DA Hike: दीवाली से पहले केंद्रीय कर्मचारियों की बल्ले-बल्ले! जानिए कितनी बढ़कर आएगी आपकी अक्टूबर की सैलरी!

DA Hike Update: केंद्र सरकार के करीब 1.2 करोड़ कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को जुलाई 2026 से देय महंगाई भत्ते (DA) और महंगाई राहत (DR) में बढ़ोतरी का बेसब्री से इंतजार है। इस बार महंगाई भत्ते में 3 फीसदी बढ़ोतरी की पूरी संभावना जताई जा रही है, जिससे DA 60% से बढ़कर 63% हो जाएगा। वैसे केंद्र सरकार की ओर से अभी आधिकारिक घोषणा और मंजूरी की तारीख तय होना बाकी है।

8 नवंबर को दीवाली है। इसे देखते हुए कर्मचारी संगठन दीवाली से पहले इस किस्त को जारी करने की मांग कर रहे हैं। 14 अक्टूबर को ‘कॉन्फेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट एंप्लाइज एंड वर्कर्स’ ने कैबिनेट सचिव को पत्र लिखकर 16 अक्टूबर को देशव्यापी प्रदर्शन का आह्वान भी किया था, जिसमें 1 जुलाई से लंबित डीए/डीआर और दिवाली बोनस की मांग शामिल थी।

सरकार ने गैर-राजपत्रित कर्मचारियों के लिए 30 दिनों के एड-हॉक बोनस (अधिकतम ₹6,908) और 11.4 लाख से अधिक रेलवे कर्मचारियों के लिए 78 दिनों के पीएलबी बोनस (अधिकतम ₹17,951) की घोषणा कर दी है। लेकिन बोनस जहां एकमुश्त मिलता है, वहीं DA बढ़ोतरी से हर महीने की सैलरी और पेंशन में स्थायी इजाफा होता है।

3% DA Hike से किसकी कितनी बढ़ेगी सैलरी?

महंगाई भत्ते की गणना मूल वेतन के आधार पर की जाती है। अगर डीए 60% से बढ़कर 63% होता है, तो अलग-अलग बेसिक पे पर हर महीने और सालाना होने वाले लाभ का पूरा गणित इस प्रकार है:

₹18,000 बेसिक पे पर सैलरी हाइक

  • मौजूदा DA (60%): ₹10,800 प्रति माह
  • नया DA (63%): ₹11,340 प्रति माह
  • मासिक फायदा: ₹540 प्रति माह
  • वार्षिक फायदा: ₹6,480 प्रति वर्ष

₹25,500 बेसिक पे पर सैलरी हाइक

मासिक फायदा: ₹765 प्रति माह

वार्षिक फायदा: ₹9,180 प्रति वर्ष

₹35,400 बेसिक पे पर सैलरी हाइक

मासिक फायदा: ₹1,062 प्रति माह

वार्षिक फायदा: ₹12,744 प्रति वर्ष

₹44,900 बेसिक पे पर सैलरी हाइक

मासिक फायदा: ₹1,347 प्रति माह

वार्षिक फायदा: ₹16,164 प्रति वर्ष

₹56,100 बेसिक पे पर सैलरी हाइक

मासिक फायदा: ₹1,683 प्रति माह

वार्षिक फायदा: ₹20,196 प्रति वर्ष

एरियर और 8वें वेतन आयोग का स्टेटस

1 जुलाई से लागू होने वाली इस बढ़ोतरी के कारण कर्मचारियों को एरियर यानी पिछला बकाया भी मिलेगा। जैसे ₹18,000 बेसिक पे वाले कर्मचारी को केवल जुलाई, अगस्त और सितंबर महीने का कुल ₹1,620 एरियर मिलेगा। इसी अनुपात में पेंशनभोगियों को भी डीआर (DR) का एरियर दिया जाएगा।

एक साल में 2 बार बढ़ता है डीए/डीआर

केंद्र सरकार औद्योगिक श्रमिकों के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI-IW) के आधार पर साल में दो बार (1 जनवरी और 1 जुलाई) डीए/डीआर में संशोधन करती है। यह लंबित डीए संशोधन 8वें वेतन आयोग से पूरी तरह अलग है। 3 नवंबर 2025 को गठित 8वें वेतन आयोग को अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है, जिसकी समय सीमा मई 2027 के आसपास है।

21 अक्टूबर को केंद्रीय कैबिनेट की बैठक होने वाली है। इस बैठक में जुलाई 2026 के डीए और डीआर संशोधन पर बड़ा फैसला आ सकता है। वैसे जब तक सरकार की ओर से आधिकारिक मुहर नहीं लग जाती, तब तक कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को अंतिम घोषणा का इंतजार करना होगा।

अगले साल कितनी होगी सैलरी हाइक? Aon सर्वे में आया ये आंकड़ा, जानिए किन सेक्टरों में होगी बंपर बढ़ोतरी

Salary Hike Projection: वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और ट्रेड रिस्क के बावजूद भारत में कर्मचारियों के लिए अच्छी खबर सामने आई है। ग्लोबल प्रोफेशनल सर्विसेज फर्म Aon plc के ‘Annual Salary Increase and Turnover Survey for India 2026-27’ के मुताबिक, अगले वित्त वर्ष में देश में औसत सैलरी हाइक 9.1% रहने का अनुमान है, जो कि पिछले साल के 9% से मामूली रूप से ज्यादा है। मजबूत घरेलू खपत और निरंतर निवेश के कारण देश में बिजनेस कॉन्फिडेंस बना हुआ है।

किन सेक्टरों में मिलेगी सबसे ज्यादा सैलरी हाइक?

