Stocks in Focus: विजय केडिया और सुनील सिंघानिया ने सितंबर में खरीदे ये 2 शेयर, एक ने 5 साल में दिया है 2600% का मल्टीबैगर रिटर्न

Stocks in Focus: बड़े निवेशकों के पोर्टफोलियो में नई एंट्री पर हमेशा नजर रहती है। सितंबर 2026 में सुनील सिंघानिया और विजय केडिया ने दो छोटे-मिडकैप शेयरों में खरीदारी की। खास बात यह है कि दोनों ने ये शेयर सीधे प्रमोटर से खरीदे।

Abakkus Asset Manager ने 29 सितंबर को Axiscades Technologies के 12.88 लाख शेयर खरीदे। वहीं, Kedia Securities ने Robokidz Eduventures के 5.57 लाख शेयर प्रमोटर से खरीदे। Robokidz की लिस्टिंग 28 सितंबर को हुई थी। वहीं, Axiscades ने पिछले 5 साल में 2600% से ज्यादा का मल्टीबैगर रिटर्न दिया है।

Axiscades Technologies

Axiscades Technologies एयरोस्पेस और डिफेंस सेक्टर में इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग का काम करती है। इसकी सब्सिडियरी Mistral Solutions डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स बनाती है। कंपनी का मार्केट कैप करीब ₹8,800 करोड़ है। प्रमोटर Jupiter Capital ने सितंबर में 46.2 लाख शेयर बेचे। इससे उसकी हिस्सेदारी 55.68% से घटकर 44.82% रह गई।

Abakkus ने इनमें से 12.88 लाख शेयर ₹1,824 के भाव पर खरीदे। इस सौदे की वैल्यू करीब ₹235 करोड़ रही। इस डील के बाद स्टॉक में अपर सर्किट लगा था। पिछले कारोबारी सत्र में यह स्टॉक 3.62% की बढ़त के साथ ₹2,311.90 पर बंद हुआ।

Axiscades अब इंजीनियरिंग सर्विसेज से आगे बढ़कर डिफेंस और मिसाइल मैन्युफैक्चरिंग पर फोकस कर रही है। कंपनी ने 2026 में अपनी कुछ इंजीनियरिंग सर्विसेज बिजनेस यूनिट्स Akkodis को बेचने का समझौता किया।

कंपनी का Power 930 प्लान FY30 तक करीब ₹9,000 करोड़ का रेवेन्यू और ₹960 करोड़ का मुनाफा हासिल करने का है। FY26 में नेट प्रॉफिट ₹72 करोड़ था। हालांकि, कर्ज बढ़ना और निगेटिव फ्री कैश फ्लो चिंता की वजह हैं। FY26 में कंपनी का कर्ज ₹388 करोड़ था।

Robokidz Eduventures

Robokidz स्कूलों में रोबोटिक्स, कोडिंग, AI और इलेक्ट्रॉनिक्स लैब तैयार करती है। कंपनी लैब सेटअप के साथ किट, करिकुलम और टीचर ट्रेनिंग भी देती है।

दिग्गज निवेशक विजय केडिया की Kedia Securities ने प्रमोटर से 5.57 लाख शेयर ₹77.50 के भाव पर खरीदे। इस सौदे की वैल्यू करीब ₹4.3 करोड़ थी। यह IPO प्राइस ₹106 से करीब 27% कम था।

IPO को 580 गुना से ज्यादा सब्सक्रिप्शन मिला था। शेयर ₹201.40 पर लिस्ट हुआ था। यह स्टॉक पिछले कारोबारी सत्र में 5% की गिरावट के साथ ₹221 पर बंद हुआ।

FY26 में कंपनी का रेवेन्यू ₹93 करोड़ और नेट प्रॉफिट ₹10.1 करोड़ रहा। हालांकि, ग्राहकों से पेमेंट मिलने में औसतन 279 दिन लगे और ऑपरेशनल कैश फ्लो निगेटिव रहा।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

इस फंड हाउस ने 20% पैसा कैश में रखा है, मार्केट 5-7% गिरने पर इन शेयरों में लगाएगा

पीजीआईएम इंडिया एसेट मैनेजमेंट के सीआईओ अनिरुद्ध नाहा ने 15-20 फीसदी कैश में रखा है। उनका मानना है कि अभी देश और विदेश से आने वाली खबरों का असर मार्केट पर दिख रहा है। उन्हें मार्केट में तेज गिरावट का इंतजार है। ऐसा होने पर वह इस पैसे को इनवेस्ट करेंगे।

मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में मौकों पर नजर

नाहा ने कहा कि निफ्टी में 5-7 फीसदी करेक्शन आने पर उनका फंड हाउस निवेश के मौकों को देखना शुरू करेगा। हालांकि, फंड हाउस की पसंद लार्जकैप शेयर नहीं होंगे। अगर अर्निंग्स ग्रोथ के हिसाब से वैल्यूएशन अट्रैक्टिव दिखती है तो फंड हाउस मिडकैप और स्मॉलकैप स्टॉक्स में भी निवेश करेगा।

बीते दो सालों में फंड हाउस ने कभी इतना कैश नहीं रखा

उन्होंने कहा कि कम से कम बीते दो सालों में फंड हाउस ने कभी इतना कैश अपने पास नहीं रखा था। उन्होंने बताया कि उनका फंड हाउस बॉटम-अप एप्रोच का इस्तेमाल करता है। यह इसके लिए PEG रेशियो का इस्तेमाल करता है। प्राइस-टू-अर्निंग्स को अर्निग्स ग्रोथ से डिवाइड करने पर PEG Ratio मिलता है।

कैपिटल गुड्स कंपनियों के शेयर पीक से 30-35% नीचे

नाहा ने कैपिटल गुड्स को ऐसा सेक्टर बताया जो, फंड हाउस की स्ट्रेटेजी में फिट बैठता है। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि बाजार में बड़ी गिरावट के बाद कई कैपिटल गुड्स कंपनियों के शेयर अपने ऑल-टाइम हाई से 30-35 फीसदी तक नीचे हैं। इस सेगमेंट में उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज (EMS) और बेयरिंग्स कंपनियों पर जोर दिया।

लंबी अवधि के निवेश के लिए हेल्थ केयर सेक्टर भी अट्रैक्टिव 

हेल्थकेयर दूसरा सेगमेंट है, जिस पर नाहा की नजर है। उन्होंने कहा कि इस सेक्टर के शेयरों में अगर और गिरावट आती है तो वे और अट्रैक्टिव हो जाएंगे। उनका मानना है कि लंबी अवधि के निवेश के लिए हेल्थकेयर कंपनियों के शेयरों में मौके दिख रहे हैं। इस सेक्टर की एक खास बात यह है कि इस पर मंदी का असर नहीं दिखता है।

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एसेट मैनेजमेंट कंपनियों का प्रदर्शन भी अच्छा रहेगा

नाहा की लिस्ट में एसेट मैनेजमेंट कंपनियां तीसरे पायदान पर हैं। उन्होंने कहा कि इस सेगमेंट में वैल्यूएशन काफी घटी है, जबकि अर्निंग्स में इम्प्रूवमेंट दिखा है। भारत में परिवारों की सेविंग्स अब फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स में जा रही है। इस वजह सेअगले पांच से सात सालों में इस सेक्टर का प्रदर्शन बेहतर रह सकता है। उन्होंने इंश्योरेंस सेक्टर के बारे में कहा कि लंबी अवधि के लिहाज से फंड हाउस की नजरें इस सेक्टर पर है।

Stock in Focus: सोलर कंपनी को ₹75 करोड़ का ऑर्डर मिला, शेयरों पर रहेगी नजर

Stock in Focus: सोलर एनर्जी कंपनी Solex Energy को घरेलू कंपनियों से ₹74.77 करोड़ के नए ऑर्डर मिले हैं। कंपनी को ये ऑर्डर सोलर PV मॉड्यूल बनाने और सप्लाई करने के लिए मिले हैं। इन्हें दिसंबर 2026 तक पूरा किया जाना है।

कंपनी का कहना है कि नए ऑर्डर से उसकी ऑर्डर पाइपलाइन और मजबूत हुई है। सोलर मॉड्यूल की बढ़ती मांग के बीच कंपनी को लगातार नए ऑर्डर मिल रहे हैं।

₹174 करोड़ के ऑर्डर के लिए LOI मिला

Solex Energy को करीब ₹174.30 करोड़ के एक और ऑर्डर के लिए लेटर ऑफ इंटेंट यानी LOI मिला है। इस ऑर्डर के लिए मॉड्यूल सप्लाई एग्रीमेंट पर साइन होना अभी बाकी है।

नए ऑर्डर और LOI समेत कंपनी की एग्जीक्यूटेबल ऑर्डर पाइपलाइन करीब ₹846 करोड़ तक पहुंच गई है। कंपनी का लक्ष्य इन ऑर्डर को 31 दिसंबर 2026 तक पूरा करना है।

