रोशनदान के पास बस एक पौधा और घर में बरसेगा पैसा! जानिए फेंग शुई के नियम

घर के रोशनदान को सिर्फ रोशनी और हवा आने की जगह न समझें, इसे हरियाली से भी खूबसूरत बनाया जा सकता है रोशनदान के पास सही पौधे लगाने से घर का यह छोटा सा हिस्सा और भी सुंदर दिखने लगता है। साथ ही, फेंग शुई के अनुसार पौधों को घर में सकारात्मक माहौल और ताजगी से भी जोड़ा जाता है।

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बैरिंगटोनिया का पेड़

बैरिंगटोनिया अपने खूबसूरत फूलों और हरे-भरे रूप के लिए जाना जाता है। इसके बड़े फूल घर के बड़े आंगन या खुले रोशनदान वाली जगह को बेहद सुंदर बना सकते हैं। फेंग शुई से जुड़ी मान्यताओं में इस पेड़ को समृद्धि, सौभाग्य और शांति का प्रतीक माना जाता है। घर में बड़ा रोशनदान या खुला स्थान है, तो यह पेड़ वहां अच्छी तरह सज सकता है। इसे भरपूर धूप, रेफूलर पानी और पोषक मिट्टी की जरूरत होती है। साथ ही, ड्रेनेज का ध्यान रखना जरूरी है, ताकि ज्यादा पानी जमा होकर जड़ों को नुकसान न पहुंचाए।

ताइवानी टर्मिनलिया कैटाप्पा 

ताइवानी टर्मिनलिया कैटाप्पा का पेड़ अपनी खूबसूरत पत्तियों और साइज के कारण घर के खुले हिस्सों और बड़े रोशनदान के लिए परफेक्ट है। इसकी पत्तियां ज्यादा घनी नहीं होतीं, इसलिए आसपास की जगह बहुत बंद या भारी नहीं लगती। फेंग शुई की मान्यताओं में इसे पॉजिटिव एनर्जी, बैलेंस और शांति से जोड़ा जाता है। इस पौधे को अच्छी धूप पसंद होती है और रेगुलर पानी की जरूरत पड़ती है। इसे ऐसी मिट्टी में लगाना बेहतर होता है, जिसमें पानी आसानी से निकल सके और पौधे को बढ़ने के लिए पर्याप्त जगह मिले।

पर्वतीय धन का पेड़

पर्वतीय धन वृक्ष यानी मनी ट्री अपनी घनी हरी पत्तियों के कारण घर के डेकोरेशन में काफी पसंद किया जाता है। फेंग शुई की मान्यताओं के अनुसार इसे धन, समृद्धि, सफलता और सौभाग्य से जोड़ा जाता है। रोशनदान के पास इसे रखने से घर के उस हिस्से में हरियाली और ताजगी भी बढ़ती है। इस पौधे को तेज रोशनी पसंद है, लेकिन यह हल्की छाया में भी बढ़ सकता है। इसलिए अलग-अलग तरह के रोशनदान वाली जगहों में इसे रखा जा सकता है। मिट्टी सूखने पर पानी दें और गमले या जमीन में पानी जमा न होने दें।

स्टारफ्रूट का पेड़

स्टारफ्रूट का पेड़ अपने हरे पत्तों, छोटे खूबसूरत फूलों और स्वादिष्ट फलों के लिए जाना जाता है। बड़े रोशनदान या खुले आंगन में यह पेड़ अच्छी तरह बढ़ सकता है। इसकी हरियाली घर को नेचुरल और शांत लुक देती है। लोक मान्यताओं में स्टारफ्रूट के पेड़ को समृद्धि, परिवार में एकता और सुख-शांति से जोड़ा जाता है। इसे नियमित पानी की जरूरत होती है, लेकिन मिट्टी में पानी जमा नहीं होना चाहिए। समय-समय पर इसकी शाखाओं की कटाई-छंटाई करें और फर्टिलाइजर दें, ताकि पौधे की अच्छी ग्रोथ बनी रहे।

 

बड़ा फ्रैंगिपानी पेड़

फ्रैंगिपानी यानी प्लुमेरिया अपने खूबसूरत सफेद, गुलाबी और हल्के पीले फूलों के साथ अपनी खुशबू के लिए भी जाना जाता है। इसका मोटा तना और चमकदार हरी पत्तियां इसे अट्रैक्टिव बनाती हैं। फेंग शुई और लोक मान्यताओं में इसे शांति, पवित्रता और सौभाग्य से जोड़ा जाता है। रोशनदान के पास इसे लगाने से घर में हरियाली के साथ फूलों की खूबसूरती भी देखने को मिलती है। इसे भरपूर धूप पसंद है, इसलिए खुली और अच्छी रोशनी वाली जगह इसके लिए बेहतर रहती है। पौधे को जरूरत के हिसाब से पानी दें और ऐसी मिट्टी चुनें जिसमें पानी आसानी से बाहर निकल सके।

