Parag Parikh Flexi Cap Fund: पराग पारिख में पैसा लगाना बंद कर रहे निवेशक? 6 महीने में 77% घटा निवेश

Parag Parikh Flexi Cap Fund: पराग पारिख फ्लेक्सी कैप फंड में हर महीने आने वाला अनुमानित निवेश तेजी से घटा है। मार्च 2026 में यह करीब ₹3,950 करोड़ था। सितंबर में घटकर सिर्फ ₹900 करोड़ रह गया। यानी 6 महीने में करीब 77% की गिरावट आई। हालांकि, फंड में पैसा आना बंद नहीं हुआ है। इसके बावजूद फंड मैनेजर ने नए शेयरों और दूसरे निवेश विकल्पों में पैसा लगाना जारी रखा है।

फंड की कैश होल्डिंग भी काफी घटी है। मार्च में कुल संपत्ति का 18.94% पैसा कैश में था। सितंबर में यह घटकर 9.77% रह गया। इस दौरान फंड को रियल एस्टेट, REITs और चुनिंदा ऑयल एंड गैस कंपनियों में निवेश के मौके मिले।

फंड में निवेश क्यों घटा?

PPFAS Mutual Fund के फंड मैनेजर राज मेहता ने Moneycontrol को बताया कि निवेश में कमी से फंड की रणनीति नहीं बदली है। उनके मुताबिक, फंड में अब भी नया पैसा आ रहा है।

उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में मिडकैप और स्मॉलकैप फंडों का प्रदर्शन बेहतर रहा है। ऐसे में निवेशकों का रुझान भी उनकी तरफ बढ़ा है। अक्सर निवेशक हालिया रिटर्न देखकर अपना पैसा लगाने का फैसला करते हैं।

कैश में पैसा रखने के बजाय कहां निवेश किया?

राज मेहता के मुताबिक, फंड कितना पैसा कैश में रखेगा, यह बाजार के स्तर से ज्यादा निवेश के मौकों पर निर्भर करता है। बाजार में लंबे समय तक खास तेजी न आने और कुछ शेयरों की कीमत घटने से फंड को खरीदारी के मौके मिले। इसलिए उसने कैश घटाकर शेयरों में निवेश बढ़ाया।

सितंबर की फैक्टशीट के मुताबिक, फंड की कुल संपत्ति का 72.06% हिस्सा भारतीय कोर इक्विटी में था। वहीं, 11.90% विदेशी सिक्योरिटीज, IDR और ADR में लगा था। REITs और InvITs में निवेश 6.27% था।

सितंबर में किन शेयरों में बढ़ाया निवेश?

अगस्त के मुकाबले सितंबर में DLF में सबसे ज्यादा नया निवेश किया गया। फंड की कुल संपत्ति का 1.81% हिस्सा इसमें लगाया गया। इसके अलावा Mahindra & Mahindra, Indus Towers, Bharti Airtel और कुछ ऑयल एंड गैस कंपनियों में भी निवेश बढ़ाया गया।

दूसरी तरफ, फंड ने Great Eastern Shipping Company से अपना निवेश निकाल लिया। अगस्त में इस शेयर में फंड की संपत्ति का 0.11% हिस्सा लगा था।

फंड के पास Embassy Office Parks REIT में 2.49%, Knowledge Realty Trust में 2.18% और Brookfield India Real Estate Trust में 1.60% निवेश था।

फंड का रिटर्न कैसा रहा?

हाल के प्रदर्शन की बात करें तो फंड का रिटर्न कमजोर रहा है। इसके रेगुलर प्लान ने एक साल में 4.14% निगेटिव रिटर्न दिया। वहीं, बेंचमार्क Nifty 500 TRI में 2.03% की गिरावट आई।

हालांकि, तीन, पांच और दस साल की अवधि में फंड ने अपने बेंचमार्क से बेहतर प्रदर्शन किया।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

करोड़ों की प्रॉपर्टी देखने पहुंचे अशनीर ग्रोवर, रियल एस्टेट कारोबारी ने दे डाला नौकरी का ऑफर

भारतपे के पूर्व को-फाउंडर अशनीर ग्रोवर अपने बेबाक अंदाज के लिए जाने जाते हैं, लेकिन इस बार वह खुद एक मजेदार सोशल मीडिया पोस्ट का हिस्सा बन गए हैं। गुरुग्राम के एक रियल एस्टेट कारोबारी ने उनकी प्रॉपर्टी विजिट पर चुटकी लेते हुए उन्हें नौकरी तक ऑफर कर दी। मामला गुरुग्राम के महंगे रिहायशी प्रोजेक्ट DLF Camellias का है, जहां अशनीर की विजिट के दौरान फ्लैट के बजाय क्लब, सुविधाओं और हरियाली को दिखाए जाने पर कारोबारी ने सवाल उठाए। उनकी पोस्ट अब सोशल मीडिया पर चर्चा में है।

फ्लैट देखने पहुंचे अशनीर

गुरुग्राम के रियल एस्टेट कारोबारी अभिषेक भारद्वाज ने X पर एक पोस्ट साझा करते हुए अशनीर ग्रोवर की साइट विजिट पर मजाकिया टिप्पणी की। उन्होंने बताया कि अशनीर की यह विजिट उनकी पत्नी के चैनल पर शेयर किए गए एक वीडियो में दिखाई गई थी, जिसका शीर्षक ‘Home Beyond the Price Tag’ है। अभिषेक के मुताबिक, फ्लैट में किरायेदार होने और दरवाजा नहीं खुलने की स्थिति में विजिट के दौरान क्लब, दूसरी सुविधाएं और हरियाली दिखाई गई। उन्होंने इस अनुभव की तुलना प्रॉपर्टी ब्रोकरों के उस आम तरीके से की, जिसमें फ्लैट नहीं दिखा पाने पर खरीदार को आसपास की सुविधाएं दिखाकर व्यस्त रखा जाता है।

