Dussehra 2026: आज या कल कब होगा रावण दहन? जानें सही तारीख, विजय मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

Dussehra 2026: धर्म पर धर्म, असत्य पर सत्य और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक महापर्व विजयादशमी (दशहरा) इस वर्ष देश भर में भव्य रूप से मनाया जा रहा है। दशहरे के पावन अवसर पर मां अपराजिता की पूजा, शस्त्र पूजन (आयुध पूजा), शमी वृक्ष के पत्तों के आदान-प्रदान और शाम को रावण, कुंभकर्ण व मेघनाद के पुतलों के दहन की परंपरा निभाई जाती है। हालांकि, तिथियों की गणना और क्षेत्रीय परंपराओं की वजह से लोगों के मन में इस बात को लेकर भ्रम की स्थिति बनी है कि रावण दहन 20 अक्टूबर को होगा या 21 अक्टूबर को। पंचांग और शास्त्रीय मान्यताओं के आधार पर आइए समझते हैं कि रावण दहन की सही तारीख, शुभ मुहूर्त और पूजन विधि क्या है।

20 या 21 अक्टूबर: कब मनाया जाएगा दशहरा और रावण दहन?

हिंदू पंचांग के अनुसार, आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को विजयादशमी का पर्व मनाया जाता है।

दशमी तिथि का प्रारंभ: 20 अक्टूबर को दोपहर 12 बजकर 50 मिनट से।

दशमी तिथि का समापन: 21 अक्टूबर को दोपहर 2 बजकर 11 मिनट तक।

श्रवण नक्षत्र: 19 अक्टूबर की दोपहर 3 बजकर 38 मिनट से शुरू होकर 20 अक्टूबर की शाम 6 बजकर 2 मिनट तक।

उत्तर, मध्य और पश्चिम भारत में 20 अक्टूबर को दशहरा

उत्तर भारत, राजस्थान, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में विजयादशमी का निर्धारण अपराह्न काल (दोपहर के समय) में दशमी तिथि की उपस्थिति के आधार पर किया जाता है। 20 अक्टूबर को दोपहर 12:50 बजे के बाद दशमी तिथि लग रही है, इसलिए उत्तर भारत में मुख्य दशहरा पर्व और रावण दहन 20 अक्टूबर मंगलवार को ही संपन्न होगा। हालांकि मंगलवार के दिन माता की मूर्ति का विसर्जन नहीं किया जाता, इसलिए देवी दुर्गा की विदाई 21 अक्टूबर बुधवार को होगी।

पूर्वी भारत में 21 अक्टूबर को विजयादशमी

पश्चिम बंगाल, ओडिशा, असम और पूर्वी भारत के कई हिस्सों में दुर्गा पूजा का निर्धारण सूर्योदय कालीन तिथि (उदयातिथि) के आधार पर होता है। 20 अक्टूबर को सूर्योदय के समय नवमी तिथि रहेगी (जो दोपहर 12:50 तक चलेगी), जबकि 21 अक्टूबर को सूर्योदय के समय दशमी तिथि मौजूद रहेगी। इसलिए बंगाल और पूर्वी भारत में 21 अक्टूबर को विजयादशमी मनाई जाएगी।

रावण दहन का सही समय और प्रदोष काल मुहूर्त

दशहरे पर रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के विशाल पुतलों का दहन हमेशा सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल के दौरान किया जाता है। शास्त्रानुसार 20 अक्टूबर को रावण दहन के लिए सबसे उत्तम समय इस तरह रहेगा:

प्रदोष काल का समय: 20 अक्टूबर को शाम 5 बजकर 47 मिनट से रात 8 बजकर 17 मिनट (कुछ गणनाओं में 8:21 बजे) तक।

रावण दहन का सर्वोत्तम मुहूर्त: 20 अक्टूबर की शाम 5 बजकर 47 मिनट से 6 बजकर 12 मिनट के बीच का समय रावण दहन के लिए सबसे शुभ और फलदायी माना गया है।

पूजा के शुभ मुहूर्त: अपराजिता पूजन और आयुध पूजा

विजयादशमी के दिन मां अपराजिता और अस्त्र-शस्त्रों की पूजा का विशेष विधान है। इस दिन अगर आप नया वाहन, इलेक्ट्रॉनिक सामान या प्रॉपर्टी खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो इन विजय और शुभ मुहूर्तों का ध्यान रखें:

मां अपराजिता पूजा मुहूर्त: 20 अक्टूबर को दोपहर 1 बजकर 14 मिनट से दोपहर 3 बजकर 30 मिनट तक।

आयुध/शस्त्र पूजा मुहूर्त: 20 अक्टूबर को दोपहर 1 बजकर 59 मिनट से दोपहर 2 बजकर 45 मिनट तक।

विजयादशमी पर क्या करें और क्या है धार्मिक महत्व?

विजयादशमी का पर्व केवल उत्सव का दिन नहीं है, बल्कि यह जीवन में धर्म और मर्यादा को स्थापित करने का संदेश देता है। इस दिन मां अपराजिता का ध्यान कर जीवन में हर क्षेत्र में विजय की कामना की जाती है। इसके साथ ही शमी के वृक्ष की पूजा की जाती है और शमी के पत्तों को ‘सोना’ मानकर अपनों में बांटकर आशीर्वाद लिया जाता है। विजयादशमी को अभूज मुहूर्त माना जाता है। इस दिन अपने काम में आने वाले उपकरणों, अस्त्र-शस्त्रों, गाड़ियों और व्यापारिक बही-खातों की पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

बुराइयों के दहन का संकल्प

रावण दहन का प्रतीक हमें यह याद दिलाता है कि व्यक्ति चाहे कितना भी शक्तिशाली या विद्वान क्यों न हो, अहंकार, क्रोध और असत्य का अंत विनाशकारी ही होता है। इस दिन अपने अंदर की बुराइयों को त्याग कर सत्य और अच्छाई के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया जाता है।

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Happy Dussehra 2026 Wishes: विजयादशमी पर अपनों को भेजें ये 15 बेस्ट बधाई संदेश, कोट्स और WhatsApp स्टेटस

