दक्षिण कोरिया के Kospi में लगा सर्किट, चिप शेयरों की बिकवाली पर टूट गया 8%, इस कारण मचा हाहाकार

चिप शेयरों की ताबड़तोड़ बिकवाली ने आज दक्षिण कोरियाई बाजार में ऐसा हाहाकार मचाया कि सर्किट लग गया। दक्षिण कोरिया का कोस्पी (Kospi) इंडेक्स आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सेक्टर में निवेश का एक अहम इंडिकेटर है और चिप शेयरों की बिकवाली में यह 8% टूट गया। चिप बनाने वाली दिग्गज कंपनियों सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स (Samsung Electronics) और एसके हीनिक्स (SK Hynix) के शेयरों में 8% से अधिक की गिरावट आई। सिर्फ दक्षिण कोरियाई बाजार ही नहीं बल्कि अधिकतर एशियाई बाजारों में हाहाकार मचा हुआ है। एशियाई बाजारों में यह कमजोरी वॉल स्ट्रीट यानी अमेरिकी बाजार में आई भारी गिरावट के बाद देखने को मिली।

एशियाई मार्केट में कैसी है हालत

दक्षिण कोरिया के बेंचमार्क इंडेक्स कोस्पी में 8% की गिरावट आई है तो जापान के बेंचमार्क इंडेक्स निक्केई 225 (Nikkei 225) में इंट्रा-डे में 4% और टॉपिक्स (TOPIX) में 2% की फिसलन आई। साथ ही MSCI एशिया पैसेफिक इक्विटी इंडेक्स में 2.2% की गिरावट आई, जिससे इसके जुलाई के बाद के सबसे निचले बंद स्तर की ओर बढ़ने की आशंका बन गई। हालांकि भारतीय मार्केट में बात करें तो आईटी सेक्टर में ताबड़तोड़ खरीदारी के दम पर शानदार रौनक दिखी और घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज सेंसेक्स (Sensex) और निफ्टी 50 (Nifty 50) डेढ़-डेढ़ फीसदी से अधिक उछल पड़े।

इस हाहाकार की क्या है वजह

अमेरिका में सितंबर में महंगाई के अनुमान से अधिक आंकड़ों ने बाजार में इस आशंका को मजबूत कर दिया कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में और बढ़ोतरी कर सकता है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ने से अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड में तेजी आई। अमेरिका में पांच महीने में सबसे तेज रफ्तार से महंगाई बढ़ने से इस बात के आसार बढ़ गए हैं कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक ब्याज दरें बढ़ा सकता है। अमेरिका और ईरान के बीच लड़ाई ने तेल की सप्लाई को लेकर अनिश्चितता के चलते कच्चे तेल के भाव ऊंचे बने हुए हैं। तेल की ऊंची कीमतों के कारण अमेरिका में महंगाई का दबाव बना हुआ है।

भारतीय मार्केट में इस कारण छाई रौनक

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Asian Market Today: चिप शेयरों में बिकवाली से एशियाई बाजारों में गिरावट, KOSPI 8% टूटा, Nikkei 4% नीचे गिरा

Asian Market Today: आज (गुरुवार, 15 अक्टूबर) एशियाई बाजारों के लिए दिन की शुरुआत काफी खराब रही। ग्लोबल स्तर पर चिप (सेमीकंडक्टर) शेयरों में आई भारी बिकवाली के दबाव में सभी प्रमुख सूचकांक (indices) लुढ़क गए।

एशियाई बाजारों में गिरावट

ग्लोबल इक्विटी बाजारों में आई भारी बिकवाली का असर एशिया-पैसिफिक क्षेत्र में भी दिखा। अमेरिका में महंगाई के आंकड़े उम्मीद से कहीं ज्यादा रहे, जिससे बाजार को यह लगने लगा है कि फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में और बढ़ोतरी कर सकता है। इसके चलते सेमीकंडक्टर शेयरों में गिरावट आई। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, सुरक्षित निवेश की तलाश में निवेशकों ने ट्रेजरी सिक्योरिटीज (सरकारी बॉन्ड) की खरीदारी की, जिससे उनकी कीमतें बढ़ीं।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सेक्टर में निवेश के लिए एक अहम संकेतक माने जाने वाले दक्षिण कोरिया के ‘कोस्पी’ (KOSPI) इंडेक्स में सबसे बड़ी गिरावट देखी गई। इसमें 8% की कमी आई, क्योंकि प्रमुख चिप निर्माता कंपनियों – सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स और SK हाइनिक्स – के शेयरों में 8% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। जापान का प्रमुख सूचकांक ‘निक्केई 225’ (Nikkei 225) दिन के कारोबार के दौरान 4% से ज्यादा टूट गया, जबकि ‘टोपिक्स’ (TOPIX) में 2% की गिरावट आई।

इस बीच, दलाल स्ट्रीट पर ‘गिफ्ट निफ्टी’ (GIFT Nifty) के संकेत बता रहे हैं कि भारतीय बाजारों में भी आज की शुरुआत नकारात्मक रह सकती है।

MSCI एशिया-पैसिफिक इक्विटी इंडेक्स में 2.2% की गिरावट आई, जो जुलाई के बाद से इसका सबसे निचला स्तर है।

टेक्नोलॉजी सेक्टर को लेकर धारणा कमजोर बनी रही, और नैस्डैक 100 (Nasdaq 100) इंडेक्स फ्यूचर्स में 0.8% की गिरावट आई। एशियाई बाजारों में यह गिरावट वॉल स्ट्रीट पर आई भारी गिरावट के बाद देखने को मिली है। वॉल स्ट्रीट पर इस गिरावट के कारण ‘रसेल 2000’ (Russell 2000) इंडेक्स ‘करेक्शन’ (गिरावट) के दायरे में आ गया। वहीं, अमेरिकी सेमीकंडक्टर शेयरों को ट्रैक करने वाला एक प्रमुख इंडेक्स लगातार कई दिनों तक गिरता रहा, जो मई 2025 के बाद की सबसे लंबी गिरावट है।

अमेरिका में पिछले पांच महीनों में महंगाई का आंकड़ा सबसे ज्यादा रहा। इससे बाजार के निवेशकों को लगने लगा है कि फेडरल रिजर्व अपनी मौद्रिक नीति को और सख्त कर सकता है। भले ही अक्टूबर में नीतिगत दरों को स्थिर रखा जाए, लेकिन आगे चलकर दरों में और बढ़ोतरी की संभावना बढ़ गई है।

