क्या है भारत की आर्थिकी का इंजन?

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बेसिक सवाल है! इस सप्ताह रिजर्व बैंक के ब्याज दर फैसले, शेयर बाजार, जीडीपी की हवाबाजी, लुढ़कते रुपए, भारत से भागती पूंजी जैसे तथ्यों से बेसिक सवाल है कि तब देश की आर्थिकी भला चल कैसे रही है? वह प्लेटफॉर्म पर खड़ी है या वह उस छुक-छुक इंजन से बंधी है जो भाप छोड़ रहा है पर न कोयला है न बॉयलर में भभकती आग है?

आप भी सोचें, भारत के हर बंदे को सोचना चाहिए कि आखिर भारत की आर्थिकी के पहियों का मौजूदा इंजन है क्या?

पहले देश विशेष की ताक़त उसकी फ़ौज, कारखानों और खेतों से मापी जाती थी। अब पैसे से है। मतलब पूंजी, कमाई, बचत, श्रीवृद्धि, लक्ष्मी की चंचलता प्राथमिक कसौटी (वैश्विक भी) है। इस मायने में भारत की रियलिटी क्या है? क्या यह रियलिटी नहीं है कि देश के अमीर, देश की बुद्धि भारत छोड़ विदेश जा बस रही है? क्या यह खबर नहीं है कि विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) भारतीय शेयर बाजार से पूंजी निकाल कर दूसरे देशों के बाजारों में निवेश कर रहे हैं? मतलब भारत का शेयर बाजार जोखिम भरा, कम कमाई का है वही इंडोनेशिया हो या तुर्किये, आसियान देश वैश्विक पूंजी के लिए इसलिए कमाई वाले हैं क्योंकि इन देशों की इकोनॉमी सचमुच तेजी से बढ़ती हुई है।

सोचें, सरकारी आंकड़ों के अनुसार भारत में अप्रैल-जून 2026 में वास्तविक जीडीपी वृद्धि 7.8 प्रतिशत थी, जबकि सकल मूल्य वर्धन (GVA) की बढ़ोतरी 8.2 प्रतिशत। सात अक्टूबर को रिज़र्व बैंक ने पूरे वित्त वर्ष 2026-27 की विकास दर का अनुमान बढ़ा कर 7.1 प्रतिशत किया। अब यदि भारत की वास्तविक अर्थव्यवस्था 7.8 प्रतिशत बढ़ रही है, तो उसकी करेंसी, रुपया और शेयर बाज़ार क्यों लगातार कमजोर होता हुआ है? गुरूवार को सेंसेक्स फिर भारी गिरा। तथ्य है कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने वर्ष 2026 में अब तक लगभग 30.4 अरब डॉलर के भारतीय शेयर बेचे है। अकेले अक्टूबर के शुरुआती नौ दिनों में लगभग 47,000 करोड़ रुपए के भारतीय शेयरों को विदेशियों ने बेचा।

दुनिया के किसी भी पैमाने पर यह मामूली उतार-चढ़ाव नहीं है। सो, सीधा सवाल है एक तरफ भारत में उत्पादन बढ़ने के सरकारी आंकड़े हैं, वहीं विदेशी निवेशक भारत की कंपनियों के भविष्य को लेकर घबराए हुए हैं, उनके शेयर बेच भाग रहे हैं? ऐसे ही भारत की करेंसी विदेशी बाजार में कौड़ियों वाली हैसियत में है। इस वर्ष डॉलर के मुक़ाबले रुपए का मूल्य सात प्रतिशत से अधिक गिर चुका है।

सरकारी दावा है कि आर्थिकी की रेलगाड़ी तेज़ विकास, डिजिटल अर्थव्यवस्था, रिकॉर्ड जीएसटी संग्रह, कंक्रीटों में नजर आते बुनियादी ढांचे से दुनिया की सर्वाधिक तेज़ बुलेट ट्रेन है। वहीं रियलिटी में गाड़ी प्लेटफॉर्म पर छुक-छुक करते हुए है। बाज़ार की हकीकत, भारतीय करेंसी के घटते भाव, विदेशी पूंजी के भागने, अब नई ऊंची ब्याज दर, महंगा तेल-ईंधन, महंगे कर्ज व व्यापारियों, अमीरों का भागना या हाथ पर हाथ धरे बैठे होना है।

कह सकते हैं कि खेती, आईटी कंपनियां, सेवा क्षेत्र, मेक इन इंडिया के कारखानों की भाप से आर्थिकी का इंजन सरपट भागता हुआ है। पर खेती यदि खुशहाल होती तो किसानों के पेट नहीं भरे होते! किसान तब दो-दो हजार रुपए की प्रधानमंत्री की रेवड़ी पर टकटकी लगाए उसका इंतजार क्या करते हुए होते? सब्जी बाजार, आटे-तेल के दाम क्या आम आदमी का जीना हराम ऐसा किए हुए होते जो रिजर्व बैंक को महंगाई के हवाले ब्याज दर बढ़ाने का फैसला करना पड़ता? ऐसी ही आईटी कंपनियों, सेवा क्षेत्र की कंपनियों के शेयर बाजार में लुढ़कने का औसत है। भारत की आईटी कंपनियों की अमेरिका में हुई एआई क्रांति से लुटिया डूबती हुई है। इन कंपनियों में ही निवेशित पूंजी सर्वाधिक भाग रही है। और मेक इन इंडिया या इंफ्रास्ट्रक्चर की तो बात ही नहीं होनी चाहिए। अंबानी हो, अडानी हो, एयरलाइंस सेक्टर हो या टेक्सटाइल सेक्टर या बैंकिंग सब महंगाई बढ़ा रहे हैं या बांग्लादेश, वियतनाम, आसियान देशों से पिट रहे हैं या आर्थिकी का कर्जा बढ़ा रहे हैं। बट्टेखाते में भारत की पूंजी, बचत वैसे ही जा रही है जैसे शेयर बाजार के चक्कर में मध्यवर्गीय नौकरीपेशा नौजवानों ने म्यूचुअल फंड (एसआईपी) के जरिए अपनी बचत को शेयर बाज़ार में उड़ेला, जबकि खर्चों के लिए कर्ज लेकर अपने आपको ब्याज (जो महंगा होना ही है) के चक्रव्यूह में फंसाया।

सो, पूंजी देशी (कभी भारत में घर-परिवार रिकॉर्ड बचत किया करते थे) हो या विदेशी वह भारत की इकोनॉमी को दौड़ाती हुई नहीं है। न ही भारत की उत्पादकता (यदि होती तो चीन के आयातों पर क्या खतरनाक स्तर पर आश्रित होते?) का इंजन है। तो ले देकर पैसे की मालिक या तो सरकार, उसके खर्च और बाबुओं का भ्रष्टाचार है या सरकारी कृपाओं के क्रोनी खरबपति याकि अडानी-अंबानी जैसे देशी जगत सेठ हैं। इन सबकी ऊर्जा के इंजन का नाम क्या है? 140 करोड़ लोगों का पेट! हां, भारत के 140 करोड़ लोगों की बुनियादी भूख, जीने का संघर्ष ही 2026 की इंडियन इकोनॉमी की वह छुक-छुक रेलगाड़ी है, जिसमें फर्स्ट क्लास, मिडिल क्लास के कुछ डिब्बे हैं बाकी तो भूखे पेटों की आग, उसके हाथ-पांव मार कर जीने की जिजीविषा है!

