ईरान को सुबह धमकी दी, रात में कहा- डील साइन:ईरान से समझौते के दिन कैसे बदलता रहा ट्रम्प का मिजाज; 12 PHOTOS

अमेरिका और ईरान के बीच जंग खत्म करने के लिए समझौते पर डोनाल्ड ट्रम्प ने बुधवार रात को फ्रांस के वर्साय पैलेस में साइन किए। इस दौरान फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों मौजूद थे। अमेरिका-ईरान की पीस डील 19 जून को स्विट्जरलैंड में होनी थी। ऐसे में किसी को भी यह अंदाजा नहीं था कि 2 दिन पहले ट्रम्प यह ऐतिहासिक फैसला करेंगे। ट्रम्प ने समझौते के दिन की शुरुआत ईरान को धमकी देने से शुरू की। उन्होंने G7 समिट के दौरान कहा कि अगर अगले 60 दिनों में समझौता नहीं हुआ, तो अमेरिका फिर से ईरान पर बम बरसाएगा। रात होते-होते ट्रम्प नरम पड़ गए और पीस डील पर साइन कर दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक उस समय वहां मौजूद लोगों को कुछ मिनट पहले तक इसकी जानकारी नहीं थी। ट्रम्प के ईरान को धमकी देने से लेकर पीस डील पर साइन करने से जुड़ी 12 तस्वीरें… G7 वर्किंग सेशन और प्रेस कॉन्फ्रेंस PM मोदी से मुलाकात, लुक की तारीफ की ट्रम्प वर्साय पैलेस की ओर रवाना हुए

दुनिया देखती रह गई और पाकिस्तान बन गया ‘किंगमेकर’! शहबाज शरीफ ने किया अमेरिका और ईरान ‘मेगा डील’ का ऐलान

US Iran Sign Islamabad MoU: खाड़ी में सीजफायर के बीच दुनिया के लिए एक और राहत भरी खबर सामने आई है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव को खत्म करने के लिए ऐतिहासिक ‘इस्लामाबाद समझौते’ पर हस्ताक्षर हो गए हैं। अब यह समझौता तुरंत प्रभाव से लागू भी हो गया है।

इस ऐतिहासिक शांति समझौते की मध्यस्थता करने वाले पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इसकी आधिकारिक घोषणा की है। उन्होंने लिखा कि, ‘इस समझौते के तहत ईरान तुरंत होर्मुज जलडमरूमध्य को खोल देगा, वहीं अमेरिका भी अपनी नौसैनिक नाकेबंदी को ‘तुरंत’ हटा लेगा’।

शहबाज शरीफ और कतर की मध्यस्थता से हुई डील

पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ ने X पर लिखा, ‘मुझे यह घोषणा करते हुए गर्व हो रहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच ऐतिहासिक ‘इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन’ पर आज इलेक्ट्रॉनिक रूप से हस्ताक्षर किए गए हैं। दोनों देशों के माननीय राष्ट्रपतियों ने इस पर दस्तखत किए हैं और मध्यस्थ के रूप में मैंने भी इस पर हस्ताक्षर किए हैं’।

शहबाज शरीफ ने बताया कि पाकिस्तान, सह-मध्यस्थ कतर के सहयोग से 19 जून 2026 को स्विट्जरलैंड में एक आधिकारिक समारोह की मेजबानी करेगा, जहां तकनीकी स्तर की बातचीत शुरू होगी। उन्होंने इस समझौते को क्षेत्र में शांति, आपसी सम्मान और साझा समृद्धि की एक मजबूत नींव बताया।

ट्रंप ने वर्साय के महल में किए दस्तखत

व्हाइट हाउस ने भी इस बात की पुष्टि की है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ संघर्ष को समाप्त करने वाले इस समझौते को अपनी मंजूरी दे दी है। रॉयटर्स और एएफपी के मुताबिक, G7 शिखर सम्मेलन के बाद फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन के साथ वर्साय के महल में डिनर के दौरान ट्रंप ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किए।

वर्साय से रवाना होते समय ट्रंप ने खुद पत्रकारों से इसकी पुष्टि करते हुए कहा, ‘यह साइन हो चुका है… मैंने वर्साय में इस पर दस्तखत किए हैं।’ हालांकि, ट्रंप ने यह चेतावनी भी दी कि अगर ईरान ने इसका उल्लंघन किया, तो सख्त कार्रवाई की जा सकती है। उन्होंने कहा कि स्थिति की निगरानी के लिए अमेरिकी सेना कुछ समय तक खाड़ी में मौजूद रहेगी।

ईरान ने भी की पुष्टि, लेबनान को लेकर हुआ बड़ा फैसला

ईरान की आधिकारिक समाचार एजेंसी ‘इर्ना’ (IRNA) के मुताबिक, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने भी समझौते के फाइनल होने की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के सर्वोच्च अधिकारियों के दस्तखत के बाद अब इस समझौते को लागू करने की परीक्षा है।

समझौते की ये है मुख्य बातें:

  1. ईरान ने साफ किया कि लेबनान में युद्ध को समाप्त करना और सीजफायर उनकी प्राथमिकता है। इस समझौते के शुरुआती क्लॉज में लेबनान का तीन बार जिक्र है और लेबनान की संप्रभुता का सम्मान करने की बात कही गई है।
  2. समझौते के तहत अगले 60 दिनों तक ईरान के परमाणु कार्यक्रम और उस पर लगे प्रतिबंधों को हटाने के लिए बातचीत का दौर चलेगा।
  3. ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि उसका मिसाइल कार्यक्रम इस बातचीत के एजेंडे से पूरी तरह बाहर है और उस पर कोई समझौता नहीं होगा।

