Sawan Fourth Somwar 2026: एकसाथ 5 शुभ संयोग लेकर आ रहा है सावन का अंतिम सोमवार व्रत, जानें शिववास योग का महत्व, तारीख और मुहूर्त

Sawan Fourth Somwar 2026: सावन का महीना अब धीरे-धीरे अपने समापन की ओर पहुंच रहा है। इस माह में सोमवार के व्रत का विशेष स्थान है। श्रद्धालु पूरी आस्था और विधि-विधान से सावन के सभी सोमवार का व्रत करते हैं। इस साल सावन का चौथा और अंतिम सोमवार 24 अगस्त 2026 को पड़ रहा है। इस दिन 5 शुभ संयोग बन रहे हैं, जिससे इस दिन का महत्व और भी बढ़ गया है। साथ ही, सावन के चौथे सोमवार में भगवान शिव का वास कैलाश पर होगा, जिससे यह दिन रुद्राभिषेक के लिए अति उत्तम माना जा रहा है। जो लोग सावन सोमवार व्रत होंगे, वे अंतिम सोमवार को उद्यापन करेंगे। जो लोग अभी तक भगवान शिव का जलाभिषेक नहीं कर पाए हैं, उनके लिए भी यह एक अच्छा अवसर है, जिससे आपको भगवान भोलेनाथ की कृपा प्राप्त हो सकती है।

5 शुभ संयोग में अंतिम सावन सोमवार

सावन पुत्रदा एकादशी : अंतिम सावन सोमवार पर सावन पुत्रदा एकादशी व्रत का पारण है और वैष्णव भक्तों का व्रत भी है। यह दिन भगवान शिव और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्ति का उत्तम अवसर है। शिव और हरि की पूजा से आपका कल्याण होगा।

प्रीति योग : सावन के अंतिम सोमवार पर प्रीति योग प्रात:काल से ही बन जाएगा, जो सुबह 07 बजकर 04 मिनट तक रहेगा। यह एक शुभ, सकारात्मक और मंगलकारी योग है, जो शुभ कार्यों के लिए अच्छा है। इसके स्वामी ग्रह बुध और अधिपति देव भगवान विष्णु हैं।

आयुष्मान योग : उस दिन सुबह में 07 बजकर 04 मिनट से आयुष्मान योग का प्रारंभ होगा, जो पूरे दिन रहेगा। आयुष्मान योग भी एक शुभ योग है। इस योग के स्वामी ग्रह चंद्रमा और अधिपति देव गुरु बृहस्पति हैं। इस योग में दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य और जीवन में सकारात्मकता की प्राप्ति होती है।

कैलाश पर शिववास : सावन के अंतिम सोमवार पर भगवान शिव का वास कैलाश पर है। किसी भी दिन यदि शिवजी का वास कैलाश पर हो तो आप रुद्राभिषेक करा सकते हैं, इससे सुख-समृद्धि, शांति, सकारात्मक ऊर्जा में बढ़ोत्तरी होती है।

हंसराज योग : इस समय देवों के गुरु बृहस्पति अपनी उच्च राशि कर्क में विराजमान हैं, जिससे हंसराज योग का निर्माण हुआ है। यह व्यक्ति की उन्नति करने वाला योग है। सावन सोमवार पर हंसराज योग तो बना ही है, उस दिन चंद्रमा धनु राशि में और सूर्य सिंह राशि में विराजमान होंगे।

अंतिम सावन सोमवार पर जलाभिषेक का मुहूर्त

सावन के अंतिम सोमवार पर आप ब्रह्म मुहूर्त से ही जलाभिषेक कर सकते हैं। उस दिन ब्रह्म मुहूर्त प्रात:काल 04:27 ए एम से 05:11 ए एम तक रहेगा। अभिजीत मुहूर्त दिन में 11:57 ए एम से लेकर दोपहर 12:49 पी एम तक रहेगा। अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त सुबह में 05:55 ए एम से 07:32 ए एम तक है, वहीं शुभ-उत्तम मुहूर्त 09:09 ए एम से 10:46 ए एम तक रहेगा। वैसे तो शिव जी के जलाभिषेक के लिए मुहूर्त की जरूरत नहीं पड़ती है, आप दिन में कभी भी जलाभिषेक कर सकते हैं।

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Sawan Shivratri 2026 Rajyog Sanyog: सावन शिवरात्रि पर एक साथ बन रहे हैं 4 राजयोग, 4 राशियों पर बरसेगी भगवान की कृपा और मिलेगा मान-सम्मान

Sawan Shivratri 2026 Rajyog Sanyog: सावन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को शिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पौराणिक काल में माता पार्वती की तपस्या से प्रसन्न हो कर इसी दिन भगवान शिव ने उन्हें अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया था। इस दिन ढेरों शिवभक्त पवित्र नदियों से कांवड़ में जल भरकर लाते हैं और भोलेनाथ का जलाभिषेक करते हैं। खास बात यह है कि इस साल शिवरात्रि पर एक साथ कई दुर्लभ संयोग बन रहे हैं। एक तो सावन शिवरात्रि का पर्व दूसरे मंगला गौरी व्रत के साथ पड़ रहा है। इसके अलावा यह दिन ज्योतिषीय दृष्टि से भी बेहद खास माना जा रहा है।

उज्जैन के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य आनंद भारद्वाज ने लोकल 18 को बताया कि इस दिन ग्रह-नक्षत्रों की विशेष स्थिति से 4 प्रभावशाली राजयोगों का निर्माण हो रहा है। इनमें हंस राजयोग, शशि आदित्य राजयोग, गजकेसरी राजयोग और बुधादित्य राजयोग शामिल हैं। इन शुभ योगों का प्रभाव सभी 12 राशियों पर देखने को मिल सकता है। लेकिन 4 राशि के जातकों के लिए यह समय विशेष फलदायी माना जा रहा है। इन राशियों को करियर में सफलता, कारोबार में लाभ, आर्थिक मजबूती और समाज में मान-सम्मान मिलने के योग बन सकते हैं। आइए जानते हैं कि वे शुभ राशियां कौन सी हैं।