महंगाई के आंकड़े आने के बाद शुरुआत में ट्रेजरी सिक्योरिटीज की कीमतों में गिरावट आई थी, लेकिन बाद में निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ने से उन्होंने अपना ज्यादातर नुकसान कवर कर लिया, क्योंकि उन्हें बॉन्ड पर कई सालों के उच्चतम स्तर का रिटर्न (yield) मिल रहा था। वहीं, अमेरिकी डॉलर में कमजोरी आई। मध्य पूर्व में संघर्ष शुरू होने के बाद कच्चे तेल की कीमतें लगातार ऊंची बनी हुई हैं, जिससे अमेरिका में महंगाई भी बनी हुई है। इसके चलते अब यह उम्मीद की जा रही है कि फेडरल रिजर्व अपनी मौद्रिक नीति को और अधिक सख्त कर सकता है।

AI का दौर

वहीं दूसरी ओर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में भारी उछाल के बाद अब इक्विटी बाजारों पर दबाव देखने को मिल रहा है। इससे कोविड-19 महामारी के बाद से अमेरिकी बाजार में चल रहा स्थिरता का लंबा दौर अब खत्म हो गया है।

एशिया-प्रशांत क्षेत्र में कारोबार की शुरुआत के साथ ही ट्रेजरी सिक्योरिटीज (सरकारी बॉन्ड) में तेजी आई, क्योंकि इक्विटी बाजार में बिकवाली के कारण सुरक्षित निवेश विकल्पों की मांग बढ़ गई। बेंचमार्क 10-वर्षीय ट्रेजरी नोट पर यील्ड 6 बेसिस पॉइंट घटकर 5.12% रह गई, जबकि 2-वर्षीय ट्रेजरी सिक्योरिटीज पर यील्ड 7 बेसिस पॉइंट गिरकर 4.73% पर आ गई।

लगातार तीन दिनों की गिरावट के बाद सोने की कीमतों में सुधार आया और यह लगभग 4,140 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल के बेंचमार्क ‘ब्रेंट’ की कीमत 1.1% गिरकर 104.94 डॉलर प्रति बैरल हो गई, लेकिन पेट्रोलियम की लगातार ऊंची कीमतों के कारण अमेरिका में सितंबर महीने के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) में बढ़ोतरी दर्ज की गई।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Asian Market : क्रूड में उछाल, टेक शेयरों में बिकवाली से गिरे एशियाई बाजार, निक्केई 700 अंक टूटा

Asian Market :  अमेरिकी बाजारों में गिरावट के बाद 8 अक्तूबर को एशियन शेयर मार्केट में भी बिकवाली देखने को मिल रही है। क्रूड की ऊंची कीमतों ने महंगाई की आशंकाओं को हवा दी और निवेशकों ने एक बार फिर टेक्नोलॉजी शेयरों की बिकवाली की। MSCI के एशिया पैसिफिक इंडेक्स में 0.3% की गिरावट आई, जिसमें जापान और दक्षिण कोरिया सबसे आगे रहे। जापान का निक्केई 225 इंडेक्स 1.12% गिरा, जबकि व्यापक टॉपिक्स (Topix) इंडेक्स में 1.42% की गिरावट दर्ज की गई। दक्षिण कोरिया के कोस्पी (Kospi) में 0.56% की गिरावट आई और हैंग सेंग फ्यूचर्स ने हांगकांग में 0.6% की गिरावट के साथ खुलने का संकेत दिया। चीन के मुख्य बाजार छुट्टी के बाद फिर से खुले।

सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स के शेयरों में उतार-चढ़ाव देखा गया। चिप बनाने वाली इस प्रमुख कंपनी ने रिकॉर्ड मुनाफा दर्ज किया, लेकिन ब्लूमबर्ग के अनुसार, नतीजे विश्लेषकों के अनुमान से कम रहे।

वॉल स्ट्रीट ने बाजार का रुख तय किया। महंगाई की चिंताएं फिर से उभरने के कारण S&P 500 और नैस्डैक 100 दोनों में 0.2% की गिरावट आई, और फिलाडेल्फिया सेमीकंडक्टर इंडेक्स 1.2% नीचे आ गया।

भारत में, GIFT निफ्टी (जो यह बताता है कि देश का शेयर बाजार दिन के कारोबार के लिए कैसे खुलेगा ) ने गिरावट के साथ शुरुआत का संकेत दिया, जिससे 50-स्टॉक वाला इंडेक्स पूरे सप्ताह के लिए नुकसान में जा सकता है।

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें निवेशकों के लिए स्थिति को मुश्किल बना रही हैं क्योंकि वे महंगाई का दबाव बढ़ाती हैं, ठीक उसी समय जब अमेरिकी फेडरल रिजर्व अपनी नीति को सख्त कर रहा है। पिछले महीने, केंद्रीय बैंक ने 2023 के बाद पहली बार ब्याज दरों में बढ़ोतरी की थी।

फेड की सितंबर की बैठक के मिनट्स (कार्यवृत्त) से पता चला कि सभी 19 अधिकारियों ने बेंचमार्क दर की टारगेट रेंज को 3.75%-4% तक बढ़ाने का समर्थन किया, जो जुलाई 2023 के बाद पहली बढ़ोतरी थी। अमेरिकी नीति निर्माताओं ने अर्थव्यवस्था के मजबूत होने के संकेत मिलने के बाद यह कदम उठाया। अधिकारियों ने वित्तीय स्थितियों की भी समीक्षा की। कई लोगों ने कहा कि लंबी अवधि के अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड (बॉन्ड पर मिलने वाला रिटर्न) बढ़ने के बावजूद, स्थितियां अभी भी विकास के अनुकूल थीं क्योंकि शेयरों में तेजी आई थी और कॉर्पोरेट बॉन्ड स्प्रेड कम बने हुए थे। जापानी येन 158 प्रति डॉलर के आसपास स्थिर रहा और 0.1% बढ़कर 157.92 पर पहुंच गया। मीटिंग के मिनट्स से यह भी पता चला कि जुलाई के आखिर में येन को सपोर्ट करने के लिए किए गए इंटरवेंशन में अमेरिका की भूमिका फेड ने अपने फंड का इस्तेमाल करके नहीं, बल्कि US ट्रेजरी डिपार्टमेंट ने निभाई थी।

ऑफशोर युआन 6.7020 प्रति डॉलर पर लगभग स्थिर रहा।

इस बीच, जियोपॉलिटिकल रिस्क और सप्लाई में रुकावट की वजह से तेल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई। ब्रेंट क्रूड 1% बढ़कर लगभग $101.20 प्रति बैरल हो गया। यह बढ़ोतरी एक रिपोर्ट के बाद हुई जिसमें कहा गया था कि व्हाइट हाउस ने पेंटागन से ईरान के खिलाफ स्ट्राइक के ऑप्शन तैयार करने को कहा है, जिन्हें मिडटर्म इलेक्शन से पहले अंजाम दिया जा सकता है। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट 0.9% बढ़कर $89.09 प्रति बैरल हो गया।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