जनवरी में मिला था ₹276 करोड़ का ऑर्डर

इस साल जनवरी में Solex Energy को घरेलू इंडिपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर से ₹276 करोड़ का बड़ा वर्क ऑर्डर मिला था। यह ऑर्डर N-type TOPCon सोलर PV मॉड्यूल बनाने और सप्लाई करने के लिए था।

इस ऑर्डर के तहत कंपनी को 615 Wp और 620 Wp ग्लास-टू-ग्लास G12R सोलर मॉड्यूल की सप्लाई करनी थी। इनकी सप्लाई फरवरी से मई 2026 के बीच होनी थी।

Solex Energy के शेयरों का हाल

Solex Energy का शेयर गुरुवार को 2.11% की तेजी के साथ ₹728 पर बंद हुआ। पिछले 6 महीने में स्टॉक 15.48% टूटा है। वहीं, 1 साल में ये करीब 44% क्रैश हुआ है। कंपनी का मार्केट कैप 777.46 करोड़ रुपये है।

1 साल में 555% का रिटर्न! अब ₹3000 करोड़ के निवेश से मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाएगी ऑप्टिकल फाइबर कंपनी

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

टेक्सटाइल कंपनी के शेयर में 20% का अपर सर्किट लगा, EV बिजनेस में बड़े प्लान का दिखा दम

टेक्सटाइल कंपनी Jindal Worldwide के शेयर में गुरुवार को जबरदस्त तेजी आई। शेयर 20% चढ़कर अपर सर्किट लगा और यह ₹48.22 पर बंद हुआ। ये स्टॉक का एक साल से ज्यादा समय का सबसे ऊंचा स्तर है। पिछले 6 महीने में स्टॉक 108.65% का रिटर्न दिया है।

इससे पहले मंगलवार को शेयर 10% चढ़ा था। बुधवार को इसमें करीब 4.5% की गिरावट आई। लेकिन गुरुवार को इसमें फिर से तेज खरीदारी देखने को मिली।

FY28 तक 100 शोरूम खोलने का प्लान

Jindal Worldwid की EV सब्सिडियरी Jindal Mobilitric ने बड़ा विस्तार प्लान बनाया है। कंपनी FY28 के अंत तक देशभर में करीब 100 शोरूम खोलना चाहती है।

FY27 के अंत तक करीब 40 शोरूम खोले जाएंगे। बाकी शोरूम FY28 में शुरू होंगे। कंपनी का कहना है कि वह EV ग्राहकों तक बेहतर तरीके से पहुंचना चाहती है। साथ ही आफ्टर-सेल्स सर्विस को भी मजबूत किया जाएगा।

अभी दो शोरूम, 52 डीलर जुड़े

कंपनी का अहमदाबाद स्थित मैन्युफैक्चरिंग प्लांट चालू हो चुका है। Jindal Mobilitric ने श्रीनगर और जयपुर में अपने पहले दो शोरूम खोले हैं।

कंपनी ने देशभर में 52 डीलर भी नियुक्त किए हैं। अब इन्हीं के जरिए कंपनी अपना रिटेल नेटवर्क बढ़ाएगी। उसका फोकस बड़े शहरों के साथ छोटे शहरों पर भी है।

अमित अग्रवाल फिर बने मैनेजिंग डायरेक्टर

Jindal Worldwide ने अमित यमुनादत्त अग्रवाल को फिर से मैनेजिंग डायरेक्टर नियुक्त किया है। उनका नया कार्यकाल तीन साल का होगा।

EV बिजनेस के विस्तार प्लान से शेयर में निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी है। यही वजह है कि गुरुवार को शेयर में फिर से तेज उछाल देखने को मिला।

Jindal Worldwide का बिजनेस क्या है?

Jindal Worldwide का मुख्य कारोबार टेक्सटाइल सेक्टर में है। कंपनी डेनिम फैब्रिक और दूसरे टेक्सटाइल प्रोडक्ट्स बनाती है। कंपनी का टेक्सटाइल बिजनेस उसका मुख्य कारोबार है। हालांकि, अब वह इलेक्ट्रिक व्हीकल सेक्टर में भी तेजी से कदम बढ़ा रही है।

कंपनी की सब्सिडियरी Jindal Mobilitric इलेक्ट्रिक व्हीकल बिजनेस संभालती है। कंपनी ने अहमदाबाद में अपना मैन्युफैक्चरिंग प्लांट शुरू कर दिया है। श्रीनगर और जयपुर में दो शोरूम खुल चुके हैं। अब कंपनी देशभर में रिटेल नेटवर्क बढ़ाने और EV मार्केट में अपनी मजबूत पहचान बनाने की तैयारी कर रही है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Small Cap Stocks: क्या अब स्मॉलकैप स्टॉक्स में निवेश का सही मौका है? Ambit ने बताए अच्छे रिटर्न के 5 बड़े संकेत