Happy Dussehra 2026 Wishes: असत्य पर सत्य और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक महापर्व विजयादशमी (दशहरा) इस साल देश भर में पूरे उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। हिंदू पंचांग के मुताबिक साल 2026 में उत्तर, पश्चिम और मध्य भारत के अधिकांश हिस्सों में मुख्य दशहरा पर्व 20 अक्टूबर मंगलवार को मनाया जा रहा है, जबकि पश्चिम बंगाल, ओडिशा और पूर्वी भारत के कुछ हिस्सों में दुर्गा पूजा की स्थानीय परंपराओं और उदयातिथि के आधार पर 21 अक्टूबर बुधवार को विजयादशमी मनाई जाएगी। त्योहारों के इस पावन अवसर पर लोग एक-दूसरे को शुभकामनाएं भेजकर सुख, समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते हैं। अगर आप भी अपने परिवार, दोस्तों और प्रियजनों को व्हाट्सएप, फेसबुक या इंस्टाग्राम के जरिए बेहतरीन बधाई संदेश भेजना चाहते हैं तो यहां आपके लिए चुनिंदा शुभकामनाएं, कोट्स और स्टेटस दिए गए हैं।

विजयादशमी 2026: शुभ मुहूर्त और तिथियां

पंचांग के मुताबिक आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि 20 अक्टूबर को दोपहर 12 बजकर 50 मिनट से शुरू होकर 21 अक्टूबर को दोपहर 2 बजकर 11 मिनट तक रहेगी। श्रवण नक्षत्र का समय 19 अक्टूबर की दोपहर 3 बजकर 38 मिनट से शुरू होकर 20 अक्टूबर की शाम 6 बजकर 2 मिनट तक रहा। उत्तर भारत में 20 अक्टूबर को अपराह्न काल में दशमी तिथि रहने के कारण मुख्य रूप से इसी दिन दशहरा मनाया जा रहा है, जबकि माता की विदाई परंपरा के अनुसार 21 अक्टूबर को होगी।

अपनों को भेजने के लिए 15 बेस्ट बधाई संदेश और शुभकामनाएं

1 – शुभ विजयादशमी! भगवान राम की कृपा से आपके जीवन में हमेशा अच्छाई की जीत हो और हर चुनौती में आपको सफलता मिले। आपको और आपके परिवार को दशहरा की हार्दिक शुभकामनाएं!

2- Happy Dussehra! असत्य पर सत्य की विजय का यह पर्व आपके जीवन में नई रोशनी, सकारात्मकता और अपार खुशियां लेकर आए।

3- मां दुर्गा और भगवान श्री राम के आशीर्वाद से आपके घर में सुख, शांति और समृद्धि का वास हो। आप सभी को विजयादशमी की बहुत-बहुत बधाई!

4 – आइए इस दशहरे पर अपने अंदर के अहंकार, क्रोध और बुराइयों का दहन करें और नेकी के मार्ग पर चलने का संकल्प लें। हैप्पी दशहरा 2026!

5- सफलता और समृद्धि की कामना: आपकी मेहनत रंग लाए और आपके जीवन में हर कार्य में सफलता व आर्थिक स्थिरता बनी रहे। आपको और आपके अपनों को दशहरा की शुभकामनाएं।

6- परिवार के लिए संदेश: मां दुर्गा और भगवान राम के आशीर्वाद से हमारा परिवार हमेशा एकजुट, खुशहाल और स्वस्थ रहे। आप सभी को विजयादशमी की मंगलकामनाएं!

7- धैर्य, सत्य और साहस ही मनुष्य की सबसे बड़ी ताकत हैं। विजयादशमी का यह पवित्र पर्व आपके जीवन में नई शुरुआत लेकर आए।

8 – नया सवेरा, नई शुरुआत: पुरानी चिंताओं को पीछे छोड़कर विश्वास और आत्मविश्वास के साथ जीवन में आगे बढ़ें। आपको दशहरा की ढेरों बधाइयां!

9 – हर चुनौती एक नया अवसर लेकर आती है। भगवान राम आपको हर बाधा से लड़ने का साहस दें। Happy Dussehra 2026!

10 – आपके जीवन का हर अंधकार दूर हो और आपका भविष्य उम्मीदों और उजालों से जगमगा उठे। विजयादशमी की हार्दिक शुभकामनाएं!

WhatsApp Status के लिए

1 – अधर्म का नाश हो, धर्म की रक्षा हो, हर दिल में श्रीराम का वास हो। आप सभी को दशहरा की शुभकामनाएं!

2 – आपके और आपके परिवार के लिए यह पावन पर्व उत्तम स्वास्थ्य, सौभाग्य और ढेरों खुशियां लेकर आए। शुभ दशहरा!

3- रिश्तों में प्यार बढ़े, आपसी सौहार्द बना रहे और हर तरफ खुशहाली हो। विजयादशमी के इस पावन दिन पर यही कामना है।

4- हर बुराई को हराकार अच्छाई को अपनाने का दिन है दशहरा। आइए मिलकर इस पर्व को धूमधाम से मनाएं। Happy Vijayadashami!

5 – भगवान श्रीराम आपको बुद्धि, बल और पराक्रम प्रदान करें ताकि आप जीवन की हर कठिनाई पर विजय प्राप्त कर सकें। दशहरा की शुभकामनाएं!