लेवरेज्ड ETF के लिए कोर्स करना जरूरी, दक्षिण कोरिया ने इस कारण बनाया नियम

दक्षिण कोरिया का $4.3 ट्रिलियन का स्टॉक मार्केट बहुत ही अधिक वोलेटाइल हो चुका है। सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स (Samsung Electronics) और एसके हीनिक्स (SK Hynix) से जुड़े सिंगल-स्टॉक लेवरेज्ड ईटीएफ में निवेश तेजी से घटा है। अगस्त में इनसे करीब $100 करोड़ की निकासी हो चुकी है। ऐसे कठिन समय में मॉक ट्रेडिंग कोर्स निवेशकों के डर को दूर करने का प्रभावी तरीका बनता जा रहा है। बता दें कि दक्षिण कोरिया ने लेवरेज्ड ईटीएफ में रिस्क वाली ट्रेडिंग को कम करने के लिए नियम काफी सख्त कर दिए हैं। सबसे अहम बात ये है कि लेवरेज्ड ईटीएफ खरीदने के लिए यह कोर्स अनिवार्य है। न्यूज एजेंसी ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक यह अनिवार्य नियम 19 अगस्त से लागू है।

क्या है मॉक ट्रेडिंग कोर्स में

अब निवेशकों को लेवरेज्ड ईटीएफ खरीदने से पहले पांच दिन का मॉक ट्रेडिंग कोर्स करना जरूरी होगा और हर दिन कम से कम 1 घंटे वर्चुअल मनी से ट्रेडिंग करनी होगी। इस कोर्स में विंडोज पीसी पर एक प्रोग्राम डाउनलोड करना जरूरी है, जिससे कई रिटेल इंवेस्टर्स इसे काफी झंझट वाला मान रहे हैं। यह ऐप सिर्फ पीसी पर ही डाउनलोड होगा और कोरियन एक्सचेंज का कहना है कि फिलहाल मोबाइल-बेस्ड प्लेटफॉर्म शुरू करने की कोई योजना नहीं है। सरकार का उद्देश्य खुदरा निवेशकों को हाई-रिस्क लेवरेज्ड प्रोडक्ट्स से दूर रखना है, और फिलहाल इन नियमों का असर साफ दिखाई दे रहा है।

क्या है Leveraged ETF की स्थिति

दक्षिण कोरियाई बाजार में लेवरेज्ड ईटीएफ का कुल AUM (एसेट अंडर मैनेजमेंट) जून के पीक $1140 करोड़ से घटकर 27 अगस्त तक करीब $500 करोड़ तक आ गया। सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स और हीनिक्स जैसे टेक स्टॉक्स में गिरावट ने मार्केट में कोहराम मचा दिया। अब सवाल उठता है कि इनमें इतनी तेज गिरावट क्यों आई तो इसका जवाब ये है कि सरकार के सख्त नियमों के साथ-साथ एआई सेक्टर में अधिक खर्च और उससे कमाई की संभावनाओं को लेकर चिंता ने भी टेक स्टॉक्स पर भी दबाव बनाया।

लेवरेज्ड ईटीएफ की स्थिति तो अब ऐसी है कि उनकी ट्रेडिंग वैल्यू जून के रिकॉर्ड हाई लेवल से सिर्फ 4% रह गई है तो इनमें पहली बार किसी महीने में निवेश से अधिक निकासी के आसार दिखने लगे हैं। इन ईटीएफ में ट्रेडिंग कम होने से वोलैटिलिटी कम हुई है। कोस्पी वोलैटिलिटी गॉज जून के 97 से गिरकर चार महीने के निचले स्तर लगभग 50 पर आ गया। दक्षिण कोरिया का इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्स इस साल अभी भी 61% ऊपर है, लेकिन अपने दो महीने पुराने रिकॉर्ड हाई से 25% नीचे है।

Tax-Saving Mutual Fund: टैक्स बचाने वाला इकलौता म्यूचुअल फंड प्लान, तो सबसे कम लॉक-इन वाला ऑप्शन भी

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Nvidia के धमाकेदार रिजल्ट, बदला निवेशकों का सवाल, भारतीय आईटी कंपनियों के लिए ये है मतलब

Nvidia Q2 Result and IT Stocks: दुनिया की सबसे बड़ी चिप कंपनियों में शुमार एनविडिया के धमाकेदार तिमाही नतीजों ने ग्लोबल एआई ट्रेड को एक और मजबूती दी है। यह ऐसे समय में आया है जब निवेशक सवाल उठाने लगे थे कि एआई शेयरों की तेज रफ्तार आगे भी जारी रह पाएगी या नहीं। चिप कंपनी एनवीडिया ने रेवेन्यू, कमाई और गाइडेंस को लेकर बाजार के अनुमान को पछाड़ दिया। वहीं कंपनी का डेटा-सेंटर बिजनेस भी शानदार स्पीड से बढ़ता रहा। इससे एशियाई बाजारों में सेंटीमेंट मजबूत हुआ और शुरुआती कारोबार में MSCI का एशिया पैसेफिक इंडेक्स और दक्षिण कोरिया का टेक-हैवी इंडेक्स कोस्पी उछल पड़ा। हालांकि निवेशकों के लिए बड़ा सवाल ये है कि एआई पर खर्च और कमाई में बढ़ोतरी की रफ्तार इतनी मजबूत है या नहीं कि पूरे एआई इकोसिस्टम में मौजूदा ऊंचे वैल्यूएशन को सही ठहरा सके।

Nvidia ने दूर की AI की मांग से जुड़ी चिंता

एनविडिया के लिए इस वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही यानी 26 जुलाई को समाप्त होने वाली तिमाही में इसका रेवेन्यू सालाना आधार पर दोगुने से अधिक बढ़कर $9622 करोड़ पर पहुंच गया जोकि एनालिस्ट्स के $9217 करोड़ के अनुमान से अधिक रहा। कंपनी का EPS भी $2.10 के अनुमान की तुलना में $2.22 पर रहा। सबसे मजबूत परफॉरमेंस तो कंपनी के डेटा-सेंटर बिजनेस का रहा, जिसका रेवेन्यू सालाना आधार पर 117% बढ़कर $8900 करोड़ हो गया, जबकि अनुमान $8633 करोड़ का था।

