Sawan Purnima 2026: जीवन में लाना चाहते हैं सुख-समृद्धि तो सावन के अंतिम दिन करें ये 7 उपाय, मां लक्ष्मी की कृपा से नहीं होगी किसी चीज की कमी

Sawan Purnima 2026: सावन का महीना अब समापन की ओर बढ़ रहा है। हिंदू पंचांग के अनुसार, उत्तर भारत में मुख्य रूप से प्रचलित पूर्णिमान्त कैलेंडर में श्रावण मास का समापन श्रावण पूर्णिमा के दिन होता है। इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रक्षासूत्र यानी राखी बांधती हैं और भाई उनकी रक्षा का वचन देते हैं। इसी दिन ब्राह्मण और द्विज समाज के लोग पुराना यज्ञोपवीत उतार कर नया धारण करते हैं। साथ ही, श्रावण पूर्णिमा को ‘विश्व संस्कृत दिवस’ के रूप में भी मनाया जाता है।

सावन पूर्णिमा के दिन सिर्फ रक्षाबंधन का पर्व ही नहीं, गायत्री जयंती, वरलक्ष्मी व्रत और नारली पूर्णिमा भी मनाई जाती है। इस साल सावन का अंतिम दिन और भी खास है, क्योंकि इस दिन चंद्र ग्रहण भी लग रहा है। हालांकि ये ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, जिस कारण से इसका यहां कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। बता दें, हर हिंदू माह में पूर्णिमा का दिन माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा के लिए भी खास माना जाता है। सावन की पूर्णिमा पर भगवान शिव की भी पूजा की जाती है। इसलिए इस दिन को जीवन में खुशहाली और सुख समृद्धि लाने के लिए बेहद अहम माना जाता है। अगर आप इस दिन कुछ खास उपाय करते हैं तो घर में सुख-शांति और समृद्धि आती है।

कब है श्रावण पूर्णिमा 2026?

सावन महीना 28 अगस्त 2026 को खत्म हो रहा है। इस दिन श्रावण पूर्णिमा है, जो 27 अगस्त 2026 की सुबह 09:08 बजे से 28 अगस्त 2026 की सुबह 09:48 बजे तक रहेगी।

सावन पूर्णिमा के उपाय

  • श्रावण पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विधि विधान पूजा जरूर करें, उन्हें मखाने की खीर का भोग लगाएं। साथ ही कनकधारा स्तोत्र या विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें। कहते हैं ऐसा करने से धन-धान्य में वृद्धि के रास्ते खुलते हैं।
  • सावन के आखिरी दिन मां लक्ष्मी के चरणों में 5 साबुत पीली कौड़ियां और थोड़ा अक्षत अवश्य चढ़ाएं। पूजा के बाद इन कौड़ियों और चावल को एक लाल रेशमी कपड़े में बांधकर घर की तिजोरी या धन रखने के स्थान पर रख दें। मान्यता है इस उपाय को करने से घर में धन-धान्य की कभी कमी नहीं होती।
  • सावन के अंतिम दिन शिवलिंग का पंचामृत से अभिषेक करें। इसके बाद शिवलिंग पर शुद्ध जल भी जरूर चढ़ाएं। इसके बाद शिवजी को बेलपत्र और शमी के पत्ते चढ़ाएं। मान्यता है कि सावन के आखिरी दिन भक्तिभाव से यह उपाय करने से जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं।
  • सावन के अंतिम दिन यानी श्रावण पूर्णिमा की रात में चंद्र देव की पूजा भी जरूर करें। रात में चांदी के पात्र में साफ जल, थोड़ा सा कच्चा दूध, अक्षत और सफेद फूल मिलाकर चंद्र देव को अर्घ्य दें। अर्घ्य देते समय चंद्र देव के मंत्र को 3 बार जरूर बोलें। मंत्र है ‘ॐ चंद्राय नमः’।
  • सावन के आखिरी दिन पीपल के वृक्ष पर जल अर्पित करना अत्यंत शुभ फलदायी माना जाता है। साथ ही पीपल के पेड़ पर सरसों के तेल का दीपक भी जलाएं। कहते हैं इससे सभी देवी-देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त हो जाता है।
  • सावन के अंतिम दिन किसी जरूरतमंद या ब्राह्मण को तिल, सफेद वस्त्र, चावल, दूध या भोजन का दान जरूर करें। कहते हैं इससे माता लक्ष्मी की असीम कृपा प्राप्त होती है।

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Rakshabandhan 2026: इस रक्षाबंधन पर एक नहीं बल्कि 7 शुभ योग बन रहे हैं, जानें रक्षाबंधन की तारीख और राखी बांधने के शुभ मुहूर्त

Rakshabandhan 2026: इस रक्षाबंधन पर एक नहीं बल्कि 7 शुभ योग बन रहे हैं, जानें रक्षाबंधन की तारीख और राखी बांधने के शुभ मुहूर्त

