Wealth Creation Tips: सिर्फ हाई सैलरी के भरोसे बैठे हैं तो धोखा खा जाएंगे, एक्सपर्ट ने बताए वेल्थ क्रिएशन के 5 तरीके

Wealth Creation Tips: वेल्थ क्रिएशन के लिए क्या ज्यादा सैलरी जरूरी है? आपकी इस बारे में क्या राय है? ज्यादातर लोग यह सोचते हैं कि इनवेस्टमेंट से मोटा पैसा बनाने के लिए ज्यादा सैलरी जरूरी है। वे सैलरी बढ़ने के इंतजार में इनवेस्टमेंट शुरू नहीं कर पाते, जबकि कम इनकम वाले लोग रेगुलर इनवेस्टमेंट से बड़ा फंड तैयार कर लेते हैं। आशीष कांचरला एंड एसोसिएट्स के फाउंडर और सीए ने बताया कि वेल्थ क्रिएशन के लिए मोटी सैलरी से ज्यादा जरूरी कुछ खास आदतें हैं।

पहले निवेश करें फिर खर्च

उन्होंने कहा कि वेल्थ क्रिएशन के आपके रास्ते में सबसे बड़ी बाधा रुपये-पैसे को लेकर आपकी पुरानी सोच है। हममें से ज्यादातर लोग पहले खर्च करने के बारे में सोचते हैं। पैसे बचने पर वे सेविंग्स के बारे में सोचते हैं। यह आदत वेल्थ क्रिएशन से आपको रोक देती है। अगर आप वेल्थ क्रिएट करना चाहते हैं तो पहले आपको सेविंग्स करनी होगी फिर बाकी पैसे से महीने का खर्च चलाना होगा। मान लीजिए आपकी सैलरी मंथली 1 लाख रुपये है तो आपको कम से कम हर महीने 20,000-30,000 रुपये सेविंग्स और निवेश के लिए इस्तेमाल करना होगा।

निवेश को बनाएं आदत

दूसरा, इनवेस्टमेंट किसी त्योहार की तरह नहीं है, जो साल में तीन बार या चार बार आता है। इसका नियमित होना जरूरी है। आपको हर महीने अनुशासित रूप से निवेश जारी रखना होगा। कई लोग निवेश शुरू तो करते हैं, लेकिन कुछ ही महीनों बाद उनके निवेश की गाड़ी पटरी से उतर जाती है। सबसे पहले आपको इनवेस्टमेंट अमाउंट सोच-समझकर तय करना होगा। अगर आप ज्यादा अमाउंट तय करेंगे तो फिर आपको उसे जारी रखने में दिक्कत आ सकती है।

 खर्च को नहीं बढ़ने दें

ज्यादातर लोगों का खर्च सैलरी बढ़ने के साथ ही बढ़ जाता है। यह वेल्थ क्रिएशन के लिए ठीक नहीं है। आपको अपने खर्च को सैलरी के हिसाब से बढ़ने से रोकना होगा। अगर आज आपकी सैलरी 1 लाख है, जो पांच साल बाद बढ़कर 2.5 लाख हो जाएगी तो इसका मतलब यह नहीं आपका खर्च भी 2.5 गुना हो जाना चाहिए। आपको बढ़ी हुई इनकम का इस्तेमाल इनवेस्टमेंट बढ़ाने के लिए करना चाहिए। इससे कम से ज्यादा वेल्थ आसानी से क्रिएट कर सकेंगे।

इंश्योरेंस सिर्फ प्रोटेक्शन के लिए

कई लोग इंश्योरेंस का मतलब ठीक तरह से नहीं समझते। एक्सपर्ट्स का कहना है कि बीमा का इस्तेमाल सिर्फ प्रोटेक्शन के लिए होना चाहिए, न कि इनवेस्टमेंट के लिए। अगर आप नौकरी करते हैं और आपकी फैमिली है, जिसमें बीवी और बच्चें हैं तो परिवार की फाइनेंशियल सिक्योरिटी आपकी पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। यहां इंश्योरेंस आपकी मदद करता है। टर्म पॉलिसी खरीदकर आप अपने परिवार को पर्याप्त फाइनेंशियल कवर दे सकते हैं। किसी अनहोनी की स्थिति में इंश्योरेंस से आपके परिवार को इतना पैसा मिल जाएगा कि उन्हें आर्थिक रूप से लाचार नहीं होना पड़ेगा। टर्म पॉलिसी का प्रीमियम एन्डॉमेंट पॉलिसी के प्रीमियम के मुकाबले काफी कम होता है।

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निवेश में डायवर्सिफिकेशन

सिर्फ निवेश करना पर्याप्त नहीं है। आप कहां अपने पैसे का निवेश कर रहे हैं, यह काफी मायने रखता है। पहला, आपके निवेश से मिलने वाला रिटर्न इनफ्लेशन रेट से काफी ज्यादा होना चाहिए। अगर ऐसा नहीं है तो आपके पैसे की वैल्यू लंबी अवधि में बढ़ने की जगह घटेगी। दूसरा, निवेश में डायवर्सिफिकेशन बहुत जरूरी है। आप कुछ पैसा अगर शेयर या म्यूचुअल फंड की स्कीम में लगा रहे हैं तो कुछ फिक्स्ड इनकम इंस्ट्रूमेंट्स में भी लगाना चाहिए। इसके अलावा आपके पोर्टफोलियो में कम से कम 10-15 फीसदी हिस्सेदारी बुलियन यानी गोल्ड और सिल्वर की होनी चाहिए। पीपीएफ, वीपीएफ, बैंक एफडी और बॉन्ड फंड्स फिक्स्ड इनकम के अच्छे ऑप्शंस हैं।

Stocks to Watch: 4 सितंबर को Gland Pharma, RVNL, Avalon Tech, Coal India समेत ये शेयर फोकस में, 4 कंपनियां होंगी लि​स्ट

शुक्रवार, 4 सितंबर को कई शेयरों पर फोकस रहेगा क्योंकि तेज हलचल देखने को मिल सकती है। इनमें ग्लैंड फार्मा, रेल विकास निगम, पावर ग्रिड, सिप्ला, स्टरलाइट टेक, धूत ट्रांसमिशन जैसे नाम प्रमुख हैं। वजह हैं- तिमाही नतीजे, नई डील या कॉन्ट्रैक्ट, कारोबार से जुड़े डेवलपमेंट्स, एग्रीमेंट आदि। इसके अलावा शुक्रवार को मेनबोर्ड और SME सेगमेंट में 2-2 कंपनियों की लिस्टिंग होने वाली है। साथ ही 40 से ज्यादा कंपनियों के शेयर एक्स-डिविडेंड ट्रेड करने वाले हैं। कुछ शेयर एक्स-बोनस और एक्स-स्प्लिट ट्रेड भी करेंगे। आइए डिटेल में जानते हैं किन प्रमुख शेयरों पर रहेगी नजर…

