अब यूपी में गूंजेगा बाबा का नाम! कैंची धाम के बाद अब जन्मभूमि से समाधि तक बदलेगा पूरा नक्शा

नीम करौली बाबा को लेकर लोगों की बढ़ती दिलचस्पी भी देखने को मिल रही है और उनके जीवन पर आधारित फिल्म ‘हनुमान अंश’ की रिलीज के बाद उनका नाम एक बार फिर चर्चा में आया है। खबरों के मुताबिक, करीब 2 करोड़ रुपये के बजट में बनी इस फिल्म ने भी बाबा के जीवन और उनकी आध्यात्मिक विरासत से जुड़े विषय को लोगों के बीच पहुंचाया है।

नीम करौली बाबा का जन्म उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद में हुआ था और उन्होंने अपने जीवन का काफी समय इसी क्षेत्र में साधना और तपस्या करते हुए बिताया। बाबा की समाधि भी उत्तर प्रदेश में ही स्थित है, इसलिए उनके भक्तों के लिए राज्य में मौजूद ये जगहें खास महत्व रखती हैं। अब उत्तर प्रदेश सरकार इन स्थानों को धार्मिक पर्यटन के लिहाज से विकसित करने की योजना बना रही है। फिरोजाबाद स्थित उनकी जन्मस्थली को एक बड़े धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की तैयारी है।

जन्म स्थान पर बनेगा भव्य कॉरिडोर

फिरोजाबाद में नीम करौली बाबा की जन्मस्थली को बड़े धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है। इस परियोजना के लिए करीब 87.5 बीघा जमीन तय की गई है। यहां भव्य प्रवेश द्वार, डिजिटल म्यूजियम और इंटरप्रिटेशन सेंटर बनाया जाएगा, जहां लोग बाबा के जीवन और उनकी आध्यात्मिक यात्रा से जुड़ी जानकारी हासिल कर सकेंगे। इसके अलावा मीटिंग हॉल, मल्टी लेवल पार्किंग, कम्युनिटी किचन, फूड कोर्ट, मेडिटेशन सेंटर और वेलनेस सेंटर जैसी सुविधाएं भी प्रस्तावित हैं।

जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया जारी

इस प्रोजेक्ट के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। जमीन मालिकों को सरकारी नियमों के अनुसार मुआवजा दिया जाएगा और यह राशि जमीन की मौजूदा कीमत से चार गुना होने की बात कही गई है। बाबा के परिवार के सदस्यों समेत कुछ ग्रामीणों ने कथित तौर पर अनापत्ति प्रमाण पत्र भी दिया है, जिसे मंजूरी के लिए सरकार के पास भेजा गया है। सरकार की मंजूरी के बाद जमीन अधिग्रहण पूरा होने पर निर्माण का काम शुरू किया जा सकेगा।

तपस्या स्थल पर भी बढ़ेंगी सुविधाएं

सरकार की योजना जन्म स्थान के साथ फर्रुखाबाद के नीब करौरी गांव में भी विकास कार्य किए जाने की तैयारी है। माना जाता है कि नीम करौली बाबा ने इस इलाके में करीब 12 साल तक तपस्या की थी और इसी गांव के नाम से बाद में वे नीम करौली बाबा के नाम से प्रसिद्ध हुए। यहां करीब 5 एकड़ जमीन को विकसित करने की योजना है। प्रस्तावित कामों में पानी की टंकी, सड़कों को चौड़ा करना, अतिक्रमण हटाना और व्यवस्थित पार्किंग जैसी सुविधाएं शामिल हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, फिल्म ‘हनुमान अंश’ की रिलीज के बाद यहां श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ी है और रोजाना करीब 60 से 70 हजार लोगों के पहुंचने की बात कही गई है।

वृंदावन के समाधि स्थल का भी होगा विकास

नीम करौली बाबा से जुड़ी धार्मिक पर्यटन योजना में वृंदावन स्थित उनके समाधि स्थल को भी शामिल किया गया है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ आसपास के इलाके में सड़क संपर्क और दूसरी जरूरी सुविधाओं को मजबूत करने की योजना है। इसका मकसद समाधि स्थल तक पहुंच को आसान बनाना और वहां आने वाले भक्तों के लिए बेहतर माहौल तैयार करना है।

हनुमान सेतु से शुरू होगा प्रस्तावित बाबा सर्किट

लखनऊ का गोमती नदी के किनारे स्थित हनुमान सेतु मंदिर भी प्रस्तावित ‘नीम करौली बाबा सर्किट’ का अहम हिस्सा होगा। यह मंदिर बाबा की प्रेरणा से बनाया गया था और इसे सर्किट के शुरुआती केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है। उम्मीद है कि उत्तर प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम लिमिटेड की ओर से यहां से गाइडेड टूर भी शुरू किए जा सकते हैं। मंदिर परिसर में फिलहाल नीम करौली बाबा की दो मूर्तियां और भगवान हनुमान की एक बड़ी मूर्ति मौजूद है।

नीम करौली बाबा से जुड़ा कैंची धाम भले ही बाबा से जुड़ी सबसे प्रसिद्ध जगहों में शामिल हो, लेकिन उत्तर प्रदेश में मौजूद इन स्थानों की अपनी अलग कहानी और महत्व है। प्रोजेस्ट में कैंची धाम की तरह श्रद्धालुओं के अनुभव और सुविधाओं को बेहतर बनाने की कोशिश की जाएगी, फिरोजाबाद की भौगोलिक स्थिति को ध्यान में रखकर विकास किया जाएगा। इस विकास के बाद इन जगहों पर सुविधाएं बेहतर होने के साथ बाबा के जीवन, उनकी साधना और आध्यात्मिक विरासत को करीब से समझने का मौका भी मिल सकता है।

ओरछा में रामराजा लोक के निर्माण कार्यों का CM डॉ. मोहन यादव ने लिया जायजा, स्थानीय दुकानदारों से किया संवाद

ओरछा में रामराजा लोक के निर्माण कार्यों का CM डॉ. मोहन यादव ने लिया जायजा, स्थानीय दुकानदारों से किया संवाद

भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि ओरछा को पर्यटन के अद्भुत केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। ओरछा का राम राजा मंदिर हमारे गौरवशाली अतीत की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संपदा है। यहां के मंदिर एवं महल तत्कालीन समृद्ध स्थापत्य के प्रत्यक्ष उदाहरण हैं, जो हमें हमारी प्राचीन धरोहर और संस्कृति से जोड़े रखते हैं। ये तत्कालीन उन्नत तकनीक और स्थापत्य के भी अद्भुत उदाहरण हैं, पहले एअर कंडीशनर नहीं होते थे, लेकिन यहां के भवन वातानुकूलित बने है, जो गर्मी में ठंडे और ठंड में गर्मी का एहसास कराते हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आज ओरछा स्थित ऐतिहासिक एवं आस्था के प्रमुख केन्द्र श्री रामराजा लोक में जारी निर्माण कार्यों का अवलोकन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने  निर्माण कार्यों की प्रगति की जानकारी लेते हुए संबंधित अधिकारियों को कार्यों को गुणवत्ता के साथ निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निरीक्षण के बाद मीडिया से चर्चा में यह विचार-व्यक्त किए।

 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्माणाधीन रामराजा लोक परिसर में विभिन्न प्रतिष्ठानों का निरीक्षण करते हुए प्रतिष्ठान संचालकों से संवाद किया तथा उनकी समस्याओं और सुझावों को सुना। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को प्राप्त समस्याओं के निराकरण के लिए आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जुझार सिंह महल में चल रहे निर्माण तथा जीर्णोद्धार कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने जहांगीर महल का भ्रमण कर यहां की ऐतिहासिक एवं समृद्ध स्थापत्य कला का अवलोकन भी किया।

 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव को निरीक्षण के दौरान आर्किटेक्ट द्वारा मंदिर परिसर स्थित प्राचीन एवं ऐतिहासिक ‘सावन-भादो’ स्तंभों के संरक्षण एवं उनके स्थापत्य महत्व के संबंध में विस्तृत जानकारी दी गई। बताया कि रामराजा लोक की संरचना एवं विकास कार्यों को आकार देते समय मंदिर परिसर की प्राचीन धरोहरों, विशेषकर ‘सावन-भादो’ स्तंभों के मूल स्वरूप एवं ऐतिहासिक महत्व का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। बुंदेलखंड की विशिष्ट स्थापत्य कला के प्रतीक इन प्राचीन स्तंभों की संरचना एवं निर्माण शैली अपने समय की उन्नत तकनीक को दर्शाती है। नए निर्माण कार्यों के दौरान इन प्राचीन संरचनाओं को किसी प्रकार की क्षति नही पहुंचे, इसका विशेष ध्यान रखते हुए उनके आसपास के क्षेत्र को व्यवस्थित, सुंदर एवं श्रद्धालुओं के लिए सुगम बनाया जा रहा है।

