सीजेपी ने शिक्षा का मुद्दा छोड़ दिया

कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी ने क्या शिक्षा का मुद्दा छोड़ दिया? उसके नेता इस पर कुछ नहीं बोल रहे हैं। उन्होंने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद स्कूल बदलने का अभियान शुरू किया था। हालांकि शुरू में वे सिर्फ भाजपा शासित राज्यों में गए। लेकिन जब दबाव बना तो कुछ विपक्षी शासन वाले राज्यों में भी गए। लेकिन वहां से सिर्फ अच्छी तस्वीरें दिखाईं। फिर भी स्कूल सुधारों और शिक्षा में बदलाव का उनका एक बड़ा एजेंडा था, जिस पर युवाओं और छात्रों का समर्थन उनको मिल रहा था। उनके आंदोलन और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद ही केंद्र सरकार ने नीट सहित अन्य परीक्षाओं में सुधार के लिए नंदन नीलेकणी कमेटी का गठन किया था।

पिछले चार दिन में इनसे जुड़े दो बड़े घटनाक्रम हुए हैं लेकिन सीजेपी का कोई बयन देखने को नहीं मिला। मुख्य चुनाव आयुक्त का इस्तीफा मांगने में बिजी सीजेपी के नेताओं ने न तो नंदन नीलेकणी कमेटी की सिफारिशों को लेकर कोई टिप्पणी की और न इस पर कोई बयान दिया कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने संसद की शिक्षा मामलों की समिति के सामने कहा कि उसके नौ साल के कार्यकाल में एक भी पेपर लीक नहीं हुआ है। एनटीए ने इतना बडा झूठ बोला लेकिन नीट पेपर लीक पर आंदोलन करने वाली सीजेपी ने लगता है कि इसको देखा ही नहीं। इसी तरह नीलेकणी कमेटी की सिफारिशें तैयार हो गई हैं। उसमें कहा गया है कि परीक्षा कंप्यूटर बेस्ड होगी। यह भी कहा गया है कि हजारों सवालों का बैंक तैयार किया जाएगा और परीक्षा के समय उस प्रश्न बैंक से एआई के जरिए रैंडम सवाल सीधे कंप्यूटर पर आ जाएंगे। इस सिफारिश को अच्छा या बुरा बताने वाली कोई टिप्पणी सीजेपी की नहीं आई।

सचाई झुठलाने की सरकारी कोशिश

क्या दिल्ली में 10 अक्टूबर को मेट्रो की सेवा नहीं बंद थी? क्या मेडिकल में दाखिले के लिए होने वाली नीट की परीक्षा के पेपर लीक नहीं हुए थे? क्या नेशनल टेस्टिंग एजेंसी जिन परीक्षाओं का आयोजन कराती है उनमें से पिछले नौ साल में किसी परीक्षा के पेपर लीक नहीं हुए हैं? राजधानी दिल्ली में या दूसरे भी किसी शहर में किसी भी नागरिक से ये सवाल पूछेंगे तो उसका जवाब यही होगा कि मेट्रो बंद थी और पेपर लीक हुए हैं। दिल्ली और एनसीआर में रहने वाला हर व्यक्ति निजी अनुभव से जानता है कि मेट्रो की सेवा बंद थी। जहां तक इंटरनेट सेवा की बात है तो उस पर तो एक अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट गुरुवार, 15 अक्टूबर को ही छपी है, जिसके मुताबिक पूरी दुनिया में इंटरनेट बंद होने के मामले में भारत दूसरे स्थान पर है। पहले स्थान पर सैनिक तानाशाही वाला देश म्यांमार है। सो, मेट्रो बंद थी और इंटरनेट भी बंद थे।

परंतु दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर कहा है कि मेट्रो सेवा बंद नहीं थी। उसने कहा है कि सिर्फ 45 मेट्रो स्टेशनों पर एंट्री और एग्जिट बंद किया गया था। यानी मेट्रो की सेवा सीमित की गई थी। सोचें, कितना आसान है सरकार के लिए यह कह देना! 45 मेट्रो स्टेशनों पर लोग अंदर नहीं जा सकते थे और न बाहर निकल सकते थे। फिर यह सेवा सीमित करना कैसे हुआ? जिन लोगों को इन 45 मेट्रो स्टेशनों पर ट्रेन पकड़नी थी या इन स्टेशनों पर उतरना था उनके लिए तो मेट्रो बंद ही हुई न! सो, लाखों लोगों के लिए मेट्रो की सेवा बंद थी। सरकार एक तकनीकी टर्म का इस्तेमाल करके अदालत को बता रही है कि उसने अदालत की अवमानना नहीं की है। वास्तव में 10 और 11 अक्टूबर को कई इलाकों में मेट्रो बंद थी और ऐसा नहीं था कि मेट्रो ने स्टेशनों पर एंट्री और एग्जिट बंद की तो यात्रियों के लिए कोई और बंदोबस्त किया। एक स्टेशन से दूसरे स्टेशन तक पहुंचाने के लिए कोई फीडर बस सेवा नहीं चलाई गई थी। इसलिए यह कहना सरासर गलत है कि मेट्रो सेवा बंद नहीं थी। यह हलफनामा देकर झूठ बोलना है।