Rakshabandhan 2026: रक्षाबंधन 2026 शुक्रवार, 28 अगस्त को मनाया जाएगा। पंचांग के अनुसार, इस साल यह त्योहार खास तौर पर शुभ माना जा रहा है क्योंकि एक ही दिन सात अत्यंत दुर्लभ और शुभ योग बन रहे हैं। ग्रहों और नक्षत्रों का ऐसा मेल होने की उम्मीद है, जिसका परिणाम बहुत शुभ होगा। इससे भी जरूरी बात यह है कि भद्रा त्योहार पर असर नहीं डालेगी, जिससे बहनों को अपने भाइयों की कलाई पर पवित्र धागा बांधने के लिए ज्यादा समय मिलेगा।

रक्षाबंधन पर भद्रा नहीं

पंचांग के अनुसार, भद्रा गुरुवार, 27 अगस्त को सुबह 9:08 बजे शुरू होगी और उसी दिन रात 9:27 बजे खत्म होगी। इसलिए, 28 अगस्त को भद्रा नहीं होगी, जिससे परिवार बिना इस रोक के रक्षाबंधन मना सकेंगे। भद्रा को राखी बांधने के लिए अशुभ समय माना जाता है। हालांकि, इस साल यह त्योहार से एक दिन पहले खत्म हो जाएगी।

रक्षाबंधन पर सात शुभ योग

रक्षाबंधन 2026 को खास बनाने के लिए कई अच्छे ज्योतिषीय संयोग बनने की उम्मीद है। इनमें शतभिषा नक्षत्र, सुकर्मा योग, त्रिपुष्कर योग और सर्वार्थ सिद्धि योग के साथ-साथ दूसरे शुभ ग्रहों की स्थिति शामिल है।

शतभिषा नक्षत्र के प्रभाव में चंद्रमा कुंभ राशि में रहेगा। ज्योतिष में, यह नक्षत्र वरुण देव से जुड़ा है और राहु इसका स्वामी है। इस दौरान की जाने वाली पूजा, दान और दूसरे आध्यात्मिक कामों का खास महत्व माना जाता है।

कर्क राशि में बृहस्पति का होना भी अच्छा माना जाता है। इसके अलावा, भद्रा का न होना भी उन वजहों में गिना जा रहा है जो इस दिन को रक्षाबंधन की रस्में करने के लिए ज़्यादा सही बनाती हैं।

सावन पूर्णिमा तिथि कब से कब तक है?

पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त को सुबह करीब 9:09 बजे शुरू होने और 28 अगस्त को सुबह करीब 9:48 बजे खत्म होने की उम्मीद है। पूर्णिमा 28 अगस्त को सूर्योदय के समय रहेगी, इसलिए उदया तिथि की परंपरा के अनुसार उसी दिन रक्षाबंधन मनाया जाएगा। पूर्णिमा का व्रत करने वाले श्रद्धालु 27 अगस्त को उपवास कर सकते हैं, जबकि बहनें 28 अगस्त को राखी बांध सकती हैं।

राखी बांधने का सबसे अच्छा समय

सुबह का मुहूर्त : सुबह 5:57 बजे से 9:48 बजे तक

शुभ चौघड़िया के आधार पर एक और शुभ समय इस समय रहने की उम्मीद है:

शुभ चौघड़िया : सुबह 11:45 बजे से दोपहर 1:19 बजे तक

राहु काल में राखी बांधने से बचें

राहु काल सुबह 10:11 बजे से 11:45 बजे तक रहने की उम्मीद है। ज्योतिष के हिसाब से समय मानने वाले परिवार इस दौरान राखी बांधने से बच सकते हैं।

पंचांग का समय शहर और कैलेंडर के हिसाब से थोड़ा अलग हो सकता है। इसलिए परिवार यह रस्म करने से पहले लोकल मुहूर्त देख सकते हैं।

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Raksha Bandhan 2026 Bhadra timing: इस बार रक्षा बंधन पर नहीं होगा भद्रा का साया, जानें कौन हैं भद्रा और इसमें क्यों नहीं बांधनी चाहिए राखी

Raksha Bandhan 2026 Bhadra timing: हिंदू धर्म में पूरे दिन में कुछ विशेष समय को अशुभ माना जाता है। इस समय में कोई शुभ या मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं। ऐसा ही एक समय है भद्रा का। हिंदू पौराणिक कथाओं और पंचांग का एक विशेष भाग है। इस समय में रक्षा बंधन का पर्व भी नहीं मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस समय में राखी भी नहीं बांधनी चाहिए। इस साल रक्षा बंधन का पर्व 28 अगस्त 2026 को मनाया जाएगा। इस दिन बहनें अपने भाइयों को रक्षा सूत्र बांधती हैं और उनको तिलक लगाकर मुंह मीठा कराती हैं। साथ ही, उनकी शुभ और मंगल की कामना करती हैं। बदले में भाई अपनी बहन को हमेशा रक्षा करने का वचन देते हैं और भेंट देकर विदा करते हैं।

इस बार भद्रा का साया नहीं

इस बार रक्षा बंधन पर भद्रा का साया नहीं रहीं हेगा। भद्रा रक्षा बंधन के दिन सूर्योदय से पूर्व ही समाप्त हो जाएगी। इसलिए भद्रा की अड़चन के बिना पूरे दिन राखी का त्योहार मनाया जा सकेगा।

कौन है भद्रा?

