AYUSH PG Entrance Test 2026: आधिकारिक वेबसाइट पर देखें प्रोविजनल आंसर की, 5 सितंबर रात 11.59 बजे तक कर सकते हैं चैलेंज

AYUSH PG Entrance Test 2026: ऑल इंडिया आयुष पोस्ट ग्रेजुएट एंट्रेंस टेस्ट (AIAPGET) 2026 देने वाले परीक्षार्थियों के लिए बड़ा अपडेट है। इस परीक्षा में शामिल उम्मीदवार अस्थायी उत्तर कुंजी (Provisional Answer Key) का इंतजार कर रहे हैं। इन परीक्षार्थियों का इंतजार खत्म करते हुए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने एआईएपीजीईटी 2026 की प्रोविजनल आंसर-की जारी कर दी है। कैंडिडेट आधिकारिक पोर्टल के जरिए आंसर-की चेक कर सकते हैं। साथ ही, आंसर को अगर कोई चुनौती देना चाहते हैं, तो उसे दर्ज कर सकते हैं। टेस्टिंग एजेंसी ने आधिकारिक वेबसाइट पर रिकॉर्ड किए गए जवाबों के साथ प्रश्नपत्र भी अपलोड कर दिए हैं।

चैलेंज विंडो 5 सितंबर रात 11:59 बजे तक खुली रहेगी। कैंडिडेट इसी डेडलाइन तक चैलेंज फीस भी दे सकते हैं। किसी सवाल को चैलेंज करने के लिए, कैंडिडेट को हर सवाल के लिए 200 रुपये फीस देनी होगी। चैलेंज सिर्फ आधिकारिक पोर्टल के जरिए ऑनलाइन ही स्वीकार किए जाएंगे। प्रोसेसिंग फीस डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड या नेट बैंकिंग से दी जा सकती है। प्रोसेसिंग फीस दिए बिना कोई भी चैलेंज स्वीकार नहीं किया जाएगा। फीस किसी और तरीके से स्वीकार नहीं की जाएगी।

22 अगस्त को हुआ था एआईएपीजीईटी 2026

एनटीए ने 22 अगस्त को देश के 104 शहरों में लगभग 205 परीक्षा केंद्रों पर लगभग 51,482 कैंडिडेट के लिए एआईएपीजीईटी 2026 आयोजित किया था। यह परीक्षा कंप्यूटर-बेस्ड टेस्ट (CBT) मोड में हुई थी। इसके अलावा, 49 कैंडिडेट के लिए री-टेस्ट 1 सितंबर को राजस्थान कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग फॉर विमेन, जयपुर में कंडक्ट किया गया था।

विशेषज्ञों का पैनल करेगा चुनौती आकलन

एनटीए के मुताबिक, कैंडिडेट के दिए गए चैलेंज को विषय विशेषज्ञों का एक पैनल वेरिफाई करेगा। अगर कोई चैलेंज सही पाया जाता है, तो आंसर की को बदला जाएगा और उसी हिसाब से सभी कैंडिडेट के जवाबों पर लागू किया जाएगा। फाइनल आंसर की के आधार पर, रिजल्ट तैयार किए जाएंगे और घोषित किए जाएंगे। किसी भी कैंडिडेट को उनके चैलेंज के स्वीकार या अस्वीकार किए जाने के बारे में नहीं बताया जाएगा।

परीक्षा एजेंसी ने कहा, “चैलेंज पर विचार करने के बाद विशेषज्ञ जो आंसर की फाइनल करेंगे, वही अंतिम होगी। 5 सितंबर, रात 11:59 बजे के बाद कोई भी चैलेंज स्वीकार नहीं किया जाएगा।” अधिक जानकारी के लिए, कैंडिडेट एनटीए से 011-40759000 पर संपर्क कर सकते हैं या aiapget@nta.ac.in पर ईमेल कर सकते हैं।

परीक्षार्थियों को सलाह दी जाती है कि वे परीक्षा के बारे में ताजा जानकारी के लिए नियमित एनटीए की वेबसाइट और आधिकारिक एआईएपीजीईटी पोर्टल देखते रहें।

NTA advisory for NEET, JEE, CUET: एनटीए ने जारी की ग्रीवांस एडवाइजरी, छात्रों की चिंताओं के जल्दी समाधान के लिए दिया सुझाव

NTA advisory for NEET, JEE, CUET: एनटीए ने जारी की ग्रीवांस एडवाइजरी, छात्रों की चिंताओं के जल्दी समाधान के लिए दिया सुझाव

NTA advisory for NEET, JEE, CUET: नीट यूजी, जेईई और सीयूईटी जैसी बड़ी प्रवेश परीक्षाओं में शामिल देने वाले देश के लाखों-करोड़ों छात्रों की सहूलियत के लिए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने समाधान एडवाइजरी जारी की है। छात्रों को अब एनटीए को शिकायत या सवाल भेजते समय अपनी जरूरी डिटेल सही-सही साझा करनी होगी। एजेंसी द्वारा जारी नई एडवाइजरी में बताया गया है कि इन डिटेल्स में परीक्षा का नाम, आवेदन संख्या और दूसरी जरूरी जानकारी शामिल है। एनटीए ने कहा कि जानकारी गायब होने से किसी छात्र की पहचान और वेरिफिकेशन मुश्किल हो सकती है, क्योंकि लाखों उम्मीदवार इन परीक्षाओं में शामिल होते हैं।

एनटीए ने छात्रों को इन परीक्षाओं से जुड़ी किसी समस्या, शिकायत या चिंता के बारे में संपर्क करते समय कुछ आसान स्टेप्स फॉलो करने का सुझाव दिया है। इनमें शामिल हैं :

