DA Hike: दीवाली से पहले केंद्रीय कर्मचारियों की बल्ले-बल्ले! जानिए कितनी बढ़कर आएगी आपकी अक्टूबर की सैलरी!

DA Hike Update: केंद्र सरकार के करीब 1.2 करोड़ कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को जुलाई 2026 से देय महंगाई भत्ते (DA) और महंगाई राहत (DR) में बढ़ोतरी का बेसब्री से इंतजार है। इस बार महंगाई भत्ते में 3 फीसदी बढ़ोतरी की पूरी संभावना जताई जा रही है, जिससे DA 60% से बढ़कर 63% हो जाएगा। वैसे केंद्र सरकार की ओर से अभी आधिकारिक घोषणा और मंजूरी की तारीख तय होना बाकी है।

8 नवंबर को दीवाली है। इसे देखते हुए कर्मचारी संगठन दीवाली से पहले इस किस्त को जारी करने की मांग कर रहे हैं। 14 अक्टूबर को ‘कॉन्फेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट एंप्लाइज एंड वर्कर्स’ ने कैबिनेट सचिव को पत्र लिखकर 16 अक्टूबर को देशव्यापी प्रदर्शन का आह्वान भी किया था, जिसमें 1 जुलाई से लंबित डीए/डीआर और दिवाली बोनस की मांग शामिल थी।

सरकार ने गैर-राजपत्रित कर्मचारियों के लिए 30 दिनों के एड-हॉक बोनस (अधिकतम ₹6,908) और 11.4 लाख से अधिक रेलवे कर्मचारियों के लिए 78 दिनों के पीएलबी बोनस (अधिकतम ₹17,951) की घोषणा कर दी है। लेकिन बोनस जहां एकमुश्त मिलता है, वहीं DA बढ़ोतरी से हर महीने की सैलरी और पेंशन में स्थायी इजाफा होता है।

3% DA Hike से किसकी कितनी बढ़ेगी सैलरी?

महंगाई भत्ते की गणना मूल वेतन के आधार पर की जाती है। अगर डीए 60% से बढ़कर 63% होता है, तो अलग-अलग बेसिक पे पर हर महीने और सालाना होने वाले लाभ का पूरा गणित इस प्रकार है:

₹18,000 बेसिक पे पर सैलरी हाइक

  • मौजूदा DA (60%): ₹10,800 प्रति माह
  • नया DA (63%): ₹11,340 प्रति माह
  • मासिक फायदा: ₹540 प्रति माह
  • वार्षिक फायदा: ₹6,480 प्रति वर्ष

₹25,500 बेसिक पे पर सैलरी हाइक

मासिक फायदा: ₹765 प्रति माह

वार्षिक फायदा: ₹9,180 प्रति वर्ष

₹35,400 बेसिक पे पर सैलरी हाइक

मासिक फायदा: ₹1,062 प्रति माह

वार्षिक फायदा: ₹12,744 प्रति वर्ष

₹44,900 बेसिक पे पर सैलरी हाइक

मासिक फायदा: ₹1,347 प्रति माह

वार्षिक फायदा: ₹16,164 प्रति वर्ष

₹56,100 बेसिक पे पर सैलरी हाइक

मासिक फायदा: ₹1,683 प्रति माह

वार्षिक फायदा: ₹20,196 प्रति वर्ष

एरियर और 8वें वेतन आयोग का स्टेटस

1 जुलाई से लागू होने वाली इस बढ़ोतरी के कारण कर्मचारियों को एरियर यानी पिछला बकाया भी मिलेगा। जैसे ₹18,000 बेसिक पे वाले कर्मचारी को केवल जुलाई, अगस्त और सितंबर महीने का कुल ₹1,620 एरियर मिलेगा। इसी अनुपात में पेंशनभोगियों को भी डीआर (DR) का एरियर दिया जाएगा।

एक साल में 2 बार बढ़ता है डीए/डीआर

केंद्र सरकार औद्योगिक श्रमिकों के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI-IW) के आधार पर साल में दो बार (1 जनवरी और 1 जुलाई) डीए/डीआर में संशोधन करती है। यह लंबित डीए संशोधन 8वें वेतन आयोग से पूरी तरह अलग है। 3 नवंबर 2025 को गठित 8वें वेतन आयोग को अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है, जिसकी समय सीमा मई 2027 के आसपास है।

21 अक्टूबर को केंद्रीय कैबिनेट की बैठक होने वाली है। इस बैठक में जुलाई 2026 के डीए और डीआर संशोधन पर बड़ा फैसला आ सकता है। वैसे जब तक सरकार की ओर से आधिकारिक मुहर नहीं लग जाती, तब तक कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को अंतिम घोषणा का इंतजार करना होगा।

PF Withdrawal: EPFO का बड़ा तोहफा: अब पीएफ खाते से निकाल सकेंगे 75% एडवांस! जानिए ये नए नियम

EPFO Partial Withdrawal Rules: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के अंशधारकों के लिए पीएफ खाते से पैसे निकालने के नियमों को और आसान बना दिया गया है। कर्मचारी भविष्य निधि योजना के तहत, अब बीमारी, बच्चों की पढ़ाई, शादी और घर खरीदने जैसी जरूरतों के लिए पीएफ कॉर्पस से बड़ा हिस्सा निकाला जा सकता है।

नए नियमों के मुताबिक, आंशिक निकासी के समय कर्मचारियों को अपने पात्र पीएफ बैलेंस का कम से कम 25% हिस्सा खाते में बनाए रखना अनिवार्य होगा। बाकी का 75% तक पैसा संबंधित श्रेणी की शर्तों के आधार पर निकाला जा सकता है।

क्या है 25 प्रतिशत मिनिमम बैलेंस का गणित?