 

रोशनदान के पास सही पौधे लगाने से घर में हरियाली और खूबसूरती बढ़ती है। फेंग शुई की मान्यताओं के अनुसार, ये पौधे घर में सकारात्मक माहौल, शांति और समृद्धि का एहसास भी ला सकते हैं। बस पौधे की जरूरत के हिसाब से धूप, पानी और मिट्टी का ध्यान रखें, ताकि आपका रोशनदान सुंदर और हरा-भरा बना रहे।

पैसे टिकते नहीं तो हो रही है ये गलती, आपकी रसोई बना देगी अमीर! बस ये काम कभी न करें

रोटी हर भारतीय रसोई का सबसे जरूरी हिस्सा है। कई लोग आटा बर्बाद न हो, इसलिए पहले से तय करके गिनती के हिसाब से रोटियां बनाते हैं। लेकिन वास्तु शास्त्र और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रोटी या अन्न का इस तरह हिसाब लगाना शुभ नहीं माना जाता। माना जाता है कि रसोई में अपनाई गई छोटी-छोटी आदतें भी घर की सुख-समृद्धि, बरकत और सकारात्मक ऊर्जा पर असर डाल सकती हैं। रोटियां गिनकर बनाने से जुड़ी मान्यताएं और रसोई के कुछ महत्वपूर्ण वास्तु नियम।

 

रोटियां गिनकर बनाना

सनातन परंपरा में अन्न को भगवान का स्वरूप और मां अन्नपूर्णा का आशीर्वाद माना गया है। इसलिए भोजन को सिर्फ खाने की चीज नहीं, बल्कि जीवन का आधार माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रोटियां गिनकर बनाना या परोसना अन्न का हिसाब लगाने जैसा माना जाता है। कहा जाता है कि इससे मां अन्नपूर्णा और मां लक्ष्मी प्रसन्न नहीं होतीं, इसलिए भोजन का हमेशा सम्मान करना चाहिए।

 

बरकत पर असर

वास्तु शास्त्र के अनुसार रसोई घर की ऊर्जा पूरे घर को प्रभावित करती है। मान्यता है कि हर चीज का जरूरत से ज्यादा हिसाब रखा जाए, भोजन का, तो घर की बरकत धीरे-धीरे कम होने लगती है। इससे आर्थिक परेशानियां, धन की कमी और खर्च बढ़ने जैसी स्थितियां पैदा हो सकती हैं। इसलिए रोटियां बनाते समय थोड़ा ज्यादा भोजन रखना शुभ माना जाता है।

 

सूर्य ग्रह का संबंध

ज्योतिष शास्त्र में गेहूं का संबंध सूर्य ग्रह से माना गया है। ऐसी मान्यता है कि भोजन को गिनकर बनाने की आदत सूर्य की सकारात्मक ऊर्जा को कमजोर कर सकती है। इसके कारण घर में तनाव, मनमुटाव और पारिवारिक मतभेद बढ़ने की संभावना बताई जाती है। हालांकि यह धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यता है।

 

पहली और आखिरी रोटी

वास्तु और धार्मिक परंपरा के अनुसार रोटी बनाते समय पहली रोटी गाय के लिए निकालनी चाहिए। लेकिन आखिर में बनने वाली रोटी कुत्ते, पक्षियों या अन्य जीवों के लिए अलग रखने की परंपरा भी है। ऐसा करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और घर में सकारात्मक ऊर्जा व सुख-शांति बनी रहने की मान्यता है।

 

रोटी बनाने का तरीका

रोटी बनाने से पहले गर्म तवे पर पानी या दूध की कुछ बूंदें छिड़कना शुभ माना जाता है। इसके साथ ही रोटियां बनाते समय साफ-सफाई, शांत मन और सकारात्मक सोच रखने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि ऐसे वातावरण में बना भोजन परिवार के लिए शुभ फल देता है और घर का माहौल भी अच्छा बना रहता है।

 