क्या नहीं?

यूपी का मतलब अल्टीमेट पोटेंशियल, टेक्सटाइल सेक्टर बनेगा नई औद्योगिक ताकत : CM योगी

यूपी का मतलब अल्टीमेट पोटेंशियल, टेक्सटाइल सेक्टर बनेगा नई औद्योगिक ताकत : CM योगी

UP Textiles Conclave 2026

UP Textiles Conclave 2026: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यूपी का मतलब अप यानी ‘अल्टीमेट पोटेंशियल’ है। उत्तर प्रदेश के पास विरासत, हुनर, मानव संसाधन, उद्योग, उद्यमिता और देश का सबसे बड़ा बाजार है। दुनिया की सबसे युवा वर्कफोर्स भी हमारे पास है। अब इसी ताकत के सहारे उत्तर प्रदेश को ग्लोबल टेक्सटाइल हब बनाना है। हमारा लक्ष्य फाइबर से यार्न, यार्न से फैब्रिक, फैब्रिक से गारमेंट और गारमेंट से ब्रांड होते हुए ग्लोबल मार्केट तक पूरी वैल्यू चेन प्रदेश में विकसित करने का है।

 

मुख्यमंत्री योगी मंगलवार को दो दिवसीय यूपी टेक्सटाइल्स कॉन्क्लेव-2026 के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने यूपी टेक मित्र पोर्टल लॉन्च करने के साथ हथकरघा बुनकर समृद्धि योजना का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में टेक्सटाइल सेक्टर में 5,196 करोड़ रुपये के नए निवेश प्रस्तावों के एमओयू किए गए। साथ ही 163 करोड़ रुपये के लेटर ऑफ कम्फर्ट और 60 करोड़ रुपये की सब्सिडी का वितरण किया गया। मुख्यमंत्री ने देशभर से आए टेक्सटाइल सेक्टर के प्रतिष्ठित उद्यमियों, निवेशकों, निर्यातकों, प्रदेश के परंपरागत बुनकरों, हथकरघा संचालकों और इस क्षेत्र में भविष्य तलाश रहे युवाओं का स्वागत और अभिनंदन किया।

फैब्रिक सेक्टर में यूपी चौथा सबसे बड़ा निर्यातक राज्य

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश की टेक्सटाइल पहचान हजारों वर्षों पुरानी है। वैदिक साहित्य से लेकर रामायण और महाभारत तक में काशी के रेशमी वस्त्रों का उल्लेख मिलता है। वाराणसी की सिल्क साड़ी, भदोही का कारपेट, लखनऊ की चिकनकारी, बरेली की जरी, कानपुर का टेक्सटाइल इकोसिस्टम और मेरठ में टेक्निकल टेक्सटाइल की संभावनाएं प्रदेश की विरासत और औद्योगिक क्षमता का प्रमाण हैं।

 

प्रदेश में दो लाख हैंडलूम और पांच लाख से अधिक पावरलूम बुनकर इस सेक्टर की असली ताकत हैं। कृषि के बाद सर्वाधिक रोजगार का सृजन वस्त्र उद्योग करता है। उत्तर प्रदेश फैब्रिक मैन्युफैक्चरिंग में देश में तीसरे स्थान पर है और कुल फैब्रिक उत्पादन में उसकी हिस्सेदारी 13 से 14 प्रतिशत है। पिछले छह वर्षों में प्रदेश के वस्त्र, परिधान और हस्तशिल्प निर्यात में करीब 56 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। यूपी इस सेक्टर में देश का चौथा सबसे बड़ा निर्यातक राज्य बन गया है। वर्ष 2025-26 में 21 हजार करोड़ रुपये से अधिक के निर्यात के साथ गौतमबुद्ध नगर देश के प्रमुख निर्यातक जिलों में दूसरे स्थान पर पहुंचा है।

यूपी के 17 टेक्सटाइल उत्पादों को जीआई टैग

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने 2030 तक 350 बिलियन अमेरिकी डॉलर की टेक्सटाइल एवं अपैरल इकोनॉमी और 100 बिलियन डॉलर के निर्यात का लक्ष्य रखा है। इस राष्ट्रीय संकल्प में उत्तर प्रदेश अपनी पूरी क्षमता से भागीदारी करेगा। ओडीओपी के माध्यम से प्रदेश के 35 से अधिक जिलों के वस्त्र और हैंडलूम उत्पादों को नई पहचान मिली है। प्रदेश के 17 टेक्सटाइल उत्पादों को जीआई टैग मिल चुका है। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से लाखों महिलाएं भी इस सेक्टर से जुड़कर आत्मनिर्भर हो रही हैं। दुनिया की सबसे युवा वर्कफोर्स प्रदेश में उपलब्ध है, जो टेक्सटाइल सेक्टर को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

2017 से पहले वसूली की पर्ची लेकर लौट जाते थे निवेशक

मुख्यमंत्री ने पिछली सरकारों पर हमला करते हुए कहा कि 2017 से पहले प्रदेश की पहचान ‘वन डिस्ट्रिक्ट-वन माफिया’ की बन गई थी। हर जनपद में माफिया की समानांतर सरकार चलती थी। कानून व्यवस्था चौपट थी। माफिया जहां हाथ रख देता, वह जमीन उसकी हो जाती और तत्कालीन सरकार मौन बनी रहती थी। निवेशक व्यापार का सपना लेकर आता था और वसूली की पर्ची लेकर लौट जाता था। दंगे, कर्फ्यू, गुंडा टैक्स और माफिया के कारण उद्योग लगाना मुश्किल था। बिजली और विकास एक परिवार तक सीमित था। आज यूपी कर्फ्यू, दंगा, माफिया और उपद्रव से मुक्त है। अब किसी ने बेटी, व्यापारी या निवेशक की सुरक्षा में सेंध लगाने का दुस्साहस किया तो उसके लिए दो ही जगह होंगी- जेल या जहन्नुम। अब कोई यूपी में खुलेआम पिस्टल लहरा कर नहीं चल सकता।

