Happy Dussehra 2026 Wishes: विजयादशमी पर अपनों को भेजें ये 15 बेस्ट बधाई संदेश, कोट्स और WhatsApp स्टेटस

Happy Dussehra 2026 Wishes: असत्य पर सत्य और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक महापर्व विजयादशमी (दशहरा) इस साल देश भर में पूरे उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। हिंदू पंचांग के मुताबिक साल 2026 में उत्तर, पश्चिम और मध्य भारत के अधिकांश हिस्सों में मुख्य दशहरा पर्व 20 अक्टूबर मंगलवार को मनाया जा रहा है, जबकि पश्चिम बंगाल, ओडिशा और पूर्वी भारत के कुछ हिस्सों में दुर्गा पूजा की स्थानीय परंपराओं और उदयातिथि के आधार पर 21 अक्टूबर बुधवार को विजयादशमी मनाई जाएगी। त्योहारों के इस पावन अवसर पर लोग एक-दूसरे को शुभकामनाएं भेजकर सुख, समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते हैं। अगर आप भी अपने परिवार, दोस्तों और प्रियजनों को व्हाट्सएप, फेसबुक या इंस्टाग्राम के जरिए बेहतरीन बधाई संदेश भेजना चाहते हैं तो यहां आपके लिए चुनिंदा शुभकामनाएं, कोट्स और स्टेटस दिए गए हैं।

विजयादशमी 2026: शुभ मुहूर्त और तिथियां

पंचांग के मुताबिक आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि 20 अक्टूबर को दोपहर 12 बजकर 50 मिनट से शुरू होकर 21 अक्टूबर को दोपहर 2 बजकर 11 मिनट तक रहेगी। श्रवण नक्षत्र का समय 19 अक्टूबर की दोपहर 3 बजकर 38 मिनट से शुरू होकर 20 अक्टूबर की शाम 6 बजकर 2 मिनट तक रहा। उत्तर भारत में 20 अक्टूबर को अपराह्न काल में दशमी तिथि रहने के कारण मुख्य रूप से इसी दिन दशहरा मनाया जा रहा है, जबकि माता की विदाई परंपरा के अनुसार 21 अक्टूबर को होगी।

अपनों को भेजने के लिए 15 बेस्ट बधाई संदेश और शुभकामनाएं

1 – शुभ विजयादशमी! भगवान राम की कृपा से आपके जीवन में हमेशा अच्छाई की जीत हो और हर चुनौती में आपको सफलता मिले। आपको और आपके परिवार को दशहरा की हार्दिक शुभकामनाएं!

2- Happy Dussehra! असत्य पर सत्य की विजय का यह पर्व आपके जीवन में नई रोशनी, सकारात्मकता और अपार खुशियां लेकर आए।

3- मां दुर्गा और भगवान श्री राम के आशीर्वाद से आपके घर में सुख, शांति और समृद्धि का वास हो। आप सभी को विजयादशमी की बहुत-बहुत बधाई!

4 – आइए इस दशहरे पर अपने अंदर के अहंकार, क्रोध और बुराइयों का दहन करें और नेकी के मार्ग पर चलने का संकल्प लें। हैप्पी दशहरा 2026!

5- सफलता और समृद्धि की कामना: आपकी मेहनत रंग लाए और आपके जीवन में हर कार्य में सफलता व आर्थिक स्थिरता बनी रहे। आपको और आपके अपनों को दशहरा की शुभकामनाएं।

6- परिवार के लिए संदेश: मां दुर्गा और भगवान राम के आशीर्वाद से हमारा परिवार हमेशा एकजुट, खुशहाल और स्वस्थ रहे। आप सभी को विजयादशमी की मंगलकामनाएं!

7- धैर्य, सत्य और साहस ही मनुष्य की सबसे बड़ी ताकत हैं। विजयादशमी का यह पवित्र पर्व आपके जीवन में नई शुरुआत लेकर आए।

8 – नया सवेरा, नई शुरुआत: पुरानी चिंताओं को पीछे छोड़कर विश्वास और आत्मविश्वास के साथ जीवन में आगे बढ़ें। आपको दशहरा की ढेरों बधाइयां!

9 – हर चुनौती एक नया अवसर लेकर आती है। भगवान राम आपको हर बाधा से लड़ने का साहस दें। Happy Dussehra 2026!

10 – आपके जीवन का हर अंधकार दूर हो और आपका भविष्य उम्मीदों और उजालों से जगमगा उठे। विजयादशमी की हार्दिक शुभकामनाएं!

WhatsApp Status के लिए

1 – अधर्म का नाश हो, धर्म की रक्षा हो, हर दिल में श्रीराम का वास हो। आप सभी को दशहरा की शुभकामनाएं!

2 – आपके और आपके परिवार के लिए यह पावन पर्व उत्तम स्वास्थ्य, सौभाग्य और ढेरों खुशियां लेकर आए। शुभ दशहरा!

3- रिश्तों में प्यार बढ़े, आपसी सौहार्द बना रहे और हर तरफ खुशहाली हो। विजयादशमी के इस पावन दिन पर यही कामना है।

4- हर बुराई को हराकार अच्छाई को अपनाने का दिन है दशहरा। आइए मिलकर इस पर्व को धूमधाम से मनाएं। Happy Vijayadashami!

5 – भगवान श्रीराम आपको बुद्धि, बल और पराक्रम प्रदान करें ताकि आप जीवन की हर कठिनाई पर विजय प्राप्त कर सकें। दशहरा की शुभकामनाएं!

प्रेरणादायक कोट्स (Inspirational Quotes for Dussehra)

  • सत्य को अपना मार्ग बनाएं और दयालुता को अपनी ताकत बनाएं।
  • भय जब आपका नियंत्रण छोड़ देता है, तभी वास्तविक साहस की शुरुआत होती है।
  • अहंकार और बुराई पर विजय पाना ही जीवन की सबसे बड़ी जीत है।
  • हर चुनौती इंसान को अंदर से मजबूत और बेहतर बनने का अवसर देती है।
  • आप इन संदेशों और कोट्स को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म या मैसेजिंग ऐप्स के जरिए शेयर करके अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ इस पावन पर्व की खुशियां बांट सकते हैं।

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Ramayana Budget: यश ने ‘रामायणम्’ 4,000 करोड़ के बजट को किया कन्फर्म, एक्टर ने फैंस से की ये खास अपील

Ramayana Budget: बेंगलुरु में ‘रामायणम्’ के हालिया ट्रेलर लॉन्च इवेंट में यश ने इस फिल्म फ्रेंचाइजी के ₹4,000 करोड़ के चर्चित बजट पर बात की। इस आने वाली फिल्म में रावण का किरदार निभाने वाले यश, नमित मल्होत्रा ​​के साथ इसके प्रोड्यूसर भी हैं। इवेंट में यश ने कन्फर्म किया कि ‘रामायणम्’ के दोनों भागों का कुल बजट ₹4,000 करोड़ है।