रजिस्टर्ड ईमेल ID का इस्तेमाल करें छात्र

एजेंसी ने कहा कि वह हर असली चिंता का सही और सावधानी से समाधान करना चाहता है। छात्रों को अपनी शिकायतें उसी रजिस्टर्ड ईमेल ID से भेजनी चाहिए जिसका इस्तेमाल उन्होंने परीक्षा के लिए आवेदन करते समय किया था। इससे एजेंसी को संबंधित कैंडिडेट की पहचान करने और उसे ट्रेस करने में मदद मिलेगी।

आवेदन संख्या बताना जरूरी

कैंडिडेट्स को ईमेल की सब्जेक्ट लाइन में अपना एप्लीकेशन नंबर लिखना चाहिए।

एग्जाम का नाम

अपनी चिंता से जुड़ी परीक्षा का नाम छात्रों साफ-साफ दर्ज करना होगा।

समस्या को संक्षेप में बताएं

एनटीए ने छात्रों से कहा है कि वे अपनी समस्या संक्षेप में बताएं और जहां भी लागू हो, उससे जुड़े स्क्रीनशॉट या सपोर्टिंग डॉक्यूमेंट्स अटैच करें।

शिकायत सही हेल्पडेस्क पर भेजें

छात्रों को अपनी चिंताएं उस खास परीक्षा के लिए बने हेल्पडेस्क के पंजीकृत ईमेल आईडी पर भेजनी चाहिए। एजेंसी ने कहा कि संबंधित ईमेल एड्रेस परीक्षा के इन्फॉर्मेशन बुलेटिन और उसकी ऑफिशियल वेबसाइट पर मौजूद होता है।

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NEET UG 2026 Counselling: जारी नहीं हुआ है नीट यूजी राउंड 1 काउंसलिंग रिजल्ट, एमसीसी 21 अगस्त को जारी करेगा मेरिट लिस्ट

NEET UG 2026 Counselling: नीट यूजी 2026 काउंसलिंग प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। आवेदन करने और चॉइस लॉकिंग प्रक्रिया से गुजरने के बाद छात्र अब पहले राउंड के काउंसलिंग परिणाम का इंतजार कर रहे हैं। इस मेरिट लिस्ट में नाम आने के बाद छात्र अपने आवंटित कॉलेज या संस्थान में प्रवेश की प्रक्रिया को अंतिम रूप देंगे और अपनी सीट पक्की करेंगे। लेकिन मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC) ने नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET) अंडरग्रेजुएट (UG) काउंसलिंग 2026 के पहले राउंड के रिजल्ट की तारीख बदलने का फैसला किया है।

नई घोषणा के अनुसार, नीट यूजी 2026 काउंसलिंग राउंड 1 का रिजल्ट अब 21 अगस्त को घोषित किया जाएगा। सीट आवंटन के बाद, अगर कैंडिडेट आवंटित सीट स्वीकार करते हैं, तो उन्हें 22 से 31, 2026 तक आवंटित संस्थान में रिपोर्ट करना होगा। नए कार्यक्रम के अनुसार, डेटा का वेरिफिकेशन 1 सितंबर को किया जाएगा। एमसीसी ने यह भी घोषणा की है कि राउंड 1 स्टेट काउंसलिंग प्रोसेस अब 27 अगस्त तक जारी रहेगा।

मेडिकल बॉडी ने कहा कि टाइम शेड्यूल का ईमानदारी से पालन सुनिश्चित करने और काउंसलिंग आयोजित करने के लिए उपलब्ध सीमित समय को ध्यान में रखते हुए, सभी भाग लेने वाले इंस्टीट्यूट और कॉलेजों को सभी शनिवार, रविवार और गजेटेड छुट्टियों को वर्किंग डे मानने का निर्देश दिया गया है। बदला हुआ काउंसलिंग शेड्यूल कमेटी की ऑफिशियल वेबसाइट mcc.nic.in पर उपलब्ध है। अगर किसी कैंडिडेट को सीट अलॉट हो जाती है, तो वे अपनी पसंद के हिसाब से अपना अलॉटमेंट फ्रीज या फ्लोट कर सकते हैं।

जो लोग सीट अपग्रेडेशन के लिए बाद के काउंसलिंग राउंड में हिस्सा लेने के लिए ‘फ्लोट’ ऑप्शन चुनते हैं, वे तय समयसीमा के अंदर ऑनलाइन मोड से दस्तावेज सत्यापन समेत प्रवेश की औपचारिकता पूरी कर सकेंगे। इस दौरान, उन्हें आवंटित किए गए संस्थान में फिजिकली रिपोर्ट करने, मूल दस्तावेज जमा करने या प्रवेश फीस देने की जरूरत नहीं होगी। इस साल लाए गए सुधारों के मुताबिक, जब तक वे बाद के काउंसलिंग राउंड में हिस्सा नहीं लेते, तब तक उनका अस्थायी प्रवेश वैध रहेगा।

आगे क्या?

अगर नीट यूजी काउंसलिंग राउंड 1 के बाद कोई सीट अलॉट नहीं होती है, तो कैंडिडेट नीट 2026 काउंसलिंग के अगले राउंड में हिस्सा लेने के लिए योग्य हो जाएंगे। अगर किसी कैंडिडेट को सीट अलॉट हो जाती है, तो वे अपनी पसंद के हिसाब से अपना अलॉटमेंट फ्रीज या फ्लोट कर सकते हैं। मेडिकल कमिटी के बताए गए नए नियमों के मुताबिक, अपग्रेडेशन चुनने वाले कैंडिडेट को फिजिकल रिपोर्टिंग की जरूरत नहीं है।

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नीलेकणी क्या नीट खत्म करने की सिफारिश करेंगे?

