Market Outlook : गिरावट के साथ बंद हुआ बाजार, जानिए 15 सितंबर को कैसी रह सकती है इसकी चाल

Market Outlook : 11 सितंबर को एक और उतार-चढ़ाव भरे सेशन में भारतीय इक्विटी इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुए। निफ्टी 23,400 के लेवल के आसपास बंद होने में कामयाब रहा। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 120.83 अंक यानी 0.16 प्रतिशत गिरकर 74,781.76 पर और निफ्टी 79.70 अंक या 0.34 प्रतिशत गिरकर 23,398.10 पर बंद हुआ। आज लगभग 1773 शेयरों में बढ़त हुई, 2373 शेयरों में गिरावट आई और 190 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ।

डॉ.रेड्डीज़ लैबोरेटरीज, HDFC बैंक, ITC, टेक महिंद्रा और विप्रो निफ्टी में बढ़त वाले प्रमुख शेयरों में शामिल रहे, जबकि हिंडाल्को इंडस्ट्रीज, JSW स्टील, टाटा स्टील, आयशर मोटर्स और ONGC सबसे ज़्यादा गिरावट वाले शेयर रहे।

सेक्टरों की बात करें तो निफ्टी प्राइवेट बैंक इंडेक्स 0.5% बढ़ा। वहीं, मेटल और रियल्टी इंडेक्स में 2% से ज़्यादा की गिरावट आई,जबकि ऑटो, एनर्जी, ऑयल एंड गैस और PSU बैंक इंडेक्स में 0.5% की गिरावट दर्ज की गई। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 0.26% की गिरावट आई, जबकि स्मॉलकैप इंडेक्स 0.6% गिरा।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स में हेड ऑफ़ रिसर्च विनोद नायर का कहना है कि कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और ग्लोबल स्तर पर ऊंची ब्याज दरों की चिंता ने घरेलू शेयर बाज़ार पर दबाव बनाया,जिससे बाजार में गिरावट का दौर जारी रहा। प्रोड्यूसर महंगाई में बढ़ोतरी और मज़बूत अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों ने ब्याज दरों में बढ़त की संभावना को मज़बूत किया है। इससे बॉन्ड यील्ड बढ़ी और FII की बिकवाली जारी रही। हालांकि,यूरोपीय बाज़ारों में अच्छी शुरुआत के बाद कुछ खास सेक्टरों (खासकर IT) में वैल्यू बाइंग की वजह से बाज़ार दिन के निचले स्तरों से संभल गया।

बाज़ार में सुधार के बावजूद,कमज़ोर मार्केट ब्रेड्थ से पता चलता है कि बाज़ार में अभी भी उतार-चढ़ाव के साथ सुस्ती का दौर जारी है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें,विदेशी निवेशकों की बिकवाली और जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता के कारण बाज़ार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है,लेकिन मज़बूत घरेलू फंडामेंटल और संस्थागत निवेशकों के सपोर्ट से निचले स्तरों पर खरीदारी हो रही है। ऐसे में किसी बड़ी गिरावट का डर नहीं है और मध्यम अवधि के नजरिए से बाज़ार का आउटलुक पॉजिटिव बना हुआ है।

SBI सिक्योरिटीज में टेक्निकल और डेरिवेटिव्स रिसर्च के हेड सुदीप शाह का कहना है कि शुक्रवार को निफ्टी गैप-डाउन के साथ खुला। हालांकि,सेशन के पहले हिस्से के बाद बिकवाली का दबाव जारी नहीं रहा और इंडेक्स में निचले स्तरों से थोड़ी शॉर्ट-कवरिंग देखी गई। निफ्टी दिन के निचले स्तर से लगभग 200 अंक सुधरा। हालांकि यह 0.34% नीचे बंद हुआ। डेली चार्ट पर लगातार गिरावट के बाद इंडेक्स ने एक बुलिश कैंडल बनाया,जो निचले स्तरों पर खरीदारी आने का संकेत है। हालांकि,एक ठोस रिकवरी की पुष्टि के लिए आगे भी लगातार बढ़त जारी रहने की जरूरत होगी।