इन चार राशियों को होगा लाभ

वृषभ राशि : इन शुभ योगों के बनने से वृषभ राशि के जातकों के लिए समय अनुकूल रहने वाला है। करियर में लंबे समय से अटके काम अब गति पकड़ सकते हैं। नौकरीपेशा लोगों को नई जिम्मेदारियां मिलने के साथ प्रमोशन के अवसर भी बन सकते हैं। व्यापारियों को नए ग्राहक मिलने और आर्थिक लाभ होने की संभावना है।

कर्क राशि : इस राशि के जातकों के लिए चारों राजयोगों का सबसे शुभ प्रभाव देखने को मिल सकता है। इस दौरान आत्मविश्वास में बढ़ोतरी होगी और कार्यक्षेत्र में आगे बढ़ने के नए अवसर मिल सकते हैं। नौकरीपेशा लोगों को वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग प्राप्त होगा, जिससे महत्वपूर्ण कार्य आसानी से पूरे होंगे।

तुला राशि : इस राशि के जातकों को यह राजयोग सफलता की सीढ़ी चढ़ा सकता है। इस अवधि में व्यापार से जुड़े जातकों को अच्छे लाभ के अवसर मिल सकते हैं और करियर में आगे बढ़ने के नए रास्ते खुल सकते हैं। लंबे समय से अटके प्रोजेक्ट गति पकड़ेंगे और उन्हें पूरा करने में सफलता मिल सकती है।

कुंभ राशि : शुभ राजयोग से कुंभ राशि के जातकों की किस्मत चमक सकती है। नौकरी में बदलाव या करियर की नई शुरुआत करने की योजना बना रहे लोगों के लिए यह समय अनुकूल साबित हो सकता है। कार्यक्षेत्र में नए अवसर मिलेंगे और तरक्की के रास्ते खुल सकते हैं। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।

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Sawan Shivratri Mangla gauri vrat 2026: आज सावन शिवरात्रि और मंगला गौरी व्रत पर भद्रा का साया, जानें कब से कब तक रहेगी भद्रा और पूजा कैसे करें

Sawan Shivratri Mangla gauri vrat 2026: सावन का महीना भगवान शिव की उपासना के साथ-साथ मां पार्वती का आशीष पाने के लिए भी सबसे उत्तम समय माना जाता है। इसमें सोमवार के दिन भोलेनाथ की पूजा, जलाभिषेक और उपवास किया जाता है। वहीं, इस माह के सभी मंगलवार को मंगला गौरी का व्रत भी करते हैं। इस साल सावन माह के दूसरे मंगलवार को मंगला गौरी व्रत के साथ बेहद दुर्लभ संयोग बन रहा है। सावन का दूसरा मंगला गौर व्रत इस माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को पड़ रहा है, जिससे इस दिन सावन शिवरात्रि का संयोग बन रहा है। मंगला गौरी व्रत के साथ शिवरात्रि का संयोग अत्यंत शुभ माना जा रहा है। लेकिन चिंता की बात ये है इस दिन भद्रा भी रहेगी। इसलिए आइए जानें, आज भद्रा का क्या समय है और पूजा के लिए भद्रा रहित मुहूर्त क्या होगा ?

सावन चतुर्दशी तिथि और समय

सावन कृष्ण पक्ष चतुर्दशी तिथि हिंदू पंचांग के अनुसार, 11 अगस्त को सुबह 4.55 मिनट से लेकर रात में 1.52 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि में सावन शिवरात्रि और मंगला गौरी व्रत 11 अगस्त को रखा जाएगा। सावन शिवरात्रि पर इस दिन भद्रा भी लग रही है। सावन शिवरात्रि पर पूजा और व्रत संकल्प करने के लिए सबसे उत्तम मुहूर्त ब्रह्म मुहूर्त होगा, जो सुबह 04:22 बजे से 05:05 बजे तक रहेगा। इस दिन इसके बाद भद्रा काल शुरू हो जाएगा।

कब से कब तक भद्रा का प्रभाव?

12 अगस्त के दिन चंद्रमा कर्क राशि में रहेंगे। भद्रा का पृथ्वी पर निवास चंद्रमा से देखा जाता है। जब भी चंद्र ग्रह कर्क राशि में होते हैं तो पृथ्वी पर भद्रा निवास करती है। इस दिन भद्रा का वास पृथ्वी पर रहेगा और यह सुबह 5:48 बजे सूर्योदय से लेकर दोपहर 3:22 बजे तक रहेगी। सावन शिवरात्रि, मंगला गौरी व्रत पर 9 घंटे से भी ज्यादा देर तक भद्रा रहेगी।

सावन शिवरात्रि और मंगला गौरी व्रत पर शुभ योग

इस दिन शाम 6.51 मिनट तक सिद्धि योग रहेगा। सुबह 10:09 मिनट तक पुनर्वसु नक्षत्र रहेगा, फिर पुष्य नक्षत्र रहेगा।

पूजा के उत्तम मुहूर्त

गोधूलि मुहूर्त : शाम 07:04 से 07:26 बजे तक

सायाह्न सन्ध्या : शाम 07:04 से 08:09 बजे तक

निशिता काल : रात 12:05 से 12:48 बजे तक

कैसे करें पूजा?

स्नान के बाद साफ वस्त्र धारण करें। भगवान शिव और मां पार्वती की विधिवत पूजा करें। अगर व्रत रखना है तो हाथ में पवित्र जल, फूल और अक्षत लेकर व्रत रखने का संकल्प लें। फिर संध्या के समय घर के मंदिर में गोधूलि बेला में दीपक जलाएं। फिर शिव मंदिर या घर में भगवान शिव का अभिषेक करें। शिव, गौरी सहित शिव परिवार की विधिवत पूजा करें। अब सावन शिवरात्रि और मंगला गौरी व्रत की कथा सुनें। फिर आरती करें। अंत में ॐ नमः शिवाय का मंत्र-जाप करें। अंत में क्षमा प्रार्थना भी करें।

आज ये उपाय होंगे शुभ फलदायी

सावन शिवरात्रि पर 11 बेलपत्र पर सफेद चंदन से ॐ नमः शिवाय लिखें और अपनी मनोकामना कहें। फिर शिवलिंग पर अर्पित कर दें।

