Polycab Share Price: ₹2.78 करोड़ की कानूनी लड़ाई, NSE ने कॉल-पुट पर लगाया बैन तो शेयर धड़ाम

Polycab Share Price: वायर और केबल बनाने वाली देश की सबसे बड़ी इंटीग्रेटेड कंपनी पॉलीकैब के शेयरों ने आज निवेशकों को तगड़ा शॉक दिया। एनएसई ने जब 30 दिसंबर, 2026 से इसके F&O (फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस) कॉन्ट्रैक्ट्स को बंद करने को कहा तो आज इसमें बिकवाली का दबाव दिखा। एनएसई ने दिसंबर के बाद से इसे डेरिवेटिव सेगमेंट से बाहर करने का आदेश इसलिए दिया क्योंकि कंपनी अब IBC (इनसॉल्वेंस एंड बैंकरप्सी कोड) फ्रेमवर्क के तहत आ गई। इसके बाद अब कंपनी के शेयर धड़ाम हो गए। फिलहाल बीएसई पर यह 2.16% की गिरावट के साथ ₹8232.00 पर है। इंट्रा-डे में यह 5.38% टूटकर ₹7,961.10 तक आ गया था।

Polycab क्यों आई IBC फ्रेमवर्क के शॉर्टलिस्ट में

एनएसई ने पॉलीकैब इंडिया को इक्विटी डेरिवेटिव सेगमेंट से बाहर करने का फैसला इसलिए किया क्योंकि यह आईबीसी फ्रेमवर्क के तहत शॉर्टलिस्ट हुई है। यह मामला पॉलीकैब इंडिया के खिलाफ एक दिवालिया याचिका से जुड़ा है, जिसे एशियर मेटल्स (Asier Metals) ने फाइल किया है और इस पर सुनवाई के लिए NCLT (नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल) ने दोनों पक्षों की बहस के बाद मंजूरी दे दी है।

यह मामला ₹2.78 करोड़ के डिफॉल्ट से जु़ड़ा है। एशियर मेटल्स का कहना है कि पॉलीकैब के साथ उसका कारोबार संबंध साल 2020 में शुरू हुआ और इसके तहत पहले ही तय हो गया था कि एलुमिनियम इनगॉट्स की सप्लाई के पेमेंट 100% एडवांस होगा। सप्लायर एशियर मेटल्स के मुताबिक ऐसा मार्च 2026 तक चलता रहा और फिर इसके बाद 8 जून और 25 जून को जो दो ऑर्डर्स पॉलीकैब ने दिए, उसका एडवांस पेमेंट नहीं मिला। सप्लायर ने बाद में सप्लाई और बकाये के आधार पर पेमेंट मांगा।

सप्लायर के दावे के मुताबिक उसने प्रति किग्रा ₹405 के भाव पर एलुमिनियम इनगॉट्स की सप्लाई की और 29 इनवॉइस जारी की। रिफंड्स, क्रेडिट नोट्स और अन्य एडजस्टमेंट्स के बाद एशियर मेटल्स ने ₹2.78 करोड़ के बकाए की बात कही, जिस पर कंपनी 26 जून को डिफॉल्ट हो गई यानी कि दे नहीं पाई। इस पर सप्लायर ने 6 अगस्त को स्टैटुअर डिमांड नोटिस भेजा। पेमेंट नहीं मिलने पर सप्लायर ने 24 अगस्त को एनसीएलटी में याचिका डाली, जिसे 7 अक्टूबर को एनसीएलटी ने स्वीकार कर लिया।

कंपनी के दावे की बात करें तो पॉलीकैब का कहना है कि इनवॉइस प्रोविजिनल बिलिंग थी और इसमें फाइनल प्राइसिंग, रिकंसिलिएशन, क्वांटिटी डिस्काउंट्स, क्रेडिट नोट्स और अन्य एडजस्टमेंट्स होने थे। पॉलीकैब ने ₹17.52 करोड़ का काउंटर-क्लेम भी किया और डिटेंशन/डेमरेज के लिए ₹80 लाख के एडजस्टमेंट की मांग की। कंपनी का दावा है कि सप्लायर ने यह रकम एकतरफा और बिना मिलान किए गए हिसाब-किताब से निकाली थी। वहीं सप्लायर ने पर्चेज ऑर्डर का हवाला देते हुए कहा कि इसमें साफतौर पर प्रति किग्रा ₹405 की कीमत तय लिखी है।