टेक्निकल नज़रिए से डेली RSI अभी भी 40 ज़ोन के नीचे ट्रेड कर रहा है। यह मंदी के रुख (बेयरिश बायस) के बने रहने का संकेत है। निफ्टी अपने 20-डे और 50-डे EMA के नीचे भी ट्रेड कर रहा है,जिससे इसका ओवरऑल स्ट्रक्चर कमज़ोर बना हुआ है। वहीं,बढ़ता ADX और हाई लेवल पर बना इंडिया विक्स ग्लोबल अनिश्चितता के बीच ट्रेंड की तेजी और लगातार उतार-चढ़ाव का संकेत दे रहे हैं। निकट भविष्य में स्ट्रक्चर में ठोस सुधार के लिए लगातार खरीदारी की जरूरत होगी।

आगे निफ्टी के लिए 23250–23230 का ज़ोन एक अहम सपोर्ट एरिया का काम कर सकता है,जो आज के निचले स्तर के आसपास है। अगर यह 23230 के नीचे बना रहता है,तो 23080 के स्तर की ओर बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है। ऊपर की तरफ, 23600–23620 के स्तर पर तत्काल रेजिस्टेंस हो सकता है। अगर निफ्टी 23620 के ऊपर बना रहता है,तो पुलबैक 23800 के स्तर तक बढ़ सकता है।

बैंक निफ्टी का आउटलुक

सुदीप शाह का कहना है कि बैंक निफ्टी भी गैप-डाउन के साथ खुला। हालांकि,जोरदार शॉर्ट कवरिंग की वजह से इसमें दिन के निचले स्तर से लगभग 890 अंकों की रिकवरी देखी गई। बैंक निफ्टी ने डेली चार्ट पर लोअर विक (lower wick) के साथ एक मज़बूत बुलिश कैंडल बनाई,जो निचले स्तरों पर खरीदारी आने का संकेत है। गैप-डाउन ओपनिंग के बावजूद इंडेक्स 0.24% ऊपर बंद हुआ,जो निचले स्तरों पर खरीदारों की बढ़ती भागीदारी को दिखाता है।

आगे बैंक निफ्टी के लिए 56000–55900 का जोन एक अहम सपोर्ट एरिया का काम कर सकता है। अगर यह 55900 के नीचे बना रहता है तो 55500 के स्तर तक और बिकवाली का दबाव बन सकता है। ऊपर की तरफ 57100–57200 के स्तर पर तत्काल रेजिस्टेंस दिख सकता है,जबकि 57200 के ऊपर बने रहने पर पुलबैक 57500 के स्तर तक बढ़ सकता है।

 

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डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

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बाजार पर बात करते हुए चॉइस ब्रोकिंग के VP टेक्निकल रिसर्च सचिन गुप्ता ने कहा कि ग्लोबल सेंटीमेंट में सुधार हुआ है क्योंकि कल वॉल स्ट्रीट बढ़त के साथ बंद हुआ और ज़्यादातर एशियाई बाजार भी पॉज़िटिव जोन में हैं। US ट्रेज़री यील्ड में भी कमी आई है। इससे बाजार को सपोर्ट मिल रहा है। हालांकि, ब्रेंट क्रूड $96–97 के आस-पास ऊंचे स्तर पर बना हुआ है। इसके अलावा अमेरिका–ईरान संघर्ष से जुड़े जियोपॉलिटिकल रिस्क बाज़ार के सेंटीमेंट के लिए एक अहम निगेटिव फ़ैक्टर बने हुए हैं।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य निवेश रणनीतिकार वी के विजयकुमार का कहना है कि अच्छी और बुरी खबरें आती-जाती रहती हैं। CMIE की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, FY27 की पहली तिमाही में प्राइवेट इन्वेस्टमेंट में 97% की जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। इसमें FY26 की पहली तिमाही के मुकाबले जबरदस्त बढ़त हुई है। यह कैपेक्स में बड़े बदलाव का संकेत है। लंबे समय के बाद प्राइवेट कैपेक्स में सुधार हो रहा है, जो भविष्य के आर्थिक विकास के लिए अच्छा संकेत है।