मंगला गौरी व्रत पर देवी पार्वती को प्रसन्न करने से लिए शृंगार का सामान चढ़ाएं। शिव और गौरी चालीसा का पाठ करें।

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Sawan Shivratri 2026: सावन की शिवरात्रि पर रहेगा भद्रा का साया, जानें तारीख और क्या भद्रा में कर सकते हैं शिव-शंभु का जलाभिषेक

Sawan Shivratri 2026: इस समय भगवान शिव का अति प्रिय श्रावण मास चल रहा है। यूं तो, सावन के सभी दिन भगवान शिव का जलाभिषेक करने पर पुण्य मिलता है। लेकिन कुछ खास दिन ऐसे हैं, जब भगवान शिव की विशेष पूजा, उपवास और जलाभिषेक करने पर भोलेनाथ प्रसन्न होते हैं। शिवरात्रि का दिन भी इनमें से एक है। वैसे तो, हिंदू कैलेंडर के हर माह में शिवरात्रि मनाई जाती है, लेकिन सावन में आने वाली शिवरात्रि तिथि का विशेष महत्व है। शिवरात्रि का पर्व श्रावन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को किया जाता है।

इस साल यह पर्व 11 अगस्त को मनाया जाएगा। इस दिन सुबह से ही शिवालयों में शिव भक्तों की धूम रहेगी, कांवड़िये महादेव का जलाभिषेक करेंगे, कुछ लोग उपवास और विशेष पूजा या रुद्राभिषक का भी आयोजन करेंगे। पंचांग के अनुसार, माना जा रहा है कि इस साल शिवरात्रि पर भद्र लग रही है। ऐसे में श्रद्धालुओं के मन में सवाल उठ रहा है कि भद्रा काल में देवाधिदेव का जलाभिषेक किया जाएगा या नहीं? सावन शिवरात्रि की तिथि, शुभ मुहूर्त, जलाभिषेक का समय, भद्रा काल और पूजा विधि से जुड़ी संपूर्ण जानकारी नीचे दी गई है:

सावन शिवरात्रि 2026 तिथि

व्रत एवं पूजन तिथि : मंगलवार, 11 अगस्त 2026

चतुर्दशी तिथि प्रारंभ : 11 अगस्त 2026, प्रातः 04:43 AM

चतुर्दशी तिथि समाप्त : 12 अगस्त 2026, रात्रि 01:51 AM

भद्रा काल का समय

भद्रा का समय : 11 अगस्त 2026, प्रातः 04:56 AM से दोपहर 03:24 PM तक।

मान्यता : शास्त्रों के अनुसार भद्राकाल में शुभ या मांगलिक कार्य वर्जित होते हैं, लेकिन भगवान शिव की पूजा, मंत्र जाप और भक्ति में भद्रा का दोष नहीं लगता। इसलिए भक्त पूरे दिन श्रद्धापूर्वक जलाभिषेक और पूजा-अर्चना कर सकते हैं।

जलाभिषेक का शुभ मुहूर्त

आप पूरे दिन चतुर्दशी तिथि के दौरान जलाभिषेक कर सकते हैं। विशेष फलदाई मुहूर्त इस प्रकार हैं:

ब्रह्म मुहूर्त : प्रातः 05:23 AM से 06:00 AM

अभिजीत मुहूर्त : दोपहर 12:06 PM से 12:58 PM

गोधूलि मुहूर्त : सायं 09:13 PM से 09:32 PM

निशिता काल (मुख्य मध्यरात्रि पूजा): 11-12 अगस्त की रात्रि 12:05 AM से 12:48 AM तक

चार प्रहर की पूजा का समय

प्रथम प्रहर : सायं 07:04 PM से रात्रि 09:45 PM

द्वितीय प्रहर : रात्रि 09:45 PM से मध्यरात्रि 12:26 AM

तृतीय प्रहर : मध्यरात्रि 12:26 AM से तड़के 03:07 AM (12 अगस्त)

चतुर्थ प्रहर : तड़के 03:07 AM से प्रातः 05:49 AM (12 अगस्त)

शिव पूजा विधि

  • सावन शिवरात्रि के दिन प्रातः स्नान के बाद स्वच्छ कपड़े पहनें और व्रत का संकल्प लें।
  • मंदिर या घर पर शिवलिंग पर गंगाजल व शुद्ध जल अर्पित करें। इसके बाद दूध, दही, घी, शहद और शक्कर (पंचामृत) से अभिषेक करें।
  • शिवलिंग पर बेलपत्र (अखंडित), धतूरा, भांग, शमी पत्र, सफेद आंकड़े के फूल, चंदन और भस्म चढ़ाएं।
  • पूजा करते समय ॐ नमः शिवाय” या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करते रहें।
  • अंत में धूप-दीप जलाकर शिव जी की आरती करें और सात्विक भोग या फल अर्पित करें।
  • शिवलिंग पर तुलसी के पत्ते, सिंदूर, रोली, हल्दी और केतकी के फूल न चढ़ाएं।

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Sawan Bel Patra Ke Upay: सावन के महीने में बेल पत्र के ये उपाय करने से मिल जाएगा सभी तीर्थों का पुण्य फल, जानें इनके बारे में

Sawan Bel Patra Ke Upay: जिस तरह सावन का महीना भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है, उसी तरह उन्हें बिल्प पत्र यानी बेलपत्र भी प्रिय हैं। भगवान शिव की पूजा में बेल पत्र का विशेष स्थान है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव की पूजा बेलपत्र के बिना अधूरी मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बेल पत्र की जड़ में दुनिया में जितने सभी प्रसिद्ध तीर्थ निवास करते हैं। इसलिए इसकी जड़ के पास दीपक जलाने, दीपमाला दान करने से कई गुना फल मिलता है।

