खेती से AI तक… बिजनेस आइडिया से जीतें डेढ़ लाख रुपये! जानिए IIT कानपुर के मेंटरशिप वाले चैलेंज में कैसे करें रजिस्ट्रेशन

आपके पास कोई ऐसा आइडिया है, जो लोगों की जिंदगी आसान बना सकता है या किसी बड़ी समस्या का समाधान कर सकता है, तो उसे हकीकत में बदलने का मौका है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर युवाओं को उनके नए विचारों को आगे बढ़ाने में मदद करेगा। इसके लिए यूथ एंटरप्रेन्योर्स चैलेंज (YEC) 2027 के तहत आवेदन मांगे गए हैं। इस राष्ट्रीय प्रतियोगिता में चुने जाने वाले युवाओं को विशेषज्ञों का मार्गदर्शन मिलेगा। इस प्रतियोगिता में बेहतरीन प्रदर्शन करने वाली टीमों को डेढ़ लाख रुपये तक का नकद पुरस्कार भी मिलेगा। आवेदन करने की अंतिम तिथि 22 अक्टूबर 2026 है। यह पहल भारत सरकार के युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के अंतर्गत विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग 2027 का हिस्सा है। इसमें आईआईटी कानपुर नॉलेज पार्टनर की भूमिका निभा रहा है।

आइडिया को कारोबार में बदलने में मिलेगी मदद

इस प्रतियोगिता का उद्देश्य ऐसे युवाओं की पहचान करना है, जो तकनीक और नए प्रयोगों के जरिए समाज की समस्याओं का समाधान निकालना चाहते हैं। कई बार युवाओं के पास अच्छा विचार होता है, लेकिन उसे आगे बढ़ाने, उसका प्रोटोटाइप तैयार करने और बाजार तक पहुंचाने का रास्ता नहीं पता होता। ऐसे युवाओं को प्रतियोगिता के माध्यम से अपने विचार को बेहतर बनाने का मौका मिलेगा। आईआईटी कानपुर का स्टार्टअप इनक्यूबेशन एंड इनोवेशन सेंटर (एसआईआईसी) भी नए विचारों को व्यावहारिक रूप देने और उन्हें बड़े स्तर पर लागू करने की दिशा में मददगार साबित हो सकता है।

18 से 35 साल के युवा कर सकेंगे आवेदन

इस प्रतियोगिता में 18 से 35 वर्ष की उम्र के युवा हिस्सा ले सकते हैं। ऐसे स्टार्टअप संस्थापक आवेदन कर सकते हैं, जिनके उद्यम को डीपीआईआईटी से मान्यता मिली हो या जो एमएसएमई के रूप में पंजीकृत हों। सरकारी, निजी, गैर सरकारी संगठनों और शैक्षणिक संस्थानों में काम करने वाले पेशेवर भी निर्धारित शर्तों के तहत आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए संबंधित संस्थान से अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) देना होगा। युवा अकेले या अधिकतम तीन सदस्यों की टीम बनाकर हिस्सा ले सकते हैं। प्रतियोगिता में शामिल होने के लिए कोई शुल्क नहीं देना होगा।

खेती से लेकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तक पर मौका

युवा स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, कृषि, पर्यावरण संरक्षण, महिला सशक्तीकरण, शासन व्यवस्था और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों से जुड़े अपने विचार पेश कर सकते हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) पर आधारित नए समाधान भी इसमें शामिल किए जा सकते हैं। विचार ऐसा होना चाहिए, जो किसी वास्तविक समस्या को हल करने में मदद करे और जिसे भविष्य में उपयोगी समाधान के रूप में विकसित किया जा सके।

पहले स्थान पर डेढ़ लाख रुपये का पुरस्कार

प्रतियोगिता के तहत चुनी गई टीमों को अलग-अलग चरणों में अपने विचार प्रस्तुत करने होंगे। क्षेत्रीय स्तर पर अक्टूबर और नवंबर 2026 में प्रस्तुतियां प्रस्तावित हैं। राष्ट्रीय स्तर पर चयनित टीमों को दिसंबर में मार्गदर्शन मिलेगा। इसके बाद 8 और 9 दिसंबर को आईआईटी कानपुर परिसर में प्रत्यक्ष मार्गदर्शन का कार्यक्रम प्रस्तावित है। प्रोटोटाइप और पोस्टर तैयार करने के लिए प्रत्येक फाइनलिस्ट टीम को 5,000 रुपये की सहायता भी दी जाएगी। प्रतियोगिता का अंतिम चरण 10 से 12 जनवरी 2027 के बीच प्रस्तावित है। इसमें पहले स्थान पर आने वाली टीम को 1.50 लाख रुपये, दूसरे स्थान पर एक लाख रुपये, तीसरे स्थान पर 75 हजार रुपये, चौथे स्थान पर 50 हजार रुपये और पांचवें स्थान पर 30 हजार रुपये मिलेंगे। फाइनल में पहुंचने वाले प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र के साथ नीति निर्माताओं और निवेशकों से जुड़ने का अवसर भी मिलेगा।

22 अक्टूबर तक करना होगा पंजीकरण

इच्छुक युवा माय भारत पोर्टल पर जाकर विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग 2027 के अंतर्गत यूथ एंटरप्रेन्योर्स चैलेंज के लिए आवेदन कर सकते हैं। पंजीकरण की अंतिम तिथि 22 अक्टूबर 2026 है। आवेदन और पात्रता से जुड़ी जानकारी के लिए आधिकारिक लिंक https://mybharat.gov.in/pages/youth-entrepreneurs-challenge पर जाना होगा।

कानपुर से अखंड प्रताप सिंह की रिपोर्ट

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दुनिया बना रही बुद्धि, भारत बनेगा पालतू?

