Sword Raas Video: एक हाथ से ड्राइव करती जीप, दूसरे हाथ से भांजती तलवार… क्षत्रिय राजपूत महिलाओं का ये तलवार रास हो गया वायरल

नवरात्रि में गरबा और डांडिया की रौनक तो आपने खूब देखी होगी, लेकिन गुजरात में उत्सव का एक ऐसा नजारा भी देखने को मिला, जिसने लोगों का ध्यान खींच लिया। यहां महिलाएं हाथों में तलवार लेकर मैदान में उतरीं और अपनी पारंपरिक कला का प्रदर्शन किया। राजकोट और जामनगर में राजपूत समाज की महिलाओं ने तलवार रास के जरिए वीरता और संस्कृति की अनूठी झलक पेश की। पारंपरिक पोशाक, हाथों में चमचमाती तलवारें और आत्मविश्वास से भरी महिलाओं का अंदाज इस आयोजन को खास बनाता है।

यह प्रदर्शन केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं है, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा को सहेजने की कोशिश भी है। खास बात यह है कि इस कला को सीखने के लिए महिलाओं को बाकायदा प्रशिक्षण दिया जाता है और नवरात्रि से पहले लंबे समय तक अभ्यास कराया जाता है।

गरबा के साथ दिखा वीरता और परंपरा का संगम

गुजरात में नवरात्रि का नाम आते ही गरबा और डांडिया की तस्वीर सामने आती है। हालांकि, राजकोट में होने वाला तलवार रास इस उत्सव को एक अलग पहचान देता है। यहां महिलाएं तलवारों के साथ पारंपरिक दांव-पेच और करतब दिखाती हैं। राजकोट पैलेस के ऐतिहासिक मैदान में क्षत्रिय समाज की महिलाएं इस प्रस्तुति के जरिए अपनी परंपरा को आगे बढ़ा रही हैं। आयोजकों से जुड़ी जानकारी के अनुसार, यह कार्यक्रम पिछले करीब 18 वर्षों से आयोजित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य प्राचीन गरबा और रास संस्कृति को सहेजकर अगली पीढ़ी तक पहुंचाना है।

तलवार चलाना नहीं जानने वाली महिलाओं को भी मिलती है ट्रेनिंग

इस आयोजन की खास बात यह है कि इसमें भाग लेने के लिए पहले से तलवार चलाना आना जरूरी नहीं है। कार्यक्रम से जुड़ी एक महिला ने समाचार एजेंसी आईएएनएस को बताया कि संस्था में महिलाओं को बारीकी से प्रशिक्षण दिया जाता है। उन्होंने कहा कि जब दूर-दूर से लोग इस अनोखी प्रस्तुति को देखने पहुंचते हैं, तो उन्हें गर्व महसूस होता है। इस परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए महिलाओं ने काफी मेहनत की है। प्रशिक्षण के दौरान उन महिलाओं को भी सिखाया जाता है, जिन्हें पहले तलवार चलाने का अनुभव नहीं होता।

डेढ़ महीने पहले से शुरू हो जाती है तैयारी

इस कार्यक्रम से करीब 15 वर्षों से जुड़ी एक वरिष्ठ सदस्य ने बताया कि तलवार रास में क्षत्रिय समाज की महिलाएं विशेष रूप से हिस्सा लेती हैं। उनके मुताबिक, नवरात्रि शुरू होने से लगभग डेढ़ महीने पहले ही अभ्यास शुरू हो जाता है। पैलेस ग्राउंड में होने वाली इस प्रस्तुति में तलवार के अलग-अलग दांव और स्टंट दिखाए जाते हैं। लगातार अभ्यास के जरिए महिलाएं अपने प्रदर्शन को तैयार करती हैं।

परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की कोशिश

राजकोट और जामनगर में महिलाओं का यह प्रदर्शन नवरात्रि के पारंपरिक उत्सव में एक अलग रंग जोड़ता है। जहां गरबा और डांडिया भक्ति और सामूहिक उल्लास का प्रतीक हैं, वहीं तलवार रास के जरिए महिलाएं अपनी सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक युद्ध-कला से जुड़ी परंपराओं को जीवित रखने का प्रयास कर रही हैं।

