IIRF Rankings: देश के टॉप 10 प्राइवेट इंजीनियरिंग कॉलेज के हाल पर आईआईआरएफ रैंकिंग जारी, ये लिस्ट देखने के बाद करें प्रवेश का फैसला

IIRF Rankings: इंटरनेशनल इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क (IIRF) ने 2026 के लिए भारत के टॉप 10 प्राइवेट इंजीनियरिंग कॉलेजों की अपनी सालाना लिस्ट जारी की है। यह रैंकिंग देश के निजी इंजीनियरिंग संस्थानों की इंफ्रास्ट्रक्चर, फैकल्टी और प्लेसमेंट के मौकों के आधार पर रैंकिंग करती है। देश में मौजूद सरकारी प्रौद्योगिकी संस्थानों के अलावा निजी संस्थानों में अच्छी टेक्निकल एजुकेशन ढूंढ़ रहे छात्रों के लिए ये लिस्ट खास अहमियत रखती है।

हाल के वर्षों में निजी संस्थान काफी बढ़े हैं, और उनमें से कई अब इंफ्रास्ट्रक्चर, फैकल्टी और प्लेसमेंट के मौकों के मामले में देश के प्रमुख आईआईटी और एनआईटी जैसे इंजीनियरिंग संस्थानों से मुकाबला करते हैं। आईआईआरएफ लिस्ट देश भर के टॉप परफॉर्मर्स की जानकारी मुहैया कराती है और छात्रों को सोच-समझकर चुनाव करने में मदद करती है। आईआईआरएफ रैंकिंग के अनुसार, 2026 में भारत के टॉप 10 प्राइवेट इंजीनियरिंग कॉलेजों की लिस्ट कुछ इस प्रकार है।

इंस्टीट्यूट शहर राज्य

  • बीआईटीएस पिलानी – बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस पिलानी राजस्थान
  • एसआरएम इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी चेन्नई तमिलनाडु
  • वेल्लोर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (VIT) वेल्लोर तमिलनाडु
  • मणिपाल एकेडमी ऑफ हायर एजुकेशन (MAHE) मणिपाल कर्नाटक
  • थापर इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी पटियाला पंजाब
  • धीरूभाई अंबानी यूनिवर्सिटी गांधीनगर गुजरात
  • आईआईआईटी हैदराबाद – इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी हैदराबाद तेलंगाना
  • शिव नादर डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी, एनसीआर दादरी उत्तर प्रदेश
  • केआईईटी डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी गाजियाबाद उत्तर प्रदेश
  • आईआईआईटी बेंगलुरु – इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी बेंगलुरु कर्नाटक
  • बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी मेसरा मेसरा झारखंड

पिलानी, राजस्थान स्थित बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस (BITS) ने पहली पोजीशन हासिल की है। यह इंस्टीट्यूट अपने कड़े एकेडमिक स्टैंडर्ड और मजबूत इंडस्ट्री कनेक्शन के लिए जाना जाता है। टॉप तीन में तमिलनाडु की अच्छी मौजूदगी है, चेन्नई का एसआरएम इंस्टिट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी दूसरे और वेल्लोर का वेल्लोर इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (VIT) तीसरे नंबर पर है। दोनों यूनिवर्सिटी अपने आधुनिक कैंपस और रिसर्च फैसिलिटी के लिए इंजीनियरिंग छात्रों के बीच काफी लोकप्रिय हैं।

चौथा नंबर कर्नाटक के मणिपाल एकेडमी ऑफ हायर एजुकेशन (MAHE) का है। यह देश के सबसे पुराने निजी विश्वविद्यालयों में से एक है। पंजाब के पटियाला का थापर इंस्टिट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी पांचवें नंबर पर है। इस साल की लिस्ट में छठे नंबर पर एक नया संस्थान शामिल हुआ है। इसका नाम गुजरात के गांधीनगर की धीरूभाई अंबानी यूनिवर्सिटी है।

तेलंगाना का इंटरनेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, आईआईआईटी हैदराबाद सातवें नंबर पर है। वहीं, आठवें नंबर पर उत्तर प्रदेश के ही दो संस्थानों ने कब्जा जमाया है। यह दादरी स्थित शिव नादर डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी और गाजियाबाद की केआईईटी डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी है। कर्नाटक का आईआईआईटी बेंगलुरु नौवें नंबर पर है, और झारखंड का बिरला इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी मेसरा दसवें नंबर पर लिस्ट में है।

बीआईटीएस पिलानी और वीआईटी जैसे जाने-माने नाम अब भी आगे हैं, लेकिन नए प्रौद्योगिकी शिक्षा संस्थान भी अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहे हैं। छात्रों के लिए, इंजीनियरिंग एडमिशन के लिए कॉलेजों को शॉर्टलिस्ट करते समय यह लिस्ट काफी उपयोगी साबित हो सकती है। हालांकि, आखिरी फैसला लेने से पहले हमेशा अलग-अलग प्रोग्राम, फैकल्टी और प्लेसमेंट रिकॉर्ड पर रिसर्च करना सही रहता है।

NEET UG Re-exam 2026: नीट यूजी री-एग्जाम के लिए राज्यों ने ट्रांसपोर्ट और सुविधाओं का किया इंतजाम, परीक्षा केंद्रों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था सख्त

नीट की दोबारा परीक्षा से पहले केंद्रों पर की गई मॉकड्रिल

नीट की दोबारा परीक्षा से पहले केंद्रों पर की गई मॉकड्रिल

नीट-यूजी 2026 की दोबारा परीक्षा से पहले शनिवार को दिल्ली समेत देश भर के परीक्षा केंद्रों पर मॉकड्रिल की गई। इस दौरान परीक्षा केंद्रों की निगरानी समेत अन्य पहलुओं को पुलिस सहित अन्य विभागों के अधिकारियों ने देखा।