पीएफ खाते में 25% बैलेंस बनाए रखने का मतलब कोई तय रकम (जैसे- 25,000 या 50,000 रुपये) नहीं है, बल्कि यह आपके कुल इलिजिबल पीएफ बैलेंस पर निर्भर करता है।

जैसे अगर आपके पीएफ खाते में कुल पात्र बैलेंस ₹1 लाख है, तो ₹25,000 खाते में ही रहेंगे और आप अधिकतम ₹75,000 तक निकाल सकते हैं।

इलिजिबल बैलेंस में क्या शामिल है: इस बैलेंस में कर्मचारी का अंशदान, नियोक्ता का अंशदान और इस पर जमा हुआ ब्याज शामिल है।

नियम का उद्देश्य: EPFO ने यह 25% मिनिमम बैलेंस का प्रावधान इसलिए लागू किया है ताकि बार-बार पैसा निकालने से रिटायरमेंट के लिए जमा हो रहा कॉर्पस पूरी तरह खत्म न हो जाए।

कब निकाल सकते हैं पूरा पैसा: ध्यान दें कि यह नियम यह नहीं कहता कि बचा हुआ 25% पैसा कभी नहीं मिलेगा। नए प्रावधानों के तहत एक साल बाद विशेष परिस्थितियों में इसे भी निकाला जा सकता है। इसके अलावा, रिटायरमेंट, स्थायी विकलांगता, छंटनी, वीआरएस (VRS) या विदेश बसने जैसी स्थितियों में 100% पीएफ निकासी की अनुमति अलग से है।

आवश्यक सामाजिक जरूरतें

सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज (CBT) द्वारा स्वीकृत कॉमन फ्रेमवर्क के तहत अब आंशिक निकासी के लिए न्यूनतम सेवा अवधि केवल 12 महीने कर दी गई है।

1. बीमारी

सेवा की शर्त: 12 महीने

कितनी बार निकाल सकते हैं: एक वित्तीय वर्ष में अधिकतम 3 बार

2. पढ़ाई

सेवा की शर्त: 12 महीने

कितनी बार निकाल सकते हैं: पूरी सर्विस के दौरान अधिकतम 10 बार

3. शादी

सेवा की शर्त: 12 महीने

कितनी बार निकाल सकते हैं: पूरी सर्विस के दौरान अधिकतम 5 बार

घर और होम लोन से जुड़ी जरूरतें

आवास से जुड़ी आवश्यकताओं के लिए भी पीएफ से पैसा निकालने की प्रक्रिया बेहद आसान कर दी गई है:

किन कामों के लिए मिलेगा पैसा: घर या प्लॉट/साइट खरीदने, घर का निर्माण कराने, होम लोन चुकाने और मौजूदा मकान की मरम्मत या रेनोवेशन कराने के लिए।

शर्त और सीमा: 12 महीने की कुल सदस्यता के बाद इसके लिए आवेदन किया जा सकता है। पूरी सर्विस अवधि के दौरान हाउसिंग कैटेगरी में अधिकतम 5 बार निकासी की अनुमति है।

चूंकि यह नियम घर की जरूरतों के लिए पीएफ के इस्तेमाल की छूट देता है, लेकिन रिटायरमेंट फंड का इस्तेमाल करने से भविष्य में मिलने वाले कंपाउंडिंग यानी ब्याज पर ब्याज का नुकसान भी होता है।

विशेष परिस्थितियां

तीसरी कैटेगरी ‘विशेष परिस्थितियों’ की है, जिसके दायरे को और बढ़ा दिया गया है। इसके तहत सदस्य को बिना कोई खास वजह बताए भी आंशिक निकासी के लिए आवेदन करने की छूट दी गई है। इसमें अनिवार्य मिनिमम बैलेंस (25%) और लागू फ्रीक्वेंसी को ध्यान में रखते हुए पात्र बैलेंस का इस्तेमाल किया जा सकता है।

रिटायरमेंट फंड का रखें ध्यान

नए नियम पीएफ का पैसा निकालना आसान बनाते हैं, लेकिन यह आपकी रिटायरमेंट की बचत है। यदि कोई कर्मचारी बार-बार अधिकतम सीमा तक पैसा निकालता है, तो भले ही उसकी तात्कालिक ज़रूरत पूरी हो जाए, लेकिन रिटायरमेंट के समय उसका फंड काफी छोटा रह जाएगा। इसलिए 25% का मिनिमम बैलेंस एक बेसिक बैकअप सुरक्षा कवच की तरह काम करता है।

8th Pay Commission: डीए, पे-स्केल, सैलरी, पेंशन और इंक्रीमेंट… 8वें वेतन आयोग से क्या-क्या उम्मीदें? जानिए पूरा लेखा-जोखा

8th Pay Commission: इस हफ्ते बेंगलुरु में बड़ी बैठक, कर्मचारियों की सैलरी व पेंशन पर होंगी ये 5 बड़ी चर्चाएं!

8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग की बैठकों की श्रृंखला में अगला सबसे बड़ा पड़ाव बेंगलुरु है। आयोग की टीम 7 और 8 अक्टूबर को बेंगलुरु के दो दिवसीय दौरे पर रहेगी। बैठक में भाग लेने और अपनी मांगें रखने के लिए कर्मचारी संघों, एसोसिएशनों और पेंशनभोगी संगठनों को अधिकारिक पोर्टल के माध्यम से 18 सितंबर तक आवेदन करने का समय दिया गया था। आयोग इस बैठक में प्रतिनिधिमंडलों और हितधारकों के साथ आमने-सामने की विस्तृत चर्चा करने जा रहा है।

किन-किन बड़ी बातों पर होगी चर्चा?