क्या है NSE के आदेश का मतलब

एनएसई ने 12 अक्टूबर के अपने आदेश में पॉलीकैब इंडिया को इक्विटी डेरिवेटिव्स सेगमेंट से बाहर निकालने का आदेश दिया, जिसके तहत 30 दिसंबर, 2026 से इसके F&O (फ्यूचर्स एंड कॉन्ट्रैक्ट्स) की ट्रेडिंग नहीं होगी। हालांकि इस सर्कुलर में यह भी कहा गया है कि अक्टूबर 2026 के कॉन्ट्रैक्ट्स एक्सपायर होने के बाद एक्सपायरी महीनों के लिए कोई नया कॉन्ट्रैक्ट जारी नहीं होगा। वहीं अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर 2026 में एक्सपायर होने वाले मौजूदा कॉन्ट्रैक्ट्स अपने-अपने एक्सपायरी डेट तक ट्रेडिंग के लिए उपलब्ध रहेंगे। NSE का यह भी कहना है कि सभी मौजूदा डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स पर T+2 दिन के आधार पर 100% मार्जिन लगाया जाएगा। यह नियम 13 अक्टूबर, 2026 तक की सभी ओपन पोजीशन्स और 14 अक्टूबर से बनने वाली नई पोजीशन्स पर लागू होगा।

एक साल में कैसी रही शेयरों की चाल

पॉलीकैब के शेयरों ने अमेरिका-ईरान के बीच के युद्ध, टैरिफ वार की आंच और महंगाई की मार के बीच निवेशकों को कम समय में अच्छा रिटर्न दिया है। 27 जनवरी 2026 को बीएसई पर यह ₹6,660.50 पर था, जो इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड निचला स्तर है। इस निचले स्तर से 5 महीने में यह 52.07% उछलकर 22 जून 2026 को ₹10,128.60 पर पहुंच गया था।

Polycab India Q1 Results: अनुमान से कमजोर रहा नेट प्रॉफिट और रेवेन्यू

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Manipal Payment Q1 Results: आईपीओ के बाद पहला रिजल्ट; मुनाफा 129% बढ़ा, रेवेन्यू में भी तगड़ा उछाल

Manipal Payment Q1 Results: पेमेंट कार्ड कंपनी Manipal Payment and Identity Solutions का FY27 की पहली तिमाही में प्रदर्शन मजबूत रहा। यह कंपनी का आईपीओ के बाद पहला रिजल्ट है। इसकी लिस्टिंग पिछले महीने यानी 17 सितंबर को हुई थी।

Manipal Payment का नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 129% बढ़कर ₹78 करोड़ हो गया। पिछले साल इसी तिमाही में मुनाफा ₹34 करोड़ था। कंपनी का रेवेन्यू भी 47.8% बढ़ा। यह ₹418.9 करोड़ रहा, जो पिछले साल ₹283.5 करोड़ था। EBITDA 44.1% बढ़कर ₹124.1 करोड़ हो गया।

EBITDA मार्जिन थोड़ा घटा

कंपनी का EBITDA मार्जिन 29.6% रहा। पिछले साल इसी तिमाही में यह 30.4% था। कंपनी ने बताया कि नए देशों और नई सुविधाओं से जुड़े शुरुआती खर्च का असर मार्जिन पर पड़ा।

इंटरनेशनल बिजनेस से मिला फायदा

इस तिमाही में इंटरनेशनल बिजनेस कंपनी के लिए बड़ा ग्रोथ ड्राइवर रहा। एक्सपोर्ट बढ़ने से कुल रेवेन्यू में इंटरनेशनल बिजनेस की हिस्सेदारी बढ़कर 15.3% हो गई। एक साल पहले यह हिस्सेदारी सिर्फ 3.9% थी। यानी एक साल में कंपनी के कुल रेवेन्यू में विदेशी कारोबार का योगदान काफी बढ़ा है।

कंपनी को बेहतर प्रोडक्ट मिक्स का भी फायदा मिला। प्रीमियम, टेक्नोलॉजी से जुड़े और वैल्यू एडेड प्रोडक्ट्स की हिस्सेदारी बढ़ी। इनमें मेटल कार्ड भी शामिल हैं।

CEO ने क्या कहा?