प्रेरणादायक कोट्स (Inspirational Quotes for Dussehra)

  • सत्य को अपना मार्ग बनाएं और दयालुता को अपनी ताकत बनाएं।
  • भय जब आपका नियंत्रण छोड़ देता है, तभी वास्तविक साहस की शुरुआत होती है।
  • अहंकार और बुराई पर विजय पाना ही जीवन की सबसे बड़ी जीत है।
  • हर चुनौती इंसान को अंदर से मजबूत और बेहतर बनने का अवसर देती है।
  • आप इन संदेशों और कोट्स को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म या मैसेजिंग ऐप्स के जरिए शेयर करके अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ इस पावन पर्व की खुशियां बांट सकते हैं।

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दशहरा 2026 वाहन पूजा मुहूर्त: कार और बाइक पूजा का सबसे शुभ समय, नोट कर लें सही विधि

आज 20 अक्टूबर को देश भर में दशहरा यानी विजयादशमी मनाई जा रही है। आज के दिन भगवान राम ने रावण पर जीत हासिल की थी। दशहरे पर नई गाड़ी खरीदना और अपनी कार-बाइक की पूजा करना बहुत शुभ माना जाता है। कहते हैं इससे सफर सुरक्षित रहता है। अगर आप भी आज अपनी गाड़ी की पूजा करने वाले हैं तो शुभ मुहूर्त और पूजा की विधि यहाँ जान लें।

कार या बाइक की पूजा इस तरह करें

पंचांग के अनुसार आज पूजा के लिए ये समय शुभ है:

  • विजय मुहूर्त: दोपहर 1:59 से 2:45 बजे तक
  • अपराह्न मुहूर्त: दोपहर 1:14 से 3:30 बजे तक
  • दशमी तिथि: 20 अक्टूबर दोपहर 12:50 से 21 अक्टूबर दोपहर 2:11 बजे तक

ध्यान दें, हर शहर के पंचांग में समय थोड़ा अलग हो सकता है, इसलिए अपने शहर का समय जरूर देख लें।

पूजा के लिए रखें ये सामग्री

पूजा के लिए ये सामान पहले से तैयार रख लें।

  • रोली, कुमकुम, हल्दी
  • अक्षत यानी साबुत चावल
  • फूल और गेंदे की माला
  • धूप और घी का दीया
  • मौली या कलावा
  • नारियल, नींबू
  • फल या मिठाई का प्रसाद

कार-बाइक की पूजा कैसे करें?

  1.  सबसे पहले अपनी गाड़ी को अच्छे से धोकर साफ करें।
  2.  गाड़ी को साफ और खुली जगह पर खड़ा करें।
  3.  भगवान गणेश को याद करके पूजा शुरू करें।
  4.  गाड़ी के आगे रोली से स्वस्तिक बनाएं और टायरों पर तिलक लगाएं।
  5.  गाड़ी पर फूल-अक्षत चढ़ाएं और माला लगाएं। चाबी या हैंडल पर मौली बांध दें।
  6.  धूप-दीया जलाकर आरती करें और प्रसाद चढ़ाएं।

कुछ लोग नजर उतारने के लिए नींबू का भी इस्तेमाल करते हैं, पर ये जरूरी नहीं है।

दशहरे पर गाड़ी की पूजा क्यों करते हैं?

दशहरा बुराई पर अच्छाई की जीत का त्योहार है। इसलिए इस दिन नई चीजों की शुरुआत शुभ मानी जाती है। इसी वजह से लोग इस दिन गाड़ी और अपने काम के औजारों की पूजा करते हैं।

रावण दहन का समय

आज शाम रावण दहन का शुभ समय 5:47 से 8:21 बजे तक है। इसमें 5:47 से 6:12 बजे तक का समय सबसे अच्छा माना गया है। आपके शहर में रावण दहन का समय स्थानीय आयोजन के हिसाब से अलग हो सकता है।

Muhurat Trading: दिवाली पर मुहूर्त ट्रेडिंग की टाइमिंग का हुआ ऐलान, दोपहर 2:20 बजे से खुलेगा बाजार

Diwali Muhurat Trading 2026: नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ने दिवाली के दिन होने वाले विशेष ‘मुहूर्त ट्रेडिंग’ सत्र की टाइमिंग का ऐलान कर दिया है। इस साल रविवार, 8 नवंबर 2026 को विशेष लाइव ट्रेडिंग सत्र आयोजित किया जाएगा। इस दिन भारतीय शेयर बाजार नए हिंदू वर्ष विक्रम संवत 2083 का स्वागत करेगा।

भारतीय शेयर बाजार में दिवाली के दिन मुहूर्त ट्रेडिंग की परंपरा दशकों पुरानी है। मान्यता है कि इस शुभ मुहूर्त में शेयर बाजार में निवेश करने से पूरे वर्ष सुख-समृद्धि और वित्तीय उन्नति बनी रहती है। आइए जानते हैं NSE द्वारा जारी मुहूर्त ट्रेडिंग का मिनट-टू-मिनट पूरा शेड्यूल।

मेन ट्रेडिंग सेशन

मुहूर्त ट्रेडिंग के दौरान मुख्य बाजार में कारोबार की समय-सारणी इस प्रकार रहेगी:

प्री-ओपन ऑर्डर एंट्री: दोपहर 2:05 बजे से 2:15 बजे तक (इसमें ऑर्डर दर्ज, संशोधित या रद्द किए जा सकते हैं)।

ऑर्डर मैचिंग व ट्रेड कन्फर्मेशन: दोपहर 2:15 बजे से 2:17 बजे तक।

प्री-ओपन बफर टाइम: दोपहर 2:17 बजे से 2:20 बजे तक।

कंटीन्यूअस ट्रेडिंग: दोपहर 2:20 बजे से शुरू होगा।

मार्केट क्लोजिंग टाइम: नॉन-क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) प्रतिभूतियों के लिए बाजार दोपहर 3:30 बजे बंद होगा, जबकि CAS सिक्योरिटीज के लिए सामान्य बाजार 3:15 बजे समाप्त होगा।

CAS और पोस्ट-क्लोज सेशन का शेड्यूल

क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) और उसके बाद के सत्रों की समय-सारणी इस प्रकार निर्धारित की गई है:

  • रेफरेंस प्राइस कैलकुलेशन: दोपहर 3:15 बजे से 3:20 बजे तक।
  • CAS ऑर्डर एंट्री पीरियड: दोपहर 3:20 बजे से 3:30 बजे तक।
  • ऑर्डर मैचिंग व ट्रेड कन्फर्मेशन: दोपहर 3:30 बजे से 3:35 बजे तक।
  • CAS ट्रांजिशन टाइम: दोपहर 3:35 बजे से 3:50 बजे तक।
  • पोस्ट-क्लोज सेशन: दोपहर 3:50 बजे से शाम 4:00 बजे तक।
  • ट्रेड मॉडिफिकेशन कट-ऑफ टाइम: शाम 4:15 बजे तक।

