HDFC Bank का शेयर कई साल के निचले स्तर पर, लेकिन लोन पर ट्रेडर्स का रिकॉर्ड निवेश

HDFC Bank Share Price: प्राइवेट सेक्टर के सबसे बड़े लेंडर एचडीएफसी बैंक के शेयर कई वर्षों के निचले स्तर पर हैं। जून 2026 तिमाही के कारोबारी नतीजे के बाद इसके शेयरों की हालिया तेजी पूरी गायब हो चुकी है। हालांकि दूसरी तरफ इस शेयर में लेवरेज लेकर किए जा रहे निवेश लगातार बढ़ रहे हैं। 13 अगस्त 2026 एनएसई के मार्जिन ट्रे़डिंग फैसिलिटी (MTF) के आंकड़ों के अनुसार एचडीएफसी बैंक में लेवरेज्ड पोजीशन ₹3,000 करोड़ के पार पहुंच गई थी। एमटीएफ बुक में इतनी बड़ी एक्सपोजर वाला यह एकमात्र शेयर बन गया है।

13 अगस्त को इस पर लेवरेज्ड बेट ₹3,212 करोड़ पर पहुंच गया जबकि 31 जुलाई 2026 को यह ₹2,360 करोड़ पर था यानी कि कुछ ही दिनों में इस पर दांव 36% बढ़ गया। जून के आखिरी में यह आंकड़ा ₹1,790 करोड़ था यानी जून के आखिरी से अगस्त के मध्य तक एचडीएफसी बैंक में लेवरेज्ड पोजीशन लगभग 80% बढ़ गई।

क्या है Margin Trading Facility (MTF)?

मार्जिन ट्रेडिंग फैसिलिटी एक ऐसा तरीका है जिसमें ट्रेडर्स कुल कीमत का एक छोटा हिस्सा देकर शेयरों की डिलीवरी ले सकते हैं। बाकी पैसे ब्रोकर लोन के तौर पर देता है और शेयरों को गिरवी रखकर रोजाना के आधार पर ब्याज वसूलता है। जब स्टॉक की कीमत बढ़ती है, तो कम निवेश लागत के कारण मुनाफा कई गुना बढ़ जाता है, लेकिन स्टॉक की कीमत गिरने पर नुकसान भी कई गुना बढ़ जाता है और ब्याज का खर्च और भी दबाव डालता है। हालांकि अगर स्टॉक की कीमत तेजी से गिरती है और ट्रेडर अतिरिक्त फंड नहीं डाल पाता है, तो ब्रोकर को स्टॉक बेचने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।

कैसी है एचडीएफसी बैंक के शेयरों की स्थिति

एचडीएफसी बैंक के शेयरों के लिए यह साल 2026 शेयरों की तेजी को लेकर अब तक के सबसे खराब वर्षों में से एक रहा है। इस साल इसमें अब तक 25% की गिरावट आ चुकी है। पिछले कम से कम 10 वर्षों से लगातार इस स्टॉक ने सालाना पॉजिटिव रिटर्न दिया है। अभी इसके शेयरों पर जून तिमाही के कमजोर नतीजों ने दबाव बनाया है। जून तिमाही में बैंक का नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया, जिससे पिछले साल से चली आ रही लोन और डिपॉजिट में मजबूत बढ़ोतरी का असर खत्म हो गया। हालांकि एसेट क्वालिटी अपनी कैटेगरी में सबसे अच्छी बनी रही।

एचडीएफसी बैंक का परफॉरमेंस इतना खराब रहा है कि मार्केट कैप के मामले में आईसीआईसीआई बैंक ने तेजी से उसकी बराबरी कर ली है। जहां एक तरफ एचडीएफसी बैंक के शेयर कई वर्षों के निचले स्तर पर हैं, तो आईसीआईसीआई बैंक के शेयर रिकॉर्ड ऊंचाई के करीब हैं। मार्केट कैप के मामले में दोनों के बीच का अंतर अब दस साल में सबसे कम है। एचडीएफसी बैंक फिलहाल बीएसई पर 0.28% की गिरावट के साथ ₹725.30 पर है तो आईसीआईसीआई बैंक 0.05% की बढ़त के साथ ₹1418.65 पर। एचडीएफसी बैंक का एक साल का हाई ₹1020.35 और आईसीआईसीआई बैंक का 1,479.90 है।