बुद्धि के ब्रह्म ने मानो मशीन में, एआई में अपना निवास बना लिया हो। तभी अब मशीनें मनुष्य से लाखों गुना विशाल दिमाग दिखलाते हुए हैं। हर दिन, हर सप्ताह इतनी खबरें, ऐसी-ऐसी कवर स्टोरीज आ रही हैं कि अब एआई का न ओर है और न छोर। इस सप्ताह पत्रिका द इकोनॉमिस्ट का कवर देखा, यूरेका एआई! यदि विज्ञान की खोजों का जिम्मा मशीनों ने अपने हाथ में ले लिया तो? देख पढ़ने की तुक समझ नहीं आई। लगा पढ़ने की जरूरत ही नहीं है! आखिर मनुष्य यानी पाठक पढ़े भी तो उसमें एआई के असीम को समझने, विचारने का सामर्थ्य कितना है? उसके करने के लिए अब है क्या? बेचारा मनुष्य। जहाँ वह असंख्य दिमागी सीमाओं में बँधा हुआ है, वहीं एआई स्वतंत्र है, स्वच्छंद है, बेफिक्र है और अपने ही पुर्जों, भाषा के अनंत में उड़ता हुआ।

बात केवल लिखने-पढ़ने की ही नहीं है। द इकोनॉमिस्ट की 15 अक्टूबर की कवर स्टोरी के अनुसार, छह अक्टूबर 2026 का दिन गणित के इतिहास का सबसे बड़ा दिन साबित हो सकता है। कैसे? इस दिन अमेरिकी कंपनी ओपनएआई ने एक ही दिन में 719 शोधपत्र जारी किए। दावा किया कि उसके एआई मॉडल ने गणित की कम से कम 372 ऐसी समस्याओं के समाधान खोज लिए हैं जिनमें बड़े-बड़े गणितज्ञ दशकों से उलझे हुए थे। उससे पहले सितंबर में एआई ने तरल पदार्थों की गति से जुड़ी एक ऐसी गणितीय समस्या को महज 88 घंटों में हल करने का दावा किया जिस पर गणितज्ञ एक सदी से माथापच्ची कर रहे थे।

नतीजतन गणितज्ञ हैरान-परेशान हैं। कुछ तो विरोध में उतर आए हैं। आखिर मनुष्य के वर्षों के अध्ययन, चिंतन और शोध का अर्थ क्या बचेगा यदि मशीन चंद घंटों में उत्तर निकाल दे? और वह भी ऐसे उत्तर जिन्हें सही मानने से पहले मनुष्य को समझने में ही महीनों लग जाएँ! ध्यान रहे, ये एआई कंपनियों के घोषित समाधान हैं, जिनकी स्वतंत्र वैज्ञानिक जाँच और पुष्टि अलग प्रश्न है।

पर गणित मात्र एक विषय है। मौसम की भविष्यवाणी, परमाणु संलयन के प्रयोग, नई धातुओं और पदार्थों की खोज, प्रोटीन की संरचना, दवाइयों का निर्माण आदि सभी में तो एआई घुस चुकी है। जीव विज्ञान में भी छलाँगें हैं। मशीनें डीएनए की भाषा पढ़ रही हैं। उसमें फेरबदल सुझा रही हैं। सूखे और गर्मी को झेलने वाली फसलें तैयार करने की कोशिश हो रही है। प्रयोगशालाओं में जीवित कोशिकाओं के कंप्यूटर मॉडल बनाने की तैयारी है। मतलब कल को वैज्ञानिक किसी दवा का असर पहले कंप्यूटर की आभासी कोशिका पर जाँचेंगे। और आगे? बिल्कुल नए जीवों की रचना भी संभव होगी! द इकोनॉमिस्ट ने बताया है कि एआई की मदद से प्राकृतिक वायरसों से अलग सोलह प्रयोगात्मक वायरस बनाए जा चुके हैं, जो बैक्टीरिया पर हमला करते हैं। सोचें, जिस जीव-जगत को समझने में मनुष्य को सदियाँ लगीं, अब उसकी जैविक संरचना में परिवर्तन और नए जीव बनाने की संभावनाएँ मशीनों से लगातार खुल रही हैं और खुलती जाएँगी।

असली बात इससे भी आगे की है। गूगल डीपमाइंड, ओपनएआई और एंथ्रोपिक जैसी कंपनियाँ एआई को केवल वैज्ञानिकों की सहायता करने वाला औजार नहीं बनाए रखना चाहतीं। वे स्वयं वैज्ञानिक खोजों के मैदान में उतर रही हैं। क्यों? इसलिए भी कि विज्ञान की कठिन समस्याएँ हल करते हुए उनके एआई मॉडल और अधिक बुद्धिमान बन सकते हैं। यानी मशीन विज्ञान की समस्याएँ सुलझाएगी, उससे अपनी बुद्धि बढ़ाएगी और फिर उसी बढ़ी हुई बुद्धि से अपने से भी बेहतर मशीन बनाने की कोशिश करेगी।

तब मनुष्य कहाँ होगा? वैज्ञानिक खोज का मालिक, उसका निरीक्षक या मशीन द्वारा निकाले गए निष्कर्षों को समझने में लगा एक विद्यार्थी, शोधकर्ता? द इकोनॉमिस्ट की संपादकीय चिंता यही है कि विज्ञान में मनुष्य की समझ और नियंत्रण बना रहना चाहिए। अन्यथा वह स्थिति भी संभव है जिसमें मशीनें खोजें करती रहें और मनुष्य केवल उनसे पूछता रहे कि अब क्या करना है। पत्रिका ने तो यहाँ तक लिखा है कि ऐसा समाज मनुष्यों को मशीनों के पालतू प्राणियों जैसी स्थिति में पहुँचा सकता है!

इस नई दुनिया का बाजार तेजी से सभी ओर बन रहा है। एआई की बुद्धि अब टोकन के हिसाब से बिक रही है। जिस तरह कभी अनाज, नमक या पशुओं से मूल्य का हिसाब होता था, वैसे अब मशीन की भाषा पढ़ने, लिखने और सोचने की कीमत टोकन में तय हो रही है। एक कंपनी का एआई दूसरी कंपनी से चालीस गुना सस्ता हो सकता है। सस्ते और महँगे एआई मॉडलों के बीच ग्राहक को चुनाव कराने वाली ओपनराउटर जैसी कंपनी को खरीदने के लिए भुगतान कंपनी स्ट्राइप ने कथित तौर पर 7.5 अरब डॉलर का सौदा किया है।

यानी बुद्धि का नया बाजार! किस काम के लिए सस्ती मशीन का दिमाग लगाना है और किस काम के लिए महँगी मशीन का, यह कारोबार का नया हिसाब, नया मॉडल है। जाहिर है औद्योगिक उत्पादनों, सेवाओं में जैसे सस्ते विकल्प देकर बाजार पर कब्जा करता है वैसे ही एआई बाजार में भी चीन की डीपसीक जैसी कंपनियाँ सस्ते एआई मॉडल बेचकर अमेरिकी कंपनियों को चुनौती दे रही हैं।