नोएडा में भी नीट की दोबारा परीक्षा से पहले, सुरक्षा इंतजामों का जायजा लेने के लिए सेक्टर 46 के भवानी शंकर इंटर कॉलेज में मॉक ड्रिल की गई। छत्तीसगढ़ के रायपुर 21 जून को होने वाली परीक्षा से पहले शहर भर के नीट परीक्षा केंद्रों पर मॉक ड्रिल की गई, जिसमें 25 केंद्रों पर 9,050 उम्मीदवार कड़ी एंट्री और टाइमिंग नियमों के तहत परीक्षा में शामिल होंगे।

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज के जिला मजिस्ट्रेट मनीष कुमार वर्मा ने कहा, “प्रयागराज में 47 केंद्रों पर नीट यूजी आयोजित की जाएगी और सभी तैयारियाँ पूरी हो चुकी हैं। कल सुबह एक मॉक ड्रिल और ड्राई रन किया जाएगा। हमने यह सुनिश्चित किया है कि छात्रों को परीक्षा केंद्रों पर कोई असुविधा न हो।

उत्तर प्रदेश के वाराणसी रेलवे स्टेशन के डायरेक्टर अर्पित गुप्ता ने कहा, “नीट परीक्षा के लिए हमें लगभग 25,000 उम्मीदवारों की सूची मिली है, जो यहां आएंगे। उनके लिए जगह की व्यवस्था करने और स्टेशन पर कड़ी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए, हम अपने आरपीएफ और जीआरपी स्टाफ के साथ अतिरिक्त कर्मचारियों की व्यवस्था कर रहे हैं। इसके अलावा, मेडिकल टीम को भी स्टेशन पर मौजूद रहने के लिए विशेष निर्देश दिए गए हैं।

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नीट री-एग्जाम पर उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री अनिल राजभर ने कहा हम अपनी शुभकामनाएं देते हैं। सरकार जो कोशिशें कर रही है, हम उसकी सराहना करते हैं और उसका स्वागत करते हैं। जिस तरह से सरकार काम कर रही है, मुझे नहीं लगता कि ऐसी घटनाएं दोबारा होंगी।

गुजरात के राजकोट स्थित धर्मेंद्र सिंह कॉलेज के इंचार्ज प्रिंसिपल शिशिर भारद्वाज ने कहा इस कॉलेज में कुल 552 छात्र-छात्राओं को अलॉट किया गया है। यह नीट का री-एग्जाम है, जो बहुत संवेदनशील मामला है। हम सरकार के सभी निर्देशों का सख्ती से पालन कर रहे हैं।

पश्चिम बंगाल स्थित खड़गपुर केंद्रीय विद्यालय के प्रिंसिपल और नीट डिस्ट्रिक्ट इंचार्ज संग्राम बनर्जी ने कहा पेपरलीक की वजह से नीट का एग्जाम दूसरी बार हो रहा है। हमारे जिले में लगभग 13 केंद्र हैं और करीब 6500 छात्र री-टेस्ट दे रहे हैं।

हरियाणा में नीट री-एग्जाम देने वाले छात्रों के लिए दो दिन तक मुफ्त बस यात्रा की व्यवस्था की गई है। छात्र अपना एडमिट कार्ड दिखाकर इस सुविधा का लाभ उठा सकते हैं। करनाल बस स्टैंड के इंचार्ज सोनू ने कहा, “सरकार ने 20 और 21 जून के लिए एडवाइजरी जारी की है। नीट एग्जाम देने वाले छात्र अपना एडमिट कार्ड दिखाकर मुफ्त यात्रा कर सकते हैं।

दिल्ली में एक छात्र ने कहा मेरी तैयारी बहुत अच्छी चल रही है। मैं पिछले सालों के प्रश्न बहुत अच्छे से सॉल्व कर रहा हूं। पिछली बार परीक्षा रद्द हो गई थी और मैं बहुत निराश हुआ था। इस बार भी मैं कड़ी मेहनत कर रहा हूं ताकि सफल हो सकूं।

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NEET UG Re-exam 2026: नीट यूजी री-एग्जाम के लिए राज्यों ने ट्रांसपोर्ट और सुविधाओं का किया इंतजाम, परीक्षा केंद्रों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था सख्त

NEET UG Re-exam 2026: नीट यूजी 2026 पुन:परीक्षा का आयोजन कल, 21 जून 2026 को पूरे देश में बने परीक्षा केंद्रों पर किया जाएगा। परीक्षा केंद्रों तक छात्रों को सुरक्षित और बिना किसी परेशानी के पहुंचाने के लिए कई राज्यों ने मुफ्त बस यात्रा और रेल सेवा सुविधा देने की घोषणा की है। अधिकारियों ने यह भी निर्देश दिया है कि सभी सेंटर्स में पीने का पानी, बिना रुकावट बिजली की सप्लाई, बैकअप जनरेटर, फर्स्ट-एड की सुविधा, एम्बुलेंस और ज़रूरत पड़ने पर पोर्टेबल टॉयलेट मौजूद हों। डायबिटीज से पीड़ित छात्रों के लिए परीक्षा के दौरान हल्का नाश्ता भी देने का प्रबंध किया गया है। इसके अलावा कुछ परीक्षा केंद्रों के आसपास के दायरे में निषेधाज्ञा लागू करने की भी जानकारी है।

कई राज्यों में फ्री बस यात्रा की घोषणा

कल नीट यूजी री-एग्जाम में शामिल होने वाले परीक्षार्थियों के लिए पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, बिहार और छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों ने परीक्षा केंद्र तक जाने वाले छात्रों के लिए ट्रांसपोर्टेशन सपोर्ट की घोषणा की है। छात्र अपना एडमिट कार्ड दिखाकर बसों में मुफ्त सफर कर सकते हैं।

ये राज्य दे रहे अलग सुविधाएं भी

  • बिहार में राज्य सरकार, जिला प्रशासन, धार्मिक संस्थाओं और एनजीओ के साथ मिल कर रेलवे स्टेशनों, बस स्टैंडों और मुख्य ट्रांजिट पॉइंट्स पर छात्रों और उनके माता-पिता के लिए पीने का पानी, सत्तू और दूसरी रिफ्रेशमेंट्स देने की तैयारी की है।
  • उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने छात्रों को बस किराए में 50% छूट के साथ ही जिला प्रशासन को परीक्षार्थियों के लिए अस्थायी रहने की जगह का इंतजाम करने का निर्देश दिया गया है।
  • दिल्ली सरकार ने नीट परीक्षा केंद्रों के पास कूलिंग जोन बनाने का ऐलान किया है। इनमें कूलिंग जोन में बैठने की व्यवस्था के साथ-साथ पीने का पानी, नींबू पानी (शिकंजी) और दूसरी जरूरी सुविधाए भी मिलेंगी।

