Donald Trump Iran News: अमेरिका-ईरान पर दुनिया की निगाहें टिकी हुई हैं। जब से युद्ध की शुरुआत हुई है, पूरी दुनिया में गैस और ईंधन की सप्लाई पर बुरा असर पड़ा है। तेल की चढ़ती कीमत ने दुनिया भर में महंगाई बढ़ा दी है और इसका सबसे बड़ा कारण है होर्मुज से जहाजों का नियमित रूप से नहीं
Crude Oil Price: पश्चिम एशिया में हालात एक बार फिर बिगड़ते दिख रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को नई सैन्य कार्रवाई की खुली चेतावनी दी है। ट्रंप ने कहा कि अगर अमेरिकी ठिकानों पर हमले जारी रहे तो अमेरिका जोरदार जवाब देगा। इसके चलते कच्चे तेल के दामों में जोरदार तेजी आई और वो 90 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गए।
ट्रंप बोले- ईरान पर करेंगे जोरदार हमला
ईरान ने जॉर्डन में अमेरिकी ठिकाने को निशाना बनाने का दावा किया है। वहीं, अमेरिका और सऊदी अरब ने इराक में ईरान समर्थित गुटों पर संयुक्त हवाई हमले किए हैं। इन घटनाओं से कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है।
Fox News से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका अब चुप नहीं बैठेगा। उन्होंने कहा, “हम ईरान पर जोरदार हमला करेंगे।” ट्रंप ने साफ कहा कि जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर हुए हमलों का जवाब सीधे ईरान को दिया जाएगा। उनके बयान से संकेत मिला है कि दोनों देशों के बीच तनाव फिर से तेजी से बढ़ सकता है।
100 डॉलर तक जा सकता है कच्चा तेल
बुधवार को रात 8.20 बजे तक क्रूड 7.68% चढ़कर 90.54 डॉलर प्रति बैरल पर था। DBS बैंक का अनुमान है कि आने वाले दिनों में ब्रेंट क्रूड 80 से 100 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में रह सकता है। वहीं, OPEC+ भी अक्टूबर से कुछ समय के लिए उत्पादन बढ़ाने की योजना टाल सकता है।
DBS बैंक के एनर्जी रिसर्च हेड सुव्रो सरकार का कहना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बातचीत के संकेत जरूर दिए हैं, लेकिन इससे हॉर्मुज का संकट पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। अगर तनाव कम भी होता है, तब भी कच्चे तेल की कीमतों के 80 डॉलर प्रति बैरल से नीचे जाने की संभावना फिलहाल कम दिखती है।
हूती विद्रोही वसूल सकते हैं शुल्क
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, यमन का हूती समूह अब दक्षिणी लाल सागर से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों से शुल्क लेने पर विचार कर रहा है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि चीन ने हूती विद्रोहियों से सीधे बातचीत की है। मकसद यह है कि उसके तेल टैंकरों को इस रास्ते से सुरक्षित गुजरने दिया जाए।
अमेरिकन पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट (API) के शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, 24 जुलाई को खत्म हुए हफ्ते में अमेरिका का कच्चे तेल का भंडार करीब 33 लाख बैरल घटा है।
OPEC+ भी ले सकता है बड़ा फैसला
रॉयटर्स के मुताबिक, OPEC+ अक्टूबर से अगले तीन महीने तक उत्पादन बढ़ाने की योजना रोक सकता है। अगर ऐसा होता है तो बाजार में सप्लाई सीमित रह सकती है। इससे कच्चे तेल की कीमतों को और सहारा मिल सकता है।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर उत्पादन में कटौती के साथ ईरान युद्ध का संकट गहराता है, तो कीमतें 100 डॉलर के पार पहुंच गई हैं।
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फ्रांस के एवियान शहर में चल रहे G7 शिखर सम्मेलन (G7 Summit) से एक बड़ी खबर आ रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर बेहद सख्त और कड़े तेवर दिखाए हैं। ट्रंप ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि अगर ईरान ने अपना रवैया नहीं सुधारा, तो अमेरिका एक बार फिर उस पर बम बरसाना शुरू कर देगा।
