NTA advisory for NEET, JEE, CUET: एनटीए ने जारी की ग्रीवांस एडवाइजरी, छात्रों की चिंताओं के जल्दी समाधान के लिए दिया सुझाव

NTA advisory for NEET, JEE, CUET: नीट यूजी, जेईई और सीयूईटी जैसी बड़ी प्रवेश परीक्षाओं में शामिल देने वाले देश के लाखों-करोड़ों छात्रों की सहूलियत के लिए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने समाधान एडवाइजरी जारी की है। छात्रों को अब एनटीए को शिकायत या सवाल भेजते समय अपनी जरूरी डिटेल सही-सही साझा करनी होगी। एजेंसी द्वारा जारी नई एडवाइजरी में बताया गया है कि इन डिटेल्स में परीक्षा का नाम, आवेदन संख्या और दूसरी जरूरी जानकारी शामिल है। एनटीए ने कहा कि जानकारी गायब होने से किसी छात्र की पहचान और वेरिफिकेशन मुश्किल हो सकती है, क्योंकि लाखों उम्मीदवार इन परीक्षाओं में शामिल होते हैं।

एनटीए ने छात्रों को इन परीक्षाओं से जुड़ी किसी समस्या, शिकायत या चिंता के बारे में संपर्क करते समय कुछ आसान स्टेप्स फॉलो करने का सुझाव दिया है। इनमें शामिल हैं :

रजिस्टर्ड ईमेल ID का इस्तेमाल करें छात्र

एजेंसी ने कहा कि वह हर असली चिंता का सही और सावधानी से समाधान करना चाहता है। छात्रों को अपनी शिकायतें उसी रजिस्टर्ड ईमेल ID से भेजनी चाहिए जिसका इस्तेमाल उन्होंने परीक्षा के लिए आवेदन करते समय किया था। इससे एजेंसी को संबंधित कैंडिडेट की पहचान करने और उसे ट्रेस करने में मदद मिलेगी।

आवेदन संख्या बताना जरूरी

कैंडिडेट्स को ईमेल की सब्जेक्ट लाइन में अपना एप्लीकेशन नंबर लिखना चाहिए।

एग्जाम का नाम

अपनी चिंता से जुड़ी परीक्षा का नाम छात्रों साफ-साफ दर्ज करना होगा।

समस्या को संक्षेप में बताएं

एनटीए ने छात्रों से कहा है कि वे अपनी समस्या संक्षेप में बताएं और जहां भी लागू हो, उससे जुड़े स्क्रीनशॉट या सपोर्टिंग डॉक्यूमेंट्स अटैच करें।

शिकायत सही हेल्पडेस्क पर भेजें

छात्रों को अपनी चिंताएं उस खास परीक्षा के लिए बने हेल्पडेस्क के पंजीकृत ईमेल आईडी पर भेजनी चाहिए। एजेंसी ने कहा कि संबंधित ईमेल एड्रेस परीक्षा के इन्फॉर्मेशन बुलेटिन और उसकी ऑफिशियल वेबसाइट पर मौजूद होता है।

International Earth Science Olympiad: 19वें अंतरराष्ट्रीय ओलंपियाड में भारतीय छात्रों ने जीते 9 मेडल, 4 गोल्ड मेडल के साथ रहा अब तक का बेस्ट प्रदर्शन

International Earth Science Olympiad: 19वें अंतरराष्ट्रीय ओलंपियाड में भारतीय छात्रों ने जीते 9 मेडल, 4 गोल्ड मेडल के साथ रहा अब तक का बेस्ट प्रदर्शन

International Earth Science Olympiad: भारत ने इंटरनेशनल अर्थ साइंस ओलंपियाड (IESO) में अपना अब तक का सबसे अच्छा प्रदर्शन करते हुए 9 मेडल अपने नाम किए हैं। 19वीं इंटरनेशनल अर्थ साइंस ओलंपियाड प्रतियोगिता 20 से 27 अगस्त 2026 के बीच इटली के ट्यूरिम में आयोजित की गई थी। इसमें चार सदस्यों वाली भारतीय टीम ने अलग-अलग कॉम्पिटिशन में 4 गोल्ड, 3 सिल्वर और 2 ब्रॉन्ज मेडल जीते।

