“मैं बॉस हूं’ वाले बयान पर ट्रंप की सफाई, बोले- मैं मजाक कर रहा था, मेरी बात को गलत समझा गया

Donald Trump: G7 नेताओं से “मैं बॉस हूं” (I’m the boss) वाली बात कहने के बाद, जब यह टिप्पणी वायरल हो गई और समिट के दौरान दुनिया भर का ध्यान अपनी ओर खींचा और लोगों को इस बात पर हंसी भी आई, तो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सफाई देते हुए कहा, “मैं मजाक कर रहा था। मैं बॉस बनने की कोशिश नहीं कर रहा था।” ट्रंप ने यह बात The Axios Show पर एक इंटरव्यू के दौरान कही। उन्होंने बताया कि उनकी टिप्पणी का मकसद मजाक करना था, लेकिन उसे गलत संदर्भ में लिया गया।

उस पल को याद करते हुए जब शो के होस्ट ने ट्रंप से पूछा, “आप कमरे में आए और कहा, ‘मैं बॉस हूं।’ उनमें से कितने लोगों ने इस बात पर यकीन किया होगा?”

इस पर ट्रंप ने जवाब दिया कि जब वह उस कमरे में पहुंचे, जहां पहले से ही दुनिया के कई बड़े नेता बैठे थे, तो उन्होंने माहौल हल्का करने के लिए मजाक में यह बात कही थी। उनका कहना है कि इस बयान को गंभीरता से लेने की जरूरत नहीं थी, लेकिन यह तेजी से वायरल हो गया।

“मैं बॉस हूं…” G7 बैठक में बोले ट्रंप 

बता दें कि बुधवार को, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने G7 शिखर सम्मेलन के अंतिम दिन बैठक में प्रवेश करते समय एक मजाकिया टिप्पणी की, जिस पर सब हंस पड़े।

जब वह तीन दिवसीय जी7 समिट के अंतिम दिन की सुबह की बैठक में पहुंचे, तो बाकी देश के नेता पहले से अपनी सीटों पर बैठे हुए थे। उसी दौरान ट्रंप ने अंदर आते हुए कहा, “मैं बॉस हूं।”

इसी हंसी-मजाक के बीच, फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन ने इस टिप्पणी को हल्के-फुल्के अंदाज में लिया। फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने पूछा, “आप कैसे हैं?” ट्रंप ने जवाब दिया, “अच्छा हूं, धन्यवाद।”

G7 समिट का आयोजन कैसे होता है, और इसमें कितने देश शामिल हैं?

गौरतलब है कि G7 देश बारी-बारी से कार्यक्रमों की मेजबानी और आयोजन करते हैं। इस बार फ्रांस को पिछले साल के मेजबान कनाडा से G7 की अध्यक्षता मिली थी और 2027 में यह अमेरिका को सौंपी जाएगी।

वहीं, इस समूह का पहला शिखर सम्मेलन 1975 में फ्रांस के रैम्बौइलेट में हुआ था। इसमें छह देशों – फ्रांस, पश्चिमी जर्मनी, इटली, जापान, ब्रिटेन और अमेरिका – के नेता एक साथ आए थे। उन्होंने दूसरे विश्व युद्ध के बाद आई सबसे बड़ी आर्थिक मंदी से उबरने की गति तेज करने के तरीकों पर विचार-विमर्श किया था। अगले साल कनाडा भी इसमें शामिल हो गया, जिससे यह G7 बन गया।

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“मुझसे फोटो के लिए गिड़गिड़ाई थीं मेलोनी”… ट्रंप के दावे पर भड़कीं इटली की पीएम, कहा- ‘हम कभी भी भीख नहीं मांगते’

अभी कुछ ही दिन पहले फ्रांस के एवियान (Evian) में हुए G7 शिखर सम्मेलन (G7 Summit) (15 से 17 जून) में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के बीच गर्मजोशी भरी मुलाकात की तस्वीरें सामने आई थीं। लेकिन अब इस दोस्ती में बहुत बड़ा धमाका हो गया है। डोनाल्ड ट्रंप ने एक इंटरव्यू में दावा कर दिया कि जॉर्जिया मेलोनी ने उनके साथ फोटो खिंचवाने के लिए बकायदा “भीख मांगी थी” (Begged)। इस दावे के बाद मेलोनी काफी ज्यादा भड़क गई हैं और उन्होंने ट्रंप को करारा जवाब दिया है।

ट्रंप का विवादित दावा: “तरस खाकर खिंचवाई फोटो”

इटली के एक न्यूज चैनल ‘La7 TV’ को दिए फोन इंटरव्यू में डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी ही धुन में मेलोनी का मजाक उड़ाते हुए कहा, “वह शायद खुश होंगी कि मैंने उनसे बात की, जबकि मुझे उनसे बात करने की कोई जरूरत नहीं थी। उन्होंने मेरे साथ एक तस्वीर खिंचवाने के लिए मुझसे भीख मांगी थी। वह मेरे साथ फोटो खिंचवाने के लिए इतनी बेताब थीं कि पूछिए मत। मैं तो फोटो नहीं खिंचवाता, लेकिन मुझे उन पर तरस आ गया, इसलिए मैं मान गया।”

मेलोनी का पलटवार: “ईश्वर गवाह है, इटली कभी भीख नहीं मांगता!”