‘क्लब दिखा दिया, हरियाली दिखा दी, फ्लैट की बात ही नहीं की’

200 से ज्यादा प्रॉपर्टी डील करने का अनुभव रखने वाले अभिषेक ने कहा कि गुरुग्राम के प्रीमियम रिहायशी प्रोजेक्ट्स में कई खरीदारों के लिए फ्लैट के साथ उसका पता और सोसायटी भी काफी मायने रखती है। ऐसी जगहों पर उपलब्ध फ्लैट कम होने के कारण खरीदार कई बार प्रॉपर्टी देखने से पहले ही उसमें दिलचस्पी दिखाने लगते हैं।

हालांकि, अभिषेक का मानना है कि अच्छी साइट विजिट में खरीदार को असली फ्लैट दिखाना जरूरी है। उन्होंने मजाक में कहा कि अगर किरायेदार दरवाजा नहीं खोल रहा हो, तो वह उसके साथ एक घंटे बैठकर चाय पीने को भी तैयार हैं, लेकिन खरीदार को फ्लैट दिखाए बिना वापस नहीं जाने देंगे।

अशनीर ग्रोवर को दे दी फील्ड एसोसिएट की नौकरी

अभिषेक ने अपनी पोस्ट में अशनीर पर तंज कसते हुए लिखा कि उन्होंने साइट विजिट बिल्कुल उसी अंदाज में की, जैसा प्रॉपर्टी इंडस्ट्री में कई बार देखने को मिलता है। उन्होंने कहा, ‘क्लब दिखा दिया, हरियाली दिखा दी, फ्लैट की बात ही नहीं की।’ इसके बाद कारोबारी ने अशनीर को फील्ड एसोसिएट की नौकरी का ऑफर दे दिया। उन्होंने बताया कि वह फिलहाल साइट विजिट के लिए लोगों की तलाश कर रहे हैं और अशनीर ने तो पहली विजिट में ही इंडस्ट्री का तरीका दिखा दिया।

सोशल मीडिया पर चर्चा में आई पोस्ट

अभिषेक ने अपनी पोस्ट के आखिर में अशनीर से मजाकिया अंदाज में पूछा, ‘इंटरव्यू कब दे रहे हो?’ उनकी इस टिप्पणी ने प्रॉपर्टी विजिट के तरीके और महंगी सोसायटी में घर खरीदने के अनुभव को लेकर चर्चा छेड़ दी है। हालांकि, यह पूरा मामला कारोबारी की सोशल मीडिया पोस्ट में किए गए दावों और व्यंग्य पर आधारित है।

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हैदराबाद में लग्जरी विला खरीदने से पहले नेता के बारे में पूछ रहे खरीदार, रियल एस्टेट एजेंट ने बताई वजह

आलीशान घर, शानदार लोकेशन, स्विमिंग पूल और प्राइवेट गार्डन लग्जरी घर खरीदते समय लोग आमतौर पर इन्हीं सुविधाओं पर ध्यान देते हैं। लेकिन हैदराबाद में कुछ लग्जरी होमबायर्स की प्राथमिकताएं अब कुछ अलग नजर आ रही हैं। वे घर पसंद करने से पहले यह भी जानना चाहते हैं कि आसपास किसी बड़े नेता का घर तो नहीं है। वजह घर की कीमत या सुविधाएं नहीं, बल्कि शांति, निजता और रोजमर्रा की जिंदगी में होने वाली संभावित परेशानियां हैं। हैदराबाद के एक रियल एस्टेट कारोबारी की सोशल मीडिया पोस्ट ने इस दिलचस्प ट्रेंड को चर्चा में ला दिया है।

विला खरीदने पहुंचे ग्राहक ने सबसे पहले पूछा ये सवाल

हैदराबाद के रियल एस्टेट कारोबारी सतीश रेड्डी ने 19 अक्टूबर 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट साझा की। उन्होंने बताया कि हाल ही में एक प्रीमियम विला प्रोजेक्ट में ग्राहक के साथ जाने पर उन्हें एक दिलचस्प सवाल सुनने को मिला। रेड्डी के मुताबिक, ग्राहक ने सेल्स हेड से सबसे पहले पूछा, “ई विलास लो पेद्दा पॉलिटिशियंस एवरु तीस्कोलेदु कदा?” यानी इन विला में किसी बड़े नेता ने तो घर नहीं खरीदा है?

लग्जरी प्रॉपर्टी खरीदने के दौरान इस तरह का सवाल आमतौर पर सुनने को नहीं मिलता। लेकिन रेड्डी के मुताबिक, यह कोई पहला मौका नहीं था, जब किसी ग्राहक ने आसपास रहने वाले लोगों और उनके प्रभाव के बारे में ऐसी चिंता जताई हो।

बड़े नेताओं के आसपास घर होने से क्या हो सकती है परेशानी?