 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारे गौरवशाली बुन्देला राजाओं का ओरछा बुंदेलखंड की राजधानी के रूप पहचाना जाता था। यहां के प्राचीन महल और भवन, हमारी समृद्ध विरासत हैं, उसे जीवंत करने के लिए सरकार काम कर रही है। तत्कालीन समय में निर्माण कार्यों में जिस प्रकार की सामग्री लगाई जाती थी, उसी सामग्री से भवनों का जीर्णोद्धार कराया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य यह है कि हमारे गौरवशाली अतीत के प्रतीक ये भवन उसी स्वरूप में दिखें जिस स्वरूप में वह वर्षों पहले थे। इसके लिए हमारे अधिकारियों के नेतृत्व और मार्गदर्शन में कुशल कारीगर काम कर रहे हैं।

 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि श्री महाकाल महालोक के निर्माण के बाद उज्जैन आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, उज्जैन की अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव आया है। इसी तर्ज पर मध्यप्रदेश के प्रमुख तीर्थस्थलों जैसे ओरछा, चित्रकूट, दतिया, नलखेड़ा, पशुपतिनाथ मंदसौर आदि का भी समग्र विकास किया जा रहा है। इससे धार्मिक पर्यटन को प्रोत्साहन मिलेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

भगवान श्रीराम ने अपने 14 वर्ष के वनवास में, लम्बी अवधि चित्रकूट में व्यतीत की। भगवान श्रीकृष्ण की जहां शिक्षा भी हुई, उज्जैन के सांदीपनि आश्रम सहित भगवान श्रीकृष्ण की जहां-जहां लीलाएं हुईं, उन सब स्थानों को तीर्थ के रूप में विकसित किया जाएगा। हमारी गौरवशाली विरासत को धार्मिक सांस्कृतिक भावनाओं के अनुरूप आने वाली पीढ़ियों से जोड़ने और उन्हें इस अतीत से परिचित कराने के लिए विभिन्न गतिविधियां संचालित हैं, इन्हें संरक्षित करना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। ओरछा में भव्य श्री रामराजा लोक का निर्माण किया जा रहा है, जो आने वाले समय में देश-दुनिया के श्रद्धालुओं के लिए प्रमुख तीर्थस्थल बनेगा।

UP Expressway Projects: यूपी में ₹24,000 करोड़ का मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर बूस्ट! दो नए एक्सप्रेसवे को मिली मंजूरी, इंडस्ट्रियल प्रोजेक्ट्स पर भी बड़ा दांव

UP Expressway Projects: उत्तर प्रदेश में सड़क कनेक्टिविटी और औद्योगिक विकास को लेकर योगी आदित्यनाथ सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सीएम योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में 24,000 करोड़ रुपये से अधिक के इंफ्रास्ट्रक्चर और औद्योगिक निवेश से जुड़े प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इसमें दो बड़े एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट सुल्तानपुर में मैन्युफैक्चरिंग-लॉजिस्टिक्स क्लस्टर और राज्य के अलग-अलग जिलों में 11 बड़े औद्योगिक प्रोजेक्ट्स के लिए प्रोत्साहन शामिल हैं। योगी सरकार का फोकस अब सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं है। नए फैसलों के जरिए उभरते औद्योगिक क्षेत्रों को बेहतर सड़क नेटवर्क से जोड़ने और प्रदेश के अलग-अलग जिलों में बड़े निवेश को आकर्षित करने की तैयारी है।

‘गंगा एक्सप्रेसवे’ पहुंचेगा हरिद्वार, 10,761 करोड़ होंगे खर्च

कैबिनेट ने 10,761 करोड़ रुपये की लागत से गंगा एक्सप्रेसवे को हरिद्वार तक बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इसके तहत छह लेन का ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे बनाया जाएगा, जिसे भविष्य में आठ लेन तक विस्तारित करने का प्रावधान होगा। इस परियोजना का पूरा खर्च उत्तर प्रदेश सरकार उठाएगी। इसमें केंद्र की वित्तीय भागीदारी प्रस्तावित नहीं है।

इस एक्सप्रेसवे से बिजनौर और हरिद्वार के बीच कनेक्टिविटी काफी बेहतर होने की उम्मीद है। फिलहाल बिजनौर से हरिद्वार जाने के लिए मुख्य रूप से NH-34 यानी मेरठ-बिजनौर-हरिद्वार हाईवे पर निर्भरता है। नया एक्सप्रेसवे बनने के बाद बिजनौर की लखनऊ से कनेक्टिविटी भी गंगा एक्सप्रेसवे नेटवर्क के जरिए और मजबूत होगी।

प्रयागराज से हरिद्वार तक बनेगा तेज कॉरिडोर

गंगा एक्सप्रेसवे का हरिद्वार तक विस्तार केवल सड़क परियोजना नहीं। बल्कि पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हरिद्वार जुड़ने के बाद एक्सप्रेसवे नेटवर्क प्रयागराज और हरिद्वार जैसे गंगा तट पर बसे दो प्रमुख कुंभ शहरों को एक्सेस-कंट्रोल्ड सड़क कनेक्टिविटी से जोड़ देगा।

यूपी सरकार को उम्मीद है कि इससे धार्मिक पर्यटन, व्यापार, निवेश और अन्य आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। इसका फायदा बिजनौर, हरिद्वार और आसपास के इलाकों को मिलने की उम्मीद है। अब इस परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट यानी DPR तैयार की जाएगी।

झांसी लिंक एक्सप्रेसवे पर 7,968 करोड़

योगी कैबिनेट ने 7,968.30 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाले झांसी लिंक एक्सप्रेसवे को भी मंजूरी दी है। इसका मुख्य उद्देश्य बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण यानी BIDA क्षेत्र और झांसी के आसपास के डिफेंस कॉरिडोर को बेहतर कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना है। इस परियोजना का पूरा खर्च भी उत्तर प्रदेश सरकार उठाएगी। केंद्र से किसी वित्तीय भागीदारी का प्रस्ताव नहीं है। ॉ

सरकार का मानना है कि एक्सप्रेसवे बनने के बाद बुंदेलखंड के उभरते औद्योगिक क्षेत्रों से उत्तर प्रदेश के दूसरे हिस्सों और देश के अन्य क्षेत्रों तक सड़क संपर्क तेज होगा। निर्माण के दौरान प्रत्यक्ष रोजगार के साथ-साथ औद्योगिक गतिविधियां बढ़ने पर अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी पैदा होने की उम्मीद है।

सुल्तानपुर में 272 करोड़ का इंडस्ट्रियल-लॉजिस्टिक्स क्लस्टर

कैबिनेट ने सुल्तानपुर में 272.25 करोड़ रुपये के निवेश से इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक्स क्लस्टर यानी IMLC के इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट को भी मंजूरी दी है। यह क्लस्टर पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के नजदीक विकसित किया जाएगा। इससे यहां आने वाली औद्योगिक इकाइयों को पहले से मौजूद तेज सड़क नेटवर्क का सीधा फायदा मिलेगा।

इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े काम का खर्च राज्य सरकार उठाएगी और निर्माण एजेंसी के चयन के लिए ग्लोबल बिड आमंत्रित की जाएगी। सरकार को उम्मीद है कि यह क्लस्टर मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स से जुड़े निवेश को आकर्षित करेगा तथा सुल्तानपुर और आसपास के क्षेत्रों में रोजगार पैदा करेगा।

11 बड़े प्रोजेक्ट्स को भी मंजूरी

इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ-साथ कैबिनेट ने 11 बड़े औद्योगिक प्रोजेक्ट्स के लिए भी प्रोत्साहन को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं में कुल प्रस्तावित निवेश 5,500 करोड़ रुपये से अधिक है। इनमें से आठ परियोजनाओं के लिए करीब 2,901.97 करोड़ रुपये के निवेश पर उत्तर प्रदेश इंडस्ट्रियल इन्वेस्टमेंट एंड एम्प्लॉयमेंट प्रमोशन पॉलिसी-2022 के तहत लेटर ऑफ कंफर्ट जारी करने को मंजूरी दी गई है। इन परियोजनाओं का विस्तार गौतम बुद्ध नगर (नोएडा), हमीरपुर, हाथरस, बाराबंकी, लखीमपुर खीरी, मथुरा और उन्नाव जैसे जिलों तक है।

इनमें प्रमुख निवेश इस प्रकार हैं:-

  • सूर्या ग्लोबल सुपर फ्लेक्सिफिल्म्स, गौतम बुद्ध नगर- 605.37 करोड़ रुपये
  • शाल्विस स्पेशियलिटीज, हमीरपुर- 297.30 करोड़ रुपये
  • साउंड कास्टिंग्स, हाथरस – 225 करोड़ रुपये
  • वृंदावन बॉटलर्स, बाराबंकी – 436.12 करोड़ रुपये
  • जुआरी एनविएन बायोएनर्जी, लखीमपुर खीरी- 294.72 करोड़ रुपये
  • पसवारा पेपर्स, हाथरस- 315 करोड़ रुपये
  • CRD फूड्स एंड बेवरेजेज, मथुरा- 363.94 करोड़ रुपये
  • माउंट एवरेस्ट ब्रेवरीज, उन्नाव- 363.52 करोड़ रुपये