Small Cap Stocks: साल 2025 की शुरुआत से आई गिरावट के बाद अब स्मॉलकैप शेयरों में जोखिम और रिटर्न का संतुलन पहले से बेहतर दिख रहा है। Ambit Asset Management का कहना है कि अब कमाई, वैल्यूएशन, कैपेक्स, घरेलू निवेश और ग्लोबल माहौल जैसे कई बड़े फैक्टर स्मॉलकैप शेयरों के पक्ष में नजर आ रहे हैं।

कंपनी का मानना है कि इस बार की गिरावट पहले जैसी नहीं थी। यह ज्यादातर वैल्यूएशन करेक्शन था, न कि क्रेडिट संकट या अर्थव्यवस्था में बड़ी कमजोरी की वजह से। आइए जानते हैं कि Ambit किन 5 कारणों से स्मॉल कैप स्टॉक्स पर दांव लगाने का सुझाव दे रहा है।

1. कमाई में फिर आई तेजी

Ambit के मुताबिक, जून 2026 तक Nifty Smallcap 250 कंपनियों का PAT सालाना आधार पर करीब 27% बढ़ा है। यह ग्रोथ लार्जकैप कंपनियों से भी बेहतर रही।

पिछली दो तिमाहियों में रेवेन्यू और EBITDA दोनों में सुधार आया है। साथ ही FY27 के लिए कमाई के अनुमान भी बढ़ाए गए हैं।

2. वैल्यूएशन पहले से ज्यादा आकर्षक

स्मॉलकैप शेयरों में सबसे बड़ा वैल्यूएशन रीसेट देखने को मिला है। जुलाई 2026 तक करीब 47% स्मॉलकैप शेयर अपने 10 साल के औसत वैल्यूएशन से नीचे ट्रेड कर रहे थे।

तुलना करें तो मिडकैप में यह आंकड़ा 31% और लार्जकैप में 27% था। 18 में से 12 स्मॉलकैप सेक्टर अब अपने लंबे समय के औसत वैल्यूएशन से नीचे आ चुके हैं।

3. कैपेक्स मजबूत बना हुआ है

FY26 में लिस्टेड कंपनियों का कुल कैपिटल एक्सपेंडिचर 9% बढ़कर ₹11.5 लाख करोड़ पहुंच गया। इसमें मिडकैप कंपनियों का कैपेक्स 16% और स्मॉलकैप कंपनियों का 13% बढ़ा।

Ambit का अनुमान है कि अगले चार साल में पावर, डेटा सेंटर और सेमीकंडक्टर जैसे सेक्टरों में ₹20-25 लाख करोड़ का अतिरिक्त निवेश हो सकता है।

4. घरेलू निवेशकों का बढ़ा भरोसा

स्मॉलकैप म्यूचुअल फंड में निवेश तेजी से बढ़ा है। FY22 में जहां नेट इनफ्लो ₹10,145 करोड़ था, वहीं FY26 में यह बढ़कर ₹51,872 करोड़ पहुंच गया।

साथ ही Nifty Smallcap 250 में ट्रेडिंग एक्टिविटी भी फरवरी 2025 के मुकाबले जून 2026 तक काफी बढ़ गई है, जिससे बाजार में लिक्विडिटी बेहतर हुई है।

5. ट्रेड डील से मिल सकता है फायदा

Ambit का कहना है कि भारत के नए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट का सबसे ज्यादा फायदा स्मॉलकैप कंपनियों को मिल सकता है। खासकर कैपिटल गुड्स, ऑटो कंपोनेंट, केमिकल, टेक्सटाइल, पावर और मेटल सेक्टर की कंपनियां इससे लाभ उठा सकती हैं।

इसके अलावा अमेरिका-ईरान संघर्ष के बाद बने सीजफायर माहौल और भारत-अमेरिका ट्रेड वार्ता में प्रगति से भी निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ है।

निवेशकों के लिए क्या मतलब है?