ईरानी संसद के स्पीकर बोले- ‘हमारा हाथ ट्रिगर पर है’

भले ही समझौते पर हस्ताक्षर हो गए हों, लेकिन ईरान के भीतर अमेरिका को लेकर अभी भी भारी अविश्वास है। ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबफ ने वाशिंगटन के प्रति गहरा संदेह जताते हुए कहा, ‘अमेरिका पर मेरा अविश्वास सबसे ज्यादा है। भले ही यह समझौता फाइनल हो जाए और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) इसे मंजूरी दे दे, फिर भी अमेरिका भरोसे के लायक नहीं है’।

होर्मुज जलडमरूमध्य का जिक्र करते हुए उन्होंने कड़े शब्दों में चेतावनी दी, ‘ईरान के वहां संप्रभु अधिकार हैं और स्वाभाविक रूप से हम सेवाओं के लिए शुल्क लेंगे। हमारा हाथ अभी भी ट्रिगर पर है।’

पीएम शरीफ ने इन नेताओं का जताया आभार

शहबाज शरीफ ने इस ऐतिहासिक डील तक पहुंचने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, जेडी वेंस, जेरेड कुशनर और ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला सैय्यद मोजतबा खामेनेई और राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन का शुक्रिया अदा किया। इसके अलावा उन्होंने कतर, सऊदी अरब, तुर्की, मिस्र के नेतृत्व और पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर के अथक प्रयासों की सराहना की।

‘भारतीय नाविकों की सुरक्षा जरूरी’… पीएम मोदी ने ट्रंप के सामने उठाया 3 नाविकों की मौत का मुद्दा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को G7 समिट के दौरान अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बातचीत की। इस बातचीत में उन्होंने अमेरिकी हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत पर चिंता जताई। इस मुद्दे को उठाते हुए पीएम मोदी ने कहा: “ईरान के साथ किसी भी समझौते में समुद्री जहाजों पर काम करने वाले नाविकों की सुरक्षा और हिफाजत पक्की की जानी चाहिए।” बता दें कि इस महीने की शुरुआत में, ओमान की खाड़ी में एक ऑयल टैंकर पर अमेरिकी नौसेना के हमले में तीन भारतीय नाविक मारे गए थे।

वहीं, जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या वह पीड़ितों के परिवारों के लिए कोई संदेश या शोक संवेदना देना चाहते हैं, तो उन्होंने कहा, “हां, बिल्कुल।” उन्होंने समुद्री व्यापार में काम करने वाले लोगों का जिक्र करते हुए कहा कि वह “उन सभी लोगों से प्यार करते हैं।”

बुधवार को CNN-News18 के एक सवाल के जवाब में राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा: “मैंने भारतीय नाविकों के बारे में सुना। यह एक मुश्किल पेशा है। हम उन सभी लोगों का सम्मान करते हैं।”

बता दें कि हमले के समय पलाऊ के झंडे वाला तेल टैंकर सेट्टेबेलो (Settebello) पर कुल 28 लोग सवार थे। इनमें 24 भारतीय नागरिक और 4 विदेशी नागरिक शामिल थे। विदेशी नागरिकों में दो पाकिस्तानी, एक यूक्रेनी और एक रूसी थे।

इस घटना के बाद 21 भारतीय नाविकों को सुरक्षित बचा लिया गया था। वहीं, लापता नाविकों की तलाश तब तक जारी रहीं जब तक कि उनकी मौत की पुष्टि नहीं हो गई।

वहीं, अमेरिकी सेना ने जहाज पर हमला करने की बात मानी है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (USCENTCOM) के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने टैंकर को तब निशाना बनाया जब उसने अमेरिकी नौसेना के कर्मियों के निर्देशों का पालन नहीं किया और ईरान से तेल ले जाने की कोशिश की, जो अमेरिकी नाकेबंदी (ब्लॉकेड) का उल्लंघन था।

गौरतलब है कि यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ा हुआ है। क्षेत्र में जारी संघर्ष के कारण लगाए गए समुद्री प्रतिबंधों से कमर्शियल जहाजों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार में भी रुकावटें आ रही हैं।

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वर्ल्ड अपडेट्स:भारत और ब्रिटेन का फ्री ट्रेड एग्रीमेंट 15 जुलाई से लागू, G7 में मोदी- स्टार्मर ने इसकी घोषणा की

भारत और ब्रिटेन का फ्री ट्रेड एग्रीमेंट 15 जुलाई 2026 से लागू होगा। पीएम नरेंद्र मोदी और ब्रिटिश पीएम कीर स्टार्मर ने बुधवार को इसकी घोषणा की। इस समझौते पर 24 जुलाई 2025 को हस्ताक्षर हुए थे। दोनों नेताओं की फ्रांस के एवियन में जी-7 शिखर सम्मेलन में मुलाकात हुई थी। यानी कारोबारियों को नई व्यवस्था की तैयारी के लिए 28 दिन मिलेंगे। पीएम मोदी ने इसे भारत-ब्रिटेन संबंधों के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। भारतीय कपड़े, फुटवियर और कुछ खाद्य उत्पादों पर टैरिफ घटाएगा। भारतीय कुशल प्रोफेशनल्स को ब्रिटेन में काम के दौरान दोहरे सोशल सिक्योरिटी योगदान से राहत मिलेगी। यह राहत 36 महीने से बढ़ाकर 60 महीने तक होगी। भारत में ब्रिटिश व्हिस्की पर शुल्क 150% से घटकर 40% होगा। ऑटोमोबाइल पर शुल्क कोटा के तहत 100% से घटकर 10% होगा।