आटा स्टोर करना

अगर घर के लिए आटा गूंधना हो, तो रोटियों की गिनती तय करने के बजाय परिवार के सदस्यों की जरूरत का अंदाजा लगाकर आटा निकालना बेहतर माना जाता है। साथ ही 2–3 रोटियां ज्यादा बनाना भी शुभ माना जाता है, ताकि जरूरत पड़ने पर किसी मेहमान, जरूरतमंद या पशु-पक्षी के लिए भोजन मिल सके।

 

बचे हुए आटे का नियम

वास्तु शास्त्र में गूंथे हुए आटे को लंबे समय तक फ्रिज में रखने से बचने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि बासी आटा नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ा सकता है। इसलिए जितनी जरूरत हो उतना ही आटा गूंधें और ताजा भोजन बनाने की कोशिश करें। यह धार्मिक मान्यता होने के साथ-साथ ताजा भोजन खाने की अच्छी आदत भी मानी जाती है।

Sawan Second Somwar 2026: दूसरे सोमवार पर बन रहे प्रदोष व्रत समेत 7 शुभ संयोग, जानें किस समय किया जाएगा भगवान शिव का जलाभिषेक

Sawan Second Somwar 2026: सावन माह के सोमवार पर श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक और विशेष पूजा-उपवास करना शुभ मानते हैं। इस साल सावन का दूसरा सोमवार 10 अगस्त को पड़ रहा है। इस दिन सावन माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि भी पड़ रही है, जिससे सावन सोमवार के साथ पहले प्रदोष व्रत का संयोग बन रहा है। इस साल सावन के दूसरे सोमवार को प्रदोष व्रत के साथ ही कई दुर्लभ संयोग भी बन रहे हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन व्रत और पूजा करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं। उनके और माता पार्वती के आशीर्वाद से जल्द ही सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

सावन के दूसरे सोमवार पर बनने वाले 7 शुभ संयोग

सावन के दूसरे सोमवार पर सोम प्रदोष व्रत, एकादशी पारण, कर्क राशि में त्रिग्रही योग, बुधादित्य योग, हंसराज योग, वज्र योग और सिद्धि योग का शुभ संयोग एक साथ बन रहा है।

प्रदोष व्रत : दूसरे सावन सोमवार पर सावन का पहला प्रदोष व्रत भी है। यह व्रत भगवान शिव के लिए रखते हैं और पूजा शाम को सूर्यास्त के बाद होती है। उस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 07:05 बजे से है। प्रदोष व्रत करने से दुख, रोग, दोष, पाप, कष्ट आदि मिट जाते हैं।

एकादशी पारण : दूसरे सावन सोमवार को कामिका एकादशी व्रत का पारण है, जो सूर्योदय के बाद होगा। इस दिन द्वादशी तिथि सुबह 08:00 ए एम तक है, फिर शिव जी की तिथि त्रयोदशी प्रारंभ होगी।

त्रिग्रही योग : दूसरे सावन सोमवार को कर्क राशि में सूर्य, बुध और गुरु की युति से त्रिग्रही योग बना हुआ है। 5 अगस्त को जब कर्क में बुध का गोचर हुआ है, तब से यह त्रिग्रही योग बना है। इससे मिथुन, कर्क, कन्या वालों को बंपर लाभ होगा।

बुधादित्य योग : कर्क में ही सुर्य और बुध की युति से बुधादित्य राजयोग का निर्माण हुआ है, जो दूसरे सावन सोमवार पर भी विद्यमान होगा।

हंसराज योग : इस समय कर्क राशि में देव गुरु बृहस्पति विराजमान हैं। यह उनकी उच्च राशि है। इस वजह से हंसराज योग बन रहा है।

वज्र योग : दूसरे सावन सोमवार पर प्रात:काल से वज्र योग बनेगा, जो रात – 10:27 पी एम तक रहेगा। इस योग में नए काम नहीं करते हैं, वाहन, सोना आदि नहीं खरीदते हैं।

सिद्धि योग : दूसरे सावन सोमवार पर रात 10:27 पी एम से सिद्धि योग बन रहा है, जो अगले दिन सुबह तक रहेगा। इसमें किए गए कार्य सिद्ध होते हैं।

दूसरा सावन सोमवार 2026 जलाभिषेक मुहूर्त

दूसरे सावन सोमवार पर जलाभिषेक ब्रह्म मुहूर्त से ही प्रारंभ हो जाएगा। वैसे तो आप सुबह में कभी भी जलाभिषेक कर सकते हैं। लेकिन नीचे सुबह के कुछ शुभ मुहूर्त दिए गए हैं। उस दिन प्रदोष है तो शाम के समय में भी जलाभिषेक होगा।