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Risks of MTF: ₹12000 करोड़ की सीख, दक्षिण कोरिया में हाहाकार के पांच सबक

Risks of MTF: मान लीजिए कि स्टॉक मार्केट में MTF (मार्जिन ट्रे़डिंग फैसिलिटी) चुनने वाले हर 30 में से एक को एक ही हफ्ते में मैसेज आए, ‘मार्जिन काल, फंड डालिए, नहीं तो हम बेच देंगे’, तो क्या होगा, हड़कंप मच जाएगा न। वैसे यह कल्पना नहीं रह गई और पिछले महीने जुलाई में दक्षिण कोरिया में ऐसा ही हुआ। अब सवाल ये है कि क्या भारत में भी ऐसा कुछ हो सकता है। सैमको सिक्योरिटीज के सीईओ और फाउंडर जिमीत मोदी का मानना है कि रिस्क तो बढ़ा है। उनका कहना है कि एनालिसिस में गलती हुई तो मार्केट माफ कर सकता है लेकिन अत्यधिक लेवरेज की गलती शायद माफ न हो। उनका कहना है कि दक्षिण कोरिया के निवेशकों ने यह सबक सीखने के लिए सिर्फ चार हफ्ते में करीब ₹12,000 करोड़ गंवा दिए और भारतीय निवेशकों के पास अभी भी यह मौका है कि वे बिना नुकसान उठाए इस अनुभव से सीख लें।

क्या है मामला

शुरुआत में सब शानदार चल रहा था। चिप से जुड़े स्टॉक में तेजी के चलते दक्षिण कोरिया का कोस्पी (KOSPI) इंडेक्स उछलकर जून में रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गया। साथ ही कोरिया का एमटीएफ यानी मार्जिन ट्रेडिंग फैसिलिटी का लोन बुक रिकॉर्ड 38.6 ट्रिलियन वान (KRW) यानी ₹2.56 लाख करोड़ पर पहुंच गया जोकि एक साल में करीब डबल हो गया। खास बात ये है कि इस उधार लिए गए पैसे का बड़ा हिस्सा सिर्फ दो शेयरों, सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स (Samsung Electronics) और एसके हाइनिक्स (SK Hynix), में लगाया गया था जिनका कोस्पी इंडेक्स में आधे से अधिक हिस्सा है।

फिर बाजार ने गोता लगाया और गिरावट इतनी तेज रही कि कोस्पी जून महीने के रिकॉर्ड हाई से करीब 40% टूट गया। इसके बाद करीब 12 लाख रिटेल अकाउंट्स को मार्जिन कॉल मिले और इनमें से 3.20 लाख-3.60 लाख निवेशकों के शेयर जबरन बेच दिए गए। जबरन बिकवाली से शेयरों की कीमतें और नीचे आईं, जिससे और अधिक निवेशकों को मार्जिन कॉल मिले। इससे खुदरा निवेशकों को करीब 2.15 ट्रिलियन वान (KRW) यानी करीब ₹12 हजार करोड़ की दौलत सिर्फ एक महीने में खत्म हो गई। सबसे अधिक नुकसान 20 से 30 साल की उम्र के निवेशकों को हुआ, जिनकी हिस्सेदारी इस पूरे नुकसान में 62% रही।

भारत के लिए क्या है चेतावनी

भारतीय मार्केट में एमटीएफ बुक FY23 में लगभग ₹25,000 करोड़ से बढ़कर अब ₹1.44 लाख करोड़ से अधिक हो गया है यानी तीन साल में लगभग छह गुना बढ़ोतरी। इस पर सेबी की नजर तो है और सेबी ने एमटीएफ पर एक्सपोजर लिमिट और रिस्क से जुड़े नियम का प्रस्ताव पेश किया है, जिन्होंने हमें कोरिया जैसी बुरी स्थितियों से पहले ही बचा लिया है। हालांकि ध्यान दें कि रेगुलेशन सिर्फ नियम बनाता है, सही फैसला लेने की समझ नहीं देता और वह जिम्मेदारी निवेशकों की खुद की है। यहां ऐसे ही कुछ रिस्क के बारे में बताया जा रहा है, जिन पर ध्यान देना चाहिए-