आज के नतीजे

धूत ट्रांसमिशन

5 सितंबर को ये कंपनी जारी करेगी तिमाही नतीजे

मोलबायो डायग्नोस्टिक्स

इन शेयरों पर रहेगी नजर

Indian Energy Exchange: अगस्त महीने में बिजली का ट्रेडेड वॉल्यूम सालाना आधार पर 20.2% बढ़कर 13.94 BU हो गया। रियल-टाइम इलेक्ट्रिसिटी मार्केट वॉल्यूम 10.6% बढ़कर 5.6 BU हो गया। ‘डे-अहेड कंटीजेंसी’ और ‘टर्म-अहेड मार्केट’ का ट्रेडेड वॉल्यूम 111.3% उछलकर 1,765 MU हो गया।

Gland Pharma: CNBC-TV18 की एक रिपोर्ट के अनुसार, सूत्रों का कहना है कि फोसुन फार्मा इंडस्ट्रियल ब्लॉक डील के जरिए 5% इक्विटी हिस्सेदारी बेच सकती है। इस ऑफर का साइज 2,279.5 करोड़ रुपये रह सकता है। फ्लोर प्राइस 2,763 रुपये प्रति शेयर तय किया गया है।

Rail Vikas Nigam: कंपनी ईस्ट कोस्ट रेलवे के 404.88 करोड़ रुपये के कॉन्ट्रैक्ट के लिए सबसे कम बोली लगाने वाली (L1) कंपनी बनकर उभरी है।

Power Grid Corporation of India: कंपनी को ‘बिल्ड, ओन, ऑपरेट एंड ट्रांसफर’ (BOOT) बेसिस पर एक इंटर-स्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम बनाने के लिए 1,152.49 करोड़ रुपये का ‘लेटर ऑफ इंटेंट’ (LoI) मिला है। यह गुजरात के लकाडिया REZ-फेज II (7,500 MW) में रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स से बिजली को जोड़ने के लिए है। इस प्रोजेक्ट में गुजरात में एक नया 765/400 kV लकाडिया-II सबस्टेशन बनाना शामिल है।

Welspun Investments and Commercials: बोर्ड ने सब्सिडियरी, विश्वकर्मा रियल्टी में 1,285 करोड़ रुपये तक का फंड लगाने की मंजूरी दी है। यह फंड 75 करोड़ तक कंपल्सरी कन्वर्टिबल डिबेंचर्स (CCDs) और 53.50 करोड़ तक ऑप्शनली कन्वर्टिबल डिबेंचर्स (OCDs) के सब्सक्रिप्शन के जरिए लगाया जाएगा। इन्हें एक या ज्यादा किश्तों में जारी किया जाएगा।

इसके अलावा, बोर्ड ने विश्वकर्मा रियल्टी द्वारा प्रमोटर ग्रुप की कंपनी इंडिवारा रियल्टी में फंड लगाने की भी मंजूरी दी है। यह फंड 100 करोड़ तक OCDs के सब्सक्रिप्शन के जरिए लगाया जाएगा। इनकी कुल वैल्यू 1,000 करोड़ रुपये तक होगी और इन्हें एक या ज्यादा किश्तों में जारी किया जाएगा।

Shanthi Gears: कंपनी के बोर्ड ने साईं कृष्णा अल्लूरी को तुरंत प्रभाव से कंपनी का चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) नियुक्त किया है। इसके साथ ही, सुकांत कुमार पाणिग्रही अब कंपनी के अंतरिम CFO नहीं रहे।

Avalon Technologies: EMS कंपनी एवलॉन टेक्नोलॉजीज और यूरोप की नामी इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज कंपनी जोलनर इलेक्ट्रॉनिक AG ने भारत में PCBA, बॉक्स-बिल्ड और सिस्टम-इंटीग्रेशन मैन्युफैक्चरिंग के लिए एक जॉइंट वेंचर (JV) बनाने की घोषणा की है।

Cipla: कंपनी की सब्सिडियरी इनवेजेन फार्मास्यूटिकल्स इंक. ने अमेरिका में QL2107 (जो कीट्रूडा/pembrolizumab का बायोसिमिलर है) के एक्सक्लूसिव लाइसेंसिंग और सप्लाई के लिए Qilu फार्मास्युटिकल कंपनी के साथ एक स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप की है। इस एग्रीमेंट के तहत Qilu पर प्रोडक्ट के डेवलपमेंट, रेगुलेटरी रजिस्ट्रेशन और सप्लाई की जिम्मेदारी होगी, जबकि सिप्ला USA इंक. तय इलाके में अपनी मजबूत कमर्शियल मौजूदगी का फायदा उठाकर इस एसेट को कमर्शियलाइज करने की जिम्मेदारी संभालेगी।

WeWork India Management: कंपनी के बोर्ड ने कर्नाटक में 10 MWp का कैप्टिव सोलर पावर प्लांट लगाने के लिए सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है।

Max Healthcare Institute: बोर्ड ने सब्सिडियरी कलिंगा हॉस्पिटल में राइट्स बेसिस पर इक्विटी शेयरों के सब्सक्रिप्शन के जरिए लगभग 87.87 करोड़ रुपये के अतिरिक्त निवेश को मंजूरी दी है।

Sterlite Technologies: ऑप्टिकल फाइबर केबल और कनेक्टिविटी सॉल्यूशंस की ग्लोबल मांग को देखते हुए कंपनी के बोर्ड ने मौजूदा मैन्युफैक्चरिंग यूनिट के लिए 3,000 करोड़ रुपये के कैपिटल एक्सपेंडिचर (capex) को मंजूरी दी है।

Bharat Forge: सब्सिडियरी कंपनी, कल्याणी स्ट्रैटेजिक सिस्टम्स (KSSL) ने FN ब्राउनिंग ग्रुप की सब्सिडियरी FN हर्स्टल के साथ एक MoU साइन किया है। इसका मकसद छोटे हथियारों, इंटीग्रेटेड वेपन सिस्टम्स और काउंटर-अनमैन्ड एरियल सिस्टम (C-UAS) सॉल्यूशंस की लोकल मैन्युफैक्चरिंग करना है।

RBL Bank: बैंक को दिल्ली के असिस्टेंट कमिश्नर से एक कारण बताओ नोटिस मिला है। इसमें वित्त वर्ष 2022-23 के लिए लागू ब्याज और पेनल्टी समेत कुल 164.13 करोड़ रुपये के GST की डिमांड की गई है।

Market Trend : बाजार पर तेजड़ियों की पकड़ ढ़ीली, कमजोर बाजार में भी इस कैपिटल मार्केट शेयर में दिख रहा दम

बल्क और ब्लॉक डील्स

Meesho: SVF II मीरकाट (DE) LLC ने कंपनी में 8 करोड़ इक्विटी शेयर ₹1,650.4 करोड़ में बेचे हैं। पूरी 1.73% हिस्सेदारी वैश्विक और घरेलू निवेशकों ने खरीदी।

Clean Max Enviro Energy Solutions: DSDG होल्डिंग ApS ने 16.33 लाख शेयर ₹199.3 करोड़ में बेचे हैं। सभी शेयर बड़े इंस्टीट्यूशनल निवेशकों ने खरीदे, जिनमें SBI लाइफ इंश्योरेंस, महिंद्रा मैन्युलाइफ म्यूचुअल फंड, ICICI प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस, DSP इंडिया फंड और व्हाइटओक कैपिटल MF शामिल हैं।