यूपी का नाम सुनकर दूरी बना लेते थे लोग

सीएम ने कहा कि 2017 से पहले प्रदेश के नागरिकों के सामने पहचान का संकट पैदा हो गया था। यूपी का नाम सुनकर प्रदेश के बाहर लोग यहां के नागरिकों को किराये पर मकान देने और होटल में कमरा देने तक से कतराते थे। किसी समाज और नागरिक के लिए इससे बड़ी त्रासदी क्या हो सकती है। यूपी का परिचय देने पर व्यक्ति को कई बार सामाजिक रूप से दूरी का सामना करना पड़ता था। यहां कोई पर्व और त्योहार शांतिपूर्ण तरीके से नहीं गुजरता था। उत्सव से पहले ही उपद्रव शुरू हो जाता था। पूरे प्रदेश में लोग दंगों की आग में झुलसते थे। बरेली, मथुरा के कोसीकलां, मुजफ्फरनगर और सहारनपुर जैसे स्थानों पर बड़े दंगे हुए। व्यापक पैमाने पर पलायन हुआ और महीनों तक कर्फ्यू लगा रहा।

अराजकता का शिकार बनीं कानपुर की ऐतिहासिक कपड़ा मिलें

मुख्यमंत्री ने कहा कि कानपुर की ऐतिहासिक कपड़ा मिलें भी इसी अराजक व्यवस्था की शिकार बनीं। मगहर की कताई मिल 1977 में बनी और 1997 में बंद हो गई। बुनकरों और छोटे टेक्सटाइल उद्यमियों को बैंक से ऋण मिलने में भी कठिनाई होती थी। डीबीटी की व्यवस्था के अभाव में सरकारी योजनाओं का लाभ न तो नागरिकों तक पहुंचता था और न ही उद्यमियों तक। 2017 के बाद उत्तर प्रदेश में बड़ा बदलाव आया है। अब यहां कानून का राज है।

यूपी के पास हैं 36 सेक्टोरल पॉलिसी

सीएम ने कहा कि कानून व्यवस्था में बदलाव और निवेश अनुकूल नीतियों का परिणाम है कि आज प्रदेश के पास 36 सेक्टोरल पॉलिसी हैं। देश के 55 प्रतिशत मोबाइल और 60 प्रतिशत इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट का उत्पादन यूपी में हो रहा है। यूपी डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के 6 स्ट्रेटेजिक नोड में 35 हजार करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। प्रदेश में एमएसएमई के 12 प्लेज पार्क भी तैयार हो रहे हैं।

 

पिछले 9 वर्ष में यूपी पर कैपिटा इनकम तीन गुना करने और वूमेन वर्कफोर्स की भागीदारी भी तीन गुना बढ़ाने में सफल रहा है। यूपी पिछले 6 वर्षों से रेवेन्यू सरप्लस स्टेट है। यह निवेशकों का भरोसा है कि हमें पिछले 9 वर्षों में 50 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए, जिसमें 15 लाख करोड़ रुपये के प्रस्ताव धरातल पर उतर चुके हैं। 65 लाख से अधिक युवाओं को रोजगार दिलाने में सफलता मिली है। हमने हर एमएसएमई को 5 लाख रुपये की सोशल सिक्योरिटी गारंटी दी है। आज यूपी में सर्वाधिक 96 लाख एमएसएमई यूनिट हैं।

नोएडा बन रहा है अपैरल सिटी

उन्होंने कहा कि टेक्सटाइल इंडस्ट्री अब केवल धागे, कपड़े और फैशन तक सीमित नहीं है। डिफेंस, हेल्थकेयर, कृषि और स्पोर्ट्स जैसे क्षेत्रों में टेक्निकल टेक्सटाइल तेजी से उभर रहा है। इसलिए उत्तर प्रदेश को ट्रेडिशनल टेक्सटाइल से आगे बढ़कर टेक्निकल टेक्सटाइल में भी अपनी ताकत बढ़ानी होगी। पीएम मित्र पार्क और संत कबीर टेक्सटाइल पार्क जैसी पहल इसी दिशा में आगे बढ़ रही हैं। वाराणसी, अमरोहा, बरेली, संतकबीरनगर और बिजनौर में परियोजनाओं के लिए भूमि आरक्षित की गई है। सीतापुर, मऊ, कानपुर, झांसी और रायबरेली में टेक्सटाइल एवं अपैरल पार्क के लिए भूमि चिन्हित करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। नोएडा को अपैरल सिटी के रूप में विकसित किया जा रहा है।

ग्लोबल वैल्यू चेन पार्टनर बनें एमएसएमई

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार चाहती है कि एमएसएमई केवल सब-कॉन्ट्रैक्टर नहीं, ग्लोबल वैल्यू चेन के पार्टनर बनें। युवा केवल जॉब सीकर नहीं, टेक्सटाइल एंटरप्रेन्योर और इनोवेटर बनें तथा कारीगर केवल सप्लायर नहीं, अपने ब्रांड के मालिक बनें। ‘डिजाइन इन यूपी, मेड इन यूपी और एक्सपोर्टेड फ्रॉम यूपी’ के मंत्र से प्रदेश के हुनर को वैश्विक पहचान मिले। निफ्ट रायबरेली और उत्तर प्रदेश टेक्सटाइल टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट कानपुर युवाओं को आधुनिक जरूरतों के अनुरूप तैयार कर रहे हैं। यूपी आज पॉलिसी, इन्फ्रास्ट्रक्चर, टैलेंट और मार्केट हर स्तर पर तैयार है। अब प्रदेश की सांस्कृतिक पूंजी को आर्थिक पूंजी में बदलना है। बुनकर का हुनर, उद्यमी का कारोबार, युवाओं का रोजगार, महिलाओं की भागीदारी, निवेश और निर्यात बढ़ाकर उत्तर प्रदेश को दुनिया के प्रमुख टेक्सटाइल केंद्रों में स्थापित किया जाएगा।

 

कार्यक्रम में खादी एवं ग्रामोद्योग, रेशम, हथकरघा एवं वस्त्र उद्योग मंत्री राकेश सचान, उत्तर प्रदेश ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन के सीईओ मनोज कुमार सिंह, प्रमुख सचिव वस्त्र उद्योग अनिल कुमार सागर सहित देशभर के प्रमुख उद्यमी, निवेशक, निर्यातक और टेक्सटाइल सेक्टर के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