Manipal Payment and Identity Solutions के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और CEO के गिरिश किनी ने कहा कि कंपनी ने FY27 की शुरुआत मजबूत प्रदर्शन के साथ की है। उनके मुताबिक, कंपनी के अलग-अलग कारोबार में अच्छी ग्रोथ देखने को मिली।

उन्होंने कहा कि कंपनी आगे कस्टमर रिलेशनशिप मजबूत करने पर फोकस करेगी। साथ ही इंटरनेशनल बिजनेस बढ़ाया जाएगा। प्रीमियम और टेक्नोलॉजी आधारित प्रोडक्ट्स पर भी जोर रहेगा।

शेयर का हाल

नतीजों से पहले गुरुवार को Manipal Payment का शेयर 1.78% की गिरावट के साथ ₹402.55 पर बंद हुआ। आईपीओ के बाद से स्टॉक 17.05% चढ़ा है। कंपनी का मार्केट कैप 9.36 हजार करोड़ रुपये है।

Stocks to Buy: तीन सरकारी कंपनियों के स्टॉक्स में 48% तक तेजी की उम्मीद, जेफरीज ने खरीदने की सलाह

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Shankesh Jewellers Q1 Results: लिस्टिंग के बाद पहला रिजल्ट! ज्वेलरी कंपनी का मुनाफा डबल, रेवेन्यू 55% बढ़ा

Shankesh Jewellers Q1 Results: ज्वेलरी कंपनी Shankesh Jewellers ने जून 2026 तिमाही के नतीजे जारी किए हैं। कंपनी का नेट प्रॉफिट ₹43 करोड़ रहा। पिछले साल इसी तिमाही में मुनाफा ₹22 करोड़ था। यानी मुनाफा करीब दोगुना हो गया। ऑपरेशनल रेवेन्यू भी 55.1% बढ़कर ₹424 करोड़ हो गया। पिछले

EBITDA भी मजबूत रहा। यह 92.4% बढ़कर ₹61 करोड़ हो गया। पिछले साल EBITDA ₹32 करोड़ था। वहीं, EBITDA मार्जिन 11.6% से बढ़कर 14.4% हो गया।

यह लिस्टिंग के बाद कंपनी का पहला तिमाही नतीजा है। Shankesh Jewellers के शेयर 25 अगस्त 2026 को NSE और BSE पर लिस्ट हुए थे।

बोर्ड ने नतीजों को मंजूरी दी

Shankesh Jewellers के बोर्ड की 10 सितंबर को बैठक हुई। इसमें जून तिमाही के अनऑडिटेड स्टैंडअलोन नतीजों को मंजूरी दी गई। ऑडिटर V J Shah & Co की लिमिटेड रिव्यू रिपोर्ट को भी मंजूरी मिली।

कंपनी की कुल आय ₹423.61 करोड़ रही। पिछले साल यह ₹273.18 करोड़ थी। कुल खर्च बढ़कर ₹365.65 करोड़ हो गया। एक साल पहले यह ₹244.33 करोड़ था।

कंपनी का प्रॉफिट बिफोर टैक्स ₹57.96 करोड़ रहा। पिछले साल यह ₹28.85 करोड़ था। टैक्स खर्च भी बढ़कर ₹14.73 करोड़ हो गया। पिछले साल यह ₹7.25 करोड़ था। कंपनी की बेसिक और डाइल्यूटेड EPS ₹3.68 रही। पिछले साल यह ₹1.84 थी।

IPO से जुटाए ₹274 करोड़

Shankesh Jewellers का IPO जून तिमाही खत्म होने के बाद आया था। इसमें 2.95 करोड़ नए शेयर जारी किए गए। इनका फेस वैल्यू ₹5 था। इश्यू प्राइस ₹93 प्रति शेयर था।

फ्रेश इश्यू से कंपनी ने ₹274.18 करोड़ जुटाए। इसके अलावा प्रमोटर शेयरधारकों ने 1 करोड़ शेयर OFS में बेचे। इससे ₹93 करोड़ जुटाए गए।

