पेट्रोल-डीजल को लेकर सरकार का बड़ा झटका! अब एक दिन में मिलेगा सिर्फ इतने लीटर तेल

पेट्रोल-डीजल को लेकर सरकार का बड़ा झटका! अब एक दिन में मिलेगा सिर्फ इतने लीटर तेल

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Petrol Diesel News in Hindi : मोदी सरकार ने एक आधिकारिक आदेश जारी कर इंडस्ट्रियल, कमर्शियल और इंस्टीट्यूशनल यूजर्स को पेट्रोल पंपों से पेट्रोल और डीजल खरीदने पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। अब बड़े उपभोक्ताओं को अपनी जरूरत का तेल 'बल्क सेल पॉइंट्स' से ही खरीदना होगा। अब गाड़ियों के लिए भी प्रति दिन 200 लीटर डीजल की सीमा तय की गई है। ALSO READ: एथेनॉल वाले पेट्रोल पर टैक्स खत्म! इस बड़े फैसले से क्या पेट्रोल सस्ता होगा, आपकी गाड़ी पर क्या होगा असर?

 

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 11 जून को मोटर स्पिरिट और हाई स्पीड डीजल (खुदरा दुकानों के माध्यम से आपूर्ति का अस्थायी विनियमन) आदेश, 2026 जारी किया, जिसमें ईंधन खुदरा विक्रेताओं और तेल विपणन कंपनियों को एक बार में 90 दिनों तक की अवधि के लिए खुदरा दुकानों से थोक खरीद पर अंकुश लगाने का निर्देश दिया गया है।

 

अधिसूचना में कहा गया है कि वर्तमान स्थिति में यह देखा गया है कि देश के कुछ हिस्सों में खुदरा दुकानों के माध्यम से मोटर स्पिरिट (पेट्रोल) और हाई स्पीड डीजल (डीजल) की बिक्री में असामान्य वृद्धि हो रही है। इसका कारण खुदरा और थोक बिक्री कीमतों के बीच अंतर के चलते औद्योगिक, वाणिज्यिक और संस्थागत उपभोक्ताओं का खुदरा दुकानों की ओर रुख करना है। ALSO READ: पेट्रोल से 20 रुपए सस्ता ईंधन आ गया! WagonR और Splendor वालों के लिए बड़ी खुशखबरी

 

39 रुपये प्रति लीटर का अंतर

पश्चिम एशिया संकट के बाद लागत बढ़ने के बावजूद आम जनता को राहत देने के लिए रिटेल कीमतें ज्यादा नहीं बढ़ाई गईं। इससे दिल्ली में रिटेल डीजल (95.20 रुपए प्रति लीटर) और बल्क डीजल (134.50 रुपए प्रति लीटर) के बीच 39 रुपए से अधिक का भारी अंतर आ गया। इस वजह से बल्क यूजर्स नुकसान से बचने के लिए रिटेल पेट्रोल पंपों से खरीदारी करने लगे थे। ALSO READ: E20 पेट्रोल से E85 सस्ता होगा, जानिए Flex Fuel Maruti Wagon R आपके लिए कितनी फायदेमंद, क्या है कीमत

 

एक ग्राहक को नहीं मिलेगा 200 लीटर से ज्यादा डीजल

इस अधिसूचना में खुदरा दुकानों पर डीजल की बिक्री को वाहनों के ईंधन टैंक या पेट्रोलियम और विस्फोटक सुरक्षा संगठन (पीईएसओ) द्वारा अनुमोदित कंटेनरों तक सीमित कर दिया गया है, और प्रति ग्राहक या वाहन प्रति दिन खरीद की सीमा 200 लीटर तय की गई है। आदेश में कहा गया है कि ऐसे डीजल को पुनः बेचा नहीं जा सकता।

edited by : Nrapendra Gupta

क्या भारत में एलन मस्क की ‘स्टारलिंक’ पर मंडराए संकट के बादल?

क्या भारत में एलन मस्क की ‘स्टारलिंक’ पर मंडराए संकट के बादल?

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मीडिया खबरों में दावा किया गया है कि भारत ने शीर्ष अमेरिकी कारोबारी एलन मस्क को झटका देते हुए उनकी कंपनी स्टारलिंक को देश में उपग्रह आधारित इंटरनेट सेवा शुरू करने की मंजूरी रोक दी है। बताया जा रहा है कि ईरान युद्ध में कंपनी के उपग्रह आधारित टर्मिनलों के उपयोग को लेकर चिंता के बाद यह फैसला किया गया। हालांकि स्टारलिंक ने इस तरह खबरों का खंडन किया है।

 

मीडिया कंपनी ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्र सरकार की सुरक्षा एजेंसियों ने स्टारलिंक को अंतिम परिचालन मंजूरी देने से इनकार कर दिया। स्टारलिंक के टर्मिनलों का इस्तेमाल ईरान   और अमेरिका-इजराइल के बीच युद्ध के दौरान किया गया। ऐसे में सुरक्षा एजेंसियों को डर है कि भू-राजनीतिक तनाव या कानून-व्यवस्था बिगड़ने की स्थिति में अमेरिकी स्वामित्व वाली इस कंपनी पर नियंत्रण पाना मुश्किल होगा।

 

गौरतलब है कि ईरान में इंटरनेट पर पाबंदी के बावजूद स्टारलिंक के टर्मिनलों के जरिये इंटरनेट चालू रहा। वह भी तब, जबकि कंपनी के पास ईरान में परिचालन का लाइसेंस तक नहीं था।

 

इस कदम से साफ है कि स्टारलिंक का वैश्विक विस्तार एकसमान नहीं रहने वाला है। स्टारलिंक पहले ही चीन में प्रवेश नहीं कर पा रहा है और अब भारत भी इसके विस्तार दायरे से बाहर हो गया है।