टेक्सटाइल कंपनी के शेयर में 20% का अपर सर्किट लगा, EV बिजनेस में बड़े प्लान का दिखा दम

टेक्सटाइल कंपनी Jindal Worldwide के शेयर में गुरुवार को जबरदस्त तेजी आई। शेयर 20% चढ़कर अपर सर्किट लगा और यह ₹48.22 पर बंद हुआ। ये स्टॉक का एक साल से ज्यादा समय का सबसे ऊंचा स्तर है। पिछले 6 महीने में स्टॉक 108.65% का रिटर्न दिया है।

इससे पहले मंगलवार को शेयर 10% चढ़ा था। बुधवार को इसमें करीब 4.5% की गिरावट आई। लेकिन गुरुवार को इसमें फिर से तेज खरीदारी देखने को मिली।

FY28 तक 100 शोरूम खोलने का प्लान

Jindal Worldwid की EV सब्सिडियरी Jindal Mobilitric ने बड़ा विस्तार प्लान बनाया है। कंपनी FY28 के अंत तक देशभर में करीब 100 शोरूम खोलना चाहती है।

FY27 के अंत तक करीब 40 शोरूम खोले जाएंगे। बाकी शोरूम FY28 में शुरू होंगे। कंपनी का कहना है कि वह EV ग्राहकों तक बेहतर तरीके से पहुंचना चाहती है। साथ ही आफ्टर-सेल्स सर्विस को भी मजबूत किया जाएगा।

अभी दो शोरूम, 52 डीलर जुड़े

कंपनी का अहमदाबाद स्थित मैन्युफैक्चरिंग प्लांट चालू हो चुका है। Jindal Mobilitric ने श्रीनगर और जयपुर में अपने पहले दो शोरूम खोले हैं।

कंपनी ने देशभर में 52 डीलर भी नियुक्त किए हैं। अब इन्हीं के जरिए कंपनी अपना रिटेल नेटवर्क बढ़ाएगी। उसका फोकस बड़े शहरों के साथ छोटे शहरों पर भी है।

अमित अग्रवाल फिर बने मैनेजिंग डायरेक्टर

Jindal Worldwide ने अमित यमुनादत्त अग्रवाल को फिर से मैनेजिंग डायरेक्टर नियुक्त किया है। उनका नया कार्यकाल तीन साल का होगा।

EV बिजनेस के विस्तार प्लान से शेयर में निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी है। यही वजह है कि गुरुवार को शेयर में फिर से तेज उछाल देखने को मिला।

Jindal Worldwide का बिजनेस क्या है?

Jindal Worldwide का मुख्य कारोबार टेक्सटाइल सेक्टर में है। कंपनी डेनिम फैब्रिक और दूसरे टेक्सटाइल प्रोडक्ट्स बनाती है। कंपनी का टेक्सटाइल बिजनेस उसका मुख्य कारोबार है। हालांकि, अब वह इलेक्ट्रिक व्हीकल सेक्टर में भी तेजी से कदम बढ़ा रही है।

कंपनी की सब्सिडियरी Jindal Mobilitric इलेक्ट्रिक व्हीकल बिजनेस संभालती है। कंपनी ने अहमदाबाद में अपना मैन्युफैक्चरिंग प्लांट शुरू कर दिया है। श्रीनगर और जयपुर में दो शोरूम खुल चुके हैं। अब कंपनी देशभर में रिटेल नेटवर्क बढ़ाने और EV मार्केट में अपनी मजबूत पहचान बनाने की तैयारी कर रही है।

Share Market Updates: सेंसेक्स दिन के हाई से 372 अंक तक लुढ़का, इन कारणों से बाजार ने गंवाई पूरी बढ़त

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

MP में निवेश का बड़ा मौका, 8,635 करोड़ के निवेश प्रस्ताव मिले, 5,700 से ज्यादा लोगों को मिलेगा रोजगार

MP में निवेश का बड़ा मौका, 8,635 करोड़ के निवेश प्रस्ताव मिले, 5,700 से ज्यादा लोगों को मिलेगा रोजगार

गुजरात के अहमदाबाद में आयोजित निवेश संवाद के दौरान मध्यप्रदेश को विभिन्न क्षेत्रों में 8 हजार 635 करोड़ रुपए के निवेश प्राप्त हुए हैं। इन प्रस्तावों से 5 हजार 785 से अधिक रोजगार के अवसर सृजित होंगे। निवेश संवाद में गुजरात के अहमदाबाद, सूरत, भावनगर, राजकोट और वडोदरा सहित प्रमुख औद्योगिक केंद्रों से 500 से अधिक उद्योगपतियों, निवेशकों एवं कॉर्पोरेट प्रतिनिधियों ने सहभागिता की और मध्यप्रदेश में निवेश के प्रति विशेष रुचि दिखाई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 12 अगस्त को अहमदाबाद में आयोजित मेगा निवेश संवाद इंटरैक्टिव सेशन ऑन इन्वेस्टमेंट अपॉर्च्युनिटीज इन मध्यप्रदेश में देशभर से आए प्रमुख उद्योगपतियों और निवेशकों को संबोधित किया।   

 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश व्यापार-व्यवसाय, नई औद्योगिक इकाइयों की स्थापना-विस्तार और बिजनेस एक्सटेंशन के लिए असीम संभावनाओं की धरती है। मध्यप्रदेश में निवेश हमेशा से ही फायदे का सौदा रहा है। उन्होंने देशभर के निवेशकों का प्रदेश की साढ़े आठ करोड़ जनता की ओर से स्वागत करते हुए कहा कि प्रदेश में निवेश करने वालों को हमारी सरकार हर संभव सुविधा, सुरक्षा और सहयोग उपलब्ध कराएगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए देश में चल रहे विकास यज्ञ का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश की नई औद्योगिक नीतियों को देश के उद्योग जगत से सराहना मिल रही है। उद्योग के संचालन के लिए मुख्यत: ठोस नीति, नेक नीयत और सहयोगी सरकार। मध्यप्रदेश में आपको यह तीनों ही मिलेंगे। मुख्यमंत्री ने गुजरात के उद्योग जगत को आगामी प्रस्तावित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2027, भोपाल के लिए आमंत्रित करते हुए कहा, आपके पास अनुभव है और हमारे पास अवसर। हमारे अवसरों को आपका अनुभव मिल जाए, तो हम मिलकर इतिहास रचेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उद्योगपतियों से मध्यप्रदेश के प्रगति पथ में सहयात्री बनने का आह्वान करते हुए कहा कि आइए, मध्यप्रदेश में बिना किसी संकोच के और खुले दिल से निवेश कीजिए तथा हमारे साथ विकास की इस ऐतिहासिक यात्रा का हिस्सा बनिए।

