Investment Mantra : एक्सिस निफ्टी एनर्जी इंडेक्स फंड दे रहा एनर्जी कंपनियों में निवेश का सीधा मौका, जानिए क्या है खासियत

Investment Mantra : एनर्जी और सोना-चांदी दोनों इस वक्त बाजार के फोकस में हैं। एक तरफ जहां क्रूड में तेज उतार-चढ़ाव से एनर्जी सेक्टर सीधे रडार पर है और सोने-चांदी करेक्शन के बाद बुलियन सभी को लुभा रहा है। लेकिन क्या अभी एनर्जी और सोने-चांदी में निवेश का मौका है? यहां हम आपकी यही मुश्किल दूर करने की कोशिश करेंगे। लेकिन पहले हम आपको बता दें कि बाजार में इन दिनों Axis Nifty Energy Index Fund का NFO खुला हुआ है। क्या इसमें निवेश करके एनर्जी सेक्टर में एक्सपोजर बनाना चाहिए? इन्हीं सब बातों पर चर्चा करने के लिए हमारे साथ हैं मनीफ्रंट (Moneyfront) के CEO और को-फाउंडर मोहित गर्ग।

आइए पहले जान लेते हैं निफ्टी एनर्जी इंडेक्स के बारे में

निफ्टी एनर्जी इंडेक्स में एक्सपोजर की बात करें तो इसमें ऑयल एंड गैस, पावर जेनरेशन, ट्रांसमिशन एंड डिस्ट्रीब्यूशन, रिन्यूएबल एनर्जी, एनर्जी इक्विपमेंट और एनर्जी से जुड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल है।

निफ्टी एनर्जी इंडेक्स की खासियत यह है कि इसमें 500 में से अधिकतम 40 शेयरों पर फोकस है। किसी भी एक शेयर का वेटेज 10% से ज्यादा नहीं है। वहीं, किसी एक सेक्टर का वेटेज 25% से ज्यादा नहीं है। साल में दो बार मार्च और सितंबर में रीकंस्ट्रक्शन होता है।

निफ्टी एनर्जी इंडेक्स:टॉप 10 होल्डिंग्स

इसकी कोल इंडिया में 10%, रिलायंस इंडस्ट्रीज में 9.9%, ONGC में 9.5%, NTPC में 5.9%, GAIL में 4.9%, पावर ग्रिड में 4.6%, सुजलॉन एनर्जी में 4.2%, CG पावर में 3.9%, GE वर्नोवा में 3.6% और BHEL में 3.6% होल्डिंग है।

निफ्टी एनर्जी इंडेक्स: इन सेक्टर्स में निवेश

हेवी इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट में 25.5%, रिफाइनिंग में 15%, ऑयल एक्सप्लोरेशन में 11.8%, पावर जेनरेशन में 11.8% और कोल में 10% निवेश है।

निफ्टी एनर्जी इंडेक्स: निवेश कटेगरी

इसका लार्जकैप 72%, मिडकैप में 23% और स्मॉलकैप में 6% निवेश है।

निफ्टी एनर्जी में रिटर्न जोरदार

निफ्टी एनर्जी ने 1 साल में 10.1% रिटर्न दिया है। जबकि, निफ्टी ने इसी अवधि में 1.7 फीसदी रिटर्न दिया है। इसने तीन साल में 18.8% रिटर्न दिया है। इसी अवधि में निफ्टी ने 12.9 फीसदी रिटर्न दिया है। 5 साल में इसने 16.7% और निफ्टी ने 12.4% रिटर्न दिया है। 5 साल में इसने 18.7% और निफ्टी ने 13.9% रिटर्न दिया है। 25 साल में इसने 17.8% और निफ्टी ने 16.5% रिटर्न दिया है।

एक्सिस निफ्टी एनर्जी इंडेक्स फंड को जाने

एक्सिस निफ्टी एनर्जी इंडेक्स फंड एक इक्विटी इंडेक्स फंड है। इसका बेंचमार्क निफ्टी एनर्जी TRI है। इसका NFO खुला 7 अगस्त को खुला है जो 21 अगस्त को बंद होगा। इसमें न्यूनतम 100 रुपए का निवेश किया जा सकता है। इसका NFO NAV 10 रुपए है। इसमें रिस्क काफी हाई है। इस फंड मैनेजर्स नंदिक मलिक और रोहित गौतम हैं। एक्सिस निफ्टी एनर्जी इंडेक्स फंड का एक्जिट लोड 15 दिन के भीतर 0.25% और 15 दिन के बाद निल है।

एक्सिस निफ्टी एनर्जी इंडेक्स फंड: एनर्जी में बड़ा मौका

अगले दशक में भारत में 580+ GW पावर जेनरेशन का अनुमान है। इसमें रिन्यूएबल एनर्जी की बड़ी हिस्सेदारी होगी। अगले दशक में ट्रांसमिशन,स्टोरेज,नेचुरल गैस इंफ्रा में निवेश बढ़ेगा। अगले दशक में ग्रिड मॉडर्नाइजेशन में भी निवेश बढ़ेगा।

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

 

Market Outlook : भारतीय इक्विटी इंडेक्स मामूली गिरावट के साथ हुए बंद, जानिए 17 अगस्त को कैसी रह सकती है बाजार की चाल

SIP vs Lumpsum: ₹2000 की SIP या ₹2 लाख का लंपसम? आपके बच्चे के लिए कौन-सा निवेश बेस्ट रहेगा, पूरा कैलकुलेशन समझिए

SIP vs Lumpsum: बच्चा जब छोटा होता है, तब उसकी पढ़ाई, कॉलेज या करियर की चिंता दूर की बात लगती है। लेकिन समय बहुत तेजी से निकलता है। आज जो बच्चा गोद में है, वही 15-20 साल बाद इंजीनियरिंग, मेडिकल, MBA या विदेश में पढ़ाई का सपना देख सकता है। ऐसे में अगर आपने समय रहते निवेश शुरू नहीं किया, तो एक साथ बड़ी रकम जुटाना आसान नहीं होगा।

यहीं से एक सवाल शुरू होता है। अगर आपके पास आज ₹2 लाख हैं, तो क्या उन्हें एक साथ निवेश कर देना चाहिए? या हर महीने ₹2,000 की SIP शुरू करना ज्यादा समझदारी होगी? दोनों के अपने फायदे हैं। आइए आसान भाषा और कैलकुलेशन से समझते हैं।

SIP और लंपसम में क्या अंतर है?