हालांकि,कुछ बुरी खबरें भी हैं। सबसे बड़ी बुरी खबर है दुनिया भर में बॉन्ड यील्ड का बढ़ना। अमेरिका में 10-साल की बॉन्ड यील्ड 4.8% के आसपास बनी हुई है। जापान में 10-साल की यील्ड 3% है,जो पिछले 30 सालों में सबसे ज़्यादा है। UK में 30-साल की यील्ड 6% है। भारत में भी 10-साल की यील्ड 7% के करीब है।

बॉन्ड यील्ड का बढ़ना इक्विटी मार्केट के लिए बुरा है। महंगाई बढ़ने और ब्याज दरों में बढ़ोतरी की ज़्यादा संभावना के कारण फिक्स्ड इनकम इन्वेस्टमेंट ज़्यादा आकर्षक हो जाएंगे। उभरते बाज़ारों से कैपिटल के बाहर जाने (कैपिटल फ्लाइट) की संभावना भी बनी हुई है। इन वजहों से इक्विटी मार्केट पर दबाव पड़ेगा।

हालांकि, भारतीय अर्थव्यवस्था के बारे में अच्छी खबरों से इन बुरी वजहों का असर कम हो रहा है। GST कलेक्शन,ऑटोमोबाइल बिक्री और क्रेडिट ग्रोथ से जुड़े हालिया आंकड़े (हाई-फ़्रीक्वेंसी डेटा) खास तौर पर अच्छे रहे हैं। अच्छी और बुरी वजहों का यह मिला-जुला असर निकट भविष्य में बाज़ार में उतार-चढ़ाव बनाए रखेगा।

निफ्टी पर रणनीति

सीएनबीसी- आवाज़ के वीरेंद्र कुमार का कहना है कि निफ्टी के लिए पहला रेजिस्टेंस 23971-24029 पर और अगला रेजिस्टेंस 24081-24129/184 पर है। इसके लिए पहला बेस 23866-23789 पर और अगला बेस 23761-23677 पर है।

बैंक निफ्टी पर रणनीति

वीरेंद्र कुमार का कहना है कि बैंक निफ्टी के लिए पहला रेजिस्टेंस 57478-57631 पर और अगला रेजिस्टेंस 57771-57878/58040 पर है। इसके लिए पहला बेस 57110-56910 पर और अगला बेस 56691-56578 पर है।

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चकाचक चार्ट वाले शेयर

चकाचक चार्ट वाले शेयर बताने के लिए हमारे साथ जुड़े हैं www.rajeshsatpute.com के राजेश सातपुते। इनकी OBEROI RLTY के फ्यूचर्स में 1900 रुपए के स्टॉपलॉस के साथ 1950 रुपए के टारगेट के लिए खरीदारी की सलाह है। वहीं,SBICARD के फ्यूचर्स में इनकी 650 रुपए के स्टॉपलॉस के साथ 680 रुपए के टारगेट के लिए खरीदारी की सलाह है।

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Market Mantra : 3-6 महीने के नजरिए से निवेश करना रहेगा अच्छा, US-ईरान युद्ध को लेकर ज्यादा टेंशन नहीं

Market Mantra : बाजार के सामने संकट के बादल फिर खड़े हो गए हैं। एक तरफ जहां अमेरिका-ईरान फिर लड़ पड़े हैं तो वहीं क्रूड की बिगड़ी चाल ने बाजार में फिर डर का माहौल बना दिया है। इसके अलावा भी बाजार के सामने कई और बड़ी चुनौतियां अब भी खड़ी हैं। कमजोर मॉनसून और पहली तिमाही के नतीजों पर बाजार नजर बनाए बैठा है। इन सभी मुद्दों से अब आगे बाजार की दिशा तय होनी है। ऐसे में निवेशक कंफ्यूज है कि निवेश को लेकर क्या रणनीति बनाएं,अभी निवेश करें या कुछ महीने पहले देख लें कि हालात क्या करवट लेते हैं। इसी कंफ्यूजन को दूर करने के लिए आज हमारे साथ हैं खास मेहमान LIC म्यूचुअल फंड (LIC Mutual Fund) के CIO इक्विटी सुधांशु अस्थाना।

