यंत धर्मात्मा, दानवीर और प्रजापालक थे। उनके राज्य में प्रजा हर तरह से सुख-समृद्धि से परिपूर्ण थी, लेकिन राजा महीजित की कोई संतान नहीं थी। संतान न होने के कारण राजा और उनकी पत्नी अत्यंत दुःखी और चिंतित रहते थे।

जब राजा वृद्धावस्था की ओर बढ़ने लगे, तो उन्होंने राज्य के ऋषि-मुनियों और पंडितों को बुलाकर अपनी इस व्यथा का समाधान मांगा। उन्होंने ऋषियों से कहा, “मैंने जीवन में कभी कोई अधर्म नहीं किया, प्रजा को पुत्र समान माना, फिर भी मुझे संतान सुख क्यों नहीं मिला?”

राजा की व्यथा सुनकर सभी ऋषि-मुनि जंगल में लोमश ऋषि के आश्रम पहुंचे। लोमश ऋषि परम ज्ञानी और त्रिकालदर्शी थे। ऋषियों के निवेदन पर लोमश ऋषि ने ध्यान लगाकर राजा के पूर्व जन्म का वृत्तांत देखा और बताया कि राजा महीजित पूर्व जन्म में एक निर्धन वैश्य थे। एक बार श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को वे दो दिनों से भूखे-प्यासे भटक रहे थे।

रास्ते में एक जलाशय देखकर वे पानी पीने पहुंचे। उसी समय एक प्यासी गाय भी वहां पानी पीने आई। वैश्य ने उस गाय को हटाकर स्वयं पहले पानी पी लिया। अनजाने में एकादशी के दिन प्यासी गाय को जल से वंचित करने के कारण उन्हें इस जन्म में राजा बनने का सुख तो मिला, परंतु संतानहीन रहने का श्राप भी मिला।

ऋषि लोमश ने इस पाप के निवारण का उपाय बताते हुए कहा कि यदि राजा और उनकी प्रजा श्रावण माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी का विधिवत व्रत रखें और उसका पुण्य फल राजा को अर्पित करें, तो उन्हें निश्चित ही संतान की प्राप्ति होगी।

राजा महीजित, उनकी पत्नी और समस्त प्रजाजनों ने ऋषियों के बताए अनुसार श्रावण पुत्रदा एकादशी का निष्ठापूर्वक व्रत रखा और उसका संपूर्ण पुण्य राजा को दे दिया। इस व्रत के प्रभाव से रानी गर्भवती हुईं और समय आने पर उन्होंने एक सुंदर, तेजस्वी तथा योग्य पुत्र को जन्म दिया। तभी से इस एकादशी का नाम ‘पुत्रदा एकादशी’ पड़ा।

Putrada Ekadashi 2026: कल किया जाएगा सावन पुत्रदा एकादशी का व्रत, जानें साल में 2 बार क्यों किया जाता है पुत्रदा एकादशी व्रत

Putrada Ekadashi 2026: कल किया जाएगा सावन पुत्रदा एकादशी का व्रत, जानें साल में 2 बार क्यों किया जाता है पुत्रदा एकादशी व्रत

Putrada Ekadashi 2026: हिंदू धर्म में पुत्रदा एकादशी व्रत का विशेष स्थान है। यह व्रत संतान की सुख-समृद्धि, खुशहाली और अच्छी सेहत के लिए किया जाता है। पूरे साल में आने वाली सभी एकादशी व्रतों में यह अकेला उपवास है, जो साल में दो बार किया जाता है। एक बार श्रावण शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि और फिर पौष शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नि:संतान दंपति इस व्रत को संतान प्राप्ति की कामना से कर सकते हैं। इस एकादशी में भगवान विष्णु की बाल रूप में या श्री कृष्ण की पूजा जाती है।

पुत्रदा एकादशी 2026 में कब?