(नोट- इन परियोजनाओं को पात्रता के आधार पर नीति के तहत नेट SGST और कैपिटल सब्सिडी समेत विभिन्न प्रोत्साहन मिल सकेंगे।)

तीन और प्रोजेक्ट्स में 2,606 करोड़ का निवेश

कैबिनेट ने तीन और परियोजनाओं के लिए लेटर ऑफ कम्फर्ट को मंजूरी दी है। इनका कुल प्रस्तावित निवेश 2,606.04 करोड़ रुपये है। ये परियोजनाएं बिजनौर, उन्नाव और कानपुर देहात में लगाई जाएंगी।

उन्नाव में एल्युमिनियम कैन फैक्ट्री

Canpack India उन्नाव में करीब 1,573.62 करोड़ रुपये का निवेश करेगी। कंपनी एल्युमिनियम बेवरेज कैन बनाने की इकाई स्थापित करेगी। यह प्लांट करीब 26 हेक्टेयर क्षेत्र में UPEIDA द्वारा विकसित IMLC इंडस्ट्रियल कॉरिडोर क्षेत्र में लगाया जाएगा। इसकी अनुमानित वार्षिक उत्पादन क्षमता 130 करोड़ यूनिट होगी।

बिजनौर में फ्रेंच फ्राइज प्लांट

इसके अलावा Agristo Masa बिजनौर में 794.27 करोड़ रुपये का निवेश करेगी। यह कंपनी मौजूदा पोटैटो फ्लेक्स कारोबार का विस्तार करने के साथ फ्रेंच फ्राइज बनाने की यूनिट स्थापित करेगी। प्रस्तावित प्लांट की अधिकतम स्थापित क्षमता हर साल 75,000 टन होगी। इसके मुकाबले कंपनी की मौजूदा पोटैटो फ्लेक्स उत्पादन क्षमता करीब 7,332 टन सालाना बताई गई है।

कानपुर देहात में प्लास्टिक प्रोडक्ट्स का होगा उत्पादन

एक बयान के मुताबिक, Supreme Industries कानपुर देहात में 238.15 करोड़ रुपये का निवेश करेगी। यहां वैल्यू-एडेड प्लास्टिक बिल्डिंग सॉल्यूशन उत्पाद बनाए जाएंगे। कंपनी की स्थापना 1942 में हुई थी। यह भारत की प्रमुख प्लास्टिक प्रोसेसिंग कंपनियों में शामिल है।

एक्सप्रेसवे और उद्योग को एक साथ जोड़ने की रणनीति

यूपी सरकार के इन फैसलों से साफ संकेत मिलता है कि उत्तर प्रदेश अब एक्सप्रेसवे नेटवर्क को सीधे औद्योगिक विकास से जोड़ने की रणनीति पर आगे बढ़ रहा है। झांसी लिंक एक्सप्रेसवे को बुंदेलखंड के औद्योगिक और डिफेंस कॉरिडोर से जोड़ा जा रहा है। जबकि सुल्तानपुर का IMLC पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का फायदा उठाएगा। वहीं, गंगा एक्सप्रेसवे के हरिद्वार तक विस्तार से पश्चिमी उत्तर प्रदेश और हरिद्वार के बीच आर्थिक संपर्क मजबूत होने की उम्मीद है।

उत्तर प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि कैबिनेट के फैसले एक्सप्रेसवे विस्तार और औद्योगिक विकास को एक साथ आगे बढ़ाने की कोशिश को दिखाते हैं। सरकार का लक्ष्य बेहतर कनेक्टिविटी के जरिए निवेश, व्यापार, रोजगार और पर्यटन को बढ़ावा देना है।

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उन्होंने कहा कि 24 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा के इन प्रस्तावों को उत्तर प्रदेश के इंफ्रास्ट्रक्चर और औद्योगिक नक्शे में बड़ा बदलाव लाने वाली पहल के तौर पर देखा जा रहा है। खास बात यह है कि इसका असर सिर्फ लखनऊ, नोएडा या दूसरे बड़े औद्योगिक केंद्रों तक सीमित न रहकर बुंदेलखंड, पूर्वांचल और पश्चिमी यूपी के कई जिलों तक पहुंचने की उम्मीद है।

Ganga Expressway to Haridwar: प्रयागराज से हरिद्वार तक बनेगा गंगा एक्सप्रेसवे! ₹10,761 करोड़ की योजना को यूपी कैबिनेट की मंजूरी

Ganga Expressway to Haridwar: उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल ने प्रयागराज और हरिद्वार के बीच गंगा एक्सप्रेसवे को विस्तार देने के प्रस्ताव को मंगलवार (25 अगस्त) को मंजूरी दे दी। प्रस्तावित ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे को छह-लेन हाईवे के तौर पर बनाया जाएगा, जिसमें भविष्य में इसे आठ-लेन तक बढ़ाने की गुंजाइश होगी। एक बयान में कहा गया है कि यूपी का सबसे लंबा गंगा एक्सप्रेसवे (594 किमी, मेरठ से प्रयागराज) हरिद्वार तक बढ़ाया जाएगा। इसके विस्तार की कुल लंबाई 130 किमी होगी (100 किमी यूपी में और 30 किमी उत्तराखंड में)। इस प्रोजेक्ट पर ₹10,761 करोड़ का खर्च आएगा, जिसे पूरा राज्य सरकार वहन करेगी।

गंगा एक्सप्रेसवे दो कुंभ नगरियों (प्रयागराज और हरिद्वार) के बीच सीधी कनेक्टिविटी बनेगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार, प्रस्तावित ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे छह लेन का होगा, जिसे भविष्य में आठ लेन तक विस्तारित किया जा सकेगा। परियोजना पर करीब 10,761 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। अधिकारियों के मुताबिक, परियोजना में केंद्र सरकार की किसी तरह की वित्तीय भागीदारी अपेक्षित या प्रस्तावित नहीं है।

मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने समेत आगे की आवश्यक कार्यवाही की जाएगी। राज्य सरकार की ओर से जारी बयान के अनुसार, उत्तराखंड सीमा से लगे बिजनौर जिले से हरिद्वार जाने के लिए फिलहाल प्रमुख रूप से मेरठ-बिजनौर-हरिद्वार नेशनल हाईवे उपलब्ध है।

प्रयागराज-हरिद्वार के बीच एक्सप्रेसवे कॉरिडोर बनेगा

बयान में बताया गया कि गंगा एक्सप्रेसवे के हरिद्वार तक विस्तार से बिजनौर से हरिद्वार तक आवागमन बेहतर एवं तेज होगा। बयान के मुताबिक, प्रस्ताव के तहत प्रयागराज-हरिद्वार के बीच एक्सप्रेसवे गलियारा विकसित किया जाएगा।

बयान में बताया गया कि गंगा एक्सप्रेसवे के हरिद्वार तक पहुंचने से प्रयागराज और हरिद्वार के बीच एक्सेस कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे नेटवर्क के जरिए तेज एवं सुगम ट्रैफिक सुविधा विकसित होगी। अधिकारियों ने बताया कि इससे धार्मिक एवं आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों के लिए दोनों धार्मिक नगरियों के बीच आवागमन अधिक सुविधाजनक होने की उम्मीद है।

₹10,761 करोड़ का आएगा खर्च

गंगा एक्सप्रेसवे को हरिद्वार तक बढ़ाने पर राज्य सरकार का अनुमानित खर्च 10,761 करोड़ रुपये होगा। इस प्रोजेक्ट के लिए केंद्र सरकार से किसी वित्तीय मदद की उम्मीद या प्रस्ताव नहीं है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद, आगे की जरूरी कार्रवाई की जाएगी। इसमें डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार करना भी शामिल है। अभी उत्तराखंड की सीमा से सटे बिजनौर जिले से हरिद्वार जाने के लिए मुख्य रूप से NH-34 (मेरठ-बिजनौर-हरिद्वार नेशनल हाईवे) का इस्तेमाल किया जाता है।

गंगा एक्सप्रेसवे को हरिद्वार तक बढ़ाने से बिजनौर को शहर से बेहतर और तेज कनेक्टिविटी मिलेगी। साथ ही गंगा एक्सप्रेसवे से बिजनौर और राज्य की राजधानी लखनऊ के बीच कनेक्टिविटी बेहतर होगी। यूपी सरकार ने एक बयान में कहा कि इस विकास से क्षेत्र में व्यापार, निवेश, उद्योग और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

तेज और आसान कनेक्टिविटी मिलेगी

गंगा एक्सप्रेसवे को हरिद्वार तक बढ़ाने से प्रयागराज और हरिद्वार के बीच एक्सेस-कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे नेटवर्क के जरिए तेज और आसान कनेक्टिविटी मिलेगी। इस पहल से धार्मिक और आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। साथ ही तीर्थयात्रियों और पर्यटकों के लिए इन दो पवित्र शहरों के बीच यात्रा करना ज्यादा सुविधाजनक हो जाएगा।