कम लिक्विडिटी वाले शेयरों के लिए भी लेवरेज: ब्रोकर करीब 1,500 शेयरों पर एमटीएफ की फैसिलिटी दे रहे हैं। फिलहाल इंडस्ट्री के एमटीएफ बुक का एक बड़ा हिस्सा एफएंडओ सेगमेंट से बाहर के ऐसे स्मॉल-कैप और मिड-कैप शेयरों में है जो लगातार लोअर सर्किट में जा सकते हैं, जिससे अचानक मुश्किल आने पर निकलने का कोई रास्ता नहीं बचता। कोरिया के निवेशकों के शेयर कम से कम किसी कीमत पर तो बिके थे, लोअर सर्किट पर तो शेयर बिकेगा भी नहीं।

नया सिस्टम: एटीएफ का चलन सिर्फ 3-4 साल में तेजी से बढ़ा है। कोरोना महामारी के बाद अभी यहां कोस्पी जैसी स्थिति आई नहीं है जिसका मतलब है कि ₹1.44 लाख करोड़ के लेवरेज ने असली आंधी का सामना नहीं किया है।

युवाओं की अधिक संख्या: एटीएफ का इस्तेमाल कोरियाई मार्केट की तरह अधिकतर युवा ही कर रहे हैं जिन्होंने अधिकतर सिर्फ चढ़ता हुआ मार्केट ही देखा है।

पांच बातों का रखें ख्याल

लेवरेज लोन है, स्ट्रैटेजी नहीं: शेयर परफॉर्म करे या नहीं, सालाना 10-15% की दर से ब्याज देना पड़ता है। 50% मार्जिन पर खरीदे गए स्टॉक से फंडिंग कॉस्ट निकालने के लिए ही सालाना 5% से ज़्यादा रिटर्न मिलना ज़रूरी है। उधार के पैसे से कोई खराब निवेश नहीं बन जाता, बल्कि और खराब हो जाता है।

कुछ ही स्टॉक्स में न लें लवरेज: दक्षिण कोरिया की सबसे बड़ी गलती केवल लीवरेज लेना नहीं था, बल्कि सिर्फ दो शेयरों में भारी निवेश करना था। अगर आपके भी एमटीएफ वाले अधिकतर निवेश सिर्फ दो-तीन स्टॉक्स में हैं, जिनमें बाकी लोग भी पैसे डाल रहे हैं तो गिरावट आने पर सभी लोग एक साथ बेचने की कोशिश करेंगे और ऐसी स्थिति में नुकसान अधिक तेजी से बढ़ सकता है।

मार्जिन कॉल आ सकती है खराब समय में: अच्छी कंपनी में भी एमटीएफ निवेश से घाटा हो सकता है। इसकी वजह ये है कि मार्जिन कॉल हमेशा सबसे खराब समय में आती है। लोअर सर्किट में ब्रोकर को भी खरीदार नहीं मिलेगा और मार्केट अगर अनुमान से अधिक समय तक नीचे आया और गिरवी रखा पैसा यानी कोलैटरल उतने समय के लिए पर्याप्त न हो तो दिक्कत हो सकती है।

अधिकतम मुनाफा नहीं, बल्कि लंबे समय तक टिके रहने की योजना: हर मार्केट में कभी न कभी 25% से 30% की गिरावट आती ही है। दक्षिण कोरिया में यह गिरावट सिर्फ चार सप्ताह में आ गई। ऐसे में एमटीएफ का इस्तेमाल से पहले खुद से एक प्रश्न पूछे कि क्या अगर अगले महीने मेरा शेयर 30% गिर जाए, तो क्या मैं बिना किसी अन्य निवेश को बेचे इस स्थिति से निकल सकता हूं? अगर इसका जवाब ना में है तो आपका निवेश बहुत बड़ा है।