  • मुंबई का सबअर्बन रेलवे नेटवर्क 21 जून, रविवार को अपने रेगुलर संडे मेंटेनेंस ब्लॉक रोक देगा। सेंट्रल रेलवे और वेस्टर्न रेलवे दोनों ने बिना संडे ब्लॉक के काम करने का फैसला किया है।

परीक्षा केंद्र के पास निषेधाज्ञा लागू

कई जगहों पर परीक्षा केंद्रों के आसपास 500 गज के दायरे में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा-163 (द.प्र.सं. की धारा 144) के अंतर्गत निषेधाज्ञा लागू करने का आदेश दिया गया है। इसके तहत परीक्षा केंद्रों के पास 5 या 5 से अधिक व्यक्ति एक साथ एकत्रित नहीं रहीं होंगे। कोई भी व्यक्ति घातक हथियार लेकर नहीं चलेंगे।

सेना के हेलीकॉप्टर से प्रश्न पत्र पहुंचाए जाएंगे

भारतीय सेना के एक हेलीकॉप्टर ने हाल ही में तमिलनाडु में हाई-सिक्योरिटी प्रोटोकॉल के तहत क्वेश्चन पेपर्स पहुंचाने के प्लान के तहत ड्राई रन किया। इस व्यवस्था के तहत, पेपर्स दिल्ली से मदुरै लाए जाएंगे और फिर हथियारों की सुरक्षा में तिरुनेलवेली पहुंचाए जाएंगे।

सुरक्षा के सख्त इंतजाम

परीक्षा केंद्रों पर दूसरे सुरक्षा उपायों में एआई मॉनिटरिंग के साथ चार-स्तर की सीसीटीवी सर्विलांस, एंट्री से पहले बायोमेट्रिक और फेशियल रिकग्निशन-बेस्ड वेरिफिकेशन, कई राउंड की तलाशी और मल्टी-लेवल ओवरसाइट शामिल हैं। देश की सबसे बड़ी मेडिकल परीक्षा की ईमानदारी सुनिश्चित करने के लिए परीक्षा प्रक्रिया पर भी सबसे ऊंचे लेवल पर कड़ी नजर रखी जा रही है।

NEET UG Re-exam 2026: नागपुर के छात्र को दे डाला अबु धाबी में परीक्षा केंद्र, राहुल गांधी ने एक्स पर उठाया मुद्दा तो एनटीए ने दिया गलती सुधारने का भरोसा

NEET UG Re-exam 2026: नागपुर के छात्र को दे डाला अबु धाबी में परीक्षा केंद्र, राहुल गांधी ने एक्स पर उठाया मुद्दा तो एनटीए ने दिया गलती सुधारने का भरोसा

NEET UG Re-exam 2026: नीट यूजी 2026 री-एग्जाम का आयोजन कल, रविवार, 21 जून 2026 को पूरे देश में किया जाएगा। परीक्षा में अब जहां बहुत कम समय बचा, वहीं नागपुर के एक छात्र की परेशानी ने कल होने वाली परीक्षा की तैयारियों पर फिर से सवालिया निशान लगा दिया है। इस छात्र को महाराष्ट्र में परीक्षा केंद्र चुनने के बावजूद अबु धाबी में परीक्षा केंद्र अलॉट करने का मामला सामने आया है। इस मामले को कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने अपने एक्स हैंडल के जरिए उठाया है। उनकी पोस्ट पर जवाब देते हुए एनटीए ने मामले का तुरंत संज्ञान लेते हुए गलती सुधारने का आश्वासन दिया है।

होमटाउन से हजारों किलोमीटर दूर अबू धाबी में सेंटर अलॉट किया

यह मामला नागपुर के छात्र अब्दुल्ला का है, जिसे नीट यूजी री-एग्जाम के लिए यूएई के अबू धाबी में परीक्षा केंद्र किया गया था। इस घटना से छात्र और उसके परिवार के लोग परेशान है। खास बात यह है कि अब्दुल्ला को पिछली परीक्षा के दौरान नागपुर में एक सेंटर अलॉट किया गया था। अब्दुल्ला ने एप्लीकेशन फॉर्म भरते समय नागपुर, वर्धा और भंडारा को अपने पसंदीदा एग्ज़ामिनेशन सेंटर के तौर पर चुना था। इसके बावजूद, उसे उसके होमटाउन से हजारों किलोमीटर दूर अबू धाबी में सेंटर अलॉट किया गया। छात्र की परेशानी इसलिए और भी बढ़ गई है, क्योंकि परीक्षा में अब सिर्फ एक दिन का समय बचा है और उसके पास न तो पासपोर्ट है और विदेश जाने के पैसे। ऐसे हालात में, परिवार के लिए इतने कम समय में पासपोर्ट और वीजा की फॉर्मैलिटी पूरी करना और उसे परीक्षा देने के लिए विदेश भेजना लगभग असंभव है।

छात्र के परिवार ने एनटीए से किया संपर्क

गलती का पता चलने के बाद, छात्र के अभिभावकों ने तुरंत एनटीए के हेल्पलाइन पर संपर्क किया और शिकायत दर्ज कराई। परिवार के मुताबिक, एनटीए अधिकारियों ने माना कि एक टेक्निकल गड़बड़ी हुई थी और उन्हें भरोसा दिलाया कि सुधार की कार्रवाई की जाएगी। शुक्रवार देर रात बातचीत के बाद स्टूडेंट को बताया गया कि उसे नागपुर में एक परीक्षा केंद्र दिया जाएगा और शनिवार शाम 4 बजे तक रिवाइज्ड एडमिट कार्ड जारी कर दिया जाएगा।