साल में दो बार पौष और सावन माह में पुत्रदा एकादशी का व्रत रखा जाता है। दोनों ही व्रत संतान प्राप्ति या संतान की सुख-शांति के उद्देश्य से रखा जाता है। इस साल श्रावण मास की पुत्रदा एकादशी का व्रत 23 अगस्त 2026 को रखा जाएगा।

श्रावण पुत्रदा एकादशी का धार्मिक महत्व

श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को श्रावण पुत्रदा एकादशी के नाम से जाना जाता है। कई हिस्सों में इसे पवित्रा एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसे पापों का नाश करने वाली और पुण्य प्रदान करने वाली एकादशी बताया जाता है। श्रावण मास में इस एकादशी का महत्व इसलिए भी और बढ़ जाता है क्योंकि इस महीने में भगवान शिव की भी पूजा होती है। ऐसे में भगवान विष्णु के साथ-साथ भगवान शिव की पूजा करने से भक्तों को खास लाभ मिलता है।

साल में 2 बार पुत्रदा एकादशी क्यों?

साल में दो बार पुत्रदा एकादशी व्रत होने का मुख्य कारण यह है कि, विभिन्न धार्मिक ग्रंथों और पुराणों में दोनों ही खास तिथियों का फल संतान प्राप्ति और संतान की सुरक्षा के लिए बताया गया है। दोनों ही एकादशियों का उद्देश्य और फल की समानता होने के कारण ही दोनों को पुत्रदा एकादशी (संतान प्रदान करने वाली) कहा जाता है।

दोनों एकादशियों का अलग-अलग महत्व

श्रावण एकादशी : यह विशेष रूप से संतान के स्वास्थ्य, दीर्घायु और संकटों से रक्षा के लिए रखी जाती है।

पौष एकादशी : यह मुख्य रूप से योग्य, ज्ञानी और तेजस्वी संतान की प्राप्ति तथा उसकी उन्नति के लिए मानी जाती है।

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Putrada Ekadashi Date and Muhurat: 23 अगस्त को होगा सावन पुत्रदा एकादशी का व्रत, खास संयोग में पूजा से पूरी होगी संतान की मनोकामना

Sawan Putrada Ekadashi Date and Muhurat: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष स्थान है। यह व्रत हिंदू कैलेंडर के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है। भगवान विष्णु को समर्पित यह व्रत जब सावन माह में होता है, तो श्री हरि के साथ ही भगवान विष्णु की पूजा का भी संयोग प्राप्त होता है। सावन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को पुत्रदा एकादशी का व्रत किया जाता है। इस साल यह व्रत 23 अगस्त रविवार के दिन पड़ रहा है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो दंपत्ति संतान सुख से वंचित हैं या जिनकी संतान के जीवन में स्वास्थ्य या करियर से जुड़ी समस्याएं आ रही हैं, उनके लिए यह व्रत विशेष फलदायी होता है। ऐसा माना जाता है कि इस व्रत के प्रभाव से समस्त पापों का नाश होता है और संतान सुख एवं सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करने से संतान से जुड़ी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और संतान के जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है।

खास बात यह है कि सावन का महीना होने के कारण इस दिन भगवान शिव और भगवान विष्णु दोनों की आराधना का विशेष महत्व बताया गया है। देवघर के ज्योतिषाचार्य पंडित नंदकिशोर मुद्गल ने लोकल 18 को बताया कि रविवार के दिन पुत्रदा एकादशी का पड़ना भी एक बड़ा संयोग है। इस दिन विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। सावन का महीना होने के कारण भगवान शिव की पूजा करने से भक्तों को विशेष आध्यात्मिक लाभ मिलने की मान्यता है।

पूजा का शुभ मुहूर्त और पारण का समय

इस बार एकादशी तिथि 23 अगस्त 2026 की रात 2 बजे से शुरू होगी और 24 अगस्त 2026 की सुबह 4 बजकर 18 मिनट तक रहेगी। भगवान विष्णु की पूजा के लिए 23 अगस्त को सुबह 7 बजकर 32 मिनट से दोपहर 12 बजकर 24 मिनट तक का समय सबसे शुभ है।

पुत्रदा एकादशी व्रत पारण समय

व्रत का पारण 24 अगस्त 2026 को दोपहर 1 बजकर 41 मिनट से शाम 4 बजकर 16 मिनट के बीच किया जा सकेगा।

हरि और हर की पूजा का दुर्लभ संयोग

सावन की आखिरी एकादशी में भगवान शिव की आराधना के साथ पुत्रदा एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। यही कारण है कि इस दिन शिव और विष्णु की संयुक्त आराधना को लेकर धार्मिक आस्था और भी बढ़ जाती है।