खुद से जरूर पूछें एक सवाल: अगर आप किसी शेयर को बिना उधार लिए हुए पैसे के साथ लॉन्ग टर्म तक नहीं रख सकते, तो इसे उधार लेकर भी नहीं खरीदना चाहिए क्योंकि लेवरेज सिर्फ उस भरोसे को बढ़ाना चाहिए जो आपके पास पहले से है। यह उस भरोसे की जगह नहीं ले सकता जो आपके पास है ही नहीं।

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Sell-off in chip stocks : चिप शेयरों में उधार लेकर की गई खरीदारी दक्षिण कोरिया पर पड़ रही भारी, जानिए भारत के लिए है कितना बड़ा खतरा

Sell-off in chip stocks : अमेरिका में चिप शेयरों में बिकवाली दक्षिण कोरिया पर भारी पड़ रही है। कॉस्पी में आज करीब 11% की भारी गिरावट दिख रही है। इस बिकवाली का एक बड़ा कारण कोस्पी में बढ़ती मार्जिन पोजिशन भी है। जब बाजार में बिकवाली बढ़ती है तो मार्जिन ट्रिगर होते हैं और ब्रोकर्स सौदे काट देते हैं। मार्जिन ट्रेडिंग की समस्या सिर्फ कोस्पी की नहीं,पूरी दुनिया में है। अमेरिका,चीन के साथ साथ भारत में भी मार्जिन पोजिशन रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई है। ये भारत और दुनिया भर के बाजारों के लिए कितनी बड़ी चुनौती है,इस पर खास चर्चा के लिए हमारे साथ हैं स्टॉकएज (Stockedge) के को-फाउंडर विवेक बजाज। लेकिन इसके पहले जान लेते हैं कि दुनिया के बड़े बाजारों में क्या है मार्जिन पोजिशन (लेवरेज पोजिशन) की स्थिति।

रिकॉर्ड स्तर पर लेवरेज पोजिशन

अमेरिका में लेवरेज पोजिशन 1.53 लाख करोड़ डॉलर पर है। वहीं, चीन में यह 3 लाख करोड़ यूआन, दक्षिण कोरिया में 39 अरब डॉलर और भारत में 1.38 लाख करोड़ रुपए पर है। भारत में MTF पोजिशन की बात करें तो यह FY23 में 0.25 लाख करोड़ रुपए,FY24 में 0.47 लाख करोड़ रुपए, FY 25 में 0.72 लाख करोड़ रुपए। सितंबर 2025 में 1 लाख करोड़ रुपए, दिसंबर 2025 में 1.16 लाख करोड़ रुपए और जुलाई 2026 में 1.38 लाख करोड़ रुपए थी।

मार्केट कैप में MTF पोजिशन का हिस्सा

मार्केट कैप में MTF पोजिशन के हिस्से की बात करें तो चीन में यह कुल मार्केट कैप का 2.4%, अमेरिका में कुल मार्केट कैप का 2%, दक्षिण कोरिया में कुल मार्केट कैप का 0.8% और भारत में कुल मार्केट कैप का 0.34% है।

कोस्पी की गिरावट का लेवरेज कनेक्शन

27 मई को कोरिया में सिंगल स्टॉक लेवरेज ETF लॉन्च किया गया। इस ETF में सिर्फ सैमसंग और SK Hynix शामिल हैं। AI चिप रैली में रिटेल ने अंधाधुंध पैसा लगाया। इसमें कुछ ही हफ्तों में 9.48 अरब डॉलर की खरीदारी हुई। इस ETF के 92 फीसदी होल्डर रिटेल निवेशक हैं। मई के अंत तक रिटेल मार्जिन लोन 39 अरब डॉलर तक पहुंच गया।

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कोस्पी: मार्जिन कॉल और फोर्स सेलिंग

कोस्पी में सैमसंग और SK Hynix की हिस्सेदारी 50% से ज्यादा है। सैमसंग और SK Hynix में सबसे ज्यादा लेवरेज पोजिशन है। चिप शेयरों में बिकवाली से सैमसंग और SK Hynix में तेज बिकवाली आई। एक महीने में सैमसंग 38% और SK Hynix 42% टूट गया। तेज बिकवाली से ब्रोकर्स ने मार्जिन पोजिशन काटी।

मार्जिन ट्रेडिंग भारत के लिए चुनौती?