बेंगलुरु में ‘रामायण’ के हालिया ट्रेलर लॉन्च इवेंट में यश ने इस फिल्म फ्रेंचाइजी के ₹4,000 करोड़ के चर्चित बजट पर बात की। इस आने वाली महाकाव्य फिल्म में रावण का किरदार निभाने वाले यश, नमित मल्होत्रा ​​के साथ मिलकर इसे प्रोड्यूस भी कर रहे हैं। इवेंट में यश ने कन्फर्म किया कि ‘रामायणम्’ के दोनों भागों का कुल बजट ₹4,000 करोड़ है।

यश ने कहा- “मुझे पता है कि सोशल मीडिया पर नमित का बयान वायरल हो गया था। भारत में एक समस्या है- लोगों को यह पसंद नहीं आता जब आप पूरे आत्मविश्वास के साथ बात करते हैं। नमित के बयान के साथ भी यही हुआ। लेकिन पश्चिमी देशों में इसका बिल्कुल उल्टा है। अगर आप उनसे बहुत विनम्र होकर कहें कि हमने एक अच्छी फिल्म बनाई है तो वे हमारी फिल्म को एक छोटा प्रोजेक्ट मानकर खारिज कर देंगे। इसीलिए नमित ने पूरे आत्मविश्वास के साथ कहा कि यह फिल्म ₹4,000 करोड़ के बजट पर बन रही है। हमें ग्लोबल मार्केट के सामने भारतीय फिल्म इंडस्ट्री की ताकत साबित करनी है।”

उन्होंने आगे कहा- “रामायण दो भागों वाला प्रोजेक्ट है और दोनों फिल्मों का कुल बजट ₹4,000 करोड़ है। इस बजट में पोस्ट-प्रोडक्शन और प्रमोशन का खर्च भी शामिल है।”

‘आप गर्व के साथ रामायण के बारे में बात कर सकेंगे’

इस इवेंट में यश ने अपने फैंस को उनके लगातार सपोर्ट के लिए धन्यवाद दिया, भले ही उनकी आने वाली फिल्म ‘टॉक्सिक’ को मिली-जुली प्रतिक्रिया मिली हो। उन्होंने फैंस को भरोसा दिलाया कि वे ‘रामायणम्’ में बेहतरीन काम करने की पूरी कोशिश करेंगे और कहा कि वे इस फिल्म के बारे में गर्व से बात कर सकेंगे।

अभिनेता ने ‘रामायणम्’ के पीछे की अपनी बड़ी सोच के बारे में भी बात की और बताया कि वे चाहते हैं कि यह फिल्म दुनिया भर के दर्शकों तक पहुंचे। उन्होंने अपनी बात खत्म करते हुए कर्नाटक के लोगों से अपनी आने वाली फिल्मों के लिए आशीर्वाद और सपोर्ट मांगा।

‘रामायण’ के बारे में

नितेश तिवारी द्वारा निर्देशित और नमित मल्होत्रा ​​के ‘प्राइम फोकस स्टूडियोज’ द्वारा निर्मित, ‘रामायण’ हिंदू महाकाव्य पर आधारित दो भागों वाली एक फिल्म है। इस बड़े प्रोजेक्ट में रणबीर कपूर भगवान राम के रूप में, साई पल्लवी सीता के रूप में, यश रावण के रूप में और सनी देओल हनुमान के रूप में नजर आएंगे। फिल्म में रवि दुबे, अनुपम खेर, काजल अग्रवाल, रकुल प्रीत सिंह, विवेक ओबेराय, कुणाल कपूर, आदिनाथ कोठारे, अरुण गोविल, इंदिरा कृष्णन और लारा दत्ता भी अहम भूमिकाओं में हैं।

UP Holiday List 2026: 18 से 20 अक्टूबर तक दफ्तर बंद, चलिए जानते हैं मायावती, अखिलेश या योगी-किस सरकार में मिलीं ज्यादा छुट्टियां?

UP Holiday List 2026: त्योहारों के बीच उत्तर प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों को लगातार तीन दिन की छुट्टी मिलने जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महानवमी के मौके पर 19 अक्टूबर को सार्वजनिक अवकाश घोषित करने का फैसला लिया है। वहीं, रविवार की साप्ताहिक छुट्टी और मंगलवार को विजयादशमी की छुट्टी पहले से तय है। ऐसे में अब सरकारी दफ्तर लगातार तीन दिन बंद रहेंगे।

राज्य के सामान्य प्रशासन विभाग ने 2026 की छुट्टियों की पहले जारी की गई सूची में बदलाव को लेकर आदेश जारी किया है। हालांकि, पुराने आदेश की बाकी सभी बातें पहले की तरह लागू रहेंगी।

बता दें कि शिक्षकों और कर्मचारियों के संगठनों ने मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को पत्र लिखकर महानवमी पर छुट्टी देने की मांग की थी। इससे पहले राज्य सरकार ने 20 अक्टूबर को महानवमी और विजयादशमी, दोनों त्योहारों के लिए एक ही दिन की छुट्टी घोषित की थी।

दफ्तर कब तक बंद रहेंगे?

तारीखदिनस्थितिकारण
18 अक्टूबररविवारबंदसाप्ताहिक छुट्टी (महाअष्टमी)
19 अक्टूबरसोमवारबंदनए आदेश के तहत महानवमी की सार्वजनिक छुट्टी
20 अक्टूबरमंगलवारबंदपहले से घोषित विजयादशमी/दशहरा की छुट्टी
21 अक्टूबरबुधवारखुलेंगेसरकारी दफ्तर दोबारा खुलेंगे

क्या योगी सरकार ने पहली बार किसी त्योहार की छुट्टी बढ़ाई है?

नहीं। इस साल की शुरुआत में, राज्य सरकार ने 26 और 27 मार्च को राम नवमी के मौके पर दो दिन की छुट्टी की घोषणा की थी, और 15 जनवरी को मकर संक्रांति के लिए सार्वजनिक अवकाश था। अक्टूबर 2024 में, सरकार ने नवमी के दिन छुट्टी घोषित की।

अलग-अलग सरकारों के दौरान यूपी में छुट्टियों को लेकर क्या बदलाव आए हैं?

