Android vs iPhone: 2026 में भारतीय यूजर्स के लिए कौन है बेहतर विकल्प? जानिए पूरी तुलना

Android vs iPhone: 2026 में भारतीय यूजर्स के लिए कौन है बेहतर विकल्प? जानिए पूरी तुलना

पिछले एक दशक से स्मार्टफोन बाजार में Android vs iPhone की बहस लगातार जारी है। भारत जैसे तेजी से बढ़ते स्मार्टफोन बाजार में यह सवाल और भी महत्वपूर्ण हो गया है, क्योंकि अब ग्राहक केवल कीमत नहीं, बल्कि परफॉर्मेंस, सॉफ्टवेयर अपडेट, कैमरा, सिक्योरिटी और रीसेल वैल्यू को भी ध्यान में रखकर नया फोन खरीद रहे हैं।

 

साल 2026 में भारत दुनिया के सबसे बड़े स्मार्टफोन बाजारों में शामिल हो चुका है। जहां एक ओर छात्र और बजट यूजर्स एंड्रॉयड फोन पसंद कर रहे हैं, वहीं प्रोफेशनल्स और कंटेंट क्रिएटर्स आईफोन की ओर आकर्षित हो रहे हैं। खास बात यह है कि आईफोन की बढ़ती लोकप्रियता ने इस मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है।

 

ऑपरेटिंग सिस्टम का अंतर

 

एंड्रॉयड, गूगल के ऑपरेटिंग सिस्टम पर आधारित है और इसका इस्तेमाल Samsung, OnePlus, Vivo, Xiaomi, Realme और Motorola जैसी कंपनियां करती हैं। वहीं आईफोन, Apple के iOS प्लेटफॉर्म पर चलता है, जो सभी डिवाइस में एक जैसा अनुभव देता है।

 

एंड्रॉयड में ज्यादा कस्टमाइजेशन और अलग-अलग बजट के विकल्प मिलते हैं। आईफोन बेहतर सिक्योरिटी, स्थिरता और लंबे समय तक सॉफ्टवेयर सपोर्ट प्रदान करता है।

कीमत के मामले में कौन आगे?

 

भारतीय बाजार में कीमत सबसे बड़ा फैक्टर है।

 

Android Smartphones (2026):

 

एंट्री लेवल: ₹8,000 से ₹15,000

मिड-रेंज: ₹18,000 से ₹35,000

फ्लैगशिप: ₹50,000 से ₹1.30 लाख या उससे अधिक

 

iPhone (2026):

 

बेस मॉडल: लगभग ₹70,000 से शुरू

Pro मॉडल: ₹1.20 लाख से अधिक

 

हालांकि, रिफर्बिश्ड आईफोन की बढ़ती मांग ने तस्वीर बदल दी है। 2026 में iPhone 14 लगभग ₹40,000-55,000 और iPhone 13 लगभग ₹30,000-40,000 में उपलब्ध हो सकता है, जिससे यह मिड-रेंज एंड्रॉयड फोन को सीधी टक्कर देता है।

 

परफॉर्मेंस और यूजर एक्सपीरियंस

 

आईफोन में Apple खुद हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर दोनों डिजाइन करता है, जिससे इसकी स्पीड और मल्टीटास्किंग काफी स्मूद रहती है। कई साल पुराने आईफोन भी बेहतर परफॉर्म करते हैं।

 

वहीं एंड्रॉयड फोन की परफॉर्मेंस ब्रांड और मॉडल पर निर्भर करती है। फ्लैगशिप एंड्रॉयड फोन बेहद दमदार होते हैं, लेकिन कम बजट वाले मॉडल समय के साथ स्लो हो सकते हैं।

 

कैमरा में किसका दबदबा?

 

एंड्रॉयड की खूबियां

  • ज्यादा जूम क्षमता
  • हाई-मेगापिक्सल सेंसर
  • AI कैमरा फीचर्स
  • अल्ट्रा-वाइड फोटोग्राफी

 

आईफोन की ताकत:

 

  • नेचुरल कलर
  • शानदार वीडियो रिकॉर्डिंग
  • बेहतर लो-लाइट परफॉर्मेंस
  • प्रोफेशनल वीडियो एडिटिंग सपोर्ट
  • बैटरी और चार्जिंग

 

एंड्रॉयड स्मार्टफोन में 65W, 80W और 120W तक की फास्ट चार्जिंग मिल रही है, जबकि आईफोन अपेक्षाकृत धीमी चार्जिंग स्पीड देता है। हालांकि, आईफोन की बैटरी हेल्थ लंबे समय तक बेहतर बनी रहती है।

 

सॉफ्टवेयर अपडेट और लंबी उम्र

 

आईफोन को 5 साल या उससे ज्यादा समय तक iOS अपडेट मिलते हैं। दूसरी तरफ, ज्यादातर मिड-रेंज एंड्रॉयड फोन केवल 2-3 साल तक अपडेट प्राप्त करते हैं, जबकि कुछ फ्लैगशिप मॉडल 4-5 साल का सपोर्ट देते हैं।

 

रीसेल वैल्यू और सिक्योरिटी

 

भारत में आईफोन की रीसेल वैल्यू सबसे ज्यादा मानी जाती है। मजबूत सॉफ्टवेयर सपोर्ट और सेकेंड-हैंड मार्केट में अच्छी मांग इसकी बड़ी वजह है। सिक्योरिटी और प्राइवेसी के मामले में भी आईफोन को बढ़त मिलती है, जबकि एंड्रॉयड में ज्यादा कस्टमाइजेशन के साथ कुछ अतिरिक्त जोखिम भी जुड़े रहते हैं।

 

किसके लिए कौन बेहतर?

