दिवाली से पहले चमकेंगे भाग्य के सितारे मिलेगा बंपर धन लाभ, पैसा लगाने से पहले जान लें ये जरुरी नियम!

दिवाली का त्योहार आते ही घर की सजावट और खरीदारी के साथ लोग धन से जुड़े फैसलों पर भी ध्यान देने लगते हैं। इस समय गोल्ड खरीदने से लेकर नई सेविंग या इन्वेस्टमेंट शुरू करने तक कई तरह की प्लानिंग की जाती है। वहीं ज्योतिष में भी दिवाली के आसपास बनने वाले कुछ खास ग्रह संयोग और शुभ मुहूर्तों को आर्थिक मामलों से जोड़कर देखा जाता है। इस साल भी ऐसे कई योग चर्चा में हैं, जिनके बारे में ज्योतिषाचार्य इन्वेस्टमेंट और धन से जुड़े फैसलों के लिए अपनी मान्यताएं बताते हैं।

दिवाली से पहले इन्वेस्टमेंट और धन लाभ के लिए शुभ योग

इन्वेस्टमेंट के लिए शुभ है ये योग

जब बुध और शुक्र एक ही राशि में आते हैं, तो ज्योतिष में इसे लक्ष्मी-नारायण योग कहा जाता है। मान्यता है कि यह योग धन और आर्थिक मामलों के लिए अनुकूल माना जाता है। ऐसे समय में लोग निवेश, नया काम शुरू करने या बिजनेस से जुड़े फैसलों पर विचार करते हैं। शेयर मार्केट, म्यूचुअल फंड या SIP में पैसा लगाने से पहले बाजार के रिस्क और अपनी जरूरत को समझना जरूरी है।

प्रॉपर्टी में निवेश के लिए मंगल का खास संयोग

ज्योतिष में मंगल को भूमि और संपत्ति से जोड़कर देखा जाता है। इसलिए मंगल के राशि परिवर्तन को कुछ ज्योतिषी जमीन, मकान या दूसरी अचल संपत्ति से जुड़े कामों के लिए महत्वपूर्ण मानते हैं। अगर आप घर, दुकान या जमीन खरीदने की प्लानिंग बना रहे हैं, तो इस दौरान शुभ मुहूर्त देखा जा सकता है।

धनतेरस पर खरीदारी के लिए क्यों खास है पुष्य नक्षत्र?

पुष्य नक्षत्र को ज्योतिष में शुभ नक्षत्रों में गिना जाता है। जब पुष्य नक्षत्र रविवार को आता है तो इसे रवि पुष्य और गुरुवार को आने पर गुरु पुष्य कहा जाता है। इन योगों को खरीदारी और नई शुरुआत के लिए शुभ माना जाता है। दिवाली और धनतेरस के आसपास सोना या दूसरी चीजें खरीदने की परंपरा भी कई परिवारों में देखने को मिलती है।

सेविंग और नई शुरुआत के लिए सिद्धि योग

ज्योतिष में इस योग को शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इन योगों में शुरू किए गए अच्छे कामों में सफलता की संभावना बेहतर रहती है। दिवाली से पहले आने वाले ऐसे मुहूर्तों में लोग बैंक में जमा, नई बचत शुरू करने या लक्ष्मी पूजन जैसे धार्मिक कार्य कर सकते हैं। इन योगों को लेकर धार्मिक मान्यताएं अलग-अलग हो सकती हैं, इसलिए इन्हें आर्थिक लाभ की गारंटी नहीं माना जाना चाहिए।

दिवाली के समय धन और इन्वेस्टमेंट से जुड़ी कई ज्योतिषीय मान्यताएं प्रचलित हैं। शुभ योग और मुहूर्त लोगों को नई शुरुआत के लिए इंस्पायर कर सकते हैं, लेकिन फिनेंशिअल डिसीजन सोच-समझकर लेना जरूरी है। इन्वेस्टमेंट से पहले अपनी जरूरत, सेविंग और रिस्क को ध्यान में रखें, ताकि त्योहार के साथ फाइनेंशियल प्लानिंग भी सही तरीके से आगे बढ़ सके।

Disclaimer: यह जानकारी ज्योतिषीय मान्यताओं और धार्मिक विश्वासों पर आधारित है। किसी भी इन्वेस्टमेंट या बड़े वित्तीय फैसले से पहले फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह लें और अपनी फाइनेंशियल सिचुएशन के अनुसार ही निर्णय करें।