राज्य सरकारें पहले भी अपनी छुट्टियों की सूची का इस्तेमाल एक राजनीतिक संकेत देने के लिए करती रही हैं। मई 2007 में मायावती सरकार ने 9 अक्टूबर को-जो बीएसपी संस्थापक कांशी राम की पुण्यतिथि है-छुट्टी घोषित की थी। हालांकि, अक्टूबर 2012 में अखिलेश यादव सरकार ने इस छुट्टी को खत्म कर दिया।

बता दें कि सपा सरकार ने महर्षि कश्यप और निषादराज जयंती, अजमेर उर्स, तथा चंद्रशेखर और महाराणा प्रताप की जयंती पर भी छुट्टियां घोषित की थीं।

वहीं अप्रैल 2017 में, योगी कैबिनेट ने 15 छुट्टियां रद्द कर दीं थी, जिनमें चेटी चंड, परशुराम जयंती, छठ पूजा और वाल्मीकि जयंती शामिल थीं। सरकार का कहना था कि स्कूलों को इन महापुरुषों के बारे में पढ़ाना चाहिए, न कि उनके नाम पर छुट्टी देनी चाहिए।

सरकारछुट्टीफैसलासमयकिससे संबंधित
मायावती (BSP)कांशीराम की पुण्यतिथि (9 अक्टूबर)नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट के तहत छुट्टी घोषितमई 2007बहुजन समाज के प्रमुख नेता
मायावती (BSP)कांशीराम की जयंती (15 मार्च)यूपी की छुट्टियों की सूची में शामिल2012 तकबहुजन समाज के प्रमुख नेता
अखिलेश यादव (SP)कांशीराम की पुण्यतिथि (9 अक्टूबर)छुट्टी रद्द कीअक्टूबर 2012BSP सरकार के फैसले में बदलाव
अखिलेश यादव (SP)महर्षि कश्यप और निषादराज जयंती (5 अप्रैल)छुट्टी घोषित की2012–2017धार्मिक और सामुदायिक महत्व
अखिलेश यादव (SP)अजमेर गरीब नवाज उर्सछुट्टी घोषित की2012–2017धार्मिक महत्व
अखिलेश यादव (SP)चंद्रशेखर जयंती (17 अप्रैल) और महाराणा प्रताप जयंती (9 मई)छुट्टी घोषित की2012–2017महापुरुषों की जयंती
योगी आदित्यनाथ (BJP)चेती चंद, परशुराम जयंती, अजमेर उर्स, जमात-उल-विदा, विश्वकर्मा पूजा, वाल्मीकि जयंती, छठ पूजा और ईद-ए-मिलाद समेत 15 छुट्टियांछुट्टियां रद्द कींअप्रैल 2017त्योहार और जयंती
योगी आदित्यनाथ (BJP)महानवमी (11 अक्टूबर)छुट्टी घोषित की2024धार्मिक त्योहार
योगी आदित्यनाथ (BJP)मकर संक्रांति (15 जनवरी)छुट्टी घोषित की2026धार्मिक त्योहार
योगी आदित्यनाथ (BJP)रामनवमी (26–27 मार्च)दो दिन की छुट्टी घोषित की2026धार्मिक त्योहार
योगी आदित्यनाथ (BJP)महानवमी (19 अक्टूबर)छुट्टी घोषित की2026धार्मिक त्योहार

क्या योगी ने नवरात्रि के दौरान कुछ और भी कहा?

छुट्टी का यह आदेश नवरात्रि के छठे दिन आया। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने महिलाओं की शक्ति के बारे में एक संदेश भी दिया। उन्होंने इस संदेश के जरिए लड़कियों और खेलों के क्षेत्र में अपनी सरकार के कामकाज को सामने रखा।

मां कात्यायनी को समर्पित इस दिन, योगी ने सोशल मीडिया पर एक संदेश साझा किया, जिसमें उन्होंने देवी को महिलाओं के साहस, संकल्प और वीरता का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा, “सभी बाधाओं और राक्षसी प्रवृत्तियों का नाश करने वाली मां कात्यायनी, महिलाओं के अदम्य साहस, अटूट संकल्प और अजेय वीरता का प्रतीक हैं।”

उन्होंने दावा किया कि 2017 से पहले, “राज्य में डर और अराजकता का माहौल था, जहां बेटियों के सपनों को दबा दिया जाता था, उनका आत्मविश्वास कुचल दिया जाता था और मौकों की कमी के कारण उनकी प्रतिभा मुरझा जाती थी।”

सीएम योगी ने कहा कि खेल के मैदान माफियाओं के नियंत्रण में थे, और लड़कियों के सपनों को उड़ान मिलने के बजाय, उन्हें “चार दीवारों के भीतर कैद” कर दिया गया था।

उन्होंने कहा, “पिछले साढ़े नौ वर्षों में, राज्य में बदलाव का एक नया अध्याय लिखा गया है। डर की जगह सुरक्षा ने ले ली है, उपेक्षा की जगह प्रोत्साहन ने, और संसाधनों की कमी की जगह खेल सुविधाओं के विस्तार ने ले ली है।”

योगी ने खेलों से जुड़ी किन सुविधाओं का जिक्र किया?

मुख्यमंत्री ने कहा कि अब लड़कियों के पास अपनी प्रतिभा को निखारने के लिए एक मजबूत आधार है, जिसमें “गांव के खेल के मैदानों और ब्लॉक-स्तरीय मिनी स्टेडियमों से लेकर जिला स्टेडियम, मंडल स्तरीय खेल कॉलेज और मेरठ में स्थित मेजर ध्यानचंद खेल विश्वविद्यालय” शामिल हैं।

उन्होंने ओलंपिक, कॉमनवेल्थ और एशियाई खेलों के पदक विजेताओं को मिलने वाले लाखों-करोड़ों रुपये के नकद पुरस्कारों और खिलाड़ियों की सीधी भर्ती का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ये चीजें प्रतिभा को बढ़ावा देती हैं, उपलब्धियों का सम्मान करती हैं और खिलाड़ियों के भविष्य को सुरक्षित बनाती हैं।

मुख्यमंत्री ने किन महिला खिलाड़ियों के नाम गिनाए?

सीएम योगी आदित्यनाथ ने एथलेटिक्स में पारुल चौधरी, प्रियंका गोस्वामी, प्राची चौधरी और अन्नू रानी; जूडो में अस्मिता डे; क्रिकेट में दीप्ति शर्मा और मेघना सिंह; हॉकी में वंदना कटारिया; और कुश्ती में दिव्या काकरान का नाम लिया। उन्होंने कहा कि कॉमनवेल्थ और एशियाई खेलों में उनके प्रदर्शन ने भारत और उत्तर प्रदेश, दोनों का मान बढ़ाया है।

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अमित शाह का इतना भरोसा!

अमित शाह ने इस सप्ताह खम ठोंक कर कहा कि विपक्ष कुछ कर लें 2029 में मोदी जीतेंगे। कांग्रेस की लगातार चौथी हार होगी। सवाल है यह शाह की गणित है या अहंकार? आखिर 2029 के चुनाव में अभी ढाई वर्ष से अधिक का समय है। तब तक देश की आर्थिकी का कैसा कबाड़ा होगा? 35 वर्ष की उम्र से कम नौजवानों की उम्मीदों और बेकारी का गुस्सा किस करवट बैठेगा? नैरेटिव कैसा चलेगा? ट्रंप, शी जिनपिंग, मुनीर जैसी विदेशी ताकतें भारत का कितना टेंटुआ दबा चुकी होंगी? इसलिए कि घर के अंदर हो या घर के बाहर कोई ऐसा है नहीं, जिसे मोदी सरकार ने ठगा नहीं! बावजूद इसके अमित शाह के लिए 2029 का चुनाव चुटकी बजा कर जीतना वैसा ही है जैसे महाराष्ट्र, बिहार, बंगाल जीता और आने वाले महीनों में जीतेंगे। मानों चुनाव होना महज औपचारिकता हो। नतीजा उन्होंने पहले से लिखाया हुआ हो। 13 अक्टूबर का उनका वाक्य था, ‘2029 के चुनाव में भी कांग्रेस बुरी तरह से हारेगी’।