और अब जरा कल्पना करें, दिमाग में भारत पर सोचें तो क्या मिलेगा? खाली खोखा! दुनिया में जब अमेरिका और चीन की कंपनियाँ मशीनों से गणित की अनसुलझी समस्याएँ हल कराने, नई दवाएँ और जीव बनाने तथा एआई से एआई की बुद्धि बढ़ाने में लगी हैं, तब भारत इस वैज्ञानिक क्रांति में कहाँ खड़ा है? बकौल विश्व बौद्धिक संपदा संगठन के ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स 2026 के, भारत इनोवेशन में 139 अर्थव्यवस्थाओं की लिस्ट में 38वें स्थान पर है। स्विट्जरलैंड पहले, स्वीडन दूसरे, अमेरिका तीसरे, दक्षिण कोरिया चौथे और सिंगापुर पाँचवें स्थान पर हैं। चीन दसवें स्थान पर पहुँच चुका है।

मतलब दुनिया में नवाचार की दौड़ का हिसाब देखें तो भारत अभी पहले तीस देशों में भी नहीं है। जबकि भारत दुनिया की सबसे बड़ी आबादी और अर्थव्यवस्थाओं में एक है। उसके नौजवान वैश्विक तकनीकी कंपनियों में काम कर रहे हैं। कहने को भारत सूचना प्रौद्योगिकी सेवाओं के निर्यात में दुनिया में पहले स्थान पर है। ऐसे ही विकसित चरण के स्टार्टअप उद्यमों में वेंचर कैपिटल सौदों के मामले में चौथे स्थान पर है। नवाचार से प्राप्त परिणामों में 25वें स्थान पर है। लेकिन मार कहाँ खा रहा है? नवाचार के लिए आबोहवा याकि जरूरी संसाधनों और व्यवस्थाओं में 49वें स्थान पर होने के कारण! मतलब दुनिया की तकनीक को चलाने, उसके लिए सेवाएँ देने और उसका बाजार बनने के जुगाड़ों में भारत आगे है, लेकिन मौलिक वैज्ञानिक अनुसंधान और नई तकनीक बनाने की बुनियादी क्षमता में पीछे।

जबकि चीन की छलाँगें क्या हैं? वह सॉफ्टवेयर और मोबाइल एप्लीकेशन से आगे सेमीकंडक्टर, उन्नत विनिर्माण और गहन वैज्ञानिक अनुसंधान की दुनिया में अपनी ताकत बढ़ा रहा है। द इकोनॉमिस्ट के अनुसार, अमेरिका में गहन विज्ञान और भौतिक तकनीक पर आधारित 12,752 स्टार्टअप हैं। चीन में ऐसी कंपनियों की संख्या 2025 में 3,466 हो गई। पाँच वर्षों में दोगुने से अधिक! और ये कंपनियाँ केवल मोबाइल एप्लीकेशन बनाने या ऑनलाइन सामान बेचने वाली नहीं हैं। ये भौतिक दुनिया की नई तकनीकों पर काम करने वाली कंपनियाँ हैं।

यानी चीन की तैयारी उस दुनिया के लिए है जिसमें मशीनें विज्ञान की खोज करेंगी और उनसे नई मशीनें, नई दवाएँ, नए पदार्थ और नई उत्पादन प्रणालियाँ बनेंगी। तब सवाल है कि भारत क्या करेगा? दुनिया की तकनीक का सेवा प्रदाता और उपभोक्ता बना रहेगा? या अपनी खोज, अपने आविष्कार और अपनी वैज्ञानिक क्षमता से उस दुनिया के निर्माण में भी हिस्सा लेगा?

सवाल केवल विज्ञान की प्रयोगशालाओं का नहीं है। मनुष्य के जीवन का भी है। आखिर विज्ञान, तकनीक, नवाचार और आर्थिक विकास किसलिए हैं? नागरिक के बेहतर जीवन के लिए ही न? पर भारत और भारत के नागरिक याकि भीड़ बेहतर जीवन की जिद कहाँ करते हैं? लोगों की जिंदगी खैराती बनने, प्रदूषणों, झुग्गी झोपड़ियों, कॉकरोचपने में ही विकसित भारत के सपनों की है। कोई आश्चर्य नहीं कि 2026 में भारत का एक भी शहर दुनिया के सौ सबसे रहने योग्य शहरों में नहीं है! इकोनॉमिस्ट इंटेलिजेंस यूनिट की 173 शहरों की ग्लोबल लिवेबिलिटी रैंकिंग में नई दिल्ली 120वें, मुंबई 121वें, चेन्नई 123वें और बेंगलुरु 127वें स्थान पर हैं। दुनिया में कोपेनहेगन पहले, वियना दूसरे और मेलबर्न तीसरे स्थान पर हैं।

भारत की राजधानी दिल्ली को स्वास्थ्य सेवाओं में महज 41.7 और संस्कृति तथा पर्यावरण में 35.4 अंक मिले। सोचें, देश की राजधानी की यह स्थिति! और वह भी तब जब दिल्ली में चमचमाते एयरपोर्ट हैं, मेट्रो है, एक्सप्रेसवे हैं, गगनचुंबी इमारतें हैं। खरबों रुपये निर्माण पर खर्च हुए हैं। बावजूद इसके नागरिक के लिए साफ हवा, अच्छी स्वास्थ्य सेवाएँ, सुरक्षित परिवेश और सुविधाजनक रोजमर्रा का जीवन उपलब्ध कराना चुनौती है। जबकि चीन के सभी सर्वेक्षित शहरों में स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार लगातार दर्ज होता हुआ है।

तो तस्वीर में एक मशीनें मनुष्य से आगे निकलने की तैयारी में हैं, वहीं दूसरी तरफ भारत में मनुष्य अभी रहने योग्य शहर की बुनियादी सुविधाओं के लिए भी तरस रहा है। वहाँ चिंता है कि एआई कहीं विज्ञान पर अधिकार न कर ले। यहाँ चिंता है कि प्रदूषण से साँस कैसे बचे, बीमारी में अस्पताल कैसा मिले, सड़क पर चलना कितना सुरक्षित हो और रोजमर्रा की जिंदगी कैसे कटे। दुनिया की वैज्ञानिक छलाँग और भारत के नागरिक की वास्तविकता का अंतर दिन-रात का है! कुछ भी हो सारे विकास की कसौटी तो अंततः मनुष्य जीवन के अपने बदलाव ही तो हैं!