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Navratri 2026: हाथी पर आईं मां की मुर्गे पर होंगी विदा, प्रस्थान का वाहन दे रहा देश में उथल-पुथल का संकेत

Navratri 2026: शारदीय नवरात्रि शुरू हो चुकी है। अश्विन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी तिथि तक मनाए जाने वाले इस पर्व में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है। नवरात्रि का पर्व श्रद्धा और आध्यात्म के साथ ज्योतिष दृष्टि से भी बेहद अहम माना जाता है। मां के आगमन और प्रस्थान के वाहन देश की आने वाले समय में दशा और दिशा का संकेत देते हैं। जैसे इस साल मां दुर्गा का आगमन हाथी पर हुआ है, जो अच्छी बारिश और समृद्धि का संकेत है। इसे देश की कृषि और अर्थव्यवस्था के लिए बहुत शुभ माना जाता है। लेकिन मां की विदाई इस बार कुक्कुट या मुर्गे पर हो रही है, जिससे ज्योतिष विशेषज्ञ चिंताजनक मान रहे हैं। इसे लेकर काशी के ज्योतिषी ने बड़ी भविष्यवाणी की है। बनारस हिंदू यूनिवार्सिटी के ज्योतिष विभाग में प्रोफेसर पंडित विनय पांडेय ने लोकल 18 को बताया कि इस बार शारदीय नवरात्रि में देवी का आगमन तो शुभ है, लेकिन मुर्गे पर उनका जाना शुभकारी नहीं है।

मुर्गे पर प्रस्थान देता है उथल-पुथल का संकेत

पंडित विनय पांडेय कहते हैं कि जब भी देवी मुर्गे पर प्रस्थान करती हैं तो ऐसे में देश में उथल पुथल की स्थिति बनी रहती है। ऐसे समय में प्रायः विद्रोह की आशंका बनी रहती है। सरकार और शासन पक्ष से जनता असंतुष्ट रहती है। गृह युद्ध जैसे हालात भी बन सकते हैं।

9 नहीं 10 दिनों की है नवरात्रि

इस बार शारदीय नवरात्रि नौ नहीं 10 दिनों की है। नवमी तिथि नौवे नहीं बल्कि 10 वें दिन यानि 20 अक्टूबर को मान्य होगी क्योंकि 20 अक्टूबर को ही उदया तिथि में नवमी तिथि प्राप्त हो रही है। इस दिन ही नवमी का हवन पूजन किया जाएगा। कन्या पूजन के लिए भी यही दिन सबसे उपयुक्त है। जो लोग नौ दिनों का व्रत रखते हैं, वे भी 21 तारीख को अपने व्रत का पारण करेंगे। नवरात्रि में कन्या पूजन के बिना देवी की पूजा अधूरी मानी जाती है। नौ दिनों तक देवी की पूजा आरधना और व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं को हवन के बाद पूरे विधि विधान से कन्या पूजन भी करना चाहिए। कन्या पूजन के दौरान नौ कन्याओं को देवी स्वरूप में उनकी पूजा आराधना करनी चाहिए। इससे ही नौ दिनों की पूजा संपूर्ण मानी जाती है।

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2.04 लाख रुपये की एक टिकट! मुंबई में फाल्गुनी पाठक के गरबा कार्यक्रम में ऐसा क्या खास?