संतान इच्छुक दंपति जरूर रखें व्रत

पुत्रदा एकादशी का व्रत खासतौर पर संतान की कामना रखने वाले दंपत्तियों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। संतान इच्छुक दंपत्ति इस दिन श्रद्धा के साथ व्रत रखकर भगवान विष्णु और भगवान शिव की पूजा-अर्चना कर सकते हैं। मान्यता है कि इससे संतान प्राप्ति की इच्छा रखने वाले दंपत्तियों की मनोकामना पूरी हो सकती है और संतान पर भगवान की कृपा बनी रहती है।

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Putrada Ekadashi 2026: सावन की पुत्रदा एकादशी पर इन 5 बातों का रखें खास ध्यान, वर्ना नहीं मिलेगा व्रत और पूजा का पूरा फल

Putrada Ekadashi 2026: सावन माह में आने वाली पुत्रदा एकादशी का सभी व्रत और पर्व में विशेष स्थान है। यह व्रत माताएं और अभिभावक अपनी संतान की सुख-समृद्धि, अच्छी सेहत और खुशहाली के लिए करते हैं। कुछ दंपति संतान की प्राप्ति की कामना से भी यह व्रत करते हैं। पुत्रदा एकादशी व्रत सावन के अलावा पौष माह में भी किया जाता है। सावन माह के शुल्क पक्ष की एकादशी तिथि को सावन पुत्रदा एकादशी का व्रत होता है। एकादशी तिथि भगवान विष्णु को समर्पित है, लेकिन सावन का महीना होने की वजह से इस दिन भगवान शिव की पूजा का भी विशेष महत्व है।धार्मिक मान्यताओं के अनुसार एकादशी के दिन व्रत और पूजा करते समय कुछ बातों का खास ध्यान रखना चाहिए। आइए जानें इनके बारे में

कब है सावन पुत्रदा एकादशी 2026

पंचांग के अनुसार, सावन शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 23 अगस्त 2026 को रात 2 बजे से शुरू होकर 24 अगस्त सुबह 4:18 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर 23 अगस्त को पुत्रदा एकादशी का व्रत रखा जाएगा। लेकिन सावन पुत्रदा एकादशी व्रत पारण के दिन हरिवासर सूर्योदय के बाद तक रहने की वजह से 24 अगस्त को भी पुत्रदा एकादशी व्रत होगा।

इन 5 नियमों को भूल कर भी अनदेखा न करें

काले कपड़े न पहनें : एकादशी व्रत में पीले रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है। यह रंग भगवान विष्णु का प्रिय रंग है। पूजा-पाठ के दौरान काले रंग के कपड़े पहनने से बचने की सलाह दी जाती है।

तुलसी की पत्तियां न तोड़ें : इस दिन तुलसी की पत्तियां तोड़ने से बचना चाहिए। भगवान विष्णु की पूजा में पहले से रखी तुलसी की पत्तियों का इस्तेमाल किया जा सकता है।

गुस्सा और विवाद न करें : उन्होंने कहा कि इस दिन किसी का अपमान करने, बहस करने या किसी का दिल दुखाने से बचें। शांत मन से भगवान का स्मरण करना शुभ माना जाता है।

चावल खाने से बचें : धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एकादशी व्रत के दिन चावल का सेवन नहीं करना चाहिए। इस दिन सात्विक भोजन और फलाहार को प्राथमिकता दी जाती है।

तामसिक भोजन से दूरी रखें : एकादशी के दिन मांस-मदिरा और अन्य तामसिक चीजों से दूर रहने की सलाह दी जाती है। इससे पूजा और उपवास का पूरा फल नहीं मिलता है।

Sawan Fourth Somwar 2026: एकसाथ 5 शुभ संयोग लेकर आ रहा है सावन का अंतिम सोमवार व्रत, जानें शिववास योग का महत्व, तारीख और मुहूर्त

Sawan Fourth Somwar 2026: एकसाथ 5 शुभ संयोग लेकर आ रहा है सावन का अंतिम सोमवार व्रत, जानें शिववास योग का महत्व, तारीख और मुहूर्त