कहा जाता है कि जो व्यक्ति धूप-दीप, फूलों से बिल्ववृक्ष के मूल का पूजन करता है, वह शिवलोक को प्राप्त करता है और उसके सन्तान और सुख दोनों में वृद्धि होती है। ऐसे व्यक्ति को संतान से सुख मिलता है। शिवपुराण सावन के अनुसार, सावन के पवित्र महीने में बिल्व पत्र के पेड़ के नीचे दीपक जलाने का विशेष महत्व और अनेक लाभ बताए गए हैं। इसे प्रदोष काल या रात में जलाना अत्यंत फलदायी माना जाता है। सावन में बेलपत्र के पेड़ के नीचे दीया जलाने के प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं:

भगवान शिव का आशीर्वाद : शिवपुराण के अनुसार, बेलपत्र के वृक्ष की जड़ में स्वयं महादेव का वास होता है। सावन में इसके नीचे दीपक जलाने से भगवान भोलेनाथ अत्यंत प्रसन्न होते हैं और साधक को सुख-शांति तथा आरोग्य का वरदान देते हैं।

मां लक्ष्मी का वास और धन-धान्य की प्राप्ति : धार्मिक कथाओं के अनुसार, बेलपत्र के वृक्ष में माता लक्ष्मी का भी निवास माना गया है। मान्यता है कि शाम या रात के समय बेलपत्र के नीचे घी का दीपक जलाने से घर से दरिद्रता दूर होती है और आर्थिक संकटों से मुक्ति मिलती है।

पापों का नाश : माना जाता है कि बेलपत्र की जड़ में समस्त तीर्थों का वास होता है। इसके नीचे दीपदान करने से व्यक्ति के ज्ञात-अज्ञात पाप मिट जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

सकारात्मक ऊर्जा और वास्तु दोष से मुक्ति : घर में या आसपास लगे बेलपत्र के नीचे दीया जलाने से घर की नकारात्मक ऊर्जा खत्म होती है और वातावरण शुद्ध एवं सकारात्मक बनता है।

पितृ दोष और कष्टों से राहत : बेलपत्र के पेड़ के पास शाम को दिया जलाने से ग्रह-दोष दूर होते हैं और पितरों का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है।

दीपक जलाने का सही तरीका

दीपक के लिए गाय के शुद्ध घी या तिल के तेल का उपयोग करें।

दीपक मुख्य रूप से प्रदोष काल (सूर्यास्त के आसपास का समय) में बेलपत्र की जड़ के पास जलाएं।

दीपक जलाते समय भगवान शिव के मंत्र “ॐ नमः शिवाय” का मन में जाप करें।

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24 पोते बने 95 वर्षीय दादी सोनदेवी के श्रवण कुमार, हरिद्वार में कराया गंगा स्नान

Soni devi kanwar Meerut

Yogi Government Kanwar Arrangements: सावन की कांवड़ यात्रा में जहां डीजे की धुन, भव्य कांवड़ और शिवभक्तों का उत्साह हर किसी को आकर्षित कर रहा है, वहीं सिवाया टोल प्लाजा पर सोमवार को एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसने लोगों की आंखें नम कर दीं। 95 वर्षीय सोनदेवी पालकी में हाथ जोड़कर भोलेनाथ का जयघोष कर रही थीं और उनके 24 पोते बारी-बारी से पालकी को अपने कंधों पर उठाकर आगे बढ़ रहे थे। यह दृश्य देखते ही राहगीरों के कदम थम गए। जिसने भी इस परिवार का समर्पण देखा, उसने इसे आज के दौर की सबसे खूबसूरत तस्वीर बताया। 

दादी की अधूरी इच्छा को बनाया अपना संकल्प

बुलंदशहर के हसनपुर जागीर निवासी सोनदेवी की वर्षों से इच्छा थी कि वह हरिद्वार जाकर मां गंगा में स्नान करें और कांवड़ यात्रा का हिस्सा बनें। उम्र के इस पड़ाव पर उनके लिए यह यात्रा संभव नहीं थी। ऐसे में परिवार के युवाओं ने उनकी इच्छा को अपना संकल्प बना लिया। 'महाकाल ग्रुप' के नाम से यात्रा कर रहे 24 पोतों ने दादी को हरिद्वार ले जाकर गंगास्नान कराया और अब पालकी में बैठाकर गांव तक लेकर जा रहे हैं। पोतों का कहना है कि योगी सरकार ने कांवड़ यात्रा में जिस तरह के इंतजाम किए हैं, उससे किसी को परेशानी का सामना नहीं करना पड़ रहा है।  

हर कुछ दूरी पर बदल जाते हैं कंधे

महाकाल ग्रुप के सदस्यों ने बताया कि टोली में शामिल सभी 24 युवक रिश्ते में सोनदेवी के पोते हैं। यात्रा के दौरान कोई एक व्यक्ति लगातार पालकी नहीं उठाता। कुछ दूरी तय करने के बाद दूसरे पोते कंधा संभाल लेते हैं, ताकि दादी को बिना किसी परेशानी के पूरी यात्रा कराई जा सके। परिवार का कहना है कि दादी की खुशी ही उनके लिए सबसे बड़ा आशीर्वाद है।

सिवाया टोल पर लगा लोगों का जमावड़ा

जैसे ही कांवड़ यात्रा सिवाया टोल प्लाजा पहुंची, पालकी में बैठी सोनदेवी को देखने के लिए लोगों की भीड़ लग गई। कोई उनके चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लेने पहुंचा तो किसी ने इस भावुक पल को मोबाइल कैमरे में कैद कर लिया। दादी पूरे रास्ते हाथ जोड़कर 'बोल बम' और 'हर-हर महादेव' के जयघोष करती रहीं, जबकि पोते पूरे उत्साह के साथ उनकी सेवा में जुटे रहे।

आस्था से बढ़कर बना संस्कारों का संदेश

कांवड़ यात्रा में यह दृश्य केवल धार्मिक आस्था का नहीं, बल्कि भारतीय परिवारों के संस्कार और बुजुर्गों के प्रति सम्मान का भी प्रतीक बन गया। जहां एक ओर युवा कांवड़िए भगवान शिव के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त कर रहे हैं, वहीं सोनदेवी के 24 पोतों ने यह साबित कर दिया कि माता-पिता और बुजुर्गों की सेवा ही सबसे बड़ी भक्ति है। कांवड़ मार्ग पर यह अनोखा कारवां लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र होने के साथ-साथ प्रेरणा का संदेश भी देता नजर आया।