स्टूडेंट्स : बजट एंड्रॉयड या रिफर्बिश्ड आईफोन

कंटेंट क्रिएटर्स : आईफोन

प्रोफेशनल्स : आईफोन

बजट खरीदार : एंड्रॉयड

गेमर्स : हाई-एंड एंड्रॉयड
 

क्या कहते हैं एक्सपर्ट्‍स 

अगर आप कम कीमत, ज्यादा विकल्प, कस्टमाइजेशन और फास्ट चार्जिंग चाहते हैं तो एंड्रॉयड बेहतर विकल्प है। वहीं, यदि आपकी प्राथमिकता लंबा सॉफ्टवेयर सपोर्ट, बेहतर कैमरा, मजबूत सिक्योरिटी और शानदार रीसेल वैल्यू है तो आईफोन आपके लिए सही रहेगा। 2026 में रिफर्बिश्ड आईफोन भारतीय ग्राहकों के लिए एक ऐसा विकल्प बनकर उभरे हैं, जो प्रीमियम Apple अनुभव को अपेक्षाकृत कम कीमत में उपलब्ध करा रहे हैं। Edited by : Sudhir Sharma

Safety Tips : भीषण गर्मी में स्मार्टफोन बन सकता आग गोला! ओवरहीटिंग से बचाने के लिए अपनाएं ये आसान टिप्स

Safety Tips : भीषण गर्मी में स्मार्टफोन बन सकता आग गोला! ओवरहीटिंग से बचाने के लिए अपनाएं ये आसान टिप्स

भीषण गर्मी और नौतपा के दौरान अत्यधिक तापमान स्मार्टफोन को तेजी से गर्म कर सकता है, खासकर गेमिंग, वीडियो स्ट्रीमिंग, फोटोग्राफी और चार्जिंग के समय। विशेषज्ञों का कहना है कि ज्यादा गर्मी बैटरी को नुकसान पहुंचा सकती है, फोन की परफॉर्मेंस कम कर सकती है और कुछ मामलों में आग या विस्फोट जैसी घटनाओं का खतरा भी बढ़ा सकती है।

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जब गर्मी सामान्य से कहीं ज्यादा बढ़ जाती है। इसका असर सिर्फ इंसानों पर ही नहीं, बल्कि हमारे स्मार्ट गैजेट्स पर भी पड़ता है। स्मार्टफोन पहले की तुलना में ज्यादा तेजी से गर्म होने लगे हैं। अगर आपका फोन गेम खेलते समय, वीडियो शूट करते समय या लगातार वेब सीरीज देखने के दौरान बहुत गर्म हो रहा है, तो आप अकेले नहीं हैं। आधुनिक स्मार्टफोन भारी वर्कलोड संभालते हैं, जिससे उनका आंतरिक तापमान बढ़ जाता है। ऊपर से तेज धूप और गर्म मौसम स्थिति को और खराब कर देता है। इससे फोन की स्पीड धीमी हो सकती है, बैटरी पर दबाव बढ़ सकता है और दुर्लभ मामलों में आग लगने या ब्लास्ट होने का खतरा भी हो सकता है।

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फोन को धूप से बचाकर रखें

 

सीधी धूप स्मार्टफोन की सबसे बड़ी दुश्मन है। अगर आप धूप में फोन का इस्तेमाल करते हैं या उसे कार के डैशबोर्ड जैसी गर्म जगह पर छोड़ देते हैं, तो उसका तापमान तेजी से बढ़ सकता है। कोशिश करें कि फोन हमेशा छांव में रहे और उसे गर्म सतहों पर न रखें।

 

पानी या फ्रीजर से ठंडा करने की गलती न करें

 

अगर फोन ज्यादा गर्म हो जाए तो उसे पानी में डालना या फ्रीजर में रखना खतरनाक हो सकता है। अत्यधिक ठंड से फोन के अंदर नमी बन सकती है, जो इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स को नुकसान पहुंचा सकती है। बेहतर होगा कि फोन को बंद करके किसी ठंडी और छायादार जगह पर कुछ देर के लिए रख दें।

 

फोन को आराम भी दें

लगातार गेमिंग, वीडियो रिकॉर्डिंग या लंबे समय तक स्ट्रीमिंग करने से फोन का प्रोसेसर ज्यादा काम करता है और डिवाइस गर्म हो जाती है। ऐसे में कुछ समय के लिए फोन को आराम देना जरूरी है।