“समुद्री यात्रियों की सुरक्षा सबसे अहम”, तनाव के बीच ट्रंप के सामने PM मोदी ने पुरजोर तरीके से उठाया ‘भारतीय नाविकों’ का मुद्दा

फ्रांस में चल रहे G7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच शुक्रवार को एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक हुई। यह मुलाकात भारत और अमेरिका के रिश्तों को एक नई दिशा देने के लिए बहुत बड़ी मानी जा रही है। दरअसल, पिछले कुछ समय से दोनों देशों के बीच व्यापारिक पाबंदियों (टैरिफ) और हाल ही में ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ के पास अमेरिकी हमलों में तीन भारतीय नाविकों की मौत के बाद से रिश्तों में थोड़ी कड़वाहट आ गई थी। ऐसे में इस बैठक पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी थीं।

“हमारे रिश्तों में आई है नई ऊर्जा”- पीएम मोदी

पिछले 16 महीनों में राष्ट्रपति ट्रंप के साथ अपनी पहली आमने-सामने की मुलाकात में PM मोदी ने बेहद सकारात्मक रुख दिखाया।

राष्ट्रपति ट्रंप को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “मिस्टर प्रेसिडेंट, आपसे मिलकर बहुत खुशी हुई। पिछले साल हमारी मुलाकात वॉशिंगटन में हुई थी और तब से हमारे संबंधों को एक नई रफ्तार मिली है। एक नई ऊर्जा का संचार हुआ है। यह हमारे लिए बेहद खुशी की बात है कि हमारी दोनों टीमों ने मिलकर कुछ लक्ष्य तय किए हैं। हम उन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं और बहुत तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।”

मिडल ईस्ट में शांति के प्रयासों की तारीफ

पीएम मोदी ने पश्चिम एशिया में शांति बहाल करने के लिए डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व और उनके प्रयासों की जमकर सराहना की। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस इलाके में शांति का यह प्रयास लंबे समय तक टिका रहेगा। मोदी ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (समुद्री व्यापार का मुख्य रास्ता) का खुला रहना बेहद जरूरी है और समुद्र में जहाजों की आवाजाही बिना किसी रोक-टोक के होनी चाहिए।

भारतीय नाविकों की सुरक्षा को ‘सर्वोच्च प्राथमिकता’ देने की मांग

मुलाकात के दौरान पीएम मोदी ने अमेरिका और ईरान के बीच शुक्रवार को ही साइन होने वाले समझौते (MoU) का जिक्र किया। उन्होंने बेहद मजबूती से भारतीय नाविकों (Seafarers) का मुद्दा उठाया, जो दुनिया के कुल नाविकों का लगभग 10% हैं। हाल ही में हुई तीन भारतीय नाविकों की मौत के जख्मों को ध्यान में रखते हुए पीएम मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि इस नए समझौते में उनकी सुरक्षा को सबसे ऊपर रखा जाए।

पीएम मोदी ने ट्रंप से साफ शब्दों में कहा, “जैसा कि आप जानते हैं, समुद्री व्यापार की दुनिया में लाखों भारतीय नाविक पूरी दुनिया के समुद्री रास्तों पर अपनी ड्यूटी निभा रहे हैं, जिसमें ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ भी शामिल है। वे वैश्विक प्रगति में बहुत बड़ा योगदान दे रहे हैं। उनकी सुरक्षा हमारे लिए सबसे ज्यादा मायने रखती है। आपने ईरान के साथ इस समझौते को करने के लिए बहुत बड़े प्रयास किए हैं, और मुझे पूरा विश्वास है कि जब इस समझौते को लागू किया जाएगा, तो नाविकों की सुरक्षा को सबसे पहली प्राथमिकता दी जाएगी।”

‘अगर भारत पर कभी हमला हुआ, तो अमेरिका हमेशा उसके साथ खड़ा रहेगा’ PM मोदी से मुलाकात में ट्रंप ने कह दी बहुत बड़ी बात

‘अगर भारत पर कभी हमला हुआ, तो अमेरिका हमेशा उसके साथ खड़ा रहेगा’ PM मोदी से मुलाकात में ट्रंप ने कह दी बहुत बड़ी बात

फ्रांस में चल रहे G7 शिखर सम्मेलन (G7 Summit) के इतर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच बेहद खास और ऐतिहासिक बातचीत हुई। इस मुलाकात के दौरान जहां पीएम मोदी ने अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली शांति डील का स्वागत किया, वहीं डोनाल्ड ट्रंप ने पीएम मोदी पर जमकर तारीफों के पुल बांधे। ट्रंप ने यहां तक कह दिया कि अगर भारत पर कोई हमला होता है, तो अमेरिका हमेशा भारत के साथ खड़ा रहेगा।

पीएम मोदी की बड़ी चिंता: “हमारे नाविकों की सुरक्षा सबसे जरूरी”