एक्सप्रेसवे के विस्तार से धार्मिक पर्यटन में काफी बढ़ोतरी होने की संभावना है। बेहतर कनेक्टिविटी से हरिद्वार, बिजनौर और गंगा एक्सप्रेसवे से जुड़े अन्य क्षेत्रों में पर्यटन-आधारित आर्थिक गतिविधियों में भी तेज़ी आ सकती है।

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प्रोजेक्ट के निर्माण और उससे जुड़ी आर्थिक गतिविधियों से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोज़गार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है। बयान में कहा गया है कि इससे क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास को भी नई गति मिलेगी। 29 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरदोई में 594 किलोमीटर लंबे एक्सेस-कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किया था। यह एक्सप्रेसवे मेरठ को प्रयागराज से जोड़ता है।

MP में निवेश का बड़ा मौका, 8,635 करोड़ के निवेश प्रस्ताव मिले, 5,700 से ज्यादा लोगों को मिलेगा रोजगार

MP में निवेश का बड़ा मौका, 8,635 करोड़ के निवेश प्रस्ताव मिले, 5,700 से ज्यादा लोगों को मिलेगा रोजगार

गुजरात के अहमदाबाद में आयोजित निवेश संवाद के दौरान मध्यप्रदेश को विभिन्न क्षेत्रों में 8 हजार 635 करोड़ रुपए के निवेश प्राप्त हुए हैं। इन प्रस्तावों से 5 हजार 785 से अधिक रोजगार के अवसर सृजित होंगे। निवेश संवाद में गुजरात के अहमदाबाद, सूरत, भावनगर, राजकोट और वडोदरा सहित प्रमुख औद्योगिक केंद्रों से 500 से अधिक उद्योगपतियों, निवेशकों एवं कॉर्पोरेट प्रतिनिधियों ने सहभागिता की और मध्यप्रदेश में निवेश के प्रति विशेष रुचि दिखाई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 12 अगस्त को अहमदाबाद में आयोजित मेगा निवेश संवाद इंटरैक्टिव सेशन ऑन इन्वेस्टमेंट अपॉर्च्युनिटीज इन मध्यप्रदेश में देशभर से आए प्रमुख उद्योगपतियों और निवेशकों को संबोधित किया।   

 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश व्यापार-व्यवसाय, नई औद्योगिक इकाइयों की स्थापना-विस्तार और बिजनेस एक्सटेंशन के लिए असीम संभावनाओं की धरती है। मध्यप्रदेश में निवेश हमेशा से ही फायदे का सौदा रहा है। उन्होंने देशभर के निवेशकों का प्रदेश की साढ़े आठ करोड़ जनता की ओर से स्वागत करते हुए कहा कि प्रदेश में निवेश करने वालों को हमारी सरकार हर संभव सुविधा, सुरक्षा और सहयोग उपलब्ध कराएगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए देश में चल रहे विकास यज्ञ का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश की नई औद्योगिक नीतियों को देश के उद्योग जगत से सराहना मिल रही है। उद्योग के संचालन के लिए मुख्यत: ठोस नीति, नेक नीयत और सहयोगी सरकार। मध्यप्रदेश में आपको यह तीनों ही मिलेंगे। मुख्यमंत्री ने गुजरात के उद्योग जगत को आगामी प्रस्तावित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2027, भोपाल के लिए आमंत्रित करते हुए कहा, आपके पास अनुभव है और हमारे पास अवसर। हमारे अवसरों को आपका अनुभव मिल जाए, तो हम मिलकर इतिहास रचेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उद्योगपतियों से मध्यप्रदेश के प्रगति पथ में सहयात्री बनने का आह्वान करते हुए कहा कि आइए, मध्यप्रदेश में बिना किसी संकोच के और खुले दिल से निवेश कीजिए तथा हमारे साथ विकास की इस ऐतिहासिक यात्रा का हिस्सा बनिए।

 

एमपी में किसी बात की चिंता नहीं

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में निवेशकों को बिजली, पानी और जमीन की चिंता करने की जरूरत नहीं है। औद्योगिक भूमि रियायती दरों पर लीज पर उपलब्ध है, पर्याप्त वाटर बैंक और सरप्लस बिजली है तथा प्लग एंड प्ले जोन विकसित किए जा रहे हैं। लगभग 19 हजार एकड़ में 48 नए इंडस्ट्रियल पार्क विकसित किए जा रहे हैं। सिंगल विंडो सिस्टम को 'समस्याओं का अंत, सेवा तुरंत' बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हर बाधा का समाधान एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है। सरल और सहज कनेक्टिविटी को प्रदेश की बड़ी ताकत बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश में 5 लाख किलोमीटर से अधिक सड़क नेटवर्क, मजबूत रेल कनेक्टिविटी, 8 एयरपोर्ट, 6 अंतर्देशीय कंटेनर डिपो, एक्सप्रेस-वे और हाईवेज़ उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में प्रशिक्षित और कुशल श्रम शक्ति भी बेहद आसानी से उपलब्ध है।

 

मध्यप्रदेश और गुजरात हैं जुड़वा भाई

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश और गुजरात के बीच औद्योगिक संभावनाओं एवं उच्च कोटि के परस्पर सहयोग का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों ही राज्य जुड़वा भाईयों की तरह हैं। उन्होंने कहा कि गुजरात के पास तकनीक, व्यापार और औद्योगिक अनुभव है, वहीं मध्यप्रदेश के पास प्रचुर जल, लैंड बैंक और देश के मध्य में स्थित होने का लॉजिस्टिक्स एडवांटेज है। दोनों राज्यों की इन्हीं बेजोड़ विशेषताओं के समन्वय से इस क्षेत्र में औद्योगिक विकास का नया इतिहास रचा जा सकता है। उन्होंने कहा कि गुजरात के पेट्रोकेमिकल, रसायन, टेक्सटाइल, फार्मा, फूड प्रोसेसिंग और ऑटोमोबाइल क्षेत्रों के लिए मध्यप्रदेश में व्यापक अवसर हैं। बीना में विशाल पेट्रोकेमिकल रिफाइनरी, उज्जैन में 360 एकड़ में विकसित हो रहा अत्याधुनिक मेडिकल डिवाइस पार्क, धार और नवसारी में पीएम मित्रा पार्क तथा पीथमपुर का मजबूत ऑटोमोबाइल आधार दोनों राज्यों की औद्योगिक साझेदारी की संभावनाओं को और मजबूत करते हैं। उन्होंने बताया कि पिछले ढाई वर्षों में प्रदेश को विभिन्न क्षेत्रों में 34 लाख करोड़ रुपए से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 10 लाख करोड़ रुपए से अधिक के प्रस्ताव धरातल पर उतर चुके हैं। नवीकरणीय ऊर्जा, पंप्ड हाइड्रो और बायोमास जैसी नीतियों से निवेश का रास्ता आसान हुआ है और इन क्षेत्रों में 7 लाख 19 हजार करोड़ रुपए का निवेश प्राप्त हुआ है।

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मां नर्मदा के दो बेटे देश के औद्योगिक विकास के लिए बढ़ रहे हैं साथ-साथ

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के काल से गुजरात की धरती देश को समृद्धि देती आई है। गुजरात ने महात्मा गांधी और सरदार वल्लभ भाई पटेल जैसे महापुरुष हमें दिए हैं। अब प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल में भारत दुनिया का अग्रणी देश बनने की ओर अग्रसर है। गुजरात और मध्यप्रदेश मां नर्मदा के दो बेटों की तरह हैं। नर्मदा के जल से दोनों प्रदेशों में पेयजल और सिंचाई के पर्याप्त पानी मिल रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने सरदार सरोवर बांध के लिए अपने संकल्प को पूरा किया है। दोनों राज्यों में उद्योग, व्यापार, संस्कृति सहित सभी क्षेत्रों में आगे बढ़ने के लिए अनुकूलता बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि उद्यमी पुरुषार्थ और व्यापार से कई लोगों को रोजगार और घर चलाने का अवसर मिलता है। हम 'जियो और जीने दो' के साहचर्य सिद्धांत पर आगे बढ़ने वाले लोग हैं।

 