पार्टी महासचिव राहुल गांधी और महाराष्ट्र कांग्रेस नेता ने उठाई आवाज

इस घटना पर कांग्रेस महासचिव और सांसद राहुल गांधी ने अपने एक्स अकाउंट से पोस्ट किया। राहुल गांधी ने अपने पोस्ट में कहा कि परिवार के पास न पासपोर्ट है और न विदेश जाने के पैसे। उसको जो तनाव हुआ है, इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती है। इससे पहले महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता डॉ. अनीस अहमद ने कड़ी नाराजगी जताते हुए एनटीए से मांग की कि एजेंसी तुरंत एक बदला हुआ एडमिट कार्ड जारी करे और गलती सुधारे।

राहुल की पोस्ट पर एनटीए ने मानी गलती

राहुल गांधी की पोस्ट पर एनटीए ने जवाब देते हुए भरोसा दिया कि छात्र की शिकायत दर्ज कर ली गई है। उस पर तत्काल प्रभाव से एक्शन भी लिया जा रहा है। जरूरी सत्यापन के बाद अगले कुछ घंटों में उसे नागपुर के पास ही कोई परीक्षा केंद्र आवंटित कर सूचित कर दिया जाएगा।

NEET-UG Re-Exam 2026: कल होने वाली परीक्षा के लिए एनटीए आज करेगा पूरे देश में मॉक ड्रिल, पूरे देश में 5500 केंद्रों पर परीक्षा देंगे छात्र

NEET-UG Re-Exam 2026: कल होने वाली परीक्षा के लिए एनटीए आज करेगा पूरे देश में मॉक ड्रिल, पूरे देश में 5500 केंद्रों पर परीक्षा देंगे छात्र

NEET-UG Re-Exam 2026: नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET) स्नातक (UG) 2026 पुन: परीक्षा (Re-Exam) का आयोजन कल रविवार, 21 जून 2026 को पूरे देश में किया जाएगा। इस परीक्षा को बिना किसी गड़बड़ी के संपन्न कराने के लिए राष्ट्रीए परीक्षा एजेंसी (NTA) ने कमर कस ली है।

अपनी सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेने के लिए एनटीए आज पूरे देश में मॉक ड्रिल कर रही है। एनटीए की यह मॉक ड्रिल किसी भी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा अब तक के सबसे बड़े सुरक्षा इंतजामों में से एक का जायजा लेंगे। पूरी रिहर्सल सुबह 9:00 बजे से रात 8:00 बजे तक चलेगी। इसमें एग्जाम प्रोसेस के हर स्टेज को दिखाया जाएगा, जिसमें प्रश्न पत्रों की डिलीवरी से लेकर आंसर शीट के कलेक्शन और ट्रांसपोर्टेशन तक शामिल होगा।

5,500 से ज्यादा केंद्रों पर परीक्षा कल 

पूरे देश में परीक्षार्थी कल 551 भारतीय शहरों और 14 अंतरराष्ट्रीय ठिकानों पर फैले 5,500 से ज्यादा परीक्षा केंद्रों पर नीट यूजी 2026 री-एग्जाम देंगे। इन सभी एग्जाम सेंटर को हाई-सिक्योरिटी जोन बनाया गया है, जिसमें त्रिस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है। इसके लिए अधिकारी जिला प्रशासन, राज्य पुलिस बल और केंद्र सरकार के विशेष सुरक्षा दस्तों को शामिल किया गया है।

सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम

अधिकारियों ने कहा कि परीक्षा केंद्रों की सुरक्षा और टेस्ट के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए 2 लाख से 2.5 लाख पुलिस कर्मियों को तैनात किया जाएगा। इसके अलावा, लगभग 15,000 पैरामिलिट्री कर्मियों को प्रश्नपत्र के ट्रांसपोर्टेशन और परीक्षा के बाद आंसर शीट की सुरक्षित वापसी का काम सौंपा गया है। बेहतर निगरानी के लिए, अधिकारियों ने परीक्षा की जगहों पर 1.5 लाख और CCTV कैमरे और 15,000 सिग्नल जैमर लगाए हैं। सभी सेंटर्स पर एनटीए हेडक्वार्टर और देश भर में बनाए गए खास कंट्रोल रूम से रियल टाइम में नजर रखी जाएगी।

22 लाख से ज्यादा छात्र लेंगे परीक्षा में हिस्सा

अधिकारियों के मुताबिक, लगभग 22.8 लाख स्टूडेंट्स ने परीक्षा के लिए रजिस्टर किया है, जिससे यह देश के सबसे बड़े एंट्रेंस टेस्ट में से एक बन गया है। 18.5 लाख से ज़्यादा कैंडिडेट्स ने अपने एडमिट कार्ड पहले ही डाउनलोड कर लिए हैं, जबकि लगभग 3.5 लाख स्टूडेंट्स ने अपना परीक्षा शहर या सेंटर बदलने का ऑप्शन चुना है। खास बात यह है कि सुरक्षा और प्रशासनिक निगरानी को मजबूत करने की कोशिशों के तहत 98.8% परीक्षा केंद्र सरकारी शैक्षिक संस्थानों में बनाए गए हैं।

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शिक्षा, परीक्षा दोनों लापता

शिक्षा, परीक्षा दोनों लापता

भारत की शिक्षा प्रणाली और परीक्षा की व्यवस्था को लेकर इन दिनों पूरे देश में चर्चा हो रही है। यह चर्चा इसलिए शुरू हुई क्योंकि मेडिकल में दाखिले के लिए हुई नीट यूजी के पेपर लीक हो गए और परीक्षा दोबारा करानी पड़ी। 21 जून को दोबारा परीक्षा होगी और उससे पहले 12 युवाओं ने आत्महत्या करके जान दे दी है। 12वीं की बोर्ड में सीबीएसई ने ऑन स्क्रीन मार्किंग यानी ओएसएम का जो सिस्टम बनाया उसकी गड़बड़ियों से भी लोगों की नजर इसकी ओर गई है। लेकिन ऐसा नहीं है कि ये दोनों बड़ी घटनाएं कोई अपवाद हैं। यह भारत में शिक्षा व्यवस्था की मुख्यधारा है। इन दोनों पर ज्यादा ध्यान इसलिए गया क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक देश, एक कुछ भी कराने की जिद में मेडिकल में दाखिले की सारी परीक्षाएं एक साथ कराने का फैसला किया और इसके लिए एनटीए का गठन हुआ, जिसके नकारेपन की दास्तान पूरे भारत के लोग जानते हैं। उस एक एजेंसी के नकारेपन की वजह से सेना और वायु सेना को नीट यूजी की परीक्षा में शामिल करना पड़ा है।