Updater Services: SIS लिमिटेड ने और 10.12 लाख शेयर ₹23.76 करोड़ में खरीदे हैं।

Advit Jewels: Taurus Mutual Fund Flexicap Share Multi Cap ने 4.82 लाख शेयर 11.63 करोड़ रुपये में बेचे हैं। रमेश सवालराम सरावगी ने 5 लाख शेयर 12.14 करोड़ रुपये में खरीदे हैं।

Bulkcorp International: Chanakya Opportunities Fund I ने अतिरिक्त 1.08 लाख शेयर 81.63 लाख रुपये में खरीदे हैं। Care Wealth Advisors LLP ने अपनी पूरी हिस्सेदारी बेच दी है। 91,200 शेयर 68.94 लाख रुपये में बेचे गऐ।

Knowledge Realty Trust: मीरा गोयल ने IIFL मैनेजमेंट सर्विसेज से 28.31 लाख यूनिट ₹31 करोड़ में खरीदी हैं।

KSR Footwear: Alpa Wealth Creator ने 3.38 लाख शेयर 1.06 करोड़ रुपये में बेचे हैं। रानू परवाल HUF ने 1.5 लाख शेयर 46.8 लाख रुपये में और इंद्रा इनवेस्टमेंट ने 1.5 लाख शेयर 47.38 लाख रुपये में खरीदे हैं।

मेनबोर्ड लिस्टिंग

ESDS सॉफ्टवेयर सॉल्यूशन

प्रायोरिटी ज्वेल्स

SME लिस्टिंग

पलक टेक्नोलॉजीज

कंप्लीट स्पोर्ट्स एंड मैनेजमेंट इंडिया

ये शेयर करेंगे एक्स-डिविडेंड ट्रेड

कोल इंडिया

ऑयल इंडिया

ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन

अरविंद

BMW इंडस्ट्रीज

क्लीन साइंस एंड टेक्नोलॉजी

एमक्योर फार्मास्यूटिकल्स

कैपरी ग्लोबल कैपिटल

फिनोलेक्स केबल्स

फेडरल-मोगुल गोएट्ज (इंडिया)

AIA इंजीनियरिंग

हाईटेक कॉर्पोरेशन

इंडिगो पेंट्स

गल्फ ऑयल लुब्रिकेंट्स इंडिया

सिटाडेल रियल्टी एंड डेवलपर्स

मैक ट्रैवल सॉल्यूशंस

फिनोटेक्स केमिकल

जनरल इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया

हिकल

जैगसनपाल फार्मास्यूटिकल्स

माज्दा

पारादीप फॉस्फेट्स

परमेश्वर मेटल

नाहर कैपिटल एंड फाइनेंशियल सर्विसेज

नाहर पॉलीफिल्म

नाहर स्पिनिंग मिल्स

मेट्रो ब्रांड्स

OM इंफ्रा

पैनासोनिक एनर्जी इंडिया कंपनी

POCL एंटरप्राइजेज

प्रीवेस्ट डेनप्रो

SKP सिक्योरिटीज

SP अपैरल्स

संधू फार्मास्यूटिकल्स

शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया

शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लैंड एंड एसेट्स

शिल्पा मेडिकेयर

स्पेशियलिटी रेस्टोरेंट्स

स्पोर्टकिंग इंडिया

सूरज प्रोडक्ट्स

वीनस पाइप्स एंड ट्यूब्स

स्टोव क्राफ्ट

सुप्रिया लाइफसाइंस

Promoter Holding: इन 10 मिडकैप शेयरों में प्रमोटर्स ने हिस्सेदारी घटाई, जानिए 1 महीने में कैसा रहा रिटर्न

स्प्लिट के लिए ये शेयर करेंगे एक्स-ट्रेड

इंटीग्रेटेड प्रोटीन्स

TCC कॉन्सेप्ट

ये शेयर करेंगे एक्स-बोनस ट्रेड

जोंजुआ ओवरसीज

बाय-बैक के लिए एक्स-डेट पर ट्रेड करने वाले स्टॉक्स

PVR INOX

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

ETF में निवेश की टाइमिंग वाकई मायने रखती है? जानें लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए सही रणनीति

ETF Investment Strategy: शेयर बाजार में निवेश करते समय हर निवेशक के मन में यह सवाल जरूर आता है कि क्या फंड लगाने के लिए सही समय का इंतजार करना चाहिए? क्या गिरावट आने पर पैसा लगाना ज्यादा फायदेमंद होता है?

म्यूचुअल फंड के विपरीत, एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) शेयर बाजार में दिनभर रियल-टाइम पर ट्रेड होते हैं। यही वजह है कि इनकी कीमतों में हर सेकंड होने वाला बदलाव निवेशकों को आकर्षित करता है। आइए समझते हैं कि ETF में टाइमिंग कितनी मायने रखती है और बिना जोखिम बढ़ाए बेहतर रिटर्न कैसे हासिल किया जाए।

टाइमिंग बनाम अवधि

लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए बाजार को टाइम करने की कोशिश करने से ज्यादा जरूरी बाजार में बने रहना है।

म्यूचुअल फंड बनाम ETF: म्यूचुअल फंड का NAV दिन में केवल एक बार तय होता है, जबकि ETF बाजार के घंटों के दौरान लगातार खरीदे और बेचे जाते हैं।

इंट्राडे वोलैटिलिटी का सच: दिन के दौरान कीमतों में उतार-चढ़ाव ट्रेडर्स के लिए अवसर हो सकता है, लेकिन लंबी अवधि के निवेशकों को ‘परफेक्ट एंट्री पॉइंट’ के चक्कर में अपना निवेश नहीं रोकना चाहिए।

रिटर्न का पैच: बाजार के विभिन्न सूचकांकों (जैसे- निफ्टी 50, स्मॉलकैप, हाइब्रिड) का डेटा बताता है कि आउटपरफॉर्मेंस हमेशा टुकड़ों में आता है। अगर आप सही समय के इंतजार में बाहर बैठे रहे और वह तेजी का दौर निकल गया, तो आपका लॉन्ग टर्म रिटर्न काफी घट जाएगा।

मार्केट टाइमिंग के जोखिम से कैसे बचें?