Sawan Fourth Somwar 2026: सावन का महीना अब धीरे-धीरे अपने समापन की ओर पहुंच रहा है। इस माह में सोमवार के व्रत का विशेष स्थान है। श्रद्धालु पूरी आस्था और विधि-विधान से सावन के सभी सोमवार का व्रत करते हैं। इस साल सावन का चौथा और अंतिम सोमवार 24 अगस्त 2026 को पड़ रहा है। इस दिन 5 शुभ संयोग बन रहे हैं, जिससे इस दिन का महत्व और भी बढ़ गया है। साथ ही, सावन के चौथे सोमवार में भगवान शिव का वास कैलाश पर होगा, जिससे यह दिन रुद्राभिषेक के लिए अति उत्तम माना जा रहा है। जो लोग सावन सोमवार व्रत होंगे, वे अंतिम सोमवार को उद्यापन करेंगे। जो लोग अभी तक भगवान शिव का जलाभिषेक नहीं कर पाए हैं, उनके लिए भी यह एक अच्छा अवसर है, जिससे आपको भगवान भोलेनाथ की कृपा प्राप्त हो सकती है।

5 शुभ संयोग में अंतिम सावन सोमवार

सावन पुत्रदा एकादशी : अंतिम सावन सोमवार पर सावन पुत्रदा एकादशी व्रत का पारण है और वैष्णव भक्तों का व्रत भी है। यह दिन भगवान शिव और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्ति का उत्तम अवसर है। शिव और हरि की पूजा से आपका कल्याण होगा।

प्रीति योग : सावन के अंतिम सोमवार पर प्रीति योग प्रात:काल से ही बन जाएगा, जो सुबह 07 बजकर 04 मिनट तक रहेगा। यह एक शुभ, सकारात्मक और मंगलकारी योग है, जो शुभ कार्यों के लिए अच्छा है। इसके स्वामी ग्रह बुध और अधिपति देव भगवान विष्णु हैं।

आयुष्मान योग : उस दिन सुबह में 07 बजकर 04 मिनट से आयुष्मान योग का प्रारंभ होगा, जो पूरे दिन रहेगा। आयुष्मान योग भी एक शुभ योग है। इस योग के स्वामी ग्रह चंद्रमा और अधिपति देव गुरु बृहस्पति हैं। इस योग में दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य और जीवन में सकारात्मकता की प्राप्ति होती है।

कैलाश पर शिववास : सावन के अंतिम सोमवार पर भगवान शिव का वास कैलाश पर है। किसी भी दिन यदि शिवजी का वास कैलाश पर हो तो आप रुद्राभिषेक करा सकते हैं, इससे सुख-समृद्धि, शांति, सकारात्मक ऊर्जा में बढ़ोत्तरी होती है।

हंसराज योग : इस समय देवों के गुरु बृहस्पति अपनी उच्च राशि कर्क में विराजमान हैं, जिससे हंसराज योग का निर्माण हुआ है। यह व्यक्ति की उन्नति करने वाला योग है। सावन सोमवार पर हंसराज योग तो बना ही है, उस दिन चंद्रमा धनु राशि में और सूर्य सिंह राशि में विराजमान होंगे।

अंतिम सावन सोमवार पर जलाभिषेक का मुहूर्त

सावन के अंतिम सोमवार पर आप ब्रह्म मुहूर्त से ही जलाभिषेक कर सकते हैं। उस दिन ब्रह्म मुहूर्त प्रात:काल 04:27 ए एम से 05:11 ए एम तक रहेगा। अभिजीत मुहूर्त दिन में 11:57 ए एम से लेकर दोपहर 12:49 पी एम तक रहेगा। अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त सुबह में 05:55 ए एम से 07:32 ए एम तक है, वहीं शुभ-उत्तम मुहूर्त 09:09 ए एम से 10:46 ए एम तक रहेगा। वैसे तो शिव जी के जलाभिषेक के लिए मुहूर्त की जरूरत नहीं पड़ती है, आप दिन में कभी भी जलाभिषेक कर सकते हैं।

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Sawan Putrada Ekadashi 2026: क्या इस साल दो दिन होगा सावन पुत्रदा एकादशी का व्रत? जानें सही तारीख, मुहूर्त और पारण समय