ऐसे ही एक रिपोर्ट आई है कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी एनटीए ने शिक्षा मामलों की संसदीय समिति के सामने कहा है कि 2017 में एनटीए के गठन के बाद से आज तक कोई पेपर लीक नहीं हुआ है। यह झूठ नहीं, बल्कि सफेद झूठ है। कांग्रेस सांसद मुकुल वासनिक की अध्यक्षता वाली कमेटी के सामने एनटीए ने कहा कि कुछ अनियमितता का शिकायत हुई है लेकिन पेपर लीक नहीं हुआ है। सवाल है कि तीन मई 2026 को हुई नीट की परीक्षा को क्यों रद्द किया गया? सात मई को पेपर लीक होने की खबर आई और 12 मई को एनटीए ने परीक्षा रद्द दी, जिसका आयोजन 21 जून को किया गया। एनटीए और शिक्षा मंत्रालय दोनों की ओर से कई बार कहा गया कि पेपर लीक होने के कारण परीक्षा रद्द हुई है। इस बार तो किसी और धांधली या अनियमितता की खबर भी नहीं थी। इसी तरह 2024 के नीट की परीक्षा पेपर लीक और धांधली दोनों कारणों से प्रभावित हुई थी और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कई जगह परीक्षा रद्द की गई। उसके बाद पेपर लीक रोकने का एक कानून बना। जिस रिपोर्ट के आधार पर केंद्र सरकार ने कानून बनाया उसमें अनियमितता को ‘पेपर लीक केस’ के तौर पर दर्ज किया गया। सोचें, नीट परीक्षा को लेकर 356 केस दर्ज हैं, जेईई मेन्स के 31, यूजीसी नेट के 26 और सीयूईटी यूजी के 14 केस दर्ज हैं। पर एनटीए कह रहा है कि सब कुछ ठीक है!

JEE Main 2027 Eligibility Criteria: 12वीं के बाद जेईई मेन करने जा रहे हैं, तो पहले करें एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया और ड्रॉप ईयर नियम की जानकारी

JEE Main 2027 Eligibility Criteria: जेईई मेन 2027 की तैयारी कर रहे परीक्षार्थियों के लिए फॉर्म आदि से जुड़ी औपचारिकताओं की शुरुआत जनवरी 2027 से होगी। लेकिन इससे पहले परीक्षार्थियों के लिए देश के प्रतिष्ठि इंजीनियरिंग कॉलेजों में प्रवेश का दरवाजा खोलने वाले इस परीक्षा से जुड़े कुछ बेहद जरूरी नियमों को जान लेना चाहिए। इनमें एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया, ड्रॉप ईयर और उम्र सीमा का नियम शामिल है। इस साल जेईई मेन सेशन 1 की परीक्षा 22 जनवरी 2027 से आयोजित की जाएगी। हालांकि, अभी एनटीए ने इसके लिए पंजीकरण की तारीख घोषित नहीं की है। अगर आप जॉइंट एंट्रेंस एग्जामिनेशन (JEE) मेन की तैयारी कर रहे हैं, तो अप्लाई करने से पहले इस पेज पर अपनी क्लास 12 पासिंग ईयर, ड्रॉप ईयर एलिजिबिलिटी और एडमिशन की जरूरतें चेक कर लें।

जेईई मेन 2027 के लिए कौन अप्लाई कर सकता है?