 

एमपी में किसी बात की चिंता नहीं

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में निवेशकों को बिजली, पानी और जमीन की चिंता करने की जरूरत नहीं है। औद्योगिक भूमि रियायती दरों पर लीज पर उपलब्ध है, पर्याप्त वाटर बैंक और सरप्लस बिजली है तथा प्लग एंड प्ले जोन विकसित किए जा रहे हैं। लगभग 19 हजार एकड़ में 48 नए इंडस्ट्रियल पार्क विकसित किए जा रहे हैं। सिंगल विंडो सिस्टम को 'समस्याओं का अंत, सेवा तुरंत' बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हर बाधा का समाधान एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है। सरल और सहज कनेक्टिविटी को प्रदेश की बड़ी ताकत बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश में 5 लाख किलोमीटर से अधिक सड़क नेटवर्क, मजबूत रेल कनेक्टिविटी, 8 एयरपोर्ट, 6 अंतर्देशीय कंटेनर डिपो, एक्सप्रेस-वे और हाईवेज़ उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में प्रशिक्षित और कुशल श्रम शक्ति भी बेहद आसानी से उपलब्ध है।

 

मध्यप्रदेश और गुजरात हैं जुड़वा भाई

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश और गुजरात के बीच औद्योगिक संभावनाओं एवं उच्च कोटि के परस्पर सहयोग का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों ही राज्य जुड़वा भाईयों की तरह हैं। उन्होंने कहा कि गुजरात के पास तकनीक, व्यापार और औद्योगिक अनुभव है, वहीं मध्यप्रदेश के पास प्रचुर जल, लैंड बैंक और देश के मध्य में स्थित होने का लॉजिस्टिक्स एडवांटेज है। दोनों राज्यों की इन्हीं बेजोड़ विशेषताओं के समन्वय से इस क्षेत्र में औद्योगिक विकास का नया इतिहास रचा जा सकता है। उन्होंने कहा कि गुजरात के पेट्रोकेमिकल, रसायन, टेक्सटाइल, फार्मा, फूड प्रोसेसिंग और ऑटोमोबाइल क्षेत्रों के लिए मध्यप्रदेश में व्यापक अवसर हैं। बीना में विशाल पेट्रोकेमिकल रिफाइनरी, उज्जैन में 360 एकड़ में विकसित हो रहा अत्याधुनिक मेडिकल डिवाइस पार्क, धार और नवसारी में पीएम मित्रा पार्क तथा पीथमपुर का मजबूत ऑटोमोबाइल आधार दोनों राज्यों की औद्योगिक साझेदारी की संभावनाओं को और मजबूत करते हैं। उन्होंने बताया कि पिछले ढाई वर्षों में प्रदेश को विभिन्न क्षेत्रों में 34 लाख करोड़ रुपए से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 10 लाख करोड़ रुपए से अधिक के प्रस्ताव धरातल पर उतर चुके हैं। नवीकरणीय ऊर्जा, पंप्ड हाइड्रो और बायोमास जैसी नीतियों से निवेश का रास्ता आसान हुआ है और इन क्षेत्रों में 7 लाख 19 हजार करोड़ रुपए का निवेश प्राप्त हुआ है।

mohan yadav

मां नर्मदा के दो बेटे देश के औद्योगिक विकास के लिए बढ़ रहे हैं साथ-साथ

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के काल से गुजरात की धरती देश को समृद्धि देती आई है। गुजरात ने महात्मा गांधी और सरदार वल्लभ भाई पटेल जैसे महापुरुष हमें दिए हैं। अब प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल में भारत दुनिया का अग्रणी देश बनने की ओर अग्रसर है। गुजरात और मध्यप्रदेश मां नर्मदा के दो बेटों की तरह हैं। नर्मदा के जल से दोनों प्रदेशों में पेयजल और सिंचाई के पर्याप्त पानी मिल रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने सरदार सरोवर बांध के लिए अपने संकल्प को पूरा किया है। दोनों राज्यों में उद्योग, व्यापार, संस्कृति सहित सभी क्षेत्रों में आगे बढ़ने के लिए अनुकूलता बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि उद्यमी पुरुषार्थ और व्यापार से कई लोगों को रोजगार और घर चलाने का अवसर मिलता है। हम 'जियो और जीने दो' के साहचर्य सिद्धांत पर आगे बढ़ने वाले लोग हैं।

 

समृद्धि वाली धरती है गुजरात

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मेगा निवेश संवाद कार्यक्रम में आए उद्योगपतियों और उद्यमियों का अभिनंदन करते हुए कहा कि गुजरात के साथ संबंध अनेक प्रकार से महात्मा गांधी के समय से है। स्वतंत्रता आंदोलन समर में सभी राज्य संयुक्त रूप से संघर्षरत थे। गुजरात से ही सरदार वल्लभभाई पटेल द्वारा आधुनिक भारत की नींव रखने का कार्य किया गया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने मध्यप्रदेश में शिक्षा ग्रहण की। गुजरात में वे द्वारकाधीश बने और जगद्गुरु भी बने। गुजरात की धरती ही कृष्ण को श्री लगाने वाली और समृद्धि देने वाली धरती है। अब एक बार फिर गुजरात और मध्यप्रदेश के साथ अब नया रिश्ता जुड़ रहा है। मध्यप्रदेश में उद्योगों की स्थापना के लिए गुजरात के सभी उद्यमी आमंत्रित हैं। उद्योगपतियों को मध्यप्रदेश में पूरा सहयोग प्राप्त होगा। गुजरात में पेट्रोकेमिकल , रसायन, टेक्सटाइल, फॉर्मा और एनर्जी सेक्टर में अपार संभावनाएं हैं। गुजरात का टेक्सटाइल तो दुनिया में प्रसिद्ध है। गुजरात के पास धार जिले में प्रधानमंत्री मोदी ने 2 हजार एकड़ में बन रहे टेक्सटाइल सेक्टर के पीएम मित्र पार्क का भूमिपूजन किया। यहां तेजी से निवेश आ रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी भी गुजरात से हैं। उनके नेतृत्व में भारत पूरे विश्व में सबसे अलग छवि बना रहा।

 