ट्रंप के इस बयान के बाद जॉर्जिया मेलोनी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वीडियो जारी कर ट्रंप के दावों की धज्जियां उड़ा दीं।

मेलोनी ने वीडियो में साफ-साफ कहा, “डोनाल्ड ट्रंप का यह बयान पूरी तरह मनगढ़ंत और झूठा है। मैं सच में उनके इस व्यवहार से हैरान हूं। मुझे नहीं पता कि अमेरिकी राष्ट्रपति अपने ही सहयोगियों के साथ ऐसा बर्ताव क्यों करते हैं; वैसे यह कोई पहली बार नहीं है।”

मेलोनी यहीं नहीं रुकीं, उन्होंने ट्रंप की दुखती रग पर हाथ रखते हुए आगे कहा, “बड़े दुख की बात है कि ट्रंप अपनी यह आक्रामकता और तेवर पश्चिमी देशों या अमेरिका के असली दुश्मनों के खिलाफ नहीं दिखाते, बल्कि उनके सामने तो वह बेहद नरम पड़ जाते हैं। खैर, उन्हें एक बात हमेशा याद रखनी चाहिए: मैं और मेरा देश इटली, कभी किसी के आगे भीख नहीं मांगते।”

इटली में भारी गुस्सा: डिप्टी पीएम ने रद्द किया अमेरिका दौरा

ट्रंप की इस टिप्पणी से पूरे इटली के नेताओं में गुस्सा उबल पड़ा है। इसे पूरे देश का अपमान माना जा रहा है।

इटली के डिप्टी पीएम एंटोनियो तायानी ने गुस्से में अपना 21 और 22 जून का अमेरिका दौरा रद्द कर दिया है। उन्होंने कहा, “ट्रंप के ये शब्द पूरे इटली का अपमान हैं, इसलिए मैं अमेरिका नहीं जा रहा।”

इटली के रक्षा मंत्री गुइडो क्रोसेटो ने कहा, “मैं तो बंदूक की नोक पर भी मेलोनी को किसी से फोटो के लिए भीख मांगते नहीं देख सकता। मेलोनी ने इटली और यूरोप के भले के लिए ट्रंप की पुरानी कड़वी बातों को भुलाकर उनसे मुलाकात की थी, लेकिन ट्रंप ने फिर से अपनी खराब तहज़ीब (Lapse in style) दिखा दी।”

कभी पक्के दोस्त थे, अब क्यों आई इतनी कड़वाहट?

आपको बता दें कि जॉर्जिया मेलोनी कभी डोनाल्ड ट्रंप की बहुत बड़ी समर्थक हुआ करती थीं। यहां तक कि साल 2025 में जब ट्रंप ने दोबारा राष्ट्रपति पद की शपथ ली, तो मेलोनी उस समारोह में शामिल होने वाली अकेली यूरोपीय नेता थीं।

लेकिन फिर रिश्ते क्यों बिगड़े?

दरअसल ट्रंप ने ईसाई धर्मगुरु पोप लियो (Pope Leo) पर कुछ विवादित टिप्पणियां की थीं, जिससे मेलोनी नाराज हो गईं। इस साल शुरू हुए ईरान युद्ध को लेकर दोनों के विचार बिल्कुल अलग हो गए और मेलोनी ने ट्रंप से दूरी बना ली।

हालांकि, इस G7 समिट में दोनों ने पैच-अप (रिश्ते सुधारने) की कोशिश की थी, लेकिन ट्रंप के इस एक बयान ने दोनों देशों के बीच एक नया ‘विवाद’ खड़ा कर दिया है।

मोजतबा खामेनेई का बड़ा दावा, ईरान डील के लिए ‘बेताब’ ट्रंप ने हर तरह के हथकंडे अपनाए

 

मोजतबा खामेनेई का बड़ा दावा, ईरान डील के लिए ‘बेताब’ ट्रंप ने हर तरह के हथकंडे अपनाए

Mojtaba Khamenei: ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई ने एक खास पोस्ट के जरिए अमेरिका के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर करने की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि यह समझौता ईरान की इच्छा से नहीं, बल्कि अमेरिका की मजबूरी की वजह से हुआ है। खामेनेई ने अपने पोस्ट में लिखा, “जैसा कि आपको बताया गया है, ईरान और अमेरिका के राष्ट्रपतियों के बीच एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए।”