लेकिन अखिल भारतीय परीक्षाओं के साथ साथ हर राज्य में शिक्षा और परीक्षा को लेकर एक जैसी कहानी है। शिक्षा का सत्र समय से नहीं चलना और परीक्षा समय पर नहीं होना या परीक्षा होने के बाद नतीजों का प्रकाशन समय से नहीं होना या नतीजे आने के बाद भी नियुक्ति नहीं होना, हर राज्य की समस्या है। बिहार में करीब दो साल पहले 70वीं बीपीएससी की परीक्षा हुई थी लेकिन अभी तक नतीजे घोषित नहीं किए गए हैं। नतीजों में देरी से लाखों की संख्या में छात्र अगली परीक्षा होने तक उम्र की सीमा पार कर जाएंगे। परीक्षा के सत्र में देरी से लाखों छात्र प्रतियोगिता परीक्षाओं से वंचित रह जाते हैं। छोटी छोटी परीक्षाओं के रद्द होने पर लोग ध्यान भी देते हैं। दिल्ली में सीयूईटी की परीक्षा में 36 सौ से ज्यादा अभ्यर्थी तकनीकी गड़बड़ी से परीक्षा नहीं दे सके। उनको बाद में फिर परीक्षा के लिए जाना पड़ा। ऐसी गड़बड़ियां आम होती हैं। एक ही दिन दो बड़ी परीक्षा हो जाना भी एक समस्या है, जिससे छात्रों को जूझना पड़ता है।

दूसरी ओर परीक्षा का आयोजन सरकार के लिए या परीक्षा कराने वाली एजेंसियों के लिए कमाई का साधन बन गया है। बेरोजगारी इतनी ज्यादा है कि एक एक नौकरी के लिए हजारों लोग आवेदन दे रहे हैं। बिहार में एक नौकरी के लिए चार हजार पद निकले तो 14 लाख लोगों ने आवेदन किया। सोचें, न्यूनतम फीस भरने पर भी कितने पैसे जमा हुए होंगे? ऐसी परीक्षाओं के लिए सरकारें यातायात की अतिरिक्त व्यवस्था नहीं करती हैं और परीक्षा के केंद्र अभ्यर्थी के घर से तीन तीन सौ किलोमीटर दूर रखे जाते हैं। बिहार में पिछले ही दिनों रेलवे स्टेशनों की भयावह तस्वीरें सोशल मीडिया पर सारे देश ने देखी। हजारों छात्र परीक्षा केंद्रों पर पहुंच ही नहीं पाए। कई साल पहले रेलवे ने एक लाख पदों की बहाली निकाली थी, जिसके लिए एक करोड़ आठ लाख अभ्यर्थियों ने आवेदन किया। अभी तक वह परीक्षा नहीं हो पाई है।

असल में प्रतियोगिता परीक्षाएं छात्रों और अभिभावकों के आर्थिक, शारीरिक व मानसिक शोषण का पर्याय बन गई हैं। राहुल गांधी ने पिछले दिनों कोटा में छात्रों के साथ संवाद में एक आंकड़ा देश के सामने रखा। अभी तक उसका खंडन नहीं किया गया और कई जानकार उसकी पुष्टि कर रहे हैं। उस आंकड़े के मुताबिक देश की सिर्फ पांच बड़ी परीक्षाओं नीट, जेईई, एसएससी, यूपीएससी और आरआरबी की तैयारी से लेकर परीक्षा तक देश के छात्रों का साढ़े तीन लाख करोड़ रुपया खर्च होता है। यह बिहार जैसे राज्य के साल भर के बजट से ज्यादा है। केंद्र सरकार के कई मंत्रालयों के बजट से ज्यादा है यह रकम। सिर्फ नीट की परीक्षा में 23 लाख छात्रों के एक लाख 32 हजार करोड़ रुपए खर्च होते हैं। यह हकीकत भी सामने आई है कि यूपीएससी की परीक्षा में करीब डेढ़ हजार प्रतियोगियों मे से एक को नौकरी मिलती है। बाकियों के लिए संघर्ष ही रास्ता है। शिक्षा की गुणवत्ता में कैसी गिरावट आई है उस पर तो कई ग्रंथ लिखे जा सकते हैं। कोरोना के बाद हुए एक सर्वे में पता चला है कि बिल्कुल प्राथमिक स्तर पर ही बच्चों के सीखने की प्रक्रिया प्रभावित हुई है और छठी क्लास के बच्चे अपने से दो क्लास नीचे की किताबें नहीं पढ़ पाते हैं। उच्च शिक्षा और रिसर्च की हालत दुनिया में सबसे खराब है। हाल ही में दुनिया की बेहतरीन यूनिवर्सिटीज की क्यूएस रैंकिंग आई है, जिसमें टॉप एक सौ यूनिवर्सिटीज में भारत की एक भी यूनिवर्सिटी नहीं है और टॉप दो सौ में तीन को जगह मिली है। दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाएं जैसे अमेरिका, चीन आदि अपने जीडीपी का तीन से चार फीसदी तक रिसर्च पर खर्च करती हैं। ध्यान रहे अमेरिका की जीडीपी 30 ट्रिलियन डॉलर है, जो भारत से सात गुने से ज्यादा है और चीन की 20 ट्रिलियन डॉलर है। भारत की जीडीपी चार ट्रिलियन डॉलर की है और उसमें से 0.70 फीसदी रिसर्च पर खर्च होता है।