SIP यानी सिस्टमैटिक इनवेस्टमेंट प्लान में आप हर महीने एक तय रकम निवेश करते हैं। इससे निवेश की आदत बनती है और बाजार के उतार-चढ़ाव का असर भी कुछ हद तक संतुलित हो जाता है।

वहीं लंपसम में पूरी रकम एक साथ निवेश की जाती है। अगर निवेश लंबी अवधि का हो, तो पूरी रकम पहले दिन से ही कंपाउंडिंग का फायदा उठाने लगती है।

इसे उदाहरण से समझिए

अब मान लीजिए आपका बच्चा अभी छोटा है और आप उसके भविष्य के लिए निवेश शुरू करना चाहते हैं। दो विकल्प हैं। हर महीने ₹2,000 की SIP करें या आज ही ₹2 लाख का लंपसम निवेश कर दें। मान लेते हैं कि दोनों निवेशों पर औसतन 12% सालाना रिटर्न मिलता है।

15, 20 और 25 साल में कितना बनेगा पैसा?

निवेश का तरीका15 साल20 साल25 साल
₹2,000 की SIP का अनुमानित फंड₹10.09 लाख₹19.98 लाख₹37.95 लाख
आपका कुल SIP निवेश₹3.60 लाख₹4.80 लाख₹6.00 लाख
₹2 लाख का लंपसम निवेश₹10.95 लाख₹19.29 लाख₹34.00 लाख
लंपसम में अनुमानित मुनाफा₹8.95 लाख₹17.29 लाख₹32.00 लाख

नोट: यह कैलकुलेशन 12% सालाना अनुमानित रिटर्न पर आधारित है। म्यूचुअल फंड बाजार से जुड़े होते हैं। इसलिए वास्तविक रिटर्न इससे कम या ज्यादा हो सकता है।

दोनों रिटर्न में अंतर क्यों दिखता है?

15 साल में ₹2 लाख का लंपसम, ₹2,000 की SIP से थोड़ा आगे दिखता है। लेकिन जैसे-जैसे समय बढ़ता है, SIP का फंड बड़ा होता जाता है। इसकी वजह यह नहीं है कि SIP का रिटर्न ज्यादा है, बल्कि इसलिए क्योंकि SIP में हर महीने नया पैसा भी जुड़ता रहता है।

उदाहरण के लिए, 25 साल में SIP के जरिए आपने कुल ₹6 लाख निवेश किए हैं। वहीं, लंपसम में सिर्फ ₹2 लाख लगाए हैं। इसलिए दोनों की तुलना करते समय सिर्फ अंतिम रकम नहीं, बल्कि कुल निवेश को भी ध्यान में रखना चाहिए।

अगर आज ₹2 लाख पड़े हैं…

अब मान लीजिए आपको बोनस मिला है। कोई जमीन बिकी है। या FD मैच्योर हुई है। अगर इस पैसे की अगले 20-25 साल तक जरूरत नहीं है, तो उसे बैंक खाते में पड़ा रहने देने से बेहतर है कि लंबी अवधि के लिए निवेश कर दिया जाए। इससे पूरा पैसा पहले दिन से ही आपके लिए काम करना शुरू कर देगा।

अगर हर महीने बचत करना आसान है…

हर परिवार के पास ₹2 लाख एक साथ नहीं होते। लेकिन ₹2,000 महीने निकालना कई लोगों के लिए मुमकिन होता है। ऐसे में SIP बेहतर विकल्प है। इससे घर का बजट भी नहीं बिगड़ता और धीरे-धीरे अच्छा फंड तैयार हो जाता है।

अगर दोनों कर सकते हैं तो?

मान लीजिए आपके पास ₹2 लाख भी हैं और हर महीने ₹2,000 बचाने की क्षमता भी है। ऐसे में दोनों का फायदा उठाया जा सकता है।

आज ₹2 लाख निवेश कर दीजिए। फिर अगले महीने से ₹2,000 की SIP भी शुरू कर दीजिए। इससे एक तरफ बड़ी रकम लंबे समय तक कंपाउंड होगी और दूसरी तरफ हर महीने नया निवेश भी जुड़ता रहेगा।

सबसे बड़ा रोल समय निभाता है

अक्सर लोग सही म्यूचुअल फंड ढूंढने में महीनों लगा देते हैं, लेकिन निवेश शुरू नहीं करते। जबकि सच यह है कि अच्छे फंड से भी ज्यादा ताकत समय में होती है।

अगर बच्चा अभी 3 साल का है और आपने आज निवेश शुरू कर दिया, तो आपके पास 15 से 20 साल का समय है। यही समय छोटी-छोटी रकम को बड़े फंड में बदल देता है।

इसलिए अगर आज आप सोच रहे हैं कि अगले साल से शुरू करेंगे, तो शायद वही सबसे महंगी गलती होगी। चाहे शुरुआत ₹2,000 महीने से करें या ₹2 लाख एक साथ लगाएं, सबसे जरूरी बात यह है कि शुरुआत जितनी जल्दी होगी, भविष्य उतना ही आसान हो सकता है।

Silver Price Outlook: चांदी इस साल ₹65000 सस्ती हुई, एक्सपर्ट्स से जानिए अब दाम घटेंगे या बढ़ेंगे