यों राजनीति में नेता की मजबूरी होती है कि वह आत्मविश्वास दिखाए। पर अमित शाह का हुंकारा उस समय और परिस्थितियों में है, जिसमें अब गारंटीशुदा माना जा रहा है कि मतदाता सूचियों में वोटरों के नाम कटवा कर, हटवा कर भाजपा पश्चिम बंगाल में चुनाव जीती है। 2024 के लोकसभा चुनाव में मतदाताओं के मोदी से मोहभंग को मोदी सरकार-चुनाव आयोग की मशीनरी ने वोट सूचियों में हेराफेरी से पलटा है। देश अब करोड़ों नामों (15 करोड़ मतदाताओं के अनुमान!) के कटने, नए नाम जुड़वाने की शर्तों, माता-पिता के दस्तावेजों, प्रवासी मजदूरों और पहली बार वोट देने वाले नौजवानों की पात्रता पर तलवार लटकी देख रहा है। चुनाव आयोग अराजक सूचियां बना रहा है!

सोचें, इसके पीछे की राजनीति पर। जरा सोचें। चुनाव में जनता किसे वोट देगी, उससे पहले यह तय होता है कि वोट देने वालों की सूची में कौन होगा? फिर यह कि किस इलाके के वोट किस लोकसभा क्षेत्र में (आगे की सीट परिसीमन योजना) गिने जाएंगे! फिर इरादा महिला आरक्षण लागू कराने का है। मतलब किस सीट पर किस तरह का उम्मीदवार खड़ा करने में मोदी-शाह का अपर हैंड। मुझे लग रहा है कि तीनों बातें चुनाव से पहले तय होंगी। तीनों के नियम, प्रक्रियाएं और प्रशासनिक फैसले (याकि सरकार) हैं। अब यदि इसी गेमप्लान में मोदी-शाह अपने चक्रवर्ती राजनीतिक भविष्य की गारंटी मान काम करें, सुप्रीम कोर्ट, चुनाव आयोग आदि सभी रास्ता बनवाएं तो सड़क पर राहुल गांधी या जेनरेशन ज़ेड कितना ही आंदोलन करें, हल्ला मचाएं पर 2029 के नतीजे मोदी के लिए पश्चिम बंगाल जैसे होंगे।

असली सवाल बूथ का है। मोदी की कमान में भाजपा ने बूथवार मतदाताओं का राजनीतिक हिसाब रखने के पेशेवरों (सर्वेयर, पन्ना प्रमुखों आदि) की फौज बनाई हुई है। इनके पास मतदाताओं की केवल जानकारी ही नहीं है, बल्कि मतदाता सूचियों में मनमाफिक छंटनी की सामर्थ्य भी है। फॉर्म-7 सबमिट करो और नाम कटाओ। फिलहाल इतना तो प्रमाणित है कि एसआईआर के बहाने बड़ी संख्या में मौजूद मतदाताओं के नाम हटे हैं। और नए नौजवानों के वोटर पंजीकरण की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल हैं। नौजवान पहले यों भी कम वोटर बनते थे लेकिन अब तो उनके आगे पंजीकरण में अतिरिक्त दस्तावेजी शर्तों को ऐसा बनाया है कि यूथ भले बेरोजगार भटकता रहे, सड़क पर आंदोलन करे लेकिन वोटर बनने के महत्त्व के प्रति लापरवाह बना रहेगा। जैसे नौकरी के आवेदनों से निराशा है वैसे ही वोटर बनने की भागदौड़ से बेरुखी रही तो 2029 में मोदी 2014 से भी बड़े बहुमत से जीतेंगे।

यही अमित शाह के आत्मविश्वास का बीजमंत्र है। सो, जेनरेशन ज़ेड का सड़क पर गुस्सा एक बात है और मतदाता सूची में उनका नाम होना दूसरी। फिर मतदान केंद्र पहुंचकर वोट डालना तीसरी। यदि पहली बार वोट देने वाले लाखों पात्र नौजवानों के पंजीकरण में बाधाएं हों तो उनकी राजनीतिक सक्रियता और चुनावी भागीदारी के बीच फासला अपने आप होगा।

अमित शाह ने कांग्रेस को याद दिलाया कि वह एसआईआर से पहले भी चुनाव हारती रही है। सही है। लेकिन इससे एसआईआर के सवाल का जवाब कैसे है? कांग्रेस 2014 और 2019 में हारी, 2024 में भी सरकार नहीं बना सकी। मगर 2024 में भाजपा की अपनी सीटें 303 से घटकर 240 हुई थीं। कांग्रेस 52 से 99 पर पहुंची थी। तब क्या उस चुनाव का सबक केवल कांग्रेस की हार था? या यह भी था कि पूर्ण बहुमत वाली भाजपा को गठबंधन के सहारे सरकार बनानी पड़ी? भाजपा के जीत के लाले पड़े तो एसआईआर को सुनियोजित नए फॉर्म, नई प्रक्रियाओं याकि झंझटों से भरपूर बनाने की धांधलेबाजी हुई।

बैंगलूरू में बेहतरीन समापन के बीच बारिश का साया, अभ्यास सत्र भी रद्द

INDvsWI भारत बनाम वेस्टइंडीज के पांचवे टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैच में जहां प्रशंसक अंतिम ओवर तक के मुकाबले के सपने सजाए हैं वहां काले बादलों का कुछ अलग ही इरादा लगता है। बैंगलुरू में बारिश शनिवार के दिन मैच का मजा किरकिरा कर सकती है।

इसका अंदाजा इस ही बात से लगाया जा सकता है कि टीमों के लिए जरूरी अभ्यास सत्र आज बारिश के कारण रद्द करना पड़ा, हालांकि इंडीज भी अभ्यास सत्र में हिस्सा नहीं ले पाई लेकिन मेजबान टीम पर सीरीज जीतने का ज्यादा दबाव है।

मौसम विभाग की मानें तो कल भी हालात ठीक नहीं है। शाम 5 बजे 66 प्रतिशत बारिश के आसार है तो 6 बजे 68 प्रतिशत। मैच की शुरुआत 7 बजे 69 प्रतिशत  बारिश के आसार है। 8 और 9 बजे यह आंकड़ा 70 प्रतिशत तक जा रहा है। वहीं 10 बजे 69 प्रतिशत पर यह आंकड़ा टिका हुआ है।

भारत के लिये समस्या शीर्ष क्रम से शुरू होती है। संजू सैमसन और अभिषेक शर्मा ने अभी तक तीन अर्धशतक जमाये हैं लेकिन सलामी जोड़ी के रूप में उनका योगदान 29, 42, 7 और 60 रहा है।ईशान किशन, कप्तान श्रेयस अय्यर और नमन धीर बड़ी पारियां खेलने में नाकाम रहे । लखनऊ में पहले टी20 में 102 रन बनाने के बाद श्रेयस ने अगले तीन मैचों में 40, 1 और 16 रन बनाये । यहां हारने से बतौर कप्तान श्रेयस की छवि को ठेस पहुंचेगी।