अमेरिका और ईरान के बीच होने वाले समझौते (MoU) पर बात करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में शांति के लिए जो प्रयास किए जा रहे हैं, वे काबिले तारीफ हैं। इससे दुनिया में शांति की एक नई किरण दिखाई दे रही है। हालांकि, पीएम मोदी ने इस डील के बीच भारत की सबसे बड़ी चिंता को दुनिया के सामने रखा।

पीएम मोदी ने साफ शब्दों में कहा: “हम हमेशा से कहते आए हैं कि समुद्री रास्तों से व्यापार बिना किसी रुकावट के होना चाहिए। ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ का खुला रहना पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद जरूरी है। दुनिया के अलग-अलग समुद्री जहाजों पर हमारे लाखों भारतीय नाविक अपनी सेवाएं दे रहे हैं। मेरा मानना है कि उनकी सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है। मुझे पूरा भरोसा है कि अमेरिका-ईरान के इस समझौते में नाविकों की सुरक्षा को सबसे ऊपर (सर्वोच्च प्राथमिकता) रखा जाएगा।”

ट्रंप ने की तारीफों की बौछार: “मोदी फरिश्ते जैसे सुंदर हैं, लेकिन…”

मुलाकात के बाद डोनाल्ड ट्रंप अपने पुराने और चिर-परिचित अंदाज में नजर आए। उन्होंने पीएम मोदी को अपना बहुत पुराना और पक्का दोस्त बताया। ट्रंप ने मोदी की तारीफ करते हुए कुछ बेहद दिलचस्प बातें कहीं।

ट्रंप ने मुस्कुराते हुए कहा, “मोदी किसी एंजल (फरिश्ते) की तरह बेहद खूबसूरत दिखते हैं। वह बहुत अच्छे लगते हैं।”

इसके साथ ही ट्रंप ने चुटकी लेते हुए कहा, “दिखने में भले ही वह शांत और सुंदर हों, लेकिन व्यापार के मामलों में वह बहुत सख्त कारोबारी (Tough Trader) और मुश्किल नेगोशिएटर हैं। वे भारत और अमेरिका दोनों से बहुत प्यार करते हैं।”

ट्रंप ने एक बहुत बड़ा बयान देते हुए कहा, “अगर भारत पर कोई हमला करता है और वहां के लीडर मोदी हुए… तो हम (अमेरिका) तुरंत भारत की मदद के लिए वहां मौजूद होंगे। मेरे मन में मोदी के लिए बहुत सम्मान है।”

ट्रंप के मुताबिक, जब तक नरेंद्र मोदी जैसे नेता कमान संभाल रहे हैं, तब तक दुनिया और पश्चिम एशिया की राजनीति में भारत का बहुत बड़ा रोल रहने वाला है। ट्रंप ने यह भी कहा कि वे भविष्य में भारत दौरे पर जरूर जाएंगे।

व्यापार और दोस्ती पर क्या बोले ट्रंप?

डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस में हुई इस मुलाकात को बेहद सकारात्मक और उपयोगी बताया। उन्होंने कहा कि G7 के बाद अब आगे G2 और G20 बैठकों का दौर शुरू होगा।

ट्रंप ने बातचीत के मुख्य बिंदु साझा करते हुए कहा, अमेरिका और भारत के बीच कई बड़े व्यापार समझौतों (Trade Deals) पर तेजी से काम चल रहा है।

ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था इस समय शानदार काम कर रही है। वहां नई फैक्ट्रियां लग रही हैं। उन्होंने इस बात की तारीफ की कि पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत भी अमेरिका में बड़े पैमाने पर निवेश (Investment) कर रहा है।

इस हाई-प्रोफाइल मुलाकात ने एक बार फिर दिखा दिया है कि वैश्विक मंच पर भारत और अमेरिका की दोस्ती कितनी मजबूत और गहरी हो चुकी है।

“दिखने में शांत, लेकिन बातचीत में ‘जबरदस्त खिलाड़ी’ हैं PM मोदी”… G7 समिट में ट्रंप ने की तारीफ, बोले- मैं उनके जैसा नहीं हूं

“दिखने में शांत, लेकिन बातचीत में ‘जबरदस्त खिलाड़ी’ हैं PM मोदी”… G7 समिट में ट्रंप ने की तारीफ, बोले- मैं उनके जैसा नहीं हूं

फ्रांस में चल रहे G7 शिखर सम्मेलन (G7 Summit) के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जोड़ी एक बार फिर चर्चाओं में आ गई है। समिट से अलग इन दोनों नेताओं के द्विपक्षीय बातचीत हुई, लेकिन उससे पहले ही ट्रंप ने पीएम मोदी की जमकर तारीफ की। ट्रंप ने पीएम मोदी की खुलकर तारीफ करते हुए दोनों नेताओं के बीच लंबे समय से चली आ रही मजबूत व्यक्तिगत दोस्ती को फिर से उजागर किया।

ट्रंप ने हाल के महीनों में कई बार मोदी को लेकर सकारात्मक टिप्पणियां की हैं। उन्होंने पीएम मोदी को “शांत”, “कूल” और यहां तक कि “टोटल किलर” तक बताया था। ट्रंप के अनुसार, इसका मतलब यह है कि मोदी भले ही सार्वजनिक तौर पर शांत और संयमित दिखाई देते हों, लेकिन बातचीत और फैसले लेने के मामले में बेहद मजबूत और प्रभावशाली नेता हैं।