Sawan Putrada Ekadashi 2026: पुत्रदा एकादशी का व्रत मुख्य रूप से संतान की सुख-शांति और अच्छी सेहत के लिए किया जाता है। लेकिन कुछ नि:संतान दंपत्ति इस व्रत को संतान प्राप्ति की कामना से भी करते हैं। वैसे यह व्रत पुत्रदा एकादशी व्रत सावन और पौष माह में दो बार किया जाता है। सावन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को श्रावण पुत्रदा एकादशी का व्रत किया जाएगा। यह सावन माह की अंतिम एकादशी होगी। पंचांग के अनुसार, इस साल सावन पुत्रदा एकादशी पर दो दिन उपवास का संयोग बन रहा है। माना जा रहा है कि इस बार सावन पुत्रदा एकादशी 23 अगस्त और 24 अगस्त दो दिन है। इसमें भी हरिवासर का समापन सूर्योदय के बाद हो रहा है। ऐसे में लोगों को सावन पुत्रदा एकादशी व्रत की तारीख को लेकर कन्फ्यूजन है।

सावन पुत्रदा एकादशी व्रत 2026 तारीख

पंचांग के अनुसार, सावन पुत्रदा एकादशी के लिए जरूरी श्रावण शुक्ल एकादशी तिथि 23 अगस्त को 02:00 ए एम से लेकर 24 अगस्त को 04:18 ए एम तक रहेगी। व्रत के लिए उदयातिथि की मान्यता है। इस आधार पर सावन पुत्रदा एकादशी का व्रत 23 अगस्त को है, लेकिन हरिवासर 24 अगस्त को सुबह 10:49 ए एम तक है।

सूर्योदय के बाद तक रहेगा हरिवासर

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हरिवासर जब तक खत्म नहीं होता है, तब तक व्रती पारण नहीं कर सकते हैं। 24 अगस्त को हरिवासर समापन सूर्योदय के बाद हो रहा है। इस वजह से यह व्रत दो दिनों का होगा। 23 अगस्त को गृहस्थ लोग सावन पुत्रदा एकादशी का व्रत रखेंगे और 24 अगस्त को वैष्णव लोगों को व्रत रखना है। जो लोग 23 अगस्त को व्रत रखेंगे, उनका पारण 24 अगस्त को हरिवासर खत्म होने के बाद दोपहर के समय होगा, वहीं 24 अगस्त को व्रत रखने वाले लोग 25 अगस्त को सूर्योदय के बाद पारण करेंगे।

सावन पुत्रदा एकादशी 2026 मुहूर्त

23 अगस्त को सावन पुत्रदा एकादशी की पूजा का मुहूर्त सुबह में 07:32 ए एम से लेकर दोपहर 12:24 पी एम तक है। वहीं 24 अगस्त को पूजा का मुहूर्त सुबह में 05:55 ए एम से 07:32 ए एम तक और फिर 09:09 ए एम से 10:46 ए एम तक है।

23 अगस्त को ब्रह्म मुहूर्त 04:26 ए एम से 05:10 ए एम तक और अभिजीत मुहूर्त 11:58 ए एम से दोपहर 12:49 पी एम तक रहेगा। वहीं 24 अगस्त को ब्रह्म मुहूर्त 04:27 ए एम से 05:11 ए एम तक है, जबकि अभिजीत मुहूर्त 11:57 ए एम से दोपहर 12:49 पी एम तक रहेगा।

23 अगस्त को राहुकाल शाम 05:15 पी एम से 06:53 पी एम तक रहेगा, वहीं 24 अगस्त को राहुकाल सुबह में 07:32 ए एम से 09:09 ए एम तक है।

सावन पुत्रदा एकादशी 2026 पारण

24 अगस्त को पारण का समय दोपहर में 01:41 बजे से शाम 04:16 बजे तक है, वहीं 25 अगस्त को व्रत का पारण सुबह 05:55 बजे से सुबह 06:20 बजे के बीच होगा। उस दिन पारण के लिए आपको केवल 25 मिनट का ही समय प्राप्त होगा क्योंकि उसके बाद द्वादशी तिथि का समापन हो जाएगा और त्रयोदशी तिथि शुरू हो जाएगी।

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Kamika Ekadashi 2026 Katha: आज द्विपुष्कर योग में कामिका एकादशी का व्रत आज, पूजा में जरूर सुनें ये व्रत कथा और जानें आज पूजा का मुहूर्त