क्रियान्वित हो रहा समृद्धि का संकल्प

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश और गुजरात के मध्य समन्वय तेजी से बढ़ रहा है। इसमें प्रधानमंत्री मोदी का जो राज्यों की समृद्धि का संकल्प था , वह क्रियान्वित हो रहा। सरदार सरोवर परियोजना के संदर्भ में राज्यों के मध्य आवश्यक सहयोग पर बल दिया गया है। दोनों राज्यों के बीच प्रधानमंत्री मोदी के शासनकाल में केंद्र का पर्याप्त समुचित मार्गदर्शन प्राप्त हुआ है। राज्यों में परस्पर सहयोग और साथ रहे, इस दृष्टि से विभिन्न क्षेत्रों में राज्य समान रूप से आगे बढ़ें, यह अनुकूलता बढ़ रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सरकार ने औद्योगिक विकास के लिए ठोस नीतियां लागू की हैं। नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में मध्यप्रदेश में विशेष प्रयास हुए हैं। राज्य में बिजली की उपलब्धता सरप्लस है। मध्यप्रदेश की बिजली से दिल्ली में मेट्रो ट्रेन भी चल रही है। देश में सबसे सस्ती बिजली दर मध्यप्रदेश में है। राज्य सरकार ने उद्योगों के लिए अनुकूल नीतियों को लागू कर सकारात्मक वातावरण तैयार किया है। निवेशकों से किए हर वादे को पूरा करते हुए बड़े उद्योग और एमएसएमई ईकाइयों को पिछले माह तक की निवेश प्रोत्साहन राशि का भुगतान कर दिया गया है। सरकार ने अपनी प्रतिबद्धता के बलबूते बैकलॉग सब्सिडी को भी खत्म किया है।

 

युवाओं को हर क्षेत्र में मिल रहे अवसर

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने युवा दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि मध्यप्रदेश में युवाओं के लिए हर क्षेत्र में आगे बढ़ने के अवसर दिए जा रहे हैं। राज्य में टूरिज्म, आईटी, फूड प्रोसेसिंग सेक्टर में भी अपार संभावनाएं हैं। राज्य में इंदौर-उज्जैन मेट्रोपोलिटन सिटी और भोपाल सहित पड़ोसी जिले को जोड़कर मेट्रोपोलिटन सिटी तैयार करने का संकल्प लिया है। मध्यप्रदेश में सबसे तेज गति से मेडिकल कॉलेज खुल रहे हैं। सबसे तेज गति से उद्योगों की स्थापना हो रही है। मध्यप्रदेश देश में में सबसे कम बेरोजगारी दर वाला राज्य है। उन्होंने नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र के विकास में मध्यप्रदेश में हो रहे विशेष प्रयासों और अन्य सेक्टर में आ रहे निवेश का भी विवरण दिया। मुख्यमंत्री ने मध्यप्रदेश में उद्योगों के लिए अनुकूल नीतियों और सकारात्मक वातावरण की विस्तार पूर्वक जानकारी दी।

 

एमपी में अद्भुत टूरिज्म

गुजरात के वेलस्पन ट्रांसफॉर्मेशन सर्विस लिमिटेड के ऑनर चिंतन ठाकर ने मध्यप्रदेश में निवेश का अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि गुजरात और मध्यप्रदेश सिस्टर स्टेट होने के साथ-साथ देश के भविष्य के ग्रोथ इंजन हैं। वर्ष 2011 में हमारी कंपनी ने मध्यप्रदेश में प्रवेश किया। देवास-भोपाल रोड पर अपनी यूनिट शुरू की। हमने वॉटर पाइप्स तैयार किए। मध्यप्रदेश सरकार ने केवल 12 महीने में उद्योग स्थापना के लिए जरूरी सभी अनुमतियां दे दीं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में उद्यमियों और निवेशकों की सभी देनदारियां लगातार भुगतान की जा रही हैं। सिम्फनी लिमिटेड कंपनी के सीएमडी एवं कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्रीज की गुजरात स्टेट कांउसिल के चेयरमेन  अचल बेकेरी ने कहा कि मध्यप्रदेश अतुल्य भारत का हृदय प्रदेश है। हाल के वर्षों में पर्यटन के क्षेत्र में मध्यप्रदेश ने नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। घरेलू पर्यटकों की संख्या 14 करोड़ से अधिक दर्ज की गई। अब घरेलू पर्यटन के क्षेत्र में मध्यप्रदेश पारंपरिक तौर पर गोवा और हिमाचल प्रदेश की श्रेणी में शामिल हो रहा है। धार्मिक पर्यटन के लिए उज्जैन और चित्रकूट, वन्यजीव पर्यटन के लिए बांधवगढ़, कान्हा और पेंच राष्ट्रीय उद्यान, ऐतिहासिक विरासत के लिए खजुराहो, मांडू और सांची प्रसिद्ध पर्यटन स्थल हैं। राज्य में बढ़ते टूरिज्म को देखते हुए मध्यप्रदेश सरकार ने होमस्टे की संख्या बढ़ाने का निर्णय लिया है। टूरिज्म राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के साथ ही स्थानीय लोगों को रोजगार भी प्रदान कर रहा है। गुजराती समुदाय के लिए मध्यप्रदेश में हॉस्पिटिलिटी सेक्टर में अपार संभावनाएं नजर आ रही हैं। कई गुजराती निवेशक मध्यप्रदेश को अपने दूसरे घर के रूप में देखते हैं। राज्य में नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भी बेहतर कार्य हुए हैं। गुजरात में पहले हुई इन्वेस्टर्स मीट में हजारों करोड़ों के निवेश प्रस्ताव मध्यप्रदेश पर भरोसा दिखाते हैं। राज्य में उद्योग मित्र नीतियां, पारदर्शिता और निवेश अनुकूल वातावरण निवेशकों को आकर्षित कर रहा है।

 