सर्वे के अनुसार, सभी सेक्टरों में एक जैसी बढ़ोतरी नहीं होगी। कुछ खास सेक्टर्स टैलेंट की मांग और ग्रोथ के चलते सबसे आगे रहने वाले हैं:

NBFC: नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियां 10.1% की सबसे ऊंची सैलरी ग्रोथ के साथ सूची में सबसे आगे रहेंगी।

एनर्जी: ऊर्जा सेक्टर में वेतन वृद्धि औसतन 9.9% तक रहने की उम्मीद है।

रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर: इस क्षेत्र में कर्मचारियों को 9.8% तक की सैलरी हाइक मिल सकती है।

एट्रिशन रेट और टैलेंट की जंग

कंपनियों के बजट स्थिर होने के बावजूद कर्मचारियों के नौकरी छोड़ने का सिलसिला बढ़ा है। ओवरऑल एट्रिशन रेट बढ़कर 2026 में 18% पर पहुंच गया है, जो कि 2025 में 16.2% और 2024 में 17.1% था। इससे यह साफ होता है कि कुशल और अनुभवी टैलेंट को अपने पास रोके रखने के लिए कंपनियों के बीच मुकाबला काफी कड़ा बना हुआ है।

AI स्किल्स और अपस्किलिंग का दौर: मिल रहा है तगड़ा प्रीमियम

डे-टू-डे वर्क में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की गहरी पैठ और तेजी से बदलते ट्रेंड्स का असर सैलरी और रिक्रूटमेंट पर साफ दिख रहा है। रूटीन कामकाज में एआई प्रोडक्टिविटी टूल्स का इस्तेमाल करने वाली कंपनियां 2025 के 46.1% से बढ़कर 56% हो गई हैं। करीब 60% एंप्लॉयर अपने कर्मचारियों के अपस्किलिंग को प्राथमिकता दे रहे हैं। AI, मशीन लर्निंग और डेटा साइंस के प्रोफेशनल्स के लिए कंपनियां सामान्य से लगभग 10% अधिक पे-प्रीमियम दे रही हैं।

वेज कोड और पेरोल कॉस्ट का असर

सर्वे के मुताबिक, 65.4% एंप्लॉयर पूरी तरह से नए वेज कोड का पालन कर रहे हैं, जबकि 20.9% कंपनियां अगले छह महीनों में इसके अनुपालन की उम्मीद कर रही हैं। वैसे लगभग 42.8% कंपनियों को अंदेशा है कि इससे उनकी पेरोल लागत कम से कम 1% तक बढ़ सकती है, जिसके लिए उन्हें अपने रिवॉर्ड स्ट्रक्चर को समझदारी से री-अलाइन करना होगा।

Sword Raas Video: एक हाथ से ड्राइव करती जीप, दूसरे हाथ से भांजती तलवार… क्षत्रिय राजपूत महिलाओं का ये तलवार रास हो गया वायरल

नवरात्रि में गरबा और डांडिया की रौनक तो आपने खूब देखी होगी, लेकिन गुजरात में उत्सव का एक ऐसा नजारा भी देखने को मिला, जिसने लोगों का ध्यान खींच लिया। यहां महिलाएं हाथों में तलवार लेकर मैदान में उतरीं और अपनी पारंपरिक कला का प्रदर्शन किया। राजकोट और जामनगर में राजपूत समाज की महिलाओं ने तलवार रास के जरिए वीरता और संस्कृति की अनूठी झलक पेश की। पारंपरिक पोशाक, हाथों में चमचमाती तलवारें और आत्मविश्वास से भरी महिलाओं का अंदाज इस आयोजन को खास बनाता है।

यह प्रदर्शन केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं है, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा को सहेजने की कोशिश भी है। खास बात यह है कि इस कला को सीखने के लिए महिलाओं को बाकायदा प्रशिक्षण दिया जाता है और नवरात्रि से पहले लंबे समय तक अभ्यास कराया जाता है।

गरबा के साथ दिखा वीरता और परंपरा का संगम

गुजरात में नवरात्रि का नाम आते ही गरबा और डांडिया की तस्वीर सामने आती है। हालांकि, राजकोट में होने वाला तलवार रास इस उत्सव को एक अलग पहचान देता है। यहां महिलाएं तलवारों के साथ पारंपरिक दांव-पेच और करतब दिखाती हैं। राजकोट पैलेस के ऐतिहासिक मैदान में क्षत्रिय समाज की महिलाएं इस प्रस्तुति के जरिए अपनी परंपरा को आगे बढ़ा रही हैं। आयोजकों से जुड़ी जानकारी के अनुसार, यह कार्यक्रम पिछले करीब 18 वर्षों से आयोजित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य प्राचीन गरबा और रास संस्कृति को सहेजकर अगली पीढ़ी तक पहुंचाना है।

तलवार चलाना नहीं जानने वाली महिलाओं को भी मिलती है ट्रेनिंग

इस आयोजन की खास बात यह है कि इसमें भाग लेने के लिए पहले से तलवार चलाना आना जरूरी नहीं है। कार्यक्रम से जुड़ी एक महिला ने समाचार एजेंसी आईएएनएस को बताया कि संस्था में महिलाओं को बारीकी से प्रशिक्षण दिया जाता है। उन्होंने कहा कि जब दूर-दूर से लोग इस अनोखी प्रस्तुति को देखने पहुंचते हैं, तो उन्हें गर्व महसूस होता है। इस परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए महिलाओं ने काफी मेहनत की है। प्रशिक्षण के दौरान उन महिलाओं को भी सिखाया जाता है, जिन्हें पहले तलवार चलाने का अनुभव नहीं होता।