नोट: प्री-ओपन और CAS ऑर्डर एंट्री पीरियड के अंतिम 2 मिनट में सिस्टम-ड्रिवन रैंडम क्लोजर लागू रहेगा।

ब्लॉक डील, IPO और अन्य विशेष सत्र

ब्लॉक डील विंडो: दोपहर 1:50 बजे से 2:05 बजे तक खुलेगी।

IPO और री-लिस्टेड सिक्योरिटीज के लिए स्पेशल प्री-ओपन: दोपहर 2:05 बजे से 2:50 बजे तक (अंतिम 10 मिनट में रैंडम क्लोजर)।

स्पेशल प्री-ओपन वाली कंपनियों का नॉर्मल मार्केट: दोपहर 3:05 बजे से 3:30 बजे तक चलेगा।

कॉल ऑक्शन इलिक्विड सेशन: दोपहर 2:25 बजे से 3:10 बजे तक रहेगा।

NSE ने स्पष्ट किया है कि इस विशेष दिवाली मुहूर्त ट्रेडिंग सत्र के दौरान एग्जिक्यूटेड सभी सौदों के लिए सेटलमेंट दायित्व अनिवार्य रूप से लागू होंगे।

Muhurat Trading: क्या इस दिवाली भी दोपहर में होगी मुहूर्त ट्रेडिंग? ब्रोकर्स और अन्य मार्केट पार्टिसिपेंट्स ने स्टॉक एक्सचेंजों से की अपील

पिछले साल की तरह इस बार भी दिवाली पर ‘मुहूर्त ट्रेडिंग’ का आयोजन दिन के समय किया जाए। ऐसा अनुरोध स्टॉक ब्रोकरों और अन्य मार्केट पार्टिसिपेंट्स ने एक बार फिर स्टॉक एक्सचेंजों से किया है। ब्रोकरों ने ‘ब्रोकर्स इंडस्ट्री स्टैंडर्ड्स फोरम’ (BISF) के माध्यम से एक्सचेंजों को एक प्रस्ताव सौंपा है। पिछले साल दिवाली पर मुहूर्त ट्रेडिंग को शाम के पारंपरिक समय के बजाय दोपहर 1:45 बजे से 2:45 बजे के बीच आयोजित किया गया था। इससे पहले भी साल 2012 में एक बार मुहूर्त ट्रेडिंग सेशन दोपहर 3:45 बजे से शाम 5:00 बजे के बीच रखा गया था। ऐसा शुभ समय को देखते हुए किया गया था।

मनीकंट्रोल को ब्रोकरों से पता चला है कि इस साल 8 नवंबर को दिवाली पर शुभ मुहूर्त का समय दोपहर 1:47 बजे से 3:12 बजे के बीच है। उन्होंने दोपहर 2 बजे से 3 बजे के बीच ट्रेडिंग सत्र आयोजित करने का प्रस्ताव दिया है। भारतीय शेयर बाजारों में दिवाली पर मुहूर्त ट्रेडिंग की परंपरा कई सालों से चली आ रही है।

निवेशक इस विशेष सत्र में एक प्रतीकात्मक शुरुआत के तौर पर हिस्सा लेते हैं, जिसे हिंदू परंपरा में देवी लक्ष्मी की पूजा से जोड़कर देखा जाता है और यह धन-समृद्धि लाने का प्रतीक माना जाता है। यह सत्र विक्रम संवत कैलेंडर के अनुसार नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत का भी प्रतीक है। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) ने 1957 में ‘मुहूर्त ट्रेडिंग’ की परंपरा शुरू की थी।

दोपहर 2:20 बजे से 3:20 बजे के बीच हो सकती है मुहूर्त ट्रेडिंग

आमतौर पर, ट्रेडिंग शेड्यूल और छुट्टियों को अंतिम रूप देने से पहले एक्सचेंज आपस में परामर्श करते हैं। इन चर्चाओं के पूरा होने के बाद ही मुहूर्त ट्रेडिंग के फाइनल शेड्यूल की घोषणा होने की उम्मीद है। सूत्रों के अनुसार, एक्सचेंज इस अनुरोध पर विचार कर रहे हैं। शुरुआती योजना के तहत, मुहूर्त ट्रेडिंग दोपहर 2:20 बजे से 3:20 बजे के बीच हो सकती है। इससे पहले दोपहर 1:50 बजे से 2:05 बजे तक ‘ब्लॉक डील विंडो’ और उसके बाद 2:05 बजे से 2:20 बजे तक ‘प्री-ओपनिंग सेशन’ हो सकता है। हालांकि, अभी तक कोई आधिकारिक सर्कुलर जारी नहीं किया गया है।

ब्रोकरों का तर्क है कि दोपहर में मुहूर्त ट्रेडिंग सत्र होने से ब्रोकरेज फर्मों, स्टॉक एक्सचेंजों, क्लियरिंग कॉरपोरेशंस, डिपॉजिटरीज, कस्टोडियंस, बैंकों और बाजार से जुड़े अन्य संस्थानों में काम करने वाले हजारों कर्मचारी अपना काम समय पर पूरा कर सकेंगे। इससे वे शाम के शुभ समय में अपने परिवारों के साथ दिवाली मना सकेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया है कि उनका उद्देश्य नियमों में कोई ढील मांगना नहीं है, बल्कि मार्केट प्रोफेशनल्स को अपने परिवारों के साथ त्योहार मनाने में मदद करना है। साथ ही यह सुनिश्चित करना है कि बाजार का कामकाज सुचारू रूप से चलता रहे।