जिन छात्रों ने 2025 या 2026 में कक्षा 12 या उसके बराबर की परीक्षा पास की है और जो छात्र 2027 में अपनी कक्षा 12 की परीक्षा दे रहे हैं, वे जेईई मेन 2027 में शामिल होने के योग्य होंगे। योग्यता शर्तों के अनुसार, जिन कैंडिडेट्स ने 2024 या उससे पहले 12वीं कक्षा पास की है, वे 2027 की परीक्षा के लिए योग्य नहीं होंगे।

हालांकि, छात्रों को ध्यान रखना चाहिए कि जेईई मेन में शामिल होने की योग्यता और किसी खास कॉलेज में प्रवेश पाने की योग्यता दो अलग-अलग चीजें हैं। कैंडिडेट्स को अपने चुने हुए इंस्टिट्यूशन द्वारा तय एकेडमिक और सब्जेक्ट की शर्तों को भी पूरा करना होगा।

जेईई मेन 2027 ड्रॉप ईयर रूल्स

जिन छात्रों का 12वीं कक्षा के बाद ड्रॉप-ईयर है और वे 2025 या 2026 में अपनी क्वालिफाइंग परीक्षा पास करते हैं, वे जेईई मेन 2027 दे सकते हैं। उदाहरण के लिए, जो लोग 2025 में कक्षा 12 पास कर चुके हैं और इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा की तैयारी के लिए एक साल का ब्रेक लेते हैं, वे 2027 में परीक्षा दे सकते हैं। 2026 में पास होने वाले परीक्षार्थी भी आवेदन करने के लिए योग्य हैं।

जेईई मेन 2027 उम्र सीमा

योग्यता नियमों के अनुसार, जेईई मेन देने के लिए कोई एज लिमिट नहीं है। लेकिन परीक्षार्थियों को उन संस्थानों की प्रवेश जरूरतों को पूरा करना होगा जिनमें वे प्रवेश लेना चाहते हैं।

क्या आईआईटी उम्मीदवारों को जेईई मेन 2027 देना चाहिए?

आईआईटी में प्रवेश के इच्छुक छात्रों को जेईई एडवांस्ड देने के लिए जेईई मेन क्वालिफाई करना होगा। जेईई मेन, एनआईटी, आईआईआईटी और दूसरे हिस्सा लेने वाले इंजीनियरिंग कॉलेजों में सीटों के लिए कॉम्पिटिशन में भी मदद करता है। परीक्षार्थियों को सलाह दी जाती है कि किसी भी कन्फ्यूजन से बचने के लिए आवेदन करने से पहले एनटीए की आधिकारिक वेबसाइट पर ताजा योग्यता मानदंड, परीक्षा कार्यक्रम और प्रवेश के नियम चेक कर लें।

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दिल्ली के पॉल्यूशन से लड़ने की नई पहल! मिरांडा हाउस में बना कार्बन गार्डन, जानिए कैसे काम करेगा यह ग्रीन मॉडल

दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण और तापमान के बीच, हरियाली बढ़ाने की जरूरत महसूस की जा रही है। इसी दिशा में, दिल्ली यूनिवर्सिटी के मिरांडा हाउस कॉलेज ने अपने कैंपस में एक ‘कार्बन गार्डन’ बनाया है। कॉलेज का कहना है कि कार्बन सोखने की क्षमता बढ़ाने और जैव-विविधता को बढ़ावा देने के साथ-साथ, यह गार्डन छात्रों को पर्यावरण से जुड़े मुद्दों की व्यावहारिक समझ हासिल करने में भी मदद करेगा।

50 अलग-अलग प्रजातियों के पौधे लगाए गए

मिरांडा हाउस के इस कार्बन गार्डन में लगभग 50 अलग-अलग तरह के पौधे लगाए गए हैं। इनमें अलग-अलग तरह के जीवन वाले पौधे शामिल हैं, जैसे कि हाइड्रोफाइट्स (पानी में उगने वाले), जेरोफाइट्स (सूखी जगह पर उगने वाले) और मेसोफाइट्स (सामान्य नमी वाली जगह पर उगने वाले)। अमरूद और सहजन जैसी देसी प्रजातियों को भी इस गार्डन में शामिल किया गया है। कॉलेज के अनुसार, इतने तरह के पौधे लगाने का मकसद सिर्फ हरियाली बढ़ाना नहीं है, बल्कि एक छोटा इकोसिस्टम बनाना है जहां छात्र पौधों, बायोडायवर्सिटी और पर्यावरण के आपसी संबंधों को बेहतर ढंग से समझ सकें।

छात्रों के लिए बनेगा लिविंग लैब

मिरांडा हाउस का यह कार्बन गार्डन छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए एक जीवंत प्रयोगशाला (living laboratory) के तौर पर काम करेगा। यहां छात्र कार्बन सोखने की प्रक्रिया (carbon sequestration), पौधों की विविधता, इकोसिस्टम और पर्यावरण के अनुकूल तौर-तरीकों जैसे विषयों की व्यावहारिक समझ हासिल कर सकेंगे।