और घूम फिर कर सवाल बुद्धि (मनुष्य की) पर लौटता है। अब तक मनुष्य स्वयं ज्ञान अर्जित करता था। उसे समझने, परखने, उस पर संदेह करने और आगे बढ़ाने में पीढ़ियाँ खपती थीं। अब मशीनें ज्ञान के ऐसे परिणाम सामने रख सकती हैं जिन तक पहुँचने का रास्ता स्वयं वैज्ञानिकों को समझ न आए। तब ज्ञान बढ़ेगा, लेकिन क्या मनुष्य की समझ उसी अनुपात में बढ़ेगी? खासकर भारत जैसे देशों में? दुनिया निश्चित ही आगे अधिक बुद्धिमान मशीनों और उन पर अधिक निर्भर मनुष्यों की बनेगी। उसके जो स्वामी मनुष्य होंगे, मालिक होंगे वे क्या हैसियत इसलिए हुए होंगे, इसकी कल्पना ही दहलाने वाली है!

संडे प्रोफाइल : जॉन टर्नस:टर्नस के सामने एपल को एआई में आगे ले जाने की चुनौती

एपल के नए सीईओ जॉन टर्नस डिजाइन की खूबसूरती के साथ हार्डवेयर पर यकीन करते हैं। वे मानते हैं टेक्नोलॉजी से अलग हटकर दूसरी चीजों का भी महत्व है। टर्नस को हाल ही में टाइम मैगजीन के बेस्ट इन्वेंशन ऑफ 2026 के संस्करण के कवर पर जगह मिली है। सितंबर में एपल के बहुप्रतीक्षित फोल्डेबल फोन की लॉन्चिंग के दौरान जॉन टर्नस के हाथ कांप रहे थे। कार्यक्रम का यूट्यूब पर सीधा प्रसारण हो रहा था और कई लोगों ने इस पर ध्यान दिया। बाद में टर्नस ने बताया कि वे इतने उत्साहित थे कि रातभर सो नहीं पाए। इससे अपने प्रोडक्ट के प्रति उनका लगाव जाहिर होता है। इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले टर्नस ने एपल में 25 साल से ज्यादा समय तक काम किया है। इस दौरान उन्होंने आईफोन, मैक, आईपैड और एयरपॉड्स जैसे प्रोडक्ट को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाई। आईपैड की हर पीढ़ी और पहली पीढ़ी के एयरपॉड्स के हार्डवेयर विकास में वे शामिल रहे। मैक कंप्यूटर में इंटेल के प्रोसेसर की जगह एपल के अपने चिप लगाने के बदलाव में भी उन्होंने योगदान दिया। उनके काम में प्रोडक्ट को मजबूत और टिकाऊ बनाना और उनकी मरम्मत आसान करना भी शामिल रहा है। टर्नस से पहले एपल के सीईओ रहे टिम कुक और स्टीव जॉब्स की भूमिका अलग थी। कुक ने कंपनी के कारोबार को बढ़ाने, दुनिया भर में प्रोडक्ट पहुंचाने और सामान बनाने व सप्लाई करने की व्यवस्था को मजबूत करने पर काम किया। उनसे पहले स्टीव जॉब्स नए प्रोडक्ट की सोच, उनके डिजाइन और लोगों के इस्तेमाल के अनुभव पर ध्यान देते थे। आईफोन, आईपैड और आईपॉड जैसे प्रोडक्ट को दुनिया के सामने लाने में उनकी अहम भूमिका रही। टर्नस की खासियत यह है कि वे प्रोडक्ट के अंदरूनी हिस्सों, उसकी बनावट और काम करने के तरीके पर ध्यान देते हैं। वे यह सुनिश्चित करने में जुटे रहे कि प्रोडक्ट अच्छी तरह काम करें और लोगों के लिए उपयोगी हों। टर्नस का जन्म 1975 में हुआ था। आठ साल की उम्र में उनके पिता ने उन्हें एपल-2 कंप्यूटर दिया था। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने वर्चुअल रियलिटी से जुड़ी एक कंपनी में काम किया। 2001 में वे एपल की प्रोडक्ट डिजाइन टीम में इंजीनियर बने। 2013 में हार्डवेयर इंजीनियरिंग के वाइस प्रेसिडेंट और 2021 में सीनियर वाइस प्रेसिडेंट बने। इस दौरान कंपनी के कई बड़े प्रोजेक्ट्स में उनकी जिम्मेदारी बढ़ती गई। एपल के प्रोडक्ट डिजाइन वाइस प्रेसिडेंट रिचर्ड डिन्ह के अनुसार, कंपनी की अलग-अलग टीमों के बीच तालमेल बढ़ाने में टर्नस की अहम भूमिका रही है। अब उनके सामने एआई के क्षेत्र में एपल को आगे बढ़ाने की चुनौती है। दूसरी बड़ी टेक कंपनियां एआई पर तेजी से काम कर रही हैं, जबकि एपल की प्रगति पर सवाल उठे हैं। टर्नस का कहना है कि हम ऐसी एआई सुविधाओं पर काम कर रही है, जिनमें यूजर की निजी जानकारी सुरक्षित रहे। फिलहाल टर्नस डिजाइन स्टूडियो और यूजर्स से जुड़ी टीमों के साथ समय बिताते हैं।

Stocks Markets: बीएसई और एनएसई 20 अक्तूबर को बंद रहेंगे, जानिए कैसा रहेगा 4 दिन का यह कारोबारी हफ्ता

यह हफ्ता शेयर बाजारों के लिए अच्छा रहा। लंबे समय बाद शेयर बाजार में रौनक लौटी। निफ्टी इस दौरान 2.49 फीसदी चढ़ा, जबकि सेंसेक्स में 3.30 फीसदी का उछाल आया। अब बाजार की नजरें 19 अक्तूबर यानी सोमवार पर टिकी हैं। मंगलवार को शेयर बाजारों में दशहरा की छुट्टी है। इसलिए सोमवार के बाद बीएसई और एनएसई में फिर से बुधवार यानी 21 अक्तूबर को कारोबार शुरू होगा। सवाल है कि क्या बाजार में तेजी का सिलसिला क्या अगले हफ्ते जारी रहेगा?