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

Market Mantra : AI से जुड़ी IT कंपनियों के वैल्युएशन महंगे,कैपिटल मार्केट शेयरों में आगे दिखेगी अच्छी तेजी – कैलाश कुलकर्णी

Market Mantra : इस समय बाजार एक दोराहे पर खड़ा है। कच्चा तेल है जिसने बाजार की सांस फूला रखी है। वहीं अबतक आए नतीजे हैं मिलेजुले होने के बाद कमेंट्री के फ्रंट पर अच्छे हैं। IT,बैंक और कंज्यूमर कंपनियां सब आगे की अच्छी राह की बात कर रही हैं। ऐसे में निवेशक कंफ्यूज है कि निवेश को लेकर आगे क्या रणनीति बनाएं,अभी निवेश करें या कुछ महीने पहले देख लें कि हालात क्या करवट लेते हैं। इसी कंफ्यूजन को दूर करने के लिए आज हमारे साथ हैं। HSBC MF के CEO कैलाश कुलकर्णी (Kailash Kulkarni)।

कैलाश कुलकर्णी की राय

कैलाश कुलकर्णी का कहना है कि जियोपॉलिटिकल हालात के चलते बाजार में काफी ज्यादा अनिश्चितता है। पिछले कुछ सालों में भारतीय निवेशक मैच्योर हुए हैं। इसके चलते भारतीय निवेशकों की तरफ से पैनिक बिकवाली नहीं हुई है। निवेशकों अभी वेट एंड वॉच मोड में ही रहना चाहिए। भारतीय इकोनॉमी के हालात काफी बेहतर है।

डाइवर्सिफाइड इंडेक्स में बना पैसा

उन्होंने आगे कहा कि निवेशकों का पैसा डाइवर्सिफाइड इंडेक्स में बना है। निवेशक लार्जकैप की बजाय मिडकैप और स्मॉलकैप में पैसे डाल रहे हैं। फ्लैक्सीकैप कैटेगरी में काफी निवेश आ रहा है। मिडकैप की तरफ निवेशकों का रुझान बढ़ा है। इनमें रिटर्न भी अच्छे मिले हैं।

मैन्युफैक्चरिंग और डिजिटाइजेशन थीम ज्यादा चल रही है। कंज्यूमर डिस्क्रेशनरी थीम भी अच्छी चल रही है। फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) के चलते आगे एक्सपोर्ट सेक्टर भी चल सकता है। PLI और चीन+1 के चलते मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को फायदा होगा। देश के 8-10 राज्यों में मैन्युफैक्चरिंग हो रही है।

AI से जुड़ी IT कंपनियों के वैल्युएशन ज्यादा

कैलाश कुलकर्णी ने आगे कहा कि AI से जुड़ी IT कंपनियों के वैल्युएशन महंगे दिख रहे हैं। IT कंपनियों पर अंडरवेट नजरिया है। BFSI फंड में कैपिटल मार्केट शेयरों पर फोकस है। कैपिटल मार्केट शेयरों में आगे अच्छी तेजी दिखेगी। फार्मा शेयरों पर वेट एंड वॉच का नजरिया है।

Market Mantra : कैलाश कुलकर्णी के मुताबिक मैन्युफैक्चरिंग और डिजिटाइजेशन थीम ज्यादा चल रही है। कंज्यूमर डिस्क्रेशनरी थीम भी अच्छी चल रही है। फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के चलते आगे एक्सपोर्ट सेक्टर भी चल सकता है

 

Top Stock Picks : बाजार में वेट एंड वॉच मोड में रहें, किसी गिरावट में इन फार्मा और डिफेंस शेयरों में करें खरीदारी

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Market Mantra : 3-6 महीने के नजरिए से निवेश करना रहेगा अच्छा, US-ईरान युद्ध को लेकर ज्यादा टेंशन नहीं

Market Mantra : बाजार के सामने संकट के बादल फिर खड़े हो गए हैं। एक तरफ जहां अमेरिका-ईरान फिर लड़ पड़े हैं तो वहीं क्रूड की बिगड़ी चाल ने बाजार में फिर डर का माहौल बना दिया है। इसके अलावा भी बाजार के सामने कई और बड़ी चुनौतियां अब भी खड़ी हैं। कमजोर मॉनसून और पहली तिमाही के नतीजों पर बाजार नजर बनाए बैठा है। इन सभी मुद्दों से अब आगे बाजार की दिशा तय होनी है। ऐसे में निवेशक कंफ्यूज है कि निवेश को लेकर क्या रणनीति बनाएं,अभी निवेश करें या कुछ महीने पहले देख लें कि हालात क्या करवट लेते हैं। इसी कंफ्यूजन को दूर करने के लिए आज हमारे साथ हैं खास मेहमान LIC म्यूचुअल फंड (LIC Mutual Fund) के CIO इक्विटी सुधांशु अस्थाना

US-ईरान युद्ध को लेकर ज्यादा टेंशन नहीं

बाजार की चाल पर बात करते हुए सुधांशु अस्थाना ने कहा कि US-ईरान युद्ध को लेकर ज्यादा टेंशन नहीं है। US-ईरान फिर शांति की तरफ बढ़ेंगे। सरकार के कदमों से इकोनॉमी में डिमांड बढ़ी है। प्राइवेट कैपेक्स और क्रेडिट ग्रोथ में भी सुधार देखने को मिल रहा है। कॉर्पोरेट क्रेडिट ग्रोथ में 15% का उछाल आया है। देश में डॉलर का फ्लो आगे सुधरेगा। US-ईरान युद्ध आगे बढ़ा तो FY28 नतीजों पर असर दिखेगा। कच्चा तेल 85-90 डॉलर प्रति बैरल पर रहे तो इकोनॉमी पर असर नहीं होगा।