Ambit Asset Management का मानना है कि स्मॉलकैप शेयरों में फिर से तेजी के लिए जरूरी कई हालात बनते दिख रहे हैं। हालांकि, हर स्मॉलकैप शेयर एक जैसा नहीं होता। इसलिए मजबूत बैलेंस शीट, बेहतर कमाई और उचित वैल्यूएशन वाली कंपनियों का चयन करना ज्यादा अहम रहेगा।

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Q1 Results: बिगब्लॉक कंस्ट्रक्शन का घाटा कम हुआ, रेवेन्यू 40% बढ़ा; नया प्लांट लगाने का प्लान

BigBloc Construction Q1 Results: AAC ब्लॉक और ग्रीन बिल्डिंग मटेरियल बनाने वाली कंपनी BigBloc Construction ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में मजबूत नतीजे दर्ज किए हैं। कंपनी की ऑपरेशंस से रेवेन्यू 40.5% बढ़कर 79.14 करोड़ रुपये रहा। यह पिछले साल की समान तिमाही में 56.35 करोड़ रुपये थी।

कंपनी के घाटे में बड़ी कमी

कंपनी का नेट लॉस घटकर 71.95 लाख रुपये रह गया, जबकि पिछले साल इसी तिमाही में यह 4.96 करोड़ रुपये था। वहीं, EBITDA 386% बढ़कर 6.28 करोड़ रुपये हो गया। EBITDA मार्जिन भी 2.29% से बढ़कर 7.93% पर पहुंच गया। कंपनी ने इसका श्रेय बेहतर ऑपरेशनल, लागत नियंत्रण और वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट्स को दिया है।

क्षमता विस्तार पर जोर

तिमाही के दौरान BigBloc Construction ने उमरगांव प्लांट में कंस्ट्रक्शन केमिकल्स का कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू किया। इसमें ब्लॉक जॉइंटिंग मोर्टार, रेडी मिक्स प्लास्टर और टाइल एडहेसिव्स शामिल हैं। कंपनी का कुल क्षमता उपयोग बढ़कर 69% हो गया, जो पिछले साल 53% था। इसके अलावा समूह की रूफटॉप सोलर क्षमता बढ़कर 3.34 मेगावाट हो गई।

इंदौर में बनेगा सबसे बड़ा AAC प्लांट

BigBloc ने हाल ही में इंदौर के पास 56,950 वर्ग मीटर जमीन खरीदी है। यहां भारत का सबसे बड़ा ग्रीनफील्ड AAC ब्लॉक मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाया जाएगा। मानसून के बाद इसका निर्माण शुरू होने की उम्मीद है। कंपनी को L&T से बुलेट ट्रेन स्टेशन परियोजना का ऑर्डर भी मिला है, जिससे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में उसकी मौजूदगी और मजबूत हुई है।

कंपनी के CFO मोहित साबू ने कहा कि BigBloc अब सिर्फ AAC ब्लॉक निर्माता नहीं, बल्कि एक इंटीग्रेटेड ग्रीन बिल्डिंग सॉल्यूशंस कंपनी बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। कंपनी का फोकस क्षमता विस्तार, नए प्रोडक्ट्स, वितरण नेटवर्क और लंबी अवधि में शेयरधारकों के लिए वैल्यू बढ़ाने पर रहेगा।

Q1 Results: ज्वेलरी कंपनी का मुनाफा 140% बढ़ा, रेवेन्यू 78% उछला; शेयरों पर नजर रहेगी

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Q1 Results: ज्वेलरी कंपनी का मुनाफा 140% बढ़ा, रेवेन्यू 78% उछला; शेयरों पर नजर रहेगी

Sky Gold Q1 Results: मुंबई की B2B ज्वेलरी मैन्युफैक्चरिंग कंपनी Sky Gold and Diamonds ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में मजबूत नतीजे दर्ज किए हैं। कंपनी की कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 78% बढ़कर 2,012.8 करोड़ रुपये रही। वहीं, टैक्स के बाद मुनाफा (PAT) दोगुना से ज्यादा यानी 140% बढ़कर 104.9 करोड़ रुपये हो गया।

कंपनी ने कहा कि यह ग्रोथ संगठित ज्वेलरी रिटेलर्स से मजबूत मांग, हल्के वजन (Lightweight) और वैल्यू-एडेड ज्वेलरी की बढ़ती बिक्री और बेहतर मैन्युफैक्चरिंग एग्जीक्यूशन की वजह से आई है।

कैश फ्लो भी हुआ पॉजिटिव

Sky Gold ने बताया कि जून तिमाही में उसका ऑपरेटिंग कैश फ्लो पॉजिटिव रहा। इसका श्रेय एसेट-लाइट मैन्युफैक्चरिंग मॉडल, एडवांस गोल्ड बिजनेस की बढ़ती हिस्सेदारी और एक्सपोर्ट पेमेंट जल्दी मिलने को दिया गया है।

हल्की ज्वेलरी और एक्सपोर्ट पर फोकस

स्काई गोल्ड अब हल्के वजन की ज्वेलरी, कम कैरेट के गहने और डायमंड-स्टडेड ज्वेलरी पर ज्यादा ध्यान दे रही है। उसका मानना है कि इससे प्रोडक्ट पोर्टफोलियो और मजबूत होगा। साथ ही, एक्सपोर्ट कारोबार बढ़ाने पर भी कंपनी का फोकस है।