डेढ़ महीने पहले से शुरू हो जाती है तैयारी

इस कार्यक्रम से करीब 15 वर्षों से जुड़ी एक वरिष्ठ सदस्य ने बताया कि तलवार रास में क्षत्रिय समाज की महिलाएं विशेष रूप से हिस्सा लेती हैं। उनके मुताबिक, नवरात्रि शुरू होने से लगभग डेढ़ महीने पहले ही अभ्यास शुरू हो जाता है। पैलेस ग्राउंड में होने वाली इस प्रस्तुति में तलवार के अलग-अलग दांव और स्टंट दिखाए जाते हैं। लगातार अभ्यास के जरिए महिलाएं अपने प्रदर्शन को तैयार करती हैं।

परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की कोशिश

राजकोट और जामनगर में महिलाओं का यह प्रदर्शन नवरात्रि के पारंपरिक उत्सव में एक अलग रंग जोड़ता है। जहां गरबा और डांडिया भक्ति और सामूहिक उल्लास का प्रतीक हैं, वहीं तलवार रास के जरिए महिलाएं अपनी सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक युद्ध-कला से जुड़ी परंपराओं को जीवित रखने का प्रयास कर रही हैं।

Zoho में इस साल सैलरी हाइक नहीं करने का ऐलान कर इसके फाउंडर श्रीधर वेम्बू ने मांगी माफी, खस्ता हालत की वजह भी बताई

Zoho में इस साल सैलरी हाइक नहीं करने का ऐलान कर इसके फाउंडर श्रीधर वेम्बू ने मांगी माफी, खस्ता हालत की वजह भी बताई

नौकरी करने वाले लोगों के लिए सालाना सैलरी हाइक का इंतजार काफी अहम होता है। बढ़ती महंगाई के बीच वेतन में होने वाली बढ़ोतरी से घर का बजट संभालने में मदद मिलती है। लेकिन सॉफ्टवेयर कंपनी Zoho के कर्मचारियों को इस साल निराशा का सामना करना पड़ सकता है। कंपनी के संस्थापक श्रीधर वेम्बू ने बताया है कि इस साल कर्मचारियों की सैलरी में सामान्य सालाना बढ़ोतरी नहीं की जाएगी। इसके पीछे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े बढ़ते खर्च, सर्वर की महंगी कीमतें और वैश्विक कारोबारी अनिश्चितता जैसे कारण हैं। हालांकि, उन्होंने कर्मचारियों को यह भरोसा भी दिया है कि कंपनी बड़े पैमाने पर छंटनी से बचने की पूरी कोशिश करेगी।

Zoho कर्मचारियों को इस साल नहीं मिलेगा सालाना इंक्रीमेंट

श्रीधर वेम्बू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए कंपनी की मौजूदा स्थिति साझा की। उन्होंने बताया कि सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री का भविष्य फिलहाल अनिश्चित बना हुआ है और AI के बढ़ते इस्तेमाल से कंपनियों का खर्च काफी बढ़ गया है। इसी दबाव के चलते Zoho ने इस साल कर्मचारियों की सामान्य वेतन वृद्धि रोकने का फैसला किया है। वेम्बू ने स्वीकार किया कि यह फैसला लेना आसान नहीं था। उन्होंने कर्मचारियों से माफी भी मांगी कि वह इस साल सैलरी हाइक को जारी नहीं रख सके।

AI के कारण चार गुना बढ़ी सर्वर की कीमतें

कंपनी के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक डेटा सेंटर के लिए जरूरी सर्वर की बढ़ती लागत है। वेम्बू के मुताबिक, सर्वर की कीमतें चार गुना तक बढ़ गई हैं। इसके अलावा, AI टूल्स का इस्तेमाल तेजी से बढ़ने के कारण कंपनी के परिचालन खर्च में भी इजाफा हुआ है। इन बढ़ते खर्चों को नियंत्रित करने के लिए Zoho ने अपने मार्केटिंग बजट में कटौती की है। वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों ने भी कारोबारी माहौल को चुनौतीपूर्ण बना दिया है।

बड़े पैमाने पर छंटनी से बचने की कोशिश

सैलरी हाइक रोकने के फैसले के बीच कर्मचारियों के लिए राहत की बात यह है कि कंपनी फिलहाल बड़े पैमाने पर छंटनी से बचना चाहती है। वेम्बू ने कहा कि कंपनी कर्मचारियों की बड़े स्तर पर नौकरी जाने की स्थिति से बचने के लिए पूरी मेहनत करेगी।

हालांकि, उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि सॉफ्टवेयर क्षेत्र में नौकरियों का भविष्य चुनौतीपूर्ण दिखाई दे रहा है। उनके मुताबिक, Zoho ने पिछले 18 महीनों से अपने कर्मचारियों की संख्या में बढ़ोतरी नहीं की है। इससे कंपनी में भर्ती की रफ्तार धीमी रहने का संकेत मिलता है।

अगले 3 से 5 साल Zoho के लिए अहम

वेम्बू ने बताया कि कंपनी इस समय खुद को नए कारोबारी माहौल के अनुरूप ढालने की प्रक्रिया में है। अगले तीन से पांच साल यह तय करने में महत्वपूर्ण होंगे कि कंपनी का बदलाव कितना सफल रहता है।