शेयर का हाल

Shankesh Jewellers का शेयर 10 सितंबर को NSE पर 0.53% की तेजी के साथ ₹98.45 पर बंद हुआ। यह फिलहाल अपने लिस्टिंग प्राइस से 3.83% ऊपर है। कंपनी का मार्केट कैप 1.45 हजार करोड़ रुपये है।

Defence Stocks: सरकार ₹1.1 लाख करोड़ की डिफेंस खरीद करेगी, Kotak इन स्टॉक्स पर बुलिश

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Shiprocket Q1 Results: आईपीओ के बाद पहला रिजल्ट; घाटा घटकर ₹14 करोड़ हुआ, रेवेन्यू 34% बढ़ा

Shiprocket Q1 Results: शेयर बाजार में लिस्टिंग के बाद Shiprocket ने पहली बार तिमाही नतीजे जारी किए हैं। जून तिमाही में कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट लॉस घटकर ₹13.7 करोड़ रहा। एक साल पहले यह ₹18 करोड़ था। वहीं, ऑपरेशंस से रेवेन्यू 33.8% बढ़कर ₹592.1 करोड़ पहुंच गया। Q1FY26 में यह ₹442.5 करोड़ था।

कंपनी का EBITDA लॉस भी ₹26 करोड़ से घटकर ₹21 करोड़ रह गया। एडजस्टेड EBITDA ₹1 करोड़ से बढ़कर ₹8.9 करोड़ हो गया। कंपनी ने कहा कि पूरी तिमाही में एडजस्टेड EBITDA पॉजिटिव रहा।

कोर बिजनेस का रेवेन्यू 22% बढ़ा

Shiprocket के कोर बिजनेस का रेवेन्यू 22% बढ़कर ₹411.7 करोड़ रहा। इसका एडजस्टेड EBITDA ₹52.7 करोड़ रहा। EBITDA मार्जिन 12.8% रहा, जो एक साल पहले 12.3% था।

कंपनी के MD और CEO साहिल गोयल ने कहा कि तिमाही के नतीजे कंपनी की रणनीति के मुताबिक रहे। कंपनी तेजी से बढ़ रहे नए कारोबार में निवेश जारी रखेगी।

इमर्जिंग बिजनेस की ग्रोथ 70%

इमर्जिंग बिजनेस का रेवेन्यू 70% बढ़कर ₹180.4 करोड़ हो गया। इसमें चेकआउट और मार्केटिंग सॉल्यूशंस, क्रॉस-बॉर्डर और ओम्नीचैनल सॉल्यूशंस शामिल हैं।

अब यह कारोबार कंपनी के कुल रेवेन्यू में 30% योगदान देता है। एक साल पहले यह 24% था। इसका Contribution Margin 9.3% से बढ़कर 15.3% हो गया। वहीं, EBITDA मार्जिन का घाटा 38% से घटकर 24% रह गया।

चेकआउट और मार्केटिंग सॉल्यूशंस में करीब 193% की सालाना ग्रोथ हुई। कंपनी ने कहा कि Ads जैसे कारोबार अब तेजी से बढ़ रहे हैं। कुल कंट्रीब्यूशन मार्जिन 43% बढ़कर ₹115.1 करोड़ हो गया और मार्जिन 19.4% रहा।

AI प्रोडक्ट्स पर फोकस बढ़ाया

जून तिमाही के अंत में Shiprocket के एक्टिव मर्चेंट्स 2,24,314 थे। पिछले 12 महीनों का GMV ₹34,661.8 करोड़ रहा। यूनिक ट्रांजैक्शन 21.6 करोड़ रहे।

कंपनी ने RADAR का अपग्रेडेड AI बेस्ड वर्जन लॉन्च किया। यह ऑर्डर भेजे जाने से पहले पिनकोड स्तर पर SLA टूटने और Return-to-Origin के जोखिम पहचान सकता है।

इसके अलावा AI Ads, AI Assist और ऑर्डर कन्फर्मेशन के लिए AI Calling शुरू की गई। क्विक-कॉमर्स डार्क स्टोर्स के लिए अपॉइंटमेंट आधारित कार्गो डिलीवरी भी शुरू हुई। इसमें Blinkit और Zepto के साथ इंटीग्रेशन है।