समृद्धि वाली धरती है गुजरात

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मेगा निवेश संवाद कार्यक्रम में आए उद्योगपतियों और उद्यमियों का अभिनंदन करते हुए कहा कि गुजरात के साथ संबंध अनेक प्रकार से महात्मा गांधी के समय से है। स्वतंत्रता आंदोलन समर में सभी राज्य संयुक्त रूप से संघर्षरत थे। गुजरात से ही सरदार वल्लभभाई पटेल द्वारा आधुनिक भारत की नींव रखने का कार्य किया गया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने मध्यप्रदेश में शिक्षा ग्रहण की। गुजरात में वे द्वारकाधीश बने और जगद्गुरु भी बने। गुजरात की धरती ही कृष्ण को श्री लगाने वाली और समृद्धि देने वाली धरती है। अब एक बार फिर गुजरात और मध्यप्रदेश के साथ अब नया रिश्ता जुड़ रहा है। मध्यप्रदेश में उद्योगों की स्थापना के लिए गुजरात के सभी उद्यमी आमंत्रित हैं। उद्योगपतियों को मध्यप्रदेश में पूरा सहयोग प्राप्त होगा। गुजरात में पेट्रोकेमिकल , रसायन, टेक्सटाइल, फॉर्मा और एनर्जी सेक्टर में अपार संभावनाएं हैं। गुजरात का टेक्सटाइल तो दुनिया में प्रसिद्ध है। गुजरात के पास धार जिले में प्रधानमंत्री मोदी ने 2 हजार एकड़ में बन रहे टेक्सटाइल सेक्टर के पीएम मित्र पार्क का भूमिपूजन किया। यहां तेजी से निवेश आ रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी भी गुजरात से हैं। उनके नेतृत्व में भारत पूरे विश्व में सबसे अलग छवि बना रहा।

 

क्रियान्वित हो रहा समृद्धि का संकल्प

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश और गुजरात के मध्य समन्वय तेजी से बढ़ रहा है। इसमें प्रधानमंत्री मोदी का जो राज्यों की समृद्धि का संकल्प था , वह क्रियान्वित हो रहा। सरदार सरोवर परियोजना के संदर्भ में राज्यों के मध्य आवश्यक सहयोग पर बल दिया गया है। दोनों राज्यों के बीच प्रधानमंत्री मोदी के शासनकाल में केंद्र का पर्याप्त समुचित मार्गदर्शन प्राप्त हुआ है। राज्यों में परस्पर सहयोग और साथ रहे, इस दृष्टि से विभिन्न क्षेत्रों में राज्य समान रूप से आगे बढ़ें, यह अनुकूलता बढ़ रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सरकार ने औद्योगिक विकास के लिए ठोस नीतियां लागू की हैं। नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में मध्यप्रदेश में विशेष प्रयास हुए हैं। राज्य में बिजली की उपलब्धता सरप्लस है। मध्यप्रदेश की बिजली से दिल्ली में मेट्रो ट्रेन भी चल रही है। देश में सबसे सस्ती बिजली दर मध्यप्रदेश में है। राज्य सरकार ने उद्योगों के लिए अनुकूल नीतियों को लागू कर सकारात्मक वातावरण तैयार किया है। निवेशकों से किए हर वादे को पूरा करते हुए बड़े उद्योग और एमएसएमई ईकाइयों को पिछले माह तक की निवेश प्रोत्साहन राशि का भुगतान कर दिया गया है। सरकार ने अपनी प्रतिबद्धता के बलबूते बैकलॉग सब्सिडी को भी खत्म किया है।

 

युवाओं को हर क्षेत्र में मिल रहे अवसर

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने युवा दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि मध्यप्रदेश में युवाओं के लिए हर क्षेत्र में आगे बढ़ने के अवसर दिए जा रहे हैं। राज्य में टूरिज्म, आईटी, फूड प्रोसेसिंग सेक्टर में भी अपार संभावनाएं हैं। राज्य में इंदौर-उज्जैन मेट्रोपोलिटन सिटी और भोपाल सहित पड़ोसी जिले को जोड़कर मेट्रोपोलिटन सिटी तैयार करने का संकल्प लिया है। मध्यप्रदेश में सबसे तेज गति से मेडिकल कॉलेज खुल रहे हैं। सबसे तेज गति से उद्योगों की स्थापना हो रही है। मध्यप्रदेश देश में में सबसे कम बेरोजगारी दर वाला राज्य है। उन्होंने नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र के विकास में मध्यप्रदेश में हो रहे विशेष प्रयासों और अन्य सेक्टर में आ रहे निवेश का भी विवरण दिया। मुख्यमंत्री ने मध्यप्रदेश में उद्योगों के लिए अनुकूल नीतियों और सकारात्मक वातावरण की विस्तार पूर्वक जानकारी दी।

 

एमपी में अद्भुत टूरिज्म

गुजरात के वेलस्पन ट्रांसफॉर्मेशन सर्विस लिमिटेड के ऑनर चिंतन ठाकर ने मध्यप्रदेश में निवेश का अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि गुजरात और मध्यप्रदेश सिस्टर स्टेट होने के साथ-साथ देश के भविष्य के ग्रोथ इंजन हैं। वर्ष 2011 में हमारी कंपनी ने मध्यप्रदेश में प्रवेश किया। देवास-भोपाल रोड पर अपनी यूनिट शुरू की। हमने वॉटर पाइप्स तैयार किए। मध्यप्रदेश सरकार ने केवल 12 महीने में उद्योग स्थापना के लिए जरूरी सभी अनुमतियां दे दीं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में उद्यमियों और निवेशकों की सभी देनदारियां लगातार भुगतान की जा रही हैं। सिम्फनी लिमिटेड कंपनी के सीएमडी एवं कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्रीज की गुजरात स्टेट कांउसिल के चेयरमेन  अचल बेकेरी ने कहा कि मध्यप्रदेश अतुल्य भारत का हृदय प्रदेश है। हाल के वर्षों में पर्यटन के क्षेत्र में मध्यप्रदेश ने नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। घरेलू पर्यटकों की संख्या 14 करोड़ से अधिक दर्ज की गई। अब घरेलू पर्यटन के क्षेत्र में मध्यप्रदेश पारंपरिक तौर पर गोवा और हिमाचल प्रदेश की श्रेणी में शामिल हो रहा है। धार्मिक पर्यटन के लिए उज्जैन और चित्रकूट, वन्यजीव पर्यटन के लिए बांधवगढ़, कान्हा और पेंच राष्ट्रीय उद्यान, ऐतिहासिक विरासत के लिए खजुराहो, मांडू और सांची प्रसिद्ध पर्यटन स्थल हैं। राज्य में बढ़ते टूरिज्म को देखते हुए मध्यप्रदेश सरकार ने होमस्टे की संख्या बढ़ाने का निर्णय लिया है। टूरिज्म राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के साथ ही स्थानीय लोगों को रोजगार भी प्रदान कर रहा है। गुजराती समुदाय के लिए मध्यप्रदेश में हॉस्पिटिलिटी सेक्टर में अपार संभावनाएं नजर आ रही हैं। कई गुजराती निवेशक मध्यप्रदेश को अपने दूसरे घर के रूप में देखते हैं। राज्य में नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भी बेहतर कार्य हुए हैं। गुजरात में पहले हुई इन्वेस्टर्स मीट में हजारों करोड़ों के निवेश प्रस्ताव मध्यप्रदेश पर भरोसा दिखाते हैं। राज्य में उद्योग मित्र नीतियां, पारदर्शिता और निवेश अनुकूल वातावरण निवेशकों को आकर्षित कर रहा है।

 

एमपी में निवेश के लिए अनुकूल माहौल

अपर मुख्य सचिव, औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन नीरज मंडलोई ने निवेशकों को मध्यप्रदेश की विशेषताओं के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि हमारे पड़ोसी राज्य गुजरात ने हमेशा अपनी उद्यमिता, चुनौतियों का सामना करने और नवाचारों से देश को प्रेरित किया है। मध्यप्रदेश में उद्योग स्थापित करने के लिए एक लाख एकड़ से अधिक का लैंड बैंक उपलब्ध है। राज्य में 8 एयरपोर्ट, 22 रेल जंक्शन और तेजी से बढ़ता लॉजिस्टिक्स कॉरिडोर इसे बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करते हैं। राज्य सरकार ने 8 डेडिकेटेड इंडस्ट्रियल पार्क विकसित करने का संकल्प लिया है। उन्होंने कहा कि इनमें मुरैना में फुटवियर पार्क, उज्जैन में मेडिकल डिवाइस, रायसेन में प्लास्टिक पार्क भी शामिल हैं। सेक्टर आधारित क्लस्टर हमारी विशेषता हैं। नीति आयोग ने मध्यप्रदेश को निवेश प्रोत्साहन नीतियों के निर्माण के मामले में शीर्ष राज्य घोषित किया है। हमारी उद्योग आधारित नीतियों को देश के दूसरे राज्य भी अपना रहे हैं। राज्य की पॉलिसी निर्यात, निवेश अनुदान को भी बढ़ावा दे रही हैं। मध्यप्रदेश जनवरी-फरवरी 2027 में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट का आयोजन करने जा रहा है। मध्यप्रदेश देश का सबसे बड़ा गेहूं उत्पादक, तीसरा सबसे बड़ा दूध उत्पादक है। फूड प्रोसेसिंग के लिए राज्य में कच्चे माल की पर्याप्त उपलब्धता है। उन्होंने कहा कि पीथमपुर में ऑटो सेक्टर का सबसे बड़ा टेस्टिंग ट्रैक है। धार जिले में टेक्सटाइल सेक्टर का देश के सबसे बड़ा पीएम मित्र पार्क स्थापित किया जा रहा है, जिसमें अब तक 2 हजार करोड़ से अधिक का निवेश मिल चुका है। मध्यप्रदेश की ईज ऑफ डूइंग बिजनेस पॉलिसी निवेशकों को हर क्षेत्र में मदद कर रही हैं। भोपाल, जबलपुर और उज्जैन में नए इंडस्ट्रियल पार्क विकसित करने पर काम चल रहा है। ग्वालियर में केंद्र सरकार के सहयोग से देश का पहला टेलीकॉम मैन्यूफेक्चरिंग जोन (टीएमजेड) विकसित किया जा रहा है। पर्यटन भविष्य में रोजगार का सबसे बड़ा जरिया बनेगा। मध्यप्रदेश वन्यजीव पर्यटन और धार्मिक पर्यटन में अग्रणी राज्य है। राज्य सरकार टूरिज्म सेक्टर में निवेश करने वाले उद्यमियों को हर संभव सहायता प्रदान कर रही है।