टेलीग्राम पर अस्थायी बैन बरकरार, दिल्ली हाईकोर्ट ने सही ठहराया सरकार का फैसला

टेलीग्राम पर अस्थायी बैन बरकरार, दिल्ली हाईकोर्ट ने सही ठहराया सरकार का फैसला

नीट री-एग्जाम से पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने टेलीग्राम ऐप प्लेटफॉर्म पर सरकार के अस्थायी बैन के फैसले को सही ठहराया है। शुक्रवार को हाईकोर्ट ने अस्थायी बैन के खिलाफ दायर टेलीग्राम की याचिका को भी खारिज कर दिया।

दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस तेजस कारिया की सिंगल बेंच ने शुक्रवार को टेलीग्राम की याचिका पर अपना फैसला दिया। जस्टिस तेजस करिया ने कहा सरकार का आदेश सही है। आईटी एक्ट के सेक्शन 69ए के तहत किसी प्लेटफॉर्म पर बैन लगाया जा सकता है।

सरकार ने परीक्षा में पेपर लीक और संगठित नकल गिरोहों से जुड़े मामलों की आशंका के चलते टेलीग्राम पर 22 जून तक अस्थायी बैन लगाया है। चिंताएं थीं कि नीट-यूजी विवाद में शामिल संगठित नकल करने वाले नेटवर्क इसका इस्तेमाल कर रहे थे। बड़े पैमाने पर पेपर लीक और गड़बड़ियों के आरोपों के बाद मूल नीट परीक्षा रद्द होने के बाद सरकार ने इस पर बैन का फैसला लिया। साथ ही, 30 जून तक पहले से भेजे गए संदेशों को एडिट करने की सुविधा भी बंद करने का आदेश दिया गया।

ये पाबंदियां नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) की सिफारिशों के बाद इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की ओर से सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69ए के तहत जारी निर्देशों के आधार पर लगाई गई थीं।

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हालांकि, टेलीग्राम ने सरकार के फैसले का विरोध किया और इसे दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी। टेलीग्राम की ओर से अदालत में कहा गया कि कानून इस तरह के भेद का प्रावधान नहीं करता। टेलीग्राम ने केंद्र सरकार के आदेश को कानूनी खामियों से ग्रस्त बताते हुए कहा कि समिति ने सर्वसम्मति से अंतरिम निर्देश की पुष्टि करने की सिफारिश की थी।

केंद्र सरकार ने फैसले का बचाव करते हुए कहा कि टेलीग्राम के आर्किटेक्चर और परीक्षा से जुड़े धोखाधड़ी के मामलों में इसके बार-बार गलत इस्तेमाल के कारण अधिकारियों के पास इमरजेंसी ब्लॉकिंग शक्तियों का इस्तेमाल करने के अलावा कोई और विकल्प नहीं बचा था। एक हलफनामे में केंद्र ने कहा, “यह फैसला दूसरे सभी विकल्पों को आजमाने के बाद ही लिया गया, जिसमें गैर-कानूनी कंटेंट को खास तौर पर हटाने के बार-बार किए गए अनुरोध भी शामिल थे, जो नाकाफी पाए गए।”

दोनों पक्षों को सुनने के बाद गुरुवार को दिल्ली हाईकोर्ट ने मामले में फैसला सुरक्षित रखा था। शुक्रवार को सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने फैसले को बरकरार रखा और टेलीग्राम की याचिका खारिज कर दी।

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NEET UG 2026 Dress Code: 21 जून को परीक्षा केंद्र पर पेन न ले जाएं परीक्षाथी, जानें नीट यूजी री-एग्जाम में ड्रेस कोर्ड पर क्या है एनटीए का नोटिस

NEET UG 2026 Dress Code: नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) 21 जून 2026 को देश और विदेश में निर्धारित परीक्षा केंद्रों पर नीट यूजी 2026 री-एग्जाम आयोजित करने जा रहा है। 03 मई 2026 को हुई नीट यूजी 2026 में पेपर लीक का खुलासा होने के बाद पूरे देश की नजरें इस परीक्षा पर टिकी हुई हैं। परीक्षा एजेंसी और सरकार दोनों इस परीक्षा को लेकर हर मुमकिन सतर्कता बरत रहे हैं। नीट यूजी री-एग्जाम में तकरीबन 22.7 लाख विद्यार्थी हिस्सा लेंगे। परीक्षार्थियों से लेकर अभिभावकों में नीट यूजी री-एग्जाम को लेकर काफी उथल-पुथल मची हुई है।

नीट यूजी री-एग्जाम दोपहर 2 से शाम 5:15 बजे तक होगी, लेकिन केंद्रों पर प्रवेश और सुरक्षा जांच सुबह 11 बजे से शुरू हो जाएगी। 1.30 के बाद परीक्षा हॉल में एंट्री नहीं जाएगी। ऐसे में अभ्यर्थियों को समय से पहले केंद्र पर पहुंचने की सलाह दी गई है। पांच लाख से अधिक सुरक्षाकर्मी, छह हजार से अधिक पर्यवेक्षक और 674 शहर समन्वयक पूरी प्रक्रिया पर नजर रखेंगे। एनटीए ने अभ्यर्थियों, अभिभावकों और शिक्षकों से वे अफवाहों, सोशल मीडिया पर चल रही अपुष्ट सूचनाओं से दूर रहने और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने की अपील की है। परीक्षा के दौरान, लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 लागू रहेगा। इसके तहत पेपर लीक और नकल के मामलों में 10 वर्ष तक की जेल और एक करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है।

अभ्यर्थियों का आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन, फेस पहचान और लाइव फोटो ली जाएगी। परीक्षा से लगभग 45 मिनट पहले ही अधिकारियों की मौजूदगी में सीलबंद ट्रंक खोले जाएंगे। नीट विद्यार्थियों को पेन लेकर नहीं जाना है। उन्हें सेंटर पर ही पेन दिया जायेगा। इसके अलावा, एनटीए ने छात्रों के लिए ड्रेस कोड जारी किया है, जिसका पालन करना सभी परीक्षार्थियों के लिए जरूरी होगा।