इंफोसिस के सह संस्थापक और भारत में आधार क्रांति के सूत्रधार नंदन नीलेकणी के ऊपर केंद्र सरकार ने परीक्षा प्रणाली में सुधार के सुझाव देने का जिम्मा सौंपा है। भारत की अंतरिक्ष एजेंसी इसरो के पूर्व प्रमुख एस सोमनाथ को भी इस उच्चाधिकार प्राप्त कमेटी का सदस्य बनाया गया है। पता नहीं लोगों को याद हो कि न हो, दो साल पहले इसरो के पूर्व प्रमुख के राधाकृष्णन की अध्यक्षता में परीक्षा प्रणाली में सुधार के सुझाव देने के लिए एक कमेटी बनाई गई थी। जैसे 2026 में नीट यूजी पेपर लीक के बाद यह कमेटी बनी है वैसे ही 2024 में नीट यूजी पेपर लीक के बाद वह कमेटी बनी थी। राधाकृष्ण कमेटी ने एक सौ ज्यादा सिफारिशें की थीं। एक रिपोर्ट के मुताबिक उनकी 27 सिफारिशें ऐसी हैं, जिन पर ध्यान नहीं दिया गया। कुछ सिफारिशें आंशिक तौर पर मानी गईं और 57 सिफारिशों को पूरी तरह से स्वीकार किया गया। लेकिन उसका क्या नतीजा निकला? दो साल के बाद फिर पेपर लीक हो गया!

राधाकृष्ण कमेटी ने सिफारिश की थी नीट यूजी सहित करीब 20 प्रतियोगिता परीक्षाएं कराने वाली नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी एनटीए में विषय के विशेषज्ञों को शामिल किया जाए। इस सिफारिश को स्वीकार कर लिया गया। इसके बाद भी पेपर लीक होना जारी है और दूसरी गड़बड़ियां भी हो ही रही हैं तो इसका अर्थ है कि एकमात्र समस्या यह नहीं है कि एनटीए में विषय के विशेषज्ञ नहीं हैं। समस्या संरचनात्मक और व्यवस्थागत है। अगर नंदन नीलेकणी संरचनात्मक समस्याओं को समझ कर उसे ठीक करने का सुझाव देते हैं तब तो ठीक है अन्यथा इसका भी कोई मतलब नहीं होगा।

उनके सामने सबसे पहली और बड़ी चुनौती यह है कि क्या वे अखिल भारतीय परीक्षा के सिद्धांत को खत्म करने की सिफारिश करेंगे? क्या वे कहेंगे कि एक बार में 24 लाख छात्रों वाली नीट यूजी की परीक्षा नहीं होनी चाहिए? क्या वे यह सिफारिश कर सकते हैं कि मेडिकल में दाखिले की पुरानी व्यवस्था बहाल हो और नीट यूजी की बजाय राज्यों को अपने कॉलेजों में दाखिले का अधिकार पहले जैसा दिया जाए? यानी शिक्षा और परीक्षा के मामले में राज्यों की स्वायत्तता सुनिश्चित की जाए। अगर नंदन नीलेकणी की कमेटी नीट समाप्त करने और मेडिकल में दाखिले की परीक्षा का विकेंद्रीकरण करने की सिफारिश नहीं करती है तो उनकी सिफारिशों का स्कोप बहुत सीमित हो जाएगा और तब किसी बड़े सुधार की संभावना कम हो जाएगी।

अब सवाल है कि अगर नीट समाप्त करने या नीट जैसी दूसरी अखिल भारतीय परीक्षाएं खत्म करने की सिफारिश नीलेकणी कमेटी नहीं करती है तो उसके पास क्या विकल्प बचेगा? सबसे अच्छा तो यही होगा कि नीट को समाप्त किया जाए। लेकिन अगर सरकार की ओर से कमेटी की सिफारिशों का जो स्कोप तय किया जाएगा यानी जो फ्रेमवर्क दिया जाएगा उसमें पहले ही यह स्पष्ट कर दिया जाए कि नीट की परीक्षा जारी रहेगी तो फिर नीलेकणी कमेटी को नीट को इंजीनियरिंग में दाखिले की परीक्षा जेईई की तरह दो चरणों में कराने की सिफारिश करनी चाहिए। ध्यान रहे अगले साल नीट की परीक्षा जेईई की तरह कंप्यूटर आधारित होगी और कई पालियों में होगी। हालांकि उसमें प्रश्नपत्रों की कठिनता के आधार पर अंकों के सामान्यीकरण की अलग समस्या आती है। फिर भी कंप्यूटर बेस्ड परीक्षा पेपर लीक की संभावना को कम करती है। इसके साथ साथ अगर नीट की परीक्षा भी जेईई के तरह दो चरण में हो तो पेपर लीक की संभावना और कम हो सकती है। दो चरण का अर्थ है कि पहले चरण में प्रारंभिक परीक्षा हो और दूसरे चरण में एडवांस परीक्षा हो। पहले चरण में मल्टीपल च्वाइस वाले प्रश्न हों और दूसरे चरण में सब्जेक्टिव प्रश्न पूछे जाएं।