बेंगलुरु बैठक में केंद्र सरकार के कर्मचारियों, पेंशनर्स, रेलवे, रक्षा प्रतिष्ठानों, आयकर और अन्य केंद्रीय विभागों के क्षेत्रीय प्रतिनिधि शामिल होंगे। चर्चा का मुख्य फोकस इन प्रमुख बिंदुओं पर रहेगा:

वेतन और फिटमेंट फैक्टर: नए वेतनमान के तहत बेसिक पे का निर्धारण करने वाले फिटमेंट फैक्टर पर अंतिम सहमति बनाना।

पेंशन और रिटायरमेंट बेनिफिट्स: पेंशनभोगियों की पेंशन संशोधन, कम्यूटेशन अवधि घटाने और फैमिली पेंशन के नियमों को आसान बनाने पर मंथन।

भत्ते: बेंगलुरु जैसे तेजी से बढ़ते और महंगे शहरों के लिए हाउस रेंट अलाउंस (HRA), ट्रांसपोर्ट अलाउंस और मेडिकल सुविधाओं में बढ़ोतरी पर चर्चा।

वार्षिक वेतन वृद्धि: मौजूदा 3% सालाना वेतन वृद्धि दर की समीक्षा और इसे बढ़ाने की मांग।

कार्य परिस्थितियां व पदोन्नति: कैडर पुनर्गठन और समयबद्ध पदोन्नति से जुड़े स्थानीय मुद्दे।

कर्मचारी यूनियंस की मुख्य मांगें

कर्मचारी यूनियनों और नेशनल काउंसिल-जेसीएम (NC-JCM) की ओर से 8वें वेतन आयोग के समक्ष रखी जा रही प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:

 1. न्यूनतम बेसिक सैलरी ₹69,000 करना: कर्मचारी संघों की मांग है कि न्यूनतम बेसिक सैलरी को मौजूदा ₹18,000 से बढ़ाकर ₹69,000 प्रति माह किया जाए।

2. 3.83 फिटमेंट फैक्टर की मांग: बेसिक पे के रिवीजन के लिए 3.833 फिटमेंट फैक्टर लागू करने का प्रस्ताव रखा गया है।

3. 5-यूनिट फैमिली फॉर्मूला: न्यूनतम वेतन तय करने के लिए कर्मचारी और परिवार के साथ आश्रित माता-पिता को भी शामिल करते हुए ‘5-यूनिट फॉर्मूला’ लागू करने की मांग।

4. वार्षिक इंक्रीमेंट 6% हो: सालाना इंक्रीमेंट को 3% से बढ़ाकर 6% करने की मांग की जा रही है।

5. कम्यूटेड पेंशन रीस्टोरेशन: कम्यूटेड पेंशन की बहाली अवधि को 15 साल से घटाकर 11 साल करने का प्रस्ताव।

ये सभी आंकड़े और शर्तें फिलहाल कर्मचारी यूनियनों द्वारा रखी गई मांगें हैं। आयोग की सिफारिशों और सरकार की अंतिम मंजूरी के बाद ही नई सैलरी और पेंशन की दरें तय होंगी।

8th Pay Commission पर 1 अक्टूबर को ये है 5 बड़े अपडेट्स! जानें आपकी सैलरी और पेंशन पर क्या होगा असर

8th Pay Commission: केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए 8वें वेतन आयोग से जुड़ी गतिविधियों ने रफ्तार पकड़ ली है। 1 अक्टूबर 2026 तक आयोग के कामकाज, बैठकों और कर्मचारियों की मांगों को लेकर 5 सबसे बड़े अपडेट्स सामने आए हैं, जिन्हें हर सरकारी कर्मचारी को जानना जरूरी है।

1. अक्टूबर में होंगी आयोग की 2 बड़ी बैठकें (बेंगलुरु और मुंबई दौरा)

8वें वेतन आयोग की टीम देश के अलग-अलग हिस्सों में जाकर कर्मचारियों और पेंशनर्स यूनियनों से सीधी बात कर रही है। आयोग 7 और 8 अक्टूबर को बेंगलुरु में और 22-23 अक्टूबर को मुंबई में बड़ी बैठकें करने जा रहा है। इन बैठकों में रेलवे, डिफेंस और सिविल कर्मचारियों के संगठन अपनी मांगें सीधे आयोग के सामने रखेंगे।

2. मीटिंग में शामिल होने की डेडलाइन (10 अक्टूबर)

अगर कोई मान्यता प्राप्त कर्मचारी संगठन या पेंशनर्स एसोसिएशन मुंबई की बैठक में हिस्सा लेकर अपना सुझाव देना चाहता है, तो आधिकारिक प्रक्रिया के तहत आवेदन करने की अंतिम तारीख 10 अक्टूबर 2026 रखी गई है। आयोग इन मेमोरेंडम और सुझावों के आधार पर ही अपनी सिफारिशें तैयार करेगा।

3. दशहरा पर डीए (DA Hike) का तोहफा संभव

त्योहारों के इस सीजन में कर्मचारियों के जुलाई से दिसंबर 2026 तक के महंगाई भत्ते (DA) में बढ़ोतरी का ऐलान किसी भी वक्त हो सकता है। माना जा रहा है कि सरकार डीए में 3% की बढ़ोतरी कर सकती है, जिससे कुल महंगाई भत्ता बढ़कर 63% हो जाएगा।

4. फिटमेंट फैक्टर और न्यूनतम सैलरी पर तगड़ी मांग

स्टाफ साइड (NC-JCM) और विभिन्न कर्मचारी संघों ने आयोग के सामने न्यूनतम बेसिक पे को ₹69,000 करने और फिटमेंट फैक्टर को 3.833 करने का प्रस्ताव रखा है। इसके साथ ही सालाना इंक्रीमेंट को 3% से बढ़ाकर 6% करने की भी मांग रखी गई है। हालांकि, आयोग ने अभी सैलरी या फिटमेंट फैक्टर पर कोई आधिकारिक फैसला नहीं सुनाया है।

5. रिपोर्ट सबमिशन और लागू होने की समयसीमा

3 नवंबर 2025 को गठित हुए 8वें वेतन आयोग को अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिए 18 महीने (मई 2027 तक) का समय मिला है। आयोग की रिपोर्ट 2027 के मध्य में आएगी और इसे 1 जनवरी 2026 से ही प्रभावी माना जाएगा जिसका एरियर कर्मचारियों को मिलेगा।

8th Pay Commission: खाते में आएंगे ₹18 लाख! वेतन आयोग की देरी से एरियर में बंपर इजाफा! जानें लेवल 6, 7 और 8 का पूरा कैलकुलेशन

8th Pay Commission Arrears Calculation: 8वें वेतन आयोग को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बीच खूब हलचल है। आयोग इस समय फिटमेंट फैक्टर, वेतन पुनरीक्षण, भत्तों और पेंशन से जुड़े मुद्दों पर हितधारकों से लगातार बैठकें कर रहा है। चंडीगढ़, तमिलनाडु, पुडुचेरी और राजस्थान में चर्चा के बाद, आयोग की अगली बैठकें 7-8 अक्टूबर को बेंगलुरु और 22-23 अक्टूबर 2026 को मुंबई में आयोजित होने जा रही हैं।