नवरात्रि शुरू होते ही देशभर में गरबा का रंग चढ़ने लगता है और लोगों में इसे लेकर खासा उत्साह देखने को मिलता है। लेकिन जब गरबा क्वीन फाल्गुनी पाठक की परफॉर्मेंस हो, तो इसकी एक्साईटमेंट और बढ़ जाती है। हर साल बड़ी संख्या में उनके शो का इंतजार करते हैं। मुंबई में इस साल फाल्गुनी पाठक के साथ नौ रातों तक गरबा का उत्सव मनाया जाएगा। वहीं, फाल्गुनी पाठक का नवरात्रि उत्सव 2026 इस बार अपने महंगे टिकटों की कीमतों को लेकर भी चर्चा में है। कार्यक्रम में सबसे खास VIP पॉड की कीमत करीब 2.04 लाख रुपये रखी गई है।

आयोजन शुरू होने से पहले ही कई कम कीमत वाली टिकट कैटेगरी बिक चुकी हैं। ऐसे में महंगी टिकट और लोगों की जबरदस्त दिलचस्पी, दोनों ही इस गरबा उत्सव को सुर्खियों में ला रहे हैं।

कितनी है टिकट की शुरुआती कीमत

मुंबई में फाल्गुनी पाठक का गरबा उत्सव शुरू हो चुका है और लोगों में जबरदस्त उत्साह है। फाल्गुनी पाठक के नवरात्रि उत्सव का आयोजन 11 से 19 अक्टूबर के बीच जियो वर्ल्ड कन्वेंशन सेंटर में किया जा रहा है। वहीं इस इवेंट का नाम टवेस्ट एवेन्यू रियल्टी नवरात्रि उत्सव 2026′ रखा गया है। इस कार्यक्रम के टिकटों की कीमत ने लोगों का ध्यान खींचा है। शुरुआती टिकट करीब 2,000 रुपये से शुरू हो रहे हैं, जबकि सबसे खास प्राइवेट पॉड के लिए 2.04 लाख रुपये तक खर्च करने पड़ सकते हैं। यानी इस गरबा आयोजन में आम टिकट से लेकर बेहद महंगे VIP अनुभव तक कई विकल्प मौजूद हैं। आने वाले वीकेंड और कार्यक्रम की आखिरी रातों के लिए कई टिकट कैटेगरी पहले ही बिक चुकी हैं, जबकि प्रीमियम टिकट अभी उपलब्ध हैं।

कितने की है सबसे मंहगी टिकट

फाल्गुनी पाठक के नवरात्रि उत्सव में सबसे महंगी टिकट कैटेगरी ‘एक्सक्लूसिव पॉड’ है, जिसकी कीमत करीब 2.04 लाख रुपये है। इस प्राइवेट VIP स्पेस में एक साथ 12 लोग शामिल हो सकते हैं और टिकट के साथ 10,000 रुपये का फूड और बेवरेज वाउचर भी मिलता है, जो तय दिन पर ही इस्तेमाल किया जा सकता है। 18 अक्टूबर के लिए इस कैटेगरी की टिकटें तेजी से बिक रही हैं, जबकि 17 अक्टूबर की एक्सक्लूसिव पॉड टिकटें पहले ही खत्म हो चुकी हैं।

ग्रुप में भी ले सकते हैं टिकट

फाल्गुनी पाठक के नवरात्रि उत्सव में दोस्तों और परिवार के साथ जाने वालों के लिए ग्रुप टिकट भी उपलब्ध हैं। पांच लोगों के पैकेज की कीमत 13,000 रुपये है, यानी प्रति व्यक्ति करीब 2,600 रुपये खर्च होंगे। वहीं, 10 लोगों के लिए ग्रुप पैकेज 25,000 रुपये में मिल रहा है, जिसके हिसाब से एक व्यक्ति का टिकट करीब 2,500 रुपये पड़ता है। इस तरह ज्यादा लोगों के साथ बुकिंग करने पर प्रति व्यक्ति टिकट की कीमत थोड़ी कम हो जाती है।