कॉलेज का कहना है कि इस पहल से छात्रों को क्लासरूम से बाहर, प्रकृति के बीच सीखने और रिसर्च करने का मौका मिलेगा। साथ ही, इससे पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दों के बारे में जागरूकता बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है।

प्रो. दीनबंधु साहू ने किया उद्घाटन

कार्बन गार्डन का उद्घाटन दिल्ली यूनिवर्सिटी के बॉटनी डिपार्टमेंट के हेड और रिसर्च, इनोवेशन और एंटरप्रेन्योरशिप काउंसिल के चेयरपर्सन प्रोफेसर दीनबंधु साहू ने किया। प्रोफेसर साहू भारत के पहले कार्बन गार्डन के संस्थापक भी हैं। प्रोफेसर साहू ने कहा कि प्रकृति से जुड़ाव लंबे समय से भारतीय संस्कृति और परंपराओं का अहम हिस्सा रहा है। उन्होंने आधुनिक विज्ञान और पर्यावरण की समझ को जोड़कर इस जुड़ाव को और आगे बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया। दिल्ली जैसे शहरों में ग्रीन स्पेस की अहम भूमिका पर प्रकाश डालते हुए, उन्होंने पर्यावरण संरक्षण में युवाओं की भागीदारी के महत्व पर भी जोर दिया।

मानसिक स्वास्थ्य से भी जुड़ा है गार्डन

कार्बन गार्डन के फायदे सिर्फ पर्यावरण तक ही सीमित नहीं माने जाते हैं। प्रोफेसर साहू के अनुसार, ऐसी हरी-भरी जगहें छात्रों को प्रकृति के करीब ला सकती हैं और साथ ही उनके मानसिक स्वास्थ्य और समग्र कल्याण में भी योगदान दे सकती हैं। मिरांडा हाउस की प्रिंसिपल प्रोफेसर बिजयालक्ष्मी नंदा ने कहा कि कॉलेज अपनी पर्यावरणीय जिम्मेदारी को गंभीरता से लेता है। उनका मानना है कि यह पहल छात्रों को जलवायु परिवर्तन से निपटने और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने की दिशा में सक्रिय रूप से काम करने के लिए प्रेरित कर सकती है।

दिल्ली से शुभांगी तिवारी की रिपोर्ट

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यूपीएससी के सवाल क्या एआई बना रहा है?

यह बहुत परेशान करने वाला सवाल है क्योंकि संघ लोक सेवा आयोग यानी यूपीएससी एकमात्र ऐसी संस्था है, जिस पर प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होने वाले अभ्यर्थी आज भी आंख मूंद कर भरोसा करते हैं। इसका भरोसा इतना गहरा है कि सुप्रीम कोर्ट ने दो बार अपनी सुनवाई में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी एनटीए और भारत सरकार से कहा कि वह यूपीएससी की तरह का सिस्टम बनाए। लेकिन अब यूपीएससी पर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि सवाल पेपर लीक या परीक्षा में गड़बड़ी का नहीं है। लेकिन प्रश्न पत्र तैयार करने में होने वाली गड़बड़ियों के मामले सामने आ रहे हैं और यह सवाल उठ रहा है कि क्या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से सवाल तैयार कराए जा रहे हैं?

एआई से सवाल तैयार कराने का आरोप इसलिए लगा है क्योंकि इस साल प्रीलिम्स में पूछे गए कई प्रश्न ऐसे थे, जिनमें एक से ज्यादा विकल्प सही हो सकते थे। सवाल उलझा हुआ था और जवाब में जो विकल्प दिए गए थे वो भी उलझे हुए थे। कम से कम 27 सवालों के बारे में ऐसी शिकायत मिली है। इनके बारे में छात्रों ने कहा कि या तो सवाल गलत थे या विकल्पों में कोई सही जवाब नहीं था या विकल्पों में एक से ज्यादा सही जवाब थे। चार छात्रों ने इस साल की परीक्षा के आठ सवालों को चुनौती दी है, जबकि 63 छात्रों ने 27 सवालों को चुनौती दी है। उनके 27 सवालों में चार छात्रों वाले आठ सवाल भी शामिल है। कैट में इस मामले की सुनवाई हो रही है।

NEET paper leak: सीआईएसएफ के पहरे में रहेगा एनटीए का नई दिल्ली ऑफिस, 2 से 3 महीने में पूरा होगा सुरक्षा का बंदोबस्त