पौराणिक पहचान : धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, भद्रा भगवान सूर्यदेव और माता छाया की पुत्री हैं, तथा भगवान शनिदेव की सगी बहन हैं।

स्वभाव : शनिदेव की तरह भद्रा का स्वभाव भी अत्यंत क्रोधी और उग्र माना जाता है। जन्म लेते ही वे यज्ञों और मांगलिक कार्यों में विघ्न डालने लगी थीं।

ज्योतिष/पंचांग में स्थान : उनके उग्र स्वभाव को नियंत्रित करने के लिए ब्रह्मा जी ने उन्हें पंचांग के 11 करणों में से 7वें करण (विष्टि करण) में स्थान दिया। भद्रा काल एक ऐसा समय होता है जब भद्रा का प्रभाव पृथ्वी पर रहता है।

भद्रा में राखी क्यों नहीं बांधनी चाहिए?

ज्योतिष शास्त्र और हिंदू मान्यताओं में भद्रा काल को अशुभ और किसी भी शुभ या नए कार्य के लिए वर्जित माना गया है। इसके पीछे मुख्य कारण निम्नलिखित हैं :

अशुभ प्रभाव और अनिष्ट की आशंका : भद्रा के दौरान किए गए शुभ कार्यों का फल नहीं मिलता या वे कार्य निष्फल हो जाते हैं। भाई-बहन का रिश्ता अटूट रहे, इसलिए इस उग्र काल को छोड़कर शुभ मुहूर्त में ही रक्षासूत्र बांधा जाता है।

पौराणिक कथा : प्रचलित कथा के अनुसार, लंकापति रावण की बहन शूर्पणखा ने रावण को भद्रा काल में ही राखी बांधी थी। इसके फलस्वरूप उसी वर्ष रावण के वंश और साम्राज्य का विनाश हो गया। इसी कारण से भद्रा के साये में राखी बांधने से बचा जाता है।

Putrada Ekadashi Date and Muhurat: 23 अगस्त को होगा सावन पुत्रदा एकादशी का व्रत, खास संयोग में पूजा से पूरी होगी संतान की मनोकामना

Putrada Ekadashi Date and Muhurat: 23 अगस्त को होगा सावन पुत्रदा एकादशी का व्रत, खास संयोग में पूजा से पूरी होगी संतान की मनोकामना

Sawan Putrada Ekadashi Date and Muhurat: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष स्थान है। यह व्रत हिंदू कैलेंडर के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है। भगवान विष्णु को समर्पित यह व्रत जब सावन माह में होता है, तो श्री हरि के साथ ही भगवान विष्णु की पूजा का भी संयोग प्राप्त होता है। सावन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को पुत्रदा एकादशी का व्रत किया जाता है। इस साल यह व्रत 23 अगस्त रविवार के दिन पड़ रहा है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो दंपत्ति संतान सुख से वंचित हैं या जिनकी संतान के जीवन में स्वास्थ्य या करियर से जुड़ी समस्याएं आ रही हैं, उनके लिए यह व्रत विशेष फलदायी होता है। ऐसा माना जाता है कि इस व्रत के प्रभाव से समस्त पापों का नाश होता है और संतान सुख एवं सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करने से संतान से जुड़ी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और संतान के जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है।

खास बात यह है कि सावन का महीना होने के कारण इस दिन भगवान शिव और भगवान विष्णु दोनों की आराधना का विशेष महत्व बताया गया है। देवघर के ज्योतिषाचार्य पंडित नंदकिशोर मुद्गल ने लोकल 18 को बताया कि रविवार के दिन पुत्रदा एकादशी का पड़ना भी एक बड़ा संयोग है। इस दिन विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। सावन का महीना होने के कारण भगवान शिव की पूजा करने से भक्तों को विशेष आध्यात्मिक लाभ मिलने की मान्यता है।

पूजा का शुभ मुहूर्त और पारण का समय

इस बार एकादशी तिथि 23 अगस्त 2026 की रात 2 बजे से शुरू होगी और 24 अगस्त 2026 की सुबह 4 बजकर 18 मिनट तक रहेगी। भगवान विष्णु की पूजा के लिए 23 अगस्त को सुबह 7 बजकर 32 मिनट से दोपहर 12 बजकर 24 मिनट तक का समय सबसे शुभ है।

पुत्रदा एकादशी व्रत पारण समय

व्रत का पारण 24 अगस्त 2026 को दोपहर 1 बजकर 41 मिनट से शाम 4 बजकर 16 मिनट के बीच किया जा सकेगा।