रेड्डी ने अपनी पोस्ट में बताया कि किसी प्रमुख राजनीतिक हस्ती के आसपास रहने पर कुछ परिस्थितियों में आम निवासियों की दिनचर्या प्रभावित हो सकती है। किसी खास घर पर लोगों की आवाजाही बढ़ना, आगंतुकों की भीड़ जुटना और आसपास हलचल बने रहना ऐसी संभावित परेशानियां हैं।

उन्होंने जन्मदिन या अन्य अवसरों पर राजनीतिक समर्थकों की ओर से लगाए जाने वाले बड़े-बड़े बैनरों का भी जिक्र किया। उनके अनुसार, कुछ आवासीय परिसरों में ऐसे बैनर कई दिनों तक लगे रह सकते हैं और कभी-कभी लंबे समय तक भी दिखाई देते हैं।

रेड्डी ने इस संदर्भ में हैदराबाद के NCC Urban One का उदाहरण दिया। हालांकि, ये अनुभव और टिप्पणियां उनकी पोस्ट पर आधारित हैं, न कि सभी आवासीय परिसरों की स्थिति का प्रमाण।

फाइनेंशियल डिस्ट्रिक्ट से गांडीपेट तक सामने आई ऐसी चिंता

रेड्डी ने बताया कि उन्हें पहले भी ऐसा अनुभव सुनने को मिला था। उनके अनुसार, हैदराबाद के फाइनेंशियल डिस्ट्रिक्ट स्थित एक आवासीय समुदाय से गांडीपेट के दूसरे विला समुदाय में शिफ्ट हुए एक व्यक्ति ने भी इसी तरह की चिंता जाहिर की थी।

यह उदाहरण दिखाता है कि प्रीमियम घर खरीदने या बदलने के दौरान कुछ लोगों के लिए सिर्फ प्रॉपर्टी की खूबसूरती और सुविधाएं ही अहम नहीं हैं। वे यह भी देखना चाहते हैं कि वहां रहने के बाद उनकी रोजमर्रा की जिंदगी कितनी शांत और निजी रहेगी।

लग्जरी घर का मतलब सिर्फ महंगी प्रॉपर्टी नहीं

सतीश रेड्डी की पोस्ट पर सोशल मीडिया यूजर्स ने भी चर्चा की। कुछ लोगों ने माना कि घर के आसपास का माहौल, लोगों की आवाजाही और निजता किसी प्रॉपर्टी को चुनने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

दरअसल, महंगा घर खरीदने वाले कई लोगों के लिए लग्जरी का मतलब केवल बड़ा घर या शानदार सुविधाएं नहीं, बल्कि सुकून से रह पाना भी है। हैदराबाद में सामने आया यह मामला इसी बदलती सोच की ओर इशारा करता है, जहां घर खरीदने से पहले लोग सिर्फ यह नहीं पूछ रहे कि प्रॉपर्टी कितनी शानदार है, बल्कि यह भी जानना चाहते हैं कि वहां उनकी निजी जिंदगी कितनी प्रभावित हो सकती है।

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LTCG Tax: क्या अमेरिकी शेयरों की कमाई पर मिलेगा ₹1.25 लाख टैक्स छूट का फायदा? जानें क्या कहते हैं नियम

LTCG Tax on Global Stocks: बजट 2027 से पहले लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स और सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के रुख ने इक्विटी टैक्सेशन पर नई बहस छेड़ दी है। विदेशी निवेशकों की निकासी और भारतीय इक्विटी की प्रतिस्पर्धा को लेकर चिंताओं के बीच निवेशक राहत की उम्मीद कर रहे हैं।

एक बड़ा सवाल यह है कि क्या भारत में चुनिंदा इक्विटी निवेशों पर मिलने वाली ₹1.25 लाख सालाना LTCG टैक्स छूट का फायदा विदेशी शेयरों पर भी मिल सकता है। आइए जानते हैं कि विदेशी शेयरों पर कैपिटल गेन्स पर टैक्स कैसे लगता है और कौन से निवेश इसके दायरे में आते हैं।

क्या ग्लोबल शेयरों पर ₹1.25 लाख की सालाना LTCG टैक्स छूट मिलती है?

आयकर अधिनियम, 2025 की धारा 198 के तहत मिलने वाला ₹1.25 लाख का सालाना थ्रेशोल्ड सिर्फ इसलिए विदेशी शेयरों के मुनाफे पर लागू नहीं होता कि वे विदेशी एक्सचेंजों पर सूचीबद्ध हैं या लंबे समय तक रखे गए हैं।

इस प्रावधान में केवल वे लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स शामिल हैं जो योग्य इक्विटी शेयरों, इक्विटी-ओरिएंटेड म्यूचुअल फंड्स की यूनिट्स और बिजनेस ट्रस्टों की यूनिट्स से मिलते हैं, बशर्ते वे निर्धारित सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) की शर्तों को पूरा करते हों।

विदेशी शेयर आमतौर पर इन शर्तों को पूरा नहीं करते हैं। धारा 197 के तहत उनके लॉन्ग-टर्म मुनाफे पर बिना ₹1.25 लाख की छूट के 12.5 प्रतिशत की दर से टैक्स लगता है, जिसमें लागू सरचार्ज और सेस शामिल हैं।

उदाहरण के लिए, अगर किसी भारतीय निवासी को अमेरिकी शेयरों से ₹1 लाख का लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन होता है, तो यह मुनाफा सिर्फ इसलिए टैक्स-फ्री नहीं हो जाता कि यह ₹1.25 लाख से कम है। किसी अन्य राहत या एडजस्टमेंट को छोड़कर, इस पर सरचार्ज और सेस से पहले ₹12,500 का टैक्स बनेगा।

ग्लोबल शेयरों पर LTCG और STCG की गणना कैसे की जाती है?