16 महीने बाद आमने-सामने मिले मोदी और ट्रंप

फ्रांस के एवियन-ले-बैंस में हुई ये मुलाकात पिछले 16 महीनों में दोनों नेताओं की पहली आमने-सामने की बैठक थी। दोनों नेताओं ने गर्मजोशी से एक-दूसरे का स्वागत किया और बाद में व्यापार, ऊर्जा सहयोग और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा की।

यह मुलाकात ऐसे समय हुई है, जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते समेत कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर बातचीत जारी है। साथ ही होर्मुज स्ट्रेट से जुड़े हालिया घटनाक्रमों के कारण क्षेत्रीय सुरक्षा भी चर्चा का बड़ा विषय बनी हुई है।

ट्रंप बार-बार करते हैं मोदी का जिक्र

डोनाल्ड ट्रंप अक्सर दुनिया के नेताओं के बारे में बात करते समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जिक्र करते हैं। उन्होंने कई बार ह्यूस्टन में आयोजित ऐतिहासिक “Howdy Modi” कार्यक्रम का जिक्र किया है और मोदी को ऐसे नेता के रूप में पेश किया है जो कठिन फैसले लेने से नहीं हिचकते।

“टोटल किलर” वाला ट्रंप का बयान भी काफी चर्चा में रहा था। ट्रंप का कहना था कि मोदी की शांत छवि के पीछे एक बेहद मजबूत राजनीतिक रणनीतिकार और सख्त वार्ताकार मौजूद है।

मोदी के लंबे कार्यकाल की भी की तारीफ

कुछ समय पहले ट्रंप ने पीएम मोदी को भारत के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले प्रधानमंत्रियों में शामिल होने पर बधाई दी थी। उन्होंने मोदी को “मजबूत, स्वस्थ और बुद्धिमान व्यक्ति” बताते हुए कहा था कि आने वाले वर्षों में भी उन्हें बड़ी सफलता मिलेगी।

किन मुद्दों पर हुई चर्चा?

सूत्रों के मुताबिक, दोनों नेताओं के बीच संभावित व्यापार समझौते, ऊर्जा सहयोग, वीजा से जुड़े मामलों और वैश्विक भू-राजनीतिक हालात पर चर्चा हुई। नई दिल्ली और वॉशिंगटन के बीच व्यापार वार्ता जारी है और दोनों पक्ष जल्द ही एक अंतरिम समझौते की उम्मीद जता रहे हैं।

G7 शिखर सम्मेलन के बीच मोदी और ट्रंप की यह मुलाकात सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाली बैठकों में शामिल हो गई है। यह न सिर्फ भारत-अमेरिका संबंधों की अहमियत दिखाती है, बल्कि दोनों नेताओं के बीच की व्यक्तिगत केमिस्ट्री को भी एक बार फिर सामने लाती है।

US-ईरान का MoU साइन होने से पहले लीक! लेकिन होर्मूज स्ट्रेट पर नहीं बनी बात? ये 14 प्वाइंट हुए फाइनल

US-ईरान का MoU साइन होने से पहले लीक! लेकिन होर्मूज स्ट्रेट पर नहीं बनी बात? ये 14 प्वाइंट हुए फाइनल

अमेरिका और ईरान के बीच शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में एक ऐतिहासिक समझौते (MoU) पर दस्तखत होने वाले हैं। दोनों देशों ने भले ही इस डील की शर्तों को बेहद गुप्त रखा था, लेकिन अमेरिकी न्यूज चैनल सीएनएन (CNN) के हाथ इस समझौते का ’14-पॉइंट वाला सीक्रेट ड्राफ्ट’ लग गया है। चौंकाने वाली बात ये है कि इस MoU में दुनिया के सबसे अहम तेल रास्ते स्ट्रेट ऑफ होर्मूज के भविष्य को लेकर कुछ भी तय नहीं हुआ है।

हालांकि, व्हाइट हाउस और ईरानी मीडिया दोनों ही इस लीक हुए ड्राफ्ट को पूरी तरह सटीक नहीं मान रहे हैं, लेकिन G7 समिट में मौजूद राजनयिकों ने इसकी मुख्य बातों की पुष्टि की है। इस ड्राफ्ट के मुताबिक, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबफ पहले ही इस पर डिजिटल साइन कर चुके हैं।

आइए बेहद आसान भाषा में समझते हैं कि दुनिया के इन दो कट्टर दुश्मनों के बीच हुए इस गुप्त समझौते के उन 14 पॉइंट्स में क्या लिखा है:

  1. हर मोर्चे पर तुरंत जंग का खात्मा: दोनों देश और उनके साथी (जैसे लेबनान) तुरंत युद्ध रोकने का ऐलान करते हैं। अब से कोई भी एक-दूसरे पर हमला नहीं करेगा या धमकी नहीं देगा।
  2. एक-दूसरे का सम्मान: अमेरिका और ईरान एक-दूसरे की सीमाओं और संप्रभुता का सम्मान करेंगे और एक-दूसरे के अंदरूनी मामलों में टांग नहीं अड़ाएंगे।
  3. 60 दिनों की समय-सीमा: दोनों देश इस शुरुआती समझौते के बाद अगले 60 दिनों के भीतर एक ‘फाइनल एग्रीमेंट’ तैयार करेंगे। आपसी सहमति से यह समय बढ़ाया भी जा सकता है।
  4. समुद्री नाकाबंदी खत्म और अमेरिकी सेना की वापसी: अमेरिका 30 दिनों के भीतर ईरान की समुद्री नाकाबंदी हटा देगा, ताकि पहले की तरह जहाजों की आवाजाही हो सके। फाइनल एग्रीमेंट के 30 दिनों के भीतर अमेरिका इलाके से अपनी सेनाएं भी हटा लेगा।
  5. समुद्री रास्तों से हटेंगे बारूदी माइंस: ईरान 30 दिनों के भीतर फारस की खाड़ी (Persian Gulf) से ओमान की खाड़ी तक मर्चेंट जहाजों का रास्ता साफ करेगा। इसके लिए ईरान समुद्र में बिछाई गई बारूदी सुरंगों को हटाएगा।
  6. ईरान के लिए $300 बिलियन का फंड: अमेरिका अपने क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ मिलकर ईरान की अर्थव्यवस्था को दोबारा खड़ा करने के लिए कम से कम 300 अरब डॉलर (करीब 25 लाख करोड़ रुपये) के फंड का इंतजाम करेगा।
  7. सभी पाबंदियों से आजादी: फाइनल एग्रीमेंट के तहत अमेरिका ईरान पर लगे अपने सभी तरह के प्रतिबंधों को हटाएगा। साथ ही संयुक्त राष्ट्र (UN) और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की पाबंदियां भी खत्म की जाएंगी।
  8. परमाणु हथियार कभी नहीं बनाएगा ईरान: ईरान ने एक बार फिर दोहराया है कि वह कभी भी न्यूक्लियर हथियार नहीं बनाएगा। हालांकि, ईरान के पास पहले से मौजूद यूरेनियम का क्या होगा, यह फाइनल एग्रीमेंट में तय किया जाएगा।
  9. बातचीत तक ‘जैसे थे’ की स्थिति: जब तक फाइनल डील नहीं हो जाती, तब तक दोनों देश ‘जैसे हैं वैसे ही रहेंगे’। यानी ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को आगे नहीं बढ़ाएगा और अमेरिका कोई नया प्रतिबंध नहीं लगाएगा।
  10. ईरान को तेल बेचने की खुली छूट: जब तक पाबंदियां पूरी तरह नहीं हट जातीं, तब तक अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ईरान को कच्चे तेल और पेट्रोकेमिकल प्रोडक्ट्स बेचने के लिए विशेष छूट (Waivers) देगा। बैंकिंग, इंश्योरेंस और ट्रांसपोर्ट की सुविधाएं भी मिलेंगी।
  11. ईरान का जब्त पैसा वापस मिलेगा: जैसे-जैसे बातचीत आगे बढ़ेगी, अमेरिका ईरान के जब्त किए गए पैसे और संपत्तियों को पूरी तरह आजाद कर देगा। ईरान का सेंट्रल बैंक इस पैसे का इस्तेमाल कर सकेगा।
  12. निगरानी के लिए बनेगी कमेटी: डील ठीक से लागू हो रही है या नहीं और दोनों देश अपनी बात पर टिके हैं या नहीं, इसकी निगरानी के लिए एक तालमेल तंत्र बनाया जाएगा।
  13. बची हुई शर्तों पर आगे बात: समुद्री रास्ते खोलने, तेल बेचने की छूट मिलने और पैसे जारी होने के बाद, दोनों देश बची हुई शर्तों को सुलझाने के लिए फाइनल बातचीत के दौर में कदम रखेंगे।
  14. संयुक्त राष्ट्र (UN) की पक्की मुहर: जब दोनों देशों के बीच फाइनल एग्रीमेंट बन जाएगा, तो उसे कानूनी रूप से बाध्यकारी बनाने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में एक प्रस्ताव पास कराकर मंजूर किया जाएगा।

अधिकारियों का क्या कहना है?

अमेरिकी अधिकारियों ने CNN को बताया कि यह सिर्फ एक “राजनीतिक दस्तावेज” है। असली और महत्वपूर्ण वादे, खासकर ईरान के परमाणु कार्यक्रम के भविष्य को लेकर पर्दे के पीछे की गुप्त बातचीत (Back-Channel) में हुए हैं, जिनका जिक्र इस ड्राफ्ट में नहीं है। अब पूरी दुनिया की नजरें शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में होने वाले आधिकारिक हस्ताक्षरों पर टिकी हैं।

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दुनिया के सबसे ताकतवर देशों के नेता जब एक बंद कमरे में मिलते हैं, तो हमें लगता है कि वहां सिर्फ युद्ध, व्यापार और दुनिया की सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दों पर ही चर्चा होती होगी। लेकिन फ्रांस में चल रहे G7 समिट (G7 Summit) के दूसरे दिन एक गजब का वाकया हुआ। यहां करीब 27 मिनट तक नेताओं का माइक गलती से चालू रह गया (Hot-Mic)। इस ‘ओपन माइक’ ने दुनिया के इन बड़े नेताओं के बीच की अनौपचारिक बातचीत, हंसी-मजाक, खेल और निजी जिंदगी के कई ऐसे दिलचस्प राज खोल दिए जो अमूमन सामने नहीं आते।

इटली की पीएम मेलोनी ने छोड़ी सिगरेट

इस लीक हुई बातचीत में सबसे ज्यादा चर्चा इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की रही। जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने मेलोनी से अनौपचारिक बातचीत में पूछा कि क्या उन्होंने सुबह की सिगरेट पी ली है? इस पर मेलोनी ने सबको चौंकाते हुए बताया कि उन्होंने इसी साल 1 मई से सिगरेट पीना पूरी तरह छोड़ दिया है।