हरि और हर की पूजा का दुर्लभ संयोग

सावन की आखिरी एकादशी में भगवान शिव की आराधना के साथ पुत्रदा एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। यही कारण है कि इस दिन शिव और विष्णु की संयुक्त आराधना को लेकर धार्मिक आस्था और भी बढ़ जाती है।

संतान इच्छुक दंपति जरूर रखें व्रत

पुत्रदा एकादशी का व्रत खासतौर पर संतान की कामना रखने वाले दंपत्तियों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। संतान इच्छुक दंपत्ति इस दिन श्रद्धा के साथ व्रत रखकर भगवान विष्णु और भगवान शिव की पूजा-अर्चना कर सकते हैं। मान्यता है कि इससे संतान प्राप्ति की इच्छा रखने वाले दंपत्तियों की मनोकामना पूरी हो सकती है और संतान पर भगवान की कृपा बनी रहती है।

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Bhauma Pradosh Vrat 2026 Date: सावन के दूसरे और अंतिम प्रदोष व्रत पर त्रिपुष्कर योग का संयोग, जानें कब होगा भौम प्रदोष व्रत और पूजा का मुहूर्त

Bhauma Pradosh Vrat 2026 Date: हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का अहम स्थान है। यह तिथि भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है। माना जाता है कि भगवान शिव इस दिन कैलाश पर्वत पर प्रदोष काल में प्रसन्न मुद्रा में नृत्य करते हैं। और इस समय भगवान की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। प्रदोष व्रत हिंदू कैलेंडर के हर माह की कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को किया जाता है। इस व्रत में प्रदोष काल यानी सूर्यास्त के बाद पूजा का विधान है। प्रदोष व्रत का नाम उस दिन से तय होता है, जब यह तिथि पड़ रही हो। जैसे सोमवार को त्रयोदशी तिथि लगने पर सोम प्रदोष व्रत किया जाता है।

सावन माह का अंतिम प्रदोष व्रत मंगलवार के पड़ रहा है। सावन शुक्ल त्रयोदशी तिथि मंगलवार के दिन पड़ने की वजह से यह भौम प्रदोष व्रत होगा। यह व्रत उन श्रद्धालुओं के लिए खासतौर से फलदायी होता है जिनकी कुंडली में मंगल दोष होता है। संतान की प्राप्ति के लिए भी प्रदोष व्रत रखा जाता है। इस दिन मंगला गौरी व्रत का भी सुंदर संयोग बनेगा। इस व्रत के दिन शिव पूजा के लिए करीब सवा दो घंटे का मुहूर्त है। सावन के भौम प्रदोष व्रत के दिन त्रिपुष्कर योग बन रहा है, जो तीन गुना फल प्रदान करने वाला माना जाता है।

भौम प्रदोष व्रत 2026 तारीख

श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 25 अगस्त को सुबह 6 बजकर 20 मिनट पर प्रारंभ होगी। इस तिथि की समाप्ति 26 अगस्त को सुबह में 7 बजकर 59 मिनट पर होगी। उदयातिथि के आधार पर त्रयोदशी तिथि 26 अगस्त को है, लेकिन सावन का अंतिम प्रदोष यानि भौम प्रदोष व्रत 25 अगस्त दिन मंगलवार को रखा जाएगा। क्योंकि प्रदोष काल का पूजा मुहूर्त 25 अगस्त को मिल रहा है।

भौम प्रदोष व्रत 2026 मुहूर्त

इस बार भौम प्रदोष व्रत की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त शाम को 6 बजकर 51 मिनट से है, जो रात 9 बजकर 4 मिनट तक रहेगा। शिव पूजा के लिए भक्तों को 2 घंटे 13 मिनट का शुभ समय प्राप्त होगा। इसके अलावा प्रदोष के दिन ब्रह्म मुहूर्त प्रात:काल 04:27 ए एम से 05:11 ए एम तक है, वहीं अभिजीत मुहूर्त दिन में 11 बजकर 57 मिनट से दोपहर 12 बजकर 49 मिनट तक रहेगा। उस दिन का निशिता मुहूर्त देर रात 12:01 ए एम से लेकर 26 अगस्त को 12:45 ए एम तक है।

भौम प्रदोष व्रत में त्रिपुष्कर योग का संयोग

सावन का यह भौम प्रदोष व्रत त्रिपुष्कर योग में किया जाएगा। त्रिपुष्कर योग सुबह 5 बजकर 55 मिनट से सुबह 6 बजकर 20 मिनट तक रहेगा। इस योग में किए गए शुभ कार्यों के तीन गुने फल प्राप्त होते हैं। प्रदोष के दिन रवि योग भी बन रहा है, जो रात में 10 बजकर 51 मिनट से 26 अगस्त को सुबह 5 बजकर 56 मिनट तक रहेगा। रवि योग भी एक शुभ योग होता है। उस दिन सुबह में आयुष्मान् योग 07 बजकर 41 मिनट तक रहेगा। इस योग में आयु लंबी होती है, उत्तम सेहत का आशीर्वाद मिलता है। सुबह 7:41 बजे से सौभाग्य योग बनेगा, जो रात तक रहेगा। त्रयोदशी व्रत पर उत्तराषाढा नक्षत्र प्रात:काल से लेकर रात 10:51 पी एम तक रहेगा, फिर श्रवण नक्षत्र का प्रारंभ होगा।