IPO के बाद पहला नतीजा

Shiprocket के शेयर 19 अगस्त को NSE पर ₹131 पर लिस्ट हुए थे। यह ₹97 के इश्यू प्राइस से 35.05% ऊपर था। BSE पर शेयर ₹129.50 पर लिस्ट हुआ।

नतीजों से पहले सोमवार को Shiprocket का शेयर 1% से ज्यादा गिरकर 134.50 रुपये पर बंद हुआ। यह अपने 131 रुपये के लिस्टिंग प्राइस से करीब 3% ऊपर है।

अदाणी पावर की GVK Energy को खरीदने की तैयारी, 330 MW हाइड्रो प्रोजेक्ट मिलेगा

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

4% टूटा Federal Bank का शेयर, इस स्मॉल फाइनेंस बैंक में हिस्सेदारी की खरीदारी पर निगेटिव रिस्पांस

Federal Bank Share Price: फेडरल बैंक और जन स्मॉल फाइनेंस बैंक (Jana Small Finance Bank) के बीच एक सौदे को लेकर बातचीत चल रही है और यह एडवांस स्टेज में पहुंच चुका है। इसका आज शेयरों पर निगेटिव असर दिखा और शेयर 4% से अधिक टूट गए। सीएनबीसी-टीवी18 की रिपोर्ट के मुताबिक फेडरल बैंक इसमें कंट्रोलिंग स्टेक लेना चाहता है और जन स्मॉल फाइनेंस बैंक अपनी पूरी हिस्सेदारी बेचना चाहता है। रिपोर्ट के मुताबिक प्रमोटर्स की हिस्सेदारी हासिल करने के बाद फेडरल बैंक बाकी शेयरहोल्डर्स से शेयरों की खरीदारी के लिए ओपन ऑफर ला सकता है।

अभी फेडरल बैंक के शेयरों की बात करें तो बीएसई पर फिलहाल यह 2.77% की गिरावट के साथ ₹348 पर है जबकि इंट्रा-डे में यह 4.50% फिसलकर ₹341.80 तक आ गया था। वहीं जन स्मॉल फाइनेंस बैंक के शेयर फिलहाल 2.09% की गिरावट के साथ ₹569.70 पर हैं तो इंट्रा-डे में यह 3.59% गिरकर ₹560.95 तक आ गया था।

कैसी है Federal Bank की सेहत

फेडरल बैंक के लिए इस वित्त वर्ष 2027 की शुरुआत धमाकेदार रही। ब्याज से शुद्ध कमाई यानी NII की हेल्दी ग्रोथ और प्रोविजनिंग में गिरावट के दम पर इसकी कमाई जून 2026 तिमाही के दमदार रही। इसकी एसेट क्वालिटी में अच्छा सुधार दिखा लेकिन मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक इसका शुद्ध तिमाही में उम्मीद से थोड़ी हल्की रही।

जून 2026 तिमाही के फेडरल बैंक का शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 36.6% बढ़कर ₹1177 करोड़ पर पहुंच गया जोकि ब्लूमबर्ग के पोल में ₹1186 करोड़ के लगाए गए अनुमान से थोड़ा कम रहा। इस दौरान बैंक की ब्याज से शुद्ध कमाई 26.1 बढ़कर ₹2,946 करोड़ पर पहुंच गई जोकि ₹2851 करोड़ के अनुमान से काफी अधिक रही।

बैंक का प्रोविजन सालाना आधार पर ₹400 करोड़ से गिरकर ₹316 करोड़ पर आ गया तो टैक्स पर खर्च ₹294.4 करोड़ से बढ़कर ₹402.7 करोड़ पर पहुंच गया। बैंक के एसेट क्वालिटी की बात करें तो इसमें सुधार दिखा और तिमाही आधार पर ग्रॉस एनपीए 1.62% से 1.52% तो नेट एनपीए 0.20% से 0.18% पर आ गया।