बाजार में सही समय चुनने के बजाय जोखिम को कम करने के दो सबसे प्रभावी तरीके हैं:

ETF में SIP: निश्चित अंतराल पर थोड़ी-थोड़ी राशि ETF में लगाएं। इससे आपको Rupee-Cost Averaging का फायदा मिलेगा और अलग-अलग कीमतों पर खरीदारी होने से एवरेज कॉस्ट बेहतर होगी।

एसेट एलोकेशन और डाइवर्सिफिकेशन: अलग-अलग सेगमेंट के ETF में पैसा लगाएं या हाइब्रिड इंडेक्स ETF चुनें। डेटा दर्शाता है कि हाइब्रिड इंडेक्स की वोलैटिलिटी प्योर इक्विटी इंडेक्स की तुलना में लगभग 40% कम होती है।

ETF खरीदते और बेचते समय ध्यान रखने योग्य 3 जरूरी रूल्स

अगर आप खुद ETF में ट्रेड कर रहे हैं, तो इन तकनीकी बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है:

1- शुरुआती और आखिरी मिनटों से बचें: बाजार खुलने के पहले 5-10 मिनट और बंद होने के आखिरी 5-10 मिनट में ट्रेडिंग न करें। इस दौरान लिक्विडिटी कम होती है और प्राइस वोलैटिलिटी अधिक रहती है।

2- घड़ी नहीं, Bid-Ask Spread और iNAV देखें: खरीदने से पहले यह जांचें कि ETF का ट्रेडेड प्राइस उसके इंडिकेटिव NAV के आसपास ही हो। जब ETF iNAV की तुलना में भारी प्रीमियम पर मिल रहा हो, तो खरीदारी से बचना चाहिए।

3- सिस्टमैटिक एंट्री लें: एक साथ पूरा पैसा लगाने के बजाय किस्तों में खरीदारी करें ताकि एक ही दिन के गलत एंट्री पॉइंट का नुकसान न हो।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Radhika Gupta: कभी 0% बचत, आज सैलरी का 90% SIP! एडलवाइस CEO राधिका गुप्ता ने बताए वेल्थ क्रिएशन के ये 4 सीक्रेट्स

Radhika Gupta SIP Investment Strategy: एडलवाइस म्यूचुअल फंड की एमडी और सीईओ राधिका गुप्ता अपनी फाइनेंशियल डिसिप्लिन के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने हाल ही में एक पॉडकास्ट में अपनी पर्सनल फाइनेंस जर्नी को लेकर बड़ा खुलासा किया है। राधिका गुप्ता ने बताया कि आज वह अपनी टैक्स कटने के बाद मिलने वाली सैलरी का 90% हिस्सा म्यूचुअल फंड SIP में निवेश करती हैं।

हालांकि, उनकी शुरुआत ऐसी बिल्कुल नहीं थी। एक समय ऐसा भी था जब वह अपनी सैलरी से एक रुपया भी नहीं बचा पाती थीं। आइए जानते हैं उनकी जर्नी और पहली जॉब वाले युवाओं के लिए उनके दिए गए गोल्डन रूल्स के बारे में।

₹45000 की सैलरी में से कम से कम ₹5000 बचाएं

‘Konversation with Kushal’ पॉडकास्ट में बात करते हुए राधिका गुप्ता ने युवाओं को सलाह दी कि अपनी पहली सैलरी से ही निवेश करने की आदत डालनी चाहिए, भले ही शुरुआत छोटी राशि से हो। आपकी कमाई की शुरुआत में बड़ी रकम से ज्यादा महत्वपूर्ण आपकी निवेश करने की आदत है।

उन्होंने कहा, ‘अगर आपकी सैलरी ₹45000 है, तो उसमें से ₹9000 से ₹10000 बचाने की कोशिश करें। अगर आप इतना नहीं बचा पा रहे हैं, तो कम से कम ₹5000 हर महीने बचाने का लक्ष्य जरूर रखें।’

SIP क्यों है बेस्ट?

राधिका गुप्ता के अनुसार, SIP की सफलता का सबसे बड़ा कारण यह है कि यह ऑटोमेशन के जरिए अनुशासन बनाती है। उन्होंने समझाया, ‘जब आपकी सैलरी ₹50000 होती है, तो आप टैक्स से नहीं बच पाते क्योंकि वह सैलरी क्रेडिट होने से पहले ही TDS के रूप में कट जाता है।

ठीक इसी तरह SIP भी Investment Deducted at Source की तरह होनी चाहिए।’ ऑटोमैटिक डेबिट सेट करने से पैसा पहले ही इन्वेस्ट हो जाता है, जिससे ‘पहले खर्च करो और बाद में बचाओ’ वाली आदत पर रोक लगती है।

‘जीरो बचत’ से 90% तक का सफर

अपनी पर्सनल फाइनेंस जर्नी को याद करते हुए एडलवाइस की सीईओ ने बताया कि उन्होंने रातों-रात 90% सेविंग्स रेट हासिल नहीं किया। उन्होंने अपनी पोस्ट-टैक्स सैलरी से बिल्कुल कुछ न बचाने की स्थिति से 10%, फिर 20% और धीरे-धीरे आय बढ़ने के साथ इसे बढ़ाकर 90% तक पहुंचाया।

बेटे के 6 महीने के होते ही शुरू किया पोर्टफोलियो

राधिका गुप्ता बच्चों के नाम पर शुरुआती उम्र में निवेश की पुरजोर समर्थक हैं। उन्होंने 2023 में खुलासा किया था कि उन्होंने अपने बेटे के 6 महीने का होते ही उसके नाम पर इक्विटी में निवेश शुरू कर दिया था ताकि उसे लंबे समय तक कंपाउंडिंग का फायदा मिल सके। बच्चों के नाम पर SIP खोलने से माता-पिता ज्यादा गोल-ओरिएंटेड हो जाते हैं और वे लंबे समय के वित्तीय लक्ष्यों पर फोकस रहते हैं।

‘जिंदगी सिर्फ सबसे बड़े NAV या बैंक बैलेंस की रेस नहीं है’

हालांकि वह एक अग्रेसिव सेविंग्स रेट बनाए रखती हैं, लेकिन उन्होंने केवल पैसे जोड़ने की सनक से बचने की सलाह भी दी है। उन्होंने अपनी एक पोस्ट में लिखा था, ‘मेरा काम SIP बेचना है, लेकिन मैं हमेशा सभी से कहती हूं कि अपनी कड़ी मेहनत के फलों का आनंद लेने के लिए भी समय निकालें।’

उन्होंने आगे लिखा कि ‘जिंदगी इस बात की रेस नहीं है कि किसके पास सबसे ज्यादा NAV या सबसे ज्यादा रुपये हैं, बल्कि इस बात की है कि किसने सबसे ज्यादा खुशी से अपनी जिंदगी जी है।’

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

₹1 करोड़ का रिटायरमेंट फंड बनाने के लिए कितने की करनी होगी मंथली SIP? जानिए 15, 20 और 25 साल का पूरा कैलकुलेशन

Monthly SIP For ₹1 Crore Retirement Corpus: अपने रिटायरमेंट के बाद की जिंदगी को बिना किसी आर्थिक तंगी के सुकून से जीने के लिए एक बड़ा फंड होना बेहद जरूरी है। आज के दौर में महंगाई और जीवनशैली के खर्चों को देखते हुए कम से कम ₹1 करोड़ का रिटायरमेंट गोल एक बुनियादी जरूरत बन चुका है। लेकिन सवाल यह है कि इस ₹1 करोड़ के आंकड़े तक पहुंचने के लिए आपको हर महीने कितना निवेश करना होगा?