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Nag Panchami 2026: नाग पंचमी के त्योहार पर बन रहा ये खास संयोग, भूल कर भी न करें ये गलतियां

Nag Panchami 2026: हर साल की तरह इस बार भी नाग पंचमी सावन माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को होगी। 17 अगस्त 2026 दिन सोमवार को नाग पंचमी मनाई जाएगी। यह और भी खास हो गई है, क्योंकि इसी दिन सावन का तीसरा सोमवार पड़ रहा है। ऐसे शुभ दिन पर नाग पंचमी और सावन सोमवार का यह संयोग पर्व के महत्व और ज्यादा बढ़ा देता है। माना जाता है कि इस विशेष संयोग में शुभ मुहूर्त पर नाग देवता की विधि-विधान से पूजा करने से भक्तों को 4 गुना ज्यादा फल मिलता है। पूजा मन लगाकर विधि विधान से करनी चाहिए।

पूजा विधि

इस साल नाग पंचमी 17 अगस्त को मनाई जाने वाली है। ज्योतिष के मुताबिक नाग पंचमी श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को होती है। इस दिन नाग देवताओं की पूजा होती है, जिससे सर्प दंश (काटने) का भय न हो, जीवन में सुख शांति समृद्धि बनी रहे, और प्रकृति तथा जीव-जंतुओं के प्रति सम्मान करने का भी ये एक जरिया है। इस दिन यदि आप सावन सोमवार का व्रत कर रहे हैं, तो आपको नागव्रत का संकल्प नहीं कर सकते हैं। एक बार में एक व्रत किया जा सकता है। इसके बाद शिव जी की विधि विधान से पूजा करनी चाहिए। फिर नाग देवता की पूजा करनी चाहिए। जल अर्पित कर तिलक, चावल, फूल, भोग चढ़ाएं। वस्त्र अर्पित करें। वहीं दूध और खीर चढ़ाना न भूलें।

ये काम करने से बचें

1-सांपों का बिल जमीन के अंदर होता है। इसलिए नाग पंचमी के दिन गलती से भी जमीन, खेत वगैरह की खुदाई न करें। ऐसा करने से सांपों को चोट पहुंच सकती है, जो अशुभ होगा।

2-नाग पंचमी वाले दिन लोहे के बर्तनों का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए।

3-इस दिन नुकीलीं चीजें जैसे चाकू, सुई आदि का यूज करने से बचें।

4-नाग पंचमी वाले दिन भूलकर भी किसी जीव जंतु खासकर सापों को नुकसान न पहुंचाए।

5-इस दिन मदिरा और तामसिक भोजन करने से भी बचना चाहिए।

कथा

सबसे फेमस कथा के मुताबिक एक खेत जोतता किसान था। हल चलाते समय गलती से उसने नागिन के बच्चों को मार दिया ता। दुखी और क्रोधित नागिन ने किसान के पूरे परिवार को डंस लिया था। बाद में किसान की बेटी ने श्रद्धा से नाग देवता की पूजा की और उनसे क्षमा याचना की थी।

उसकी भक्ति को देख नागिन ने प्रसन्न होकर पूरे परिवार को जीवनदान दे दिया था। तभी से नाग पंचमी पर नाग देवता की पूजा करने की परंपरा की शुरुआत हो गई। मान्यता है कि इस दिन नाग देवता की पूजा करने से परिवार सुरक्षित रहता है और जीवन में आने वाले संकट कटते हैं।

Hariyali Teej 2026 Date: आज शाम से शुरू हो रहा शुभ मुहूर्त, जानें 15 अगस्त को कब कैसे हरियाली तीज की करें पूजा

Hariyali Teej 2026 Date: आज 14 अगस्त 2026 का दिन बेहद खास होने वाला है। हिंदू पंचांग के मुताबिक आज सावन महीने की शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि है। वहीं शाम 6 बजकर 46 मिनट से तृतीया तिथि लग जाएगी। सावन का शु्क्रवार दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा के लिए शुभ माना गया है। बता दें कि आज हरियाली तीज की तिथि शाम 6 बजकर 46 मिनट पर शुरू होगी और 15 अगस्त की शाम 5 बजकर 28 मिनट पर समाप्त होगी।

उत्तर भारत में तीज की धूम

उत्तर भारती में तीज का त्योहार बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है। खासकर राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार और झारखंड में अलग ही माहौल होता है। श्रावण और भाद्रपद मास के दौरान महिलाएं 3 तीज मनाती हैं। यह समय जीवन में उत्साह, आनंद और पारिवारिक संतुलन बनाने का प्रतीक होता है। जानिए आज पूजा का शुभ मुहूर्त, राहुकाल, चंद्रोदय और नक्षत्र…

हरियाली तीज 2026 कब होगी?