 

अधिकारी ने किया भ्रामक खबरों का खंडन

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर स्टारलिंक बिजनेस ऑपरेशंस की वाइस प्रेसिडेंट लॉरेन ड्रायर ने कहा, 'सूत्रों के हवाले से भ्रामक और बेबुनियाद खबरें चल रही हैं। स्टारलिंक भारत सरकार के साथ सक्रिय बातचीत कर रही है। हमने सभी जरूरी रेगुलेटरी और कंप्लायंस प्रक्रियाओं को पारदर्शी और जिम्मेदारी के साथ पूरा करने के लिए सरकार के साथ मिलकर काम किया है।'

भारतीय कंपनियां भी तैयार

भारत के सैटेलाइट इंटरनेट बाजार में स्टारलिंक के अलावा अन्य बड़ी कंपनियां भी कतार में हैं। सरकार पहले ही भारती ग्रुप समर्थित 'यूटेलसैट वनवेब' और रिलायंस जियो की 'जियो-एसजीएस' को लाइसेंस जारी कर चुकी है। स्पेक्ट्रम आवंटन के बाद दोनों कंपनियां देश में अपनी सेवाएं शुरू कर सकती है।

edited by : Nrapendra Gupta 

जामनगर बनेगा AI इंफ्रास्ट्रक्चर का नया केंद्र, रिलायंस-Meta बनाएंगे डेटा सेंटर

जामनगर बनेगा AI इंफ्रास्ट्रक्चर का नया केंद्र, रिलायंस-Meta बनाएंगे डेटा सेंटर

Reliance Industries Limited and Meta have partnered to build data center in Jamnagar Gujarat

– रिन्युएबल एनर्जी, नेटवर्क कनेक्टिविटी और ऑपरेशन की जिम्मेदारी रिलायंस के पास

– जामनगर से Meta की AI कंप्यूटिंग जरूरतों को मिलेगी ताकत

– 168MW क्षमता वाला डेटा सेंटर 2 साल में बनाएगी रिलायंस

रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड और Meta ने गुजरात के जामनगर में AI-एनेबल्ड डेटा सेंटर बनाने के लिए साझेदारी की है। रिलायंस जामनगर में 168MW क्षमता वाला डेटा सेंटर विकसित करेगी, जिसे अगले 2 वर्षों में तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। आगे जरूरत के हिसाब से इसकी क्षमता बढ़ाई जा सकेगी।

 

रिलायंस इस परियोजना में डेटा सेंटर का डिजाइन, निर्माण, बिजली और जरूरी सेवाओं का प्रबंधन, रिन्युएबल पावर सप्लाई, नेटवर्क कनेक्टिविटी और ऑपरेशनल सर्विसेज उपलब्ध कराएगी यानी रिलायंस इस प्रोजेक्ट में Meta के लिए एंड-टू-एंड इंफ्रास्ट्रक्चर पार्टनर की भूमिका निभाएगी।

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यह भारत में Meta के लिए पहली बिल्ट-टू-सूट डेटा सेंटर क्षमता होगी। आसान भाषा में कहें तो यह डेटा सेंटर Meta की खास जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया जाएगा। इससे Meta के AI इंफ्रास्ट्रक्चर, उसके मुख्य कारोबार और बड़े पैमाने की कंप्यूटिंग जरूरतों को मदद मिलेगी।

 

गुजरात का जामनगर एक अहम रणनीतिक स्थान है। यहां रिन्युएबल एनर्जी, पानी की उपलब्धता, जियो का बड़ा फाइबर नेटवर्क और पश्चिमी तट पर समुद्री इंटरनेट केबल लैंडिंग स्टेशनों की नजदीकी जैसे फायदे हैं। यह डेटा सेंटर रिन्युएबल एनर्जी से चलेगा और कूलिंग के लिए साफ किए गए समुद्री पानी का इस्तेमाल किया जाएगा।

 

रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर मुकेश डी. अंबानी ने कहा कि Meta के साथ यह साझेदारी भारत के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए एक बड़ा क्षण है। उन्होंने कहा कि रिलायंस विश्वस्तरीय डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है, जो AI इनोवेशन की अगली पीढ़ी को भारत ही नहीं, दुनिया के लिए भी ताकत देगा। उनके मुताबिक जामनगर हाइपरस्केल AI कंप्यूटिंग के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा।

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Meta के फाउंडर और CEO मार्क जुकरबर्ग ने कहा कि कंपनी भारत में अपना पहला AI-एनेबल्ड डेटा सेंटर रिलायंस के साथ बनाने को लेकर उत्साहित है। उन्होंने कहा कि जामनगर की यह विश्वस्तरीय सुविधा Meta को अपनी AI इंफ्रास्ट्रक्चर क्षमता को वैश्विक स्तर पर बढ़ाने में मदद करेगी और भारत की अर्थव्यवस्था में Meta के दीर्घकालिक निवेश को और मजबूत करेगी।

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रिलीज़ के मुताबिक यह साझेदारी भारत सरकार की उन प्राथमिकताओं से भी मेल खाती है, जिनमें डेटा सेंटर को रणनीतिक राष्ट्रीय इंफ्रास्ट्रक्चर माना गया है। यह प्रोजेक्ट भारत में वैश्विक AI इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश को आकर्षित करने की दिशा में भी अहम कदम माना जा रहा है।
Edited By : Chetan Gour

राजेश एक्सपोर्ट्स के 15 लाख करोड़ के भंवर में फंसा LIC का पैसा! क्या डूब जाएगी आम निवेशकों की गाढ़ी कमाई?

राजेश एक्सपोर्ट्स के 15 लाख करोड़ के भंवर में फंसा LIC का पैसा! क्या डूब जाएगी आम निवेशकों की गाढ़ी कमाई?