19 अक्टूबर को खुलेगा जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ

अगले हफ्ते शेयर बाजार पर सितंबर तिमाही के नतीजों, क्रूड ऑयल की कीमतों और Jio Platforms के आईपीओ का असर दिखेगा। लेकिन, सबसे ज्यादा नजरें विदेशी निवेशकों पर होंगी। विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने बाजार पर दबाव बढ़ाया है। जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ एंकर इनवेस्टर्स के लिए 19 अक्तूबर को खुल जाएगा। बाकी इनवेस्टर्स के लिए यह 21 अक्तूबर को खुलेगा। यह देश का सबसे बड़ा आईपीओ है। अब तक किसी कंपनी ने आईपीओ से 30,000 करोड़ रुपये नहीं जुटाए हैं।

30000 करोड़ के इश्यू का असर लिक्विडिटी पर दिख सकता है

जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ में निवेश के लिए इनवेस्टर्स को पैसे के इंतजाम करने होंगे। कई इनवेस्टर्स इस आईपीओ में निवेश करने के लिए दूसरे शेयरों से पैसे निकाल सकते हैं। चूंकि यह 30,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का इश्यू है, जिससे पैसे की काफी जरूरत पड़ेगी। इसका असर लिक्विडिटी पर पर पड़ सकता है। सूत्रों ने बताया है कि कई बड़े विदेशी संस्थागत निवेशकों और घरेलू संस्थागत निवेशकों ने इस इश्यू में निवेश में दिलचस्पी दिखाई है। वे इस इश्यू में निवेश के लिए दूसरे शेयरों में बिकवाली कर सकते हैं।

क्रूड ऑयल की कीमतों पर भी होंगी बाजार की नजरें 

क्रूड ऑयल की कीमतों का असर भी बाजार पर पड़ेगा। इस हफ्ते के अंत में क्रूड की कीमतों में बड़ा उछाल दिखा। ब्रेंट क्रूड करीब 110 डॉलर प्रति बैरल तक चला गया। अगर अगले हफ्ते क्रूड की कीमतों में नरमी नहीं आती है तो बाजार पर दबाव दिख सकता है। महंगे क्रूड की वजह से पेंट्स, टायर सहित कई कंपनियों की प्रोडक्शन कॉस्ट बढ़ी है। इसका निगेटिव असर उनके शेयरों पर दिखा है। क्रूड का 110 डॉलर प्रति बैरल पर बने रहना भारत की इकोनॉमी के लिए भी अच्छा नहीं है। इससे महंगाई तेजी से बढ़ सकती है।

आईटी शेयरों में तेजी जारी रही तो बाजार को मिल सकता है सपोर्ट

एनरिच मनी के सीईओ पोममुदी आर ने कहा कि निवेशकों की नजरें इस बात पर होगी कि बाजार में आईटी शेयरों की बदौलत आई तेजी जारी रहती है या नहीं। वे देखना चाहते हैं कि बाजार के प्रमुख सूचकांक अपने रेसिस्टेंस लेवल को तोड़ पाते हैं या नहीं। इस हफ्ते तेजी की वजह से बाजार का मोमेंटम पॉजिटिव बना हुआ है। आईटी शेयरों में अच्छी रिकवरी दिखी है।

इन दिग्गज बैंकिंग शेयरों पर दिखेगा सितंबर तिमाही के नतीजों का असर

इस हफ्ते के अंत में एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, एक्सिस बैंक, पीएनबी जैसे बड़े बैंकों ने अपने नतीजों के एलान किए। मिलाजुलाकर ये नतीजे अच्छे हैं। इन बैंकों के शेयरों पर 19 अक्तूबर यानी सोमवार को इन नतीजों का असर दिखेगा। पिछले एक-डेढ़ साल में प्राइवेट बैंकों के शेयरों का प्रदर्शन सरकारी बैंकों के शेयरों के मुकाबले कमजोर रहा है। सितंबर तिमाही के नतीजों से प्राइवेट बैंकों के शेयरों में तेजी शुरू हो सकती है।

अमेरिका में एआई और चिप शेयरों पर भी होगी नजरें 

मार्केट पार्टिसिपेंट्स को ग्लोबल फैक्टर्स पर भी नजर रखने की जरूरत है। खासकर अमेरिकी बॉन्ड यील्ड का असर फिलहाल मार्केट्स पर बना रहेगा। जियोपॉलिटिकल डेवलपेमेंट पर भी बाजार की नजरें होंगी। इस हफ्ते में अमेरिका में एआई और चिप शेयरों की पिटाई हुई है। अगर अगले हफ्ते भी इन शेयरों पर दबाव जारी रहता है तो भारतीय आईटी शेयरों में तेजी दिख सकती है।

AI में निवेश घटा तो एशियाई शेयर बाजारों में मच सकता है कोहराम, जानिए भारतीय शेयर बाजार पर पड़ेगा कितना असर

अमेरिका में टेक्नोलॉजी स्टॉक्स में आई बड़ी गिरावट ने कई एशियाई शेयर बाजारों के लिए खतरे की घंटी बजा दी है। अमेरिका में सेमीकंडक्टर्स शेयरों में लगातार 8 सत्रों में बिकवाली देखने को मिली। यह 2008 के बाद बिकवाली का सबसे लंबा सिलसिला था। इसका असर नैस्डेक 100 पर भी पड़ा। अप्रैल 2005 के बाद इसमें सबसे बड़ी गिरावट आई।

आईआई शेयरों की बदौलत अमेरिकी शेयर बाजारों में तेजी

पिछले 1.5-2 सालों में अमेरिका में एआई और सेमीकंडक्टर कंपनियों के शेयरों में जबर्दस्त तेजी आई है। इस सेक्टर को चिप और दूसरे हार्डवेयर सप्लाई करने वाली एशियाई कंपनियों के शेयरों में भी खूब तेजी आई है। इनमें दक्षिण कोरिया और ताइवान की कई कंपनियां शामिल हैं। अमेरिका में एआई बूम जारी रखने के लिए नए निवेश की जरूरत है। पहले ही इस सेक्टर में काफी ज्यादा निवेश हो चुका है।

एआई में निवेश घटा तो एशियाई शेयर बाजारों में मच सकता है कोहराम

अगर अमेरिका में एआई में निवेश की रफ्तार सुस्त पड़ती है तो इसका असर इस सेक्टर से जुड़ी एशियाई कंपनियों पर भी पड़ेगा। इसका संकेत दिखने लगा है। नियोक्लाउड ऑफर करने वाली कंपनी CoreWeave के बॉन्ड्स की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिली है। इससे इस सेक्टर पर बढ़ते दबाव का संकेत मिलता है। इनवेस्टर्स सवाल पूछ रहे है कि एआई और सेमीकंडक्टर्स कंपनियों ने जो निवेश किया है, क्या उसका रिटर्न मिलने जा रहा है? क्या AI की डिमांड इतनी है, जिससे इन कंपनियों के रेवेन्यू को सपोर्ट मिलेगा?