उन्होंने कर्मचारियों के सहयोग के लिए आभार भी जताया। उनके मुताबिक, ज्यादातर कर्मचारी कंपनी की स्थिति को समझ रहे हैं। यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब तकनीकी कंपनियां AI में निवेश बढ़ाने के साथ अपने खर्चों पर नियंत्रण रखने की चुनौती का सामना कर रही हैं।

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Video: Zomato की ₹50 हजार वाली नौकरी छोड़ी, अब 4 तरीकों से कमा रही ₹2.28 लाख रुपये

नौकरी छोड़ने का फैसला अक्सर जोखिम भरा माना जाता है, खासकर जब हर महीने मिलने वाली तय सैलरी का सहारा छूट जाए। लेकिन Zomato की नौकरी छोड़ने वाली वर्षा ने कमाई के लिए एक नहीं, बल्कि चार अलग-अलग रास्ते चुने। पांच महीने पहले तक वह हर महीने 50 हजार रुपये की सैलरी पा रही थीं, लेकिन अब सितंबर में उनकी कुल कमाई 2.28 लाख रुपये से ज्यादा रही। उन्होंने टेक्नोलॉजी से जुड़े वीडियो बनाने, ब्रांड्स के साथ साझेदारी करने, लोगों को ट्रेनिंग देने और रिमोट सेल्स के जरिए पैसे कमाए। वर्षा ने अपनी इस कमाई का पूरा ब्योरा इंस्टाग्राम पर साझा किया, जिसके बाद उनकी कहानी चर्चा में आ गई।

हालांकि, उन्होंने यह भी बताया कि सितंबर की कमाई जुलाई और अगस्त के मुकाबले कम रही। उनकी कहानी बताती है कि कमाई के कई विकल्प बनाना संभव है, लेकिन इसमें मेहनत और आय में उतार-चढ़ाव दोनों शामिल हैं।

टेक्नोलॉजी से जुड़े वीडियो बनाकर कमाए ₹1 लाख से ज्यादा

वर्षा की सितंबर की कमाई में सबसे बड़ा हिस्सा टेक यूजीसी (TechUGC) का रहा। इस काम से उन्होंने 1,00,900 रुपये कमाए। इसमें टेक्नोलॉजी प्रोडक्ट्स, ऐप्स, सॉफ्टवेयर और डिजिटल टूल्स के बारे में वीडियो बनाना शामिल है। ऐसे कंटेंट में किसी प्रोडक्ट का डेमो देना या उसके इस्तेमाल का तरीका समझाना भी शामिल हो सकता है। हालांकि, वर्षा के मुताबिक, जुलाई और अगस्त की तुलना में सितंबर में इस काम से उनकी कमाई कम रही।

ब्रांड्स के साथ काम करके मिले ₹86 हजार

वर्षा की कमाई का दूसरा बड़ा जरिया सोशल मीडिया पर ब्रांड पार्टनरशिप है। उन्होंने बताया कि सितंबर में इससे 86,000 रुपये की कमाई हुई। हालांकि, इस रकम में से 66,000 रुपये उस समय तक उनके बैंक खाते में नहीं आए थे। इससे पता चलता है कि ऑनलाइन काम में कमाई दर्ज होने और पैसा वास्तव में खाते में आने के बीच अंतर हो सकता है।

लोगों को सिखाने और रिमोट सेल्स से भी हो रही कमाई

वर्षा केवल कंटेंट बनाकर ही पैसा नहीं कमा रहीं, बल्कि अपने अनुभव को दूसरों के साथ साझा करके भी कमाई कर रही हैं। उन्होंने बताया कि टेक यूजीसी के जरिए कमाई करना सिखाने वाले उनके वन-टू-वन सेशन से सितंबर में करीब 36,242 रुपये आए। वहीं, रिमोट सेल्स से उन्हें 5,744 रुपये मिले। फिलहाल यह उनकी चारों इनकम स्ट्रीम में सबसे छोटा हिस्सा है।

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सितंबर में कमाई घटी, फिर भी अक्टूबर से उम्मीदें

चारों स्रोतों को मिलाकर वर्षा ने सितंबर में 2,28,892 रुपये की कुल कमाई बताई। हालांकि, उन्होंने माना कि यह जुलाई और अगस्त के मुकाबले कम थी। अब उनकी कोशिश अक्टूबर में कमाई को दोबारा बढ़ाने की है।

उनकी कहानी सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींच रही है। कुछ यूजर्स ने उनके प्रयासों की तारीफ की, जबकि कुछ ने टेक यूजीसी के बारे में और जानकारी जानने की इच्छा जताई।

हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि वर्षा की बताई गई रकम कुल रेवेन्यू है, जरूरी नहीं कि यही उनका शुद्ध मुनाफा हो। कंटेंट बनाने में लगने वाला खर्च, टैक्स और भुगतान में देरी जैसी बातें वास्तविक कमाई को प्रभावित कर सकती हैं। उनकी कहानी दिखाती है कि कमाई के कई रास्ते बनाना संभव है, लेकिन हर महीने एक जैसी आय की गारंटी नहीं होती।

(डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।)

127% सैलरी हाइक का ऑफर ठुकराए या नई नौकरी जॉइन करे? कर्मचारी की दुविधा पर Reddit यूजर्स ने दी सलाह