तीसरे नंबर पर ईशान ने 43, 37 और छह रन बनाये हैं। वहीं धीर की पारियां 4, 10 और 0 की रही है।एम चिन्नास्वामी स्टेडियम की सपाट पिच बल्लेबाजों की ऐशगाह मानी जाती है। इस मैदान पर हालांकि अक्टूबर 2024 में न्यूजीलैंड के खिलाफ पहले टेस्ट के बाद से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट नहीं खेली गई है।पिछले मैच में कंधे की चोट का शिकार हुए अर्शदीप सिंह की जगह अनुभवी तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार की टीम में वापसी हुई है।

वेस्टइंडीज के लिये कप्तान शाई होप और शेरफान रदरफोर्ड 261 और 221 रन बना चुके हैं और श्रृंखला में सर्वाधिक रन बनाने वाले बल्लेबाजों में शीर्ष दो स्थानों पर हैं।वहीं पहले दो टी-20 मैचों में पिटने वाली कैरिबियाई गेंदबाजी ने पिछले दो मुकाबलों में भारतीय बल्लेबाजी को परेशानी में डाला है वह भी तेज शरुआत मिलने के बाद इससे टीम के गेंदबाजों को आत्मविश्वास मिला है।

भारत: श्रेयस अय्यर (कप्तान), ईशान किशन, संजू सैमसन (विकेटकीपर), नमन धीर, वैभव सूर्यवंशी, तिलक वर्मा (उपकप्तान), अभिषेक शर्मा, शिवम दुबे, नितीश कुमार रेड्डी, अक्षर पटेल, भुवनेश्वर कुमार , अर्शदीप सिंह, कुलदीप यादव, प्रिंस यादव, रवि बिश्नोई, मयंक यादव।

वेस्टइंडीज: शाई होप (कप्तान और विकेटकीपर), ज्वेल एंड्रयू (विकेटकीपर), शिमरोन हेटमायर, आमिर जांगू (विकेटकीपर), कामिल पूरन, रोवमैन पॉवेल, शेरफान रदरफोर्ड, क्वेंटिन सैम्पसन, रोस्टन चेज़, कीमो पॉल, रोमारियो शेफर्ड, शमर स्प्रिंगर, मैथ्यू फोर्ड, अकील होसेन, शमर जोसेफ, गुडाकेश मोती।

समय:-शाम 7:00 बजे

कहां देखें– स्टार स्पोर्ट्स नेटवर्क या जियो हॉटस्टार पर

Nayyi Navelli Review: सुपरनैचुरल पावर के साथ यामी गौतम ने मचाया गदर, जानें कैसी है ‘नई नवेली’

फिल्म- नई नवेली

निर्देशक- बालाजी मोहन

कलाकार- यामी गौतम, आदिनाथ एम कोठारे, अनुराग ठाकुर, मीता वशिष्ठ, सुनीता राजवर आदि

रेटिंग- 3.5/5

Nayyi Navelli Review: क्या एक नई नवेली दुल्हन सिर्फ अपने परिवार की खुशियों के लिए घर में आती है? या उसके आने के पीछे कोई ऐसा मकसद भी हो सकता है, जो पूरे परिवार की दुनिया बदल दे? निर्देशक बालाजी मोहन की नई नवेली इसी सवाल को दिलचस्प अंदाज में पेश करती है। यामी गौतम और आदिनाथ एम. कोठारे की यह फिल्म प्यार, रहस्य, कॉमेडी और जादुई शक्तियों के जरिए भारतीय लोककथाओं की दुनिया में ले जाती है। फिल्म का अंदाज थोड़ा अलग है और यही इसकी सबसे बड़ी खासियत भी है।

फिल्म की कहानी

कहानी मोहनी (यामी गौतम) और राजा अवस्थी (आदिनाथ एम. कोठारे) के प्यार से शुरू होती है। दोनों की शादी जल्दबाजी में हो जाती है, लेकिन इस फैसले के पीछे एक खास वजह छिपी है। कहानी जैसे-जैसे आगे बढ़ती है, अवस्थी परिवार की जिंदगी में कई ऐसे मोड़ आते हैं, जो दर्शकों को सोचने पर मजबूर करते हैं।

राजा का भाई बंटू अवस्थी (अनुराग ठाकुर) अपनी भाभी मोहनी पर शक करने लगता है। उसे लगता है कि मोहनी कोई साधारण महिला नहीं, बल्कि एक डायन है। लेकिन फिल्म का असली खेल यहीं शुरू होता है। मोहनी के पास जादुई शक्तियां तो हैं, मगर उसके रहस्य को सिर्फ डायन होने के शक तक सीमित नहीं किया जा सकता। आखिर वह इस परिवार से क्यों जुड़ी है और उसका असली मकसद क्या है? इन सवालों के जवाब ही एक्साइटमेंट पैदा करते हैं।

फिल्म की कहानी में भारतीय लोककथाओं और धार्मिक कहानियों के संदर्भ भी शामिल हैं। रामायण से जुड़ने वाली इसकी कड़ियां कहानी को एक सांस्कृतिक आयाम देती हैं। हालांकि फिल्म इन पहलुओं को किस तरह अपनी कहानी का हिस्सा बनाती है, यही इसका दिलचस्प पक्ष है।

यामी गौतम का चला जादू

मोहनी के किरदार में यामी गौतम पूरी फिल्म पर अपनी छाप छोड़ती हैं। उनके अभिनय में सहजता है और चेहरे के हाव-भाव कई बार बिना ज्यादा संवादों के भी किरदार की भावनाएं जाहिर कर देते हैं। उनका खूबसूरत लुक मोहिनी का राज है, जिसे वो और आकर्षक बनाता है। यामी इस किरदार में सिर्फ ग्लैमर नहीं बल्कि गंभीरता और आत्मविश्वास भी लेकर आती हैं।

आदिनाथ एम. कोठारे राजा के रूप में उनका अच्छा साथ देते हैं। वहीं अनुराग ठाकुर बंटू के किरदार में कहानी के शक और कॉमेडी वाले पहलू को आगे बढ़ाते हैं। सुनीता राजवर, आदित्य कुलश्रेष्ठ, मीता वशिष्ठ, सुष्मिता मुखर्जी, प्रतीक पचौरी, सोनल झा और सुनील सिन्हा सहित बाकी कलाकार भी अपने हिस्से के सीन में प्रभाव छोड़ते हैं। फिल्म में डराने वाले पलों से लेकर हंसाने वाले सीन्स तक, कलाकारों का प्रदर्शन इसकी ताकत है।

डायलॉग और तकनीकी मजबूती

फिल्म की सबसे अच्छी बात इसका देसी अंदाज है। डायलॉग में देसीपन, जो कहानी को आम दर्शकों के करीब लाता है। कई सीन्स में कॉमेडी नैचुलर लगती है और कुछ पल ऐसे हैं, जिन्हें सोशल मीडिया पर मीम्स के रूप में भी पसंद किया जा सकता है।

तकनीकी पक्ष की बात करें तो फिल्म का वीएफएक्स इसके बजट के हिसाब से अच्छा है। सिनेमैटोग्राफी में कुछ खूबसूरत शॉट्स देखने को मिलते हैं। खास बात यह है कि फिल्म का बड़ा हिस्सा एक ही लोकेशन पर शूट होने के बावजूद प्रस्तुति में यूनिकनेस बनाए रखने की कोशिश की गई है। निर्देशक बालाजी मोहन इस सीमित सेटिंग को कहानी के अनुरूप इस्तेमाल करते हैं। हालांकि फिल्म की रफ्तार कुछ जगहों पर बेहतर हो सकती थी। एडिटिंग में थोड़ी और कसावट इसे ज्यादा इंप्रेसिव बना सकती थी। वहीं म्यूजिक जुबान पर चढ़ने वाला नहीं है।

क्या ये है फैमली फिल्म?