3-6 महीने के नजरिए से निवेश करना अच्छा

उन्होंने आगे कहा कि 3-6 महीने के नजरिए से निवेश करना अच्छा रहेगा। कंपनियों के मुताबिक युद्ध का असर अभी डिमांड पर नहीं दिखा है। दिसंबर नतीजों के बाद अर्निंग अपग्रेड संभव है। अगले साल से 8वें वेतन आयोग का पैसा भी आने लगेगा। 8वें वेतन आयोग के पैसे से डिमांड को बूस्ट मिलेगा। कच्चे माल की कीमतें बढ़ने का असर Q1 नतीजों पर दिखेगा।नतीजों के साथ कंपनियों की कमेंट्री और आउटलुक पर बाजार की नजर रहेगी।

बैंकिंग और फाइनेंशियल शेयरों में एक्सपोजर बढ़ा

सुधांशु अस्थाना ने बताया कि उन्होंनें बैंकिंग और फाइनेंशियल शेयरों में एक्सपोजर बढ़ाया है। प्राइवेट बैंक,NBFC और कैपिटल मार्केट शेयरों पर फोकस बढ़ा है। हेल्थकेयर शेयरों में भी एक्सपोजर बढ़ाया है। प्रीसिजन इंजीनियरिंग और डाटा सेंटर पर भी फोकस बढ़ा है। दिसंबर नतीजों के बाद अर्निंग अपग्रेड संभव है।

कम रिस्क चाहते हैं तो मल्टिकैप फंड में डालें पैसा

उन्होंने आगे कहा कि अगर आप कम रिस्क चाहते हैं तो मल्टिकैप फंड में पैसा डालें। फ्लैक्सीकैप फंड में भी निवेश किया जा सकता है। पिछले कुछ महीनों में मिडकैप और स्मॉलकैप में निवेश बढ़ा है। मिडकैप और स्मॉलकैप आगे अच्छा कर सकते हैं।

 

MF Investment : वाइजइन्वेस्ट के CEO हेमंत रुस्तगी से जाने बाजार में निवेश के मंत्र, क्या हैं स्टेप-अप SIP के फायदे

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

MF Investment : वाइजइन्वेस्ट के CEO हेमंत रुस्तगी से जाने बाजार में निवेश के मंत्र, क्या हैं स्टेप-अप SIP के फायदे

MF Investment : महंगाई के दौर में सिर्फ बचत नहीं,बल्कि स्मार्ट निवेश भी उतना ही जरूरी है। ऐसे में स्टेप-अप SIP आपकी बढ़ती आय के साथ निवेश बढ़ाकर लंबी अवधि में बड़ा फंड बनाने में मदद कर सकती है। लेकिन सवाल सिर्फ निवेश बढ़ाने का नहीं,बल्कि बाजार की गिरावट में उस निवेश को बनाए रखने का भी है। तो अतिरिक्त रकम कहां लगानी चाहिए? क्या हर ट्रेंडिंग फंड सही विकल्प है? और बाजार की अस्थिरता में गोल-बेस्ड निवेश कैसे आपकी सबसे बड़ी ताकत बन सकता है? आज यहा इन्हीं अहम सवालों के जवाब जानेंगे वाइजइन्वेस्ट के CEO हेमंत रुस्तगी (Hemant Rustagi) से

क्या है स्टेप-अप SIP?

इसमें हर साल SIP की रकम तय परसेंट या तय रकम से बढ़ाई जाती है। हमें इसमें बढ़ती आय के हिसाब से निवेश बढ़ाने की सुविधा मिलती है। छोटी राशि से निवेश की शुरुआत करना आसान होता है। कंपाउंडिंग का लाभ समय के साथ अधिक मिलता है। इससे लंबी अवधि में बड़ा निवेश फंड तैयार करने में मदद मिलती है।

कैसे बढ़ता है रिटर्न ?

सामान्य SIP में निवेश राशि पूरे समय एक जैसी रहती है। स्टेप-अप SIP में हर साल निवेश बढ़ने से ज्यादा रकम निवेश होती है। बढ़े हुए निवेश पर कंपाउंडिंग का असर और ज्यादा मिलता है। लंबी अवधि में रिटर्न सामान्य SIP से काफी ज्यादा हो सकता है।

नौकरीपेशा लोगों के लिए फायदेमंद

स्टेप-अप SIP नौकरीपेशा लोगों के लिए फायदेमंद होती है। इसमें सालाना सैलेरी बढ़ने के साथ निवेश भी बढ़ेगा। निवेश बढ़ाने का अतिरिक्त बोझ एक साथ महसूस नहीं होता। फाइनेंशियल गोल जल्दी हासिल करने में मदद मिलती है। रेग्युलर बचत और निवेश की आदत बनी रहती है। भविष्य की बढ़ती जरूरतों के अनुसार बेहतर फंड तैयार होता है।

बड़े फाइनेंशियल गोल होंगे हासिल

इससे बच्चों की उच्च शिक्षा के लिए बड़ा फंड तैयार होता है। यह तरीका घर खरीदने के लक्ष्य को आसान बनाता है। रिटायरमेंट के लिए मजबूत कॉर्पस बनाता है।

यह लंबी अवधि के बड़े लक्ष्यों के लिए सही निवेश रणनीति होती है।

कहां लगाएं अतिरिक्त राशि?