हाल ही में कंपनी ने लंदन में आयोजित Asiana UK-India Jewellery Expo में अपने प्रोडक्ट्स पेश किए। कंपनी के मुताबिक, उसे ब्रिटेन और यूरोप के खरीदारों से अच्छा रिस्पॉन्स मिला और 30-45 करोड़ रुपये की ऑर्डर बुक तैयार हुई।

₹8,100 करोड़ रेवेन्यू का टारगेट

स्काई गोल्ड के मैनेजिंग डायरेक्टर मंगेश चौहान ने कहा कि संगठित ज्वेलरी बाजार और डिजाइन बेस्ड प्रोडक्ट्स की मांग लगातार बढ़ रही है। उनका मानना है कि भारत डिजाइन-बेस्ड ज्वेलरी मैन्युफैक्चरिंग का वैश्विक केंद्र बन सकता है।

कंपनी ने वित्त वर्ष 2026-27 में 8,100 करोड़ रुपये या उससे ज्यादा रेवेन्यू हासिल करने का लक्ष्य रखा है। साथ ही, कंपनी का फोकस रेवेन्यू ग्रोथ, मुनाफे और मजबूत कैश फ्लो के बीच संतुलन बनाए रखने पर रहेगा।

स्काई गोल्ड के शेयरों का हाल

स्काई गोल्ड का शेयर पिछले कारोबारी सत्र में 4.61% बढ़कर 723 रुपये पर बंद हुआ। पिछले 6 महीने में स्टॉक 106.78% चढ़ा है। वहीं, 1 साल में इसने 169.37% का रिटर्न दिया है। 5 साल में 3,114% का मल्टीबैगर रिटर्न दिया है। कंपनी का मार्केट कैप 11.20 हजार करोड़ रुपये है।

Nifty Outlook: 10 अगस्त को निफ्टी की चाल कैसी रहेगी, एक्सपर्ट्स से जानिए

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Best Agrolife Share: 3 दिन में 36% उछला एग्रोकेमिकल स्टॉक, दमदार रिजल्ट से निवेशकों में खरीदने की होड़

Best Agrolife Share: एग्रोकेमिकल कंपनी बेस्ट एग्रोलाइफ के शेयरों में जून तिमाही के नतीजों के बाद जोरदार तेजी आई है। यह स्टॉक रिजल्ट के बाद तीन कारोबारी सत्र में करीब 36% चढ़ चुका है। वहीं, बीते 5 दिनों में इसने 46% से ज्यादा का रिटर्न दिया है।

मंगलवार को भी स्टॉक 20% के अपर सर्किट के साथ 22.66 रुपये पर बंद हुआ। इसकी वजह जून तिमाही में मुनाफे का डबल होना और मैनेजमेंट का आने वाली तिमाहियों को लेकर सकारात्मक रुख है।

मार्जिन और मुनाफे में जोरदार उछाल

जून तिमाही में Best Agrolife का मुनाफा तेजी से बढ़ा। कंपनी का रेवेन्यू 4% बढ़कर 396 करोड़ रुपये रहा। लेकिन असली मजबूती मुनाफे में दिखी। EBITDA 70% बढ़कर 78 करोड़ रुपये पहुंच गया और EBITDA मार्जिन 12% से बढ़कर 20% हो गया।

शुद्ध मुनाफा (PAT) भी दोगुना होकर 41 करोड़ रुपये रहा। ग्रॉस मार्जिन 29% से बढ़कर 37% पहुंच गया। कंपनी का कहना है कि बेहतर प्रोडक्ट मिक्स, कीमतों में चुनिंदा बढ़ोतरी और लागत पर नियंत्रण की वजह से यह सुधार देखने को मिला।

पेटेंटेड प्रोडक्ट्स पर बढ़ा फोकस

बेस्ट एग्रोलाइफ का पेटेंटेड प्रोडक्ट पोर्टफोलियो लगातार मजबूत हो रहा है। इस तिमाही में इसकी वॉल्यूम 37% बढ़ी। वहीं, ब्रांडेड बिक्री में पेटेंटेड प्रोडक्ट्स की हिस्सेदारी 45% से बढ़कर 64% हो गई। डीलरों को ब्रांडेड प्रोडक्ट्स की बिक्री भी 13% बढ़ी। कंपनी ने तीन नए पेटेंटेड प्रोडक्ट लॉन्च किए हैं, जिससे कुल पोर्टफोलियो 12 प्रोडक्ट्स का हो गया है।

मैनेजमेंट का कहना है कि किसानों से अच्छा फीडबैक मिल रहा है और रिपीट ऑर्डर भी बढ़ रहे हैं। मानसून में देरी और फसल की धीमी शुरुआती बढ़त से खरीफ सीजन की शुरुआत कमजोर रही। लेकिन अब दूसरी तिमाही से मांग में सुधार की उम्मीद है।

कंपनी की रणनीति आगे क्या है?