यह सुनते ही ब्रिटिश पीएम कीर स्टार्मर समेत कई नेताओं ने उन्हें बधाई दी। वहीं कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने मजाक में अपने हाथ को पकड़ने का इशारा करते हुए पूछा, “क्या आप निकोटीन पैच (सिगरेट छुड़ाने वाली पट्टी) का इस्तेमाल कर रही हैं?” इस पर मेलोनी ने खुशी से दोनों हाथ उठाकर जश्न मनाया।

समिट में चढ़ा फुटबॉल और UFC का बुखार

दुनिया भर के बड़े संकटों के बीच नेताओं के सिर पर फुटबॉल का खुमार भी देखने को मिला। अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको में होने वाले आगामी फीफा वर्ल्ड कप को लेकर नेताओं ने लंच के दौरान फुटबॉल पर लंबी बात की।

इसी बीच एक आवाज आई, “एले ले ब्लूज!” (फ्रांस की टीम का हौसला बढ़ाने वाला नारा)।

एक नेता ने पेरिस सेंट-जर्मेन (PSG) क्लब की चैंपियंस लीग में जीत की तारीफ की।

ब्रिटिश पीएम कीर स्टार्मर ने केप वर्डे की टीम की वर्ल्ड चैंपियन स्पेन को 0-0 से ड्रॉ पर रोकने को बेहद हैरान करने वाला बताया।

वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बातचीत का रुख मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स (MMA) की तरफ मोड़ दिया। उन्होंने अपने 80वें जन्मदिन पर व्हाइट हाउस में रखी गई UFC इवेंट की यादें ताजा करते हुए इसके प्रेसिडेंट डाना व्हाइट की जमकर तारीफ की।

ट्रंप का ‘ग्रीनलैंड’ वाला रहस्यमयी कमेंट

इस रिकॉर्डिंग में डोनाल्ड ट्रंप का एक छोटा सा कमेंट खूब सुर्खियां बटोर रहा है। यूरोपीयन यूनियन के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा से बात करते हुए ट्रंप ने धीरे से कहा, “तुम समझे?” और थोड़ा रुककर सिर्फ एक शब्द बोला- “ग्रीनलैंड।”

इसके आगे की बात सुनाई नहीं दी। लेकिन इस एक शब्द ने ही कौतूहल बढ़ा दिया है, क्योंकि ट्रंप पहले भी कई बार डेनमार्क के इस हिस्से (ग्रीनलैंड) को खरीदने की इच्छा जता चुके हैं, जिससे यूरोपीय नेता नाराज भी हुए थे। ट्रंप यहां क्या कहना चाहते थे, यह अब भी एक रहस्य है।

जब मैक्रों की घड़ी चुराने चले ट्रंप!

एक हल्के-फुल्के पल में कनाडा के पीएम मार्क कार्नी ने देखा कि फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों अपनी घड़ी लंच टेबल पर ही भूल गए हैं। कार्नी ने मजाक में कहा, “वह अपनी घड़ी यहीं छोड़ गए हैं। हमारे हाथ उनकी घड़ी लग गई है।”

यह सुनते ही ट्रंप तुरंत मजे लेते हुए बोले, “अगर वह छोड़ गए हैं, तो वो घड़ी मुझे दे दो, मुझे दे दो।” ट्रंप की यह बात सुनकर वहां मौजूद सभी नेता ठहाके मारकर हंस पड़े।

ट्रंप को मिले अनोखे तोहफे: साइकिल और ’47’ नंबर की जर्सी

इस समिट में नेताओं ने एक-दूसरे को गिफ्ट भी दिए। फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने सभी G7 नेताओं को एक-एक कस्टमाइज्ड (खास तौर पर तैयार) साइकिल गिफ्ट की। यह तोहफा इसलिए मजेदार था, क्योंकि ट्रंप अक्सर गोल्फ के अलावा किसी भी तरह की एक्सरसाइज से बचने के लिए जाने जाते हैं और इस पर मजाक भी करते हैं।

वहीं, जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने ट्रंप को जर्मनी की फुटबॉल टीम की एक जर्सी गिफ्ट की, जिस पर पीछे ‘TRUMP’ और ’47’ नंबर लिखा था (ट्रंप अमेरिका के 47वें राष्ट्रपति हैं)। ट्रंप ने इस जर्सी के साथ मुस्कुराते हुए तस्वीरें खिंचवाईं। बाद में जर्मन चांसलर ने इस फोटो को इंटरनेट पर पोस्ट करते हुए लिखा, “आखिरकार, हम सब एक ही टीम में हैं।”

Melodi का जलवा फिर बरकरार

तस्वीर खिंचवाने से ठीक पहले भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इटली की पीएम जॉर्जिया मेलोनी के बीच भी बेहद गर्मजोशी भरी मुलाकात हुई। दोनों ने एक-दूसरे का हंसकर स्वागत किया। मेलोनी ने पीएम मोदी से कहा, “आपसे दोबारा मिलकर बहुत अच्छा लगा!”