स्टेप-अप SIP को सही जगह लगाना निवेशकों के लिए बड़ी चुनौती है। अतिरिक्त रकम को मौजूदा SIP में बढ़ाना सही कदम होता है। नए सेक्टर,थीमैटिक फंड में अतिरिक्त निवेश में ज्यादा जोखिम होता है। ट्रेंडिंग सेक्टर,थीमैटिक और स्मॉलकैप फंड में निवेश करने में जोखिम होता है। ऐसे फंड Cyclical होते हैं और इनमें गलत समय पर निवेश मुश्किल बढ़ाएगा। रिटेल निवेशकों के लिए इन फंडों पर नजर रखना आसान नहीं होता। जब SIP काफी बढ़ जाए,तब पोर्टफोलियो में मिडकैप या स्मॉलकैप फंड जोड़ें। सही एलोकेशन में आवंटन सेलंबे समय में बेहतर रिटर्न संभव है।

बाजार की अस्थिरता से कैसे निपटें?

बाजार में उतार-चढ़ाव सामान्य बात है, इसके लिए मानसिक रूप से तैयार रहें। गिरावट में डरने की बजाय अनुशासित निवेश बरकरार रखें। गिरावट में लंबी अवधि का नजरिया हमेशा काम आता है। अस्थिर बाजार में SIP से लंबे समय में अच्छे रिटर्न मिलते हैं। गोल बेस्ड निवेश गिरावट में निवेशक को इमोशनल फैसले लेने से रोकता है। यदि पैसा 20–25 साल बाद चाहिए तो आज की गिरावट से क्यों डरना। साफ समय-सीमा से निवेशक का बाजार पर भरोसा बना रहता है। बाजार में जल्दबाजी में डेट या हाइब्रिड फंड में शिफ्ट होने से बचें। इससे लंबी अवधि में वेल्थ क्रिएशन पर असर पड़ सकता है।

 

Market this week : इस हफ्ते बढ़त के साथ बंद हुआ बाजार, जानिए अगले हफ्ते कैसी रह सकती है इसकी चाल

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

SIP Calculator: ₹500, ₹1,000 या ₹5,000… कितनी रकम से SIP शुरू करें? जानिए आसान फॉर्मूला

SIP Calculator: म्यूचुअल फंड में निवेश शुरू करने वाले ज्यादातर लोगों के मन में एक सवाल जरूर आता है। आखिर SIP की शुरुआत कितने रुपये से करनी चाहिए? ₹500, ₹1,000, ₹5,000 या इससे भी ज्यादा?

इसका कोई एक जवाब नहीं है। सही SIP वही है, जिसे आप हर महीने बिना रुके लंबे समय तक जारी रख सकें। निवेश की दुनिया में बड़ी रकम से शुरुआत करने से ज्यादा जरूरी है नियमित निवेश करना। यही आदत आगे चलकर बड़ी पूंजी बना सकती है।

₹500 की SIP से भी हो सकती है शुरुआत

आज ज्यादातर म्यूचुअल फंड में सिर्फ ₹500 महीने से SIP शुरू की जा सकती है। अगर आप पहली बार निवेश कर रहे हैं या नौकरी की शुरुआत की है, तो छोटी रकम से शुरुआत करना बिल्कुल सही फैसला हो सकता है।

मान लीजिए आपने 25 साल की उम्र में ₹500 महीने की SIP शुरू की। अगर आपको औसतन 12% सालाना रिटर्न मिलता है और आप 35 साल तक निवेश जारी रखते हैं, तो आपके पास 32 लाख का फंड तैयार हो जाएगा। इसमें कुल निवेश सिर्फ ₹2.10 लाख का होगा यानी आपको करीब 30 लाख मुनाफा मिलेगा।

₹1,000 या ₹5,000 की SIP में कितना फर्क पड़ता है?

अब मान लीजिए निवेश की अवधि 25 साल है और औसतन 12% सालाना रिटर्न मिलता है।

मासिक SIPकुल निवेशअनुमानित फंड
₹500₹1.50 लाख₹9.5 लाख
₹1,000₹3 लाख₹19 लाख
₹5,000₹15 लाख₹95 लाख

यही कंपाउंडिंग की ताकत है। जितनी बड़ी SIP और जितना लंबा समय, उतना बड़ा फंड बनने की संभावना।

कंपाउंडिंग आखिर होती क्या है?

मान लीजिए आपने ₹5,000 की SIP शुरू की। पहले साल आपको रिटर्न मिला। अगले साल सिर्फ आपके निवेश पर ही नहीं, बल्कि पहले साल के मुनाफे पर भी रिटर्न मिलने लगता है। इसे ही कंपाउंडिंग कहते हैं।

यानी आपका पैसा खुद भी कमाई करने लगता है। इसलिए निवेश में समय सबसे बड़ी ताकत माना जाता है।

मार्केट गिर जाए तो क्या SIP बंद कर देनी चाहिए?

यही सबसे बड़ी गलती होती है। जब बाजार गिरता है, तब आपकी SIP से ज्यादा यूनिट खरीदने को मिलती हैं। बाद में बाजार संभलता है, तो यही यूनिट बेहतर रिटर्न दे सकती हैं।

उदाहरण के लिए, पहले महीने NAV ₹100 था। ₹5,000 में 50 यूनिट मिलीं। अगले महीने बाजार गिरा और NAV ₹80 हो गया। अब ₹5,000 में 62.5 यूनिट मिल गईं। यानी बाजार गिरने पर भी आपका निवेश आपके लिए ज्यादा यूनिट खरीद रहा होता है। इसलिए गिरावट हमेशा नुकसान नहीं होती।

सैलरी बढ़े तो SIP भी बढ़ाइए

अगर हर साल आपकी सैलरी बढ़ती है, तो SIP भी बढ़ानी चाहिए। इसे Step-Up SIP कहते हैं। मान लीजिए आपने ₹5,000 महीने की SIP शुरू की। अगर 25 साल तक रकम नहीं बढ़ाई, तो 12% सालाना रिटर्न के हिसाब से फंड करीब ₹95 लाख बन सकता है।

लेकिन अगर हर साल SIP सिर्फ 10% बढ़ाते रहे, तो यही फंड करीब ₹2 करोड़ तक पहुंच सकता है। यानी सिर्फ SIP बढ़ाने की आदत से आपका फंड दोगुना से भी ज्यादा हो सकता है।

कितनी SIP आपके लिए सही है?