 

ब्राइटनेस कम रखें और ठंडी जगह का इस्तेमाल करें

स्क्रीन की ब्राइटनेस ज्यादा रखने से बैटरी पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और फोन गर्म होता है। जरूरत के अनुसार ब्राइटनेस कम रखें और संभव हो तो एयर कंडीशनर या हवादार जगह में फोन का इस्तेमाल करें। बैकग्राउंड में चल रहे अनावश्यक ऐप्स को बंद करना भी मददगार हो सकता है।

 

हमेशा ओरिजिनल चार्जर का इस्तेमाल करें

सस्ते या थर्ड पार्टी चार्जर सही तरीके से वोल्टेज नियंत्रित नहीं कर पाते, जिससे फोन ओवरहीट हो सकता है और बैटरी खराब होने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए हमेशा कंपनी द्वारा प्रमाणित या ओरिजिनल चार्जर का ही इस्तेमाल करें। गर्मी का मौसम स्मार्टफोन के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है, लेकिन थोड़ी सावधानी और सही आदतों से आप अपने फोन को सुरक्षित रख सकते हैं और उसकी परफॉर्मेंस बेहतर बनाए रख सकते हैं। Edited by : Sudhir Sharma

Power bank blast reason : पावर बैंक क्यों फटते हैं? जानिए इसके पीछे की बड़ी वजहें और बचाव के आसान तरीके

Power bank blast reason : पावर बैंक क्यों फटते हैं? जानिए इसके पीछे की बड़ी वजहें और बचाव के आसान तरीके

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आज के समय में स्मार्टफोन, टैबलेट और वायरलेस गैजेट्स के बढ़ते इस्तेमाल के कारण पावर बैंक हमारी रोजमर्रा की जरूरत बन चुके हैं। यात्रा हो, ऑफिस हो या घर से बाहर लंबा समय बिताना हो, पावर बैंक लोगों को मोबाइल चार्ज रखने में मदद करते हैं। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में पावर बैंक फटने या उनमें आग लगने की घटनाएं भी तेजी से सामने आई हैं।

Power bank Info

ऐसे हादसे न केवल महंगे गैजेट्स को नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि जानलेवा भी साबित हो सकते हैं। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि आखिर पावर बैंक क्यों फटते हैं और इससे बचने के लिए क्या सावधानियां रखनी चाहिए। क्या फ्लाइट में पावर बैंक ले जाना सुरक्षित है?

एयरलाइंस पावर बैंक को लेकर सख्त नियम अपनाती हैं। आमतौर पर पावर बैंक को चेक-इन बैगेज में रखने की अनुमति नहीं होती। इसे हमेशा हैंड बैगेज में रखना चाहिए ताकि किसी भी समस्या पर तुरंत कार्रवाई की जा सके।

  • हमेशा कंपनी द्वारा सुझाए गए या प्रमाणित चार्जर और केबल का उपयोग करें।
  • चार्जिंग के दौरान इस्तेमाल कम करें
  • चार्जिंग के समय पावर बैंक को ज्यादा दबाव वाले कामों में इस्तेमाल न करें।
  • कौन-से संकेत खतरे की चेतावनी देते हैं?
  • पावर बैंक का जरूरत से ज्यादा गर्म होना
  • बैटरी का फूलना
  • चार्जिंग बहुत धीमी या बहुत तेज होना
  • जलने जैसी बदबू आना
  • स्पार्क या धुआं निकलना

 

इन संकेतों को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है।

पावर बैंक फटने की मुख्य वजहें

1. खराब क्वालिटी की बैटरी

 

कई सस्ते और लोकल पावर बैंक कम गुणवत्ता वाली लिथियम-आयन बैटरियों के साथ आते हैं। इनमें सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जाता, जिससे ओवरहीटिंग और शॉर्ट सर्किट का खतरा बढ़ जाता है।

2. ओवरचार्जिंग

 

कई लोग पावर बैंक को पूरी रात चार्जिंग पर लगा छोड़ देते हैं। लगातार चार्जिंग से बैटरी गर्म हो सकती है और अंदर के सेल्स पर दबाव बढ़ सकता है, जिससे विस्फोट की संभावना बन जाती है।

3. अधिक गर्मी

 

पावर बैंक को धूप, बंद कार या गर्म जगह पर रखने से उसका तापमान तेजी से बढ़ जाता है। लिथियम बैटरियां ज्यादा गर्मी सहन नहीं कर पातीं और उनमें आग लग सकती है।

4. फिजिकल डैमेज

 

अगर पावर बैंक गिर जाए, दब जाए या उसमें किसी तरह की टूट-फूट हो जाए तो उसके अंदर की बैटरी सेल्स क्षतिग्रस्त हो सकती हैं। यह बाद में विस्फोट का कारण बन सकती हैं।

5. नकली या गलत चार्जर का इस्तेमाल

लोकल चार्जर या गलत वोल्टेज वाले एडॉप्टर से चार्ज करने पर पावर बैंक के सर्किट पर असर पड़ता है। इससे बैटरी खराब हो सकती है और खतरा बढ़ जाता है।

6. लंबे समय तक लगातार इस्तेमाल

एक साथ कई डिवाइस चार्ज करना या पावर बैंक का लगातार उपयोग भी उसे अत्यधिक गर्म कर सकता है।

पावर बैंक फटने से कैसे बचें?