 

आईटी सेक्टर में अपार संभावनाएं

प्रमुख सचिव, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी एम. सेल्वेंद्रन ने कहा कि मध्यप्रदेश में आईटी सेक्टर में आगे बढ़ने की अपार संभावनाएं हैं। इंदौर, भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर में देश के दूसरे राज्यों की तुलना में सस्ती और विश्वस्तरीय सुविधाएं मिलती हैं। यहां रहना काफी सस्ता है। टीसीएस इंदौर में अपनी यूनिट संचालित करती है, जिसमें 16 हजार से अधिक स्टॉफ काम करता है। इन्फोसिस भी राज्य में अपना विस्तार करने जा रही है। बैगलौर और हैदराबाद की अपेक्षा मध्यप्रदेश में ट्रैफिक अत्यंत सुगम है। राज्य सरकार नया स्पेस टेक पार्क स्थापित करने पर कार्य कर रही है। भोपाल में ड्रोन मैन्यूफेक्चरिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और ड्रोन टेस्टिंग के लिए ग्रीन जोन तैयार किया जा रहा है। मध्यप्रदेश सरकार स्पेस टेक पॉलिसी के अंतर्गत 40 से 60 प्रतिशत तक कैपिटल सब्सिडी प्रदान करती है। हमारी सेमीकंडक्टर पॉलिसी को देशभर से बेहतर रिस्पांस मिल रहा है। राज्य सरकार उद्योग स्थापित करने के लिए किराये और स्टॉफ की सैलरी के लिए भी सहायता दे रही है।

 

मुख्यमत्री डॉ. यादव ने उद्योगपतियों से की वन-टू-वन चर्चा

मुख्यमंत्री डॉ. यादव निवेश संवाद के दौरान प्रमुख उद्योग समूहों के साथ 15 से अधिक वन-टू-वन बैठकें हुईं। इनमें निवेश प्रस्तावों, औद्योगिक विस्तार और मध्यप्रदेश में उपलब्ध निवेश अवसरों पर विस्तार से चर्चा की गई। अरविंद लिमिटेड के साथ पीएम मित्र पार्क में प्रस्तावित 1,200 करोड़ रुपए के निवेश को शीघ्र क्रियान्वित करने, टेक्सटाइल एवं गारमेंट क्षेत्र में उपलब्ध प्रोत्साहनों और  पर्यावरण-अनुकूल औद्योगिक अधोसंरचना के विकास पर चर्चा हुई। वहीं, टोरेंट पावर लिमिटेड के साथ अनूपपुर में प्रस्तावित 1600 मेगावाट ताप विद्युत परियोजना, प्रदेश की दीर्घकालीन ऊर्जा सुरक्षा, अतिरिक्त विद्युत क्षमता सृजन और भविष्य में ऊर्जा क्षेत्र में निवेश की संभावनाओं पर चर्चा की गई। पेट्रोकेमिकल, केमिकल, टेक्सटाइल, फार्मास्युटिकल्स, फूड प्रोसेसिंग, इंजीनियरिंग, एयरोस्पेस एवं रक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों के उद्योग समूहों ने मध्यप्रदेश में निवेश में रुचि दिखाई। वन-टू-वन बैठकों में चिरपाल ग्रुप, गोल्डक्रेस्ट सीमेंट, गुजरात अंबुजा, एजियोस पॉलीफिल्म्स, एरिस लाइफसाइंसेज सहित अन्य उद्योग समूहों के निवेश प्रस्तावों पर चर्चा हुई। गुजरात के निवेशकों एवं उद्योग जगत ने प्रदेश की औद्योगिक नीतियों, व्यवस्थाओं और नेतृत्व के प्रति विश्वास भी व्यक्त किया।

 

सीएम डॉ. मोहन ने बताया किसने कितना किया निवेश

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि सीमेंट क्षेत्र में गोल्डक्रेस्ट सीमेंट द्वारा 3,000 करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव से 1,500 रोजगार के अवसर सृजित होंगे। पैकेजिंग क्षेत्र में एजियोस पॉलीफिल्म्स प्रालि द्वारा 2,500 करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव से 1,000 रोजगार के अवसर सृजित होंगे। वहीं फूड प्रोसेसिंग क्षेत्र में गुजरात अंबुजा एक्सपोर्ट्स लिमिटेड द्वारा 1,200 करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव से 500 रोजगार के अवसर सृजित होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि फार्मास्युटिकल्स क्षेत्र में एरिस लाइफसाइंसेज लिमिटेड द्वारा 500 करोड़ रुपए के निवेश से 800 रोजगार, टेक्सटाइल क्षेत्र में राघव वूवन एलएलपी द्वारा 250 करोड़ रुपए के निवेश से 400 रोजगार, इंजीनियरिंग क्षेत्र में भव्य मशीन टूल्स द्वारा 250 करोड़ रुपए के निवेश से 300 रोजगार, केमिकल क्षेत्र में जय केमिकल इंडस्ट्रीज प्रालि द्वारा 200 करोड़ रुपए के निवेश से 100 रोजगार तथा पैकेजिंग क्षेत्र में बालाजी मल्टीफ्लेक्स प्रालि द्वारा 200 करोड़ रुपए के निवेश से 100 रोजगार के अवसर सृजित होंगे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि टेक्सटाइल क्षेत्र में श्रद्धा स्पन प्रालि द्वारा 160 करोड़ रुपए के निवेश से 600 रोजगार, अन्य क्षेत्र में इनर इंजीनियरिंग प्रोडक्ट्स एंड सिस्टम्स प्रालि द्वारा 150 करोड़ रुपए के निवेश से 160 रोजगार, एयरोस्पेस एवं डिफेंस क्षेत्र में ऑप्टिमाइज्ड ग्रुप द्वारा 100 करोड़ रुपए के निवेश से 120 रोजगार, फूड प्रोसेसिंग क्षेत्र में जेएमके फूड द्वारा 50 करोड़ रुपए के निवेश से 80 रोजगार, केमिकल क्षेत्र में विबफास्ट ग्रुप द्वारा 50 करोड़ रुपए के निवेश से 75 रोजगार तथा अरुणाया ऑर्गेनिक्स लिमिटेड द्वारा 25 करोड़ रुपए के निवेश से 50 रोजगार के अवसर सृजित होने की संभावना है। इन सभी निवेश प्रस्तावों से कुल 8 हजार 635 करोड़ रुपए का निवेश और 5 हजार 785 रोजगार सृजित होने की संभावना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि मध्यप्रदेश को पिछले ढाई वर्षों में 34 लाख करोड़ रुपए से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जबकि 10 लाख करोड़ रुपए से अधिक का निवेश धरातल पर उतर चुका है। उन्होंने निवेशकों को आगामी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2027 में सहभागिता के लिए आमंत्रित किया।

घूमें बेफिक्र होकर, IRCTC के नए टूर पैकेज से बिना प्लानिंग के करें दर्शन-पूजन!