नई नवेली में मनोरंजन के साथ सामाजिक कुरीतियों पर तंज कसने वाले डायलॉग भी हैं। फिल्म कुछ जगहों पर मैसेज देने की कोशिश करती है, जबकि लोककथाओं और रामायण से जुड़े संदर्भ इसकी कहानी को भारतीय सांस्कृतिक बैकग्राउंड से जोड़ते हैं। यही पहलू इसे सिर्फ एक सामान्य कॉमेडी या फैंटेसी फिल्म से थोड़ा अलग बनाता है। अगर आप परिवार के साथ कुछ अलग देखना चाहते हैं तो यह फिल्म एक ऑप्शन हो सकती है।

देखें या नहीं

नई नवेली की सबसे बड़ी जीत इसका अनोखा विचार और यामी गौतम का काम है। देसी डायलॉग, को स्टार्स की मौजूदगी और भारतीय लोककथाओं से जुड़ाव इसे मनोरंजक बनाते हैं। वहीं एडिटिंग और म्यूजिक बेहतर हो सकता था। कुल मिलाकर बालाजी मोहन की यह फिल्म कुछ कमियों के बावजूद एक अलग तरह का सिनेमाई अनुभव देने की कोशिश करती है। अगर आपको कॉमेडी और सुपरनैचुलर पावर वाली फिल्म देखना का मन है तो नई नवेली आपके लिए ट्रीट बन सकती है।

डेनमार्क ओपन के पहले दौर में ही बाहर हुए सात्विक-चिराग

Satvik Chirag

डेनमार्क में भारत के बड़े खिलाड़ियों के जल्दी बाहर होने वालों की लिस्ट में सात्विक-चिराग भी शामिल हो गए हैं। उनसे पहले मंगलवार को पीवी सिंधु और लक्ष्य सेन भी अपने शुरुआती मैच हार गए थे।

बुधवार को डेनमार्क ओपन में भारत की टॉप पुरुष डबल्स जोड़ी सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी को चौंकाने वाली हार का सामना करना पड़ा और वे पहले ही राउंड में बाहर हो गए। पुरुष डबल्स बैडमिंटन रैंकिंग में पांचवें स्थान पर मौजूद सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी की जोड़ी को चीन के हे जिटिंग और रेन जियांगयु (वर्ल्ड नंबर 37) से 12-21, 21-15, 21-19 से हार मिली।

मंगलवार को पीवी सिंधु और लक्ष्य सेन भी सुपर 750 टूर्नामेंट के पहले राउंड में बाहर हो गए थे। सात्विक-चिराग ने आत्मविश्वास के साथ शुरुआत की और पहले गेम में दबदबा बनाए रखा, लेकिन दूसरे गेम में बाजी पलट गई। हे जिटिंग और रेन जियांगयु ने इंटरवल तक 11-4 की बढ़त बना ली और मैच को निर्णायक गेम (डिसाइडर) तक ले गए।

आखिरी गेम में काफी कड़ा मुकाबला रहा। चीनी जोड़ी ने इंटरवल तक 11-10 की मामूली बढ़त बनाई और फिर अपनी बढ़त को बनाए रखते हुए जीत हासिल की, जिससे भारतीय जोड़ी टूर्नामेंट से बाहर हो गई।हे जिटिंग और रेन जियांगयु के खिलाफ चार मुकाबलों में सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी की यह पहली हार थी।

वहीं दूसरी ओर, पुरुष सिंगल्स में आयुष शेट्टी भी पहले राउंड में बाहर हो गए। उन्हें इंडोनेशिया के अल्वी फरहान से 21-11, 13-21, 21-10 से हार का सामना करना पड़ा। पहले गेम में आयुष शेट्टी की शुरुआत धीमी रही और जल्द ही वे 11-4 से पिछड़ गए, जबकि अल्वी फरहान ने बिना किसी परेशानी के पहला गेम जीत लिया।

इसके बाद भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी ने दूसरे गेम में वापसी की; इंटरवल तक वे 11-8 से आगे थे और उसके बाद सिर्फ़ पाँच पॉइंट गंवाकर मैच को निर्णायक गेम तक ले गए।

हालाँकि, निर्णायक गेम भी पहले गेम जैसा ही रहा; आयुष शेट्टी इंटरवल तक 11-3 से पिछड़ गए और कभी वापसी नहीं कर पाए, जिससे अल्वी फरहान ने मैच जीत लिया और अगले दौर में अपनी जगह पक्की कर ली। अल्वी फरहान के हाथों आयुष शेट्टी की यह हार, इस इंडोनेशियाई खिलाड़ी के खिलाफ़ खेले गए छह मैचों में उनकी चौथी हार थी।

उनके बाहर होने का मतलब यह भी है कि पुरुष सिंगल्स में अब किदांबी श्रीकांत ही एकमात्र भारतीय खिलाड़ी बचे हैं।वहीं, आज बाद में महिला सिंगल्स में अश्मिता चालिहा, देविका सिहाग और उन्नति हुड्डा भी खेलती नज़र आएँगी। महिला डबल्स में ट्रेसा जॉली-गायत्री गोपीचंद और रुतपर्णा पांडा-श्वेतपर्णा पांडा की जोड़ियाँ भी मुक़ाबला करेंगी।

Sword Raas Video: एक हाथ से ड्राइव करती जीप, दूसरे हाथ से भांजती तलवार… क्षत्रिय राजपूत महिलाओं का ये तलवार रास हो गया वायरल

नवरात्रि में गरबा और डांडिया की रौनक तो आपने खूब देखी होगी, लेकिन गुजरात में उत्सव का एक ऐसा नजारा भी देखने को मिला, जिसने लोगों का ध्यान खींच लिया। यहां महिलाएं हाथों में तलवार लेकर मैदान में उतरीं और अपनी पारंपरिक कला का प्रदर्शन किया। राजकोट और जामनगर में राजपूत समाज की महिलाओं ने तलवार रास के जरिए वीरता और संस्कृति की अनूठी झलक पेश की। पारंपरिक पोशाक, हाथों में चमचमाती तलवारें और आत्मविश्वास से भरी महिलाओं का अंदाज इस आयोजन को खास बनाता है।