मैनेजमेंट का फोकस फिलहाल कारोबार को स्थिर करने और मुनाफा बढ़ाने पर है। इसी वजह से CAPEX योजना को अभी टाल दिया गया है। कंपनी ने 60 करोड़ रुपये का सेल्स रिटर्न प्रावधान भी किया है। साथ ही वर्किंग कैपिटल सुधारने के लिए इन्वेंट्री घटाकर 764 करोड़ रुपये कर दी गई है।

कंपनी को आगे 10% से 15% की CAGR रेवेन्यू ग्रोथ और 13% से 14% के टिकाऊ EBITDA मार्जिन की उम्मीद है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी विस्तार जारी है। नेपाल, थाईलैंड, वियतनाम और मेक्सिको में नए प्रोडक्ट रजिस्ट्रेशन मिले हैं, जबकि श्रीलंका में पेटेंटेड प्रोडक्ट्स को फास्ट-ट्रैक मंजूरी मिली है।

Best Agrolife Q1 Results: एग्रोकेमिकल कंपनी का मुनाफा 104% बढ़ा, फोकस में रहेगा स्टॉक

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Q1 Results: A-1 लिमिटेड का जून तिमाही में दमदार प्रदर्शन, प्रॉफिट और रेवेन्यू में तगड़ा उछाल

Q1 Results: A-1 लिमिटेड ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (Q1 FY27) में शानदार वित्तीय नतीजे घोषित किए हैं। इंडस्ट्रियल एसिड और केमिकल सप्लाई के साथ लॉजिस्टिक्स कारोबार से जुड़ी कंपनी का रेवेन्यू और मुनाफा दोनों में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई। कंपनी का कहना है कि बेहतर ऑपरेशनल प्रदर्शन, नए ऑर्डर और बिजनेस विस्तार का फायदा पहली तिमाही के नतीजों में देखने को मिला।

रेवेन्यू 175 करोड़ रुपये पहुंचा

कंपनी की ऑपरेशन से होने वाली आय (रेवेन्यू) सालाना आधार पर 170.5% बढ़कर 175.01 करोड़ रुपये रही। पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में यह 64.69 करोड़ रुपये थी।

मुनाफे में 429% की बढ़ोतरी

पहली तिमाही में कंपनी का शुद्ध मुनाफा (PAT) 429.3% बढ़कर 3.16 करोड़ रुपये हो गया। एक साल पहले इसी अवधि में कंपनी ने 0.60 करोड़ रुपये का मुनाफा दर्ज किया था। वहीं, PAT मार्जिन भी 0.92% से बढ़कर 1.81% हो गया।

EBITDA में भी मजबूत सुधार

कंपनी का EBITDA सालाना आधार पर 210.6% बढ़कर 6.07 करोड़ रुपये पहुंच गया, जो पिछले साल की समान तिमाही में 1.95 करोड़ रुपये था। वहीं, EBITDA मार्जिन 3.02% से बढ़कर 3.47% हो गया। कंपनी के मुताबिक, यह बेहतर ऑपरेशनल एफिशिएंसी और लागत नियंत्रण का नतीजा है।

नए ऑर्डर से कारोबार को मिला सहारा

तिमाही के दौरान कंपनी को सोलर इंडस्ट्रीज लिमिटेड, महाधन एग्रीटेक लिमिटेड और साईं बाबा पॉलीमर टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड जैसे ग्राहकों से करीब 35 करोड़ रुपये के इंडस्ट्रियल सप्लाई ऑर्डर मिले। इसके अलावा कंपनी 127.50 करोड़ रुपये के इंडस्ट्रियल यूरिया सप्लाई ऑर्डर पर भी काम कर रही है।

केमिकल कारोबार का दायरा बढ़ा

A-1 लिमिटेड को ईशान डाइज एंड केमिकल्स लिमिटेड के सल्फर आधारित इंडस्ट्रियल केमिकल्स के लिए प्राइमरी ऑथराइज्ड डीलर नियुक्त किया गया है। कंपनी का मानना है कि इससे उसके इंडस्ट्रियल केमिकल कारोबार और ग्राहक आधार को मजबूती मिलेगी।

इलेक्ट्रिक मोबिलिटी सेगमेंट में एंट्री

A-1 लिमिटेड  ने A-1 सुरेजा इंडस्ट्रीज में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर 51% कर ली है। इसके बाद यह कंपनी उसकी सब्सिडियरी बन गई है। इस अधिग्रहण के जरिए A-1 लिमिटेड ने इलेक्ट्रिक मोबिलिटी सेगमेंट में भी कदम रखा है, जिसे भविष्य की ग्रोथ के लिए अहम माना जा रहा है।

क्या बोले मैनेजिंग डायरेक्टर?