NEET paper leak: नीट यूजी, यूजीसी नेट और महाराष्ट्र टीईटी के प्रश्नपत्र लीक का खुलासा होने के बाद चौरतरफा दबाव झेल रही राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। परीक्षा एजेंसी के नई दिल्ली ऑफिस की सुरक्षा व्यवस्था अब केंद्रीय सुरक्षा बलों के हाथ में होगी। एनटीए के उस हिस्से की पहरेदारी अब सेंट्रल इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी फोर्स (CISF) के करेगी, जहां गोपनीय एग्जामिनेशन मटीरियल को स्टोर किया जाता है।

अधिकारियों ने कहा कि यह तैनाती अगले दो से तीन महीनों में पूरी होने की उम्मीद है। यह कदम नीट यूजी पेपर लीक विवाद और परीक्षा में कथित गड़बड़ियों से जुड़े कई दूसरे मामलों के बाद उठाया गया है। एनटीए ने अपनी सभी संवेदनशील गतिविधियां मिंटो रोड पर भारत सरकार की प्रेस बिल्डिंग में स्थानांतरित कर दी है।

एनटीए ऑफिस में सुरक्षा के उपाय

मिंटो रोड स्थित एनटीए के नए ऑफिस पर 39 सीआईएसएफ कर्मी होंगे जो प्रवेश नियंत्रण, जांच और तलाशी के लिए जिम्मेदार होंगे। सुरक्षा जांच में एक्स-रे बैगेज स्कैनर और डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर भी शामिल होंगे, जबकि कॉन्फिडेंशियल एरिया के अंदर आने-जाने पर कड़ी नजर रखी जाएगी। एनटीए कड़े एक्सेस कंट्रोल, एन्क्रिप्शन, टैम्पर-एविडेंट स्टोरेज और इम्यूटेबल लॉग के जरिए अपनी डिजिटल सुरक्षा को भी मजबूत कर रहा है। बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन, फेशियल रिकग्निशन, सीसीटीवी और लाइव मॉनिटरिंग को भी मजबूत किया जा रहा है।

प्रश्नपत्रों की सख्त जांच के लिए बनी व्यवस्था

एजेंसी ने एक चीफ इन्फॉर्मेशन सिक्योरिटी ऑफिसर (CISO) की पोस्ट बनाई है और इंडिपेंडेंट साइबर-सिक्योरिटी ऑडिट कर रही है। सरकार ने चार-लेवल का क्वेश्चन-पेपर चेकिंग सिस्टम भी शुरू किया है और एनटीए की विशेषज्ञ और प्रशासनिक टीमों को मजबूत किया है।

कई पेपर लीक बने फैसले की वजह

यह फैसला 2026 में नीट यूजी पेपर लीक मामले के बाद आया है। सीबीआई ने 3 मई के परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र के कथित सर्कुलेशन को लेकर केस दर्ज किया था। एजेंसी ने तब से गिरफ्तारियां की हैं और केमिस्ट्री और बायोलॉजी के पेपर के कथित लीक की जांच की है। सीबीआई के मुताबिक, प्रश्नपत्र तक पहुंच रखने वाले एक केमिस्ट्री प्रवक्ता ने परीक्षा से पहले कथित तौर पर कोचिंग सेशन किए थे। जांच करने वालों ने कहा कि इन सत्र के दौरान, जिन सवालों और जवाबों पर चर्चा हुई वे परीक्षा में आए नीट यूजी पेपर से मेल खाते थे। यूजीसी नेट और महाराष्ट्र टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (TET) समेत दूसरी परीक्षाओं में भी पेपर लीक के आरोप सामने आए हैं, जहां हाल ही में दो मुख्य संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया था।

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एनटीए का ऑफिस देखेंगे सुप्रीम कोर्ट के जज

नई दिल्ली। मेडिकल में दाखिले के लिए होने वाली नीट यूजी और नीट पीजी सहित दो दर्जन से ज्यादा अखिल भारतीय परीक्षाओं का आयोजन करने वाली नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी एनटीए में सुधार का सुप्रीम कोर्ट ने मिशन बनाया है। सर्वोच्च अदालत ने कहा है एनटीए में सुधार के लिए क्या क्या किया जा रहा है इसका पूरा ब्योरा वेबसाइट पर डालना होगा। अदालत ने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर नीट परीक्षा सिस्टम की जांच के लिए जज एनटीए के ऑफिस का दौरा करेंगे। वे देखेंगे कि परीक्षा को सुरक्षित और पारदर्शी तरीके से कराने के इंतजाम वास्तव में काम कर रहे हैं या नहीं।

जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस अलोक अराधे की बेंच ने शुक्रवार को यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट और अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई की। इसमें एनटीए को भंग करने और पेपर लीक रोकने के लिए मजबूत निगरानी सिस्टम की मांग की गई है। इसी मामले की सुनवाई में 19 अगस्त को केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि नीट परीक्षा सिस्टम फूलप्रूफ है। इसमें सेंध लगाना मुश्किल है। हालांकि पिछले तीन साल में दो बार पेपर लीक हुए हैं और परीक्षा में गड़बड़ी हुई है। 2024 में कई सेंटर्स पर दोबारा परीक्षा हुई और 2026 पूरी परीक्षा ही रद्द हुई।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने एनटीए को अपने सुधारों और अब तक हुई प्रगति का ब्योरा वेबसाइट पर डालने का निर्देश दिया है। इससे परीक्षा व्यवस्था में हो रहे बदलावों की जानकारी सार्वजनिक होगी। सुनवाई के दौरान एनटीए के लिए पर्याप्त स्थायी कर्मचारी और विशेषज्ञ स्टाफ रखने की जरूरत पर चर्चा हुई। कोर्ट ने बेहतर मैनपावर, प्रशिक्षण, इंफ्रास्ट्रक्चर और संस्थानों के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत बताई।

एनटीए को मजबूत कानूनी आधार देने के लिए वैधानिक व्यवस्था पर भी विचार किया गया। कोर्ट ने कहा कि लिखित परीक्षा से डिजिटल परीक्षा की ओर बदलाव अचानक नहीं किया जा सकता। इसे धीरे धीरे लागू करना होगा, ताकि नई व्यवस्था में परेशानी न हो। सुनवाई के दौरान केंद्र ने कोर्ट को बताया कि नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता वाली उच्च अधिकारी प्राप्त पैनल की पहली अंतरिम रिपोर्ट सितंबर के अंत तक आने की संभावना है। सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर दोहराया कि नीट परीक्षा के लिए एनटीए को यूपीएससी जैसा मजबूत सिस्टम बनाना चाहिए, जिसमें परीक्षा कराने का अनुभव अधिकारियों के ट्रांसफर होने के बाद भी संस्था के पास बना रहे।

UGC-NET June 2026: तीन विषयों के री-एग्जाम की प्रोविजनल आंसर जारी, 13 सितंबर तक खुली रहेगी चैलेंज विंडो

UGC-NET June 2026: नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने यूजीसी-नेट जून 2026 के इंग्लिश, कॉमर्स और सोशियोलॉजी विषयों के री-एग्जामिनेशन के लिए प्रोविजनल आंसर-की जारी कर दी है। परीक्षा एजेंसी ने अस्थायी उत्तर कुंजी के साथ परीक्षार्थियों के रिकॉर्डेड रिस्पॉन्स भी जारी किए हैं। परीक्षा देने वाले आधिकारिक वेबसाइट पर प्रोविजनल आंसर-की और अपने रिकॉर्डेड रिस्पॉन्स देख सकते हैं। यूजीसी-नेट जून 2026 री-एग्जाम के प्रश्नों पर अगर किसी उम्मीदवार को आपत्ति है, तो वे 13 सितंबर तक उसे चुनौती दे सकते हैं।

आधिकारिक वेबसाइट पर चैलेंज विंडो 13 सितंबर को रात 11.59 बजे तक खुली रहेगी। चैलेंज करने के लिए परीक्षार्थियों को हर सवाल के लिए 200 रुपये की प्रोसेसिंग फीस देनी होगी। यूजीसी-नेट जून 2026 पुन:परीक्षा तीन विषयों इंग्लिश, कॉमर्स और सोशियोलॉजी के लिए 9 और 10 सितंबर को देश भर में अलग-अलग जगहों पर हुई थी।

आधिकारिक नोटिस के मुताबिक, चैलेंज सिर्फ ऑनलाइन मोड से ही स्वीकार किए जाएंगे। ईमेल, फैक्स या लेटर समेत किसी और तरीके से या बिना तय फीस दिए जमा किए गए चैलेंज स्वीकार नहीं किए जाएंगे। अगर विषय विशेषज्ञ किसी चैलेंज को स्वीकार करते हैं, तो उससे होने वाला करेक्शन उस विषय के सभी उम्मीदवारों पर एक समान लागू होगा। साथ ही, जिन प्रश्नों पर आपत्ति सही पाई जाएगी, उसके लिए 200 रुपये प्रति सवाल की प्रोसेसिंग फीस पूरी तरह से वापस कर दी जाएगी।