इंटरेस्ट रेट बढ़ने से एआई कंपनियों के लिए बढ़ रही इनवेस्टमेंट कॉस्ट

CoreWeave के शेयरों में 16 अक्तूबर को 12 फीसदी गिरावट आई। क्रूड की बढ़ती कीमतों ने एआई और सेमीकंडक्टर्स कंपनियों के लिए चिंता और बढ़ा दी है। क्रूड में उछाल से महंगाई बढ़ रही है, जिससे काबू में करने के लिए केंद्रीय बैंक इंटरेस्ट रेट्स बढ़ा रहे हैं। इससे इससे एआई कंपनियों के लिए नए निवेश की लागत भी बढ़ रही है। पिछले महीने अमेरिकी केंद्रीय बैंक इंटरेस्ट रेट 25 बेसिस प्वाइंट बढ़ा चुका है। अब नजरें इस महीने की फेड की पॉलिसी पर लगी हैं।

ताइवान और दक्षिण कोरिया की चिप कंपनियों को हो सकती है दिक्कत

ताइवान की TSMC, दक्षिण कोरिया की SK Hynix और Samsung Electronics जैसी कंपनियां AI कंप्यूटिंग के लिए जरूरी चिप और मेमोरी की सप्लाई करती हैं। इन कंपनियों की कमाई एआई इंफ्रास्ट्रक्चर में होने वाले इनवेस्टमेंटम पर निर्भर है। अगर एआई इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश घटता है तो इन कंपनियों की कमाई पर सीधा असर पड़ेगा। Gartner ने चेतावनी दी है कि एआई इंफ्रास्ट्रक्चर में 3.5 ट्रिलियन डॉलर के इनवेस्टमेंट को 2030 तक बड़ा खतरा पैदा हो सकता है। इसकी वजह यह है कि इनवेस्टमेंट के अनुपात में रेवेन्यू नहीं दिख रहा।

कंपोनेंट्स बनाने वाली कंपनियों के शेयरों में 236% तक उछाल

Union Bancaire Privee में मैनेजिंग डायरेक्टर वी-सेर्न लिंग ने कहा, “अगर हायरपरस्केलर्स और नियोक्लाउड्स को निवेश जारी रखने के लिए फंड नहीं मिलता है तो इसका असर टीएसएमसी, सैमसंग और SK Hynix जैसी एशियाई कंपनियों पर पड़ेगा। उन्हें मिलने वाले ऑर्डर्स घट जाएंगे।” इस साल MSCI Asia-Pacific Index की सबसे ज्यादा चढ़ने वाली 10 कंपनियों से 8 कंपोनेंट्स बनाने वाली कंपनियां हैं। इनमें से हर कंपनी का शेयर कम से कम 236 फीसदी चढ़ा है।

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भारतीय बाजार पर इस वजह से नहीं पड़ेगा असर 

जहां तक भारत की बात है तो इसका असर भारतीय शेयर बाजारों पर नहीं पड़ेगा। इसकी वजह यह है कि भारत में एआई और सेमीकंडक्टर्स बनाने वाली कंपनियां नहीं हैं। यहीं वजह है कि पिछले 1-2 सालों में जब अमेरिका, दक्षिण कोरिया और ताइवान के शेयर बाजारों में तेजी आई तब भारतीय शेयर बाजारों में गिरावट देखने को मिली है। यहां तक की एआई बूम का निगेटिव असर भारतीय आईटी कंपनियों पर पड़ा है। अब जब एआई और चिप शेयर गिर रहे हैं तो भारतीय आईटी शेयरों में तेजी दिख रही है।

 

सीजेपी ने शिक्षा का मुद्दा छोड़ दिया

कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी ने क्या शिक्षा का मुद्दा छोड़ दिया? उसके नेता इस पर कुछ नहीं बोल रहे हैं। उन्होंने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद स्कूल बदलने का अभियान शुरू किया था। हालांकि शुरू में वे सिर्फ भाजपा शासित राज्यों में गए। लेकिन जब दबाव बना तो कुछ विपक्षी शासन वाले राज्यों में भी गए। लेकिन वहां से सिर्फ अच्छी तस्वीरें दिखाईं। फिर भी स्कूल सुधारों और शिक्षा में बदलाव का उनका एक बड़ा एजेंडा था, जिस पर युवाओं और छात्रों का समर्थन उनको मिल रहा था। उनके आंदोलन और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद ही केंद्र सरकार ने नीट सहित अन्य परीक्षाओं में सुधार के लिए नंदन नीलेकणी कमेटी का गठन किया था।

पिछले चार दिन में इनसे जुड़े दो बड़े घटनाक्रम हुए हैं लेकिन सीजेपी का कोई बयन देखने को नहीं मिला। मुख्य चुनाव आयुक्त का इस्तीफा मांगने में बिजी सीजेपी के नेताओं ने न तो नंदन नीलेकणी कमेटी की सिफारिशों को लेकर कोई टिप्पणी की और न इस पर कोई बयान दिया कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने संसद की शिक्षा मामलों की समिति के सामने कहा कि उसके नौ साल के कार्यकाल में एक भी पेपर लीक नहीं हुआ है। एनटीए ने इतना बडा झूठ बोला लेकिन नीट पेपर लीक पर आंदोलन करने वाली सीजेपी ने लगता है कि इसको देखा ही नहीं। इसी तरह नीलेकणी कमेटी की सिफारिशें तैयार हो गई हैं। उसमें कहा गया है कि परीक्षा कंप्यूटर बेस्ड होगी। यह भी कहा गया है कि हजारों सवालों का बैंक तैयार किया जाएगा और परीक्षा के समय उस प्रश्न बैंक से एआई के जरिए रैंडम सवाल सीधे कंप्यूटर पर आ जाएंगे। इस सिफारिश को अच्छा या बुरा बताने वाली कोई टिप्पणी सीजेपी की नहीं आई।

Q2 Results: सीमेंट कंपनी का मुनाफा 340% बढ़ा, शेयरों पर रहेगी नजर

Q2 Results: दिग्गज सीमेंट कंपनी UltraTech Cement की सब्सिडियरी India Cements का सितंबर तिमाही में मुनाफा करीब 340% यानी चार गुना से ज्यादा बढ़ गया। कंपनी ने ₹38.8 करोड़ का नेट प्रॉफिट कमाया। पिछले साल इसी तिमाही में मुनाफा ₹8.8 करोड़ था।

कंपनी की कमाई यानी रेवेन्यू भी बढ़ी है। सितंबर तिमाही में यह 2.2% बढ़कर ₹1,142 करोड़ रहा। पिछले साल इसी दौरान रेवेन्यू ₹1,117 करोड़ था।

India Cements की कमाई में कैसे आया उछाल?