Rajesh Exports News

Rajesh Exports fraud case: भारतीय शेयर बाजार ने कई बड़े घोटाले देखे हैं, लेकिन जून 2026 में सामने आया राजेश एक्सपोर्ट्स (Rajesh Exports) का यह मामला बेहद अनोखा और हैरान करने वाला है। एक आम निवेशक के नजरिए से देखें तो यह बात आसानी से गले नहीं उतरती कि महज 3000 करोड़ रुपए के मार्केट कैप वाली कंपनी भला 15 लाख करोड़ रुपए का हेरफेर कैसे कर सकती है?

 

यह रकम इतनी बड़ी है कि यह भारत के कुल सालाना एक्सपोर्ट (निर्यात) के लगभग 20 फीसदी के बराबर बैठती है। आखिर कैसे हुआ यह सब? क्या यह बैंकों से नकदी लेकर भागने का मामला है? जी नहीं, यह बेहद शातिर दिमाग से रचा गया अकाउंटिंग फ्रॉड (कारोबार में हेराफेरी) का खेल है। आइए इसे बेहद आसान भाषा में समझते हैं।

सेबी (SEBI) का बड़ा एक्शन : प्रमोटर राजेश मेहता पर शिकंजा

बाजार नियामक सेबी (SEBI) ने इस पूरे मामले पर कड़ा रुख अख्तियार किया है। जून 2026 में जारी अपने अंतरिम आदेश में सेबी ने कंपनी के प्रमोटर और सीएमडी राजेश मेहता पर शेयर बाजार में ट्रेडिंग करने की पूरी तरह से रोक लगा दी है। इसके साथ ही, नेशनल फाइनेंशियल रिपोर्टिंग अथॉरिटी (NFRA) को निर्देश दिया गया है कि वह कंपनी के ऑडिटर (BSD & Co) के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे, जिन्होंने सालों तक इतने बड़े भ्रामक आंकड़ों पर आंखें मूंदकर हस्ताक्षर किए।

खेल की शुरुआत : कब और कैसे खुली पोल?

इस पूरे खेल का पर्दाफाश तब शुरू हुआ जब 11 मार्च, 2024 को सेबी के पास एक जागरूक शेयरधारक की शिकायत पहुंची।

 

  • शक की वजह : शिकायत में कंपनी की 'ट्रेड रिसीवेबल्स' (व्यापार प्राप्तियों) पर सवाल उठाए गए थे, जो कथित तौर पर दो साल से भी अधिक समय से बकाया थीं।
  • लंबी अवधि की लेनदारियां : आमतौर पर अकाउंटिंग की भाषा में इतने लंबे समय तक बकाया रकम इस बात का संकेत होती है कि या तो भुगतान मिलने में कोई गंभीर समस्या है या फिर बही-खातों में जानबूझकर हेराफेरी की जा रही है।

 

इस शिकायत के बाद सेबी तुरंत एक्शन में आया। अक्टूबर 2024 में एक जांच प्राधिकरण नियुक्त किया गया और कंपनी के खातों की फोरेंसिक जांच के लिए बीडीओ (BDO India) को जिम्मेदारी सौंपी गई। यह हाल के वर्षों में भारतीय कॉरपोरेट इतिहास की सबसे बड़ी जांचों में से एक बन गई।

5 साल और 15 लाख करोड़ का फर्जीवाड़ा : कैसे रचा गया चक्रव्यूह?

सेबी की जांच में जो बातें सामने आईं, वे आंखें खोलने वाली थीं। वित्त वर्ष 2021 से वित्त वर्ष 2025 के बीच, राजेश एक्सपोर्ट्स ने अपनी कुल कंसोलिडेटेड बिक्री (Consolidated Revenue) का 97% से 99% हिस्सा विदेशी सहायक कंपनियों (Subsidiaries) से आना दिखाया।

 

रीढ़ की हड्डी पर ही वार : इस समूह की सबसे महत्वपूर्ण सहायक कंपनी स्विट्जरलैंड स्थित गोल्ड रिफाइनरी यूनिट 'वालकैम्बी एसए' (Valcambi SA) है, जिसे राजेश एक्सपोर्ट्स ने सालों पहले खरीदा था। इसे ही कंपनी के अंतरराष्ट्रीय कारोबार का मुख्य आधार माना जाता था।

 

जब फोरेंसिक ऑडिटर्स ने वैलकैम्बी और अन्य विदेशी कंपनियों के रिकॉर्ड्स खंगाले, तो एक चौंकाने वाला अंतर (Mismatch) सामने आया। सेबी के मुताबिक, कंपनी ने अपनी वित्तीय रिपोर्टों में जो रेवेन्यू (राजस्व) दिखाया था, वह सहायक कंपनियों के वास्तविक रिकॉर्ड से मेल ही नहीं खा रहा था। पिछले 5 सालों के आंकड़ों को मिलाने पर यह अंतर कुल 15.15 लाख करोड़ रुपए  का निकला!

 

यह कोई एक झटके में गायब की गई नकदी (Cash) नहीं थी। असल में, कंपनी ने कागजों पर जो 15 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की संचयी बिक्री (Cumulative Sales) दिखाई थी, वह केवल हवा में थी—वास्तव में वह बिजनेस कभी हुआ ही नहीं था।

चालाकी के तीन रास्ते : कैसे घुमाया गया आंकड़ों का पहिया?