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ANMI ने भी किया अनुरोध

‘एसोसिएशन ऑफ NSE मेंबर्स ऑफ इंडिया’ (ANMI) ने भी अलग से एक्सचेंजों से दोपहर में मुहूर्त ट्रेडिंग कराने के प्रस्ताव पर विचार करने का आग्रह किया है। उन्होंने इसके पीछे ‘परंपरा, समावेशिता और वर्क-लाइफ बैलेंस’ का तर्क दिया है। ANMI के नेशनल प्रेसिडेंट कमलेश श्रॉफ का कहना है, “इससे हमारी बाजार की पुरानी परंपरा भी बनी रहेगी और ब्रोकरों, कर्मचारियों व उनके परिवारों को देर शाम तक चलने वाले ट्रेडिंग सत्र के दबाव के बिना, साथ में दिवाली मनाने का मौका मिलेगा।”

ब्रोकरों ने ‘मुहूर्त ट्रेडिंग’ के बाद पूरी की जाने वाली अनुपालन (Compliance) जरूरतों का भी जिक्र किया है। उन्होंने सुझाव दिया है कि कुछ प्रक्रियाओं, जैसे कि सिक्योरिटीज के ‘अर्ली पे-इन’ और फंड एलोकेशन को अगले कारोबारी दिन पूरा करने की इजाजत दी जाए। अन्य सुझावों में इस स्थिति के कारण होने वाली ‘पीक मार्जिन’ की कमी पर लगने वाले जुर्माने को माफ करना, और ‘एंड-ऑफ-डे’ (EOD) एलोकेशन को अगले कारोबारी दिन सुबह 9 बजे से पहले पूरा करने की छूट देना शामिल है। मौजूदा शेड्यूल के कारण स्टॉक एक्सचेंज और क्लियरिंग कॉर्पोरेशन जैसी संस्थाओं के कर्मचारियों को अपने परिवारों के साथ त्योहार मनाने के लिए बहुत कम समय मिल पाता है।

अनुपालन की बढ़ती जरूरतों और रिपोर्टिंग की सख्त समय-सीमाओं के कारण, कर्मचारियों को अक्सर फंड एलोकेशन और सिक्योरिटीज के ‘अर्ली पे-इन’ जैसी पोस्ट-ट्रेड प्रक्रियाओं को पूरा करने के लिए देर तक रुकना पड़ता है। जब तक वे अपना काम खत्म करके घर पहुंचते हैं, तब तक दिवाली मनाने का आनंद खत्म हो चुका होता है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Shardiya Navratri 2026 Muhurat: कल गज वाहन पर वैधृति योग और चित्रा नक्षत्र में होगा मां दुर्गा का आगमन, जानें कलश स्थापना का मुहूर्त

Shardiya Navratri 2026 Muhurat: हिंदू धर्म में शारदीय नवरात्रि का पर्व विशेष महत्व रखता है। यह हिंदू कैलेंडर में आने वाली चार नवरात्रि पर्वों में से एक है, जिसमें मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है। चार में से दो नवरात्रि, माघ और आषाढ़ में साधक गुप्त रूप से नौ सिद्धियों की उपासना करते हैं। जबकि चैत्र और शारदीय नवरात्रि का पर्व गृहस्थ भक्तों समेत सभी अन्य विशेष उत्साह और धूमधाम से मनाते हैं। शारदीय नवरात्रि की शुरुआत अश्विन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से होती है और दशमी तिथि को इस पर्व का समापन होता है।

इस साल शारदीय नवरात्रि का शुभारंभ 11 अक्टूबर दिन रविवार से हो रहा है। रविवार को मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर धरती पर आएंगी। हाथी पर माता की सवारी भक्तों के लिए सुख, समृद्धि और उन्नति देने वाली मानी जाती है। शारदीय नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना से नवदुर्गा की पूजा शुरू होती है। इस बार कलश स्थापना के लिए दो शुभ मुहूर्त मिल रहे हैं। पंचांग के अनुसार, पहले दिन यानी प्रतिपदा पर वैधृति योग और द्विपुष्कर योग बन रहा है। इसके साथ ही चित्रा नक्षत्र भी विद्यमान रहेगा। आइए जानें प्रतिपदा के दिन कलश स्थापना के लिए शुभ मुहूर्त क्या है?

शारदीय नवरात्रि 2026 प्रतिपदा तिथि मुहूर्त

आश्विन शुक्ल प्रतिपदा तिथि का प्रारंभ : 10 अक्टूबर, शनिवार, रात 9:19 बजे

आश्विन शुक्ल प्रतिपदा तिथि का समापन : 11 अक्टूबर, रविवार, रात 9:30 बजे

कलश स्थापना मुहूर्त 2026

नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना का मुहूर्त सुबह में 06:19 ए एम से है और सुबह 10:12 ए एम तक रहेगा। दोपहर में कलश स्थापना मुहूर्त 11:44 ए एम से लेकर 12:31 पी एम तक है।

नवरात्रि के पहले दिन के मुहूर्त और योग

ब्रह्म मुहूर्त : प्रात: 04:40 बजे से लेकर 05:30 बजे तक

अभिजीत मुहूर्त : 11:44 ए एम से दोपहर 12:31 बजे तक

द्विपुष्कर योग : रात 09:30 बजे से लेकर रात 10:32 बजे तक

वैधृति योग : प्रात:काल से लेकर रात 09:05 बजे तक

चित्रा नक्षत्र : प्रात:काल से लेकर रात 10:32 बजे तक

उदया तिथि के आधार पर 11 अक्तूबर यानी रविवार को नवरात्र का प्रथम दिवस मान्य होगा। इस दिन मां शैलपुत्री की पूजा होती है।

शारदीय नवरात्रि 2026 कलश स्थापना सामग्री

शारदीय नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा के स्वागत और उनकी कृपा प्राप्ति के लिए घटस्थापना का विशेष विधान है। यह पूजा का सबसे महत्वपूर्ण आरंभिक चरण है। यहाँ कलश स्थापना के लिए जरूरी सामग्री दी गई है :