विदेशी शेयरों पर कैपिटल गेन्स की गणना, बिक्री मूल्य में से खरीद लागत और ट्रांसफर से जुड़े योग्य खर्चों को घटाकर की जाती है। निवेशकों को इसमें विदेशी मुद्रा रूपांतरण के नियमों का भी ध्यान रखना होता है।

धारा 2(101) के तहत, विदेशी एक्सचेंजों पर सूचीबद्ध शेयर उन एसेट्स की श्रेणी में आते हैं जिन पर मान्यता प्राप्त भारतीय स्टॉक एक्सचेंजों पर सूचीबद्ध विशिष्ट प्रतिभूतियों के मुकाबले 24 महीने की होल्डिंग पीरियड की परीक्षा लागू होती है।

24 महीने या उससे कम समय के लिए रखे गए विदेशी शेयरों से होने वाले मुनाफे को शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन्स (STCG) माना जाता है और निवेशक के लागू इनकम-टर्म स्लैब दरों के अनुसार टैक्स लगाया जाता है। वहीं, 24 महीने से अधिक समय तक रखे गए शेयर बिना इंडेक्सेशन के 12.5 प्रतिशत की लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स दर के दायरे में आते हैं।

किन अन्य निवेशों को इस छूट से बाहर रखा गया है?

पीएनएएम एंड कंपनी एलएलपी (PNAM & Co. LLP) के पार्टनर मोहित गुप्ता के अनुसार, ₹1.25 लाख का थ्रेशोल्ड सभी प्रकार के लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स के लिए यूनिवर्सल छूट नहीं है। धारा 198 के दायरे से बाहर रहने वाले प्रमुख निवेश ये हैं:

रियल एस्टेट: जमीन या मकान की बिक्री से होने वाला मुनाफा।

सोना और चांदी: भौतिक कीमती धातुओं से होने वाला लाभ।

डेट-ओरिएंटेड म्यूचुअल फंड: टैक्स का तरीका विशिष्ट म्यूचुअल फंड्स के विशेष नियमों समेत लागू प्रावधानों पर निर्भर करता है।

इंटरनेशनल म्यूचुअल फंड: अगर वे विदेशी इक्विटी में निवेश करते हैं और इक्विटी-ओरिएंटेड फंड की वैधानिक परिभाषा पर खरे नहीं उतरते हैं, तो वे इसके पात्र नहीं हैं।

बॉन्ड और डिबेंचर: टैक्स का स्वरूप इंस्ट्रूमेंट और लागू नियमों के अनुसार अलग-अलग होता है।

अन्य गैर-पात्र एसेट्स: वे मुनाफे जो धारा 198 की पात्रता और STT शर्तों को पूरा नहीं करते।

निवेशकों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

निवेशकों को सबसे पहले यह जांचना चाहिए कि क्या उनके निवेश धारा 198 के तहत योग्य हैं और क्या निर्धारित STT शर्तें पूरी होती हैं।

  • ₹1.25 लाख की छूट की सीमा पात्र मुनाफे के लिए एक संयुक्त वार्षिक सीमा है, न कि प्रत्येक स्टॉक, ब्रोकर, डीमैट खाते या म्यूचुअल फंड निवेश के लिए अलग-अलग मिलने वाली छूट।
  • कैपिटल गेन्स की गणना को सही साबित करने के लिए निवेशकों को खरीद और बिक्री की पुष्टि, ब्रोकरेज स्टेटमेंट, ट्रांजैक्शन खर्च और विदेशी मुद्रा रूपांतरण के रिकॉर्ड संभाल कर रखने चाहिए।
  • निवेशक की रेसिडेंशियल स्थिति और फाइलिंग की परिस्थितियों के आधार पर विदेशी निवेशों में विदेशी संपत्ति और विदेशी आय से जुड़े अतिरिक्त खुलासे की जरूरत पड़ सकती है।
  • जिन निवेशकों ने विदेश में टैक्स चुकाया है, उन्हें अलग से यह आकलन करना चाहिए कि क्या वे लागू प्रावधानों और संधि की शर्तों के तहत विदेशी कर क्रेडिट का दावा कर सकते हैं।

मुख्य अंतर यह है कि किसी निवेश को लंबे समय तक होल्ड करने मात्र से उसका मुनाफा स्वचालित रूप से ₹1.25 लाख की छूट के योग्य नहीं हो जाता। अपनी टैक्स देनदारी की गणना करने से पहले निवेशकों को एसेट कैटेगरी और प्रासंगिक वैधानिक शर्तों की जांच जरूर करनी चाहिए।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

अगले साल कितनी होगी सैलरी हाइक? Aon सर्वे में आया ये आंकड़ा, जानिए किन सेक्टरों में होगी बंपर बढ़ोतरी

Salary Hike Projection: वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और ट्रेड रिस्क के बावजूद भारत में कर्मचारियों के लिए अच्छी खबर सामने आई है। ग्लोबल प्रोफेशनल सर्विसेज फर्म Aon plc के ‘Annual Salary Increase and Turnover Survey for India 2026-27’ के मुताबिक, अगले वित्त वर्ष में देश में औसत सैलरी हाइक 9.1% रहने का अनुमान है, जो कि पिछले साल के 9% से मामूली रूप से ज्यादा है। मजबूत घरेलू खपत और निरंतर निवेश के कारण देश में बिजनेस कॉन्फिडेंस बना हुआ है।

किन सेक्टरों में मिलेगी सबसे ज्यादा सैलरी हाइक?