Kamika Ekadashi 2026 Katha: कामिका एकादशी व्रत भगवान विष्णु के योगनिद्रा में जाने के बाद पहला एकादशी व्रत होता है। यह उपवास सावन में कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत को करने से ब्रह्म हत्या की दोष से मुक्ति मिलती है, पाप मिटते हैं और श्री हरि की कृपा से मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस व्रत की पूजा में भक्तों को कामिका एकादशी की व्रत कथा जरूर सुननी चाहिए।

माना जाता है कि ऐसा करने वाले श्रद्धालुओं को वाजपेय यज्ञ के समान पुण्य फल मिलता है। इस साल कामिका एकादशी का व्रत 9 अगस्त रविवार को है। इस दिन द्विपुष्कर योग बन रहा है। इस योग में व्रत, पूजा पाठ, जप, तप और शुभ काम करने का आपको दोगुना फल प्राप्त होगा। आइए जानें कामिका एकादशी की व्रत कथा, मुहूर्त और पारण समय के बारे में।

कामिका एकादशी 2026 मुहूर्त और पारण समय

सावन कृष्ण एकादशी तिथि का प्रारंभ : 8 अगस्त, दोपहर 1:59 बजे से

सावन कृष्ण एकादशी तिथि का समापन : 9 अगस्त, 11:04 एम पर

कामिका एकादशी पूजा मुहूर्त : सुबह 07:27 बजे से दोपहर 12:26 बजे तक

लाभ-उन्नति मुहूर्त : सुबह 09:07 बजे से 10:47 बजे तक

अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त : सुबह 10:47 बजे से दोपहर 12:26 बजे तक

द्विपुष्कर योग : 11:04 ए एम से दोपहर 02:43 बजे तक

व्रत पारण समय : 10 अगस्त, सोमवार, सुबह 5:47 बजे से 8 बजे

द्वादशी तिथि का समापन : 10 अगस्त, सुबह 08:00 बजे

कामिका एकादशी व्रत कथा

एक बार धर्मराज युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी के बारे में बताने का निवेदन किया। तब भगवान श्रीकृष्ण ने उनसे कहा कि एक बार ब्रह्मदेव ने नारद जी को एक कथा सुनाई थी, वही कथा मैं आपको सुनाता हूं-

ब्रह्माजी ने नारद मुनि को बताया कि श्रावण कृष्ण एकादशी को कामिका एकादशी भी कहा जाता है। जो लोग यह व्रत रखते हैं, उनको सुदर्शन चक्र धारण करने वाले भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए। इस व्रत की कथा के अनुसार, एक गांव में एक ठाकुर रहता था। वह बड़ा ही क्रोधी था। एक दिन वो अपने घर से किसी काम के लिए निकला, तो उसका गांव के ही एक ब्राह्मण से किसी बात को लेकर वाद विवाद हो गया।

देखते ही देखते बात इतनी बिगड़ गई कि उसने क्रोध में आकर उस ब्राह्मण की हत्या कर दी। जब उसका गुस्सा शांत हुआ तो उसे अपने किए गए पाप का एहसास हुआ। उस अपराध बोध से मुक्ति के लिए उसने उस ब्राह्मण का अंतिम संस्कार करना चाहा, लेकिन गांव के अन्य ब्राह्मणों ने उसे इसकी अनुमति नहीं दी।

उस ठाकुर पर ब्रह्म हत्या का दोष था। समय व्यतीत होने के साथ-साथ उसके मन पर ब्रह्म हत्या के दोष और आत्म ग्लानि का भार बढ़ने लगा। एक दिन उसकी मुलाकात एक ऋषि से हुई। उसने ब्रह्म हत्या की घटना बताई और उससे मुक्ति का उपाय पूछा। तब उस ऋषि मुनि ने उससे कहा कि ब्रह्म हत्या से मुक्ति के लिए तुमको सावन कृष्ण एकादशी यानि कामिका एकादशी का व्रत विधिपूर्वक करना चाहिए। भगवान विष्णु की कृपा से ही तुम ब्रह्म हत्या दोष से मुक्ति पा सकते हो। इससे तुम्हारे अन्य पाप भी मिट जाएंगे।

जब श्रावण कृष्ण एकादशी आई तो उस ठाकुर ने विधिपूर्वक कामिका एकादशी व्रत किया और भगवान विष्णु की पूजा की। रात्रि जागरण के समय वह भगवान विष्णु की मूर्ति के पास सो गया। स्वप्न में भगवान विष्णु ने उसे दर्शन दिए और उनकी कृपा से वह ब्रह्म हत्या दोष से मुक्त हो गया।