कर्मचारियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि नया वेतन आयोग कब से लागू होगा। 7वें वेतन आयोग का 10 साल का कार्यकाल 31 दिसंबर 2025 को समाप्त हो चुका है। अगर 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें 1 जनवरी 2026 से लागू मानी जाती हैं और अंतिम अमल में 20 से 24 महीने की देरी होती है, तो कर्मचारियों को एकमुश्त भारी-भरकम एरियर मिलेगा।

गणित के हिसाब से देखें तो पे-लेवल 8 के कर्मचारियों को 24 महीने की देरी पर लगभग ₹18 लाख (₹17.93 लाख) तक का एरियर मिल सकता है।

कब तक आएगी 8वें वेतन आयोग की रिपोर्ट?

नवंबर 2025 में तय नियमों के मुताबिक, आयोग को अपनी सिफारिशें सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है, जो मई या जून 2027 के आसपास पूरा होता है। रिपोर्ट सौंपने के बाद सरकार इसकी समीक्षा करेगी और फिर नए वेतन ढांचे का नोटिफिकेशन जारी करेगी। अगर प्रक्रिया में 20 से 24 महीने का समय लगता है, तो 1 जनवरी 2026 से प्रभावी तिथि मानकर कर्मचारियों को एरियर दिया जाएगा।

कैसे होता है एरियर का कैलकुलेशन?

एरियर की गणना मूल रूप से संशोधित बेसिक पे और मौजूदा बेसिक पे के अंतर को देरी के महीनों (20 या 24 महीने) से गुणा करके की जाती है।

फॉर्मूला: मासिक वृद्धि=मौजूदा बेसिक पे×फिटमेंट फैक्टर−मौजूदा बेसिक पे

कुल एरियर=मासिक वृद्धि×विलंब के महीने (20 या 24)

लेवल 6, 7 और 8 के लिए एरियर का पूरा कैलकुलेशन कार्ड

विभिन्न फिटमेंट फैक्टर 2.57 के आधार पर पे-लेवल 6, 7 और 8 के कर्मचारियों का अनुमानित एरियर इस प्रकार होगा:

लेवल 6, 7 और 8 के लिए एरियर का पूरा कैलकुलेशन कार्ड

HRA, DA और ट्रैवल अलाउंस (TA) का क्या होगा?

इस बात का ध्यान दें कि ऊपर दिए गए आंकड़े केवल मूल वेतन में वृद्धि पर आधारित एक सांकेतिक गणना हैं:

मकान किराया भत्ता (HRA): HRA बेसिक पे से जुड़ा होता है, इसलिए नया वेतन लागू होने पर HRA में भी बढ़ोतरी होगी।

महंगाई भत्ता (DA) और TA: ट्रांसपोर्ट अलाउंस (TA) महंगाई भत्ते (DA) से जुड़ा होता है, जो हर 6 महीने में अलग से रिवाइज होता है।

इसलिए कर्मचारियों का अंतिम टेक-होम एरियर इन सभी भत्तों को मिलाकर इससे भी अधिक हो सकता है। अंतिम एरियर की रकम 8वें वेतन आयोग की अंतिम सिफारिशों और सरकार के आधिकारिक फैसले पर निर्भर करेगी।

8th Pay Commission से पेंशनर्स की हो सकती है बल्ले-बल्ले! ₹45,000 न्यूनतम पेंशन और OPS बहाली की उठी मांग

8th Pay Commission OPS vs NPS Demand: देश में जबसे 8वें वेतन आयोग का गठन हुआ है तभी से सरकारी कर्मचारियों में सैलरी और पेंशन को लेकर चर्चा तेज है। कोई फिटमेंट फैक्टर की बात करता है तो कोई भत्तों की। वही रिटायर हो चुके कर्मचारियों के बीच पुरानी पेंशन योजना और नेशनल पेंशन सिस्टम को लेकर बहस होती है।

जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में गठित 8वें वेतन आयोग का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। 3 नवंबर 2025 को गठित इस आयोग को 10 महीने से अधिक का समय हो चुका है। देश के अलग-अलग शहरों में कर्मचारी यूनियनों और एसोसिएशनों के साथ लगातार बैठकें की जा रही हैं। सितंबर में पुडुचेरी और चंडीगढ़ में हुई बैठकों के बाद अब 7 और 8 अक्टूबर को बेंगलुरु में केंद्रीय कर्मचारियों की मांगें सुनी जाएंगी।

आयोग को अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपने के लिए 18 महीने का वक्त दिया गया है, जिसके अनुसार रिपोर्ट मई-जून 2027 तक सरकार को सौंपी जा सकती है। बैठकों में फिटमेंट फैक्टर, सैलरी रिवीजन और भत्तों के अलावा सबसे गर्मा-गर्मी वाला विषय पुरानी पेंशन योजना (OPS) बनाम नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) का बना हुआ है। साल 2004 के बाद सेवा में आए केंद्रीय कर्मचारी और पेंशनभोगी संगठन अब ‘गारंटीड पेंशन’ की मांग पर अड़ गए हैं।

क्यों केंद्रीय कर्मचारियों के लिए सबसे बड़ा मुद्दा बना ‘OPS vs NPS’?

वर्ष 2004 के बाद भर्ती हुए कर्मचारियों के लिए शुरू की गई अंशदायी पेंशन व्यवस्था से देश भर के कर्मचारी संगठन असंतुष्ट हैं। 8वें वेतन आयोग को सौंपे गए ज्ञापनों में कर्मचारी यूनियनों ने साफ कहा है कि मौजूदा बाजार-आधारित रिटर्न वाली योजनाएं उनके और उनके परिवार के भविष्य को आर्थिक सुरक्षा देने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रही हैं।

कर्मचारियों की मांग है कि उन्हें अनिश्चितता के माहौल से निकालकर पुरानी ‘परिभाषित लाभ’ वाली व्यवस्था के तहत लाया जाए।

प्रमुख कर्मचारी संगठनों की क्या हैं 4 बड़ी मांगें?