म्यूचुअल फंड में एसआईपी (SIP) के जरिए रेगुलर निवेश करके आप आसानी से ₹1 करोड़ का फंड तैयार कर सकते हैं। म्यूचुअल फंड इक्विटी स्कीम्स ने लंबी अवधि में औसतन 12% का सीएजीआर रिटर्न दिया है। आइए समझते हैं कि 15, 20 और 25 साल की समय सीमा के हिसाब से आपको हर महीने कितने रुपये की SIP शुरू करनी होगी।

1. 15 साल में 1 करोड़ रुपये बनाने का कैलकुलेशन

अगर आपकी उम्र 40-45 साल के करीब है और आपके पास रिटायरमेंट के लिए केवल 15 साल का समय बचा है, तो आपको कंपाउंडिंग का फायदा उठाने के लिए थोड़ी बड़ी रकम निवेश करनी होगी:

  • लक्ष्य: ₹1 करोड़
  • समय अवधि: 15 साल (180 महीने)
  • अनुमानित वार्षिक रिटर्न: 12%
  • जरूरी मंथली SIP: ₹20,017 (करीब ₹20,000 प्रति महीने)

गणित का पूरा हिसाब:

कुल निवेश: ₹36,03,060

अनुमानित वेल्थ गेन: ₹63,96,940

कुल मैच्योरिटी फंड: ₹1,00,00,000

2. 20 साल में 1 करोड़ रुपये बनाने का कैलकुलेशन

अगर आप 35-40 साल की उम्र में अपनी रिटायरमेंट प्लानिंग शुरू कर रहे हैं और आपके पास 20 साल का समय है, तो आपका मंथली SIP अमाउंट काफी घटकर आधा रह जाता है:

  • जरूरी मंथली SIP: ₹10,009 (करीब ₹10,000 प्रति महीने)
  • कुल निवेश: ₹24,02,160
  • अनुमानित वेल्थ गेन: ₹75,97,840
  • कुल मैच्योरिटी फंड: ₹1,00,00,000

3. 25 साल में 1 करोड़ रुपये बनाने का कैलकुलेशन

अगर आपकी उम्र 25 से 30 साल के बीच है और आप अपने करियर की शुरुआत में ही रिटायरमेंट प्लानिंग शुरू कर देते हैं, तो कंपाउंडिंग (Chakravridhi) का जादू सबसे बेहतरीन काम करता है:

  • जरूरी मंथली SIP: ₹5,270 (करीब ₹5,300 प्रति महीने)
  • कुल निवेश: ₹15,81,000
  • अनुमानित वेल्थ गेन: ₹84,19,000
  • कुल मैच्योरिटी फंड: ₹1,00,00,000

₹1 करोड़ का रिटायरमेंट फंड बनाने के लिए 15, 20 और 25 साल की SIP का गणित

₹1 करोड़ का रिटायरमेंट फंड बनाने के लिए 15, 20 और 25 साल की SIP का गणित

स्मार्ट टिप: Step-Up SIP से आसान होगी राह

अगर आप शुरुआत में ही ₹10,000 या ₹20,000 की बड़ी SIP शुरू नहीं कर सकते, तो आप Step-Up SIP का सहारा ले सकते हैं। इसमें आप हर साल अपनी सैलरी या आमदनी बढ़ने के साथ अपनी SIP रकम में 10% का इजाफा कर सकते हैं। ऐसा करने पर आप बहुत छोटी मंथली रकम (जैसे- ₹2,500 – ₹3,000) से शुरुआत करके भी समय से पहले 1 करोड़ रुपये का गोल हासिल कर सकते हैं।

एक्सपर्ट्स की माने तो रिटायरमेंट प्लानिंग में सबसे महत्वपूर्ण कारक आपकी उम्र और समय है। जितना जल्दी आप निवेश की शुरुआत करेंगे, जेब पर उतना ही कम बोझ पड़ेगा और कंपाउंडिंग का फायदा उतना ही ज्यादा मिलेगा। अगर आप भी 1 करोड़ रुपये का फंड बनाना चाहते हैं, तो आज ही अपनी वित्तीय क्षमता के अनुसार म्यूचुअल फंड्स में SIP की शुरुआत करें।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

September 2026: दूध से लेकर LPG सिलेंडर तक… 1 सितंबर से बदल जाएंगे ये 9 बड़े नियम! आपकी जेब पर पड़ेगा बड़ा असर

Financial Rule Changes September 2026: सितंबर का महीना शुरू होते ही आम आदमी से लेकर निवेशकों और करदाताओं के लिए कई नियम बदलने वाले हैं। सितंबर 2026 में दूध की कीमतों से लेकर डीमैट अकाउंट, एडवांस टैक्स, एलपीजी सिलेंडर बायोमेट्रिक और फ्लाइट में सफर तक से जुड़े 9 बड़े बदलाव लागू हो रहे हैं। 1 सितंबर 2026 से लागू होने वाले इन सभी 9 महत्वपूर्ण बदलावों के बारे में विस्तार से जानिए।

1. डीमैट और म्यूचुअल फंड में नॉमिनेशन के नए नियम

1 सितंबर 2026 से डीमैट अकाउंट और म्यूचुअल फंड फोलियो के लिए नॉमिनेशन के नए दिशानिर्देश लागू हो जाएंगे। निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे अपने खातों का नॉमिनेशन स्टेटस तुरंत चेक करें और आवश्यक प्रक्रिया या ऑप्ट-आउट फॉर्म समय रहते पूरा कर लें।

2. SEBI के नए ETF रूल्स

शेयर बाजार के नियामक सेबी का नया एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) फ्रेमवर्क 7 सितंबर 2026 से लागू होने जा रहा है। इसमें बेस प्राइस, प्राइस बैंड, प्री-ओपन कॉल ऑक्शन और क्लोज-आउट प्रक्रियाओं में बदलाव शामिल हैं। पहले इसे लागू करने की समयसीमा अलग थी, जिसे बढ़ाकर 7 सितंबर किया गया है।

3. FCNR(B) डिपॉजिट पर स्पेशल स्वैप विंडो बंद

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की FCNR(B) डिपॉजिट के लिए विशेष डॉलर-रुपया स्वैप सुविधा 31 अगस्त को समाप्त हो रही है। 1 सितंबर से नई FCNR(B) एफडी पर यह स्पेशल फैसिलिटी नहीं मिलेगी। हालांकि, FCNR(B) डिपॉजिट बंद नहीं हुए हैं, लेकिन अब इन पर ब्याज दरें बैंक की सामान्य दरों के आधार पर तय होंगी।

4. एडवांस टैक्स चुकाने की लास्ट डेट: 15 सितंबर

करदाताओं के लिए 15 सितंबर 2026 एडवांस टैक्स की अगली किश्त जमा करने की अंतिम तिथि है। नियमों के तहत, योग्य टैक्सपेयर्स को 15 सितंबर तक अपनी कुल एडवांस टैक्स देनदारी का कम से कम 45% हिस्सा सरकार को जमा करना अनिवार्य है।

5. छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों में बदलाव

सितंबर का आखिरी दिन यानी 30 सितंबर छोटी बचत योजनाओं में निवेश करने वालों के लिए बेहद अहम है। केंद्र सरकार अक्टूबर-दिसंबर 2026 तिमाही के लिए पीपीएफ (PPF), सुकन्या समृद्धि और एनएससी (NSC) जैसी स्मॉल सेविंग्स स्कीम्स की नई ब्याज दरों की समीक्षा और घोषणा करेगी।

6. इंटरनेशनल फ्लाइट्स: बोर्डिंग पास पर स्टैंप की जरूरत खत्म

1 सितंबर 2026 से भारत से विदेश यात्रा करने वाले यात्रियों को इमिग्रेशन काउंटर पर बोर्डिंग पास पर मोहर लगवाने की बाध्यता से छूट दे दी गई है। अब यात्री अपने मोबाइल में इलेक्ट्रॉनिक बोर्डिंग पास का उपयोग कर सकते हैं या प्रिंटेड पास दिखाकर इमिग्रेशन की प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।

7. LPG e-KYC की अनिवार्यता

घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन (e-KYC) कराने की समयसीमा 31 अगस्त यानी आज तक है। जिन उपभोक्ताओं ने अभी तक ई-केवाईसी पूरी नहीं की है, उन्हें 1 सितंबर के बाद रसोई गैस सिलेंडर की रीफिल बुकिंग या सब्सिडी दरों का लाभ लेने में दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है।

8. मुंबई में दूध की कीमतें बढ़ीं

मुंबई में 1 सितंबर से ताजा भैंस के दूध के थोक दामों में ₹9 प्रति लीटर की बढ़ोतरी होने वाली है। इसके बाद अब दूध की नई दरें ₹102 प्रति लीटर तक पहुंच गई हैं। यह रिवाइज्ड रेट अगले छह महीनों के लिए लागू रहेंगे।

9. मुंबई में ऑटो और टैक्सी के किराए में बढ़ोतरी

मुंबई में रोजाना सफर करने वाले यात्रियों के लिए भी झटका लगने वाला है। 1 सितंबर से मुंबई में ऑटो-रिक्शा और टैक्सी के बेस फेयर में बढ़ोतरी होने वाली है, जिससे लोकल ट्रैवलिंग थोड़ी महंगी हो जाएगी।

NSE IPO Update: NSE के आईपीओ से पहले SBI का बड़ा ऐलान! ₹30000 करोड़ के मेगा इश्यू में बेचेगा अपनी हिस्सेदारी

SBI to Dilute Stake in NSE IPO: देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) और उसकी सब्सिडियरी एसबीआई कैपिटल मार्केट्स मिलकर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के प्रस्तावित ₹30,000 करोड़ के आईपीओ में अपनी 1% तक हिस्सेदारी बेचने जा रहे हैं।

इस बात की पुष्टि खुद एसबीआई के चेयरमैन सी एस शेट्टी ने की है। इसके साथ ही उन्होंने बैंक के होम लोन पोर्टफोलियो और हालिया एसबीआई म्यूचुअल फंड आईपीओ को लेकर भी कई अहम जानकारियां साझा की हैं।

NSE IPO में SBI ग्रुप कितना बेचेगा हिस्सा?

एसबीआई चेयरमैन सी एस शेट्टी ने एक इंटरव्यू में बताया कि बैंक और उसकी सहयोगी कंपनी मिलकर एनएसई के आईपीओ (OFS के जरिए) में हिस्सा बेचेंगे। एसबीआई मुख्य रूप से एनएसई में अपनी 0.65% हिस्सेदारी बेचेगा। एसबीआई कैपिटल मार्केट्स अपनी 0.35% हिस्सेदारी बेचेगा। इस तरह एसबीआई ग्रुप मिलकर कुल 1% हिस्सेदारी कैश करेगा। अन्य शेयरधारकों के शामिल होने के आधार पर यह आंकड़ा थोड़ा कम भी हो सकता है।

वर्तमान में कितनी है हिस्सेदारी?

मौजूदा समय में एनएसई में SBI की 3.23% और एसबीआई कैपिटल मार्केट्स की 4.33% हिस्सेदारी है। चेयरमैन ने साफ किया कि फिलहाल बैंक की किसी अन्य सब्सिडियरी कंपनी के मोनेटाइजेशन या आईपीओ की तत्काल कोई योजना नहीं है।

सुपरहिट रहा था SBI Mutual Fund का IPO

हाल ही में एसबीआई ने अपने विदेशी पार्टनर ‘अमुंडी’ के साथ मिलकर एसबीआई म्यूचुअल फंड में लगभग 10% हिस्सेदारी बेची थी। ₹9,800 करोड़ का यह पब्लिक ऑफर निवेशकों के बीच बेहद सुपरहिट रहा और इसे 42 गुना सब्सक्रिप्शन मिला था।लिस्टिंग के बाद एसबीआई की हिस्सेदारी 61.76% से घटकर 55.46% रह गई, जबकि अमुंडी की हिस्सेदारी 3.7% घटकर 32.56% पर आ गई।

होम लोन पोर्टफोलियो ₹10 लाख करोड़ पार करने की तैयारी में

हाउसिंग फाइनेंस सेगमेंट में एसबीआई की बादशाहत कायम है। बैंक जल्द ही एक बड़ा नया रिकॉर्ड बनाने जा रहा है। चालू तिमाही में एसबीआई का होम लोन पोर्टफोलियो ₹10 लाख करोड़ के ऐतिहासिक आंकड़े को पार कर जाएगा। बीते वित्त वर्ष में बैंक ने ₹9 लाख करोड़ का आंकड़ा पार किया था। होम लोन सेगमेंट में एसबीआई की बाजार हिस्सेदारी लगभग 28% है। देशभर में बैंक के 460 से ज्यादा होम लोन प्रोसेसिंग सेंटर्स काम कर रहे हैं, जो ग्राहकों के लिए प्रक्रिया को आसान बनाते हैं।

देश की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद अहम है होम लोन: CS Setty

सी एस शेट्टी ने कहा कि ग्राहक कागजी कार्रवाई की पारदर्शिता, बिल्डर्स की ड्यू-डिलिजेंस और बैंक के भरोसे के कारण एसबीआई से होम लोन लेना पसंद करते हैं।उन्होंने जोर देकर कहा कि होम लोन को केवल एक बैंकिंग प्रोडक्ट के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। 200 से अधिक उद्योग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से रियल एस्टेट सेक्टर पर निर्भर हैं, इसलिए होम लोन भारत की आर्थिक वृद्धि का एक अभिन्न और महत्वपूर्ण हिस्सा है।