सोशल मीडिया पर दोनों की तस्वीरों और वीडियो के क्रेज का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने इस संक्षिप्त बातचीत के दौरान ‘इंस्टाग्राम’ का भी नाम लिया, जिसे सुनकर मेलोनी मुस्कुरा उठीं।

कुल मिलाकर, इस 27 मिनट के ‘ओपन माइक’ ने यह दिखा दिया कि भले ही ये दुनिया के सबसे ताकतवर नेता हों, लेकिन जब काम का दबाव थोड़ा कम होता है, तो ये भी आम इंसानों की तरह नींद की कमी, मौसम, खेल, सिगरेट और सोशल मीडिया पर मजेदार गप्पें लड़ाते हैं।

“सुधर जाओ, वरना फिर से सिर पर गिराएंगे बम”! G7 समिट में ईरान पर भड़के डोनाल्ड ट्रंप, डील से पहले दी खुली चेतावनी

 

“सुधर जाओ, वरना फिर से सिर पर गिराएंगे बम”! G7 समिट में ईरान पर भड़के डोनाल्ड ट्रंप, डील से पहले दी खुली चेतावनी

फ्रांस के एवियान शहर में चल रहे G7 शिखर सम्मेलन (G7 Summit) से एक बड़ी खबर आ रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर बेहद सख्त और कड़े तेवर दिखाए हैं। ट्रंप ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि अगर ईरान ने अपना रवैया नहीं सुधारा, तो अमेरिका एक बार फिर उस पर बम बरसाना शुरू कर देगा।

यह तीखी चेतावनी ऐसे समय में आई है, जब दोनों देश पश्चिमी एशिया (Middle East) में जारी युद्ध को खत्म करने के लिए राजी हो चुके हैं। इसी शुक्रवार को स्विट्जरलैंड के जिनेवा में दोनों देशों के बीच एक समझौते (MoU) पर दस्तखत होने वाले हैं। लेकिन ट्रंप ने साफ कर दिया है कि यह समझौता अभी फाइनल नहीं है।

ट्रंप ने अपने ही अंदाज में कहा, “यह सिर्फ एक समझौता (MoU) है। अगर मुझे यह पसंद नहीं आया, तो हम फिर से उन पर गोलियां चलाना और उनके सिर पर बम गिराना शुरू कर देंगे। अगर वे ढंग से बर्ताव नहीं करेंगे, तो मुझे यह बिल्कुल पसंद नहीं आएगा। हम सीधे उनके सिर के ठीक बीचों-बीच बम गिराने के लिए वापस लौट आएंगे।”

‘यह डील कई मायनों में अच्छी है’

हालांकि, ईरान को घुड़की देने के साथ-साथ राष्ट्रपति ट्रंप ने इस होने वाले समझौते की तारीफ भी की। उन्होंने कहा कि यह समझौता कई मायनों में अच्छा है, सबसे खास बात यह कि यह ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकेगा। ट्रंप हमेशा से यह मांग करते रहे हैं कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होने चाहिए।

ट्रंप ने इस समझौते के फायदे गिनाते हुए कहा:

सस्ता होगा पेट्रोल-डीजल: इस समझौते की खबर से ही शेयर बाजार का ग्राफ ऊपर जा रहा है और फ्यूल की कीमतें नीचे आ रही हैं।

खुल जाएगा समुद्री रास्ता: समझौता साइन होने के अगले दो दिनों के भीतर ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) को पूरी तरह से दोबारा खोल दिया जाएगा।

अमेरिका नहीं देगा एक भी पैसा: ट्रंप ने साफ किया कि इस समझौते के तहत वॉशिंगटन (अमेरिका) ईरान को कोई पैसा नहीं दे रहा है। हालांकि, उन्होंने किसी तीसरे देश के निवेश किए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया।

ओबामा पर साधा निशाना: “ईरान ने उन्हें धोखा दिया”

ट्रंप ने इस मौके पर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा पर भी जमकर भड़ास निकाली। ओबामा के कार्यकाल में हुए मशहूर ईरान न्यूक्लियर डील (JCPOA) का जिक्र करते हुए ट्रंप ने दावा किया, “ईरानियों ने ओबामा को धोखा दिया था और उनसे अरबों डॉलर ऐंठ लिए थे।”

बता दें कि ट्रंप शुरू से ही ओबामा की इस न्यूक्लियर डील के खिलाफ रहे हैं। यही वजह थी कि जब वे पहली बार राष्ट्रपति बने थे, तो उन्होंने 2018 में अमेरिका को इस डील से बाहर कर लिया था।

क्या है इस अमेरिका-ईरान डील में?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस नए समझौते (MoU) में मुख्य रूप से ये बातें शामिल हैं:

व्यापार का रास्ता खुलेगा: ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को तुरंत खोला जाएगा। यह दुनिया का वो बेहद महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है जहां से दुनिया का लगभग 20% (पांचवा हिस्सा) तेल और गैस का व्यापार होता है।

पाबंदियां हटेंगी: इसके बदले में ईरान पर लगे अमेरिकी और संयुक्त राष्ट्र (UN) के कड़े प्रतिबंधों को हटाने का रास्ता साफ होगा।

परमाणु हथियारों पर रोक: ईरान वादा करेगा कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा।

60 दिनों का सीजफायर: दोनों पक्ष 60 दिनों के लिए युद्धविराम बढ़ाने पर सहमत हुए हैं, ताकि शांति से आगे की बातचीत हो सके।

हर मोर्चे पर जंग का खात्मा: इस डील का फोकस लेबनान सहित सभी मोर्चों पर दुश्मनी और लड़ाई को पूरी तरह खत्म करना है, जिसकी मांग ईरान लगातार कर रहा था।

US Iran News: शांति समझौते को खामेनेई ने दिखाया ठेंगा! ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में कमर्शियल जहाजों पर किया ड्रोन हमला, अमेरिका का पलटवार