पैसे टिकते नहीं तो हो रही है ये गलती, आपकी रसोई बना देगी अमीर! बस ये काम कभी न करें

रोटी हर भारतीय रसोई का सबसे जरूरी हिस्सा है। कई लोग आटा बर्बाद न हो, इसलिए पहले से तय करके गिनती के हिसाब से रोटियां बनाते हैं। लेकिन वास्तु शास्त्र और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रोटी या अन्न का इस तरह हिसाब लगाना शुभ नहीं माना जाता। माना जाता है कि रसोई में अपनाई गई छोटी-छोटी आदतें भी घर की सुख-समृद्धि, बरकत और सकारात्मक ऊर्जा पर असर डाल सकती हैं। रोटियां गिनकर बनाने से जुड़ी मान्यताएं और रसोई के कुछ महत्वपूर्ण वास्तु नियम।

 

रोटियां गिनकर बनाना

सनातन परंपरा में अन्न को भगवान का स्वरूप और मां अन्नपूर्णा का आशीर्वाद माना गया है। इसलिए भोजन को सिर्फ खाने की चीज नहीं, बल्कि जीवन का आधार माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रोटियां गिनकर बनाना या परोसना अन्न का हिसाब लगाने जैसा माना जाता है। कहा जाता है कि इससे मां अन्नपूर्णा और मां लक्ष्मी प्रसन्न नहीं होतीं, इसलिए भोजन का हमेशा सम्मान करना चाहिए।

 

बरकत पर असर

वास्तु शास्त्र के अनुसार रसोई घर की ऊर्जा पूरे घर को प्रभावित करती है। मान्यता है कि हर चीज का जरूरत से ज्यादा हिसाब रखा जाए, भोजन का, तो घर की बरकत धीरे-धीरे कम होने लगती है। इससे आर्थिक परेशानियां, धन की कमी और खर्च बढ़ने जैसी स्थितियां पैदा हो सकती हैं। इसलिए रोटियां बनाते समय थोड़ा ज्यादा भोजन रखना शुभ माना जाता है।

 

सूर्य ग्रह का संबंध

ज्योतिष शास्त्र में गेहूं का संबंध सूर्य ग्रह से माना गया है। ऐसी मान्यता है कि भोजन को गिनकर बनाने की आदत सूर्य की सकारात्मक ऊर्जा को कमजोर कर सकती है। इसके कारण घर में तनाव, मनमुटाव और पारिवारिक मतभेद बढ़ने की संभावना बताई जाती है। हालांकि यह धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यता है।

 

पहली और आखिरी रोटी

वास्तु और धार्मिक परंपरा के अनुसार रोटी बनाते समय पहली रोटी गाय के लिए निकालनी चाहिए। लेकिन आखिर में बनने वाली रोटी कुत्ते, पक्षियों या अन्य जीवों के लिए अलग रखने की परंपरा भी है। ऐसा करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और घर में सकारात्मक ऊर्जा व सुख-शांति बनी रहने की मान्यता है।

 

रोटी बनाने का तरीका

रोटी बनाने से पहले गर्म तवे पर पानी या दूध की कुछ बूंदें छिड़कना शुभ माना जाता है। इसके साथ ही रोटियां बनाते समय साफ-सफाई, शांत मन और सकारात्मक सोच रखने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि ऐसे वातावरण में बना भोजन परिवार के लिए शुभ फल देता है और घर का माहौल भी अच्छा बना रहता है।

 

आटा स्टोर करना

अगर घर के लिए आटा गूंधना हो, तो रोटियों की गिनती तय करने के बजाय परिवार के सदस्यों की जरूरत का अंदाजा लगाकर आटा निकालना बेहतर माना जाता है। साथ ही 2–3 रोटियां ज्यादा बनाना भी शुभ माना जाता है, ताकि जरूरत पड़ने पर किसी मेहमान, जरूरतमंद या पशु-पक्षी के लिए भोजन मिल सके।

 

बचे हुए आटे का नियम

वास्तु शास्त्र में गूंथे हुए आटे को लंबे समय तक फ्रिज में रखने से बचने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि बासी आटा नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ा सकता है। इसलिए जितनी जरूरत हो उतना ही आटा गूंधें और ताजा भोजन बनाने की कोशिश करें। यह धार्मिक मान्यता होने के साथ-साथ ताजा भोजन खाने की अच्छी आदत भी मानी जाती है।