इसका आसान नियम है। अगर आपकी मासिक कमाई ₹40,000 है, तो कोशिश करें कि कम से कम 10% यानी ₹4,000 निवेश करें। अगर अभी इतना मुमकिन नहीं है, तो ₹500 या ₹1,000 से शुरुआत करें। सबसे जरूरी बात यह है कि निवेश शुरू हो। बाद में कमाई बढ़ने पर SIP भी बढ़ाते रहें।

निवेश शुरू करने से पहले ये 5 बातें याद रखें

  • जितनी SIP आराम से चला सकें, उतनी ही शुरू करें।
  • कम से कम 10-15 साल का नजरिया रखें।
  • बाजार गिरने पर SIP बंद न करें।
  • हर साल SIP में 10-15% की बढ़ोतरी करें।
  • किसी लक्ष्य के साथ निवेश करें, सिर्फ रिटर्न देखकर नहीं।

SIP vs SSY: सुकन्या समृद्धि और SIP में हर महीने ₹2000 निवेश करें तो किसमें ज्यादा पैसा बनेगा? समझिए पूरा कैलकुलेशन

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

Multi Cap vs Flexi Cap: मल्टीकैप या फ्लेक्सी कैप… जानिए कौन-सा म्यूचुअल फंड आपके लिए रहेगा बेहतर?

Multi Cap vs Flexi Cap: जब हम अपनी गाढ़ी कमाई निवेश करने की सोचते हैं, तो चाहते हैं कि पैसा सुरक्षित रहे और अच्छा रिटर्न भी मिले। ऐसे निवेशकों के लिए म्यूचुअल फंड काफी लोकप्रिय विकल्प है। लेकिन यहां भी अक्सर लोग मल्टी-कैप (Multi Cap) और फ्लेक्सी-कैप (Flexi Cap) फंड को लेकर उलझ जाते हैं।

नाम सुनने में दोनों एक जैसे लगते हैं, लेकिन निवेश का तरीका और रणनीति अलग है। मनीफ्रंट के को-फाउंडर और CEO मोहित गांग ने आसान शब्दों में समझाया कि दोनों फंड कैसे काम करते हैं और किस तरह के निवेशक के लिए कौन-सा विकल्प बेहतर हो सकता है।

मल्टी-कैप फंड कैसे काम करता है?

मल्टी-कैप फंड को आप ऐसे परिवार की तरह समझ सकते हैं, जहां हर खर्च पहले से तय होता है। SEBI के नियमों के मुताबिक, इस फंड को अपनी कुल रकम का कम से कम 75% शेयर बाजार में निवेश करना होता है।

इसके अलावा फंड मैनेजर को 25% लार्ज-कैप, 25% मिड-कैप और 25% स्मॉल-कैप कंपनियों में निवेश करना ही पड़ता है। बाकी 25% रकम वह अपनी रणनीति के हिसाब से कहीं भी लगा सकता है।

मोहित गांग के मुताबिक, यही इसकी सबसे बड़ी ताकत भी है और सबसे बड़ी सीमा भी। फायदा यह है कि आपका पैसा हर तरह की कंपनियों में बंटा रहता है। लेकिन अगर बाजार में गिरावट आए और स्मॉल-कैप शेयर लगातार कमजोर चल रहे हों, तब भी फंड मैनेजर वहां से पूरा पैसा नहीं निकाल सकता। उसे नियमों के मुताबिक निवेश बनाए रखना पड़ता है। इससे जोखिम बढ़ सकता है।

फ्लेक्सी-कैप फंड में क्या खास है?

फ्लेक्सी-कैप फंड में फंड मैनेजर के पास ज्यादा आजादी होती है। इसे सिर्फ अपनी कुल रकम का कम से कम 65% शेयरों में निवेश करना होता है। इसके बाद वह बाजार की स्थिति के हिसाब से निवेश का फैसला ले सकता है।

अगर उसे लगता है कि आने वाले समय में स्मॉल-कैप कंपनियां बेहतर प्रदर्शन करेंगी, तो वह वहां ज्यादा पैसा लगा सकता है। अगर बाजार में जोखिम बढ़ता दिखे, तो वह निवेश का बड़ा हिस्सा लार्ज-कैप कंपनियों में शिफ्ट कर सकता है। जरूरत पड़ने पर वह स्मॉल-कैप में निवेश शून्य भी कर सकता है।

मोहित गांग का कहना है कि फ्लेक्सी-कैप की सबसे बड़ी ताकत यही लचीलापन है। फंड मैनेजर बाजार के हिसाब से रणनीति बदल सकता है। इससे गिरावट के दौर में जोखिम को कुछ हद तक कम किया जा सकता है।

आपके लिए कौन-सा फंड सही रहेगा?

यह पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि आप कितना जोखिम उठा सकते हैं। मोहित गांग के मुताबिक, अगर आप लंबी अवधि के लिए निवेश कर रहे हैं और बाजार के उतार-चढ़ाव से ज्यादा परेशान नहीं होते, तो मल्टी-कैप फंड आपके लिए बेहतर हो सकता है। इसमें मिड और स्मॉल-कैप का हिस्सा तय होने की वजह से लंबे समय में बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना रहती है। हालांकि, इसमें जोखिम भी ज्यादा होता है।

अगर आप चाहते हैं कि बाजार की स्थिति के हिसाब से आपका पोर्टफोलियो बदलता रहे और जोखिम कुछ कम रहे, तो फ्लेक्सी-कैप फंड बेहतर विकल्प हो सकता है। इसमें फंड मैनेजर बाजार के हिसाब से निवेश का अनुपात बदल सकता है।