यह प्रदर्शन केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं है, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा को सहेजने की कोशिश भी है। खास बात यह है कि इस कला को सीखने के लिए महिलाओं को बाकायदा प्रशिक्षण दिया जाता है और नवरात्रि से पहले लंबे समय तक अभ्यास कराया जाता है।

गरबा के साथ दिखा वीरता और परंपरा का संगम

गुजरात में नवरात्रि का नाम आते ही गरबा और डांडिया की तस्वीर सामने आती है। हालांकि, राजकोट में होने वाला तलवार रास इस उत्सव को एक अलग पहचान देता है। यहां महिलाएं तलवारों के साथ पारंपरिक दांव-पेच और करतब दिखाती हैं। राजकोट पैलेस के ऐतिहासिक मैदान में क्षत्रिय समाज की महिलाएं इस प्रस्तुति के जरिए अपनी परंपरा को आगे बढ़ा रही हैं। आयोजकों से जुड़ी जानकारी के अनुसार, यह कार्यक्रम पिछले करीब 18 वर्षों से आयोजित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य प्राचीन गरबा और रास संस्कृति को सहेजकर अगली पीढ़ी तक पहुंचाना है।

तलवार चलाना नहीं जानने वाली महिलाओं को भी मिलती है ट्रेनिंग

इस आयोजन की खास बात यह है कि इसमें भाग लेने के लिए पहले से तलवार चलाना आना जरूरी नहीं है। कार्यक्रम से जुड़ी एक महिला ने समाचार एजेंसी आईएएनएस को बताया कि संस्था में महिलाओं को बारीकी से प्रशिक्षण दिया जाता है। उन्होंने कहा कि जब दूर-दूर से लोग इस अनोखी प्रस्तुति को देखने पहुंचते हैं, तो उन्हें गर्व महसूस होता है। इस परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए महिलाओं ने काफी मेहनत की है। प्रशिक्षण के दौरान उन महिलाओं को भी सिखाया जाता है, जिन्हें पहले तलवार चलाने का अनुभव नहीं होता।

डेढ़ महीने पहले से शुरू हो जाती है तैयारी

इस कार्यक्रम से करीब 15 वर्षों से जुड़ी एक वरिष्ठ सदस्य ने बताया कि तलवार रास में क्षत्रिय समाज की महिलाएं विशेष रूप से हिस्सा लेती हैं। उनके मुताबिक, नवरात्रि शुरू होने से लगभग डेढ़ महीने पहले ही अभ्यास शुरू हो जाता है। पैलेस ग्राउंड में होने वाली इस प्रस्तुति में तलवार के अलग-अलग दांव और स्टंट दिखाए जाते हैं। लगातार अभ्यास के जरिए महिलाएं अपने प्रदर्शन को तैयार करती हैं।

परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की कोशिश

राजकोट और जामनगर में महिलाओं का यह प्रदर्शन नवरात्रि के पारंपरिक उत्सव में एक अलग रंग जोड़ता है। जहां गरबा और डांडिया भक्ति और सामूहिक उल्लास का प्रतीक हैं, वहीं तलवार रास के जरिए महिलाएं अपनी सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक युद्ध-कला से जुड़ी परंपराओं को जीवित रखने का प्रयास कर रही हैं।

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अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस पर UNICEF India ने स्मृति मंधाना को यह सम्मान

Unicef India ने  भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान स्मृति मंधाना को संयुक्त राष्ट्र बाल अधिकार एजेंसी की सेलिब्रिटी एडवोकेट के रूप में नियुक्त करने की घोषणा की। इस नई भूमिका में, मंधाना बच्चों और युवाओं के समान अधिकारों और अवसरों की वकालत करने के अपने पूर्व के कार्यों को आगे बढ़ाएंगी।

यह नियुक्ति 11 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस पर की गई, जो लड़कियों के अधिकारों, सुरक्षा, क्षमता और नेतृत्व पर प्रकाश डालती है, साथ ही उन बाधाओं पर भी जो अभी भी उनके विकल्पों को सीमित करती हैं। भारत की खेल आइकन और युवा महिलाओं व लड़कियों के लिए रोल मॉडल, मंधाना लड़कियों को खेलने और आगे बढ़ने के लिए समान अवसरों की वकालत करेंगी। वह यूनिसेफ इंडिया के प्रयासों को आगे बढ़ाने में सहयोग देंगी ताकि किशोरियों को सशक्त बनाया जा सके, उनके स्वास्थ्य और कल्याण को बढ़ावा दिया जा सके और वे अपनी पूरी क्षमता तक पहुंच सकें।

इस अवसर पर मंधाना ने कहा, “मैं यूनिसेफ इंडिया की सेलिब्रिटी एडवोकेट के रूप में जुड़कर सम्मानित महसूस कर रही हूं। बचपन में क्रिकेट खेलने ने मुझे सिखाया कि हर सपना एक अवसर से शुरू होता है। मेहनत, दृढ़ संकल्प और प्रोत्साहन से वह अवसर कुछ असाधारण बन सकता है। हर बच्चे और युवा को बड़ा सपना देखने और अपनी पूरी क्षमता तक पहुंचने का अवसर मिलना चाहिए।”

यूनिसेफ इंडिया की प्रतिनिधि सिंथिया मैककैफ्री ने इस अवसर पर कहा, “हम अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस पर स्मृति मंधाना का यूनिसेफ इंडिया की सेलिब्रिटी एडवोकेट के रूप में स्वागत करते हुए प्रसन्न हैं। स्मृति की यात्रा, एक महत्वाकांक्षी युवा एथलीट से वैश्विक क्रिकेट आइकन तक, लड़कियों को दिखाती है कि जब प्रतिभा को अवसर मिलता है तो क्या संभव है। ऐसे समय में जब भारत दुनिया के सबसे बड़े बच्चों और युवाओं की पीढ़ी का घर है, लड़कियों के अधिकारों, नेतृत्व और कल्याण में निवेश करना किसी देश का सबसे समझदार निवेश है। हम स्मृति के साथ साझेदारी करने की आशा करते हैं ताकि हर लड़की को सीखने, खेलने, नेतृत्व करने और अपनी क्षमता पूरी करने का अवसर मिल सके।”

अर्जुन पुरस्कार प्राप्त और भारत की अग्रणी खिलाड़ियों में से एक, मंधाना, भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान हैं। वह उस टीम का हिस्सा थीं जिसने 2025 में भारत को पहला आईसीसी महिला क्रिकेट विश्व कप खिताब दिलाया। उसी वर्ष, वह पहली महिला बनीं जिन्होंने एक कैलेंडर वर्ष में 1,000 से अधिक वनडे रन बनाए, और पांच वनडे शतक लगाकर रिकॉर्ड बनाया। 2026 में, वह महिला अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर और महिला टी20 अंतरराष्ट्रीय में अग्रणी रन-स्कोरर बनीं। वह विश्व की शीर्ष रैंक वाली महिला वनडे बल्लेबाज हैं और दो बार आईसीसी महिला क्रिकेटर ऑफ द ईयर रह चुकी हैं।