  • हमेशा ब्रांडेड पावर बैंक खरीदें या अन्य भरोसेमंद कंपनियों के पावर बैंक खरीदना ज्यादा सुरक्षित माना जाता है।
  • ओवरचार्जिंग से बचें
  • पावर बैंक को चार्ज होने के बाद तुरंत प्लग से हटा दें। लंबे समय तक चार्जिंग पर न छोड़ें।
  • गर्म जगह पर न रखें
  • धूप, कार के डैशबोर्ड या तकिए के नीचे पावर बैंक रखने से बचें। इसे ठंडी और सूखी जगह पर रखें।
  • डैमेज होने पर तुरंत बदलें
  • अगर पावर बैंक फूलने लगे, बहुत ज्यादा गर्म हो या उससे जलने जैसी गंध आए तो उसका इस्तेमाल तुरंत बंद कर दें।  Edited by : Sudhir Sharma

Chrome का नया लुक, अब ऊपर वाले टैब्स से पाएं छुटकारा, इस सीक्रेट सेटिंग से बदलें अपना ब्राउजिंग एक्सपीरियंस

Chrome का नया लुक, अब ऊपर वाले टैब्स से पाएं छुटकारा, इस सीक्रेट सेटिंग से बदलें अपना ब्राउजिंग एक्सपीरियंस

हम में से ज्यादातर लोग अपने वेब ब्राउज़र में बदलाव पसंद नहीं करते। इंटरनेट सर्फिंग हमारी जिंदगी का इतना अहम हिस्सा बन गई है कि छोटा सा “अपडेट” भी कभी-कभी सिरदर्द लगने लगता है। लेकिन, गूगल ने अब क्रोम के सबसे बेसिक फीचर- टैब्स (Tabs)-को पूरी तरह से बदल दिया है। यह फीचर नवंबर 2025 से डेवलपर्स के लिए टेस्टिंग मोड (Canary Build) में था, लेकिन अब इसे हम सभी के लिए जारी कर दिया गया है।

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क्या है यह नया बदलाव?

मंगलवार को गूगल ने क्रोम में 'वर्टिकल टैब्स' (Vertical Tabs) फीचर लॉन्च किया है। अब तक आपके द्वारा खोले गए पेज (टैब्स) ब्राउज़र में सबसे ऊपर एक लाइन में दिखाई देते थे। अब आप उन्हें स्क्रीन के बाईं ओर (Left Side) एक लंबी लिस्ट के रूप में देख सकेंगे।

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क्यों है यह खास?

टैब्ड ब्राउजिंग का चलन 2002 में फायरफॉक्स (Firefox) के दौर से शुरू हुआ था और तब से हम ऊपर की तरफ ही टैब्स देखने के आदी हैं। लेकिन जब हम बहुत सारे टैब्स खोल लेते हैं, तो वे इतने छोटे हो जाते हैं कि यह पहचानना मुश्किल हो जाता है कि कौन सा पेज किस बारे में है। वर्टिकल टैब्स इसी समस्या का समाधान हैं।

 

यूजर्स को इससे क्या फायदा होगा?

वर्टिकल टैब्स सिर्फ एक दिखावटी बदलाव नहीं है, बल्कि इसके कई व्यावहारिक फायदे हैं:

 

नाम पढ़ना हुआ आसान: जब आप 20-30 टैब्स खोल लेते हैं, तो ऊपर वाली पट्टी में सिर्फ छोटे आइकन दिखते हैं। वर्टिकल लिस्ट में टैब का टाइटल (Headline) साफ नजर आता है, जिससे आपको पता रहता है कि आप किस पेज पर हैं।

 

बेहतर मैनेजमेंट: अगर आप बहुत ज्यादा रिसर्च या मल्टी-टास्किंग करते हैं, तो साइड बार में टैब्स को मैनेज करना और उनके बीच स्विच करना ज्यादा तेज और आसान होता है।

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जगह की बचत: अगर आपको सिर्फ आइकन देखने हैं, तो आप इस साइड बार को छोटा (Collapse) भी कर सकते हैं, जिससे स्क्रीन पर कंटेंट देखने के लिए ज्यादा जगह मिलती है।

 

रीडिंग मोड (Reading Mode): गूगल ने इसके साथ ही 'फुल-पेज रीडिंग मोड' भी दिया है। अब किसी भी आर्टिकल पर राइट-क्लिक करके आप उसे बिना किसी विज्ञापन या फालतू की चीजों के, बिल्कुल एक किताब की तरह पढ़ सकते हैं।

 

इसे कैसे शुरू करें?