सर्वे के अनुसार, सभी सेक्टरों में एक जैसी बढ़ोतरी नहीं होगी। कुछ खास सेक्टर्स टैलेंट की मांग और ग्रोथ के चलते सबसे आगे रहने वाले हैं:

NBFC: नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियां 10.1% की सबसे ऊंची सैलरी ग्रोथ के साथ सूची में सबसे आगे रहेंगी।

एनर्जी: ऊर्जा सेक्टर में वेतन वृद्धि औसतन 9.9% तक रहने की उम्मीद है।

रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर: इस क्षेत्र में कर्मचारियों को 9.8% तक की सैलरी हाइक मिल सकती है।

एट्रिशन रेट और टैलेंट की जंग

कंपनियों के बजट स्थिर होने के बावजूद कर्मचारियों के नौकरी छोड़ने का सिलसिला बढ़ा है। ओवरऑल एट्रिशन रेट बढ़कर 2026 में 18% पर पहुंच गया है, जो कि 2025 में 16.2% और 2024 में 17.1% था। इससे यह साफ होता है कि कुशल और अनुभवी टैलेंट को अपने पास रोके रखने के लिए कंपनियों के बीच मुकाबला काफी कड़ा बना हुआ है।

AI स्किल्स और अपस्किलिंग का दौर: मिल रहा है तगड़ा प्रीमियम

डे-टू-डे वर्क में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की गहरी पैठ और तेजी से बदलते ट्रेंड्स का असर सैलरी और रिक्रूटमेंट पर साफ दिख रहा है। रूटीन कामकाज में एआई प्रोडक्टिविटी टूल्स का इस्तेमाल करने वाली कंपनियां 2025 के 46.1% से बढ़कर 56% हो गई हैं। करीब 60% एंप्लॉयर अपने कर्मचारियों के अपस्किलिंग को प्राथमिकता दे रहे हैं। AI, मशीन लर्निंग और डेटा साइंस के प्रोफेशनल्स के लिए कंपनियां सामान्य से लगभग 10% अधिक पे-प्रीमियम दे रही हैं।

वेज कोड और पेरोल कॉस्ट का असर

सर्वे के मुताबिक, 65.4% एंप्लॉयर पूरी तरह से नए वेज कोड का पालन कर रहे हैं, जबकि 20.9% कंपनियां अगले छह महीनों में इसके अनुपालन की उम्मीद कर रही हैं। वैसे लगभग 42.8% कंपनियों को अंदेशा है कि इससे उनकी पेरोल लागत कम से कम 1% तक बढ़ सकती है, जिसके लिए उन्हें अपने रिवॉर्ड स्ट्रक्चर को समझदारी से री-अलाइन करना होगा।

Saif Ali Khan: सैफ अली खान ने मुंबई के अंधेरी में लीज पर दिए दो ऑफिस, किराया 22.76 लाख रुपये महीना

Saif Ali Khan: CRE Matrix द्वारा हासिल किए गए प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन दस्तावेजों के अनुसार सैफ अली खान ने मुंबई के अंधेरी कुर्ला रोड पर 5,692 वर्ग फुट (RERA कारपेट एरिया) की दो कमर्शियल यूनिट्स को ₹22.76 लाख के मासिक किराए पर दिया है।

दस्तावेजो के मुताबिक ‘लीव एंड लाइसेंस’ समझौता 29 सितंबर 2026 को रजिस्टर किया गया था। यह समझौता 10 मई 2026 से 9 मई 2031 तक, यानी पांच साल की अवधि के लिए है। यह जगह ‘दुर्वा फिनटेक प्राइवेट लिमिटेड’ को लीज पर दी गई है, जिसका प्रतिनिधित्व कंपनी के डायरेक्टर विकास मोहन सचदेवा कर रहे हैं। वे ही ‘लाइसेंसी’ (लाइसेंस लेने वाले) हैं। वहीं खान ‘लाइसेंसर’ (लाइसेंस देने वाले) हैं, जो अपने अधिकृत प्रतिनिधि (अटॉर्नी) के जरिए यह समझौता कर रहे हैं।

प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन दस्तावेजों के अनुसार लीज पर ली गई जगह अंधेरी ईस्ट के चकाला में स्थित ‘कनाकिया वॉल स्ट्रीट’ नामक इमारत की ऊपरी मंजिलों पर मौजूद कमर्शियल यूनिट्स हैं। समझौते के तहत कुल 5,692 वर्ग फुट जगह के लिए ₹22,76,800 का मासिक किराया तय किया गया है, जो RERA कारपेट एरिया के हिसाब से लगभग ₹400 प्रति वर्ग फुट प्रति माह बैठता है।

इस समझौते में ₹2.36 करोड़ की सिक्योरिटी डिपॉजिट शामिल है, जो शुरुआती मासिक किराए के 10 महीने से भी अधिक के बराबर है। किराएदार को 10 मई 2026 से 9 जुलाई 2026 तक, यानी दो महीने के लिए बिना किराए की अवधि दी गई है। ताकि वे 10 जुलाई 2026 (किराया शुरू होने की तारीख) से पहले अपनी जरूरत के हिसाब से जगह तैयार (फिट-आउट) कर सकें। पांच साल की लीज अवधि के दौरान, मासिक किराए में हर साल 5% की बढ़ोतरी होगी।

समझौते के अनुसार 60 महीने की अवधि में कुल किराया लगभग ₹14 करोड़ से अधिक होगा, जिसमें लागू वस्तु एवं सेवा कर (GST) शामिल नहीं है। पंजीकरण दस्तावेजों से यह भी पता चलता है कि खान ने नवंबर 2025 में ये दो कमर्शियल यूनिट्स खरीदीं। इंडेक्स-II के रिकॉर्ड बताते हैं कि एक यूनिट ₹30 करोड़ से अधिक में खरीदी गई थी, जिससे कुल खरीद मूल्य ₹30.75 करोड़ हो गया। CRE मैट्रिक्स के अनुसार, ये दोनों खरीद 18 नवंबर 2025 को ‘एपिकोर फार्मास्यूटिकल्स प्राइवेट लिमिटेड’ से पंजीकृत कराई गई थीं।