इसके अलावा नीलेकणी कमेटी को मेडिकल की पढ़ाई की फीस को नियमित करने के बारे में भी सुझाव देने चाहिए। अभी मेडिकल की परीक्षा में सबसे ज्यादा प्रश्न पत्र इसलिए लीक होते हैं कि एक बार में परीक्षा होती है और 720 अंकों की परीक्षा में अगर अच्छे अंक आ गए तो देश के प्रीमियम संस्थान में बहुत कम फीस में पढ़ने का मौका मिलता है। अन्यथा निजी कॉलेजों में फीस इतनी ज्यादा है कि लोग स्वाभाविक रूप से पेपर लीक पर पैसा खर्च करने के लिए प्रेरित होते हैं। खुद सरकार इसी वजह से इसे हाई स्टेक यानी बड़े दांव वाली परीक्षा मानती है। नीट के बचाव में तर्क दिया जाता है कि इसमें क्वालिफाई करके गरीब बच्चे भी मेडिकल की पढ़ाई कर सकते हैं। यह गलत है। निजी मेडिकल कॉलेजों में फीस एक से डेढ़ करोड़ रुपए तक है। ऐसे में कौन गरीब अपने बच्चों को वहां पढ़ा पाएगा! अगर डोनेशन नहीं देना पड़े तब भी निजी कॉलेजों में मेडिकल की पढ़ाई का खर्च सामान्य लोगों की पहुंच से बाहर है।

बहरहाल, नीलेकणी कमेटी को सिर्फ नीट पर विचार नहीं करना है, बल्कि पूरी परीक्षा प्रणाली को दुरुस्त करने के सुझाव देने हैं। इसकी शुरुआत एनटीए से हो सकती है। भारत सरकार ने एक देश, एक परीक्षा की महत्वाकांक्षी योजना के तहत एनटीए का गठन किया। इसके बाद एक एक करके परीक्षाओं को अखिल भारतीय स्वरूप दिया जाने लगा। मेडिकल की परीक्षा के साथ साथ केंद्रीय विश्वविद्यालयों में दाखिले के लिए भी सीयूईटी की परीक्षा ली जाने लगी। इसमें अलग समस्याएं हैं। वास्तविकता यह है कि एनटीए देश में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता सुधार में शून्य योगदान दे रहा है। सो, नीलेकणी कमेटी एनटीए को खत्म करने और पुरानी विकेंद्रित परीक्षा व्यवस्था बहाल करने की सिफारिश करे। सवाल है कि अगर एनटीए को समाप्त करना उसके स्कोप ऑफ वर्क से बाहर हो तो क्या करना चाहिए? तब उसे एनटीए में सुधार की सिफारिश करनी चाहिए।

सबसे पहला सुधार तो यह जरूरी है कि एनटीए को कम से कम वैधानिक दर्जा दिया जाए। अगर सरकार चाहती है कि यूपीएससी की तरह इसकी परीक्षाएं विश्वसनीय बनें तो इसे संवैधानिक नहीं तो वैधानिक दर्जा दिया जाए। इसका अपना कैडर बने ताकि तदर्थ ढंग से काम नहीं हो। अभी इधर उधर से ले आकर अधिकारियों को रखा जाता है और गड़बड़ी होने पर बाद में उनको वापस अपने कैडर में भेज दिया जाता है। इससे जवाबदेही नहीं बनती है। इसके बाद ठेके पर नियुक्ति रोकने की सिफारिश की जाए और परीक्षा से जुड़े काम आउटसोर्स करने पर रोक लगे। यूपीएससी की तरह एनटीए का अपना बुनियादी ढांचा बने। विशेषज्ञों की नियुक्ति हो और पूरे साल इसका काम चले। जैसे यूपीएससी की परीक्षा में प्रश्न पत्र के ढेर सारे सेट बनते हैं और किसी को पता नहीं होता है कि परीक्षा में कौन से सेट का इस्तेमाल होगा वैसी व्यवस्था एनटीए द्वारा आय़ोजित की जाने वाली परीक्षाओं के लिए भी की जाए। एनटीए जिन परीक्षाओं का आयोजन करता है उसके अलावा भी कई एजेंसियां हैं, जो दाखिला और भर्ती परीक्षा आयोजित करती हैं। उनमें भी एनटीए की तर्ज पर ही सुधार की सिफारिश होनी चाहिए। हालांकि सिर्फ कमेटी की सिफारिशों से कुछ खास नहीं होगा। सरकार की मंशा और राजनीतिक इच्छाशक्ति भी होनी चाहिए तभी जरूरी सुधार होंगे।

NTA Young Professional Vacancy 2026: एनटीए ने 16 युवा पेशेवरों के पदों पर शुरू की भर्ती, यूपीएससी के प्रतिभा सेतु पोर्टल के जरिए करें आवेदन

NTA Young Professional Vacancy 2026: नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने युवा पेशवरों (यंग प्रोफेशनल YP) की भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू करने की घोषणा की है। एजेंसी ने आधिकारिक वेबसाइट पर इस भर्ती के लिए आधिकारिक नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया है। इस भर्ती प्रक्रिया के जरिए 16 यंग प्रोफेशनल (YP) के पद भरे जाएंगे। इच्छुक और योग्य उम्मीदवार यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (UPSC) प्रतिभा सेतु पोर्टल के जरिए इन पदों के लिए आवेदन कर सकते हैं।