US-ईरान युद्ध को लेकर ज्यादा टेंशन नहीं

बाजार की चाल पर बात करते हुए सुधांशु अस्थाना ने कहा कि US-ईरान युद्ध को लेकर ज्यादा टेंशन नहीं है। US-ईरान फिर शांति की तरफ बढ़ेंगे। सरकार के कदमों से इकोनॉमी में डिमांड बढ़ी है। प्राइवेट कैपेक्स और क्रेडिट ग्रोथ में भी सुधार देखने को मिल रहा है। कॉर्पोरेट क्रेडिट ग्रोथ में 15% का उछाल आया है। देश में डॉलर का फ्लो आगे सुधरेगा। US-ईरान युद्ध आगे बढ़ा तो FY28 नतीजों पर असर दिखेगा। कच्चा तेल 85-90 डॉलर प्रति बैरल पर रहे तो इकोनॉमी पर असर नहीं होगा।

3-6 महीने के नजरिए से निवेश करना अच्छा

उन्होंने आगे कहा कि 3-6 महीने के नजरिए से निवेश करना अच्छा रहेगा। कंपनियों के मुताबिक युद्ध का असर अभी डिमांड पर नहीं दिखा है। दिसंबर नतीजों के बाद अर्निंग अपग्रेड संभव है। अगले साल से 8वें वेतन आयोग का पैसा भी आने लगेगा। 8वें वेतन आयोग के पैसे से डिमांड को बूस्ट मिलेगा। कच्चे माल की कीमतें बढ़ने का असर Q1 नतीजों पर दिखेगा।नतीजों के साथ कंपनियों की कमेंट्री और आउटलुक पर बाजार की नजर रहेगी।

बैंकिंग और फाइनेंशियल शेयरों में एक्सपोजर बढ़ा

सुधांशु अस्थाना ने बताया कि उन्होंनें बैंकिंग और फाइनेंशियल शेयरों में एक्सपोजर बढ़ाया है। प्राइवेट बैंक,NBFC और कैपिटल मार्केट शेयरों पर फोकस बढ़ा है। हेल्थकेयर शेयरों में भी एक्सपोजर बढ़ाया है। प्रीसिजन इंजीनियरिंग और डाटा सेंटर पर भी फोकस बढ़ा है। दिसंबर नतीजों के बाद अर्निंग अपग्रेड संभव है।

कम रिस्क चाहते हैं तो मल्टिकैप फंड में डालें पैसा

उन्होंने आगे कहा कि अगर आप कम रिस्क चाहते हैं तो मल्टिकैप फंड में पैसा डालें। फ्लैक्सीकैप फंड में भी निवेश किया जा सकता है। पिछले कुछ महीनों में मिडकैप और स्मॉलकैप में निवेश बढ़ा है। मिडकैप और स्मॉलकैप आगे अच्छा कर सकते हैं।

 

MF Investment : वाइजइन्वेस्ट के CEO हेमंत रुस्तगी से जाने बाजार में निवेश के मंत्र, क्या हैं स्टेप-अप SIP के फायदे

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

MF Investment : वाइजइन्वेस्ट के CEO हेमंत रुस्तगी से जाने बाजार में निवेश के मंत्र, क्या हैं स्टेप-अप SIP के फायदे

MF Investment : महंगाई के दौर में सिर्फ बचत नहीं,बल्कि स्मार्ट निवेश भी उतना ही जरूरी है। ऐसे में स्टेप-अप SIP आपकी बढ़ती आय के साथ निवेश बढ़ाकर लंबी अवधि में बड़ा फंड बनाने में मदद कर सकती है। लेकिन सवाल सिर्फ निवेश बढ़ाने का नहीं,बल्कि बाजार की गिरावट में उस निवेश को बनाए रखने का भी है। तो अतिरिक्त रकम कहां लगानी चाहिए? क्या हर ट्रेंडिंग फंड सही विकल्प है? और बाजार की अस्थिरता में गोल-बेस्ड निवेश कैसे आपकी सबसे बड़ी ताकत बन सकता है? आज यहा इन्हीं अहम सवालों के जवाब जानेंगे वाइजइन्वेस्ट के CEO हेमंत रुस्तगी (Hemant Rustagi) से

क्या है स्टेप-अप SIP?