इंडिया सीमेंट्स का EBITDA सालाना आधार पर 78% बढ़कर ₹145 करोड़ हो गया। पिछले साल यह ₹81 करोड़ था। वहीं, EBITDA मार्जिन भी 7.3% से बढ़कर 12.7% हो गया।

कंपनी के मुताबिक, प्लांट में कामकाज बेहतर होने और मशीनों का ज्यादा इस्तेमाल होने से मुनाफा बढ़ा है। आसान भाषा में कहें तो कंपनी पहले के मुकाबले अपने संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल कर रही है।

₹2,000 करोड़ खर्च करने की तैयारी

इंडिया सीमेंट्स ने कारोबार बढ़ाने के लिए ₹2,000 करोड़ के निवेश को मंजूरी दी है। सितंबर 2026 तक इसमें से करीब ₹1,728 करोड़ खर्च करने की प्रतिबद्धता जताई जा चुकी थी।

कंपनी हर साल सीमेंट बनाने की क्षमता 28 लाख टन बढ़ाना चाहती है। इसके अलावा, बिजली का खर्च घटाने के लिए भी कदम उठाए जा रहे हैं। कंपनी 24 मेगावाट का ऐसा सिस्टम लगाने की योजना पर काम कर रही है, जो सीमेंट बनाने के दौरान निकलने वाली गर्मी से बिजली बनाने में मदद करेगा। साथ ही, 263 मेगावाट की रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता भी डेवलपम की जाएगी।

इंडिया सीमेंट्स के शेयरों का हाल

नतीजों की घोषणा से पहले शुक्रवार को BSE पर इंडिया सीमेंट्स का शेयर 1.78% चढ़कर ₹302.50 पर बंद हुआ। पिछले 1 साल में स्टॉक 23% गिरा है।

India Cements सीमेंट और इससे जुड़े प्रोडक्ट बनाती है। इसका इस्तेमाल निर्माण और इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में होता है। कंपनी UltraTech Cement की सब्सिडियरी है, जो आदित्य बिड़ला ग्रुप का हिस्सा है।

AI Stocks: एआई शेयरों में कमाई की रफ्तार घटने का अनुमान, Jefferies ने निवेशकों को दी बड़ी सलाह

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AI Stocks: एआई शेयरों में कमाई की रफ्तार घटने का अनुमान, Jefferies ने निवेशकों को दी बड़ी सलाह

AI Stocks: दुनिया भर के शेयर बाजारों में इस हफ्ते भारी बिकवाली देखने को मिली। AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी कंपनियों के कारोबार पर सवाल उठने और बढ़ते कर्ज की चिंता ने निवेशकों का भरोसा कमजोर किया। इसका असर खास तौर पर चिप बनाने वाली कंपनियों के शेयरों पर पड़ा। अब ब्रोकरेज फर्म Jefferies ने निवेशकों को AI से आगे दूसरे क्षेत्रों में भी अवसर तलाशने की सलाह दी है।

Jefferies की ताजा Greed and Fear रिपोर्ट के मुताबिक, अगले दो साल में AI कंपनियों की कमाई बढ़ने की रफ्तार काफी धीमी हो सकती है। रिपोर्ट का शीर्षक Diversifying Beyond AI है। इसका मतलब है कि पोर्टफोलियो में AI के परे जाकर विविधता लाना।

AI कंपनियों की कमाई में कितनी बढ़ोतरी का अनुमान?

जेफरीज की रिपोर्ट के मुताबिक, MSCI AC World Index में शामिल AI से जुड़ी कंपनियों की कमाई में बढ़ोतरी का अनुमान 2026 में करीब 100% है। हालांकि, 2027 में यह घटकर 30% और 2028 में 22% रह सकता है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या इन कंपनियों की कमाई उनके महंगे शेयरों की कीमत को सही ठहरा पाएगी।

Jefferies के ग्लोबल हेड ऑफ क्वांटिटेटिव स्ट्रैटेजी देश पेरामुनेतिलके (Desh Peramunetilleke) ने कहा कि अब निवेशकों के लिए AI से आगे दूसरे क्षेत्रों में निवेश फैलाने का समय है।

AI शेयरों का वैल्यूएशन दूसरी कंपनियों से ज्यादा

Jefferies के मुताबिक, वैश्विक AI शेयरों का फॉरवर्ड प्राइस-टू-अर्निंग (PE) रेशियो 23 गुना है। वहीं, AI से बाहर की कंपनियों का यह रेशियो करीब 13 गुना है। यानी निवेशक AI कंपनियों के शेयरों के लिए ज्यादा कीमत चुका रहे हैं, जबकि उनकी कमाई बढ़ने की रफ्तार धीमी पड़ने का अनुमान है।

उभरते बाजारों में भी AI शेयरों की तेजी कमजोर हुई है। जून 2026 तक के एक साल में इन शेयरों में 81% की बढ़ोतरी हुई थी, लेकिन साल की दूसरी छमाही में इनसे मिलने वाले रिटर्न की रफ्तार घटी। इस दौरान AI से बाहर के कई क्षेत्रों ने भी अच्छा प्रदर्शन किया।

सेमीकंडक्टर शेयरों पर नजर

Jefferies के पोर्टफोलियो में TSMC, Samsung Electronics और SK Hynix जैसी कंपनियां शामिल हैं। हालांकि, इनका जॉइंट वेटेज पोर्टफोलियो में 16% है, जबकि MSCI AC Asia ex-Japan Index में यह 32.1% है।

Jefferies का मानना है कि AI पर खर्च जारी रहा तो Samsung Electronics और SK Hynix के शेयर जून के उच्च स्तर को दोबारा छू सकते हैं। फिर भी रिपोर्ट ने चेताया है कि सेमीकंडक्टर शेयरों में आसान कमाई का दौर काफी हद तक पीछे छूट सकता है। इसलिए निवेशकों के लिए AI के अलावा दूसरे क्षेत्रों में भी निवेश के अवसर तलाशना जरूरी हो गया है।

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अगले साल कितनी होगी सैलरी हाइक? Aon सर्वे में आया ये आंकड़ा, जानिए किन सेक्टरों में होगी बंपर बढ़ोतरी

Salary Hike Projection: वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और ट्रेड रिस्क के बावजूद भारत में कर्मचारियों के लिए अच्छी खबर सामने आई है। ग्लोबल प्रोफेशनल सर्विसेज फर्म Aon plc के ‘Annual Salary Increase and Turnover Survey for India 2026-27’ के मुताबिक, अगले वित्त वर्ष में देश में औसत सैलरी हाइक 9.1% रहने का अनुमान है, जो कि पिछले साल के 9% से मामूली रूप से ज्यादा है। मजबूत घरेलू खपत और निरंतर निवेश के कारण देश में बिजनेस कॉन्फिडेंस बना हुआ है।

किन सेक्टरों में मिलेगी सबसे ज्यादा सैलरी हाइक?