यह फीचर पूरी तरह वैकल्पिक (Optional) है। अगर आप इसे आज़माना चाहते हैं, तो इन स्टेप्स को फॉलो करें:

क्रोम के सबसे ऊपरी हिस्से (जहां टैब्स होते हैं) पर Right-Click करें। वहाँ “Show Tabs Vertically” का विकल्प चुनें। अगर आपको यह विकल्प नहीं दिख रहा है, तो परेशान न हों। गूगल इसे धीरे-धीरे सभी यूजर्स के लिए रोल आउट कर रहा है, जल्द ही यह आपके ब्राउज़र में पहुंच जाएगा।  Edited by : Sudhir Sharma 

Gmail की 22वीं सालगिरह पर बड़ा तोहफा, अब बदल सकेंगे अपनी पुरानी ईमेल आईडी, जानें आसान स्टेप्स

Gmail की 22वीं सालगिरह पर बड़ा तोहफा, अब बदल सकेंगे अपनी पुरानी ईमेल आईडी, जानें आसान स्टेप्स

दुनिया के अधिकतर इंटरनेट यूजर्स की तरह आपने भी शायद अपना पहला जीमेल अकाउंट सालों पहले किसी अस्थायी काम या मस्ती-मजाक के लिए बनाया होगा। लेकिन समय के साथ वही 'अजीब' दिखने वाली आईडी हमारे बैंक, सरकारी दस्तावेजों और सोशल मीडिया से जुड़ गई, जिसे बदलना अब तक लगभग असंभव और बेहद थकाऊ काम था।

 

 गूगल का यह कदम उन करोड़ों यूजर्स के लिए राहत लेकर आया है जो सालों पुराने 'Goofy' ईमेल एड्रेस से छुटकारा पाना चाहते थे।जीमेल अब अपनी 22वीं वर्षगांठ (लॉन्च: 1 अप्रैल, 2004) मना रहा है। इस खास मौके पर गूगल ने एक क्रांतिकारी फीचर पेश किया है, जिससे यूजर्स अपनी प्राथमिक ईमेल आईडी को बदल सकेंगे।

 

क्या हैं इस नए अपडेट की खासियतें?

गूगल का यह नया विकल्प यूजर्स की सबसे बड़ी समस्या का समाधान करता है। पुराना यूजरनेम बना रहेगा 'एलियास' (Alias): जब आप अपनी 'गूगल अकाउंट' ईमेल आईडी बदलेंगे, तो आपका पुराना यूजरनेम सक्रिय रहेगा। यह आपकी नई आईडी से लिंक रहेगा, जिससे पुरानी आईडी पर आने वाले ईमेल भी आपको नए इनबॉक्स में मिलते रहेंगे।

 

डाटा रहेगा पूरी तरह सुरक्षित

आपकी गूगल फोटोज, ड्राइव की फाइल्स और गूगल शीट्स का एक्सेस दोनों अकाउंट्स पर बना रहेगा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आपके द्वारा छोड़े गए पुराने यूजरनेम से कोई दूसरा व्यक्ति नया अकाउंट नहीं बना पाएगा।

 

सुरक्षा और सावधानी: यदि आपकी पुरानी आईडी फेसबुक, ऐपल आईडी, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप या आधार जैसे महत्वपूर्ण खातों से जुड़ी है, तो सावधानी बरतें। गूगल सलाह देता है कि इन प्लेटफॉर्म्स पर जाकर भी अपनी जानकारी अपडेट कर लें।

 

कैसे बदलें अपनी Gmail आईडी? (स्टेप-बाय-स्टेप गाइड)

अगर आप अपनी ईमेल आईडी बदलना चाहते हैं, तो इन चरणों का पालन करें:

 

सेटिंग्स एक्सेस करें: ब्राउज़र पर myaccount.google.com/google-account-email पर जाएं।

 

पर्सनल इंफो: 'Personal info' टैब पर क्लिक करें, फिर 'Email' और उसके बाद 'Google Account email' पर जाएं।

 

बदलाव की प्रक्रिया: 'Change Google Account email' विकल्प चुनें, अपना नया मनपसंद यूजरनेम दर्ज करें और कन्फर्म करें।

 

यदि आपको 'Change Google Account email' का विकल्प नहीं दिख रहा है, तो इसका मतलब है कि यह फीचर अभी आपके क्षेत्र में रोलआउट नहीं हुआ है। गूगल इसे चरणों (Phases) में वैश्विक स्तर पर जारी कर रहा है।

 

सिर्फ 'डिस्प्ले नाम' बदलना है? तो अपनाएं ये तरीका

अगर आप ईमेल आईडी नहीं, बल्कि सिर्फ वह नाम बदलना चाहते हैं जो ईमेल भेजने पर दूसरों को दिखाई देता है, तो ये स्टेप्स फॉलो करें:

  • अपने गूगल अकाउंट में साइन-इन करें।
  • ऊपर बाईं ओर 'Personal info' पर क्लिक करें।
  • 'Name' वाले विकल्प पर जाएं।
  • अपने वर्तमान नाम के बगल में 'Edit' (पेंसिल आइकन) पर क्लिक करें।
  • नया नाम अपडेट करें और 'Save' पर क्लिक कर दें। Edited by : Sudhir Sharma

WhatsApp स्कैमर्स की अब खैर नहीं! इन 8 जादुई फीचर्स को आज ही करें ऑन, आपका अकाउंट बन जाएगा अभेद्य किला

WhatsApp स्कैमर्स की अब खैर नहीं! इन 8 जादुई फीचर्स को आज ही करें ऑन, आपका अकाउंट बन जाएगा अभेद्य किला

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दुनिया के सबसे लोकप्रिय इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप WhatsApp का इस्तेमाल आज हम सभी करते हैं, लेकिन क्या आपका अकाउंट वाकई सुरक्षित है? आए दिन सामने आ रहे 'डिजिटल अरेस्ट' और 'ऑनलाइन स्कैम' के मामलों ने प्राइवेसी पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

 

अगर आप भी चाहते हैं कि कोई अनजान व्यक्ति आपकी चैट न पढ़ सके या आपको ठगी का शिकार न बना सके, तो WhatsApp के ये 8 छिपे हुए सिक्योरिटी फीचर्स आपके लिए सुरक्षा कवच साबित होंगे। आइए जानते हैं इन्हें कैसे ऑन करें:

 

1. टू-स्टेप वेरिफिकेशन (Two-Step Verification)

यह सुरक्षा की सबसे पहली और मजबूत दीवार है। इसे ऑन करने के बाद, अगर कोई आपका सिम कार्ड क्लोन भी कर ले, तो भी वह बिना आपके '6-डिजिट पिन' के WhatsApp लॉगिन नहीं कर पाएगा।

 

कैसे करें: Settings > Account > Two-step verification > Enable.

 

2. साइलेंस अननोन कॉलर्स (Silence Unknown Callers)

आजकल अंतरराष्ट्रीय नंबरों (+92, +84 आदि) से फर्जी कॉल आने की बाढ़ आई हुई है। इस फीचर को ऑन करते ही अनजान नंबरों से आने वाली कॉल खुद-ब-खुद म्यूट हो जाएंगी।

 

कैसे करें: Settings > Privacy > Calls > Silence Unknown Callers.

 

3. चैट लॉक (Chat Lock)

अगर आप अपनी पर्सनल चैट को दूसरों की नजरों से छिपाना चाहते हैं, तो यह फीचर बेस्ट है। यह आपकी चुनिंदा चैट्स को एक अलग फोल्डर में सुरक्षित कर देता है जो आपके फिंगरप्रिंट या फेस आईडी से ही खुलता है।

 

कैसे करें: जिस चैट को लॉक करना है उस पर लॉन्ग प्रेस करें > Chat Lock पर क्लिक करें।

 

4. पासकी (Passkeys)

पासवर्ड भूलने की झंझट खत्म! 'पासकी' फीचर के जरिए आप अपने फोन के बायोमेट्रिक (फिंगरप्रिंट या फेस अनलॉक) का इस्तेमाल कर WhatsApp में लॉगिन कर सकते हैं। यह हैकर्स के लिए सेंध लगाना नामुमकिन बना देता है।

 

5. 'एडवांस' प्राइवेसी – आईपी एड्रेस प्रोटेक्शन

क्या आप जानते हैं कि कॉल के दौरान कोई आपकी लोकेशन ट्रैक कर सकता है? 'Protect IP Address in Calls' फीचर को ऑन करने से आपकी लोकेशन और आईपी एड्रेस पूरी तरह सुरक्षित रहता है।

 

कैसे करें: Settings > Privacy > Advanced > Protect IP Address in Calls.

 

6. डिसेपियरिंग मैसेज (Disappearing Messages)

अगर आप चाहते हैं कि आपकी चैट एक निश्चित समय के बाद खुद डिलीट हो जाए, तो इसे ऑन करें। यह डेटा लीक होने की स्थिति में आपकी पुरानी चैट को सुरक्षित रखता है।

 

7. प्रोफाइल फोटो और स्टेटस प्राइवेसी

अपनी प्रोफाइल फोटो और स्टेटस को हमेशा 'My Contacts' पर रखें। इससे स्कैमर्स आपकी फोटो का इस्तेमाल कर आपके रिश्तेदारों को ठगने (Impersonation Scam) की हिम्मत नहीं कर पाएंगे।

 

8. ग्रुप इनविटेशन कंट्रोल

अक्सर ठग आपको अनजान ग्रुप्स में जोड़कर निवेश या जॉब स्कैम का झांसा देते हैं। प्राइवेसी सेटिंग में जाकर 'Groups' को 'My Contacts' पर सेट करें, ताकि कोई भी एरा-गैरा आपको ग्रुप में न जोड़ सके। Edited by: Sudhir Sharma