सोने (Gold) के कारोबार की एक खास विशेषता होती है। इसमें प्रॉफिट मार्जिन बहुत कम होता है (लगभग 0.5% से 1%), लेकिन इसका टर्नओवर (सालाना लेनदेन) बहुत भारी-भरकम होता है। इसी बात का फायदा उठाकर राजेश मेहता ने मुख्य रूप से तीन तरीके अपनाए:

 

1. विदेशी शेल और सहायक कंपनियों का मायाजाल

कंपनी ने सिंगापुर में REL Singapore और स्विट्जरलैंड में Valcambi जैसी सहायक कंपनियों का जाल बुना। दस्तावेजों में दिखाया गया कि सारा बंपर बिजनेस इन्हीं के जरिए हो रहा है। मजेदार बात यह है कि जब सेबी ने इन विदेशी कंपनियों के अकाउंटिंग सिस्टम, बिल और बैंक ट्रांजैक्शन की डिटेल्स मांगी, तो कंपनी ने डेटा देने में आनाकानी की और जांच में सहयोग नहीं किया।

 

2. सर्कुलर ट्रेडिंग (कागजी कारोबार)

सोने के क्षेत्र में 'सर्कुलर ट्रेडिंग' करना बेहद आसान माना जाता है। इसमें असल में कोई सोना कहीं नहीं जाता, बल्कि सोने की एक ही खेप या केवल बिल को अपनी ही 4-5 डमी (शेल) कंपनियों के बीच गोल-गोल घुमाकर टर्नओवर को कई गुना बढ़ा दिया जाता है। सेबी को पक्का अंदेशा है कि कंपनी का 99% रेवेन्यू इसी तरह कागजों पर बनाया गया था।

 

3. अफ्रीकी माइंस का रहस्यमयी निवेश

साल 2023 में कंपनी ने जोर-शोर से दावा किया था कि उन्होंने अफ्रीका में सोने की खदानों (Gold Mines) में 1,035 करोड़ रुपए का भारी निवेश किया है। लेकिन जब ऑडिटर्स ने खातों की जांच की, तो न तो पैरेंट कंपनी और न ही किसी सहायक कंपनी के रिकॉर्ड में इस निवेश का कोई वजूद मिला। यह पैसा भी पूरी तरह शक के दायरे में है।

 

कंपनी के पैसों से पर्सनल ट्रेडिंग और केनरा बैंक का संकट

जांच में यह भी सामने आया कि कंपनी के फंड का इस्तेमाल प्रमोटर राजेश मेहता से जुड़े निजी खातों में ट्रांसफर करने के लिए किया गया। इन पैसों का उपयोग व्यक्तिगत डेरिवेटिव ट्रेडिंग (F&O) गतिविधियों के लिए हो रहा था। जांचकर्ताओं ने राजेश मेहता के निजी खातों में 7.4 करोड़ रुपए के संदिग्ध लेनदेन को पकड़ा, जिसका एक हिस्सा बाद में कंपनी को वापस किया गया।

 

दूसरी तरफ, कंपनी कर्ज के दलदल में भी फंसती जा रही है। लोन चुकाने में असमर्थ रहने के कारण केनरा बैंक ने कंपनी के 509 करोड़ रुपये के लोन को संकटग्रस्त परिसंपत्ति (Stressed Asset/NPA) घोषित कर दिया है। बैंक अब अपनी बकाया राशि वसूलने के लिए नीलामी प्रक्रिया के जरिए इसे बेचने की तैयारी कर रहा है।


LIC और आम निवेशकों पर क्या होगा असर?

इस महाघोटाले की आंच सिर्फ प्रमोटर्स तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के लाखों आम नागरिकों पर भी इसका अप्रत्यक्ष असर पड़ रहा है। देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) की राजेश एक्सपोर्ट्स में 10.8% की बड़ी हिस्सेदारी (Stake) है।

 

जैसे ही यह खबर बाजार में फैली, राजेश एक्सपोर्ट्स के शेयरों में 5 फीसदी का लोअर सर्किट लग गया और कंपनी की मार्केट वैल्यू गिरकर 3,090 करोड़ रुपये रह गई। LIC जैसी संस्था का पैसा डूबने का सीधा मतलब है कि आम जनता के भरोसे को चोट पहुंचना।

क्यों किया गया यह सब? और कंपनी की सफाई

सवाल उठता है कि आखिर प्रमोटर्स ने अपनी बैलेंस शीट को इतना बढ़ा-चढ़ाकर (हर साल 2.5 से 3 लाख करोड़ की सेल) क्यों दिखाया? इसका सीधा जवाब है—भरोसा जीतना। बैलेंस शीट जितनी बड़ी और आकर्षक होगी, शेयर बाजार में निवेशकों का आकर्षण उतना ही बढ़ेगा और केनरा बैंक या LIC जैसी बड़ी वित्तीय संस्थाओं से कर्ज व निवेश पाना उतना ही आसान हो जाएगा।

 

दूसरी ओर, राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। स्टॉक एक्सचेंज को दिए स्पष्टीकरण में कंपनी ने कहा- “सेबी द्वारा लगाए गए सभी आरोप पूरी तरह बेबुनियाद हैं। यह आदेश केवल अंतरिम (शुरुआती) है और सेबी अभी किसी अंतिम निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा है। हमारे द्वारा घोषित रेवेन्यू के आंकड़े शत-प्रतिशत सही हैं और टर्नओवर को कतई बढ़ा-चढ़ाकर नहीं दिखाया गया है।”

 

अब गेंद सेबी और कानून के पाले में है। यह देखना दिलचस्प होगा कि फॉरेंसिक ऑडिट की अंतिम रिपोर्ट में इस 15 लाख करोड़ के कॉरपोरेट चक्रव्यूह के और कितने काले पन्ने सामने आते हैं। आम निवेशकों के लिए सबक साफ है— सिर्फ भारी-भरकम टर्नओवर देखकर किसी कंपनी पर आंख मूंदकर भरोसा न करें।

महंगाई का झटका! घरेलू LPG सिलेंडर 29 रुपए महंगा, जानिए अब आपके शहर में कितनी होगी कीमत