नीट यूजी री-एग्जाम ड्रेस कोड

  • परीक्षार्थी को ओरिजिनल आइडी जैसे आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड, वोटर कार्ड अथवा सरकार द्वारा जारी कोई अन्य आईडी जिसमें कैंडिडेट की फोटो आ रही हो, इनमें से कोई भी एक आइडी साथ लाना है।
  • सभी कैंडिडेट्स को एग्जाम हॉल के अंदर ट्रांसपेरेंट पानी की बोतलें ले जाने की इजाजत है।
  • बारिश से खराब होने से बचाने के लिए कैंडिडेट्स अपना एडमिट कार्ड ट्रांसपेरेंट प्लास्टिक पाउच में ले जा सकते हैं।
  • कैंडिडेट्स को आस्था की चीजें (धार्मिक निशान, कलावा, पगड़ी, हिजाब, या इसी तरह की चीजें) पहनने की इजाजत है, लेकिन उन्हें एग्जाम सेंटर पर काफी पहले रिपोर्ट करना होगा ताकि एग्जाम स्टाफ उनकी अच्छी तरह से तलाशी ले सके।
  • हल्के कपड़े पहनना बेहतर है, लेकिन कैंडिडेट्स जरूरत पड़ने पर पूरी बाजू के कपड़े या ऊनी कपड़े पहन सकते हैं, लेकिन उन्हें सेंटर पर काफी पहले रिपोर्ट करना होगा ताकि अच्छी तरह से तलाशी ली जा सके।
  • जूते की कैटेगरी में चप्पल और कम हील वाले जूते पसंद किए जाते हैं।
  • हाई हील वाले जूते पहनने वाले कैंडिडेट्स की एक्स्ट्रा चेकिंग हो सकती है।
  • कैंडिडेट्स को एग्जाम हॉल के अंदर मोबाइल फोन, स्मार्टवॉच, ब्लूटूथ एक्सेसरीज, ईयरफोन, या कोई भी कम्युनिकेशन डिवाइस समेत कोई भी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस ले जाने की सख्त मनाही है। एग्जामिनेशन हॉल के अंदर मेटल की चीजें, बड़े बेल्ट बकल, भारी ज्वेलरी और एक्सेसरीज ले जाने की इजाजत नहीं है।
  • सभी कैंडिडेट्स की एंट्री से पहले जरूरी तलाशी ली जाएगी। कैंडिडेट्स को सलाह दी जाती है कि वे बिना ज्यादा टेंशन के आसान सिक्योरिटी चेकिंग के लिए तय रिपोर्टिंग टाइम पर सेंटर पर रिपोर्ट करें।

परीक्षार्थियों की सुविधा के लिए हेल्पलाइन

नीट यूजी 2026 री-एग्जाम से जुड़ी किसी भी जानकारी के लिए, कैंडिडेट्स एनटीए हेल्पडेस्क से 011-40759000/ 011-69227700 पर कॉन्टैक्ट कर सकते हैं या [email protected] पर लिख सकते हैं। सभी कैंडिडेट्स से रिक्वेस्ट है कि वे ऊपर दी गई एडवाइजरी को मानें और री-एग्जाम को आसानी से और सुरक्षित तरीके से कराने के लिए परीक्षा स्टाफ के साथ पूरा सहयोग करें। ड्रेस कोड और सिक्योरिटी प्रोटोकॉल का पालन न करने पर एंट्री से मना किया जा सकता है।

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क्या टेलीग्राम पर पाबंदी से नीट परीक्षा सही होगी?

क्या टेलीग्राम पर पाबंदी से नीट परीक्षा सही होगी?

सरकार को तकनीकी, प्रशासनिक और कानूनी सुधारों के साथ आगे बढ़ना चाहिए ताकि नीट जैसी परीक्षाएं मेरिट का प्रतीक बनें, न कि विवाद का। छात्रों का भविष्य दांव पर है, ऐसे में आधी-अधूरी कोशिशें पर्याप्त नहीं हो सकती। पूर्ण सुधार से ही विश्वास बहाल होगा।

राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) और केंद्र सरकार द्वारा NEET-UG 2026 के पुनर्परीक्षा 21 जून से ठीक पहले ‘टेलीग्राम’ ऐप पर अस्थायी प्रतिबंध लगाने का फैसला लिया है। मेडिकल की परीक्षा प्रक्रिया में बढ़ती डिजिटल धोखाधड़ी और पेपर लीक की समस्या को लेकर सरकार का यह कदम गंभीर चिंता का प्रतीक है। यह कदम सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69A के तहत लिया गया है, जो सार्वजनिक व्यवस्था के हित में किया गया है। एनटीए के अनुसार, पेपर लीक का  गिरोह टेलीग्राम चैनलों का इस्तेमाल फर्जी पेपर बेचने, गलत सूचना फैलाने और अभ्यर्थियों को ठगने के लिए कर रहे थे। इसलिए सरकार को ऐसा कदम उठाना पड़ा।

यह प्रतिबंध 22 जून तक है, जो परीक्षा के दिन और उसके तुरंत बाद को कवर करता है। साथ ही, टेलीग्राम के मैसेज एडिटिंग फीचर को भी 30 जून तक अक्षम कर दिया गया है ताकि फर्जी सबूत न बनाए जा सकें। यह फैसला पिछले मई के पेपर लीक कांड के बाद आया है, जिसमें परीक्षा रद्द करनी पड़ी और इस मामले पर सीबीआई जांच चल रही है। सरकार ने परीक्षा पेपर की सुरक्षित डिलीवरी के लिए भारतीय वायुसेना की मदद ली है, जो सुरक्षा की दिशा में सकारात्मक कदम है।

परंतु यदि इस समस्या का विश्लेषण किया जाए तो लीक रोकने में यह कदम कितना प्रभावी साबित होगा? नीट जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में पेपर लीक एक पुरानी समस्या है, जो छात्रों के भविष्य और मेरिट को नष्ट करती है। वहीं ‘टेलीग्राम’ ऐप की कुछ ऐसी विशेषताएं हैं जो अन्य ऐप में नहीं पाई जाती। मिसाल के तौर पर एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन, बड़े ग्रुप/चैनल, फाइल शेयरिंग, मैसेज एडिटिंग और अपेक्षाकृत कम मॉनिटरिंग। यह सभी विशेषताएँ इस ऐप को धोखेबाजों के लिए आकर्षक बनाती हैं। पिछले घटनाक्रमों में ऐसे चैनल फर्जी पेपर बेचते पाए गए, जिससे अभ्यर्थी लाखों रुपये गंवा बैठे और परीक्षा की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठे।