एजेंसी के अपनी परीक्षा और शोध गतिविधियों में विस्तार के बीच इस भर्ती का मकसद शैक्षिक, कानूनी और वित्तीय मामलों में एजेंसी की स्थिति मजबूत करना है। ऑफिशियल नोटिफिकेशन के मुताबिक, ये पद तीन स्ट्रीम में उपलब्ध हैं। एकेडमिक रिसर्च में 12 पद, लीगल रिसर्च में 2 पद, और फाइनेंस और अकाउंट्स रिसर्च में 2 पद हैं। चयनित उम्मीदवार दिल्ली में एनटीए मुख्यालय में काम करेंगे। आधिकारिक काम के आधार पर कभी-कभी भारत के अंदर ट्रैवल भी करना पड़ सकता है। एजेंसी के साथ युवा पेशेवरों का जुड़ाव शुरू में 24 महीने के लिए होगा और प्रदर्शन और ऑर्गेनाइजेशनल जरूरतों के आधार पर इसे 12 महीने और बढ़ाया जा सकता है।

वैकेंसी डिटेल्स

स्ट्रीम पोस्ट की संख्या

एकेडमिक रिसर्च 12

लीगल रिसर्च 2

फाइनेंस और अकाउंट्स रिसर्च 2

कुल 16

आवेदन के लिए जरूरी योग्यता

सिर्फ यूपीएससी के प्रतिभा सेतु पोर्टल पर पंजीकृत उम्मीदवारों के आवेदन स्वीकार किए जाएंगे।

एकेडमिक रिसर्च

  • कैंडिडेट्स को सिविल सेवा परीक्षा में शामिल होना चाहिए और प्रतिभा सेतु पोर्टल पर लिस्टेड होना चाहिए।
  • बेहतर होगा कि उनके पास संबंधित विषय में पोस्टग्रेजुएट डिग्री हो।
  • जिन कैंडिडेट्स के पास डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी (PhD) डिग्री या रिसर्च और टीचिंग का अनुभव है, उन्हें प्राथमिकता दी जाएगी।

लीगल रिसर्च

  • कैंडिडेट्स के पास सिविल सेवा परीक्षा में वैकल्पिक विषया के तौर पर लॉ होना चाहिए।
  • किसी मान्यता प्रापत विश्वविद्यालय से मास्टर ऑफ लॉज (LLM) डिग्री होनी चाहिए।
  • लीगल रिसर्च या लिटिगेशन में अनुभव वाले उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी जाएगी।

फाइनेंस और अकाउंट्स रिसर्च

  • भर्ती प्रक्रिया में शामिल उम्मीदवारों को सीएसई में शामिल होना और प्रतिभा सेतु पोर्टल पर होना जरूरी है।
  • कॉमर्स, इकोनॉमिक्स, फाइनेंस या इससे जुड़े सब्जेक्ट में पोस्टग्रेजुएट डिग्री हो, या चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA), कॉस्ट एंड मैनेजमेंट अकाउंटेंट (CMA) या कंपनी सेक्रेटरी (CS) जैसी प्रोफेशनल क्वालिफिकेशन हो।
  • फाइनेंस, बजटिंग या ऑडिटिंग में अनुभव वाले उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी जाएगी।

कैंडिडेट्स की उम्र भी यूपीएससी प्रतिभा सेतु स्कीम के तहत तय उम्र सीमा के अंदर होनी चाहिए।

सैलरी और कार्यकाल

चयनित उम्मीदवारों को ₹80,000 का फिक्स्ड मंथली सैलरी। शुरुआती कॉन्ट्रैक्ट 24 महीने का होगा, जिसे परफॉर्मेंस के आधार पर 36 महीने तक बढ़ाया जा सकता है। साल में प्रो-राटा बेसिस पर आठ दिन की छुट्टी। दिल्ली में एनटीए ऑफिस में फुल-टाइम, पांच दिन का वर्क वीक। नोटिफिकेशन में यह साफ किया गया है कि यह एंगेजमेंट पूरी तरह से कॉन्ट्रैक्ट पर है और सरकार या एनटीए में स्थायी नियुक्ति की गारंटी नहीं देता है।

चयन प्रक्रिया

एलिजिबल कैंडिडेट्स को उनकी प्रोफाइल और रिलेवेंट स्ट्रीम के आधार पर शॉर्टलिस्ट करना।

एक इंटरव्यू, जो पर्सनली या वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हो सकता है।

अगर जरूरी हो, तो एनटीए अंतिम चयन से पहले एक लिखित परीक्षा या टास्क-बेस्ड असेसमेंट भी कर सकता है।

एनटीए ने यह भी कहा है कि सिर्फ एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया पूरा करने से शॉर्टलिस्टिंग या चयन की गारंटी नहीं मिलती है। एजेंसी बिना कोई कारण बताए वैकेंसी की संख्या बदलने या किसी भी पोस्ट को न भरने का अधिकार रखती है।

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NEET Paper Leak Row: NTA के 47 अफसर बर्खास्त, पेपर लीक मामले में शिक्षा मंत्रालय का बड़ा एक्श

राजधानी दिल्ली में चल रहे छात्रों के प्रदर्शन के बीच देश की परीक्षा प्रणाली को और मजबूत बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। NEET पेपर लीक मामले में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने 47 अधिकारियों को बर्खास्त कर दिया है। जानकारी के मुताबिक, बर्खास्त अधिकारियों में से कुछ के खिलाफ केस भी दर्ज किया जा सकता है। मुताबिक यह कदम NTA में बड़े पैमाने पर हो रहे बदलाव के तहत उठाया गया है। NTA में सुधार के लिए जल्द ही और एक्शन लिए जाएंगे। एक दिन पहले सरकार ने गुरुवार को शिक्षा मंत्रालय के दो सचिवों को बदला था

NTA से 47 अधिकारी हटाए गए

शिक्षा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, देश की परीक्षा प्रणाली को और मजबूत बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। इसी के तहत राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) ने शुक्रवार को 47 अधिकारियों को नौकरी से हटा दिया। सूत्रों का कहना है कि इनमें से कुछ अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी की जा सकती है। सरकार एजेंसी के भीतर जवाबदेही तय करने और व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने पर जोर दे रही है।