महंगाई का झटका! घरेलू LPG सिलेंडर 29 रुपए महंगा, जानिए अब आपके शहर में कितनी होगी कीमत

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आम लोगों को एक बार फिर महंगाई का झटका लगा है। घरेलू रसोई गैस (LPG) सिलेंडर की कीमत में 29 रुपए प्रति सिलेंडर की बढ़ोतरी कर दी गई है। नई दरें रविवार, 7 जून से लागू हो गई हैं। इस बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत 913 रुपए से बढ़कर 942 रुपए हो गई है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ रहे असर के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन की कीमतों में दबाव बना हुआ है। इसी वजह से घरेलू गैस के दामों में एक बार फिर इजाफा किया गया है।

 

इससे पहले मार्च में भी घरेलू LPG सिलेंडर की कीमतों में 60 रुपए की बढ़ोतरी की गई थी। उस समय वैश्विक ऊर्जा बाजार पर अमेरिका-ईरान तनाव का असर देखने को मिला था।

क्यों बढ़े LPG के दाम?

सरकारी तेल विपणन कंपनियों का कहना है कि सीमित वैश्विक आपूर्ति और बढ़ती लागत के कारण उन्हें घरेलू LPG की बिक्री पर भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। सूत्रों के अनुसार, ताजा बढ़ोतरी से पहले कंपनियों को प्रत्येक घरेलू सिलेंडर पर करीब 703 रुपए का नुकसान हो रहा था।

 

घरेलू LPG के साथ-साथ पेट्रोल, डीजल, एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) और कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमतों में भी हाल के महीनों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

 

कमर्शियल LPG भी हुआ महंगा

 

होटल, रेस्टोरेंट और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में इस्तेमाल होने वाले 19 किलोग्राम के कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमतों में भी लगातार इजाफा हो रहा है। 1 जून को इसकी कीमत में 42 रुपए की बढ़ोतरी की गई थी, जिसके बाद दिल्ली में इसकी कीमत 3,113 रुपए प्रति सिलेंडर पहुंच गई है। इससे पहले मई में कमर्शियल सिलेंडर के दाम 1,000 रुपए, अप्रैल में 195.50 रुपए और मार्च में 114.50 रुपए बढ़ाए गए थे। Edited by : Sudhir Sharma

 

होम और कार लोन की EMI पर बड़ी राहत, RBI ने रेपो रेट को रखा स्थिर; जानें जीडीपी और महंगाई पर क्या कहा?

होम और कार लोन की EMI पर बड़ी राहत, RBI ने रेपो रेट को रखा स्थिर; जानें जीडीपी और महंगाई पर क्या कहा?

RBI Monetary Policy

RBI Monetary Policy: रिजर्व बैंक (RBI) ने शुक्रवार को मौद्रिक नीति की घोषणा करते हुए रेपो रेट को 5.25% पर बरकरार रखा। इस फैसले से अब लोन की EMI नहीं बढ़ेगी। यानी आपके होम लोन, कार लोन या पर्सनल लोन की मासिक किस्त में कोई बढ़ोतरी नहीं होगी।

 

भारतीय रिजर्व बैंक ने रियल GDP ग्रोथ का अनुमान अब 6.9% से घटाकर 6.6% कर दिया गया है। रेपो रेट को स्थिर रखकर आरबीआई ने एक ओर देश की आर्थिक रफ्तार को बनाए रखा है। दूसरी तरफ पश्चिम एशिया में जारी संकट की वजह से कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों पर भी उसकी नजर है।

 

रेपो वह ब्याज दर है, जिस पर वाणिज्यिक बैंक अपनी तात्कालिक जरूरतों को पूरा करने के लिए केंद्रीय बैंक से कर्ज लेते हैं। आरबीआई ने इसके साथ मौद्रिक नीति रुख को ‘तटस्थ’ बनाए रखा है। इसका मतलब है कि केंद्रीय बैंक आर्थिक स्थिति के हिसाब से नीतिगत दर में समायोजन को लेकर लचीला बना रहेगा।

 

मौद्रिक नीति की 6 खास बातें 

  • नीतिगत दर रेपो को उम्मीद के मुताबिक 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखा।
  • चालू वित्त वर्ष के लिए आर्थिक वृद्धि के अनुमान को घटाकर 6.6 प्रतिशत किया। पहले इसके 6.9 प्रतिशत रहने का अनुमान था। 
  • 2026-27 के लिए खुदरा मुद्रास्फीति के अनुमान को बढ़ाकर 5.1 प्रतिशत कर दिया है, जो पहले 4.6 प्रतिशत था।
  • RBI को अब अर्थव्यवस्था की रफ्तार पहले के मुकाबले थोड़ी धीमी रहने की आशंका है।
  • विदेशी मुद्रा बाजार में स्थिरता बनाए रखने के लिए RBI पूरी तरह सतर्क।
  • सरकार ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों को आकर्षित करने के लिए सरकारी बॉन्ड में निवेश पर कैपिटल गेन टैक्स खत्म कर दिया है।

 

क्या बोले RBI गर्वनर संजय मल्होत्रा?

गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था ने ग्लोबल उथल-पुथल के इस दौर में पहले के ऐसे ही दौरों की तुलना में कहीं बेहतर बुनियादी मजबूती के साथ प्रवेश किया है। हमें भरोसा है कि हम कम से कम नुकसान के साथ इन झटकों का सामना कर लेंगे।

 

उन्होंने कहा कि पिछले कुछ महीनों में, ग्लोबल अर्थव्यवस्था में काफ़ी अनिश्चितता रही है, अहम व्यापारिक रास्तों और सप्लाई चेन में रुकावटें आई हैं, बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ा है और बिजनेस को लेकर सावधानी का माहौल रहा है। मैं सबसे पहले इस बात पर जोर देना चाहूंगा कि भारतीय अर्थव्यवस्था ने ग्लोबल उथल-पुथल के इस दौर में पहले के ऐसे ही दौरों की तुलना में कहीं बेहतर बुनियादी मजबूती के साथ प्रवेश किया है। हमें भरोसा है कि हम कम से कम नुकसान के साथ इन झटकों का सामना कर लेंगे।

 

आरबीआई के इस फैसले से इकोनॉमी को भी मजबूती मिलेगी क्योंकि ब्याज दरें बढ़ने का डर खत्म होने से बाजार में घरों और नई गाड़ियों की डिमांड बढ़ेगी। इससे प्रॉपर्टी और ऑटोमोबाइल सेक्टर को रफ्तार मिलेगी।

edited by : Nrapendra Gupta

RBI ने सोना बेचने के दावे को किया खारिज, ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट को बताया गलत; जानिए क्या है पूरा सच

RBI ने सोना बेचने के दावे को किया खारिज, ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट को बताया गलत; जानिए क्या है पूरा सच

RBI rejects Bloomberg report on gold

ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक्स की रिपोर्ट में दावा किया गया कि अमेरिका-ईरान संघर्ष से बढ़े आर्थिक दबाव के बीच भारतीय रिजर्व बैंक ने विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करने के लिए लगभग 12 अरब डॉलर (लगभग 1.14 लाख करोड़ रुपए) मूल्य का सोना बेचा है। हालांकि रिजर्व बैंक ने इस दावे को सिरे से नकार दिया।

 

क्या है मामला?

ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक्स की रिपोर्ट के मुताबिक केंद्रीय बैंक रिजर्व बैंक ने 22 मई को समाप्त हुए दो हफ्तों के भीतर लगभग 12 अरब डॉलर (करीब 1.14 लाख करोड़ रुपए) मूल्य का सोना बेचा। इसी अवधि के दौरान केंद्रीय बैंक ने 7.5 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां खरीदीं। रिपोर्ट के अनुसार, आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा रुपए को स्थिर करने के लिए ब्याज दरों में बढ़ोतरी और विदेशी निवेशकों से डॉलर जुटाने जैसे सभी विकल्पों पर विचार कर रहे हैं।

 

रिजर्व बैंक ने क्या कहा?

रिजर्व बैंक ने मामले में स्पष्‍टीकरण जारी करते हुए कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक के संज्ञान में मीडिया के कुछ हिस्सों में आरबीआई द्वारा सोना बेचे जाने की खबरें आई हैं। आरबीआई इस बात पर जोर देता है कि ये खबरें सही नहीं हैं। 

RBI  ने कहा कि सोने के फिजिकल स्टॉक का विवरण आरबीआई द्वारा अपने 'मासिक बुलेटिन' में साझा किया जाता है। बैंक ने कहा कि आज की तारीख तक सोने का भौतिक भंडार 880.52 टन पर अपरिवर्तित बना हुआ है। इसलिए, आम जनता को सलाह दी जाती है कि वे ऐसे मामलों में समय-समय पर आरबीआई द्वारा प्रकाशित आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें।

क्या कहती है पीआईबी फैक्ट चैक की रिपोर्ट?

पीआईबी फैक्ट चैक ने भी एक्स पर अपनी पोस्ट में ब्लूमबर्ग के सोने बेचने संबंधी दावे को गलत बताया। इसमें RBI के हवाले कहा गया कि भारत के विदेशी मुद्रा भंडार (फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व) में सोने की हिस्सेदारी सितंबर 2025 के अंत में 13.92% से बढ़कर 31 मार्च 2026 को 16.70% हो गई। 22 मई 2026 तक यह और बढ़कर 16.85% हो गई है।

गौरतलब है कि अमेरिका ईरान युद्ध और हॉमूज स्ट्रेट से तेल सप्लाय बाधित होने की वजह से डॉलर के मुकाबले रुपया काफी कमजोर हो चला है। गिरते रुपए को थामने के लिए सरकार ने कई प्रयास किए हैं। पीएम मोदी ने भी लोगों से सोना नहीं खरीदने, तेल कम खाने और पेट्रोल डीजल का संभलकर इस्तेमाल करने की सलाह दी थी।

edited by : Nrapendra Gupta

RBI ला रहा है प्लास्टिक के नोट! न फटेंगे, न गलेंगे; जानिए कागजी नोटों की जगह क्यों पड़ी इसकी जरूरत

RBI ला रहा है प्लास्टिक के नोट! न फटेंगे, न गलेंगे; जानिए कागजी नोटों की जगह क्यों पड़ी इसकी जरूरत

plastic currency

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) देश में करेंसी नोटों की लगातार बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए प्लास्टिक या पॉलीमर नोट छापने पर गंभीरता से विचार कर रहा है। यह नोट लंबे समय तक ना फटेगा और ना ही गलेगा। साथ ही इसे बनाने की लागत भी कम आएगी।

 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पटना और मुंबई में हुई केंद्रीय बैंक की पिछली दो बोर्ड बैठकों में इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की गई है। ऐसी संभावना है कि आम जनता के लिए प्लास्टिक नोटों के इस्तेमाल का पायलट प्रोजेक्ट जल्द ही शुरू किया जा सकता है। RBI की वित्त वर्ष 2025 की सालाना रिपोर्ट से पता चला है कि कागजी नोटों की छपाई पर होने वाला खर्च पिछले वित्त वर्ष के 5,101.4 करोड़ रुपए से बढ़कर 6,372 रुपए हो गया था।

 

plastic currency

कहां से आया रुपया

रुपया शब्द संस्कृत के रुप्यकम से आया है। इसका मतलब होता है चांदी का सिक्का। शुरुआत में जो मूल रुपया इस्तेमाल में लाया जाता था वो चांदी का होता था, इसकी वजह से इसका नाम रुपया पड़ा। मध्यकाल में भारत में रुपए का प्रयोग सबसे पहले सूरी वंश के शासक शेरशाह सूरी ने किया था। उन्होंने देश पर 1540 से 1545 तक राज किया था। उस समय 10 ग्राम सोने से बने सिक्कों को रुपया कहा जाता था। उन्होंने ही सोने के साथ ही तांबे का भी सिक्का चलाया।

 

देश में कबसे छप रहे हैं कागज के नोट?