भारत में भी मार्जिन ट्रेडिंग या MTF तेजी से बढ़ रही है। 27 जुलाई को MTF 1.38 लाख करोड़ रुपए के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए। हालांकि कुल मार्केट कैप में MTF का हिस्सा 0.34% ही है।

एक्सपर्ट की राय

स्टॉकएज (Stockedge) के को-फाउंडर विवेक बजाज ने कहा कि सालों से मार्जिन ट्रेडिंग चलती आ रही है। यह अमेरिका की उपज है। अमेरिकी लीवरेज पसंद करते है। वे हर तरह के इंस्ट्रूमेंट में लीवरेज क्रिएट करते हैं। वहां पर भी यह काफी बड़ा होता जा रहा है। टिपिकली जब भी किसी एसेट में बबल बनता है तो वह पूरे बाजार में बबल बनाने में अहम भूमिका निभाता है। उदाहरण के लिए जैसे 2008 में रियल एस्टेट बबल बना उसमें रियल एस्टेट लीवरेज बाजार में बबल बनने का कारण बना। जब बबल फटता है तो जहां भी लीवरेज होता है वहां असर पड़ता है।

हम सभी जानते हैं कि इस समय दुनिया में एआई ड्रिवेन बबल बन चुका है। लेकिन ये कब फटेगा हमें नहीं पता है। इस नजरिए से कोस्पी इस समय बहुत बड़ा केस स्टडी बन गया है। कोरियन मार्केट अपने हाई से 33 फीसदी टूट चुका है। लेकिन लीवरेज बबल फटने पर इसमें और बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है।

विवेक बजाज ने आगे कहा कि भारत में मार्जिन ट्रेडिंग या MTF 2000 शेयरों में हैं। वहीं, कोरिया में सिर्फ 20 शेयरों में भारत से कई गुना बड़ा लीवरेज्ड पोजीशन है। भारत में फ्री फ्लोट बेसिस पर MTF पोजीशन मार्केट कैप का 0.74 फीसदी है। ऐसे में भारत में मार्जिन ट्रेंडिंग का बड़ा रिस्क नहीं है।

उन्होंने आगे कहा कि कोरिया का बाजार एक ट्रिगर का काम करेगा। अगर वहां,लीवरेज्ड शेयरों में गिरावट आती है तो इसका असर भारत सहित पूरे ग्लोबल मार्केट पर देखने को मिलेगा। ऐसे में जहां भी लीवरेज ज्यादा होगा वहां दबाव दिखेगा।

MTF क्या है?

मार्जिन ट्रेडिंग फैसिलिटी ‘आज खरीदें,बाद में भुगतान करें’के मॉडल की तरह काम करता है। इसमें निवेशकों को ट्रेडिंग के लिए जरूरी पैसों का कुछ हिस्सा ही चुकाना पड़ता है और बाकी पैसा ब्रोकर लोन की तरह देता है। जैसे कि मान लें कि 100 रुपये के भाव वाले 1 हजार शेयरों की ट्रेडिंग करनी है तो 1 लाख रुपये की जरूरत पड़ेगी। अब या तो आप पूरे एक लाख रुपये अपने पास से लगाएं या 30 फीसदी यानी 30 हजार रुपये खुद का लगाएं और बाकी 70 फीसदी यानी 70 हजार रुपये ब्रोकर से लोन के रूप में मिल जाएगा।

मार्जिन ट्रेडिंग का फायदा ट्रेडर्स और ब्रोकर्स दोनों को मिलता है। ट्रेडर्स ज्यादा पैसा लगाने के लिए लोन ले सकते हैं और बड़ा मुनाफा कमाने की कोशिश कर सकते हैं, वहीं ब्रोकर्स दिए गए लोन पर ब्याज कमाते हैं।

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।