सामग्री सूची

मिट्टी का बर्तन/छोटा घड़ा या कलश : तांबे, पीतल या मिट्टी का कलश

शुद्ध जल : गंगा जल मिला हुआ साफ पानी

पंचरत्न या सिक्के : कलश में डालने के लिए

आम या अशोक के पत्ते : 5 या 7 पत्ते कलश के मुख पर रखने के लिए

जटा वाला नारियल : जिस पर लाल कपड़ा या कलावा बंधा हो

बुआई के लिए सामग्री : एक चौड़ा मिट्टी का पात्र और उसमें बोने के लिए साफ जौ या गेहूं, तथा शुद्ध मिट्टी

पूजन सामग्री : रोली, कलावा, अक्षत, सुपारी, और पुष्प

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Hotel Stocks : इस बार शादियों को सीजन में खूब बजेगी शहनाई, होटल कंपनियों की खूब बढ़ेगी कमाई, इन शेयरों पर रहे नजर

Hotel Stocks : शादियों के सीजन में होटल सेक्टर की डिमांड बढ़ सकती है। जेफरीज का कहना है कि अगले साल शादियों के शुभ मुहूर्त के ज्यादा दिन होंगे। इसको ध्यान में रखते हुए जेफरीज होटल स्पेस पर बुलिश है। ब्रोकरेज फर्म का कहना है कि वित्त वर्ष 2028 में शादी के 95 शुभ मुहूर्त हैं। सामान्य तौर पर 65-70 के मुकाबले शुभ मुहूर्त 40% ज्यादा हैं। वित्त वर्ष 2027 की चौथी तिमाही से वित्त वर्ष 2028 की तीसरी तिमाही तक शादी के दिनों में तेज बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। शादी की ज्यादा तारीखों से होटल डिमांड और रेवेन्यू बढ़ेगा। शादियों से कमरे के किराए, बैंक्वेट और F&B कमाई बढ़ेगी। होटल की पूरी कैपेसिटी का बेहतर इस्तेमाल होने की उम्मीद है। डिमांड का बड़ा हिस्सा घरेलू डेस्टिनेशन में हो सकता है। यह होटल सेक्टर के लिए पॉजिटिव फैक्टर है।

बजेगी शहनाई, बढ़ेगी कमाई

2026 के शुभ मुहूर्त पर नजर डालें तो 21से 26 नवंबर के बीच शादी के शुभ मुहूर्त हैं। उसके बाद 1 से 13 दिसंबर के बीच शादी के शुभ मुहूर्त हैं। जेफरीज का कहना है कि इससे होटल स्टॉक्स खास कर रॉयल ऑर्किड होटल्स, लेमन ट्री होटल्स, शैले होटल्स, द लीला और कामत होटल्स को अच्छा फायदा हो सकता है। जेफरीज का कहना है कि इस बार के शादियों के सीजन में लग्जरी शादियों की बुकिंग बढ़ेगी। Q4FY27- Q3FY28 के बीच लग्जरी शादियों की बुकिंग में तेज इजाफा देखने को मिल सकता है।

होटल कपनियों की बल्ले-बल्ले

गौरतलब है कि शादियों और सर्दियों के सीजन की शुरुआत के करीब आने के साथ ही भारतीय होटल और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में जोरदार डिमांड देखी जा रही है। कई लोकप्रिय होटलों में शादी से जुड़े कारोबार में डबल डिजिट ग्रोथ देखने को मिली है। नवंबर से फरवरी जैसे प्रमुख महीनों के लिए अधिकांश बुकिंग लगभग पूरी हो चुकी हैं। 2027 तक एडवांस बुकिंग हो चुकी लोग अब 4 से 6 महीने पहले ही बुकिंग करा रहे हैं। कई होटलों में साल 2027 के लिए भी एडवांस बुकिंग और पूछताछ आने लगी है।

विभिन्न जगहों पर मांग पर नजर डालें तो उदयपुर, जयपुर, गोवा, गुरुग्राम, करनाल और टियर-2 शहरों में डेस्टिनेशन वेडिंग के कारण कमरों, बैंक्वेट हॉल, भोजन और पेय पदार्थों की मांग काफी बढ़ गई है। इसके चलते होटल कंपनियों के रेवेन्यू ग्रोथ में जोरदार उछाल आया है। Hilton जैसी कंपनियों का वेडिंग रेवेन्यू पिछले साल के मुकाबले 50% से ज्यादा हो गया है। वहीं, Sayaji Hotels ने उदयपुर प्रॉपर्टी में वेडिंग रेवेन्यू में 77% की सालाना ग्रोथ हासिल की की है।

Jefferies के साथ ही होटर शेयरों पर मोतीलाल ओसवाल भी बुलिश

ऐसे में Jefferies और मोतीलाल ओसवाल जैसी ब्रोकरेज फर्म्स का मानना है कि इस वेडिंग सीजन से होटल कंपनियों की ऑक्यूपेंसी, एवरेज रूम रेट्स (ARR) और कुल आय में भारी ग्रोथ देखने को मिल सकती है।

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज की हालिया रिपोर्ट में कहा गया है की वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही में होटल कंपनियों की प्रति उपलब्ध कमरे से होने वाली कमाई (RevPAR) में 10 से 12% की बढ़ोतरी हो सकती है। इसकी वजह रूम बुकिंग में बढ़ोतरी और किराए की दरों में बढ़त है। इस ग्रोथ का पहला ट्रिगर बड़े इवेंट्स हैं। दूसरा ट्रिगर है शादी-ब्याह का सीज़न। वित्त वर्ष 2028 में शादियों के लिए लगभग 95 शुभ दिन होने का अनुमान है, जबकि वित्त वर्ष 2027 में यह संख्या 69 थी। इसका मतलब है कि शुभ दिनों की संख्या में लगभग 40% की बढ़ोतरी होगी। इससे होटल और रिसॉर्ट बुकिंग बढ़ सकती है, और कंपनियां सिर्फ़ कमरों के किराए के अलावा बैंक्वेट हॉल और कैटरिंग सेवाओं से भी ज़्यादा कमाई करेंगी।