एमपी में निवेश के लिए अनुकूल माहौल

अपर मुख्य सचिव, औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन नीरज मंडलोई ने निवेशकों को मध्यप्रदेश की विशेषताओं के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि हमारे पड़ोसी राज्य गुजरात ने हमेशा अपनी उद्यमिता, चुनौतियों का सामना करने और नवाचारों से देश को प्रेरित किया है। मध्यप्रदेश में उद्योग स्थापित करने के लिए एक लाख एकड़ से अधिक का लैंड बैंक उपलब्ध है। राज्य में 8 एयरपोर्ट, 22 रेल जंक्शन और तेजी से बढ़ता लॉजिस्टिक्स कॉरिडोर इसे बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करते हैं। राज्य सरकार ने 8 डेडिकेटेड इंडस्ट्रियल पार्क विकसित करने का संकल्प लिया है। उन्होंने कहा कि इनमें मुरैना में फुटवियर पार्क, उज्जैन में मेडिकल डिवाइस, रायसेन में प्लास्टिक पार्क भी शामिल हैं। सेक्टर आधारित क्लस्टर हमारी विशेषता हैं। नीति आयोग ने मध्यप्रदेश को निवेश प्रोत्साहन नीतियों के निर्माण के मामले में शीर्ष राज्य घोषित किया है। हमारी उद्योग आधारित नीतियों को देश के दूसरे राज्य भी अपना रहे हैं। राज्य की पॉलिसी निर्यात, निवेश अनुदान को भी बढ़ावा दे रही हैं। मध्यप्रदेश जनवरी-फरवरी 2027 में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट का आयोजन करने जा रहा है। मध्यप्रदेश देश का सबसे बड़ा गेहूं उत्पादक, तीसरा सबसे बड़ा दूध उत्पादक है। फूड प्रोसेसिंग के लिए राज्य में कच्चे माल की पर्याप्त उपलब्धता है। उन्होंने कहा कि पीथमपुर में ऑटो सेक्टर का सबसे बड़ा टेस्टिंग ट्रैक है। धार जिले में टेक्सटाइल सेक्टर का देश के सबसे बड़ा पीएम मित्र पार्क स्थापित किया जा रहा है, जिसमें अब तक 2 हजार करोड़ से अधिक का निवेश मिल चुका है। मध्यप्रदेश की ईज ऑफ डूइंग बिजनेस पॉलिसी निवेशकों को हर क्षेत्र में मदद कर रही हैं। भोपाल, जबलपुर और उज्जैन में नए इंडस्ट्रियल पार्क विकसित करने पर काम चल रहा है। ग्वालियर में केंद्र सरकार के सहयोग से देश का पहला टेलीकॉम मैन्यूफेक्चरिंग जोन (टीएमजेड) विकसित किया जा रहा है। पर्यटन भविष्य में रोजगार का सबसे बड़ा जरिया बनेगा। मध्यप्रदेश वन्यजीव पर्यटन और धार्मिक पर्यटन में अग्रणी राज्य है। राज्य सरकार टूरिज्म सेक्टर में निवेश करने वाले उद्यमियों को हर संभव सहायता प्रदान कर रही है।

 

आईटी सेक्टर में अपार संभावनाएं

प्रमुख सचिव, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी एम. सेल्वेंद्रन ने कहा कि मध्यप्रदेश में आईटी सेक्टर में आगे बढ़ने की अपार संभावनाएं हैं। इंदौर, भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर में देश के दूसरे राज्यों की तुलना में सस्ती और विश्वस्तरीय सुविधाएं मिलती हैं। यहां रहना काफी सस्ता है। टीसीएस इंदौर में अपनी यूनिट संचालित करती है, जिसमें 16 हजार से अधिक स्टॉफ काम करता है। इन्फोसिस भी राज्य में अपना विस्तार करने जा रही है। बैगलौर और हैदराबाद की अपेक्षा मध्यप्रदेश में ट्रैफिक अत्यंत सुगम है। राज्य सरकार नया स्पेस टेक पार्क स्थापित करने पर कार्य कर रही है। भोपाल में ड्रोन मैन्यूफेक्चरिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और ड्रोन टेस्टिंग के लिए ग्रीन जोन तैयार किया जा रहा है। मध्यप्रदेश सरकार स्पेस टेक पॉलिसी के अंतर्गत 40 से 60 प्रतिशत तक कैपिटल सब्सिडी प्रदान करती है। हमारी सेमीकंडक्टर पॉलिसी को देशभर से बेहतर रिस्पांस मिल रहा है। राज्य सरकार उद्योग स्थापित करने के लिए किराये और स्टॉफ की सैलरी के लिए भी सहायता दे रही है।

 

मुख्यमत्री डॉ. यादव ने उद्योगपतियों से की वन-टू-वन चर्चा

मुख्यमंत्री डॉ. यादव निवेश संवाद के दौरान प्रमुख उद्योग समूहों के साथ 15 से अधिक वन-टू-वन बैठकें हुईं। इनमें निवेश प्रस्तावों, औद्योगिक विस्तार और मध्यप्रदेश में उपलब्ध निवेश अवसरों पर विस्तार से चर्चा की गई। अरविंद लिमिटेड के साथ पीएम मित्र पार्क में प्रस्तावित 1,200 करोड़ रुपए के निवेश को शीघ्र क्रियान्वित करने, टेक्सटाइल एवं गारमेंट क्षेत्र में उपलब्ध प्रोत्साहनों और  पर्यावरण-अनुकूल औद्योगिक अधोसंरचना के विकास पर चर्चा हुई। वहीं, टोरेंट पावर लिमिटेड के साथ अनूपपुर में प्रस्तावित 1600 मेगावाट ताप विद्युत परियोजना, प्रदेश की दीर्घकालीन ऊर्जा सुरक्षा, अतिरिक्त विद्युत क्षमता सृजन और भविष्य में ऊर्जा क्षेत्र में निवेश की संभावनाओं पर चर्चा की गई। पेट्रोकेमिकल, केमिकल, टेक्सटाइल, फार्मास्युटिकल्स, फूड प्रोसेसिंग, इंजीनियरिंग, एयरोस्पेस एवं रक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों के उद्योग समूहों ने मध्यप्रदेश में निवेश में रुचि दिखाई। वन-टू-वन बैठकों में चिरपाल ग्रुप, गोल्डक्रेस्ट सीमेंट, गुजरात अंबुजा, एजियोस पॉलीफिल्म्स, एरिस लाइफसाइंसेज सहित अन्य उद्योग समूहों के निवेश प्रस्तावों पर चर्चा हुई। गुजरात के निवेशकों एवं उद्योग जगत ने प्रदेश की औद्योगिक नीतियों, व्यवस्थाओं और नेतृत्व के प्रति विश्वास भी व्यक्त किया।

 