तृतीया तिथि की शुरुआत 14 अगस्त की शाम 6 बजकर 46 मिनट पर हो रही है। इसका समापन 15 अगस्त को शाम 5 बजकर 28 मिनट पर हो जाएगा। उदयातिथि के आधार पर हरियाली तीज का व्रत 15 अगस्त 2026 को किया जाएगा। इस दिन महिलाएं व्रत रखकर भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना करेंगी। पति की लंबी आयु की कामना करेंगी।

त्योहार की तिथि- शुक्ल पक्ष की द्वितीया –शाम 6 बजकर 46 मिनट तक, फिर तृतीया तिथि की होगी शुरुआत

योग- परिघ – सुबह 09 बजकर 28 मिनट तक, फिर शिव होगा शुरू

शुभ मुहूर्त

अभिजीत मुहूर्त- दोपहर 11 बजकर 59 मिनट से दोपहर 12 बजक 52 मिनट तक

अमृत काल- रात्रि 09 बजकर 33 मिनट से रात्रि 11 बजकर 05 मिनट तक

आज के अशुभ समय

राहुकाल- सुबह 10 बजकर 47 मिनट से दोपहर 12 बजकर 26 मिनट तक

गुलिकाल- सुबह 07 बजकर 29 मिनट से प्रातः 09 बजकर 08 मिनट तक

आज का नक्षत्र

आज चंद्रदेव पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में विराजेंगे।

पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र- अगले दिन सुबह 03 बजकर 42 मिनट (15 अगस्त) तक

नक्षत्र स्वामी- शुक्रदेव

राशि स्वामी- सूर्यदेव

Hariyali Teej 2026 Vrat Vidhi: अगर पहली बार करने जा रही हैं तीज का व्रत, जान लें पूरी विधि

Hariyali Teej 2026 Vrat Vidhi: हरियाली तीज 15 अगस्त 2026, दिन शनिवार को मनाई जाने वाली है। इस दिन सभी सुहागिन महिलाएं अखंड सौभाग्य के लिए पूरी श्रद्धा और विधि विधान से व्रत करती हैं। वहीं कुंवारी लड़कियां अच्छे वर को पाने के लिए इस व्रत को रखती हैं। सावन मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को इसे मनाया जाता है। ये त्योहार मां पार्वती और भगवान शिव के पुनर्मिलन का प्रतीक माना गया है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन व्रत और शिव-पार्वती की पूजा करने से शादीशुदा जीवन सुखों से भरा रहता है। हालांकि, पूर्ण फल पाने के लिए व्रत को विधि-पूर्वक करना बेहद जरूरी है। ऐसे में अगर आप पहली बार हरियाली तीज का व्रत कर रही हैं, तो इसकी पूरी विधि जरूर जान लें।

जानें हरियाली तीज व्रत विधि

1- सावन मास की तृतीया तिथि पर व्रत रखने वाली महिलाओं को सुबह जल्दी उठकर साफ-सफाई करके स्नान कर लेना चाहिए। इसके बाद, साफ कपड़े पहने।

2- हरियाली तीज पर महिलाओं के मायके से सिंधारा या शगुन का सामान आता है। इसमें साड़ी, चूड़ियां, मिष्ठान, श्रृंगार का सामान दिया जाता है। मायके से आए सामान में से ही साड़ी पहननी चाहिए, इसे शुभ माना जाता है। इस दिन हरे रंग की साड़ी पहनना बेहद शुभ माना गया है।

3- महिलाएं इस दिन सोलह श्रृंगार करती हैं। हरियाली तीज पर सोलह श्रृंगार का बहुत महत्व होता है। इस त्योहार को सुहाग का प्रतीक माना जाता है।

4- हरियाली तीज के दिन सबसे पहले व्रत का संकल्प लें। इसके बाद सुबह शुभ मुहूर्त में भगवान शिव और माता पार्वती की स्थापना करें और पूजा करें। माता पार्वती को पूरा श्रृंगार का सामान चढ़ाएं। वहीं शिवजी को बेलपत्र, जल, फूल आदि अर्पित करें। वहीं पूजा के दौरान हरियाली तीज व्रत कथा पाठ भी जरूर करना चाहिए। भगवान को भोग अर्पित करें।

5- मान्यताओं के मुताबिक महिलाएं हरियाली तीज पर अपनी सास को श्रृंगार का सामान देती हैं। साथी ही उनका आशीर्वाद लेती हैं। इस दिन महिलाएं को झूला भी झूलती हैं। वहीं हरियाली तीज पर मेहंदी लगाना अच्छा माना जाता है।