Kanwar Yatra 2026: कांवड़ यात्रा के दौरान बंद रहेंगे ‘नमो भारत’ के ये 17 स्टेशन, इन राज्यों में स्कूल भी बंद, जानिए रूट समेत सभी बड़ी बातें

Kanwar Yatra 2026: नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (NCRTC) ने बताया है कि कांवड़ यात्रा के मद्देनजर गाजियाबाद और मोदीनगर के बीच 17 ‘नमो भारत’ स्टेशनों के एंट्री और एग्जिट गेट चार से 12 अगस्त तक बंद रहेंगे। इन स्टेशनों पर पार्किंग की सुविधा भी सीमित रहेगी। NCRTC ने बताया कि वार्षिक कांवड़ यात्रा के दौरान सुरक्षा और ट्रैफिक मैनेजमेंट को सुगम बनाने के लिए प्रशासनिक निर्देशों के तहत ये अस्थायी प्रतिबंध लगाए हैं।

निगम के अनुसार, प्रभावित स्टेशनों में मोदीनगर, मेरठ नॉर्थ, एमईएस कॉलोनी, बेगमपुल, भैंसाली, मेरठ सेंट्रल, ब्रह्मपुरी, शताब्दी नगर, रिठानी, परतापुर, मेरठ साउथ, मोदीनगर नॉर्थ, मोदीनगर साउथ, मुरादनगर, दुहाई, गुलधर और गाजियाबाद शामिल हैं। NCRTC ने बताया कि अधिकतर स्टेशनों पर इस अवधि के दौरान गेट संख्या-2 बंद रहेगा। बयान के मुताबिक, बेगमपुल स्टेशन पर गेट संख्या-2 और 3, जबकि दुहाई स्टेशन पर गेट संख्या-3 और 4 बंद रहेंगे। गाजियाबाद स्टेशन पर गेट संख्या-3 और 5 बंद रहेंगे।

पार्किंग भी बंद

इन स्टेशनों के प्रभावित हिस्से की पार्किंग सुविधा भी उपलब्ध नहीं रहेगी। एनसीआरटीसी ने यात्रियों को नमो भारत सेवाओं का उपयोग करने के लिए संबंधित स्टेशनों पर उपलब्ध वैकल्पिक प्रवेश और निकास द्वारों का इस्तेमाल करने की सलाह दी है। निगम ने यात्रियों को हुई असुविधा के लिए खेद भी जताया।

निगम ने कहा कि सरायकाले खां-मोदीनगर कॉरिडोर पर नमो भारत ट्रेन सेवाएं सामान्य रूप से जारी रहेंगी। बयान के मुताबिक, 14 अगस्त तक प्रतिदिन सुबह छह बजे से रात 10 बजे तक ट्रेनें आठ मिनट के अंतराल पर चलेंगी। इस साल कांवड़ यात्रा पवित्र श्रावण मास की शुरुआत के साथ 30 जुलाई से शुरू हुई है और 11 अगस्त को समाप्त होगी।

स्कूल-कॉलेज 12 अगस्त तक बंद रहेंगे

श्रावण मास की प्रसिद्ध कांवड़ यात्रा में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए मेरठ और गाजियाबाद जिलों में शिक्षण संस्थान 12 अगस्त तक बंद रहेंगे। मेरठ में जिलाधिकारी डॉ. वी के सिंह के आदेश के अनुसार यह अवकाश 12 अगस्त तक प्रभावी रहेगा। इसके अनुसार सोमवार से सभी स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय और तकनीकी संस्थान बंद कर दिए गए।

प्रशासन ने कहा कि यह फैसला छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और ट्रैफिक मैनेजमेंट को सुगम बनाने के लिए लिया गया है, क्योंकि श्रावण शिवरात्रि के दौरान बड़ी संख्या में कांवड़िए जिले से गुजरते हैं। मेरठ प्रशासन के आदेश के अनुसार, कक्षा एक से 12 तक के सभी शिक्षण संस्थान, जिनमें बेसिक शिक्षा परिषद, उत्तर प्रदेश बोर्ड, सीबीएसई, आईसीएसई, मदरसा बोर्ड और अन्य मान्यता प्राप्त बोर्ड से जुड़े संस्थान शामिल हैं, 12 अगस्त तक बंद रहेंगे।

इसके अनुसार सरकारी और निजी कॉलेज, विश्वविद्यालयों और तकनीकी संस्थानों को भी इस दौरान क्लास बंद रखने का निर्देश दिया गया है। गाजियाबाद प्रशासन ने भी नर्सरी से कक्षा 12 तक के सभी स्कूल के साथ-साथ कॉलेज, विश्वविद्यालयों और तकनीकी संस्थानों को चार अगस्त से 12 अगस्त तक बंद रखने का आदेश दिया।

इस बीच, बागपत प्रशासन ने कांवड़ यात्रा को देखते हुए तीन अगस्त से 12 अगस्त तक कक्षा एक से 12 तक के सभी सरकारी और निजी विद्यालयों को बंद करने का आदेश दिया है। प्रशासन के अनुसार, हरिद्वार से गंगाजल लेकर लाखों कांवड़िये अपनी मंजिल की ओर जाते हुए बागपत से गुज़र रहे हैं। जबकि बड़ी संख्या में श्रद्धालु ‘जलाभिषेक’ के लिए जिले के प्रमुख शिवमंदिरों में भी जा रहे हैं, जिससे कांवड़ रूट और आस-पास के इलाकों में भारी ट्रैफिक हो रहा है।

कब शुरू हुई कांवड़ यात्रा?

भगवान शिव के पवित्र माह सावन के आगमन के साथ ही कांवड़ यात्रा 2026 की शुरुआत 30 जुलाई से हो चुकी है। यह यात्रा 11 अगस्त 2026 को सावन शिवरात्रि के दिन अपने चरम पर पहुंचेगी। इसी दिन श्रद्धालु शिव मंदिरों में गंगाजल अर्पित कर भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करेंगे। इसी के साथ मुख्य धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होंगे।

कहां से लाया जाता है गंगाजल?