टेस्टिंग एजेंसी ने साफ किया कि चैलेंज पर विचार करने के बाद फाइनल की गई आंसर-की को फाइनल माना जाएगा। चैलेंज विंडो बंद होने या रिजल्ट घोषित होने के बाद आंसर-की के बारे में कोई चैलेंज या शिकायत नहीं सुनी जाएगी।

चैलेंज विंडो और फीस पेमेंट

चैलेंज विंडो 13 सितंबर रात 11:59 बजे तक खुली रहेगी। प्रोसेसिंग फीस का भुगतान डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड या नेट बैंकिंग से उसी डेडलाइन तक किया जा सकता है। प्रोसेसिंग फीस के भुगतान के बिना कोई चैलेंज नहीं माना जाएगा।

चुनौती की प्रक्रिया

उम्मीदवारों द्वारा जमा किए गए चैलेंज को तय विषय विशेषज्ञ सत्यापित करेंगे। अगर कोई चैलेंज मेरिट के आधार पर सही पाया जाता है, तो प्रोविजनल आंसर-की को संशोधित किया जाएगा, और रिजल्ट तैयार करने और घोषित करने के लिए उम्मीदवारों के जवाबों को संशोधित अंतिम आंसर-की के आधार पर मूल्यांकित किया जाएगा। संशोधित अंतिम आंसर की रिजल्ट घोषित होने से पहले आधिकारिक वेबसाइट पर प्रकाशितकी जाएगी। कैंडिडेट्स को सलाह दी जाती है कि वे ताजा अपडेट के लिए एनटीए और यूजीसी-नेट की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं और सिर्फ एनटीए से मिलने वाली आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें।

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UGC NET June 2026 Re-Exam: 9 और 10 सितंबर को होने वाले री-एग्जाम के लिए जारी हुआ एडमिट कार्ड, जानें कैसे मिलेगा एडमिट कार्ड

UGC NET June 2026 Re-Exam: नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने यूजीसी नेट जून 2026 के इंग्लिश, कॉमर्स और सोशियोलॉजी पेपर्स के री-एग्जाम के लिए एडमिट कार्ड जारी कर दिए हैं। ये पेपर्स 9 और 10 सितंबर को पूरे देश में होने वाले हैं। इस परीक्षा में शामिल होने वाले परीक्षार्थी अपने लॉगिन क्रेडेंशियल्स का इस्तेमाल करके ऑफिशियल वेबसाइट ugcnet.nta.nic.in से अंडरटेकिंग के साथ अपने एडमिट कार्ड डाउनलोड कर सकते हैं।

कैंडिडेट्स को सलाह दी जाती है कि वे परीक्षा के दिन किसी भी परेशानी से बचने के लिए एडमिट कार्ड पर दिए गए निर्देशों को ध्यान से पढ़ें। इनमें परीक्षा के दिन की खास गाइडलाइंस, क्या ले जाना है, रिपोर्टिंग टाइम, ड्रेस कोड और दूसरी जरूरी जानकारी शामिल है। एडमिट कार्ड डाउनलोड करते समय किसी भी तरह की दिक्कत होने या उस पर दिए गए विवरण में कोई गड़बड़ी होने पर, कैंडिडेट्स को एनटीए हेल्पडेस्क से 011-40759000 पर संपर्क करना चाहिए या ugcnet@nta.ac.in पर लिखना चाहिए।

कैंडिडेट्स को उनके परीक्षा शहर और तारीख के बारे में 1 सितंबर को जारी एडवांस सिटी इंटिमेशन स्लिप के जरिए पहले ही बता दिया गया था।

परीक्षा एजेंसी ने 28 अगस्त को 87 में से 84 सब्जेक्ट्स के यूजीसी नेट जून 2026 के रिजल्ट घोषित किए।

एनटीए को मुख्य परीक्षा में इंग्लिश, कॉमर्स और सोशियोलॉजी, तीन विषयों के पेपर में गलतियों के बारे में कई शिकायतें मिली थीं। इसके बाद परीक्षा एजेंसी ने इनके लिए दोबारा परीक्षा की घोषणा की।

इसके बाद एनटीए ने बताई गई गलतियों की जांच के लिए एक कमेटी बनाई। कमेटी ने पाया कि तीनों पेपर्स में कई फैक्ट्स, टाइपिंग और ट्रांसलेशन की गलतियां थीं। इनमें जाने-माने स्कॉलर्स के नामों की गलत स्पेलिंग, किताबों के टाइटल में गड़बड़, क्वेश्चन स्टेम्स के शब्दों में गलतियां, ग्रामर की गलतियां, जेंडर और नंबर एग्रीमेंट की गलतियां, पंक्चुएशन की गलतियां और पहले से मौजूद कॉन्सेप्ट्स के लिए बनाए गए नॉन-स्टैंडर्ड शब्द शामिल थे। इसने यह भी पाया कि पहले हुए एग्जाम्स से काफी सारे सवाल रिपीट किए गए थे।