लेवरेज्ड ETF के लिए कोर्स करना जरूरी, दक्षिण कोरिया ने इस कारण बनाया नियम

दक्षिण कोरिया का $4.3 ट्रिलियन का स्टॉक मार्केट बहुत ही अधिक वोलेटाइल हो चुका है। सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स (Samsung Electronics) और एसके हीनिक्स (SK Hynix) से जुड़े सिंगल-स्टॉक लेवरेज्ड ईटीएफ में निवेश तेजी से घटा है। अगस्त में इनसे करीब $100 करोड़ की निकासी हो चुकी है। ऐसे कठिन समय में मॉक ट्रेडिंग कोर्स निवेशकों के डर को दूर करने का प्रभावी तरीका बनता जा रहा है। बता दें कि दक्षिण कोरिया ने लेवरेज्ड ईटीएफ में रिस्क वाली ट्रेडिंग को कम करने के लिए नियम काफी सख्त कर दिए हैं। सबसे अहम बात ये है कि लेवरेज्ड ईटीएफ खरीदने के लिए यह कोर्स अनिवार्य है। न्यूज एजेंसी ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक यह अनिवार्य नियम 19 अगस्त से लागू है।

क्या है मॉक ट्रेडिंग कोर्स में

अब निवेशकों को लेवरेज्ड ईटीएफ खरीदने से पहले पांच दिन का मॉक ट्रेडिंग कोर्स करना जरूरी होगा और हर दिन कम से कम 1 घंटे वर्चुअल मनी से ट्रेडिंग करनी होगी। इस कोर्स में विंडोज पीसी पर एक प्रोग्राम डाउनलोड करना जरूरी है, जिससे कई रिटेल इंवेस्टर्स इसे काफी झंझट वाला मान रहे हैं। यह ऐप सिर्फ पीसी पर ही डाउनलोड होगा और कोरियन एक्सचेंज का कहना है कि फिलहाल मोबाइल-बेस्ड प्लेटफॉर्म शुरू करने की कोई योजना नहीं है। सरकार का उद्देश्य खुदरा निवेशकों को हाई-रिस्क लेवरेज्ड प्रोडक्ट्स से दूर रखना है, और फिलहाल इन नियमों का असर साफ दिखाई दे रहा है।

क्या है Leveraged ETF की स्थिति

दक्षिण कोरियाई बाजार में लेवरेज्ड ईटीएफ का कुल AUM (एसेट अंडर मैनेजमेंट) जून के पीक $1140 करोड़ से घटकर 27 अगस्त तक करीब $500 करोड़ तक आ गया। सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स और हीनिक्स जैसे टेक स्टॉक्स में गिरावट ने मार्केट में कोहराम मचा दिया। अब सवाल उठता है कि इनमें इतनी तेज गिरावट क्यों आई तो इसका जवाब ये है कि सरकार के सख्त नियमों के साथ-साथ एआई सेक्टर में अधिक खर्च और उससे कमाई की संभावनाओं को लेकर चिंता ने भी टेक स्टॉक्स पर भी दबाव बनाया।

लेवरेज्ड ईटीएफ की स्थिति तो अब ऐसी है कि उनकी ट्रेडिंग वैल्यू जून के रिकॉर्ड हाई लेवल से सिर्फ 4% रह गई है तो इनमें पहली बार किसी महीने में निवेश से अधिक निकासी के आसार दिखने लगे हैं। इन ईटीएफ में ट्रेडिंग कम होने से वोलैटिलिटी कम हुई है। कोस्पी वोलैटिलिटी गॉज जून के 97 से गिरकर चार महीने के निचले स्तर लगभग 50 पर आ गया। दक्षिण कोरिया का इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्स इस साल अभी भी 61% ऊपर है, लेकिन अपने दो महीने पुराने रिकॉर्ड हाई से 25% नीचे है।

Tax-Saving Mutual Fund: टैक्स बचाने वाला इकलौता म्यूचुअल फंड प्लान, तो सबसे कम लॉक-इन वाला ऑप्शन भी

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Step Up SIP: क्या आप इस 10% वाले सीक्रेट फॉर्मूले के बारे में जानते हैं? सिर्फ ₹5000 की SIP से बन गया ₹1 करोड़ का फंड

Step-Up SIP Wealth Creation: शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव के बीच हर नौकरीपेशा व्यक्ति का सपना होता है कि वह अपने और अपने परिवार के भविष्य के लिए एक बड़ा फंड तैयार करे। लेकिन अक्सर लोग यह सोचकर कदम पीछे खींच लेते हैं कि शुरुआत में उनके पास बड़ा पैसा निवेश करने के लिए नहीं है।

अगर आप भी ऐसा ही सोचते हैं, तो अमित की कहानी आपकी इस सोच को पूरी तरह बदल देगी। अमित ने कोई बहुत बड़ा निवेश नहीं किया, बल्कि सिर्फ ‘स्टेप-अप SIP’ की एक छोटी सी तरकीब अपनाकर ₹1 करोड़ का बड़ा फंड तैयार कर लिया। आइए आपको बताते हैं कम पैसों के इनवेस्टमेंट से भी इस फॉर्मूले से मोटा फंड तैयार किया जा सकता है।

₹5,000 की SIP से शुरू की इन्वेस्टमेट जर्नी की शुरूआत

बात लगभग 20 साल पुरानी है। अमित ने जब अपने करियर की शुरुआत की, तो उसकी सैलरी बहुत कम थी। बचत के नाम पर उसके पास ज्यादा पैसे नहीं बचते थे। हालांकि, उसके बावजूद उसने म्यूचुअल फंड में हर महीने ₹5000 की एक छोटी मंथली SIP से शुरुआत करने का फैसला किया। उसी के साथ काम करने वाले विकास ने भी ₹5,000 महीने की ही SIP शुरू की। लेकिन दोनों के निवेश करने के अंदाज में एक बड़ा अंतर था जिसका असर उसके वेल्थ क्रिएशन पर भी देखने को मिला।

विकास ने तय किया कि वह अगले 20 सालों तक बिना किसी फेरबदल के हर महीने ₹5,000 जमा करता रहेगा। अमित ने एक स्मार्ट फॉर्मूला अपनाया। वो जानता था कि हर साल उसकी सैलरी में कम से कम 10% से 12% का इंक्रीमेंट होगा। इसलिए उसने फैसला किया कि वह हर साल अपनी SIP में भी 10% की बढ़ोतरी करेगा।

साल-दर-साल कैसे बढ़ा अमित का निवेश?

अमित ने अपनी जेब पर बिना कोई एक्स्ट्रा दबाव डाले इस प्रक्रिया को बेहद आसान रखा:

  • पहला साल: हर महीने ₹5,000 जमा किए (साल में कुल ₹60,000 निवेश)।
  • दूसरा साल (10% बढ़ोतरी): इंक्रीमेंट होते ही SIP ₹500 बढ़ा दी। अब हर महीने ₹5,500 जाने लगे।
  • तीसरा साल (10% बढ़ोतरी): अब हर महीने ₹6,050 की SIP होने लगी।
  • चौथा साल: हर महीने ₹6,655 जमा होने लगे… और इसी तरह हर साल 10% का स्टेप-अप अपने आप लागू होता गया।

एक जैसी शुरुआत, लेकिन 20 साल बाद नतीजों में जमीन-आसमान का अंतर!