अलग-अलग केंद्रीय कर्मचारी और पेंशनभोगी यूनियनों ने 8वें वेतन आयोग के समक्ष अपनी विस्तृत मांगें रखी हैं:

A. मिनिस्टीरियल स्टाफ एसोसिएशन (सर्वे ऑफ इंडिया): सर्वे ऑफ इंडिया के कर्मचारियों ने पुरानी पेंशन योजना (OPS) की पूरी तरह बहाली की मांग की है। उनकी मांग है कि सेवानिवृत्ति के समय कर्मचारी के अंतिम प्राप्त मूल वेतन का कम से कम 50% हिस्सा गारंटीड पेंशन के रूप में तय किया जाए।

B. फेडरेशन ऑफ नेशनल पोस्टल ऑर्गेनाइजेशन्स (FNPO): डाक विभाग के इस प्रमुख संगठन ने तर्क दिया है कि NPS और हाल ही में घोषित यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) जैसी योजनाएं कर्मचारियों की आशंकाओं को दूर नहीं कर पा रही हैं। इसलिए NPS और UPS के दायरे में आने वाले सभी कर्मचारियों को वापस पुरानी परिभाषित-लाभ पेंशन व्यवस्था (OPS) में शामिल किया जाए।

C. रेलवे सीनियर सिटीजन्स वेलफेयर सोसाइटी (RSCWS): रेलवे पेंशनभोगियों के इस संगठन ने पूर्व कर्मचारियों के वित्तीय और स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया है। संघ ने सरकार से एक गारंटीड न्यूनतम पेंशन का प्रावधान करने और पेंशन सुरक्षा को और मजबूत करने का आग्रह किया है।

D. भारत पेंशनर्स समाज (BPS): पेंशनभोगियों के इस सबसे बड़े मंच ने आयोग के सामने आंकड़ों के साथ बड़ी मांग रखी है। BPS ने न्यूनतम पेंशन को बढ़ाकर ₹45,000 प्रति माह करने, अंतिम वेतन का 67% पेंशन देने और फैमिली पेंशन को अंतिम वेतन का 50% करने की सिफारिश की है।

आगे क्या होगा? जानिए कब लागू हो सकती हैं सिफारिशें

वेतन आयोग देश भर के अलग-अलग जोनों में जाकर सभी हितधारकों की बातें सुन रहा है। इन बैठकों में फिटमेंट फैक्टर को बढ़ाने, न्यूनतम वेतन में बढ़ोतरी करने और पेंशन बराबरी जैसे गंभीर मुद्दों पर भी ज्ञापन प्राप्त हुए हैं।

आयोग अपनी रिपोर्ट मई-जून 2027 तक केंद्र सरकार को सौंपेगा। इसके बाद सरकार द्वारा सिफारिशें मंजूर होने पर इसे लागू किया जाएगा। अब सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि क्या केंद्र सरकार मौजूदा NPS/UPS जैसे अंशदायी ढांचे को ही मजबूत करेगी या फिर कर्मचारी संगठनों के भारी दबाव में पेंशन संरचना में कोई क्रांतिकारी बदलाव लेकर आएगी।

8वें वेतन आयोग के तहत पेंशन सुधारों को लेकर जिस तरह से केंद्रीय कर्मचारी एकजुट होकर ‘गारंटीड पेंशन’ और अंतिम वेतन के 50% के फिक्स फॉर्मूले की मांग कर रहे हैं, उससे सरकार पर नैतिक दबाव बढ़ गया है। 2027 में आने वाली फाइनल रिपोर्ट यह तय करेगी कि 2004 के बाद भर्ती हुए लाखों कर्मचारियों का रिटायरमेंट सुरक्षित हो पाएगा या नहीं।

8th Pay Commission: कितनी बढ़ेगी सैलरी? DA मर्जर, फिटमेंट फैक्टर और HRA पर ये है बड़े अपडेट्स

8th Pay Commission Salary Hike Updates: केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए आठवें वेतन आयोग को लेकर सरगर्मियां तेज हैं। 3 नवंबर 2025 को गठित हुआ 8वां वेतन आयोग इस समय देशभर में कर्मचारी यूनियनों, पेंशनभोगी संघों, रेलवे और रक्षा बलों के प्रतिनिधियों के साथ परामर्श के दौर में है। हाल ही में चंडीगढ़, चेन्नई और पुडुचेरी में बैठकों के बाद अगले महीने आयोग की टीम बेंगलुरु के दौरे पर जाने वाली है।

वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने पर 1 करोड़ से अधिक कर्मचारियों और पेंशनर्स की सैलरी और पेंशन में बंपर इजाफा होगा। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि आपकी सैलरी कितनी बढ़ेगी और किन-किन घटकों में बड़ा बदलाव होने वाला है?

सैलरी हाइक के ये है 4 मुख्य पिलर

मंत्रिमंडल द्वारा मंजूर की गई टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToR) के तहत आठवां वेतन आयोग कर्मचारियों के वेतन, भत्तों और पेंशन ढांचे की समीक्षा कर रहा है। सैलरी रिवीजन मुख्य रूप से इन 4 घटकों पर निर्भर करेगा:

1. बेसिक पे: इसमें नया वेतन मैट्रिक्स, पे-स्ट्रक्चर और सबसे अहम फिटमेंट फैक्टर शामिल है।

2. भत्ते: महंगाई भत्ता (DA/DR), मकान किराया भत्ता (HRA) और ट्रैवल अलाउंस (TA)।

3. कैश और अन्य लाभ: सालाना इंक्रीमेंट, प्रमोशन, परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव और रिवॉर्ड।

4. अन्य ढांचागत सुधार: कामकाजी जरूरतें और विभिन्न पदों का युक्तिकरण।

बेसिक पे में महंगाई भत्ते के विलय की मांग क्यों?