कांवड़ यात्रा के दौरान उत्तराखंड के हरिद्वार, गौमुख और गंगोत्री गंगाजल लेने के प्रमुख केंद्र होते हैं। यहां से भोलेनाथ के श्रद्धालु पवित्र गंगाजल लेकर अपने मंजिल की ओर रवाना होते हैं। यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु ऋषिकेश स्थित नीलकंठ महादेव मंदिर, झारखंड के देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम और वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर सहित कई प्रमुख शिवधामों में भी दर्शन-पूजन करते हैं।

ट्रैफिक व्यवस्था में बड़े बदलाव

यात्रा के दौरान लाखों श्रद्धालुओं की आवाजाही को देखते हुए विभिन्न राज्यों की सरकारों ने व्यापक ट्रैफिक में बदलाव किया है। दिल्ली-हरिद्वार हाईवे और गंगा नहर मार्ग सहित कई प्रमुख रास्तों पर जुलाई के अंतिम सप्ताह से भारी वाहनों की एंट्री पर प्रतिबंध लगाया गया है। यात्रा के चरम दिनों में कई रूट केवल कांवड़ियों के लिए आरक्षित रहेंगे। जबकि अन्य वाहनों के लिए वैकल्पिक रूट तय किए गए हैं।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम

कांवड़ यात्रा को शांतिपूर्ण और सुरक्षित बनाने के लिए पुलिस और प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की है। पूरे यात्रा रूट को अलग-अलग सुरक्षा जोन में बांटा गया है। हजारों CCTV कैमरों, ड्रोन निगरानी, अतिरिक्त पुलिस बल और विशेष गश्ती दलों की तैनाती की गई है।

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श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए जगह-जगह अस्थायी मेडिकल कैंप, एंबुलेंस और सहायता केंद्र भी बनाए गए हैं। इसके अलावा, बिजली से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए कांवड़ और डीजे सिस्टम की ऊंचाई को लेकर भी नए नियम लागू किए गए हैं। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से निर्धारित नियमों का पालन करते हुए सुरक्षित और शांतिपूर्ण ढंग से यात्रा करने की अपील की है।

Sawan First Somwar 2026: सच्ची श्रद्धा के साथ आज दिन में इस समय करें भगवान शिव का जलाभिषेक, जानें विधि और जरूरी नियम

Sawan First Somwar 2026: भगवान शिव के अनेक नामों में से एक नाम ‘भोलेनाथ’ भी है, यानी महादेव अपने भक्त की सच्ची श्रद्धा और संपूर्ण समर्पण चाहते हैं। जो भक्त महादेव की सच्च दिल से आराधना करते हैं, शिव सदा उनके सहायक रहते हैं। भगवान शिव का प्रिय समय यानी सावन का महीना शुरू हो चुका है और आज इस माह का पहला सोमवार है। इस दिन बहुत से भक्त उपवास करते हैं, शिवलिंग का जलाभिषेक करते हैं और पूजा-अर्चना करते हैं।

माना जाता है कि सावन के सोमवार को भगवान शिव की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में खुशहाली आती है। आज के दिन छोटे-बड़े सभी शिवालयों में सुबह से ही भक्तों की भीड़ लग जाती है। आज श्रद्धालु भांग, बेलपत्र, धतूरा और जल से शिवलिंग का अभिषेक करते हैं और सोमवार का उपवास करते हैं। अक्सर भक्त सावन के सोमवार को महादेव के जलाभिषेक के सही समय को लेकर दुविधा में रहते हैं। ऐसे में आइए जानें भगवान का जलाभिषेक किस समय करना चाहिए।

शिवलिंग जलाभिषेक का समय

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सुबह का समय पूजा के लिए सबसे अचछा माना जाता है। इसिलए भगवान का जलाभिषेक सूर्योदय के समय करने की कोशिश करनी चाहिए। लेकिन किसी वजह से सुबह मंदिर नहीं जा पाते ह तो दिन में भी श्रद्धा से पूजा कर सकते है। भगवान शिव के लिए सबसे जरूरी सच्ची श्रद्धा मानी गई है।

पूजा विधि

सुबह स्नानादि के बाद साफ कपड़े पहनें और भगवान शिव का ध्यान करें। शिवलिंग पर साफ जल जढ़ाएं। अगर घर में गंगाजल है तो उसकी कुछ बूंद भी मिला सकते हैं। इसके बाद दूध, बेलपत्र, धतूरा, सफेद फूल और चंदन अर्पित करें। पूजा के दौरान ‘ॐ नमः शिवायʼ मंत्र का जाप करें। आखिर में आरती करें और भगवान शिव से परिवार की खुशहाली की प्राथना करें।

पूजा के जरूरी नियम

जल्दबाजी में पूजा न करें, पूजा करते समय मन शांत रखें। शिवलंग पर ताजे बेलपत्र और ताजे फूल ही चढ़ाएं। अगर व्रत रख रहे हैं तो अपनी सेहत का भी ध्यान रखें। मंदिर में साफ-सफाई का ध्यान रखें।

शिव पूजा में ध्यान रखें कि शिवलंग पर तुलसी के पत्ते और केतकी का फूल नहीं चढ़ाया जाता। टूटे हुए बेलपत्र, बासी फूल या खराब फल भी भगवान को अर्पित नहीं करने चाहिए। पूजा के दौरान गुस्सा या किसी का अपमान करने से भी बचना चाहिए।

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Omkareshwar Darshan 2026 : ओंकारेश्वर में सावन में बदल गई दर्शन व्यवस्था, श्रद्धालु जान लें मंदिर का नया वन-वे रूट

omkarshwar tirth

ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग में सावन के महीने में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने को देखते हुए जिला प्रशासन ने दर्शन और आवागमन की व्यवस्था में बदलाव किया है। श्रद्धालुओं की भीड़ को नियंत्रित करने और दर्शन व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए मंदिर क्षेत्र में एकांगी मार्ग यानी वन-वे सिस्टम लागू किया गया है। अगर आप सावन में ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने जा रहे हैं, तो मंदिर पहुंचने से पहले नई व्यवस्था और मार्ग की जानकारी जरूर जान लें। 