अब आगे की बात करें तो करीब 2% के कम या ज्यादा के साथ इस तिमाही में कंपनी को करीब $10.8 करोड़ के रेवेन्यू की उम्मीद है। साथ ही कंपनी ने अगले वित्त वर्ष 2028 में लगभग 70% रेवेन्यू ग्रोथ की उम्मीद जताई है। इससे AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर लगातार मजबूत खर्च की उम्मीद बनी हुई है।

रेमंड जेम्स इंवेस्टमेंट के चीफ मार्केट स्ट्रैटेजिस्ट मैट ओर्टोन (Matt Orton) के मुताबिक इन आंकड़ों से AI ट्रेड के बने रहने के संकेत मिल रहे हैं। उनका कहना है कि इससे चिप की मजबूत कंज्यूमर डिमांड, एआई को तेजी से अपनाने और पूरी सप्लाई चेन में लगातार बढ़ते ऑर्डर बैकलॉग का संकेत मिल रहा है। यह उन चिप कंपनियों के लिए पॉजिटिव है, जिनके शेयरों में हाल में तेज गिरावट आई थी।

लेकिन बनी हुई है वैल्यूएशन की चिंता

धमाकेदार कारोबार नतीजे से एआई की मांग को लेकर कुछ चिंता जरूर कम हुई है लेकिन हाई वैल्यूएशन को लेकर चिंता अभी खत्म नहीं हुई है। मार्केट एक्सपर्ट अजय बग्गा का कहना है कि एनविडिया के ऐसे नतीजे एक-दो साल पहले आते शेयर रॉकेट बन जाते लेकिन इस बार मार्केट का रिस्पांस सीमित रहा। नतीजे के बाद इसके शेयरों में हल्की तेजी आई। हालांकि बाद में कंपनी के सीईओ जेनसेन हुआंग (Jensen Huang) के आउटलुक और एक नए AWS सौदे के बाद शेयर तेजी से ऊपर चढ़े।

अजय का कहना है कि अब निवेशकों का सवाल बदला है और अब वे एआई के डिमांड की बजाय यह पूछ रहे हैं कि AI शेयरों की कीमतों में पहले से कितनी ग्रोथ शामिल हो चुकी है। ट्रे़डिंगडॉटकॉम के सीईओ Peter McGuire का भी कहना है कि कंपनी पिछले दो वर्षों से लगातार कमाई के अनुमान को पीछे छोड़ रही है, लेकिन साल 2024 के आखिरी से शेयर पर इसका असर पहले जैसा मजबूत नहीं दिख रहा। हालांकि पीटर के मुताबिक 2023-24 के AI तेजी की तुलना में वैल्यूएशन अब थोड़े नीचे आए हैं।

AI Stocks और Indian IT Stocks के लिए क्या है मतलब

एनविडिया के नतीजे ऐसे समय आए हैं जब कई वैश्विक चिप कंपनियों के शेयर हाल ही में धड़ाम हो गए थे। अमेरिका में माइक्रोन टेक (Micron Tech) और सैनडिस्क (SanDisk) जैसी चिप कंपनियों के शेयर दो महीनों में करीब 28% तक टूट चुके हैं तो दक्षिण कोरिया की सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स (Samsung Electronics) और एसके हीनिक्स में भी लगभग 25-30% की गिरावट आई। एलारा की एक रिपोर्ट के मुताबिक ताइवान-फोकस्ड फंड से इस साल पहली बार लगातार दो हफ्तों तक पैसा निकला। वहीं दक्षिण कोरिया से $75.8 करोड़ की निकासी हुई, जो तीन महीनों में सबसे अधिक रही। ऐसे में एनविडिया के धमाकेदार नतीजे काफी अहम हैं और संकेत मिल रहा कि चिप स्टॉक्स की कमजोरी एआई की मांग कम होने का संकेत नहीं है।

भारतीय आईटी कंपनियों पर असर की बात करें तो इसका रुझान मिला-जुला है। चिप स्टॉक्स की गिरावट से भारतीय आईटी स्टॉक्स को फायदा मिला क्योंकि वैश्विक निवेशक महंगे हार्डवेयर शेयरों का विकल्प खोज रहे थे। एक तरफ चिप स्टॉक्स में तेज गिरावट आई तो दो महीने में निफ्टी आईटी करीब 20% चढ़ गया। इसे बेहतर वैल्यूएशन और मजबूत घरेलू लिक्विडिटी से भी सपोर्ट मिला। अब आगे की बात करें तो मार्केट एक्सपर्ट सुनील सुब्रमणियन के मुताबिक एनविडिया के धमाकेदार नतीजे से भारतीय आईटी स्टॉक्स को झटका लग सकता है क्योंकि एक बार फिर चिप कंपनियो में निवेश बढ़ सकता है।

Vedanta Resource ने दी सफाई, लाल हो गए वेदांता और वेदांता एलुमिनियम के शेयर

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Asian Market Today: एशिया बाजारों में दबाव, वॉल स्ट्रीट में बिकवाली का दिखा असर, निक्केई और कोस्पी में गिरावट

Asian Market Today: शुक्रवार, 21 अगस्त को एशियाई शेयरों में गिरावट आई। वॉल स्ट्रीट के बेंचमार्क इंडेक्स गुरुवार को बॉन्ड यील्ड के निचले स्तर से वापस ऊपर आने के कारण काफी नीचे बंद हुए थे। MSCI का एशिया-पैसिफिक इक्विटी गेज 0.2% गिर गया। कोस्पी (Kospi) ने इस ट्रेंड के उलट 0.87% की बढ़त दर्ज की, जबकि जापान का निक्केई 225 (Nikkei 225) 0.90% और टोपिक्स (Topix) 0.31% नीचे आ गया। हैंग सेंग (Hang Seng) फ्यूचर्स में कोई खास बदलाव नहीं हुआ।

S&P 500 इंडेक्स में रात भर में 0.9% की गिरावट आई, जिसका मुख्य कारण वॉलमार्ट (Walmart) था। कमजोर बिक्री के आंकड़ों के बाद इसमें 2022 के बाद की सबसे बड़ी गिरावट देखी गई। नैस्डैक 100 (Nasdaq 100) में 0.7% की गिरावट आई, जो लगातार पांचवें दिन की गिरावट थी।

US ट्रेजरी में शुरुआती तेजी के बाद एशियाई बॉन्ड गिरे और अमेरिकी डॉलर कमजोर बना रहा। निवेशकों के मन में यह सवाल था कि क्या लंबे समय के कर्ज की अमेरिकी बायबैक (buyback) प्रक्रिया से उधार लेने की लागत में केवल कुछ समय के लिए ही राहत मिलेगी।

ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में बॉन्ड की शुरुआत गिरावट के साथ हुई, क्योंकि गुरुवार को US 30-वर्षीय यील्ड में बढ़ोतरी हुई थी, भले ही US ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने भविष्य में बड़े बायबैक और एक नए फिस्कल प्लान का संकेत दिया था।

30-वर्षीय यील्ड छह बेसिस पॉइंट बढ़कर 5.25% हो गई, जिससे ट्रेजरी के बायबैक बढ़ाने के अचानक फैसले से आई गिरावट का असर काफी हद तक खत्म हो गया।

जापानी येन स्थिर रहा क्योंकि देश का मुख्य महंगाई सूचकांक लगातार दूसरे महीने बढ़ा, जिससे बैंक ऑफ जापान द्वारा जल्द ही ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना बनी रही। बाजार अब सितंबर में संभावित कदम पर नजर रखे हुए हैं। येन 158.96 प्रति डॉलर के आसपास कारोबार कर रहा था, जबकि पिछले सत्र में यह 159 के स्तर को पार कर गया था।

ऑफशोर युआन 6.7238 प्रति डॉलर पर लगभग स्थिर रहा।

टेक्नोलॉजी शेयरों में सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स (Samsung Electronics) पर ध्यान केंद्रित रहा। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी शुक्रवार को 110 ट्रिलियन वॉन ($79 बिलियन) तक का शेयरधारक रिटर्न पैकेज पेश करने वाली थी। इस बीच, ईरान के खिलाफ़ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की “आर्थिक युद्ध” की धमकी के कारण पांच दिनों तक कीमतों में आई तेज़ी के बाद तेल की कीमतें कुछ कम हुईं। ट्रंप ने कहा था कि तेहरान ने एक डील को ठुकरा दिया है।

ब्रेंट क्रूड 0.7% गिरकर $93.10 प्रति बैरल पर आ गया, जबकि गुरुवार को कारोबार के दौरान यह $94 प्रति बैरल के करीब पहुंच गया था। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट 0.7% गिरकर $86.19 प्रति बैरल पर आ गया।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Samsung Galaxy इवेंट की डेट कन्फर्म, इस दिन Galaxy S26 FE होगा लॉन्च, जानें फीचर्स

दक्षिण कोरिया की दिग्गज कंपनी Samsung ने Galaxy S26 FE को लॉन्च करने के लिए ‘Galaxy Event’ की घोषणा की है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, यह इवेंट 27 अगस्त, 2026 को आयोजित किया जाएगा। इसके लिए वर्चुअल इवेंट भारतीय मानक समय (IST) के अनुसार शाम 5:30 बजे शुरू होगा और इसे YouTube पर लाइव स्ट्रीम किया जाएगा।

Samsung की आधिकारिक घोषणा में कहा गया है, ’27 अगस्त को सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स ‘Galaxy Event August 2026′ आयोजित करेगा, जिसमें Galaxy S26 परिवार में सबसे नया स्मार्टफोन पेश किया जाएगा। इसे खास तौर पर उन लोगों के लिए डिजाइन किया गया है जो अपने लिए सबसे जरूरी चीजों को महत्व देते हैं। इसमें कैमरा से लेकर AI तक के मुख्य Galaxy S26 अनुभव और लेटेस्ट One UI शामिल हैं।’

इस इवेंट की एक बड़ी खासियत Samsung Galaxy S26 FE का लॉन्च हो सकता है। ऐसी भी चर्चा है कि कंपनी Galaxy Tab S12 को भी बाजार में उतार सकती है। इसी सिलसिले में, आइए जानते हैं Samsung के आने वाले इस फोन के स्पेसिफिकेशन्स, कैमरा और दूसरे खास फीचर्स के बारे में।

Samsung Galaxy S26 FE: कैमरा और स्पेसिफिकेशन्स

कैमरे की बात करें तो Samsung Galaxy S26 FE में ट्रिपल रियर कैमरा सेटअप मिलने की उम्मीद है। इसमें OIS (ऑप्टिकल इमेज स्टेबिलाइजेशन) के साथ 50MP का प्राइमरी कैमरा, 12MP का अल्ट्रा-वाइड एंगल कैमरा और 8MP का टेलीफोटो कैमरा दिया जा सकता है।

सेल्फी और वीडियो कॉल के लिए फोन में 12MP का Sony IMX825 सेंसर मिलने की बात कही जा रही है। हालांकि, ये जानकारी फिलहाल सामने आई रिपोर्ट्स और लीक्स पर आधारित है।

Samsung Galaxy S26 FE में 120Hz रिफ्रेश रेट वाला 6.7-इंच का FHD+ डिस्प्ले हो सकता है। वहीं, इस डिवाइस में Samsung Exynos 2500 प्रोसेसर के साथ 12GB RAM और बेस वेरिएंट में 256GB इंटरनल स्टोरेज मिल सकता है। सॉफ्टवेयर की बात करें तो यह फोन Android 17 ऑपरेटिंग सिस्टम पर आधारित होगा, जिसमें ऊपर One UI 9 स्किन होगी। अफवाहों के अनुसार, इस फोन में 4,900mAh की बैटरी होगी, जो 45W फास्ट चार्जिंग को सपोर्ट करेगी।

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Kospi Outlook: हाहाकार के बाद अब क्या है दक्षिण कोरियाई बाजार का हाल, कब तक बनेगा विदेशी निवेशकों की पसंद

Kospi Outlook: दक्षिण कोरिया के शेयर मार्केट की भारी उथल-पुथल खत्म होने की संभावना जताई जाने लगी है। रिकॉर्ड बिकवाली के बाद लेवरेज्ड पोजीशन खत्म हो गईं और नियामकीय प्रतिबंधों के चलते तगड़े रिस्क वाले कुछ प्रोडक्ट्स की ट्रेडिंग में भारी गिरावट आई है। बता दें कि पिछले कारोबारी हफ्ते कोस्पी में ऐसी गिरावट आई कि यह टूटकर जून के रिकॉर्ड हाई से गिरकर दो महीने के निचले स्तर पर आ गया। यह जून के हाई से करीब 40% नीचे आ चुका है।

कोस्पी की यह स्थिरता मार्केट में हाहाकार के चलते कुछ पोजिशन को जबरन बंद करने के चलते आई, जिसके बंद होने से बकाया मार्जिन डेट को कम करने में मदद मिली। इसके अलावा कोस्पी को लेवरेज्ड ईटीएफ पर सख्त नियमों के चलते दिग्गज कंपनियों सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी और एसके हाइनिक्स से जुड़े प्रोडक्ट्स की ट्रेडिंग और एसेट्स में गिरावट से भी सपोर्ट मिला। इससे संकेत मिल रहा है कि कोरियाई स्टॉक मार्केट में उठा-पटक का दौर अब काफी हद तक गुजर चुका है। वैश्विक ब्रोकरेज फर्म मॉर्गन स्टैनले का अनुमान है कि डीलेवरेजिंग प्रोसेस अब आधे से अधिक पूरा हो चुका है।