ब्रह्म मुहूर्त : प्रात: 04:22 बजे से 05:05 बजे तक

अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त : सुबह 05:47 बजे से 07:27 बजे तक

शुभ-उत्तम मुहूर्त : सुबह 09:07 बजे से 10:47 बजे तक

अभिजीत मुहूर्त : दोपहर 12:00 बजे से दोपहर 12:53 बजे तक

Hariyali Teej 2026 Vastu tips: किसी दिशा में सबसे ज्यादा फलदायी होगी पूजा, यहां जानें हरियाली तीज के लिए वास्तु टिप्स

Hariyali Teej 2026 Vastu tips: किसी दिशा में सबसे ज्यादा फलदायी होगी पूजा, यहां जानें हरियाली तीज के लिए वास्तु टिप्स

Hariyali Teej 2026 Vastu tips: हरियाली तीज हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है, जो विशेष रूप से सुहागिन महिलाओं द्वारा पति की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य के लिए मनाया जाता है। कुंवारी लड़कियां भी मनचाहा वर पाने के लिए यह व्रत रखती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए 108 वर्षों तक कठिन तपस्या की थी। तब भगवान शिव ने सावन माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि पर माता पार्वती की तपस्या से प्रसन्न होकर उन्हें अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया था। यह पर्व शिव-पार्वती के पुनर्मिलन और अटूट प्रेम का प्रतीक माना जाता है।

कब किया जाएगा हरियाली तीज 2026 व्रत?

हरियाली तीज 2026 का व्रत 15 अगस्त 2026, शनिवार को रखा जाएगा।

तिथि और मुहूर्त विवरण

तृतीया तिथि प्रारंभ : 14 अगस्त 2026 को शाम 6:46 बजे से

तृतीया तिथि समाप्त : 15 अगस्त 2026 को शाम 5:28 बजे तक

उदया तिथि : 15 अगस्त 2026 को पड़ने के कारण व्रत इसी दिन रखा जाएगा।

शिव-पार्वती की मूर्ति रखने के लिए कौन सी दिशा है शुभ?

वास्तु शास्त्र में पूजा-पाठ, देवी-देवताओं के लिए शुभ दिशा का वर्णन किया गया है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, हरियाली तीज के दिन शिव-पार्वती की मूर्ति को उत्तर-पूर्व दिशा में विराजमान करना चाहिए। यह दिशा को देवताओं की मानी जाती है। ऐसा माना जाता है कि इस दिशा में शिव-पार्वती की मूर्ति को विराजमान करने से घर में सुख-शांति का वास होता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इसलिए कहा जाता है कि मंदिर में देवी-देवताओं की मूर्ति को विराजमान करने से पहले शुभ दिशा के बारे में जरूर जान लें।

अगर घर में उत्तर-पूर्व दिशा में शिव-पार्वती की मूर्ति को रखना संभव नहीं है, तो ऐसे में उत्तर दिशा में मूर्ति को विरजमान करना शुभ माना जाता है। इस दिशा में मूर्ति को विराजमान करने से सकारात्मक ऊर्जा में वृद्धि होती है। हरियाली तीज के दिन पूजा के दौरान पूर्व या उत्तर दिशा की तरफ मुख होना चाहिए।

किस दिशा में न रखें मूर्ति?

वास्तु शास्त्र के अनुसार, भगवान शिव और मां पार्वती की मूर्ति को दक्षिण दिशा में भूलकर भी विराजमान नहीं करनी चाहिए, क्योंकि इस दिशा में पितरों का वास माना जाता है। इस दिशा में पूजा करने से शुभ फल प्राप्त नहीं होता है।

Kamika Ekadashi 2026: सावन की पहली एकादशी का व्रत इस दिन होगा, नोट करें सही तारीख, मुहूर्त और पूजा विधि

घर में नहीं टिक रहा पैसा तो ऑफिस की टेबल पर रखे ये प्लांट, होगी बरकत बिजनेस में!