Multibagger Stocks: रामदेव अग्रवाल ने बताया अच्छे स्टॉक खरीदने का फॉर्मूला, इन 10 बातों से होगी पहचान

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Market View : गिरते बाजार में वोलैटिलिटी को खतरा नहीं,मौका मानें, डेट से पैसा निकालकर इक्विटी निवेश बढ़ाने का अच्छा मौका

Market View : गुरुवार को पिछले कारोबारी सत्र में आखिरी घंटे में बाजार में ऊपरी स्तर से मुनाफावसूली आई थी। सेंसेक्स-निफ्टी ऊपरी स्तर से फिसलकर बंद हुए थे। हालांकि सेंसेक्स 109 प्वाइंट चढ़कर 77,100 पर बंद हुआ था। वहीं, निफ्टी 34 प्वाइंट चढ़कर 24,056 पर बंद हुआ था। मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुए थे। ऑटो और FMCG शेयरों में खरीदारी आई थी। मेटल,PSE और तेल-गैस इंडेक्स गिरावट पर बंद हुए थे। IT और एनर्जी शेयरों में दबाव देखने को मिला था। बैंक निफ्टी 27 प्वाइंट चढ़कर 58,177 पर बंद हुआ था। मिडकैप 400 प्वाइंट गिरकर 61,796 पर बंद हुआ था।

निफ्टी के 50 में से 26 शेयरों में बिकवाली देखने को मिली थी। सेंसेक्स के 30 में से 19 शेयरों में बिकवाली रही थी। बैंक निफ्टी के 14 में से 8 शेयरों में गिरावट आई थी। डॉलर के मुकाबले रुपया 27 पैसे मजबूत होकर 94.40/$ पर बंद हुआ था।

बंधन AMC में VP-इक्विटीज,प्रतीक पोद्दार ने बाजार पर बात करते हुए कहा कि गिरते बाजार में वोलैटिलिटी को खतरा नहीं,मौका मानें। यह डेट से पैसा निकालकर इक्विटी निवेश बढ़ाने का मौका है। गिरावट में अच्छे स्टॉक्स सस्ते दाम पर मिलते हैं। मिड और स्मॉलकैप में भी अवसर मिलने पर एग्रेसिव खरीदारी की जा सकती है। ऑटोमैटिक रीबैलेंसिंग से रिस्क कंट्रोल में रहता है। इस समय पैनिक सेलिंग नहीं,डिसिप्लिन्ड एलोकेशन पर जोर होना चाहिए।

डेट पोर्टफोलियो की रणनीति

प्रतीक पोद्दार ने बताया कि उनके फंड का डेट हिस्से का लगभग पूरा पैसा निवेशित है। कैश होल्डिंग बहुत सीमित। सिर्फ हाई क्वालिटी डेट इंस्ट्रूमेंट्स पर फोकस है। AAA रेटेड बॉन्ड्स में बड़ा एक्सपोजर है। इसका ड्यूरेशन करीब 4 साल के आसपास है। बाजार गिरने पर डेट से पैसा निकालकर इक्विटी में शिफ्ट करने पर फोकस है।

रीबैलेंसिंग की स्ट्रैटेजी

रीबैलेंसिंग का सबसे बड़ा आधार है वैल्यूएशन। जहां रिस्क-रिवॉर्ड बेहतर दिखता है,वहां निवेश बढ़ाते हैं। सेक्टर और स्टॉक दोनों का लगातार रिव्यू करते रहना चाहिए। महंगे पॉकेट्स से निकलकर सस्ते अवसरों की तलाश की सलाह होगी।

बाजार की गिरावट में डेट का रोल?

डेट का अहम काम वोलैटिलिटी कम करना है। डेट रिटर्न्स को ज्यादा स्थिर बनाए रखता है। यह पश्चिम एशिया संकट और टैरिफ वॉर जैसे इवेंट्स में सुरक्षा कवच का काम करता है। बाजार गिरते ही इक्विटी वेट घटता है और डेट वेट बढ़ता है।

Daily Voice : ग्लोबल AI थीम से जुड़े शेयरों के वैल्यूएशन को लेकर रहें सतर्क, अगले 6-9 महीनों में मार्केट के रिकॉर्ड हाई पर पहुंचने की संभावना कम

बंधन एग्रेसिव हाइब्रिड फंड

बंधन एग्रेसिव हाइब्रिड फंड (Bandhan Aggressive Hybrid Fund) के बारे में बताते हुए प्रतीक पोद्दार ने कहा कि यह फंड सिर्फ हाई-रिस्क निवेशकों के लिए नहीं है। मॉडरेट रिस्क प्रोफाइल वाले भी इसे चुन सकते हैं। इसमें इक्विटी-डेट का बैलेंस कॉम्बिनेशन है। इसमें सिर्फ रिटर्न नहीं,रिस्क मैनेजमेंट पर भी फोकस है। निवेशकों को बार-बार रीबैलेंसिंग की जरूरत नहीं होती। यह 3-5 साल के नजरिया के लिए बेहतर है।

 

डिस्क्लेमर:मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Index funds vs Active funds: इंडेक्स फंड या एक्टिव फंड… 10 साल में ₹1 लाख से किसने बनाया ज्यादा पैसा?