सीएम डॉ. मोहन ने बताया किसने कितना किया निवेश

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि सीमेंट क्षेत्र में गोल्डक्रेस्ट सीमेंट द्वारा 3,000 करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव से 1,500 रोजगार के अवसर सृजित होंगे। पैकेजिंग क्षेत्र में एजियोस पॉलीफिल्म्स प्रालि द्वारा 2,500 करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव से 1,000 रोजगार के अवसर सृजित होंगे। वहीं फूड प्रोसेसिंग क्षेत्र में गुजरात अंबुजा एक्सपोर्ट्स लिमिटेड द्वारा 1,200 करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव से 500 रोजगार के अवसर सृजित होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि फार्मास्युटिकल्स क्षेत्र में एरिस लाइफसाइंसेज लिमिटेड द्वारा 500 करोड़ रुपए के निवेश से 800 रोजगार, टेक्सटाइल क्षेत्र में राघव वूवन एलएलपी द्वारा 250 करोड़ रुपए के निवेश से 400 रोजगार, इंजीनियरिंग क्षेत्र में भव्य मशीन टूल्स द्वारा 250 करोड़ रुपए के निवेश से 300 रोजगार, केमिकल क्षेत्र में जय केमिकल इंडस्ट्रीज प्रालि द्वारा 200 करोड़ रुपए के निवेश से 100 रोजगार तथा पैकेजिंग क्षेत्र में बालाजी मल्टीफ्लेक्स प्रालि द्वारा 200 करोड़ रुपए के निवेश से 100 रोजगार के अवसर सृजित होंगे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि टेक्सटाइल क्षेत्र में श्रद्धा स्पन प्रालि द्वारा 160 करोड़ रुपए के निवेश से 600 रोजगार, अन्य क्षेत्र में इनर इंजीनियरिंग प्रोडक्ट्स एंड सिस्टम्स प्रालि द्वारा 150 करोड़ रुपए के निवेश से 160 रोजगार, एयरोस्पेस एवं डिफेंस क्षेत्र में ऑप्टिमाइज्ड ग्रुप द्वारा 100 करोड़ रुपए के निवेश से 120 रोजगार, फूड प्रोसेसिंग क्षेत्र में जेएमके फूड द्वारा 50 करोड़ रुपए के निवेश से 80 रोजगार, केमिकल क्षेत्र में विबफास्ट ग्रुप द्वारा 50 करोड़ रुपए के निवेश से 75 रोजगार तथा अरुणाया ऑर्गेनिक्स लिमिटेड द्वारा 25 करोड़ रुपए के निवेश से 50 रोजगार के अवसर सृजित होने की संभावना है। इन सभी निवेश प्रस्तावों से कुल 8 हजार 635 करोड़ रुपए का निवेश और 5 हजार 785 रोजगार सृजित होने की संभावना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि मध्यप्रदेश को पिछले ढाई वर्षों में 34 लाख करोड़ रुपए से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जबकि 10 लाख करोड़ रुपए से अधिक का निवेश धरातल पर उतर चुका है। उन्होंने निवेशकों को आगामी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2027 में सहभागिता के लिए आमंत्रित किया।

Aastha Spintex: 23 जुलाई को बोर्ड मीटिंग होगी, 1:1 बोनस शेयर के साथ डिविडेंड देने के प्रस्ताव पर विचार करेगा बोर्ड

Aastha Spintex: गुजरात की इंटीग्रेटेड कॉटन यार्न निर्माता Aastha Spintex Ltd अपने कारोबार के अगले चरण की तैयारी में जुट गई है। कंपनी का बोर्ड 23 जुलाई 2026 को होने वाली बैठक में कई अहम प्रस्तावों पर विचार करेगा। इनमें 1:1 बोनस शेयर, 100% तक फाइनल डिविडेंड और वैल्यू-एडेड टेक्सटाइल प्रोडक्ट्स में विस्तार शामिल है।

बोनस शेयर और डिविडेंड पर फैसला

Aastha Spintex के बोर्ड के सामने 1:1 बोनस इश्यू का प्रस्ताव रखा जाएगा। इसके तहत हर एक इक्विटी शेयर पर एक अतिरिक्त बोनस शेयर मिलेगा। इसके अलावा, ₹10 फेस वैल्यू वाले प्रत्येक शेयर पर ₹10 तक के फाइनल डिविडेंड पर भी विचार किया जाएगा। हालांकि, इन प्रस्तावों को शेयरधारकों की मंजूरी मिलना जरूरी होगा।

टेक्सटाइल वैल्यू चेन में आगे बढ़ने की तैयारी

Aastha Spintex के मुताबिक, वह अब सिर्फ कॉटन यार्न तक सीमित नहीं रहना चाहती। कंपनी अपने ब्रांड के तहत ग्रे फैब्रिक और दूसरे वैल्यू-एडेड फैब्रिक प्रोडक्ट्स के कारोबार में उतरने की योजना बना रही है। इस कदम से कंपनी टेक्सटाइल वैल्यू चेन में अपनी मौजूदगी और मजबूत करना चाहती है। साथ ही मौजूदा मैन्युफैक्चरिंग क्षमता का बेहतर इस्तेमाल भी हो सकेगा।

मैनेजिंग डायरेक्टर क्या बोले?

Aastha Spintex के मैनेजिंग डायरेक्टर दिव्यांग जसवंत पटेल ने कहा कि कंपनी लंबे समय से एक मजबूत और इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल बिजनेस बनाने की दिशा में काम कर रही है। उनके मुताबिक, अब टेक्सटाइल वैल्यू चेन में आगे बढ़ने का सही समय है। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित बोनस इश्यू और डिविडेंड शेयरधारकों के साथ कंपनी की बनाई गई वैल्यू साझा करने की प्रतिबद्धता को भी दिखाते हैं।

हाल में बढ़ी उत्पादन क्षमता

हाल ही में NSE और BSE के मेन बोर्ड पर लिस्टिंग के बाद कंपनी ने Falcon Yarns Pvt Ltd का अधिग्रहण पूरा किया है। कंपनी का दावा है कि अब उसकी सालाना स्पिनिंग क्षमता 7,700 मीट्रिक टन से बढ़कर 17,457 मीट्रिक टन हो गई। वहीं, स्पिंडल क्षमता 25,920 से बढ़कर 61,824 तक पहुंच गई। कंपनी का मानना है कि वैल्यू-एडेड फैब्रिक सेगमेंट में विस्तार इस बढ़ी क्षमता का बेहतर इस्तेमाल करने में मदद करेगा।

वित्तीय प्रदर्शन कैसा रहा

पिछले दो वित्त वर्षों में कंपनी की वित्तीय स्थिति में भी सुधार हुआ है। वित्त वर्ष 2023 में ₹240 करोड़ रहा रेवेन्यू बढ़कर वित्त वर्ष 2025 में ₹352 करोड़ हो गया। इस दौरान कंपनी ने 21.2% की CAGR दर्ज की। ऑपरेटिंग प्रॉफिट मार्जिन 5.87% से बढ़कर 14.16% हो गया। वहीं, EBITDA मार्जिन 6.05% से बढ़कर 14.45% पहुंच गया।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।