19वें इंटरनेशनल अर्थ साइंस ओलंपियाड में शामिल 4 सदस्यीय भारतीय टीम में सौमिक मंडल, आरोन मैती, ऋद्धि रंजन और एमडी एहतेशाम रिजवी शामिल थे। इंटरनेशनल कॉम्पिटिशन के लिए चुने जाने से पहले स्टूडेंट्स ने महाराजा सयाजीराव यूनिवर्सिटी ऑफ बड़ौदा के जियोलॉजी डिपार्टमेंट में तीन हफ्ते का प्रशिक्षण और चयन प्रोग्राम आयोजित किया गया था।

इटली के ट्यूरिन में हुए 19वें इंटरनेशनल अर्थ साइंस ओलंपियाड में भारतीय छात्रों ने लिखित और प्रैक्टिकल परीक्षा, इंटरनेशनल टीम फील्ड इन्वेस्टिगेशन और अर्थ साइंस प्रोजेक्ट कॉम्पिटिशन में मेडल जीते। 19वें इंटरनेशनल अर्थ साइंस ओलंपियाड में नौ मेडल की जीत भारत का इस प्रतियोगिता में अब तक का बेस्ट प्रदर्शन माना जा रहा है। इससे पहले 2025 संस्करण में भारतीय छात्रों ने सात मेडल जीते थे। इन-पर्सन IESO में भारत का पिछला सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 2019 में 10 मेडल का था। हालांकि, 2026 के नतीजों को प्रतियोगिता में शामिल टीम का देश का अब तक का सबसे अच्छा प्रदर्शन बताया गया है।

17,000 उम्मीदवारों में से चुने गए छात्र

भारतीय टीम में शामिल चार छात्रों को राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित चयन प्रक्रिया के जरिए चुना गया। इस प्रक्रिया में करीब 17,000 छात्रों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला। बाद में उन्होंने 20 मई से 11 जून, 2026 तक यूनिवर्सिटी में इंटेंसिव ट्रेनिंग प्रोग्राम में हिस्सा लिया।

इंटरनेशनल अर्थ साइंस ओलंपियाड स्कूल छात्रों को अर्थ साइंस से जुड़े क्षेत्र में मुकाबला करने का मौका देता है। इस प्रतियोगिता में जियोलॉजी, जियोफिजिक्स, मेटियोरोलॉजी, ओशनोग्राफी और एनवायर्नमेंटल साइंस से जुड़े विषय और गतिविधि शामिल हैं। फाइनल टीम चुने जाने से पहले भारत की चयन प्रक्रिया में एक नेशनल एंट्रेंस टेस्ट, एक ट्रेनिंग कैंप और इंडियन नेशनल अर्थ साइंस ओलंपियाड शामिल हैं। भारतीय छात्रों की यह उपलब्धि इंटरनेशनल साइंस ओलंपियाड स्टेज पर भारतीय स्कूली छात्रों के एक और मजबूत प्रदर्शन को जोड़ती है।

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जानिए इतिहास के सबसे तेज धमाके के बारे में, जिसने दो दिन तक रोक दी सूरज की रोशनी!

इंडोनेशिया का एक्टिव ज्वालामुखीय द्वीप अनाक क्राकाटाउ एक बार फिर विस्फोटों के कारण चर्चा में है। इस हफ्ते हुए कई विस्फोटों के दौरान ज्वालामुखी से राख का गुबार करीब 250 मीटर तक आसमान में उठता देखा गया। हालांकि, एक्सपर्ट का कहना है कि फिलहाल आसपास के लोगों के लिए कोई खतरा नहीं है। आइये जानते है इसके बारे में और भी खास बातें:

1883 का विनाशकारी क्राकाटोआ विस्फोट

Anak Krakatau at highest alert | WIRED

इंडोनेशिया के क्राकाटोआ ज्वालामुखी में अगस्त 1883 में इतिहास के सबसे भीषण विस्फोटों में से एक हुआ। इस विस्फोट ने महज 48 घंटों में 36,000 से ज्यादा लोगों की जान ले ली और करीब 165 गांव पूरी तरह तबाह हो गए। इसी विस्फोट के बाद विशाल काल्डेरा बना, जिससे बाद में अनाक क्राकाटाउ का जन्म हुआ। इसे दुनिया की सबसे घातक प्राकृतिक आपदाओं में गिना जाता है।