बताया जा रहा है कि आने वाले समय में एनटीए में और भी बड़े सुधार किए जा सकते हैं। यह कार्रवाई एजेंसी में व्यापक बदलाव की योजना का हिस्सा है। हाल के दिनों में परीक्षा पेपर लीक के विवादों के बाद एनटीए पर सवाल उठे थे। अब सरकार एजेंसी का पूरी तरह से पुनर्गठन करने की तैयारी में है, जिसे अगले महीने लागू किया जा सकता है।

एनटीए के आउटसोर्सिंग सिस्टम में होगा बड़ा बदलाव

सूत्रों के मुताबिक, सरकार का सबसे बड़ा फोकस राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के आउटसोर्सिंग मॉडल में बदलाव करना है। परीक्षा से जुड़े कई काम बाहरी एजेंसियों के जरिए कराए जाते हैं। अब इन प्रक्रियाओं में बदलाव कर निगरानी बढ़ाने, जवाबदेही तय करने और परीक्षा आयोजित करने में सामने आई कमियों को दूर करने की तैयारी है। बताया जा रहा है कि ये बदलाव एक विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों के आधार पर किए जाएंगे। सरकार का लक्ष्य ऐसी परीक्षा व्यवस्था तैयार करना है, जो ज्यादा सुरक्षित, पारदर्शी और पेपर लीक जैसी घटनाओं से पूरी तरह सुरक्षित हो।

लीक-प्रूफ परीक्षा प्रणाली बनाने की तैयारी

पेपर लीक के मामलों को लेकर हुए विवाद के बाद केंद्र सरकार अब पूरी परीक्षा व्यवस्था को ज्यादा सुरक्षित बनाने की तैयारी में है। सरकार का लक्ष्य ऐसी लीक-प्रूफ परीक्षा प्रणाली तैयार करना है, जिसमें पेपर लीक जैसी घटनाओं की गुंजाइश न रहे। इसके लिए तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर कई बड़े बदलाव किए जाएंगे। साथ ही, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) में पारदर्शिता, जवाबदेही और कामकाज की क्षमता भी बढ़ाई जाएगी।

ये सुधार नीट-यूजी 2026 पेपर लीक विवाद के बाद सामने आए सवालों को देखते हुए किए जा रहे हैं। इस मामले ने देशभर में नाराजगी पैदा की थी और सुरक्षित व भरोसेमंद परीक्षा प्रणाली की मांग तेज हो गई थी। सरकार का मानना है कि इन बदलावों से एनटीए के काम करने का तरीका पूरी तरह बदलेगा। सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी, अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी और राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं पर छात्रों का भरोसा फिर से कायम होगा। फिलहाल राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) देशभर में जेईई, नीट, सीयूईटी समेत 15 से 20 राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश और भर्ती परीक्षाएं आयोजित करती है।

NEET पेपर लीक विवाद के बीच शिक्षा मंत्रालय का बड़ा एक्शन, NTA के 47 अधिकारियों पर कार्रवाई

सीजेपी प्रोस्टेट के बीच शिक्षा मंत्रालय ने एनटीए को लेकर बड़ा एक्शन लिया गया है। एनटीए के 47 अधिकारियों को बर्खास्त किया गया है। कुछ अफसरों पर कानूनी कार्रवाई भी की गई है। माना जा रहा है कि यह कार्रवाई NTA में बड़े सुधार और जवाबदेही तय करने के लिए शुरू किए गए बड़े अभियान का हिस्सा है।

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इससे पहले केंद्रीय मंत्रिमंडल ने प्रश्नपत्र लीक के मामलों में कड़ी सजा का प्रावधान सुनिश्चित करने के लिए एक विधेयक के मसौदे को शुक्रवार को मंजूरी दे दी। 

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आधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार को घोषणा की थी कि अगले हफ्ते संसद में एक विधेयक पेश किया जाएगा, जिसमें प्रश्नपत्र लीक के खिलाफ सख्त प्रावधान होंगे। इस घोषणा के कुछ घंटे बाद मंत्रिमंडल ने मसौदे को मंजूरी दी।

‘शॉर्टकट मत अपनाओं…’, CJP प्रोटेस्ट के बीच सचिन तेंदुलकर का बड़ा संदेश

दिल्ली के जंतर-मंतर पर CJP के नेतृत्व में छात्रों का प्रदर्शन 20 जून से जारी है। वहीं पूर्व भारतीय क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर ने प्रदर्शन कर रहे स्टूडेंट्स की चिंताओं और शिक्षा व्यवस्था को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर अपनी बात रखी है। उन्होंने अपने पिता को याद करते हुए कहा कि असफल हो जाने में कोई बुराई नहीं है, लेकिन चीटिंग या छल करना बिल्कुल गलत है। सचिन तेंदुलकर ने सभी पक्षों से शांति, आपसी सम्मान और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की।

सचिन तेंदुलकर ने छात्रों की पीड़ा पर जताई चिंता

सचिन तेंदुलकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, “मेरे पिता प्रोफेसर थे। उन्होंने मुझे बचपन से सिखाया था कि असफल होना गलत नहीं है, लेकिन नकल करना गलत है। कभी भी शॉर्टकट का रास्ता नहीं अपनाना चाहिए।” उन्होंने कहा कि समाज के जिम्मेदार लोगों का कर्तव्य है कि वे सही मूल्यों को बढ़ावा दें। अगर मेहनत से ज्यादा नतीजों को महत्व दिया जाएगा, तो लोग योग्यता के बजाय शॉर्टकट अपनाने लगेंगे। सचिन ने कहा कि छात्रों की निराशा समझी जा सकती है, क्योंकि उन्हें लग रहा है कि उनकी मेहनत का सही फल नहीं मिला।