एक साल में कैसी रही सेहत

फेडरल बैंक के शेयरों ने निवेशकों की ताबड़तोड़ कमाई कराई है। पिछले साल बीएसई पर 4 सितंबर 2025 को यह ₹188.45 के भाव पर था जोकि इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड निचला स्तर है। इस निचले स्तर से शेयरों ने शानदार रिकवरी की और 11 महीने में यह 93.66% उछलकर इस महीने की शुरुआत में 4 अगस्त 2026 को ₹364.95 पर पहुंच गया जोकि इसके शेयरों के लिए रिकॉर्ड हाई लेवल है।

Federal Bank Q1 Results: जून तिमाही में मुनाफा 37% बढ़ा, NII में 26% का इजाफा

Stock in News: 13% का उछाल, अलीबाग वाली जमीन को लेकर एग्रीमेंट पर शेयर रॉकेट

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

HDFC Bank का शेयर कई साल के निचले स्तर पर, लेकिन लोन पर ट्रेडर्स का रिकॉर्ड निवेश

HDFC Bank Share Price: प्राइवेट सेक्टर के सबसे बड़े लेंडर एचडीएफसी बैंक के शेयर कई वर्षों के निचले स्तर पर हैं। जून 2026 तिमाही के कारोबारी नतीजे के बाद इसके शेयरों की हालिया तेजी पूरी गायब हो चुकी है। हालांकि दूसरी तरफ इस शेयर में लेवरेज लेकर किए जा रहे निवेश लगातार बढ़ रहे हैं। 13 अगस्त 2026 एनएसई के मार्जिन ट्रे़डिंग फैसिलिटी (MTF) के आंकड़ों के अनुसार एचडीएफसी बैंक में लेवरेज्ड पोजीशन ₹3,000 करोड़ के पार पहुंच गई थी। एमटीएफ बुक में इतनी बड़ी एक्सपोजर वाला यह एकमात्र शेयर बन गया है।

13 अगस्त को इस पर लेवरेज्ड बेट ₹3,212 करोड़ पर पहुंच गया जबकि 31 जुलाई 2026 को यह ₹2,360 करोड़ पर था यानी कि कुछ ही दिनों में इस पर दांव 36% बढ़ गया। जून के आखिरी में यह आंकड़ा ₹1,790 करोड़ था यानी जून के आखिरी से अगस्त के मध्य तक एचडीएफसी बैंक में लेवरेज्ड पोजीशन लगभग 80% बढ़ गई।

क्या है Margin Trading Facility (MTF)?

मार्जिन ट्रेडिंग फैसिलिटी एक ऐसा तरीका है जिसमें ट्रेडर्स कुल कीमत का एक छोटा हिस्सा देकर शेयरों की डिलीवरी ले सकते हैं। बाकी पैसे ब्रोकर लोन के तौर पर देता है और शेयरों को गिरवी रखकर रोजाना के आधार पर ब्याज वसूलता है। जब स्टॉक की कीमत बढ़ती है, तो कम निवेश लागत के कारण मुनाफा कई गुना बढ़ जाता है, लेकिन स्टॉक की कीमत गिरने पर नुकसान भी कई गुना बढ़ जाता है और ब्याज का खर्च और भी दबाव डालता है। हालांकि अगर स्टॉक की कीमत तेजी से गिरती है और ट्रेडर अतिरिक्त फंड नहीं डाल पाता है, तो ब्रोकर को स्टॉक बेचने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।

कैसी है एचडीएफसी बैंक के शेयरों की स्थिति

एचडीएफसी बैंक के शेयरों के लिए यह साल 2026 शेयरों की तेजी को लेकर अब तक के सबसे खराब वर्षों में से एक रहा है। इस साल इसमें अब तक 25% की गिरावट आ चुकी है। पिछले कम से कम 10 वर्षों से लगातार इस स्टॉक ने सालाना पॉजिटिव रिटर्न दिया है। अभी इसके शेयरों पर जून तिमाही के कमजोर नतीजों ने दबाव बनाया है। जून तिमाही में बैंक का नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया, जिससे पिछले साल से चली आ रही लोन और डिपॉजिट में मजबूत बढ़ोतरी का असर खत्म हो गया। हालांकि एसेट क्वालिटी अपनी कैटेगरी में सबसे अच्छी बनी रही।