कर्मचारी संगठन और पेंशनर्स लगातार मांग कर रहे हैं कि 7वें वेतन आयोग की सिफारिशों के तहत डीए का विलय मूल वेतन में किया जाए। बेसिक सैलरी ही वह आधार है जिससे प्रोविडेंट फंड (PF) योगदान, पेंशन, ग्रेच्युटी और अन्य भत्तों की गणना होती है। अगर डीए को बेसिक पे में मिला दिया जाता है, तो बेसिक सैलरी अपने आप बढ़ जाएगी, जिससे मिलने वाले सभी अन्य भत्ते और रिटायर्मेंट बेनेफिट्स कई गुना बढ़ जाएंगे।

फिटमेंट फैक्टर से ही होगा पूरा खेल

फिटमेंट फैक्टर एक गणितीय गुणांक है, जिसका उपयोग पुराना बेसिक वेतन बदलकर नया बेसिक वेतन तय करने के लिए किया जाता है। 7वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 2.57 था।

8वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर कितना होगा इस पर फिलहाल आयोग में चर्चा जारी है, लेकिन विश्लेषकों और कर्मचारी यूनियनों की रिपोर्ट के मुताबिक यह 2.28 से लेकर 3.83 के बीच तय हो सकता है। अगर फिटमेंट फैक्टर 3.68 या 3.83 तक जाता है, तो कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक सैलरी में रिकॉर्ड बढ़ोतरी होगी।

HRA में संशोधन: 2017 के बाद पहली बार बदलाव की तैयारी!

नेशनल काउंसिल – जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) और ऑल इंडिया एनपीएस एंप्लाइज फेडरेशन ने आयोग के सामने HRA बढ़ाने की पुरजोर वकालत की है। 2017 के बाद से मकान किराए भत्ते (HRA) की दरों में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है, जबकि शहरों में कमरों और मकानों का किराया काफी बढ़ चुका है।

कर्मचारी संगठनों का प्रस्ताव है कि शहरों की कैटेगरी के हिसाब से HRA को X श्रेणी के शहरों के लिए 36%, Y श्रेणी के लिए 24% और Z श्रेणी के शहरों के लिए 12% किया जाए। साथ ही, जब-जब डीए बढ़े, तब-तब HRA में भी अपने आप बढ़ोतरी का नियम बने।

कब तक लागू होंगी सिफारिशें?

गठन के नियमों के अनुसार आठवें वेतन आयोग को अपनी अंतिम सिफारिशें सौंपने के लिए 18 महीने का वक्त (मई 2027 तक) मिला है। वैसे जानकारों का मानना है कि फरवरी या अप्रैल 2027 के आसपास कुछ अंतरिम सिफारिशों की घोषणा की जा सकती है। पिछले वेतन आयोगों के ट्रेंड को देखें तो आयोग की रिपोर्ट आने के बाद इसे पूरी तरह लागू होने और एरियर जारी होने में 2029 या 2030 तक का समय लग सकता है।

 

8वें वेतन आयोग में 3.25 फिटमेंट फैक्टर और Level 10 की डिमांड, समझिए सरकारी कर्मचारियों की सैलरी कितनी बढ़ सकती है

आठवें वेतन आयोग लगातार एंप्लॉयीज संगठनों, एंप्लॉयीज यूनियंस और इंस्टीट्यूशंस के प्रतिनिधियों से मिलकर उनका राय जानने की कोशिश कर रहा है। चंडीगढ़ में आयोग की दो दिन की मीटिंग 18 सितंबर को खत्म हो गई। आयोग अब 7 और 8 अक्तूबर को बेंगलुरु में मामले से जुड़े पक्षों की राय जानने की कोशिश करेगा।

चंडीगढ़ में आयोग की बैठक के बाद नर्सेज वेल्फेयर एसोसिएशंस (NWA) और पोस्ट ग्रेचुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (PGIMER) ने बताया कि उन्हें भरोसा है कि आयोग उनकी मांगें मान लेगा। नर्सों के एसोसिएशंस ऑल इंडिया एनपीएस एंप्लॉयीज फेडरेशंस (AINEF) से जुड़े हैं।

AINEF से जुड़े नर्सों के एसोसिएशंस का मानना है कि आयोग अगर उनकी मांगें मान लेता है तो इससे केंद्र सरकार के हॉस्पिटल्स, पीजीआई, ईएसआईसी हॉस्पिटल्स, एम्स और दूसरे हेल्थकेयर इंस्टीट्यूशंस के 3 लाख से ज्यादा नर्सों को फायदा होगा। NWA ने कहा, “8वें वेतन आयोग और नर्सेज वेल्फेयर एसोसिएशंस की प्रतिनिधियों के बीच काफी अहम और फायदेमंद बातचीत आज पूरी हो गई।”

NWA की दलील है कि नर्सिंग अधिकारियों के लिए लेवल-10 एंट्री-लेवल पे की डिमांड जीएनएम से बीएससी नर्सिंग की अपग्रेडेड एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया के मुताबिक है। यह मिनिस्ट्री ऑफ हेल्थ एंड फैमिली वेल्फेयर की उस सिफारिश के भी मुताबिक है, जिसमें नर्सिंग अधिकारियों को मिलिट्री नर्सिंग सर्विस के बराबर रखने की बात कही गई है।

उनकी मांगों में सभी नर्सिंग अधिकारियों के लिए डेडिकेटेड नाइट ड्यूटी अलाउंस और R1H1 मैट्रिक्स के तहत रिस्क एंड हार्डशिप अलाउन्स की मांगें शामिल हैं। उनकी दलील है कि नर्स का काम काफी चैलेंजिंग है। उन्होंने हेल्थकेयर वर्कर्स के लिए कंप्रिहेंसिव टर्म इंश्योरेंस और हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी की भी मांग की है।

एसोसिएशन ने हाउस रेंट अलाउन्स (HRA) और ट्रांसपोर्ट अलाउन्स (TA) के कैलकुलेशन के मकसद से चंडीगढ़ को A1 सिटी की कैटेगरी में शामिल करने की भी मांग की है। इसके अलावा एसोसिएशन ने नर्सिंग अलाउन्स, ड्रेस अलाउन्स और स्पेशल अलाउन्स की भी मांग की है। एसोशिएशन ओल्ड पेंशन स्कीम की भी वापसी चाहता है।