पेपर लीक के बाद बढ़ा विरोध

नीट-यूजी 2026 का पेपर लीक होने और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) द्वारा दोबारा परीक्षा कराने के फैसले के बाद देशभर में विरोध शुरू हो गया। इसी दौरान इस मामले को लेकर 20 से ज्यादा छात्रों की आत्महत्या की घटनाओं का भी जिक्र हुआ। इस माहौल में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) को सोशल मीडिया पर काफी समर्थन मिला और संगठन ने शांतिपूर्ण धरना शुरू किया। नीट पेपर लीक मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) कर रही है। वहीं, केंद्र सरकार ने कहा है कि, पेपर लीक के दोषियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।

सचिन ने युवाओं का हौसला बढ़ाने की अपील की

सचिन तेंदुलकर ने कहा कि हम सभी की जिम्मेदारी है कि छात्रों को दोबारा ऐसी निराशा का सामना न करना पड़े। उन्होंने कहा, “भारत के युवा सपनों और ऊर्जा से भरे हुए हैं। वही देश का भविष्य हैं। माता-पिता, शिक्षक, दोस्त, परिवार, स्कूल और प्रशासन—सभी की जिम्मेदारी है कि युवाओं का हौसला बढ़ाएं और उन्हें सही दिशा दें।” उन्होंने कहा कि ऐसा माहौल बनाया जाना चाहिए, जहां मेहनत का सम्मान हो, ईमानदारी को बढ़ावा मिले और योग्यता के आधार पर सफलता मिले। सचिन ने भरोसा जताया कि सभी मिलकर ऐसा समाधान निकालेंगे, जिससे बच्चों का भविष्य सुरक्षित रहेगा और उनका विश्वास बना रहेगा।

CBSE’s three-language policy: सुप्रीम कोर्ट ने सीबीएसई की 3 भाषा नीति पर जताई चिंता, तमिलनाडु में जेएनवी मामले में सुनवाई के दौरान की टिप्पणी

CBSE’s three-language policy: सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को एक अन्य मामले की सुनवाई के दौरान सीबीएसई बोर्ड के स्कूलों में 9वीं कक्षा में तीसरी भाषा लागू करने के फैसले पर चिंता जताई है। जस्टिस नागरत्ना ने तीसरी भाषा शुरू करने के समय पर कई बातें कहीं। उन्होंने कहा कि इससे बोर्ड परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों पर बेवजह का तनाव पड़ता है।

जस्टिस बीवी नागरत्ना ने यह बात तमिलनाडु सरकार अपील पर सुनवाई करते हुए कही है। तमिलनाडु सरकार ने मद्रास हाई कोर्ट के उस निर्देश के खिलाफ अपील की थी, जिसमें राज्य के हर जिले में जवाहर नवोदय विद्यालय (JNV) के निर्माण को आसान बनाने को कहा गया था। तमिलनाडु ने इन स्कूलों की थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी को लेकर चिंताओं का हवाला देते हुए लगातार जेएनवी बनाने का विरोध किया है। यह मामला सीधी तौर पर सीबीएसई बोर्ड की तीन भाषा नीति से जुड़ा हुआ नहीं है। लेकिन जस्टिस नागरत्ना ने तीसरी भाषा शुरू करने के समय पर कई बातें कहीं।

सीबीएसई बोर्ड की की थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी को अभी चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच के सामने अलग-अलग जनहित याचिकाओं में चुनौती दी गई है। बेंच ने पॉलिसी को लागू करने पर रोक लगाने से मना कर दिया है और मामले की सुनवाई अगले हफ्ते के लिए लिस्ट कर दी है।

तमिलनाडु में जेएनवी बनाने पर रोक की अपील पर सुनवाई के दौरान, तमिलनाडु सरकार के वकील ने कहा कि राज्य का एतराज मुख्य रूप से तीन-भाषा पॉलिसी से जुड़ा है। जस्टिस नागरत्ना ने साफ किया कि पॉलिसी में हिंदी को तीसरी भाषा के तौर पर जरूरी नहीं बनाया गया है। उन्होंने कहा, “राज्य की भाषा पढ़ाई जानी चाहिए, इंग्लिश पढ़ाई जानी चाहिए, और कोई भी तीसरी भाषा। इसमें हिंदी नहीं लिखा है।”

रेस्पोंडेंट (हाई कोर्ट में NGO पिटीशनर) की तरफ से पेश वकील जी. प्रियदर्शिनी ने बताया कि एनईपी में साफ तौर पर कहा गया है कि किसी भी राज्य पर कोई भी भाषा नहीं थोपी जानी चाहिए। जवाब में, जस्टिस नागरत्ना ने राज्य से पूछा, “आप हिंदी नहीं चाहते, लेकिन अगर यह संस्कृत है, तो क्या दिक्कत है?” तमिलनाडु के वकील ने जवाब दिया कि तीसरी भाषा सिर्फ कक्षा 9 से जरूरी हो जाती है।

जस्टिस नागरत्ना ने कहा, “नहीं, यह बहुत बुरा है। 9वीं कक्षा काफी तनाव वाली होती है। आप 9वीं में एक नई भाषा क्यों शुरू करते हैं? आप इसे छठी कक्षा में शुरू करें।”