मोतीलाल ओसवाल की टॉप पिक्स

स्टॉक्स की बात करें तो मोतीलाल ओसवाल ने लेमन ट्री होटल्स (Lemon Tree Hotels) को ₹140 के टारगेट प्राइस के साथ ‘खरीदने’ (buy) की रेटिंग दी है। इसमें लगभग 34% की बढ़ोतरी का अनुमान है। वेंटिव हॉस्पिटैलिटी (Ventive Hospitality) के लिए ₹750 का टारगेट तय किया गया है,जो मौजूदा भाव से लगभग 34% की बढ़त दिखाता है। वहीं, इंडियन होटल्स के लिए ₹870 का टारगेट दिया गया है,जो मौजूदा कीमत से लगभग 22% ज़्यादा है। ब्रोकरेज का मानना ​​है कि अच्छी बुकिंग,कमरों की कम उपलब्धता,बड़े इवेंट्स और शादी का सीज़न आगे भी इस सेक्टर की ग्रोथ को सपोर्ट देते रहेंगे।

 

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माता की चौकी सजाने से पहले: जान लें पहले दिन कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त, सुबह से दोपहर तक की पूरी टाइमिंग

शारदीय नवरात्रि इस साल 11 अक्टूबर, रविवार से शुरू होगी। नवरात्रि के पहले दिन घर में कलश स्थापना के साथ मां दुर्गा की पूजा शुरू की जाती है। पूरे 9 दिनों तक माता के अलग-अलग रूपों की पूजा होती है। इस बार कलश स्थापना के लिए दो शुभ समय मिल रहे हैं।

प्रतिपदा तिथि कब से कब तक?

आश्विन शुक्ल प्रतिपदा तिथि 10 अक्टूबर की रात 9:19 बजे शुरू होगी। यह 11 अक्टूबर की रात 9:30 बजे तक रहेगी। 11 अक्टूबर को सूर्योदय प्रतिपदा तिथि में होने के कारण इसी दिन से नवरात्रि की शुरुआत होगी।

नवरात्रि के दौरान कई लोग व्रत रखते हैं। घर में कलश स्थापना के बाद 9 दिनों तक पूजा की जाती है। इसके बाद कन्या पूजा और हवन भी किया जाता है।

कलश स्थापना के शुभ समय

सुबह: 6:19 बजे से 10:12 बजे तक

दोपहर: 11:44 बजे से 12:31 बजे तक

सुबह का मुहूर्त 3 घंटे 52 मिनट का है। वहीं दोपहर का मुहूर्त 46 मिनट का रहेगा।

पहले दिन कब-कब रहेगा शुभ समय?

नवरात्रि के पहले दिन पूजा और दूसरे शुभ कामों के लिए ये समय रहेंगे:

ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:40 से 5:30 बजे तक

प्रातः संध्या: सुबह 5:05 से 6:19 बजे तक

विजय मुहूर्त: दोपहर 2:04 से 2:50 बजे तक

अमृत काल: दोपहर 3:55 से शाम 5:34 बजे तक

निशिता मुहूर्त: रात 11:43 से 12:33 बजे तक

ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करके व्रत और पूजा का संकल्प लिया जा सकता है।

राहुकाल, सूर्योदय और चंद्रोदय का समय

राहुकाल शाम 4:29 बजे से 5:56 बजे तक रहेगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस समय शुभ काम करने से बचना चाहिए। सूर्योदय सुबह 6:19 बजे होगा। सूर्यास्त शाम 5:56 बजे होगा। चंद्रोदय सुबह 6:52 बजे और चंद्रास्त शाम 6:02 बजे होगा।

कलश स्थापना को नवरात्रि की पूजा की शुरुआत माना जाता है। इसे सही समय और पूजा की विधि के अनुसार करने की मान्यता है।

Shardiya Navratri 2026 Date: अक्टूबर में इस दिन से शुरू होगी मां दुर्गा की अराधना, जानें कलश स्थापना का मुहूर्त और शारदीय नवरात्रि का पूरा कैलेंडर

Shardiya Navratri 2026 Date: शारदीय नवरात्रि हिंदू धर्म के सबसे महत्वपूर्ण और पवित्र त्योहारों में से एक है। यह अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से नवमी तिथि तक मनाई जाती है। यह पर्व मां दुर्गा के नौ रूपों की उपासना और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। इस पर्व के 10वें दिन दुर्गा विसर्जन करते हैं और शाम के समय में रावण के पुतलों का दहन करके दशहरा का त्योहार मनाते हैं। इस पर्व को लेकर कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं। माता के भक्त नवरात्रि पर्व के नौ दिन उपवास करते हैं और कड़े नियमों का पालन करते हैं। इस पर्व की शुरुआत प्रतिपदा तिथि पर कलश स्थापना के साथ होती है। आइए जानें इस साल शारदीय नवरात्रि कब से शुरू हो रही है ? अक्टूबर नवरात्रि के कलश स्थापना का मुहूर्त क्या है?

शारदीय नवरात्रि 2026 कब से है?

इस साल 10 अक्टूबर रविवार को आश्विन शुक्ल प्रतिपदा तिथि रात 9:19 बजे से शुरू हो रही है और अगले दिन 11 अक्टूबर रविवार को रात 9:30 बजे तक खत्म होगी। प्रतिपदा तिथि में सूर्योदय 11 अक्टूबर को प्राप्त हो रहा है, इस आधार पर अक्टूबर नवरात्रि का शुभारंभ 11 अक्टूबर रविवार से होगा।

कलश स्थापना का मुहूर्त

अक्टूबर नवरात्रि के पहले दिन 11 अक्टूबर को कलश स्थापना के लिए 2 शुभ मुहूर्त प्राप्त हो रहे हैं। एक सुबह में और दूसरा दोपहर के समय।

पहला मुहूर्त : सुबह 6:19 बजे से लेकर सुबह 10:12 बजे तक

दूसरा मुहूर्त : 11:44 बजे से लेकर दोपहर 12:31 बजे तक

प्रतिपदा के दिन ब्रह्म मुहूर्त 04:40 ए एम से 05:30 ए एम तक है, वहीं उस दिन का निशिता मुहूर्त रात 11:43 बजे से लेकर मध्य रात्रि 12:33 ए एम तक है।