PGIMR के नर्सों ने 3.25 फिटमेंट फैक्टर की भी मांग की है। सातवें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 2.57 था। एसोसिएशन का कहना है कि बढ़ती लिविंग कॉस्ट, हाउसिंग, हेल्थकेयर और एजुकेशन से जुड़े खर्चों को देखते हुए ज्यादा फिटमेंट फैक्टर जरूरी है। उनकी मांग एनुअल इंक्रीमेंट को 3 फीसदी से बढ़ाकर 5 फीसदी करने की भी है। उनकी दलील है कि अभी जितनी इंक्रीमेंट होती है, उससे बढ़ते खर्च से निपटना मुश्किल है।

8th Pay Commission में इस नए फॉर्मूले से बदल जाएगा पूरा सैलरी स्ट्रक्चर! बेसिक पे में होगा बंपर इजाफा

8th Pay Commission Minimum Pay Calculation: 8वें वेतन आयोग फिलहाल देशभर में बैठके कर के विभिन्न कर्मचारी संगठनों से उनकी मांगों का ब्योरा तैयार कर रहा है। इसी बीच केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए एक बड़ा अपडेट है है। आयोग के सामने दशकों से चले आ रहे उस नियम को बदलने की जोरदार मांग उठी है, जिसके आधार पर सरकारी कर्मचारियों की न्यूनतम सैलरी तय की जाती है।

अब तक वेतन आयोग न्यूनतम सैलरी का हिसाब लगाते समय एक परिवार में केवल 3 यूनिट (कर्मचारी, पति/पत्नी और 2 बच्चे) को ही जोड़ता था। लेकिन कर्मचारी यूनियनों और पेंशनभोगी संगठनों ने 8वें वेतन आयोग के समक्ष मांग रखी है कि इस परिवार यूनिट में बुजुर्ग आश्रित माता-पिता को भी शामिल किया जाए।

अगर इस फॉर्मूले को मंजूरी मिलती है, तो कर्मचारियों की बेसिक पे और पेंशन में भारी-भरकम बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। आइए आसान भाषा में समझते हैं इस नए गणित को।

3 यूनिट नहीं, अब 5.2 यूनिट पर तय हो सैलरी!

करीब 10 लाख पेंशनभोगियों का प्रतिनिधित्व करने वाले भारत पेंशनर्स समाज (BPS) और कर्मचारियों की शीर्ष संस्था नेशनल काउंसिल ऑफ जेसीएम (NCJCM-Staff Side) ने 8वें वेतन आयोग को सौंपे ज्ञापन में एक समान नया फॉर्मूला पेश किया है:

कर्मचारी (स्वयं): 1.0 यूनिट

पति या पत्नी: 1.0 यूनिट

दो बच्चे: 0.8 + 0.8 = 1.6 यूनिट

दो आश्रित माता-पिता: 0.8 + 0.8 = 1.6 यूनिट

इस हिसाब से कुल परिवार की यूनिट 5.2 (राउंड ऑफ में 5 यूनिट) बनती है। यूनियनों का तर्क है कि भारत में एक कर्मचारी न केवल अपने बच्चों का बल्कि अपने बुजुर्ग माता-पिता का भी मुख्य कमाऊ सहारा होता है। इसके अलावा ‘माता-पिता और वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण अधिनियम’ और ‘सोशल सिक्योरिटी कोड 2020’ भी कानूनी रूप से माता-पिता की जिम्मेदारी बच्चों पर डालता है।

सैलरी का नया गणित: ₹19,900 से सीधे ₹69,000 न्यूनतम बेसिक पे?

अगर 5 यूनिट के इस नए फॉर्मूले को 8वां वेतन आयोग स्वीकार कर लेता है, तो न्यूनतम सैलरी की गणना पूरी तरह बदल जाएगी।

NCJCM और BPS द्वारा दिए गए आंकड़े के अनुसार:

फूड बास्केट: 5 यूनिट के परिवार के लिए भोजन (चावल, दाल, सब्जी, दूध, अंडा, मांस आदि) का मासिक खर्च करीब ₹24,443 बैठता है।

अन्य खर्च: इसमें 10% मसाले/पेय पदार्थ, 7.5% मकान किराया, 20% ईंधन व बिजली, 25% स्किल डेवलपमेंट, 25% त्योहार व शादी-ब्याह और 5% टेक्नोलॉजी खर्च जोड़ने पर न्यूनतम सैलरी ₹68,947 (राउंड ऑफ ₹69,000) बनती है।

फिटमेंट फैक्टर: ₹69,000 की न्यूनतम बेसिक पे के आधार पर 3.833 का फिटमेंट फैक्टर निकलकर आता है, जिसे कर्मचारियों और पेंशनभोगियों दोनों पर समान रूप से लागू करने की मांग की गई है।

(नोट: NCJCM के एक अन्य अनुमान के अनुसार, 2025-26 की महंगाई दरों के आधार पर 5 यूनिट का न्यूनतम वेतन ₹80,444 तक भी जा सकता है)।

पिछले वेतन आयोगों में कैसे बदली मिनिमम बेसिक सैलरी?

NCJCM द्वारा 8वें वेतन आयोग को सौंपे गए आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले आयोगों में न्यूनतम वेतन किस तरह बढ़ा:

8th Pay Commission में इस एक नए फॉर्मूले से बदल जाएगा पूरा सैलरी स्ट्रक्चर! बेसिक पे में होगा बंपर इजाफा

पेंशनभोगियों और कर्मचारियों पर क्या होगा इसका बड़ा असर?