लेकिन विदेशी निवेशक अभी भी नहीं कर रहे ताबड़तोड़ निवेश

कोस्पी में भारी उठा-पटक के चलते इसे मापने वाला इंडेक्स जून में 96.9 के रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गया था जबकि साल 2025 के आखिरी में यह सिर्फ 28.9 पर था। मार्केट में ऐसी हाहाकार मची थी कि मार्केट के 8% गिरने पर एक्सचेंज का 20 मिनट तक ट्रेडिंग रोकने वाला फीचर पिछले महीने रिकॉर्ड चार बार एक्टिव हुआ था। इसके अलावा लगभग आधे ट्रेडिंग दिनों में कोस्पी में कम से कम 5% की तेजी या गिरावट आई। 31 जुलाई को तो कोस्पी में एक ही दिन में रिकॉर्ड 18% की तेजी आई।

अब कोस्पी में स्थिरता आती दिख रही है लेकिन विदेशी निवेशक अभी भी ताबड़तोड़ निवेश नहीं कर रहे हैं। सिंगापुर में एबेरडीन एशियन इनकम फंड के सीनियर इंवेस्टमेंट डायरेक्टर Isaac Thong का कहना कि विदेशी निवेशकों का रुझान अब पॉजिटिव तो हो रहा है, लेकिन वे अभी पूरी तरह सहज नहीं हैं क्योंकि वोलैटिलिटी अभी भी काफी अधिक है। उनका कहना है अगर रिटर्न की गुंजाइश इतनी अधिक हो जाए कि रिस्क लेने को वाजिब बना लसके तो मार्केट को लेकर नजरिया और पॉजिटिव हो सकता है।

शेयर मार्केट की हाहाकार और सख्त नियमों के चलते कई रिटेल इंवेस्टर्स को अपनी पोजिशंस बंद करनी पड़ी। कोरिया फाइनेंशियल इंवेस्टमेंट एसोसिएशन के आंकड़ों के अनुसार खुदरा निवेशकों के खातों से जून में करीब 1 लाख करोड़ वान (करीब ₹6760 करोड़) और जुलाई में 99.3 हजार करोड़ वान (करीब $6710 करोड़) की पोजिशन जबरन बंद कर दी हई। ये इस साल के दो सबसे बड़े मंथली आंकड़े थे। अब स्थिति में थोड़ा सुधार है और शेयरों की खरीदारी के लिए इस्तेमाल होने वाले मार्जिन लोन का आउटस्टैंडिंग बैलेंस भी 4 अगस्त तक घटकर इस साल के रिकॉर्ड निचले स्तर 27.4 लाख करोड़ वान (करीब ₹1.85 लाख करोड़) रह गया।

अब सवाल उठता है कि क्या खुदरा निवेशकों की जगह विदेशी निवेशक लेंगे। इसे लेकर दुबई की अर्केवियम कैपिटल (Arkevium Capital) के सीआईओ Maxence Visseau का मानना है कि ऐसा हो सकता है लेकिन इसके लिए उन्हें भरोसा होना चाहिए मार्केट में प्राइस डिस्कवरी मैकेनिज्म यानी सही कीमत तय होने की प्रक्रिया फिर से सामान्य तरीके से काम कर रही है।

किस लेवल तक चढ़ सकता है Kospi?

ताबड़तोड़ बिकवाली के बाद अब कोरियाई मार्केट कुछ मायने में सस्ता दिख रहा है। कोस्पी फिलहाल अपने 12 महीने के फारवर्ड अर्निंग्स के मुकाबले 5.1 गुना के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया है लेकिन विदेशी निवेशकों को यह आकर्षित नहीं कर पा रहा है।

सिंगापुर में टेम्पलटन ग्लोबल इन्वेस्टमेंट्स की फंड मैनेजर यिपिंग लियाओ का कहना है कि गिरावट के बाद सैमसंग और हाइनिक्स काफी सस्ते हो चुके हैं और इनके मुनाफे का आउटलुक भी मजबूत है लेकिन भारी उतार-चढ़ाव के बाद निवेशक काफी सतर्क हो चुके हैं। उनका कहना है कि भारी उठा-पटक की वजह से मार्केट में दोबारा ताबड़तोड़ खरीदारी का माहौल नहीं बन रहा है बल्कि धीरे-धीरे खरीदारी हो रही है।

ग्लोबल फंड्स ने कोरियाई शेयरों से अपनी निकासी धीमी कर दी है, लेकिन वे अभी भी बेच रहे हैं। स्टॉक एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार जून में रिकॉर्ड $30 अरब निकालने के बाद विदेशी निवेशकों ने जुलाई में $6.2 अरब और अगस्त में अब तक $4.3 अरब के शेयर बेचे हैं।

हालांकि कुछ एनालिस्ट्स बुलिश हैं। गोल्डमैन सैक्स ग्रुप ने इस हफ्ते कोस्पी के लिए फिर से 12 महीने का टारगेट 12,000 फिक्स किया है, जो शुक्रवार की क्लोजिंग से लगभग 90% अधिक है। पिछले हफ्ते ब्लूमबर्ग टेलीविजन पर एक इंटरव्यू में इन्वेस्टमेंट बैंक के चीफ एशिया पैसिफिक इक्विटी स्ट्रैटेजिस्ट टिमोथी मो ने कहा था कि अगर उतार-चढ़ाव कम हो जाता है, तो फंडामेंटल्स फिर से असरदार हो जाएंगी।

मैथ्यूज इंटरनेशनल कैपिटल मैनेजमेंट के चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर और पोर्टफोलियो मैनेजर शॉन टेलर का कहना है कि फंडामेंटल्स बहुत मजबूत हैं और हाल के नतीजे से ये साबित भी होता है। हालांकि शॉन का कहना है कि उनका मार्केट में लेवरेज और पोजिशनिंग बहुत अधिक बढ़ गई थी, तो अभी एक और महीने तक इंतजार करना पड़ सकता है।

दक्षिण कोरिया का जलवा, अमेरिका से जापान तक ट्रेडर्स की वॉचलिस्ट में, पहली बार देख रहे Kospi का चार्ट

Risks of MTF: ₹12000 करोड़ की सीख, दक्षिण कोरिया में हाहाकार के पांच सबक

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Gift Nifty Indicator: ग्लोबल बाजारों में गिरावट के बीच क्या हरे निशान में खुलेंगे भारतीय बाजार, जानें गिफ्ट निफ्टी से क्या मिल रहा है संकेत