अक्टूबर नवरात्रि कैलेंडर 2026

नवरात्रि का पहला दिन: 11 अक्टूबर, रविवार- प्रतिपदा तिथि, कलश स्थापना, मां शैलपुत्री पूजा

नवरात्रि का दूसरा दिन: 12 अक्टूबर, सोमवार- द्वितीया तिथि, मां ब्रह्मचारिणी पूजा

नवरात्रि का तीसरा दिन: 13 अक्टूबर, मंगलवार- तृतीया तिथि, मां चंद्रघण्टा पूजा

नवरात्रि का चौथा दिन: 14 अक्टूबर, बुधवार- चतुर्थी तिथि, मरं कूष्माण्डा पूजा

नवरात्रि का पांचवा दिन: 15 अक्टूबर, गुरुवार- पंचमी तिथि, देवी स्कन्दमाता पूजा

नवरात्रि का छठा दिन: 16 अक्टूबर, शुक्रवार- षष्ठी तिथि, मां कात्यायनी पूजा

नवरात्रि का सातवां दिन: 17 अक्टूबर, शनिवार- सप्तमी तिथि, मां कालरात्रि पूजा

नवरात्रि का आठवां दिन: 18 अक्टूबर, रविवार- सप्तमी तिथि

नवरात्रि का नौवां दिन: 19 अक्टूबर, सोमवार- दुर्गा अष्टमी और महानवमी, मां महागौरी और मां सिद्धिदात्री की पूजा, कन्या पूजा, नवरात्रि हवन

नवरात्रि का पारण: 20 अक्टूबर, मंगलवार

दशहरा कब है?

नवरात्रि 9 दिनों की होती है। इसके अगले दिन विजयादशमी का पर्व मनाया जाता है, जिसे दशहरा भी कहते हैं। इसमें विजय मुहूर्त में शस्त्र पूजा करते हैं। शाम को प्रदोष काल में रावण के पुतले का दहन होता है। इस साल दशहरा 20 अक्टूबर दिन मंगलवार को है।

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Vishwakarma Puja Kab Hai 2026: सिद्ध योग आज की जाएगी देवताओं के शिल्पी भगवान विश्वकर्मा की पूजा, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त

Vishwakarma Puja Kab Hai 2026: विश्वकर्मा पूजा को विश्वकर्मा जयंती भी कहा जाता है। यह हिंदू धर्म का एक प्रमुख त्योहार है, जो देवताओं के शिल्पी भगवान विश्वकर्मा को समर्पित है। भगवान विश्वकर्मा को ब्रह्मांड का पहला शिल्पकार, वास्तुकार और इंजीनियर माना जाता है। यह पर्व हर साल मुख्य रूप से 17 सितंबर कन्या संक्रांति के अवसर पर मनाया जाता है। इस दिन निर्माण कार्य से जुड़ी मशीनों, औजारों, गाड़ियों, कारखानों और इलेक्ट्रॉनिक्स की साफ-सफाई की जाती है और उनकी पूजा की जाती है। माना जाता है कि भगवान विश्वकर्मा की पूजा करने से व्यापार में उन्नति होती है, मशीनों में खराबी नहीं आती और कार्यक्षेत्र में सफलता मिलती है।

विश्वकर्मा पूजा 2026 सही तारीख

विश्वकर्मा की पूजा कन्या संक्रांति के दिन की जाती है। सूर्य देव जब कन्या राशि में प्रवेश करते हैं तो उस समय कन्या संक्रांति होती है। वैदिक पंचांग के अनुसार, सूर्य देव 17 सितंबर को कन्या राशि में प्रवेश करेंगे। कन्या में सूर्य का गोचर 17 सितंबर को सुबह 7:58 बजे होगा और इसी दिन कन्या संक्रांति मनाई जाएगी। इसलिए विश्वकर्मा पूजा भी 17 सितंबर गुरुवार को ही मनाई जाएगी।

विश्वकर्मा पूजा 2026 मुहूर्त

विश्वकर्मा पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 7:58 बजे से होगा क्योंकि इस समय ही कन्या संक्रांति का क्षण है। सुबह 10:43 ए एम से लेकर दोपहर 01:48 पी एम के बीच भी पूजा कर सकते हैं।

इसमें आपको चर-सामान्य मुहूर्त 10:43 ए एम से 12:15 पी एम और लाभ-उन्नति मुहूर्त दोपहर 12:15 पी एम से 01:48 पी एम प्राप्त हो जाएगा। शाम के समय में शुभ-उत्तम मुहूर्त 04:52 पी एम से 06:24 पी एम तक रहेगा। कन्या संक्रांति का पुण्य काल भी सुबह 7:58 बजे से लेकर दोपहर 02:31 बजे तक रहेगा।

पंचांग के अनुसार, विश्वकर्मा पूजा के दिन भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि है। इस दिन ब्रह्म मुहूर्त 04:33 ए एम से 05:20 ए एम तक है, वहीं दिन का शुभ समय यानि अभिजीत मुहूर्त 11:51 ए एम से 12:40 पी एम तक है। विश्वकर्मा पूजा के दिन राहुकाल दोपहर में 01 बजकर 48 मिनट से दोपहर 03 बजकर 20 मिनट तक है।

विश्वकर्मा पूजा पर रहेंगे दो शुभ योग

इस साल विश्वकर्मा पूजा पर सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग विराजमान रहेंगे। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 06:07 ए एम से बनेगा और शाम 07:53 पी एम तक रहेगा। इस समय में ही रवि योग भी बन रहा है। ये दोनों ही शुभ योग फलदायी हैं।

विश्वकर्मा पूजा को प्रात:काल में विष्कम्भ योग बनेगा, जो दोपहर 12:50 पी एम तक है, उसके बाद से प्रीति योग का निर्माण होगा, जो रात्रि तक है। इस दिन अनुराधा नक्षत्र प्रात:काल से लेकर शाम 07:53 पी एम तक है, फिर ज्येष्ठा नक्षत्र है।

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