पहली बार देश में कागज के नोटों का प्रचलन 1861 के पेपर करेंसी एक्ट के बाद शुरू हुआ था। उससे पहले देश में सिक्कों का प्रचलन था। पहली कागजी मुद्रा विक्टोरिया पोट्रेट मुद्रा थी। ये नोट 10, 20, 50, 100 और 1000 रुपए के नोट में उपलब्ध थे। नोट पर क्वीन की तस्वीर थी और यह 2 भाषाओं में उपलब्ध थे। वर्ष 1923 में जॉर्ज पंचम की तस्वीर के साथ ही अधिक भाषाओं और विवरण वाले नोट प्रकाशित हुए। नोटों की प्रिटिंग बैंक ऑफ इंग्लैंड में होती थी। 1928 में भारत पहली बैंक नोट प्रेस नासिक में स्थापित हुई।

 

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया कब से छाप रहा है नोट?

रिजर्व बैक भारत की अर्थव्यवस्था को नियंत्रित करता है। यह केंद्रीय बैंक भारत में बैंकिंग प्रणाली भी संचालित करता है। 1935 में रिजर्व बैंक की स्थापना रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ऐक्ट 1934 के अनुसार हुई थी। 1938 में RBI ने सबसे पहले 5 रुपए का नोट जारी किया। बाद में इसी वर्ष 10, 100, 1000 और 10,000 रुपए के नोट जारी किए गए। 1940 में 1 रुपए का नोट जारी हुआ और फिर 1943 में 2 रुपए का नोट जारी कर दिया गया।

 

आजादी से पहले आरबीआई स्वतंत्र बैंक हुआ करता था लेकिन स्वतंत्रता के बाद इसका राष्ट्रीयकरण कर दिया गया। पूरे भारत में रिजर्व बैंक के कुल 29 क्षेत्रीय कार्यालय हैं। बैंक का मुख्यालय मुंबई में स्थित है। मौद्रिक नीति तैयार करना, उसका कार्यान्वयन और निगरानी करना आदि महत्वपूर्ण कार्य रिजर्व बैंक के ही जिम्मे हैं। मुद्रा जारी करना, उसका विनिमय करना और परिचालन योग्य न रहने पर उन्हें नष्ट करना भी RBI का काम है। आज भी देश में जारी हर नोट पर रिजर्व बैंक के गर्वनर के साइन होते हैं।

40 से ज्यादा देशों में चलती है प्लास्टिक करेंसी

इस तकनीक की शुरुआत सबसे पहले ऑस्ट्रेलिया ने 1988 में की थी। दुनिया भर में 40 से अधिक देश प्लास्टिक (पॉलिमर) करेंसी का उपयोग पूर्ण या आंशिक रूप से कर रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, न्यूजीलैंड, कनाडा, विएतनाम और मालदीव जैसे देशों में केवल प्लास्टिक के नोट ही चलते हैं। इन देशों ने कागज के नोट छापना पूरी तरह बंद कर दिया है। सिंगापुर, मलेशिया, थाईलैंड, सऊदी अरब, चिली और मेक्सिको समेत कई देशों में कुछ चुनिंदा नोट प्लास्टिक के हैं। यहां कागज के साथ ही प्लास्टिक के नोट भी चलते हैं।

 

क्या होगा फायदा?

  • ये कागजी नोटों की तुलना में लगभग 2.5 गुना ज्यादा चलते हैं।
  • ये पानी, चाय या कॉफी गिरने से खराब नहीं होते और इन पर गंदगी नहीं चिपकती।
  • फटने या कटने के बाद इन नोटों को रिसाइकिल करके अन्य प्लास्टिक उत्पाद बनाए जा सकते हैं।

Reliance ने कीं 1 लाख से ज्यादा नई भर्तियां, ग्रीन एनर्जी से 2 लाख रोजगार की उम्मीद

Reliance ने कीं 1 लाख से ज्यादा नई भर्तियां, ग्रीन एनर्जी से 2 लाख रोजगार की उम्मीद

Reliance Group made over 100000 new hires in financial year 2025-26

– कुल कर्मचारियों की संख्या 4.19 लाख के पार

– लगातार छठे साल ‘ग्रेट प्लेस टू वर्क’ प्रमाणन मिला

– AI, डिजिटल और ग्रीन एनर्जी से जुड़े क्षेत्रों पर रहा जोर

Reliance Group : रिलायंस ग्रुप ने वित्त वर्ष 2025-26 में 1 लाख से ज्यादा नई भर्तियां कीं। कंपनी की ताजा वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक 31 मार्च 2026 तक रिलायंस के कुल कर्मचारियों की संख्या बढ़कर 4,19,911 हो गई। इस दौरान कंपनी ने AI, डेटा साइंस, ऑटोमेशन और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन जैसे क्षेत्रों में नई प्रतिभाओं को जोड़ने पर खास ध्यान दिया। रिलायंस के मुताबिक यह भर्ती कंपनी के उस बदलाव को दिखाती है, जिसके तहत वह खुद को AI-फर्स्ट और डीप-टेक कंपनी के रूप में आगे बढ़ा रही है।