जिस इलाके में सैफ अली खान के ये ऑफिस यूनिट्स हैं, वहीं हाल ही में एलन मस्क के सैटेलाइट इंटरनेट वेंचर ‘स्टारलिंक सैटेलाइट कम्युनिकेशंस प्राइवेट लिमिटेड’ ने मुंबई के चांदीवली इलाके में 1,294 वर्ग फुट की ऑफिस जगह पांच साल के लिए लीज पर ली है, जिसका कुल किराया ₹2.33 करोड़ है।

सैफ अली खान का रियल एस्टेट पोर्टफोलियो

सैफ अली खान मुंबई के पॉश इलाके बांद्रा वेस्ट में एक आलीशान अपार्टमेंट में रहते हैं। लगभग एक दशक पहले ‘सतगुरु शरण’ बिल्डिंग में खरीदे गए 24 करोड़ रुपये के फ्लैट के अलावा उनके पास मुंबई में कुछ और प्रॉपर्टी भी हैं। इंडेक्सटैप.कॉम (IndexTap.com) द्वारा हासिल किए गए ‘प्रॉपर्टी इंडेक्स-2’ दस्तावेजों के अनुसार, खान का 6,500 वर्ग फुट से बड़ा यह अपार्टमेंट अप्रैल 2012 में रियल एस्टेट डेवलपर ‘सतगुरु बिल्डर्स’ से 23.50 करोड़ रुपये में खरीदा गया था।

इस अपार्टमेंट में जाने से पहले सैफ अली खान और करीना बांद्रा के ‘फॉर्च्यून हाइट्स’ अपार्टमेंट कॉम्प्लेक्स में रहते थे। रिपोर्ट्स के अनुसार 2013 में इस चार मंजिला प्रॉपर्टी की कीमत ₹48 करोड़ थी, जिसमें 3BHK यूनिट्स थीं। जैपकी.कॉम (Zapkey.com) द्वारा हासिल किए गए प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन दस्तावेजों के मुताबिक अप्रैल 2016 में सैफ अली खान ने मुंबई के बांद्रा स्थित ‘फॉर्च्यून हाइट्स’ में 950 वर्ग फुट से बड़ा एक अपार्टमेंट ₹7 करोड़ में खरीदा था।

Parag Parikh MF: पराग पारिख फ्लेक्सी कैप फंड ने कैश होल्डिंग घटाई, इन दो कंपनियों पर लगाया बड़ा दांव

Parag Parikh MF: पराग पारिख फ्लेक्सी कैप फंड ने अपने पास रखी नकदी में बड़ी कटौती की है। एक साल पहले फंड की कैश होल्डिंग करीब 24% थी। अब यह घटकर 9.7% रह गई है। शेयरों की कीमतों में गिरावट के बाद फंड को निवेश के नए मौके दिख रहे हैं। इसलिए उसने बाजार में पैसा लगाना बढ़ा दिया है।

PPFAS Mutual Fund के को-फंड मैनेजर (इक्विटी) और हेड ऑफ रिसर्च रौनक ओंकार ने CNBC-TV18 को एक इंटरव्यू में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि शेयरों की वैल्यूएशन अब पहले के मुकाबले आकर्षक हो रही है। फंड को कुछ कंपनियों के शेयर कम कीमत पर मिल रहे हैं। इसलिए उसने इन कंपनियों में अच्छी-खासी रकम लगाई है।

ओंकार ने बताया कि फंड ऐसी कंपनियों पर भी नजर रख रहा है, जिनके कारोबार से लगातार कैश आता है। फिलहाल बाजार का ज्यादा ध्यान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा सेंटर और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों पर है। इस वजह से कई दूसरी कंपनियों पर निवेशकों का ध्यान कम गया है।

उनके मुताबिक, ऐसी कुछ कंपनियों के शेयर उनकी कमाई और कैश फ्लो के मुकाबले कम वैल्यूएशन पर मिल रहे हैं। इससे मजबूत कारोबार वाली कंपनियों में निवेश का मौका बन रहा है।

DLF में PPFAS क्यों लगा रहा है पैसा?

PPFAS Mutual Fund ने अपने पोर्टफोलियो में रियल एस्टेट कंपनी DLF के शेयर भी शामिल किए हैं। ओंकार ने बताया कि DLF के पास काफी बड़ी जमीन है। कंपनी के पास प्रोजेक्ट पूरे करने की अच्छी क्षमता भी है। इसके अलावा, उसने अपना कर्ज कम किया है। इससे कंपनी की वित्तीय स्थिति मजबूत हुई है।

ओंकार के मुताबिक, अब DLF में निवेश का मौका इस बात में है कि कंपनी अपनी जमीन का इस्तेमाल किस तरह करती है। वह नए प्रोजेक्ट बनाकर कारोबार बढ़ा सकती है। साथ ही, उसके कमर्शियल प्रॉपर्टी से किराये के रूप में लगातार कैश भी आता है।

उन्होंने यह भी कहा कि DLF की बैलेंस शीट पहले से मजबूत है। कर्ज कम होने के कारण कंपनी के पास विस्तार के लिए ज्यादा गुंजाइश है। इससे वह उत्तर भारत के अपने पारंपरिक बाजार से आगे दूसरे क्षेत्रों में भी कारोबार बढ़ा सकती है।

CMS Info Systems पर क्यों है PPFAS की नजर?