यह तीखी चेतावनी ऐसे समय में आई है, जब दोनों देश पश्चिमी एशिया (Middle East) में जारी युद्ध को खत्म करने के लिए राजी हो चुके हैं। इसी शुक्रवार को स्विट्जरलैंड के जिनेवा में दोनों देशों के बीच एक समझौते (MoU) पर दस्तखत होने वाले हैं। लेकिन ट्रंप ने साफ कर दिया है कि यह समझौता अभी फाइनल नहीं है।
ट्रंप ने अपने ही अंदाज में कहा, “यह सिर्फ एक समझौता (MoU) है। अगर मुझे यह पसंद नहीं आया, तो हम फिर से उन पर गोलियां चलाना और उनके सिर पर बम गिराना शुरू कर देंगे। अगर वे ढंग से बर्ताव नहीं करेंगे, तो मुझे यह बिल्कुल पसंद नहीं आएगा। हम सीधे उनके सिर के ठीक बीचों-बीच बम गिराने के लिए वापस लौट आएंगे।”
‘यह डील कई मायनों में अच्छी है’
हालांकि, ईरान को घुड़की देने के साथ-साथ राष्ट्रपति ट्रंप ने इस होने वाले समझौते की तारीफ भी की। उन्होंने कहा कि यह समझौता कई मायनों में अच्छा है, सबसे खास बात यह कि यह ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकेगा। ट्रंप हमेशा से यह मांग करते रहे हैं कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होने चाहिए।
ट्रंप ने इस समझौते के फायदे गिनाते हुए कहा:
सस्ता होगा पेट्रोल-डीजल: इस समझौते की खबर से ही शेयर बाजार का ग्राफ ऊपर जा रहा है और फ्यूल की कीमतें नीचे आ रही हैं।
खुल जाएगा समुद्री रास्ता: समझौता साइन होने के अगले दो दिनों के भीतर ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) को पूरी तरह से दोबारा खोल दिया जाएगा।
अमेरिका नहीं देगा एक भी पैसा: ट्रंप ने साफ किया कि इस समझौते के तहत वॉशिंगटन (अमेरिका) ईरान को कोई पैसा नहीं दे रहा है। हालांकि, उन्होंने किसी तीसरे देश के निवेश किए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया।
ओबामा पर साधा निशाना: “ईरान ने उन्हें धोखा दिया”
ट्रंप ने इस मौके पर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा पर भी जमकर भड़ास निकाली। ओबामा के कार्यकाल में हुए मशहूर ईरान न्यूक्लियर डील (JCPOA) का जिक्र करते हुए ट्रंप ने दावा किया, “ईरानियों ने ओबामा को धोखा दिया था और उनसे अरबों डॉलर ऐंठ लिए थे।”
बता दें कि ट्रंप शुरू से ही ओबामा की इस न्यूक्लियर डील के खिलाफ रहे हैं। यही वजह थी कि जब वे पहली बार राष्ट्रपति बने थे, तो उन्होंने 2018 में अमेरिका को इस डील से बाहर कर लिया था।
क्या है इस अमेरिका-ईरान डील में?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस नए समझौते (MoU) में मुख्य रूप से ये बातें शामिल हैं:
व्यापार का रास्ता खुलेगा: ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को तुरंत खोला जाएगा। यह दुनिया का वो बेहद महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है जहां से दुनिया का लगभग 20% (पांचवा हिस्सा) तेल और गैस का व्यापार होता है।
पाबंदियां हटेंगी: इसके बदले में ईरान पर लगे अमेरिकी और संयुक्त राष्ट्र (UN) के कड़े प्रतिबंधों को हटाने का रास्ता साफ होगा।
परमाणु हथियारों पर रोक: ईरान वादा करेगा कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा।
60 दिनों का सीजफायर: दोनों पक्ष 60 दिनों के लिए युद्धविराम बढ़ाने पर सहमत हुए हैं, ताकि शांति से आगे की बातचीत हो सके।
हर मोर्चे पर जंग का खात्मा: इस डील का फोकस लेबनान सहित सभी मोर्चों पर दुश्मनी और लड़ाई को पूरी तरह खत्म करना है, जिसकी मांग ईरान लगातार कर रहा था।