127% सैलरी हाइक का ऑफर ठुकराए या नई नौकरी जॉइन करे? कर्मचारी की दुविधा पर Reddit यूजर्स ने दी सलाह

नौकरी बदलने का फैसला आसान नहीं होता, खासकर तब जब नई कंपनी पहले से कहीं ज्यादा सैलरी देने को तैयार हो और मौजूदा कंपनी भी आपको रोकने के लिए वेतन बढ़ाने का प्रस्ताव दे। बेंगलुरु में काम करने वाले एक क्लिनिकल डेटा स्पेशलिस्ट के सामने ऐसी ही स्थिति आ गई है। उन्हें नई नौकरी में 127 फीसदी सैलरी हाइक का ऑफर मिला है। अब उनकी मौजूदा कंपनी भी वेतन बढ़ाकर उन्हें अपने साथ बनाए रखना चाहती है।

कर्मचारी ने Reddit पर अपनी परेशानी साझा करते हुए बताया कि नई नौकरी में पूरी तरह वर्क फ्रॉम होम की सुविधा और घर से काम करने के लिए जरूरी सामान खरीदने हेतु जॉइनिंग बोनस भी दिया जा रहा है। हालांकि, नई जगह काम का दबाव कितना होगा और वर्क-लाइफ बैलेंस कैसा रहेगा, इसे लेकर वह असमंजस में हैं।

पुरानी कंपनी में सुकून, लेकिन भविष्य को लेकर चिंता

कर्मचारी की मौजूदा कंपनी क्लिनिकल रिसर्च इंडस्ट्री में फंक्शनल सर्विस प्रोवाइडर (FSP) मॉडल के तहत काम करती है। उनके मुताबिक, पुरानी नौकरी में टीम और काम करने का तरीका जाना-पहचाना है। काम भी फिलहाल संभालने लायक है, इसलिए वहां बने रहने का मन था।

लेकिन मौजूदा प्रोजेक्ट या FSP एंगेजमेंट को लेकर अनिश्चितता और मैनेजर के कंपनी छोड़ने से उनकी चिंता बढ़ गई है। कंपनी ने नई नौकरी के ऑफर के जवाब में सैलरी मैच करने की संभावना जताई है, मगर अभी तक कोई आधिकारिक फैसला नहीं आया है।

कर्मचारी के सामने सवाल है कि अगर पुरानी कंपनी भी उतनी ही सैलरी देने लगे, तो क्या सिर्फ नए अवसर के लिए नौकरी बदलना सही होगा? या फिर परिचित माहौल में बने रहना ही बेहतर फैसला है?

Reddit यूजर्स ने दी सलाह, काउंटर ऑफर स्वीकार करने से पहले सोचें

कर्मचारी की पोस्ट पर कई Reddit यूजर्स ने उन्हें नई नौकरी चुनने की सलाह दी। कुछ लोगों का मानना था कि इस्तीफे की बात सामने आने के बाद कंपनी का व्यवहार बदल सकता है और भविष्य में कर्मचारी पर ज्यादा काम का दबाव डाला जा सकता है।

एक यूजर ने सलाह दी कि काउंटर ऑफर मिलने के बावजूद नई नौकरी के फायदे और जोखिमों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। दूसरे यूजर ने आशंका जताई कि कंपनी कर्मचारी को रोकने के साथ-साथ कम वेतन पर किसी दूसरे व्यक्ति को नियुक्त करने की योजना भी बना सकती है। हालांकि, इन टिप्पणियों में बताई गई आशंकाओं की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

127% hike with a new company vs retention offer from my current employer

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u/AnaWong97 in

IndianWorkplace

नौकरी बदलने से पहले किन बातों पर दें ध्यान?

यह मामला केवल ज्यादा सैलरी पाने का नहीं, बल्कि लंबे समय के करियर और निजी जिंदगी के बीच संतुलन बनाने का भी है। नौकरी बदलने से पहले वेतन के साथ काम के घंटे, जिम्मेदारियां, नौकरी की स्थिरता, मैनेजर और टीम का माहौल तथा भविष्य में तरक्की की संभावनाएं देखना जरूरी है।

साथ ही, अगर मौजूदा कंपनी वेतन बढ़ाने की पेशकश करती है, तो यह जानना भी अहम है कि वह प्रस्ताव लिखित और स्पष्ट है या नहीं। आखिरकार, 127 फीसदी की सैलरी हाइक आकर्षक जरूर है, लेकिन सही फैसला वही होगा जो आर्थिक फायदे के साथ करियर और जीवनशैली के लिए भी बेहतर साबित हो।

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8th Pay Commission: कितनी बढ़ेगी सैलरी? DA मर्जर, फिटमेंट फैक्टर और HRA पर ये है बड़े अपडेट्स

8th Pay Commission Salary Hike Updates: केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए आठवें वेतन आयोग को लेकर सरगर्मियां तेज हैं। 3 नवंबर 2025 को गठित हुआ 8वां वेतन आयोग इस समय देशभर में कर्मचारी यूनियनों, पेंशनभोगी संघों, रेलवे और रक्षा बलों के प्रतिनिधियों के साथ परामर्श के दौर में है। हाल ही में चंडीगढ़, चेन्नई और पुडुचेरी में बैठकों के बाद अगले महीने आयोग की टीम बेंगलुरु के दौरे पर जाने वाली है।

वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने पर 1 करोड़ से अधिक कर्मचारियों और पेंशनर्स की सैलरी और पेंशन में बंपर इजाफा होगा। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि आपकी सैलरी कितनी बढ़ेगी और किन-किन घटकों में बड़ा बदलाव होने वाला है?