IRCTC ने ‘गंगा गया संगम यात्रा’ नाम से 8 दिन और 7 रात का नया धार्मिक टूर शुरू किया है। इस पैकेज में गया, वाराणसी, सारनाथ, प्रयागराज, अयोध्या, लखनऊ और नैमिषारण्य जैसे पवित्र स्थलों के दर्शन कराए जाएंगे। फ्लाइट, होटल, खाने, एसी वाहन और ट्रैवल इंश्योरेंस जैसी कई फैसिलिटी भी पैकेज में हैं। इस तरह से श्रद्धालुओं को अलग-अलग बुकिंग करने की चिंता नहीं करनी पड़ेगी।

यात्रा की शुरुआत

विष्णुपद मंदिर, पर्यटन, 2023 - बोध गया | विष्णुपद मंदिर की तस्वीरें - Tripinvites - TripInvites

यह तीर्थयात्रा 2 सितंबर 2026 को हैदराबाद से शुरू होगी। पहले फ्लाइट से गया पहुंचाया जाएगा, जहां होटल में ठहरने के बाद महाबोधि मंदिर और आसपास के बौद्ध मठों के दर्शन कराए जाएंगे। इसके बाद अगले दिन विष्णुपद मंदिर और मंगला गौरी शक्तिपीठ देखने का मौका मिलेगा। यहां से सड़क मार्ग से वाराणसी के लिए रवाना हुआ जाएगा।

काशी और सारनाथ 

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वाराणसी में यात्रियों को तीन रात रुकने का मौका मिलेगा। यहां काशी विश्वनाथ मंदिर, गंगा घाट, शाम की भव्य गंगा आरती और शहर के पुराने बाजार देखने का मौका मिलेगा। अगले दिन सारनाथ की सैर भी कराई जाएगी, जहां भगवान बुद्ध ने अपना पहला उपदेश दिया था। यहां आप चाहें तो खाली समय में खरीदारी भी कर सकते हैं।

प्रयागराज और अयोध्या 

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वाराणसी के बाद यात्रा प्रयागराज पहुंचेगी। यहां श्रद्धालु त्रिवेणी संगम और अलोपी देवी मंदिर के दर्शन करेंगे। इसके बाद अयोध्या ले जाया जाएगा, जहां रामलला मंदिर और भी कई प्रमुख धार्मिक स्थलों के दर्शन कराए जायेंगे। यहां की आध्यात्मिक शांति और भक्ति का माहौल बहुत ही सुख देता है।

लखनऊ और नैमिषारण्य

अयोध्या से निकलकर यात्रा लखनऊ पहुंचेगी। यहां से नैमिषारण्य की यात्रा कराई जाएगी, जिसे हिंदू धर्म के सबसे प्राचीन तीर्थ स्थलों में सबसे खूबसूरत है। वापसी पर लखनऊ का फेमस बड़ा इमामबाड़ा भी दिखाया जाएगा। इसके बाद फ्लाइट से वापस हैदराबाद लौटकर जर्नी पूरी होगी।

यात्रा की सुविधाएं

इस टूर में आने-जाने की फ्लाइट, सात रात होटल में ठहरने की फैसिलिटी, सात बार नाश्ता, सात बार डिनर और एक बार लंच शामिल है। इसके साथ ही एसी वाली गाड़ी से घूमना, ट्रैवल इंश्योरेंस, IRCTC टूर एस्कॉर्ट और सभी जरूरी टैक्स भी पैकेज में हैं। यानी ट्रिप में आपको अलग-अलग बुकिंग करने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी।

पैकेज कॉस्ट 

इस पैकेज की कीमत कमरे और लोगों के हिसाब से की गई है। सिंगल रूम के लिए ₹54,800, दो लोगों के साथ रुकने पर ₹41,000 प्रति व्यक्ति और तीन लोगों के साथ रुकने पर ₹38,750 प्रति व्यक्ति खर्च आएगा। अपनी जरूरत और बजट के हिसाब से आप इस पैकेज को चुन सकते हैं।

इन बातों का रखें ध्यान

इस पैकेज में मंदिरों या स्मारकों के एंट्री टिकट शामिल नहीं हैं। इसके साथ ही ऑटो-रिक्शा, बैटरी वाहन, विशेष पूजा, गाइड, टिप्स, लॉन्ड्री, ड्रिंक्स, बोतलबंद पानी और दूसरे अपने खुद के खर्च यात्रियों को खुद उठाने होंगे। इसलिए ट्रिप पर निकलने से पहले इन एक्स्ट्रा खर्चों को ध्यान में रखकर तैयारी करें।

देवभूमि में कांवड़ियों का भव्य स्वागत, पुष्पवर्षा और चरण प्रक्षालन से किया अभिनंदन, CM धामी ने परोसा भोजन

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धर्मनगरी हरिद्वार में कांवड़ यात्रा के दौरान मंगलवार को आस्था, सेवा और संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिला। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में देवभूमि उत्तराखंड ने देश के विभिन्न राज्यों से आए शिवभक्त कांवड़ियों का आत्मीय स्वागत और अभिनंदन किया। राज्य सरकार की ओर से आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में श्रद्धालुओं के सम्मान के साथ-साथ कांवड़ यात्रा के सुरक्षित, सुव्यवस्थित और सफल संचालन के लिए किए जा रहे प्रयासों का भी संदेश दिया गया।

 

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के हरिद्वार आगमन पर हरकीपैड़ी से लेकर कांवड़ यात्रा मार्ग पर हेलीकॉप्टर से शिवभक्तों पर पुष्पवर्षा कर उनका स्वागत किया गया। अलकनंदा होटल परिसर में आयोजित भव्य समारोह में मुख्यमंत्री ने पाँच शिवभक्त कांवड़ियों का चरण प्रक्षालन कर उनका सम्मान किया।  

 

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कांवड़ यात्रियों की स्वास्थ्य सहायता एवं सुविधाओं के लिए स्थापित मुख्यमंत्री स्वास्थ्य सेवा शिविर का उद्घाटन किया। उन्होंने शिविर में उपलब्ध चिकित्सकीय सुविधाओं का अवलोकन किया और श्रद्धालुओं को त्वरित उपचार, आवश्यक दवाइयां तथा अन्य स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्थाओं की जानकारी ली।

 

मुख्यमंत्री ने देश के विभिन्न राज्यों से आए शिवभक्त कांवड़ियों के बीच पहुंचकर उनका स्वागत किया और अपने हाथों से भोजन परोसा।

 

काँवड़ यात्रियों के अभिनदंन कार्यक्रम के अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड सरकार का संकल्प है कि देवभूमि आने वाले प्रत्येक शिवभक्त को सुरक्षित, सुगम और सम्मानजनक वातावरण मिले। कांवड़ यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारत की सनातन परंपरा, सामाजिक समरसता और आध्यात्मिक चेतना का विराट पर्व है। इसके सफल आयोजन के लिए राज्य सरकार सभी संबंधित विभागों के समन्वय से निरंतर कार्य कर रही है।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले पाँच वर्षों से उन्हें कांवड़ यात्रा के दौरान शिवभक्तों के बीच आने और उनकी सेवा करने का अवसर प्राप्त हो रहा है। उन्होंने कहा कि भगवान शिव का नाम करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए आस्था, ऊर्जा और विश्वास का आधार है। कठिन परिस्थितियों में भी शिवभक्त सैकड़ों किलोमीटर की यात्रा पूरी करते हैं और “बम-बम भोले” के जयघोष के साथ अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं। कांवड़ यात्रा अनुशासन, सेवा, समर्पण और सामाजिक एकता का भी प्रतीक है।

 

मुख्यमंत्री ने बताया कि इस वर्ष अब तक एक करोड़ से अधिक शिवभक्त गंगाजल लेकर सफलतापूर्वक अपने गंतव्य की ओर प्रस्थान कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की सांस्कृतिक विरासत और आध्यात्मिक स्थलों के संरक्षण एवं विकास का व्यापक कार्य हो रहा है। काशी विश्वनाथ धाम, महाकाल लोक, श्रीराम जन्मभूमि, केदारनाथ धाम के पुनर्निर्माण और बद्रीनाथ मास्टर प्लान जैसी परियोजनाएं भारतीय संस्कृति को वैश्विक स्तर पर नई पहचान प्रदान कर रही हैं।

 

उन्होंने केदारनाथ आपदा का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2013 की आपदा के बाद प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में केदारनाथ धाम का पुनर्निर्माण कर इसे भव्य और दिव्य स्वरूप दिया गया है। वहां आस्था पथ, सरस्वती घाट, आदि शंकराचार्य की प्रतिमा, तीर्थ पुरोहित आवास सहित अनेक सुविधाओं का विकास किया गया है। उन्होंने कहा कि हरिद्वार में प्रस्तावित गंगा कॉरिडोर और शारदा कॉरिडोर जैसी योजनाएं राज्य के विकास और धार्मिक पर्यटन को नई दिशा प्रदान करेंगी।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वाेच्च प्राथमिकता है। इसके लिए यात्रा मार्गों पर सीसीटीवी कैमरे, ड्रोन निगरानी, एंबुलेंस सेवाएं, स्वास्थ्य शिविर और आपातकालीन सहायता व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं। उन्होंने शिवभक्तों से यात्रा के दौरान अनुशासन, मर्यादा और धार्मिक परंपराओं का पालन करने की अपील की।

उन्होंने पुलिस, प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग, पर्यावरण मित्रों, स्वच्छता कर्मियों, स्वयंसेवी संस्थाओं और अन्य सेवा कार्यों में जुटे कर्मयोगियों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि सभी का सामूहिक सहयोग ही इस विशाल आयोजन को सफल बनाता है। मुख्यमंत्री ने कांवड़ यात्रा के सफल संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले पाँच पुलिसकर्मियों तथा पाँच पर्यावरण मित्रों को सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान केवल कुछ व्यक्तियों का नहीं, बल्कि उन सभी कर्मयोगियों के प्रति राज्य की कृतज्ञता का प्रतीक है, जो यात्रा के दौरान सुरक्षा, स्वच्छता, स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य व्यवस्थाओं को सुचारु बनाए रखने में दिन-रात जुटे हुए हैं।

 