अपनी स्कूलिंग के अनुभव बताते हुए, जज ने याद किया कि उनके स्कूल के छात्रों ने मिडिल स्कूल के दौरान तीसरी भाषा सीखना शुरू कर दिया था क्योंकि एसएसएलसी परीक्षा के लिए यह जरूरी था। “यह उन लोगों के लिए कन्नड़ थी जिनकी दूसरी भाषा हिंदी थी और इसका उल्टा भी। संस्कृत भी थी, इसलिए आपके पास तीसरी भाषा हो सकती थी। जितना पहले हो, उतना अच्छा।” केंद्र सरकार को संबोधित करते हुए, जस्टिस नागरत्ना ने आगे कहा, “भारत सरकार, कृपया 9वीं कक्षा में तीसरी भाषा न रखें। सीबीएसई, आईसीएसई और स्टेट बोर्ड में 10वीं कक्षा एक बोर्ड परीक्षा है। 8वीं कक्षा के आखिर से, प्रेशर शुरू हो जाता है।”

जस्टिस नागरत्ना ने तमिलनाडु सरकार को यह भी सलाह दी कि वह सिर्फ इसलिए सेंट्रल स्कीम्स को रिजेक्ट न करे क्योंकि वे यूनियन गवर्नमेंट से आती हैं। उन्होंने राज्य से कहा, “आपका अपना एजुकेशन सिस्टम हो सकता है, लेकिन केंद्र सरकार के स्कूलों को न रोकें,” बाद में उन्होंने कहा, “यह रवैया न रखें कि यह केंद्र सरकार है, तो हम इसे क्यों मानें।” बेंच में जस्टिस आर महादेवन भी थे। बेंच ने कहा कि जवाहर नवोदय विद्यालय बनाने पर केंद्र सरकार और तमिलनाडु सरकार के बीच बातचीत अभी भी चल रही है।

NEET UG 2026 refund: नीट यूजी फीस रिफंड के लिए अब तक सिर्फ 52% ने किया अप्लाई, एनटीए ने आखिरी बार बैंक डिटेल देने की डेट बढ़ाकर 31 जुलाई की

NEET UG 2026 refund: नीट यूजी फीस रिफंड के लिए अब तक सिर्फ 52% ने किया अप्लाई, एनटीए ने आखिरी बार बैंक डिटेल देने की डेट बढ़ाकर 31 जुलाई की

NEET UG 2026 refund: नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने नीट यूजी 2026 के उम्मीदवारों के लिए एग्जाम फीस रिफंड के लिए अपनी बैंक डिटेल्स जमा या अपडेट करने की डेडलाइन एक बार फिर बढ़ाने का फैसला किया है। यह फैसला इसलिए लिया गया क्योंकि मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 50% से ज्यादा योग्य उम्मीदवार पिछली डेडलाइन तक अपनी बैंकिंग डिटेल्स जमा नहीं कर पाए थे। समय बढ़ाने से उम्मीदवारों को फीस वापसी की प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरा करने का दूसरा मौका मिलता है।

52% उम्मीदवारों ने बैंक डिटेल्स दी हैं

एनटीए ने बताया कि 14 जुलाई, 2026 तक, सिर्फ 11,46,401 उम्मीदवारों ने अपनी बैंक डिटेल्स जमा की हैं। एजेंसी ने उन लोगों के लिए रिफंड प्रक्रिया आगे बढ़ानी शुरू कर दी है जिन्होंने अपनी बैंक खाते की जानकारी सफलतापूर्वक अपडेट कर ली है। जिन उम्मीदवारों ने अभी तक प्रक्रिया पूरी नहीं की है, उनसे जल्द से जल्द अपनी डिटेल्स जमा करने का आग्रह किया गया है।

नीट यूजी 2026 रिफंड की डेडलाइन बढ़ाई गई

एनटीए ने अब बैंक खाते की जानकारी अपडेट या जमा करने की आखिरी तारीख 31 जुलाई, 2026 रात 11:50 बजे तक बढ़ा दी है। पिछली डेडलाइन 14 जुलाई थी। यह एक्सटेंशन इसलिए दिया गया है ताकि सभी पात्र उम्मीदवारों को उनकी परीक्षा फीस का रिफंड मिल जाए। जो परीक्षार्थी रिवाइज्ड डेडलाइन से पहले अपने बैंक अकाउंट की डिटेल्स अपडेट नहीं करते हैं, उन्हें रिफंड मिलने में देरी हो सकती है।

कैंडिडेट्स को रिफंड क्यों मिल रहा है?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नीट यूजी 2026 पहले 3 मई, 2026 को आयोजित की गई थी। लेकिन पेपर लीक होने के दावों के कारण, इसे रद्द कर दिया गया और 21 जून, 2026 को एक बार फिर से नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट आयोजित किया गया। परीक्षा रद्द होने की सूचना के साथ ही एनटीए और सरकारी ने सभी परीक्षार्थियों को परीक्षा शुल्क वापस करने का फैसला किया, जिसके तहत यह प्रक्रिया की का जा रही है। रिफंड पाने के लिए 03 मई 2026 को हुई पहली परीक्षा में शामिल सभी परीक्षार्थियों को एनटीए नीट के आधिकारिक पोर्टल पर अपने बैंक संबंधी जानकारी को अपडेट या सुधार करना होगा। परीक्षा के बाद सभी उम्मीदवारों को मुआवजा सुनिश्चित करने के लिए एनटीए ने परीक्षा शुल्क वापसरी की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया है। रिफंड सीधे कैंडिडेट्स द्वारा दिए गए बैंक अकाउंट्स में ट्रांसफर किया जा रहा है।

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