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omkarshwar map

सामान्य श्रद्धालु

पुराने बस स्टैंड से रूट

निर्वाणी अखाड़ा जूता-चप्पल स्टैंड → जेपी चौक → पुराना पुल → रैम्प → गर्भगृह → झूला पुल → स्काईब्रिज → निर्वाणी अखाड़ा।

न्यू बस स्टैंड (दांडी तिराहा) की ओर से रूट

गजानन आश्रम → ब्रह्मपुरी जूता-चप्पल स्टैंड → स्काईब्रिज → जेपी चौक → पुराना पुल → रैम्प → गर्भगृह → झूला पुल → ब्रह्मपुरी जूता-चप्पल स्टैंड -> गजानन आश्रम -> प्रसादालय पार्किंग।

प्रोटोकॉल एवं शीघ्र दर्शन श्रद्धालु

प्रोटोकॉल एवं शीघ्र दर्शन टिकटधारी श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए निर्वाणी अखाड़ा एवं ब्रह्मपुरी पार्किंग में रिस्टबैंड काउंटर स्थापित किए गए हैं, जहां जूता-चप्पल स्टैंड की भी व्यवस्था है।

पुराने बस स्टैंड से रूट 

निर्वाणी अखाड़ा सेंटर → स्काईब्रिज → झूला पुल → गर्भगृह → झूला पुल → स्काईब्रिज → निर्वाणी अखाड़ा।

न्यू बस स्टैंड से रूट

प्रसादालय पार्किंग  -> गजानन आश्रम → ब्रह्मपुरी पार्किंग सेंटर → झूला पुल → गर्भगृह → झूला पुल → ब्रह्मपुरी पार्किंग सेंटर।

जिला प्रशासन ने सभी श्रद्धालुओं से निर्धारित मार्ग व्यवस्था का पालन करते हुए प्रशासन का सहयोग करने की अपील की है।

क्या है ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग का महत्व

मध्यप्रदेश के खंडवा जिले में पवित्र नर्मदा नदी के तट पर स्थित ओंकारेश्वर, भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। यह स्थान न केवल अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि यहाँ के ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग से जुड़ी एक ऐसी अलौकिक मान्यता भी है, जो भक्तों को विस्मित कर देती है। कहा जाता है कि इस पावन धाम में हर रात स्वयं भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती शयन के लिए आते हैं, और सोने से पहले वे चौपड़ का खेल भी खेलते हैं। यह मान्यता सदियों से चली आ रही है और लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बनी हुई है।

 

रात्रि शयन और चौपड़ की दिव्य लीला

ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग से जुड़ी सबसे अद्भुत और रहस्यमयी मान्यता यह है कि भगवान शिव तीनों लोकों का भ्रमण करके प्रतिदिन रात को इसी मंदिर में शयन करने आते हैं। उनके साथ माता पार्वती भी होती हैं। भक्तों का दृढ़ विश्वास है कि रात्रि के समय मंदिर के पट बंद होने के बाद, भोलेनाथ और माता पार्वती यहाँ चौसर (चौपड़) का खेल खेलते हैं।

 

इस मान्यता के चलते, मंदिर में प्रतिदिन रात्रि में पंडित के अलावा किसी को शामिल होने की अनुमति नहीं है। शयन आरती के बाद, गर्भगृह में ज्योतिर्लिंग के सामने चौपड़-पांसे की बिसात सजाई जाती है। सुबह जब मंदिर के पट खुलते हैं, तो कई बार चौसर और उसके पासे कुछ इस तरह से बिखरे मिलते हैं, जैसे रात्रि के समय उन्हें किसी ने खेला हो। यह दृश्य भक्तों के विश्वास को और भी पुख्ता करता है। यह एक ऐसा रहस्य है जिसे विज्ञान भी नहीं सुलझा पाया है, और यह सिर्फ़ श्रद्धा और आस्था का विषय है।

 

ओंकारेश्वर और ममलेश्वर: एक ही ज्योति का दो रूप

ओंकारेश्वर द्वीप नर्मदा नदी के मध्य में 'ॐ' के आकार में स्थित है, और यहीं पर ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग विराजमान है। नर्मदा के दक्षिणी तट पर ममलेश्वर मंदिर स्थित है, जिसे प्राचीन काल में अमरेश्वर के नाम से जाना जाता था। पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान शिव ने अपने ओंकारेश्वर नामक लिंग के दो भाग किए थे, जिनमें से एक ओंकारेश्वर और दूसरा ममलेश्वर कहलाया। दोनों शिवलिंगों का स्थान भले ही अलग हो, लेकिन उनकी सत्ता और स्वरूप एक ही माना जाता है। शिवपुराण में इन दोनों ज्योतिर्लिंगों की महिमा का विस्तार से वर्णन किया गया है।

 

इस स्थान पर ध्यान और पूजा करने से मन को शांति और आध्यात्मिक बल मिलता है। यह माना जाता है कि ओंकारेश्वर में नर्मदा स्नान और ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन के बिना सभी तीर्थ यात्राएं अधूरी मानी जाती हैं। यह मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि एक जीवंत आस्था का प्रतीक है, जहाँ लाखों भक्त दूर-दूर से इस चमत्कारिक ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने आते हैं, यह विश्वास लेकर कि यहाँ आने से उनके सभी पाप धुल जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

चलो बुलावा आया है! सावन में ऐसे बनाएं 12 ज्योतिर्लिंग दर्शन का परफेक्ट प्लान

सावन का पवित्र महीना भगवान शिव की भक्ति और आस्था के लिए खास माना जाता है। इस महीने में देशभर के 12 ज्योतिर्लिंगों में दर्शन के लिए भक्तों की भारी भीड़ होती है। हर ज्योतिर्लिंग की अपनी अलग महिमा और धार्मिक महत्व होता है, जहां सावन में जलाभिषेक और पूजा-अर्चना का विशेष महत्व होता है। ऐसे ही है ये ज्योतिर्लिंग जहां सावन में भक्तों की धूम मची होती है:

Somnath Jyotirlinga (सोमनाथ ज्योतिर्लिंग) – गुजरात

Somnath Temple:हवा में तैरता था शिवलिंग और 8 करोड़ साल पुराना है मंदिर, क्या है सोमनाथ मंदिर का रहस्य? - Somnath Temple Facts A Jyotirlinga Full Of Miracles And Mysteries Somnath Temple -

सावन में सोमनाथ मंदिर में सुबह से ही भक्तों की लाइन लग जाती है। यहां रुद्राभिषेक, शिव आरती और मंत्र जाप के साथ सावन सोमवार का पर्व धूमधाम से मनाया जाता है।

Mahakaleshwar Jyotirlinga (महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग) – उज्जैन, मध्य प्रदेश

Somnath Temple Shivling Images HD | First Jyotirlinga Wallpapers

सावन में बाबा महाकाल की भस्म आरती और श्रृंगार दर्शन भक्त करते हैं। हर सोमवार को भगवान महाकाल की सवारी निकाली जाती है।

Kedarnath Jyotirlinga (केदारनाथ ज्योतिर्लिंग) – उत्तराखंड

केदारनाथ ज्योतिर्लिंग मंदिर, रुद्रप्रयाग (उत्तराखंड) | दर्शन जानकारी | Reviving Cultures

सावन में केदारनाथ धाम में शिव भक्त हर-हर महादेव के जयकारों के साथ पूजा करते हैं। मंदिर में अभिषेक और धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। हिमालय की गोद में बसे इस पवित्र धाम में सावन में ऊर्जा और भक्ति का माहौल देखने को मिलता है।

Kashi Vishwanath Jyotirlinga (काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग) – वाराणसी, उत्तर प्रदेश

काशी विश्वनाथ, केदारनाथ और बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग | भारत के 12 ज्योतिर्लिंग: शिवभक्तों के लिए पवित्र यात्रा – Sadhana Shop

सावन में काशी विश्वनाथ मंदिर में कांवड़ियों और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रहती है। भक्त गंगाजल से बाबा विश्वनाथ का जलाभिषेक करते हैं। सावन सोमवार के दिन यहां आरती और पूजा में शामिल होने के लिए देशभर से भक्त पहुंचते हैं।

Trimbakeshwar Jyotirlinga (त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग) – नासिक, महाराष्ट्र

काशी विश्वनाथ मंदिर 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है - A Great Hindu Temple kashi vishvanath temple-Varanasi

सावन में यहां रुद्र पूजा, अभिषेक और मंत्रों का जाप किया जाता है। भक्त भगवान शिव से सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। गोदावरी नदी के उद्गम स्थल के कारण सावन में इस धाम का महत्व और भी बढ़ जाता है।

Baidyanath Jyotirlinga (बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग) – देवघर, झारखंड

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सावन में बैद्यनाथ धाम में कांवड़ यात्रा की धूम रहती है। भक्त दूर-दूर से गंगाजल लाकर बाबा का जलाभिषेक करते हैं। सावन के पूरे महीने मंदिर परिसर में शिव भक्तों की आस्था और भक्ति का अनोखा रूप दिखाई देता है।

Rameshwaram Jyotirlinga (रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग) – तमिलनाडु

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सावन में रामेश्वरम मंदिर में विशेष पूजा और अभिषेक होते हैं। भक्त पवित्र कुंडों में स्नान कर शिव आराधना करते हैं। समुद्र किनारे स्थित यह ज्योतिर्लिंग सावन में धार्मिक आस्था और शांति का खास केंद्र बन जाता है।

Nageshwar Jyotirlinga (नागेश्वर ज्योतिर्लिंग) – गुजरात

नागेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर - स्थान, वास्तुकला, तस्वीरें

सावन में मंदिर में रुद्राभिषेक और महामृत्युंजय मंत्र का जाप किया जाता है। भक्त भगवान शिव जी से आशीर्वाद लेते है और प्रार्थना करते हैं। सावन में यहां भक्तों की भीड़ और शिव भक्ति की धूम देखने लायक होता है।

Bhimashankar Jyotirlinga (भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग) – महाराष्ट्र

Gallery - Jyotirlinga Bhimashankar

सावन में यहां शिव भक्तों की लंबी लाइन लगती हैं। पूजा, आरती और भक्ति कार्यक्रम किए जाते हैं। हरियाली से घिरे इस धाम में सावन के दौरान श्रद्धालु शिव भक्ति में नजर आते हैं।

Grishneshwar Jyotirlinga (घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग) – महाराष्ट्र

घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर, संभाजीनगर (Maharashtra) | दर्शन जानकारी | Reviving Cultures

सावन के महीने में मंदिर को सजाया जाता है और भक्त जलाभिषेक व पूजा करके भगवान शिव का आशीर्वाद लेते हैं। सावन सोमवार के दिन यहां दर्शन और पूजा का महत्व और भी बढ़ जाता है।

Omkareshwar Jyotirlinga (ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग) – मध्य प्रदेश

सावन ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग विशेष! उत्तम स्वास्थ्य, नज़र दोष और नकारात्मक ऊर्जाओं से रक्षा के लिए भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करें।

सावन में नर्मदा नदी के किनारे स्थित ओंकारेश्वर में विशेष आरती और धार्मिक आयोजन होते हैं। भक्त नर्मदा जल से शिवलिंग का अभिषेक करते हैं। नर्मदा तट पर होने वाली शिव आरती भक्तों को आध्यात्म की अनुभूति देती है।

Mallikarjuna Jyotirlinga (मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग) – आंध्र प्रदेश

ऋग्वेद में आया सोमनाथ मंदिर का जिक्र, चंद्रमा से सीधा कनेक्शन; जानें कैसे बना ज्योतिर्लिंग

सावन में मंदिर में विशेष श्रृंगार, पूजा और अभिषेक किए जाते हैं। भक्त शिव-पार्वती की आराधना कर मनोकामनाएं मांगते हैं। सावन के दौरान यह धाम भगवान शिव और माता पार्वती की भक्ति का प्रमुख केंद्र बन जाता है।