मंधाना ने पहले यूनिसेफ-आईसीसी अभियानों का समर्थन किया है जो लैंगिक समानता और जीवन कौशल पर केंद्रित थे। वह यूनिसेफ के प्रॉमिस टू चिल्ड्रन अभियान की भी समर्थक रही हैं।

यूनिसेफ सरकारों, समुदायों, नागरिक समाज और युवाओं के साथ मिलकर किशोरियों के अधिकारों, एजेंसी और अवसरों को आगे बढ़ाने के लिए काम करता है। लड़कियों को ज्ञान, जीवन कौशल, नेतृत्व के अवसर और सुरक्षित स्थान प्रदान करता है ताकि वे शिक्षा, स्वास्थ्य, कल्याण और अपने भविष्य के बारे में सूचित निर्णय ले सकें। साझेदारों के साथ मिलकर, यूनिसेफ परिवारों और समुदायों के साथ भी काम करता है ताकि हानिकारक लैंगिक मानदंडों को चुनौती दी जा सके, सहयोग प्रणालियों को मजबूत किया जा सके, लड़कियों को शिक्षा में बनाए रखा जा सके, सामाजिक सुरक्षा का विस्तार किया जा सके और उन्हें कौशल और आजीविका मार्गों से जोड़ा जा सके — जिससे उनका आत्मविश्वास और विकल्प बढ़े ताकि वे सीख सकें, नेतृत्व कर सकें, आगे बढ़ सकें और विवाह को टाल सकें।

यूनिसेफ हर बच्चे के अधिकारों को बनाए रखने का प्रयास करता है, उन्हें नुकसान और सभी प्रकार के भेदभाव से बचाता है, ताकि वे स्वस्थ और शिक्षित होकर अपनी पूरी क्षमता तक पहुंच सकें। यह कार्य यूनिसेफ के वैश्विक रूप से मान्यता प्राप्त जनादेश और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के समर्थन के अनुरूप है। यूनिसेफ दुनिया के सबसे कठिन स्थानों में काम करता है, ताकि दुनिया के सबसे वंचित बच्चों तक पहुंचा जा सके। 190 से अधिक देशों और क्षेत्रों में, संस्था हर बच्चे के लिए हर जगह काम करती है ताकि सभी के लिए एक बेहतर दुनिया बनाई जा सके। यूनिसेफ इंडिया व्यवसायों और व्यक्तियों से मिलने वाले समर्थन और दान पर निर्भर करता है ताकि स्वास्थ्य, पोषण, जल और स्वच्छता, शिक्षा, सामाजिक नीति और सामाजिक सुरक्षा तथा बाल संरक्षण कार्यक्रमों को विस्तारित किया जा सके।

महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर ने भी इस अवसर पर यूनिसेफ और मंधाना की तारीफ में ट्वीट किया। उन्होंने एक्स पर लिखा, ‘‘स्मृति मंधाना यूनिसेफ इंडिया परिवार में आपका स्वागत है। आप मैदान पर लाखों लोगों को प्रेरित करती हैं और मुझे पूरा विश्वास है कि मैदान के बाहर आप बच्चों के अधिकारों के लिए बुलंद आवाज बनोगी।’’

Video: 61 साल की उम्र में गजब की फिटनेस, एक घंटे में 1,575 पुश-अप्स के बाद 5 घंटे प्लैंक कर रचा इतिहास

उम्र सिर्फ एक नंबर है, यह बात कनाडा की 61 साल की डोना जीन वाइल्ड ने साबित कर दी है। 12 बच्चों की दादी डोना ने लगातार पांच घंटे तक प्लैंक करके अपनी पिछली रिकॉर्ड उपलब्धि को पीछे छोड़ दिया। उनकी कहानी इसलिए खास है, क्योंकि फिटनेस का यह सफर किसी बड़े लक्ष्य से नहीं, बल्कि हाथ में फ्रैक्चर होने के बाद शुरू हुआ था। आज वह अपनी मेहनत और हौसले से दुनियाभर के लोगों को प्रेरित कर रही हैं।

हाथ में फ्रैक्चर के बाद शुरू किया प्लैंक

डोना जीन वाइल्ड ने करीब 15 साल पहले प्लैंक करना शुरू किया था। उस समय उनके हाथ में फ्रैक्चर हो गया था। वह खुद को फिट रखना चाहती थीं, इसलिए उन्होंने प्लैंक का अभ्यास शुरू किया। शुरुआत में वह केवल एक से डेढ़ मिनट तक ही इस एक्सरसाइज को कर पाती थीं। लेकिन लगातार अभ्यास से उनका आत्मविश्वास बढ़ता गया और कुछ मिनटों का समय घंटों में बदल गया।

4 घंटे 30 मिनट का रिकॉर्ड तोड़कर पहुंचीं 5 घंटे तक

21 मार्च 2024 को डोना ने 4 घंटे, 30 मिनट और 11 सेकंड तक प्लैंक करके महिलाओं के वर्ग में गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया था। इसके बाद उन्होंने एक बार फिर अपनी क्षमता को चुनौती दी। यूटा में आयोजित हंट्समैन वर्ल्ड सीनियर गेम्स में उन्होंने पांच घंटे तक प्लैंक किया। इस दौरान दर्शक लगातार उनका हौसला बढ़ाते रहे।

पोती को पीठ पर बैठाकर करती थीं प्रैक्टिस

डोना की ट्रेनिंग का एक दिलचस्प पहलू उनकी तीन साल की पोती रोज भी है। रिकॉर्ड की तैयारी के दौरान उनकी पोती कई बार उनकी पीठ पर लेट जाती थी और डोना प्लैंक करती रहती थीं। परिवार का साथ उनकी इस फिटनेस यात्रा का अहम हिस्सा रहा।

प्लैंक करते हुए पूरी की मास्टर डिग्री

डोना केवल एक्सरसाइज ही नहीं करतीं, बल्कि प्लैंक करते हुए पढ़ाई, मैसेज और दूसरे काम भी निपटाती हैं। उन्होंने इसी दौरान मास्टर डिग्री पूरी की और एक किताब भी लिखी। वह अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में फिटनेस के लिए कई घंटे निकालती हैं।

एक घंटे में 1,575 पुश-अप्स का भी रिकॉर्ड

साल 2024 में डोना ने एक घंटे में 1,575 पुश-अप्स करके महिलाओं के वर्ग में एक और गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया था। अब उनका लक्ष्य एक घंटे में 1,600 से ज्यादा पुश-अप्स करना है।

आखिरी 10 मिनट में छोड़ने का मन हुआ

पांच घंटे के प्लैंक के दौरान एक समय डोना को लगा कि वह अब आगे नहीं कर पाएंगी। लेकिन दर्शकों की हौसलाअफजाई ने उन्हें चुनौती पूरी करने में मदद की। हैरानी की बात यह है कि अगले ही दिन वह 3,000 मीटर की दौड़ में भी शामिल हुईं।

डोना की कहानी बताती है कि सही अभ्यास, धैर्य और मजबूत इच्छाशक्ति से बड़ी उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं। हालांकि, किसी भी कठिन एक्सरसाइज को अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार ही करना चाहिए।

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