 

रोजगार के मोर्चे पर कंपनी की अगली बड़ी उम्मीद ग्रीन एनर्जी कारोबार से है। जामनगर में बन रहा धीरूभाई अंबानी ग्रीन एनर्जी गीगा कॉम्प्लेक्स अर्थव्यवस्था में 2 लाख से ज्यादा ग्रीन जॉब्स पैदा करने की क्षमता रखता है। कंपनी के मुताबिक स्वच्छ ऊर्जा की ओर यह बदलाव समूह के लिए रोजगार का अगला बड़ा इंजन बन सकता है।

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कंपनी सिर्फ नौकरियां देने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि अपने कर्मचारियों पर बड़ा निवेश भी करती है। रिपोर्ट के मुताबिक FY26 में रिलायंस ने कर्मचारियों पर 30,318 करोड़ रुपए खर्च किए, जो पिछले वित्त वर्ष के 28,559 करोड़ रुपए से 6.2 प्रतिशत अधिक है।

इसी दौरान कंपनी को लगातार छठे वर्ष ‘ग्रेट प्लेस टू वर्क’ का तमगा भी मिला। रिलायंस को ब्रैंडन हॉल ग्रुप HCM एक्सीलेंस अवॉर्ड्स 2024 और ग्रेट मैनेजर इंस्टीट्यूट की ओर से भारत की शीर्ष लीडरशिप फैक्ट्रीज में भी जगह मिली। महिला भागीदारी के मोर्चे पर भी रिलायंस ने प्रगति दर्ज की। FY26 में समूह में नेतृत्व पदों पर महिलाओं की हिस्सेदारी 14.7 प्रतिशत रही, जबकि कमाई से सीधे जुड़े कामों में यह हिस्सेदारी 30.6 प्रतिशत रही।

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जियो ने 11 भाषाओं में काम करने वाला AI-आधारित भर्ती प्लेटफॉर्म भी इस्तेमाल किया, जिसका उद्देश्य भर्ती प्रक्रिया को अधिक निष्पक्ष बनाना है। कंपनी के ग्रेजुएट इंजीनियर ट्रेनी कार्यक्रम को FY26 में 53,900 रजिस्ट्रेशन मिले, जिससे दूर-दराज के क्षेत्रों के उम्मीदवारों तक पहुंच बढ़ी।
Edited By : Chetan Gour

Reliance का सरकारी खजाने में 2.16 लाख करोड़ रुपए का योगदान, CSR खर्च भी बढ़ा

Reliance का सरकारी खजाने में 2.16 लाख करोड़ रुपए का योगदान, CSR खर्च भी बढ़ा

Reliance Industries contributed Rs 216472 crore to government exchequer

– 10 वर्षों में राष्ट्रीय कोष में योगदान 15 लाख करोड़ रुपए के पार

– हर 100 रुपए की वैल्यू में करीब 47 रुपए सरकार को गए

– FY26 में CSR खर्च बढ़कर 2,248 करोड़ रुपए हुआ

Reliance Industries : रिलायंस इंडस्ट्रीज ने वित्त वर्ष 2025-26 में सरकारी खजाने में 2,16,472 करोड़ रुपए का योगदान दिया है। इसमें टैक्स, ड्यूटी, लेवी और सरकार को किए गए अन्य भुगतान शामिल हैं। वित्त वर्ष 2024-25 में यह योगदान 2,10,269 करोड़ रुपए था। इस तरह सालाना आधार पर इसमें करीब 2.95 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के दौर में सरकारी खजाने में इतना बड़ा योगदान, देश के लिए कंपनी की आर्थिक भूमिका को रेखांकित करता है।

 

कंपनी के अनुसार, पिछले 10 वर्षों में रिलायंस का राष्ट्रीय कोष में कुल योगदान 15 लाख करोड़ रुपए से अधिक हो चुका है। FY26 में रिलायंस ने कुल 4,63,448 करोड़ रुपए की वैल्यू जोड़ी, जिसमें से सबसे बड़ा हिस्सा सरकार को मिला। कंपनी द्वारा बनाई गई हर 100 रुपए की वैल्यू में से करीब 47 रुपए सरकारी खजाने में गए।

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इसी दौरान रिलायंस का समाज पर खर्च भी बढ़ा। FY26 में कंपनी ने कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी यानी CSR पर 2,248 करोड़ रुपए खर्च किए, जो पिछले वित्त वर्ष के 2,156 करोड़ रुपए से 4.3 प्रतिशत अधिक है। कोविड के बाद से रिलायंस का कुल CSR खर्च 9,500 करोड़ रुपए से ज्यादा हो गया है।

 

रिलायंस फाउंडेशन की सामाजिक पहलों ने अब तक देशभर में 9.7 करोड़ से अधिक लोगों तक पहुंच बनाई है। ये काम ग्रामीण बदलाव, शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल, महिला सशक्तिकरण, पशु कल्याण और पर्यावरण जैसे क्षेत्रों में किए गए हैं। 

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कंपनी के मुताबिक रिलायंस फाउंडेशन स्कॉलरशिप कार्यक्रम के तहत हर साल 5,100 छात्रों को सहायता दी जा रही है। वहीं ग्रामीण परिवर्तन कार्यक्रम में किसानों की आय और उत्पादन में सुधार दर्ज किया गया है। रिलायंस फाउंडेशन आने वाले वर्षों में शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण आजीविका से जुड़े कामों को और विस्तार देने पर ध्यान दे रहा है।

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रिलायंस के FY26 आंकड़े बताते हैं कि कंपनी की वृद्धि का असर केवल कारोबार तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी राजस्व और सामाजिक विकास में भी उसका बड़ा योगदान है।
Edited By : Chetan Gour