रेलवे सीनियर सिटीजन्स वेलफेयर सोसाइटी (RSCWS) ने भी तर्क दिया है कि वर्तमान में भत्तों पर ज्यादा और बेसिक पे पर कम ध्यान दिया जाता है। चूंकि पेंशन और ग्रेच्युटी पूरी तरह से बेसिक पे पर निर्भर करती हैं, इसलिए बेसिक पे कम होने से रिटायर्ड कर्मचारियों को नुकसान होता है।

अगर 8वां वेतन आयोग 5 यूनिट का फॉर्मूला मान लेता है, तो बेसिक सैलरी की शुरुआती सीमा काफी ऊपर चली जाएगी। इसका सीधा फायदा यह होगा कि नए कर्मचारियों की सैलरी के साथ-साथ पुराने पेंशनभोगियों की पेंशन में भी कई गुना का इजाफा होगा।

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, परिवार की परिभाषा में माता-पिता को शामिल करने की यह मांग केवल आर्थिक नहीं, बल्कि व्यावहारिक रूप से बेहद जायज लगती है। अब सबकी निगाहें 8वें वेतन आयोग के अंतिम फैसले पर टिकी हैं कि क्या वह इस 5.2 यूनिट वाले फॉर्मूले को स्वीकार करता है या पुराने 3-यूनिट ढर्रे पर ही कायम रहता है। यह फैसला आने वाले एक दशक तक देश के लाखों कर्मचारियों और पेंशनरों का भविष्य तय करेगा।

8th Pay Commission: वेतन आयोग के इस नियम से टेंशन में पेंशनर्स, REWA ने PM मोदी से कर दी ये बड़ी मांग

8th Pay Commission Pension Revision: 8वें वेतन आयोग को लेकर एक तरफ जहां बैठकों का दौर जारी है, वहीं दूसरी तरफ देश के करीब 69 लाख पेंशनर्स और फैमिली पेंशनर्स की धड़कनें तेज हो गई हैं। पेंशनभोगियों के मन में यह बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि क्या 8वां वेतन आयोग उनकी पेंशन में भी बढ़ोतरी की सिफारिश करेगा या नहीं?

इसी भ्रम को दूर करने के लिए रिटायर्ड एंप्लाइज वेलफेयर एसोसिएशन (REWA) ने सीधा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखी है। एसोसिएशन ने सरकार से मांग की है कि 8वें वेतन आयोग के नियम और शर्तों यानी ‘टर्म्स ऑफ रेफरेंस’ (ToR) में तुरंत संशोधन किया जाए, ताकि 1 जनवरी 2026 से पहले रिटायर हुए कर्मचारियों की पेंशन रिवीजन का रास्ता पूरी तरह साफ हो सके।

आइए आसान भाषा में समझते हैं कि पूरा मामला क्या है और पेंशनर्स क्यों चिंतित हैं।

बैठकों का दौर जारी, लेकिन पेंशनर्स को क्यों है डर?

8वां वेतन आयोग इन दिनों अलग-अलग राज्यों का दौरा कर कर्मचारियों और यूनियनों के साथ बैठकें कर रहा है। आयोग ने 7 और 8 सितंबर को चेन्नई के आईटीसी ग्रैंड चोल में बैठकें कीं और आज, 10 सितंबर को पुडुचेरी में दिनभर की अहम बैठक चल रही है। इन बैठकों में केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की सैलरी, भत्तों और पेंशन ढांचे पर मंथन हो रहा है।

लेकिन इस सब के बीच पेंशनर्स एसोसिएशन REWA का कहना है कि सरकार द्वारा तय किए गए नियमों (ToR) में पेंशनर्स को लेकर स्थिति पूरी तरह साफ नहीं है।

नियमों का वो पेच, जिसने बढ़ाई 69 लाख पेंशनर्स की चिंता

REWA के मुताबिक, सारा भ्रम वेतन आयोग के नोटिफिकेशन के पॉइंट 2(e) की वजह से पैदा हुआ है। इस नियम में डेथ-कम-रिटायरमेंट ग्रैच्युटी (DCRG), एनपीएस (NPS), यूपीएस (UPS) और पेंशन स्ट्रक्चर की समीक्षा की बात तो कही गई है, लेकिन यह ‘कर्मचारियों’ के संदर्भ में लिखा गया है।

REWA का कहना है कि इसमें 1 जनवरी 2026 से पहले रिटायर हो चुके पेंशनर्स और फैमिली पेंशनर्स का स्पष्ट रूप से जिक्र नहीं है। इसी वजह से लाखों पेंशनभोगियों में यह डर पैदा हो गया है कि कहीं आयोग की सिफारिशें केवल मौजूदा कर्मचारियों तक ही सीमित न रह जाएं।

पिछले वेतन आयोगों से कैसे अलग है 8वां CPC?

एसोसिएशन ने पीएम मोदी को भेजी अपनी चिट्ठी में पुराने वेतन आयोगों के आंकड़ों का हवाला भी दिया है:

7वां वेतन आयोग: इसके नियम (ToR) में रिटायरमेंट से जुड़े फायदों और प्री-रिटायरमेंट (पुराने) पेंशनर्स की पेंशन रिवीजन का साफ जिक्र था।

5वां और 6ठा वेतन आयोग: इन दोनों आयोगों के नियमों में भी ‘पेंशनर्स’ और ‘फैमिली पेंशनर्स’ शब्द को स्पष्ट रूप से शामिल किया गया था।

REWA का कहना है कि उन्होंने इससे पहले वित्त मंत्री और वित्त सचिव से भी इस मुद्दे पर स्पष्टीकरण मांगा था, लेकिन सरकार की ओर से कोई आधिकारिक जवाब नहीं आया। इसी वजह से सोशल मीडिया और पेंशनर्स यूनियनों के बीच इस पर असमंजस लगातार बढ़ रहा है।

पेंशनर्स एसोसिएशन की सरकार से क्या हैं 2 मुख्य मांगें?

REWA ने प्रधानमंत्री से अपील करते हुए दो प्रमुख बातें रखी हैं:

नियमों में हो औपचारिक बदलाव: 8वें वेतन आयोग के ToR में आधिकारिक संशोधन कर यह साफ लिखा जाए कि आयोग 1 जनवरी 2026 से पहले रिटायर हुए सभी पेंशनभोगियों और फैमिली पेंशनर्स की पेंशन बढ़ाने की सिफारिश करेगा।

अंतरिम प्रेस नोट जारी हो: जब तक औपचारिक संशोधन नहीं होता, तब तक केंद्र सरकार एक प्रेस नोट या बयान जारी कर लाखों पेंशनर्स का भ्रम और तनाव दूर करे।