Sawan Second Somwar 2026: दूसरे सोमवार पर बन रहे प्रदोष व्रत समेत 7 शुभ संयोग, जानें किस समय किया जाएगा भगवान शिव का जलाभिषेक

Sawan Second Somwar 2026: सावन माह के सोमवार पर श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक और विशेष पूजा-उपवास करना शुभ मानते हैं। इस साल सावन का दूसरा सोमवार 10 अगस्त को पड़ रहा है। इस दिन सावन माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि भी पड़ रही है, जिससे सावन सोमवार के साथ पहले प्रदोष व्रत का संयोग बन रहा है। इस साल सावन के दूसरे सोमवार को प्रदोष व्रत के साथ ही कई दुर्लभ संयोग भी बन रहे हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन व्रत और पूजा करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं। उनके और माता पार्वती के आशीर्वाद से जल्द ही सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

सावन के दूसरे सोमवार पर बनने वाले 7 शुभ संयोग

सावन के दूसरे सोमवार पर सोम प्रदोष व्रत, एकादशी पारण, कर्क राशि में त्रिग्रही योग, बुधादित्य योग, हंसराज योग, वज्र योग और सिद्धि योग का शुभ संयोग एक साथ बन रहा है।

प्रदोष व्रत : दूसरे सावन सोमवार पर सावन का पहला प्रदोष व्रत भी है। यह व्रत भगवान शिव के लिए रखते हैं और पूजा शाम को सूर्यास्त के बाद होती है। उस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 07:05 बजे से है। प्रदोष व्रत करने से दुख, रोग, दोष, पाप, कष्ट आदि मिट जाते हैं।

एकादशी पारण : दूसरे सावन सोमवार को कामिका एकादशी व्रत का पारण है, जो सूर्योदय के बाद होगा। इस दिन द्वादशी तिथि सुबह 08:00 ए एम तक है, फिर शिव जी की तिथि त्रयोदशी प्रारंभ होगी।

त्रिग्रही योग : दूसरे सावन सोमवार को कर्क राशि में सूर्य, बुध और गुरु की युति से त्रिग्रही योग बना हुआ है। 5 अगस्त को जब कर्क में बुध का गोचर हुआ है, तब से यह त्रिग्रही योग बना है। इससे मिथुन, कर्क, कन्या वालों को बंपर लाभ होगा।

बुधादित्य योग : कर्क में ही सुर्य और बुध की युति से बुधादित्य राजयोग का निर्माण हुआ है, जो दूसरे सावन सोमवार पर भी विद्यमान होगा।

हंसराज योग : इस समय कर्क राशि में देव गुरु बृहस्पति विराजमान हैं। यह उनकी उच्च राशि है। इस वजह से हंसराज योग बन रहा है।

वज्र योग : दूसरे सावन सोमवार पर प्रात:काल से वज्र योग बनेगा, जो रात – 10:27 पी एम तक रहेगा। इस योग में नए काम नहीं करते हैं, वाहन, सोना आदि नहीं खरीदते हैं।

सिद्धि योग : दूसरे सावन सोमवार पर रात 10:27 पी एम से सिद्धि योग बन रहा है, जो अगले दिन सुबह तक रहेगा। इसमें किए गए कार्य सिद्ध होते हैं।

दूसरा सावन सोमवार 2026 जलाभिषेक मुहूर्त

दूसरे सावन सोमवार पर जलाभिषेक ब्रह्म मुहूर्त से ही प्रारंभ हो जाएगा। वैसे तो आप सुबह में कभी भी जलाभिषेक कर सकते हैं। लेकिन नीचे सुबह के कुछ शुभ मुहूर्त दिए गए हैं। उस दिन प्रदोष है तो शाम के समय में भी जलाभिषेक होगा।

ब्रह्म मुहूर्त : प्रात: 04:22 बजे से 05:05 बजे तक

अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त : सुबह 05:47 बजे से 07:27 बजे तक

शुभ-उत्तम मुहूर्त : सुबह 09:07 बजे से 10:47 बजे तक

अभिजीत मुहूर्त : दोपहर 12:00 बजे से दोपहर 12:53 बजे तक

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