उन्होंने कहा कि हालांकि ईरानी अधिकारियों ने इस समझौते तक पहुंचने के लिए ईमानदारी से काम किया था, लेकिन अमेरिकी पक्ष ने ही इसके लिए सबसे ज्यादा जोर डाला था। खामेनेई के मुताबिक, “अमेरिकी राष्ट्रपति ने ही मजबूरी में आकर इसे अंजाम देने के लिए हर तरह के दबाव और साधनों का इस्तेमाल किया।”

बता दें कि समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों द्वारा वर्साय पैलेस में आयोजित डिनर के दौरान किए गए। यह कार्यक्रम G7 शिखर सम्मेलन के समापन के बाद हुआ था। मैक्रों ने X पर इस घटनाक्रम की जानकारी देते हुए कहा कि यह समझौता “स्थायी शांति का रास्ता बनाता है और होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने की अनुमति देता है।”

औपचारिक हस्ताक्षर समारोह पहले शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में आयोजित होने वाला था। हालांकि, तेहरान ने पुष्टि की है कि जिनेवा में प्रस्तावित बैठक अपने तय कार्यक्रम के अनुसार होगी।

अमेरिका-ईरान समझौते में क्या कहा गया है?

इस दस्तावेज का औपचारिक नाम “संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के इस्लामी गणराज्य के बीच इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन” है। इसमें लेबनान सहित सभी मोर्चों पर सैन्य अभियानों को तुरंत और स्थायी रूप से समाप्त करने की बात कही गई है।

इसकी शर्तों के तहत, अमेरिका ने 30 दिनों के भीतर ईरान की नौसैनिक नाकेबंदी हटाने का वादा किया है। उम्मीद है कि इस दौरान जहाजों की आवाजाही युद्ध से पहले के स्तर पर लौट आएगी। अमेरिका अंतिम समझौता होने के 30 दिनों के भीतर ईरान के आस-पास से अपनी सेना हटाने पर भी सहमत हो गया है।

वहीं, ईरान ने भी कमर्शियल जहाजों को 60 दिनों तक बिना किसी शुल्क के सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास करने पर सहमति जताई है।

बता दें कि संधि पर हस्ताक्षर हो जाने के बाद, दोनों पक्षों के पास व्यापक अंतिम समझौते की शर्तों पर बातचीत करने के लिए 60 दिन का समय है।

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‘भारतीय नाविकों की सुरक्षा जरूरी’… पीएम मोदी ने ट्रंप के सामने उठाया 3 नाविकों की मौत का मुद्दा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को G7 समिट के दौरान अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बातचीत की। इस बातचीत में उन्होंने अमेरिकी हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत पर चिंता जताई। इस मुद्दे को उठाते हुए पीएम मोदी ने कहा: “ईरान के साथ किसी भी समझौते में समुद्री जहाजों पर काम करने वाले नाविकों की सुरक्षा और हिफाजत पक्की की जानी चाहिए।” बता दें कि इस महीने की शुरुआत में, ओमान की खाड़ी में एक ऑयल टैंकर पर अमेरिकी नौसेना के हमले में तीन भारतीय नाविक मारे गए थे।

वहीं, जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या वह पीड़ितों के परिवारों के लिए कोई संदेश या शोक संवेदना देना चाहते हैं, तो उन्होंने कहा, “हां, बिल्कुल।” उन्होंने समुद्री व्यापार में काम करने वाले लोगों का जिक्र करते हुए कहा कि वह “उन सभी लोगों से प्यार करते हैं।”

बुधवार को CNN-News18 के एक सवाल के जवाब में राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा: “मैंने भारतीय नाविकों के बारे में सुना। यह एक मुश्किल पेशा है। हम उन सभी लोगों का सम्मान करते हैं।”

बता दें कि हमले के समय पलाऊ के झंडे वाला तेल टैंकर सेट्टेबेलो (Settebello) पर कुल 28 लोग सवार थे। इनमें 24 भारतीय नागरिक और 4 विदेशी नागरिक शामिल थे। विदेशी नागरिकों में दो पाकिस्तानी, एक यूक्रेनी और एक रूसी थे।

इस घटना के बाद 21 भारतीय नाविकों को सुरक्षित बचा लिया गया था। वहीं, लापता नाविकों की तलाश तब तक जारी रहीं जब तक कि उनकी मौत की पुष्टि नहीं हो गई।

वहीं, अमेरिकी सेना ने जहाज पर हमला करने की बात मानी है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (USCENTCOM) के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने टैंकर को तब निशाना बनाया जब उसने अमेरिकी नौसेना के कर्मियों के निर्देशों का पालन नहीं किया और ईरान से तेल ले जाने की कोशिश की, जो अमेरिकी नाकेबंदी (ब्लॉकेड) का उल्लंघन था।

गौरतलब है कि यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ा हुआ है। क्षेत्र में जारी संघर्ष के कारण लगाए गए समुद्री प्रतिबंधों से कमर्शियल जहाजों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार में भी रुकावटें आ रही हैं।

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