A-1 लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर हर्षदकुमार पटेल ने कहा कि कंपनी ने वित्त वर्ष 2027 की मजबूत शुरुआत की है। उनके मुताबिक, इंटीग्रेटेड बिजनेस मॉडल, लंबे समय से ग्राहकों के साथ बने रिश्ते और मजबूत लॉजिस्टिक्स नेटवर्क की बदौलत कंपनी लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रही है।

उन्होंने कहा कि कंपनी आगे भी बाजार में अपनी मौजूदगी मजबूत करने, प्रोडक्ट पोर्टफोलियो बढ़ाने और शेयरधारकों के लिए लॉन्ग टर्म वैल्यू बनाने पर फोकस बनाए रखेगी।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Rhetan TMT को अहम BIS सर्टिफिकेशन मिला, सरकारी प्रोजेक्ट्स में सप्लाई का रास्ता खुला

स्टील बार बनाने वाली कंपनी Rhetan TMT ने अपने कारोबार के विस्तार की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। कंपनी को प्रीमियम TMT ग्रेड के लिए ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) का सर्टिफिकेशन मिल गया है। इसके साथ ही कंपनी ने अपना 1 मेगावाट का कैप्टिव सोलर पावर प्रोजेक्ट भी पूरा कर लिया है। कंपनी का दावा है कि इससे उसकी उत्पादन क्षमता, लागत दक्षता और बाजार पहुंच मजबूत होगी।

प्रीमियम TMT ग्रेड बनाने की मिली मंजूरी

Rhetan TMT को Fe500D, Fe550 और Fe550D ग्रेड के TMT बार बनाने के लिए BIS लाइसेंस मिला है। इस मंजूरी के बाद Rhetan TMT अब देशभर में सरकारी और सार्वजनिक क्षेत्र (PSU) के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए प्रीमियम ग्रेड TMT बार की सप्लाई कर सकेगी। इससे कंपनी के लिए नए बाजार खुलेंगे और उसके प्रोडक्ट पोर्टफोलियो का भी विस्तार होगा।

सोलर प्रोजेक्ट से घटेगी बिजली की लागत

Rhetan TMT ने अपना 1 मेगावाट का कैप्टिव ग्राउंड-माउंटेड सोलर पावर प्रोजेक्ट भी पूरा कर लिया है। कंपनी को GEDA रजिस्ट्रेशन और NHAI समेत सभी जरूरी मंजूरियां मिल चुकी हैं। उम्मीद है कि यह प्रोजेक्ट अगस्त 2026 के पहले सप्ताह के अंत तक बिजली उत्पादन शुरू कर देगा। कंपनी का मानना है कि इससे ऊर्जा लागत कम होगी और मैन्युफैक्चरिंग ज्यादा टिकाऊ बनेगी।

क्या बोले मैनेजिंग डायरेक्टर?

Rhetan TMT के मैनेजिंग डायरेक्टर शालिन शाह ने कहा कि कंपनी पिछले कुछ वर्षों से क्वालिटी, टेक्नोलॉजी और ऑपरेशनल एक्सीलेंस पर लगातार निवेश कर रही है। उनके मुताबिक, BIS सर्टिफिकेशन से प्रीमियम स्टील सेगमेंट में कंपनी की मौजूदगी मजबूत होगी। वहीं, सोलर पावर प्रोजेक्ट से उत्पादन प्रक्रिया ज्यादा कुशल बनेगी और लंबे समय में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने में मदद मिलेगी।

Rhetan TMT का कारोबार

Rhetan TMT, TMT स्टील बार बनाने वाली कंपनी है। इसके प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल रिहायशी, कमर्शियल और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में होता है। कंपनी का कहना है कि वह आधुनिक मैन्युफैक्चरिंग तकनीक, गुणवत्ता और क्षमता विस्तार पर लगातार फोकस कर रही है, ताकि भारत के बढ़ते स्टील और कंस्ट्रक्शन सेक्टर में अपनी मौजूदगी मजबूत कर सके।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।