दो दिन तक नहीं दिखा सूरज

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26 अगस्त 1883 को शुरू हुए विस्फोट के बाद राख और धूल का विशाल गुबार करीब 48 किलोमीटर ऊंचाई तक पहुंच गया। राख का बादल लगभग 3 लाख वर्ग मील क्षेत्र में फैल गया, जिससे पूरे इलाके में दो दिनों से ज्यादा समय तक घना अंधेरा छाया रहा। लोगों को दिन में भी कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। यह घटना इतिहास की सबसे भयावह ज्वालामुखी आपदाओं में रिकॉर्ड है।

धमाका जिसकी आवाज़ 4,600 किलोमीटर दूर तक सुनाई दी

जब इस दहकते ज्वालामुखी पर गिरी बिजली, देखिए अद्भुत तस्वीरें - Japan: See Photos Of Japanese Volcanic Eruption - Amar Ujala Hindi News Live

27 अगस्त को हुए सबसे बड़े विस्फोट की आवाज़ इतनी तेज थी कि इसे ऑस्ट्रेलिया और मॉरीशस तक सुना गया, जो लगभग 4,600 किलोमीटर दूर हैं। इसे अब तक दर्ज मानव इतिहास की सबसे तेज आवाज़ों में से एक माना जाता है। विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि पूरे द्वीप का बड़ा हिस्सा उड़ गया। इसकी गूंज ने दुनिया को हैरान कर दिया।

सुनामी ने मचाई सबसे ज्यादा तबाही

Tsunami:नए शोध में डराने वाला खुलासा, आएगी भयावह सुनामी, तबाह हो जाएगा दुनिया का सबसे शक्तिशाली देश - Tsunami Disaster Predicted In Us America Know About New Study Facts In Hindi -

ज्वालामुखी विस्फोट के बाद समुद्र में गिरे लावा और चट्टानों से कई विशाल सुनामी लहरें उठीं। इन लहरों ने तटीय इलाकों को तबाह कर दिया और करीब 34,000 लोगों की मौत केवल सुनामी से हुई। कई शहर और गांव समुद्र में समा गए। जो लोग सुनामी से बच निकले, उनमें से कई पायरोक्लास्टिक फ्लो की चपेट में आ गए।

पूरी दुनिया के मौसम पर पड़ा असर

This is the crater created by Mount Tambora's eruption in 1815 was the largest in recorded history. It caused a 'year without a summer,' leading to global crop failures and food shortages. :

विस्फोट से निकली भारी मात्रा में राख वातावरण की ऊपरी परतों तक पहुंच गई और पूरी दुनिया में फैल गई। इसकी वजह से वैश्विक औसत टेम्परेचर लगभग 0.5 डिग्री सेल्सियस तक घट गया। कई वर्षों तक सूर्योदय और सूर्यास्त का रंग गहरा लाल दिखाई देता रहा। वैज्ञानिकों के अनुसार, वातावरण सामान्य होने में करीब पांच साल लगे।

‘द स्क्रीम’ पेंटिंग से भी जोड़ा जाता है संबंध

How two men stole Edvard Munch's The Scream in just 50 seconds — and how authorities managed to get the painting back - ABC News

क्राकाटोआ विस्फोट के बाद दुनिया भर में आसमान लंबे समय तक लाल दिखाई देता था। कुछ एक्सपर्ट मानते हैं कि फेमस पेंटर एडवर्ड मंक की मशहूर पेंटिंग द स्क्रीम में दिखाया गया लाल आसमान इसी घटना से इंस्पायर्ड हो सकता है। यह सिर्फ साइंटिफिक अनुमान है, न कि पूरी तरह से सच। यह विस्फोट आर्ट और साइंस दोनों पर अपनी छाप छोड़ गया।

साइंटिस्ट को मिली जेट स्ट्रीम की अहम जानकारी

जेट स्ट्रीम - विकिपीडिया

इस आपदा ने वैज्ञानिकों को वायुमंडल की ऊपर की लेयर में बहने वाली जेट स्ट्रीम के बारे में समझ विकसित करने में मदद की। जब राख के महीन कण हजारों किलोमीटर दूर तक पहुंचे, तब पता चला कि तेज ऊंचाई वाली हवाएं इन्हें पूरी दुनिया में फैला सकती हैं। इस घटना ने यह भी दिखाया कि पृथ्वी का मौसम और पर्यावरण आपस में गहराई से जुड़े हुए हैं। बाद में इसी सोच ने ग्लोबल क्लाइमेट और एनवायरनमेंट पर होने वाले इम्पैक्ट को समझने के लिए बस तैयार किया।