क्रासुला प्लांट (Crassula plant), जिसे जेड प्लांट भी कहा जाता है, आजकल घरों की सजावट के साथ-साथ वास्तु में भी काफी पॉपुलर है। मान्यता है कि अगर इसे सही दिशा में रखा जाए, तो यह घर में सकारात्मक ऊर्जा, सुख-समृद्धि और आर्थिक उन्नति का प्रतीक बन सकता है। आइए जानते हैं इसे कहां रखना शुभ माना जाता है और किन बातों का ध्यान रखना चाहिए:

जानिए इसकी खासियत

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वास्तु शास्त्र (Vastu Shastra)में क्रासुला प्लांट (Crassula plant) को सुख, समृद्धि और धन का प्रतीक माना जाता है। इसकी गोल और मोटी पत्तियां आर्थिक मजबूती और बचत का संकेत मानी जाती हैं। कई लोग इसे घर और ऑफिस (office)में अच्छी ऊर्जा बनाए रखने के लिए भी लगाते हैं।

एक छोटी-सी जगह, बड़ा असर

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वास्तु के अनुसार, क्रासुला प्लांट को घर के मेन गेट की दाहिनी ओर रखना शुभ माना जाता है। जब आप घर से बाहर निकलें, तो यह पौधा आपके दाहिने हाथ की तरफ होना चाहिए। मान्यता है कि इससे पॉजिटिव एनर्जी (Positive energy) का आना बढ़ता है और घर में सुख-शांति का माहौल बना रहता है।

यह गलती न करें

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क्रासुला प्लांट को दक्षिण दिशा, बाथरूम (Bathroom), बेडरूम (Bedroom) या पूरी तरह अंधेरी जगह पर रखने से बचने की सलाह दी जाती है। वास्तु मान्यताओं के अनुसार, ऐसी जगहों पर रखने से इसकी पॉजिटिव एनर्जी का इफेक्ट कम हो सकता है। इसके लिए ऐसी जगह चुनें जहां नेचुरल लाइट और ताजी हवा आती हो।

एक दिशा मानी जाती है सबसे शुभ

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अगर घर में जगह हो, तो इस पौधे को उत्तर-पूर्व यानी ईशान कोण में रखना भी शुभ माना जाता है। वास्तु के अनुसार, यह दिशा पॉजिटिव एनर्जी और समृद्धि से जुड़ी होती है। मान्यता है कि यहां रखा क्रासुला परिवार में शांति और खुशहाली का माहौल बनाए रखता है।

किन लोगों के लिए है ज्यादा फायदेमंद?

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वास्तु एक्सपर्ट (Vastu expert) की मान्यता है कि क्रासुला प्लांट बिजनेस करने वाले लोगों के लिए शुभ माना जाता है। कई लोग इसे दुकान, ऑफिस या वर्कप्लेस के एंट्री गेट के पास भी रखते हैं। ऐसा माना जाता है कि इससे नई ऑपर्चुनिटी मिलने और फाइनेंशल ग्रोथ (Financial growth) में मदद मिल सकती है।

 

इसे स्वस्थ रखने का आसान तरीका

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क्रासुला एक कम देखभाल वाला पौधा है। इसे हल्की धूप या तेज रोशनी वाली जगह पर रखें। मिट्टी पूरी तरह सूखने के बाद ही पानी दें, क्योंकि ज्यादा पानी इसकी जड़ों को नुकसान पहुंचा सकता है। समय-समय पर पत्तों की सफाई करते रहें ताकि पौधा स्वस्थ बना रहे।

क्या सच में बदल सकती है किस्मत?

वास्तु मान्यताओं के अनुसार, सही दिशा में रखा क्रासुला प्लांट घर में सकारात्मक माहौल, सुख-शांति और आर्थिक उन्नति का प्रतीक माना जाता है। हालांकि, सफलता और आर्थिक प्रगति मेहनत, सही प्लानिंग और अच्छे फैसलों पर भी डिपेंड करती है। इसलिए इस पौधे को वास्तु से जुड़ी एक पारंपरिक मान्यता के रूप में ही देखें।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य मान्यताओं और वास्तु शास्त्र पर आधारित है। किसी भी फैसले से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

रसोई का ये एक नियम चमका सकता है आपकी किस्मत, सिर्फ रोटी बनाते समय रखें इन बातों का ध्यान!

हिंदू धर्म और वास्तु शास्त्र में रसोई घर को घर का सबसे पवित्र जगह माना गया है, क्योंकि यहां साक्षात माता अन्नपूर्णा का वास होता है. रसोई में बनने वाले भोजन का सीधा संबंध हमारी सेहत और आर्थिक स्थिति से होता है। अक्सर अनजाने में हम रोटी बनाते समय कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जिससे माता लक्ष्मी नाराज हो जाती हैं. जिससे घर में कंगाली व दरिद्रता का वास होने लगता है. आइए जानते हैं रोटी बनाते समय किन विशेष नियमों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है:

पहली रोटी गाय के लिए निकालने की परंपरा

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वास्तु और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, तवे पर बनने वाली पहली रोटी घर के किसी सदस्य को नहीं खिलानी चाहिए। इसे थोड़ा घी और गुड़ या चीनी लगाकर गाय को खिलाने की परंपरा है। मान्यता है कि ऐसा करने से पितृ दोष शांत होते हैं, ग्रहों के अशुभ प्रभाव कम होते हैं और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है।

आखिरी रोटी का भी है विशेष महत्व

टिप्स और ट्रिक्स: लंच बॉक्स में रोटी और चपाती को नरम कैसे रखें?