Gift Nifty Indicator:  कच्चे तेल की कीमतों में नरमी, US-ईरान शांति समझौते की दिशा में प्रगति की उम्मीदें और घरेलू कंपनियों की अच्छी कमाई का माहौल भारतीय इक्विटी को सहारा दे सकता है। हालांकि एशियाई टेक्नोलॉजी शेयरों में कमजोरी का असर क्षेत्रीय बाजारों पर पड़ रहा है। यहीं कारण है कि 6 अगस्त को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी के बढ़त के साथ खुलने की उम्मीद है। ग्लोबल संकेतों के मिले-जुले होने के बावजूद GIFT निफ्टी पॉजिटिव शुरुआत का संकेत दे रहा है।

सुबह लगभग 7:45 बजे GIFT निफ्टी 58.5 अंक या 0.24 फीसदी बढ़कर 24,693 पर ट्रेड कर रहा था, जो संकेत देता है कि निफ्टी 50 बुधवार के 24,624.65 के क्लोजिंग लेवल से ऊपर खुल सकता है। यह पॉजिटिव संकेत भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स के बुधवार के सेशन में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की मॉनेटरी पॉलिसी की घोषणा के बाद मजबूती के साथ बंद होने के बाद आया है। सेंसेक्स 152.05 अंक या 0.19 फीसदी बढ़कर 78,581.00 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 9.75 अंक या 0.04 फीसदी बढ़कर 24,624.65 पर पहुंचा और क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) के बाद 24,600 के स्तर से ऊपर बंद होने में कामयाब रहा।

एशियाई बाजारों में गिरावट

बुधवार की जोरदार तेजी के बाद एशियाई इक्विटी में सुस्ती देखी गई, जिसमें वॉल स्ट्रीट में रात भर की कमजोरी के बाद टेक्नोलॉजी शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट आई। जापान को छोड़कर एशिया-पैसिफिक शेयरों के MSCI के सबसे बड़े इंडेक्स में 0.69 प्रतिशत की गिरावट आई। जापान का निक्केई 225 1.57 प्रतिशत गिरा, जबकि दक्षिण कोरिया का कोस्पी 3.64 फीसदी नीचे आया क्योंकि बड़ी चिप बनाने वाली कंपनियों पर दबाव था। सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स में 2.44 फीसदी की गिरावट आई, जबकि SK हाइनिक्स लगभग 7 फीसदी लुढ़क गया।

US बाजार रात भर मिले-जुले रुख के साथ बंद हुए, जिसमें डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज एक और रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया। ईरान के साथ संभावित शांति समझौते की दिशा में प्रगति को लेकर उम्मीद टेक्नोलॉजी शेयरों में कमजोरी पर भारी पड़ी। डाउ में 0.49 फीसदी की बढ़त हुई, जबकि S&P 500 में 0.17 फीसदी और नैस्डैक कंपोजिट में 0.83 प्रतिशत की गिरावट आई, क्योंकि तिमाही नतीजों के बाद स्पेसएक्स और एडवांस्ड माइक्रो डिवाइसेस के शेयरों में कमजोरी देखी गई।

तेल की कीमतों में नरमी

कच्चे तेल की कीमतों में थोड़ी गिरावट आई क्योंकि निवेशक यह आकलन कर रहे थे कि क्या ईरान-ओमान बातचीत में हुई प्रगति से अंततः अमेरिका-ईरान के बीच व्यापक शांति समझौते और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के फिर से खुलने का रास्ता साफ हो सकता है। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 0.18 प्रतिशत गिरकर 79.31 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड 0.35 प्रतिशत गिरकर 74.96 डॉलर पर आ गया।

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के पॉलिसी फैसले के बाद, अब निवेशकों का ध्यान अप्रैल-जून तिमाही के जारी अर्निंग्स सीजन (कंपनियों के नतीजों के दौर) पर लौटने की उम्मीद है। कंपनियों के नतीजे और मैनेजमेंट की कमेंट्री स्टॉक-स्पेसिफिक हलचल के मुख्य कारण बने रहेंगे, जबकि मध्य पूर्व से जुड़ी वैश्विक घटनाएं और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव व्यापक बाजार धारणा को प्रभावित करते रहेंगे।

विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने बुधवार को लगातार छह सत्रों से जारी खरीदारी का सिलसिला तोड़ दिया और वे नेट सेलर (शुद्ध विक्रेता) बन गए, तथा 943 करोड़ रुपये के भारतीय शेयर बेचे। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने 2,883 करोड़ रुपये के शेयर खरीदकर बाजार को सहारा दिया, जिससे विदेशी बिकवाली के असर को कम करने में मदद मिली।

Stock Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी दे रहा संकेत, फ्लैट हो सकती है भारतीय बाजार की शुरुआत 

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Risks of MTF: ₹12000 करोड़ की सीख, दक्षिण कोरिया में हाहाकार के पांच सबक

Risks of MTF: मान लीजिए कि स्टॉक मार्केट में MTF (मार्जिन ट्रे़डिंग फैसिलिटी) चुनने वाले हर 30 में से एक को एक ही हफ्ते में मैसेज आए, ‘मार्जिन काल, फंड डालिए, नहीं तो हम बेच देंगे’, तो क्या होगा, हड़कंप मच जाएगा न। वैसे यह कल्पना नहीं रह गई और पिछले महीने जुलाई में दक्षिण कोरिया में ऐसा ही हुआ। अब सवाल ये है कि क्या भारत में भी ऐसा कुछ हो सकता है। सैमको सिक्योरिटीज के सीईओ और फाउंडर जिमीत मोदी का मानना है कि रिस्क तो बढ़ा है। उनका कहना है कि एनालिसिस में गलती हुई तो मार्केट माफ कर सकता है लेकिन अत्यधिक लेवरेज की गलती शायद माफ न हो। उनका कहना है कि दक्षिण कोरिया के निवेशकों ने यह सबक सीखने के लिए सिर्फ चार हफ्ते में करीब ₹12,000 करोड़ गंवा दिए और भारतीय निवेशकों के पास अभी भी यह मौका है कि वे बिना नुकसान उठाए इस अनुभव से सीख लें।