एचडीएफसी बैंक का परफॉरमेंस इतना खराब रहा है कि मार्केट कैप के मामले में आईसीआईसीआई बैंक ने तेजी से उसकी बराबरी कर ली है। जहां एक तरफ एचडीएफसी बैंक के शेयर कई वर्षों के निचले स्तर पर हैं, तो आईसीआईसीआई बैंक के शेयर रिकॉर्ड ऊंचाई के करीब हैं। मार्केट कैप के मामले में दोनों के बीच का अंतर अब दस साल में सबसे कम है। एचडीएफसी बैंक फिलहाल बीएसई पर 0.28% की गिरावट के साथ ₹725.30 पर है तो आईसीआईसीआई बैंक 0.05% की बढ़त के साथ ₹1418.65 पर। एचडीएफसी बैंक का एक साल का हाई ₹1020.35 और आईसीआईसीआई बैंक का 1,479.90 है।

HDFC Bank Q1 Results: जून तिमाही में मुनाफा 5% बढ़ा, इनकम 7% घटी; NPA गिरा

Stock Crash: 20% के लोअर सर्किट पर Zaggle Prepaid, टूटकर आया IPO प्राइस के नीचे

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Dividend Stocks: RVNL और HUDCO समेत 4 सरकारी कंपनियां दे रहीं डिविडेंड का तोहफा, जानिए रिकॉर्ड डेट समेत पूरी डिटेल

Dividend Stocks: अगले हफ्ते डिविडेंड पर नजर रखने वाले निवेशकों के लिए अच्छी खबर है। HUDCO, NBCC, RVNL और Mazagon Dock Shipbuilders समेत चार सरकारी कंपनियां 17 से 20 अगस्त के बीच एक्स-डिविडेंड होने जा रही हैं। इन चारों कंपनियों ने जून तिमाही (Q1 FY27) के नतीजे भी जारी किए हैं। कहीं मुनाफे में मजबूत बढ़ोतरी हुई है तो कहीं रेवेन्यू और ऑपरेटिंग प्रदर्शन ने निवेशकों का ध्यान खींचा है।

HUDCO

सरकारी हाउसिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस कंपनी HUDCO 17 अगस्त को एक्स-डिविडेंड होगी। कंपनी ने ₹1.50 प्रति शेयर फाइनल डिविडेंड का ऐलान किया है।

इस सरकारी कंपनी का जून तिमाही में नेट प्रॉफिट 35% बढ़कर ₹851 करोड़ हो गया। वहीं, रेवेन्यू 26.6% बढ़कर ₹3,717 करोड़ पहुंच गया। बेहतर लोन ग्रोथ और मजबूत एसेट क्वालिटी ने कंपनी के नतीजों को सहारा दिया।

NBCC

सरकारी कंस्ट्रक्शन कंपनी NBCC (India) भी 17 अगस्त को एक्स-डिविडेंड होगी। कंपनी ₹0.15 प्रति शेयर अंतरिम डिविडेंड दे रही है।

NBCC का जून तिमाही में नेट प्रॉफिट 17.2% बढ़कर ₹154.83 करोड़ रहा। हालांकि, रेवेन्यू 5.6% घटकर ₹2,259.53 करोड़ पर आ गया। इसके बावजूद कंपनी का मजबूत ऑर्डर बुक आगे के कारोबार के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

RVNL

सरकारी रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी RVNL 18 अगस्त को एक्स-डिविडेंड होगी। कंपनी ने ₹0.71 प्रति शेयर फाइनल डिविडेंड घोषित किया है।

इस सरकारी कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट 18.5% बढ़कर ₹159 करोड़ हो गया। वहीं, रेवेन्यू 10.6% बढ़कर ₹4,321 करोड़ पहुंच गया। EBITDA में भी मजबूत बढ़त दर्ज हुई, जिससे ऑपरेटिंग प्रदर्शन बेहतर रहा।

Mazagon Dock Shipbuilders

सरकारी डिफेंस शिपबिल्डिंग कंपनी Mazagon Dock Shipbuilders 20 अगस्त को एक्स-डिविडेंड होगी। कंपनी अपने शेयरधारकों को ₹4.62 प्रति शेयर फाइनल डिविडेंड देगी।