Index funds vs Active funds: म्यूचुअल फंड में निवेश लंबी अवधि में पैसा बढ़ाने का सबसे अच्छा विकल्प माना जाता है। लेकिन, कौन सा फंड ज्यादा बेहतर रिटर्न देता है? अब मान लीजिए कि दो दोस्त हैं। 10 साल पहले दोनों ने म्यूचुअल फंड में ₹1-1 लाख लगाए। पहले ने ज्यादा सोच-विचार नहीं किया और Nifty 50 Index Fund में पैसा लगा दिया। दूसरे को भरोसा था कि एक अच्छा फंड मैनेजर बाजार से बेहतर रिटर्न दिला सकता है, इसलिए उसने एक एक्टिव इक्विटी फंड चुना।

10 साल बाद पहले निवेशक का ₹1 लाख बढ़कर करीब ₹3.15 लाख हो गया। लेकिन दूसरे निवेशक के लिए नतीजा इस बात पर निर्भर करता है कि उसने कौन-सा फंड चुना था।

अगर उसने सही लार्ज कैप फंड चुना होता, तो उसकी रकम करीब ₹3.83 लाख हो सकती थी। लेकिन अगर फंड का चुनाव गलत हो जाता, तो वही ₹1 लाख सिर्फ ₹2.60 लाख तक पहुंचता। यानी इंडेक्स फंड से भी कम रिटर्न मिलता।

chart pfssss

फ्लेक्सी कैप फंड में और बड़ा अंतर

फ्लेक्सी कैप फंड्स में यह अंतर और ज्यादा बड़ा दिखता है। पिछले 10 साल में कुछ फ्लेक्सी कैप फंड्स ने ₹1 लाख को बढ़ाकर करीब ₹5.99 लाख कर दिया। वहीं कुछ फंड्स में यही रकम सिर्फ ₹2.53 लाख तक पहुंची।

यही इंडेक्स फंड और एक्टिव फंड के बीच सबसे बड़ा फर्क है। इंडेक्स फंड का मकसद बाजार जितना रिटर्न देना होता है, इसलिए इसमें रिटर्न का अंदाजा लगाना आसान होता है। दूसरी तरफ एक्टिव फंड में ज्यादा कमाई का मौका भी होता है और कमजोर रिटर्न का जोखिम भी।

एक्टिव फंड ज्यादा रिटर्न कैसे दे सकते हैं?

Arthasadhana Investments की संस्थापक और QPFP®️ Namrata Singh कहती हैं कि एक्टिव फंड्स में बाजार से बेहतर रिटर्न देने की क्षमता होती है। खासकर उन कैटेगरी में, जहां फंड मैनेजर को अलग-अलग सेक्टर और अलग-अलग आकार की कंपनियों में निवेश करने की आजादी होती है।

इंडेक्स फंड एक तय सूची के हिसाब से निवेश करते हैं। लेकिन एक्टिव फंड में फंड मैनेजर अपने हिसाब से फैसले ले सकता है। उसे अगर लगता है कि किसी सेक्टर में तेजी आने वाली है, तो वह वहां निवेश बढ़ा सकता है। अगर कोई सेक्टर महंगा लग रहा है, तो वहां निवेश कम कर सकता है। फ्लेक्सी कैप फंड्स में तो फंड मैनेजर लार्ज, मिड और स्मॉल कैप कंपनियों के बीच भी आसानी से पैसा शिफ्ट कर सकता है।

chart pfsssss

अनुभव मैनेजर पकड़ लेते हैं मौके

नम्रता सिंह का कहना है कि भारतीय शेयर बाजार में हालात लगातार बदलते रहते हैं। कभी कोई सेक्टर आगे निकल जाता है तो कभी दूसरा। ऐसे में अनुभवी फंड मैनेजर कई बार ऐसे मौके पकड़ लेते हैं, जो अभी इंडेक्स में पूरी तरह दिखाई नहीं देते।

यही वजह है कि इस अध्ययन में सबसे बेहतर फ्लेक्सी कैप फंड ने ₹1 लाख को करीब ₹6 लाख में बदल दिया। यह Nifty 50 Index Fund के रिटर्न से लगभग दोगुना है।

लेकिन जोखिम भी उतना ही बड़ा है

लेकिन कहानी का दूसरा पहलू भी है। जिस फ्लेक्सी कैप फंड का प्रदर्शन सबसे कमजोर रहा, उसने 10 साल में ₹1 लाख को सिर्फ ₹2.53 लाख बनाया। वहीं सबसे कमजोर लार्ज कैप फंड की वैल्यू ₹2.60 लाख तक पहुंची। दोनों ही मामलों में रिटर्न Nifty 50 Index Fund से कम रहा। यानी एक्टिव फंड में सफलता काफी हद तक इस बात पर निर्भर करती है कि आपने कौन-सा फंड चुना है।

नम्रता सिंह कहती हैं कि सिर्फ पुराने रिटर्न देखकर निवेश का फैसला नहीं करना चाहिए। निवेशकों को यह भी देखना चाहिए कि फंड पैसा कैसे निवेश करता है, जोखिम को कैसे संभालता है और लंबे समय में उसका प्रदर्शन कितना स्थिर रहा है।

फिर भी कई लोग इंडेक्स फंड क्यों चुनते हैं?

कई निवेशक फंड मैनेजर चुनने की झंझट में नहीं पड़ना चाहते। वे यह सोचकर निवेश करते हैं कि बाजार जितना रिटर्न मिल जाए, वही काफी है। ऐसे निवेशकों के लिए इंडेक्स फंड एक आसान विकल्प बन जाते हैं। ये बाजार को हराने की कोशिश नहीं करते। इनका मकसद सिर्फ Nifty 50 जैसे किसी इंडेक्स के प्रदर्शन को दोहराना होता है।

इसके अलावा इंडेक्स फंड का खर्च भी आमतौर पर कम होता है और निवेशक को एक ही फंड के जरिए कई बड़ी कंपनियों में निवेश का मौका मिल जाता है।

नम्रता सिंह के मुताबिक, जो निवेशक सरल और नियम-आधारित निवेश पसंद करते हैं और फंड मैनेजर पर निर्भर नहीं रहना चाहते, उनके लिए इंडेक्स फंड अच्छा विकल्प हो सकते हैं। वहीं जो लोग थोड़ा ज्यादा जोखिम लेकर बेहतर रिटर्न की तलाश में हैं, वे अच्छे एक्टिव फंड्स पर विचार कर सकते हैं।

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।