सैलरी हाइक के ये है 4 मुख्य पिलर

मंत्रिमंडल द्वारा मंजूर की गई टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToR) के तहत आठवां वेतन आयोग कर्मचारियों के वेतन, भत्तों और पेंशन ढांचे की समीक्षा कर रहा है। सैलरी रिवीजन मुख्य रूप से इन 4 घटकों पर निर्भर करेगा:

1. बेसिक पे: इसमें नया वेतन मैट्रिक्स, पे-स्ट्रक्चर और सबसे अहम फिटमेंट फैक्टर शामिल है।

2. भत्ते: महंगाई भत्ता (DA/DR), मकान किराया भत्ता (HRA) और ट्रैवल अलाउंस (TA)।

3. कैश और अन्य लाभ: सालाना इंक्रीमेंट, प्रमोशन, परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव और रिवॉर्ड।

4. अन्य ढांचागत सुधार: कामकाजी जरूरतें और विभिन्न पदों का युक्तिकरण।

बेसिक पे में महंगाई भत्ते के विलय की मांग क्यों?

कर्मचारी संगठन और पेंशनर्स लगातार मांग कर रहे हैं कि 7वें वेतन आयोग की सिफारिशों के तहत डीए का विलय मूल वेतन में किया जाए। बेसिक सैलरी ही वह आधार है जिससे प्रोविडेंट फंड (PF) योगदान, पेंशन, ग्रेच्युटी और अन्य भत्तों की गणना होती है। अगर डीए को बेसिक पे में मिला दिया जाता है, तो बेसिक सैलरी अपने आप बढ़ जाएगी, जिससे मिलने वाले सभी अन्य भत्ते और रिटायर्मेंट बेनेफिट्स कई गुना बढ़ जाएंगे।

फिटमेंट फैक्टर से ही होगा पूरा खेल

फिटमेंट फैक्टर एक गणितीय गुणांक है, जिसका उपयोग पुराना बेसिक वेतन बदलकर नया बेसिक वेतन तय करने के लिए किया जाता है। 7वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 2.57 था।

8वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर कितना होगा इस पर फिलहाल आयोग में चर्चा जारी है, लेकिन विश्लेषकों और कर्मचारी यूनियनों की रिपोर्ट के मुताबिक यह 2.28 से लेकर 3.83 के बीच तय हो सकता है। अगर फिटमेंट फैक्टर 3.68 या 3.83 तक जाता है, तो कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक सैलरी में रिकॉर्ड बढ़ोतरी होगी।

HRA में संशोधन: 2017 के बाद पहली बार बदलाव की तैयारी!

नेशनल काउंसिल – जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) और ऑल इंडिया एनपीएस एंप्लाइज फेडरेशन ने आयोग के सामने HRA बढ़ाने की पुरजोर वकालत की है। 2017 के बाद से मकान किराए भत्ते (HRA) की दरों में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है, जबकि शहरों में कमरों और मकानों का किराया काफी बढ़ चुका है।

कर्मचारी संगठनों का प्रस्ताव है कि शहरों की कैटेगरी के हिसाब से HRA को X श्रेणी के शहरों के लिए 36%, Y श्रेणी के लिए 24% और Z श्रेणी के शहरों के लिए 12% किया जाए। साथ ही, जब-जब डीए बढ़े, तब-तब HRA में भी अपने आप बढ़ोतरी का नियम बने।

कब तक लागू होंगी सिफारिशें?

गठन के नियमों के अनुसार आठवें वेतन आयोग को अपनी अंतिम सिफारिशें सौंपने के लिए 18 महीने का वक्त (मई 2027 तक) मिला है। वैसे जानकारों का मानना है कि फरवरी या अप्रैल 2027 के आसपास कुछ अंतरिम सिफारिशों की घोषणा की जा सकती है। पिछले वेतन आयोगों के ट्रेंड को देखें तो आयोग की रिपोर्ट आने के बाद इसे पूरी तरह लागू होने और एरियर जारी होने में 2029 या 2030 तक का समय लग सकता है।

 

8th Pay Commission: एक्शन में 8वां वेतन आयोग! कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए ये है 5 बड़े अपडेट्स

8th Pay Commission Latest News: केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए 8वें वेतन आयोग से जुड़ी बड़ी खबर है। आयोग का दो दिवसीय चेन्नई दौरा आज, 7 सितंबर से शुरू हो गया है। 7 और 8 सितंबर के इस दौरे के दौरान आयोग कर्मचारी यूनियनों और प्रमुख हितधारकों से मुलाकात कर उनकी मांगों, चिंताओं और सुझावों पर सीधी चर्चा करेगा।

चेन्नई से पहले आयोग दिल्ली, लद्दाख, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और ओडिशा जैसे राज्यों का दौरा कर चुका है। आइए आपको बताते हैं कि इस दौरे का क्या मतलब है, बैठक में किन मुद्दों पर बात होगी और 8वें वेतन आयोग को लेकर अब तक के 5 सबसे बड़े अपडेट्स क्या हैं।

चेन्नई बैठक में किन अहम मुद्दों पर होगी चर्चा?