जैसे पहली रोटी का महत्व बताया गया है, वैसे ही आखिरी रोटी भी विशेष मानी जाती है। इसे काले कुत्ते या किसी अन्य कुत्ते को खिलाना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इससे शनि, राहु और केतु के अशुभ प्रभाव कम होते हैं और परिवार पर आने वाली परेशानियां दूर रहती हैं।

ताजा आटे का प्रयोग क्यों जरूरी है?

टिप्स और ट्रिक्स: लंच बॉक्स में रोटी और चपाती को नरम कैसे रखें?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नियमित रूप से बासी आटे का उपयोग करने से घर में मानसिक तनाव, आलस्य और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां बढ़ सकती हैं। साथ ही यह भी माना जाता है कि इससे घर की सकारात्मक ऊर्जा प्रभावित होती है। इसलिए रोजाना ताजा आटा गूंथकर भोजन तैयार करना शुभ माना जाता है।

बासी आटे की रोटी बनाने से बचें

 

कैसे रोटी बनायें, रोटी बनाना सीखें (How to Make Chapati in Hindi)

आजकल कई लोग सुविधा के लिए रात में आटा गूंथकर फ्रिज में रख देते हैं और अगले दिन उसी से रोटियां बनाते हैं। वास्तु शास्त्र में इसे शुभ नहीं माना गया है। मान्यता है कि लंबे समय तक रखा गूंथा आटा नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित कर सकता है, इसलिए हमेशा ताजा आटा गूंथकर ही रोटियां बनाना बेहतर माना जाता है।

रोटियां गिनकर बनाने से बचें

The Butter Substitute To Use For Impossibly Soft Roti Bread

मान्यता है कि परिवार के लिए रोटियां बनाते समय उनकी संख्या गिनकर नहीं बनानी चाहिए। ऐसा करने से अन्न का सम्मान कम होता है और घर की बरकत प्रभावित हो सकती है। इसलिए भोजन को श्रद्धा और सम्मान के साथ तैयार करने की सलाह दी जाती है।

तवे से जुड़ी इन गलतियों से बचें

How To Make Perfect Gol Roti: अब नहीं बनेगी टेढ़ी-मेढ़ी रोटी, जानें एकदम गोल रोटियां बनाने का आसान तरीका

वास्तु शास्त्र के अनुसार, गर्म तवे पर सीधे पानी नहीं डालना चाहिए और रोटी बनाने के बाद तवे को खाली चूल्हे पर भी नहीं छोड़ना चाहिए। इसके अलावा गंदे तवे पर रोटी बनाना, तवे को उल्टा रखना या उसे नुकीली चीज से खुरचना भी शुभ नहीं माना जाता। तवे को हमेशा साफ-सुथरा और सही तरीके से रखना चाहिए।

इस तरह वास्तु शास्त्र में रसोई और भोजन से जुड़े कुछ नियमों का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखने से घर में सकारात्मक ऊर्जा, सुख-समृद्धि और बरकत बनी रहती है। हालांकि, इन मान्यताओं का पालन करना पूरी तरह व्यक्ति की आस्था और विश्वास पर निर्भर करता है।

Vastu Shastra: वास्तु के ये 10 नियम बदल सकते हैं घर का माहौल, बनी रहेगी सुख-समृद्धि

A photo illustrating essential Vastu rules for happiness, prosperity, and a positive atmosphere at home

Home Vastu Rule: भारतीय परंपरा में वास्तु शास्त्र को जीवन और स्थान की ऊर्जा को संतुलित करने का विज्ञान माना गया है। माना जाता है कि यदि घर या कार्यस्थल वास्तु नियमों के अनुसार बनाया और व्यवस्थित किया जाए, तो वहां सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है और जीवन में सुख-समृद्धि, शांति और सफलता बनी रहती है। वहीं, गलत दिशा या असंतुलित ऊर्जा से घर में तनाव, आर्थिक समस्याएं और मानसिक अशांति उत्पन्न हो सकती है।ALSO READ: Vastu Tips for Plantation: सही दिशा में लगाया गया पौधा बदल सकता है आपकी किस्मत