डिस्क्लेमर- यहां पर मौजूद जानकारी की मनीकंट्रोल पुष्टी नहीं करता है। आर्टिकल में मौजूद जानकारी मान्यताओं पर आधारित है।

Second Mangla Gauri Vrat 2026: सुखी दांपत्य के लिए दूसरे मंगला गौरी व्रत पर करें ये 5 उपाय, जानें मुहूर्त और पूजा विधि

Second Mangla Gauri Vrat 2026: सावन के महीने में सोमवार व्रत के साथ ही मंगलवार को मंगला गौरी व्रत भी किया जाता है। कल यानी 11 अगस्त को इस साल का दूसरा मंगला गौरी व्रत किया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन का महीना शिव भक्ति के साथ मां पार्वती की असीम कृपा प्राप्त करने के लिए भी जाना जाता है। इसमें आने वाले हर मंगलवार को महिलाएं और कुंवारी कन्याएं दांपत्य जीवन में खुशहाली और अखंड सौभाग्य के लिए यह व्रत करती हैं। इस दिन सुखी दांपत्य और जीवन में खुशहाली के लिए 5 खास उपाय विशेष रूप से फलदायी माने जाते हैं।

पूजन के शुभ मुहूर्त (11 अगस्त 2026)

पूजा के लिए सावन के इस पावन दिन पर निम्नलिखित शुभ मुहूर्त रहेंगे:

ब्रह्म मुहूर्त (प्रातः साधना): सुबह 04:49 बजे से 05:34 बजे तक

अभिजीत मुहूर्त (सर्वश्रेष्ठ समय): दोपहर 12:18 बजे से 01:09 बजे तक

विजय मुहूर्त (शुभ कार्य हेतु): दोपहर 02:52 बजे से 03:43 बजे तक

गोधूलि मुहूर्त: शाम 07:09 से 07:31 तक

संध्या पूजा: शाम 07:09 से 08:16 तक

पूजन विधि

ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ व लाल/पीले वस्त्र धारण करें। इसके बाद हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर निम्न मंत्र से व्रत का संकल्प लें।

एक साफ चौकी पर लाल या सफेद वस्त्र बिछाकर मां मंगला गौरी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। मां के समक्ष आटे से बना 16 बत्तियों वाला घी का दीपक प्रज्वलित करें।

माँ का ध्यान करते हुए इस मंत्र का उच्चारण करें: “कुंकुमागुरुलिप्तांगा सर्वाभरणभूषिताम्। नीलकण्ठप्रियां गौरीं वन्देहं मंगलाह्वयाम्॥”

इसके बाद मां का विधि-विधान से षोडशोपचार पूजन करें।

मां मंगला गौरी की पूजा में 16 की संख्या का विशेष महत्व है। मां को 16 मालाएं, 16 लौंग, 16 सुपारियां, 16 इलायची, 16 चूड़ियां, सुहाग की 16 सामग्रियां, फल, पान, लड्डू और मिठाई अर्पित करें। साथ ही 5 प्रकार के सूखे मेवे और 7 प्रकार के अनाज (गेहूँ, उड़द, मूँग, चना, जौ, चावल और मसूर) अर्पित करें।

व्रत कथा का पाठ करें या श्रद्धापूर्वक सुनें। अंत में आरती करें। इस व्रत में एक ही समय शुद्ध सात्विक अन्न ग्रहण करने का विधान है।

भाग्य बदलने वाले 5 अचूक उपाय

16 श्रृंगार का दान : विवाह में रही बाधाएं दूर करने के लिए अविवाहित कन्याएं इस दिन मां मंगला गौरी को सुहाग की 16 वस्तुएं अर्पित करें और पूजा के बाद इन्हें किसी सुहागिन स्त्री को दान कर दें।

लाल पुष्प और शहद : यदि दांपत्य जीवन में तनाव या अनबन रहती है, तो मां मंगला गौरी को 16 लाल गुड़हल के फूल और शहद अर्पित करें। इसके बाद “ॐ ह्रीं मंगला गौर्यै नमः” मंत्र का 108 बार जाप करें।

16 बत्तियों का दीपक : इस दिन संध्या समय घर के मंदिर में आटे का 16 बत्तियों वाला दीपक जलाएं और उसमें थोड़ा-सा कपूर डाल दें। इससे घर की दरिद्रता दूर होती है और धन वृद्धि के योग बनते हैं।

अन्न व वस्त्र दान : पूजा के पश्चात 7 प्रकार के अनाज का मिश्रण बनाकर किसी जरूरतमंद को दान करें। साथ ही किसी वृद्ध सुहागिन स्त्री के चरण छूकर उनका आशीर्वाद लें।

मंगल दोष शांत करने का उपाय : यदि आपकी कुंडली में मंगल दोष के कारण जीवन में परेशानियां आ रही हैं, तो मंगला गौरी पूजा के समय मां को 16 छोटी इलायची और 16 बताशे चढ़ाएं और बाद में इसे प्रसाद स्वरूप परिवार में बांट दें।