इस दो दिवसीय बैठक में कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन और भत्तों में संशोधन को लेकर मुख्य रूप से इन मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा:

  • फिटमेंट फैक्टर: बेसिक सैलरी और पेंशन बढ़ाने के लिए सबसे अहम ‘फिटमेंट फैक्टर’ के मल्टीपल पर चर्चा।
  • सैलरी और पेंशन रिवीजन: सेवारत कर्मचारियों के वेतन और रिटायर्ड कर्मचारियों की पेंशन में सुधार।
  • भत्ते: महंगाई भत्ते (DA) समेत अन्य भत्तों में बढ़ोतरी के सुझाव।
  • वर्किंग कंडीशंस: कर्मचारियों के काम करने के माहौल को बेहतर बनाने पर राय।

8वें वेतन आयोग की वेबसाइट के 5 सबसे नए अपडेट्स

वेतन आयोग ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर आने वाले महीनों के बैठकों और दौरों का पूरा शेड्यूल जारी किया है:

8वें वेतन आयोग की वेबसाइट के 5 सबसे नए अपडेट्स

केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए इसका क्या अर्थ है?

केंद्र सरकार ने 3 नवंबर 2025 को 8वें वेतन आयोग का गठन किया था और इसे अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया गया था। 18 महीने की समयसीमा में से आयोग अब तक 10 महीने का काम पूरा कर चुका है और लगातार अलग-अलग राज्यों का दौरा कर रिपोर्ट तैयार करने में जुटा है।

फिटमेंट फैक्टर पर अभी क्या है स्थिति?

सोशल मीडिया और मीडिया रिपोर्टों में 2.15, 2.28 या 2.57 जैसे फिटमेंट फैक्टर को लेकर तरह-तरह के गणित और अनुमान लगाए जा रहे हैं। लेकिन कर्मचारियों को यह समझना जरूरी है कि अभी तक किसी भी फिटमेंट फैक्टर या सैलरी में बढ़ोतरी को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। ऐतिहासिक संदर्भ:

6ठां वेतन आयोग: फिटमेंट फैक्टर 1.86 था।

7वां वेतन आयोग: फिटमेंट फैक्टर 2.57 तय किया गया था।

अब देखना होगा कि 8वां वेतन आयोग किस फिटमेंट फैक्टर की सिफारिश करता है। अंतिम मुहर सरकार की सिफारिशें स्वीकार करने के बाद ही लगेगी।

आगे का पूरा शेड्यूल

चेन्नई दौरे के बाद आयोग का शेड्यूल काफी व्यस्त रहने वाला है:

9 सितंबर 2026: पुडुचेरी

16 से 18 सितंबर 2026: चंडीगढ़

7 और 8 अक्टूबर 2026: बेंगलुरु

इंटरव्यू पाने के लिए रिज्यूमे में छिपा रहे AI के सीक्रेट प्रॉम्प्ट, सफेद टेक्स्ट में लिखी ऐसी बात कि HR भी रह गए हैरान

नौकरी पाने की होड़ अब सिर्फ अच्छे रिज्यूमे और शानदार अनुभव तक सीमित नहीं रह गई है। AI के बढ़ते इस्तेमाल के बीच कुछ जॉब सीकर्स अपने रिज्यूमे में ऐसे छिपे हुए AI प्रॉम्प्ट डाल रहे हैं, जो स्क्रीनिंग करने वाले AI टूल्स को प्रभावित कर सकें। इस नए तरीके ने रिक्रूटर्स और HR प्रोफेशनल्स के बीच भरोसे और नैतिकता को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

सफेद अक्षरों में छिपा था करीब 1,500 कैरेक्टर का मैसेज

यह मामला तब सामने आया जब कैलिफोर्निया की कैप्शनिंग टेक्नोलॉजी कंपनी InnoCaption के CEO पॉल ली ने एक जॉब एप्लीकेशन में कुछ अजीब देखा। कानूनी और कंप्लायंस पद के लिए भेजे गए रिज्यूमे में करीब 1,500 कैरेक्टर का सफेद रंग का टेक्स्ट छिपा हुआ था। यह टेक्स्ट सफेद बैकग्राउंड में होने के कारण सामान्य तौर पर दिखाई नहीं देता था।

रिपोर्ट के मुताबिक, इस छिपे निर्देश में AI सिस्टम को पुराने निर्देशों को नजरअंदाज कर आवेदक को टॉप कैंडिडेट बताने के लिए कहा गया था, भले ही उसकी योग्यता उस स्तर की हो या नहीं।

‘लाइन में आगे निकलने’ की कोशिश से नाराज CEO

पॉल ली के लिए यह सिर्फ एक चालाकी नहीं, बल्कि भरोसे से जुड़ा गंभीर मुद्दा था। उन्होंने इसे लाइन में दूसरों से आगे निकलने की कोशिश बताया। खास तौर पर जिस पद के लिए आवेदन किया गया था, उसमें ईमानदारी और भरोसा बेहद महत्वपूर्ण थे। ऐसे में AI को प्रभावित करने के लिए छिपे निर्देशों का इस्तेमाल करना कंपनी के लिए और भी चिंताजनक बन गया।

पहले छिपे Keywords, अब AI Prompts का खेल

रिज्यूमे में AI प्रॉम्प्ट छिपाने की यह रणनीति पूरी तरह नई सोच नहीं है। पहले भी कुछ उम्मीदवार Applicant Tracking Systems (ATS) को प्रभावित करने के लिए रिज्यूमे में ऐसे Keywords या टेक्स्ट छिपाते थे, जिन्हें इंसान आसानी से नहीं देख पाता था। अब AI के भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने के साथ यह तरीका एक कदम आगे बढ़ गया है। उम्मीदवार ऐसे निर्देश डालने की कोशिश कर रहे हैं, जो जनरेटिव AI को उनके पक्ष में फैसला लेने के लिए प्रभावित कर सकें।