कम कीमत वाले टिकट बिके

फाल्गुनी पाठक के नवरात्रि उत्सव के आखिरी वीकेंड के लिए कम कीमत वाले कई टिकट विकल्प अब उपलब्ध नहीं हैं। 17 अक्टूबर के लिए 2,000 रुपये वाला अर्ली बर्ड पास, 2,300 रुपये का फेज-1 और 2,700 रुपये का फेज-2 टिकट बिक चुका है। हालांकि, 3,500 रुपये की कीमत वाला फाइनल फेज टिकट अभी बुक किया जा सकता है। 18 अक्टूबर के लिए 2,000 रुपये वाला अर्ली बर्ड और 2,300 रुपये का फेज-1 टिकट पहले ही बिक चुका है। लेकिन, 2,700 रुपये वाला फेज-2 टिकट और ग्रुप पैकेज अभी बुकिंग के लिए उपलब्ध हैं। वहीं, 19 अक्टूबर को नवरात्रि उत्सव का आखिरी दिन होगा और इस दिन 2,700 रुपये का फेज-2 टिकट तेजी से बिक रहा है। पांच और 10 लोगों वाले ग्रुप पैकेज भी तेजी से भर रहे हैं।

इस बार कार्यक्रम में क्या है खास

इस बार फाल्गुनी पाठक का गरबा कार्यक्रम खुले मैदान की जगह पूरी तरह से एसी वाले जियो वर्ल्ड कन्वेंशन सेंटर में आयोजित किया जा रहा है। यहां डांस के लिए कारपेट वाला बड़ा फ्लोर तैयार किया गया है। आयोजकों के मुताबिक, कार्यक्रम में रोजाना महा आरती, लाइव म्यूजिक और परफॉर्मेंस, आकर्षक लाइटिंग और खाने-पीने की कई सुविधाएं भी मिलेंगी। लोगों की सुविधा के लिए पर्याप्त पेड पार्किंग की व्यवस्था भी रखी गई है।

कितनी देर तक चलेगा परफॉर्मेंस

फाल्गुनी पाठक का यह नवरात्रि उत्सव 11 से 19 अक्टूबर तक यानी लगातार नौ दिनों तक आयोजित किया जाएगा। हर रात कार्यक्रम की शुरुआत रात 8 बजे होगी और करीब चार घंटे तक गरबा और लाइव परफॉर्मेंस का सिलसिला चलेगा। इस आयोजन को ट्राइबवाइब और अल्फोंसो स्टूडियोज ने तैयार और प्रमोट किया है, जबकि वेस्ट एवेन्यू रियल्टी इसका टाइटल पार्टनर है। आयोजकों का दावा है कि ये कार्यक्रम गरबा प्रेमियों को एक खास और प्रीमियम नवरात्रि अनुभव देने के लिए तैयार किया गया है।

विंध्याचल धाम जाने वालों के लिए खुशखबरी, वाराणसी रीजन से चलेंगी 65 एक्स्ट्रा पूजा स्पेशल बसें! इस नंबर पर मिलेगी सारी जानकारी

नवरात्रि महापर्व बहुत जल्द शुरू होने वाला है। नवरात्रि में मां विंध्यवासिनी के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां विंध्यवासिनी के धाम पहुंचते हैं। विंध्याचल जाने वाले श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए अब ‘पूजा स्पेशल’ बसें चलाई जाएंगी। उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम ने बस सेवाओं का विस्तार किया है। इसका सबसे ज्यादा फायदा वाराणसी परिक्षेत्र से विंध्याचल धाम जाने वाले यात्रियों को मिलेगा। नवरात्रि के दौरान वाराणसी के आठ डिपो से कुल 86 बसों का संचालन किया जाएगा, जिनमें 65 अतिरिक्त ‘पूजा स्पेशल’ बसें चलाई जाएंगी।

आमतौर पर वाराणसी के इस रूट पर करीब 21 बसें चलती हैं। नवरात्रि शुरू होने के साथ ही इनकी संख्या 4 गुना से अधिक हो जाएगी। वाराणसी परिक्षेत्र के क्षेत्रीय प्रबंधक परशुराम पांडेय ने बताया की नवरात्रि में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए वाराणसी डिपो से विंध्याचल धाम के लिए बसों की संख्या को बढ़ाया गया है। अतिरिक्त बसों के संचालन से वाराणसी और आसपास के जिलों से विंध्याचल धाम जाने वाले श्रद्धालुओं को सीधी परिवहन सुविधा मिलेगी। बताते चलें की इस व्यवस्था से वाराणसी, जौनपुर, चंदौली, गाजीपुर, सोनभद्र और आसपास के जिलों से आने वाले श्रद्धालुओं को विंध्याचल धाम पहुंचने में आसानी होगी।