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Sawan Shivratri 2026: सावन की शिवरात्रि पर रहेगा भद्रा का साया, जानें तारीख और क्या भद्रा में कर सकते हैं शिव-शंभु का जलाभिषेक

Sawan Shivratri 2026: इस समय भगवान शिव का अति प्रिय श्रावण मास चल रहा है। यूं तो, सावन के सभी दिन भगवान शिव का जलाभिषेक करने पर पुण्य मिलता है। लेकिन कुछ खास दिन ऐसे हैं, जब भगवान शिव की विशेष पूजा, उपवास और जलाभिषेक करने पर भोलेनाथ प्रसन्न होते हैं। शिवरात्रि का दिन भी इनमें से एक है। वैसे तो, हिंदू कैलेंडर के हर माह में शिवरात्रि मनाई जाती है, लेकिन सावन में आने वाली शिवरात्रि तिथि का विशेष महत्व है। शिवरात्रि का पर्व श्रावन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को किया जाता है।

इस साल यह पर्व 11 अगस्त को मनाया जाएगा। इस दिन सुबह से ही शिवालयों में शिव भक्तों की धूम रहेगी, कांवड़िये महादेव का जलाभिषेक करेंगे, कुछ लोग उपवास और विशेष पूजा या रुद्राभिषक का भी आयोजन करेंगे। पंचांग के अनुसार, माना जा रहा है कि इस साल शिवरात्रि पर भद्र लग रही है। ऐसे में श्रद्धालुओं के मन में सवाल उठ रहा है कि भद्रा काल में देवाधिदेव का जलाभिषेक किया जाएगा या नहीं? सावन शिवरात्रि की तिथि, शुभ मुहूर्त, जलाभिषेक का समय, भद्रा काल और पूजा विधि से जुड़ी संपूर्ण जानकारी नीचे दी गई है:

सावन शिवरात्रि 2026 तिथि

व्रत एवं पूजन तिथि : मंगलवार, 11 अगस्त 2026

चतुर्दशी तिथि प्रारंभ : 11 अगस्त 2026, प्रातः 04:43 AM

चतुर्दशी तिथि समाप्त : 12 अगस्त 2026, रात्रि 01:51 AM

भद्रा काल का समय

भद्रा का समय : 11 अगस्त 2026, प्रातः 04:56 AM से दोपहर 03:24 PM तक।

मान्यता : शास्त्रों के अनुसार भद्राकाल में शुभ या मांगलिक कार्य वर्जित होते हैं, लेकिन भगवान शिव की पूजा, मंत्र जाप और भक्ति में भद्रा का दोष नहीं लगता। इसलिए भक्त पूरे दिन श्रद्धापूर्वक जलाभिषेक और पूजा-अर्चना कर सकते हैं।

जलाभिषेक का शुभ मुहूर्त

आप पूरे दिन चतुर्दशी तिथि के दौरान जलाभिषेक कर सकते हैं। विशेष फलदाई मुहूर्त इस प्रकार हैं:

ब्रह्म मुहूर्त : प्रातः 05:23 AM से 06:00 AM

अभिजीत मुहूर्त : दोपहर 12:06 PM से 12:58 PM

गोधूलि मुहूर्त : सायं 09:13 PM से 09:32 PM

निशिता काल (मुख्य मध्यरात्रि पूजा): 11-12 अगस्त की रात्रि 12:05 AM से 12:48 AM तक

चार प्रहर की पूजा का समय

प्रथम प्रहर : सायं 07:04 PM से रात्रि 09:45 PM

द्वितीय प्रहर : रात्रि 09:45 PM से मध्यरात्रि 12:26 AM

तृतीय प्रहर : मध्यरात्रि 12:26 AM से तड़के 03:07 AM (12 अगस्त)

चतुर्थ प्रहर : तड़के 03:07 AM से प्रातः 05:49 AM (12 अगस्त)

शिव पूजा विधि

  • सावन शिवरात्रि के दिन प्रातः स्नान के बाद स्वच्छ कपड़े पहनें और व्रत का संकल्प लें।
  • मंदिर या घर पर शिवलिंग पर गंगाजल व शुद्ध जल अर्पित करें। इसके बाद दूध, दही, घी, शहद और शक्कर (पंचामृत) से अभिषेक करें।
  • शिवलिंग पर बेलपत्र (अखंडित), धतूरा, भांग, शमी पत्र, सफेद आंकड़े के फूल, चंदन और भस्म चढ़ाएं।
  • पूजा करते समय ॐ नमः शिवाय” या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करते रहें।
  • अंत में धूप-दीप जलाकर शिव जी की आरती करें और सात्विक भोग या फल अर्पित करें।
  • शिवलिंग पर तुलसी के पत्ते, सिंदूर, रोली, हल्दी और केतकी के फूल न चढ़ाएं।

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