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AYUSH PG Entrance Test 2026: आधिकारिक वेबसाइट पर देखें प्रोविजनल आंसर की, 5 सितंबर रात 11.59 बजे तक कर सकते हैं चैलेंज

AYUSH PG Entrance Test 2026: ऑल इंडिया आयुष पोस्ट ग्रेजुएट एंट्रेंस टेस्ट (AIAPGET) 2026 देने वाले परीक्षार्थियों के लिए बड़ा अपडेट है। इस परीक्षा में शामिल उम्मीदवार अस्थायी उत्तर कुंजी (Provisional Answer Key) का इंतजार कर रहे हैं। इन परीक्षार्थियों का इंतजार खत्म करते हुए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने एआईएपीजीईटी 2026 की प्रोविजनल आंसर-की जारी कर दी है। कैंडिडेट आधिकारिक पोर्टल के जरिए आंसर-की चेक कर सकते हैं। साथ ही, आंसर को अगर कोई चुनौती देना चाहते हैं, तो उसे दर्ज कर सकते हैं। टेस्टिंग एजेंसी ने आधिकारिक वेबसाइट पर रिकॉर्ड किए गए जवाबों के साथ प्रश्नपत्र भी अपलोड कर दिए हैं।

चैलेंज विंडो 5 सितंबर रात 11:59 बजे तक खुली रहेगी। कैंडिडेट इसी डेडलाइन तक चैलेंज फीस भी दे सकते हैं। किसी सवाल को चैलेंज करने के लिए, कैंडिडेट को हर सवाल के लिए 200 रुपये फीस देनी होगी। चैलेंज सिर्फ आधिकारिक पोर्टल के जरिए ऑनलाइन ही स्वीकार किए जाएंगे। प्रोसेसिंग फीस डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड या नेट बैंकिंग से दी जा सकती है। प्रोसेसिंग फीस दिए बिना कोई भी चैलेंज स्वीकार नहीं किया जाएगा। फीस किसी और तरीके से स्वीकार नहीं की जाएगी।

22 अगस्त को हुआ था एआईएपीजीईटी 2026

एनटीए ने 22 अगस्त को देश के 104 शहरों में लगभग 205 परीक्षा केंद्रों पर लगभग 51,482 कैंडिडेट के लिए एआईएपीजीईटी 2026 आयोजित किया था। यह परीक्षा कंप्यूटर-बेस्ड टेस्ट (CBT) मोड में हुई थी। इसके अलावा, 49 कैंडिडेट के लिए री-टेस्ट 1 सितंबर को राजस्थान कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग फॉर विमेन, जयपुर में कंडक्ट किया गया था।

विशेषज्ञों का पैनल करेगा चुनौती आकलन

एनटीए के मुताबिक, कैंडिडेट के दिए गए चैलेंज को विषय विशेषज्ञों का एक पैनल वेरिफाई करेगा। अगर कोई चैलेंज सही पाया जाता है, तो आंसर की को बदला जाएगा और उसी हिसाब से सभी कैंडिडेट के जवाबों पर लागू किया जाएगा। फाइनल आंसर की के आधार पर, रिजल्ट तैयार किए जाएंगे और घोषित किए जाएंगे। किसी भी कैंडिडेट को उनके चैलेंज के स्वीकार या अस्वीकार किए जाने के बारे में नहीं बताया जाएगा।

परीक्षा एजेंसी ने कहा, “चैलेंज पर विचार करने के बाद विशेषज्ञ जो आंसर की फाइनल करेंगे, वही अंतिम होगी। 5 सितंबर, रात 11:59 बजे के बाद कोई भी चैलेंज स्वीकार नहीं किया जाएगा।” अधिक जानकारी के लिए, कैंडिडेट एनटीए से 011-40759000 पर संपर्क कर सकते हैं या aiapget@nta.ac.in पर ईमेल कर सकते हैं।

परीक्षार्थियों को सलाह दी जाती है कि वे परीक्षा के बारे में ताजा जानकारी के लिए नियमित एनटीए की वेबसाइट और आधिकारिक एआईएपीजीईटी पोर्टल देखते रहें।

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