PPFAS Mutual Fund ने CMS Info Systems में भी निवेश किया है। इस कंपनी के कारोबार का एक बड़ा हिस्सा कैश से जुड़ा है। ओंकार के मुताबिक, देश की अर्थव्यवस्था में आज भी नकदी का इस्तेमाल हो रहा है। इसलिए बैंकों और दूसरे कैश एक्सेस पॉइंट्स के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत बनी हुई है।

उन्होंने कहा कि देश में चलन में मौजूद नकदी का स्तर नोटबंदी के समय के मुकाबले ज्यादा है। अर्थव्यवस्था में कई तरह के लेनदेन अब भी कैश से होते हैं। ऐसे में बैंकों और दूसरी जगहों पर नकदी पहुंचाने और उसे संभालने के लिए भरोसेमंद ऑपरेटर जरूरी हैं।

CMS Info Systems इसी तरह के काम से जुड़ी कंपनी है। वह कैश लेनदेन के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर संभालती है। हालांकि, ओंकार ने यह भी माना कि कंपनी के मुख्य कारोबार में ऑर्गेनिक ग्रोथ बहुत मजबूत नहीं है। इसी वजह से उसके शेयर की वैल्यूएशन भी ज्यादा ऊंची नहीं है।

इसके बावजूद कंपनी का कैश फ्लो मजबूत है। यानी कारोबार से उसके पास लगातार पैसा आता है। कंपनी अपने मौजूदा कारोबार से जुड़े दूसरे क्षेत्रों में भी विस्तार के मौके तलाश रही है।

प्राइवेट बैंकों में 20% निवेश से संतुष्ट है PPFAS

PPFAS Mutual Fund के पोर्टफोलियो का करीब 20% हिस्सा प्राइवेट सेक्टर के बैंकों में लगा है। इसमें HDFC Bank, ICICI Bank, Axis Bank और Kotak Mahindra Bank जैसे शेयर शामिल हैं।

ओंकार ने कहा कि फंड बैंकिंग शेयरों में अपने मौजूदा निवेश से संतुष्ट है। उसे इस सेक्टर में लगातार अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की जरूरत नहीं दिखती। उन्होंने कहा, ‘मुझे नहीं लगता कि इसमें इससे आगे निवेश बढ़ाते रहना सही होगा। आखिर यह बैंकिंग फंड नहीं है। हमने अपने पोर्टफोलियो में बैंकिंग सेक्टर को एक तय हिस्सेदारी दी है।’

ओंकार ने फंड की मौजूदा पसंद के हिसाब से बैंकों की रैंकिंग भी बताई। इसमें HDFC Bank पहले नंबर पर है। इसके बाद ICICI Bank, Axis Bank और Kotak Mahindra Bank का स्थान है।

हालांकि, यह रैंकिंग हमेशा एक जैसी रहेगी, ऐसा नहीं है। ओंकार के मुताबिक, समय के साथ इन बैंकों में निवेश का अनुपात बदल सकता है। यह बाजार की चाल, शेयरों के प्रदर्शन और संबंधित बैंकों के कारोबार की स्थिति पर निर्भर करेगा।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Vedanta Share Price: डिविडेंड के ऐलान के बाद माइनिंग कंपनी का शेयर 4% तक चढ़ा, एक साल में 50% मजबूत

माइनिंग कंपनी वेदांता लिमिटेड के शेयरों में 9 अक्टूबर को तेजी है। शेयर BSE पर दिन में पिछली क्लोजिंग से 4 प्रतिशत तक चढ़ा और 263.25 रुपये के हाई तक गया। कंपनी का मार्केट कैप बढ़कर 1 लाख करोड़ रुपये के पार चला गया है। कंपनी की ओर से डिविडेंड की घोषणा के बाद शेयर खरीद बढ़ी है। एक दिन पहले अनिल अग्रवाल की कंपनी के बोर्ड ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए पहले अंतरिम डिविडेंड को मंजूरी दी थी। मीटिंग में 5 रुपये प्रति शेयर के अमाउंट पर मोहर लगाई गई।

इस डिविडेंड के लिए रिकॉर्ड डेट पहले ही 14 अक्टूबर 2026 तय कर दी गई थी। इस तारीख तक जिन लोगों के नाम शेयरों के लाभार्थी मालिकों के तौर पर रजिस्टर ऑफ मेंबर्स ऑफ द कंपनी या डिपॉजिटरीज के रिकॉर्ड्स में दर्ज होंगे, वे डिविडेंड के हकदार होंगे। शेयर की फेस वैल्यू 1 रुपये है। शेयर में 8 अक्टूबर को 3 प्रतिशत की गिरावट आई थी।

Vedanta का शेयर 3 साल में 230 प्रतिशत मजबूत

वेदांता के शेयर का BSE पर 52 सप्ताह का एडजस्टेड हाई 360.70 रुपये और एडजस्टेड लो 168.30 रुपये है। शेयर एक साल में 50 प्रतिशत चढ़ा है। साल 2026 में अब तक 20 प्रतिशत मजबूत हुआ है। 3 साल में कीमत 230 प्रतिशत की बढ़त देख चुकी है। कंपनी में जून 2026 के आखिर तक प्रमोटर्स के पास 54.72 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। ​रिटेल इनवेस्टर्स की संख्या 25.4 लाख थी। इन इनवेस्टर्स के पास जून 2026 के आखिर तक कंपनी की 13.69 प्रतिशत हिस्सेदारी थी।

वेदांता का डीमर्जर हो चुका है। इससे अलग होकर 4 कंपनियों- वेदांता एल्युमीनियम मेटल लिमिटेड, वेदांता पावर लिमिटेड, वेदांता आयरन एंड स्टील लिमिटेड और वेदांता ऑयल एंड गैस लिमिटेड के शेयर अलग से लिस्ट हो चुके हैं। बेस मेटल कारोबार अभी भी वेदांता लिमिटेड के तहत ही है। कंपनी रियल एस्टेट बिजनेस का भी डीमर्जर करने वाली है।

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जून तिमाही में Vedanta का मुनाफा 72 प्रतिशत बढ़ा