हेल्पलाइन नम्बर पर मिलेंगी जानकारी

श्रद्धालुओं की सुविधा और उन्हें बस सम्बंधित जानकारी आसानी से मिल सकें इसके लिए के लिए परिवहन निगम की ओर से हेल्पडेस्क नंबर 8726005897 भी जारी किया गया है। यात्री इस नंबर पर फोन कॉल कर बस सेवा और संचालन से संबंधित जानकारी 24 घंटे प्राप्त कर सकेंगे।

जौनपुर डिपो से चलेंगी सबसे ज्यादा बसें

परशुराम पांडेय ने बताया की वाराणसी परिक्षेत्र के आठों डिपो से विंध्याचल धाम के लिए बसों का संचालन 11 अक्टूबर से 21 अक्टूबर तक किया जाएगा। सबसे ज्यादा अतिरिक्त बसें जौनपुर डिपो से चलाई जाएंगी। जौनपुर डिपो से पुरे नवरात्री में 20 अतिरिक्त बसें चलेंगी। इसके अलावा कैंट और काशी डिपो से 10-10, चंदौली से 8, गाजीपुर से 2, सोनभद्र से 10 और विंध्यनगर से 5 अतिरिक्त बसों का संचालन होगा। इन सब के अलावा वाराणसी के ग्रामीण डिपो से वर्तमान में संचालित 12 बसें भी रूट पर चलती रहेंगी।

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Shardiya Navratri 2026: नवरात्रि शुरू होने से पहले नोएडा के सेक्टर-21 मुख्य मार्ग पर मां दुर्गा और शेरावाली माता की मूर्तियां तैयार करने का काम तेजी से चल रहा है। सड़क के किनारे कई जगह झुग्गी झोपड़ी में कारीगर दिन-रात मूर्तियों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। यहां धान की फसल से निकलने वाले अपशिष्ट यानी पराली, मिट्टी और बांस की मदद से मूर्तियों का ढांचा तैयार किया जा रहा है। इसके बाद मिट्टी लगाकर शरीर और चेहरे का आकार दिया जाता है। फिर रंग, कपड़े और श्रृंगार से मूर्ति को अंतिम रूप दिया जाता है। मूर्तिकार विश्वजीत पिछले 12 साल से यह काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने यह हुनर अपने क्षेत्र से सीखने के बाद कोलकाता जाकर भी सीखा और अब खुद मूर्तियां तैयार करते हैं।

किसी मूर्ति के चेहरा का रूप देने में है सबसे बड़ी कला

एक मूर्ति को तैयार करने में करीब एक सप्ताह का समय लग जाता है। इसमें सबसे पहले ढांचा और फ्रेम तैयार किया जाता है। फिर घास बांधकर उसके ऊपर मिट्टी लगाई जाती है। इसके बाद चेहरे का काम, रंग-रोगन और अंतिम सजावट की जाती है। विश्वजीत ने MoneyControl हिंदी टीम को बताते हुए कहा कि मूर्ति का चेहरा तैयार करने के लिए सांचे का इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन अगर चेहरा उम्मीद के मुताबिक नहीं बनता तो उसे दोबारा तोड़कर तैयार करना पड़ता है। उनका कहना है कि मूर्ति को बेहतर रूप देने के लिए काफी सोच-समझकर काम करना पड़ता है। अलग-अलग कारखानों में मूर्तियों को अलग शैली और बेहतर फिनिश देने की कोशिश की जाती है।