What is Phishing : सावधान! एक गलत क्लिक और बैंक खाता साफ: जानें क्या है ‘फिशिंग’ और कैसे बचें इस डिजिटल जाल से

What is Phishing : सावधान! एक गलत क्लिक और बैंक खाता साफ: जानें क्या है ‘फिशिंग’ और कैसे बचें इस डिजिटल जाल से

what is phishing scam and how to avoid digital fraud : साइबर अपराधी फर्जी लिंक, मोबाइल फ्रॉड कॉल, OTP फ्रॉड और UPI फ्रॉड के जरिए लोगों के बैंक खाते हैक कर रहे हैं। यह एक गंभीर डिजिटल फ्रॉड और साइबर क्राइम है, जिससे बचने के लिए साइबर सुरक्षा टिप्स, ऑनलाइन बैंकिंग सेफ्टी और साइबर ठगी से बचाव के उपाय अपनाना बेहद जरूरी है। खासतौर पर डिजिटल अरेस्ट स्कैम और इंटरनेट फ्रॉड जैसे नए तरीकों से लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है।


तकनीक की दुनिया में जहाँ एक ओर सुविधाएँ बढ़ी हैं, वहीं दूसरी ओर साइबर अपराध का ग्राफ भी तेजी से ऊपर गया है। हाल के दिनों में 'फिशिंग' के जरिए लोगों की गाढ़ी कमाई लूटने के मामलों में भारी उछाल देखा गया है। आखिर क्या है यह बला और कैसे शातिर अपराधी आपके दिमाग के साथ खेल जाते हैं? आइए विस्तार से समझते हैं।

 

क्या है फिशिंग (Phishing)?

फिशिंग एक प्रकार का साइबर हमला है जिसमें अपराधी मछली पकड़ने वाले जाल की तरह ही इंटरनेट पर 'चारा' डालते हैं। इसमें ठग आपको फर्जी ईमेल, मैसेज (SMS) या व्हाट्सएप के जरिए संपर्क करते हैं जो देखने में बिल्कुल असली लगते हैं। ये मैसेज अक्सर आपके बैंक, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म (जैसे फेसबुक या इंस्टाग्राम) या किसी मशहूर ई-कॉमर्स साइट (जैसे अमेज़न) के नाम से आते हैं। इनका मकसद आपकी निजी जानकारी जैसे:

 

  • इंटरनेट बैंकिंग का यूजर आईडी और पासवर्ड
  • क्रेडिट या डेबिट कार्ड की डिटेल्स
  • आधार और पैन कार्ड की जानकारी चुराना होता है।

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कैसे बुना जाता है यह डिजिटल जाल?

फिशिंग के हमले अक्सर डर या लालच के मनोविज्ञान पर आधारित होते हैं। अपराधियों के पसंदीदा तरीके कुछ इस प्रकार हैं:

 

डर का माहौल: आपको मैसेज आएगा कि “आपका बैंक खाता ब्लॉक हो गया है, तुरंत नीचे दिए लिंक पर क्लिक कर KYC अपडेट करें।”

 

बड़ा लालच: “बधाई हो! आपने 25 लाख की लॉटरी जीती है, पैसा पाने के लिए अपनी डिटेल्स भरें।”

 

फर्जी वेबसाइट: ठग असली बैंक जैसी दिखने वाली हूबहू 'क्लोन वेबसाइट' बनाते हैं। जैसे ही आप उस पर लॉगिन करते हैं, आपका पासवर्ड अपराधी के पास पहुँच जाता है।

 

फिशिंग के प्रकार जो ट्रेंड में हैं

स्मिशिंग (Smishing): जब यह ठगी SMS के जरिए की जाए।

 

विशिंग (Vishing): जब ठग फोन कॉल के जरिए 'बैंक अधिकारी' बनकर आपसे ओटीपी (OTP) मांगते हैं।

 

स्पीयर फिशिंग: यह किसी खास व्यक्ति या कंपनी के कर्मचारी को निशाना बनाकर किया गया अटैक है।

 

बचाव के उपाय: कैसे रहें सुरक्षित?

साइबर एक्सपर्ट्स का कहना है कि थोड़ी सी सावधानी आपको बड़े नुकसान से बचा सकती है:

 

लिंक पर क्लिक न करें: किसी भी अनजान ईमेल या मैसेज में दिए गए लिंक को खोलने से बचें।

 

URL चेक करें: किसी भी वेबसाइट पर अपनी जानकारी डालने से पहले स्पेलिंग चेक करें (जैसे: HDFCBank की जगह ठग HDFCBnk लिख सकते हैं)।  (HTTPS): हमेशा देखें कि वेबसाइट के एड्रेस की शुरुआत 'https://' से हो रही है और वहाँ एक 'ताले' (Padlock) का निशान है।

 

OTP साझा न करें: बैंक कभी भी आपसे फोन पर पासवर्ड या ओटीपी नहीं मांगता।

 

टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA): अपने सभी सोशल मीडिया और बैंक अकाउंट्स पर 2FA चालू रखें।

 