सर्वे के अनुसार, सभी सेक्टरों में एक जैसी बढ़ोतरी नहीं होगी। कुछ खास सेक्टर्स टैलेंट की मांग और ग्रोथ के चलते सबसे आगे रहने वाले हैं:

NBFC: नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियां 10.1% की सबसे ऊंची सैलरी ग्रोथ के साथ सूची में सबसे आगे रहेंगी।

एनर्जी: ऊर्जा सेक्टर में वेतन वृद्धि औसतन 9.9% तक रहने की उम्मीद है।

रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर: इस क्षेत्र में कर्मचारियों को 9.8% तक की सैलरी हाइक मिल सकती है।

एट्रिशन रेट और टैलेंट की जंग

कंपनियों के बजट स्थिर होने के बावजूद कर्मचारियों के नौकरी छोड़ने का सिलसिला बढ़ा है। ओवरऑल एट्रिशन रेट बढ़कर 2026 में 18% पर पहुंच गया है, जो कि 2025 में 16.2% और 2024 में 17.1% था। इससे यह साफ होता है कि कुशल और अनुभवी टैलेंट को अपने पास रोके रखने के लिए कंपनियों के बीच मुकाबला काफी कड़ा बना हुआ है।

AI स्किल्स और अपस्किलिंग का दौर: मिल रहा है तगड़ा प्रीमियम

डे-टू-डे वर्क में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की गहरी पैठ और तेजी से बदलते ट्रेंड्स का असर सैलरी और रिक्रूटमेंट पर साफ दिख रहा है। रूटीन कामकाज में एआई प्रोडक्टिविटी टूल्स का इस्तेमाल करने वाली कंपनियां 2025 के 46.1% से बढ़कर 56% हो गई हैं। करीब 60% एंप्लॉयर अपने कर्मचारियों के अपस्किलिंग को प्राथमिकता दे रहे हैं। AI, मशीन लर्निंग और डेटा साइंस के प्रोफेशनल्स के लिए कंपनियां सामान्य से लगभग 10% अधिक पे-प्रीमियम दे रही हैं।

वेज कोड और पेरोल कॉस्ट का असर

सर्वे के मुताबिक, 65.4% एंप्लॉयर पूरी तरह से नए वेज कोड का पालन कर रहे हैं, जबकि 20.9% कंपनियां अगले छह महीनों में इसके अनुपालन की उम्मीद कर रही हैं। वैसे लगभग 42.8% कंपनियों को अंदेशा है कि इससे उनकी पेरोल लागत कम से कम 1% तक बढ़ सकती है, जिसके लिए उन्हें अपने रिवॉर्ड स्ट्रक्चर को समझदारी से री-अलाइन करना होगा।

IT Sector में रौनक समेत 4 वजह, Sensex भागा 900 प्वाइंट्स ऊपर, Nifty पहुंचा 22900 के करीब

Share Market Rally: कच्चे तेल में गिरावट और रुपये की मजबूती से स्टॉक मार्केट को शानदार सपोर्ट मिला है। इस सपोर्ट पर सेंसेक्स 900 प्वाइंट्स से अधिक उछल पड़ा तो निफ्टी भी 22900 के करीब पहुंच गया। हालांकि ब्रोडर लेवल पर बिकवाली का दबाव है और निफ्टी मिडकैप 100 में करीब आधे फीसदी और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में करीब 1% की गिरावट है। अब इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज की बात करें तो फिलहाल 10:09 AM पर सेंसेक्स (Sensex) 871.57 प्वाइंट्स यानी 1.20% की बढ़त के साथ 73,653.46 और निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 250.05 प्वाइंट्स यानी 1.11% के उछाल के साथ 22,873.25 पर है। इंट्रा-डे में सेंसेक्स 930.67 प्वाइंट्स उछलकर 73,712.56 और निफ्टी 269.20 प्वाइंट्स चढ़कर 22,891.90 तक पहुंच गया था।

Share Market Rally: ये है वजह

कच्चे तेल में गिरावट

न्यूज एजेंसी रायटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका तेल के बेडे़ पर प्रतिबंधों में ढील देने पर विचार कर रहा है। इससे कच्चे तेल पर दबाव बढ़ा और ग्लोबल ऑयल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड प्रति बैरल फिसलकर $104 के करीब आ गया। इसने मार्केट में रौनक बिखेरी है।

IT Sector से मजबूत सपोर्ट

घरेलू मार्केट को आज आईटी सेक्टर से मजबूत सपोर्ट मिला है। एआई स्टॉक्स में भारी बिकवाली के चलते एआई-हैवी दक्षिण कोरियाई इंडेक्स कोस्पी करीब 9% टूट गया। एआई स्टॉक्स में बिकवाली ने आईटी सर्विसेज स्टॉक्स की रौनक बढ़ा दी और घरेलू मार्केट में निफ्टी आईटी 2% से अधिक उछल पड़ा। इसकी तेजी ने पीएसयू बैंकिंग शेयरों की बिकवाली को संभाल लिया, जिसका निफ्टी इंडेक्स 2% से अधिक टूटा है। प्राइवेट बैंकों से भी मार्केट को सपोर्ट मिला है, और निफ्टी प्राइवेट बैंक 1% से अधिक मजबूत हुआ है।

वैल्यू बाइंग

हाल-फिलहाल मार्केट में भारी गिरावट से कई अच्छे-अच्छे स्टॉक्स भी सस्ते में मिलने लगे तो निचले स्तर पर खरीदारी यानी वैल्यू बाइंग होने लगी, जिससे मार्केट को सपोर्ट मिला है।

रुपये की मजबूती

अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 24 पैसे मजबूत होकर 94.92 के भाव पर खुला। इससे मार्केट को सपोर्ट मिला है।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।