 

इसलिए वास्तु नियमों का पालन घर के वातावरण को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यहां जानिए वास्तु शास्त्र के महत्वपूर्ण नियम, घर का सही माहौल बनाने के उपाय और सुख-समृद्धि बढ़ाने के सरल वास्तु टिप्स, जो जीवन में सकारात्मक ऊर्जा लाते हैं।

 

यहां वास्तु के ऐसे 10 अचूक नियम दिए गए हैं, जो आपके घर का माहौल पूरी तरह बदल सकते हैं:

 

1. ईशान कोण को रखें खाली

घर का उत्तर-पूर्वी कोना ईश्वर का स्थान माना जाता है। इस कोने को हमेशा बिल्कुल साफ, हल्का और खुला रखें। यहां कभी भी भारी अलमारी, कबाड़ या जूता-चप्पल का रैक न रखें। इस दिशा में मंदिर बनाना सबसे उत्तम होता है।

 

2. पूजा घर के नियम

घर में सुख-शांति के लिए पूजा घर का सही होना बहुत जरूरी है। मंदिर में कभी भी एक ही देवी-देवता की आमने-सामने दो तस्वीरें न रखें। मृत परिजनों की तस्वीरें पूजा घर में रखने की बजाय घर की दक्षिण दिशा में लगाएं।

 

3. मुख्य द्वारपर मांगलिक चिन्ह

घर का मुख्य द्वार खुशियों और लक्ष्मी के प्रवेश का रास्ता है। इसे हमेशा साफ-सुथरा रखें। मुख्य द्वार पर सिंदूर से स्वास्तिक, ॐ या शुभ-लाभ का चिन्ह बनाएं। इसके अलावा, प्रवेश द्वार पर बंदनवार (तोरण) लगाना भी बेहद शुभ माना जाता है।

 

4. रसोई घर की सही दिशा

रसोई घर में अग्नि का वास होता है, जो सेहत और समृद्धि से जुड़ा है। वास्तु के अनुसार, रसोई हमेशा अग्नि कोण (South-East) में होनी चाहिए। खाना बनाते समय आपका मुख पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए। ध्यान रखें कि सिंक (पानी) और चूल्हा (आग) कभी भी एक सीध में या बिल्कुल पास-पास न हों।ALSO READ: Vastu Tips: घर से वास्तु दोष मिटाने के 3 आसान उपाय, सुख-समृद्धि से भर जाएगा जीवन

 

5. तिजोरी और धन रखने का स्थान

यदि आप चाहते हैं कि घर में धन टिके और बरकत हो, तो अलमारी या तिजोरी को घर के दक्षिण या पश्चिम कोने में इस तरह रखें कि उसका मुख खुलते समय उत्तर दिशा की ओर हो। उत्तर दिशा को कुबेर की दिशा माना जाता है।

 

6. दर्पण लगाने की सही जगह

गलत दिशा में लगा शीशा घर में नकारात्मकता और बीमारियां बढ़ा सकता है। दर्पण को हमेशा घर की उत्तर या पूर्व दीवार पर लगाएं। ध्यान रखें कि बेडरूम में शीशा इस तरह न लगा हो जिसमें सोते समय आपका शरीर दिखाई दे, इससे स्वास्थ्य खराब होता है।

 

7. शाम के समय कपूर का धुआं और रोशनी

शाम के वक्त (सूर्यास्त के समय) घर के सभी कमरों की लाइटें कुछ देर के लिए जरूर जलाएं, विशेषकर मुख्य द्वार और पूजा घर में। इस समय घर में कपूर या लोबान का धुआं करने से दिनभर की एकत्रित हुई नकारात्मक ऊर्जा बाहर निकल जाती है और लक्ष्मी का आगमन होता है।

 

8. सोते समय सिर की दिशा

अक्सर लोग इस बात पर ध्यान नहीं देते, लेकिन गलत दिशा में सोने से मानसिक तनाव और अनिद्रा की समस्या होती है। सोते समय आपका सिर हमेशा दक्षिण  या पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए। उत्तर दिशा की तरफ सिर करके कभी न सोएं।

 