इस अवसर पर महामण्डलेश्वर ललितानंद गिरी महाराज, कैबिनेट मंत्री श्री मदन कौशिक, श्री प्रदीप बत्रा एवं श्री राम सिंह कैड़ा, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती किरण चौधरी, विधायक रानीपुर श्री आदेश चौहान, हरिद्वार की मेयर श्रीमती किरण जैसल, रुड़की की मेयर श्रीमती अनिता अग्रवाल, पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी यतीश्वरानंद, भाजपा जिलाध्यक्ष श्री आशुतोष शर्मा, पूर्व विधायक श्री संजय गुप्ता, राज्य मंत्री श्री देशराज कर्णवाल, श्री दिनेश कौशिक, डॉ. जयपाल सिंह चौहान, श्री श्यामवीर सैनी, श्री शोभाराम प्रजापति, श्री नितिन गौतम, शिवालिक नगर पालिका अध्यक्ष श्री राजीव शर्मा, गंगा सभा के महामंत्री तन्मय वशिष्ठ, भाजपा युवा मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष श्री विक्रम भुल्लर, पूर्व मेयर मनोज गर्ग, गढ़वाल आयुक्त श्री आनंद स्वरूप, मेलाधिकारी श्रीमती सोनिका, आईजी गढ़वाल श्री राजीव स्वरूप, आईजी (कुंभ मेला) श्री योगेन्द्र सिंह रावत, जिलाधिकारी श्री मयूर दीक्षित, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री नवनीत सिंह भुल्लर, एसएसपी (कुंभ मेला) श्री आयुष अग्रवाल, नगर आयुक्त श्री नंदन कुमार, मुख्य विकास अधिकारी डॉ. ललित नारायण मिश्र, पुलिस अधीक्षक (यातायात) श्रीमती निशा यादव, अपर जिलाधिकारी श्री जितेंद्र कुमार, पुलिस अधीक्षक नगर श्री अभय प्रताप सिंह, सचिव एचआरडीए श्री प्रत्यूष सिंह तथा उपजिलाधिकारी हरिद्वार श्री योगेश मेहरा, उप मेलाधिकारी मनजीत सिंह, सहित अन्य जनप्रतिनिधि, संत-महात्मा, गणमान्य नागरिक एवं बड़ी संख्या में शिवभक्त कांवड़िए उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन अपर मेलाधिकारी श्री दयानंद सरस्वती ने किया।

चलो बुलावा आया है! सावन में ऐसे बनाएं 12 ज्योतिर्लिंग दर्शन का परफेक्ट प्लान

सावन का पवित्र महीना भगवान शिव की भक्ति और आस्था के लिए खास माना जाता है। इस महीने में देशभर के 12 ज्योतिर्लिंगों में दर्शन के लिए भक्तों की भारी भीड़ होती है। हर ज्योतिर्लिंग की अपनी अलग महिमा और धार्मिक महत्व होता है, जहां सावन में जलाभिषेक और पूजा-अर्चना का विशेष महत्व होता है। ऐसे ही है ये ज्योतिर्लिंग जहां सावन में भक्तों की धूम मची होती है:

Somnath Jyotirlinga (सोमनाथ ज्योतिर्लिंग) – गुजरात

Somnath Temple:हवा में तैरता था शिवलिंग और 8 करोड़ साल पुराना है मंदिर, क्या है सोमनाथ मंदिर का रहस्य? - Somnath Temple Facts A Jyotirlinga Full Of Miracles And Mysteries Somnath Temple -

सावन में सोमनाथ मंदिर में सुबह से ही भक्तों की लाइन लग जाती है। यहां रुद्राभिषेक, शिव आरती और मंत्र जाप के साथ सावन सोमवार का पर्व धूमधाम से मनाया जाता है।

Mahakaleshwar Jyotirlinga (महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग) – उज्जैन, मध्य प्रदेश

Somnath Temple Shivling Images HD | First Jyotirlinga Wallpapers

सावन में बाबा महाकाल की भस्म आरती और श्रृंगार दर्शन भक्त करते हैं। हर सोमवार को भगवान महाकाल की सवारी निकाली जाती है।

Kedarnath Jyotirlinga (केदारनाथ ज्योतिर्लिंग) – उत्तराखंड

केदारनाथ ज्योतिर्लिंग मंदिर, रुद्रप्रयाग (उत्तराखंड) | दर्शन जानकारी | Reviving Cultures

सावन में केदारनाथ धाम में शिव भक्त हर-हर महादेव के जयकारों के साथ पूजा करते हैं। मंदिर में अभिषेक और धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। हिमालय की गोद में बसे इस पवित्र धाम में सावन में ऊर्जा और भक्ति का माहौल देखने को मिलता है।

Kashi Vishwanath Jyotirlinga (काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग) – वाराणसी, उत्तर प्रदेश

काशी विश्वनाथ, केदारनाथ और बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग | भारत के 12 ज्योतिर्लिंग: शिवभक्तों के लिए पवित्र यात्रा – Sadhana Shop

सावन में काशी विश्वनाथ मंदिर में कांवड़ियों और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रहती है। भक्त गंगाजल से बाबा विश्वनाथ का जलाभिषेक करते हैं। सावन सोमवार के दिन यहां आरती और पूजा में शामिल होने के लिए देशभर से भक्त पहुंचते हैं।

Trimbakeshwar Jyotirlinga (त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग) – नासिक, महाराष्ट्र

काशी विश्वनाथ मंदिर 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है - A Great Hindu Temple kashi vishvanath temple-Varanasi

सावन में यहां रुद्र पूजा, अभिषेक और मंत्रों का जाप किया जाता है। भक्त भगवान शिव से सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। गोदावरी नदी के उद्गम स्थल के कारण सावन में इस धाम का महत्व और भी बढ़ जाता है।

Baidyanath Jyotirlinga (बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग) – देवघर, झारखंड

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सावन में बैद्यनाथ धाम में कांवड़ यात्रा की धूम रहती है। भक्त दूर-दूर से गंगाजल लाकर बाबा का जलाभिषेक करते हैं। सावन के पूरे महीने मंदिर परिसर में शिव भक्तों की आस्था और भक्ति का अनोखा रूप दिखाई देता है।

Rameshwaram Jyotirlinga (रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग) – तमिलनाडु

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सावन में रामेश्वरम मंदिर में विशेष पूजा और अभिषेक होते हैं। भक्त पवित्र कुंडों में स्नान कर शिव आराधना करते हैं। समुद्र किनारे स्थित यह ज्योतिर्लिंग सावन में धार्मिक आस्था और शांति का खास केंद्र बन जाता है।

Nageshwar Jyotirlinga (नागेश्वर ज्योतिर्लिंग) – गुजरात

नागेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर - स्थान, वास्तुकला, तस्वीरें

सावन में मंदिर में रुद्राभिषेक और महामृत्युंजय मंत्र का जाप किया जाता है। भक्त भगवान शिव जी से आशीर्वाद लेते है और प्रार्थना करते हैं। सावन में यहां भक्तों की भीड़ और शिव भक्ति की धूम देखने लायक होता है।

Bhimashankar Jyotirlinga (भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग) – महाराष्ट्र

Gallery - Jyotirlinga Bhimashankar

सावन में यहां शिव भक्तों की लंबी लाइन लगती हैं। पूजा, आरती और भक्ति कार्यक्रम किए जाते हैं। हरियाली से घिरे इस धाम में सावन के दौरान श्रद्धालु शिव भक्ति में नजर आते हैं।

Grishneshwar Jyotirlinga (घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग) – महाराष्ट्र

घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर, संभाजीनगर (Maharashtra) | दर्शन जानकारी | Reviving Cultures

सावन के महीने में मंदिर को सजाया जाता है और भक्त जलाभिषेक व पूजा करके भगवान शिव का आशीर्वाद लेते हैं। सावन सोमवार के दिन यहां दर्शन और पूजा का महत्व और भी बढ़ जाता है।

Omkareshwar Jyotirlinga (ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग) – मध्य प्रदेश

सावन ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग विशेष! उत्तम स्वास्थ्य, नज़र दोष और नकारात्मक ऊर्जाओं से रक्षा के लिए भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करें।

सावन में नर्मदा नदी के किनारे स्थित ओंकारेश्वर में विशेष आरती और धार्मिक आयोजन होते हैं। भक्त नर्मदा जल से शिवलिंग का अभिषेक करते हैं। नर्मदा तट पर होने वाली शिव आरती भक्तों को आध्यात्म की अनुभूति देती है।

Mallikarjuna Jyotirlinga (मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग) – आंध्र प्रदेश

ऋग्वेद में आया सोमनाथ मंदिर का जिक्र, चंद्रमा से सीधा कनेक्शन; जानें कैसे बना ज्योतिर्लिंग

सावन में मंदिर में विशेष श्रृंगार, पूजा और अभिषेक किए जाते हैं। भक्त शिव-पार्वती की आराधना कर मनोकामनाएं मांगते हैं। सावन के दौरान यह धाम भगवान शिव और माता पार्वती की भक्ति का प्रमुख केंद्र बन जाता है।