विशेषज्ञ की सलाह: यदि आप फिशिंग के शिकार हो जाते हैं, तो बिना देरी किए 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर अपनी शिकायत दर्ज कराएं।  Edited by: Sudhir Sharma

OpenAI ने लॉन्च किया Prism, अब विज्ञान की दुनिया में भी क्रांति लाएगा AI, जानिए Free में कैसे बनेगा आपका हेल्पर

OpenAI ने लॉन्च किया Prism, अब विज्ञान की दुनिया में भी क्रांति लाएगा AI, जानिए Free में कैसे बनेगा आपका हेल्पर

OpenAI Prism

OpenAI ने आज अपना नया एप्लीकेशन प्रिज्म  (Prism) लॉन्च कर दिया है। कंपनी को उम्मीद है कि यह ऐप विज्ञान के क्षेत्र में वही बदलाव लाएगा, जो Claude Code और Codex जैसे टूल्स ने प्रोग्रामिंग की दुनिया में लाए हैं।  यह प्लेटफॉर्म उन अलग-अलग टूल्स की जगह लेने का प्रयास करता है, जिनका वैज्ञानिक आमतौर पर इस्तेमाल करते हैं, जैसे टेक्स्ट एडिटर, PDF रीडर, रेफरेंस मैनेजर और चैटबॉट।

Prism वर्तमान में ChatGPT पर्सनल अकाउंट वाले सभी यूजर्स के लिए उपलब्ध है। इसमें अनलिमिटेड प्रोजेक्ट्स और सहयोगियों के साथ काम करने की सुविधा है।  जल्द ही इसे ChatGPT Business, Team, 'Enterprise और 'Education प्लान्स के लिए भी रोलआउट किया जाएगा।  अब Crixet अलग से उपलब्ध नहीं होगा, इसे पूरी तरह Prism में समाहित कर दिया गया है।  

 

Prism किसी भी पर्सनल ChatGPT अकाउंट वाले यूजर के लिए पूरी तरह मुफ्त है। इसमें अनलिमिटेड प्रोजेक्ट्स और सहयोगियों के साथ काम करने की सुविधा दी गई है। हालांकि बिजनेस, यूनिवर्सिटी और एंटरप्राइज यूजर्स के लिए इसके अलग वर्जन बाद में लॉन्च किए जाएंगे।

LaTeX की जटिलताओं को करेगा खत्म

Prism का आधार Crixet है, जो एक क्लाउड-आधारित LaTeX प्लेटफॉर्म है। OpenAI ने आज ही इसके अधिग्रहण की घोषणा भी की है। दरअसल, LaTeX एक टाइपसेटिंग सिस्टम है जिसका उपयोग वैज्ञानिक दस्तावेजों और जर्नल को फॉर्मेट करने के लिए किया जाता है। हालांकि यह वैज्ञानिक समुदाय की पहली पसंद है, लेकिन इस पर TikZ कमांड के जरिए डायग्राम बनाना काफी समय लेने वाला काम होता है।

GPT-5.2 के साथ  सुपरपावर  

जहां  Crixet में पहले 'Chirp' एजेंट का उपयोग होता था, वहीं अब Prism में GPT-5.2 Thinking मॉडल दिया गया है। एक प्रेस डेमो के दौरान, OpenAI के कर्मचारी ने दिखाया कि यह मॉडल न केवल जर्नल फॉर्मेटिंग में मदद करता है, बल्कि प्रासंगिक वैज्ञानिक साहित्य (Scientific Literature) को खोजने और उनकी बिब्लियोग्राफी (संदर्भ सूची) तैयार करने की प्रक्रिया को भी ऑटोमैटिक बना देता है।

 

OpenAI के 'वाइस प्रेसिडेंट ऑफ साइंस' केविन वेइल ने फर्जी साइटेशन (fake citations) की संभावना पर कहा कि यह तकनीक वैज्ञानिकों को उनके संदर्भों (references) की सत्यता जांचने की जिम्मेदारी से मुक्त नहीं करती, लेकिन यह काम की गति को निश्चित रूप से कई गुना बढ़ा सकती है।

 

वैज्ञानिक समुदाय में AI की बढ़ती भूमिका पर वेइल ने स्पष्ट किया कि कंपनी गुणवत्ता और भरोसे को लेकर सजग है। उन्होंने कहा कि AI को वैज्ञानिक कार्यों से दूर रखने के बजाय इसे सीधे वर्कफ्लो में शामिल करना सही कदम है ताकि शोधकर्ताओं का नियंत्रण बना रहे और जवाबदेही तय हो सके।

शिक्षा के क्षेत्र में भी मददगार

डेमो के दौरान Prism का उपयोग General Relativity जैसे कठिन विषय के लिए लेसन प्लान और छात्रों के लिए प्रॉब्लम सेट तैयार करने में भी किया गया। OpenAI का लक्ष्य वैज्ञानिकों और प्रोफेसरों के उबाऊ और समय लेने वाले कार्यों को कम करना है। Edited by : Sudhir Sharma