9. बाथरूम के दरवाजे रखें बंद

बाथरूम और टॉयलेट में नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव सबसे ज्यादा होता है। इसलिए इस्तेमाल के बाद हमेशा बाथरूम का दरवाजा बंद रखें। बाथरूम के अंदर एक कांच की कटोरी में सेंधा नमक भरकर रखने से वहां की नकारात्मक ऊर्जा नष्ट हो जाती है।

 

10. बंद घड़ियां और टूटी चीजें हटाना

वास्तु में बंद घड़ी को दुर्भाग्य का सूचक माना जाता है। यदि घर में कोई घड़ी बंद पड़ी है या खराब है, तो उसे तुरंत ठीक करवाएं या हटा दें। इसी तरह टूटे हुए बर्तन, चटका हुआ कांच और बंद पड़े इलेक्ट्रॉनिक सामान घर में आर्थिक तंगी लाते हैं।

 

विशेष टिप: घर में पोंछा लगाते समय पानी में थोड़ा सा समुद्री नमक (खड़ा नमक) मिलाना शुरू करें। यह एक छोटा सा बदलाव घर के कलह-कलेश को शांत कर खुशहाली का माहौल बनाता है।ALSO READ: Flat Vastu Tips: फ्लैट में रह रहे लोगों के लिए वास्तु के 5 टिप्स

Sawan 2026: 30 जुलाई से शुरू होगा भगवान शिव का प्रिय महीना सावन, मां लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए इस माह में जरूर करें तुलसी की मंजरी का उपाय

Sawan 2026: हिंदू धर्म में सावन के महीने को बहुत शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस माह का विशेष स्थान है। यह भगवान शिव का प्रिय माह है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन में भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व होता है। इस दौरान श्रद्धालु कई तरह के धार्मिक अनुष्ठान और पूजा-पाठ करते हैं। माना जाता है कि सावन में सच्चे मन से भगवान शिव की पूजा करने से जीवन की परेशानियां दूर होती हैं, सुख-शांति और समृद्धि प्राप्त होती है तथा भगवान शिव की कृपा बनी रहती है।

सावन 2026 के करीब आते ही देशभर के शिवभक्त व्रत, पूजा, कांवड़ यात्रा और धार्मिक अनुष्ठानों की तैयारियों में जुट जाएंगे। यह पूरा महीना भगवान शिव की भक्ति, आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर माना जाता है। इस माह में तुलसी का पौधा लगाना और उसमें मंजरी आना बहुत शुभ माना जाता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, सावन में तुलसी का पौधा लगाने से सारी नेगेटिविटी दूर हो जाती है।

मां लक्ष्मी की कृपा का संकेत है तुलसी में मंजरी

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, तुलसी पर मंजरी आना अत्यंत शुभ संकेत माना जाता है। यह इस बात का प्रतीक है कि मां लक्ष्मी की कृपा आपके घर पर बनी हुई है और जल्द ही कोई शुभ समाचार मिल सकता है।

तुलसी की मंजरी करें श्री हरि को अर्पित

सावन के महीने में अक्सर घर में लगी तुलसी में मंजरी आने लगती है। तुलसी में मंजरी आना शुभ संकेत माना जाता है। यह भगवान विष्णु को भी प्रिय है। इसलिए सावन में इसके ये उपाय जरूर करने चाहिए

  • तुलसी की मंजरी भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है। यदि तुलसी पर मंजरी आ जाए, तो उसे तोड़कर भगवान विष्णु या लड्डू गोपाल को अर्पित करना चाहिए। इससे आर्थिक स्थिति में सुधार होता है।
  • मंजरी को कभी भी शिवलिंग पर न चढ़ाएं, क्योंकि शास्त्रों में इसे वर्जित माना गया है।
  • यदि मंजरी सूख जाए, तो इसे फेंकने के बजाय गमले की मिट्टी में डाल दें। इससे नए तुलसी के पौधे उगेंगे, जिससे घर में हरियाली और बरकत बनी रहती है।

घर में तुलसी लगाने के नियम

तुलसी का पौधा घर में लगाते समय कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। बहुत से लोग सावन में घर में तुलसी का पौधा लगाते हैं। आइए जानें इसे लगाने के नियम

  • तुलसी का पौधा हमेशा घर की उत्तर या पूर्व दिशा में लगाना चाहिए।
  • तुलसी की पूजा करना अच्छी सेहत और सुख-समृद्धि के लिए फलदायी है।
  • बारिश के मौसम में नमी के कारण मिट्टी में पानी रुक सकता है, जिससे जड़ें सड़ सकती हैं। अतः तुलसी के गमले में जल निकासी की उचित व्यवस्था रखें।

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