Hiring Process के ‘Black Box’ बनने की चिंता

HR प्लेटफॉर्म Lattice की CEO सारा फ्रैंकलिन के मुताबिक, भर्ती प्रक्रिया पहले से ही कई लोगों को एक तरह के ‘ब्लैक बॉक्स’ जैसी लगती है। उम्मीदवारों को अक्सर यह साफ नहीं होता कि उनका रिज्यूमे किस आधार पर शॉर्टलिस्ट या रिजेक्ट किया गया। ऐसे में AI को प्रभावित करने वाली तकनीकें सामने आने से भर्ती प्रक्रिया को लेकर पारदर्शिता और भरोसे की चिंता और बढ़ सकती है।

क्या सच में मिलेगा इंटरव्यू का फायदा?

हालांकि, HR एक्सपर्ट्स इस बात को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं कि छिपे AI प्रॉम्प्ट उम्मीदवारों को वास्तविक फायदा पहुंचाएंगे। Terra Vista की HR कॉर्पोरेट डायरेक्टर नथालिया अरयानी के मुताबिक, रिक्रूटर्स अक्सर बड़ी संख्या में आवेदन एक साथ देखते हैं और पर्याप्त योग्य उम्मीदवार मिलने के बाद आगे बढ़ जाते हैं। ऐसे में रिज्यूमे में कितनी भी चालाकी से AI निर्देश छिपाए जाएं, यह जरूरी नहीं कि वह स्क्रीनिंग सिस्टम के जरिए उम्मीदवार को इंटरव्यू तक पहुंचा ही दें।

AI और नौकरी की दुनिया में शुरू हुई नई ‘रेस’

AI जहां कंपनियों के लिए भर्ती प्रक्रिया को तेज और आसान बना रहा है, वहीं उम्मीदवार भी इसी तकनीक को मात देने के नए तरीके खोज रहे हैं। रिज्यूमे में छिपे प्रॉम्प्ट इसी बदलती जॉब मार्केट की एक झलक हैं।

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अपना घर छोड़कर नोएडा में किराए की जिंदगी? 25 हजार की कमाई को लेकर शख्स ने बताया शहर का असली खर्च

हर महीने 25 हजार रुपये कमाने वाले दो लोगों की जिंदगी एक जैसी हो, यह जरूरी नहीं। बड़े शहर में यही सैलरी किराए, खाने, सफर और दूसरे रोजमर्रा के खर्चों में निकल सकती है, जबकि छोटे शहर में कम खर्च के कारण कुछ बचत की गुंजाइश बन सकती है। इसी अंतर को नोएडा में रहने वाले अखंड ने अपने एक इंस्टाग्राम वीडियो के जरिए सामने रखा। उन्होंने नोएडा की जिंदगी की तुलना अपने गृह शहर बांदा से करते हुए सवाल किया कि क्या बड़े शहरों में मिलने वाले करियर के अवसर वहां रहने की भारी कीमत के सामने वाकई फायदेमंद हैं?

बांदा में अपना घर, नोएडा में रहने का खर्च

अखंड ने बताया कि बांदा में उनके परिवार के पास छोटे प्लॉट हैं, जिन पर बने स्वतंत्र घरों में वे रहते हैं। ऐसे में हर महीने किराए का खर्च नहीं उठाना पड़ता। इसके उलट, नोएडा में उन्हें छोटी जगहों में रहने वाले लोगों की जिंदगी काफी अलग नजर आती है। उनका कहना है कि यहां नौकरी करने वाले कई लोगों को सीमित जगह में रहकर अपना गुजारा करना पड़ता है।

25 हजार कमाई और पूरा पैसा खर्च!

अखंड ने 25 हजार रुपये मासिक कमाने वाले लोगों का उदाहरण देते हुए कहा कि शहर में इतनी कमाई भी देखते ही देखते खत्म हो सकती है। किराए के अलावा बिजली, मेंटेनेंस, खाना, आने-जाने और मोबाइल जैसे खर्च मिलकर महीने का बजट बिगाड़ सकते हैं।

ऐसे में नौकरी मिलने के बावजूद महीने के अंत में बचत के लिए बहुत कम पैसा बचता है।

फिर क्यों भागते हैं लोग नोएडा जैसे शहरों की ओर?

बड़े शहरों का खर्च ज्यादा है, लेकिन यहां बेहतर नौकरियों और करियर ग्रोथ के मौके भी मिलते हैं। यही वजह है कि छोटे शहरों से बड़ी संख्या में लोग नोएडा जैसे शहरों का रुख करते हैं।

अखंड भी मानते हैं कि नोएडा में अवसरों की कमी नहीं है। लेकिन उनका सवाल सीधा है अगर कमाई का बड़ा हिस्सा शहर में रहने में ही चला जाए, तो क्या यह सौदा वाकई फायदे का है?

कम कमाओ, लेकिन कुछ बचाओ?

अखंड ने लोगों को करियर और लाइफस्टाइल से जुड़े फैसले सोच-समझकर लेने की सलाह दी। उनका कहना है कि हर व्यक्ति को खुद से यह सवाल करना चाहिए कि वह ऐसी जिंदगी चाहता है जिसमें पूरी सैलरी खर्च हो जाए, या ऐसी जगह रहना पसंद करेगा जहां जीवन बेहतर तरीके से जीने के साथ थोड़ी बचत भी की जा सके।

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