सरकार का यह कदम तात्कालिक रूप से लीक की संभावना को कम कर सकता है। प्रतिबंध के दौरान ऐसे चैनल एक्सेसिबल नहीं रहेंगे, जिससे रीयल-टाइम शेयरिंग रुक सकती है। लेकिन स्वतंत्र नजरिये से देखें तो यह पूरी तरह प्रभावी नहीं है। पेपर लीक मुख्य रूप से स्रोत (पेपर सेटर्स, प्रिंटिंग प्रेस, ट्रांसपोर्ट) से शुरू होता है, न कि सिर्फ सोशल मीडिया से। सोशल मीडिया तो केवल एक माध्यम है। टेलीग्राम बंद होने पर पेपर लीक गिरोह व्हाट्सएप, सिग्नल, एन्क्रिप्टेड ईमेल, डार्कवेब या यहां तक कि ऑफलाइन नेटवर्क (USB, हार्ड ड्राइव) का सहारा भी ले सकते हैं। टेलीग्राम सीईओ पावेल दुरोव ने भी कहा है कि ऐसा करने से समस्या जड़ से नहीं सुलझेगी, बल्कि अन्य प्लेटफॉर्म्स पर शिफ्ट हो जाएगी।

ऐसा करने से इन पेपर लीक गिरोह के अलावा, 15 करोड़ से ज्यादा भारतीय यूजर्स प्रभावित होंगे, जो वैध संचार (बिजनेस, शिक्षा, परिवार) के लिए इस ऐप का इस्तेमाल करते हैं। विपक्षी नेता राहुल गांधी समेत कई लोगों ने इसे आलोचना का विषय बनाया है। यह कदम डिजिटल स्वतंत्रता और परीक्षा सुरक्षा के बीच संतुलन की चुनौती को उजागर करता है।

तो सवाल उठता है कि लीक रोकने के लिए सरकार को क्या कदम उठाने चाहिए? इस ऐप पर प्रतिबंध अस्थायी राहत है, लेकिन स्थायी समाधान के लिए बहुआयामी रणनीति जरूरी है। जैसे कि स्रोत-स्तरीय सुरक्षा: पेपर सेटिंग, प्रिंटिंग और ट्रांसपोर्ट को पूरी तरह डिजिटल और बायोमेट्रिक निगरानी में रखें। वायु सेना जैसी व्यवस्था को स्थायी बनाएं, GPS ट्रैकिंग और सील्ड बॉक्स को अनिवार्य करें। साइबर इंटेलिजेंस और मॉनिटरिंग: NTA और MeitY को AI-आधारित टूल्स से सोशल मीडिया, डार्क वेब और एन्क्रिप्टेड ऐप्स पर निरंतर निगरानी करनी चाहिए। बड़े चैनल्स/ग्रुप्स की प्रोएक्टिव ब्लॉकिंग और गिरोहों पर छापेमारी की जानी चाहिए। परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता: प्रश्न बैंक का डिजिटलीकरण, रैंडमाइज्ड पेपर, सीसीटीवी और जामर का व्यापक इस्तेमाल किया जाए। अभ्यर्थियों के लिए व्हिसलब्लोअर मैकेनिज्म और त्वरित शिकायत निस्तारण पर भी विचार किया जाना चाहिए। शिक्षा सुधार: कोचिंग माफिया पर सख्ती, मेरिट-आधारित सिलेक्शन को मजबूत करें ताकि लीक का आर्थिक प्रलोभन कम हो। कानूनी और संस्थागत मजबूती: लीक को राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा मानकर सख्त सजा (जैसे UFSPA जैसी विशेष प्रावधान) और फास्ट-ट्रैक कोर्ट होना चाहिए। एनटीए को स्वायत्त और जवाबदेह बनाएं जिससे कि ज़िम्मेदार व्यक्ति को कड़ी से कड़ी सज़ा मिले।

सरकार पूर्ण गारंटी नहीं दे सकती, क्योंकि कोई भी सिस्टम 100% मज़बूत नहीं होता। लेकिन बेहतर तैयारी से जोखिम को न्यूनतम किया जा सकता है। अगर फिर भी लीक होता है, तो जिम्मेदारी एनटीए, शिक्षा मंत्रालय, MeitY और संबंधित राज्य एजेंसियों की होगी। ऐसे में सीबीआई या विशेष जांच टीम तुरंत सक्रिय होनी चाहिए।

सरकार को इस संदर्भ में ऐसा कानून बनाना कहिए जहाँ दोषी पाए जाने पर, फिर वो चाहे कोई भी हो, पेपर सेटर, ट्रांसपोर्टर, गिरोह सदस्य या भ्रष्ट अधिकारी, ना सिर्फ़ कठोर कार्रवाई हो, बल्कि गिरफ्तारी, संपत्ति जब्ती, नौकरी से बर्खास्तगी और लंबी जेल तक का प्रावधान हो। इस क़ानून में अभ्यर्थियों को मुआवजा और पुनर्परीक्षा का अधिकार मिलना चाहिए। इसके साथ ही पारदर्शी जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए ताकि सरकार पर जनता का विश्वास बहाल हो।

टेलीग्राम प्रतिबंध एक आवश्यक लेकिन अपर्याप्त कदम है। यह परीक्षा की अखंडता बचाने की दिशा में सकारात्मक अवश्य है, परंतु इस उद्योग के जड़ों (भ्रष्टाचार, कमजोर सुरक्षा और माफिया नेटवर्क) को नहीं छूता। सरकार को तकनीकी, प्रशासनिक और कानूनी सुधारों के साथ आगे बढ़ना चाहिए ताकि नीट जैसी परीक्षाएं मेरिट का प्रतीक बनें, न कि विवाद का। छात्रों का भविष्य दांव पर है, ऐसे में आधी-अधूरी कोशिशें पर्याप्त नहीं हो सकती। पूर्ण सुधार से ही विश्वास बहाल होगा।