वेदांता लिमिटेड का अप्रैल-जून 2026 तिमाही में कंसोलिडेटेड बेसिस पर शुद्ध मुनाफा (कंपनी के मालिकों के लिए) 5473 करोड़ रुपये रहा। यह एक साल पहले के मुनाफे से 72 प्रतिशत ज्यादा है। ऑपरेशंस से कंसोलिडेटेड रेवेन्यू सालाना आधार पर 53.6 प्रतिशत बढ़कर 24205 करोड़ रुपये हो गया। EBITDA सालाना आधार पर 98 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ जून 2026 तिमाही में 8,469 करोड़ रुपये रहा। EBITDA मार्जिन 985 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी के साथ 57 प्रतिशत रहा।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Repo Rate में बढ़ोतरी पर Nifty Bank में 500 प्वाइंट्स की रिकवरी, इस कारण ग्रीन

Nifty Bank jumps after Repo Rate Hike: केंद्रीय बैंक RBI ने रेपो रेट में उम्मीद के मुताबिक ही 25 बेसिस प्वाइंट्स यानी 0.25% पर्सेंटेज प्वाइंट्स की बढ़ोतरी की तो बैंकिंग स्टॉक चमक उठे। आज 7 अक्टूबर को रेपो रेट में बढ़ोतरी पर बैंक निफ्टी दिन के निचले स्तर से 500 प्वाइंट्स से अधिक रिकवर हुए। आरबीआई ने अपने नीतिगत रुझान को बदलकर कैलिब्रेटेड टाइटनिंग यानी सोच-समझकर सख्ती कर दिया है। रेपो रेट को आरबीआई ने 5.25% से बढ़ाकर 5.50% कर दिया है तो वित्त वर्ष 2027 की जीडीपी ग्रोथ के अनुमान को भी बढ़ाया है।

Repo Rate में बढ़ोतरी का मार्केट पर सेक्टरवाइज क्या असर

बैंक निफ्टी फिलहाल 10:28 AM पर 0.17% की बढ़त के साथ 55,222.20 पर है। शुरुआती कारोबार में यह 492.20 प्वाइंट्स टूटकर 54,636.20 तक आ गया था। रेपो रेट हाइक के बाद इसने तेजी से रिकवरी की और ग्रीन जोन में आ गया। वहीं दूसरी तरफ रेपो रेट में बढ़ोतरी से ऑटोमोबाइल्स और रियल एस्टेट सेक्टर के शेयरों पर दबाव आ गया।

बैंकों पर ब्याज दरें बढ़ने का असर इस बात पर निर्भर करेगा कि लोन की दरें और जमा पर लागत कितनी तेजी से एडजस्ट होती हैं, और साथ ही क्रेडिट ग्रोथ की रफ्तार क्या रहती है। ब्याज दरें बढ़ने पर बैंक तुरंत एक्सटर्नल बेंचमार्क लेंडिंग रेट (EBLR) बढ़ा देते हैं। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा का कहना है कि नियर टर्म में ब्याज दरों में कटौती की कोई संभावना नहीं है। इससे संकेत मिला कि आने वाले नीतिगत बैठक में या तो इसे बढ़ाने का फैसला होगा या फिर इसे स्थिर रखा जाएगा।

क्या हुआ RBI MPC मीटिंग में

आरबीआई ने फरवरी 2023 के बाद से पहले एकमत होकर रेपो रेट में बढ़ोतरी का फैसला किया। हालांकि रुख को लेकर अलग-अलग राय दिखी। कमेटी ने अपना रुख न्यूट्रल से कैलिब्रेटेड टाइटनिंग किया है, जिसके पक्ष में चार तो विरोध में दो सदस्यों ने वोट किया। साथ ही आरबीआई गवर्नर ने आने वाली बैठकों में ब्याज दरों में बढ़ोतरी या इसकी स्थिरता के संकेत दिए।

आरबीआई को उम्मीद है कि भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनी रहेगी, लेकिन महंगाई का खतरा बढ़ गया है। आरबीआई गवर्नर के मुताबिक दूसरी तिमाही में आर्थिक गतिविधियों में तेजी बनी रहेगी लेकिन पहली तिमाही की तुलना में रफ्तार धीमी होगी।

आरबीआई ने वित्त वर्ष 2027 के लिए जीडीपी ग्रोथ के अनुमान को पहले के 6.7% से बढ़ाकर 7.1% कर दिया। दूसरी तिमाही (Q2) के लिए ग्रोथ का अनुमान 6.4% से बढ़ाकर 7.2% और तीसरी तिमाही (Q3) के लिए 6.5% से बढ़ाकर 6.9% कर दिया तो चौथी तिमाही (Q4) के लिए अनुमान 6.8% पर ही बरकरार रखा। हालांकि अगले वित्त वर्ष 2028 की पहली तिमाही के ग्रोथ अनुमान को 7.3% से घटाकर 7.1% कर दिया है।

महंगाई को लेकर आरबीआई ने कमजोर मॉनसून, अल-नीनो की स्थिति और तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव से पैदा होने वाले सप्लाई-साइड रिस्क की तरफ इशारा किया। आरबीआई ने वित्त वर्ष 2027 के लिए खुदरा महंगाई यानी CPI के अनुमान को 5% से बढ़ाकर 5.2% कर दिया। दूसरी तिमाही के अनुमान को 4.7% से बढ़ाकर 4.9%, तीसरी तिमाही के लिए 5.9% से 6% और चौथी तिमाही के लिए 5.5% से 5.7% कर दिया। वित्त वर्ष 2028 की पहली तिमाही के लिए भी अनुमान 5.3% से बढ़ाकर 5.6% कर दिया गया है।

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RBI ने 25 बीपीएस बढ़ाया रेपो रेट

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।