क्या है मामला

शुरुआत में सब शानदार चल रहा था। चिप से जुड़े स्टॉक में तेजी के चलते दक्षिण कोरिया का कोस्पी (KOSPI) इंडेक्स उछलकर जून में रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गया। साथ ही कोरिया का एमटीएफ यानी मार्जिन ट्रेडिंग फैसिलिटी का लोन बुक रिकॉर्ड 38.6 ट्रिलियन वान (KRW) यानी ₹2.56 लाख करोड़ पर पहुंच गया जोकि एक साल में करीब डबल हो गया। खास बात ये है कि इस उधार लिए गए पैसे का बड़ा हिस्सा सिर्फ दो शेयरों, सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स (Samsung Electronics) और एसके हाइनिक्स (SK Hynix), में लगाया गया था जिनका कोस्पी इंडेक्स में आधे से अधिक हिस्सा है।

फिर बाजार ने गोता लगाया और गिरावट इतनी तेज रही कि कोस्पी जून महीने के रिकॉर्ड हाई से करीब 40% टूट गया। इसके बाद करीब 12 लाख रिटेल अकाउंट्स को मार्जिन कॉल मिले और इनमें से 3.20 लाख-3.60 लाख निवेशकों के शेयर जबरन बेच दिए गए। जबरन बिकवाली से शेयरों की कीमतें और नीचे आईं, जिससे और अधिक निवेशकों को मार्जिन कॉल मिले। इससे खुदरा निवेशकों को करीब 2.15 ट्रिलियन वान (KRW) यानी करीब ₹12 हजार करोड़ की दौलत सिर्फ एक महीने में खत्म हो गई। सबसे अधिक नुकसान 20 से 30 साल की उम्र के निवेशकों को हुआ, जिनकी हिस्सेदारी इस पूरे नुकसान में 62% रही।

भारत के लिए क्या है चेतावनी

भारतीय मार्केट में एमटीएफ बुक FY23 में लगभग ₹25,000 करोड़ से बढ़कर अब ₹1.44 लाख करोड़ से अधिक हो गया है यानी तीन साल में लगभग छह गुना बढ़ोतरी। इस पर सेबी की नजर तो है और सेबी ने एमटीएफ पर एक्सपोजर लिमिट और रिस्क से जुड़े नियम का प्रस्ताव पेश किया है, जिन्होंने हमें कोरिया जैसी बुरी स्थितियों से पहले ही बचा लिया है। हालांकि ध्यान दें कि रेगुलेशन सिर्फ नियम बनाता है, सही फैसला लेने की समझ नहीं देता और वह जिम्मेदारी निवेशकों की खुद की है। यहां ऐसे ही कुछ रिस्क के बारे में बताया जा रहा है, जिन पर ध्यान देना चाहिए-

कम लिक्विडिटी वाले शेयरों के लिए भी लेवरेज: ब्रोकर करीब 1,500 शेयरों पर एमटीएफ की फैसिलिटी दे रहे हैं। फिलहाल इंडस्ट्री के एमटीएफ बुक का एक बड़ा हिस्सा एफएंडओ सेगमेंट से बाहर के ऐसे स्मॉल-कैप और मिड-कैप शेयरों में है जो लगातार लोअर सर्किट में जा सकते हैं, जिससे अचानक मुश्किल आने पर निकलने का कोई रास्ता नहीं बचता। कोरिया के निवेशकों के शेयर कम से कम किसी कीमत पर तो बिके थे, लोअर सर्किट पर तो शेयर बिकेगा भी नहीं।

नया सिस्टम: एटीएफ का चलन सिर्फ 3-4 साल में तेजी से बढ़ा है। कोरोना महामारी के बाद अभी यहां कोस्पी जैसी स्थिति आई नहीं है जिसका मतलब है कि ₹1.44 लाख करोड़ के लेवरेज ने असली आंधी का सामना नहीं किया है।

युवाओं की अधिक संख्या: एटीएफ का इस्तेमाल कोरियाई मार्केट की तरह अधिकतर युवा ही कर रहे हैं जिन्होंने अधिकतर सिर्फ चढ़ता हुआ मार्केट ही देखा है।

पांच बातों का रखें ख्याल

लेवरेज लोन है, स्ट्रैटेजी नहीं: शेयर परफॉर्म करे या नहीं, सालाना 10-15% की दर से ब्याज देना पड़ता है। 50% मार्जिन पर खरीदे गए स्टॉक से फंडिंग कॉस्ट निकालने के लिए ही सालाना 5% से ज़्यादा रिटर्न मिलना ज़रूरी है। उधार के पैसे से कोई खराब निवेश नहीं बन जाता, बल्कि और खराब हो जाता है।

कुछ ही स्टॉक्स में न लें लवरेज: दक्षिण कोरिया की सबसे बड़ी गलती केवल लीवरेज लेना नहीं था, बल्कि सिर्फ दो शेयरों में भारी निवेश करना था। अगर आपके भी एमटीएफ वाले अधिकतर निवेश सिर्फ दो-तीन स्टॉक्स में हैं, जिनमें बाकी लोग भी पैसे डाल रहे हैं तो गिरावट आने पर सभी लोग एक साथ बेचने की कोशिश करेंगे और ऐसी स्थिति में नुकसान अधिक तेजी से बढ़ सकता है।

मार्जिन कॉल आ सकती है खराब समय में: अच्छी कंपनी में भी एमटीएफ निवेश से घाटा हो सकता है। इसकी वजह ये है कि मार्जिन कॉल हमेशा सबसे खराब समय में आती है। लोअर सर्किट में ब्रोकर को भी खरीदार नहीं मिलेगा और मार्केट अगर अनुमान से अधिक समय तक नीचे आया और गिरवी रखा पैसा यानी कोलैटरल उतने समय के लिए पर्याप्त न हो तो दिक्कत हो सकती है।

अधिकतम मुनाफा नहीं, बल्कि लंबे समय तक टिके रहने की योजना: हर मार्केट में कभी न कभी 25% से 30% की गिरावट आती ही है। दक्षिण कोरिया में यह गिरावट सिर्फ चार सप्ताह में आ गई। ऐसे में एमटीएफ का इस्तेमाल से पहले खुद से एक प्रश्न पूछे कि क्या अगर अगले महीने मेरा शेयर 30% गिर जाए, तो क्या मैं बिना किसी अन्य निवेश को बेचे इस स्थिति से निकल सकता हूं? अगर इसका जवाब ना में है तो आपका निवेश बहुत बड़ा है।

खुद से जरूर पूछें एक सवाल: अगर आप किसी शेयर को बिना उधार लिए हुए पैसे के साथ लॉन्ग टर्म तक नहीं रख सकते, तो इसे उधार लेकर भी नहीं खरीदना चाहिए क्योंकि लेवरेज सिर्फ उस भरोसे को बढ़ाना चाहिए जो आपके पास पहले से है। यह उस भरोसे की जगह नहीं ले सकता जो आपके पास है ही नहीं।

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