जब 20 साल पूरे हुए और औसतन 12% का वार्षिक रिटर्न मिला, तो दोनों के खातों का रिपोर्ट कार्ड कुछ इस तरह था:

मापदंड विकास (साधारण SIP) अमित (स्टेप-अप SIP)
शुरुआती मंथली SIP₹5,000₹5,000
सालाना बढ़ोतरी0% (फिक्स्ड)10% प्रति वर्ष
20 साल में कुल निवेश₹12 लाख₹34.36 लाख
20 साल बाद मिला कुल फंड₹49.95 लाख (करीब ₹50 लाख)₹98.71 लाख (करीब ₹1 करोड़)

बड़ा टेकअवे: साधारण SIP से विकास केवल ₹50 लाख बना पाया, जबकि अमित ने सिर्फ हर साल थोड़ा-थोड़ा निवेश बढ़ाकर लगभग ₹1 करोड़ का फंड बना लिया।

कंपाउंडिंग का जादू: अमित कैसे बना विजेता?

अमित की सफलता के पीछे 3 मुख्य कारण रहे:

1- जेब पर बोझ नहीं पड़ा: उसने एक साथ ₹15,000-₹20,000 की बड़ी SIP शुरू नहीं की। सैलरी बढ़ने के साथ-साथ निवेश बढ़ा, जिससे उसकी दिनचर्या और खर्चों पर कोई असर नहीं पड़ा।

2- कंपाउंडिंग की ताकत: जो एक्स्ट्रा पैसा अमित ने दूसरे, तीसरे और चौथे साल से बढ़ाया, उस बढ़ी हुई रकम पर भी उसे अगले 15-18 सालों तक ब्याज पर ब्याज मिलता रहा।

3- अनुशासन: ऑटो-डेबिट और टॉप-अप ऑप्शन की मदद से उसका निवेश हर साल अपने आप बढ़ता गया।

आप अपने लिए इसे कैसे शुरू कर सकते हैं?

अगर आप भी अमित की तरह कम समय या छोटी शुरुआत से बड़ा फंड बनाना चाहते हैं, तो जब भी किसी म्यूचुअल फंड ऐप (Groww, Zerodha, PayTM Money आदि) से नई SIP शुरू करें, वहां ‘Step-Up SIP’ या ‘Top-Up’ का विकल्प जरूर चुनें।

वहां अपनी सुविधा के अनुसार 10% सालाना या ₹500/₹1,000 सालाना की बढ़ोतरी सेट कर दें। आज लिया गया यह छोटा सा फैसला आपके भविष्य को आर्थिक रूप से पूरी तरह चिंतामुक्त बना सकता है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

SBI Mutual Fund: बैंक FD से बेहतर रिटर्न और 0% इक्विटी रिस्क! जानिए SBI म्यूचुअल फंड की 3 सबसे सुरक्षित योजनाएं

SBI Mutual Fund Low Risk Schemes: शेयर बाजार की अनिश्चितता और उतार-चढ़ाव के बीच हर निवेशक एक ऐसे विकल्प की तलाश में रहता है, जहां उसका मूलधन पूरी तरह सुरक्षित रहे और बैंक FD की तुलना में बेहतर रिटर्न भी मिले। अगर आप भी ज्यादा जोखिम हीं लेना चाहते हैं, तो एसबीआई म्यूचुअल फंड की डेट स्कीम्स आपके लिए एक शानदार विकल्प साबित हो सकती हैं।

म्यूचुअल फंड की डेट कैटगरी में क्रेडिट रिस्क और इंटरेस्ट रेट रिस्क का डर बहुत कम होता है। आइए विस्तार से समझते हैं एसबीआई म्यूचुअल फंड की उन 3 सबसे सुरक्षित योजनाओं के बारे में, जहां आप बिना किसी बड़े जोखिम के अपना पैसा निवेश कर सकते हैं।

1. SBI Savings Fund (मनी मार्केट फंड)

एसबीआई सेविंग्स फंड एक मनी मार्केट कैटेगरी का फंड है, जो उन निवेशकों के लिए सबसे बेहतरीन माना जाता है जो बेहद कम समय के लिए अपना पैसा सुरक्षित जगह पार्क करना चाहते हैं। इसमें रिस्क लेवल बहुत कम होता है। यह फंड 1 साल तक की कम अवधि वाले बेहद सुरक्षित मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट्स जैसे- कमर्शियल पेपर्स, सर्टिफिकेट्स ऑफ डिपॉजिट और ट्रेजरी बिल्स में पैसा लगाता है।

अगर आपके पास सरप्लस कैश पड़ा है और आप 3 महीने से लेकर 12 महीने की अवधि के लिए बिना किसी जोखिम के स्थिर रिटर्न चाहते हैं, तो यह स्कीम आपके लिए एकदम सही है।

2. SBI Low Duration Fund (लो ड्यूरेशन फंड)

अगर आपका नजरिया 1 से 2 साल का है और आप बैंक सेविंग्स अकाउंट या शॉर्ट-टर्म FD से बेहतर रिटर्न की उम्मीद रखते हैं, तो एसबीआई लो ड्यूरेशन फंड एक मजबूत विकल्प है। इसमें भी रिस्क बहुत कम होता है। यह फंड 6 महीने से लेकर 12 महीने की मैकुले ड्यूरेशन वाले सुरक्षित डेट इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश करता है।

अवधि कम होने के कारण इस फंड पर बाजार में ब्याज दरों के उतार-चढ़ाव का असर न के बराबर पड़ता है। 1 से 2 साल के समयांतराल के लिए पैसा निवेश करने वाले उन लोगों के लिए ये स्कीम बेस्ट है जो हाई लिक्विडिटी और सुरक्षित ग्रोथ चाहते हैं।

3. SBI Banking and PSU Fund (बैंकिंग एंड पीएसयू फंड)

सुरक्षा और क्रेडिट क्वालिटी के मामले में यह फंड बेहद मजबूत माना जाता है, क्योंकि इसमें सरकारी गारंटी और मजबूत संस्थानों का भरोसा जुड़ा होता है। इसका रिस्क लेवल भी लो से मीडियम होता है।

सेबी के नियमों के अनुसार, इस फंड का कम से कम 80% पैसा देश के प्रमुख सरकारी व प्राइवेट बैंकों और सरकारी कंपनियों (PSUs/PFIs) द्वारा जारी बॉन्ड्स और पेपर्स में लगाया जाता है। इन कंपनियों के डूबने या डिफॉल्ट करने का खतरा न के बराबर होता है।

जो निवेशक 2 से 3 साल के नजरिए से फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के विकल्प के रूप में एक सुरक्षित और टैक्स-कुशल जरिया तलाश रहे हैं।

निवेशकों के लिए टेकअवे

अगर आप इक्विटी मार्केट के उतार-चढ़ाव से दूर रहकर अपनी गाढ़ी कमाई को सुरक्षित रखना चाहते हैं, तो अपनी समय सीमा के हिसाब से इन स्कीम्स का चयन कर सकते हैं:

  • 3 से 12 महीने के लिए: SBI Savings Fund
  • 1 से 2 साल के लिए: SBI Low Duration Fund
  • 2 से 3 साल के लिए: SBI Banking and PSU Fund

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।