1500 रूपये तक हर कमा लेते हैं मूर्तिकार

मूर्तिकारों के मुताबिक, पिछले कुछ वर्षों में मूर्ति बनाने में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल की कीमत बढ़ी है। विश्वजीत ने बताया कि जिस घास की कीमत पहले करीब 500 रुपये प्रति क्विंटल थी, वह अब करीब 1000 से 1500 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई है। मिट्टी की कीमत भी बढ़ी है। पहले करीब 1000 रुपये में 15 बोरी मिट्टी मिल जाती थी। जबकि अब इसके लिए 2000 से 2500 रुपये देने पड़ते है। मूर्तियों में इस्तेमाल होने वाला रंग, कपड़ा और श्रृंगार का सामान पश्चिम बंगाल से मंगाया जाता है। महंगे कच्चे माल के बीच कारीगरों की कमाई भी मौसम पर निर्भर है। विश्वजीत ने बताया कि उन्हें कारीगर के तौर पर करीब 1000 से 1500 रुपये प्रतिदिन मिल जाते हैं। लेकिन मूर्ति बनाने का काम मुख्य रूप से सीजन पर निर्भर रहता है।

शंकर अपने परिवार के साथ 20 साल से बना रहे हैं मूर्तियां

वहीं, शंकर पिछले करीब 20 साल से मूर्ति बनाने का काम कर रहे हैं। वह मूल रूप से राजस्थान जोधपुर जिले के रहने वाले हैं। वह अपनी पत्नी के साथ मिलकर खुद मूर्तियां तैयार करते हैं। उनके मुताबिक 5 फीट की एक मूर्ति को बनाने में करीब 10 से 15 दिन तक लग सकते हैं, अगर पूरा ध्यान एक ही मूर्ति पर दिया जाए।

शंकर ने बताया कि नवरात्रि के लिए मूर्तियों की मांग काफी बढ़ गई है। ग्राहक नोएडा के अलग-अलग इलाकों के साथ दूर-दराज से भी यहां पहुंचते हैं। उनके मुताबिक इस सीजन में तैयार की गई ज्यादातर मूर्तियां बिक जाती हैं। हालांकि, बढ़ती लागत के बावजूद आमदनी इतनी नहीं है कि बड़ी बचत हो सके। उनका कहना है कि मूर्ति बनाने से बस बच्चों का पालन-पोषण और परिवार का गुजारा चल जाता है। कच्चे माल और मेहनत की लागत काफी बढ़ गई है। लेकिन उसके हिसाब से भुगतान नहीं बढ़ा है।

सौभाग्य के साथ जुड़ी है परिवारों की रोजी रोटी

नवरात्रि से पहले अब इन मूर्तिकारों के पास लगातार काम का दबाव है। कुछ कारीगरों ने नए ऑर्डर लेना बंद कर दिया है, क्योंकि पहले से मिले ऑर्डर को समय पर पूरा करना जरूरी है। सेक्टर-21 मुख्य मार्ग पर एक तरफ बांस और पराली से मूर्तियों के शुरुआती ढांचे तैयार हो रहे हैं, तो दूसरी तरफ कई मूर्तियां पूरी तरह बनकर बिक्री के लिए तैयार खड़ी हैं। माता शेरावाली की इन मूर्तियों को नवरात्रि शुरू होने के साथ लोग अपने घरों और पूजा स्थलों के लिए खरीदकर ले जाएंगे।

इन मूर्तियों के पीछे सिर्फ धार्मिक आस्था ही नहीं, बल्कि कारीगरों की कई दिनों की मेहनत और पूरे परिवार की रोजी-रोटी भी जुड़ी हुई है। विश्वजीत के लिए भगवान की मूर्ति बनाना सिर्फ रोजगार नहीं, बल्कि सौभाग्य की बात है। उनका कहना है कि जिस भगवान ने इंसान को बनाया, उनका रूप बनाने का अवसर मिलना अपने आप में बहुत अच्छी और सौभाग्य वाली बात है।

(नोएडा से पवन गुप्ता की रिपोर्ट)

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