जून तिमाही में मझगांव डॉक का नेट प्रॉफिट 21.5% बढ़कर ₹549.41 करोड़ रहा। वहीं, रेवेन्यू 12.1% बढ़कर ₹2,942.70 करोड़ हो गया। EBITDA में करीब 48% की बढ़त और बेहतर मार्जिन ने तिमाही प्रदर्शन को मजबूत बनाया।

एक नजर में पूरी लिस्ट

कंपनीडिविडेंडEx-Date
HUDCO₹1.5017 अगस्त
NBCC₹0.1517 अगस्त
RVNL₹0.7118 अगस्त
Mazagon Dock₹4.6220 अगस्त

डिविडेंड पाने के लिए क्या करना होगा?

डिविडेंड का फायदा लेने के लिए निवेशकों के पास Ex-Date से पहले संबंधित कंपनी के शेयर डीमैट खाते में होने चाहिए। भारत में T+1 सेटलमेंट नियम लागू है, इसलिए एक्स-डेट वाले दिन शेयर खरीदने पर डिविडेंड का लाभ नहीं मिलेगा। आपको एक दिन पहले ही शेयर खरीदना होगा।

Dividend Stock: हर शेयर पर ₹45 का डिविडेंड, 27 अगस्त रिकॉर्ड डेट; कीमत 6 महीनों में 20% चढ़ी

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Q1 Results: डिफेंस कंपनी का मुनाफा 466% उछला, रेवेन्यू भी लगभग दोगुना; शेयरों पर रहेगी नजर

PTC Industries Q1 Results: लखनऊ की डिफेंस और इंजीनियरिंग कंपनी PTC Industries ने वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में शानदार नतीजे दिए हैं। कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर पांच गुने से ज्यादा बढ़कर ₹29.19 करोड़ हो गया। पिछले साल की इसी तिमाही में यह ₹5.16 करोड़ था।

कंपनी का ऑपरेशंस से रेवेन्यू भी 97.4% बढ़कर ₹191.80 करोड़ पहुंच गया। एक साल पहले यह ₹97.15 करोड़ था।

EBITDA में 180% की छलांग

PTC Industries का EBITDA 180% बढ़कर ₹54.21 करोड़ हो गया। पिछले साल जून तिमाही में यह ₹19.35 करोड़ था। हालांकि, कंपनी के कुल खर्च भी 62.6% बढ़कर ₹160.37 करोड़ हो गए।

मार्च तिमाही की तुलना में कंपनी का प्रदर्शन थोड़ा कमजोर रहा। नेट प्रॉफिट 51.3% घटा, जबकि रेवेन्यू में करीब 15% की गिरावट आई। हालांकि, कुल खर्च पिछली तिमाही के मुकाबले 2.8% कम रहे।

डिफेंस ऑर्डर से मिला सहारा

Q1 नतीजों से पहले कंपनी को जुलाई में कानपुर की गन फैक्ट्री से दो बड़े आर्टिलरी गन कंपोनेंट्स के डेवलपमेंट ऑर्डर मिले थे। इससे डिफेंस कारोबार में कंपनी की पकड़ और मजबूत होने की उम्मीद है।

PTC Industries का कारोबार

PTC Industries डिफेंस, ऑयल एंड गैस, LNG, शिपिंग और एयरोस्पेस जैसे अहम सेक्टरों के लिए हाई-परफॉर्मेंस मेटल कास्टिंग और इंजीनियरिंग कंपोनेंट्स बनाती है। कंपनी ऐसे प्रोडक्ट्स तैयार करती है, जिनका इस्तेमाल क्रिटिकल और सुपर-क्रिटिकल एप्लिकेशन में होता है।

शेयरों का हाल

नतीजों से पहले शुक्रवार को PTC Industries का शेयर 0.35% की गिरावट के साथ ₹19,100 पर बंद हुआ। पिछले एक महीने में स्टॉक 8.66% चढ़ा है। वहीं, एक साल में इसने करीब 39% और तीन साल में करीब 247% का रिटर्न दिया है।

Stocks to Watch: सोमवार 17 अगस्त को 20 शेयरों पर रहेगी नजर, मिल सकता है तगड़ी कमाई का मौका

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।