इसमें हर साल SIP की रकम तय परसेंट या तय रकम से बढ़ाई जाती है। हमें इसमें बढ़ती आय के हिसाब से निवेश बढ़ाने की सुविधा मिलती है। छोटी राशि से निवेश की शुरुआत करना आसान होता है। कंपाउंडिंग का लाभ समय के साथ अधिक मिलता है। इससे लंबी अवधि में बड़ा निवेश फंड तैयार करने में मदद मिलती है।

कैसे बढ़ता है रिटर्न ?

सामान्य SIP में निवेश राशि पूरे समय एक जैसी रहती है। स्टेप-अप SIP में हर साल निवेश बढ़ने से ज्यादा रकम निवेश होती है। बढ़े हुए निवेश पर कंपाउंडिंग का असर और ज्यादा मिलता है। लंबी अवधि में रिटर्न सामान्य SIP से काफी ज्यादा हो सकता है।

नौकरीपेशा लोगों के लिए फायदेमंद

स्टेप-अप SIP नौकरीपेशा लोगों के लिए फायदेमंद होती है। इसमें सालाना सैलेरी बढ़ने के साथ निवेश भी बढ़ेगा। निवेश बढ़ाने का अतिरिक्त बोझ एक साथ महसूस नहीं होता। फाइनेंशियल गोल जल्दी हासिल करने में मदद मिलती है। रेग्युलर बचत और निवेश की आदत बनी रहती है। भविष्य की बढ़ती जरूरतों के अनुसार बेहतर फंड तैयार होता है।

बड़े फाइनेंशियल गोल होंगे हासिल

इससे बच्चों की उच्च शिक्षा के लिए बड़ा फंड तैयार होता है। यह तरीका घर खरीदने के लक्ष्य को आसान बनाता है। रिटायरमेंट के लिए मजबूत कॉर्पस बनाता है।

यह लंबी अवधि के बड़े लक्ष्यों के लिए सही निवेश रणनीति होती है।

कहां लगाएं अतिरिक्त राशि?

स्टेप-अप SIP को सही जगह लगाना निवेशकों के लिए बड़ी चुनौती है। अतिरिक्त रकम को मौजूदा SIP में बढ़ाना सही कदम होता है। नए सेक्टर,थीमैटिक फंड में अतिरिक्त निवेश में ज्यादा जोखिम होता है। ट्रेंडिंग सेक्टर,थीमैटिक और स्मॉलकैप फंड में निवेश करने में जोखिम होता है। ऐसे फंड Cyclical होते हैं और इनमें गलत समय पर निवेश मुश्किल बढ़ाएगा। रिटेल निवेशकों के लिए इन फंडों पर नजर रखना आसान नहीं होता। जब SIP काफी बढ़ जाए,तब पोर्टफोलियो में मिडकैप या स्मॉलकैप फंड जोड़ें। सही एलोकेशन में आवंटन सेलंबे समय में बेहतर रिटर्न संभव है।

बाजार की अस्थिरता से कैसे निपटें?

बाजार में उतार-चढ़ाव सामान्य बात है, इसके लिए मानसिक रूप से तैयार रहें। गिरावट में डरने की बजाय अनुशासित निवेश बरकरार रखें। गिरावट में लंबी अवधि का नजरिया हमेशा काम आता है। अस्थिर बाजार में SIP से लंबे समय में अच्छे रिटर्न मिलते हैं। गोल बेस्ड निवेश गिरावट में निवेशक को इमोशनल फैसले लेने से रोकता है। यदि पैसा 20–25 साल बाद चाहिए तो आज की गिरावट से क्यों डरना। साफ समय-सीमा से निवेशक का बाजार पर भरोसा बना रहता है। बाजार में जल्दबाजी में डेट या हाइब्रिड फंड में शिफ्ट होने से बचें। इससे लंबी अवधि में वेल्थ क्रिएशन पर असर पड़ सकता है।

 

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डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।